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केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के मत्स्य मंत्री ने किया दो दिवसीय उप्र मीन महोत्सव एवं एक्वा एक्सपो का शुभारम्भ

13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ उत्तर प्रदेश का वार्षिक मत्स्य उत्पादन  केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के मत्स्य मंत्री ने किया दो दिवसीय उप्र मीन महोत्सव एवं एक्वा एक्सपो का शुभारम्भ  उत्तर प्रदेश में पहली बार हो रहा मीन महोत्सव  प्रदेश में मत्स्य विकास दर 115.5 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में एनएफडीबी सेंटर खोलने की दिशा पर भी किया जाएगा कार्य एक्सपो में 50 प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा लगाई गई औद्योगिक प्रदर्शनी एवं स्टॉल लखनऊ  उत्तर प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव (एक्वा एक्सपो-2026) का आयोजन किया गया है। शुक्रवार को केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल व प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने इसका शुभारम्भ किया। इसमें देश-प्रदेश के 1000 मत्स्य पालक उपस्थित रहे, जबकि 50 प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा औ‌द्योगिक प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाये गये। विभिन्न प्रकार के मत्स्य व्यंजनों के लिए फिश फूड कोर्ट एवं प्रोटीन जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। महोत्सव में बताया गया कि मत्स्य पालन में उत्तर प्रदेश भारत में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य का वार्षिक मत्स्य उत्पादन गत 06 वर्षों में दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ है। केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि किसानों की आय में वृ‌द्धि, उन्नत पशुपालन एवं उन्नत मत्स्य पालन से ही सम्भव है। उन्होंने कृषि दर पर मत्स्य पालकों को बिजली की आपूर्ति एवं उ.प्र. में एन.एफ.डी.बी के सेन्टर खोलने की दिशा में कार्य करने को भी कहा। प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने बताया कि राज्य में मत्स्य विकास दर 115.5 प्रतिशत है। उन्होंने अमृत सरोवरों को मछली पालन योग्य बनाने, तालाबों के पट्टे समय से दिलाने, मत्स्य पालन में विज्ञान एवं तकनीक के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने अनुदान के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान देकर मत्स्य पालकों के विकास एवं सशक्तीकरण पर जोर दिया।  अपर मुख्य सचिव मत्स्य मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में 6 लाख से अधिक जलक्षेत्र उपलब्ध हैं। मत्स्य पालक, विशेषज्ञ, उद्यमी एवं निवेशक एक साथ चर्चा कर प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से मत्स्य उत्पादन, उत्पादकता एवं किसानों की आय में वृद्धि कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विज्ञान विश्ववि‌द्यालय एवं गो-अनुसन्धान संस्थान (दुवासु) मथुरा में मत्स्य विज्ञान पर शोध कार्य प्रारम्भ हो गया है। महानिदेशक मत्स्य धनलक्ष्मी के. ने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण आजीविका का मुख्य साधन है। मत्स्य पालन में उत्तर प्रदेश भारत में तीसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक राज्य है। राज्य का वार्षिक मत्स्य उत्पादन गत 06 वर्षों में दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ है। विजन-2047 में उ.प्र. अंतर्देशीय मत्स्य पालन में प्रथम राज्य बन जायेगा। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री जी द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में मत्स्य विभाग के लिए बड़े उपहार की सौगात दी गयी है। मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की आय वृ‌द्धि हेतु कुल 114.20 करोड़ की राशि राज्य सहायतित नई मांग के रूप में स्वीकृत की गयी है। इसके तहत राज्य में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क की स्थापना एवं 03 मत्स्य मण्डी स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रूपये बजट का प्रावधान किया गया है। राज्य में मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए 03 करोड़ रुपये बजट प्रावधान किया गया है। जनपद गोरखपुर में वर्ल्डफिश प्रोजेक्ट सेन्टर की स्थापना हेतु 06 करोड़ रुपये बजट प्रावधान किया गया है। यह महोत्सव राज्य में मत्स्य पालन को औ‌द्योगिक स्तर पर विकसित होने में मदद करेगा और आने वाले समय में किसानों की आय की बढ़ोतरी में मददगार होगा।  डॉ. दीपा सुमन, एन.एफ.डी.बी. ‌द्वारा केन्द्र सरकार की योजनाओं- प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, प्रधानमंत्री किसान समृ‌द्धि योजना तथा फिशरीज एवं एक्वाकल्चर डेवलपमेन्ट फन्ड की जानकारी दी गयी। इस अवसर पर आलोक बिसवाल (डेलॉयट) द्वारा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डालर बनाने में मत्स्य की भूमिका के विषय में प्रस्तुतिकरण किया गया। रजनीश कुमार (एक्वाएक्स) द्वारा मत्स्य विकास की सम्भावनाओं पर प्रस्तुतिकरण किया गया तथा प्रोटीन की उपलब्धता एवं रोजगार सृजन में मत्स्य क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला गया। तकनीकी सत्र के प्रथम दिन डा. संजय श्रीवास्तव (मेधा हैचरी महराजगंज) द्वारा मत्स्य बीज उत्पादन, श्री राजीव रंजन सिंह (आर.एन.आर. एक्वा लखनऊ) द्वारा कैट फिश फार्मिंग, श्री मनोज शर्मा द्वारा झींगा पालन, श्री मनीष वर्मा द्वारा केज कल्चर एवं श्री शुभम सिंह द्वारा आर्नामेन्टल फिश फार्मिंग पर प्रेजेन्टेशन दिया गया। इस दौरान उ.प्र. मत्स्य विकास निगम के अध्यक्ष रमाकान्त निषाद, उ.प्र. मत्स्य जीवी सहकारी संघ के सभापति वीरू साहनी, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार के.वी. राजू, सलाहकार जी.एन. सिंह, विशेष सचिव मत्स्य सुनील कुमार वर्मा, निदेशक मत्स्य एन.एस. रहमानी, संयुक्त निदेशक मत्स्य अनिल कुमार, प्रबन्ध निदेशक एक्वाएक्स समीर पात्रा, अध्यक्ष एक्वाएक्स वीनू दन्तूलूरी समेत देश एवं प्रदेश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक, उ‌द्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 1000 मत्स्य पालक सम्मिलित हुए।

पिछले वर्ष के सापेक्ष आबकारी से अब तक मिला 13% अधिक राजस्व

फरवरी तक उत्तर प्रदेश में हुआ ₹.1.96 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व संग्रह पिछले वर्ष के सापेक्ष आबकारी से अब तक मिला 13% अधिक राजस्व मुख्यमंत्री ने की चालू वित्तीय वर्ष की फरवरी मासांत तक के कर-करेत्तर राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा, कहा, लक्ष्य के सापेक्ष तेज करें प्रयास जीएसटी, वैट आबकारी, परिवहन सहित हर सेक्टर में बढ़ा राजस्व संग्रह, मुख्यमंत्री ने जताया संतोष होली पर अलर्ट रहे प्रशासन, न बने-न बिके अवैध और जहरीली शराब: मुख्यमंत्री लैंड रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन व रजिस्ट्री कार्यालयों के आधुनिकीकरण को तेज करें: मुख्यमंत्री परिवहन निगम की बसों की फिटनेस सुनिश्चित करें, नए रुट चिन्हित कर निजी क्षेत्र के सहयोग से बस सेवा शुरू करें: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के फरवरी मासांत तक के कर एवं करेत्तर राजस्व की अद्यतन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। जीएसटी, वैट, आबकारी, स्टाम्प एवं पंजीकरण, परिवहन, ऊर्जा, भू-राजस्व तथा खनन विभागों द्वारा प्रस्तुत लक्ष्यों और उपलब्धियों का आकलन करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राजस्व वृद्धि प्रदेश में विकास कार्यों की गति को निर्धारित करती है। उन्होंने सभी विभागों को पारदर्शिता, दक्षता और नवाचार-आधारित कार्यप्रणाली के साथ लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कर-राजस्व का वार्षिक लक्ष्य ₹2,95,000 करोड़ निर्धारित है, जिसके सापेक्ष फरवरी 2026 तक ₹1,96,177 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की गई है। राज्य कर (जीएसटी + वैट) का लक्ष्य ₹1,75,725 करोड़ है, जिनके मुकाबले अभी तक ₹1,03,770 करोड़ का संग्रह प्राप्त हुआ है। इसमें जीएसटी के तहत ₹75,195 करोड़ तथा वैट के अंतर्गत ₹28,575 करोड़ की प्राप्ति शामिल है। राज्य कर विभाग ने बताया कि जीएसटी 2.0, एआई आधारित जोखिम विश्लेषण, बड़े पैमाने पर स्क्रूटनी, ई-इनवॉइसिंग और ई-वे बिल की प्रभावी निगरानी जैसे प्रयासों से कर अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एआई आधारित 1.59 लाख करदाताओं की जांच, 75 जनपदों में संवाद कार्यक्रम, फर्जी आईटीसी पर नियंत्रण तथा ₹3,117 करोड़ की वसूली विभाग के प्रमुख परिणाम रहे। आबकारी विभाग की ओर से बताया कि विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹63,000 करोड़ है, जिसके सापेक्ष फरवरी 2026 तक ₹48,501 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया जा चुका है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 13.2 प्रतिशत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दुकानों के नवीनीकरण की दर 93.75 प्रतिशत दर्ज की गई है। विभाग ने उपभोग आधारित रणनीति, दुकानों के नवीनीकरण, लाइसेंस शुल्क, असग्रम मांग पत्र तथा थोक एवं ब्रांड नवीनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से मार्च में लगभग ₹9,050 करोड़ की अतिरिक्त प्राप्ति का रोडमैप प्रस्तुत किया। वर्षांत तक राजस्व लगभग ₹57,550 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने वर्ष 2025-26 के अपने वार्षिक लक्ष्य ₹38,150 करोड़ के सापेक्ष फरवरी तक ₹29,487 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की। विभाग ने यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, बरेली, गोरखपुर और वाराणसी सहित विभिन्न विकास प्राधिकरणों की आगामी आवासीय एवं वाणिज्यिक परियोजनाओं से संभावित राजस्व का भी विवरण प्रस्तुत किया। खनन पट्टों के नवीनीकरण, अवशेष संपत्तियों के पंजीकरण अभियान, टोल प्लाज़ा मामलों के निस्तारण तथा सर्किल दरों के वैज्ञानिक पुनरीक्षण को राजस्व संवर्धन के प्रभावी उपायों के रूप में प्रस्तुत किया गया। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹14,000 करोड़ है, जिसके मुकाबले फरवरी तक ₹11,005 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। वाहन पंजीकरण में सुधार, कर अदायगी की बेहतर व्यवस्था, तकनीक आधारित निगरानी तथा प्रवर्तन कार्यवाहियों की मजबूती से विभाग ने राजस्व वृद्धि दर्ज की है। कर वसूली शिविर, निगरानी अभियान और डिजिटल मॉनिटरिंग को आगामी अवधि में और तीव्र करने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। बैठक में भू-राजस्व एवं ऊर्जा विभाग ने संयुक्त रूप से फरवरी तक ₹3,414 करोड़ की उपलब्धि की जानकारी दी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.6 प्रतिशत अधिक है। खनन एवं भू-तत्व विभाग ने बताया कि विभाग वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित ₹6,000 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष फरवरी तक ₹3,597 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति कर चुका है। विभाग ने बताया कि खनन क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग, ओवरलोडिंग की ज़ीरो पॉइंट रोकथाम, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, विभिन्न राज्यों के पोर्टलों से एपीआई इंटीग्रेशन तथा अंतरराज्यीय समन्वय के परिणामस्वरूप राजस्व संग्रह और अधिक सुदृढ़ हुआ है। विभाग ने मार्च में लगभग ₹600 करोड़ की संभावित प्राप्ति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि बढ़ता हुआ राजस्व प्रदेश में बुनियादी ढाँचे, सामाजिक कल्याण, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को गति प्रदान करता है। उन्होंने सभी विभागों को टीम भावना, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री जी ने आबकारी विभाग को होली पर्व के दौरान विशेष सतर्कता बरतने तथा अवैध और जहरीली शराब के किसी भी प्रकार के उत्पादन एवं बिक्री को पूर्णतः रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग से लैंड रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन की प्रगति की जानकारी लेते हुए रजिस्ट्री कार्यालयों के आधुनिकीकरण की गति बढ़ाने को कहा। परिवहन विभाग को मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम की बसों की फिटनेस, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की ठोस कार्ययोजना और नए रूट चिन्हित कर निजी बस संचालकों के सहयोग से बेहतर परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री का निर्देश, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के खुद के भवन नहीं, उनका कराएं निर्माण

हर आंगनबाड़ी केंद्र का होगा स्वयं का भवन-मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री का निर्देश, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के खुद के भवन नहीं, उनका कराएं निर्माण  प्रदेश में 1.89 लाख केंद्र, 76 हजार को नए भवनों की आवश्यकता सीएसआर से सहयोग लें, राज्य सरकार भी करेगी सहयोग: मुख्यमंत्री  प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल की उपयोगिता पर करें विचार: मुख्यमंत्री   नए आंगनबाड़ी भवनों में होगा आधुनिक व समावेशी सुविधाओं का समावेश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को उनके स्वयं के भवनों में संचालित करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 03 से 06 वर्ष आयु के बच्चे आते हैं और ये केंद्र प्री-प्राइमरी के रूप में भी उपयोगी हैं। ऐसे में बच्चों की सुविधा, पठन-पाठन की उत्कृष्ट व्यवस्था तथा भवनों का आकर्षक स्वरूप सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से लगभग 76 हजार केंद्र अभी अपने स्वयं के भवनों में नहीं चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों के निर्माण में कॉरपोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) का सहयोग लिया जा सकता है और आवश्यकतानुसार राज्य सरकार भी वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाया जा सकता है। उन्होंने एक मानक मॉडल तैयार कर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि जहाँ भी संभव हो, प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगण में ही बाल-मित्र आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जाए, ताकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित एकीकृत सेवाएँ एक ही स्थान पर सहजता से उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा के दौरान कहा कि बच्चों, गर्भवती माताओं और समुदाय को सुरक्षित, स्वच्छ तथा आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों की बुनियाद हैं। राज्य सरकार आंगनबाड़ी ढाँचे को पूरी तरह रूपांतरित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। यह मिशन ‘स्वस्थ बचपन-समर्थ उत्तर प्रदेश’ को नई गति देगा। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रस्तावित नए आंगनबाड़ी भवनों का मॉडल समावेशी एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इसमें पेयजल सुविधा, विद्युत व्यवस्था, शौचालय, खेल-आधारित गतिविधियों हेतु पर्याप्त ‘प्ले एरिया’, किचन शेड, हॉट-कुक्ड मील की व्यवस्था, लो-हाइट वॉश यूनिट, बाल-मित्र शौचालय, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु पृथक कक्ष तथा रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सहित पोषण वाटिका जैसी व्यवस्थाएँ शामिल होंगी।

योगी सरकार ने होली से पहले यूपी के छात्रों को दिया तोहफा, 38 लाख स्टूडेंट्स को मिलेगा लाभ

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में होली से पहले प्रदेश के छात्रों के लिए योगी सरकार ने बड़ी सौगात का ऐलान किया गया है. जिसमें कक्षा 9 और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि करने का फैसला लिया है. इस निर्णय से खास तौर पर पिछड़ा वर्ग के लाखों छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा. सरकार के नए आदेश के अनुसार अब पिछड़ा वर्ग के छात्रों को तीन हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी. पहले की तुलना में यह राशि बढ़ाई गई है, जिससे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक सहारा मिलेगा. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर रखना और ड्रॉपआउट दर को कम करना है. छात्र हित में लिया गया फैसला प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने इस फैसले का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देते हुए कहा कि यह निर्णय छात्रों के हित में लिया गया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि प्रदेश का कोई भी छात्र आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे. छात्रवृत्ति की बढ़ी हुई राशि सीधे पात्र विद्यार्थियों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी. 38 लाख छात्रों को मिलेगा लाभ सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 38 लाख छात्र इस योजना से लाभान्वित होंगे. इससे न सिर्फ छात्रों को आर्थिक सहायता मिलेगी, बल्कि उनके अभिभावकों पर भी आर्थिक बोझ कम होगा. होली से पहले आई इस घोषणा को सरकार की ओर से छात्रों के लिए एक बड़े तोहफे के रूप में देखा जा रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में यह फैसला प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है, जिसमें युवाओं के भविष्य को मजबूत करना प्रमुख लक्ष्य है. पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए यह कदम बड़ा बताया जा रहा है.सरकार जनहित के फैसले लगातार ले रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को मिल सके.

25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार, जितनी बड़ी आबादी है, उतनी ही विशाल संभावनाएं: मुख्यमंत्री

टोक्यो में आयोजित निवेश रोड शो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान के उद्यमियों को दिया यूपी में निवेश का न्योता नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास विकसित की जा रही जापान इंडस्ट्रियल सिटी से जापान की कंपनियों को मिलेगा विशेष लाभ: मुख्यमंत्री 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार, जितनी बड़ी आबादी है, उतनी ही विशाल संभावनाएं: मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश में निवेश सुरक्षित क्योंकि यहां स्केल, स्किल, स्टेबिलिटी और स्पीड चारों उपलब्ध: सीएम योगी सीएम ने डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी में वैश्विक साझेदारी का रखा प्रस्ताव, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में भी निवेश का आमंत्रण यूपी के माध्यम से भविष्य में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा भारत-जापान औद्योगिक सहयोग: सीएम योगी टोक्यो/लखनऊ  उत्तर प्रदेश में दुनिया के बड़े निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर के बाद जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचे। यहां आयोजित वृहद यूपी निवेश रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री ने वहां के उद्योगपतियों और निवेशकों को उत्तर प्रदेश में निवेश करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज सुरक्षित माहौल, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़ी बाजार क्षमता और युवा कार्यबल के कारण निवेश के लिए भारत का सबसे बेहतर राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने जापानी उद्योगपतियों से उत्तर प्रदेश आने, निवेश करने और प्रदेश के आध्यात्मिक स्थलों का अनुभव लेने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यूपी में निवेश के माध्यम से भारत-जापान औद्योगिक सहयोग भविष्य में और मजबूत होगा। भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंध जापान को 'लैंड ऑफ द सनराइज' बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि इस पावन धरा को नमन करता हूं। उत्तर प्रदेश सूर्यवंश के राजा भगवान श्रीराम की पावन जन्मस्थली है। यही नहीं, भगवान बुद्ध की पावन कर्मभूमि भी उत्तर प्रदेश ही है। भगवान बुद्ध से जुड़े विश्व के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थल कपिलवस्तु, सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कौशांबी, सहित अनेक पवित्र स्थल उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में रामायण सर्किट एवं बौद्ध सर्किट को प्रभावी ढंग से विकसित किया जा रहा है, जिससे स्पिरिचुअल टूरिज्म को नई गति मिली है। जब भगवान राम और भगवान बुद्ध की बात होती है, तो यह सूर्यवंश की उस महान परंपरा से जुड़ती है, जिसकी प्रथम किरण का उदय जापान की धरती पर होता है। इसी सांस्कृतिक आत्मीयता के साथ मैं आप सभी का स्वागत करता हूं।  निवेशकों के लिए यूपी बड़ा बाजार मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। जितनी बड़ी आबादी है, उतनी ही बड़ी चुनौतियां हैं और उतनी ही विशाल संभावनाएं भी हैं। पिछले नौ वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय लगभग तीन गुना बढ़ी है। जो राज्य कभी बीमारू कहा जाता था, वह आज भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है। उन्होंने बताया कि देश की केवल 11 प्रतिशत कृषि भूमि होने के बावजूद उत्तर प्रदेश देश का करीब 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन करता है। इससे फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और एग्री लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में बड़े निवेश के अवसर हैं। जल संसाधन और युवा शक्ति बनी ताकत मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास भरपूर मीठा जल संसाधन है, जिसका उपयोग कृषि के साथ ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में किया जा सकता है। राज्य की 56 प्रतिशत आबादी युवा है, जिससे उद्योगों को पर्याप्त और कुशल मानव संसाधन मिलता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में प्रदेश में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हुआ है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और ईस्टर्न-वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन उत्तर प्रदेश में है। एक्सप्रेसवे के किनारे 27 औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि मैं जापान के बिजनेस लीडर्स को आमंत्रित करता हूं कि वे यूपी में इन परियोजनाओं में भागीदारी करें।  500 एकड़ में विकसित होगी जापान इंडस्ट्रियल सिटी मुख्यमंत्री ने जापान के उद्यमियों को विशेष रूप से यीडा क्षेत्र में प्रस्तावित जापान इंडस्ट्रियल सिटी के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, जिनमें 4 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं तथा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जल्द शुरू होने वाला है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ही जापानी निवेशकों के लिए जापान इंडस्ट्रियल सिटी विकसित की जा रही है। इसके लिए 500 एकड़ भूमि चिन्हित कर ली गई है। इसका उद्देश्य है कि जापानी उद्योग एक ही स्थान पर क्लस्टर के रूप में निवेश कर सकें। यहां उन्हें बेहतर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।  मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से सेमीकंडक्टर तक अवसर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश इसलिए सुरक्षित है क्योंकि यहां स्केल, स्किल, स्टेबिलिटी और स्पीड चारों उपलब्ध हैं। भारत के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में हो रहा है। डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश की अच्छी संभावनाएं हैं। हाल ही में नोएडा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर यूनिट की आधारशिला रखी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के पास 75,000 एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है। झांसी के पास बुंदेलखंड क्षेत्र में 56,000 एकड़ में नया औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। यूपी के पास एमएसएमई की ताकत मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रदेश को 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। लगभग 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं और 7 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रक्रिया में हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। नई इकाइयों को 1000 दिनों तक कई तरह की एनओसी से छूट दी जाती है, ताकि उद्योग आसानी से शुरू हो सकें। आसान निवेश व्यवस्था और सुरक्षित माहौल मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 34 से अधिक सेक्टोरल नीतियां लागू हैं। निवेश मित्र और निवेश सारथी जैसी सिंगल विंडो व्यवस्था से निवेश प्रक्रिया सरल हुई है। बेहतर कानून-व्यवस्था और पारदर्शी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटक आए, जिससे होटल, रेस्टोरेंट, हेरिटेज और स्पिरिचुअल टूरिज्म में … Read more

सीएम योगी के जापान दौरे में मिले मेगा निवेश प्रस्ताव, जापान की कंपनियों ने यूपी में निवेश को दिखाई उत्सुकता

जापान दौरे के पहले दिन लगभग 11 हजार करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर सीएम योगी के जापान दौरे में मिले मेगा निवेश प्रस्ताव, जापान की कंपनियों ने यूपी में निवेश को दिखाई उत्सुकता कृषि और औद्योगिक मशीनरी क्षेत्र में वैश्विक कंपनियों की भागीदारी, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट और औद्योगिक प्रिंटिंग सेक्टर में विस्तार जापान/लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे के पहले दिन औद्योगिक निवेश को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। विभिन्न जापानी कंपनियों के साथ लगभग 11 हजार करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। जिन कंपनियों के साथ करार हुआ है उनमें कुबोता कारपोरेशन, मिंडा कारपोरेशन, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री, नागासे एंड कंपनी लिमिटेड, सीको एडवांस, ओएंडओ ग्रुप, फूजी जैपनीज जेवी और फूजीसिल्वरटेक कंक्रीट प्रा. लि. शामिल हैं। ये समझौते कृषि यंत्र निर्माण,  औद्योगिक मशीनरी निर्माण, जल और पर्यावरण अवसंरचना समाधान, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक प्रिंटिंग एवं ग्राफिक्स, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़े हैं। इससे विनिर्माण क्षमता के विस्तार और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। कुबोता कारपोरेशन, वर्ष 1890 में स्थापित जापान की एक अग्रणी बहुराष्ट्रीय कंपनी है और जिसका मुख्यालय ओसाका में स्थित है। यह कृषि और औद्योगिक मशीनरी निर्माण में वैश्विक पहचान रखती है। कंपनी ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, इंजन और निर्माण उपकरण के साथ साथ जल और पर्यावरण अवसंरचना समाधान जैसे पाइप, पंप और ट्रीटमेंट सिस्टम के क्षेत्र में भी कार्यरत है। एस्कॉर्ट्स कुबोता लिमिटेड के साथ सहयोग के माध्यम से कंपनी भारत में अपने विनिर्माण विस्तार और फार्म मैकेनाइजेशन क्षेत्र में उपस्थिति को मजबूत कर रही है। मिंडा कारपोरेशन, जो स्पार्क मिंडा समूह का हिस्सा है, ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माण में अग्रणी भारतीय कंपनी है। यह मैक्ट्रॉनिक्स, वायरिंग हार्नेस, प्लास्टिक इंटीरियर, सेंसर और ईवी समाधान उपलब्ध कराती है। जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री जिसे जेएई के नाम से जाना जाता है, ऑटोमोटिव और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एडवांस कनेक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस समाधान में विशेषज्ञता रखती है। नागासे एंड कंपनी लिमिटेड, एक विविधीकृत जापानी ट्रेडिंग और टेक्नोलॉजी कंपनी है जो केमिकल्स, एडवांस्ड मैटेरियल्स, मोबिलिटी सॉल्यूशंस और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में सक्रिय है। इन कंपनियों के बीच सहयोग से ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। सीको एडवांस जापान मूल की कंपनी है जो उच्च प्रदर्शन स्क्रीन प्रिंटिंग इंक और कोटिंग सॉल्यूशंस के लिए जानी जाती है। इसके उत्पाद ऑटोमोटिव डीकल्स, इंडस्ट्रियल ग्राफिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स पैनल, ग्लास प्रिंटिंग और कंज्यूमर अप्लायंसेज में उपयोग होते हैं। कंपनी भारत में अपनी विनिर्माण इकाई के माध्यम से विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को आपूर्ति कर रही है। इसके अतिरिक्त ओ एंड ओ  ने हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश को लेकर समझौता किया। पहले दिन हुए इन समझौतों को भारत और जापान के बीच औद्योगिक सहयोग को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।

यीडा क्षेत्र में बन रहे मेडिकल डिवाइस पार्क को सीएम योगी ने बताया जापानी कंपनियों के लिए सुनहरा अवसर

सीएम योगी ने कोनोइके ट्रांसपोर्ट के साथ की अहम बैठक, यूपी में निवेश के लिए किया आमंत्रित लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग में निवेश की संभावनाओं पर हुई गंभीर चर्चा यीडा क्षेत्र में बन रहे मेडिकल डिवाइस पार्क को सीएम योगी ने बताया जापानी कंपनियों के लिए सुनहरा अवसर जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हुआ जोरदार स्वागत टोक्यो/लखनऊ  उत्तर प्रदेश को ग्लोबल सप्लाई चेन और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान दौरे के पहले ही दिन बड़े निवेश संवाद की शुरुआत कर दी। मुख्यमंत्री ने शीगेकी तानाबे (Shigeki Tanabe), सीनियर मैनेजिंग एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं एग्जीक्यूटिव जनरल मैनेजर (सेल्स मैनेजमेंट डिवीजन/डोमेस्टिक बिजनेस प्रभारी), कोनोइके ट्रांसपोर्ट को. लिमिटेड (Konoike Transport Co. Ltd.) के साथ विस्तृत बैठक की। इस दौरान उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग में निवेश की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा हुई। निवेशकों के लिए यूपी में असाधारण अवसर मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश का भौगोलिक व औद्योगिक परिदृश्य अब निवेशकों के लिए असाधारण अवसर प्रस्तुत कर रहा है। राज्य सीधे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) नेटवर्क से जुड़ा है, जिससे माल ढुलाई की गति तेज और लागत प्रतिस्पर्धी बनती है। यह सुविधा निर्यातोन्मुख उद्योगों और ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़े निवेशकों के लिए बड़ा अवसर प्रदान करती है। यही नहीं, मुख्यमंत्री ने यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) क्षेत्र में विकसित हो रहे मेडिकल डिवाइस पार्क का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना जापानी कंपनियों के लिए अत्यंत अनुकूल इकोसिस्टम उपलब्ध कराती है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, नीतिगत समर्थन और सिंगल-विंडो क्लियरेंस की व्यवस्था के कारण यह क्षेत्र हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग के लिए आदर्श गंतव्य बन रहा है। उन्होंने भारत-जापान औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश निवेशकों को न केवल भूमि और बुनियादी ढांचा देता है, बल्कि स्थिर नीति, कुशल मानव संसाधन और तेजी से निर्णय लेने वाली सरकार भी उपलब्ध कराता है। टोक्यो में सीएम योगी का भव्य स्वागत जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचने पर मुख्यमंत्री का गरिमापूर्ण स्वागत किया गया। उनका स्वागत यामानाशी प्रांत के वाइस गवर्नर जुनिचि इशिदरा (Junichi Ishidera) ने किया। इस अवसर पर जापान में भारत की राजदूत नगमा एम मलिक तथा भारतीय समुदाय के सदस्य भी उपस्थित रहे। सीएम योगी की यह यात्रा उत्तर प्रदेश की बढ़ती वैश्विक भागीदारी और भारत-जापान के बीच गहराते रणनीतिक व आर्थिक संबंधों का प्रतीक मानी जा रही है। ‘उगते सूरज की धरती’ को ‘आदित्य’ का नमस्कार टोक्यो पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अनूठे अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने आधिकारिक हैंडल से लिखा, “अभी जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचा हूं। उगते सूरज की नवोन्मेषी भूमि को प्रभु श्री राम की पावन धरा के ‘आदित्य’ का नमस्कार…।”

उपमुख्यमंत्री और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री की जर्मनी में वैश्विक रक्षा कंपनियों से वार्ता, यूपी को मिला निवेश का भरोसा

उपमुख्यमंत्री व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने वैश्विक रक्षा कंपनियों से किया संवाद  जर्मनी में यूपी की दमदार दस्तक में रक्षा संबंधी निवेश को मिला समर्थन जर्मनी/लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी मार्गदर्शन व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में जर्मनी पहुंचा प्रतिनिधिमंडल वहां के उद्यमियों से संवाद स्थापित कर रहा है। इसी क्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व प्रदेश सरकार के इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा के नेतृत्व में पहुंचे प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को जर्मन-इजराइल की अग्रणी कंपनी क्वाटंम सिस्टम जीएमबीएच के साथ बैठक की। यह कंपनी मानवरहित और ड्रोन आधारित प्रौद्योगिकी की विशेषज्ञ है। यह कंपनी भारत में पिछले एक दशक से अधिक समय से उन्नत हवाई निगरानी तथा 160 किमी तक की परिचालन क्षमता वाले मानवरहित प्लेटफॉर्म में विशेषज्ञ है। इस कंपनी की टेक्नोलॉजी जर्मनी और स्पेन की सशस्त्र सेनाओं की सेवा में भी है।  उपमुख्यमंत्री व आईटी मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भारत की तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था का मुख्य केंद्र है। उप मुख्यमंत्री मौर्य व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री शर्मा ने क्वांटम टेक्नोलॉजीज को राज्य में ड्रोन मैन्युफेक्चरिंग, अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया, जिससे यहां की प्रगतिशील नीतियां, मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र और कुशल प्रतिभा-समूह का लाभ उत्तर प्रदेश को भी मिले। दोनों पक्षों ने मैन्युफेक्चरिंग, अनुसंधान-विकास, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में दीर्घकालिक सहयोग पर चर्चा की जिससे भारत के एयरोस्पेस और मानवरहित प्रणालियों के पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाया जा सके।

नवीकरणीय ऊर्जा, आईसीटी, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे प्रमुख सेक्टर्स में निवेश के लिए किया आमंत्रित

सीएम योगी ने मित्सुई प्रबंधन के साथ की व्यापक निवेश पर चर्चा, दिया यूपी में बड़े निवेश का न्यौता नवीकरणीय ऊर्जा, आईसीटी, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे प्रमुख सेक्टर्स में निवेश के लिए किया आमंत्रित मुख्यमंत्री ने भारत-जापान आर्थिक सहयोग को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए जताई अपनी प्रतिबद्धता टोक्यो/लखनऊ उत्तर प्रदेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान दौरे के पहले दिन वैश्विक निवेश संवाद की मजबूत शुरुआत की। जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने जापान की अग्रणी वैश्विक ट्रेडिंग और निवेश कंपनी मित्सुई एंड कंपनी लि.0(Mitsui & Co.) के प्रबंधन से मुलाकात कर उत्तर प्रदेश में परिवर्तनकारी निवेश अवसरों को तलाशने का औपचारिक आमंत्रण दिया। चार उभरते सेक्टर पर रणनीतिक फोकस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा के तहत सोलर, बायो-एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं शामिल हैं। वहीं दूसरी आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) के तहत आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल सर्विसेज और स्टार्टअप इकोसिस्टम में निवेश पर चर्चा हुई। तीसरा सेक्टर सेमीकंडक्टर का रहा, जिसमें चिप निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन का विस्तार प्रमुख रहे। वहीं चौथा सेक्टर डेटा सेंटर रहा, जिसमें हाइपर-स्केल डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल कनेक्टिविटी हब जैसे क्षेत्रों में निवेश को लेकर गहन विमर्श हुआ।  भारत-जापान औद्योगिक संबंधों को नई गति मुख्यमंत्री ने मित्सुई प्रबंधन को दीर्घकालिक साझेदारी के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश भारत-जापान आर्थिक सहयोग को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के साथ-साथ उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स के कारण निवेशकों के लिए अत्यंत अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। सीएम योगी ने राज्य सरकार की उद्योग समर्थक नीतियों, सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम और समयबद्ध स्वीकृति प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और परिणामोन्मुख वातावरण उपलब्ध कराता है।

सैट्स के सीईओ ने योगी सरकार की कार्यशैली की सराहना, विदेशी निवेश के लिए सीएम योगी के प्रतिबद्धता की जताई प्रशंसा

सैट्स के सीईओ ने योगी सरकार की कार्यप्रणाली को खुलकर सराहा कहा, विदेशी निवेश के लिए प्रतिबद्ध हैं सीएम योगी आदित्यनाथ सिंगापुर/लखनऊ  इन्वेस्ट यूपी मेगा रोड शो में सिंगापुर की एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी सैट्स के सीईओ (एशिया-पैसिफिक) बॉब ची ने कहा कि सीएम योगी का सैट्स के कार्गो हब का दौरा करना उनकी विदेशी निवेश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता जाहिर करता है। हम उत्तर प्रदेश की विकास संभावनाओं को लेकर अत्यंत आशावादी हैं। यूपी की प्रगति का आधार उसका तेजी से विस्तार करता कृषि, औद्योगिक और सेवा क्षेत्र है। बीते एक दशक में उत्तर प्रदेश का एयर कार्गो वॉल्यूम लगभग पांच गुना बढ़ा है, जो लगातार दो अंकों की सालाना वृद्धि दर को दर्शाता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि उत्तर प्रदेश भारत की आर्थिक शक्ति का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है। बॉब ने कहा कि हमने देखा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली अत्यंत प्रगतिशील है। यह तत्परता से कार्रवाई करती है, जो उद्यमिता के लिए अनिवार्य शर्त है। यह समाधान-उन्मुख है और प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण अपनाती है। राज्य सरकार विशेष रूप से नई तकनीकों, डिजिटलीकरण से जुड़े निवेशों तथा स्थानीय आबादी के लिए उच्च-कौशल वाले रोजगार अवसरों के सृजन को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। हमने यूपी सरकार की सशक्त एवं उद्योगों के अनुकूल नीतियों का प्रत्यक्ष अनुभव किया है। सरकार द्वारा हमें जो सहयोग और सकारात्मक समर्थन मिला है, उसके लिए हम आभारी हैं। यूपी में वैसा ही माहौल है, जिसे वैश्विक कंपनियां महत्व देती हैं और यही कार्यप्रणाली उत्तर प्रदेश में निवेश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करती है।