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राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 के विमोचन कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन

राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 के विमोचन कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन लखनऊ  गन्ना किसानों की प्रदेश के अंदर क्या स्थिति थी..वर्ष 2000 से 2017 के बीच में गन्ना किसानों को कुल ₹2,14,000 करोड़ का भुगतान हुआ है, यानी 17 वर्षों में ₹2,14,000 करोड़ का. और 2017 से लेकर 2025 के बीच में, इन 8-9 वर्षों में हम लोगों ने ₹3,00,000 करोड़ अन्नदाता किसानों के खाते में गन्ना किसानों के खाते में सीधे पैसा दिया है,17 वर्ष में जितना नहीं हुआ, उसके आधे वर्षों में उससे भी हम लोगों ने ₹86,000 करोड़ अधिक किसान के खाते में भेजे हैं.. आज एक क्विंटल का हम ₹400 अन्नदाता किसान को दे रहे हैं, गन्ना किसान को दे रहे हैं,  ये सरकार के द्वारा उठाए गए कदम हैं और इसके माध्यम से लाभान्वित होने वाले किसानों का परिणाम है.. आज यूपी इथेनॉल उत्पादन में देश के अंदर नंबर एक पर है। गन्ना उत्पादन में देश का कुल गन्ना उत्पादन का 55 फीसदी केवल यूपी कर रहा है, चीनी उत्पादन में भी देश के अंदर यूपी नंबर एक पर है..

सीएम योगी का मिशन विलेज: अब ग्लोबल होगा यूपी का शहद, महिलाएं लॉन्च करेंगी अपना ब्रांड, देश-दुनिया में मिलेगी पहचान

यूपी में एक लाख ग्रामीण महिलाओं के जीवन में मिठास घोलेगा शहद सीएम योगी का मिशन विलेज: अब ग्लोबल होगा यूपी का शहद, महिलाएं लॉन्च करेंगी अपना ब्रांड, देश-दुनिया में मिलेगी पहचान एक लाख ग्रामीण महिलाएं बनेंगी शहद उद्यमी, आय में एक लाख रुपये की सालाना वृद्धि का लक्ष्य 'डबल' मुनाफा : मधुमक्खियां बढ़ाएंगी फसल की पैदावार, बदलेगी खेती किसानी की तस्वीर लखनऊ  उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को नई ताकत देने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मधुमक्खी पालन कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से प्रदेश के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं शहद उत्पादन के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता भी बढ़ाएंगी। योजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में एक लाख महिला मधुमक्खी पालक तैयार की जाएंगी। इसके तहत प्रत्येक महिला उद्यमी की आय में प्रति वर्ष एक लाख रुपये तक की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। मधुमक्खियों द्वारा परागण से गेहूं, सरसों, दलहन-तिलहन और बागवानी फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा। यूपी का शहद वैश्विक पहचान बनाएगा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन विलेज के तहत अब यूपी का शहद वैश्विक पहचान बनाएगा। महिलाएं शहद का अपना ब्रांड विकसित करेंगी और शहद व अन्य उत्पादों के विपणन से प्रदेश के आर्थिक विकास में साझीदार बनेंगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिलाओं का आत्मनिर्भरता का सपना साकार होगा। इस योजना के जरिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और उद्यमियों को बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि यूपी का शहद देश-दुनिया में गुणवत्ता और भरोसे की पहचान बने।

योगी सरकार ने द गंगा सहकारी चीनी मिल के आधुनिकीकरण/विस्तारीकरण के लिए स्वीकृत किए हैं 261.91 करोड़ रुपये

सीएम योगी से मिले भाकियू प्रवक्ता, जताया आभार  योगी सरकार ने द गंगा सहकारी चीनी मिल के आधुनिकीकरण/विस्तारीकरण के लिए स्वीकृत किए हैं 261.91 करोड़ रुपये  भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा- यह निर्णय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों व चीनी उद्योग के लिए ऐतिहासिक  लखनऊ  भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। द गंगा सहकारी चीनी मिल मोरना (मुजफ्फरनगर) के आधुनिकीकरण/विस्तारीकरण के लिए 261.91 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने पर उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। मलिक ने कहा कि यह निर्णय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि द गंगा सहकारी चीनी मिल के आधुनिकीकरण एवं क्षमता विस्तार के लिए आपकी अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश कैबिनेट द्वारा लिए गए ऐतिहासिक निर्णय पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) एवं क्षेत्र के लाखों गन्ना किसानों की ओर से आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस मिल की पेराई क्षमता को प्रथम चरण में 2500 TCD से बढ़ाकर 3500 TCD तथा भविष्य में 5000 TCD तक ले जाने की योजना और इसके लिए लगभग 262 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति देना स्पष्ट करता है कि आपकी सरकार किसानों की आय, समयबद्ध गन्ना भुगतान और आधुनिक कृषि आधारित उद्योगों के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है। यह निर्णय न केवल मोरना क्षेत्र, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। इससे पेराई में तेजी आएगी, किसानों को समय पर भुगतान होगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार व आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम न केवल इस मिल की उत्पादन क्षमता, दक्षता और तकनीकी स्तर को आधुनिक बनाएगा, बल्कि क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों की आय, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा।  मलिक ने मुख्यमंत्री से कहा कि आपकी दूरदर्शी सोच के कारण किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा तथा मिल की कार्यक्षमता बढ़ेगी। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे तथा पर्यावरण अनुकूल तकनीक को बढ़ावा मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समयबद्ध गन्ना मूल्य भुगतान, चीनी मिलों का आधुनिकीकरण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, ग्रामीण अधोसंरचना का विकास और किसान-कल्याणकारी योजनाएं किसानों के मन में विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करती हैं। उन्होंने आशा जताई कि सीएम के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का गन्ना क्षेत्र निरंतर प्रगति करेगा।

योगी सरकार का मिशन, यीडा के सेक्टर-28 के अंतर्गत 350 एकड़ में आकार ले रहा मेडिकल डिवाइस पार्क

यीडा बना मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का नया केंद्र, 101 यूनिट्स को भूमि आवंटन योगी सरकार का मिशन, यीडा के सेक्टर-28 के अंतर्गत 350 एकड़ में आकार ले रहा मेडिकल डिवाइस पार्क मेडिकल डिवाइस पार्क में 188.15 एकड़ भूमि औद्योगिक इकाइयों के लिए आरक्षित 203 प्लॉट्स में निवेश की रफ्तार तेज, 101 का आवंटन, 49 ने लिया पजेशन और 12 में निर्माण कार्य शुरू 22 नए प्लॉट्स आवंटन के लिए प्रस्तावित, 11 फरवरी तक किया जा सकेगा आवेदन ग्रीन जोन, वेयरहाउस और कमर्शियल एरिया के साथ समग्र प्लानिंग, निवेशकों को मिल रहा सिंगल-विंडो सपोर्ट लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-28 में 350 एकड़ में विकसित हो रहा मेडिकल डिवाइस पार्क अब कागजी योजना से निकलकर जमीन पर उतर चुका है, जहां निवेश, आवंटन और निर्माण तीनों स्तरों पर ठोस प्रगति दर्ज की गई है। योजना के अंतर्गत यहां अब तक न सिर्फ 100 से अधिक प्लॉट्स का आवंटन कर दिया गया है, बल्कि एक दर्जन इकाइयों ने अपना निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है। जल्द ही यहां प्रोडक्शन भी शुरू होने की संभावना है।  उल्लेखनीय है कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में विकसित हो रहा मेडिकल डिवाइस पार्क, योगी सरकार के उस विजन का प्रतीक है, जिसमें उत्तर प्रदेश को नीति, इन्फ्रास्ट्रक्चर व भरोसा, तीनों स्तरों पर निवेशकों का पसंदीदा राज्य बनाया जा रहा है। यह पार्क आने वाले वर्षों में यूपी को मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का नया पावरहाउस बना सकता है। 203 इंडस्ट्रियल प्लॉट में 101 का आवंटन मेडिकल डिवाइस पार्क के अंतर्गत 188.15 एकड़ भूमि औद्योगिक इकाइयों के लिए आरक्षित की गई है, जिसमें विभिन्न आकार के कुल 203 इंडस्ट्रियल प्लॉट विकसित किए गए हैं। अब तक 101 प्लॉट का आवंटन हो चुका है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि यीडा क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस सेक्टर को लेकर निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। धरातल पर उतर रहा निवेश यीडा द्वारा जारी प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, 85 निवेशकों ने लीज प्लान जमा किया है, जबकि 62 लीज डीड निष्पादित हो चुकी हैं। 49 यूनिट्स ने साइट का पजेशन भी ले लिया है। 23 इकाइयों के भवन मानचित्र स्वीकृत हो चुके हैं तो 12 इकाइयों में निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। यह प्रगति योगी सरकार के सिंगल विंडो सिस्टम, समयबद्ध स्वीकृति और नीति-स्थिरता का सीधा प्रमाण मानी जा रही है। ग्रीन, वेयरहाउस व कमर्शियल जोनों के साथ यीडा का समग्र मॉडल यीडा इस मेडिकल डिवाइस पार्क को केवल एक इंडस्ट्रियल क्लस्टर नहीं, बल्कि एक फुल-फ्लेज्ड इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के रूप में विकसित कर रहा है। इसके तहत 9.02 एकड़ में वेयरहाउस प्लॉट, 18.66 एकड़ में ग्रीन एरिया, 46.43 एकड़ में कॉमन फैसिलिटी एरिया, 4.84 एकड़ में कमर्शियल सेक्टर और 79.10 एकड़ में पार्किंग व रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया गया है, जिससे उत्पादन के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स, पर्यावरण और वर्कफोर्स सुविधाओं का संतुलन सुनिश्चित हो सके। नए आवंटन की प्रक्रिया तेज, निवेश के लिए फिर खुले अवसर मेडिकल डिवाइस पार्क में औद्योगिक इकाइयों के लिए उपलब्ध शेष भूमि में से 10.32 एकड़ भूमि पर नए आवंटन के लिए 12 जनवरी 2026 को योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत कुल 22 नए प्लॉट आवंटन के लिए प्रस्तावित हैं, जिनमें 1000 वर्गमीटर के 11 प्लॉट, 2100 वर्गमीटर के 9 प्लॉट तथा 5940 वर्गमीटर के 2 प्लॉट शामिल हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 11 फरवरी 2026 तय की गई है। योगी मॉडल को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यीडा की रणनीतिक लोकेशन, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी और एयरपोर्ट इकोसिस्टम के साथ योगी सरकार की उद्योगोन्मुख नीतियों का मेल उत्तर प्रदेश को मेडिकल डिवाइस सेक्टर में राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला सकता है। यह परियोजना आयात पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को भी मजबूती देती है।

मुख्यमंत्री का निर्देश, अयोध्या में वरिष्ठ भवन परिसर में तैयार होगी ‘वैदेही आर्ट गैलरी’

सीता मइया के दिव्य चरित का ज्ञान करायेगी 'वैदेही आर्ट गैलरी': मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री का निर्देश, अयोध्या में वरिष्ठ भवन परिसर में तैयार होगी 'वैदेही आर्ट गैलरी' मिथिला की संस्कृति, लोकपरंपरा और कला के विविध आयामों को गैलरी में प्रमुखता से दर्शाएं: मुख्यमंत्री   लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीअयोध्या धाम में माता सीता के जीवन-चरित पर केंद्रित 'वैदेही आर्ट गैलरी' की स्थापना के निर्देश दिए हैं। बुधवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में उन्होंने कहा कि सीता मइया भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिक आदर्शों की अनुपम प्रेरणा हैं, और नई पीढ़ी को उनके उज्ज्वल चरित्र से गहराई से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। आर्ट गैलरी की परिकल्पना साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्याधुनिक गैलरी केवल एक कला-संग्रहालय न होकर, सीता माता के जीवन, त्याग, करुणा, मर्यादा, धैर्य और शक्ति का आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनर्पाठ प्रस्तुत करने वाली एक जीवंत सांस्कृतिक अनुभव-स्थली होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि इस गैलरी की कथा-वस्तु, डिजाइन, विज़ुअल भाषा, कला और तकनीक सहित सभी आयाम इस भावना को प्रकट करे कि हम एक दिव्य विरासत का पुनर्पाठ कर रहे हैं, जिसे नई पीढ़ी के सामने प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित किया जाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैदेही आर्ट गैलरी की मूल भावना यही हो कि आगंतुक सीता माता के जीवन-संदेश को केवल देखें नहीं, बल्कि उसे अनुभव करें, समझें और आत्मसात करें। अयोध्या विकास प्राधिकरण के साथ संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निकट वशिष्ठ भवन परिसर में विकसित की जा सकती, जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि इस गैलरी का विकास अयोध्या के वैश्विक सांस्कृतिक नगर के रूप में उभरने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण चरण होगा। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि मिथिला की संस्कृति, लोकपरंपरा और कला के विविध आयामों को गैलरी में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।

सीएम योगी के पास पहुंच कर बालहठ के साथ निश्छल मन से अपनी बात रखते हैं प्रदेश भर के बच्चे

सीएम योगी का बाल प्रेम  जनसेवा, संवेदना और सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं मुख्यमंत्री सीएम योगी के पास पहुंच कर बालहठ के साथ निश्छल मन से अपनी बात रखते हैं प्रदेश भर के बच्चे  बच्चों के सामने झलक पड़ता है सीएम योगी का कोमल हृदय, समाज को जोड़ती है सीएम की बच्चों से यह दोस्ती बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा व सुरक्षा पर सीएम योगी का है विशेष फोकस एडमिशन, उपचार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराते हैं मुख्यमंत्री  लखनऊ  नर्सरी में एडमिशन कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची मासूम बच्ची की जिद हो या चॉकलेट की मांग करने वाले बच्चों की हठ। जिन मुख्यमंत्री का नाम सुनकर अपराधी कांप उठते हैं, बच्चे उन्हीं से मिलकर सहजता से अपनी जिद मनवा लेते हैं। कहते हैं, ‘बच्चे मन के सच्चे’, वे अपने दिल की भावना को अत्यंत निश्छलता से प्रकट कर देते हैं, यही भाव उस समय सामने आया, जब सीएम योगी आदित्यनाथ को देखते ही एक छोटी बच्ची ने उन्हें सैल्यूट किया। सीएम ने भी मुस्कुराते हुए बच्ची को खूब मन लगाकर पढ़ने के लिए कहा। उनका यह बाल प्रेम उनके कोमल हृदय व सर्वसुलभ होने के साथ-साथ जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री के बच्चों से जुड़ाव और उनके साथ भावनात्मक संवाद के कई दृश्य समय-समय पर सामने आते रहते हैं। विगत सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आई बच्ची अनाबी अली से सीएम का संवाद इन दिनों चर्चा में है। अपने एडमिशन के लिए जिद, फिर एबीसीडी व कविता सुनाकर अनाबी ने सीएम का दिल जीत लिया। वहीं मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछना और उसका मासूम जवाब सुनकर खिलखिलाकर हंसना भी उनके बालप्रेम को प्रकट करता है। बच्चों से अत्यंत आत्मीयता से संवाद और उनके भविष्य को लेकर त्वरित निर्णय मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता को प्रदर्शित करते हैं। बीते दिनों ‘जनता दर्शन’ में दो साल की अनन्या से संवाद भी लोगों के मन को छू गया। इसी तरह 31 दिसंबर को मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने मकान पर कब्जे की शिकायत की, जिस पर मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर न सिर्फ मकान को कब्जा मुक्त कराया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर व तत्काल गिरफ्तारी भी कराई। यह मामला सीएम की जन समस्याओं के प्रति गंभीरता को प्रकट करते हुए स्पष्ट संदेश देता है कि वे कानून व्यवस्था, बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों का समाधान कराने में तनिक भी विलंब नहीं करते।  कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी भी इन दिनों हर किसी की जुबां पर है। मुख्यमंत्री से मिलने की उसकी जिद और अकेले पैदल चलकर लखनऊ पहुंचने की जानकारी जब सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली तो उन्होंने उसे बुलाकर उसके बनाए चित्रों को स्वीकार किया और उसके शिक्षित-सुरक्षित भविष्य का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के अपनत्व से भाव-विभोर खुशी की ‘अनकही भावनाओं’ ने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के बीच मुख्यमंत्री की ‘प्रदेश ही परिवार’ धारणा की विश्वसनीय तस्वीर पेश की।  ‘जनता दर्शन’ के जरिए लखनऊ की अनाबी अली, कानपुर की मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी और मुरादाबाद की वाची का स्कूल में एडमिशन कराना भी सीएम योगी की संवेदनशीलता का हिस्सा है। कानपुर की नन्ही मायरा ने कहा था कि मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूं। इस पर सीएम ने तत्काल उसका प्रवेश कराने का निर्देश दिया। वाची ने कहा कि मैं पढ़ना चाहती हूं,  सीएम ने उसका भी प्रवेश कराया। गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराने के साथ ही उसे पुनः विद्यालय भेजना भी सुनिश्चित कराया। गणतंत्र दिवस परेड में भी सीएम के पास पहुंच गए बच्चे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में आए बच्चे सीधे सीएम योगी के पास पहुंच गए। सभी ने सीएम के साथ फोटो खिंचवाई, उनसे बातचीत की। सीएम ने उन्हें दुलारा और एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर अपना वात्सल्य भाव प्रकट किया।   वृद्ध मां के दर्द से द्रवित सीएम ने कैंसर पीड़ित बेटे को भिजवाया अस्पताल बीते सितंबर में ‘जनता दर्शन’ में कानपुर की रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे का दर्द लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची थीं। उनकी तकलीफ देखकर सीएम द्रवित हो गए और कैंसर पीड़ित बेटे को एंबुलेंस से सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर उसका इलाज प्रारंभ कराया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाल प्रेम, जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

सभी पात्र आवंटियों तक ओटीएस योजना की जानकारी पहुंचे, मुख्यमंत्री ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए

लंबित आवास मामलों के निस्तारण हेतु ‘एकमुश्त समाधान योजना’ लागू करें: मुख्यमंत्री सभी पात्र आवंटियों तक ओटीएस योजना की जानकारी पहुंचे, मुख्यमंत्री ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए लंबित देयों का मानवीय व न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री डिफॉल्टर मामलों के निस्तारण में गति लाएं, प्रक्रिया को पूरी तरह यूजर-फ्रेंडली बनाएं: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में लंबित आवासीय और व्यावसायिक आवंटनों के त्वरित निस्तारण के लिए एक नई ‘एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस-2026)’ लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित देयों और विवादित मामलों के कारण न केवल योजनाओं की प्रगति प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था लागू करना है, जिसमें समाधान तेज, पारदर्शी और सभी के लिए व्यावहारिक हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की किसी भी योजना में लंबित भुगतान या विवादित आवंटन राज्य की विकास गति को धीमा करते हैं। इसलिए आवास विभाग को ऐसी समाधान-प्रधान व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे विभाग को आवश्यक राजस्व प्राप्त हो और आवंटियों को भी राहत मिले। उन्होंने कहा कि यह योजना जन-केंद्रित होनी चाहिए, जिसमें हर वास्तविक आवंटी को स्पष्ट और सरल विकल्प उपलब्ध हों। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2020 में लागू की गई ओटीएस-2020 योजना से बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण हुआ था, लेकिन कोविड-19 के कारण कई आवंटी अंतिम भुगतान नहीं कर पाए। विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में प्रदेश के विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में मौजूद ऐसे सभी डिफॉल्ट मामलों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओटीएस-2026 योजना को अधिक व्यावहारिक और लाभकारी स्वरूप दिया जाए। एकमुश्त भुगतान करने वाले आवंटियों को देयों पर उपयुक्त छूट दी जाए। साथ ही, किस्तों में भुगतान की सुविधा हो। उन्होंने कहा कि योजना के प्रावधानों को अंतिम रूप देते समय यह ध्यान रहे कि योजना के मूल में आम आदमी को राहत देने का ही भाव निहित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विभाग द्वारा प्रत्येक आवेदन का निस्तारण निर्धारित समयसीमा में कर दिया जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि नई योजना लागू होने से हजारों आवंटियों को राहत मिलेगी और विभाग को राजस्व भी प्राप्त होगा।  मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार की विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे अवगत हो सकें। उन्होंने कहा, 'एकमुश्त समाधान योजना' के बारे में आम जनता के बीच सक्रिय रूप से जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि सभी पात्र लोग इसका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि योजना की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल होनी चाहिए।

BJP का बड़ा कदम: 2027 यूपी चुनाव से पहले अगले 15 दिनों में हो सकते हैं महत्वपूर्ण बदलाव

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी अलग-अलग मोर्चों की टीम बदलने की तैयारी में जुट गई है. सूत्रों के मुताबिक अगले 15 दिन के भीतर पार्टी में बदलाव होने की संभावना है. एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद संगठन में बड़ा बदलाव किया जा सकता है.  यूपी बीजेपी जल्द ही अनुसूचित जाति मोर्चे, किसान मोर्चा, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और अन्य मोर्चो के अध्यक्ष समेत टीम में बदलाव की संभावना है. माना जा रहा है कि 28 फरवरी से पहले ये पूरी प्रक्रिया हो जाएगी. एक बार इन तमाम मोर्चों में बदलाव होने के बाद पार्टी चुनावी मोड में जुट जाएगी.  बीजेपी के मोर्चों में बदलाव की तैयारी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के अलग-अलग मोर्चों के बदलाव में जातीय समीकरण का साधने पर ज़ोर दिया जा सकता है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वयं ओबीसी (कुर्मी) समाज से आते हैं. वहीं पश्चिमी यूपी में जाट, ब्रज में यादव और ब्राह्मणों को समीकरण देखने को मिल सकता हैं. जानकारों का मानना है कि सपा के पीडीए की काट की भी झलक भी इस नए बदलाव में दिखाई दे सकती है.   यूपी बीजेपी की ये कवायद आगामी पंचायत चुनाव, विधान परिषद की शिक्षक व स्नातक कोटे की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखी जा रही है. ताकि पार्टी का प्रदर्शन और मज़बूत हो सके और यूपी में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई जा सके. सूत्रों के मुताबिक़ इन मोर्चों में 30-40 फ़ीसद तक फेरबदल हो सकता है.  विधानसभा चुनाव को लेकर कवायद तेज बीते दिनों बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में लखनऊ में एक बैठक भी हो चुकी हैं. जिसमें पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ट, विभागों के अध्यक्ष, महामंत्री, संयोजक व अन्य पदाधिकारी शामिल हुए थे. इस बैठक में महामंत्री धर्मपाल सिंह भी मौजूद रहे थे. इस बैठक में विभिन्न मोर्चों में किए जाने वाले बदलाव को लेकर चर्चा की गई.  पंकज चौधरी ने इस बैठक के बाद कहा था कि पार्टी के विभिन्न विभाग और प्रकोष्ठों में काम करने वाले पदाधिकारियों को भूमिका काफी अहम होती है. संगठन में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है. समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों तक पार्टी की कार्यशैली और नीतियों की जानकारी पहुंचाने में इन मोर्चों को अहम भूमिका होता है. जिससे विभिन्न संगठन के लोग पार्टी के साथ जुड़ते हैं और पार्टी मजबूत होती है.  

योगी सरकार ने राज्यकर्मियों की संपत्ति छुपाने पर वेतन रोका, लिया कड़ा निर्णय

लखनऊ   राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 68,236 राज्यकर्मियों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अब तक घोषित नहीं किया है। इस लापरवाही के चलते इन कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के आदेशानुसार सभी राज्यकर्मियों को 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड करना अनिवार्य था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने समयसीमा का पालन नहीं किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें वेतन रोके जाने की कोई चिंता नहीं है। सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अपलोड न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है। योगी आदित्यनाथ सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्यकर्मियों की संपत्ति का विवरण जुटाने को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत प्रदेश के कुल 8,66,261 राज्यकर्मियों को वर्ष 2025 तक की अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक पोर्टल पर देना अनिवार्य था। इसके लिए विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि जो कर्मचारी तय समयसीमा तक विवरण अपलोड न करें, उनका वेतन रोक दिया जाए। इन सभी का वेतन रोका जाएगा  रात तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, संपत्ति विवरण न देने वालों में सबसे अधिक 34,926 तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं। इसके अलावा 22,624 चतुर्थ श्रेणी, 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। वहीं ‘अन्य’ श्रेणी के 1,612 कर्मचारियों में से 854 ने भी संपत्ति का विवरण नहीं दिया है। इन सभी का वेतन रोका जाएगा।  

29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन-दलहन जोड़कर यूपी को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री

अन्तःफसली खेती को मिशन मोड में लागू करें, अन्नदाता की आय में होगा कई गुना इजाफा: मुख्यमंत्री गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों के लिए लाभकारी: मुख्यमंत्री 29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन-दलहन जोड़कर यूपी को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने रबी में सरसों-मसूर, जायद में उर्द-मूंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका 'गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अन्तःफसली खेती' को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि 'बहु-गुणित' करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है, इसलिए ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन है। उन्होंने कहा कि 'गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है। यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और साथ ही प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि  कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित करते हुए अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी सीजन में सरसों और मसूर तथा जायद सीजन में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा, यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने इस योजना के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय में वृद्धि करेगा और राज्य के जीवीए में बड़ा योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सहायता और अनुदान का ढांचा स्पष्ट होना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज़ नकदी प्रवाह मिलेगा और एकल फसल जोखिम कम होगा, जिससे कृषि अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल गन्ना क्षेत्र से जुड़े किसानों के लाभ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रदेश के व्यापक कृषि परिदृश्य के परिवर्तन के रूप में लागू किया जाना चाहिए।