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वृद्धावस्था पेंशन के लिए वृद्ध जनों को योगी सरकार ने दी सहूलियत, पेंशन के लिए अलग से नहीं करना होगा आवेदन

वृद्धजनों का संबल और  बुढ़ापे की लाठी बन रही है योगी सरकार वृद्धावस्था पेंशन के लिए वृद्ध जनों को योगी सरकार ने दी सहूलियत, पेंशन के लिए अलग से नहीं करना होगा आवेदन इंद्राणी और लाल मणि के चेहरों पर आई मुस्कान, पेंशन के लिए नहीं लगाने होंगे दफ्तर के चक्कर प्रयागराज जिले में 1.63 लाख से अधिक बुजुर्गों को जारी हुई पेंशन, मंडल में 5 लाख से अधिक बुजुर्गों को मिलेगी राहत प्रयागराज उत्तर प्रदेश के बेसहारा, बुजुर्गों और दिव्यांगों के कल्याण के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ वक्त पर उन तक  पहुंचाना योगी सरकार की प्राथमिकता है । बुजुर्गों के लिए चलाई जा रही वृद्धावस्था पेंशन योजना के आवेदन से जुड़ी प्रक्रिया के सरलीकरण के लिए सरकार ने एक और कदम उठाया है । अब पात्र लाभार्थी को बिना आवेदन किए पेंशन मिलेगी।  इंद्राणी और लाल मणि के चेहरे पर आई मुस्कान, पेंशन के लिए दफ्तर के नहीं काटने होंगे चक्कर योगी सरकार की कैबिनेट के एक फैसले से वृद्धावस्था पेंशन पा रहे बुजुर्गों के चेहरे खिल गए हैं। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य में वृद्धावस्था पेंशन को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। अब पात्र वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। फतेहपुर के खानपुर में रहने वाली 71 साल की इंद्राणी को हर महीने पेंशन की औचारिकताएं पूरी करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। गठिया की बीमारी से पीड़ित इंद्राणी को इसके लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन सरकार के एक फैसले ने उनकी यह झंझट दूर कर दी है। इंद्राणी की तरह ही प्रयागराज के कोरांव की रहने वाले 76 साल के लाल मणि नि:संतान होने की वजह से अपनी वृद्धावस्था पेंशन लेने के लिए सरकारी दफ्तरों में नहीं पहुंच पाते थे। लाल मणि को योगी सरकार के इस नए आदेश ने बड़ी राहत दी है।   प्रयागराज में 1.63 लाख से अधिक बुजुर्गों तक पहुंचा योजना का लाभ  बेसहारा बुजुर्गों के लिए सरकार की वृद्घावस्था पेंशन योजना बुढ़ापे की लाठी साबित हो रही है। प्रयागराज में इसका सतत विस्तार हो रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी राम शंकर पटेल बताते हैं कि सरकार की मंशा के अनुरूप जिले में मौजूदा वित्तीय वर्ष की दूसरी किश्त में 1,63,968 बुजुर्गों को इसका लाभ मिला है। उनका कहना है कि पिछली वित्तीय वर्ष के बाद नए लाभार्थियों को शामिल करने और मृतक लाभार्थियों की स्क्रीनिंग के बाद 4100 लाभार्थियों को सूची से हटाया गया है। योजना का दायरा बढ़ता जा रहा है और हर साल इसका लाभ पाने वाले पात्र सीनियर सिटीजन की संख्या भी बढ़ती जा रही है।  अप्रैल , मई और जून महीने की किश्त एक साथ बुजुर्गों को दी गई थी जिसमें लाभार्थियों की संख्या 1.63 लाख आई थी।  प्रयागराज मंडल में भी इस योजना का तेजी से विस्तार हुआ है । उत्तर प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष के प्रथम क्वार्टर में 67,50,000 लोगों को यह पेंशन जारी की गई । इधर प्रयागराज मंडल में इस वित्तीय वर्ष के प्रथम क्वार्टर में वृद्धावस्था पेंशन पाने वाले बुजुर्गों की संख्या 5,06,375 पहुंच चुकी हैं।

प्रदेश में अब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरी

वृद्धावस्था पेंशन के लिए लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं, विभाग खुद करेगा सम्पर्क फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ प्रणाली से पात्र लाभार्थियों का होगा स्वतः चिन्हीकरण 10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी राहत बागपत में पीपीपी मोड पर बनेगा मेडिकल कॉलेज, निःशुल्क मिलेगी 5.07 हेक्टेयर भूमि अब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरी  प्रदेश दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान कानून में बड़ा संशोधन, अब पूरे प्रदेश में लागू होगा अधिनियम लखनऊ उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य में वृद्धावस्था पेंशन को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। अब पात्र वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ प्रणाली से पात्र लाभार्थियों का स्वतः चिन्हीकरण होगा और उनकी सहमति मिलने पर पेंशन सीधे स्वीकृत की जाएगी। वर्तमान में 67.50 लाख वरिष्ठ नागरिक इस योजना का लाभ ले रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो प्रक्रिया पूरी न कर पाने के कारण पेंशन से बाहर रह जाते हैं। नया फैसला इसी समस्या को हल करने पर केंद्रित है। नई व्यवस्था में फैमिली आईडी के आधार पर उन नागरिकों की सूची स्वतः तैयार होगी, जिनकी आयु अगले 90 दिनों में 60 वर्ष होने जा रही है। यह सूची एपीआई के माध्यम से समाज कल्याण विभाग के पेंशन पोर्टल पर भेजी जाएगी। विभाग सबसे पहले एसएमएस, व्हाट्सऐप और फोन कॉल जैसे डिजिटल माध्यमों से पात्र नागरिकों से सहमति लेगा। जिनकी सहमति डिजिटल रूप से नहीं मिलेगी, उनसे ग्राम पंचायत सहायक, कॉमन सर्विस सेंटर या विभागीय कर्मचारी भौतिक रूप से संपर्क करेंगे। दोनों स्तरों पर सहमति न मिलने पर ऐसे नाम प्रक्रिया से हटा दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सहमति मिलने के बाद योजना अधिकारी 15 दिनों के भीतर डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से पेंशन स्वीकृत करेंगे और स्वीकृति पत्र लाभार्थी को डाक से भेजा जाएगा। भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में किया जाएगा और हर किस्त की जानकारी एसएमएस द्वारा उपलब्ध होगी। सरकार एक मोबाइल ऐप भी उपलब्ध कराएगी, जिसमें लाभार्थी पासबुक की तरह अपने सभी भुगतान देख सकेंगे। 10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी राहत  प्रदेश सरकार ने राज्य में किरायेदारी को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने 10 वर्ष तक की अवधि के किरायानामा विलेखों पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मंजूर कर दी है। इसका उद्देश्य यह है कि भवन स्वामी और किरायेदार दोनों किरायानामा लिखित रूप में तैयार करें और रजिस्ट्री कराएं, जिससे विवाद कम हों और किरायेदारी विनियमन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वर्तमान नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक अवधि की किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री अनिवार्य है, लेकिन आमतौर पर अधिकांश किरायानामे मौखिक होते हैं या यदि लिखित होते भी हैं तो उनकी रजिस्ट्री नहीं कराई जाती। ऐसे मामलों का पता आमतौर पर जीएसटी विभाग और बिजली विभाग जैसी एजेंसियों की पत्रावलियों की जांच में चलता है और बाद में कमी स्टाम्प शुल्क की वसूली की कार्रवाई करनी पड़ती है। यह भी अनिवार्य है कि किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री हो या न हो, उस पर सही स्टाम्प शुल्क हर हाल में जमा होना चाहिए। सरकार का मानना है कि यदि शुल्क अधिक होता है तो लोग विलेख लिखने और रजिस्ट्री कराने से बचते हैं। इसी वजह से मानक किरायेदारी विलेख को बढ़ावा देने और 10 वर्ष तक की अवधि के रेंट एग्रीमेंट को औपचारिक बनाने के लिए शुल्क में व्यापक छूट देने की जरूरत महसूस की गई। इस छूट प्रणाली के तहत किरायेदारी विलेख पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क और अधिकतम रजिस्ट्रेशन फीस अब निश्चित राशि से अधिक नहीं ली जाएगी। साथ ही औसत वार्षिक किराया तय करते समय अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये रखी गई है। टोल संबंधी पट्टे और खनन पट्टों को छूट से बाहर रखा गया है ताकि राजस्व हानि न हो। स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि  नई व्यवस्था के अनुसार अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क की सीमा तय कर दी गई है। यह सीमा किरायेदारी की अवधि और औसत वार्षिक किराए के आधार पर लागू होगी। इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा क्योंकि अब किरायेदारी विलेख पर भारी स्टाम्प शुल्क भरने की बाध्यता नहीं रहेगी और लोग अधिक सहजता से रजिस्ट्री करा सकेंगे। 10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी राहत •    औसत वार्षिक किराया ₹ 2,00,000 रुपये तक:- 01 वर्ष तक 500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 1500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 2000 रुपये •    औसत वार्षिक किराया ₹ 2,00,001 से ₹ 6,00,000 रुपये 01 वर्ष तक 1500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 4500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 7500 रुपये •    औसत वार्षिक किराया ₹ 6,00,001 से 10,00,000 रुपये 01 वर्ष तक 2500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 6000 रुपये, 5 से 10 वर्ष 10000 रुपये   अब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरी   प्रदेश कैबिनेट ने लेखपाल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए चैनमैन के लिए लेखपाल पद पर पदोन्नति का मार्ग खोल दिया है। वित्त मंत्री सुरेशा खन्ना ने बताया कि पंचम संशोधन नियमावली 2025 के तहत अब लेखपाल के कुल पदों में से दो प्रतिशत पद योग्य चैनमैन को पदोन्नति के आधार पर दिए जा सकेंगे। यह पहली बार है जब चैनमैन को सीधी भर्ती व्यवस्था से बाहर निकलकर लेखपाल पद तक प्रमोशन का अवसर मिलेगा। वर्तमान में लेखपाल के सभी पदों पर भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाती है। प्रदेश में कुल 30837 स्वीकृत पदों में से 21897 पर तैनाती है, जबकि 8940 पद रिक्त हैं। नई व्यवस्था के तहत वे चैनमैन पदोन्नति के लिए पात्र होंगे जो मौलिक रूप से इसी पद पर नियुक्त हों, भर्ती वर्ष के पहले दिन तक छह वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों और इंटरमीडिएट या समकक्ष परीक्षा पास कर चुके हों। इन पात्र चैनमैन का चयन चयन समिति की सिफारिश पर किया जाएगा। सरकार का कहना है कि अनुभवी चैनमैन को … Read more

योगी आदित्यनाथ ने महिला क्रिकेट टीम को विश्वकप विजय पर सराहा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वनडे विश्वकप जीत पर बधाई लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को वनडे विश्वकप में मिली ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी गई। बैठक में टीम के जज़्बे, अनुशासन और शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा गया कि खिलाड़ियों ने देश का गौरव बढ़ाया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यह जीत न केवल भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण है बल्कि देश की युवा बेटियों के लिए प्रेरणा का भी स्रोत है। दिल्ली में हाल की आतंकी घटना की निंदा और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रदेश कैबिनेट ने दिल्ली में हाल ही में हुई आतंकी घटना की कड़ी निंदा की है। बैठक में कहा गया कि यह घटना देश की शांति और सुरक्षा पर हमला है। मुख्यमंत्री और कैबिनेट ने हमले में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी जानकारी अब व्हाट्सएप पर

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की पहल – व्हाट्सएप चैटबॉट सेवा से अब परिवहन सेवाएं होंगी और आसान उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी जानकारी अब व्हाट्सएप पर उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की डिजिटल पहल: घर बैठे पाएँ सभी जरूरी सेवाएँ जनसुविधा के लिए तकनीक का नया उपयोग – परिवहन विभाग की स्मार्ट सेवा लखनऊ   मुख्यमंत्री के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश के आम नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, परिवहन विभाग ने एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की है। विभाग ने व्हाट्सएप आधारित चैटबॉट सेवा (मोबाइल नंबर: 8005441222) के माध्यम से अब लोग घर बैठे ही परिवहन संबंधी अनेक सेवाओं एवं सूचनाओं का लाभ सहजता और पारदर्शिता के साथ प्राप्त कर सकते हैं। इसका उद्देश्य नागरिकों को सरल, सुलभ एवं पारदर्शी सेवाएं प्रदान करना है। इस चैटबॉट के माध्यम से उपयोगकर्ता अपने मोबाइल पर ही ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, कर भुगतान, फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट, और अन्य सेवाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अब नागरिकों को किसी भी परिवहन कार्यालय में अनावश्यक रूप से जाने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल मोबाइल नंबर 8005441222 को अपने व्हाट्सएप में सेव करें और “Hi” या “नमस्ते” लिखकर संदेश भेजें। चैटबॉट स्वतः ही आगे की प्रक्रिया में सहायता करेगा और संबंधित जानकारी कुछ ही क्षणों में उपलब्ध करा देगा। परिवहन विभाग ने बताया कि यह सेवा 24×7 उपलब्ध रहेगी और उपयोगकर्ताओं को डिजिटल माध्यम से तेज, सुरक्षित एवं विश्वसनीय जानकारी प्रदान करेगी। यह कदम ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के अनुरूप नागरिक सेवाओं को तकनीक के माध्यम से अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे इस नई व्हाट्सएप चैटबॉट सेवा का अधिक से अधिक उपयोग करें और अपने अनुभवों से विभाग को अवगत कराएं ताकि इस सेवा को और बेहतर बनाया जा सके।

स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के माध्यम से आम जनता को लाभान्वित करने वाले राज्यों में अग्रणी है उत्तर प्रदेश

विकसित उत्तर प्रदेश, समर्थ उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में डाटा आधारित गवर्नेंस व डिजिटल इनोवेशन रख रहे प्रशासनिक पारदर्शिता की नींव स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के माध्यम से आम जनता को लाभान्वित करने वाले राज्यों में अग्रणी है उत्तर प्रदेश  प्रदेश में एसएमएस, व्हाट्सऐस व लाइव डैशबोर्ड जैसी पहले के माध्यम से शिकायतों का किया जा रहा है त्वरित निस्तारण योगी सरकार में सरकारी योजनाओं को लागू करने में भविष्य आधारित तकनीकों का प्रयोग कर पारदर्शिता के साथ प्रभावी निगरानी को किया जा रहा सुनिश्चित  लखनऊ  उत्तर प्रदेश को विकसित, समर्थ और सक्षम उत्तर प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार ने डाटा आधारित गवर्नेंस व डिजिटल इनोवेशन के माध्यम से प्रशासनिक पारदर्शिता की नींव रखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां समावेशी विकास को भविष्य आधारित तकनीकों के इस्तेमाल से धरातल पर उतारा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि चाहें बात स्मार्ट पुलिसिंग की हो, मेडिकल इनोवेशन की हो या फिर एग्रिकल्चरल व एजुकेशनल रिफॉर्म्स की, उत्तर प्रदेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के साथ ही आधुनिक तकनीक के समावेश से समाज के अंतिम पायदान पर स्थित लोगों तक सरकार की लाभदायक योजनाओं के प्रसार को सुनिश्चित कर रहा है।   प्रदेश में डाटा-आधारित प्रशासन ने सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जवाबदेह बनाया है। वहीं, तकनीक के व्यापक उपयोग से सेवाओं की वास्तविक समय में निगरानी संभव हुई है, जिससे आम नागरिकों को योजनाओं का लाभ सीधे और बिना देरी मिल रहा है। स्मार्ट गवर्नेंस ने यूपी को अनुकरणीय मॉडल के रूप में किया स्थापित राज्य में स्मार्ट गवर्नेंस के तहत डिजिटल प्रक्रियाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। विभिन्न सरकारी विभागों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग, डिजिटल फाइल ट्रैकिंग और डाटा-आधारित फैसलों ने प्रशासनिक दक्षता को नई ऊँचाई दी है। इन पहलों ने ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं की सुगमता सुनिश्चित की है, जिससे यूपी देशभर में डिजिटल गवर्नेंस का एक उल्लेखनीय मॉडल बनकर उभरा है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और लाइव डैशबोर्ड से त्वरित समाधान सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, स्कूलों के प्रदर्शन, शिकायत निस्तारण और सेवा उपलब्धता की निगरानी में एसएमएस, व्हाट्सऐप और लाइव डैशबोर्ड का उपयोग निर्णायक साबित हुआ है। इन माध्यमों के जरिए स्कूलों में शैक्षिक गैप की पहचान, योजनाओं की डिलीवरी की पुष्टि और शिकायतों का तत्काल समाधान संभव हुआ है। त्वरित संचार और रियल-टाइम डाटा ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के साथ ही निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के लिए जवाबदेह भी बनाया है। क्यूआर कोड व डिजिटल टूल्स से बढ़ी पारदर्शिता मिड-डे मील कार्यक्रम में क्यूआर कोड, गूगल शीट्स, एक्सेल, यूडीआईएससी, टेलीग्राफ तथा गूगल फॉर्म जैसे डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल से व्यवस्था अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद हुई है। इन साधनों से भोजन वितरण की निगरानी, उपस्थिति सत्यापन और गुणवत्ता नियंत्रण का डाटा तुरंत उपलब्ध हो जाता है, जिससे अनियमितताओं पर अंकुश लगा है। तकनीकी नवाचारों ने यह सुनिश्चित किया है कि बच्चों को लाभ समय पर और सही रूप में मिल रहा है।

यमुना के तट पर नया पब्लिक प्लाजा पार्क: भारतीय और जापानी संस्कृति का बेजोड़ नमूना

प्रयागराज   संगम नगरी प्रयागराज की पहचान धार्मिक ,साहित्यिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में जानी जीती है। योगी सरकार द्वारा महाकुंभ 2025 के भव्य और दिव्य आयोजन ने इसकी समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को दुनिया भर में पहुंचाया। इस भव्य आयोजन के बाद अब कुंभ नगरी में जापानी और सनातन संस्कृति का मेल भी होगा।  हजारों किलोमीटर की दूरी और भाषा का अंतर होने के बावजूद भारत की सनातन संस्कृति और जापान की पारंपरिक शिन्तो संस्कृति में अद्भुत समानताएँ दिखाई देती हैं। दोनों ही सभ्यताएं प्रकृति को देवतुल्य मानती हैं, आत्मसंयम को सर्वोच्च मूल्य और शांति को जीवन का आधार मानती हैं। इन दोनों संस्कृतियों के मेल की झलक की साक्षी बनने जा रही है कुंभ नगरी प्रयागराज। यहां जापानी स्थापत्य और सांस्कृतिक प्रतीकों से प्रेरित पब्लिक प्लाजा पार्क का निर्माण किया जा रहा है। नगर विकास की तरफ से इसका निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कार्यदायी संस्था सीएनडीएस है। सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित कुमार राणा बताते हैं कि प्रयागराज में यमुना किनारे अरैल क्षेत्र में शिवालय पार्क के नजदीक 3 हेक्टेयर में इसका निर्माण किया जाएगा। नगर निगम प्रयागराज को इसका आकलन भेजा गया है। इसमें भारतीय और जापानी संस्कृति के साझा स्थापत्य के प्रतीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रयागराज महाकुंभ के समय धार्मिक और आध्यात्मिक पार्कों का हब बनकर सामने आया। अरैल क्षेत्र में पहले शिवालय पार्क और अब साहित्य पार्क के निर्माण के क्रम में एक नई उपलब्धि जुड़ने जा रही है। यमुना नदी के किनारे पब्लिक प्लाजा पार्क का निर्माण हो रहा है। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित कुमार राणा का कहना है कि पार्क में 5 जोन बनाए जाएंगे। पार्क के चप्पे-चप्पे में जापान की शिंटो संस्कृति और भारतीय सनातन संस्कृति के साझा मूल्यों की झलक मिलेगी। पार्क में प्रवेश द्वार के स्थान पर टोरी गेट का निर्माण किया जाएगा जो शिंटो संस्कृति का प्रतीक है। पार्क में जापानी गार्डन बनेगा जिसमें मियावाकी वन भी विकसित किया जाएगा। पार्क में योग और भारतीय मंदिर वास्तुकला, नृत्य और संगीत की तरह जापान की टी सेरेमनी, इकेबाना और ज़ेन गार्डन में भी आध्यात्मिक भाव झलकता है। इस पार्क के अंदर भी जेन पार्क का निर्माण किया जायेगा। दोनों देशों की कला केवल सजावट नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन और साधना का माध्यम है। समरसता, शांति और विश्व बंधुत्व भारत के “वसुधैव कुटुम्बकम्” और जापान के “वा” दर्शन में एक ही संदेश निहित है जिसकी झलक भी यहां स्थापित होने वाले प्रतीकों में दिखेगी।

यूपी में डेयरी क्षेत्र में साहीवाल गाय की भूमिका और योगी सरकार की योजनाओं में योगदान

लखनऊ  साहीवाल गाय (Sahiwal Cow) भारत की सबसे उन्नत देसी दुधारू नस्ल है, जो पंजाब के साहीवाल जिले (अब पाकिस्तान में) से उत्पन्न हुई। योगी सरकार की मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना और नंद बाबा दुग्ध मिशन में साहीवाल को प्राथमिक नस्ल के रूप में चुना गया है। 2025 तक 11,000+ साहीवाल गायें UP के किसानों को ₹80,000 अनुदान (2 गायों पर) से वितरित की गईं, जिससे दूध उत्पादन 10-15 लीटर/दिन और आय ₹50,000+ मासिक तक पहुंची। साहीवाल का दूध A2 प्रोटीन युक्त, FAT 4.5-5.5%, SNF 9%+ और स्वास्थ्यवर्धक है, जो बच्चों की वृद्धि, इम्यूनिटी में लाभकारी है। यह नस्ल गर्मी सहनशील, रोग प्रतिरोधक और कम चारा वाली है, जो UP Dairy Policy 2022 के तहत आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन रही है। साहीवाल गाय की प्रमुख विशेषताएं: वैज्ञानिक और व्यावहारिक विश्लेषण विशेषता    विवरण    लाभ (UP संदर्भ में) 1. शारीरिक संरचना    – रंग: गहरा लाल-भूरा (महोगनी रेड)। – सींग: छोटे, मध्यम मुड़े हुए। – कान: मध्यम, लटकते हुए। – कूबड़: बड़ा, मांसल। – वजन: वयस्क गाय 400-500 किग्रा, बैल 600-700 किग्रा।    – मजबूत शरीर: UP के ग्रामीण फार्म में आसान रखरखाव। – आकर्षण: बाजार में उच्च मूल्य। 2. दूध उत्पादन क्षमता    – प्रतिदिन: 10-15 लीटर (औसत), अधिकतम 25+ लीटर। – लैक्टेशन पीरियड: 300-320 दिन। – वार्षिक: 3,000-4,000 लीटर। – FAT: 4.5-5.5%, SNF 9-9.5%।    – उच्च आय: ₹50/लीटर पर ₹5,000-7,500 मासिक (2 गायें)। – A2 दूध: प्रीमियम ₹80-120/लीटर। 3. दूध की गुणवत्ता    – A2 बीटा-कैसिन: पाचन में आसान, एलर्जी-मुक्त। – उच्च प्रोटीन, कैल्शियम: हड्डी/दांत मजबूत। – प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट: कैंसर/हृदय रोग में लाभ।    – स्वास्थ्य बाजार: UP Mart, Amul, Parag पर डिमांड। – निर्यात: G20 गिफ्टिंग में चयन। 4. पर्यावरण अनुकूलता    – गर्मी सहनशील: 48°C तक। – कम चारा: 30-35 किग्रा हरा/6-8 किग्रा सूखा चारा। – रोग प्रतिरोधक: FMD, ब्रूसेलोसिस, मास्टाइटिस।    – UP जलवायु: गर्मी/सूखे में जीवित। – कम लागत: ₹1,800 मासिक रखरखाव। 5. प्रजनन और दीर्घायु    – पहला ब्यांत: 34-38 माह। – ब्यांत अंतराल: 12-13 माह। – उम्र: 16-20 वर्ष (12+ लैक्टेशन)।    – दीर्घकालिक लाभ: 1 गाय से 12+ बछड़े। – बछड़ा मूल्य: ₹40,000-60,000। 6. आर्थिक लाभ    – गोबर: 18-22 किग्रा/दिन (खाद/गैस/पेंट)। – गौमूत्र: 6-8 लीटर/दिन (दवा/कीटनाशक)।    – अतिरिक्त आय: ₹12,000+ मासिक (गोबर पेंट)। उत्तर प्रदेश में साहीवाल गाय का योगदान: योगी सरकार की योजनाओं से •    स्वदेशी गौ संवर्धन योजना: 2 साहीवाल गायें + ₹80,000 अनुदान → 60 लीटर दूध/दिन। •    नंदिनी कृषक समृद्धि योजना: 10 साहीवाल गायें + ₹11.80 लाख → 150 लीटर/दिन। •    NDDB-PCDF MoU: पंजाब/हरियाणा से उच्च गुणवत्ता साहीवाल आयात, कानपुर/गोरखपुर प्लांट में प्रोसेसिंग। •    परिणाम: 38.78 मिलियन टन दूध में 12%+ साहीवाल योगदान। 41,000+ SHG महिलाएं लाभान्वित। प्रेरक उदाहरण: UP में साहीवाल से समृद्धि 1.    आजमगढ़ के रामू यादव (SC किसान):  o    2024: 2 साहीवाल गायें + ₹80,000। o    2025: 70 लीटर दूध/दिन, ₹50,000 मासिक। A2 दूध से प्रीमियम बिक्री। 2.    झांसी SHG (सुमित्रा देवी):  o    10 साहीवाल गायें नंदिनी से। o    अब: ₹1.2 लाख मासिक, गोबर पेंट निर्यात। योगी आदित्यनाथ का उद्धरण •    लॉन्च 2023:  "साहीवाल गाय दूध की रानी है। ₹80,000 अनुदान से किसान आत्मनिर्भर, A2 दूध से स्वास्थ्य क्रांति!" निष्कर्ष: साहीवाल – UP का दुग्ध स्वर्ण साहीवाल गाय उच्च दूध, A2 गुणवत्ता और कम रखरखाव से योगी सरकार की डेयरी क्रांति का प्रतीक है। आवेदन करें, साहीवाल अपनाएं! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश

विशेष आर्टिकल- मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना: देसी गाय पालन से किसानों की आय दोगुनी, 80 हजार तक अनुदान

लखनऊ  मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 6 जून 2023 को लॉन्च की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू यह योजना स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों (साहीवाल, गिर, थार पारकर, हरियाणा) के संवर्धन को बढ़ावा देती है, ताकि दूध उत्पादन बढ़े, ग्रामीण रोजगार सृजित हो और देसी नस्लें संरक्षित रहें। योजना के तहत दो गायों की यूनिट स्थापित करने पर 40% अनुदान (अधिकतम ₹80,000) मिलता है, जो कुल लागत (लगभग ₹2 लाख) का बड़ा हिस्सा कवर करता है। 2025 तक 2,100+ इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं, जिससे दूध उत्पादन 38.78 मिलियन टन (देश का 16%) पहुंचा। यह योजना UP Dairy Policy 2022 के साथ एकीकृत है, जो महिला SHG, SC/ST/OBC को प्राथमिकता देती है। आवेदन पोर्टल: nandbabadugdhmission.up.gov.in। योजना का उद्देश्य: देसी गौ-पालन से आत्मनिर्भरता •    दूध उत्पादन वृद्धि: प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता बढ़ाना। •    नस्ल संरक्षण: स्वदेशी गायों (हरियाणा, पंजाब, गुजरात से खरीद) को प्रोत्साहन। •    आय वृद्धि: किसानों की मासिक आय ₹5,000 से ₹50,000+ तक। •    रोजगार सृजन: ग्रामीण क्षेत्रों में 1 लाख+ परिवार लाभान्वित। •    महिला सशक्तिकरण: SHG के माध्यम 40% कोटा। योजना के प्रमुख लाभ: विस्तृत संरचना योजना दो गायों की इकाई पर फोकस करती है, जिसमें ट्रांसपोर्टेशन, इंश्योरेंस और अन्य खर्च शामिल हैं: लाभ की श्रेणी    विवरण    प्रभाव (2025 तक) वित्तीय अनुदान    – 40% सब्सिडी: कुल ₹2 लाख पर ₹80,000 (प्रति गाय ₹40,000)। – बैंक लोन: शेष पर 5% ब्याज सब्सिडी (5 वर्ष)। – SC/ST/OBC: 35% अतिरिक्त।    – आय: 50-60 लीटर दूध/दिन से ₹20,000+ मासिक। – NPA: 2.5% से कम। गाय खरीद और परिवहन    – नस्लें: साहीवाल (हरियाणा/पंजाब), गिर (गुजरात), थार पारकर (राजस्थान)। – ट्रांसपोर्ट: 40% अनुदान (अधिकतम ₹40,000/गाय)।    – उन्नत नस्ल: 8-12 लीटर दूध/गाय/दिन। – संरक्षण: 11,000+ देसी गायें। इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता    – शेड/फीड: ₹50,000 तक सब्सिडी। – पशु बीमा: ₹10 लाख कवरेज (मुफ्त प्रथम वर्ष)। – चारा: 50% सब्सिडी (1 वर्ष)।    – स्वास्थ्य: रोगमुक्त पशुधन। – बाजार: PCDF/Amul लिंकेज। प्रशिक्षण और मार्केटिंग    – 15-दिवसीय कोर्स: RSETI/CFC में मुफ्त। – डिजिटल भुगतान: तत्काल ट्रांसफर। – UP Mart: ऑनलाइन बिक्री।    – गुणवत्ता: FAT/SNF सुधार। – अतिरिक्त आय: गोबर पेंट से ₹10,000+। विशेष प्राथमिकता    – महिलाएं/SHG: 40% कोटा। – ग्रामीण फोकस: 18 जिलों (झांसी, गाजीपुर, देवरिया आदि) में प्राथमिकता।    – 41,000+ महिलाएं जुड़ीं। – पलायन रोक: गांव में स्थिरता। आवेदन प्रक्रिया: •    पात्रता: UP निवासी, 18+ आयु, 2+ गायें न हों, शेड उपलब्ध। •    दस्तावेज: आधार, बैंक पासबुक, भूमि प्रमाण-पत्र। •    चरण: ऑनलाइन आवेदन → ई-लॉटरी → सत्यापन → अनुदान वितरण। •    अंतिम तिथि: 23 अगस्त 2025 (द्वितीय चरण)। हेल्पलाइन: 1800-XXX-XXXX। प्रेरक उदाहरण: योजना से जीवन परिवर्तन 1.    झांसी के शाश्वत सिंह (दो गायों की यूनिट):  o    2024: ₹80,000 अनुदान से साहीवाल गायें खरीदीं। o    2025: ₹25,000 मासिक आय, परिवार सशक्त। "योजना ने पलायन रोका।" 2.    गाजीपुर के अमितेश सिंह:  o    अनुदान: गिर नस्ल पर ₹80,000। o    अब: 50 लीटर दूध/दिन, ₹40,000 मासिक। SC लाभार्थी के रूप में अतिरिक्त 35%। 3.    देवरिया के पशुपालक:  o    40% अनुदान: थार पारकर गायें। o    प्रभाव: आय दोगुनी, SHG में महिला भागीदारी। योगी आदित्यनाथ के उद्धरण: योजना पर दृष्टि •    लॉन्च (6 जून 2023):  *"स्वदेशी गौ संवर्धन से देसी नस्लें संरक्षित होंगी। ₹80,000 अनुदान से किसान आत्मनिर्भर, दूध क्रांति आएगी।" •    बजट समीक्षा 2025:  *"योजना से दूध उत्पादन बढ़ेगा, ग्रामीण UP मजबूत। स्वदेशी गौ-पालन हमारी सांस्कृतिक धरोहर।" निष्कर्ष: स्वदेशी गौ संवर्धन – UP का दुग्ध भविष्य मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना ₹80,000 अनुदान से दो गायें, एक परिवार की समृद्धि का मंत्र दे रही है। योगी सरकार का प्रयास विकसित भारत-2047 को मजबूत करेगा। आवेदन करें, लाभ लें! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश!

योगी सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर हो रहे अग्रसर

मुख्यमंत्री योगी के सख्त निर्देशों का असर, उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में आई उल्लेखनीय कमी योगी सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर हो रहे अग्रसर 20 प्रमुख जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों और सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राज्य सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। कम हुई पराली जलाने की घटनाएं मथुरा, पीलीभीत, सहारनपुर, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, कौशांबी, एटा, हरदोई, जालौन, फतेहपुर, महराजगंज, कानपुर देहात, झांसी, मैनपुरी, बहराइच, इटावा, गोरखपुर, अलीगढ़, उन्नाव और सीतापुर जैसे कुल 20 जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है। इसमें भी एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। यह स्थिति बताती है कि मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों का जमीनी असर दिखाई देने लगा है। सेटेलाइट से की जा रही निगरानी सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया था कि पराली जलाने की घटनाओं की सेटेलाइट से निगरानी की जाए। साथ ही किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जाए। प्रशासन द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों, कंपोस्टिंग तकनीक और बायो-डीकंपोजर के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जुर्माने और जिम्मेदारी की सख्त व्यवस्था राज्य सरकार ने पराली जलाने वालों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क तय किया है। इसके अनुसार, दो एकड़ से कम क्षेत्र पर ₹2,500, दो से पांच एकड़ तक ₹5,000, पांच एकड़ से अधिक पर ₹15,000 क्षतिपूर्ति शुल्क लगेगा। साथ ही प्रत्येक 50 से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है, जो अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करेंगे।

517 जनजातीय बहुल गांवों में सैचुरेशन आधारित विकास, धरती आबा अभियान बना बदलाव की धुरी

जनजातीय गौरव को नई पहचान, योगी सरकार ने बदली वंचित समाज की तस्वीर 517 जनजातीय बहुल गांवों में सैचुरेशन आधारित विकास, धरती आबा अभियान बना बदलाव की धुरी थारू, बुक्सा और अन्य जनजातियों के लिए योगी सरकार का सुरक्षा कवच, आवास से आजीविका तक बड़ा विस्तार थारू हस्तशिल्प कंपनी ने खोले राष्ट्रीय बाजार के दरवाजे, 371 समूहों को मिला आर्थिक संबल एकलव्य मॉडल स्कूलों और सर्वोदय छात्रावासों से जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा बनी नई ताकत पीएम जनमन से वन क्षेत्रों में बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल की सीधी पहुंच, बुक्सा जनजाति के 815 परिवार हुए संतृप्त परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना से युवाओं को बड़ा लाभ, सैकड़ों की प्रशासनिक सेवाओं में एंट्री विमुक्त और घुमंतू समुदायों के लिए योगी सरकार का बड़ा हस्तक्षेप, शिक्षा और निवास योजनाओं से जीवन में आया स्थायित्व लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जनजातीय समाज के जीवन में जो बदलाव आया है, वह सिर्फ योजनाओं का विस्तार नहीं बल्कि सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना की एक बड़ी कहानी है। लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन समुदायों को योगी सरकार ने न केवल मुख्य धारा में जगह दिलाई बल्कि उनकी परंपराओं, जरूरतों और सपनों को शासन की प्राथमिकता बनाया। मुख्यमंत्री की सोच हमेशा यही रही है कि विकास तभी सार्थक है जब वंचितों को वरीयता मिले और अंत्योदय से सर्वोदय का रास्ता खुले। प्रदेश में थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी, राजी, गोंड, बैगा, सहरिया, मुसहर और चेरो जैसी जनजातियों के 11 लाख से अधिक लोगों के जीवन को बदलने के लिए सरकार ने योजनाएं जमीन पर उतारीं। वनाधिकार अधिनियम के तहत आवासीय अधिकार दिए गए, मुख्यमंत्री आवास योजना से वनवासियों को पक्के घर मिले और पीएम जनमन योजना के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाओं को सीधे उनके द्वार तक पहुंचाया गया। खास तौर पर बुक्सा जनजाति के 815 परिवारों को हर सुविधा से संतृप्त कर एक नई मिसाल पेश की गई। 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' और 'धरती आबा जनभागीदारी अभियान' ने जनजातीय इलाकों में विकास की असली तस्वीर बदली। 26 जिलों के 517 गांवों तक पहुंचकर सरकार ने कनेक्टिविटी से लेकर आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला, जनधन, किसान सम्मान निधि और विश्वकर्मा जैसी योजनाओं का सैचुरेशन कराया। सोनभद्र, ललितपुर, कुशीनगर, बलरामपुर से लेकर बिजनौर तक इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर लगातार बढ़े हैं। जनजातीय संस्कृति को संजोने पर भी भरपूर जोर दिया गया। बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू संग्रहालय स्थापित हुआ और मिर्जापुर, सोनभद्र, महराजगंज में नए संग्रहालयों पर तेजी से काम चल रहा है। थारू समुदाय की कला और कौशल को राष्ट्रीय बाजार दिलाने के लिए लखीमपुर खीरी में थारू हस्तशिल्प कंपनी बनाई गई। इसमें जुड़े 371 समूहों को रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड देकर आत्मनिर्भरता की राह दिखाई गई। शिक्षा को जनजातीय उन्नति का आधार बनाते हुए एकलव्य मॉडल स्कूल, सर्वोदय छात्रावास और आश्रम पद्धति विद्यालयों में बच्चों को पूरी सुविधा मिल रही है। लखीमपुर खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर के एकलव्य विद्यालयों ने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को नई दिशा दी है। ये पहलें साफ बताती हैं कि योगी सरकार जनजातीय बच्चों की शिक्षा को भविष्य निर्माण का सबसे मजबूत आधार मानती है। मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि विकास की असली कसौटी भागीदारी है। पुलिस भर्ती में आरक्षित सभी सीटें पूरी तरह भरना इसी परिवर्तन का संकेत है। परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना से 700 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन, साढ़े 06 हजार युवाओं को प्रशिक्षण और आठ उच्चस्तरीय केंद्रों की स्थापना ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोली हैं। विमुक्त और घुमंतू समुदायों को भी सरकार ने बराबर महत्व दिया। नट, बंजारा, सांसी, कंजर, कालबेलिया जैसे समुदायों के लिए 101 आश्रम पद्धति विद्यालय, 9 सर्वोदय विद्यालय और अनेक छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। इन समुदायों को सामाजिक सुरक्षा, आवास और आजीविका से जोड़कर सरकार ने उन्हें सम्मानजनक जीवन की राह दी है।