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विशेष आर्टिकल : बेटियों को सशक्त बनाने की राह: कन्या सुमंगला योजना की अनोखी कहानी

विशेष आर्टिकल : कन्या सुमंगला योजना: बेटियों के सपनों को पंख लगाने वाली क्रांतिकारी पहल लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति फेज-5.0 एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस अभियान का अभिन्न हिस्सा है मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के संकल्प को साकार करने वाली एक ऐसी योजना है। इस योजना ने न केवल कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों पर अंकुश लगाया है, बल्कि लाखों बेटियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 26 लाख से अधिक बेटियों को लाभ पहुंचाया गया है, जो उत्तर प्रदेश को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। योजना का उद्देश्य और संरचना: एक विस्तृत नजर मिशन शक्ति के स्वावलंबन स्तंभ के तहत संचालित कन्या सुमंगला योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हो और बेटियां बिना रुकावट पढ़ सकें। योजना को छह चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें कुल 25,000 रुपये की धनराशि दी जाती है: • प्रथम चरण: बेटी के जन्म पर 5,000 रुपये (1 अप्रैल 2019 या उसके बाद जन्मी बेटियों के लिए)। • द्वितीय चरण: पूर्ण टीकाकरण पर 2,000 रुपये। • तृतीय चरण: कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये। • चतुर्थ चरण: कक्षा-6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये। • पंचम चरण: कक्षा-9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये। • षष्ठम चरण: कक्षा-10/12 उत्तीर्ण करने पर 7,000 रुपये (स्नातक या 2 वर्षीय डिप्लोमा में प्रवेश के लिए)। पात्रता के मानदंड सरल हैं: लाभार्थी परिवार उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी हो, वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम हो, और परिवार में अधिकतम दो बेटियां लाभार्थी हो सकें। आवेदन ऑनलाइन (mksy.up.gov.in) या ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। योजना ने लिंगानुपात में सुधार लाया है और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को कम किया है, जिससे उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर हो गया है। प्रेरणादायक कहानी: वाराणसी की प्रिया – योजना की जीवंत मिसाल कन्या सुमंगला योजना की सच्ची ताकत तो उसके लाभार्थियों की सफलता कहानियों में झलकती है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है वाराणसी की प्रिया सिंह की, जो एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। प्रिया का जन्म 2020 में हुआ, जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था। लेकिन मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने उनके परिवार को नई उम्मीद दी। प्रिया को योजना के पहले चरण में जन्म पर 5,000 रुपये मिले, जिससे परिवार ने टीकाकरण और पोषण पर खर्च किया। कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये से स्कूल फीस और किताबें खरीदी गईं। कक्षा-6 में 3,000 रुपये ने यूनिफॉर्म और स्टेशनरी का इंतजाम किया, जबकि कक्षा-9 में 5,000 रुपये ने अतिरिक्त ट्यूशन की सुविधा प्रदान की। अब कक्षा-10 उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें 7,000 रुपये मिल चुके हैं, जिसका उपयोग आईएएस की तैयारी के लिए कोचिंग में किया जा रहा है। प्रिया बताती हैं, "यह पैसा मेरे लिए सिर्फ धन नहीं, बल्कि सपनों का ईंधन है। योजना ने मुझे साबित किया कि बेटी भी परिवार का सहारा बन सकती है।" आज प्रिया न केवल अपनी कक्षा में टॉपर हैं, बल्कि गांव की अन्य लड़कियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। उनकी कहानी मिशन शक्ति के उस विजन को दर्शाती है, जहां हर बेटी एक भविष्य की नारी शक्ति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दूरदर्शी नेतृत्व: तारीफ के काबिल योगदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि के बिना कन्या सुमंगला योजना इतनी सफल न होती। उन्होंने 25 अक्टूबर 2019 को योजना का उद्घाटन किया और इसे मिशन शक्ति का मजबूत स्तंभ बनाया। हाल ही में मिशन शक्ति 5.0 के लॉन्च पर लखनऊ में दिए गए अपने भाषण में सीएम योगी ने कहा, "बेटी के जन्म से स्नातक तक 25,000 रुपये का पैकेज देकर हम नारी शक्ति को मजबूत कर रहे हैं। यह योजना बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएगी और समाज की कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंकेगी।" उनके नेतृत्व में योजना ने 26 लाख बेटियों को जोड़ा, जो एक रिकॉर्ड है। योगी जी का यह प्रयास न केवल प्रशासनिक कुशलता का प्रतीक है, बल्कि संवेदनशील शासन का भी उदाहरण। उन्होंने नवरात्रि के कन्या पूजन के दौरान भी जोर दिया कि "कन्या पूजन से हम भविष्य की नारियों को सम्मान दे रहे हैं, और कन्या सुमंगला जैसी योजनाएं इसे साकार कर रही हैं।" योगी आदित्यनाथ का यह समर्पण उत्तर प्रदेश को 'बेटी-रक्षक' राज्य बनाने में मीलों आगे ले गया है। भाजपा सरकार का सराहनीय कदम: महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भाजपा सरकार के इस कदम की सराहना किए बिना न्याय नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान को मजबूत करने वाली यह योजना उत्तर प्रदेश में भाजपा शासन की प्राथमिकता को दर्शाती है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हुई कन्या सुमंगला ने न केवल आर्थिक सहायता दी, बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी लाया। सरकार ने योजना को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर पारदर्शिता सुनिश्चित की, जिससे भ्रष्टाचार मुक्त वितरण संभव हुआ। यह कदम नारी सम्मान और समानता की दिशा में भाजपा की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। निष्कर्ष: योगी सरकार की दूरदर्शी सोच से सशक्त बेटियां, समृद्ध उत्तर प्रदेश मिशन शक्ति और कन्या सुमंगला योजना मिलकर उत्तर प्रदेश को एक ऐसा राज्य बना रही हैं, जहां हर बेटी सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर हो। प्रिया जैसी लाखों कहानियां साबित करती हैं कि यह योजना सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाली है। योगी आदित्यनाथ सरकार की यह पहल न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि ऐतिहासिक भी है। • 2017 से पहले की अराजकता को याद करें, जब बेटियां घर से बाहर निकलने में डरती थीं। आज योगी सरकार ने महिला पुलिस बीट ऑफिसर, पिंक पेट्रोलिंग, महिला हेल्प डेस्क और 1090 हेल्पलाइन जैसे ठोस कदम उठाकर सुरक्षा का मजबूत कवच तैयार किया है। • कन्या सुमंगला योजना ने 26 लाख बेटियों को सीधे वित्तीय सहायता दी, जिससे लिंगानुपात में 50 अंकों का सुधार हुआ। • डिजिटल पारदर्शिता के जरिए हर पैसा सही हाथों तक पहुंच रहा है … Read more

गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसम्बर तक पूरा करने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री ने दिए गति बढ़ाने के निर्देश

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक तरक्की की रीढ़ हैं एक्सप्रेसवे: मुख्यमंत्री गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसम्बर तक पूरा करने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री ने दिए गति बढ़ाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने की यूपीडा के परियोजनाओं की समीक्षा, कहा समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो मेरठ-हरिद्वार, नोएडा-जेवर, चित्रकूट-रीवा और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के रूट पर हुई गहन चर्चा, मुख्यमंत्री ने एनएचएआई के साथ रूट समन्वय पर दिया बल डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सभी नोड्स पर स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित होंगे: मुख्यमंत्री भूमि आवंटन के तीन वर्ष में निवेश न होने पर आवंटन रद्द किया जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि एक्सप्रेसवे केवल सड़कों का जाल नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक भविष्य की रीढ़ हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य दिसम्बर तक हर हाल में पूरा कराने के लक्ष्य के साथ तेज गति से आगे बढ़ाया जाए, ताकि राज्य के पश्चिमी और पूर्वी अंचलों के बीच सहज कनेक्टिविटी स्थापित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा हो और कार्य की गुणवत्ता पर किसी प्रकार का समझौता न हो। बैठक में गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार स्वरूप प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे, नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे तथा प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली और सोनभद्र तक प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे व विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के रूट पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नए एक्सप्रेसवे की योजना बनाते समय भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और हाइवे नेटवर्क का पूरा ध्यान रखा जाए, ताकि दोहराव से बचते हुए राज्य में एकीकृत और समन्वित सड़क तंत्र विकसित हो सके। मुख्यमंत्री ने डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े सभी नोड्स (लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट) में स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रक्षा उद्योग से जोड़ना चाहिए, जिससे रोजगार सृजन के साथ ही क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। बैठक में बताया गया कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए अब तक लगभग 30,819 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। 5039 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है। विभिन्न कंपनियों द्वारा कार्य प्रारंभ भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने भूमि आवंटन नीति पर विशेष बल देते हुए कहा कि भूमि आवंटन के तीन वर्ष के भीतर यदि निवेशक द्वारा यथोचित उपयोग नहीं किया जाता है तो ऐसा आवंटन स्वतः निरस्त किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भूमि उपयोग की निगरानी की पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए और निवेशक को केवल वास्तविक प्रगति की स्थिति में ही आगे की सुविधाएँ दी जाएँ। बैठक में यह भी बताया गया कि एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्कों में निवेश आकर्षित करने के लिए यूपीडा ने बिजली, जलापूर्ति, ट्रक टर्मिनल और हेल्थ-इमरजेंसी सुविधाओं की व्यवस्था हेतु समयबद्ध योजना बनाई है।

एथेनॉल उत्पादन व गन्ना क्षेत्रफल में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम, किसान हित में सरकार के ठोस कदम

गन्ना किसानों को योगी सरकार का बड़ा उपहार, गन्ना मूल्य ₹30 प्रति कुन्तल बढ़ा पेराई सत्र 2025-26 में अगेती गन्ना ₹400, सामान्य ₹390 प्रति कुन्तल निर्धारित गन्ना मूल्य वृद्धि से किसानों को होगा ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान गन्ना किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सशक्त स्तंभ हैं : लक्ष्मी नारायण चौधरी योगी सरकार में अब तक ₹2.90 लाख करोड़ का रिकॉर्ड भुगतान, पिछली सरकारों से ₹1.42 लाख करोड़ अधिक प्रदेश में संचालित 122 चीनी मिलें, पारदर्शी नीतियों से उद्योग में आया ₹12,000 करोड़ निवेश 8 वर्षों में 4 नई चीनी मिलें स्थापित, 6 पुनः शुरू, 42 में क्षमता विस्तार ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली ने खत्म किया बिचौलियों का राज, भुगतान सीधे किसानों के खातों में एथेनॉल उत्पादन व गन्ना क्षेत्रफल में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम, किसान हित में सरकार के ठोस कदम लखनऊ योगी सरकार ने एक बार फिर गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति कुन्तल की वृद्धि की गई है। उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के अनुसार अब अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य ₹400 प्रति कुन्तल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹390 प्रति कुन्तल निर्धारित किया गया है। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार है जब गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। यह निर्णय न केवल गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भी भरेगा।  मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि किसानों के परिश्रम का सम्मान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गन्ना किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सशक्त स्तंभ हैं। गन्ना हमारे ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था का आधार है और हर किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य सही समय पर उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने बताया कि गन्ना किसानों को अब तक ₹2,90,225 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो वर्ष 2007 से 2017 के बीच सपा और बसपा सरकारों में किसानों को कुल मात्र ₹1,47,346 करोड़ का भुगतान हुआ था। इस प्रकार सरकार ने मात्र साढ़े आठ वर्षों में पिछली सरकारों के मुकाबले ₹1,42,879 करोड़ अधिक भुगतान कर नया इतिहास रचा है। मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 122 चीनी मिलें संचालित हैं, जिससे उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में जहां 21 मिलें औने-पौने दामों पर बेची गई थीं, वहीं सरकार के पारदर्शी प्रबंधन और निवेशोन्मुख नीतियों से इस उद्योग में ₹12,000 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है। पिछले आठ वर्षों में 4 नई चीनी मिलें स्थापित की गईं, 6 बंद मिलें पुनः शुरू की गईं और 42 मिलों की उत्पादन क्षमता में विस्तार हुआ। इससे प्रदेश में 8 नई बड़ी मिलों के बराबर उत्पादन क्षमता में वृद्धि दर्ज हुई है। साथ ही, 2 मिलों में सीबीजी संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिससे गन्ना क्षेत्र में वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन को भी बल मिला है। प्रदेश सरकार की अभिनव पहल ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली के माध्यम से गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल पर प्राप्त होती है और भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में पहुंचता है। इस प्रणाली को भारत सरकार ने 'मॉडल सिस्टम' घोषित किया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है। एथेनॉल उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि सरकार के प्रयासों से राज्य में एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है और आसवनियों की संख्या 61 से बढ़कर 97 हो गई है। गन्ना क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में गन्ना क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 29.51 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर आ गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को मिल रही उड़ान, घरेलू यात्रियों में 15.7% और एयर कार्गो में 19.1% का आया उछाल

आसमान में नई ऊंचाइयां छू रहा उत्तर प्रदेश, हवाई यात्री और कार्गो ट्रैफिक में रिकॉर्ड वृद्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को मिल रही उड़ान, घरेलू यात्रियों में 15.7% और एयर कार्गो में 19.1% का आया उछाल वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहर बने उत्तर प्रदेश की हवाई ग्रोथ के इंजन अप्रैल से अगस्त 2025 की अवधि में उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों से 60 लाख से अधिक यात्रियों ने किया सफर इन तीन महीनों में भारत के कुल हवाई यातायात में राज्य की हिस्सेदारी 3.52% तक पहुंची 2016-17 में 59.97 लाख यात्रियों की तुलना में 2024-25 में 142.28 लाख तक पहुंचे एयर पैसेंजर्स नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ से प्रदेश और अन्य राज्यों के पैसेंजर्स को मिलेगी और भी बेहतर कनेक्टिविटी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब न केवल सड़क पर, बल्कि आसमान में भी विकास की उड़ान भर रहा है। राज्य की हवाई कनेक्टिविटी और यात्री संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे प्रदेश अब भारत की हवाई ग्रोथ स्टोरी में एक अहम किरदार बन गया है। अप्रैल से अगस्त 2025 की अवधि में उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों पर यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 14.6% बढ़कर 60.02 लाख हो गई है। वहीं इस अवधि में भारत के कुल हवाई यातायात में राज्य की हिस्सेदारी 3.52% तक पहुंच गई, जो 2024 की तुलना में 34 बेसिस पॉइंट्स अधिक है। इससे साफ है कि अब देश के हर 30 में से एक हवाई यात्री उत्तर प्रदेश से यात्रा कर रहा है। राज्य में हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ‘कनेक्टेड यूपी, समृद्ध यूपी’ विजन के तहत पेश की थी। उनका लक्ष्य रहा है कि हर क्षेत्र, हर जिला आधुनिक परिवहन से जुड़े ताकि पर्यटन, व्यापार और रोजगार में नई गति आए। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ के साथ इस रफ्तार में और भी वृद्धि होगी और सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी कनेक्टिविटी के नए अवसर प्राप्त होंगे। 2017 से 2025 तक यूपी की हवाई यात्रा का सफर साल 2016-17 में जहां उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों से 59.97 लाख यात्री यात्रा करते थे, वहीं FY2024-25 में यह संख्या बढ़कर 142.28 लाख तक पहुंच गई। इनमें 129.29 लाख घरेलू और 12.99 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री शामिल रहे। इस दौरान राज्य का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 10.1% रहा, जो एविएशन सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग को दर्शाता है। कोविड-19 महामारी के दौरान FY2020-21 में यात्री संख्या 48.35 लाख तक गिर गई थी, लेकिन यूपी ने सबसे तेज रिकवरी दिखाई। महज दो वर्षों में यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई, जो राज्य की मजबूत हवाई नीति और बेहतर प्रबंधन का प्रमाण है। 2023-24 की तुलना में 2024-25 में हवाई यात्रियों की संख्या में 25.9 प्रतिशत का ग्रोथ दर्ज किया गया है, जबकि 2023-24 और 2024-25 में अप्रैल-अगस्त माह के बीच कंपैरिजन करें तो यह ग्रोथ 14.6% रही। इस दौरान डॉमेस्टिक एयर पैसेंजर्स में 15.7% और इंटरनेशनल पैसेंजर्स की संख्या में 4.3% ग्रोथ दर्ज की गई। अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी बने स्टार परफॉर्मर राज्य के कई शहरों ने इस ग्रोथ में अहम योगदान दिया है। 2023-24 से 2024-25 के बीच वाराणसी में 34.4%, प्रयागराज में 76.4%, गोरखपुर में 27.6% और कानपुर में 13.3% की वृद्धि दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी ने यात्री संख्या को तेजी से बढ़ाया है। खासतौर पर अयोध्या एयरपोर्ट, जिसे मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के नाम पर समर्पित किया था, अब उत्तर भारत के सबसे तेजी से बढ़ते टर्मिनल्स में शामिल है। 2023-24 में जहां 2 लाख से ज्यादा पैसेंजर्स ने यहां से हवाई उड़ान भरी थी तो वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 11 लाख से अधिक पहुंच गया। वहीं प्रयागराज और वाराणसी से भी धार्मिक और व्यावसायिक उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रयागराज में 2023-24 में 6 लाख से अधिक एयर पैसेंजर्स ने यात्रा की तो वहीं 2024-25 में यह संख्या 10.77 लाख से अधिक पहुंच गई। इसी तरह वाराणसी में 2023-24 में करीब 30 लाख एयर पैसेंजर्स यात्रा कर रहे थे तो वहीं 2024-25 यह संख्या 40 लाख का आंकड़ा पार कर गई। गोरखपुर में 2023-24 में 6.8 लाख की तुलना में 2024-25 में 8.67 लाख से अधिक हवाई यात्रियों ने सफर किया। लखनऊ ने भी अपनी रफ्तार में इजाफा किया है, जहां 2023-24 की तुलना में 2024-25 में 4.1% की वृद्धि हुई है। कार्गो ट्रैफिक में भी जबरदस्त वृद्धि उत्तर प्रदेश अब व्यापार और निर्यात के लिए भी एयर कनेक्टिविटी का बड़ा केंद्र बन रहा है। FY2016-17 से FY2024-25 तक राज्य के एयर कार्गो में 19.1% का CAGR दर्ज किया गया है। यह 5.89 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 28.36 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो कि अब तक का सर्वाधिक है। FY2024-25 में लखनऊ एयरपोर्ट ने 22,099 मीट्रिक टन कार्गो हैंडल किया, जबकि वाराणसी में 27.7% और प्रयागराज में 50% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2023-24 से 2024-25 के बीच टोटल ग्रोथ 9.4% रही और इस दौरान एयर कॉर्गो 25,915 मीट्रिक टन से 28,356 मीट्रिक टन पहुंच गया। अप्रैल-अगस्त 2025 में कानपुर (165%) और आगरा (247%) में रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज हुई जो बताता है कि राज्य के इंडस्ट्रियल क्लस्टर अब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जुड़ रहे हैं। अप्रैल-अगस्त 2025 में राज्य का भारत के कुल एयर कार्गो में हिस्सा 0.79% हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1 बेसिस पॉइंट अधिक है। साकार हो रहा योगी सरकार का विजन उत्तर प्रदेश सिविल एविएशन के डायरेक्टर ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि हवाई कनेक्टिविटी सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, पर्यटन और निवेश की नई शक्ति है। जब हर जिले से उड़ान संभव होगी, तो हर नागरिक का जीवन स्तर ऊंचा होगा। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में अयोध्या, कुशीनगर और जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) जैसे नए हवाई अड्डों का तेजी से विकास किया गया है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होते ही उत्तर प्रदेश उत्तरी भारत का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने की ओर अग्रसर होगा। इसी क्रम में प्रदेश सरकार कई नए एयर … Read more

योगी सरकार के प्रयास से देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य और लोक कलाओं की सुनाई देगी गूंज

काशी गंगा महोत्सव में भजनों से भक्ति रस की सरिता बहाएंगे हंसराज रघुवंशी योगी सरकार के प्रयास से देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य और लोक कलाओं की सुनाई देगी गूंज नामो घाट व राजघाट पर देशभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर काशी की सांस्कृतिक परंपरा को बनाएंगे भव्य व समृद्ध लोक गायन से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को जीवंत करेंगी पद्मश्री मालिनी अवस्थी, पद्मश्री गीता चन्द्रन देंगी भरतनाट्यम की प्रस्तुति -1 से 4 नवम्बर तक माँ जान्हवी के पावन तट पर होगा भव्य आयोजन, काशी गंगा महोत्सव बनेगा माध्यम -नमो घाट पर काशी सांसद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता के प्रमुख कलाकार भी देंगे विभिन्न प्रकार की प्रस्तुति वाराणसी  देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य व लोक कलाओं की संगीतमय सरिता बहेगी। माँ जान्हवी के पावन तट पर इस वर्ष गंगा महोत्सव का आयोजन 1 से 4 नवम्बर तक किया जाएगा। योगी सरकार के प्रयास से राजघाट पर देशभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर काशी की इस सांस्कृतिक परंपरा को और भव्य बनाएंगे जिनमें शास्त्रीय, भक्ति तथा लोक संगीत का अद्भुत संगम दिखाई देगा। इस महोत्सव में गायक हंसराज रघुवंशी अपने भजनों से श्रोताओं को भक्ति रस से ओत-प्रोत करेंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी अपने लोक गायन से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को जीवंत करेंगी। पद्मश्री गीता चन्द्रन का भरतनाट्यम नृत्य भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहेगा। वहीं, नमो घाट पर काशी सांसद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता के प्रमुख कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे। कई मायनों में विशिष्ट होगा आयोजन संयुक्त निदेशक पर्यटन दिनेश कुमार ने बताया कि चार दिवसीय इस उत्सव में गीत, संगीत, नृत्य और वादन की गंगा बहेगी। गंगा महोत्सव के मंच पर लोक और शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियां गूंजेंगी तो साथ ही पारंपरिक नृत्य शैलियों की झलक भी देखने को मिलेगी। महोत्सव में विशेष रूप से गायक हंसराज रघुवंशी आयोजन के अंतिम दिन अपने भजनों से श्रद्धा और भक्ति का भाव जगाएंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी 3 अक्टूबर को लोक गायन से काशी की धरती पर उत्तर भारत की लोक परंपराओं को सजीव करेंगी। इसके अतिरिक्त, 2 अक्टूबर को पद्मश्री गीता चंद्रन भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी। गंगा महोत्सव के अंतर्गत होने वाली प्रस्तुतियां शाम 4 बजे से शुरू होंगी।  काशी गंगा महोत्सव ये प्रमुख कलाकार देंगे प्रस्तुति… प्रथम दिन, 1 नवंबर पं० माता प्रसाद मिश्र एवं पं० रविशंकर मिश्र–कथक युगल नृत्य कविता मोहन्ती–ओडिसी नृत्य विदुषी श्वेता दुबे–गायन विदुषी कमला शंकर–स्लाइड गिटार डॉ० रिपि मिश्र–शास्त्रीय गायन डॉ० दिवाकर कश्यप एवं डॉ० प्रभाकर कश्यप–उपशास्त्रीय गायन रवि शर्मा एवं समूह–ब्रज लोक नृत्य एवं संगीत पं० नवल किशोर मल्लिक–शास्त्रीय गायन दूसरा दिन, 2 नवंबर शिवानी शुक्ला–गायन प्रवीण उद्भव–तालयात्रा राजकुमार तिवारी उर्फ राजन तिवारी–गायन डॉ० अर्चना आदित्य महास्कर–गायन सवीर, साकार कलाकृति–पारम्परिक लोक नृत्य वन्दना मिश्रा–गायन प्रो० पं० साहित्य नाहर एवं डॉ० पं० संतोष नाहर–सितार एवं वायलिन जुगलबन्दी ओम प्रकाश–भजन गायन पद्मश्री गीता चन्द्रन–भरतनाट्यम तीसरा दिन 3 नवंबर मीना मिश्रा–गायन विशाल कृष्ण–कथक नृत्य दिव्या शर्मा–हिन्दुस्तानी खयाल गायकी  राकेश कुमार–जनजातीय लोक नृत्य  इन्दु गुप्ता–लोक गायन चेतन जोशी–बांसुरी वादन  विदुषी कविता द्विवेदी–ओडिसी नृत्य  पद्मश्री मालिनी अवस्थी–लोक गायन  चौथा दिन, 4 नवंबर डॉ० शुभांकर डे–गायन डॉ० प्रेम किशोर मिश्र एवं साथी-सितार, सरोद जुगलबन्दी व गायन राहुल रोहित मिश्र–शास्त्रीय गायन रूपन सरकार समन्ता–शास्त्रीय गायन वासुमती बद्रीनाथन–शास्त्रीय गायन शिवानी मिश्रा–कथक समूह नृत्य मानसी रघुवंशी–गायन हंसराज रघुवंशी–भजन गायन

बच्चों की पढ़ाई अब किताबों के ज्ञान के साथ प्रयोगशाला और जीवन से जुड़ेगी

'लर्निंग बाय डूइंग' को नई उड़ान दे रही योगी सरकार, 3288 विज्ञान-गणित शिक्षक बनेंगे कौशल शिक्षक बच्चों की पढ़ाई अब किताबों के ज्ञान के साथ प्रयोगशाला और जीवन से जुड़ेगी ‘लर्निंग बाय डूइंग’ से बदलेंगे कक्षाओं के रंग' बुनियादी शिक्षा में नवाचार की पाठशाला होगी शुरू  3 नवंबर से शुरू होगा नव चयनित 3288 अध्यापकों का महाकैंप दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, लखनऊ में 03 नवम्बर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक तथा उद्यमिता विकास संस्थान लखनऊ में 16 फरवरी से 18 मार्च तक चलेगा प्रशिक्षण अब स्कूल शिक्षक तैयार करेंगे जिज्ञासा और कौशल-आधारित कक्षाएं, निखरे नौनिहाल गढ़ेंगे भारत का भविष्य  बच्चों को समझने और खोजने की शिक्षा देना है लक्ष्य: संदीप सिंह लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बुनियादी शिक्षा को प्रयोगधर्मी, कौशल-आधारित और भविष्य-केंद्रित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा रही है। बच्चों में रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर ‘सीखो करके’ (Learning by Doing) की संस्कृति विकसित करने के लिए सरकार शिक्षण पद्धति में व्यापक नवाचार लागू कर रही है। इसी के तहत प्रदेश के 3288 चयनित परिषदीय विद्यालयों और डायट संस्थानों में एलबीडी मॉडल को प्रभावी रूप से लागू करने की विस्तृत कार्ययोजना पर मिशन मोड में काम जारी है। योगी सरकार अब 3 नवंबर 2025 से दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, लखनऊ में 1888 अध्यापकों तथा उद्यमिता विकास संस्थान लखनऊ में 16 फरवरी से 18 मार्च तक 1400 (कुल 3288) विज्ञान एवं गणित अध्यापकों के त्रिदिवसीय कौशल आधारित ट्रेनर्स प्रशिक्षण महाकैंप की शुरुआत करने जा रही है। यह आवासीय प्रशिक्षण इस अवधि में कुल 66 बैचों में पूरा होगा। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे कौशल युक्त शिक्षक तैयार करना है, जो आगे विद्यालय स्तर पर बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को प्रयोगशाला, प्रोजेक्ट, मॉडल, गतिविधि और वास्तविक जीवन अनुभवों से जोड़कर पढ़ाएंगे।  बच्चों को 'समझने, परखने और खोजने' की शिक्षा देना है लक्ष्य:  बेसिक शिक्षा मंत्री बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के कक्षाकक्ष ऐसे हों, जहाँ 'याद करने' की जगह 'समझने, परखने और खोजने' पर ज़ोर हो। यह पहल NEP-2020 के मूल दर्शन और भविष्य की स्किल-इकोनॉमी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युग और नवाचार-प्रधान भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप भी है। बच्चों को निष्क्रिय श्रोता से सक्रिय शिक्षार्थी में बदलता 'लर्निंग बाय डूइंग' शिक्षा विशेषज्ञों की मानें तो जब एक बच्चा स्वयं प्रयोग करता है, वस्तुओं से खेलते-खेलते सीखता है, प्रश्न पूछता है और समाधान खोजता है; तब उसकी जिज्ञासा, तार्किक सोच, वैज्ञानिक दृष्टि, अभिव्यक्ति और समस्या-समाधान क्षमता अत्यधिक तीव्र होती है। यही 'लर्निंग बाय डूइंग' की सबसे बड़ी शक्ति है। यह बच्चों को निष्क्रिय श्रोता से सक्रिय शिक्षार्थी में बदलता भी है। बुनियादी शिक्षा में नई संस्कृति विकसित करने का है प्रयास इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को बुनियादी शिक्षा में एक नई संस्कृति विकसित करने का प्रयास माना जा रहा है। इससे उत्तर प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की एक नई संस्कृति विकसित होगी, जहाँ विद्यालय ज्ञान देने के केंद्र के साथ अनुभवों की प्रयोगशाला बनकर उभरेंगे। यह प्रयास आने वाली पीढ़ी को अधिक सक्षम, आत्मविश्वासी और रचनात्मक बनाकर नए भारत के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका को मजबूत करेगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने कहा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी का कहना है कि हमारा प्रयास है कि बच्चे, निःसंकोच रूप से प्रश्न पूछें, विद्यालयों की प्रयोगशालाएं जीवंत हों, वे मॉडल बनें और अध्यापक, हर कक्षा के विद्यार्थी में सोचने की ताकत जगाने का माध्यम बनें। यही भविष्य के उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था की नई पहचान होगी।

उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए महाअभियान, मिशन शक्ति फेज-5.0 की शुरुआत

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मिशन शक्ति एक क्रांतिकारी पहल है, जो महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। फेज-5.0 का शुभारंभ 20 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया, यह एक माह लंबा अभियान है, जो महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने पर केंद्रित है। मिशन शक्ति की आधिकारिक वेबसाइट (upmissionshakti.in) के अनुसार, यह पहल जागरूकता बढ़ाने, सुरक्षित वातावरण बनाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखती है। अब तक के चरणों में लाखों महिलाओं को लाभ पहुंचाने वाली यह योजना फेज-5.0 में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है, जिसमें स्वास्थ्य हेल्पलाइन, ड्राइविंग प्रशिक्षण और मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता जैसे नवीन आयाम जोड़े गए हैं। मिशन शक्ति फेज-5.0 का उद्देश्य- मिशन शक्ति फेज-5.0 का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को हिंसा, शोषण और असमानता से मुक्त समाज प्रदान करना है। यह तीन प्रमुख स्तंभों—सुरक्षा (Safety), सम्मान (Dignity) और स्वावलंबन (Self-Reliance)—पर आधारित है। • सुरक्षा: अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, जैसे कि अभियान के दौरान 2,500 से अधिक FIR और 3,900 गिरफ्तारियां। • सम्मान: सामाजिक जागरूकता के माध्यम से महिलाओं को समाज का अभिन्न अंग मानना। • स्वावलंबन: कौशल विकास, उद्यमिता और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉन्च के दौरान कहा, "मिशन शक्ति महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता का मार्ग दिखा रहा है, और इसके सकारात्मक परिणाम हर जगह दिखाई दे रहे हैं।" यह अभियान न केवल सरकारी योजना है, बल्कि पूरे समाज को जोड़ने वाला जन आंदोलन बन चुका है। सरकार द्वारा महिलाओं को जागरूक करने के तरीके: उत्तर प्रदेश सरकार मिशन शक्ति फेज-5.0 के तहत बहुआयामी जागरूकता अभियान चला रही है, जो ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। यह अभियान स्कूलों, पंचायतों, पुलिस स्टेशनों और सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से संचालित हो रहा है। यहां कुछ प्रमुख उदाहरण दिए जा रहे हैं: 1. बाइक रैलियां और सड़क नाटक: 21 सितंबर 2025 को सभी जिलों में विशाल बाइक रैलियां आयोजित की गईं, जिसमें हजारों महिलाएं और युवतियां शामिल हुईं। इसके अलावा, 45,000 से अधिक स्कूलों में छात्राओं द्वारा नौ दुर्गा रूपों पर आधारित स्ट्रीट प्ले (नुक्कड़ नाटक) प्रस्तुत किए गए, जो महिलाओं की शक्ति और सुरक्षा पर केंद्रित थे। ये कार्यक्रम जागरूकता फैलाने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। 2. महिला बीट ऑफिसर तैनाती: अभियान के दौरान 44,177 महिला पुलिसकर्मियों को 57,000 ग्राम पंचायतों और 14,000 शहरी वार्डों में तैनात किया गया। ये अधिकारी घर-घर जाकर महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, हेल्पलाइन नंबरों (जैसे 1090, 181) और सेल्फ-डिफेंस तकनीकों के बारे में जागरूक कर रही हैं। 3. स्वास्थ्य और स्वच्छता जागरूकता कार्यशालाएं: 10 अक्टूबर 2025 को मासिक धर्म स्वच्छता पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जहां विशेषज्ञों ने सैनिटरी पैड के सुरक्षित उपयोग और निपटान पर चर्चा की। मिथकों को दूर करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया गया, जिससे हजारों महिलाओं को लाभ हुआ। इसके अलावा, 'ड्राइविंग माय ड्रीम्स' पहल के तहत 3,000 से अधिक लड़कियों को मुफ्त ड्राइविंग ट्रेनिंग दी जा रही है, जो उनकी स्वावलंबन को बढ़ावा दे रही है। 4. कन्या पूजन और सम्मान समारोह: नवरात्रि के दौरान 5 लाख से अधिक बालिकाओं का कन्या पूजन किया गया, जो शिक्षा, सम्मान और आर्थिक सहायता (कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से) पर जोर देता है। झांसी जैसे जिलों में विशेष आयोजनों में महिलाओं को सम्मानित किया गया, जहां मिशन शक्ति की सफलताओं पर चर्चा हुई। ये अभियान न केवल जागरूकता फैला रहे हैं, बल्कि महिलाओं को सक्रिय भागीदार बना रहे हैं, जिससे अपराध दर में कमी आ रही है। महिलाओं के सम्मान की प्रेरणादायक कहानियां मिशन शक्ति फेज-5.0 ने कई महिलाओं को नई दिशा दी है, जो अब समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। यहां कुछ चुनिंदा कहानियां हैं: • जौनपुर की रानी देवी: मत्स्य पालन की 'लाखपति दीदी': जौनपुर जिले की रानी देवी एक साधारण गृहिणी थीं, लेकिन मिशन शक्ति और ब्लू रेवोल्यूशन योजना के तहत 15 लाख रुपये की अनुदान राशि और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने मत्स्य पालन व्यवसाय शुरू किया। आज वे न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी सशक्त बना रही हैं। उनकी सफलता उत्तर प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र में लहरें पैदा कर रही है। • लखपति दीदी कार्यक्रम की लाभार्थी: आशा और उद्यमिता की मिसाल: नवंबर 2024 तक लाखपति दीदी योजना के तहत हजारों महिलाओं ने स्वरोजगार अपनाया। लखनऊ की एक महिला, जिन्होंने मिशन शक्ति के कौशल विकास केंद्र से सिलाई प्रशिक्षण लिया, आज अपना बुटीक चला रही हैं और 10 अन्य महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। यह योजना महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी दिला रही है। • कन्या सुमंगला की कहानी: शिक्षा से सशक्तिकरण: नवरात्रि के कन्या पूजन में सम्मानित एक बालिका, वाराणसी की प्रिया, ने योजना की सहायता से अपनी पढ़ाई पूरी की और अब आईएएस की तैयारी कर रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा, "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं उत्तर प्रदेश को महिलाओं के सशक्तिकरण में अग्रणी बना रही हैं।" ये कहानियां साबित करती हैं कि मिशन शक्ति केवल योजना नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाला आंदोलन है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषणों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन शक्ति फेज-5.0 के लॉन्च और विभिन्न आयोजनों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर गहन चर्चा की है। उनके भाषण समाज को दिशा दे रहे हैं: • लॉन्च समारोह (20 सितंबर 2025): लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा, "महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन एक मजबूत समाज और समृद्ध राष्ट्र की नींव हैं। मिशन शक्ति केवल अभियान नहीं, बल्कि जन आंदोलन है। 2017 से पहले बेटियां असुरक्षित महसूस करती थीं, लेकिन आज अंगनवाड़ी केंद्रों से लेकर पुलिस स्टेशनों तक परिवर्तन आया है।" उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की भी प्रशंसा की। • झांसी सम्मान समारोह (27 सितंबर 2025): "उत्तर प्रदेश ने महिलाओं को सशक्त करने में मजबूत उदाहरण स्थापित किया है। मिशन शक्ति के माध्यम से हम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं को मजबूत कर रहे हैं। महिलाओं को शक्ति देना राष्ट्र निर्माण का मूल मंत्र है।" • नवरात्रि कन्या पूजन (अक्टूबर 2025): "कन्या पूजन से हम न … Read more

युवा शक्ति का महापर्व है जंबूरी, यह युवाओं के अनुशासन, सेवा भावना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त करेगा: मुख्यमंत्री

61 वर्ष बाद उत्तर प्रदेश की मेजबानी में आयोजित होगी भारत स्काउट्स एंड गाइड्स जंबूरी, मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य के लिए गौरवपूर्ण अवसर युवा शक्ति का महापर्व है जंबूरी, यह युवाओं के अनुशासन, सेवा भावना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त करेगा: मुख्यमंत्री 23 से 29 नवम्बर तक लखनऊ के डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में होगा 19वां राष्ट्रीय जंबूरी, 30,000 से अधिक प्रतिभागी होंगे शामिल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के 19वें राष्ट्रीय जंबूरी की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की मुख्यमंत्री ने महाकुंभ की तर्ज पर सुरक्षा, आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य और खानपान की व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए 300 एकड़ क्षेत्र में फैले जंबूरी स्थल पर 3,500 टेंट, 2,200 शौचालय, 1,700 बाथरूम और 100 रसोईघरों की होगी व्यवस्था मुख्यमंत्री का निर्देश, सुरक्षा, सुविधा और समन्वय का मानक होगी राष्ट्रीय जंबूरी, कहा, डिजिटल इंडिया की झलक भी दिखे पहली बार होगा दो दिवसीय भव्य ड्रोन शो, आरएफआईडी स्मार्ट आईडी कार्ड और व्हाट्सएप कम्युनिकेशन नेटवर्क राज्यवार प्रदर्शनियों के साथ ग्लोबल विलेज, 75 वर्ष की स्काउटिंग प्रदर्शनी, एयर अग्निवीर, एक जिला-एक उत्पाद, सोलर, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्मी प्रदर्शनियां भी देखने को मिलेंगी आयोजन पूर्णतः ग्रीन और सस्टेनेबल हो, कचरा पृथक्करण, ई-कार्ट और ग्रीन वॉल जैसी व्यवस्था भी हो: मुख्यमंत्री विकसित भारत के युवा नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रतीक बनेगी 19वां राष्ट्रीय जंबूरी : मुख्यमंत्री जंबूरी में रैपलिंग, वॉल क्लाइम्बिंग, स्काई साइकिलिंग, ज़िप लाइन, आर्चरी, शूटिंग, ज़ोर्बिंग बॉल्स, कमांडो ब्रिज, प्लैंक ब्रिज जैसी स्किल वर्कशॉप, एडवेंचर और अम्यूजमेंट एक्टिविटीज का भी होगा आयोजन लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आगामी भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के 19वें राष्ट्रीय जंबूरी की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। यह प्रतिष्ठित आयोजन 23 से 29 नवम्बर 2025 तक लखनऊ स्थित डिफेंस एक्सपो ग्राउंड, सेक्टर-15, वृंदावन योजना में आयोजित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 61 वर्षों बाद उत्तर प्रदेश को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी मिलना राज्य के लिए गौरव का विषय है। यह अवसर युवा शक्ति के अनुशासन, राष्ट्रसेवा और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त रूप में प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह आयोजन उत्तर प्रदेश की दक्षता, व्यवस्था, सुरक्षा और आतिथ्य क्षमता का परिचायक बने। उन्होंने निर्देश दिए कि महाकुंभ की तर्ज पर सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य, आवास, खानपान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सभी व्यवस्थाएं पूरे समन्वय के साथ की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 19वें राष्ट्रीय जंबूरी की थीम 'आत्मनिर्भर-स्वदेशी भारत, स्वच्छ एवं विकसित भारत, ग्रीन एवं सस्टेनेबल भारत' हर स्तर पर प्रतिबिंबित होना चाहिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की डायमंड जुबिली का ग्रैंड फिनाले होगा, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से 28,000 से 29,000 स्काउट्स एवं गाइड्स, विदेशों से लगभग 1,000 से 2,000 प्रतिभागी तथा करीब 5,000 स्वयंसेवक एवं स्टाफ सदस्य सम्मिलित होंगे। आयोजन स्थल लगभग 300 एकड़ क्षेत्रफल में फैला होगा, जिसकी परिधि 7 किलोमीटर से अधिक होगी। योजना के अनुसार, 3,500 टेंट, 2,200 शौचालय, 1,700 बाथरूम, 100 रसोई और 4 सेंट्रल किचन की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 10 लाख वर्गफुट क्षेत्रफल वाले मुख्य एरीना स्टेडियम में 30,000 दर्शकों के बैठने की सुविधा होगी, जिसमें 12 प्रवेश द्वार, 11 एलईडी स्क्रीन और 5 जर्मन हैंगरयुक्त वीवीआईपी गैलरी बनाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर उत्तर प्रदेश को अपनी परंपराओं, संस्कृति और नवाचारों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने निर्देश दिया कि एक्सपो ग्राउंड में प्रदर्शनी स्टॉल स्थापित किए जाएं, जिनमें राज्यवार प्रदर्शनियों के साथ ग्लोबल विलेज, 75 वर्ष की स्काउटिंग प्रदर्शनी, एयर अग्निवीर, एक जिला-एक उत्पाद, सोलर, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्मी प्रदर्शनियां भी लगाई जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन युवाओं में तकनीकी, सामाजिक और नेतृत्व कौशल को विकसित करने का अवसर बनेगा। इस उद्देश्य से आईटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब की स्थापना की जा रही है, जहां डिजिटल लर्निंग, लीडरशिप और इनोवेशन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल डिजिटल इंडिया और स्मार्ट स्काउटिंग की दिशा में नया अध्याय सिद्ध होगी। बैठक में बताया गया कि आयोजन स्थल पर 100 बेड का अस्पताल, 16 डिस्पेंसरी, पुलिस स्टेशन, पुलिस पोस्ट, नियंत्रण कक्ष, 11 फायर टेंडर सहित फायर स्टेशन, प्रशासनिक कार्यालय, ओवरसीज कैफेटेरिया और मीडिया सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संपूर्ण आयोजन परिसर को 24×7 सीसीटीवी निगरानी में रखा जाए, जिसमें नाइट विजन, फेस डिटेक्शन और पीटीजेड कैमरे लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली हर समय सक्रिय रहे। प्रकाश व्यवस्था अच्छी हो। उन्होंने यह भी कहा कि देश-विदेश से आ रहे प्रतिभागी युवाओं का लखनऊ प्रवास सुखद हो, इसके लिए आवश्यक है कि विभिन्न विभागों द्वारा तैनात कार्मिकों को अच्छे व्यवहार के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाए। मुख्यमंत्री ने स्वच्छता और सतत विकास की अवधारणा पर विशेष बल देते हुए कहा कि जंबूरी पूरी तरह ग्रीन और सस्टेनेबल हो। अधिकारियों ने बताया कि गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण, कम्पोस्टिंग, प्लास्टिक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण तथा 'ग्रीन वॉरियर्स' कार्यक्रम के माध्यम से यह लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। ई-कार्ट परिवहन, ग्रीन प्लेज वॉल और थीमैटिक सेल्फी पॉइंट्स जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जंबूरी में आने वाले देश-दुनिया के अतिथियों के उत्तर प्रदेश भ्रमण के लिए भी आवश्यक प्रबंध किए जाएं। बैठक में यह भी बताया गया कि पहली बार जंबूरी में दो दिवसीय भव्य ड्रोन शो आयोजित होगा, जिसमें सैकड़ों ड्रोन समन्वित रूप में आकाश में स्काउटिंग और युवा सशक्तीकरण की कहानी प्रस्तुत करेंगे। साथ ही, आरएफआईडी आधारित स्मार्ट आईडी कार्ड से प्रतिभागियों की एंट्री और उपस्थिति प्रबंधन किया जाएगा। व्हाट्सएप आधारित संचार प्रणाली के माध्यम से सभी प्रतिभागियों को रियल-टाइम अपडेट और सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि जंबूरी में स्किल वर्कशॉप, एडवेंचर और अम्यूजमेंट गतिविधियाँ जैसे रैपलिंग, वॉल क्लाइम्बिंग, स्काई साइकिलिंग, ज़िप लाइन, आर्चरी, शूटिंग, ज़ोर्बिंग बॉल्स, कमांडो ब्रिज और प्लैंक ब्रिज आयोजित की जाएंगी।

लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

छठ हमारी सामाजिक एकता, आध्यात्मिक उन्नयन और प्राचीन विरासत का प्रतीक है- सीएम योगी  लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ का कोई ड्रेनेज या सीवर गोमती में नहीं गिरेगा, पीलीभीत से गाजीपुर तक निर्मल होगी नदी- सीएम योगी  छठ पर्व हमें एक-दूसरे के साथ जोड़ता है और सामाजिक बंधन मजबूत करता है- सीएम योगी – नागरिकों के राष्ट्रीय कर्तव्य से जुड़े बिना राष्ट्र विकसित नहीं हो सकता- सीएम – मुख्यमंत्री ने भोजपुरी में दी शुभकामनाएं, कहा- छठ मईया सबके जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेके आवें – स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक ही आत्मनिर्भर भारत का आधार हैं- सीएम योगी – मुख्यमंत्री ने की अपील- सिंगल यूज़ प्लास्टिक का बहिष्कार करें, स्वच्छता ही ईश्वर की सेवा है – तपस्या, आस्था और नारी शक्ति का अद्भुत संगम है छठ, बहनों की साधना लोककल्याण की भावना को सशक्त करती है- मुख्यमंत्री  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा न केवल आध्यात्मिक उन्नयन का माध्यम है, बल्कि सामाजिक एकता, प्राचीन भारतीय विरासत और प्रकृति से संवाद का प्रतीक भी है। गोमती तट के किनारे लक्ष्मण मेला मैदान में छठ घाट पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने छठ गीतों का आनंद लिया और भोजपुरिया सनेश स्मारिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने भोजपुरी में संबोधन देकर श्रद्धालुओं में उत्साह भर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ का कोई ड्रेनेज या सीवर गोमती में नहीं गिरेगा, पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती निर्मल व अविरल होगी। सीएम योगी ने कहा कि छठ महापर्व विश्वभर में बसे भोजपुरी समाज को आत्मशुद्धि और लोक कल्याण के मार्ग से जोड़ता है। उन्होंने भोजपुरी में शुभकामनाएं देते हुए कहा, "छठ मईया के कृपा सबके ऊपर बनल रहे सभन लोगन के परिवार मे शुख समृद्धि और खुशहाली रहे एकरे खातिन हम छठी माई से आशीर्वाद माँगत आनी जितना लोग व्रत बाटें उहें खातिर हम छठी माई से आशीर्वाद माँगत बानी की सबके भगवती उनके सपने के पूरा करें।"  छठ पर्व परिवार की सुख-समृद्धि के साथ लोकमंगल की कामना से जुड़ा है- सीएम योगी सीएम योगी ने कहा कि यह पर्व भारत की प्राचीन विरासत को दर्शाता है और प्रकृति से संवाद सिखाता है। चार दिनों की कठिन साधना में बहनों की तपस्या को विशेष रूप से सराहते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवार की सुख-समृद्धि के साथ लोकमंगल की कामना से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पौराणिक काल से चली आ रही यह परंपरा अब पूरे भारत में फैल चुकी है। पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी इलाकों तक लाखों श्रद्धालु जुड़ रहे हैं। उन्होंने गाजियाबाद और नोएडा का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 50 हजार से एक लाख तक भक्त छठ मना रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि कोई मंदिर, सरोवर या तालाब ऐसा नहीं जहां श्रद्धालु न जुड़े हों। यह एकता न केवल सांस्कृतिक है, बल्कि राष्ट्रीय एकजुटता का भी संदेश देती है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें एक-दूसरे के साथ जोड़ता है और सामाजिक बंधन मजबूत करता है। स्वच्छता सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व- मुख्यमंत्री सीएम योगी ने कहा कि कोई देश तब तक विकसित नहीं हो सकता, जब तक उसके नागरिक राष्ट्रीय कर्तव्य से नहीं जुड़ते। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को छठ से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से चल रहा यह अभियान पर्यावरण संरक्षण का आधार है। सीएम योगी ने सिंगल-यूज प्लास्टिक, पॉलीथिन और कूड़े के अंधाधुंध उपयोग पर रोक लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गंदगी के कारकों को हटाएं, उसे नदी-नालों में न फेंकें। अगर हर व्यक्ति इसका पालन करे, तो आधे से अधिक समस्या का समाधान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। नागरिकों के राष्ट्रीय कर्तव्य से जुड़े बिना राष्ट्र विकसित नहीं हो सकता। विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में यह प्रयास मदद करेगा। पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती अविरल और निर्मल बनेगी- सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले दो वर्षों में गोमती में जल स्तर कम होने और बदबू की शिकायतें आईं, लेकिन इस बार प्रशासन, सिंचाई विभाग, नगर निगम और स्वयंसेवी संगठनों की मेहनत से सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि एक महीने पहले बैठकें हुईं और अखिल भारतीय भोजपुरी समाज ने स्वच्छता अभियान चलाया। परिणामस्वरूप, गोमती का जल शुद्ध और पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि जल का अर्घ्य अगर शुद्ध न हो, तो भगवान कैसे स्वीकार करेंगे? पूजा स्थल की तरह नदी भी साफ-सुथरी होनी चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि एक से डेढ़ वर्ष में लखनऊ का कोई ड्रेनेज या सीवर गोमती में नहीं गिरेगा। पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती अविरल और निर्मल बनेगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि कल प्रातः आयोजन समाप्त होने के बाद स्वच्छता अभियान चलाएं। यह राष्ट्रीय कर्तव्य है, हर लखनऊवासी और प्रदेशवासी की जिम्मेदारी। सीएम योगी ने की अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के पदाधिकारियों की सराहना कार्यक्रम में सीएम ने अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के पदाधिकारियों की सराहना की और कहा कि सम-विषम परिस्थितियों में उन्होंने आयोजन को नई ऊंचाई दी। मुख्यमंत्री ने छठ को घरों से लेकर नदी तट तक मनाने की परंपरा का जिक्र किया और सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छठी मैया से प्रार्थना है कि सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों, परिवार और समाज में सुख-समृद्धि आए। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महापौर सुषमा खर्कवाल, अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के अध्यक्ष प्रभुनाथ राय, मॉरिशस प्रधानमंत्री के पूर्व सचिव सुरेश रामबरन समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारीगण मौजूद रहे।

सुगम्य भारत अभियान के तहत राजधानी लखनऊ के 5 भवनों का होगा कायाकल्प

सरकारी भवनों को दिव्यांग हितैषी बना रही योगी सरकार  सुगम्य भारत अभियान के तहत राजधानी लखनऊ के 5 भवनों का होगा कायाकल्प  रैंप, लिफ्ट, ब्रेल साइनेज, व्हीलचेयर फ्रेंडली सैनिटरी यूनिट्स की सुविधाओं से सुसज्जित होंगे भवन विशेष पार्किंग जैसी सुविधाओं के साथ ही दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि की सुविधा होंगी विकसित  श्रवणबाधितों के लिए होगी साइन लैंग्वेज सपोर्ट और विशेष अलार्म सिस्टम की सुविधा लखनऊ  उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में योगी सरकार लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सुगम्य भारत अभियान के दूसरे चरण के तहत राजधानी लखनऊ के पांच प्रमुख सरकारी भवनों को दिव्यांगजन हितैषी बनाने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इसके लिए बकायदा 12 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि पर स्वीकृत कर ली गई है। यह न केवल दिव्यांगों के लिए सरकारी भवनों में सुगम आवागमन सुनिश्चित करेगी, बल्कि सरकारी कार्यालयों को सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। जनकल्याण की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही योगी सरकार सुगम्य भारत अभियान के तहत सार्वजनिक स्थलों को दिव्यांगजनों के लिए पूर्णतः सुलभ बना रही है। योगी सरकार ने इसे प्रदेश स्तर पर जोर-शोर से लागू किया है। भवनों का चिन्हित किया जा रहा है। इसके दूसरे चरण में लखनऊ के पांच भवनों को चिन्हित किया गया है। इसमें योजना भवन (हैवलॉक रोड), सिंचाई भवन (कैनाल कालोनी, कैन्ट रोड), जिला सेवायोजन कार्यालय (लालबाग), विकास अनुवेषण, मूल्यांकन एवं प्रयोग तथा प्रशिक्षण प्रभाग (कालाकांकर हाउस, पुराना हैदराबाद) और सूडा नवचेतना केंद्र (10 अशोक मार्ग) शामिल हैं।  दिव्यांगजनों के लिए होंगी विशेष सुविधाएं इन भवनों में रैंप, लिफ्ट, ब्रेल साइनेज, व्हीलचेयर फ्रेंडली सैनिटरी यूनिट्स और विशेष पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कार्य एक्सेस ऑडिट रिपोर्ट के अनुरूप होंगे, जिसमें लिफ्ट कार का आकार व्हीलचेयर सहित दो व्यक्तियों के लिए पर्याप्त रखा जाएगा, ताकि दिव्यांगजन सहजता से आ-जा सकें। दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जबकि श्रवणबाधितों के लिए साइन लैंग्वेज सपोर्ट और विशेष अलार्म सिस्टम लगाए जाएंगे। दिव्यांगों के सम्मानजनक जीवन को बढ़ावा देने वाली नीतिगत प्रतिबद्धता का प्रतीक है।