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29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन-दलहन जोड़कर यूपी को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री

अन्तःफसली खेती को मिशन मोड में लागू करें, अन्नदाता की आय में होगा कई गुना इजाफा: मुख्यमंत्री गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों के लिए लाभकारी: मुख्यमंत्री 29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन-दलहन जोड़कर यूपी को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने रबी में सरसों-मसूर, जायद में उर्द-मूंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका 'गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अन्तःफसली खेती' को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि 'बहु-गुणित' करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है, इसलिए ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन है। उन्होंने कहा कि 'गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है। यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और साथ ही प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि  कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित करते हुए अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी सीजन में सरसों और मसूर तथा जायद सीजन में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा, यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने इस योजना के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय में वृद्धि करेगा और राज्य के जीवीए में बड़ा योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सहायता और अनुदान का ढांचा स्पष्ट होना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज़ नकदी प्रवाह मिलेगा और एकल फसल जोखिम कम होगा, जिससे कृषि अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल गन्ना क्षेत्र से जुड़े किसानों के लाभ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रदेश के व्यापक कृषि परिदृश्य के परिवर्तन के रूप में लागू किया जाना चाहिए।

प्रमाणित बीज की कमी न हो, संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री

प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक बीज नीति तैयार करें: मुख्यमंत्री प्रमाणित बीज की कमी न हो, संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री कृषि उत्पादन की असली ताकत अच्छा और भरोसेमंद बीज: मुख्यमंत्री हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी अनिवार्य करें; मिलावटी और अमानक बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर, उपकार और निजी उद्योग को एक मंच पर लाने का निर्देश, बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म रिलीज़ प्रक्रिया तेज हो कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास से जोड़ने और हर क्लाइमेटिक ज़ोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने के निर्देश प्रगतिशील किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम से जोड़कर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्धता बढ़ाने पर जोर ट्यूबवेलों का सौर ऊर्जीकरण तेज़ हो, प्रदेश के सोलर पैनल निर्माताओं को प्राथमिकता देने के मुख्यमंत्री के निर्देश अगले पाँच वर्षों में पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की योजना, टिशू कल्चर लैब्स और प्रमाणित नर्सरी नेटवर्क सुदृढ़ करने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कृषि उत्पादन की वास्तविक शक्ति उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और प्रमाणित बीजों में निहित है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के लिए नई और आधुनिक 'बीज नीति' समय की मांग है। भूमि जोत लगातार घट रही है, ऐसे में ध्यान केवल रकबे पर नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि उच्च उपज, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु किस्मों के विकास को प्राथमिकता देते हुए ऐसी बीज नीति तैयार की जाए जो आने वाले वर्षों की कृषि चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करे। बीज नीति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने अगले पाँच वर्षों के लिए प्रदेश की बीज उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और उपलब्धता को नए स्तर तक ले जाने के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग आवश्यक है, ताकि प्रमाणित बीज की कमी न हो और किसान सशक्त बन सकें। मुख्यमंत्री ने भरोसेमंद बीज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी या अमानक बीजों के प्रति कोई भी ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। किसानों तक पहुँचने वाला हर बीज पैकेट प्रमाणित, परीक्षणित और पूरी तरह मानक होना चाहिए। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, उपकार तथा निजी बीज उद्योग को एक साझा मंच पर लाकर बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म-रिलीज प्रक्रिया को तेज़ करने की आवश्यकता बताई। फसल विविधीकरण को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता हेतु विशेष रणनीति तैयार करने को कहा। इसी क्रम में प्रदेश में अगले पांच वर्षों में कम से कम पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए। ये सीड पार्क उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण की सभी सुविधाओं से सुसज्जित एकीकृत परिसर होंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रमों से सीधे जोड़ा जाए, ताकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और खेत-स्तर पर तकनीक के प्रसार के बीच सुदृढ़ समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नौ क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए, जिससे क्षेत्र-विशेष की फसलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को भी बीज विकास कार्यक्रमों से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय अनुभव और आधुनिक तकनीक का प्रभावी समन्वय बन सके। मुख्यमंत्री ने कृषि में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जीकरण से जोड़ा जाए, जिससे किसानों का सिंचाई खर्च कम हो और कृषि में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में स्थापित सोलर पैनल इकाइयों को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिलने से रोजगार, निवेश और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।

एक-एक कर सभी प्रार्थियों से मिले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समस्याओं के उचित निस्तारण का दिया आश्वासन

जनता दर्शन :बच्ची ने किया सैल्यूट तो सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर निरंतर करें कड़ी कार्रवाईः मुख्यमंत्री  एक-एक कर सभी प्रार्थियों से मिले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समस्याओं के उचित निस्तारण का दिया आश्वासन  जनपदों में प्रशासन, पुलिस व राजस्व के अधिकारी मामलों को गंभीरता से लेते हुए करें कार्रवाई: मुख्यमंत्री बच्ची ने किया सैल्यूट तो सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। एक-एक कर सभी प्रार्थियों से उन्होंने मुलाकात की, उनका प्रार्थना पत्र लिया और समस्याओं के उचित निस्तारण का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों, राजस्व से जुड़े अधिकारियों व पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए लोगों की समस्याएं सुनें और जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करें। ‘जनता दर्शन’ में पहुंची एक बच्ची ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सैल्यूट किया। इस पर सीएम योगी ने उसे आशीर्वाद देते हुए खूब मन लगाकर पढ़ाई करने को कहा। जनपदों में समस्याएं सुन दोषियों पर करें कार्रवाई  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष ‘जनता दर्शन’ में अवैध कब्जे से जुड़े कुछ प्रकरण भी आए। सीएम ने सभी लोगों की बातें सुनीं,  फिर प्रार्थना पत्र लेते हुए उचित कार्रवाई का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने जनपदों में तैनात अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे वहां भी समस्याएं सुनते हुए प्रार्थियों को न्याय दिलाएं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें।  बच्चे के इलाज के लिए सीएम ने दिया आर्थिक मदद का आश्वासन ‘जनता दर्शन’ में एक महिला अपने बच्चे के साथ पहुंचीं। उनके बच्चे का केजीएमयू में इलाज चल रहा है। महिला ने मुख्यमंत्री से इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने इलाज के लिए आर्थिक सहायता दिलाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ प्रदेशवासी मेरा परिवार हैं। सरकार सभी के सुख-दुख में खड़ी है। पहले दिन से ही इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। आगे भी यह क्रम चलता रहेगा। धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा।  बच्ची ने किया सैल्यूट, सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी पहुंचे। प्रार्थियों से मिलने के क्रम में मुख्यमंत्री एक महिला के पास पहुंचे और उनका प्रार्थना पत्र लिया। महिला के साथ आई बच्ची ने सीएम योगी को देख उन्हें सैल्यूट किया। इस पर सीएम योगी ने मुस्कुराते हुए बच्ची से उसका नाम और पढ़ाई के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को चॉकलेट दी और कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करो। बच्ची ने सुनाई सीएम को कविता ‘जनता दर्शन’ में मां के संग आई एक बच्ची ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कविता सुनाई। बच्ची की कविता सुनकर मुख्यमंत्री ने उसकी खूब तारीफ की। सीएम ने बच्ची से पूछा कि स्कूल जाएगी, मेहनत से पढ़ेगी? बच्ची के हां कहने पर सीएम ने एडमिशन कराने का आदेश दिया। बच्ची ने सीएम योगी को कविता भी सुनाई- “हम शेर बच्चे, शेर बच्चे, शेर बच्चे हैं। हम छोटे हैं तो क्या हुआ, हम दिल के सच्चे हैं। हम बड़े होकर देश की शान बढ़ाएंगे। जय हिंद।” कविता सुनकर सीएम ने बच्ची का उत्साहवर्धन भी किया।

मुख्यमंत्री का आह्वान, किसान, एमएसएमई, युवा-उद्यमियों और महिलाओं को ऋण उपलब्धता तेज और सरल की जाएं

यूपी का कुल सीडी रेशियो 60.39% के पार, मार्च तक 62% का लक्ष्य ओडीओपी की तरह अब ओडीओसी को ब्रांड बनाने आगे बढ़ें बैंक, छोटे व्यापारियों और गिग वर्कर्स को होगा बड़ा लाभ: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का आह्वान, किसान, एमएसएमई, युवा-उद्यमियों और महिलाओं को ऋण उपलब्धता तेज और सरल की जाएं आवेदन और पात्रता की जांच में अनावश्यक देरी न करें बैंक, लाभार्थीपरक योजनाओं की सफ़लता बैंकों के सहयोग से ही संभव: मुख्यमंत्री प्रदेश का बैंकिंग व्यवसाय 08 वर्ष में ₹12.80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹32.79 लाख करोड़ वित्तीय समावेशन में यूपी देश में नंबर-1, जनधन, जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा और अटल पेंशन योजना में शीर्ष प्रदर्शन ऊर्जा, कृषि, उद्योग और एमएसएमई क्षेत्र में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत 20 फरवरी और 16 मार्च को दो मेगा ऋण वितरण कार्यक्रम; 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक  वितरण का लक्ष्य पीएम स्वनिधि, पीएम सूर्य घर और किसान क्रेडिट कार्ड में यूपी की तेज प्रगति, 50.81 लाख किसानों को मिली 1 लाख करोड़ रुपये की सीमा सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागिता बढ़ाएं बैंक: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक, कहा जिलों में हर माह हो डीएलबीसी कि बैठक लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक प्रदेश में कुल क्रेडिट डिपॉजिट (सीडी रेशियो) 62 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। रविवार को राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी बैंक प्रतिनिधियों से उनके सीडी रेशियो के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए सीडी रेशियो बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास करने पर बल दिया। बैठक में बताया गया कि दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश का कुल सीडी रेशियो 60.39 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले लगभग दस वर्षों का सर्वाधिक स्तर है। जनपद-वार समीक्षा के अनुसार 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले जनपद घटकर केवल पाँच रह गए हैं, जबकि 40-50, 50-60 और 60-80 प्रतिशत की श्रेणी वाले जनपदों की संख्या में भी निरंतर सुधार हुआ है। मार्च 2018 में 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले 20 जनपद थे, जो अब घटकर 5 हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मार्च 2026 तक सभी जनपदों के सीडी रेशियो में लक्षित सुधार सुनिश्चित किया जाए। महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) की सफलता के बाद अब राज्य सरकार एक जिला-एक व्यंजन (ओडीओसी) के माध्यम से छोटे व्यापारियों, पारंपरिक पाक कला से जुड़े कारीगरों और गिग वर्कर्स को नई पहचान देने जा रही है। उन्होंने बैंकों से आह्वान किया कि जैसे ओडीओपी को वित्तीय सहयोग मिला, वैसे ही ओडीओसी को भी प्राथमिकता देते हुए अधिक से अधिक लोगों को ऋण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में पूरा सहयोग दे रही है, और इस मिशन को गति देने में बैंकों की भूमिका निर्णायक होगी।  राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उदाहरण दिया और कहा कि इन योजनाओं की सफलता के केंद्र में बैंकों की सहयोगी भावना है। उन्होंने साफ कहा कि अनावश्यक दस्तावेज़ों की मांग, बार-बार वेरिफिकेशन और प्रक्रिया में देरी जैसी स्थितियाँ लाभार्थियों को हतोत्साहित करती हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बैंकिंग प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे आम नागरिक को वास्तविक सहूलियत मिले और पात्र लाभार्थी बिना किसी दिक्कत के योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक निवेश, उद्यमिता, कृषि और महिला-युवा स्वावलंबन के क्षेत्रों में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इस प्रगति में बैंकिंग तंत्र की सक्रिय साझेदारी अनिवार्य है। उन्होंने सभी बैंक प्रतिनिधियों से कहा कि किसान, सूक्ष्म,लघु, मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप, महिला स्वयं सहायता समूहों और नवउद्यमी युवाओं को ऋण उपलब्धता सरल, सम्मानजनक और समयबद्ध हो। मुख्यमंत्री ने उन जनपदों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए जहाँ सीडी रेशियो 40 प्रतिशत से कम है, और कहा कि बैंकों को गाँवों को लक्षित कर मेगा ऋण मेले आयोजित करने चाहिए। मुख्यमंत्री ने हर माह जिला स्तरीय बैकर्स कमेटी की बैठक सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव को निर्देशित किया। उन्होंने बैंकों से सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागी बनने का भी आह्वान किया। बैठक में बताया गया कि पिछले 08 वर्षों में प्रदेश का बैंकिंग तंत्र अत्यंत मजबूत हुआ है। मार्च 2017 में प्रदेश की कुल जमा राशि 8.92 लाख करोड़ रुपये थी, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 20.44 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में कुल ऋण वितरण 4.05 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12.34 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गया। मार्च 2017 में प्रदेश का कुल बैंकिंग व्यवसाय 12.80 लाख करोड़ रुपये था, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 32.79 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 के दौरान अकेले जमा में 6.47 लाख करोड़ रुपये, ऋण में 5.03 लाख करोड़ रुपये और कुल बैंकिंग व्यवसाय में 11.50 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि, एमएसएमई और प्राथमिकता क्षेत्रों में ऋण प्रवाह लगातार बेहतर हुआ है। दिसंबर 2024 से दिसंबर 2025 के बीच एमएसएमई क्षेत्र में 23 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय समावेशन अभियान (जुलाई-अक्टूबर 2025) की उपलब्धियों की जानकारी भी बैठक में प्रस्तुत की गई। इस अवधि में प्रदेश ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और आठ प्रमुख सूचकों में से सात पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रदेश में 57,699 वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित हुए, 22.24 लाख जनधन खाते खोले गए, 17.14 लाख लोगों का जीवन सुरक्षा बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) में और 43.35 लाख नागरिकों का दुर्घटना बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) में नामांकन हुआ। अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में 6.90 लाख नए सब्सक्रिप्शन दर्ज किए गए। नामांकन, दावा निपटान, पुनः-केवाईसी और नामांकन अद्यतन जैसे क्षेत्रों में भी प्रदेश का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष रहा। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ऊर्जा, कृषि, बुनियादी ढाँचा, उद्योग, एमएसएमई और एनबीएफसी सह-ऋण मॉडल सहित विभिन्न क्षेत्रों में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत किए गए हैं। यूपीपीसीएफ, यूपीसीयू, पावर ट्रांसमिशन और … Read more

उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था बनेगी भारत के विकास की नई ताकत

महाकुंभ से मिली दिशा, बजट में सनातन अर्थशास्त्र को मिली नीतिगत पहचान उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था बनेगी भारत के विकास की नई ताकत महाकुंभ के अनुभव से प्रेरित नीतियों के चलते टियर-2–3 शहरों और मंदिर नगरों पर बढ़ा फोकस महाकुंभ, काशी और अयोध्या सर्किट से मिली सीख, बजट में दिखा नया विकास दृष्टिकोण आस्था आधारित अर्थव्यवस्था को मुख्यधारा में लाने की केंद्र सरकार ने की पहल लखनऊ  महाकुंभ से सामने आए बड़े आर्थिक परिणामों और इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान ने केंद्र सरकार को भारत की पारंपरिक आर्थिक संरचना की ओर नए सिरे से देखने को प्रेरित किया है। केंद्रीय बजट 2026–27 में पहली बार भारत के सनातन आर्थिक स्वरूप- उत्सवधर्मिता, टेम्पल टूरिज्म और कस्बा आधारित अर्थव्यवस्था को नीति स्तर पर पहचान मिलती दिख रही है। यह संकेत है कि भारत की विकास यात्रा अब केवल उद्योग और महानगरों तक सीमित न रहकर अपनी सांस्कृतिक और सभ्यतागत जड़ों से जुड़ते हुए आगे बढ़ेगी। आस्था के साथ अर्थव्यवस्था का बड़ा मॉडल है महाकुंभ यूपीडीएफ के अध्यक्ष पंकज जायसवाल के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सफलतापूर्वक आयोजित महाकुंभ ने यह स्पष्ट कर दिया कि आस्था आधारित आयोजन केवल धार्मिक नहीं होते, बल्कि बड़े आर्थिक उत्प्रेरक भी होते हैं। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज, काशी और अयोध्या के सर्किट में होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, अस्थायी और स्थायी रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं और लॉजिस्टिक्स सब मिलकर एक मजबूत आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में सामने आए। इसी अनुभव ने नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद की कि आस्था आधारित आयोजन अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर तक गति दे सकते हैं। सिटी इकोनॉमिक रीजन से कस्बों को नई ताकत बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों को सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) के रूप में विकसित करने की घोषणा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘विकसित टाउन’ की सोच का विस्तार माना जा रहा है। यह योजना उन कस्बों को फिर से मजबूत करेगी, जो सदियों तक भारतीय अर्थव्यवस्था की सप्लाई चेन की रीढ़ रहे हैं। कस्बों के मजबूत होने से उनके आसपास के गांवों के किसान, कारीगर और व्यापारी सीधे लाभान्वित होंगे। स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा और ये कस्बे बड़े शहरों के लिए फुलफिलमेंट सेंटर के रूप में उभरेंगे। इससे अर्थव्यवस्था की मध्य कड़ी मजबूत होगी और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य है जहां सबसे ज्यादा कस्बे और शहरी क्षेत्र हैं। ऐसे में सिटी इकोनॉमिक रीजन योजना का सबसे बड़ा लाभ भी यूपी को मिलने की संभावना है। ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का बजट में आना ऐतिहासिक संकेत महाकुंभ से मिले आर्थिक अनुभव के बाद सरकार ने पहली बार बजट भाषण में ‘टेम्पल सिटी’ शब्द का इस्तेमाल किया है। ऐतिहासिक रूप से मंदिरों वाले नगर भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र रहे हैं। भारत में सदियों से पर्यटन का मूल आधार धार्मिक रहा है, जहां यात्रा के साथ व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक जुड़ाव स्वाभाविक रूप से होता रहा है। प्रयागराज-काशी-अयोध्या सर्किट ने सरकार को यह स्पष्ट संकेत दिया कि यदि देशभर के मंदिर वाले नगरों को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जाएं, तो हजारों कस्बों और छोटे शहरों का समग्र विकास संभव है। सनातन अर्थशास्त्र से यूपी को सबसे ज्यादा फायदा बजट में सनातन अर्थशास्त्र की दिशा में उठाए गए कदमों से उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। मथुरा, काशी, अयोध्या, प्रयागराज, नैमिषारण्य, गोरखनाथ, हस्तिनापुर, सारनाथ और कुशीनगर जैसे सनातन और बौद्ध परंपरा के प्रमुख केंद्र यूपी में ही स्थित हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन, सेवा क्षेत्र, स्थानीय उत्पाद और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। इनलैंड वाटरवे से नदी आधारित अर्थव्यवस्था को नई जान बजट में वाराणसी से पटना के बीच इनलैंड वाटरवे को और विकसित करने की घोषणा से यूपी में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सस्ती और प्रभावी होगी। यह पहल नदी आधारित अर्थव्यवस्था को फिर से जीवंत करेगी। गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती समेत कई नदियों का सबसे बड़ा नेटवर्क यूपी में होने के कारण राज्य सड़क, रेल और वायु मार्ग के साथ-साथ इनलैंड वाटर कनेक्टिविटी में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है। यह बजट इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश सनातन अर्थशास्त्र, कस्बा आधारित विकास और टेम्पल टूरिज्म के जरिए भारत के नए विकास मॉडल का केंद्र बन सकता है।

मुख्यमंत्री के गोरक्षा से जुड़े अभूतपूर्व कार्यों से मिली उनसे मुलाकात की प्रेरणा

सीएम योगी से मिले ‘गोदान’ फिल्म के निर्माता-निर्देशक, ट्रेलर लांच मुख्यमंत्री के गोरक्षा से जुड़े अभूतपूर्व कार्यों से मिली उनसे मुलाकात की प्रेरणा गोरक्षा के संकल्प, भारतीय संस्कृति और पंचगव्य विज्ञान को बड़े पर्दे पर लाएगी ‘गोदान’ पंचगव्य से पंच परिवर्तन व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती है फिल्म, 6 फरवरी को देशभर में एक साथ रिलीज होगी लखनऊ गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति में उसके महत्व और पंचगव्य आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर बनी फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर फिल्म का ट्रेलर लांच किया गया। फिल्म के निर्माता व निर्देशक ने स्पष्ट किया कि देश में गो-रक्षा को लेकर सबसे व्यापक, ठोस और जमीनी स्तर पर कार्य उत्तर प्रदेश में हुआ है, और इसके पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन और प्रतिबद्ध नेतृत्व है। इन्हीं बातों ने उन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के लिए प्रेरित किया। सीएम योगी के सत्ता संभालते ही उत्तर प्रदेश में गो तस्करों पर शुरु हुआ ताबड़तोड़ एक्शन योगी आदित्यनाथ के सीएम बनते ही उत्तर प्रदेश में गो तस्करों पर ताबड़तोड़ एक्शन शुरु हुआ और बड़े पैमाने पर गो तस्करों की गिरफ्तारी की गई। गोवंश के प्रति मुख्यमंत्री के स्नेह और गो संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता का इसी बात से पता चलता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में साढ़े सात हजार से ज्यादा गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा चुके हैं। गो सेवा और उनके संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए हर जिले में गो संरक्षण समितियों का गठन किया गया है। हर जनपद के डीएम व एसएसपी इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु, उद्देश्य और सामाजिक संदेश से अवगत कराया विनोद चौधरी द्वारा निर्मित व निर्देशित ‘गोदान’ फिल्म 6 फरवरी को देशभर में एक साथ रिलीज होने जा रही है। यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं, बल्कि गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का समग्र दस्तावेज है। निर्माता ने मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु, उद्देश्य और सामाजिक संदेश से अवगत कराया। गोरक्षा को लेकर सीएम योगी के अभूतपूर्व कार्य बने प्रेरणा फिल्म निर्माता विनोद चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान कहा कि आज देश में गो-रक्षा के क्षेत्र में जो ठोस कार्य दिख रहा है, उसका सबसे बड़ा केंद्र उत्तर प्रदेश है। प्रदेश में गोशालाओं का विस्तार, निराश्रित गोवंश की व्यवस्था, तस्करी पर सख्ती और गो संरक्षण को शासन की प्राथमिकता बनाना, ये सभी कार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संभव हो पाए हैं। निर्माता विनोद चौधरी ने कहा कि जो दायित्व सामान्यतः समाज और हर नागरिक का होना चाहिए, उसे मुख्यमंत्री स्वयं उदाहरण बनकर निभा रहे हैं। गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा है, जो वैदिक काल से हमारे जीवन का आधार रही है। समुद्र मंथन से कामधेनु की प्राप्ति की कथा से लेकर आज तक गाय भारतीय सभ्यता की पोषक रही है। नई पीढ़ी को गाय के महत्व से जोड़ने का प्रयास विनोद चौधरी ने कहा कि नई युवा पीढ़ी धीरे-धीरे गाय के महत्व को भूलती जा रही है। दूध देने तक गाय को रखा जाता है और उसके बाद उसे छोड़ दिया जाता है, फिर यह कहा जाता है कि इसकी जिम्मेदारी सरकार निभाए। जबकि यह केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सभी नागरिकों का नैतिक और सामाजिक कर्तव्य है कि गोमाता का पालन-पोषण करें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाय हमारी माता है। जो लोग गाय को केवल पशु कहते हैं, वे स्वयं पशुता की मानसिकता में जी रहे हैं। जैसे मां हमें पोषण देती है, वैसे ही गाय संपूर्ण मानव समाज का पोषण करती है।   पंचगव्य से पंच परिवर्तन का संदेश फिल्म ‘गोदान’ में पंचगव्य से पंच परिवर्तन को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसमें बताया गया है कि पंचगव्य किस प्रकार मानव जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। निर्माता के अनुसार, गाय पर हाथ फेरने मात्र से मानसिक शांति मिलती है, रक्तचाप संतुलित होता है और अनेक बीमारियों पर इसका प्रभाव पड़ता है। फिल्म में यह संदेश वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है। युवा पीढ़ी को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए फिल्म निर्माता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से फिल्म को टैक्स-फ्री किए जाने की अपेक्षा भी व्यक्त की। उनका कहना था कि यह फिल्म किसी एक जाति, धर्म या वर्ग की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए है। विशेषकर युवा पीढ़ी को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए। स्कूल के बच्चों, परिवारों और समाज के हर वर्ग तक इसका संदेश पहुंचना चाहिए। सीएम योगी से मुलाकात के दौरान विनोद चौधरी (निर्माता), शांतनु शुक्ला (प्रचार-प्रसार प्रमुख), डॉ. कपिल त्यागी (सीएमडी, यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा) और नवल किशोर उपस्थित रहे। प्रदेश में गो सेवा-संरक्षण के अभूतपूर्व प्रबंध गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि धरती, कृषि, प्रकृति और मानव जीवन, सभी के लिए गोमाता  सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं। प्रदेश में गोसेवा और संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। गोमाता पर बनी यह फिल्म हर युवा, बच्चे और बुजुर्ग को सपरिवार देखनी चाहिए।

सर्वाधिक धनराशि बाढ़ से नुकसान की क्षतिपूर्ति और पुनर्वास के लिए की गई आवंटित

आपदा राहत प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध है प्रदेश सरकार, वर्ष 2025-26 में जारी किए 710.12 करोड़ रुपये सर्वाधिक धनराशि बाढ़ से नुकसान की क्षतिपूर्ति और पुनर्वास के लिए की गई आवंटित  निराश्रितों को शीतलहरी से बचाने के लिए रैन बसेरों, कंबल वितरण और अलाव की व्यवस्था से दी गई राहत लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार बाढ़, भूकंप, सूखा, अग्निकांड, शीतलहर एवं मानव-जीव संघर्ष जैसी आपादाओं से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध और संवेदनशील है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश का राहत आयुक्त कार्यालय आपादा प्रभाव को कम करने तथा पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए सभी संभव प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपदा राहत निधि के तहत 710.12 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। इस धनराशि से विभिन्न प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदा पीड़ितों को सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही राज्य में आपदा राहत तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किये गए हैं, जिससे वर्तमान में उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है। त्वरित राहत, पुनर्वास एवं बचाव कार्यों को मिली रफ्तार    प्रदेश में आपदा न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, प्रभावी राहत वितरण एवं पीड़ितों के पुनर्वास के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में जारी 710.12 करोड़ रुपये में सर्वाधिक 365.73 करोड़ रुपये बाढ़ प्रभावितों के बचाव के लिए जारी किए गए। इसे विशेष रूप से सरयू, गंगा और घाघरा के बाढ़ प्रभावितों के पुनर्वास पर खर्च किया गया। चक्रवात व आंधी-तूफान से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति के लिए 14.13 करोड़, ओलावृष्टि से नुकसान की भरपाई के लिए 0.13 करोड़, अग्निकांड में क्षतिपूर्ति के लिए 14.63 करोड़ रुपये और शीतलहरी से बचाव के लिए 50.72 करोड़ रुपये जारी किये गये। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा अन्य आपदाओं के लिए लगभग 246.63 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। सामान्य मद के लिए 0.44 करोड़ व अन्य राहत कार्यों के लिए 17.71 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। इस राशि को प्रदेश में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत, पुनर्वास एवं बचाव कार्यों को गति प्रदान करने एवं आपदा राहत तंत्र को प्रभावी बनाने में खर्च किया गया।  बांटे गये 5 लाख 89 हजार से अधिक कंबल  राहत आयुक्त कार्यालय ने ठंड के मौसम में बचाव के लिए व्यापक प्रबंध किए, जिससे इस वर्ष शीतलहर से होने वाली जनहानि में विशेष रूप से कमी आई। इस क्रम में प्रदेश सरकार की ओर से निराश्रित एवं असहाय व्यक्तियों को कंबल वितरण हेतु 45.51 करोड़ व अलाव जलाने के लिए 3.51 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई। जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों में 27,027 स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। जहां अब तक 1,69,834 अलाव जलाए जा चुके हैं, जरूरत के हिसाब से ये कार्य अभी भी जारी है। वहीं जिला प्रशासन द्वारा गरीबों और निराश्रितों को 5,89,689 कंबल वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही प्रदेश भर में 1,242 रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं, जहां अब तक 64 हजार से अधिक व्यक्तियों को रैन बसेरों ने राहत प्रदान की। ये व्यवस्थाएं शीतलहरी के दौरान निराश्रित और असहाय लोगों की जान बचाने में उल्लेखनीय प्रयास साबित हुईं। प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि हर आपदा प्रभावित व्यक्ति को त्वरित सहायता मिले और जीवन-रक्षा के साथ आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित हो। इसके लिए राहत आयुक्त कार्यलय की ओर से आपदा प्रहरी एप और 1070 टोल फ्री नंबर का संचालन भी किया जाता है। जो आपदा प्रभावितों को त्वरित सहायता और प्रभावी समन्वय को सुनिश्चित करता है।

आवास, पेंशन व स्वच्छता में रिकॉर्ड प्रदर्शन से सामाजिक योजनाओं को नई गति

विकास के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश की बढ़त, कई योजनाओं में बना देश में नंबर वन  आवास, पेंशन व स्वच्छता में रिकॉर्ड प्रदर्शन से सामाजिक योजनाओं को नई गति कृषि, उद्योग व निवेश में अग्रणी भूमिका से बनी मजबूत अर्थव्यवस्था की तस्वीर इन्फ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी व ऊर्जा सुधारों से बदला प्रदेश का विकास परिदृश्य डिजिटल गवर्नेंस व ई-प्लेटफॉर्म के उपयोग में उत्तर प्रदेश की नेशनल लीडरशिप लखनऊ उत्तर प्रदेश ने केंद्र व राज्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के दम पर विकास के हर मोर्चे पर देश में मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश लगातार विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं में पहला स्थान हासिल कर रहा है। इससे शासन-प्रशासन की परिणाम आधारित कार्यशैली स्पष्ट रूप से सामने आई है। योगी सरकार में उत्तर प्रदेश ने योजनाओं को कागज से जमीन तक पहुंचाने का कार्य किया है। यही कारण है कि आवास,  कृषि,  उद्योग,  इन्फ्रास्ट्रक्चर,  ऊर्जा,  डिजिटल गवर्नेंस व शिक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सुदृढ़ उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कारोबारी सहूलियत (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) के मामले में प्रदेश टॉप अचीवर्स स्टेट है। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं शहरी’ के अंतर्गत आवास निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा है। पिछले पौने नौ वर्षों में लगभग 62 लाख परिवारों को पक्के घर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे गरीब व मध्यम वर्ग के जीवन स्तर में ठोस सुधार हुआ है। ‘अटल पेंशन योजना’ के अंतर्गत पंजीकरण के मामले में भी उत्तर प्रदेश ने देश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सूक्ष्म, लघु व मध्यम (एमएसएमई) उद्योगों को मजबूती दी है। देश में सर्वाधिक, 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों की स्थापना उत्तर प्रदेश में हो चुकी है। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है। सरकार का फोकस स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर रहा है। कृषि क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश लगातार अपनी अग्रणी भूमिका बनाए हुए है। गन्ना, चीनी, खाद्यान, आम, दूध व आलू के उत्पादन में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। किसानों को कृषि निवेश पर मिलने वाली अनुदान राशि का भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई। इस व्यवस्था को लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना है। इन्फ्रास्ट्रक्चर व कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में 7 एक्सप्रेस-वे और 04 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे क्रियाशील हैं। एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) निर्माणाधीन है। सड़क एवं हवाई संपर्क के विस्तार से निवेश व पर्यटन को नई गति मिली है। स्वच्छता व ऊर्जा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने नए मानक स्थापित किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण में प्रदेश का देश में पहला स्थान रहा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस कनेक्शन वितरण में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इससे गरीब परिवारों की रसोई में बड़ा बदलाव आया है।  डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व किया है। ई-मार्केटप्लेस जेम के माध्यम से देश में सर्वाधिक सरकारी खरीद करने वाला राज्य भी उत्तर प्रदेश है। एनपीएस ट्रेडर्स के अंतर्गत कामगारों के पंजीकरण में भी प्रदेश अग्रणी रहा है। इससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता व कार्य की गति बढ़ी है। शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की कार्ययोजना विकसित करने में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। कौशल विकास नीति को लागू करने में प्रदेश नंबर वन है। इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर रूप से तैयार करना है। एथेनॉल उत्पादन एवं आपूर्ति मामले में भी उत्तर प्रदेश देश में पहले पायदान पर खड़ा है।

स्वामित्व योजना से गांव-गांव मजबूत हुए कानूनी अधिकार

ग्रामीण भारत को संपत्ति अधिकारों का उपहार, एक करोड़ से अधिक घरौनियों का वितरण स्वामित्व योजना से गांव-गांव मजबूत हुए कानूनी अधिकार भूमि विवादों में कमी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला संबल लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को लेकर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रदेश में अब तक एक करोड़ से अधिक घरौनियों का वितरण किया जा चुका है। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार प्रदान कर रही है, बल्कि दशकों से चले आ रहे भूमि विवादों के समाधान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो रही है। ग्रामीण स्वामित्व को मिली कानूनी मजबूती स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि में रहने वाले परिवारों को उनकी संपत्ति का विधिक प्रमाण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से अब तक 72,961 ग्रामों में प्रपत्र-10 (डिजिटाइज्ड) जारी किए जा चुके हैं, जो सर्वे योग्य ग्रामों का लगभग 80.59 प्रतिशत है। इससे ग्रामीणों को पहली बार अपने मकान और भूमि पर स्पष्ट कानूनी स्वामित्व प्राप्त हुआ है। यह दस्तावेज अब बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और अन्य वित्तीय सुविधाओं के लिए भी मान्य आधार बन गया है। घरौनी बनी आर्थिक सुरक्षा की कुंजी राजस्व विभाग द्वारा सहमति के आधार पर अब तक 1,14,43,688 घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनमें से 1,01,31,232 घरौनियों का वितरण ग्रामीण परिवारों को किया जा चुका है। घरौनी केवल स्वामित्व का प्रमाण नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इसके जरिए ग्रामीण परिवार अब औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ रहे हैं, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए ऋण ले पा रहे हैं तथा सामाजिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भूमि विवादों में कमी, प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ स्वामित्व योजना के प्रभाव से गांवों में भूमि और मकान से जुड़े विवादों में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। स्पष्ट रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों के कारण फर्जी दावों और अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लगी है। इससे न केवल ग्रामीण स्तर पर शांति और विश्वास बढ़ा है, बल्कि न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होने की उम्मीद है। योगी सरकार की यह पहल सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। निरंतर जारी है वितरण प्रक्रिया सरकार द्वारा घरौनियों के वितरण की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। 18 जनवरी 2025 के बाद 13,12,456 नई घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनका वितरण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। आने वाले समय में लाखों और ग्रामीण परिवारों को संपत्ति स्वामित्व का लाभ मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार इस योजना से वंचित न रहे। ड्रोन तकनीक से सर्वे की संभावनाएं स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,10,344 अधिसूचित ग्रामों में से 90,530 ग्राम ऐसे हैं, जहां ड्रोन सर्वे कराया जाना तकनीकी रूप से संभव है। इन ग्रामों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से सर्वे कर सटीक और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। योगी सरकार की डिजिटल गवर्नेंस नीति के अनुरूप यह तकनीक भविष्य में ग्रामीण भूमि प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी। कुल मिलाकर, स्वामित्व योजना के माध्यम से योगी सरकार ने ग्रामीण समाज को संपत्ति अधिकार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान का मजबूत आधार प्रदान किया है, जो उत्तर प्रदेश को देश में भूमि सुधार और ग्रामीण सशक्तिकरण का अग्रणी राज्य बना रहा है।

योगी सरकार की विमानन नीति को मिला राष्ट्रीय सम्मान

आरसीएस–उड़ान में यूपी बना ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ योगी सरकार की विमानन नीति को मिला राष्ट्रीय सम्मान CM योगी  के नेतृत्व में हवाई कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक विस्तार, नॉन-प्रायोरिटी एरिया श्रेणी में यूपी देश में अव्वल 2016 की तुलना में 2025 में यूपी में हवाई यात्रियों की संख्या में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी, घरेलू उड़ानों के विस्तार से छोटे शहरों को मिला राष्ट्रीय संपर्क एयर कार्गो में पांच गुना उछाल, एमएसएमई व निर्यात को मिले नए पंख, जेवर एयरपोर्ट सहित नए हवाई अड्डे यूपी को बना रहे विमानन हब ‘उड़े देश का आम नागरिक’ का सपना सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में हो रहा साकार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व व सक्रिय नीतियों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश को रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस-उड़ान) के तहत ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ का राष्ट्रीय अवॉर्ड प्रदान किया गया है। यह सम्मान नॉन-प्रायोरिटी एरिया श्रेणी में दिया गया है, जिसमें देश के वे राज्य शामिल हैं, जो न तो पर्वतीय हैं और न ही उत्तर-पूर्व क्षेत्र में आते हैं। इस उपलब्धि ने उत्तर प्रदेश को देश के विमानन मानचित्र पर एक सशक्त और अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया है। योगी सरकार की नीति से बदला प्रदेश का विमानन परिदृश्य योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद प्रदेश में कनेक्टिविटी को विकास का आधार बनाया। हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण, नए रनवे, नाइट लैंडिंग सुविधाएं व क्षेत्रीय उड़ानों को प्रोत्साहन देकर प्रदेश के छोटे शहरों को देश के प्रमुख महानगरों से जोड़ा गया। आरसीएस-उड़ान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने गैर-प्राथमिक राज्यों की श्रेणी में सबसे तेज प्रगति दर्ज की।  यात्री यातायात में 2.6 गुना वृद्धि उत्तर प्रदेश सिविल एविएशन के डायरेक्टर ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि योगी सरकार की नीतियों का असर यात्री आंकड़ों में भी साफ दिखाई देता है। वर्ष 2016 में प्रदेश में कुल 59.97 लाख हवाई यात्री थे। 2024 में यह संख्या 1.28 करोड़ से अधिक और 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1.55 करोड़ से अधिक हो गई। बीते नौ वर्षों में प्रदेश में 9.98 प्रतिशत कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से यात्री यातायात बढ़ा है, जो यह दर्शाता है कि हवाई यात्रा अब आम नागरिकों के लिए भी सुलभ होती जा रही है। यह ‘उड़ान-उड़े देश का आम नागरिक’ के मूल उद्देश्य को जमीन पर उतारने का प्रमाण है। घरेलू उड़ानों से मजबूत हुआ क्षेत्रीय संपर्क उन्होंने बताया कि प्रदेश में घरेलू उड़ानों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। 2016 में घरेलू यात्रियों की संख्या 52.30 लाख थी, जो 2024 में 1.16 करोड़ से अधिक और 2025 में 1.41 करोड़ से अधिक पहुंच गई। इससे न केवल व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिला, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए। इसी तरह, इंटरनेशनल पैसेंजर्स की संख्या जो 2016 में 7.66 लाख थी वो 2024 में 12.63 लाख से अधिक और 2025 में 13.37 लाख से अधिक पहुंच गई।  एयर कार्गो में पांच गुना उछाल, अर्थव्यवस्था को बल योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश एयर कार्गो के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ा है। 2016 में एयर कार्गो ट्रैफिक 5,895 मीट्रिक टन था, जो 2024 में 27,998 मीट्रिक टन और 2025 में बढ़कर 29,761 मीट्रिक टन हो गया। एयर कार्गो में इन 9 वर्षों में 17.58 प्रतिशत सीएजीआर से हुई वृद्धि ने प्रदेश को कृषि उत्पादों, एमएसएमई और निर्यात आधारित उद्योगों के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म दिया है। जेवर एयरपोर्ट और क्षेत्रीय हब की भूमिका नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) सहित प्रदेश में विकसित हो रहे नए और क्षेत्रीय हवाई अड्डे उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख विमानन और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर नागरिक तेज, सुरक्षित और सस्ती हवाई कनेक्टिविटी से जुड़े। ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ का यह सम्मान योगी सरकार की इसी विकासोन्मुख सोच, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन की राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता है, जो उत्तर प्रदेश को ‘नए भारत’ की उड़ान में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रहा है।