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योगी सरकार का बड़ा कदम: BSB स्कूलों के छात्रों को मिलेगा मुख्यधारा से जुड़ने का मौका

छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता, बीएसबी से संबद्ध विद्यालयों को मुख्यधारा से जोड़ रही योगी सरकार – यू-डायस प्लस कोड आवंटन और विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया को मिली गति – छात्रों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की पहल – जिलों को आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की कार्रवाई समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक सक्षम और छात्र केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। शिक्षा सुधारों को संस्थागत मजबूती प्रदान करने और प्रत्येक विद्यार्थी को सुव्यवस्थित शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने के क्रम में अब भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी), हरिद्वार से संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस कोड आवंटन तथा विद्यालय श्रेणी उन्नयन (स्कूल केटेगरी अपग्रेडेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल प्रशासन, तकनीक आधारित अनुश्रवण और डेटा प्रबंधन को लगातार मजबूती दी जा रही है। यू-डायस प्लस जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार से शिक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों को इस व्यवस्था से जोड़ने की पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने, अभिलेखों के बेहतर प्रबंधन तथा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों के लिए नवीन यू-डाइस प्लस कोड आवंटन तथा आवश्यकतानुसार विद्यालय श्रेणी उन्नयन की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं, उन्हें नवीन कोड आवंटित होंगे निर्देशों में कहा गया है कि जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें नवीन कोड आवंटित किए जाने की कार्रवाई की जाएगी, जबकि पूर्व से यू-डायस कोड प्राप्त विद्यालयों के लिए मान्यता के अनुरूप विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेखों, आख्या और संस्तुति सहित प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। बीएसबी ने किया है नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध उल्लेखनीय है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड, हरिद्वार द्वारा संचालित एवं संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस पोर्टल पर नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध प्राप्त हुए हैं। इसके दृष्टिगत शासन स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विद्यालयों के यू-डायस प्लस प्रणाली से जुड़ने के बाद उनका शैक्षणिक डाटा राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में व्यवस्थित रूप से समाहित हो सकेगा, जिससे नामांकन, शैक्षणिक प्रगति, परीक्षा संबंधी अभिलेखों तथा अन्य शैक्षिक प्रक्रियाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा।

प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी, योगी सरकार नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार

योगी सरकार प्लाईवुड उद्योग के लिए नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार प्लाईवुड उद्योग के लिए उत्तर प्रदेश ने खोले विकास के नए द्वार देशभर से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों ने लखनऊ और हरदोई में निवेश संभावनाओं को तलाशा  ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार, 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां और आकर्षक प्रोत्साहन निवेशकों को दे रहे नई गति : दीपक कुमार लखनऊ  योगी सरकार उद्योग-अनुकूल नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और निवेशकों के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रही है। इसी क्रम में सोमवार को लखनऊ स्थित इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों एवं संभावित निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय निवेश संवाद आयोजित किया गया। इसमें उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा ताकि उन पर शीघ्र अमल हो।  बैठक में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश के लिए तैयार आधारभूत संरचना, सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं तथा प्लाईवुड एवं संबद्ध उद्योगों में उपलब्ध निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद कर उद्योग वृद्धि के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि राज्य सरकार प्लाईवुड एवं एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए प्रतिस्पर्धी और भविष्य उन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र के लिए एक समर्पित नीति तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। हम पड़ोसी राज्यों की नीतियों का भी अध्ययन करेंगे ताकि प्लाईवुड और एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी एवं उद्योग-अनुकूल ढांचा विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए गठित की जाने वाली समिति में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे नीतिगत निर्णय व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप लिए जा सकें। इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरन आनंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश निरंतर सुधारों, सक्रिय निवेश सुविधा तंत्र और मजबूत औद्योगिक आधार के कारण देश के सबसे प्रतिस्पर्धी निवेश स्थलों में उभरकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि राज्य की 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां, पूंजीगत सब्सिडी, भूमि आधारित प्रोत्साहन और रोजगार सहायता योजनाएं निवेशकों को विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख अवसर प्रदान कर रही हैं।उन्होंने बताया कि राज्य शीघ्र ही उपलब्ध भूमि बैंक से चार से पांच औद्योगिक क्लस्टरों की पहचान कर उन्हें क्लस्टर आधारित विकास के लिए आरक्षित करेगा। साथ ही यदि निवेशकों को भूमि बैंक से अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी तो राज्य सरकार भूमि उपलब्ध कराने और छह माह के भीतर उसका आवंटन सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी। प्लाईवुड फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने इस उद्योग को कृषि, विनिर्माण और ग्रामीण आजीविका से जुड़ा बहुआयामी क्षेत्र बताते हुए ओडीओपी की तर्ज पर “वन इंडस्ट्रियल पार्क” मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने एग्रोफॉरेस्ट्री आधारित उद्योगों के लाइसेंस, वन नियमों, प्रदूषण मानकों, दंडात्मक प्रावधानों और एनओसी से जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया तथा एग्रो आधारित उद्योगों के लिए पृथक नीति बनाने का प्रस्ताव रखा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक कुमार ने कहा, “उद्योग जगत द्वारा उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को हम गंभीरता से आगे बढ़ाएंगे तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखकर उद्योग-अनुकूल और व्यावहारिक समाधान तलाशेंगे।” बैठक में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती प्रेरणा शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत निवेशक प्रतिनिधिमंडल 23 जून को हरदोई जिले के संडीला क्षेत्र का दौरा करेगा, जहां वे भूमि उपलब्धता, आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का आकलन करेंगे। इस पहल से नए निवेश आकर्षित होने, रोजगार सृजन बढ़ने और उत्तर प्रदेश के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

शिक्षा सुधारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी, उत्कृष्ट अधिकारियों को परख रही योगी सरकार

शिक्षा सुधारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु उत्कृष्ट अधिकारियों को परख रही योगी सरकार  भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए प्रदेश में शुरू हुई चयन प्रक्रिया  अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए 4 बीएसए और 6 बीईओ का होगा चयन  नवाचार, सुशासन, अधिगम सुधार और जनभागीदारी आधारित प्रयासों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच  जमीनी स्तर पर शिक्षा में बदलाव लाने वाले अधिकारियों की उपलब्धियों को मिलेगी पहचान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश शिक्षा सुधारों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी सक्रिय कदम उठा रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ के लिए प्रदेश में चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।  शिक्षा प्रशासन में नवाचार, सुशासन, अधिगम सुधार, प्रभावी प्रबंधन और जनभागीदारी आधारित उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारियों का चयन कर उनके नाम राष्ट्रीय स्तर पर भेजे जाएंगे। यह पहल उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे शिक्षा सुधारों और नवाचारी प्रशासनिक मॉडलों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। चयनित होंगे चार बीएसए और छ: बीईओ अपर राज्य परियोजना निदेशक प्रेम रंजन सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पुरस्कार के लिए उत्तर प्रदेश से 4 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) तथा 6 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) का चयन किया जाएगा। इसके लिए सभी जनपदों को निर्देशित किया गया है कि वे शिक्षा प्रशासन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों का विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराएं। चयन के दौरान नवाचार, बेहतर प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता, अधिगम स्तर में सुधार, विद्यालयी व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश से चयनित अधिकारी राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे और अपने कार्यों के माध्यम से प्रदेश में लागू शिक्षा सुधारों की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करेंगे। क्या है ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ उल्लेखनीय है कि ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध राष्ट्रीय स्तर की पहल है। इसका उद्देश्य शिक्षा प्रशासन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करना तथा देशभर में सफल प्रशासनिक नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणालियों को पहचान दिलाना है।  यह हैं निर्देश निर्देशों में कहा गया है कि जनपद ऐसे अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करें, जिन्होंने शिक्षा प्रशासन में नवाचार आधारित कार्यप्रणाली अपनाकर उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हों। विशेष रूप से वे अधिकारी प्राथमिकता में रहेंगे जिनके प्रयासों से विद्यार्थियों के अधिगम स्तर, विद्यालय प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता या शैक्षणिक वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला हो। प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाम आधारित प्रशासनिक संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए होने वाला यह चयन न केवल उत्कृष्ट अधिकारियों को पहचान दिलाएगा, बल्कि शिक्षा प्रशासन में नवाचार, प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन की संस्कृति को भी प्रोत्साहित करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते वर्षों में बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में अनेक व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। निपुण भारत मिशन, बाल वाटिका, विद्यालय कायाकल्प, स्मार्ट कक्षाएं, डिजिटल शिक्षण संसाधन, मिशन प्रेरणा, शिक्षक प्रशिक्षण और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों ने विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा प्रदान की है। इन पहलों को सफलतापूर्वक धरातल तक पहुंचाने में जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि अब ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।

निपुण भारत मिशन को नई रफ्तार! योगी सरकार ने शुरू किया मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का दूसरा चरण

निपुण भारत मिशन को नई गति देने में जुटी योगी सरकार, जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का दूसरा चरण शुरू – राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में 20 जनपदों के एसआरजी सदस्य और डायट मेंटर्स ले रहे भाग – प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर हजारों शिक्षकों को देंगे प्रशिक्षण – आधारभूत साक्षरता, गणितीय दक्षता और गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष फोकस – दीक्षा और निपुण टीचर ऐप जैसे डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी दिया जा रहा प्रशिक्षण लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए शिक्षकों के क्षमता संवर्धन की मजबूत शृंखला तैयार कर रही है। इसी क्रम में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के लिए पांच दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा चरण सोमवार से प्रारंभ हो गया।  राज्य स्तर पर आयोजित इस प्रशिक्षण में सहभागी जनपदों से चयनित राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्यों और डायट मेंटर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण का नेतृत्व करते हुए लाखों शिक्षकों तक निपुण भारत मिशन की अवधारणाओं, नवीन शिक्षण पद्धतियों और अधिगम सुधार की रणनीतियों को पहुंचाएंगे। यह प्रशिक्षण निपुण भारत मिशन के अंतर्गत संचालित राज्यव्यापी शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की दूसरी कड़ी है। प्रशिक्षण का पहला चरण 16 से 20 मई के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके बाद जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए दो और चरण आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश भर में एक सुदृढ़ शैक्षणिक प्रशिक्षण तंत्र विकसित किया जा सके। वर्तमान बैच में प्रदेश के 20 जनपदों के प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रत्येक सहभागी जनपद से दो राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्य और दो डायट मेंटर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की जिम्मेदारी आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना होगी, ताकि निपुण भारत मिशन की रणनीतियां और शिक्षण पद्धतियां प्रभावी ढंग से विद्यालय स्तर तक पहुंच सकें। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आधारभूत भाषा एवं गणितीय दक्षताओं के विकास के लिए प्रभावी कक्षा-कक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति, गतिविधि आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, प्रिंट-समृद्ध शैक्षणिक सामग्री और टीएलएम के उपयोग, कक्षा मूल्यांकन की प्रभावी रणनीतियों तथा दीक्षा, कैच-अप शिक्षण एवं रीडिंग कैंपेन जैसे कार्यक्रम पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डिजिटल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष बल है। प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह सहभागितापूर्ण और व्यावहारिक स्वरूप में तैयार किया गया है। इसमें प्रदर्शन, चिंतन, सहकर्मी अधिगम, समूह चर्चा और कक्षा में प्रत्यक्ष उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि प्रशिक्षण के दौरान विकसित शैक्षणिक समझ और कौशल सीधे शिक्षण व्यवहार में परिलक्षित हों तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। विद्यालय कायाकल्प, बाल वाटिका, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे प्रयासों के साथ सरकार बुनियादी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने में जुटी है।

अलीगढ़ से सीधे घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे CM योगी, हाईलेवल बैठक के बाद ताबड़तोड़ एक्शन

अलीगढ़ से सीधे घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे सीएम योगी, हाईलेवल मीटिंग के बाद ताबड़तोड़ एक्शन -4 अभियुक्त गिरफ्तार, 4 अफसर तत्काल प्रभाव से सस्पेंड -अब SIT के निशाने पर बड़े अफसर, जांच में तय होगी बड़े अफसरों की जवाबदेही    लखनऊ  अलीगंज अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ताबड़तोड़ एक्शन के मूड में दिख रही है। इमारत में जिस वक्त हादसा हुआ, मुख्यमंत्री अलीगढ़ के दौरे पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मंच से घटना की जानकारी मिलने की बात बताई और सभी कार्यक्रमों को रद्द करने की घोषणा के बाद लखनऊ ने लिए निकल पड़े। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत तमाम अफसरों को मौके पर पहुंच कर राहत बचाव कार्य के निर्देश जारी कर चुके थे।  कार्यक्रम से निकलने के बाद लखनऊ पहुंचते ही मुख्यमंत्री सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और राहत बचाव कार्य का जायजा लिया। घटना के बाद किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में घायलों की व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए हाल चाल जाना। मौके पर मौजूद चिकित्सकों से घायलों का हाल चाल जाना और बेहतर इलाज के लिए चिकित्सकों को निर्देशित किया।  दुर्घटना के शिकार बने मृतकों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल 5-5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। घायलों को 50-50 हजार रुपये मदद का ऐलान किया गया।  मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार लोगों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया।  1)    गौरव कुमार, एक्सेन कलेक्शन (बिजली विभाग) जानकीपुरम  2)    कमलेन्द्र कुमार सिंह, FSSO (फायर विभाग) इंदिरा नगर  3)    अनिल कुमार, AE (LDA) 4)    प्रमोद पांडे, JE (LDA) हाई लेवल मीटिंग और ताबड़तोड़ एक्शन किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने पाँच कालीदास मार्ग स्थित अपने आवास पर हाईलेवल मीटिंग आयोजित की जिसमें सभी बड़े और प्रमुख अफसर शामिल हुए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग व प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन के नेतृत्व में दो सदस्यीय विशेष जांच दल के गठन का निर्देश दिया।  ताबड़तोड़, बड़े अफसरों पर भी कसेगा शिकंजा अग्निकांड के तीन अभियुक्तों- रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी अलीगंज), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (निवासी बड़ा दुर्गा मंदिर सीतापुर रोड लखनऊ), तूशॉक कृष्णा जायसवाल (निवासी बालागंज, लखनऊ) और सुरेश कुमार साहू (निवासी मड़ियांव) को गिरफ्तार किया गया।  गिरफ़्तारी की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अफसरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया। ये अफसर हैं बिजली विभाग के जानकीपुरम एक्सेन कलेक्शन गौरव कुमार, FSSO (फायर विभाग) इंदिरा नगर के प्रभारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के AE अनिल कुमार और लखनऊ विकास प्राधिकरण के JE प्रमोद पांडे।  विशेष जांच दल को सात दिनों के अंदर अपनी जांच पूरी करके मुख्यमंत्री को सौंपना है। जांच के दायरे में कई बड़े अफसरों के आने की आशंका है। 2016 में निरस्त किया गया था बिल्डिंग के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश अवैध निर्माण पर हुआ था ध्वस्तीकरण का आदेश, दो माह से कम समय में पलट गया था फैसला लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब भवन से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्राधिकरण की कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में हैं। सोमवार को जिस भवन में आग लगने की यह दुःखद घटना हुई, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन दो माह से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया। 1980 में हुआ था आवंटन अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार पुत्र रामेश्वर सहाय को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया। 2005 में यह भवन विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। वहीं 19 जनवरी 2013 को इन लोगों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दिया। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र व सुरेन्द्र के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की। करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त होने पर उठे सवाल हालांकि, बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की बात सामने आई। इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज कराया। जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया। लेकिन, ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के दो माह के अंदर ही 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल गठित

लखनऊ अग्निकांड:मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल गठित विशेष जांच दल में धर्मार्थ कार्य, पर्यटन/ संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात भी शामिल अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन प्रवीण कुमार होंगे विशेष जांच दल के दूसरे सदस्य जांच दल को सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ अग्निकांड प्रकरण पर देर रात उच्च स्तरीय बैठक की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया गया।  इस विशेष जांच दल में धर्मार्थ कार्य, पर्यटन/संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात तथा अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने जांच दल को सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि घटनास्थल के निरीक्षण, केजीएमयू में मृतकों के परिजनों से मिलने व घायलों का हालचाल जानने के बाद मुख्यमंत्री ने देर रात उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें मुख्यमंत्री ने घटना को लेकर काफी रोष जताते हुए दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल बनाया गया। इसके सदस्य 7 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

अयोध्या को बदनाम मत करो, 500 साल इंतजार किया तो 15 दिन और कर लो’, चढ़ावा चोरी मामले पर योगी का जवाब

अयोध्या  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज यानी शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे. राम मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर में कथित दान चोरी के मुद्दे पर विपक्ष को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि अयोध्या को बदनाम मत करो. अयोध्या का विकास कुछ लोगों से नहीं पच रहा. जब 500 साल इंतजार किया तो 15 दिन और एसआईटी रिपोर्ट का इंतजार कर लो. रुदौली में कामाख्या मंदिर के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने कहा कि वे लोग उपदेश दे रहे हैं जिन्होंने जय श्रीराम का नारा लगाने पर राम भक्तों पर गोली चलवाई थी. वे लोग ज्ञान दे रहे हैं, जिन्होंने राम मंदिर ना बने इसके लिए कोर्ट में वकीलों की फ़ौज खड़ी कर दी थी. मुख्यमंत्री का इशारा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की तरफ था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि SIT जांच कर रही है. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. अपराधियों को ऐसे सजा मिलेगी जो इतिहास बनेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी के पास सबूत हो तो SIT को मुहैया कराए. किसी के बहकावे में ना आएं. इन लोगों ने अयोध्या को सकरी गलियों में धकेल कर रखा था, आज अयोध्या का नाम हो रहा है, इन्हें अच्छा नहीं लग रहा है.  SIT अपना काम कर रही है. किसी को अगर SIT से कोई शिकायत रहेगी तो उसको भी SIT से पूछने का मौका दिया जाएगा. जांच के दौरान किसी भी तरह की बयानबाजी से बचें. किसी का चारित्रिक हनन नहीं किया जाना चाहिए. दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाएगा।  आज विपक्ष रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहा है उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक राम मंदिर निर्माण का विरोध किया. भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए, जबकि समाजवादी पार्टी की सरकार में रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं. इतना ही नहीं, जय श्रीराम के उद्घोष पर लाठियां बरसाई गईं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यही लोग रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने एसआईटी का गठन किया है और यह जांच पूरी निष्पक्षता से होगी. उन्होंने रामभक्तों से मर्यादा और धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “जब हमारे पूर्वजों ने प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान के लिए 500 वर्षों तक मर्यादा के साथ संघर्ष और इंतजार किया है, तो अब 15 दिन और धैर्य रखिए।  बाबर से प्यार करते हैं अखिलेश मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी. उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई दस्तावेजी प्रमाण है तो उसे एसआईटी को सौंपे और जांच पूरी होने तक कोई भी अनावश्यक बयानबाजी न करें. साथ ही उन्होंने लोगों से अयोध्या और राम मंदिर को बदनाम करने वाले दुष्प्रचार के बहकावे में न आने की भी अपील की. मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबर को प्यार करने वाले अखिलेश यादव राम मंदिर की बात कर रहे हैं। 

चंदा चोरी विवाद पर योगी आदित्यनाथ का पलटवार, कहा—SIT जांच सच सामने लाएगी

अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या जनपद के रुदौली विधानसभा क्षेत्र में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय सहित ₹378 करोड़ से अधिक की 126 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. उन्होंने वहां वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा का अनावरण भी किया. मंच से जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अयोध्या में चंदा चोरी के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए 500 साल संघर्ष हुआ है, इसलिए कोई भी अयोध्या को बदनाम न करे. किसी के पास चंदा चोरी का कोई सबूत है तो वह एसआईटी को दे, इसकी पूरी जांच और सख्त एक्शन होगा।  अयोध्या को बदनाम करने वालों पर बरसे सीएम सीएम योगी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले लोग केवल बदनाम करने का काम कर रहे हैं. इनका आचरण सबके सामने है, जिन्होंने कभी राम भक्तों पर गोलियां चलवाईं, श्री राम बोलने पर लाठियां चलवाईं और कोर्ट में प्रभु राम के खिलाफ केस लड़े।  मुख्यमंत्री ने नसीहत दी कि जांच रिपोर्ट आने तक कोई भी इस मामले में बयानबाजी न करे और किसी के चरित्र हनन का प्रयास न करे. उन्होंने भरोसा दिया कि अगर कोई अपराधी है तो वह बचेगा नहीं, यह पूरी तरह कन्फर्म है।  बकौल सीएम योगी- सबको अपनी जिम्मेदारी का दायित्व निभाना होगा. जिम्मेदारी का दायित्व निभायेंगे तभी विकास होगा. सपा जय श्री राम कहने पर गोली चलवाती थी. हमने ट्रस्ट की मांग पर SIT बनवाई. जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा. हां, अगर… किसी के पास कोई सुबूत हो तो SIT को दे. लेकिन बयानबाजी से अयोध्या का अपमान न करे. जनता अपमान करने वालों से सावधान रहे।  बेटियों के लिए पीएसी की 3 नई बटालियन अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रनायकों और वीरांगनाओं के प्रति श्रद्धा भाव को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा बताया. उन्होंने घोषणा की कि डबल इंजन की सरकार ने महारानी लक्ष्मीबाई, महारानी दुर्गावती, अवंतीबाई लोधी, झलकारी बाई और उदा देवी के सम्मान में कई अभियान शुरू किए हैं. इसी कड़ी में सरकार ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी, झलकारी बाई कोरी और वीरांगना उदादेवी पासी के नाम पर पीएसी की तीन नई बटालियन गठित की हैं. सबसे खास बात यह है कि इन तीनों बटालियन में केवल बेटियों की ही भर्ती की जाएगी। 

योगी सरकार की सामूहिक विवाह योजना बनी OBC परिवारों का सहारा, हजारों घरों को मिली राहत

योगी सरकार में ओबीसी परिवारों के लिए संबल बनी सामूहिक विवाह योजना अन्य पिछड़ा वर्ग के 1.80 लाख से अधिक जोड़ों को मिला मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का सहारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े हुए लाभान्वित, समाज कल्याण विभाग निभा रहा अहम भूमिका लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ किसी भेदभाव के बिना समाज के सभी वर्गों तक पहुंच रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। इसी सोच का परिणाम है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब परिवारों के लिए सहारा बनी है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के परिवारों की बात करें तो योगी सरकार के नौ वर्षों में 1,80,017 जोड़ों का विवाह इस योजना के माध्यम से संपन्न कराया गया है। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े योजना से लाभान्वित हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की योजनाएं समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच रही हैं और पात्र लोगों को उनका अधिकार मिल रहा है।  पात्रता के आधार पर मिल रहा योजनाओं का लाभ योगी सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां किसी वर्ग विशेष के बजाय सभी पात्र परिवारों को लाभ दिया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सम्मानजनक विवाह के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना लाखों परिवारों के जीवन में खुशियां लेकर आई है। समाज कल्याण विभाग निभा रहा सक्रिय भूमिका समाज कल्याण विभाग योजना के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग की ओर से लाभार्थियों का सत्यापन कर सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं। विवाह की संपूर्ण व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर सुनिश्चित की जाती है। समारोह में खान-पान, पंडाल, सजावट सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि लाभार्थी परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। आर्थिक सहायता से मिल रहा सामाजिक संबल मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत प्रत्येक जोड़े को एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें 60 हजार रुपये वधू के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किए जाते हैं, 25 हजार रुपये के उपहार एवं गृहस्थी के सामान दिए जाते हैं, जबकि 15 हजार रुपये विवाह आयोजन पर खर्च किए जाते हैं। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होता है और बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न हो पाता है। योगी सरकार में पात्र परिवारों को मिल रहा योजनाओं का लाभ समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में समाज के प्रत्येक पात्र परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बीते 9 वर्षों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4,957 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ, जो 2018-19 में बढ़कर 13,866 और 2019-20 में 15,417 तक पहुंच गया। वर्ष 2020-21 में 6,901, 2021-22 में 15,256, 2022-23 में 31,903, 2023-24 में 33,913 तथा 2024-25 में 31,518 जोड़ों का विवाह कराया गया। वहीं, वर्ष 2025-26 में 26,286 जोड़े इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आर्थिक संबल के साथ सामाजिक समरसता और सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा को मजबूत करते हुए कुल 5,54,202 जोड़ों की शादियां हुई हैं।

योगी सरकार ने जिस जमीन पर बसाए थे गरीब, अब उसी मकानों को तोड़ने की तैयारी; सिंचाई विभाग का नोटिस

लखनऊ  यूपी की राजधानी लखनऊ में डालीबाग स्थित एलडीए की सरदार पटेल आवास योजना में  हड़कंप मच गया। दरअसल,मुख्तार अंसारी की जमीन पर योगी सरकार ने गरीबों को जो घर बनवाकर दिए थे सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उन्हीं फ्लैटों पर गिराने का नोटिस लगा दिया है। लाल क्रॉस का निशान लगाकर उन्हें खाली करने की चेतावनी दी गई है। यह वही 72 फ्लैट हैं जिनकी चाबी नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं गरीब परिवारों को सौंपी थी। उधर, नोटिस लगते ही कॉलोनी में रहने वाले परिवारों में दहशत फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। छह महीने पहले मिला था आशियाना यह वही परियोजना है, जिसे लखनऊ विकास प्राधिकरण ने डालीबाग में माफिया मुख्तार अंसारी के ध्वस्त किए गए बंगले की जमीन पर विकसित किया था। यहां गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए 72 फ्लैट बनाए गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवंबर 2025 में आयोजित समारोह में लाभार्थियों को इन मकानों की आवंटन पत्र व चाबी सौंपी थी। कई परिवारों ने इसी वर्ष यहां आकर रहना शुरू किया था। अब सिंचाई विभाग ने सात दिन में खाली करने की नोटिस चस्पा की है। नोटिस सिंचाई विभाग के लखनऊ खण्ड दो शारदानहर के जिलेदार सर्वेक्षण की ओर से चस्पा की गयी है। नोटिस में यह भी लिखा है कि अगर इसे खाली कराने में कोई क्षति होती है तो कब्जेदार स्वयं जिम्मेदार होंगे। कब्जेदारों से शमन शुल्क और हर्जा खर्चा भी वसूला जाएगा। नोटिस देख भड़के आवंटी, जब मुख्तार का बंगला खड़ा था तब कहां था सिंचाई विभाग सिंचाई विभाग का दावा है कि यह भूमि हैदर कैनाल बंधे की सरकारी जमीन है। विभाग ने फ्लैटों पर नोटिस चस्पा करते हुए उन्हें अपनी भूमि बताया है। नोटिस लगते ही आवंटियों में नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि जब इसी जमीन पर वर्षों तक मुख्तार अंसारी का आलीशान बंगला खड़ा था, तब सिंचाई विभाग को अपनी जमीन दिखाई नहीं दी। अब जब गरीब परिवारों को सरकारी योजना के तहत घर मिल गए हैं, तब अचानक जमीन पर दावा किया जा रहा है। आवंटियों ने सवाल उठाया कि यदि भूमि को लेकर कोई विवाद था तो निर्माण शुरू होने से पहले ही इसे स्पष्ट क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि अभी उन्हें मकानों में रहते हुए छह महीने भी पूरे नहीं हुए हैं और बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एलडीए अधिकारियों के उड़े होश मामले की जानकारी मिलते ही एलडीए के अधिकारियों में भी हलचल मच गई। सूत्रों के अनुसार, सिंचाई विभाग की कार्रवाई और भूमि विवाद की सूचना तत्काल शासन के उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। एलडीए उच्च स्तर पर मामले में कड़ी नाराजगी जतायी है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इस मामले की जानकारी होने के बाद सिंचाई विभाग के अफसरों से बात की गयी। उन्होंने अपनी गलती मानी है और कहा है कि शाम तक नोटिस हटवाएंगे। जो लाल क्रास के निशान लगाया है उसकी भी सिंचाई विभाग पुताई कराएगा।