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ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोले गोरक्षपीठाधीश्वर

योग्य गुरु मिले तो कोई भी मनुष्य अयोग्य नहीं : सीएम योगी युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में श्रद्धाजंलि समारोह ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोले गोरक्षपीठाधीश्वर समाज और राष्ट्र को दिशा दिखाई गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय ने : मुख्यमंत्री गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। अगर कोई मनुष्य अयोग्य है तो मानकर चलिए उसे योग्य योजक नहीं मिला। योग्य गुरु मिलने पर मनुष्य अयोग्य हो ही नहीं सकता। इस परिप्रेक्ष्य में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की सर्वस्वीकार्य प्रतिष्ठा सुयोग्य योजक की रही है।   सीएम योगी को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धाजंलि समारोह के अंतर्गत बुधवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर अपनी भावाभिव्यक्ति कर रहे थे। ‘अमन्त्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलमनौषधम्, अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः’ का उद्धरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा कोई अक्षर नहीं है जिसमें मंत्र बनने का सामर्थ्य न हो और ऐसी कोई वनस्पति नहीं है जिसमें औषधीय गुण न हो। ऐसे ही कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, जरूरत होती है व्यक्ति की योग्यता को पहचान कर उसे सही दिशा देने वाले गुरु की। गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय ने सदैव योजक की भूमिका का निर्वहन कर समाज और राष्ट्र को दिशा दिखाई। पूर्ववर्ती दोनों पीठाधीश्वरों युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्र संत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज का पूरा जीवन देश और धर्म के लिए समर्पित था। साधु अकेला, समाज उसका परिवार, सनातन ही उसकी जाति मुख्यमंत्री ने कहा कि साधु अकेला होता है। समाज उसका परिवार, राष्ट्र उसका कुटुंब होता है और उसकी जाति सिर्फ सनातन होती है। उन्होंने कहा कि संतों के संकल्प में पवित्रता, दृढ़ता होती है, संकल्प में उसकी साधना के अंश होते हैं। और, जब सच्चा संत कोई संकल्प लेता है तो उसके परिणाम अवश्य आते हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ऐसे ही संकल्पों वाले संत थे। अयोध्या के श्रीराम मंदिर निर्माण के उनके संकल्प और संकल्प के प्रति किए गए संघर्ष का परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है।  हिंदुआ सूर्य महाराणा प्रताप की परंपरा से गोरखपुर आए महंत दिग्विजयनाथ मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति को नमन करते हुए कहा कि महंतका जन्म इतिहास प्रसिद्ध मेवाड़ की उस कुल परंपरा में हुआ था जिसने विदेशी आक्रांताओं के सामने कभी समर्पण नहीं किया। वह हिंदुआ सूर्य महाराणा प्रताप की परंपरा से गोरखपुर आए। उनका जीवन सिर्फ आध्यात्मिक उन्नयन तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने धर्म के अभ्युदय के साथ समाज और राष्ट्र के हित में सांसारिक उत्कर्ष को भी शिक्षा और सेवा के माध्यम से आमजन के लिए महत्व दिया। यही कार्य महंत अवेद्यनाथ जी ने भी किया। सीएम योगी ने कहा कि सच्चा साधु धर्म के अभ्युदय और निः श्रेयस, दोनों को साथ लेकर चलता है।  गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी और शैक्षिक क्रांति के पुरोधा थे महंत दिग्विजयनाथ मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ जी गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी थे। उन्होंने इसे सनातन परंपरा के वैभवशाली मंदिर के रूप में स्थापित किया। इसके साथ ही उनकी ख्याति पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक क्रांति के पुरोधा के रूप में भी है। 1932 में उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना के साथ ही गोरखपुर में विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया था। देश की आजादी के बाद जब गोरखपुर में विश्वविद्यालय स्थापित करने की बात आगे बढ़ी तो बहुत से लोग पीछे हट गए। तब महंत दिग्विजयनाथ जी ने अपने दो डिग्री कॉलेज दान में देकर विश्वविद्यालय की स्थापना सुनिश्चित कराई। उन्होंने बालिका शिक्षा के केंद्र को भी स्थापित करने का संकल्प बालिका विद्यालय बनवाकर पूरा किया।  गुलामी के प्रतीकों को हटाने का लिया था संकल्प सीएम योगी ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी ने गुलामी के प्रतीकों का हटाने का संकल्प लिया था। अयोध्या में गुलामी की निशानी ढांचे को हटाकर भव्य श्रीराम मंदिर बनाना उनका और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी का संकल्प और सपना था। आज दोनों आचार्यों का यह संकल्प गुलामी के निशान को हटाकर पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज ऐसा कौन भारतीय होगा जिसे अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर देखकर गर्व न होता हो। कोई ऐसा होगा तो उसके भारतीय होने पर ही संदेह होगा। विकसित भारत केवल राजनीतिक संकल्प नहीं, भारत और भारतीयता का मंत्र अपने संबोधन में सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए विकसित भारत के उद्घोष का भी उल्लेख किया। कहा कि विकसित भारत केवल राजनीतिक संकल्प नहीं है बल्कि यह भारत और भारतीयता का मंत्र है। वसुधैव कुटुम्बकम की दृष्टि से कभी भारत ने दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराया था। कोई आपस में लड़े न, यह भारत की परंपरा है। ऐसा फिर से हो, इसके लिए विकसित और आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता है। इसलिए, हर भारतीय को विकसित भारत के संकल्प से जुड़ना होगा।  जब संकल्प अंतःकरण से होता है तो वह अवश्य पूरा होता है।  परंपराएं हमारी विरासत, सीख लेने की जरूरत मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षपीठ में पूज्य आचार्यों की स्मृति में साप्ताहिक आयोजन पीठ की परंपरा का हिस्सा है। मंदिर के अलावा आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की सभी संस्थाओं में भी पूज्य आचर्यद्वय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए आयोजन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि परंपराएं हमारी विरासत होती हैं। वर्तमान और भावी पीढ़ी को इनके जरिये प्रेरणा और सीख लेने की जरूरत होती है। विरासत के संदर्भ में उन्होंने अखंड भारत में दुनिया के पहले विश्वविद्यालय, प्रभु श्रीराम के भाई भरत के पुत्र तक्ष के नाम पर स्थापित तक्षशिला विश्वविद्यालय का उल्लेख भी किया। बताया कि पाणिनि का व्याकरण इसी तक्षशिला विश्वविद्यालय से आगे बढ़ा। महर्षि सुश्रुत और चरक जैसे आयुर्वेद के जनक इसी विश्वविद्यालय से निकले। आयुर्वेद, व्याकरण, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, कृषि सहित अनेक क्षेत्रों के लिए यही प्राचीनतम विश्वविद्यालय रहा।  महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवेद्यनाथ न होते तो राम मंदिर बनता ही नहीं : डॉ. रामविलास … Read more

योगी राज में बेटी और व्यापारी हुए सुरक्षित, तो दिखने लगा प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर

विकसित यूपी @2047 :  आत्मनिर्भर हो रही नारी, बम्पर हुआ व्यापार'  यूपी ले रहा नया अवतार : लक्ष्मी हुईं सुरक्षित तो बढ़ने लगा अर्थ-व्यापार  – योगी राज में बेटी और व्यापारी हुए सुरक्षित, तो दिखने लगा प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर – 2017 से पहले महिला श्रम भागीदारी दर सिर्फ 13.5%, आज बढ़कर 34.5% – औद्योगिक ऋण 3.54 लाख करोड़ से बढ़कर 9.24 लाख करोड़ पहुंचा  – 2047 तक महिला भागीदारी दर पुरुषों के बराबर लाने का योगी सरकार का लक्ष्य – विनिर्माण निर्यात और एफडीआई में देश में नंबर-1 बनेगा यूपी – 2047 तक यूपी की जीडीपी 6 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य, देश की अर्थव्यवस्था में देगा 20% का योगदान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बीते साढ़े आठ साल में किये गये लगातार प्रयासों के फलीभूत प्रदेश में आज बेटी और व्यापारी दोनों सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि लक्ष्मी स्वरूप महिलाएं स्वयं को तेजी से सशक्त बना रही हैं, साथ ही प्रदेश में उद्योग-व्यापार का माहौल स्थापित होने लगा है। इसी सोच के साथ अब सीएम योगी ने "विकसित यूपी @2047" का विजन सामने रखा है, जिसमें आत्मनिर्भर नारी और बम्पर व्यापार को राज्य की प्रगति का मूल आधार माना गया है। 2017 से पहले की स्थिति साल 2017 से पहले प्रदेश कई चुनौतियों से घिरा हुआ था। गुंडाराज, माफिया तंत्र और अपराध ने प्रदेश में सबसे ज्यादा परेशान महिलाओं और उद्यमियों तथा व्यापारियों को कर रखा था। बेटियां स्कूल-कॉलेज जाने से भी डरती थीं, तो वहीं व्यापारी या तो गुंडा टैक्स और रंगदारी देने के मजबूर थे या प्रदेश से पलायन करने को बाध्य। बेरोजगारी दर 6.2 प्रतिशत थी और लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (एलएफपीआर) मात्र 44.6 प्रतिशत रह गया था। सबसे बड़ी चिंता महिला श्रम भागीदारी दर की थी, जो सिर्फ 13.5 प्रतिशत पर अटकी हुई थी। निवेशक प्रदेश में आने से हिचकिचा रहे थे और कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर पहुंच चुकी थीं। औद्योगिक गतिविधियां ठप पड़ने लगी थीं और रोजगार का संकट गहराता जा रहा था। 2017 से 2025 : बदलाव की नई इबारत योगी सरकार ने बीते साढ़े आठ साल में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। अपराधी या तो जेल की सलाखों के पीछे नजर आने लगे या परलोक सिधार गये, बचे खुचे अपनी जान की परवाह करते हुए प्रदेश छोड़कर भाग खड़े हुए। इसके बाद महिला सुरक्षा के साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण के द्वार तो खुले ही निवेश के क्षेत्र में भी व्यापक तौर पर बुनियादी बदलाव दिखने शुरू हो गये। प्रदेश का एलएफपीआर 44.6 प्रतिशत से बढ़कर 56.9 प्रतिशत हो गया। महिला श्रम भागीदारी दर में भी ऐतिहासिक उछाल आया और यह 13.5 से बढ़कर सीधे 34.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। बेरोजगारी दर घटकर 3 प्रतिशत पर आ गई और अकेले एमएसएमई सेक्टर से 1.65 करोड़ रोजगार सृजित हुए। औद्योगिक ऋण 3.54 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 9.24 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा। इसी दौरान 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर समझौते हुए, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं जमीन पर उतर भी चुकी हैं। उद्योग और व्यापार को मिली नई पहचान योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को नया जीवन मिला है। पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 14,169 से बढ़कर 27,295 तक हो गई हैं। 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत 77 उत्पादों को जीआई टैग मिला है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर पहुंच गया है। एमएसएमई इकाइयों की संख्या 96 लाख हो गई, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। यह न सिर्फ रोजगार सृजन का बड़ा जरिया बना, बल्कि वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की पहचान भी मजबूत हुई है। 2047 का विजन : आत्मनिर्भर नारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि 'विकसित यूपी @2047' का सबसे अहम स्तंभ महिला सशक्तिकरण है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक प्रदेश में महिला श्रम भागीदारी दर 50 प्रतिशत हो और 2047 तक यह पुरुषों के बराबर पहुंचे। इसके लिए महिलाओं को 'स्टेम' (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमेटिक्स) शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। किशोरी कल्याण, पोषण व स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त किया जाएगा। महिला श्रमिकों के लिए 2030 और 2047 तक उनकी जरूरत के हिसाब से हर शहर में हॉस्टल की व्यवस्था की जाएगी। 2047 का विजन : बम्पर व्यापार और निवेश सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक विनिर्माण निर्यात में उत्तर प्रदेश देश में नंबर एक बने और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के मामले में भी शीर्ष पर पहुंचे। प्रदेश की पांच औद्योगिक कंपनियों को फॉर्च्यून ग्लोबल 500 की सूची में शामिल कराने का रोडमैप तैयार है। इसके लिए एयरोस्पेस, डिफेंस प्रोडक्शन, अपैरल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर को रणनीतिक स्तंभ बनाया गया है। ग्रीन और टेक्नोलॉजी आधारित विकास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में भविष्य का उद्योग केवल रोजगार नहीं देगा, बल्कि सतत विकास का मॉडल भी बनेगा। इसी दिशा में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर, नीतिगत ढांचा, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और एमएसएमई को ग्लोबल वैल्यू चेन में शामिल करने पर खास जोर दिया जा रहा है। 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य 'विकसित यूपी @2047' के तहत राज्य ने 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए 2025 से 2047 तक औसतन 16 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखनी होगी। वर्तमान में प्रदेश की जीडीपी 353 बिलियन डॉलर है, जो 2030 तक 1000 बिलियन, 2036 तक 2000 बिलियन और 2047 तक 6000 बिलियन डॉलर तक पहुंचाई जाएगी। उस समय प्रति व्यक्ति आय 26 लाख रुपये तक होगी और यूपी देश की कुल जीडीपी में 20 प्रतिशत योगदान देगा।  

आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार को महंत अवेद्यनाथ जी की स्मृति में होगी श्रद्धांजलि सभा

सामाजिक समरसता और राम मंदिर के लिए युगों तक याद रहेंगे राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार को महंत अवेद्यनाथ जी की स्मृति में होगी श्रद्धांजलि सभा गोरखनाथ मंदिर में जारी श्रद्धांजलि सप्ताह का होगा समापन, सीएम योगी सहित कई संतजन रहेंगे मौजूद गोरखपुर  गोरक्षपीठ में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर जारी साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह गुरुवार (11 सितंबर) को संपन्न हो जाएगा। आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार को वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के विराट व्यक्तित्व का स्मरण कर उन्हें शब्दों और भावों की श्रद्धांजलि दी जाएगी। सामाजिक समरसता को ही आजीवन ध्येय मानने वाले श्रीराम मंदिर आंदोलन के नायक ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ का स्मरण सदैव एक ऐसे संत के रूप में होता है जिनमें समूचे राष्ट्र के सनातनियों की आस्था है।  नाथपंथ की लोक कल्याण की परंपरा को धर्म के साथ राजनीति से भी संबद्ध कर महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने पांच बार मानीराम विधानसभा और चार बार गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी किया।  श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए हुए आंदोलन को निर्णायक पड़ाव देने के लिए इस राष्ट्रसंत को निश्चित ही युगों-युगों तक याद किया जाएगा। 18 मई 1919 को गढ़वाल (उत्तराखंड) के ग्राम कांडी में जन्में महंत अवेद्यनाथ का बचपन से ही धर्म, अध्यात्म के प्रति गहरा झुकाव था। उनके इस जुड़ाव को विस्तृत आयाम नाथपंथ के विश्वविख्यात गोरक्षपीठ में महंत दिग्विजयनाथ के सानिध्य में मिला। गोरक्षपीठ में उनकी विधिवत दीक्षा 8 फरवरी 1942 को हुई और वर्ष 1969 में महंत दिग्विजयनाथ की आश्विन तृतीया को चिर समाधि के बाद 29 सितंबर को वह गोरखनाथ मंदिर के महंत व पीठाधीश्वर बने। योग व दर्शन के मर्मज्ञ पीठाधीश्वर के रूप में उन्होंने अपने गुरुदेव के लोक कल्याणकारी व सामाजिक समरसता के आदर्शों का फलक और विस्तारित किया। यह सिलसिला 2014 में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उनके चिर समाधिस्थ होने तक अनवरत जारी रहा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों का योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है। महंत दिग्विजयनाथ ने अपने जीवनकाल में मंदिर आंदोलन में क्रांतिकारी नवसंचार किया तो उनके बाद इसकी कमान संभाली महंत अवेद्यनाथ ने। नब्बे के दशक में उनके ही नेतृत्व में श्रीराम मंदिर आंदोलन को समग्र, व्यापक और निर्णायक मोड़ मिला। आंदोलन की ज्वाला गांव-गांव तक प्रज्वलित हुई। महंत अवेद्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष के रूप में आंदोलन में संतो, राजनीतिज्ञों और आमजन को एकसूत्र में पिरोया। यह भी सुखद संयोग है कि पांच सदी के इंतजार के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ की देखरेख में हुआ है। महंत अवेद्यनाथ वास्तविक अर्थों में धर्माचार्य थे। धर्म के मूल मर्म सामाजिक समरसता को उन्होंने अपने जीवनपथ का उद्देश्य बनाया। आजीवन उन्होंने हिन्दू समाज से छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने के लिए वृहद अभियान चलाया। अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बरहपंथ योगी महासभा के अध्यक्ष के रूप में महंतजी ने देशभर के संतों को भी अपने इसी अभियान से जोड़ा। अपने स्पष्ट विचारों के चलते पूरे देश के संत समाज में अति सम्माननीय रहे महंत अवेद्यनाथ दक्षिण भारत के मीनाक्षीपुरम में दलित समाज के सामूहिक धर्मांतरण की घटना से बहुत दुखी हुए। इस तरह की पुनरावृत्ति उत्तर भारत में न हो, इसी कारण से धर्म के साथ उन्होंने राजनीति की भी राह चुनी। उनका ध्येय हिन्दू समाज की कुरीतियों को दूर कर पूरे समाज को एकजुट करना था। इसे लेकर उन्होंने दलित बस्तियों में सहभोज अभियान शुरू किया जहां जातिगत विभेद से परे सभी लोग एक पंगत में भोजन करते। काशी में डोमराजा के घर संत समाज के साथ भोजन कर महंतजी ने सामाजिक समरसता का देशव्यापी संदेश दिया। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने दलित कामेश्वर चौपाल के हाथों राम मंदिर के भूमिपूजन की पहली ईंट रखवाई। महंत अवेद्यनाथ सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए प्रभु श्रीराम और देवी दुर्गा के उद्धरणों से संदेश देते थे। ऐसे संदेश उनकी दिनचर्या में शामिल थे। महंतलोगों को व्यावहारिक रूप में समझाते थे कि प्रभु श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर खाए, निषादराज को गले लगाया, गिद्धराज जटायु का अंतिम संस्कार अपने हाथों किया, वनवास के दौरान वनवासियों से मित्रता की तो इसके पीछे उनकी सोच समरस समाज की स्थापना ही थी। वह बताते थे कि देवी दुर्गा की आठ भुजाएं समाज के चारों वर्णों से दो-दो भुजाओं की प्रतीक हैं। समाज के ये चारों वर्ण एकजुट हो जाएंगे तो वह भी देवी दुर्गा की भांति इतने सशक्त होंगे कि किसी भी शक्तिशाली पर नियंत्रण पा लेंगे। ठीक वैसे ही जैसे अष्टभुजी देवी दुर्गा सबसे तेज तर्रार और शक्तिशाली जीव शेर पर सवारी करती हैं।  महंत अवेद्यनाथ के नाम राजनीति के क्षेत्र में भी अनूठा रिकार्ड है। उन्होंने पांच बार (1962, 1967, 1969, 1974 व 1977) मानीराम विधानसभा सीट और चार बार (1970, 1989,1991 व 1996) गोरखपुर सदर संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व किया था। वह अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के उपाध्यक्ष व महासचिव के रूप में भी प्रतिष्ठित रहे।

पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण तृतीया पर गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा

अहर्निश प्रासंगिक हैं युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के विचार पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण तृतीया पर बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा लोक कल्याण को समर्पित रहा महंत दिग्विजयनाथ जी का जीवन गोरखपुर  कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने, विरासत पर गौरव की अनुभूति करने और गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने की सनातनी परंपरा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष स्मृतिशेष गुरुजन की स्मृति में अध्यात्म और राष्ट्रीयता के सुर गुंजित होते हैं। अवसर होता है युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का। इस वर्ष ब्रह्मलीन महंतद्वय की स्मृति में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा 4 सितंबर से और समाज व राष्ट्र को प्रभावित करने वाले समसामयिक विषयों पर चिंतन-मंथन के सांगोष्ठिक कार्यक्रम 5 सितंबर से जारी हैं। इस साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत आश्विन कृष्ण तृतीया पर 10 सितंबर (बुधवार) को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि पर तथा आश्विन कृष्ण चतुर्थी पर 11 सितंबर (गुरुवार) को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में किया जाएगा। पुण्य स्मरण का यह कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में होगा जहां देशभर के प्रमुख संतजन उपस्थित रहेंगे।  पुण्यतिथि समारोह में बुधवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की स्मृतियों के जीवंत होने के इस अवसर पर यह जानना भी प्रासंगिक है कि उन्हें युगपुरुष क्यों कहा जाता है। भौतिक विद्यमानता न होने के बावजूद जो व्यक्तित्व अपने कार्यों-विचारों से अपने बाद की पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं, सही अर्थों में युगपुरुष होते हैं। कारण, हरेक कालखंड में उनके बताए मार्गों, विचारों और आदर्शों की प्रासंगिकता रहती है। ऐसे ही युगपुरुष हैं ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ। वर्ष 1935 से 1969 तक नाथपंथ के विश्व विख्यात पीठ के कर्ता-धर्ता रहे ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की बुधवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को 56वीं पुण्यतिथि है।  पांच दशक से अधिक समय से उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को श्रद्धा भाव से न केवल नमन-स्मरण किया जाता है बल्कि उनपर अमल करने का संकल्प भी लिया जाता है। महंत जी न केवल गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी रहे बल्कि उनका पूरा जीवन राष्ट्र, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा व समाजसेवा के जरिये लोक कल्याण को समर्पित रहा। तरुणाई से ही वह देश की आजादी की लड़ाई में जोरदार भागीदारी निभाते रहे तो देश के स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक एकता और उत्थान के लिए। इसके लिए शैक्षिक जागरण पर उनका सर्वाधिक जोर रहा। महंत दिग्विजयनाथ का जन्म वर्ष 1894 में वैशाख पूर्णिमा के दिन चित्तौड़, मेवाड़ ठिकाना ककरहवां (राजस्थान) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नान्हू सिंह था। पांच वर्ष की उम्र में 1899 में इनका आगमन गोरखपुर के नाथपीठ में हुआ। अपनी जन्मभूमि मेवाड़ की माटी की तासीर थी कि बचपन से ही उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान से समझौता न करने की प्रवृत्ति कूट कूटकर भरी हुई थी। उनकी शिक्षा गोरखपुर में ही हुई और उन्हें खेलों से भी गहरा लगाव था। 15 अगस्त 1933 को गोरखनाथ मंदिर में उनकी योग दीक्षा हुई और 15 अगस्त 1935 को वह इस पीठ के पीठाधीश्वर बने। वह अपने जीवन के तरुणकाल से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते रहे। देश को स्वतंत्र देखने का उनका जुनून था कि उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में स्कूल छोड़ दिया। उन पर लगातार आरोप लगते थे कि वह क्रांतिकारियों को संरक्षण और सहयोग देते हैं। 1922 के चौरीचौरा के घटनाक्रम में भी उनका नाम आया लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता के सामने ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और उन्हें रिहा कर दिया गया।  श्रीराम मंदिर आंदोलन में ब्रह्मलीन महंतकी रही महती भूमिका अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण को लेकर हुए आंदोलनों में गोरक्षपीठ की महती भूमिका से सभी वाकिफ हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ इस आंदोलन में नींव के पत्थर हैं। 1934 से 1949 तक उन्होंने लगातार अभियान चलाकर आंदोलन को न केवल नई ऊंचाई दी बल्कि 1949 में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भी रहे। 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति प्रकट होने के नौ दिन पहले महंत दिग्विजय नाथ के नेतृत्व में अखंड रामायण के पाठ का आयोजन शुरू हो गया था। रामलला के प्रकट होने के समय महंत जी स्वयं वहां उपस्थित थे। पांच सौ वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि स्थित मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। प्रभु रामलला के मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन को उनके बाद उनके शिष्य महंत अवेद्यनाथ ने निर्णायक बनाया तो कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी तब आई जब राज्य की सत्ता का नेतृत्व भी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। ऐसे में जब भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर का जिक्र होगा, तो वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ आप ही स्मरित होंगे।  पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति के अमर नायक हैं महंत दिग्विजयनाथ महंत दिग्विजयनाथ का नाम पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति लाने वाले नायक के रूप में अमर है। उन्होंने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा की जो ज्योति जलाई, उससे आज पूरा अंचल प्रकाशित हो रहा है। शिक्षा क्रांति के लिए उन्होंने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। एक किराए के मकान में परिषद के अंतर्गत महाराणा प्रताप क्षत्रिय स्कूल शुरू हुआ। 1935 में इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली और 1936 में हाईस्कूल की भी पढाई शुरू हुई। नाम 'महाराणा प्रताप हाई स्कूल' हो गया। इसी बीच महंत दिग्विजयनाथ के प्रयास से गोरखपुर के सिविल लाइंस में पांच एकड भूमि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को प्राप्त हो गयी और महाराणा प्रताप हाईस्कूल का केन्द्र सिविल लाइंस हो गया तथा देश के आजाद होते समय यह विद्यालय महाराणा प्रताप इन्टरमीडिएट कालेज के रुप में प्रतिष्ठित हुआ। 1949-50 में इसी परिसर में महाराणा प्रताप डिग्री कालेज की स्थापना महंतजी की अगुवाई में हुई। शिक्षा को लेकर उनकी सोच दूरदर्शी और निजी हित से परे थी। यही वजह थी कि उन्होंने 1958 में अपनी संस्था महाराणा प्रताप डिग्री कालेज को गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु दान में दिया। बाद में परिषद की तरफ से उनकी … Read more

योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने तैयार की व्यापक रणनीति

दिव्यांगजनों की योजनाओं को लेकर प्रदेश के सभी पात्रों तक पहुंचेगी योगी सरकार   योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने तैयार की व्यापक रणनीति  – सोशल मीडिया से लेकर प्रदेश भर के विद्यालयों, पंचायतों व नगरीय निकायों में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान   दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों के आयोजन पर जोर दे रही योगी सरकार लखनऊ  योगी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए विभागीय योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। इसके तहत आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा ताकि योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। योगी सरकार ने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे योजनाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सके। योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि योजनाओं की जानकारी को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में फैलाने के लिए मीडिया, सोशल मीडिया, विद्यालयों, पंचायतों, नगरीय निकायों और स्थानीय शिविरों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले मिलेगी छात्रवृत्ति  आगामी 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले छात्रवृत्ति वितरित की जाएगी। यह पहली बार होगा जब छात्रवृत्ति का वितरण समय से पूर्व सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। योगी सरकार ने प्रत्येक पात्र लाभार्थी को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है।  दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों का आयोजन दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार ने रोजगार मेलों के आयोजन पर भी जोर दिया है। ये मेले विभागीय स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, जिससे दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे योजनाओं के प्रचार-प्रसार को और प्रभावी बनाने के लिए रचनात्मक तरीके अपनाएं। सोशल मीडिया के माध्यम से योजनाओं की जानकारी को वायरल करने और स्थानीय स्तर पर शिविरों के आयोजन से जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि योगी सरकार की इस पहल से न केवल दिव्यांगजनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया जाएगा, बल्कि उनकी प्रतिभा और क्षमता को समाज में एक नई पहचान भी मिलेगी। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को दिव्यांग सशक्तीकरण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

सीएम योगी का खास नजरिया: गोसेवा करते हुए भवानी और भोलू को किया दुलारा, पुंज को खिलाया गुड़

सीएम योगी ने की गोसेवा,भवानी और भोलू को दुलारा, पुंज को भी खिलाया गुड़ सीएम योगी का खास नजरिया: गोसेवा करते हुए भवानी और भोलू को किया दुलारा, पुंज को खिलाया गुड़ सीएम योगी ने किया प्यार भरा काम, गायों भवानी, भोलू और पुंज के साथ बिताए खास पल गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पशु-पक्षी प्रेम जगजाहिर है। इसका एक नजारा बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में एक बार दिखा। प्रातःकाल मंदिर परिसर भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने गोशाला में गोसेवा की और मोर को भी गुड़ खिलाया।  गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान गोसेवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा है। इसी क्रम में बुधवार सुबह भी उन्होंने मंदिर की गोशाला में समय बिताया और गोसेवा की। मुख्यमंत्री ने गोवंश को गुड़ खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को देखभाल के लिए जरूरी निर्देश दिए। गोसेवा के दौरान उन्होंने पिछले साल आंध्र प्रदेश के येलेश्वरम स्थित गोशाला से गोरखनाथ मंदिर लाए गए नादिपथि मिनिएचर नस्ल (पुंगनूर नस्ल की नवोन्नत ब्रीड) के गोवंश भवानी और भोलू को खूब दुलारा। गोवंश के ये नाम सीएम योगी ने ही रखे हैं। उन्होंने भवानी और भोलू को गुड़ भी खिलाया। सीएम योगी के स्नेह से गोवंश भाव विह्वल दिख रहे थे। मंदिर की गोशाला में एक मोर भी विचरण करता है। उसका नाम पुंज रखा गया है। विगत कई माह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब गोशाला में होते हैं तो पुंज उनके पास आ जाता है। मुख्यमंत्री उसे भी खूब स्नेह और भोजन देते हैं। बुधवार को भी उन्होंने पुंज को दुलारा और अपने हाथों से उसे गुड़ खिलाया।

25 से 29 सितंबर तक उत्तर प्रदेश आयोजित करेगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा संस्करण

यूपी के क्राफ्ट, कुजीन, कल्चर का साक्षात्कार कराने आयोजित होने जा रहा है यूपीआईटीएस-2025 25 से 29 सितंबर तक उत्तर प्रदेश आयोजित करेगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा संस्करण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे पांच दिवसीय यूपी आईटीएस का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने की ट्रेड शो आयोजन के तैयारियों की समीक्षा, कहा, प्रदेश की ब्रांडिंग का बेहतरीन अवसर है यूपीआईटीएस पार्टनर कंट्री के रूप में इस बार रूस की हो रही है सहभागिता पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो में भाग लेने आ रहे 500 से अधिक खरीदार, 2500 एक्ज़िबिटर्स भी करा चुके पंजीयन $1ट्रिलियन अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रॉनिक्स, ई-कॉमर्स, ओडीओपी, बीमा, आयुष्मान भारत, ब्लू रिवल्यूशन जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित हों: मुख्यमंत्री बायर-सेलर मीट का खास मौका, सीएम फेलो करेंगे मदद, यूपी के उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच आईटी/आईटीईएस, एमएसएमई, स्टार्ट अप, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन व संस्कृति, ऊर्जा, ओडीओपी जैसे सेक्टरों के उद्यमियों, आंत्रप्रेन्योर, विनिर्माताओं और निर्यातकों के लिए वैश्विक मंच उपलब्ध कराएगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो पद्म पुरस्कार से सम्मानित उत्तर प्रदेश के उद्यमियों और शिल्पकारों की होगी विशेष उपस्थिति मुख्यमंत्री का निर्देश, ट्रेड शो में प्रदेश के सभी प्रमुख विभाग भी अपनी उपलब्धियों का करें प्रदर्शन मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, पीएम स्वनिधि और पीएम इंटर्नशिप कार्यक्रमों पर केंद्रित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी खादी केंद्रित फैशन शो होगा आकर्षण का केंद्र, नॉलेज सेशन में होगा फिक्की, इरडा का विशेष सत्र लखनऊ  उत्तर प्रदेश के 'क्राफ्ट, कुज़ीन और कल्चर' से दुनिया भर के उद्यमियों, विनिर्माताओं और व्यापारियों को परिचित कराने वाले वार्षिक आयोजन 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (यूपीआईटीएस) का तीसरा संस्करण आगामी 25 से 29 सितम्बर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपोज़िशन मार्ट में आयोजित होने जा रहा है। इस भव्य आयोजन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा होगा। तीसरे संस्करण में पार्टनर कंट्री के रूप में रूस की सहभगिता होगी। सोमवार को तैयारियों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब तक यूपीआईटीएस के दो संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित हो चुके हैं। वर्ष 2023 में हुई शुरुआत ने प्रदेश के निर्यात को नई गति और वैश्विक पहचान दी है। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश के 'क्राफ्ट, कुज़ीन और कल्चर' को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का बेहतरीन अवसर बताते हुए कहा कि यह आयोजन आईटी/आईटीईएस, एमएसएमई, स्टार्टअप, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन व संस्कृति, ऊर्जा और ओडीओपी जैसे सेक्टरों के उद्यमियों, आंत्रप्रेन्योर, विनिर्माताओं और निर्यातकों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि इस वर्ष ट्रेड शो में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, पीएम स्वनिधि और पीएम इंटर्नशिप कार्यक्रम पर केंद्रित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाए। साथ ही अन्य सभी प्रमुख विभाग भी अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन करें, ताकि यह आयोजन प्रदेश की ब्रांडिंग का सशक्त माध्यम बन सके। मुख्यमंत्री ने बायर-सेलर मीट की व्यवस्था तथा इसमें सहयोग के लिए सीएम फेलो की तैनाती करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार के।आयोजन में पद्म पुरस्कारों से सम्मानित उत्तर प्रदेश के उद्यमियों/शिल्पकारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाए। अपर मुख्य सचिव, एमएसएमई ने बताया कि इस बार 2500 से अधिक एक्ज़िबिटर्स ने पंजीयन कराया है, जबकि 500 से अधिक विदेशी खरीदार इसमें भाग लेने आ रहे हैं। इस बार रूस पार्टनर कंट्री के रूप में सहयोग कर रहा है और उसका प्रतिनिधिमंडल ट्रेड शो में शामिल होगा। उन्होंने बताया कि ट्रेड शो के आकर्षणों में खादी केंद्रित फैशन शो प्रमुख है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच दिवसीय इस ट्रेड शो के दौरान हर दिन एक विशेष थीम पर नॉलेज सेशन आयोजित किए जाएं। इनमें $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, ई-कॉमर्स, एफपीओ, बीमा, नीली क्रांति (मत्स्य सेक्टर), ओडीओपी और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसे विषयों पर केंद्रित सत्र शामिल हों। इसके लिए एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय, आईआईटी कानपुर और उद्योग जगत की प्रमुख संस्थाओं का सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि केंद्रीय मंत्रियों को भी विशेष सत्रों में आमंत्रित किया जाए। मुख्यमंत्री ने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्रों को आयोजन से जोड़ने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न राज्यों और अनेक देशों से आने वाले प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस आयोजन की महत्ता को और बढ़ा रही है। ऐसे में प्रदेश के सभी विभागों को इसकी सफलता में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने गौतमबुद्ध नगर प्रशासन से कार्यक्रम अवधि में यातायात प्रबंधन, आगंतुकों सुरक्षा, सुविधा और स्वच्छता के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री योगी ने की ‘सेवा पखवाड़ा’ की तैयारियों की समीक्षा

प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस से महात्मा गांधी-शास्त्री जी की जयंती तक मनेगा 'सेवा पखवाड़ा मुख्यमंत्री योगी ने की ‘सेवा पखवाड़ा’ की तैयारियों की समीक्षा सेवा पखवाड़े में चलेगा स्वच्छता, वृक्षारोपण, रक्तदान व स्वास्थ्य शिविर, चित्रकला प्रतियोगिता सहित विविध कार्यक्रम 'अंत्योदय से राष्ट्रोदय' के भाव का साकार स्वरूप होगा 'सेवा पखवाड़ा: मुख्यमंत्री विशिष्ट जनों का होगा सम्मान, दिव्यांगजनों को होगा सहायक उपकरणों का वितरण प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर होगी नमो वन और नमो पार्क की स्थापना  जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश राष्ट्रपिता गांधी जी के स्वदेशी और शास्त्री जी के ‘जय जवान-जय किसान’ के मंत्र को जीवन में उतारें : मुख्यमंत्री योगी प्रधानमंत्री जी जन्मदिन से होगा सेवा पखवाड़े का शुभारंभ, 25 सितम्बर को पंडित दीनदयाल जयंती भी मनाई जाएगी, समापन गांधी व शास्त्री जयंती पर मुख्यमंत्री का निर्देश, सेवा पखवाड़े के सफल आयोजन के लिए सभी सम्बंधित विभाग नोडल अधिकारी तैनात करें सभी कार्यक्रमों की रिपोर्ट नमो ऐप और सरल पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में आगामी 17 सितम्बर से 02 अक्तूबर तक प्रस्तावित 'सेवा पखवाड़ा' की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन से प्रारंभ होने वाला यह सेवा पखवाड़ा केवल कार्यक्रमों का आयोजन नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी, महात्मा गांधी जी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेकर समाज के गरीब, वंचित और शोषित वर्गों की सेवा का सुअवसर है। यह अंत्योदय से राष्ट्रोदय' की भावना का साकार स्वरूप होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा पखवाड़ा का शुभारंभ 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर होगा। 25 सितम्बर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती मनाई जाएगी और इसका समापन 02 अक्तूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि सेवा पखवाड़ा के दौरान स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर, प्रबुद्ध वर्ग संवाद, ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत मेले-प्रदर्शनियाँ, युवाओं के बीच खेलकूद प्रतियोगिताएँ, चित्रकला प्रतियोगिताएँ, मैराथन और प्रधानमंत्री जी के जीवन पर प्रदर्शनी जैसे विविध कार्यक्रम सभी जनपदों में आयोजित किए जाएँ। इन कार्यक्रमों में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित हो और सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि तथा पार्टी पदाधिकारी सेवा भाव से सक्रिय रूप से सम्मिलित हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता अभियान पहले दिन से प्रारम्भ हो, ताकि नवरात्रि से पूर्व प्रदेश में साफ-सफाई और व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। प्रधानमंत्री जी के जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जन्मदिवस सभी देशवासियों के लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर है। उनके नेतृत्व में भारत ने राष्ट्र निर्माण की नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। सेवा, समर्पण और सुशासन की उनकी कार्यशैली ने वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को और सशक्त किया है। सेवा पखवाड़ा के माध्यम से हम सभी ‘सेवा परमो धर्म’ के संदेश को धरातल पर उतारेंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अवसर पर वृहद पौधरोपण करते हुए ‘नमो वन’ और ‘नमो पार्क’ की स्थापना भी की जाए। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल जी, महात्मा गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर संगोष्ठी, पुष्पांजलि, वृक्षारोपण और स्वच्छता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। गांधी जी के स्वदेशी और स्वच्छता के संदेश तथा शास्त्री जी के ‘जय जवान-जय किसान’ के मंत्र को लोगों के जीवन में उतारने का प्रयास होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्यक्रम सुव्यवस्थित, प्रेरक और प्रभावशाली हों। प्रत्येक आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार हो तथा उनकी रिपोर्ट समयबद्ध तरीके से तैयार कर ‘नमो ऐप’ और ‘सरल पोर्टल’ पर अपलोड की जाए।

सीएम योगी ने लोकभवन में किया नियुक्ति पत्र का वितरण

… तो महाभारत के बहुत रिश्ते बाकी का जीवन जेल में बिताने को मजबूर होंगेः मुख्यमंत्री  प्रदेश में नवचयनित 1112 कनिष्ठ सहायक व 22 एक्सरे टेक्नीशियन को वितरित किया गया नियुक्ति पत्र  सीएम योगी ने लोकभवन में किया नियुक्ति पत्र का वितरण एक परिवार के लोग पैसा लेकर भर्ती करते थे और जनता को लूटते थेः सीएम योगी  सीएम का तंजः उनके कारनामे यूपी को विकास की बुलंदियों को छूने के बजाय गर्त की ओर धकेल रहे थे सीएम ने स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियों को भी गिनाया, बोले-जब व्यक्ति ही स्वस्थ नहीं तो व्यवस्था कैसे स्वस्थ होगी नकारात्मकता फैलाने वालों पर बोले सीएम- वे कहीं की फोटो कहीं लगाकर नकारात्मकता फैलाएंगे और शासन, विभाग व आपकी छवि को खराब करेंगे लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2016  समेत पहले की भर्ती प्रक्रियाओं पर निशाना साधा। कहा कि हमें कई भर्तियों को सीबीआई को देना पड़ा था। एक व्यक्ति आठ-आठ जगह नाम लिखाकर पैसा लिए जा रहा था, जब जांच हुई तब पता चला। यह एक परिवार के वही लोग हैं, जो पैसा लेकर भर्ती करते थे और यूपी की जनता को लूटते थे। अभी भी जांच चल रही है। समय पर जांच हो जाएगी तो महाभारत के बहुत रिश्ते बाकी का जीवन जेल में बिताने को मजबूर होंगे। उनके कारनामे यूपी को विकास की बुलंदियों को छूने की बजाय गर्त की ओर धकेल रहे थे। इन लोगों ने यूपी को बीमारू बना दिया। इससे पहचान का संकट हो गया। नौजवान को नौकरी नहीं, बेटी असुरक्षित, व्यापारी असहाय, किसान आत्महत्या को मजबूर होता था। परंपरागत उद्यम बंदी के कगार पर जा रहे थे। अराजकता का वातावरण था। त्योहारों से पहले दंगे शुरू हो जाते थे, लेकिन 8 वर्ष से हर जनपद, समुदाय और व्यक्ति उत्साह व उमंग के साथ त्योहारों में सहभागी बनता है। आज सामाजिक सौहार्द भी है, जो राष्ट्रीय एकता को संबल देता है। लोगों का उत्साह व उमंग यूपी के विकास का जज्बा लेकर आगे बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका का निर्वहन कर रहा है।  सोमवार को प्रदेश में 1112 कनिष्ठ सहायक व 22 एक्सरे टेक्नीशियन को नियुक्ति पत्र वितरित किया गया। मुख्यमंत्री ने लोकभवन स्थित मुख्य कार्यक्रम में नवचयनितों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया।  स्वस्थ व्यक्ति ही सशक्त समाज और समर्थ राष्ट्र के निर्माण में कर सकता भूमिका का निर्वहन सीएम योगी ने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सकता है। स्वस्थ व्यक्ति ही सशक्त समाज और समर्थ राष्ट्र के निर्माण में भूमिका का निर्वहन कर सकता है। जब व्यक्ति ही स्वस्थ नहीं तो व्यवस्था कैसे स्वस्थ होगी। जब व्यवस्था ही अस्वस्थ हो जाएगी तो उसके सारे पिलर ध्वस्त दिखाई देंगे। 2017 के पहले व्यवस्था में यही घुन लग चुका था, जो उसे खोखला किए जा रहा था, लेकिन पीएम मोदी के विजनरी लीडरशिप में यूपी ने समस्या के समाधान के साथ ही सभी मानकों को प्राप्त किया। उसी का परिणाम है कि पिछले 8 वर्ष में साढ़े 8 लाख युवाओं को अनेक सरकारी सेवा में लेने में हम सफल हुए हैं।  अब समय पर शुरू और संपन्न होती है प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पारदर्शी प्रक्रिया समय पर शुरू और संपन्न होती है। 8 वर्ष में 2. 19 लाख पुलिसकार्मिकों की भर्ती हुई है। हाल में ही 60,244  पुलिस कार्मिकों की भी भर्ती भी हुई। पहली बार जब हमारी सरकार ने पुलिस भर्ती प्रारंभ की थी तो ट्रेनिंग की समस्या खड़ी हुई। भर्ती 50 हजार की निकाली, लेकिन हमारे पास ट्रेनिंग सेंटर नहीं थे। जब रिव्यू किया तो पता चला कि केवल तीन हजार कार्मिकों की ही ट्रेनिंग एक साथ हो सकती है। तब मिलिट्री, पैरा मिलिट्री, अन्य राज्यों के ट्रेनिंग सेटर लेकर किसी प्रकार प्रशिक्षण पूरा कर पाए। इस बार 60,244 पुलिस कर्मियों को यूपी के अंदर ही ट्रेनिंग मिल रही है।  निष्पक्ष चयन प्रक्रिया नए यूपी की तस्वीर को करती है प्रस्तुत सीएम ने कहा कि निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से चयन की प्रक्रिया नए यूपी की तस्वीर को प्रस्तुत करती है। पिछले साढ़े 8 वर्ष में चिकित्सा स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग ने लंबी छलांग लगाने में सफलता प्राप्त की है। हर क्षेत्र में कुछ न कुछ नया परिवर्तन करके दिखाया है। यह परिवर्तन पीएम मोदी के विकसित भारत के संकल्पना को आगे बढ़ाने का क्रम है। 70 वर्ष तक हम लोग केवल 13 लाख करोड़ तक पहुंचे थे, लेकिन इस वित्तीय वर्ष के अंत तक यूपी की अर्थव्यवस्था 35 लाख करोड़ की बनने जा रही है। जो कार्य 70 वर्ष में नहीं हो पाया,  उससे भी ढाई गुना वृद्धि और बेहतर गति आठ-साढ़े वर्ष में दी है। यूपी के नौजवानों को प्रदेश में नौकरी की गारंटी मिली।  सीएम ने चिकित्सा शिक्षा व चिकित्सा स्वास्थ्य की नियुक्तियों को गिनाया  सीएम ने चिकित्सा शिक्षा व चिकित्सा स्वास्थ्य की नियुक्तियों का जिक्र करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की 1354 स्टाफ नर्स, 7182 एएनएम, 1102 विशेषज्ञ चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र दिया गया। चिकित्सा शिक्षा विभाग के 278 एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया संपन्न हुई। यूपी के बड़े-बड़े चिकित्सा संस्थान के लिए 2142 स्टाफ नर्स की भर्ती की गई। यह सभी आज यूपी के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। सीएम ने कहा कि पहले यूपी में 17 मेडिकल कॉलेज थे। 40 मेडिकल कॉलेज बनने में 100 वर्ष से अधिक लगे। पिछले साढ़े 8 वर्ष में सरकारी व निजी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की संख्या 80 से ऊपर पहुंचाने में सफल हुए हैं। एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज यूपी की पहचान बन रही है। आज सिर्फ एडमिशन ही नहीं होते, बल्कि उसमें प्रोफेसर,  क्लर्कियल स्टाफ, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, टेक्नीशियन आदि की भी भर्ती होती है। हर मेडिकल कॉलेज में बड़े पैमाने में भर्ती प्रक्रिया बढ़ाने का कार्य किया गया।  पहले डॉक्टर व दवा नहीं मिलती थी, अब सभी सुविधाएं मिल रहीं  सीएम ने कहा कि पहले हॉस्पिटल बंद मिलता था। डॉक्टर होते थे तो दवा नहीं, दवा है तो डॉक्टर नहीं। दवा और डॉक्टर है तो बिजली नहीं है, लेकिन अब जनपद में लोगों को हर सुविधाएं मिल रही हैं। यूपी मेडिकल कॉरपोरेशन के माध्यम से दवाइयां भी उपलब्ध हो रही हैं तो 5.34 करोड़ से अधिक परिवारों को यूपी में आयुष्मान कार्ड से लाभान्वित किया जा रहा … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए राहत सामग्री से भरे ट्रकों को दिखाई हरी झंडी

बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री मानवीय संवेदना की महत्वपूर्ण कड़ी- सीएम योगी – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए राहत सामग्री से भरे ट्रकों को दिखाई हरी झंडी – योगी सरकार ने निभाई मानवीय जिम्मेदारी, उत्तराखंड, हिमाचल और पंजाब को 48 ट्रकों में भेजी राहत सामग्री – सीएम योगी ने हिमाचल और उत्तराखंड राज्य को दी 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि – संकट की घड़ी में उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता तीनों राज्यों के अपने बहन-भाइयों के साथ खड़ी है- सीएम योगी – राहत सामग्री व सहायता राशि लेकर बाढ़ प्रभावित राज्यों में जाएंगे योगी सरकार के मंत्री व विधायक – समय पर किए गए प्रावधानों की वजह से बाढ़ की आपदा से बचा है यूपी- सीएम योगी – बरसात में दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा दे रही सरकार- मुख्यमंत्री  – सीएम योगी ने की जनता से अपील, आपदा के समय सतर्कता और बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है- सीएम योगी सहारनपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सहारनपुर से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बाढ़ प्रभावित नागरिकों के लिए राहत सामग्री से लदे 48 ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सरोवर पोर्टिको, अंबाला रोड पर आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि राहत सामग्री मानवीय संवेदना की महत्वपूर्ण कड़ी है। संकट की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता इन तीनों राज्यों के अपने बहन-भाइयों के साथ खड़ी है। इस दौरान सीएम योगी ने इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को पांच-पांच करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि भी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से राहत सामग्री के रूप में उत्तराखंड, हिमाचल और पंजाब के नागरिकों के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चल रहे 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि विकास के नित नए प्रतिमान स्थापित हो रहे हैं, साथ ही आपदा से निपटने के लिए सरकार के प्रयास अत्यंत प्रभावी साबित हो रहे हैं। एनडीआरएफ, आपदा मित्र और स्थानीय पुलिस जैसी संस्थाएं सक्रिय होकर राहत कार्य में अपनी भूमिका निभाती हैं। सीएम योगी ने कहा कि जब समाज और स्वयंसेवी संगठन पीड़ितों के साथ खड़े हो जाते हैं, तो सरकार के प्रयासों को और मजबूती मिलती है। समय पर किए गए प्रावधानों की वजह से बाढ़ की आपदा से बचा है यूपी- सीएम योगी उत्तर प्रदेश में बाढ़ को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए योगी ने कहा कि इस वर्ष अभी तक राज्य इस आपदा से बचा हुआ है, हालांकि निचले स्तर पर जल-भराव हुआ है। व्यापक पैमाने पर बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए समय पर किए गए प्रावधानों का परिणाम है कि आज हम इस आपदा को नियंत्रण के करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों का जिक्र किया, जहां बाढ़ आई है, जैसे यमुना नदी का क्षेत्र—सहारनपुर, बागपत, गौतम बुद्ध नगर से लेकर प्रयागराज तक, जहां गंगा से मिलती है। साथ ही बिजनौर से बलिया तक गंगा के मुहाने, सरयू, घाघरा, रामगंगा और हिंडन नदी के इलाकों में पुख्ता व्यवस्था की गई है। इन नदियों में अगर जल ओवरफ्लो से जन-धन की हानि हुई, तो सरकार ने तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई है। दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा- मुख्यमंत्री  सीएम योगी ने कहा कि यूपी में बरसात के समय अगर कोई जंगली जानवर, सांप या बिच्छू किसी व्यक्ति को काटता है और दुर्भाग्यपूर्ण मौत होती है, तो पीड़ित परिवार को सरकार चार लाख रुपये का मुआवजा तत्काल उपलब्ध करवाती है। आपदा से अगर किसी गरीब का मकान गिर गया, तो नया आवास बनाने के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है। अगर जमीन और मकान नदी में विलीन हो गया या कटान की चपेट में आ गया, तो परिवार को जमीन का पट्टा और मकान बनाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। जहां गांव जल-प्लावित हुए, वहां सुरक्षित शिविरों में पहुंचाने के साथ ब्रेकफास्ट, दोपहर और शाम का भोजन, बच्चों के लिए दूध और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की गई है। सीएम योगी ने हिमाचल और उत्तराखंड राज्य को दी 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता सीएम योगी ने कहा कि जो सामग्री उत्तर प्रदेश में वितरित की जाती है, उसी को आज इन 48 ट्रकों के माध्यम से उत्तराखंड, हिमाचल और पंजाब के बहनों-भाइयों के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि अगर कहीं आपदा आएगी, उत्तर प्रदेश सहायता के लिए तैयार रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल में बादल फटने और अतिवृष्टि से बड़ी तबाही हुई है, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार और नागरिकों की ओर से पांच करोड़ रुपये की सहायता उत्तराखंड को और पांच करोड़ रुपये हिमाचल सरकार के राहत कोष के लिए उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। योगी सरकार के मंत्री व विधायक लेकर जाएंगे सहायता राशि इस सहायता को पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कुंवर बृजेश सिंह उत्तराखंड जाएंगे, जबकि मंत्री जसवंत सैनी हिमाचल प्रदेश की राहत सामग्री और धनराशि लेकर जाएंगे। पंजाब के लिए सहारनपुर के नगर विधायक राजीव गुम्बर राहत सामग्री लेकर जाएंगे। सीएम ने कहा कि ये प्रतिनिधि वहां जाकर उत्तर प्रदेश वासियों की संवेदना प्रेषित करेंगे और सामग्री सौंपेंगे। जब पूरा देश संकट में एकजुट होता है, तो संकट, संकट नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि  इन सभी के बावजूद, अगर अन्य सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी, तो उत्तर प्रदेश सरकार और 25 करोड़ की जनता हर पीड़ित के साथ खड़ी है और हर प्रकार का सहयोग करने के लिए तत्पर रहेगी। बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है- सीएम योगी सीएम ने जनता से अपील की कि आपदा के समय सतर्कता और सावधानी बरतें। जल ज्यादा आने पर डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए पानी उबालकर पिएं। घर के आसपास पानी एकत्र न होने दें, ताकि डेंगू और मलेरिया के लार्वा न पनपें। साफ-सफाई और छिड़काव का ध्यान रखें। अगर सांप या जहरीला कीड़ा काटे, तो झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर तत्काल डॉक्टर के पास जाएं। … Read more