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योगी सरकार का बड़ा कदम, एक्सपोर्ट प्रमोशन ब्यूरो व वालमार्ट के बीच हुआ एमओयू

यूपी के एमएसएमई को ग्लोबल मार्केट से जोड़ेगा वालमार्ट वृद्धि कार्यक्रम योगी सरकार का बड़ा कदम, एक्सपोर्ट प्रमोशन ब्यूरो व वालमार्ट के बीच हुआ एमओयू प्रदेश के एमएसएमई को डिजिटल, ई-कॉमर्स और निर्यात प्रतिस्पर्धा के लिए किया जाएगा तैयार एमओयू तीन साल तक होगा प्रभावी, आपसी सहमति से बढ़ेगा कार्यकाल डिजिटल ऑनबोर्डिंग, ई-कॉमर्स और ग्लोबल वैल्यू चेन में जोड़ा जाएगा एमएसएमई लखनऊ, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एक्सपोर्ट प्रमोशन ब्यूरो (EPB), MSME एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार और वॉलमार्ट इंक के बीच, वॉलमार्ट वृद्धि सप्लायर डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत, आइडियाज टू इंपैक्ट फाउंडेशन के माध्यम से एक रणनीतिक, गैर-वित्तीय एमओयू हस्ताक्षरित किया गया। यह समझौता तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा और आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है। इस सहयोग के तहत प्रदेश के एमएसएमई को डिजिटल सशक्तिकरण, ई-कॉमर्स रेडीनेस, पैकेजिंग, क्वालिटी, सर्टिफिकेशन और मार्केट एक्सेस के क्षेत्रों में क्षमता-वृद्धि प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। उद्यमियों को मिलेगा फ्री-ऑफ-कॉस्ट प्रशिक्षण एवं मेंटरशिप इस एमओयू का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के एमएसएमई को राष्ट्रीय एवं वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़कर निर्यात में वृद्धि और रोजगार सृजन को गति देना है। वॉलमार्ट वृद्धि के तहत उद्यमियों को फ्री-ऑफ-कॉस्ट प्रशिक्षण एवं मेंटरशिप प्रदान की जाएगी और उन्हें घरेलू तथा सीमा-पार ई-कॉमर्स व्यापार में भागीदारी हेतु तैयार किया जाएगा। प्रदेश के निर्यातकों की वैश्विक बाजार में प्रवेश बाधाएं कम होंगी योगी सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025–30 में ई-कॉमर्स निर्यात पर विशेष बल दिया गया है। इसके अंतर्गत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पहली बार लिस्टिंग के लिए राज्य सरकार द्वारा एकमुश्त 75% शुल्क, अधिकतम तीन लाख रुपए तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। इससे प्रदेश के निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रवेश बाधाएं कम होंगी। नए अवसर, नए बाजार और नई संभावनाएं खोलेगी साझेदारी हस्ताक्षर समारोह में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, MSME एवं निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई विभाग आलोक कुमार सहित वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट और EPB के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर आलोक कुमार ने कहा कि योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज देश का उभरता हुआ निर्यात और ई-कॉमर्स हब बन रहा है। MSME हमारे राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इस कार्यक्रम के साथ यह साझेदारी उनके लिए नए अवसर, नए बाजार और नई संभावनाएं खोलेगी।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मरीजों के इलाज को दिये गये 4,649 करोड़

मरीजों के इलाज में न हो लापरवाही, योगी सरकार आयुष्मान अस्पतालों को 30 दिन में कर रही भुगतान आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मरीजों के इलाज को दिये गये 4,649 करोड़  सीएम के निर्देश पर पिछले एक वर्ष में क्लेम के पेंडेंसी मामलों को तेजी से किया गया निस्तारित  जनवरी- 25 में 10 लाख से अधिक पेंडेंसी को घटाकर किया गया 3 लाख, क्लेम जांच प्रक्रिया तेज   लखनऊ योगी सरकार गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इलाज कराने वाले परिवारों के लिए जहां कैशलेस उपचार सुनिश्चित किया गया है, वहीं योजना से जुड़े अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित कर व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि पिछले एक वर्ष में आयुष्मान योजना के क्लेम निस्तारण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।   नए क्लेम के साथ पुराने लंबित मामलों का भी तेजी से किया जा रहा निस्तारण स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज(साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश के सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत क्लेम के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जनवरी-25 में जहां क्लेम की पेंडेंसी 10 लाख 75 हजार तक पहुंच गई थी, वहीं दिसंबर-25 तक यह घटकर मात्र 3 लाख रह गयी है। इसे भी जल्द ही निस्तारित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में योजना के तहत प्रति माह औसतन 2 लाख से अधिक क्लेम अस्पतालों से प्राप्त होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले क्लेम का समयबद्ध निस्तारण एक बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पुराने लंबित मामलों के साथ-साथ नए क्लेम का भी नियमित और सुव्यवस्थित तरीके से निस्तारण हो। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि सूचीबद्ध अस्पताल बिना हीलाहवाली के आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज सुनिश्चित करें।  सीएम योगी के निर्देश पर मेडिकल ऑडिट व्यवस्था को किया गया सुदृढ़ साचीज की एसीईओ पूजा यादव ने बताया कि क्लेम निस्तारण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए मेडिकल ऑडिट व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। इसी क्रम में मेडिकल ऑडिटरों की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 कर दी गई है। इससे क्लेम की जांच प्रक्रिया तेज हुई है। इसके साथ ही क्लेम प्रोसेसिंग डेस्क (CPD) की संख्या भी 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है। योजना के तहत अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत क्लेम्स का भुगतान 30 दिनों की निर्धारित समय-सीमा यानी टर्न अराउंड टाइम (TAT) के भीतर किया जाए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एजेंसी स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और लंबित मामलों की सतत निगरानी की जा रही है।  पिछले एक वर्ष में 4,649 करोड़ का भुगतान अस्पतालों को किया गया  साचीज की सीईओ ने बताया कि जनवरी-25 से दिसंबर-25 की अवधि के दौरान आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश के सूचीबद्ध अस्पतालों को क्लेम्स के सापेक्ष कुल 4,649 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योगी सरकार न सिर्फ इलाज की व्यवस्था कर रही है, बल्कि अस्पतालों के आर्थिक हितों की भी पूरी तरह से रक्षा कर रही है, ताकि वे गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें। योगी सरकार की नीतियों से क्लेम पेंडेंसी में कमी, समयबद्ध भुगतान और मजबूत ऑडिट व्यवस्था ने अस्पतालों का विश्वास बढ़ाया है। इसका सीधा लाभ गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिल रहा है, जिन्हें अब इलाज के लिए कर्ज और संपत्ति बेचने की मजबूरी से पूरी तरह से मुक्ति मिल गई है।

सीएम योगी का संकल्प: सबकी समस्या का निराकरण, जनता दर्शन में 150 लोगों की समस्याएं सुनीं

सबकी समस्या का निराकरण सरकार का संकल्प : सीएम योगी जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने सुनीं 150 लोगों की समस्याएं सीएम ने अधिकारियों को दिए निर्देश, शीघ्रता से करें समस्याओं का निस्तारण गंभीर बीमारियों के इलाज में करेंगे भरपूर आर्थिक सहायता गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की समस्या का समाधान सरकार का संकल्प है। सीएम ने अफसरों को निर्देशित किया कि वे पूरी तत्परता और संवेदनशीलता से यह सुनिश्चित करें कि बिना भेदभाव सबको न्याय मिले। हर पात्र को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था हो, जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।  गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 लोगों की समस्याएं सुनीं। कुर्सियों पर बैठे लोगों तक खुद गए। उनकी शिकायतों को ध्यान से सुना। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए प्रतिबद्ध है।  जनता दर्शन में गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए कई लोगों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री ने शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। सीएम योगी ने की गोसेवा, गोवंश को खिलाया गुड़ गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा के समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़ खिलाया। गुरुवार सुबह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिजनों के साथ आए बच्चों से मिल उन्हें प्यार-दुलार, आशीर्वाद और चॉकलेट दिया।

योगी सरकार का बड़ा तोहफा, यूपी में संपत्ति का हस्तांतरण अब होगा आसान और सस्ता

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को नए साल का बड़ा तोहफा देते हुए पारिवारिक संपत्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को बेहद आसान और सस्ता बना दिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां भी दायरे में अब तक केवल आवासीय और कृषि संपत्तियों के पारिवारिक दान विलेख (गिफ्ट डीड) पर ही स्टांप ड्यूटी में छूट मिलती थी। नई व्यवस्था के तहत अब व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है। अब परिवार के सदस्यों के बीच किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति दान करने पर भारी-भरकम स्टांप शुल्क के बजाय मात्र 5,000 रुपये की स्टांप ड्यूटी देनी होगी। इसके साथ ही संपत्ति के कुल मूल्य का 1 प्रतिशत निबंधन (Registration) शुल्क देय होगा। किसे मिलेगा इसका लाभ? इस छूट का लाभ परिवार के रक्त संबंधियों जैसे- माता, पिता, पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, पुत्रवधु, दामाद, भाई, बहन और पोते-पोतियों को मिलेगा। विशेष बात यह है कि सगे भाई की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी (भाभी) को भी अब इस छूट का पात्र माना गया है। अनावश्यक विवादों और मुकदमों से मिलेगी मुक्ति स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि पहले व्यावसायिक संपत्तियों पर सर्किल रेट का 5 से 7 प्रतिशत स्टांप शुल्क देना पड़ता था, जिससे लोग कानूनी हस्तांतरण से बचते थे। इस ऐतिहासिक निर्णय से वैधानिक हस्तांतरण बढ़ेगा, जिससे पारिवारिक विवादों और लंबी मुकदमेबाजी में कमी आएगी। साथ ही, विभाग की राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। मात्र ₹5,000 होगी स्टांप ड्यूटी अब अगर कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति परिवार के सदस्य को Gift Deed (दान विलेख) के जरिए देता है, तो उसे केवल ₹5,000 की स्टांप ड्यूटी देनी होगी। पहले यह छूट सिर्फ आवासीय और कृषि संपत्ति तक सीमित थी, लेकिन अब कमर्शियल प्रॉपर्टी और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी पर भी यही नियम लागू होगा। इससे शहरों में दुकान, गोदाम, फैक्ट्री जैसी संपत्तियों के बंटवारे पर भारी टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।  सरकार ने स्टाम्प और पंजीकरण विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के दान पर भारी शुल्क खत्म कर दिया गया है। अब किसी भी प्रकार की संपत्ति के ट्रांसफर पर केवल नाममात्र की राशि में रजिस्ट्री हो सकेगी। नई व्यवस्था के अनुसार, परिवार के भीतर संपत्ति के दान पर ₹5,000 स्टांप ड्यूटी और संपत्ति मूल्य का केवल 1 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क देनी होगी। इससे पहले शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक संपत्ति पर 7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ता था, जो आम लोगों के लिए काफी महंगा था। यही कारण था कि लोग कानूनी प्रक्रिया से बचते थे और बाद में विवाद खड़े हो जाते थे। पारिवारिक सदस्यों को मिलेगा लाभ, किराया रजिस्ट्रेशन भी हुआ सस्ता इस नई छूट का फायदा पुत्र, पुत्री, माता, पिता, पति, पत्नी, भाई, बहन, पुत्रवधु, दामाद, नाती-नातिन, भतीजा-भतीजी सहित कई रिश्तों को मिलेगा। खास बात यह है कि अब सगे भाई के निधन की स्थिति में उसकी पत्नी को भी इस छूट का लाभ मिलेगा। यानी अधिकतर नजदीकी रिश्तों में संपत्ति ट्रांसफर बेहद आसान हो जाएगा। योगी सरकार ने सिर्फ संपत्ति बंटवारे ही नहीं, बल्कि किराया समझौते के रजिस्ट्रेशन को भी बेहद सस्ता बना दिया है।  अब किराए के समझौते पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कटौती की गई है। पहले अधिक शुल्क के कारण लोग रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं कराते थे, जिससे बाद में मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद होते थे। नई व्यवस्था में किराया अवधि और वार्षिक किराए के आधार पर बहुत कम शुल्क तय किया गया है। इससे अब आम नागरिक बिना डर के अपना किराया समझौता कानूनी रूप से पंजीकृत करा सकेगा। इससे न केवल कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि भविष्य के झगड़ों से भी बचाव होगा। पैतृक संपत्ति का बंटवारा अब सिर्फ 10 हजार में योगी सरकार के एक और फैसले के तहत अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री मात्र ₹10,000 में कराई जा सकेगी। पहले इस प्रक्रिया में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च हो जाते थे। अब कम खर्च में कानूनी बंटवारा संभव होगा, जिससे पारिवारिक विवादों में भारी कमी आएगी। इन सभी सुधारों से उत्तर प्रदेश में कानूनी पारदर्शिता और संपत्ति से जुड़े मामलों में भरोसा बढ़ेगा। लोग बिना डर और भारी खर्च के अपनी संपत्ति को सही तरीके से ट्रांसफर कर पाएंगे। सरकार का लक्ष्य कम खर्च, कम विवाद और ज्यादा पारदर्शिता है। योगी सरकार का यह फैसला न केवल आम नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि उत्तर प्रदेश में संपत्ति व्यवस्था को आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। बता दें कि वर्ष 2022 तक पारिवारिक दान पर पूरी स्टांप ड्यूटी देनी होती थी। 2023 में पहली बार आवासीय और कृषि संपत्तियों पर राहत दी गई थी। अब सरकार ने यह छूट कमर्शियल और इंडस्ट्रीयल प्रॉपर्टी तक बढ़ा दी है। इससे उत्तर प्रदेश में संपत्ति के पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और अवैध या कच्चे दस्तावेजों की संख्या कम होगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से संपत्ति से जुड़े विवाद, कोर्ट केस और पारिवारिक झगड़े काफी हद तक कम होंगे। जब संपत्ति का हस्तांतरण आसान और सस्ता होगा, तो लोग कानूनी रास्ता अपनाएंगे। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि राजस्व व्यवस्था में भी सुधार होगा। सरकार जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी करेगी, जिसके बाद यह सुविधा पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी।  

पुलिस विभाग की 12 हजार वर्ग फीट भूमि पर हुआ आधुनिक कंट्रोल रूम निर्माण

राम मंदिर की सुरक्षा को तैयार हुआ आधुनिक कंट्रोल रूम पुलिस विभाग की 12 हजार वर्ग फीट भूमि पर हुआ आधुनिक कंट्रोल रूम निर्माण 1128.75 लाख की लागत से तैयार हुआ है प्रशासनिक भवन दिसंबर 2023 में सीएंडडीएस ने शुरू कराया था निर्माण आधुनिक कंट्रोल रूम का जल्द होगा लोकार्पण,योगी सरकार के अहम निर्णय के बाद हुआ निर्माण अयोध्या राम मंदिर की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ठीक बाहर पुलिस विभाग की 12 हजार वर्ग फीट भूमि पर एक आधुनिक प्रशासनिक भवन और कंट्रोल रूम का निर्माण पूरा हो चुका है। यह भवन 1128.75 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट को गृह विभाग द्वारा संचालित किया गया है। निर्माण कार्य दिसंबर 2023 में निर्माण संस्था सीएंडडीएस के माध्यम से शुरू हुआ था। जी प्लस वन मंजिला इस भवन में बेसमेंट में मुख्य कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। यह कंट्रोल रूम अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा, जहां से सीसीटीवी फुटेज, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं का रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। यह सुविधाये हैं भवन में वेद मंदिर के निकट बने भवन में आंतरिक स्थल विकास कार्य के अंतर्गत कई आधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं। इनमें सीसी रोड (सीमेंट कंक्रीट रोड), रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, वाह्य जलमल निकासी व्यवस्था, वातानुकूलित (एयर-कंडीशन्ड) तंत्र, सबमर्सिबल पम्प के साथ बोरिंग, हाई-स्पीड लिफ्ट, पूर्ण विद्युतीकरण, मजबूत बाउंड्रीवाल, एमएस गेट और 160 केवीए का डीजल जनरेटर सेट प्रमुख है। ये सभी सुविधाएं भवन को पर्यावरण-अनुकूल, ऊर्जा-कुशल और आपात स्थिति में आत्मनिर्भर बनाती हैं।  हर गतिविधियों पर रखी जाएगी पैनी नजर कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के परियोजना प्रबंधक देवव्रत पवार ने बताया कि 98 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। बाउंड्रीवाल का कार्य प्रगति पर है। यह भवन जल्द ही लोकार्पण के लिए तैयार है। लोकार्पण के बाद इसे पूरी तरह से चालू कर दिया जाएगा। यह नया भवन विशेष रूप से पुलिस विभाग द्वारा संचालित होगा और राम जन्मभूमि परिसर के आसपास की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख सकेगा।

यूपी में स्कूलों में AI का प्रयोग, तकनीकी प्रशिक्षण को किया अनिवार्य

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में अब 'चॉक और डस्टर' के साथ-साथ 'एआई और मशीन लर्निंग' का दौर शुरू होने वाला है। प्रदेश सरकार ने शिक्षकों और प्रशासनिक अमले को भविष्य की तकनीक से लैस करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग ने मिशन कर्मयोगी (iGOT) पोर्टल पर उपलब्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) पाठ्यक्रमों को सभी शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। योगी सरकार ने बताया अपना लक्ष्य इस पहल का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में नवाचार लाना और प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाना है। वर्तमान में पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के मामले में उत्तर प्रदेश देश में टॉप पर है, लेकिन कोर्स पूरा करने की रैंकिंग में प्रदेश चौथे स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च तक यूपी को इस श्रेणी में भी नंबर वन बनाना है। इसके लिए विभाग ने स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मार्च तक इन कोर्सों में नामांकन कर उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करें। इसका मकसद शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में नवाचार, दक्षता और तकनीकी समझ को बढ़ाना है। विभाग ने एआई आधारित प्रमुख कोर्सों की सूची भी सभी संबंधित कार्यालयों को भेज दी है, ताकि प्रशिक्षण में कोई दिक्कत न हो। पोर्टल पर पंजीकरण के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, लेकिन कोर्स पूरा करने में प्रदेश चौथे स्थान पर है। अब सरकार का लक्ष्य इस श्रेणी में भी यूपी को नंबर वन बनाना है। इसके लिए सभी विभागों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे इसे प्राथमिकता में लें। साथ ही यह भी तय किया गया है कि पोर्टल पर उपलब्ध 57 सुझाए गए प्रशिक्षण कोर्सों में से हर कर्मचारी को हर महीने कम से कम एक कोर्स करना होगा। इस तरह 31 मार्च तक कुल 12 कोर्स पूरे करना अनिवार्य होगा।  

मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत-गारण्टी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ अधिनियम-2025 पारित करने के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार प्रकट किया

मुख्यमंत्री ने विकसित भारत-जी राम जी कानून-2025 के सम्बन्ध में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किया मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत-गारण्टी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ अधिनियम-2025 पारित करने के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार प्रकट किया  इस अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण भारत प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत/2047 के विजन के अनुरूप राष्ट्र निर्माण में और अधिक सक्रिय भूमिका का निर्वहन कर सकेगा : मुख्यमंत्री प्रदेश सरकार इस कानून को पूर्ण संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा  प्रभावशीलता के साथ राज्य में लागू कर रोजगार की नयी गारण्टी प्रदान करेगी  राज्य सरकार का संकल्प प्रत्येक पात्र को समय पर काम, प्रत्येक गांव में टिकाऊ परिसम्पत्तियों का निर्माण तथा प्रत्येक श्रमिक को सम्मान, सुरक्षा व खुशहाली प्रदान करना यह अधिनियम भारत के ग्रामीण विकास की दृष्टि से मील का पत्थर  साबित होगा, देश के श्रमिकों, किसानों तथा गांवों के विकास के हित  में उठाये गये इस कदम का स्वागत व समर्थन किया जाना चाहिए वी बी-जी राम जी अधिनियम-2025 रोजगार गारण्टी प्रदान करते हुए  ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा इस अधिनियम में रोजगार गारण्टी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गयी, मानदेय  का साप्ताहिक भुगतान होगा, भुगतान में देरी पर मुआवजे की भी व्यवस्था की गयी किसानों को मजदूरों की कमी दूर करने के लिए राज्यों को बुआई व  कटाई के समय 60 दिन तक कार्य विराम का अधिकार प्रदान किया गया जल संरक्षण की स्थायी व्यवस्था के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, चेकडैम  और उससे जुड़ी अन्य सुविधाओं को गांवों में विकसित किया जा सकता टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की गयी, सेटेलाइट  इमेजनरी के माध्यम से स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण की निगरानी की जाएगी कैग के मानकों के अनुरूप प्रत्येक 06 माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल एवं बहुस्तरीय समयबद्ध शिकायत निवारण तथा जिला लोकपाल की व्यवस्था सम्मिलित यह अधिनियम वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ  संघीय संतुलन को बनाये रखने में बेहतर योगदान देगा लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन के लिए ‘विकसित भारत-गारण्टी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ अधिनियम-2025 पारित किया गया है। प्रदेश सरकार इस कानून को पूर्ण संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा प्रभावशीलता के साथ राज्य में लागू कर रोजगार की नयी गारण्टी प्रदान करेगी। राज्य सरकार का संकल्प प्रत्येक पात्र को समय पर काम, प्रत्येक गांव में टिकाऊ परिसम्पत्तियों का निर्माण तथा प्रत्येक श्रमिक को सम्मान, सुरक्षा व खुशहाली प्रदान करना है। मुख्यमंत्री जी आज यहां विकसित भारत-जी राम जी कानून-2025 के सम्बन्ध में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह अधिनियम भारत के ग्रामीण विकास की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा। देश के श्रमिकों, किसानों तथा गांवों के विकास के हित में उठाये गये इस कदम का स्वागत व समर्थन किया जाना चाहिए। इस अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण भारत प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत/2047 के विजन के अनुरूप राष्ट्र निर्माण में और अधिक सक्रिय भूमिका का निर्वहन कर सकेगा। उत्तर प्रदेश को विकसित भारत-जी राम जी से अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अस्थायी और अधूरी सम्पत्तियों का दीर्घकालीन लाभ नहीं होता है। वी बी-जी राम जी अधिनियम-2025 रोजगार गारण्टी प्रदान करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा। यह कार्य विकसित भारत की आधारशिला मजबूत करेगा। विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब राज्य विकसित होंगे। राज्य तब विकसित होंगे, जब हमारी आधारभूत इकाई गांव विकसित होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, किसान आत्मनिर्भर होगा व श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा व सम्मान मिलेगा। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस अधिनियम में रोजगार गारण्टी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गयी है। मानदेय का साप्ताहिक भुगतान होगा। भुगतान में देरी पर मुआवजे की भी व्यवस्था की गयी है। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन चुका है। खेती के मौसम में किसानों को मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुआई व कटाई के समय 60 दिन तक कार्य विराम का अधिकार प्रदान किया गया है। उस समय वी बी-जी राम जी के कार्य स्थगित रहेंगे। इसके माध्यम से किसान और मजदूर दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ग्राम पंचायतें इस अधिनियम के अन्तर्गत किये जाने वाले कार्यां की चार श्रेणियां निर्धारित कर सकेंगी। अधिनियम के तहत जल संरक्षण की स्थायी व्यवस्था के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, चेकडैम और उससे जुड़ी अन्य सुविधाओं को गांवों में विकसित किया जा सकता है। ग्रामीण बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर के अन्तर्गत सड़क, नाली आदि का विकास किया जा सकता है। गांवों में खेल का मैदान, ओपन जिम, बाजार, दुकानों जैसे आजीविका सम्बन्धी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा सकता है। प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से निपटने तथा आपदा प्रबन्धन की तैयारी हेतु कार्य किये जा सकते हैं। परिणामस्वरूप, बाढ़ प्रबन्धन के लिए किये जाने वाले छोटे-छोटे कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों की शासन पर निर्भरता कम हो जाएगी। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस अधिनियम में टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की गयी है। इनमें बायोमैट्रिक उपस्थिति, जियो टैगिंग, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनीटरिंग, ए0आई0 से निगरानी तथा डिजिटल भुगतान जैसी युक्तियां सम्मिलित हैं। अब हाजिरी भरने की औपचारिकताएं नहीं होंगी, बल्कि बायोमैट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। सेटेलाइट इमेजनरी के माध्यम से स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण की निगरानी की जाएगी। डिजिटल भुगतान के माध्यम से श्रमिकों के खाते में मानदेय की धनराशि भेजी जाएगी।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस अधिनियम में कैग के मानकों के अनुरूप प्रत्येक 06 माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल एवं बहुस्तरीय समयबद्ध शिकायत निवारण तथा जिला लोकपाल की व्यवस्था सम्मिलित है। यह अधिनियम वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ संघीय संतुलन को बनाये रखने में बेहतर योगदान देगा। इसमें केन्द्र व राज्य की साझेदारी 60ः40 की होगी। स्पष्ट वार्षिक बजट के साथ कार्य मांग आधारित रहेगा। राज्यों को अधिक वित्तीय भागीदारी, स्वामित्व व गुणवत्ता सुधार का अधिकार दिया गया है। राज्यों को अब इस अधिनियम के माध्यम से 17,000 करोड़ रुपये अधिक धनराशि प्राप्त हो सकती है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि … Read more

मुख्यमंत्री योगी ने ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राज्य में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की

सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को बनाएं अनिवार्य: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी ने ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राज्य में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की मुख्यमंत्री ने कहा- सभी विभाग अपनी आवश्यकता के अनुरूप अपना पाठ्यक्रम बनाकर आईगॉट पोर्टल पर करें अपलोड बोले मुख्यमंत्री- विभागों एवं सरकारी संस्थाओं के पाठ्यक्रम में एआई और साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य रूप से करें शामिल मुख्यमंत्री ने कहा- ‘मिशन कर्मयोगी’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिवर्तनकारी पहल है बोले मुख्यमंत्री- सभी ट्रेनिंग सेंटर्स के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रम अवश्य बनाएं सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को अनिवार्य बनाएं- मुख्यमंत्री आईगॉट कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं वर्ष 2025 में देश भर में हुई कुल ऑनबोर्डिंग का 93 प्रतिशत है लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राज्य में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में मिशन के क्रियान्वयन, प्रशिक्षण ढांचे, डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थिति और विभिन्न विभागों में क्षमता संवर्धन से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान ने उत्तर प्रदेश में मिशन के क्रियान्वयन की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ‘मिशन कर्मयोगी’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य वैश्विक दृष्टिकोण के साथ भारतीय संस्कृति के लोकाचार में निहित मूल्यों को आत्मसात करते हुए ऐसे सक्षम मानव संसाधन तैयार करना है, जो प्रदेश और देश के विकास की प्रेरक शक्ति बने। उन्होंने कहा कि यह पहल शासन व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रही है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी को अवगत कराया गया कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत केंद्र में 30 लाख से अधिक सिविल सेवकों, राज्यों में लगभग 2.2 करोड़ कार्मिकों तथा शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 50 लाख कार्मिकों को क्षमता संवर्धन से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस मिशन के माध्यम से देश भर के 790 से अधिक सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाया जा रहा है। सभी सिविल सेवकों के सतत एवं समग्र ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए आईगॉट (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थापना की गई है। आईगॉट प्लेटफॉर्म आज विश्व का सबसे बड़ा सरकार-प्रेरित क्षमता निर्माण मंच बन चुका है। इस पर अब तक 1.45 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। प्लेटफॉर्म पर कुल 4,179 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें 840 से अधिक पाठ्यक्रम हिंदी में तथा 15 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में 540 से अधिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। अब तक 6.7 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं, जबकि पाठ्यक्रम पूर्णता दर 70 प्रतिशत से अधिक रही है, जो इस मंच की व्यापक स्वीकृति और प्रभावशीलता को दर्शाती है। आईगॉट ऐप को 50 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। आईगॉट कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं, जो वर्ष 2025 में देश भर में हुई कुल ऑनबोर्डिंग का 93 प्रतिशत है। वहीं, प्रदेश के 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने कम से कम एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। अब तक उत्तर प्रदेश से 72 लाख से अधिक पाठ्यक्रम पूर्ण किए जा चुके हैं, जो वर्ष 2025 में देश भर में हुई कुल पाठ्यक्रम पूर्णताओं का 99 प्रतिशत है। यह उपलब्धि प्रदेश में सुशासन, दक्ष प्रशासन और नागरिक-केंद्रित सेवा प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी विभाग एवं सरकारी संस्थाएं आवश्यकता अनुरूप अपना पाठ्यक्रम बनाकर भारत सरकार के ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म आईगॉट पोर्टल पर अपलोड करें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को अनिवार्य बनाएं। साथ ही इसे उनके प्रमोशन एवं एसीआर से भी जोड़ें।  मुख्यमंत्री ने कहा कि उपाम सहित प्रदेश में संचालित सभी ट्रेनिंग सेंटर्स के लिए समय की आवश्यकता को देखते हुए कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रम बनाएं, जिससे ट्रेनिंग सेंटर में ही नव प्रशिक्षणार्थियों की कार्यदक्षता को और बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी विभागों एवं सरकारी संस्थाओं के पाठ्यक्रम में एआई और साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य रूप से शामिल करें। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईगॉट के केस स्टडी प्लेटफॉर्म ‘अमृत ज्ञान कोश’ में विश्व की केस स्टडीज उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश में भी विभिन्न विभागों में अच्छी केस स्टडीज हैं, जिन्हें अमृत ज्ञान कोश पर अपलोड करना चाहिए। उन्होंने नई सोच और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि ज्ञान, कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण के समन्वय से ही जनसेवा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार संभव है। ‘मिशन कर्मयोगी’ इसी लक्ष्य के साथ कार्य संस्कृति को सुदृढ़ करता है और जनभागीदारी की भावना को मजबूती प्रदान करता है, जिससे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की समयबद्ध और प्रभावी पूर्ति सुनिश्चित होती है। मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता, नियमित मूल्यांकन और व्यावहारिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि इसका लाभ शासन की प्रत्येक इकाई तक पहुंचे और जनसेवा के मानकों में निरंतर सुधार हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत अभियंताओं को नई डिजाइन एवं नई तकनीकि का ज्ञान प्राप्त हो सके, इसके दृष्टिगत कैपेसिटी बिल्डिंग का पाठ्यक्रम अवश्य बनाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देशित किया कि मिशन कर्मयोगी के तहत एएनएम, आशा कार्यकर्ता, पुलिस कांस्टेबल, पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों से जुड़े फील्ड कर्मियों के लिए व्यवहारिक, कार्य-आधारित और जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाए, ताकि जमीनी स्तर पर सेवाओं की प्रभावशीलता और संवेदनशीलता मजबूत हो।

योगी कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृत

  जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन, आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को मंजूरी योगी कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृत जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद में अनियमितताओं पर योगी सरकार की कठोर कार्रवाई फर्जी डिग्रियों के चलते जेएस विश्वविद्यालय पर गिरी गाज, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय संभालेगा अभिलेख आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ का ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस, उच्च शिक्षा के विस्तार को मिली मंजूरी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। एक तरफ, योगी कैबिनेट ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (जनपद फिरोजाबाद) के परिसमापन को मंजूरी दी है तो वहीं आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।  फर्जी डिग्रियों पर कड़ा एक्शन  जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद के परिसमापन के प्रस्ताव की मंजूरी के निर्णय की जानकारी देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि  जांच में यह सामने आया कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी और बैक डेट में मार्कशीट व डिग्रियां जारी की गईं, जिनका उपयोग राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा किया गया। इस प्रकरण में राजस्थान पुलिस की जांच, कुलाधिपति एवं कुलसचिव की गिरफ्तारी तथा शासन स्तर पर गठित जांच समितियों की आख्या में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। मंत्री ने बताया कि जेएस विश्वविद्यालय द्वारा अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन किया गया है, जिसमें डिग्री प्रदान करने की शक्ति का दुरुपयोग, संगठित अपराध के रूप में फर्जी अंकतालिकाओं एवं डिग्रियों का वितरण, आवश्यक भूमि मानक का पालन न करना तथा उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को अनिवार्य विवरण उपलब्ध न कराना शामिल है। इन सभी तथ्यों के दृष्टिगत योगी सरकार ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद के परिसमापन का निर्णय लिया है। परिसमापन के पश्चात विश्वविद्यालय के समस्त अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे तथा उन्हीं अभिलेखों के आधार पर पूर्व में निर्गत मार्कशीट एवं डिग्रियों का प्रमाणीकरण किया जाएगा। साथ ही, परिसमापन अवधि के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के संचालन हेतु धारा 55(6) के अंतर्गत त्रि-सदस्यीय अंतरिम समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर में उच्च शिक्षा के नए अवसर होंगे सृजित  कैबिनेट बैठक में दूसरा अहम निर्णय आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस की स्थापना को लेकर लिया गया। इसके लिए संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस ऑफ-कैंपस के शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे और छात्रों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 तथा उसके द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2021 के अंतर्गत परिसर दूरस्थ केंद्र की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इस क्रम में प्रायोजक संस्था एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मेरठ द्वारा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 4.796 एकड़ भूमि चिन्हित की गई थी, जिसके लिए 25 फरवरी 2025 को आशय पत्र (एलओआई) निर्गत किया गया था। अब सरकार द्वारा आई०आई०एम०टी० विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस के संचालन हेतु प्रायोजक संस्था को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। मंत्री ने कहा कि इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

इन्वेस्ट यूपी बनी नोडल एजेंसी, आईटी से लेकर आरएंडडी तक निवेश और रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन

जीसीसी नीति-2024 की एसओपी-2025 को योगी कैबिनेट की हरी झंडी इन्वेस्ट यूपी बनी नोडल एजेंसी, आईटी से लेकर आरएंडडी तक निवेश और रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम जीसीसी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश बढ़ेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियमावली-2025 को मंजूरी प्रदान की गई। इस नियमावली के लागू होने से प्रदेश को वैश्विक निवेश, उच्च स्तरीय सेवाओं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में नई गति मिलेगी। कैबिनेट से अनुमोदित नियमावली के अंतर्गत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। यह नियमावली जीसीसी नीति-2024 के प्रख्यापन की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी तथा राज्य सरकार द्वारा संशोधन अथवा समाप्त किए जाने तक लागू रहेगी। जीसीसी में अब तक 21 कंपनियों ने किया निवेश औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कैबिनेट के निर्णय के विषय में बताया कि प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है, जिसके चलते निवेश करने के लिए उद्योग घराने और मल्टीनेशनल कंपनियां हमारे संपर्क में हैं। जीसीसी नीति हमारे लिए बहुत लाभप्रद है और आज हम इसकी एसओपी लेकर आए हैं। यूपी में जीसीसी के निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 21 कंपनियों ने इसमें निवेश प्रारंभ कर दिया है। इसके माध्यम से प्रदेश में व्यापक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नियमावली के अनुसार, जीसीसी किसी भारतीय अथवा विदेशी कंपनी द्वारा स्थापित एक कैप्टिव इकाई होगी, जो सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास (R&D), वित्त, मानव संसाधन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और नॉलेज सर्विसेज जैसे रणनीतिक कार्यों का निष्पादन करेगी। वित्तीय प्रोत्साहनों की व्यापक व्यवस्था इस नियमावली में जीसीसी इकाइयों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। इनमें फ्रंट एंड लैंड सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट अथवा प्रतिपूर्ति, पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, संचालन व्यय (ओपेक्स) सब्सिडी, पेरोल और भर्ती सब्सिडी, ईपीएफ प्रतिपूर्ति, प्रतिभा विकास एवं कौशल प्रोत्साहन, अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन के साथ-साथ केस-टू-केस आधार पर विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं। वित्तीय लाभ के अतिरिक्त, जीसीसी इकाइयों को तकनीकी सहायता समूह, इंडस्ट्री लिंकेज सपोर्ट, विनियामक सहायता, आवेदन प्रकरणों का त्वरित निस्तारण, अनुमोदन एवं प्रोत्साहन वितरण की सुव्यवस्थित प्रक्रिया भी उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्र सरकार की योजनाओं से अतिरिक्त लाभ नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि इसके अंतर्गत मिलने वाले सभी प्रोत्साहन, भारत सरकार की किसी भी योजना अथवा नीति के तहत उपलब्ध लाभों के अतिरिक्त होंगे। किसी भी विधिक विवाद की स्थिति में न्यायिक क्षेत्राधिकार केवल लखनऊ स्थित न्यायालयों का होगा। स्वीकृत प्रोत्साहन राशि का वितरण वित्त विभाग के प्रचलित नियमों एवं शासनादेशों के अनुसार किया जाएगा। निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा योगी सरकार के इस निर्णय को प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। GCC नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।