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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का स्थलीय निरीक्षण

उत्तर प्रदेश के विकास का प्रतीक बनेगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्टः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का स्थलीय निरीक्षण डोमेस्टिक टर्मिनल, सुरक्षा और उद्घाटन समारोह स्थल का लिया जायजा एयरपोर्ट के शुभारंभ की तैयारियों को लेकर अधिकारियों के साथ की विस्तृत समीक्षा सीएम ने दिए गुणवत्ता, समयबद्धता और यात्री सुविधा को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश उच्च मानकों के अनुरूप सभी निर्माण और सुरक्षा कार्य संपन्न कराए जाएंः मुख्यमंत्री उद्घाटन समारोह की तैयारियों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाएः सीएम योगी गौतमबुद्धनगर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने डॉमेस्टिक टर्मिनल, उद्घाटन समारोह स्थल, सुरक्षा प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और अन्य निर्माण कार्यों की प्रगति का बारीकी से अवलोकन किया। निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने एयरपोर्ट के बोर्डरूम में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) और एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में परियोजना की प्रगति, आगामी कार्ययोजना और उद्घाटन समारोह की तैयारियों पर पावर प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी गई। इस दौरान, सीएम योगी ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रदेश के विकास का प्रतीक बनेगा, इसलिए निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और समन्वय सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में उच्च मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएँ और उद्घाटन समारोह की तैयारियों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के निर्देश समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने एयरपोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण, स्वच्छता और यात्री सुविधा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए ठोस और समन्वित कार्ययोजना तैयार करने को कहा। एयरपोर्ट से जुड़ी सड़क और मेट्रो लिंक परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने नागरिक उड्डयन, सुरक्षा, विस्फोटक निरोधक दस्ता, नियंत्रण इकाई, उप स्टेशन और आधारभूत संरचना से संबंधित अद्यतन जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने हवाई अड्डे के संचालन से जुड़े सभी तकनीकी, सुरक्षा एवं प्रशासनिक पहलुओं की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सीओओ किरण जैन ने एनआईए अनुज्ञा निर्गमन, यात्री सुरक्षा, रनवे, वायुसंचालन परीक्षण और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने हवाई अड्डे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को पूर्ण रूप से सुदृढ़ और चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए तथा कहा कि किसी भी प्रकार की शिथिलता अस्वीकार्य होगी। गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान मुख्यमंत्री ने हवाई अड्डे से सड़क संपर्क, माल परिवहन संपर्क, अग्निशमन केंद्र, जल शोधन संयंत्र, जलभराव निस्तारण एवं वाहन पार्किंग की व्यवस्थाओं की भी विस्तार से समीक्षा की। नायल के सीईओ राकेश कुमार सिंह और नोडल अफसर शैलेन्द्र भाटिया ने प्रगति और कनेक्टिविटी के सम्बन्ध में अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों को सुगम एवं सुरक्षित अनुभव प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां निर्धारित समय सीमा में पूरी कर ली जाएं। उन्होंने निर्देश दिये कि हवाई अड्डे के सभी कार्यों की प्रगति नियमित रूप से समीक्षा कर गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। जनसभा स्थल तक सभी मार्गों पर यातायात एवं पार्किंग व्यवस्था हो दुरुस्त मुख्यमंत्री ने आगामी जनसभा एवं रैली की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभा स्थल पर भूमि समतलीकरण, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पुलिस सुरक्षा, पेयजल, शौचालय और अन्य सभी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त रखा जाए ताकि आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनसभा स्थल तक पहुंचने वाले सभी मार्गों पर यातायात एवं पार्किंग व्यवस्था सुचारू रखी जाए तथा संपूर्ण क्षेत्र में सुरक्षा प्रबंध, स्वच्छता एवं प्रकाश की व्यवस्था उच्च स्तर की सुनिश्चित की जाए। 150 उड़ानें प्रतिदिन हो सकेंगी संचालित जेवर एयरपोर्ट का लोकार्पण कराए जाने वाले हिस्से का क्षेत्रफल 3,300 एकड़ है, जबकि कुल 6,700 एकड़ भूमि का अब तक अधिग्रहण किया जा चुका है शेष 5,100 एकड़ भूमि अगले तीन माह में ली जाएगी। भूमि क्रय की लागत लगभग ₹5,000 करोड़ और एयरपोर्ट निर्माण की लागत ₹7,000 करोड़ है। उद्घाटन के समय एयरपोर्ट एक रनवे के साथ क्रियाशील होगा और इसकी वार्षिक यात्री क्षमता 1.2 करोड़ होगी। साथ ही, औसतन प्रतिदिन 150 उड़ानें यहां से संचालित होंगी। भविष्य में यात्रियों की संख्या 1 करोड़ से अधिक होने पर दूसरे रनवे का निर्माण शुरू हो जाएगा और दोनों रनवे मिलकर 7 करोड़ यात्रियों की सेवा करेंगे। जेवर एयरपोर्ट के पूर्ण स्वरूप में कुल 5 रनवे होंगे, इसका कुल क्षेत्रफल 11,750 एकड़ होगा और यह प्रतिवर्ष 30 करोड़ यात्रियों को सेवा देने में सक्षम होगा। उत्तर प्रदेश में 24 एयरपोर्ट्स, 16 संचालित उत्तर प्रदेश में कुल 24 एयरपोर्ट्स हैं, जिनमें से 16 संचालित हो चुके हैं। वहीं जेवर एयरपोर्ट बनकर तैयार हो चुका है और अब इसका जल्द ही शुभारंभ होने वाला है। वहीं, 7 एयरपोर्ट्स निर्माणाधीन हैं। संचालित एयरपोर्ट्स में घरेलू स्तर पर आगरा, त्रिशूल (बरेली), गोरखपुर, हिंडन (गाजियाबाद), प्रयागराज, कानपुर, अलीगढ़, आजमगढ़, मुरादाबाद, श्रावस्ती, चित्रकूट और सहारनपुर शामिल हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर और अयोध्या एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शुभारंभ होते ही उत्तर प्रदेश 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाला देश का इकलौता राज्य बन जाएगा। निर्माणाधीन एयरपोर्ट्स की बात करें तो सोनभद्र, ललितपुर, मेरठ, गाजीपुर, झांसी, अमेठी और पलिया में भी इस पर तेजी से कार्य चल रहा है जो भविष्य में प्रदेश के वायु संपर्क और पर्यटन को और मजबूत करेंगे। योगी सरकार में सिविल एविएशन की तीव्र प्रगति उत्तर प्रदेश अब सिविल एविएशन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो रहा है। वर्ष 2024-25 में करीब 1.5 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की, जिसमें 1.3 करोड़ घरेलू यात्री तो वहीं 13 लाख से ज्यादा इंटरनेशनल यात्री शामिल रहे। 2017 से 2025 के बीच यात्री संख्या में 10.1 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से वृद्धि हुई है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआत से लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। वहीं, बेहतर एयर कनेक्टिविटी से प्रदेश में पर्यटन को भी नया आयाम मिला है, विशेषकर अयोध्या और वाराणसी जैसे धार्मिक स्थलों पर … Read more

46 वर्षों बाद अपने आध्यात्मिक स्वरूप में लौट रहा संभल, सांस्कृतिक धरोहर को मिल रही पहचान

सीएम योगी के प्रयासों से पुनः शुरू हुई संभल की पौराणिक 24 कोसी परिक्रमा 46 वर्षों बाद अपने आध्यात्मिक स्वरूप में लौट रहा संभल,  सांस्कृतिक धरोहर को मिल रही पहचान एक बार फिर संभल अपनी पौराणिक पहचान ‘भगवान कल्कि की नगरी’ के रूप में जगमगा उठा   – 1978 में सांप्रदायिक दंगों के कारण रुकी यह परंपरा अब योगी सरकार के प्रयासों से फिर शुरू – संभल में मजबूत हुआ कानून का इकबाल, अवैध कब्जों से मिली मुक्ति, धार्मिक धरोहरों का हुआ पुनरुद्धार  – सीएम योगी के प्रयासों से मालामाल हो रहा संभल, ₹2405 करोड़ के निर्यात के साथ हासिल किया प्रदेश में 10वां स्थान  लखनऊ  संभल में इतिहास फिर से करवट ले रहा है। जहां कभी दंगों, पलायन और अवैध कब्जों की छाया थी, वहीं अब आस्था, अध्यात्म और सुरक्षा का सूर्योदय दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संभल एक बार फिर अपनी पौराणिक पहचान ‘भगवान कल्कि की नगरी’ के रूप में जगमगा उठा है। शुक्रवार रात्रि 2 बजे संभल के 68 तीर्थ और 19 कूपों की 24 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ प्राचीन तीर्थ बेनीपुरचक स्थित श्रीवंशगोपाल से लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में हुआ। शंखनाद, भजन और जयघोषों के बीच निकली यह परिक्रमा 46 वर्षों बाद पुनः आरंभ हुई है। 1978 में सांप्रदायिक दंगों के कारण रुकी यह परंपरा 2024 में योगी सरकार के प्रयासों से फिर से जीवित हो उठी। धार्मिक मान्यता है कि इस परिक्रमा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह परिक्रमा श्रीवंशगोपाल तीर्थ से प्रारंभ होकर भुवनेश्वर, क्षेमनाथ और चंदेश्वर तीर्थों से होते हुए पुनः वंशगोपाल तीर्थ पर लौटती है। इन तीन प्रमुख तीर्थों के मध्य 87 देवतीर्थ स्थित हैं, जो सम्भल की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक हैं। 2017 के बाद बदला संभल का परिदृश्य  1978 के दंगों के बाद सम्भल में जो भय, अविश्वास और पलायन का माहौल बना, उसने दशकों तक यहां के सामाजिक ताने-बाने को चोट पहुंचाई। हिंदू परिवारों ने अपने घर, दुकानें और जमीनें छोड़ीं; मंदिरों पर कब्जे हुए और धर्मिक आयोजनों पर रोक लग गई। परंतु 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। सीएम योगी ने संभल की स्थिति को व्यक्तिगत रूप से गंभीरता से लिया। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने उन सच्चाइयों को उजागर किया जिन्हें वर्षों तक दबाया गया। सत्ता संरक्षण में जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की कोशिशें हुईं और हिंदुओं को सुनियोजित रूप से पलायन के लिए विवश किया गया। योगी सरकार ने इन सभी मामलों में कठोर कार्रवाई की। दंगों की साजिश में शामिल तत्वों को जेल भेजा गया, अवैध कब्जों को हटाया गया और सांप्रदायिक राजनीति पर अंकुश लगाया गया। अवैध कब्जों से मिली मुक्ति, धार्मिक धरोहरों का हुआ पुनरुद्धार योगी सरकार ने संभल में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की ऐतिहासिक कार्रवाई की। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-67 के तहत 495 वाद दर्ज हुए, जिनमें से 243 मामलों का निस्तारण कर 1067 अतिक्रमण हटाए गए। इस प्रक्रिया में 68.94 हेक्टेयर भूमि कब्जामुक्त कराई गई। यही नहीं, धार्मिक स्थलों पर हुए अवैध कब्जों पर भी निर्णायक कार्रवाई हुई। विशेष अभियान के तहत 37 अवैध कब्जे हटाए गए, जिसमें 16 मस्जिदें, 12 मजारें, 7 कब्रिस्तान और 2 मदरसे शामिल थे। कुल 2.623 हेक्टेयर भूमि को मुक्त कराया गया। साथ ही 68 पौराणिक तीर्थस्थलों और 19 प्राचीन कूपों के संरक्षण व सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया आरंभ की गई है। कल्कि अवतार मंदिर समेत अनेक प्राचीन स्थलों पर पुनरुद्धार कार्य चल रहे हैं। संभल में मजबूत हुआ कानून का इकबाल  संभल में अब कानून का इकबाल मजबूत हुआ है। योगी सरकार ने बीते कुछ वर्षों में 2 नए थाने और 45 नई चौकियां स्थापित की हैं। संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन सर्वे की व्यवस्था की गई है। अपराधियों पर कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक विश्वास की नींव रखी गई है। बिजली चोरी रोकने के लिए चलाए गए अभियानों से लाइन लॉस 82% से घटकर 18% पर पहुंच गया है, जिससे 84 करोड़ रुपये की राजकीय धनराशि की बचत हुई। आर्थिक दृष्टि से भी संभल ने छलांग लगाई है।  ₹2405 करोड़ के निर्यात के साथ यह अब प्रदेश में 10वें स्थान पर है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत संभल के मेटैलिक, वुडन और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं।

कृषि से औद्योगिक प्रगति की नई कहानी लिख रहा उत्तर प्रदेश

योगी सरकार में प्रॉसेसिंग हब बन रहा उत्तर प्रदेश कृषि से औद्योगिक प्रगति की नई कहानी लिख रहा उत्तर प्रदेश ग्लोबल ट्रेड रिसर्च रिपोर्ट में यूपी-गुजरात को बताया गया भारत का ‘फूड प्रोसेसिंग पावरहाउस’  आगरा और फर्रूखाबाद में बन रहे अत्याधुनिक संयंत्र, किसानों को मिल रहा दोगुना लाभ प्रदेश में लगभग 65,000 फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स से करीब 2.5 लाख को मिल रहा रोजगार योगी सरकार ने हर जिले में 1,000 नई प्रॉसेसिंग यूनिट्स लगाने का रखा है लक्ष्य बरेली, बाराबंकी और वाराणसी में एग्रो पार्क दे रहे विकास को गति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को औद्योगिक शक्ल दे रहा है। राज्य तेजी से भारत का फूड प्रोसेसिंग हब बनकर उभर रहा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च की हालिया रिपोर्ट में गुजरात और उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख प्रोसेसिंग केंद्रों के रूप में रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति पक्ष पर जहां गुजरात के मेहसाणा और बनासकांठा में आधुनिक डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) संयंत्र विकसित हुए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के आगरा और फर्रूखाबाद जिलों में नए अत्याधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट्स स्थापित हो रहे हैं। इन संयंत्रों को कांट्रैक्ट फार्मिंग और कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क का मजबूत आधार प्राप्त है, जिससे किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल रहा है। योगी सरकार का यह मिशन न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश को एक ‘कृषि से उद्योग’ परिवर्तन मॉडल के रूप में स्थापित कर रहा है—जहां खेत से लेकर फैक्ट्री तक हर स्तर पर विकास की गूंज सुनाई दे रही है। 2.55 लाख युवाओं को रोजगार  राज्य में फिलहाल 65,000 से अधिक फूड प्रोसेसिंग इकाइयां संचालित हैं, जिनसे करीब 2.55 लाख युवाओं को रोजगार मिला है। सरकार का लक्ष्य हर जिले में कम से कम 1,000 नई प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करना है, जिससे खेती को मूल्य संवर्धन (Value Addition) और रोजगार दोनों के अवसर मिलेंगे। योगी सरकार ने अब तक 15 से अधिक एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग पार्क विकसित किए हैं, जिनमें बरेली, बाराबंकी, वाराणसी और गोरखपुर प्रमुख हैं। बरेली में बीएल एग्रो द्वारा करीब ₹1,660 करोड़ की इंटीग्रेटेड एग्रो प्रोसेसिंग हब की स्थापना प्रस्तावित है, जिसमें चावल मिलिंग, तेल निष्कर्षण और पैकेजिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी। निर्यात और नवाचार के नए आयाम गढ़ रहा उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश सरकार का विशेष फोकस अब फल-सब्जी प्रसंस्करण, हाई-वैल्यू क्रॉप्स और निर्यात-उन्मुख उद्योगों पर है, ताकि राज्य की कृषि उत्पादकता वैश्विक बाजार से सीधे जुड़ सके। इसी दिशा में आगरा में इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की योजना बनाई गई है, जहां आलू और अन्य ट्यूबर फसलों पर अत्याधुनिक अनुसंधान होगा। यह पहल कानपुर, आगरा, लखनऊ और फर्रूखाबाद जैसे प्रमुख आलू उत्पादक जिलों के लिए बड़ा अवसर साबित होगी, जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतें और निर्यात संभावनाएं मिलेंगी। वर्तमान में अमेरिका, बांग्लादेश, यूएई और वियतनाम जैसे देश भारत से बड़े पैमाने पर प्रॉसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स का आयात कर रहे हैं, जिससे भारतीय प्रसंस्करण उद्योग को नई पहचान मिल रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत का उपभोक्ता व्यय $6 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा, जो उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लिए इस क्षेत्र में निवेश, रोजगार और निर्यात के अभूतपूर्व अवसर लेकर आएगा। नीति से मिल रही नई रफ्तार उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को गति देने के लिए योगी सरकार ने एक स्पष्ट और सशक्त वित्तीय व नीतिगत वातावरण तैयार किया है। राज्य की ‘खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023’ इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, जिसके तहत 19 नई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। नीति के तहत उद्यमियों को उत्पादन-आधारित सब्सिडी, ब्याज सहायता, भूमि उपयोग, स्टाम्प ड्यूटी और विकास शुल्क में छूट जैसी आकर्षक रियायतें दी जा रही हैं। इसके अलावा, सौर ऊर्जा, कोल्ड-चेन, क्लस्टर मॉडल और तकनीकी उन्नयन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नीति का मुख्य फोकस “कच्चे माल की स्थानीय उपलब्धता” पर है, ताकि किसानों, प्रोसेसर्स और उद्यमियों के बीच त्रिस्तरीय वैल्यू चेन बन सके। बड़े बाजार, उत्पादन की कम लागत और दक्ष मानव संसाधन जैसी खूबियों के कारण उत्तर प्रदेश आज देश के सबसे आकर्षक फूड प्रोसेसिंग निवेश केंद्रों में गिना जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि का निर्णय

मुख्यमंत्री योगी का बड़ा निर्णय, 30 वर्ष बाद बढ़ेंगे पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकार मुख्यमंत्री योगी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि का निर्णय वर्ष 1995 में तय सीमाएं अब पुरानी, लागत बढ़ने के अनुरूप अब हो रहा वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण मुख्य अभियंता को अब ₹10 करोड़, अधीक्षण अभियंता को ₹5 करोड़ तक कार्य स्वीकृति का अधिकार अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता के अधिकारों में भी बढ़ोतरी से निर्णय प्रक्रिया होगी त्वरित मुख्यमंत्री के निर्णय से निविदा, अनुबंध व कार्यारंभ प्रक्रिया में तेजी, प्रशासनिक दक्षता व पारदर्शिता में वृद्धि होगी उत्तर प्रदेश अभियंता सेवा (लोक निर्माण विभाग) (उच्चतर) नियमावली, 1990 में होगा संशोधन विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग में पहली बार मुख्य अभियंता (स्तर-एक) का नया पद शामिल मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों की संख्या बढ़ी, पदोन्नति प्रक्रिया स्पष्ट होगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोक निर्माण विभाग के विभागीय अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पाँच गुना तक की वृद्धि किए जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बदलावों से विभागीय अधिकारियों को निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी। उच्च स्तर पर अनुमोदन की आवश्यकता घटने से निविदा, अनुबंध गठन एवं कार्यारंभ की प्रक्रिया में गति आएगी। यह सुधार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने में सहायक होगा। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विभाग के अधिकारियों के वित्तीय अधिकार वर्ष 1995 में निर्धारित किए गए थे। इस बीच निर्माण कार्यों की लागत में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के अनुसार वर्ष 1995 की तुलना में वर्ष 2025 तक लगभग 5.52 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए और परियोजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध रूप से किया जा सके। अपर मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री को सिविल, विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए वित्तीय अधिकारों की वर्तमान व्यवस्था की जानकारी दी। विमर्श के उपरांत निर्णय लिया गया कि सिविल कार्यों के लिए अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों की सीमा अधिकतम पाँच गुना तक तथा विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए कम से कम दो गुना तक बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्णय के अनुसार मुख्य अभियंता को अब ₹2 करोड़ के स्थान पर ₹10 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार होगा। अधीक्षण अभियंता को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार दिया जाएगा। अधिशासी अभियंता के वित्तीय अधिकार ₹40 लाख से बढ़ाकर ₹2 करोड़ किए जाएंगे। सहायक अभियंता को भी सीमित दायरे में टेंडर स्वीकृति एवं छोटे कार्यों की अनुमति देने के अधिकार बढ़ाए जाएंगे। बता दें कि यह पुनर्निर्धारण तीन दशकों के बाद होने जा रहा है। बैठक में उत्तर प्रदेश अभियंता सेवा (लोक निर्माण विभाग) (उच्चतर) नियमावली, 1990 में संशोधन के माध्यम से विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग की सेवा संरचना, पदोन्नति व्यवस्था तथा वेतनमान के पुनर्गठन से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बताया गया कि नियमावली में किया जा रहा यह संशोधन विभागीय अभियंताओं की सेवा संरचना को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से किया गया है। संशोधित नियमावली में विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग में पहली बार मुख्य अभियंता (स्तर-एक) का नया पद सम्मिलित किया गया है। इसके साथ मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों की संख्या में वृद्धि की गई है। नवसृजित पदों को नियमावली में समाहित करते हुए उनके पदोन्नति स्रोत, प्रक्रिया और वेतनमान को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे सेवा संरचना अधिक पारदर्शी और संगठित हो सके। बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्य अभियंता (स्तर-एक) के पद पर पदोन्नति अब मुख्य अभियंता (स्तर-दो) से वरिष्ठता के आधार पर की जाएगी। इसी प्रकार मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया को नियमावली में स्पष्ट किया गया है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता (स्तर-एक) तक के पदों के वेतनमान और मैट्रिक्स पे लेवल भी निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ चयन समिति की संरचना को अद्यतन किया गया है, ताकि पदोन्नति और नियुक्ति की कार्यवाही अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य की विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में एक प्रमुख विभाग है, इसलिए अभियंताओं की सेवा नियमावली को समयानुकूल, व्यावहारिक और पारदर्शी बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति व्यवस्था से विभाग की कार्यकुशलता, तकनीकी गुणवत्ता और सेवा भावना को नई दिशा मिलेगी।

सीएम योगी के निर्देश पर विभिन्न सेक्टर्स पर फोकस डेस्क की स्थापना का प्रदेश को मिल रहा व्यापक लाभ

फोकस सेक्टर डेस्क से प्रदेश में निवेश को मिल रही नई उड़ान सीएम योगी की दूरदर्शी पहल से करोड़ों के निवेश पाइपलाइन में, जल्द उतरेंगे धरातल पर टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर में खुली निवेश की राह फोकस सेक्टर डेस्क की मदद से प्रदेश में निवेश प्रोत्साहन लागू करने की दिशा में इन्वेस्ट यूपी के प्रयासों को मिली सफलता सीएम योगी के निर्देश पर विभिन्न सेक्टर्स पर फोकस डेस्क की स्थापना का प्रदेश को मिल रहा व्यापक लाभ लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब सिर्फ देश का सबसे बड़ा राज्य नहीं, बल्कि भारत की सबसे तेज़ी से उभरती निवेश भूमि बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन्वेस्ट यूपी द्वारा किए जा रहे नवाचारपूर्ण प्रयासों ने प्रदेश को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बना दिया है। इसी दिशा में एक अहम कदम साबित हुई है—फोकस सेक्टर डेस्क की स्थापना, जिसने न केवल निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि उद्योग जगत में उत्तर प्रदेश की छवि को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। करोड़ों के निवेश पाइपलाइन में सीएम योगी के निर्देश पर इन्वेस्ट यूपी द्वारा गठित फोकस सेक्टर डेस्क अब प्रदेश में करोड़ों रुपये के निवेश को जुटाने में सफल रही है। टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश प्रस्ताव न केवल मंजूरी के दौर में हैं, बल्कि जल्द ही धरातल पर उतरने वाले हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में फोकस सेक्टर डेस्क की रणनीति ने न केवल निवेश प्रक्रिया को गति दी है, बल्कि ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में ठोस आधार भी तैयार किया है। टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर में बड़े खिलाड़ी तैयार भारतीय तकनीकी वस्त्र संघ (ITTA), परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC), भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (CITI) और उत्तर भारत वस्त्र अनुसंधान संघ (NITRA) की साझेदारी से इस सेक्टर में ग्रासिम, ट्राइडेंट, रिलायंस, जीईएसएल और श्याम संस जैसी बड़ी कंपनियां प्रदेश में निवेश कर रही हैं। उनके प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं।  ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में नई ऊर्जा सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), एसीएमए, एसएमईवी और एआरएआई जैसी संस्थाओं के सहयोग से प्रदेश में ऑटोमोबाइल उद्योग को नई रफ्तार मिल रही है। अशोक लेलैंड, मिंडा और टाटा मोटर्स (विस्तार परियोजना) जैसे दिग्गज निवेश के लिए तैयार हैं। केमिकल सेक्टर में औद्योगिक चमक भारतीय रासायनिक परिषद (ICC), ISCM Association और CHEMEXCIL के सहयोग से प्रदेश में रिलायंस इंडस्ट्रीज और दीपक नाइट्राइट जैसी कंपनियां बड़े निवेश की योजना पर काम कर रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रदेश बन रहा टेक हब ICEA, ELCINA, AIEA और IEEMA के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ रहा है। डिक्सन, एम्बर, एचसीएल-फॉक्सकॉन, हायर और एलजी जैसी कंपनियों की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं, जिससे प्रदेश भारत का अगला टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में अग्रसर है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर से विश्व स्तरीय साझेदारी नैसकॉम के सहयोग से एडोब, एएमडी और जेपी मॉर्गन जैसी वैश्विक कंपनियां उत्तर प्रदेश में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं।

मुख्यमंत्री ने लिया निर्णय, फायर सर्विस विभाग में 98 राजपत्रित और लगभग 922 अराजपत्रित नए पद सृजित होने का रास्ता साफ

केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल दुर्घटनाओं तथा सुपर हाईराइज बिल्डिंग जैसी परिस्थितियों से निपटने हेतु स्पेशलाइज्ड यूनिट गठित हो: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने लिया निर्णय, फायर सर्विस विभाग में 98 राजपत्रित और लगभग 922 अराजपत्रित नए पद सृजित होने का रास्ता साफ जनसंख्या, औद्योगिक विस्तार और शहरीकरण की गति को देखते हुए फायर सर्विस को अधिक सशक्त और आधुनिक बनाया जाए: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने अग्निशमन विभाग के विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता जताई मुख्यमंत्री ने फायर सर्विस को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने के दिए निर्देश प्रत्येक जनपद में अकाउंट कैडर की स्थापना और प्रशिक्षण संस्थान में नए पदों से प्रशासनिक दक्षता व प्रशिक्षण गुणवत्ता में होगा सुधार एक्सप्रेस-वे पर हर 100 किमी पर छोटी फायर चौकी स्थापित की जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विस्तार और शहरीकरण की गति को देखते हुए अग्निशमन विभाग की संरचना को अधिक सशक्त, आधुनिक तथा जनसुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि फायर सर्विस को केवल आग बुझाने तक सीमित न रखकर इसे आपदा प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपात सेवाओं के समेकित स्वरूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री गुरुवार को अग्निशमन विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता जताते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक रीजन में स्पेशलाइज्ड यूनिट गठित की जाए, जो केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल दुर्घटनाओं तथा सुपर हाईराइज बिल्डिंग जैसी परिस्थितियों से निपटने में सक्षम हों। मुख्यमंत्री ने फायर सर्विस को अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित जनशक्ति से सुसज्जित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में विभाग में नए पदों के सृजन पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रत्येक जनपद में अकाउंट कैडर स्थापित किया जाए। साथ ही, राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में अतिरिक्त पद सृजित कर प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभाग में राजपत्रित संवर्ग के 98 तथा अराजपत्रित संवर्ग के लगभग 922 नए पद सृजित होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे जनपद, रीजनल और मुख्यालय स्तर पर फायर सर्विस की कार्यक्षमता और जनसेवा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में फायर एवं आपात सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। एक्सप्रेस-वे पर बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक 100 किलोमीटर की दूरी पर फायर टेंडर सहित एक छोटी फायर चौकी स्थापित की जाए, ताकि दुर्घटना की स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर राहत व बचाव कार्य प्रारंभ किया जा सके। बैठक में बताया गया कि नई ऑपरेशनल इकाइयों के रूप में कुशीनगर, आजमगढ़, श्रावस्ती, कानपुर नगर, अयोध्या, अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट और सोनभद्र एयरपोर्ट पर अग्निशमन सेवाओं की समुचित जनशक्ति पहले ही तैनात की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फायर सर्विस जनता के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। इसकी संरचना ऐसी होनी चाहिए, जो हर परिस्थिति में त्वरित, कुशल और उत्तरदायी प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि विभाग के पुनर्गठन की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जाए, ताकि इसका लाभ शीघ्र जनता तक पहुँच सके।

मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली में ये सेटेलाइट ऑफिस देंगे राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार

5 शहर, 5 रणनीतियां, एक लक्ष्य — यूपी में निवेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न पर 5 महानगरों में खुलेंगे ‘इन्वेस्ट यूपी’ के सैटेलाइट निवेश प्रोत्साहन ऑफिस मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली में ये सेटेलाइट ऑफिस देंगे राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मुंबई से लेकर चेन्नई तक हर सैटेलाइट ऑफिस का होगा अपना इंडस्ट्री-फोकस हर सैटेलाइट ऑफिस में जीएम से लेकर उद्यमी मित्र तक की समर्पित टीम संभालेगी निवेश संवर्धन की कमान सीएम योगी दे चुके हैं ‘इन्वेस्ट यूपी’ के पुनर्गठन को मंजूरी, अब देशभर में पहुंचेगी यूपी की निवेश ताकत लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। अब देश के पांच प्रमुख महानगरों—मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली—में ‘इन्वेस्ट यूपी’ के सैटेलाइट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन ऑफिस खोले जाएंगे। इसका उद्देश्य देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों से पूंजी निवेश को सीधे उत्तर प्रदेश तक लाना और निवेशकों को राज्य की नीतियों एवं संभावनाओं से जोड़ना है।  प्रत्येक ऑफिस में होगा समर्पित स्टॉफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इन्वेस्ट यूपी के पुनर्गठन प्रस्ताव को हरी झंडी दे चुके हैं। इसी क्रम में इन सैटेलाइट ऑफिसों की स्थापना किए जाने का प्रस्ताव है, जो राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देंगे। प्रत्येक ऑफिस में एक जनरल मैनेजर, एक असिस्टेंट जनरल मैनेजर, दो उद्यमी मित्र, दो एग्जिक्यूटिव और दो ऑफिस असिस्टेंट की टीम कार्य करेगी। सभी पांचों कार्यालयों पर कुल 12 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक धनराशि व्यय होने का अनुमान है। रणनीतिक क्षेत्रों पर होगा फोकस सरकार की योजना के अनुसार, प्रत्येक शहर का सैटेलाइट ऑफिस अपनी भौगोलिक और औद्योगिक विशेषता के अनुरूप रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा। मुंबई ऑफिस वित्तीय सेवाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक और ईएसजी फंड पर ध्यान देगा। बेंगलुरु ऑफिस जीसीसी, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर, ईवी और डीपटेक सेक्टर पर फोकस करेगा। हैदराबाद ऑफिस फार्मा, डेटा सेंटर, हेल्थटेक और एंटरप्राइज SaaS उद्योगों पर केंद्रित रहेगा। चेन्नई ऑफिस ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और हार्डवेयर निर्माण उद्योगों में निवेश आकर्षित करेगा। नई दिल्ली ऑफिस समर्पित इन्वेस्ट यूपी एवं एशिया-यूरोपीय संघ सुविधा कार्यालय के रूप में कार्य करेगा। ‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’ की छवि होगी और मजबूत  योगी सरकार का यह कदम निवेशकों से नजदीकी संवाद बढ़ाने और राज्य की ‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’ की छवि को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोक्ता राज्य नहीं, बल्कि निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बन चुका है। सैटेलाइट ऑफिस इस दिशा में सेतु का काम करेंगे। इन सैटेलाइट ऑफिसों के माध्यम से उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष औद्योगिक केंद्रों में अपनी स्थायी मौजूदगी दर्ज करेगा और वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक नई पहचान बनाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जन समस्याओं के प्रति संवेदनशील होकर त्वरित समाधान का निर्देश दिया

जन समस्याओं के प्रति बनें संवेदनशील, कराएं त्वरित समाधान: मुख्यमंत्री जनता दर्शन में 300 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोगों से बोले – चिंता मत करिए, होगी प्रभावी कार्रवाई गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सबकी समस्या सुनते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की समस्याओं पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाएं। समस्या से जुड़ी शिकायत पर तेजी से कार्रवाई करते हुए गुणवत्तापूर्ण व संतुष्टिपरक समाधान सुनिश्चित कराएं। समस्या लेकर पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत करिए। सरकार हर समस्या पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी।  दीपावली के दिन से गोरखपुर प्रवास कर रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान करीब 300 लोगों से मिले। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर लगी कुर्सियों पर बैठाए गए लोगो तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याओं को सुना। इत्मीनान से बात सुनते हुए उनके प्रार्थना पत्र लिए। पास में खड़े अधिकारियों को समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से जुड़े समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और सन्तुष्टिपरक होना चाहिए।  जमीन कब्जा किए जाने से संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथने पुलिस अधिकारियों को भू माफिया के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा यदि कोई दबंग, माफिया किसी की जमीन जबरन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। गरीबों को उजाड़ने वाले कतई न बख्शे जाएं। जहां पैमाइश की जरूरत हो, वहां पैमाइश कराकर विवाद का निस्तारण कराया जाए।  जनता दर्शन में हर बार की तरह कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गोपूजन के बाद सीएम ने गायों-गोवंश को खिलाया गुड़-केला

गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में मुख्यमंत्री ने की गोवर्धन पूजा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गोपूजन के बाद सीएम ने गायों-गोवंश को खिलाया गुड़-केला प्रदेशवासियों को गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं दीं सीएम ने, कहा- भारत की समृद्धि का आधार रहा है गोवंश गोरखपुर  दीपावली के पंच दिवसीय महापर्व की श्रृंखला के महत्वपूर्ण पर्व गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार प्रातः गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में विधि विधान से गोवर्धन पूजा की। गोपूजन के बाद मुख्यमंत्री ने गोसेवा की और प्रदेशवासियों को गोवर्धन पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गोवंश भारत की समृद्धि का आधार रहा है। सरकार गो संरक्षण और संवर्धन के लिए कई योजनाओं के जरिये सतत प्रयास कर रही है।  दीपावली के दिन सोमवार से ही गोरखपुर प्रवास कर रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में गोवर्धन पूजा की। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन की प्रक्रिया पूर्ण की। गायों और गोवंश को माला पहनाई, तिलक लगाया और गोमाता का आशीर्वाद लेकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। गो पूजन के बाद मुख्यमंत्री ने गायों और गोवंश को अपने हाथों से गुड़ और केला खिलाया। इस दौरान वह गायों और गोवंश को उनका नाम लेकर पुकारते रहे और उनके पास जाकर उन्हें खूब दुलार भी किया।  गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए चल रहे अभिनव कार्यक्रम : मुख्यमंत्री गोवर्धन पूजा के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदेशवासियों, अन्नदाता किसानों और पशुपालकों को गोवर्धन पूजा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए कई अभिनव कार्यक्रम संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिर्फ गोपूजन ही नहीं हो रहा है बल्कि  गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।  सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में 16 लाख गोवंश ऐसे हैं जिनका भरण पोषण प्रदेश सरकार अनुदानित कर रहे है। अन्नदाता किसानों की फसल को इनसे नुकसान न हो, इस दृष्टि से यह एक प्रयास प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि गोवंश के लिए प्रदेश में तीन प्रकार की विशेष  योजनाएं हैं। एक योजना निराश्रित गोवंश स्थल की है जिसमें हर गोवंश के लिए सरकार के स्तर पर प्रतिमाह 1500 रुपये उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे ही सहभागिता योजना है। इसमें कोई भी अन्नदाता किसान गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के साथ जुड़ता है तो उसे चार निराश्रित गोवंश की देखभाल के लिए प्रति गोवंश 1500 रुपये की दर से 6000 रुपये तक।दिए जाते हैं। तीसरी योजना कुपोषित परिवारों के लिए है। जो कुपोषित माताएं हैं, बच्चे हैं, उन परिवारों में उन्हें निराश्रित गो आश्रय स्थल से ब्याई हुई गाय दी जाती है। वह सेवा करें और गाय का दूध भी लें। साथ ही उन्हें 1500 रुपये प्रति महीना गाय की देखभाल के लिए दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रसन्नता है कि बड़ी संख्या में लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है और कुपोषण से सुपोषण की ओर बढ़े हैं।  गोवर्धन योजना से समृद्धि की ओर बढ़े हैं अन्नदाता किसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रदेश में संचालित गोवर्धन योजना से अन्नदाता किसान समृद्धि की ओर बढ़े हैं। प्रदेश में कंप्रेस्ड बायोगैस और इथेनॉल बनाने से अन्नदाता किसानों को गोबर का भी दम प्राप्त हो रहा है। साथ जी ग्रीन ईंधन के माध्यम से प्रदेश के अंदर नेट जीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने और पेट्रोल डीजल में खर्च होने वाले भारत धन को बचाने में भी मदद मिल रही है।  गोवर्धन पूजा भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था का प्रतीक सीएम योगी ने कहा कि गोवर्धन पूजा भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था का प्रतीक है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में गोवंश का महत्व क्या है, यह गोवर्धन पूजा जैसे आयोजन इसे बताते हैं। दीपावली जैसे महापर्व के साथ इस आयोजन को जोड़कर इसकी महत्ता को और भी प्रभावी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे गो पूजन और गोसेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

ओवैसी के साथ अपमानजनक तस्वीर वायरल करने वाला तस्लीम पकड़ा गया, PM मोदी और योगी थे निशाने पर

  सतना सतना जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक अपमानजनक एआई-जनरेटेड तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। मझगवां थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पूरा मामला जिले के मामला मझगवां थाना क्षेत्र का है। आरोपी की पहचान मोहम्मद तस्लीम खान (24), निवासी मझगवां के रूप में हुई है। आरोपी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक एआई-निर्मित तस्वीर साझा की थी, जो बेहद आपत्तिजनक थी। पुलिस के अनुसार इस एआई-निर्मित तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हैदराबाद लोकसभा सीट से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एक मूर्ति के पैर छूते हुए दिखाया गया था। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट होते ही तेजी से वायरल हो गई। जैसे ही यह पोस्ट स्थानीय भाजपा नेताओं के संज्ञान में आई, उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मझगवां थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। थाना प्रभारी धुर्वे ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी मोहम्मद तस्लीम खान की पहचान की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सलाखों के पीछे पहुंचा मोहम्मद तस्लीन पूछताछ में आरोपी तस्लीम ने पुलिस को बताया कि उसने यह तस्वीर किसी अन्य सोशल मीडिया अकाउंट से उठाकर अपने अकाउंट पर साझा (शेयर) की थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से माननीय न्यायालय ने उसे जेल भेजने का आदेश दिया।