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मुख्यमंत्री ने कहा, यूपी में न तनाव, न अराजकता और न ही गुंडागर्दी

सबको सुरक्षा का अहसास ही रामराज्य की अवधारणा: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने कहा, यूपी में न तनाव, न अराजकता और न ही गुंडागर्दी पांडेयहाता में होलिकादहन उत्सव समिति की तरफ से आयोजित भक्त प्रह्लाद शोभायात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी दुनिया में उपद्रव, पर पीएम मोदी के रूप में यशस्वी नेतृत्व करा रहा नए भारत का दर्शन: सीएम योगी भक्त प्रह्लाद की आरती उतारी और फूलों की होली खेली मुख्यमंत्री ने गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों को होली की मंगलमय शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में आज कोई तनाव नहीं है। कोई भय नहीं, कोई अराजकता नहीं और न ही कोई गुंडागर्दी। सबको सुरक्षा का एहसास है और सबको विश्वास है। सबके मन में एक दूसरे के प्रति सम्मान का भाव है। यही अहसास और विश्वास, रामराज्य की अवधारणा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यही कहते हैं कि जब ऐसी स्थिति रहेगी तो भारत को विकसित बनने में कोई देर नहीं लगेगी। सीएम योगी सोमवार शाम पांडेयहाता में होलिकादहन उत्सव समिति की ओर से आयोजित भक्त प्रह्लाद शोभायात्रा के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। होलिकादहन के दिन शोभायात्रा का शुभारंभ करने से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में उपद्रव, अराजकता और अव्यवस्था है। पर, हम भारतवासी गर्व कर सकते हैं कि पीएम मोदी के रूप में यशस्वी नेतृत्व देश को नई बुलंदी देते हुए नए भारत का दर्शन करा रहा है। नया भारत हर व्यक्ति, हर तबके को अवसर देकर उत्सव का वातावरण देता है।  पहले यूपी में समाज को बांटती थीं सरकारें सीएम योगी ने कहा कि हमारे यहां पर्व, त्योहारों की लंबी श्रृंखला है। पर, वर्ष 2014 के पहले लोग बेहतर तरीके से उत्सव नहीं मना पाते थे। यूपी में तो पर्व, त्योहार के पहले कर्फ्यू लग जाता था। समाज में भय और तनाव रहता था। तब की सरकारें समाज को बांटती थीं और इसका परिणाम व्यापारी और नागरिक चुकाते थे। तब गुंडागर्दी, अराजकता चरम पर थी। न बेटी सुरक्षित थी और न ही व्यापारी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का उत्तर प्रदेश सुरक्षा और सुविधा देकर उत्सव प्रदेश बन चुका है। अब यूपी में न कर्फ्यू है और न दंगा है,  यूपी में अब सब चंगा है। सब ओर उत्सव का माहौल है। पिछले पंद्रह दिनों से मथुरा-वृंदावन में होली का कार्यक्रम चल रहा है। सबकुछ स्वतः स्फूर्त देखकर विदेशियों की आंखे फटी रह जाती हैं। सीएम योगी ने कहा कि जो लोग हम पर आरोप लगाते थे कि हम बंटे हुए हैं, वे बताएं कहां बंटे दिख रहे हैं। इस उत्सव में इतनी बड़ी संख्या में लोग आए हैं। किसी की जाति का पता नहीं है, लेकिन सभी लोग होली का आनंद ले रहे हैं।  उपद्रव से उबरकर बनते हैं उत्सव की यात्रा का हिस्सा मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अव्यवस्था से व्यवस्था, अराजकता से अनुशासन, अधर्म से धर्म और असत्य से सत्य की यात्रा होती है, तभी हम उपद्रव से उबरकर उत्सव की यात्रा का हिस्सा बनते हैं। यही उत्सव आज गोरखपुर के विरासत गलियारे में देखने को मिल रहा है। पहले पांडेयहाता आने को संकरी गली थी। वाहन मुश्किल से आ पाता था। व्यापार अस्त व्यस्त था। ग्राहक नहीं आ पाते थे। अराजकता का साम्राज्य था। विरासत गलियारा के प्रभावित व्यापारियों के लिए बनेगा कॉम्प्लेक्स सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर का विरासत गलियारा प्रदेश का सबसे खूबसूरत गलियारा होगा। गलियारा बनने से प्रभावित व्यापारियों को घण्टाघर के बंधु सिंह पार्क में कुछ दुकानें दी जा रही हैं। इसके बाद अन्य जो दुकानदार शेष रह जाएंगे, उनके लिए डायट के पास कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। जगह चिन्हित करने के साथ पैसा भी आवंटित कर दिया गया है। सरकार का संकल्प है कि किसी को उजड़ने नहीं देना है, बल्कि अवसर देकर आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत गलियारा पहले पूर्वी यूपी, बिहार और नेपाल के व्यापारियों और नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र होता था। सुविधा न देने, कंजेशन और जाम के कारण यहां का कारोबार उजड़ने लगा था। अब विरासत गलियारा नव विकास से एक बार फिर व्यापार का प्रमुख केंद्र हो जाएगा। सबको सुरक्षा और सुविधा दे रही डबल इंजन की सरकार सीएम योगी ने कहा कि सबके जीवन में खुशहाली लाने के लिए डबल इंजन की सरकार सुरक्षा और सुविधा दे रही है। इसी भाव से जब गोरखपुर विकास करेगा तो प्रदेश और देश का भी विकास होगा। विकास नीचे से ऊपर आता है। विरासत गलियारा के व्यापारियों के मन में पीड़ा थी, लेकिन उन्होंने इसे व्यक्त करने की बजाय शासन-प्रशासन का सहयोग किया। इसी के परिणामस्वरूप आज शानदार विरासत गलियारा बनकर तैयार हो रहा है। यहां की सड़कें पहले से तीन गुना अधिक चौड़ी होंगी। फसाड लाइट लग जाने के बाद यह प्रदेश का सबसे शानदार गलियारा होगा। हिरण्यकश्यप जैसे हैं माफिया व गुंडे, लातों के भूत बातों से नहीं मानते होलिकादहन के महात्म्य, भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उस समय भगवान विष्णु ने भगवान नृसिंह का अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था और धर्म की स्थापना की थी। हमें याद रखना होगा कि अराजकता, गुंडागर्दी, माफियागिरी भी हिरण्यकश्यप जैसे ही हैं, ये प्यार से नही मानेंगे क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं। अराजकता, गुंडागर्दी, अव्यवस्था जैसे हिरण्यकश्यप, कंस या रावण को मारने के लिए किसी न किसी नृसिंह, कृष्ण या राम को अवतरित होना ही पड़ेगा। भक्त प्रहलाद की आरती उतार सीएम योगी ने खेली फूलों की होली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के उपरांत शोभायात्रा के लिए सजाए गए रथ पर भक्त प्रहलाद के चित्र की आरती उतारी। उनके चित्र पर फूल बरसाने के बाद सीएम योगी ने अत्यंत प्रसन्नता व उमंग से उपस्थित जनसमूह पर पुष्पवर्षा करते हुए फूलों से होली खेली। शोभायात्रा को लेकर लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कार्यक्रम में पहुंचने पर लोक कलाकारों के दल ने विभिन्न प्रस्तुतियों से मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। मंच पर सीएम योगी का स्वागत व अभिनंदन पुष्प माला व साफा पहनाकर और स्मृति-चिह्न देकर किया गया। भ्रष्टाचार का दहन कर दिया है सीएम योगी ने: रविकिशन शोभायात्रा के अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा … Read more

गंगा-यमुना की पवित्रता दूषित नहीं होने देगी योगी सरकार, राज्य में प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी किया जा रहा ट्रीट

यूपी बना 85 फीसदी सीवेज का शोधन करने में सक्षम राज्य गंगा-यमुना की पवित्रता दूषित नहीं होने देगी योगी सरकार, राज्य में प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी किया जा रहा ट्रीट नदियों की स्वच्छता में योगी सरकार ने रचा नया अध्याय, 2035 तक 100% अपशिष्ट जल उपयोग का लक्ष्य नमामि गंगे मिशन फेज-2 से यूपी के सीवरेज सिस्टम को मिल रही बड़ी मजबूती, अपशिष्ट जल से बनेगा विकास का नया मॉडल लखनऊ, उत्तर प्रदेश को स्वच्छ प्रदेश बनाने की मुहिम समय के साथ तेज होती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार अपशिष्ट जल को ‘आर्थिक संपत्ति’ में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से अधिक सीवेज का शोधन किया जा रहा है। इस तरह प्रदेश अब लगभग 85 प्रतिशत गंदे पानी को उपचारित करने में सफल है। सरकार गंगा-यमुना समेत राज्य की तमाम नदियों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। नमामि गंगे मिशन से मिली सीवरेज सिस्टम को मजबूती उल्लेखनीय है कि नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण ने प्रदेश के सीवरेज सिस्टम को नई मजबूती दी है। उत्तर प्रदेश में अब तक 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 41 पूरी होकर संचालन में भी आ चुकी हैं। शेष परियोजनाओं पर तेजी से कार्य जारी है। राज्य भर में 155 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली ने नदियों के संरक्षण के प्रयासों को नई गति दी है। हर परियोजना की मॉनीटरिंग की जा रही है, जिससे न केवल गंगा-यमुना की पवित्रता सुनिश्चित हुई है, बल्कि नगरों में जल प्रबंधन की व्यवस्था भी मजबूत हो रही है।  अपशिष्ट जल से विकास का नया मॉडल   योगी सरकार अब उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग की नीति तैयार कर रही है। योजना तीन चरणों में लागू होगी।  1. नगरपालिका- पार्कों की सिंचाई, सड़क सफाई, सार्वजनिक उद्यानों में इस्तेमाल।  2. उद्योग और कृषि- औद्योगिक प्रक्रियाओं व खेतों की सिंचाई के लिए। 3. घरेलू गैर-पेय उपयोग- निर्माण कार्य समेत अन्य कार्यों में पुनर्चक्रण।   सीएम योगी कर रहे स्वच्छ नदियों के सपने को साकार जहां एसटीपी चालू हैं और क्षमता मौजूद है, वहां वर्ष 2030 तक 50 फीसदी और 2035 तक 100 फीसदी अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वच्छ नदियों के सपने को साकार करने की दिशा में निर्णायक साबित हो रहा है।

योगी का बड़ा कदम: लड़कियों के लिए महिला ट्रेनर जरूरी, सभी जिम की होगी जांच

वाराणसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को निर्देश दिया है कि सभी जिम की जांच की जाए और यह सुनिश्चित हो कि वहां महिलाओं के लिए महिला ट्रेनर की व्यवस्था हो। सीएम योगी रविवार को वाराणसी में सर्किट हाउस सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। वाराणसी के पड़ोसी जिले में जिम की आड़ में लड़कियों के धर्मांतरण का बड़ा मामला सामने आया था। इसमें एक सिपाही समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। कई जिमों में धर्मांतरण के खेल का खुलासा हुआ था। धार्मिक स्थल पर ही हों धार्मिक आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कहा कि कोई भी धार्मिक क्रियाकलाप धार्मिक स्थल परिसर में ही किए जाएं। कोई भी नई परम्परा की अनुमति नहीं होगी। सीएम ने होली के मद्देनजर पुलिस अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कहीं भी अवैध एवं जहरीली शराब की बिक्री न होने पाए। क्षेत्रीय समन्वय समिति की बैठक की सर्किट हाउस में सुबह सीएम योगी ने क्षेत्रीय समन्वय समिति की बैठक की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह भी रहे। सड़क सुरक्षा पर जोर समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध गतिविधियों में लिप्त पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई करें। सड़कों पर अतिक्रमण कर वाहन पार्क न किए जाएं। सड़क सुरक्षा की नियमित बैठकें करें एवं अधिक से अधिक जागरूकता कार्यक्रम कराएं। लम्बित राजस्व वादों का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण और समयसीमा के अन्तर्गत सुनिश्चित हो। बोले, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि तेज आवाज वाले साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न का प्रयोग वाहनों में न होने पाए। परियोजनाओं की मॉनीटरिंग मुख्यमंत्री ने नगर में सीवेज एवं जलापूर्ति के लिए अमृत-2 योजना के तहत कार्यों को व्यवस्थित ढंग से कराने का निर्देश दिया। कहा कि गर्मी में पेयजल की समस्या नहीं होनी चाहिए। कार्यों की सघन मॉनीटरिंग करें। लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सफाई में मशीनों का उपयोग करें। अंडरग्राउंड केबलिंग मानक के अनुरूप कराएं। बैठक में इनकी रही उपस्थिति: मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में स्टाम्प राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जाएसवाल, महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, डॉ. सुनील पटेल, एमएलएसी हंसराज विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह, अपर पुलिस आयुक्त शिवहरि मीणा, डीआईजी वैभव कृष्णा, सीडीओ प्रखर सिंह, डीएफओ स्वाति मौजूद रहीं।

आंगनबाड़ी केंद्रों में लाखों बच्चों को मिला नया जीवन, कुपोषण पर निर्णायक प्रहार

कुपोषण के खिलाफ जीवनरक्षक ढाल बना योगी सरकार का ‘संभव अभियान’ आंगनबाड़ी केंद्रों में लाखों बच्चों को मिला नया जीवन, कुपोषण पर निर्णायक प्रहार बच्चों के पोषण स्तर में 81 प्रतिशत का सुधार, कुपोषण के खिलाफ उल्लेखनीय उपलब्धि  लखनऊ कुपोषण और भुखमरी दूर करने के लिए योगी सरकार की प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि प्रदेश में लाखों नौनिहालों की जान बचाने में सफलता मिली है। ‘संभव अभियान’ से अति गंभीर कुपोषित (सैम) बच्चों में से 81 प्रतिशत सामान्य स्थिति में आ चुके हैं। यह एक समग्र प्रयास है जो जीवन के पहले 1000 दिनों में कुपोषण की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करता है। बच्चों को मिल रहा है पोषण और जीवनदान प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे तीव्र कुपोषण से जूझ रहे थे, जिससे उनके जीवन और विकास पर खतरा मंडरा रहा था। सरकार ने इस समस्या को बड़ी चुनौती के रूप में लिया और केंद्र सरकार की मदद से इस पर व्यापक रणनीति बनाई। संभव अभियान को मजबूत करने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग और पोषण ट्रैकर का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया गया। पंजीकृत कुपोषित बच्चों का डाटा स्वास्थ्य विभाग के ई-कवच एप्लीकेशन से जोड़ा गया, जिससे उपचार और फॉलोअप में पारदर्शिता आई। 1.7 करोड़ से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर 2.5 लाख कुपोषित बच्चों का पंजीकरण किया गया। एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम को प्रशिक्षित कर जमीनी स्तर पर क्षमता बढ़ाई गई। इस तरह बच्चों को उचित पोषण पहुंचाकर विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है।  मां और शिशु पर विशेष फोकस सम्भव अभियान केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्भावस्था से ही पोषण सुरक्षा की नींव रखता है। कम वजन और एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं की पहचान कर प्रारंभिक पंजीकरण, नियमित वजन निगरानी, आयरन फोलिक एसिड और कैल्शियम सेवन तथा पोषण परामर्श सुनिश्चित किया जा रहा है। 0 से 6 माह तक के शिशुओं में लो बर्थ वेट और प्री-टर्म बच्चों की पहचान कर विशेष निगरानी की जाती है। जटिल मामलों को पोषण पुनर्वास केंद्रों में रेफर कर समुचित उपचार दिया जाता है। यह समन्वित दृष्टिकोण कुपोषण की जड़ पर प्रहार करता है। हर वर्ष जून से सितंबर तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में सघन अभियान चलाकर बच्चों की स्क्रीनिंग, पहचान और उपचार की समग्र व्यवस्था की जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर बना आदर्श मॉडल सम्भव अभियान के परिणाम अब जमीन पर दिख रहे हैं। कुपोषित श्रेणी के बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने की दर में दिनोंदिन वृद्धि हो रही है। यह राज्य के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। सम्भव अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन है जो पोषण के प्रति समुदाय, सेवा प्रदाताओं और नीति निर्माताओं को एकजुट करता है।

ग्रामीण कला को बाजार से जोड़कर बढ़ाया मुनाफा

परंपरा से प्रगति तक: मूंज शिल्प ने बदली रजनी बाला की दुनिया ग्रामीण कला को बाजार से जोड़कर बढ़ाया मुनाफा सुल्तानपुर की बेटी ने हस्तशिल्प से गढ़ी अपनी पहचान      कई जिलों तक पहुंची रजनी बाला की मेहनत की पहचान सरकारी योजनाओं से मजबूत हो रही आत्मनिर्भरता की नींव लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में सामाजिक परिवर्तन और नई संभावनाओं का दौर जारी है। महिलाएं अपने संकल्प और परिश्रम से आत्मनिर्भर विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। सुल्तानपुर के कुड़वार ब्लाक के गांव हरखपुर की रहने वाली रजनी बाला इसका सशक्त उदाहरण हैं, जिन्होंने मूंज उत्पादों में सिकहुला, भउका, दौरी, डोलची और कप जैसी कलाकृतियों को बढ़ावा देकर अपनी अलग पहचान बनाई है। ग्रामीण कला को बाजार से जोड़कर बढ़ाया मुनाफा रजनी बाला ने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। वह बताती हैं कि मूंज शिल्प का हुनर उन्हें अपनी मां से विरासत में मिला। उनकी मां भी मूंज के उत्पाद तैयार करती थीं, जिससे बचपन से ही रजनी को इस कार्य का पारिवारिक वातावरण और व्यावहारिक अनुभव मिलता रहा। उसी सीख और लगन के दम पर आज रजनी विभिन्न प्रकार के मूंज उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनी हैं। उनके पति दिल्ली में एक निजी कंपनी में कैब चलाते हैं और रजनी के काम में पूरा सहयोग देते हैं। उनके दो बच्चे हैं, बेटा लखनऊ में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी सुल्तानपुर के एक विद्यालय में अध्ययनरत है।  सुल्तानपुर की बेटी ने हस्तशिल्प से गढ़ी अपनी पहचान मूंज के प्रत्येक उत्पाद की कीमत अलग-अलग होती है, लेकिन लाभ की दृष्टि से यह व्यवसाय काफी मजबूत है। रजनी बाला बताती हैं कि औसतन हर उत्पाद पर लगभग 50 प्रतिशत तक शुद्ध लाभ हो जाता है। यदि किसी उत्पाद को तैयार करने में ₹100 की लागत आती है, तो उसका बाजार मूल्य लगभग ₹150 होता है। उनके व्यवसाय को अब अन्य राज्यों से भी पहचान मिल रही है। अब तक का उनका सबसे बड़ा और लाभदायक ऑर्डर राजस्थान से मिला, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने करीब 100 महिलाओं को रोजगार का अवसर दिया। इस तरह रजनी बाला न केवल स्वयं सशक्त बन रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आजीविका से जोड़कर सामूहिक आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।  कई जिलों तक पहुंची रजनी बाला की मेहनत की पहचान रजनी बाला ने बताया कि उनके मूंज उत्पादों के निर्माण और विपणन में जिला उद्योग कार्यालय का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। विशेष रूप से जिला उपायुक्त सुश्री नेहा सिंह के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से उन्हें अपने उत्पादों को बड़े मंच तक ले जाने का अवसर मिला। इसी सहयोग के चलते उन्होंने नोएडा, सुल्तानपुर के साथ-साथ लखनऊ और आसपास के अन्य जिलों में भी स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों की सफलतापूर्वक बिक्री की है। सरकारी समर्थन और अपने परिश्रम के बल पर रजनी बाला आज स्थानीय शिल्प को व्यापक बाजार से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल बनी हैं। सरकारी योजनाओं से मजबूत हो रही आत्मनिर्भरता की नींव उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाएं प्रदेशभर में महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं। राज्य स्तर पर अब तक लाखों महिलाओं एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। इन योजनाओं के प्रभाव से सुल्तानपुर सहित कई जिलों में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जो युवा कभी बेरोजगारी से जूझ रहे थे, वे आज आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर रहे हैं। योगी सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक महिलाएं और युवा इन योजनाओं का लाभ उठाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में भागीदारी निभाएं। विभिन्न विभाग अपने स्तर पर आवेदकों को मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान कर रहे हैं, ताकि प्रक्रिया सरल और सुलभ बनी रहे। साथ ही, समय-समय पर जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन सफल युवाओं और महिलाओं की प्रेरक कहानियां न केवल अन्य लोगों के लिए उत्साह का स्रोत बन रही हैं, बल्कि सुल्तानपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास और आत्मनिर्भरता की नई रोशनी भी फैला रही हैं।

सीएम योगी बोले- अब यूपी में कानून का राज, निवेशकों की पहली पसंद बना प्रदेश

लखनऊ होली पर उत्तर प्रदेश के 1.86 करोड़ उज्ज्वला परिवारों को यूपी सरकार की तरफ से गैस सिलिंडर रीफिल सब्सिडी दी गई। शनिवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह सौगात दी। लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में 1,500 करोड़ की धनराशि वितरित की गई। इस मौके पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि होली पर सब गिले शिकवे भुला देते हैं। हमारी मां चूल्हे पर रोटी बनाती थीं। पीएम मोदी का आभार, जो गैस कनेक्शन दिए। कांग्रेस राज में सिफारिश पर सिलिंडर मिलता था। अब केवल जमींदार के घर पर ही गैस नहीं है, बल्कि आमजन के घर पर भी है। पहले कोटेदार के यहां कार्ड रहते थे। अब झोला मिल रहा है। कोटेदार का भी ध्यान रखा गया है। कोरोना काल में तेल दिया गया। कहा कि, लोग भरमाएंगे लेकिन, चक्कर में न आना। यही नहीं अब तीन तलाक नहीं कह सकते हैं। अब बिना जुगाड़ के नौकरी लगती है। वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पहले जिसके यहां शौचालय बना होता था, उसे अमीर जिसके यहां नहीं हना होता था, उसे गरीब माना जाता था। इस तरह गरीब और अमीर की पहचान की जाती थी। लेकिन, अब हर घर में शौचालय बना है। आज आयुष्मान कार्ड से गर गरीब को निशुल्क इलाज मिल रहा है। बलिया से उज्ज्वला योजना की शुरुआत हुई थी। 10 करोड़ से अधिक लोगों को इस योजना का सिलिंडर मिला। अमीरी-गरीबी की खाई पाटने का काम किया। मुख्यमंत्री आवास भी मिल रहा है। विधवा दिव्यांग महिलाओं को भी आवास दे रहे हैं। कहा कि, दो करोड़ महिलाओं को और समूह से जोड़ेंगे। माताएं-बहनें कमल का बटन दबाती हैं। प्रचार की जिम्मेदारी संभालने है। समाजवादी पार्टी के गुंडे पहले परेशान करते थे। वोट न देने वालों की भी सेवा की है। होली या होली के बाद फ्री में ले सकेंगे भरा सिलिंडर- सीएम योगी  इस मौके पर सीएम योगी ने सबसे पहले प्रदेशवासियों को होली की बधाई दी। कहा कि होली पर्व समता का पर्व है, न कोई बड़ा न कोई छोटा। यूपी की डबल इंजन सरकार ने यह योजना 2022 में शुरू की थी। इसी कड़ी में आज 1500 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई है। लाभार्थी होली के पहले या होली के बाद अपने नजदीकी एजेंसी से भरा हुआ सिलिंडर फ्री में ले सकते हैं। योजना का लाभ सबको देने का एक ही मंत्र है 'सबका साथ सबका विकास'। जिसको कभी सिलिंडर नहीं मिला, उसको मोदी ने दिया। सीएम ने आगे कहा कि आयुष्मान से पांच लाख तक का कैशलेस इलाज मिलता है। शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मियों को भी इससे जोड़ा गया है। जो सरकार के लिए काम करेगा, सरकार उसके बारे में सोचेगी। पहले माफिया शासन चलाते थे। पर्व के पहले उपद्रव हो जाते थे। कर्फ्यू लग जाता था। 2017 से पहले यूपी को टेढ़ी निगाहों से देखा जाता था। आज देश और दुनिया का हर बड़ा निवेशक यूपी आना चाहता है। 9 सिलिंडर पर पहले से मोदी दे रहे हैं। अब होली पर हम दे रहे हैं। हमारे लिए पूरा प्रदेश परिवार है- सीएम योगी उन्होंने कहा कि सरकार महिला सुरक्षा, स्वावलंबन और सशक्तीकरण पर काम कर रही है। ब्रजेश पाठक ने सर्वाइकल कैंसर से लड़ रही बेटियों के लिए व्यवस्था की। 2100 रुपये का इंजेक्सन अब 300 में मिलेगा। पहले के लोगों के लिए उनका परिवार की प्रदेश था। हमारे लिए पूरा प्रदेश परिवार है। लखपति दीदी का कार्यक्रम हो या सीमार्ट। महिलाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। महिला उद्यमी जो भी प्रोडक्ट बनाएंगी, उसे बाजार मिले, इसके लिए बजट में व्यवस्था की गई है। सीएम ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाद में एक लाख की मदद दी जाती है। आज सरकार हर बेटी का कन्यादान करने के लिए तैयार है। आज 36 फीसदी महिला कार्य बल है। राशन की दुकानों में पहले ई-पॉश मशीनें नहीं थीं, आज ई-पॉश मशीनों से पारदर्शिता आई है। आज गांव की बेटी गांव में ही वीसी सखी के रूप में काम कर रही हैं। 

केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के मत्स्य मंत्री ने किया दो दिवसीय उप्र मीन महोत्सव एवं एक्वा एक्सपो का शुभारम्भ

13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ उत्तर प्रदेश का वार्षिक मत्स्य उत्पादन  केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के मत्स्य मंत्री ने किया दो दिवसीय उप्र मीन महोत्सव एवं एक्वा एक्सपो का शुभारम्भ  उत्तर प्रदेश में पहली बार हो रहा मीन महोत्सव  प्रदेश में मत्स्य विकास दर 115.5 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में एनएफडीबी सेंटर खोलने की दिशा पर भी किया जाएगा कार्य एक्सपो में 50 प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा लगाई गई औद्योगिक प्रदर्शनी एवं स्टॉल लखनऊ  उत्तर प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव (एक्वा एक्सपो-2026) का आयोजन किया गया है। शुक्रवार को केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल व प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने इसका शुभारम्भ किया। इसमें देश-प्रदेश के 1000 मत्स्य पालक उपस्थित रहे, जबकि 50 प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा औ‌द्योगिक प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाये गये। विभिन्न प्रकार के मत्स्य व्यंजनों के लिए फिश फूड कोर्ट एवं प्रोटीन जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। महोत्सव में बताया गया कि मत्स्य पालन में उत्तर प्रदेश भारत में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य का वार्षिक मत्स्य उत्पादन गत 06 वर्षों में दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ है। केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि किसानों की आय में वृ‌द्धि, उन्नत पशुपालन एवं उन्नत मत्स्य पालन से ही सम्भव है। उन्होंने कृषि दर पर मत्स्य पालकों को बिजली की आपूर्ति एवं उ.प्र. में एन.एफ.डी.बी के सेन्टर खोलने की दिशा में कार्य करने को भी कहा। प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने बताया कि राज्य में मत्स्य विकास दर 115.5 प्रतिशत है। उन्होंने अमृत सरोवरों को मछली पालन योग्य बनाने, तालाबों के पट्टे समय से दिलाने, मत्स्य पालन में विज्ञान एवं तकनीक के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने अनुदान के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान देकर मत्स्य पालकों के विकास एवं सशक्तीकरण पर जोर दिया।  अपर मुख्य सचिव मत्स्य मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में 6 लाख से अधिक जलक्षेत्र उपलब्ध हैं। मत्स्य पालक, विशेषज्ञ, उद्यमी एवं निवेशक एक साथ चर्चा कर प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से मत्स्य उत्पादन, उत्पादकता एवं किसानों की आय में वृद्धि कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विज्ञान विश्ववि‌द्यालय एवं गो-अनुसन्धान संस्थान (दुवासु) मथुरा में मत्स्य विज्ञान पर शोध कार्य प्रारम्भ हो गया है। महानिदेशक मत्स्य धनलक्ष्मी के. ने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण आजीविका का मुख्य साधन है। मत्स्य पालन में उत्तर प्रदेश भारत में तीसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक राज्य है। राज्य का वार्षिक मत्स्य उत्पादन गत 06 वर्षों में दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ है। विजन-2047 में उ.प्र. अंतर्देशीय मत्स्य पालन में प्रथम राज्य बन जायेगा। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री जी द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में मत्स्य विभाग के लिए बड़े उपहार की सौगात दी गयी है। मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की आय वृ‌द्धि हेतु कुल 114.20 करोड़ की राशि राज्य सहायतित नई मांग के रूप में स्वीकृत की गयी है। इसके तहत राज्य में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क की स्थापना एवं 03 मत्स्य मण्डी स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रूपये बजट का प्रावधान किया गया है। राज्य में मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए 03 करोड़ रुपये बजट प्रावधान किया गया है। जनपद गोरखपुर में वर्ल्डफिश प्रोजेक्ट सेन्टर की स्थापना हेतु 06 करोड़ रुपये बजट प्रावधान किया गया है। यह महोत्सव राज्य में मत्स्य पालन को औ‌द्योगिक स्तर पर विकसित होने में मदद करेगा और आने वाले समय में किसानों की आय की बढ़ोतरी में मददगार होगा।  डॉ. दीपा सुमन, एन.एफ.डी.बी. ‌द्वारा केन्द्र सरकार की योजनाओं- प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, प्रधानमंत्री किसान समृ‌द्धि योजना तथा फिशरीज एवं एक्वाकल्चर डेवलपमेन्ट फन्ड की जानकारी दी गयी। इस अवसर पर आलोक बिसवाल (डेलॉयट) द्वारा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डालर बनाने में मत्स्य की भूमिका के विषय में प्रस्तुतिकरण किया गया। रजनीश कुमार (एक्वाएक्स) द्वारा मत्स्य विकास की सम्भावनाओं पर प्रस्तुतिकरण किया गया तथा प्रोटीन की उपलब्धता एवं रोजगार सृजन में मत्स्य क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला गया। तकनीकी सत्र के प्रथम दिन डा. संजय श्रीवास्तव (मेधा हैचरी महराजगंज) द्वारा मत्स्य बीज उत्पादन, श्री राजीव रंजन सिंह (आर.एन.आर. एक्वा लखनऊ) द्वारा कैट फिश फार्मिंग, श्री मनोज शर्मा द्वारा झींगा पालन, श्री मनीष वर्मा द्वारा केज कल्चर एवं श्री शुभम सिंह द्वारा आर्नामेन्टल फिश फार्मिंग पर प्रेजेन्टेशन दिया गया। इस दौरान उ.प्र. मत्स्य विकास निगम के अध्यक्ष रमाकान्त निषाद, उ.प्र. मत्स्य जीवी सहकारी संघ के सभापति वीरू साहनी, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार के.वी. राजू, सलाहकार जी.एन. सिंह, विशेष सचिव मत्स्य सुनील कुमार वर्मा, निदेशक मत्स्य एन.एस. रहमानी, संयुक्त निदेशक मत्स्य अनिल कुमार, प्रबन्ध निदेशक एक्वाएक्स समीर पात्रा, अध्यक्ष एक्वाएक्स वीनू दन्तूलूरी समेत देश एवं प्रदेश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक, उ‌द्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 1000 मत्स्य पालक सम्मिलित हुए।

पिछले वर्ष के सापेक्ष आबकारी से अब तक मिला 13% अधिक राजस्व

फरवरी तक उत्तर प्रदेश में हुआ ₹.1.96 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व संग्रह पिछले वर्ष के सापेक्ष आबकारी से अब तक मिला 13% अधिक राजस्व मुख्यमंत्री ने की चालू वित्तीय वर्ष की फरवरी मासांत तक के कर-करेत्तर राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा, कहा, लक्ष्य के सापेक्ष तेज करें प्रयास जीएसटी, वैट आबकारी, परिवहन सहित हर सेक्टर में बढ़ा राजस्व संग्रह, मुख्यमंत्री ने जताया संतोष होली पर अलर्ट रहे प्रशासन, न बने-न बिके अवैध और जहरीली शराब: मुख्यमंत्री लैंड रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन व रजिस्ट्री कार्यालयों के आधुनिकीकरण को तेज करें: मुख्यमंत्री परिवहन निगम की बसों की फिटनेस सुनिश्चित करें, नए रुट चिन्हित कर निजी क्षेत्र के सहयोग से बस सेवा शुरू करें: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के फरवरी मासांत तक के कर एवं करेत्तर राजस्व की अद्यतन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। जीएसटी, वैट, आबकारी, स्टाम्प एवं पंजीकरण, परिवहन, ऊर्जा, भू-राजस्व तथा खनन विभागों द्वारा प्रस्तुत लक्ष्यों और उपलब्धियों का आकलन करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राजस्व वृद्धि प्रदेश में विकास कार्यों की गति को निर्धारित करती है। उन्होंने सभी विभागों को पारदर्शिता, दक्षता और नवाचार-आधारित कार्यप्रणाली के साथ लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कर-राजस्व का वार्षिक लक्ष्य ₹2,95,000 करोड़ निर्धारित है, जिसके सापेक्ष फरवरी 2026 तक ₹1,96,177 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की गई है। राज्य कर (जीएसटी + वैट) का लक्ष्य ₹1,75,725 करोड़ है, जिनके मुकाबले अभी तक ₹1,03,770 करोड़ का संग्रह प्राप्त हुआ है। इसमें जीएसटी के तहत ₹75,195 करोड़ तथा वैट के अंतर्गत ₹28,575 करोड़ की प्राप्ति शामिल है। राज्य कर विभाग ने बताया कि जीएसटी 2.0, एआई आधारित जोखिम विश्लेषण, बड़े पैमाने पर स्क्रूटनी, ई-इनवॉइसिंग और ई-वे बिल की प्रभावी निगरानी जैसे प्रयासों से कर अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एआई आधारित 1.59 लाख करदाताओं की जांच, 75 जनपदों में संवाद कार्यक्रम, फर्जी आईटीसी पर नियंत्रण तथा ₹3,117 करोड़ की वसूली विभाग के प्रमुख परिणाम रहे। आबकारी विभाग की ओर से बताया कि विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹63,000 करोड़ है, जिसके सापेक्ष फरवरी 2026 तक ₹48,501 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया जा चुका है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 13.2 प्रतिशत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दुकानों के नवीनीकरण की दर 93.75 प्रतिशत दर्ज की गई है। विभाग ने उपभोग आधारित रणनीति, दुकानों के नवीनीकरण, लाइसेंस शुल्क, असग्रम मांग पत्र तथा थोक एवं ब्रांड नवीनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से मार्च में लगभग ₹9,050 करोड़ की अतिरिक्त प्राप्ति का रोडमैप प्रस्तुत किया। वर्षांत तक राजस्व लगभग ₹57,550 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने वर्ष 2025-26 के अपने वार्षिक लक्ष्य ₹38,150 करोड़ के सापेक्ष फरवरी तक ₹29,487 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की। विभाग ने यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, बरेली, गोरखपुर और वाराणसी सहित विभिन्न विकास प्राधिकरणों की आगामी आवासीय एवं वाणिज्यिक परियोजनाओं से संभावित राजस्व का भी विवरण प्रस्तुत किया। खनन पट्टों के नवीनीकरण, अवशेष संपत्तियों के पंजीकरण अभियान, टोल प्लाज़ा मामलों के निस्तारण तथा सर्किल दरों के वैज्ञानिक पुनरीक्षण को राजस्व संवर्धन के प्रभावी उपायों के रूप में प्रस्तुत किया गया। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹14,000 करोड़ है, जिसके मुकाबले फरवरी तक ₹11,005 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। वाहन पंजीकरण में सुधार, कर अदायगी की बेहतर व्यवस्था, तकनीक आधारित निगरानी तथा प्रवर्तन कार्यवाहियों की मजबूती से विभाग ने राजस्व वृद्धि दर्ज की है। कर वसूली शिविर, निगरानी अभियान और डिजिटल मॉनिटरिंग को आगामी अवधि में और तीव्र करने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। बैठक में भू-राजस्व एवं ऊर्जा विभाग ने संयुक्त रूप से फरवरी तक ₹3,414 करोड़ की उपलब्धि की जानकारी दी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.6 प्रतिशत अधिक है। खनन एवं भू-तत्व विभाग ने बताया कि विभाग वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित ₹6,000 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष फरवरी तक ₹3,597 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति कर चुका है। विभाग ने बताया कि खनन क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग, ओवरलोडिंग की ज़ीरो पॉइंट रोकथाम, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, विभिन्न राज्यों के पोर्टलों से एपीआई इंटीग्रेशन तथा अंतरराज्यीय समन्वय के परिणामस्वरूप राजस्व संग्रह और अधिक सुदृढ़ हुआ है। विभाग ने मार्च में लगभग ₹600 करोड़ की संभावित प्राप्ति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि बढ़ता हुआ राजस्व प्रदेश में बुनियादी ढाँचे, सामाजिक कल्याण, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को गति प्रदान करता है। उन्होंने सभी विभागों को टीम भावना, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री जी ने आबकारी विभाग को होली पर्व के दौरान विशेष सतर्कता बरतने तथा अवैध और जहरीली शराब के किसी भी प्रकार के उत्पादन एवं बिक्री को पूर्णतः रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग से लैंड रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन की प्रगति की जानकारी लेते हुए रजिस्ट्री कार्यालयों के आधुनिकीकरण की गति बढ़ाने को कहा। परिवहन विभाग को मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम की बसों की फिटनेस, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की ठोस कार्ययोजना और नए रूट चिन्हित कर निजी बस संचालकों के सहयोग से बेहतर परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री का निर्देश, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के खुद के भवन नहीं, उनका कराएं निर्माण

हर आंगनबाड़ी केंद्र का होगा स्वयं का भवन-मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री का निर्देश, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के खुद के भवन नहीं, उनका कराएं निर्माण  प्रदेश में 1.89 लाख केंद्र, 76 हजार को नए भवनों की आवश्यकता सीएसआर से सहयोग लें, राज्य सरकार भी करेगी सहयोग: मुख्यमंत्री  प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल की उपयोगिता पर करें विचार: मुख्यमंत्री   नए आंगनबाड़ी भवनों में होगा आधुनिक व समावेशी सुविधाओं का समावेश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को उनके स्वयं के भवनों में संचालित करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 03 से 06 वर्ष आयु के बच्चे आते हैं और ये केंद्र प्री-प्राइमरी के रूप में भी उपयोगी हैं। ऐसे में बच्चों की सुविधा, पठन-पाठन की उत्कृष्ट व्यवस्था तथा भवनों का आकर्षक स्वरूप सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से लगभग 76 हजार केंद्र अभी अपने स्वयं के भवनों में नहीं चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों के निर्माण में कॉरपोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) का सहयोग लिया जा सकता है और आवश्यकतानुसार राज्य सरकार भी वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाया जा सकता है। उन्होंने एक मानक मॉडल तैयार कर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि जहाँ भी संभव हो, प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगण में ही बाल-मित्र आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जाए, ताकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित एकीकृत सेवाएँ एक ही स्थान पर सहजता से उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा के दौरान कहा कि बच्चों, गर्भवती माताओं और समुदाय को सुरक्षित, स्वच्छ तथा आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों की बुनियाद हैं। राज्य सरकार आंगनबाड़ी ढाँचे को पूरी तरह रूपांतरित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। यह मिशन ‘स्वस्थ बचपन-समर्थ उत्तर प्रदेश’ को नई गति देगा। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रस्तावित नए आंगनबाड़ी भवनों का मॉडल समावेशी एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इसमें पेयजल सुविधा, विद्युत व्यवस्था, शौचालय, खेल-आधारित गतिविधियों हेतु पर्याप्त ‘प्ले एरिया’, किचन शेड, हॉट-कुक्ड मील की व्यवस्था, लो-हाइट वॉश यूनिट, बाल-मित्र शौचालय, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु पृथक कक्ष तथा रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सहित पोषण वाटिका जैसी व्यवस्थाएँ शामिल होंगी।

योगी सरकार ने होली से पहले यूपी के छात्रों को दिया तोहफा, 38 लाख स्टूडेंट्स को मिलेगा लाभ

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में होली से पहले प्रदेश के छात्रों के लिए योगी सरकार ने बड़ी सौगात का ऐलान किया गया है. जिसमें कक्षा 9 और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि करने का फैसला लिया है. इस निर्णय से खास तौर पर पिछड़ा वर्ग के लाखों छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा. सरकार के नए आदेश के अनुसार अब पिछड़ा वर्ग के छात्रों को तीन हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी. पहले की तुलना में यह राशि बढ़ाई गई है, जिससे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक सहारा मिलेगा. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर रखना और ड्रॉपआउट दर को कम करना है. छात्र हित में लिया गया फैसला प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने इस फैसले का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देते हुए कहा कि यह निर्णय छात्रों के हित में लिया गया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि प्रदेश का कोई भी छात्र आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे. छात्रवृत्ति की बढ़ी हुई राशि सीधे पात्र विद्यार्थियों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी. 38 लाख छात्रों को मिलेगा लाभ सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 38 लाख छात्र इस योजना से लाभान्वित होंगे. इससे न सिर्फ छात्रों को आर्थिक सहायता मिलेगी, बल्कि उनके अभिभावकों पर भी आर्थिक बोझ कम होगा. होली से पहले आई इस घोषणा को सरकार की ओर से छात्रों के लिए एक बड़े तोहफे के रूप में देखा जा रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में यह फैसला प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है, जिसमें युवाओं के भविष्य को मजबूत करना प्रमुख लक्ष्य है. पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए यह कदम बड़ा बताया जा रहा है.सरकार जनहित के फैसले लगातार ले रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को मिल सके.