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मुख्यमंत्री के निर्देश पर चला प्रदेशव्यापी अभियान, एनडीपीएस और बीएनएस के तहत हुई सख्त कानूनी कार्रवाई

सीएम योगी के निर्देश पर एफएसडीए का बड़ा एक्शन, कोडीनयुक्त कफ सिरप की पैरेलल सप्लाई चेन ध्वस्त  – 52 जिलों में सघन जांच, 161 फर्मों पर एफआईआर, 36 जनपदों में अवैध डायवर्जन का हुआ खुलासा – कोडीन कफ सिरप का गैर-चिकित्सीय उपयोग सिद्ध, 700 करोड़ से अधिक की संदिग्ध आपूर्ति जांच के घेरे में – मुख्यमंत्री के निर्देश पर चला प्रदेशव्यापी अभियान, एनडीपीएस और बीएनएस के तहत हुई सख्त कानूनी कार्रवाई लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले पौने नौ वर्षों में अवैध नशे के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की है। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ एक्शन ने अवैध नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) को कोडिनयुक्त कफ सिरप एवं एनडीपीएस श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण तथा अवैध डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिये। इस पर तीन माह पहले अभियान शुरू किया।      कई प्रदेशों में विवेचना की गई और सुपर स्टॉकिस्ट के साथ होलसेलर के कारोबारी रिश्तों के सबूत जुटाए विभाग ने कोडिनयुक्त कफ सिरप के अवैध डायवर्जन को लेकर देश का सबसे बड़ा क्रैक डाउन शुरू करने से पहले अंदरुनी गहन जांच शुरू की। इस दौरान झारखंड, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड जैसे राज्यों में विवेचना की गई और यूपी के सुपर स्टॉकिस्ट और होलसेलर के साथ उनके कारोबारी रिश्तों के सबूत जुटाए। इसके बाद प्रदेश में क्रैक डाउन शुरू हुआ, जिसने सिरप के अवैध डायवर्जन की परतें उधेड़ दीं। एसएसडीए की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और एसटीएफ ने नशे के सौदागरों को दबोचने के लिए एक्शन शुरू किया। सीएम के निर्देश पर सिरप का नशे के रूप में इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ एनडीपीएस और बीएनएस के तहत मुकदमे दर्ज किये गये। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा चलाने को सही ठहराते हुए 22 मामलों में आरोपियों की रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने 22 मामलों में आरोपियों द्वारा अरेस्ट स्टे की रिट याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। 52 जनपदों में 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की गई एफएसडीए ने पिछले तीन माह में कोडिनयुक्त कफ सिरप और एनडीपीएस श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण तथा अवैध डायवर्जन पर कुल 52 जनपदों में 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की। जांच के दौरान प्राप्त अभिलेखीय एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर 36 जनपदों की कुल 161 फर्मों/संचालकों के विरुद्ध बीएनएस तथा एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई। वहीं, जिलाधिकारियों को गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के लिए पत्र लिखा ताकि अवैध नशे के अर्जित संपत्ति को जब्त किया जा सके। सीएम के निर्देश पर एफएसडीए ने कोडिनयुक्त कफ सिरप की नशे के रूप में तस्करी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की, जो पूरे देश में सबसे बड़ा क्रैक डाउन है।  मामले की तह तक पहुंची एफएसडीए और पकड़ में आया पूरा नेक्सेज  एफएसडीए आयुक्त ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए जनपद स्तर पर कई टीमें बनाईं। टीमों की निगरानी के लिए मुख्यालय पर एक टीम बनाई गई। विभिन्न टीमें जांच के लिए विभिन्न प्रदेशों में गई और गोपनीय तरीके से साक्ष्य जुटाए। टीम ने केंद्रीय नॉरकोटिक्स ब्यूरो, ग्वालियर, मध्य प्रदेश से कोडीन फॉस्फेट का कोटा एवं उठान के विवरण को एकत्रित किया। वहीं टीम ने कोडिनयुक्त कफ सिरप निर्माता फर्मों की जांच के लिए हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड गई। यहां से सिरप के निर्माण और वितरण से संबंधित अभिलेख जुटाए। इसके बाद सिरप के क्रय विक्रय अभिलेख के लिए रांची, दिल्ली और लखनऊ का रूख किया। इस दौरान पाया गया कि अधिकांश होलसेल के पास स्टॉक पहुंचने का सत्यापन नहीं है और रिटेल मेडिकल स्टोर के नाम पर कोई भी विक्रय बिल नहीं मिला जबकि दिल्ली, रांची के सुपर स्टॉकिस्ट और इनसे जुड़े कुछ चिन्हित होल सेलर के नाम पर बिलिंग करके सिरप के साथ एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं की एक सामानान्तर वितरण श्रृखंला बनायी गयी। इसका खुलासा करने के लिए विभाग द्वारा कड़ी मेहनत की गयी। इसके बाद पूरी चेन को कनेक्ट किया, जिसके बाद सिरप के अवैध डायवर्जन का मामला सामने आया। वर्ष 2024-25 में कफ सिरप की आपूर्ति चिकित्साीय आवश्यकता से कई गुना अधिक मिली कई मामलों में फर्में विक्रय बिल प्रस्तुत करने में असफल रहीं, जबकि कुछ फर्मों द्वारा केवल कागजी अभिलेखों में सिरप का क्रय-विक्रय दर्शाया गया। प्रस्तुत विक्रय विवरणों में भी किसी भी फुटकर औषधि प्रतिष्ठान को कोडीनयुक्त कफ सिरप की वास्तविक आपूर्ति का सत्यापन नहीं हो सका, जिससे कथित आपूर्ति को अप्रमाणित पाया गया। वर्ष 2024-25 प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की आपूर्ति वास्तविक चिकित्सीय आवश्यकता से कई गुना अधिक पाई गई। जांच में ऐबोट हेल्थ केयर द्वारा निर्मित फेन्सिडिल की 2.23 करोड़ से अधिक बोतलें, लैबोरेट फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित एस्कॉफ की 73 लाख से अधिक बोतलें तथा अन्य कंपनियों द्वारा निर्मित लगभग 25 लाख बोतलों की आपूर्ति दर्ज मिली, जिनका चिकित्सीय उपयोग प्रमाणित नहीं हो सका। पुलिस और एसटीएफ ने कुल 85 अभियुक्तों को किया अरेस्ट एफएसडीए ने रिपोर्ट सीएम और पुलिस को सौंपी। इसके आधार पर पुलिस और एसटीएफ ने 79 अभियोग दर्ज किये। इसमें अब तक 85 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। वर्तमान में एक्शन चल रहा है। वहीं मामले में गठित एसआईटी भी जांच कर रही है। जानकारों की मानें तो अगले माह एसआईटी जांच रिपोर्ट सीएम को सौंप सकती है। लाइसेंसिंग प्रणाली सख्त करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के निर्देश पर एफएसडीए मुख्यालय द्वारा थोक औषधि विक्रय लाइसेंसिंग प्रणाली को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें थोक प्रतिष्ठान की जीओ टैगिंग, भंडारण क्षमता की पुष्टि और इनकी फोटोग्राफ कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं प्रतिष्ठान के टेक्निकल पर्सन का अनुभव प्रमाण पत्र को ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सत्यापन करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है। कोडीनयुक्त कफ सिरप के निर्माण, बल्क सप्लाई, वितरण एवं निगरानी के लिए भारत सरकार से आवश्यक अधिसूचना एवं दिशा-निर्देश जारी करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिक्षा को मिला व्यापक सहारा

ईयर एंडर 2025  सीएम योगी के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग कल्याण की योजनाओं ने रची नए विकास की कहानी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिक्षा को मिला व्यापक सहारा शादी अनुदान योजना ने वंचित समाज की बेटियों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान को किया गया मजबूत कंप्यूटर प्रशिक्षण से युवाओं को मिला कौशल और रोजगार का मार्ग डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से बढ़ी पारदर्शिता, घटा भ्रष्टाचार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में पिछड़ा वर्ग कल्याण को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण—तीनों क्षेत्रों में सरकार की योजनाएं न केवल निरंतर चलीं, बल्कि लाभार्थियों की संख्या और बजट के लिहाज से पहले से अधिक प्रभावी साबित हुईं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के आधिकारिक आंकड़े यह प्रमाणित करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियां सीधे तौर पर समाज के अंतिम पायदान तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग कल्याण महज योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, सम्मान और कौशल के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने का मजबूत माध्यम बना है। योगी सरकार की यह नीति-आधारित और परिणाम-केंद्रित कार्यशैली ही उत्तर प्रदेश को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में आगे ले जा रही है। शिक्षा को प्राथमिकता, रिकॉर्ड छात्रवृत्ति वितरण वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पिछड़ा वर्ग के छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्रदान की। इस अवधि में पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 6 लाख 90 हजार 349 छात्रों को 147.75 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वहीं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से 5 लाख 85 हजार 954 छात्रों को 175.54 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। इस तरह केवल वर्ष 2025 में ही कुल 12 लाख 76 हजार 303 विद्यार्थियों को 323.29 करोड़ रुपये की सीधी मदद मिली। कुल मिलाकर योगी सरकार ने नौ वर्षों में कुल 2 करोड़ 20 लाख 29 हजार 760 छात्रों को 13,858.62 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की।  बेटियों के सम्मान में सरकार की संवेदनशीलता  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सामाजिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण शादी अनुदान योजना है। वर्ष 2025-26 (23 दिसंबर 2025 तक) में पिछड़ा वर्ग की 72 हजार 296 बेटियों को इस योजना के तहत 144.59 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। पूर्व वर्षों में भी यह योजना लगातार मजबूत होती रही। 2019-20 और 2024-25 में एक-एक लाख बेटियों को 200-200 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। कुल मिलाकर नौ वर्षों में योगी सरकार ने शादी अनुदान योजना के तहत कुल 6 लाख 47 हजार 863 लाभार्थियों को 1,295.72 करोड़ रुपये की मदद पहुंचाई। इस योजना के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम आय सीमा एक लाख वाले अन्य पिछड़े वर्ग के परिवारों की बेटियों की शादी हेतु अनुदान दिये जाने का प्राविधान है। शादी योजना में लड़की की उम्र 18 वर्ष एवं लड़के की उम्र 21 वर्ष होना आवश्यक है।  डिजिटल भविष्य की तैयारी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी बनाने की रही है। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 (23 दिसंबर 2025 तक) में कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना के तहत 18,159 बालकों और 4,233 बालिकाओं, कुल 22,392 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिस पर 19.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बीते वर्षों में यह योजना लगातार विस्तार पाती रही। 2017-18 में जहां 9,431 युवाओं को प्रशिक्षण मिला था, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 29,769 युवाओं तक पहुंच गई। नौ वर्षों में कुल 1 लाख 62 हजार 046 युवाओं को 154.56 करोड़ रुपये की लागत से डिजिटल रूप से प्रशिक्षित किया गया। इनमें ओ लेवल सर्टिफिकेट के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों की संख्या एक लाख, 1139 रही, जबकि सीसीसी सर्टिफिकेट के प्रशिक्षणार्थियों की संख्या 60,907 रही। इस योजना के अंतर्गत अन्य पिछड़े वर्ग के इंटरमीडिएट पास बेरोजगार युवक और युवतियों को जिनके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय एक लाख तक या उससे कम है को भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान करना है। इन सभी योजनाओं में लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से लाभ प्रदान किया गया, जिससे पारदर्शिता में वृद्धि हुई और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई।

गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने किया जनता दर्शन का आयोजन, करीब 150 लोगों से मुलाकात कर सुनीं समस्याएं

प्रचंड ठंड में भी जारी रहा सीएम योगी का जनसेवा अनुष्ठान गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने किया जनता दर्शन का आयोजन, करीब 150 लोगों से मुलाकात कर सुनीं समस्याएं जनता से बोले सीएम – घबराइए मत, हर समस्या का कराएंगे समाधान, सबकी होगी भरपूर मदद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश, संवेदनशीलता और तत्परता से करें जन समस्याओं का निराकरण गोरखपुर जनता के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रचंड ठंड में भी सोमवार को जनसेवा का अनुष्ठान जारी रखा। प्रतिकूल मौसम के बावजूद उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन कर लोगों से मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं। समस्या लेकर आए लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘घबराइए मत, हर समस्या का समाधान कराएंगे, सरकार सबकी भरपूर मदद करेगी।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं। सोमवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। उन्हें आश्वस्त किया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए।  कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा यदि कोई दबंग, माफिया किसी की जमीन जबरन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। गरीबों को उजाड़ने वाले कतई न बख्शे जाएं। जहां पैमाइश की जरूरत हो, वहां पैमाइश कराकर विवाद का निस्तारण कराया जाए। पारिवारिक विवाद के मामलों में उन्होंने उभयपक्षों के साथ संवाद कर समाधान की राह निकालने के लिए निर्देशित किया।  जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी।

भीषण शीतलहर के चलते यूपी में 12वीं तक के स्कूल 1 जनवरी तक बंद, सीएम योगी ने दिए सख्त निर्देश

भीषण शीतलहर का कहर: यूपी में 12वीं तक के सभी स्कूल 1 जनवरी तक बंद, सीएम योगी के सख्त निर्देश गोरखपुर उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड और भीषण शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़े कदम उठाए हैं। सीएम ने प्रदेश के सभी बोर्डों (ICSE, CBSE और यूपी बोर्ड) के कक्षा 12वीं तक के स्कूलों को 1 जनवरी तक बंद करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि शीतलहर के दौरान बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैदान में उतरें अफसर, सुनिश्चित करें व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री ने शासन और प्रशासन के आला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं क्षेत्रों में भ्रमणशील रहकर जमीनी हकीकत का जायजा लें। सीएम ने कहा कि भीषण ठंड को देखते हुए हर जिले के सार्वजनिक स्थलों पर अलाव और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 'कोई भी खुले में न सोए' मुख्यमंत्री ने रैन बसेरों के संचालन को लेकर अधिकारियों को विशेष हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि:  * प्रदेश में कोई भी व्यक्ति कड़ाके की ठंड में खुले में सोने को मजबूर न हो।  * सभी रैन बसेरों में बिछौने, कंबल और साफ-सफाई समेत सभी आवश्यक सुविधाएं पुख्ता की जाएं।  * अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जरूरतमंदों को समय पर राहत सामग्री और आश्रय प्राप्त हो।

उत्तर प्रदेश पुलिस का #यूपी_पुलिस_मंथन हैशटैग विश्व के टॉप ट्रेंड में शामिल

विश्व के टॉप ट्रेंड में रहा उत्तर प्रदेश पुलिस का हैशटैग #यूपी_पुलिस_मंथन लखनऊ  माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, श्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में दिनांक 27 एवं 28 दिसंबर 2025 को लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का सम्मेलन "पुलिस मंथन" से सम्बन्धित विभिन्न गतिविधियों की फोटो एवं वीडियो को उत्तर प्रदेश पुलिस के समस्त जनपदों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर साझा करके पोस्ट किया गया।      पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, श्री राजीव कृष्ण के निर्देशन में उक्त सम्मेलन से सम्बन्धित हैशटैग #यूपी_पुलिस_मंथन को उत्तर प्रदेश पुलिस @UPPolice ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया । यह हैशटैग दिनांक 28-12-2025 को शाम 05:30 बजे सूचीबद्ध हुआ और कुछ ही समय में विश्व के टॉप ट्रेंडिंग लिस्ट में नंबर-01 पर पहुँच गया । शाम 05:45 बजे से 08:45 बजे तक हैशटैग #यूपी_पुलिस_मंथन लगातार विश्व के ट्रेंडिंग लिस्ट में टॉप 5 में शामिल रहा । इस दौरान इस पर 47 हज़ार से अधिक ट्वीट्स किए गए, जिसे लगभग 38.6 मिलियन की रीच, 02 लाख 46 हजार Views और 1.78 बिलियन इंप्रेशन प्राप्त हुए हैं । उल्लेखनीय है कि पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 के निर्देशन में दिनांक 27 दिसंबर को हैशटैग #पुलिस_मंथन और 28 दिसम्बर को हैशटैग #यूपी_पुलिस_मंथन विश्व के टॉप ट्रेंड में लगातार 02 घण्टे से अधिक समयावधि के लिए नंबर 01 पर रहे हैं ।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय पुलिस मंथन सम्मेलन का सफल समापन

"पुलिस मंथन" वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन-2025 का समापन          पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन, ‘पुलिस मंथन’ के अन्तिम दिन दिनांक 28-12-2025 को 04 अलग-अलग विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया ।  अयोध्या     सत्र- 08 में Disaster Management, Civil Defence and Home Guards विषय पर नोडल अधिकारी डी.के. ठाकुर (DG नागरिक सुरक्षा/UPSSF) के पैनल द्वारा जलवायु परिवर्तन, बढ़ते शहरीकरण, ज्यादा आबादी घनत्व एवं लगातार आने वाली आपदाओं से बने जोखिम भरे माहौल में, उत्तर प्रदेश में प्रभावी आपदा प्रबंधन ‘इंसिडेंट कमांड सिस्टम’ (ICS) को लागू करने एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ और ट्रैफिक मैनेजमेंट, संकट के समय लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाने में सिविल डिफेंस एवं होमगार्ड ऑपरेशनल फोर्स की उपयोगिता एवं महत्व पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया ।     सत्र- 09 में Large Crowd Management विषय पर नोडल अधिकारी प्रवीण कुमार, आईजी रेंज अयोध्या के पैनल द्वारा बड़े धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक आयोजन में भीड़ प्रबंधन में आने वाली विभिन्न चुनौतियों तथा उनके उपाय के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया गया । प्रस्तुतीकरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों—जैसे भीड़ की घनता का विश्लेषण, भू-चिन्हित क्रमिक (Geo-Tagged Sequencial) पार्किंग, पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण (Predictive Analysis), डिजिटल डैशबोर्ड, ड्रोन की सहायता तथा भौतिकी पर आधारित सिमुलेशन—के माध्यम से भीड़ की स्थिति को पहले से समझने, समय रहते बेहतर योजना बनाने, आवश्यकता पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने तथा किसी भी आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षित और सुव्यवस्थित निकासी सुनिश्चित करने के बारे में जानकारी दी गई ।      सत्र- 10 में Intelligence and Emerging Challenges विषय पर नोडल अधिकारी भगवान स्वरूप, अपर पुलिस महानिदेशक अभिसूचना के पैनल द्वारा सोशल मीडिया के विभिन्न दुरुपयोग से आने वाली चुनौतियों, सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार, डीपफेक, डार्कवेब, आतंकी नेटवर्क की मौजूदगी आदि चुनौतियों एवं “रिलीजियस कन्वर्जन” पर विस्तृत चर्चा की गयी । साथ ही सोशल मीडिया से सम्बन्धित खतरों को कम करने के लिए उठाए जाने वाले सार्थक कदमों व भविष्य की कार्य-योजना पर प्रस्तुतीकरण दिया गया  ।     सत्र- 11 में Anti-Terror, Narcotics, Cattle-Theft and Other organized Crimes विषय पर नोडल अधिकारी अमिताभ यश, अपर पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था के पैनल द्वारा उ0प्र0 में पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा नेपाल से जुड़ी सीमाओं पर बढ़ते आंतकवाद के नए आयामों के विश्लेषण एवं अंतर्राष्ट्रीय सीमा निगरानी (सर्विलांस) का सुदृढ़ीकरण किये जाने के साथ-साथ उ0प्र0 में ‘अंतर्राष्ट्रीय अनुदानित धर्मान्तरण रैकेट’ के रोकथाम हेतु नयी तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस, वित्तीय ट्रेल आदि के उपयोग तथा मादक पदार्थों की तस्करी एवं नशीले पदार्थों का सेवन की जटिल और संगठित समस्या से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयास तथा भविष्य की योजनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया गया ।     उत्तम प्रथाओं (Best Practices) एवं नवाचारों पर अनुपूरक सत्र में प्रकाश डी. अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे द्वारा राजकीय रेलवे पुलिस द्वारा किए गए नवाचारों, सोनम कुमार, DCP ट्रैफिक आगरा द्वारा इनवेंटरी मैनेजमेन्ट सिस्टम (Police Inventory Portal), अभिमन्यु मांगलिक, पुलिस अधीक्षक भदोही द्वारा जमानतदार सत्यापन, सुअंकित शर्मा,पुलिस अधीक्षक कासगंज द्वारा ऑपरेशन जागृति, सागर जैन, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सहारनपुर द्वारा राजपत्रित अधिकारियों के कार्यों की डाटाबेस आधारित रैंकिंग एवं अमृत जैन पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अलीगढ़ द्वारा धारा 107 BNS के प्रयोग से सम्बन्धी नवाचारों के सम्बन्ध में प्रस्तुतीकरण दिया गया ।     सभी सत्र के प्रस्तुतीकरण के उपरान्त माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा पदक अलंकरण समारोह में निम्नलिखित पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया गया ।  मुख्यमंत्री उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक से सम्मानित वर्ष 2022 1.    प्रभाकर चौधरी – डीआईजी- अलीगढ़ परिक्षेत्र  2.    विनय चंद्रा- अपर पुलिस अधीक्षक- अभिसूचना मुख्यालय उत्तर प्रदेश  3.    रविंद्र प्रताप सिंह- निरीक्षक- मुरादाबाद  4.    दिनेश कुमार डांडियाल- निरीक्षक- अधिसूचना विभाग 5.    मनु चौधरी-निरीक्षक यूपीपीसीएल गाजियाबाद वर्ष 2023 6.    शैलेश कुमार पांडेय-डीआईजी- आगरा परिक्षेत्र  7.    विशाल विक्रम सिंह- अपर पुलिस अधीक्षक- एसटीएफ 8.    विशाल संगारी- निरीक्षक- सीतापुर 9.    मनोज चिकारा- मुख्य आरक्षी- गौतमबुद्धनगर  10.    सुशैलेष कुंतल- महिला आरक्षी वर्ष 2024 11.    अनुराग आर्य-एसएसपी- बरेली 12.    विमल कुमार सिंह- पुलिस उपाधीक्षक- एसटीएफ 13.    अरुण कुमार- मुख्य आरक्षी- एसटीएफ वर्ष 2025  14.    कृष्ण कुमार-पुलिस अधीक्षक संभल  15.    प्रेम शुक्ला-पुलिस उपाधीक्षक एसटीएफ 16.    प्रियांशी प्रजापति- महिला आरक्षी कमिश्नरेट आगरा     माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा कार्यक्रम के समापन के अवसर पर अपने सम्बोधन में इस दो दिवसीय आयोजन को अत्यंत महत्वपूर्ण, दूरदर्शी एवं परिणामोन्मुख बताया गया। उन्होंने पुलिस मंथन के सफल आयोजन हेतु पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश एवं उनकी पूरी टीम को बधाई दी तथा कहा कि यह सम्मेलन आदरणीय प्रधानमंत्री जी के स्मार्ट पुलिसिंग एवं विकसित भारत–2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में एक सशक्त रोडमैप प्रदान करता है।     मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सम्मेलन के दौरान आयोजित 11 सत्रों में बीट पुलिसिंग, मानव संसाधन विकास, पुलिस कल्याण, प्रशिक्षण, पुलिस व्यवहार, थाना प्रबंधन, महिला एवं बाल सुरक्षा, साइबर अपराध, अभियोजन, कारागार, फॉरेंसिक, आपदा प्रबंधन, इंटेलिजेंस, संगठित अपराध एवं क्राउड मैनेजमेंट जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ, जो उत्तर प्रदेश पुलिस की भावी रणनीति का आधार बनेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान समयबद्ध एवं विषय-केंद्रित प्रस्तुतीकरण की विशेष सराहना की ।     अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून के राज, सुरक्षा की भावना और पारदर्शी शासन व्यवस्था से आज प्रदेश में निवेश, आधारभूत ढांचे और रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। एक्सप्रेसवे, एयर कनेक्टिविटी, रेल नेटवर्क, मेट्रो, रैपिड रेल एवं वॉटर-वे जैसी उपलब्धियों की नींव मजबूत कानून-व्यवस्था पर टिकी है, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस की अहम भूमिका है।     उन्होंने पुलिस के व्यवहार, संवेदनशीलता, संवाद और ह्यूमन इंटेलिजेंस को प्रभावी पुलिसिंग का आधार बताते हुए जनप्रतिनिधियों, समाज के विभिन्न वर्गों, धर्माचार्यों, व्यापारियों एवं नागरिकों से सतत संवाद पर बल दिया। साथ ही थाना, सर्किल और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय को सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।     मुख्यमंत्री जी ने तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक जन-जागरूकता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने पुलिस अवसंरचना, बैरकों, पुलिस लाइनों, पीएसी पुनर्गठन, महिला वाहिनियों एवं महिला कार्मिकों की बढ़ती भागीदारी को उत्तर प्रदेश पुलिस की सशक्तिकरण यात्रा का महत्वपूर्ण चरण बताया। … Read more

यूपी पुलिस आज अपराधियों के लिए भय और नागरिकों के लिए विश्वास का बनी है प्रतीक: योगी आदित्यनाथ

"पुलिस मंथन" वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन-2025   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित सम्मेलन में साझा किया 'स्मार्ट पुलिसिंग का विजन मुख्यमंत्री योगी बोलेः साढ़े आठ वर्षों में यूपी पुलिस की छवि, संरचना और कार्यप्रणाली में ऐतिहासिक परिवर्तन सम्मेलन में बीट पुलिसिंग से साइबर सुरक्षा तक तकनीक आधारित पुलिसिंग पर व्यापक मंथन डेटा आधारित, वैज्ञानिक और नागरिक केंद्रित पुलिसिंग पर मुख्यमंत्री योगी का रहा फोकस लखनऊ पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन- 2025 ‘पुलिस मंथन’ का शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुआ। मुख्यमंत्री योगी द्वारा अपने सम्बोधन में यूपी पुलिस के अब तक के कार्य, सुधार और उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले साढ़े आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपने परसेप्शन और कानून-व्यवस्था की छवि में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को आज देश-दुनिया में एक रोल मॉडल की तरह देखा जा रहा है और परिवर्तन की यह पहचान जनता के अनुभवों से सिद्ध होती है, न कि आत्मप्रशंसा से। इस दौरान उन्होंने स्मार्ट पुलिसिंग का विजन साझा करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक पुलिसिंग के हर स्तर पर व्यापक बदलाव हुए, भर्ती, प्रशिक्षण, अवसंरचना, तकनीक, साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक क्षमता, पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था, UP-112, सेफ सिटी मॉडल, महिला पुलिस भर्ती, और प्रीडिक्टिव पुलिसिंग की दिशा में निर्णायक प्रगति की गई है। पहले जहां प्रशिक्षण क्षमता सीमित थी, वहीं आज बड़े पैमाने पर 60,000 से अधिक आरक्षियों का प्रशिक्षण प्रदेश के अन्दर ही कराया जा रहा है। 75 जनपदों में साइबर थाने, 12 एफएसएल लैब और फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी जैसे संस्थागत बदलाव प्रदेश की नई सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि आज यूपी पुलिस अपराधियों के लिए भय और आम नागरिकों के लिए विश्वास व सम्मान का भाव स्थापित कर रही है। पुलिस की भूमिका अब केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव और प्रीडिक्टिव पुलिसिंग की ओर बढ़ चुकी है। उनके द्वारा बेस्ट प्रैक्टिसेस साझा करने, नवाचार अपनाने और समयबद्ध व बिंदुवार कार्य प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। अंत में मुख्यमंत्री योगी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह दो दिवसीय पुलिस मंथन कार्यक्रम नीति, रणनीति और बेहतर क्रियान्वयन के जरिए समग्र पुलिसिंग को नई दिशा देगा और यूपी पुलिस अपने कार्यों को उसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाती रहेगी। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सम्मेलन में दो दिन उपस्थित रहकर मार्गदर्शन देने हेतु हृदय से आभार व्यक्त किया । उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के गरिमामयी इतिहास में यह एक विशिष्ट क्षण है, जब माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर इस मंथन में सहभागिता की है। उनकी उपस्थिति यह भरोसा देती है कि राज्य नेतृत्व पुलिसिंग की चुनौतियों को समझता है, सुधार की प्रक्रिया में मार्गदर्शक है और परिणामों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।      पुलिस महानिदेशक ने विभिन्न सत्रों की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए, 2017 के बाद  मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की परिवर्तनकारी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने भर्ती, प्रशिक्षण, आधारभूत संरचना, तकनीक-आधारित नागरिक सेवाओं, फॉरेंसिक सुदृढ़ीकरण, cyber policing, मिशन शक्ति केन्द्र, विशेष इकाइयों के गठन तथा अपराध के प्रति zero tolerance नीति के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि सम्मेलन का लक्ष्य प्रत्येक सत्र से स्पष्ट उत्तरदायित्व, निर्णयों की स्पष्ट timeline और ठोस परिणाम सुनिश्चित करना है, ताकि यह मंथन कक्षों से निकलकर फील्ड में दिखाई दे और नागरिकों तक बेहतर, responsive एवं citizen-first police service पहुँचे। सम्मेलन के प्रथम दिवस कुल 07 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रत्येक सत्र के  07 नोडल वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं उनकी टीम द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया ।   शनिवार को आयोजित सत्रों का सार * सत्र- 01 में Beat Policing विषय के नोडल अधिकारी एस०के० भगत, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा बीट पुलिसिंग से सम्बन्धित समस्या तथा उसके समाधान एवं Best practices के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया गया । तत्पश्चात माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा यक्ष ऐप का लोकार्पण किया गया । ‘यक्ष ऐप’- AI और Big Data Analysis की सहायता से तैयार किये गये बीट बुक का डिजिटल स्वरूप है। इसके माध्यम से बीट पर अपराध, अपराधियों तथा संवेदनशील क्षेत्रों का समग्र डाटा उपलब्ध होगा, जिससे पुलिस कार्यवाही अधिक तथ्यात्मक, विश्लेषणात्मक एवं लक्षित रूप में की जा सकेगी। यह ऐप बीट कर्मियों के रोज़मर्रा के कार्यों को आसान, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में भी मददगार होगा । •सत्र- 02 में Crime Against Women, Children and Human Trafficking विषय की नोडल अधिकारी पद्मजा चौहान, अपर पुलिस महानिदेशक, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा प्रदेश में महिलाओं एवं बच्चों से सम्बन्धित प्रमुख कार्य, उपलब्धियां, चुनौतियां एवं भावी कार्ययोजना जिसमें नवस्थापित मिशन शक्ति केन्द्र, समुदाय स्तर पर किये जा रहे जागरूकता कार्यक्रम एवं पारिवारिक विघटन के साथ लैंगिक अपराधों से पीड़ित बालिकाओं की देखभाल एवं संरक्षण, मिशन-शक्ति के द्वारा महिलाओं एवं बाल-सुरक्षा, मिशन-शक्ति केन्द्र के द्वारा सकारात्मक बदलाव, Family Dispute Resolution Clinic (FDRC), एवं बलात्कार के प्रकरणों में कानून प्रवर्तन पर प्रस्तुतीकरण दिया गया ।  

शीतलहर के बीच योगी सरकार का राहत अभियान जारी, प्रदेश में अब तक 1247 रैन बसेरे स्थापित

प्रदेश में शीतलहर को लेकर योगी सरकार अलर्ट, गरीबों और निराश्रितों के लिए की संवेदनशील पहल शीतलहर के बीच योगी सरकार का राहत अभियान जारी, प्रदेश में अब तक 1247 रैन बसेरे स्थापित सभी जनपदों में सार्वजनिक स्थल पर अलाव के लिए 1.75 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित समस्त जनपदों को कम्बल खरीद के आदेश जारी, 75 जनपदों ने 1.40 लाख से ज्यादा कम्बल किए वितरित लखनऊ उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण शीतलहर और घने कोहरे को देखते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने आमजन को राहत पहुंचाने के लिए व्यापक और सुनियोजित व्यवस्थाएं की हैं। प्रदेश के सभी जनपदों में रैन बसेरा, अलाव और कंबल वितरण की व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है, ताकि ठंड से किसी भी नागरिक को असुविधा न हो। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शीतलहर के दौरान कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति ठंड से पीड़ित न रहे। जिला प्रशासन, नगर निकाय और संबंधित विभागों को पूरी संवेदनशीलता के साथ राहत कार्यों को संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। रैन बसेरों की व्यवस्था प्रदेशभर में अब तक 1247 रैन बसेरे स्थापित किए जा चुके हैं। इन रैन बसेरों में 9949 जरूरतमंद लोग अब तक आश्रय ले चुके हैं। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि रैन बसेरों में साफ-सफाई, गर्म पानी, प्रकाश और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कंबल वितरण को प्राथमिकता प्रदेश सरकार द्वारा शीतलहर से बचाव के लिए कंबल वितरण को प्राथमिकता दी गई है। पिछले 03 वर्षों में औसतन 10,65,889 कंबलों की खरीद की गई है। इस पर लगभग 44.38 करोड़ रुपये की औसत धनराशि व्यय हुई है। चालू व्यवस्था के अंतर्गत सभी जनपदों को 17.55 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। 75 जनपदों द्वारा कंबल खरीद के लिए क्रयादेश जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 75 जनपदों में 3,78,884 कंबलों की आपूर्ति पूर्ण हो चुकी है। अब तक सभी जनपदों द्वारा 1,40,364 कंबलों का वितरण जरूरतमंदों को किया जा चुका है। शेष कंबलों को वितरण किया जा रहा है।  सभी जनपदों में अलाव की समुचित व्यवस्था ठंड से बचाव के लिए सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। सभी जनपदों को अलाव जलाने के लिए 1.75 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। जनपदों में प्रतिदिन जलाए जा रहे अलावों की स्थिति की नियमित फीडिंग राहत पोर्टल पर की जा रही है, जिससे शासन स्तर पर सतत निगरानी बनी रहे। कोहरे को लेकर अलर्ट कोहरे के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सरकार द्वारा तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा सचेत ऐप एवं वेब पोर्टल के माध्यम से अब तक 33.27 करोड़ अलर्ट एसएमएस जारी किए जा चुके हैं। ये संदेश प्रभावित जनपदों के अधिकारियों के साथ-साथ आमजनमानस को भी भेजे गए हैं। इसके अतिरिक्त संबंधित विभागों जैसे यूपीडा, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी द्वारा जिलाधिकारियों एवं जिला पुलिस को ई-मेल के माध्यम से कोहरे से संबंधित अलर्ट लगातार जारी किए जा रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण में यूपी मॉडल देश में नंबर 1, सुरक्षा से स्वावलंबन के क्षेत्र में प्रदेश का लहराया परचम

योगी आदित्यनाथ सरकार में बदला उत्तर प्रदेश का सामाजिक चेहरा, महिलाओं के जीवन में ऐतिहासिक परिवर्तन महिला सशक्तिकरण में यूपी मॉडल देश में नंबर 1, सुरक्षा से स्वावलंबन के क्षेत्र में प्रदेश का लहराया परचम  योगी सरकार में महिलाओं के सपनों को उड़ान, कल्याणकारी योजनाओं से क्रांतिकारी बदलाव  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा महिलाओं के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं ने देश में सफलता का दमदार यूपी मॉडल प्रस्तुत किया है। महिलाओं की सुरक्षा और विकास अब केवल योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि एक ठोस सामाजिक परिवर्तन का दस्तावेज बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले एक साल में प्रदेश में महिलाओं, किशोरियों और बालिकाओं के जीवन में जो बदलाव आए हैं, वे आंकड़ों में भी दिखते हैं और जमीन पर भी। यह बदलाव सिर्फ सहायता का नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्वावलंबन, सम्मान और अवसर का है।  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का क्रांतिकारी प्रभाव इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष कुल 13612 गतिविधियों के माध्यम से 25.5 लाख महिलाओं तथा बालिकाओं को जागरूक किया गया है। इसका उद्देश्य बालिकाओं के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना, लिंग-चयन की प्रक्रिया को समाप्त कर बालिकाओं को सुरक्षित करना और बाल लिंग अनुपात में सुधार लाना है। इस योजना ने शिक्षा के माध्यम से बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बालिकाओं से जुड़े विषयों यथा सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य आदि के संबंध में जागरूकता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।  मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से प्रभावी बदलाव कन्या सुमंगला योजना योगी सरकार की सबसे प्रभावशाली सामाजिक योजनाओं में शामिल हो चुकी है। इस वर्ष योजना के अंतर्गत 130.03 करोड़ रुपये की धनराशि से 3.28 लाख कन्याओं को लाभान्वित किया गया। जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक छह चरणों में मिलने वाली सहायता ने बेटियों के प्रति सामाजिक सोच को बदला और बालिका शिक्षा को नई मजबूती दी।  निराश्रित महिलाओं के लिए आर्थिक संबल निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत 38.58 लाख महिलाओं को नियमित मासिक सहायता दी जा रही है। इस वर्ष योजना पर लगभग 1200 करोड़ रुपये रुपये खर्च हुए हैं। अभी हाल ही में पेश हुए अनुपूरक बजट में भी इस योजना के लिए लगभग 535 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार की इस योजना से विधवा, परित्यक्ता और असहाय महिलाओं को सम्मानजनक जीवन का आधार मिला। पारदर्शी चयन प्रक्रिया और डीबीटी व्यवस्था ने यह सुनिश्चित किया कि लाभ सीधे वास्तविक पात्रों तक पहुंचे। रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष के अंतर्गत इस साल 3519 पीड़िताओं को लगभग 116.36 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति धनराशि प्रदान की गई।  मिशन शक्ति से महिलाओं को मिला सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा, सशक्तिकरण और सम्मान के उद्देश्य से चलाई जा रही मिशन शक्ति अपने पांचवे चरण में है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मिशनशक्ति अभियान के अंतर्गत लगभग 9 करोड लोगों तक पहुंचकर उन्हें प्रदेश में महिलाओं तथा बच्चों हेतु संचालित कल्याणकारी योजनाओं, सुविधाओं तथा कानूनों के बारे में संवेदनशील करने का प्रयास किया गया है। मिशन शक्ति के अंतर्गत प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग, गृहविभाग सहित 28 विभागों, समाज सेवी संस्थाओं तथा शैक्षणिक सस्थानों द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन तथा जनसामान्य के मध्य दूरी को कम करने तथा महिलाओं को खुलकर अपनी समस्यायें व सुझाव रखने हेतु “हक की बात जिलाधिकारी के साथ’’ और "स्वावलंबन कैम्प’’ का आयोजन सफलतापूर्वक हो रहा है।  महिलाओं को मिल रहा है त्वरित न्याय हिंसा पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सा, कानूनी परामर्श और पुलिस सहायता प्रदान करने के लिए प्रदेश में 75 से अधिक वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। इस साल 24671 महिलाएं इन केंद्रों से सहायता प्राप्त कर चुकी हैं। यह व्यवस्था महिला सुरक्षा के मामले में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सफलतम उदाहरण है। 181 महिला हेल्पलाइन अब प्रदेश की महिलाओं के लिए भरोसेमंद सुरक्षा कवच बन चुकी है। 24 घंटे संचालित इस सेवा के माध्यम से आपात स्थिति में त्वरित सहायता दी जा रही है। घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और आपात सहायता से जुड़े मामलों में इस साल 56507 महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वुमेन के अंतर्गत महिलाओं, किशोरियों और बालिकाओं को उनके लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया जा रहा है। कामकाजी और निराश्रित महिलाओं को सुरक्षित आश्रय निराश्रित, परित्यक्त और कामकाजी महिलाओं के सुरक्षित आवास में भी योगी आदित्यनाथ सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। माता अहिल्याबाई होल्कर श्रमजीवी महिला हॉस्टल योजना के तहत 7 जनपदों नें 500-500 क्षमता के हॉस्टल बनाए जा रहे हैं। श्रमजीवी महिला छात्रावास के अंतर्गत लखनऊ, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में 8 कामकाजी महिला छात्रावास का निर्माण हो रहा है। प्रदेश के 8 जनपदों में राजकीय महिला शरणालय चल रहे हैं। मथुरा में निराश्रित महिलाओं के लिए 1000 की क्षमता वाला कृष्ण कुटीर चल रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार इसी तरह प्रदेश में 14 शक्ति सदन और 13 सखी निवास के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध करा रही है।

योगी मॉडल का असर: भूमि से उद्योग तक यूपी बना निवेशकों की पहली पसंद

भूमि से उद्योग तक: यूपी टॉप, योगी के विजन पर निवेशकों का भरोसा मजबूत औद्योगिक भूमि के प्रभावी उपयोग में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में 33,327 हेक्टेयर भूमि पर संचालित हैं 286 औद्योगिक पार्क यूपी बना भरोसेमंद परिणाम देने वाला औद्योगिक गंतव्य लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने देश के औद्योगिक मानचित्र पर मजबूती के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। इसकी ठोस झलक औद्योगिक भूमि के उपयोग के आंकड़ों में दिखाई देती है। जहां देश के कई प्रमुख राज्यों में औद्योगिक पार्कों की बड़े क्षेत्रफल में भूमि आज भी निष्क्रिय पड़ी है, वहीं उत्तर प्रदेश में उपलब्ध कराई गई औद्योगिक भूमि का अधिकांश हिस्सा उद्योगों के लिए उपयोग हो चुका है। प्रदेश में अब तक 286 औद्योगिक पार्क विकसित किए जा चुके हैं। इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों की सक्रियता यह स्पष्ट करती है कि निवेश प्रस्ताव केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहे। यही कारण है कि देश और विदेश के निवेशक उत्तर प्रदेश को एक भरोसेमंद और परिणाम देने वाले औद्योगिक गंतव्य के रूप में देख रहे हैं। उद्योग जगत के विशेषज्ञ एसके आहूजा का कहना है कि उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देश के बड़े औद्योगिक पावरहाउस के रूप में उभर रहा है। उत्तर प्रदेश में 286  विकसित औद्योगिक पार्कों का कुल क्षेत्रफल 33,327 हेक्टेयर है। इनमें लगभग पूरी औद्योगिक भूमि पर उद्योग या तो स्थापित हो चुके हैं या स्थापना की प्रक्रिया में हैं। इससे जहाँ उत्पादन गतिविधियों को बल मिल रहा है और वहीँ बड़ी संख्या में रोजगार के अवसरों का भी सृजन हो रहा है। यदि देश के अन्य राज्यों की स्थिति पर दृष्टिपात किया जाए तो अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। जैसे कि तेलंगाना में 157 औद्योगिक पार्कों में 30,749  हेक्टेयर भूमि आज भी निवेश के लिए उपलब्ध है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने औद्योगिक नीति को स्पष्ट दिशा प्रदान करने का काम किया है। सरकार का फोकस केवल भूमि आवंटन पर ही नहीं वरन उद्योगों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण देने पर भी रहा है। कानून-व्यवस्था में सुधार, प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण और बुनियादी ढांचे का तेज विस्तार इस नीति के मुख्य स्तंभ बने। एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट और बेहतर कनेक्टिविटी ने उद्योगों के संचालन को आसान बनाया जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। प्रदेश भर में संतुलित औद्योगिक विस्तार एक जनपद, एक उत्पाद (ओडीओपी), डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, मेडिकल डिवाइस पार्क, फार्मा पार्क और टेक्सटाइल हब जैसी योजनाओं ने औद्योगिक विकास को केवल कुछ शहरों तक सीमित नहीं रहने दिया। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी उद्योग स्थापित हुए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और क्षेत्रीय असमानता में कमी आई है। राष्ट्रीय औद्योगिक परिदृश्य में उत्तर प्रदेश आज ठोस परिणामों के साथ अग्रणी प्रदेश के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। प्लग एंड प्ले मॉडल पर जोर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार अब उद्योगों को गति देने के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर विशेष जोर दे रही है। इसके अंतर्गत निवेशकों को पहले दिन से ही तैयार अवसंरचना मिलेगी। यही मॉडल उत्तर प्रदेश को औद्योगिक मामले में अन्य राज्यों से आगे लेकर जाएगी।