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कौशाम्बी दुर्घटना पर मुख्यमंत्री ने जताया शोक, मृतकों के परिवारों को मिलेगा 2 लाख रुपये का मुआवजा

कौशाम्बी हादसा: मुख्यमंत्री ने जताया शोक,  मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये देने की घोषणा की मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये देने की घोषणा की सीएम ने घायलों को 50-50 हजार रुपये देने का निर्देश दिया स्थानीय प्रशासन को दिया निर्देश: घायलों का कराया जाय समुचित इलाज लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कौशाम्बी में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वालों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से प्रार्थना की कि परिजनों को दुःख सहने की क्षमता प्रदान करें।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय प्रशासन से कौशांबी में हुए हादसे के बारे में जानकारी ली। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये आर्थिक मदद देने की  घोषणा की।  मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन के आलाधिकारियों को राहत-बचाव तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि घायलों का समुचित तरीके से इलाज कराया जाय। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

योगी सरकार का बिल्डरों पर बड़ा एक्शन, घर खरीदारों को मिलेंगी कानूनी राहतें

लखनऊ  उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार करते हुए गैर-पंजीकृत (Unregistered) प्रमोटरों को भी अपने दायरे में ले लिया है। रेरा अधिनियम 2016 की धारा 85 के तहत किए गए इस 10वें संशोधन के बाद, अब उन हजारों खरीदारों को न्याय मिल सकेगा जिन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश किया था जो रेरा में पंजीकृत नहीं हैं। यह नई व्यवस्था 25 मार्च 2026 से प्रभावी हो गई है। संशोधन के मुख्य बिंदु न्याय के लिए समान मंच: अब अपंजीकृत परियोजनाओं के आवंटी भी पोर्टल पर 'फार्म-एम' के माध्यम से प्रतिपूर्ति (Refund), कब्जा (Possession) और अन्य राहतों के लिए शिकायत दर्ज कर सकेंगे। पहले केवल पंजीकृत प्रोजेक्ट्स के मामलों की ही सुनवाई होती थी। पारदर्शी प्रक्रिया: यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी के अनुसार, यदि जांच में पाया जाता है कि किसी प्रोजेक्ट का पंजीकरण अनिवार्य था और प्रमोटर ने नहीं कराया, तो प्राधिकरण सचिव को उस पर कड़ी कार्रवाई के लिए निर्देश देगा। मनमाने शुल्क पर लगाम: प्रमोटर अब आवंटियों से मनमाना शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। आवंटी की मृत्यु पर उत्तराधिकारी के नाम संपत्ति ट्रांसफर करने के लिए अधिकतम 1,000 रुपये और परिवार के बाहर ट्रांसफर करने पर अधिकतम 25,000 रुपये ही प्रोसेसिंग फीस ली जा सकेगी। विधिक सुधार: यह कदम सुप्रीम कोर्ट की उस तल्ख टिप्पणी के बाद आया है जिसमें संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। अब एक ही बेंच के बजाय सभी बेंचों में इन मामलों की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर होगी। फैसले रियल एस्टेट में बढ़ेगी पारदर्शिता इस निर्णय से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और उन प्रमोटरों की जवाबदेही तय होगी जो पंजीकरण से बचकर ग्राहकों को ठग रहे थे। हालांकि, यूपी रेरा पर काम का बोझ बढ़ेगा क्योंकि पहले से ही 50 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए यह एक 'सुरक्षा कवच' की तरह काम करेगा।

मुख्यमंत्री ने लिया प्रयागराज हादसे का संज्ञान, शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना की व्यक्त

मुख्यमंत्री ने लिया प्रयागराज हादसे का संज्ञान, शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना की व्यक्त प्रयागराज में बामपुर गंगा घाट में डूबने से 4 बच्चों की हुई मौत लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार सुबह प्रयागराज में हुए हादसे का संज्ञान लिया। गौरतलब है कि प्रयागराज में बामपुर गंगा घाट पर शुक्रवार सुबह स्नान करने गए चार बच्चों की मौत हो गई। घटना की जानकारी होने पर मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत व बचाव करने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री ने रामनवमी पर हुए इस हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

खिलौना बुलडोजर को 5 साल की बच्ची ने CM योगी को गिफ्ट किया, देखिए वीडियो

गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर दौरे पर हैं. आज सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में भ्रमण के दौरान उन्हें कानपुर से आई एक छोटी बच्ची ने 'खिलौना बुलडोजर' भेंट किया. ये नजारा देखकर वहां मौजूद सभी हंसने लगे. खुद सीएम योगी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए. उन्होंने पहले तो बच्ची को पास बुलाया, फोटो खिंचवाई और फिर उसे खूब मन लगाकर पढ़ाई करने की नसीहत दी. बाद में सीएम ने बच्ची को उसका खिलौना वापस कर दिया और वह हंसते-खेलते वहां से चली गई।  फिलहाल, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. खुद सीएम योगी के ऑफिस की और से इसको शेयर किया गया है. इसमें लिखा है- 'आज सुबह गोरखनाथ मंदिर में भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री को कानपुर की पांच वर्षीय यशस्विनी ने बुलडोजर खिलौना भेंट किया.' वीडियो को मिनटों में हजारों लोग देख चुके हैं।  आपको बता दें कि इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को राम नवमी की शुभकामनाएंदेते हुए कहा कि भगवान राम भारतीय चेतना के आदर्श का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने X पर कहा कि राम करुणा और कर्तव्य के बीच एक अद्भुत संतुलन का प्रतीक हैं. उन्होंने कहा, "धर्म (सदाचार), सत्य और मर्यादा (औचित्य) के सर्वोच्च प्रतीक भगवान श्री राम की पावन जयंती पर सभी भक्तों और प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम का जीवन हमें यह याद दिलाता है कि सत्ता की सच्ची सुंदरता मर्यादा का पालन करने और लोगों के कल्याण में निहित है. उन्होंने आगे कहा, "राम नवमी का यह पावन दिन हमें अपने आचरण में सत्य को, अपने व्यवहार में करुणा को और समाज में सौहार्द को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता है; वास्तव में, यही 'राम-त्व' (राम का सार) का सच्चा उत्सव है।  अधिकारियों को दिए निर्देश  वहीं, गुरुवार को गोरखपुर में सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अवैध जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें और चेतावनी दी कि गरीबों को परेशान करने वालों को बख़्शा नहीं जाएगा।  मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में 'जनता दर्शन' कार्यक्रम में लगभग 200 लोगों से मुलाकात की, उनके आवेदन लिए और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए प्रभावी कार्रवाई करेगी।  विभिन्न मामलों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए, आदित्यनाथ ने संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को आवेदन भेजे, और उन्हें निर्देश दिया कि वे समय पर और संतोषजनक ढंग से उनका निपटारा सुनिश्चित करें। 

CM योगी का बयान: घबराहट में सिलेंडर-ईंधन न खरीदें, अफवाहों से बचें, सप्लाई पूरी तरह सामान्य

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोग बेवजह घबराकर रसोई गैस और ईंधन के लिए लाइन में लग रहे हैं, जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले एक गैस सिलेंडर एक महीने तक चलता था, लेकिन अब लोग 5-6 दिन में ही नया सिलेंडर लेने पहुंच रहे हैं, जो सही नहीं है।  उन्होंने साफ किया कि सरकार ने प्रदेश में व्यवस्था बनाई है कि गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी पहले की तरह जारी रहेगी. जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि एजेंसियां लोगों के घर तक सिलेंडर पहुंचाएं, इसलिए लाइन लगाने की जरूरत नहीं है।  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और अव्यवस्था पैदा करना चाहते हैं. ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है और अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब जरूरत हो तभी पेट्रोल और डीजल लेने जाएं, अनावश्यक खरीदारी से स्थिति बिगड़ती है।  उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में, खासकर मध्य पूर्व में युद्ध और अस्थिरता का माहौल है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो इसका असर हर व्यक्ति पर पड़ सकता है, इसलिए लोगों को मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौती के समय सरकार के साथ मिलकर चलना ही सच्ची राष्ट्र भक्ति है और देशहित में लिए गए फैसलों का समर्थन करना चाहिए।  बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने साथ मिलकर ईरान पर हमला किया था. इस हमले में ईरान के टॉप लीडरशिप की मौत हो गई. इसके बाद बड़े स्तर पर पश्चिम एशिया में जंग छिड़ गई. ईरान ने होर्मुज के रास्ते को बंद कर दिया. नतीजतन दुनिया के कई मुल्कों में ऊर्जा संकट गहरा गया. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित एशिया के मुल्क हो रहे हैं।   

योगी सरकार में बदली यूपी टूरिज्म की पहचान, वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश

योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी टूरिज्म ने तय किया ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ से ‘टेंपल इकोनॉमी’ का सफर योगी सरकार में बदली यूपी टूरिज्म की पहचान, वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश तीर्थ स्थलों का विकास और धार्मिक उत्सवों का भव्य आयोजन, यूपी बना देश में पर्यटन का सिरमौर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों के दौरान योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पर्यटन क्षेत्र ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ से निकलकर ‘टेंपल इकोनॉमी’ में बदल चुका है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने लोकभवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान योगी सरकार की 9 वर्षों की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए कहा कि यह परिवर्तन केवल सोच का नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं का भी प्रतीक बनकर उभरा है। जहां वर्ष 2017 के पहले राज्य सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा कब्रिस्तानों की दीवारें बनाने में खर्च होता था, वहीं अब योगी सरकार में प्रदेश के तीर्थ स्थलों, धार्मिक गलियारों, सांस्कृतिक मार्गों और पर्यटन अवसंरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस बदलाव ने उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्द्धन को पर्यटन के विकास से जोड़ा है। यूपी के आस्था के केंद्र,  तीर्थस्थल बने पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर्यटन मंत्री ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप पिछले 9 वर्षों में राज्य में आस्था, संस्कृति और पर्यटन का संगम अब आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन चुका है। योगी सरकार में तीर्थ विकास परिषदों का निर्माण कर प्रदेश के तीर्थों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विकास किया गया है। अयोध्या, काशी, प्रयागराज, मथुरा के साथ ही मीरजापुर, चित्रकूट, नैमिषारण्य और सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल आज प्रदेश के पर्यटन की नई पहचान बन चुके हैं। इस क्रम में विशेष रूप से काशी विश्वनाथ धाम के कॉरिडोर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में 4-5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं राम मंदिर अयोध्या में वर्ष 2025 के दौरान लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सांस्कृतिक उत्सव और आयोजन से बढ़ा यूपी में धार्मिक पर्यटन उत्तर प्रदेश में आयोजित सांस्कृतिक आयोजनों ने भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। दीपोत्सव अयोध्या ने 2025 में 26 लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। वहीं देव दीपावली वाराणसी को प्रांतीय मेले का दर्जा दिया गया है। 2017 में दीपोत्सव की शुरुआत, प्रयागराज में आयोजित होने वाला माघ, कुंभ और महाकुंभ मेला, ब्रज का रंगोत्सव जैसे आयोजनों ने पर्यटन को तेज गति से बढ़ावा दिया है। महाकुंभ-2025 का आयोजन इस यात्रा का ऐतिहासिक शिखर माना जा रहा है, जिसमें रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ। उत्तर प्रदेश की ये सांस्कृतिक परंपराएं और उत्सव अब आर्थिक गतिविधियों का बड़ा स्रोत बन रहीं हैं। इन आयोजनों से स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन, प्रसाद, फूल, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों को व्यापक लाभ मिला है। पर्यटन नीति-2022 का सफल क्रियान्वयन, हुआ 5 लाख रोजगार का सृजन उत्तर प्रदेश में पर्यटन का नीतिगत विस्तार करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पर्यटन नीति-2022 को लागू किया गया। इसका परिणाम है कि अब तक उत्तर प्रदेश में ₹36,681 करोड़ से अधिक निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे करीब 5 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। 1,757 पर्यटन इकाइयों का पंजीकरण भी किया गया है। युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के लिए शोध, प्रचार और मॉनिटरिंग कार्यों में ₹40,000 मासिक स्टाइपेंड देने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पर्यटक सुरक्षा और सुविधाएं हुईं सुदृढ़, मिला पर्यटन को बढ़ावा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख शहरों—आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, झांसी और लखनऊ में पर्यटन पुलिस तैनात की गई है। साथ ही 850 प्रशिक्षित गाइडों की नियुक्ति की गई है, जिससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। इसके साथ ही ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 234 गांवों का चयन किया गया है और 2026-27 तक 50,000 होम-स्टे कमरे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 16 वन्यजीव क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है। साथ ही तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा हेतु ₹1 लाख तथा सिंधु दर्शन यात्रियों को ₹20 हजार का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। पर्यटक आगमन में रिकॉर्ड वृद्धि, घरेलू पर्यटन में यूपी बना प्रथम पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि एक पर्यटक कम से कम 6 लोगों की आय का माध्यम बनता है। प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन पर विशेष ध्यान का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश देश में घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। वर्ष 2025 में प्रदेश में कुल 1 अरब 56 करोड़ से अधिक पर्यटक आए, जिनमें लगभग 36 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे। केवल अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज में ही वर्ष 2025 के दौरान लगभग 116 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन हुआ, जो राज्य के कुल पर्यटन का करीब 90 प्रतिशत है।  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि योगी सरकार के 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने यह सिद्ध कर दिया है कि सांस्कृतिक विरासत और आस्था को आर्थिक शक्ति में बदला जा सकता है। उत्तर प्रदेश अब तीर्थ, पर्यटन और परंपरा के समन्वय से विकास का एक नया मॉडल बनकर देश और दुनिया के सामने आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है।

सीएम योगी आज गोरखपुर में करेंगे एसटीपीआई केंद्र का उद्घाटन, आईटी-स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा नया बल

सीएम योगी गोरखपुर में आज एसटीपीआई केंद्र का करेंगे उद्घाटन, आईटी-स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा मजबूत आधार पूर्वांचल को मिलेगी टेक्नोलॉजी की नई उड़ान,  रोजगार और निवेश का नया हब बनेगा गोरखपुर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में आईटी और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति देने के लिए गुरुवार को गोरखपुर में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के अत्याधुनिक केंद्र का उद्घाटन करेंगे। लगभग 19.8 करोड़ रुपये की लागत से गीडा क्षेत्र में निर्मित यह केंद्र पूर्वांचल के युवाओं, स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए बड़े अवसरों का द्वार खोलेगा। 25,000 वर्ग फुट में विकसित यह सुविधा न केवल आईटी उद्योग को गति देगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार सृजन और डिजिटल सशक्तीकरण को भी नई दिशा देगी।  अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस, स्टार्टअप्स को मिलेगा प्लेटफॉर्म गोरखपुर एसटीपीआई केंद्र को प्लग एंड प्ले कार्यक्षेत्र, इन्क्यूबेशन स्पेस और आधुनिक नेटवर्किंग सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यहां 50 सीटों वाला कार्यक्षेत्र, 6000 वर्ग फुट का रॉ और सेमी-फर्निश्ड इन्क्यूबेशन स्पेस, 54 व्यक्तियों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस रूम और नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र स्टार्टअप्स, एमएसएमई और आईटी कंपनियों को अपने विचारों को विकसित करने और बाजार तक पहुंचाने के लिए मजबूत आधार देगा। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक प्रमुख स्वायत्त संस्था है, जिसने देश में आईटी/आईटीईएस निर्यात को बढ़ावा देने, उद्योगों को सक्षम बनाने तथा तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एसटीपीआई, अपने 70 केंद्रों (जिनमें से 62 केंद्र टियर-II/III शहरों में हैं) के माध्यम से आईटी/आईटीईएस एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने हेतु कार्य कर रहा है। पूर्वांचल में नवाचार और रोजगार का नया केंद्र यह केंद्र खासतौर पर पूर्वांचल क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा करेगा। एसटीपीआई के माध्यम से न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भी तैयार किया जाएगा। यह पहल क्षेत्रीय असंतुलन को कम करते हुए छोटे शहरों को टेक्नोलॉजी हब में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश में पहले से नोएडा, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ और आगरा जैसे शहरों में एसटीपीआई केंद्र सक्रिय हैं, जिससे राज्य का आईटी/आईटीईएस निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 48,231 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। गोरखपुर केंद्र के शुरू होने से यह नेटवर्क और मजबूत होगा तथा प्रदेश को देश के प्रमुख आईटी हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।  प्रदेश के आईटी सेक्टर को मिल रहा विस्तार सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया ने उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और वित्तीय प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित कर नवाचार को नई गति प्रदान की है। लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में स्थापित मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह केंद्र चिकित्सकीय उपकरणों, डिजिटल स्वास्थ्य समाधान और स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार को बढ़ावा देता है तथा नवउद्यमों को चिकित्सा क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने हेतु एक सशक्त मंच प्रदान करता है।

जब सेवा व संवेदना शासन का हिस्सा बनती हैं, तब बनता है गरीब का मकान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बहराइच में पुनर्वास धनराशि एवं भूमि पट्टों का वितरण किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  जब सेवा व संवेदना शासन का हिस्सा बनती हैं, तब बनता है गरीब का मकान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम ने कहा, पीडीए की बात करने वालों को क्यों याद नहीं आए भरथापुर के यादव, मौर्य, कुशवाहा  सीएम योगी ने 136 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास, शौचालय और आवास के लिए भूमि पट्टों का किया वितरण  पुनर्वास करने वाले परिवारों के लिए बनेगी बेहतरीन कॉलोनी, नाम होगा भरतपुरः सीएम योगी  बहराइच/लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जातियों में बांटकर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने वाली पिछली सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि आज जिन परिवारों का पुनर्वास किया जा रहा है, उनमें दलित, पिछड़े, यादव, मौर्य, कुशवाहा व थारू जनजाति आदि से जुड़े लोग भी हैं। हमने उन्हें जातीय चश्मे से नहीं देखा, क्योंकि वे हमारे लिए परिवार का हिस्सा हैं। उन्हें सुरक्षा के साथ ही शासन की सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए, ताकि वे भी उज्ज्वल भविष्य के सपने बुन सकें और विकास की उड़ान का हिस्सा बन सकें। लेकिन जो लोग सत्ता में आने पर केवल परिवार तक सीमित रह जाते हैं, उन्हें भरथापुर के मौर्य, यादव, दलित व पिछड़ी जातियों के लोग याद नहीं आ रहे थे। मुख्यमंत्री ने बुधवार को बहराइच जनपद की ग्राम पंचायत सेमरहना में आयोजित कार्यक्रम में भरथापुर गांव के 118 लाभार्थियों को 15 लाख रुपये प्रति हितग्राही की दर से पुनर्वास धनराशि एवं कृषि भूमि आदि परिसंपत्तियों के समतुल्य 21.55 करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण किया। इसके साथ ही उन्होंने 136 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास, शौचालय और आवास के लिए भूमि के पट्टों का वितरण भी किया। सीएम ने इस मौके पर महर्षि बालार्क व महाराजा सुहेलदेव को भी याद किया। पिछली सरकारों पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को सालों तक उपेक्षित रखा गया, हम भरथापुर के उन 500 लोगों के पुनर्वास कार्यक्रम से जुड़ रहे हैं। जो लोग पीडीए की बात करते हैं, उनसे पूछिए कि भरथापुर के लोगों को उनका अधिकार पहले क्यों नहीं मिला। इनके बच्चों को भी सुरक्षित रहने का अधिकार था, लेकिन जाति के नाम पर बांटने वाले लोगों ने आजादी के बाद से देश की जितनी क्षति की है, उसका खामियाजा देश ने लगातार भुगता है। इन लोगों ने जातीय आधार पर न बांटकर देश को एकता के सूत्र में बांधा होता तो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जैसे आज ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के लिए कार्य हो रहा है और गरीबों-वंचितों के बीच सुविधाएं पहुंच रही हैं, वैसे ही इनका पुनर्वास बहुत पहले हो गया होता। जातीय चश्मे से बांटने वालों ने गरीबों के प्रति अपनी संवेदना नहीं दिखाई। डबल इंजन सरकार लोगों को जातीय चश्मे से नहीं, बल्कि सेवा व संवेदना के चश्मे से देखती है।  सेवा व संवेदना शासन की व्यवस्था का हिस्सा सीएम योगी ने कहा कि जब सेवा व संवेदना व्यवस्था का हिस्सा बनती हैं तो गरीब को आवास, शौचालय, आयुष्मान कार्ड व शासन की अन्य सुविधाएं आसानी से मिलती हैं। हम बहराइच में सेवा व संवेदना के सेतु को जोड़ने आए हैं। उन्होंने प्रदेश में दंगा-उपद्रव कराया, हर जनपद में माफिया पैदा किए, परिवार के लिए खजाने को लूटा और हमने प्रदेश के खजाने को 25 करोड़ जनता के हित, गरीबों के उत्थान, बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार सृजन, बाढ़ जैसी आपदा रोकने और बिजली पर खर्च किया। 2017 के पहले वे बिजली नहीं देते थे, क्योंकि उनके सारे काम-कारनामे अंधेरे में होते थे। गरीबों के हक पर डकैती पड़ती थी। यूपी में भाजपा सरकार आई तो गरीब को उसका हक दिला रही है। आपदा में सेवा, सेवा में संवेदना और संवेदना में समाधान का रास्ता निकाल रही सरकार सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकार समस्या को समस्या बनाए रखने में अपना हित रखती थी। वे समस्या से ही समाज को विभाजित करते थे, फिर उपद्रवियों-दंगाइयों से लोगों को प्रताड़ित कराते थे, संपत्तियों में आगजनी कराते थे। आज सरकार आपदा में सेवा, सेवा में संवेदना और संवेदना में समाधान का रास्ता निकाल रही है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उत्थान ही डबल इंजन सरकार का संकल्प है। पुनर्वास के साथ-साथ आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में सरकार ने इस गांव को अपने हाथों में लिया है। माताएं, बहनें आत्मनिर्भर बन सकें, पुरुषों को काम मिल सके, हमने इसके लिए भी कार्य किया है।  हां, यह है जनता की सरकार  सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी की प्रेरणा से आज जो कार्य हो रहा है, वह बताता है कि हम जाति, पंथ और संप्रदाय से मुक्त होकर 25 करोड़ लोगों के लिए सामूहिक रूप से सेवा व संवेदना की भावना रखते हैं। आज इस कार्यक्रम में कुछ मांएं मंच पर आकर राहत सामग्री ले रही थीं और कुछ को चेक प्रदान किए जा रहे थे तो वास्तव में लग रहा था कि यह है जनता की सरकार।  सीएम ने बयां की भरथापुर की दुर्दशा सीएम योगी ने कहा कि 2025 में भरथापुर गांव के लोगों की एक नाव सरयू जी की धारा में विलीन हो गई। इस दुर्घटना में 9 लोगों की मौत हुई। जब प्रशासन से बातचीत की तो पता चला कि जहां दुर्घटना हुई है, वहां गांव से सटे क्षेत्र में मगरमच्छ रहते हैं। यह सुनकर मैं भी कांप गया कि आखिर ये लोग कैसे जंगल के बीच में रहते हैं। मैंने उनकी पीड़ा को महसूस किया। प्रभारी मंत्री, जन प्रतिनिधि व प्रशासनिक टीम के साथ पहुंचा। राहत कार्य तेजी से चला, दर्जन भर लोगों को बचाया गया, लेकिन 9 लोग नहीं बच पाए। मैं स्वयं आकर गांव की स्थिति देखी। सोचा इन लोगों की क्या गलती थी कि इन्हें आज तक सड़क, बिजली, आवास, पक्का मकान, शौचालय की सुविधा नहीं मिली। उन बच्चों की गलती क्या थी, जिन्होंने बचपन में ये सुविधाएं नहीं देखीं। पानी के लिए भी नदी ही सहारा थी। जंगल में हाथी, बाघ, तेंदुआ, सांप और नदी की तरफ से मगरमच्छ का खतरा, उसके बीच में ये 500 लोग रह रहे थे। 2017 के पहले उपद्रव था, 2017 के बाद त्योहारों से पहले उत्सव सीएम ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश को हमने नवनिर्माण की दिशा में … Read more

नौ सालों में यूपी में तीन गुना बढ़ी महिला श्रम शक्ति: सीएम योगी

एमएमएमयूटी में गर्ल्स हॉस्टल का भूमि पूजन व शिलान्यास किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौ सालों में यूपी में तीन गुना बढ़ी महिला श्रम शक्ति: सीएम योगी 2017 के पहले महिलाओं की सुरक्षा बड़ी चुनौती थी: सीएम योगी बिना भय महिला का कामकाजी होना समाज में सुरक्षा का मानक: सीएम योगी पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के सीएसआर फंड से होगा हॉस्टल का निर्माण, 13.67 करोड़ रुपये आएगी लागत एमएमएमयूटी में साइबर फोरेंसिक रिसर्च लैब का भी उद्घाटन किया सीएम ने, प्रदान किए रिसर्च एक्सीलेंस पुरस्कार गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि 2017 के बाद बेटियों की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए सरकार की तरफ से किए गए प्रयासों से बीते नौ सालों में महिला श्रम शक्ति तीन गुना बढ़ी है। वुमेन वर्क फोर्स का आंकड़ा 12 से बढ़कर 36 प्रतिशत को पार कर चुका है। वर्ष 2017 से पहले महिला सुरक्षा जहां एक बड़ी चुनौती थी, वहीं अब बिना भय के महिलाओं का तेजी से कामकाजी होना समाज में सुरक्षा का एक मानक बना है। सीएम योगी बुधवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में 144 बेडेड गर्ल्स हॉस्टल के भूमिपूजन एवं शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह गर्ल्स हॉस्टल, पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा सीएसआर फंड से बनवाया जाएगा। इसके निर्माण पर 13.67 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मुख्यमंत्री ने एमएमएमयूटी में 4.67 करोड़ रुपये की लागत से बनी साइबर फोरेंसिक रिसर्च लैब का उद्घाटन भी किया और रिसर्च एक्सीलेंस पुरस्कार प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एक पुस्तिका का अनावरण भी किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटी सुरक्षित हो, उसका सम्मान हो और वह स्वावलंबन के पथ पर अग्रसर होकर नए भारत के निर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन प्रभावी ढंग से कर सके, इस दृष्टि से उसी प्रकार की सुविधाएं देना आज की आवश्यकता है। इसे ही ध्यान में रखकर प्रदेश सरकार हर बड़े महानगर में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी महिला छात्रावास का निर्माण कर रही है। किसी भी समाज में सुरक्षा का मानक यही है कि महिलाएं बिना भय घर से बाहर निकल सकें। 2017 के बाद सरकार की तरफ से इस दिशा में किए गए प्रयासों के परिणाम सबके सामने हैं।  पहले पढ़ने के लिए यूपी से बाहर भेज देते थे बेटियों को मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में महिला सुरक्षा चुनौती थी। मध्य व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत सारे परिवार ऐसे थे, जिन्होंने बेटियों को पढ़ने के लिए यूपी के बाहर कहीं छात्रावास में या फिर कहीं रिश्तेदारों के यहां भेज दिया था। आज यूपी के हर जनपद में बेटी बिना डर के पढ़ने जाती है, अन्य शहरों में कार्य करने जाती है। नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में कामकाजी महिलाओं की संख्या 12 फीसदी से कम थी,  वह आज बढ़कर 36 फीसदी से ज्यादा हो गई है। बेटा-बेटी में भेदभाव बंद होने पर कई गुना बढ़ेगी विकास की रफ्तार सीएम योगी ने कहा कि सदन में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए संसद से पास नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा है कि 2029 के चुनाव में यह लागू हो जाए। जब समाज में महिला-पुरुष का भेद समाप्त होता है तो सुखद अनुभूति होती है। अभिभावक जब बेटी-बेटे में भेद करना बंद करेंगे तभी विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ पाएगी और तभी स्टेबिलिटी (स्थायित्व) आएगी। यूपी में ग्रेड-1 की अब 12 फोरेंसिक साइंस लैब, छह निर्माणाधीन वर्तमान दौर में फोरेंसिक साइंस लैब की आवश्यकता को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले यूपी पुलिस के पास ग्रेड-1 की सिर्फ 02 फोरेंसिक साइंस लैब थीं। आज यूपी में ग्रेड-1 की 12 फोरेंसिक साइंस लैब हैं, जबकि छह निर्माणाधीन हैं। लखनऊ में पुलिस के लिए विश्वस्तरीय फोरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित हो चुका है। यहां फोरेंसिक साइंस के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पाठ्यक्रमों की शुरुआत भी हो चुकी है। तीन नए कानून लागू होने के बाद सात वर्ष से ऊपर की सजा के लिए किसी भी आपराधिक मामले में फोरेंसिक साक्ष्य को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए सरकार ने सभी 75 जनपदों में दो-दो मोबाइल फोरेंसिक लैब उपलब्ध कराई हैं। अपराधी को सजा करवाने में फोरेंसिक साक्ष्य सहयोग करता है। अपराधी सजा पाता है तो पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलता है। 2017 में थे दो साइबर थाने, आज सभी जनपदों में मुख्यमंत्री कहा कि 2017 में प्रदेश में सिर्फ दो साइबर थाने थे। आज 75 जनपदों में साइबर थाने हैं। प्रदेश के 1681 थानों में साइबर हेल्प डेस्क भी है। साइबर थानों ने अपराधियों से सैकड़ों करोड रुपये बचाने में सफलता प्राप्त की है। साइबर क्राइम से बचने, डीप फेक के मामलों को नियंत्रित करने, डॉक्यूमेंट को सुरक्षा प्रदान करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।  अधिक आबादी यूपी की डेमोग्राफिक डिविडेंड और पूंजी मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की सबसे बड़ी आबादी का राज्य है। वर्ष 2017 के पहले यह राज्य पहचान का मोहताज था। लोग हमें शक की निगाहों से देखते थे। तब हमने कहा, हमारी जो आबादी है यह भारत का सबसे अच्छा डेमोग्राफिक डिविडेंड है, यह हमारी पूंजी है। यह भारत का स्किल्ड वर्कफोर्स है। मानव संसाधन की इस पूंजी को आगे बढ़ाने का दायित्व सरकार ने लिया और अलग-अलग क्षेत्रों में इसे विकसित करने का कार्य किया।  युवाओं को ‘मार्केट-इंडस्ट्री रेडी’ वर्कफोर्स में बदलने का किया काम मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रदेश के युवाओं को टेक्नोलॉजी से जोड़कर उन्हें मार्केट व इंडस्ट्री रेडी वर्कफोर्स में बदलने का काम किया है। लोग कहते हैं कि यह कैसे हुआ, हमारा जवाब है कि यह तो मौजूद था, बस पहले की सरकारों में इच्छाशक्ति का अभाव था। यहां का युवा प्रतिभाशाली था, लेकिन उसको प्लेटफार्म नहीं मिलता था। जाति के नाम पर बांटने वाले लोग कहां इस ताकत को समझते। नकारात्मकता जिनके मन में हो, समाज के प्रति जिनके मन में नफरत का भाव हो, वह कहां उस ताकत को समझेंगे। यूपी भारत का कंज्यूमर स्टेट ही नहीं, बल्कि भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड भी है। हमें युवाओं को स्किल्ड करना है, इनोवेशन के साथ जोड़ना है, टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ना है। मार्केट … Read more

नव निर्माण के 9 वर्ष: यूपी बनेगा हरित प्रदेश, 277 करोड़ से ज्यादा पौधरोपण

नव निर्माण के 9 वर्ष: 277 करोड़ से अधिक पौधरोपण वाला ‘हरित प्रदेश’ बनेगा यूपी  2026 के वर्षाकाल में फिर नया इतिहास रचेगा उत्तर प्रदेश इस वर्ष भी लक्ष्य (35 करोड़) से ज्यादा पौधरोपण की संभावना, पिछले वर्ष हुआ था 37.21 करोड़ पौधरोपण अभी से तैयारी में जुटी योगी सरकार, गांवों में लग रहीं ग्रीन चौपाल, सीएम योगी के नेतृत्व में 9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण अपने जन्मदिन (5 जून, पर्यावरण दिवस) पर प्रदेशवासियों को पौधरोपण का बड़ा तोहफा देते हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   लखनऊ  उत्तर प्रदेश 2026 में फिर नया इतिहास रचेगा। राज्य को ‘हरित प्रदेश’ बनाने वाले योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 9 वर्ष में 242.13 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए, जबकि इसके पहले 2008 से 2016 तक (9 वर्ष में) महज 65.27 करोड़ पौधरोपण ही किया जा सका। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वन विभाग इस वर्षाकाल (2026) में भी 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाएगा। इस तरह उत्तर प्रदेश 2026 तक 277 करोड़ से अधिक पौधरोपण करने वाला प्रदेश बन जाएगा। हरीतिमा वृद्धि के प्रयासों से उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। 2025 में एक दिन (9 जुलाई) में 37.21 करोड़ पौधे लगाने वाले उत्तर प्रदेश ने 2026 पौधरोपण महाभियान को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।  हाल में वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित 'वृहद पौधरोपण कार्यक्रम' में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधे रोपे थे। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने इसका प्रमाणपत्र भी सौंपा था।  जन्मदिन पर प्रदेशवासियों को पौधरोपण का तोहफा देते हैं सीएम योगी   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन 5 जून को है। इसी दिन पर्यावरण दिवस भी मनाया जाता है। मुख्यमंत्री अपने जन्मदिन की शुरुआत पौधरोपण से करते हैं। इसके बाद वर्षाकाल में करोड़ों पौधरोपण करने के साथ ही योगी आदित्यनाथ इसे जनांदोलन बनाते हैं। 2017 में सत्ता संभालने के बाद से 5 जून को पर्यावरण दिवस हो या वर्षाकाल में पौधरोपण महाभियान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसकी कमान संभाली। पौधरोपण महाभियान के पहले वह खुद सफल आयोजन के लिए मीटिंग और मॉनीटरिंग करते हैं। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पहुंचकर पौधे भी लगाते हैं। स्कूली बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों, कर्मचारियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों समेत समाज के हर तबके को इस महाभियान से जोड़ने का बीड़ा उठाते हैं। योगी सरकार के प्रयास से 9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। इससे यूपी के वनाच्छादन में भी वृद्धि हुई। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के मुताबिक उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। योगी सरकार ने 1 से 7 जुलाई 2025 के बीच जन्मे 18,348 बच्चों को ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट दिया है। बच्चों के अभिभावकों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे प्रदान कर यह संकल्प दिलाया गया कि जैसे बच्चे का पालन करें, वैसे ही पौधे का भी संरक्षण कर उसे पेड़ बनने में योगदान दें। पीएम मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में सराहनीय कार्य के लिए उत्तर प्रदेश की पीठ भी थपथपाई है।  चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त  यूपी ने विश्व के पर्यावरण मानचित्र पर 01 मार्च को नया इतिहास दर्ज किया। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी में आयोजित 'वृहद पौधरोपण कार्यक्रम' में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण कर चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। इसके पहले 10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था।  योगी सरकार-2026 में भी लगाएगी 35 करोड़ से ज्यादा पौधे  योगी सरकार वर्षाकाल-2026 में भी पौधरोपण की तैयारी में जुट गई है। वन व पर्यावरण विभाग की ओर से 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य प्रस्तावित है। सरकार की ठोस तैयारी व जन-सहभागिता से यह लक्ष्य से अधिक होने की पूरी संभावना है। पौधशालाओं, विभागों, जनपदों को आगामी दिनों में तैयारी को लेकर निर्देश दिए गए हैं। 52 करोड़ से अधिक पौधे विभिन्न पौधशालाओं में रोपण के लिए तैयार स्थिति में होंगे। हाल में प्रस्तुत बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये तथा राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित है।  गांवों में पर्यावरण संरक्षण जागरूकता के लिए ‘ग्रीन चौपाल’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2030 तक प्रदेश के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक लाने का निर्देश दिया है। यह लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब पौधरोपण को जनांदोलन का स्वरूप दिया जा सके। सीएम के विजन को केंद्र में रखते हुए वन विभाग ने गांवों में ग्रीन चौपालों का गठन करने का निर्णय किया और इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भागीदारी भी सुनिश्चित की। विभिन्न विभागों के सहयोग से प्रत्येक ग्रामसभा स्तर पर अब तक 18000 से अधिक गांवों में चौपालों का गठन/आयोजन किया जा चुका है। ग्रीन चौपालें ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में हो रही हैं। इसमें सरकार के सभी वर्गों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से इसकी बैठक की जा रही है।