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खेल अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है – मुख्यमंत्री

देश के प्रतिभावान खिलाड़ियों का उत्तर प्रदेश की धरती पर आगमन हम सबके लिए सम्मान का विषय – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेल अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है – मुख्यमंत्री हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना हो – मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिएंडर पेस को ‘मेंटॉर ऑफ द इयर’ और मिताली राज को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से किया सम्मानित उत्तर प्रदेश को मिला ‘स्टेट ऑफ द इयर’ का पुरस्कार, राज्य में विकसित हो रहे खेल ढांचे और नीतियों के लिए मिला सम्मान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित स्पोर्ट्स अवार्ड समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के इस सम्मान समारोह में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है और इससे भी अधिक प्रसन्नता इस बात की है कि इस सम्मान समारोह का आयोजन प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान समारोह के कारण देश के इन प्रतिभावान खिलाड़ियों का उत्तर प्रदेश की धरती पर आगमन हुआ है। यह हम सबके लिए सम्मान का विषय तो है ही, साथ ही यह प्रदेश की नई पीढ़ी को खेल के क्षेत्र में अचीवमेंट्स हासिल करने के लिए प्रेरणा प्रदान करेगा। स्पोर्ट्स अवार्ड समारोह का आयोजन एक निजी मीडिया समूह ने किया था, जिसमें देशभर के दिग्गज खिलाड़ियों और खेल हस्तियों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि खेल केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है। खेल भावना व्यक्ति को मजबूत बनाती है, विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का साहस देती है और नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में खेलों के विकास के लिए कई सार्थक प्रयास किए हैं।  उन्होंने बताया कि 2017 के बाद से हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहल को मुहिम की तरह आगे बढ़ाया। यही नहीं, वर्तमान में हमारी सरकार प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में एक खेल मैदान, हर ब्लॉक में एक मिनी स्टेडियम और हर जिले में एक स्टेडियम विकसित कर रही है। वाराणसी में बीसीसीआई के एक इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हुआ है, गोरखपुर में भी इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही पिछले वर्ष मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई है। साथ ही हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाए, जहां हमारे खेल क्षेत्र के दिग्गज खिलाड़ियों और अनुभवी प्रशिक्षकों के माध्यम से स्थानीय युवकों को राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं के लिए ट्रेनिंग दी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को सम्मान और जॉब सिक्योरिटी देने के लिए हमारी सरकार ने खेल पॉलिसी में बदलाव लाकर खिलाड़ियों को राज्य में सरकारी नौकरियां देने की नीति लागू की है, जिससे वे निश्चिंत होकर अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने कहा कि मुझे बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हमारी सरकार ने 500 से अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को विभिन्न पदों पर सरकारी नौकरी प्रदान की है। इनमें से कई वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत और अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम के आयोजन के लिए मीडिया समूह और आयोजक टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को सम्मान देने के साथ-साथ युवाओं को प्रेरित करने का मंच प्रदान करते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव और भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी. टी. उषा सहित कार्यक्रम में शामिल हुई खेल जगत की हस्तियों के स्वागत से हुई। इस अवसर पर देश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को खेल क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। इस क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेनिस जगत में देश का नाम रोशन करने वाले लिएंडर पेस को ‘मेंटॉर ऑफ द इयर’ के पुरस्कार से सम्मानित किया। वहीं, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया, जबकि हॉकी के दिग्गज पी. आर. श्रीजेश को भी उनके योगदान के लिए सराहा गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को राज्य में विकसित हो रहे खेल ढांचे और नीतियों के लिए ‘स्टेट ऑफ द इयर’ का पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह में ‘टीम ऑफ द इयर’ का पुरस्कार भारत की महिला दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम को दिया गया, जबकि ‘फेडरेशन ऑफ द इयर’ का पुरस्कार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को मिला। समारोह में बताया गया कि इस वर्ष मीडिया समूह की ओर से खेल की 45 श्रेणियों में 100 से अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और लगन से देश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिस्पर्धाओं में ऊंचा किया है। कार्यक्रम में फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया, बीसीसीआई के वाइस प्रेसिडेंट राजीव शुक्ला,  क्रिकेटर कुलदीप यादव, महिला क्रिकेट खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर, दीप्ति शर्मा, हरलीन देवल आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

नदियों की निर्मलता के लिए सीएम योगी ने पूर्व सरकार से 10 गुना अधिक काम किया

नदियों की निर्मलता के लिए पूर्व की सरकार की तुलना में सीएम योगी ने किया 10 गुना काम नमामि गंगे : 2017 से पहले केवल 5 एसटीपी किए जा सके इंस्टॉल 9 साल में नमामि गंगे योजना के तहत 10 गुना बढ़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 2017 के बाद योगी सरकार ने 50 एसटीपी किए इंस्टॉल प्रदेश में लगभग पांच हजार मिलियन लीटर प्रतिदिन वेस्ट वाटर किया जा रहा साफ वर्तमान में प्रदेश भर में 160 एसटीपी किए जा चुके इंस्टॉल लखनऊ उत्तर प्रदेश में नदियों की निर्मलता और गंदे पानी के शोधन के काम में योगी सरकार ने नौ वर्षों में रफ्तार कई गुना बढ़ा दी है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के तहत सिर्फ 5 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) इंस्टॉल हो पाए थे, वहीं 2017 के बाद पिछले 9 साल में ऐसे 50 से अधिक एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, यानी इस अवधि में क्षमता लगभग 10 गुना बढ़ी है। प्रदेश में लगभग 160 एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग पांच हजार मिलियन लीटर (एमएलडी) वेस्ट वाटर को शुद्ध कर नदियों में जाने से रोका जा रहा है। पूर्व की सरकारों की तुलना में मौजूदा योगी सरकार में सीवर शोधन ढांचे के विस्तार की रफ्तार लगभग दस गुना तक बढ़ी है। नमामि गंगे : 9 साल में 10 गुना बढ़े एसटीपी नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की संरचना तैयार की जा रही है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के अंतर्गत केवल 5 एसटीपी इंस्टॉल हो सके थे, वहीं योगी सरकार में 50 से अधिक नए एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं। लखनऊ में 9 संचालित एसटीपी, 624.50 एमएलडी की क्षमता राजधानी लखनऊ में इस समय कुल 09 सीवेज शोधन संयंत्र संचालित हैं, जिनकी कुल शोधन क्षमता 624.50 एमएलडी है। इन संयंत्रों के जरिए गोमती एवं उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले पानी को पहले ही शुद्ध किया जा रहा है। संचालित एसटीपी भरवारा, दौलतगंज (शहरी), दौलतगंज (ग्रामीण), हाथी पार्क, जीएच कैनाल, वृंदावन, यूपी आवास विकास परिषद क्षेत्र और सीजी सिटी आदि स्थानों पर स्थापित हैं। इन प्लांटों से निकला ट्रीटेड वॉटर एक ओर नदियों को स्वच्छ रखने में मदद कर रहा है, वहीं चरणबद्ध तरीके से इसके पुन: उपयोग (रीयूज) की योजना भी तैयार की जा रही है। लखनऊ में 3 निर्माणाधीन और 4 प्रस्तावित एसटीपी लखनऊ में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा कुल 03 एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 153.50 एमएलडी होगी। ये प्लांट बारिकल, लोनियांपुरवा और बिजनौर क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं। राजधानी में सीवेज शोधन क्षमता पहुंचेगी 1000 एमएलडी के पार इसके अलावा लखनऊ में 4 नए एसटीपी बसंत कुंज, वजीरगंज, जियामऊ और मस्तेमऊ के निर्माण का प्रस्ताव है, जिनकी कुल क्षमता 342 एमएलडी होगी। इन संयंत्रों के तैयार हो जाने के बाद राजधानी में सीवेज शोधन क्षमता 1000 एमएलडी से अधिक पहुंचने का अनुमान है। 2017 से पहले नदियों की निर्मलता कागजों तक सीमित रही 2017 से पहले नदियों की निर्मलता की योजनाएं कागजों तक सीमित रहीं और एसटीपी निर्माण की रफ्तार बेहद सुस्त थी। वहीं, योगी सरकार में नए प्लांटों के साथ-साथ पुराने संयंत्रों के उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है।

खनिज एवं उपखनिज खनन से राजस्व में वृद्धि, सोनभद्र का योगदान सबसे अधिक

खनिज एवं उपखनिज खनन से हुई राजस्व प्राप्ति में वृद्धि, सोनभद्र का रहा सर्वाधिक योगदान सोनभद्र जनपद से सर्वाधिक 678.28 करोड़ रुपये की हुई राजस्व प्राप्ति, महोबा, हमीरपुर, झांसी और जालौन रहे अन्य प्रमुख जनपद राजस्व प्राप्ति के साथ अवैध खनन पर रोक और पर्यावरणीय मानकों के पालन को सुनिश्चित कर रहा है प्रदेश का भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग लखनऊ  उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप खनिज संसाधनों का संतुलित और सतत उपयोग सुनिश्चित करते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था में अधिकाधिक योगदान का सतत प्रयास कर रहा है। इस संबंध में विभाग की ओर से हाल ही में संपन्न हुई मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में फरवरी माह के राजस्व संग्रह के आंकड़े जारी किए गए। जिसके अनुसार प्रदेश के खनिज संपदा से संपन्न प्रमुख दस जनपदों से लगभग 2543.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया। जिसमें सर्वाधिक राजस्व प्राप्ति सोनभद्र जनपद से हुई है, इसी क्रम में महोबा, हमीरपुर, झांसी और जालौन जनपद खनन आधारित राजस्व प्राप्ति में प्रमुख रहे। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग प्रदेश में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए राजस्व संग्रह में वृद्धि सुनिश्चित कर रहा है। इस क्रम में खनिज एवं उपखनिज के खनन से फरवरी माह में सर्वाधिक राजस्व प्राप्ति सोनभद्र जनपद से हुई है। सोनभद्र जनपद ने मुख्य खनिजों के खनन से 402.79 करोड़ रुपये, जबकि उपखनिजों के खनन से 275.49 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। वहीं महोबा ने 394.9 करोड़ रुपये, हमीरपुर ने 389.61 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया। जबकि झांसी से 215.83 करोड़ रुपये, जालौन से 225.62 करोड़ तथा सहारनपुर से 227.58 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति दर्ज की गई। इस क्रम में अन्य प्रमुख जनपदों में बांदा ने 209.98 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया, जबकि प्रयागराज से 136.9 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। फतेहपुर और कौशांबी जैसे जनपदों से क्रमशः 40.31 करोड़ रुपये और 24.41 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया गया। समीक्षा बैठक में विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के दस प्रमुख खनिज संपन्न जिलों से फरवरी माह में लगभग 2543.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विभागीय प्रयासों और सुदृढ़ निगरानी व्यवस्था का परिणाम माना जा रहा है।  विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए विभाग की ओर से प्रदेश में खनन गतिविधियों की सतत निगरानी एवं खनन पट्टों के आवंटन और संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है, जिससे राजस्व संग्रहण में सुधार हुआ है।

योगी सरकार का द शैडो एप: बेटियों की सुरक्षा में परछाईं की तरह होगा साथी

योगी सरकार का द शैडो एप परछाईं की तरह करेगा बेटियों की सुरक्षा  सीएम योगी की मंशा के अनुरुप यूपीएसआईएफएस ने लांच किया ‘द शैडो’ एप, बेटियों की सुरक्षा की दिशा में बड़ी पहल लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटियों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता को देखते यूपी सरकार ने आधी आबादी को सम्मानजनक व सुरक्षित वातावरण देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी क्रम में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) ने एक अनूठी पहल की है। संस्थान के बीटेक स्टूडेंट्स द्वारा विकसित “द शैडो” (यूपीएसआईएफएस एप) एप स्टूडेंट्स, विशेषकर बेटियों की सुरक्षा व शैक्षणिक प्रबंधन को एक साथ मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह एप एक समग्र सुरक्षा-आधारित डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में तैयार किया गया है, जो हर स्टूडेंट के साथ उसकी “परछाईं” की तरह जुड़ा रहेगा। यह तकनीक बेटियों को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास है। ‘पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल’ से बेटियों की सुरक्षा को नई मजबूती यूपीएसआईएफएस के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी ने बताया कि “द शैडो” इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स द्वारा ही विकसित किया गया है। इस एप की खासियत केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह स्टूडेंट्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उनके हर मूवमेंट को अधिकृत तरीके से ट्रैक करता है। कैंपस में प्रवेश, निकास, अवकाश अनुरोध और अन्य गतिविधियों को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे संस्थान प्रशासन को रियल-टाइम जानकारी मिलती रहती है। इसमें अटेंडेंस, असाइनमेंट, परीक्षा प्रदर्शन और अकादमिक प्रगति का पूरा डेटा भी उपलब्ध रहता है, जिससे स्टूडेंट्स, पैरेंट्स व टीचर तीनों एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहते हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि स्ट्डेंट्स की जिम्मेदारी भी तय होगी। एप में दिया गया ‘पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल सिस्टम’ इसे और खास बनाता है। इसके तहत किसी भी छात्रा के कैंपस से बाहर जाने या विशेष अनुमति से जुड़े अनुरोध पर सबसे पहले अभिभावकों की मंजूरी अनिवार्य है। इससे बेटियों की सुरक्षा को एक अतिरिक्त परत मिलती है और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होता है। इससे छात्राओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित होगा।  एसओएस इमरजेंसी सिस्टम से मिलेगी तुरंत मदद, रहेगी हर खतरे पर नजर “द शैडो” एप का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका इंटीग्रेटेड एसओएस इमरजेंसी कॉल सिस्टम है। यदि कोई छात्रा किसी भी प्रकार की असुरक्षित स्थिति में आती है, तो एक बटन दबाते ही संस्थान प्रशासन और अभिभावकों को तुरंत अलर्ट मिल जाता है। यह सुविधा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती है, जिससे किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सकता है। इसके साथ ही क्यूआर-कोड आधारित डिजिटल गेट पास सिस्टम भी लागू किया गया है, जिससे कैंपस में अनधिकृत प्रवेश और अवांछनीय गतिविधियों पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जा सके। इंस्टीट्यूट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंह के मार्गदर्शन में इस एप को बीटेक छात्र हर्ष व आदित्य मिश्रा ने विकसित किया है। डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि “द शैडो” एप बेटियों की सुरक्षा को लेकर तकनीकी नवाचार का एक सशक्त उदाहरण है, जो सरकारी प्रयासों को संस्थागत स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाता है। यह ऐप दिखाता है कि कैसे डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त किया जा सकता है। यह स्टूडेंट्स के लिए एक “डिजिटल साथी” की तरह है, जो हर पल उनकी सुरक्षा, निगरानी और शैक्षणिक प्रगति का ध्यान रखेगा।

योगी सरकार की अभ्युदय योजना से यूपीएससी में प्रदेश की तीन बेटियों ने किया परचम लहराना

नारी तू नारायणी योगी सरकार की अभ्युदय योजना का मिला लाभ, यूपीएससी में प्रदेश की तीन बेटियों ने लहराया परचम मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से यूपी की बेटियों को लगे ‘पंख’, अब तक ढाई सौ से अधिक ने पाई सफलता एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने अब तक कराया रजिस्ट्रेशन 2025 में योजना का लाभ लेकर प्रदेश की तीन बेटियों ने हासिल की उल्लेखनीय सफलता महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना भी बड़ी सफलता हासिल कर रहीं यूपी की बेटियां ‘नारी तू नारायणी’ की भावना को साकार करती ये बेटियां आज समाज के लिए बन रहीं हैं प्रेरणा लखनऊ उत्तर प्रदेश की बेटियां अब सिर्फ सपने नहीं देख रहीं, बल्कि उन्हें साकार भी कर रहीं हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना इनके लिए ऐसे ‘पंख’ बनकर उभरी है, जिसके सहारे वे देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का परचम लहरा रही हैं। संघ लोकसेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में इस योजना का लाभ लेकर प्रदेश की तीन बेटियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। खास बात ये है कि इस योजना के जरिए अब तक ढाई सौ से अधिक बेटियां सफलता हासिल कर चुकीं हैं और अधिकारी बनकर यूपी को दिशा दिखा रहीं हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि योगी सरकार की शिक्षा केंद्रित योजनाओं की प्रभावशीलता का भी प्रमाण है।  महंगी कोचिंग के बिना भी बड़ी सफलता 2021 में शुरू हुई मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने अब तक एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों को जोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मजबूत मंच दिया है। खास बात यह है कि बेटियां इस योजना के जरिए महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना भी बड़ी सफलता हासिल कर रहीं हैं। ‘नारी तू नारायणी’ की भावना को साकार करती ये बेटियां आज समाज के लिए प्रेरणा बन रहीं हैं। मानसी : सेल्फ स्टडी से 444वीं रैंक तक का सफर गाजियाबाद के प्रताप विहार की रहने वाली मानसी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 444वीं रैंक हासिल की। प्राइवेट जॉब करने वाले पिता समेत परिवार में पांच सदस्य हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मानसी ने घर पर ही तैयारी की और अभ्युदय योजना के मार्गदर्शन से सफलता हासिल की। अदिति सिंह: पढ़ाई के साथ दूसरों का भी किया मार्गदर्शन झांसी की अदिति सिंह ने 859वीं रैंक प्राप्त की। इंजीनियर पिता और शिक्षिका मां की बेटी अदिति ने सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की। खास बात यह रही कि वह स्वयं भी अभ्युदय योजना के तहत अन्य छात्रों को पढ़ाकर उनकी मदद करती रहीं। तनीषा सिंह : घर से पढ़ाई, बड़ा मुकाम आगरा की तनीषा सिंह ने 930वीं रैंक हासिल की। रेवेन्यू इंस्पेक्टर पिता और गृहिणी मां के परिवार से आने वाली तनीषा ने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की और अभ्युदय योजना की सहायता से सफलता प्राप्त की। कीर्तिका सिंह : डिप्टी एसपी बन मिसाल बनीं लखनऊ की रहने वाली कीर्तिका सिंह 2022 में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 58वीं रैंक हासिल कर डिप्टी एसपी बनीं। एटा में तैनात कीर्तिका किसान परिवार से हैं। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से तैयारी की और अभ्युदय योजना का लाभ उठाया। बदलती तस्वीर : गांव-शहर हर जगह जल रही शिक्षा की लौ मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने न केवल शिक्षा को सुलभ बनाया है, बल्कि बेटियों में आत्मविश्वास भी जगाया है। अब वे बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस जुटा रहीं हैं। योगी सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर यूपी की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। संदेश है साफ : अवसर मिला तो बेटियां उड़ान भरेंगी इन सफलताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर सही दिशा और संसाधन मिलें, तो प्रदेश की बेटियां देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आज उन लाखों सपनों को आकार दे रही है, जो कभी संसाधनों के अभाव में अधूरे रह जाते थे।

नवरात्रि में मुख्यमंत्री की ओर से बेटियों को नियुक्ति पत्र मिलने को लेकर सकारात्मक संदेश

नवरात्र में बेटियों को बड़ी संख्या में नियुक्ति पत्र मिलना सकारात्मक संकेत: मुख्यमंत्री  -लोकभवन में नव चयनित 1,228 नर्सिंग अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किया संबोधित  1097 महिला और 131 पुरूष नर्सिंग अधिकारियों को मिला नियुक्ति पत्र – सीएम ने नव चयनित नर्सिंग अधिकारियों को वितरित किए नियुक्ति पत्र, बोले- नए मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग व पैरामेडिकल सीटों में हुआ भारी इजाफा – सुपर स्पेशलिटी संस्थानों ने बढ़ाई प्रदेश की पहचान, नर्सिंग के साथ भाषा कौशल से मिलेगा वैश्विक अवसर लखनऊ आज नर्सिंग प्रोफेशनल्स की मांग केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में है। जापान और जर्मनी यात्रा के दौरान भी नर्सिंग प्रोफेशनल्स की डिमांड की गई। वहां भारत के नर्सिंग प्रोफेशनल्स के बारे में लोगों के मन में आदर का भाव है। यह सौभाग्य हमारे नर्सिंग प्रोफेशनल्स को प्राप्त है। ऐसे में नर्सिंग कोर्स के साथ एक लैंग्वेज में डिप्लोमा कर अपना भविष्य को और बेहतर बना सकते हैं। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोकभवन के सभागार में आयोजित निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया से चयनित 1,228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कही। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नव चयनित नर्सिंग ऑफिसर्स को नियुक्ति पत्र वितरित किया। इससे पहले नव चयनित नर्सिंग ऑफिसर्स ने मुख्यमंत्री के सामने अपने विचार साझा किए और उन्हें धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में 1097 महिलाओं और 131 पुरूष नर्सिंग अधिकारियों को मिला नियुक्ति पत्र पहले की सरकारों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल थीं कोई सुध लेने वाला नहीं था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी पूर्वी उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति के लिए जाना जाता था। हालात इतने खराब थे कि हजारों लोगों की मौतें होती थीं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। इंसेफेलाइटिस और डेंगू जैसी बीमारियां हर साल बड़ी संख्या में लोगों की जान ले लेतीं थीं। इसके अलावा अन्य कई संक्रामक रोगों से भी लगातार मौतें होती रहतीं थीं, जिससे यह क्षेत्र स्वास्थ्य संकट का केंद्र बना हुआ था। इन चुनौतियों के बीच प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए गए। वर्षों से बंद पड़े एएनएम और जेएनएम प्रशिक्षण संस्थानों को फिर से शुरू किया गया। प्रदेश में 35 ऐसे एएनएम प्रशिक्षण केंद्र, जो पूर्व में बंद हो चुके थे, उन्हें पुनः संचालित किया गया है। इसके साथ ही 31 नए नर्सिंग कॉलेजों का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में केवल मेडिकल कॉलेज ही नहीं, बल्कि नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों की भी समान रूप से अहम भूमिका होती है। यदि डॉक्टर स्वास्थ्य प्रणाली का नेतृत्व करता है, तो नर्सिंग स्टाफ उसकी रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है। इसी सोच के साथ प्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दिए जाने का परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। जहां पहले प्रदेश राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे था, वहीं अब उत्तर प्रदेश इन मानकों पर राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंच रहा है। 976 सीएचसी पर टेलीमेडिसिन और टेली-कंसल्टेशन की सुविधा शुरू  मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के तहत प्रदेश में लगभग 9.25 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। इसके अलावा डिजिटल हेल्थ आईडी (आभा आईडी) के रूप में 14 करोड़ 28 लाख से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जो नागरिकों को एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर टेलीमेडिसिन और टेली-कंसल्टेशन की सुविधा शुरू की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में रियल टाइम डिजीज ट्रैकिंग की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे बीमारियों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिल रही है। प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां स्वास्थ्य क्षेत्र में अव्यवस्था और बाहरी हस्तक्षेप की शिकायतें रहती थीं, वहीं अब “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत हर जिले में मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। मेडिकल शिक्षा को एकरूपता देने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के माध्यम से सभी मेडिकल कॉलेजों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। अब सहारनपुर, आजमगढ़, चंदौली और बिजनौर जैसे विभिन्न जिलों के मेडिकल कॉलेज एक समान पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली के तहत संचालित हो रहे हैं। 22 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के साथ नर्सिंग शिक्षा को आगे बढ़ाया जा रहा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अंदर मेडिकल कॉलेजेस की संख्या बढ़ी है। गोरखपुर और रायबरेली में एम्स अच्छे ढंग से संचालित हो चुका है। पीपीपी मोड पर भी हमने कुछ मेडिकल कॉलेज संचालित किए हैं, जो सफलतापूर्वक आगे बढ़े हैं। महाराजगंज, संभल और शामली जैसे जिलों में यह मॉडल अब “पब्लिक ट्रस्ट पार्टनरशिप” के रूप में विकसित हो रहा है, जहां सरकार के प्रति बढ़े विश्वास के चलते आम जनता भी स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए आगे आ रही है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सीटों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। नर्सिंग में 7000 सीटें और पैरामेडिकल में 2000 सीटों की वृद्धि की गई है। एमबीबीएस (यूजी) सीटें, जो पहले 5390 थीं, अब बढ़कर 12700 हो गई हैं। वहीं, पीजी सीटों की संख्या 1221 से बढ़कर 5056 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि प्रदेश में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। प्रदेश के 18 मेडिकल कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई संचालित हो रही है, जबकि 22 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के साथ इन संस्थानों में भी नर्सिंग शिक्षा को आगे बढ़ाया जा रहा है। उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के विकास में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। संस्थान में डायबिटीज और किडनी रोगियों के लिए एडवांस्ड डायबिटीज सेंटर स्थापित किया गया है, जहां एक ही छत के नीचे दोनों बीमारियों का … Read more

योगी सरकार 22 मार्च को 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को सौंपेगी नियुक्ति पत्र

योगी सरकार 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को 22 मार्च को सौंपेगी नियुक्ति पत्र  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लोकभवन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में 492 अभ्यर्थियों को सौंपेंगे पत्र  736 नवचयनित अभ्यर्थियों को लाइव प्रोग्राम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि सौंपेंगे नियुक्ति पत्र 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 संस्थानों में दी जाएगी नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को तैनाती    लखनऊ  योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में योगी सरकार रविवार को 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेगी। इनमें से 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे जबकि शेष को लाइव प्रोग्राम के दौरान 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज और 2 संस्थानों में जनप्रतिनिधियों द्वारा नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। बता दें कि योगी सरकार ने इस वर्ष प्रदेश के डेढ़ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। इसी के तहत कई विभागों में भर्ती प्रक्रिया चल रही है जबकि विभिन्न विभागों में भर्ती का विज्ञापन निकालने की तैयारी अंतिम चरण में है।  13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं दो संस्थानों को मिलेंगे नर्सिंग अधिकारी अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग में खाली पदों पर नियुक्ति करने के निर्देश दिए थे ताकि प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिल सके। इसी के तहत चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 चिकित्सा संस्थानों में रिक्त नर्सिंग अधिकारियों के पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। ऐसे में लोक सेवा आयोग, प्रयागराज द्वारा चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग में 1,228 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। योगी सरकार रविवार को सभी नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्त पत्र वितरित करेगी। सीएम योगी 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को सौंपेंगे नियुक्ति पत्र चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव एवं महानिदेशक डॉ. सारिका मोहन ने बताया कि 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज क्रमश: आगरा, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, झांसी, गोरखपुर, अंबेडकरनगर, कन्नौज, आजमगढ़, जालौन, सहारनपुर, बांदा एवं बदायूं के साथ 2 संस्थान जेके कैंसर संस्थान तथा हृदय रोग संस्थान कानपुर के लिए 1,228 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसमें 1,097 महिला अभ्यर्थी और 131 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। वहीं, सभी 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 संस्थानों में लाइव प्रोग्राम के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा 736 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।  अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 94 नवचयनित मुख्य सेविकाओं को वितरित किए गए थे नियुक्ति पत्र योगी सरकार ने इस वर्ष प्रदेश के युवाओं को डेढ़ लाख सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में रविवार को 1,228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 94 नवचयनित मुख्य सेविकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। वहीं, हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड की ओर से दरोगा एवं समकक्ष के 4,543 पदों की परीक्षा संपन्न कराई गई। इसके अलावा विभिन्न विभागों की ओर से भी भर्ती प्रक्रिया चल रही है।

सीएम योगी ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर अरण्य समागम का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने वीर बच्चों को किया सम्मानित  सीएम योगी ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर अरण्य समागम का किया शुभारंभ  प्रदर्शनी का अवलोकन किया सीएम ने, उत्कृष्ट करने वाले कर्मचारियों व सामाजिक संगठनों को किया सम्मानित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में वीर बच्चों को सम्मानित किया। तेंदुआ के हमले से खुद को व परिवार को बचाने वाले इन बच्चों की प्रशंसा करते हुए सीएम योगी ने इन्हें समाज के लिए प्रेरक बताया। सीएम योगी ने वानिकी व वन्य जीव क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के अंतर्गत दो लाभार्थी किसानों को चेक भी वितरित किए गए।  वीरता के पर्याय बने अच्छे लाल व तनु सिंह  सीएम ने बहराइच के 10 वर्षीय अच्छेलाल व प्रयागराज की तनु सिंह (18) को सम्मानित किया। अच्छेलाल 06 दिसम्बर 2025 को सायं 7 बजे अपने पिता के साथ साइकिल से खेत से वापस घर जा रहा था। इस दौरान रास्ते में अचानक गन्ने के खेत से तेंदुआ ने हमला कर दिया। तेंदुआ से मुकाबला करते हुए अच्छे लाल ने बहादुरी का परिचय देते हुए खुद को बचाया, जिससे हतोत्साहित होकर तेंदुआ भाग गया। इसी प्रकार 8 जनवरी 2026 को झूंसी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम छिवैया में रतन सिंह के घर में अचानक तेंदुआ घुस गया। कमरे में उपस्थित तनु सिंह ने साहस और सूझ-बूझ का परिचय दिया। तनु ने अपने साथ दो छोटे बच्चों को बाहर निकाला और तेंदुआ को कमरे में बन्द कर दिया, जिससे बिना जनहानि के तेंदुआ को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वानिकी एवं वन्य जीव क्षेत्र में विभागीय कर्मचारी भी सम्मानित मुख्यमंत्री ने वानिकी व वन्य जीव क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारियों को भी सम्मानित किया। सीएम के हाथों मुरादाबाद वन प्रभाग के उप क्षेत्रीय वन अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह, हमीरपुर वन प्रभाग के वन रक्षक सुनील कुमार गौंड, रामपुर वन प्रभाग के वन रक्षक शिवम कुमार व एटा वन प्रभाग की माली रीना शर्मा को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।  वानिकी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों को भी मिला सम्मान  वानिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। इस क्रम में लोकभारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह व हेल्पिंग हैंड्स सेवा संस्थान झांसी के सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया।  कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसानों को वितरित किए चेक  मुख्यमंत्री ने कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के अंतर्गत दो लाभार्थी किसानों को चेक वितरित किए। ये चेक कुशीनगर के ईश्वर चंद और रायबरेली की सुनीता को दिए गए।  मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन  मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले वन विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, वन राज्यमंत्री केपी मलिक आदि भी मौजूद रहे।

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए CM योगी

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  सीएम ने प्रकृति को “मां” मानकर संरक्षण का दिया संदेश, जनभागीदारी को बताया सफलता की कुंजी उत्तर प्रदेश में बढ़ा वनाच्छादन और पौधरोपण अभियान, 9 वर्षों में 242 करोड़ पौधे लगाए, जन आंदोलन से मिली बड़ी सफलता रामसर साइट और इको-टूरिज्म को बढ़ावा, रामसर साइट की संख्या वर्ष 2017 में एक से बढ़कर 2026 में 11 हुई लखनऊ आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वनों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में प्रकृति के साथ हुए खिलवाड़ के दुष्परिणामों को झेल रहा है। यह स्थिति हमें आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है कि आखिर हमारे प्रयासों में कहां कमी रह गई। भारतीय वैदिक परंपरा में प्रकृति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले ही यह संदेश दिया था कि धरती हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं – ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’। ऐसे में हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अपनी “मां” यानी धरती की रक्षा करे, उसके सम्मान और संरक्षण के लिए कार्य करे और उसके साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न होने दे। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में कहीं। इस दौरान सीएम ने कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया तथा विभिन्न लोगों को सम्मानित किया। उन्होंने वन विभाग की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस वर्ष की थीम 'फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स' रखी गयी   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा ने सदैव कहा है कि दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥’, इसका अर्थ है कि 10 कुंओं के बराबर एक बावड़ी, 10 बावड़ियों के बराबर एक तालाब, 10 तालाबों के बराबर एक पुत्र और 10 पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। प्रकृति में वृक्ष की महत्ता सर्वोपरि मानी गयी है। वन, जीवन के आधार और प्रकृति के संतुलन का भी एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत करता है। यदि वन है तो जल है, जल है तो वन, वन है तो वायु और वायु है तो जीवन है। जीवन की कल्पना इसके बगैर नहीं की जा सकती। ऐसे में वैश्विक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की थीम 'फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स' रखी गयी है, जो यह दिखाती है कि हमें पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने, वनों से आर्थिक विकास और उससे मानव कल्याण के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी। मुझे प्रसन्नता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में वनाच्छादन को बढ़ाने में सफलता मिली है। सफलता तब मिली जब हमने इसे जन आंदोलन बनाया। जब भी कोई अभियान जन आंदोलन बनता है, तो सफलता प्राप्त होती है, क्योंकि तब उसका नेतृत्व समाज करता है, सरकार और विभाग पीछे रहते हैं। वहीं, जब सरकार और विभाग आगे होते हैं और पब्लिक पीछे होती है तो परिणाम नहीं आते। हमने पिछले नौ वर्षों में जो सफलताएं प्राप्त की हैं,  उनका आधार जन आंदोलन था।  वर्ष 2017 में केवल एक रामसर साइट थी, आज 11 हैं, हमारा प्रयास 100 साइट का मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव के अवसर पर पहले वर्ष कुल 5.5 करोड़ पौधरोपण हो पाए थे। इसमें भी निजी नर्सरी का सहारा लेना पड़ा था। वहीं गत वर्ष वन महोत्सव के अवसर पर 37 करोड़ पौधे एक ही दिन में प्रदेश भर में लगाए गए। इस दौरान हमारे पास 50 करोड़ पौधे मौजूद थे। इस वर्ष भी हमने 35 करोड़ का लक्ष्य रखा है, जो बढ़कर 40-45 करोड़ तक पहुंच सकता है। पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 2 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर सुनिश्चित कर रहा है। इसके बावजूद प्रदेश का वनाच्छादन बढ़ना एक सुखद अनुभूति कराता है। पिछले नौ वर्ष में 242 करोड़ पौधरोपण करने में सफलता प्राप्त की गई है और अब वनाच्छादन बढ़कर लगभग 10% तक पहुंच चुका है। प्रदेश का वनाच्छादन उतना होना चाहिए जितनी देश की आबादी यूपी में रहती है। यानी इसे 16-17 फीसदी तक पहुंचाने के लिए काम करना होगा। वर्ष 2017 में हमारे पास केवल 1 रामसर साइट थी, आज इसकी संख्या बढ़कर 11 हुई है। हमारा प्रयास इसे 100 तक ले जाने का है। रामसर साइट टूरिज्म, वन्य जीवों, पक्षियों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साइट होती है। साथ ही वॉटर कंजर्वेशन की दृष्टि से भी इसकी भूमिका हो सकती है। हम रामसर साइट घोषित करेंगे, तो वह स्थान भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त रहेगा और वहां पर आसानी से संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा सकेंगे। इस दिशा में कई प्रयास हुए हैं, जिसमें अटल, एकलव्य, त्रिवेणी, ऑक्सी और स्मृति वन आदि शामिल हैं। गंगा, यमुना और सरयू नदियों के किनारे व्यापक पौधरोपण के कार्यक्रम चल रहे हैं। एक्सप्रेस-वे और राजमार्गों के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर उपयुक्त प्रजाति के पौधों के रोपण कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया है। इसके लिए हर जिले में एक नदी के पुनरोद्धार का कार्य किया गया।  दुधवा नेशनल पार्क में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के तहत कार्बन क्रेडिट के लिए कृषकों को धनराशि वितरित की गयी है। सरकार ने दुधवा नेशनल पार्क में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। कनेक्टिविटी भी बेहतर की गयी है। प्रदेश में वन आधारित 2,467 ग्रीन इकोनॉमी मॉडल उद्योग स्थापित किये गये हैं। हर व्यक्ति नेशनल पार्क में बाघ देखने जाता है। ऐसे में इनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां मानव-वन्य जीव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में रखा गया है। सीएम ने कहा कि टाइगर कभी अचानक हमला नहीं करता। मेरा जन्म जहां हुआ था, उस घर से मुश्किल से 50 मीटर दूर से जंगल प्रारंभ हो जाता था। हम लोग टाइगर को देखते थे। कभी छेड़ते नहीं थे, उसने कभी हमें नुकसान नहीं पहुंचाया। हमारे पशुओं को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। वहीं, अगर हम टाइगर के साथ, उसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करेंगे, … Read more

मुख्यमंत्री की पहल, बेमौसम बारिश से फसल नुकसान का तत्काल आकलन कर मुआवजा देने के दिए निर्देश

बेमौसम बारिश को लेकर मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल, फसलों के नुकसान का तत्काल आकलन कर मुआवजा सुनिश्चित करने के निर्देश जिलाधिकारियों को फील्ड में उतरने का आदेश, राहत आयुक्त को सीधा समन्वय बनाने की जिम्मेदारी किसानों को किसी भी स्थिति में न हो असुविधा, समयबद्ध ढंग से मुआवजा वितरण पर जोर लखनऊ प्रदेश में असमय वर्षा को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और फसलों को हुए नुकसान का त्वरित आकलन कर राहत पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे स्वयं फील्ड में निकलकर स्थिति का जायजा लें और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन कराएं। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल कागजी न होकर वास्तविक स्थिति के आधार पर किया जाए, ताकि किसानों को सही और समय पर सहायता मिल सके। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह फील्ड स्तर पर कार्य कर रहे अधिकारियों से सीधा संपर्क और समन्वय बनाए रखें। सीएम ने कहा कि सभी सूचनाएं समय पर एकत्रित कर शासन को उपलब्ध कराई जाएं, जिससे राहत कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि फसलों को हुई क्षति का आकलन प्राप्त होते ही मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भुगतान व्यवस्था पारदर्शी और समयबद्ध हो, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और किसी भी आपदा की स्थिति में उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशीलता के साथ कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।