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यूपी को इससे सर्वाधिक लाभ, रोजगार की नई गारंटी के साथ प्रदेश में लागू करेंगेः मुख्यमंत्री

ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा विकसित भारत–जी राम जी कानून : सीएम योगी यूपी को इससे सर्वाधिक लाभ, रोजगार की नई गारंटी के साथ प्रदेश में लागू करेंगेः मुख्यमंत्री सीएम बोले, जिन्होंने लंबे समय तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, जनता उनसे सवाल करेगी मनरेगा के दौरान अधूरी व अस्थायी परिसंपत्तियां बनीं, फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी की शिकायतें मिलीं, इसलिए लाया गया बदलाव बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनिटरिंग और डीबीटी के माध्यम से सीधा भुगतान होगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ‘विकसित भारत–जी राम जी कानून, 2025’ कानून की खूबियां बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण भारत के कायाकल्प की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 पारित किया गया है, जो देश के ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को इस कानून से सर्वाधिक लाभ होगा। रोजगार की नई गारंटी के साथ इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा।  लोकभवन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए योगी ने कहा कि जिन लोगों ने लंबे समय तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, गरीबों को भूख और युवाओं को बेरोजगारी व पलायन के लिए मजबूर किया, वे आज पारदर्शी सुधारों का समर्थन करने से इसलिए बच रहे हैं, क्योंकि तब जनता उनसे सवाल करेगी कि जब उन्हें मौका मिला था, तब उन्होंने यह काम क्यों नहीं किया। कांग्रेस और उसका इंडी गठबंधन इस महत्वपूर्ण अधिनियम पर सवाल खड़े कर रहा है, जबकि देशहित, श्रमिकों, किसानों और गांवों के विकास के लिए उठाए गए इस कदम का स्वागत होना चाहिए था। प्रधानमंत्री और एनडीए के प्रति आभार जताने के बजाय वे अपने पुराने, भ्रष्टाचार-प्रेरित मॉडल का बचाव कर रहे हैं। सीएम योगी ने बताया कि वीबी–जी राम जी एक्ट, 2025 की मूल भावना पारदर्शी प्रक्रिया, रोजगार की अधिकतम गारंटी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर आधारित है। यही अधिनियम विकसित भारत-2047 के विजन की मजबूत आधारशिला बनेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा जब राज्य विकसित होंगे और राज्य तभी विकसित होंगे जब गांव विकसित होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त कर किसान आत्मनिर्भर बनेगा, श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिलेगा। पहले कमजोर सोशल ऑडिट, शिकायत निवारण की खामियां थीं मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून इसलिए जरूरी था क्योंकि मनरेगा के दौरान अधूरी व अस्थायी परिसंपत्तियां बनीं, फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और भुगतान में कटौती जैसी शिकायतें हर जनपद से सामने आईं।  समाजवादी पार्टी की सरकार के समय मनरेगा में घोटाला हुआ था जिसकी सीबीआई जाँच चली।   कमजोर सोशल ऑडिट, शिकायत निवारण की खामियां, प्रशासनिक अक्षमताएं और मजदूरी में देरी लगातार बनी रहीं। खेती के मौसम में किसानों को मजदूर नहीं मिलते थे और श्रमिकों को समय पर काम व भुगतान की गारंटी नहीं मिल पाती थी। सीएम योगी ने बताया कि नए अधिनियम में रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साप्ताहिक भुगतान होगा और देरी पर मुआवजा व अतिरिक्त ब्याज दिया जाएगा। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन गया है। खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुवाई और कटाई के समय 60 दिन तक कार्य स्थगित करने का अधिकार दिया गया है। बंद होगा गड्ढा खोदने और पाटने का खेल उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत पंचायतें स्थायी परिसंपत्तियां बना सकेंगी। ग्राम पंचायतें चार प्राथमिक श्रेणियों में कार्य तय करेंगी। जल संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चेक डैम, ग्रामीण सड़कें, नालियां, आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर, खेल मैदान, ओपन जिम, बाजार और मंडियों का निर्माण किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य भी इसी के तहत होंगे। सीएम योगी ने बताया कि इस अधिनियम में टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में शामिल किया गया है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनिटरिंग और डीबीटी के माध्यम से सीधा भुगतान होगा। फर्जी नामों पर भुगतान का खेल पूरी तरह बंद होगा। पहले जो लोग गड्ढा खोदते थे और उसे पाटते थे, उनका यह खेल बंद होगा।  मनरेगा की तुलना में 17 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं राज्यों को उन्होंने बताया कि कानून में छह माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल और समयबद्ध शिकायत निवारण, जिला लोकपाल और मानकों के अनुरूप ऑडिट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। केंद्र–राज्य की साझेदारी 60:40 रहेगी और कार्य पूरी तरह मांग आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नई योजना से राज्यों को मनरेगा की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं। जिन राज्यों में श्रमिकों की संख्या अधिक है, वहां अधिक कार्य मिलेगा। रोजगार अब केवल राहत नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनेगा। हर पात्र को समय पर काम, हर गांव में टिकाऊ परिसंपत्तियां सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूरी केंद्रीय कैबिनेट के प्रति आभार जताते हुए कहा कि राज्य सरकार इसे पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है। हर पात्र को समय पर काम, हर गांव में टिकाऊ परिसंपत्तियां और हर श्रमिक के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत राजग से जुड़े दलों के नेता भी उपस्थित थे।

मकर संक्रांति से शुरू होकर माहभर से अधिक चलने वाले मेले की तैयारियां पूरी

श्रद्धा, मनोरंजन व रोजगार का संगम है गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला मकर संक्रांति से शुरू होकर माहभर से अधिक चलने वाले मेले की तैयारियां पूरी त्रेतायुगीन है महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा गोरखपुर  मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में लगने और इससे पखवारा पूर्व शुरू होकर माह भर से अधिक समय तक चलने वाला खिचड़ी मेला श्रद्धा, मनोरंजन और रोजगार का संगम है। पूरी प्रकृति को ऊर्जस्वित करने वाले सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी के रूप में चढ़ाए जाने वाला अन्न वर्षभर जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है। मंदिर के अन्न क्षेत्र में कभी भी कोई जरूरतमंद पहुंचा, खाली हाथ नहीं लौटा। ठीक वैसे ही, जैसे बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता। मंदिर में खिचड़ी का यह पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनेगा। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन मानी जाती है। मान्यता है कि तत्समय आदियोगी गुरु गोरखनाथ एक बार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी के दरबार मे पहुंचे। मां ने उनके भोजन का प्रबंध किया। कई प्रकार के व्यंजन देख बाबा ने कहा कि वह तो योगी हैं और भिक्षा में प्राप्त चीजों को ही भोजन रूप में ग्रहण करते हैं। उन्होंने मां ज्वाला देवी से पानी गर्म करने का अनुरोध किया और स्वयं भिक्षाटन को निकल गए। भिक्षा मांगते हुए वह गोरखपुर आ पहुंचे और राप्ती और रोहिन के तट पर जंगलों में बसे इस स्थान पर धूनी रमाकर साधनालीन हो गए। उनका तेज देख लोग उनके खप्पर में अन्न (चावल, दाल) दान करते रहे। मकर संक्रांति का पर्व आने पर यह परंपरा खिचड़ी पर्व के रूप में परिवर्तित हो गई। तब से बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का क्रम हर मकर संक्रांति पर अहर्निश जारी है। कहा जाता है कि उधर ज्वाला देवी के दरबार मे बाबा की खिचड़ी पकाने के लिए आज भी पानी उबल रहा है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर नाथ पंथ की विशिष्ट परंपरानुसार गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख समृद्धि की मंगलकामना करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार तथा देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु शिवावतारी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के दिन भोर में सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करते हैं। तत्पश्चात नेपाल राजपरिवार की ओर से आई खिचड़ी बाबा को चढ़ाई जाती है। इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं और जनसामान्य की आस्था खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाती है। खिचड़ी महापर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर तैयार है। प्रशासन के साथ ही मंदिर प्रबंधन की तरफ से श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं का पूरा इंतज़ाम किया गया है। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी अब तक तीन बार खिचड़ी मेला की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं।   सामाजिक समरसता का केंद्र है गोरखनाथ मंदिर गोरखनाथ मंदिर सामाजिक समरसता का ऐसा केंद्र है जहां जाति, पंथ, महजब की बेड़ियां टूटती नजर आती हैं। इसके परिसर में क्या हिंदू, क्या मुसलमान, सबकी दुकानें हैं। यानी बिना भेदभाव सबकी रोजी रोटी का इंतजाम है। यही नहीं, मंदिर परिसर में  लगने वाला खिचड़ी मेला भी जाति-धर्म के बंटवारे से इतर हजारों लोगों की आजीविका का माध्यम बनता है। मंदिर परिसर में नियमित रोजगार करने वालों से लेकर मेला में दुकान लगाने वालों तक, बड़ी भागीदारी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की होती है। उन्होंने कभी कोई भेदभाव महसूस नहीं किया बल्कि अपनेपन के भाव से विभोर होते रहते हैं। मेले में खरीदारी से लेकर मनोरंजन के साधनों तक का भरपूर इंतजाम हैं।

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, राज्य में पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण होगा आसान

परिवार के बीच दान विलेख पर स्टाम्प शुल्क में राहत, अब व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियां भी शामिल योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, राज्य में पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण होगा आसान पारिवारिक सदस्यों को दान दी गई संपत्ति पर देय होगा अधिकतम ₹5,000 स्टाम्प शुल्क  व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर मिली राहत, शहरी और गांव सभी जगह होगा लागू   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य में परिवार के सदस्यों के मध्य निष्पादित अचल संपत्ति के दान विलेख पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क में दी जा रही छूट के दायरे को और व्यापक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय से अब पारिवारिक सदस्यों के बीच व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी स्टाम्प शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में दान विलेखों पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार हस्तांतरण पत्र (कन्वेयंस डीड) की भांति स्टाम्प शुल्क देय होता है, जबकि रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के अनुसार अचल संपत्ति के दान विलेख का पंजीकरण अनिवार्य है। ₹5,000 तक सीमित है स्टाम्प शुल्क स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन अनुभाग-2 की 3 अगस्त 2023 की अधिसूचना के माध्यम से यह व्यवस्था की गई थी कि यदि अचल संपत्ति का दान परिवार के सदस्यों के पक्ष में किया जाता है तो स्टाम्प शुल्क में छूट देते हुए अधिकतम ₹5,000 ही लिया जाएगा। यह छूट अब तक केवल कृष्य एवं आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी। योगी कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव के तहत इस छूट को पारिवारिक सदस्यों के मध्य व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे परिवारों के बीच संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हो जाएगी। शहरी और ग्रामीण सभी कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर मिलेगी राहत   प्रदेश के स्टांप तथा पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि 2022 से पहले तक परिवार के रिश्ते में यदि कोई प्रॉपर्टी देता था तो पूरे सर्किल रेट के बराबर स्टाम्प शुक्ल देना पड़ता था। 2022 में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में तय हुआ कि पारिवारिक रिश्तों में यदि कोई प्रॉपर्टी दान की जाती है तो उस पर फिक्स्ड 5 हजार रुपए स्टांप लगेगा। लेकिन यह दान केवल आवासीय और कृषि पर लागू था, लेकिन अब यह नियम कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी लागू कर दिया गया है। शहर के अंदर अब तक यह 7 प्रतिशत और गांवों में 5 प्रतिशत था, लेकिन अब गांव या शहर कहीं भी आपको केवल 5 हजार रुपए ही भुगतान करना है।  प्रावधानों में और स्पष्टता कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, पूर्व में जारी अधिसूचना में उल्लिखित संबंधियों की परिभाषा एवं अन्य प्रावधानों को भी और अधिक स्पष्ट किया गया है, जिससे नियमों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे। यह छूट संबंधित अधिसूचना के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने की तिथि से तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी। सरकार के इस फैसले को आम जनता के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे पारिवारिक संपत्ति के वैधानिक हस्तांतरण को प्रोत्साहन मिलेगा और विवादों में भी कमी आएगी। कुशीनगर और झांसी में नए उप निबंधक कार्यालय भवनों के लिए भूमि आवंटन को मंजूरी कैबिनेट की बैठक में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत कैबिनेट ने जनपद कुशीनगर की तहसील कप्तानगंज में उप निबंधक कार्यालय भवन के निर्माण हेतु ग्राम बसहिया उर्फ कप्तानगंज स्थित तहसील परिसर की भूमि में से 0.0920 हेक्टेयर (920 वर्गमीटर) भूमि को स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। वर्तमान में उप निबंधक कार्यालय जीर्ण-शीर्ण भवन में संचालित है, जिसे ध्वस्त कर नए भवन का निर्माण किया जाएगा।  इसके साथ ही कैबिनेट ने झांसी में उप निबंधक कार्यालय सदर एवं अभिलेखागार के निर्माण हेतु पुरानी तहसील परिसर, मौजा झांसी खास स्थित आराजी संख्या 3035 में से 0.0638 हेक्टेयर (638 वर्गमीटर) भूमि को राजस्व विभाग से स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को आवंटित/हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान की। दोनों ही मामलों में भूमि राज्य सरकार के स्वामित्व की है, अतः भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत स्टाम्प शुल्क से तथा रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के अंतर्गत पंजीकरण शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे ‘मिशन कर्मयोगी’ की प्रगति की समीक्षा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे 'मिशन कर्मयोगी' की प्रगति की  समीक्षा कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन द्वारा प्रदेश में जारी प्रयासों का पेश किया जाएगा खाका फील्ड स्तर के कर्मियों के प्रशिक्षण को लेकर हो रहे कार्यों पर रहेगा विशेष फोकस कई विभागों के प्रमुख सचिव समीक्षा बैठक में रहेंगे मौजूद लखनऊ उत्तर प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत अब तक हुई प्रगति और भविष्य में क्रियान्वित की जाने वाली योजनाओं की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समीक्षा करेंगे। मंगलवार को कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस राधा चौहान अपनी टीम के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगी और राज्य में मिशन के क्रियान्वयन की स्थिति को लेकर एक विस्तृत खाका पेश करेंगी । बैठक में विभिन्न विभागों और प्रशासनिक स्तरों पर कार्यरत लोक सेवकों की क्षमता बढ़ाने को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रशिक्षण की दिशा और प्राथमिकताओं पर आवश्यक दिशा-निर्देश दे सकते हैं। इस समीक्षा बैठक में कई विभागों के प्रमुख सचिव भी उपस्थित रहेंगे, जो अपने-अपने विभागों में क्षमता निर्माण से जुड़ी प्रगति और चुनौतियों से मुख्यमंत्री योगी को अवगत कराएंगे। उल्लेखनीय है कि सोमवार को कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस  राधा चौहान ने मुख्य सचिव एसपी गोयल से भी मुलाकात कर प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत जारी कार्यों को लेकर चर्चा की। प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में समीक्षा हाल ही में आयोजित मुख्य सचिवों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्यों को कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन के मार्गदर्शन में क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में मुख्यमंत्री योगी द्वारा यह समीक्षा बैठक की जा रही है, जिसमें अब तक की प्रगति का आकलन किया जाएगा और आगे की कार्ययोजना पर दिशा-निर्देश दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राज्यों में क्षमता निर्माण के प्रयासों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन ने उत्तर प्रदेश सहित 28 राज्यों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। फील्ड कार्मिकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत एएनएम, आशा कार्यकर्ता, पुलिस कांस्टेबल, पंचायती राज संस्थाओं तथा स्थानीय नगरीय निकायों (ULB) के फील्ड स्तर के कर्मियों के लिए व्यवहारिक और कार्यात्मक प्रशिक्षण पर विशेष फोकस रहेगा। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जमीनी स्तर पर सेवा वितरण की क्षमता को मजबूत करने का लक्ष्य है। UPAAM है नोडल की भूमिका में, iGoT पर उपलब्ध होंगे पाठ्यक्रम राज्य सरकार ने विभागों को क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार करने में सहयोग के लिए UPAAM को नोडल संस्था नामित किया है। इसके तहत तैयार किए जाने वाले प्रशिक्षण पैकेज iGoT पोर्टल पर कर्मयोगी भारत के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां अब तक 18.8 लाख से अधिक उपयोगकर्ता ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। राज्य के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विभागों में स्कूल शिक्षा और पुलिस विभाग प्रमुख हैं। इनके बाद चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, होम गार्ड्स, कृषि, पावर कॉरपोरेशन तथा पंचायती राज विभाग उल्लेखनीय रूप से आगे हैं। कर्मयोगी भारत (iGOT) प्लेटफॉर्म पर वर्तमान में हिंदी भाषा में 840 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण पैकेज तैयार मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर सड़क, सिंचाई, भवन, पुल और संचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण पैकेज भी तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य तकनीकी दक्षता के साथ-साथ प्रशासनिक और प्रबंधन क्षमताओं को सुदृढ़ करना है। इस बैठक को राज्य में मिशन कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन और एक सक्षम, आधुनिक व उत्तरदायी प्रशासनिक तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इस बैठक का उद्देश्य हिंदी में राज्य-विशेष पाठ्यक्रमों के विकास के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना भी है।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने लिखी संघर्ष से सफलता तक की कहानी

यही है अभ्युदय, जौनपुर के किसान की बेटी पूजा बनी असिस्टेंट कमांडेंट  मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने लिखी संघर्ष से सफलता तक की कहानी आर्थिक कठिनाइयों के बीच शिक्षा बनी ताकत दिल्ली से जौनपुर तक का सफर पहले ही प्रयास में यूपीएससी-सीएपीएफ परीक्षा पास कर गांव और प्रदेश का नाम किया रोशन लखनऊ  सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में उत्तर प्रदेश देश में अपनी एक नई पहचान गढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाए। जौनपुर की पूजा सिंह की सफलता इसी सोच का जीवंत उदाहरण है। एक किसान परिवार में जन्मी पूजा सिंह ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के माध्यम से वह मुकाम हासिल किया है जो कभी उनके लिए दूर का सपना लगता था। पूजा कहती हैं कि “मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने मेरे सपनों को राह दी।” पूजा का जीवन संघर्ष और संकल्प की मिसाल है। उनके पिता खेती करते हैं और सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बचपन से ही पूजा ने अभाव को काफी निकट से देखा। इन परिस्थितियों ने उन्हें कमजोर नहीं बनाया वरन उनकी इच्छा शक्ति को और प्रबल बनाने का काम किया। उन्होंने तय कर लिया था कि शिक्षा के माध्यम से वह न केवल अपना भविष्य संवारने का काम करेंगी, बल्कि अपने परिवार और गांव का नाम भी रोशन करेंगी। पूजा ने 12वीं तक की अपनी पढ़ाई दिल्ली से पूरी की थी। आर्थिक दबाव के कारण दिल्ली जैसे महानगर में रहकर आगे की पढ़ाई को जारी रख पाना उनके लिए संभव नहीं हो सका। ऐसे में पूजा जौनपुर लौट आईं और वहां के टीडी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। यह वह दौर था जब आर्थिक सीमाएं पूजा के सपनों के आड़े आ सकती थीं, लेकिन प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना उनके लिए संजीवनी साबित हुईं हैं। वर्ष 2024 में पूजा को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के बारे में जानकारी मिली। मई 2024 में उन्होंने आवेदन किया और जून 2024 से अभ्युदय योजना के अंतर्गत मुफ्त कोचिंग से जुड़ गईं। यह वही योजना है जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के होनहार विद्यार्थियों के लिए शुरू किया, जिससे कि आर्थिक स्थिति उनकी प्रतिभा के रास्ते में किसी प्रकार की बाधा न बन सके। पूजा बताती हैं कि अभ्युदय योजना के अंतर्गत उन्हें अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। नियमित कक्षाएं, व्यवस्थित पाठ्यक्रम और निरंतर अभ्यास से उनकी तैयारी को नई दिशा मिली। पूजा शाम को कॉलेज के बाद डेढ़ घंटे की कक्षाओं में शामिल होती थीं। शिक्षक विषयों को सरल भाषा में समझाने के साथ-साथ बार-बार रिवीजन और नोट्स के माध्यम से विद्यार्थियों की नींव को मजबूत करते थे। पूजा कहती हैं कि उन्हें निजी कोचिंग संस्थान का सहारा लेना पड़ता तो 1-1.50 लाख रुपये तक का खर्च आता, जो उनके परिवार के लिए असंभव सा था। अभ्युदय योजना ने यह आर्थिक बोझ पूरी तरह समाप्त कर दिया। निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया और लक्ष्य पर केंद्रित रहने का अवसर प्रदान किया। समर्पित तैयारी से सफलता तक  अभ्युदय योजना का सहारा मिलने के बाद पूजा की समर्पित तैयारी का परिणाम यह रहा कि वह अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी-सीएपीएफ परीक्षा उत्तीर्ण की और असिस्टेंट कमांडेंट बनीं। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता तक ही सीमित नहीं रही, यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों की सफलता का भी प्रमाण है। पूजा की सफलता से उनके परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र में गर्व का भाव है। हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण पूजा सिंह कहती हैं कि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों की कमी से अपने सपनों को दबा देते हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित यह योजना आईएएस, पीसीएस, नीट, जेईई और सीएपीएफ जैसी परीक्षाओं की तैयारी को गांव-गांव की गलियों तक पहुंचा दिया है।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: पुलिस भर्ती में आयु सीमा में तीन साल की राहत, 32,679 पदों पर होगी भर्ती

योगी सरकार का बड़ा फैसला, पुलिस भर्ती में आयु सीमा पर तीन साल की राहत 32,679 पदों पर सीधी भर्ती में सभी वर्गों को आयुसीमा में छूट उत्तर प्रदेश में युवाओं के हित में फिर आगे आई योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ी राहत दी है। अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती-2025 के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। लाखों युवाओं को होगा लाभ सीधी भर्ती-2025 के अंतर्गत कुल 32,679 पदों को भरे जाने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। शासनादेश के अनुसार आरक्षी नागरिक पुलिस (पुरुष/महिला), आरक्षी पीएसी/सशस्त्र पुलिस (पुरुष), आरक्षी विशेष सुरक्षा बल (पुरुष), महिला बटालियन हेतु महिला आरक्षी, आरक्षी घुड़सवार पुलिस (पुरुष) तथा जेल वार्डर (पुरुष एवं महिला) पदों पर भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित होने वाले सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को यह आयु शिथिलीकरण एक बार के लिए प्रदान किया जाएगा। सरकार द्वारा यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के आलोक में लिया गया है। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के अनुक्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से लागू किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा जो आयु सीमा के कारण अब तक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। युवाओं के हित में योगी आदित्यनाथ सरकार योगी सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि प्रदेश की सरकार युवाओं की वास्तविक समस्याओं को समझती है और समाधान के लिए ठोस फैसले लेने से पीछे नहीं हटती। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को न्यायसंगत अवसर देना, रोजगार के अधिक से अधिक विकल्प उपलब्ध कराना और प्रशासनिक निर्णयों में संवेदनशीलता बनाए रखना योगी सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। पुलिस भर्ती में आयु सीमा शिथिलीकरण का यह निर्णय न केवल लाखों युवाओं की उम्मीदों को नया बल देगा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार में युवाओं का भविष्य नीति निर्धारण के केंद्र में है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री/राज्यपाल कल्याण सिंह की 94वीं जयंती पर अर्पित किए श्रद्धासुमन

अपने नाम को उत्तर प्रदेश के ‘कल्याण’ के साथ जोड़कर सार्थक करते रहे ‘बाबू जीः’ मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री/राज्यपाल कल्याण सिंह की 94वीं जयंती पर अर्पित किए श्रद्धासुमन   सुशासन, विकास, राष्ट्रवादी मिशन को बढ़ाने के लिए हमेशा जाना जाएगा ‘बाबू जी’ का कार्यकालः सीएम योगी  कल्याण सिंह जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में पढ़ा राष्ट्रवाद का पाठः मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री/राज्यपाल कल्याण सिंह की 94वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और कहा कि ‘बाबू जी’ अपने नाम को उत्तर प्रदेश के ‘कल्याण’ के साथ जोड़कर सार्थक करते रहे। उतर प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री थे कल्याण सिंह  मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बाबू जी’ उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री थे। 1991 में जब उन्होंने उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाली, तब यहां अव्यवस्था, अराजकता, गुंडागर्दी थी और आतंकी गतिविधियां सिर उठा रही थीं। गांवों, गरीबों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था। एक ओर कुव्यवस्था थी तो दूसरी ओर 500 वर्षों की गुलामी को दूर करने के लिए हिंदू समाज छटपटा रहा था।  ‘बाबू जी’ का कार्य देख प्रदेशवासियों को हुआ विश्वास- सुशासन की ओर चलकर विकास के नए सोपान को चुनेगा यूपी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने पहली बार भाजपा की  सरकार की कमान अपने हाथ में ली थी। जब उन्होंने कार्य शुरू किया तो कुछ ही महीने में प्रदेशवासियों के मन में यह विश्वास सुदृढ़ होने लग गया था कि उत्तर प्रदेश सुशासन की ओर चलकर विकास के नए सोपान को चुनेगा, लेकिन उन्हें अस्थिर करने की साजिशें होने लगी। अव्यवस्था फैलानी शुरू हो गईं।  सुशासन, विकास, राष्ट्रवादी मिशन को बढ़ाने के लिए हमेशा जाना जाएगा ‘बाबू जी’ का कार्यकाल मुख्यमंत्री ने कहा कि जब राम जन्मभूमि आंदोलन चरम की ओर बढ़ा तो रामभक्तों, पूज्य संतों की भावना का सम्मान करते हुए अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के प्रति उन्होंने सत्ता को बलिदान करने में संकोच नहीं किया। उनकी सरकार गई, लेकिन गुलामी के ढांचे को हटाने के जिस प्रण के साथ राम भक्त आगे बढ़े थे, उन्होंने सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर प्रभु राम के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करने में तनिक भी देर नहीं लगाई। बाबू जी का कार्यकाल यूपी सरकार के सुशासन, विकास, राष्ट्रवादी मिशन को बढ़ाने के लिए हमेशा जाना जाएगा।  कल्याण सिंह जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में पढ़ा राष्ट्रवाद का पाठ  सीएम योगी ने कहा कि आज हर भारतवासी बाबू जी को याद करता है। उनका जन्म किसान परिवार में हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा। आजीवन उसे जीवन का मंत्र बनाया और उस मिशन के लिए समर्पित होकर लगातार कार्य करते रहे और अपने नाम को उत्तर प्रदेश के ‘कल्याण’ के साथ जोड़कर सार्थक करते रहे। विधायक, मंत्री, सांसद, मुख्यमंत्री व राज्यपाल के रूप में उनकी सेवाएं देशवासियों के लिए सदैव स्मरणीय रहेंगी।  इस दौरान स्व. कल्याण सिंह के पुत्र व पूर्व सांसद राजवीर सिंह, भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह, सांसद सतीश गौतम, मुकेश राजपूत, कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद, राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी, स्व. कल्याण सिंह के पौत्र व बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह समेत अनेक लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी के टाउनहॉल रैन बसेरे की देखी व्यवस्था

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भीषण शीतलहरी में टाउनहॉल रैन बसेरा पहुंचे और यहाँ रह रहे लोगों का हाल जाना। मुख्यमंत्री ने ठंड से ठिठुरते लोगों को राहत पहुंचाते हुए कंबल एवं भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए। उन्होंने सभी का कुशलक्षेम जाना। छोटे बच्चों को उन्होंने चॉकलेट भी दी। उन्होंने लोगों से कहा कि ठंड में बाहर सड़क पर खुले आसमान के नीचे कत्तई न सोएं। रैनबसेरा आप लोगों के लिए ही बनवाया गया है। उन्होंने रैनबसेरा में शरण लिए लोगों से व्यवस्थाओं के बाबत जानकारी ली और पूछा कि कोई कमी तो नहीं है? लोगों ने प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। लोगों ने बताया कि सब कुछ दुरुस्त है। बिछाने के लिए बिस्तर और ओढ़ने के लिये कंबल तथा तापने के लिये अलाव आदि की भी समुचित व्यवस्था है।        मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अत्यधिक ठंड के दृष्टिगत यह सुनिश्चित किया जाय कि कोई भी व्यक्ति रात्रि में सड़क के किनारे अथवा खुले आसमान में न रहे, गरीब एवं असहाय लोगों को रैनबसेरा में रहने के लिए कहा जाय। रैनबसेरों में समुचित साफ-सफाई, शौचालयों, प्रकाश, बिस्तर, अलाव आदि की व्यवस्था हर हालत में सुनिश्चित की जाए।       इस दौरान प्रदेश के स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, आयुष एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ दयाशंकर मिश्र 'दयालु', एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, धर्मेन्द्र राय, विधायक नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

एआई विजन से 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर मजबूती से बढ़ेंगे कदम

लखनऊ में एआई  सिटी उत्तर प्रदेश को बनाएगी वैश्विक टेक हब एआई सिटी  दो हिस्सों में होगी विकसित, लगभग 60  प्रतिशत क्षेत्र को कोर जोन के रूप में किया जायेगा विकसित एआई विजन से 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर मजबूती से बढ़ेंगे कदम  प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार और निवेश के नए अवसर खोलेगी एआई सिटी लखनऊ   उत्तर प्रदेश देश के बड़े तकनीकी और डिजिटल केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा जिस दूरदर्शी विकास मॉडल को अपनाया गया है उसका अगला बड़ा गंतव्य लखनऊ में प्रस्तावित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) सिटी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता के नाम अपने पत्र में भी एआई सिटी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया था। यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश की आर्थिक दिशा को नई गति देने के साथ-साथ प्रदेश को वैश्विक टेक मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाने का भी काम करेगा। एआई सिटी को दो हिस्सों में विकसित किया जाएगा। लगभग 60  प्रतिशत क्षेत्र को कोर जोन के रूप में विकसित किया जाएगा जहां एआई इनोवेशन सेंटर, टेक पार्क और रिसर्च सुविधाएं होंगी। शेष 40 प्रतिशत क्षेत्र में रेजिडेंशियल, कमर्शियल और सामाजिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।  योगी सरकार का लक्ष्य, अगले पांच  सालों में उत्तर प्रदेश को एक  ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए आईटी-आईटीईएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर को ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित और स्थापित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने इसी सोच के अंतर्गत लखनऊ में एआई सिटी को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई है, जिससे प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और सरकारी सहयोग का संतुलित ढांचा तैयार हो सके। लखनऊ की एआई सिटी को एक समर्पित व आत्मनिर्भर टेक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पर अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई रिसर्च लैब्स, स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर और ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए आधुनिक वर्क प्लेस उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य भारतीय और वैश्विक एआई कंपनियों को एक ही स्थान पर विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है, जिससे कि वे त्वरित गति से अपनी परियोजनाओं को विकसित और विस्तारित कर सकें। यह परियोजना लखनऊ को टॉप-20 ग्लोबल एआई हब्स में शामिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। राजधानी होने के साथ-साथ लखनऊ की शैक्षणिक और तकनीकी क्षमता इस दिशा में एक बड़ी ताकत है। आईआईएम लखनऊ और आईआईआईटी लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान पहले से ही यहां मौजूद हैं, जो रिसर्च, इनोवेशन और स्किल डेवलपमेंट में विशेष भूमिका निभाने का काम कर रहे हैं। आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सिटी इन संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर एक मजबूत टैलेंट पूल तैयार करेगी। एआई सिटी के माध्यम से रोजगार के हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन के अवसर बनेंगे। आईटी प्रोफेशनल्स, डेटा साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स, रिसर्चर्स और स्टार्टअप उद्यमियों के लिए यह एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनेगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को जॉब के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें यहीं पर उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के मार्ग खुलेंगे। एआई सिटी ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा का संबल, 27 लाख बेटियों का भविष्य हुआ सशक्त

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा का संबल सरकार की इस पहल से 27 लाख बेटियों का भविष्य हो रहा सशक्त  आर्थिक सहायता से बदली सामाजिक सोच, लाखों परिवारों का सरकार पर बढ़ा भरोसा लखनऊ उत्तर प्रदेश में बालिकाओं के कल्याण और सशक्तिकरण को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गंभीरता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि बेटियां बोझ नहीं बल्कि समाज की ताकत हैं। इस योजना के द्वारा लगभग 27 लाख बेटियों का भविष्य सशक्त हो रहा है। योजना का उद्देश्य प्रदेश में लैंगिक समानता स्थापित करना, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना और बालिकाओं के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना है। लाखों बालिकाओं तक पहुंची योजना मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 27 लाख पात्र बालिकाओं को लाभान्वित किया जा चुका है। इस पर राज्य सरकार द्वारा कुल 647.21 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि योजना केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू की जा रही है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों तक सहायता पहुंचना सरकार की प्रशासनिक प्रतिबद्धता और पारदर्शी व्यवस्था को दर्शाता है।  बालिकाओं का कल्याण सरकार की प्राथमिकता सरकार ने योजना के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया है। इस वर्ष 3.28 लाख लाभार्थियों को 130.03 करोड़ रुपये की धनराशि योजना के अंतर्गत दी गई है। यह दर्शाता है कि योगी सरकार बालिकाओं के कल्याण को दीर्घकालिक नीति के रूप में आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आज प्रदेश में बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और शैक्षिक सशक्तिकरण की पहचान बन चुकी है और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लैंगिक समानता की दिशा में सरकार का ठोस कदम वर्ष 2019 में शुरू की गई मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत ऐसे परिवारों की बालिकाओं को लाभ दिया जा रहा है, जिनके परिवार उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं। पात्रता की शर्तों के अनुसार परिवार की वार्षिक आय 3.00 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए और परिवार में अधिकतम 2 बच्चे होने चाहिए। योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कारणों से किसी भी बालिका की शिक्षा या विकास बाधित न हो और परिवारों को बेटियों के पालन पोषण में सहयोग मिल सके। सहायता राशि में बढ़ोतरी से मजबूत हुआ भरोसा वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार ने योजना के अंतर्गत दी जाने वाली कुल सहायता राशि को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया। यह सहायता 6 चरणों में प्रदान की जाती है। जन्म के समय 5,000 रुपये, 2 वर्ष की आयु पर टीकाकरण पूर्ण होने पर 2,000 रुपये, कक्षा 1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा 6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा 9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये तथा कक्षा 10 या 12 की परीक्षा उत्तीर्ण कर डिप्लोमा या स्नातक अथवा उससे अधिक अवधि के डिग्री कोर्स में प्रवेश लेने पर 7,000 रुपये की सहायता दी जाती है। यह व्यवस्था बालिकाओं को हर शैक्षिक पड़ाव पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।