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वाराणसी में बाढ़ प्रभावितों के राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

2017 के पहले बाढ़पीड़ितों को देते थे सूखी ब्रेड, अब मिलती है 26 सामानों वाली 50 किलो की किट : सीएम योगी वाराणसी में बाढ़ प्रभावितों के राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  मुख्यमंत्री ने कहा – पहले यही सामग्री, यही पैसा सपाई खाकर डकार जाते थे जिन किसानों की फसल डूबी है, उनका सर्वे कर मुआवजा देने का आदेश 10 वर्ष पहले 45 जिले बाढ़ से प्रभावित होते थे, दर्जनों जनपदों में मस्तिष्क ज्वर से बच्चे कालकवलित होते थे सीएम बोले, जब अच्छी सरकार आती है, अच्छी स्कीम लाती है, लूट-खसोट पर रोक लगाती है, गरीब को उसका हक उपलब्ध करवाती है मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर वितरित की राहत सामग्री लखनऊ/वाराणसी,  वाराणसी के विद्या विहार इण्टर कॉलेज में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाढ़ प्रभावितों के राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आज से 10 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के 45 जिले बाढ़ से प्रभावित होते थे और दर्जनों जनपदों में मस्तिष्क ज्वर से बच्चे कालकवलित होते थे। मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, इतनी राहत सामग्री पहले नहीं मिलती थी। तब एक सूखी ब्रेड मिलती थी और हम देते हैं 50 किलो की किट, जिसमें 26 प्रकार के सामान होते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की डूबी फसलों का सर्वे किया जा रहा है। उन्हें भी मुआवजा देने के आदेश कर दिए गए हैं। सीएम योगी ने कहा कि उस समय न बच्चों के लिए दूध था, न गर्म भोजन, न राशन और न डिग्निटी किट। यही सामग्री या यही पैसा 2017 के पहले ये सपाई सब खा जाते थे। गरीब का हक खाकर डकार जाते थे। जब अच्छी सरकार आती है, अच्छी स्कीम लेकर आती है, लूट-खसोट पर रोक लगाती है और गरीब को उसका हक उपलब्ध करवाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गत वर्ष भी मुझे इस विद्यालय परिसर में आकर राहत कार्यों की समीक्षा करने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने क्या व्यवस्थाएं की हैं, इनका निरीक्षण करने का अवसर मिला था। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और राहत सामग्री का भी वितरण किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष वरुणा नदी में जब गंगा जी का जलस्तर बढ़ता है तो वरुणा नदी बैक फ्लो करती है और उसके कारण निचले क्षेत्र में जलजमाव की समस्या खड़ी हो जाती है। आज से 10 साल पहले इसी सीजन में भीषण जलजमाव से लोगों का आवागमन बाधित होता था, उन्हें परेशानी होती थी। उन्होंने कहा कि आज मेरे साथ बाढ़ नियंत्रण के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह साथ में हैं। पिछले नौ-साढ़े नौ वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में प्रत्येक क्षेत्र में जो कार्य हुए हैं, उसके परिणाम वाराणसी में भी देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए नए कलेवर के रूप में एक नई काशी का हम सब दर्शन कर रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम हो, काशी के घाट हों, काशी के अंदर रेलवे स्टेशन हो, बस स्टेशन हो, एयरपोर्ट हो, सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य हो, रिंग रोड का कार्य हो, जनता को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का कार्य हो या बाढ़ पर प्रभावी नियंत्रण करने के लिए किए गए उपाय हों, ये सभी आज काशी में देखने को मिल रहे हैं। जिस प्रदेश में आज से 10 वर्ष पहले दर्जनों जनपदों में मस्तिष्क ज्वर से बच्चे कालकवलित होते थे, आज इस बात को देखकर संतुष्टि होती है कि कुल मिलाकर 14 ऐसे जिले हैं, जहां आज पानी थोड़ा-बहुत आया है। उन क्षेत्रों का हम दौरा कर राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं। किट में 26 प्रकार के सामान हर प्रभावित परिवार को उपलब्ध करवाए जा रहे सीएम ने कहा कि व्यापक स्तर पर पूरा जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी युद्ध स्तर पर राहत कार्य के साथ जुड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो पैसा भेजा है, आपदा राहत निधि से उसी पैसे से सारी व्यवस्थाएं की जा रहीं हैं। इस किट में ढाई किलो लाई, कच्चा चना दो किलो, भुना चना दो किलो, चीनी एक किलो, 10 पैकेट बिस्किट, माचिस एक पैकेट, मोमबत्ती एक पैकेट, नहाने के दो साबुन, ढक्कनदार बाल्टी, तिरपाल, 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, दो किलो अरहर दाल, 10 किलो आलू। हल्दी, मिर्च, मसाले, एक लीटर रिफाइंड या सरसों का तेल, एक किलो नमक, सैनिटरी पैड, कपड़ा धोने के दो साबुन, एक तौलिया, एक सूती कपड़ा, 20 डिस्पोजेबल बैग, एक मग और 100 मिलीलीटर डिटॉल या सेवलॉन। यह 26 प्रकार के आइटम हर प्रभावित परिवार को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। मौत पर 24 घंटे के अंदर प्रभावित परिवार को राहत की व्यवस्था सीएम योगी ने कहा कि पानी का फैलाव होता है तो सांप, बिच्छू और अन्य कीड़ों के द्वारा काटने की शिकायतें आती हैं। मनुष्य और वन्यजीव संघर्ष के कारण भी बहुत सारी जगह जनहानि की शिकायतें आती हैं। मकान ढहने या बिजली गिरने से भी समस्याएं आती हैं। इन सबको भी आपदा राहत के रूप में शामिल किया गया है। किसी की डूबने से मौत हो गई, आकाशीय बिजली से असामयिक मौत हो गई, किसी किसान की खेत में काम करते समय, बटाईदार के खेत में काम करते समय या उनके परिवार के सदस्य की खेत में काम करते समय मौत हो गई, तो आपदा राहत निधि से अगले 24 घंटे के अंदर उस परिवार को चार लाख रुपये की सहायता हर हाल में मिल जाए, यह व्यवस्था कर दी गई है। किसी गरीब का मकान जल गया, किसी गरीब का मकान बाढ़ में बह गया या बाढ़ में टूट गया, तो उसको तत्काल प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना में एक आवास उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि जब अच्छी सरकार आती है कोई भेदभाव किसी के साथ नहीं करती, सबको उसका अधिकार मिले और यही अधिकार देने के लिए और समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री के निर्देश पर आज वे यहां पर आए हैं। 21 राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के रहने की व्यवस्था  मुख्यमंत्री ने बताया कि वाराणसी के 16 वार्डों में 567 परिवार प्रभावित हैं, जिनमें 2,486 नागरिक रह … Read more

योगी सरकार का खेल प्रतिभाओं को बड़ा तोहफा, लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में बनेगा अत्याधुनिक सेंटर

खिलाड़ियों की चोट का इलाज अब लखनऊ में, तैयार हो रहा अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर योगी सरकार का खेल प्रतिभाओं को बड़ा तोहफा, लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में बन रहा सेंटर अब दूसरे राज्यों का नहीं करना पड़ेगा रुख, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस होगा सेंटर सेंटर में होंगी क्रायोथेरेपी से लेकर शॉकवेव थेरेपी तक सात अत्याधुनिक मशीनों की सुविधा सिविल कार्य प्रगति पर, उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी करीब 7.17 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सेंटर को एक साल की समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रही है। राजधानी लखनऊ स्थित गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना की जा रही है। यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां खिलाड़ियों की फिटनेस, खेल संबंधी चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन में सुधार के लिए वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। सेंटर के निर्माण के बाद प्रदेश के खिलाड़ियों को खेल संबंधी चोटों के इलाज और आधुनिक पुनर्वास के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे खिलाड़ियों को समय पर उपचार मिलने के साथ उनकी रिकवरी और खेल में वापसी की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकेगी। फिटनेस से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक एकीकृत व्यवस्था स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर का उद्देश्य केवल घायल खिलाड़ियों का उपचार करना नहीं, बल्कि उनकी शारीरिक क्षमता का नियमित वैज्ञानिक मूल्यांकन और प्रदर्शन में निरंतर सुधार करना भी है। सेंटर में खिलाड़ियों को फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स साइंस आधारित प्रशिक्षण, पोषण संबंधी परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मार्गदर्शन की सुविधा मिलेगी। इसके माध्यम से खिलाड़ियों की फिटनेस का वैज्ञानिक आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण और रिकवरी की रणनीति तैयार की जा सकेगी। चोट के बाद पुनर्वास से लेकर मैदान पर वापसी तक खिलाड़ियों को विशेषज्ञों की निगरानी में सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। करीब 7.17 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा तैयार स्पोर्ट्स सांइस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना के लिए शासन द्वारा 716.77 लाख रुपये (7.17 करोड़ रुपये) की स्वीकृति प्रदान की गयी है। परियोजना के माध्यम से खिलाड़ियों के लिए आधुनिक चिकित्सा, पुनर्वास और खेल विज्ञान से जुड़ा मजबूत सपोर्ट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में अभी तक ऐसा सेंटर नहीं था। इसमें बाहर के लोगों को भी इलाज की सुविधा दिए जाने का प्रस्ताव है। फीस देकर आमजन भी अपनी चोटों का इलाज और पुनर्वास करा सकेंगे। सात अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा सेंटर खिलाड़ियों के उपचार और रिकवरी के लिए सेंटर में सात प्रमुख अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। इनमें हॉल बॉडी क्रायोथेरेपी चैबर, रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस, टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण, वायवीय संपीडन चिकित्सा इकाई, कॉम्बो पेन मैनेजमेट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट, क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणासी, फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट शामिल हैं।  हॉल बॉडी क्रायोथेरेपी चैबर सुविधा में तरल नाइट्रोजन के स्थान पर बिजली से संचालित क्रायोथेरेपी कक्ष की सुविधा होगी। इसमें -120°C से -140°C तक तापमान सीमा उपलब्ध होगी। जबकि रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस दो एकीकृत कंप्रेसर के माध्यम से उच्च आवृत्ति, 20 Hz तक के इम्पल्स देने में सक्षम होगा। इसका डिजाइन आधुनिक और उपयोग में आसान बताया गया है। वहीं टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण उच्च आवृत्ति इलेक्ट्रोथेरेपी के जरिए गहरे ऊतकों के उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके माध्यम से विभिन्न प्रकार की उपचार प्रणालियां उपलब्ध होंगी, जिनमें धाव, टैडन, लिगामेंट, जोड़ तथा मांसपेशियों के उपचार जैसी सुविधाएं शामिल हैं। वायवीय संपीड़न चिकित्सा इकाई (प्न्यूमैटिक कंप्रेशन थेरेपी यूनिट) के माध्यम से दोनों पैरों, भुजाओं, कमर एवं शरीर के विभिन्न हिस्सों का एक साथ उपचार किया जा सकेगा। खिलाड़ियों के रिकवरी और पुनर्वास में यह उपयोगी होगा। कॉम्बो पेन मैनेजमेंट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट में समकालिक, वैकल्पिक, पृथक एवं क्रमिक चैनल मोड में इलेक्ट्रोस्टिमुलेशन की सुविधा होगी। इसके जरिए गैल्वैनिक, फैराडिक, ट्रेबर्ट, अल्ट्रा राइज, हाई वोल्ट, माइक्रो करंट तथा टीईएनएस जैसी विभिन्न करंट थेरेपी उपलब्ध होगी। क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणाली में 2 इंच या उससे अधिक बैकलिट टच स्क्रीन डिस्प्ले और क्लास-4 जीएएआईएएस डायोड लेजर स्रोत होगा। इसकी न्यूनतम 10 वाट या उससे अधिक आउटपुट क्षमता होगी। फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट में मायोफेशियल ट्रिगर प्वाइंट, पीठ दर्द और गर्दन दर्द आदि के उपचार में उपयोगी होगा। इसके जरिए कैल्सिफिक टेंडिनोपैथी जैसी समस्याओं के उपचार में भी सहायता मिलेगी। निर्माण कार्य प्रगति पर, उपकरणों की खरीद जल्द स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर का सिविल निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। वहीं अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान उपकरणों की खरीद के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। टेंडर प्रक्रिया के बाद उपकरणों की खरीद की कार्यवाही शुरू की जाएगी। परियोजना को कार्य प्रारंभ होने की तिथि से एक वर्ष की समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सेंटर के तैयार होने के बाद खिलाड़ियों को उपचार, रिकवरी और प्रदर्शन सुधार के लिए एकीकृत सुविधा उपलब्ध होगी। प्रशिक्षकों और खेल विशेषज्ञों की भी बढ़ेगी क्षमता इस सेंटर को खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों, खेल अधिकारियों और खेल विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के लिए भी क्षमता विकास के मंच के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे खेल से जुड़े मानव संसाधन को भी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और चोट प्रबंधन की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर महत्वपूर्ण पहल  प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के साथ-साथ अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां खिलाड़ियों की फिटनेस, चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन से जुड़ी सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगी। -कुमार विनीत, विशेष सचिव, खेल विभाग

सीएम योगी रविवार को चित्रकूट पहुंचेंगे, बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को बांटेंगे राहत सामग्री

सीएम योगी रविवार को चित्रकूट पहुंचेंगे, बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरित करेंगे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का लेंगे जायजा आश्रयहीन परिवारों को देंगे भूमि आवंटन प्रमाणपत्र और राहत राशि का करेंगे वितरण रैन बसेरा में बाढ़ पीड़ितों से संवाद कर जानेंगे उनकी समस्याएं लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को चित्रकूट जनपद के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरित करेंगे। साथ ही बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को आवास के लिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र और आपदा मोचन निधि से राहत राशि भी प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लेंगे। इसके बाद रैन बसेरा में बाढ़ प्रभावित लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं जानेंगे। कार्यक्रम के दौरान मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, जिला पंचायत प्रशासक अशोक जाटव, नगर पालिका परिषद चित्रकूटधाम कर्वी अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता और मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी समेत अन्य गणमान्य मौजूद रहेंगे।

बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 19 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 19 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया राहत-बचाव के बीच 4.66 लाख से अधिक लंच पैकेट और 92 हजार राहत खाद्य पैकेट वितरित किए 1,977 नाव-मोटरबोट से जारी है बचाव अभियान, अब तक शून्य जनहानि, शरणालयों में मिला सुरक्षित ठिकाना लोगों के स्वास्थ का ध्यान रखते हुए 6.13 लाख क्लोरीन टैबलेट और 2.17 लाख ओआरएस वितरित किए लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। प्रशासन की सतर्कता, राहत दलों की तत्परता और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी का असर साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक प्रदेश में अब तक 19,294 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि बाढ़ से जन व पशुहानि का आंकड़ा शून्य है। प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। 4.66 लाख से अधिक लंच पैकेट बांटे बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर राहत अभियान चल रहा है। अब तक 4.66 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 92,128 बाढ़ राहत खाद्य पैकेट भी प्रभावित परिवारों तक पहुंचाए गए हैं। इससे बाढ़ के चलते आवागमन अवरुद्ध होने से प्रभावित होने वाले परिवारों को संकट के समय भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। रेस्क्यू अभियान में 1,977 नाव-मोटरबोट राहत एवं बचाव अभियान के लिए अब तक 1,977 नाव एवं मोटरबोट रेस्क्यू कार्य में लगाई जा चुकी हैं। इनके माध्यम से प्रभावित गांवों और जलभराव वाले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ जरूरी राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। 1,313 बाढ़ शरणालयों में सुरक्षित ठिकाना प्रभावित लोगों के लिए प्रदेश में अब तक 1,313 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। जहां 6,538 लोग रह रहे हैं। सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों के लिए भोजन और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से लगातार सक्रिय बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय है। प्रदेश में 1,072 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 6.13 लाख से ज्यादा क्लोरीन टैबलेट और 2.17 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को कम करने में मदद मिल रही है। शनिवार को प्रभावित जिले अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, शाहजहांपुर, सीतापुर, उन्नाव और वाराणसी।

योगी सरकार में गुमशुदा बच्चों की तलाश को मिली रफ्तार, 18 हजार से ज्यादा मामलों का निस्तारण

योगी सरकार में गुमशुदा बच्चों की तलाश को मिली और रफ्तार, 18 हजार से ज्यादा मामलों का निस्तारण बाल हेल्पलाइन पर 7 महीने में सामने आए करीब 20,500 मामले 9,146 बच्चों से जुड़े मामलों में 92.05% का निस्तारण, परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाने पर जोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल सुरक्षा के व्यापक तंत्र को मिल रही मजबूती महिला कल्याण विभाग की सक्रियता से बड़ी संख्या में परिवारों को मिली राहत लखनऊ, बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और सुरक्षित भविष्य को लेकर योगी सरकार की संवेदनशीलता का असर बाल हेल्पलाइन के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से सामने आया है। 7 महीने में बाल हेल्पलाइन (1098) पर बच्चों के गुम होने से संबंधित करीब 20,500 मामले सामने आए, जिनमें 18,123 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। गुमशुदा बच्चों की तलाश, उनकी सुरक्षित बरामदगी और परिवार से पुनर्मिलन के लिए प्रदेश का बाल संरक्षण तंत्र लगातार सक्रियता से काम कर रहा है। संकट में फंसे बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित उनके परिवार तक वापस पहुंचाने के लिए सरकार ने एक संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था विकसित की है। हर सूचना पर सक्रियता, बड़ी संख्या में परिवारों को मिली राहत बाल हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार,1 जनवरी से 1 अगस्त 2026 तक बच्चों से संबंधित कुल 58,293 मामले प्राप्त हुए, जिनमें 50,589 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या गुमशुदा बच्चों से संबंधित मामलों की रही। वहीं 9,146 बच्चों के मिलने से जुड़े मामले भी हेल्पलाइन तक पहुंचे, जिनमें 8,419 मामलों का समाधान किया गया। योगी सरकार की प्राथमिकताओं में बच्चों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रमुख रूप से शामिल है। इसी सोच के तहत हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाने के साथ मामलों की प्रगति पर भी नजर रखी जा रही है।  गुमशुदा बच्चों की सुरक्षित वापसी पर विशेष फोकस गुमशुदगी के मामलों में बड़ी संख्या में निस्तारण होना उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिनके बच्चे किसी कारण से उनसे बिछड़ गए। बाल संरक्षण तंत्र बच्चों की तलाश के साथ उनकी सुरक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दे रहा है। बच्चों के मिलने के बाद उन्हें परिवार तक सुरक्षित पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाती है। काउंसलिंग और पुनर्वास पर दिया जा रहा ध्यान महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। गुमशुदा बच्चों से संबंधित प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाती है। बच्चों की तलाश के साथ उनकी सुरक्षित वापसी, परिवार से पुनर्मिलन तथा जरूरत के अनुसार काउंसलिंग और पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बाल हेल्पलाइन पर केवल गुमशुदगी ही नहीं, बल्कि अन्य समस्याओं से जुड़े मामले भी सामने आते हैं। इन पर भी संबंधित विभागों और संस्थाओं के समन्वय से कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में हेल्पलाइन बच्चों की समस्याओं को सुनने और उन्हें समाधान तक पहुंचाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम कर रही है।

योगी सरकार की पहल से मजबूत हो रही शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रभार

योगी सरकार के प्रयासों से मजबूत हो रही शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य का प्रभार – वरिष्ठता क्रम के आधार पर वरिष्ठ प्रवक्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी – विशेष सचिव बेसिक शिक्षा, यतीन्द्र कुमार ने निदेशक एससीईआरटी को दिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश – डायटों के प्रभावी संचालन से शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों को मिलेगा संस्थागत संबल – एटा, इटावा और मऊ में भी अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता के साथ शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को भी लगातार सुदृढ़ कर रही है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव यतीन्द्र कुमार ने निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तर प्रदेश को पत्र जारी कर 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को वरिष्ठता क्रम के आधार पर प्रधानाचार्य पद का प्रभार दिए जाने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एटा, इटावा और मऊ के डायट में तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। योगी सरकार के विशेष सचिव की ओर से जारी पत्र में शासन द्वारा सम्यक विचारोपरांत डायटों के सुचारु संचालन के लिए संबंधित वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद का प्रभार दिए जाने का निर्णय बताया गया है। निदेशक एससीईआरटी को संबंधित अधिकारियों को प्रभार दिलाने और आवश्यक अग्रेतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डायट, प्रदेश की शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षकों के प्रशिक्षण, क्षमता संवर्धन, शैक्षणिक सहयोग और विद्यालयी शिक्षा में नवाचारों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में इन संस्थानों की अहम भूमिका है। ऐसे में डायटों को प्रभावी नेतृत्व उपलब्ध कराना शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को जिम्मेदारी शासन के निर्देश के अनुसार इनमें राजेश कुमार सिंह (बहराइच), राम प्रताप सिंह (श्रावस्ती), विनोद कुमार (हमीरपुर), मुक्तेश कुमार (फिरोजाबाद), संजय कुमार (फर्रुखाबाद), नवाब वर्मा (हाथरस), दीपक श्रीवास्तव (ललितपुर), अश्वनी प्रताप सिंह (जालौन), विश्वदीपक त्रिपाठी (चंदौली), विमलेश कुमार त्रिपाठी (मिर्जापुर), सुरिद्धि पाण्डेय (सोनभद्र), सुनील कुमार (बलिया), कुलदीप नारायण सिंह (देवरिया), दीनानाथ (कुशीनगर), नरेन्द्र सिंह (संतकबीर नगर), आशीष चौहान (शाहजहांपुर) और नन्दित कुमार (झांसी) शामिल हैं। इन्हें मिला अतिरिक्त प्रभार जिन तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं/अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, उनमें पत्र में आराध्य उपाध्याय, वरिष्ठ प्रवक्ता, डायट अलीगढ़ को डायट एटा, अतुल कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक, इटावा को डायट इटावा तथा अतुल कुमार तिवारी, वरिष्ठ प्रवक्ता, डायट मऊ को डायट मऊ के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

योगी सरकार ने ताइवान की टेक कंपनियों को दिया यूपी में निवेश का न्योता, टेक सेक्टर में बड़े अवसर

योगी सरकार ने ताइवान की टेक कंपनियों को दिया यूपी में निवेश का न्योता ताइपे में आयोजित ‘सेमिकॉन 2026’ में सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम का किया प्रदर्शन प्रदेश में डाटा सेंटर परियोजनाओं के लिए उत्तर प्रदेश ने पेश किए निवेश के अवसर ताइवान कंपनियों के समक्ष नीतिगत प्रोत्साहनों, बुनियादी ढांचे और कुशल प्रतिभा को किया प्रस्तुत ताइपे/लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ने ताइपे में 2 से 4 सितंबर तक आयोजित ‘सेमिकॉन 2026’ में प्रमुख ताइवानी टेक कंपनियों के समक्ष राज्य में निवेश की संभावनाओं को प्रस्तुत किया और उन्हें सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाओं में निवेश के लिए आमंत्रित किया। ताइवान की कंपनियों के सामने यूपी का निवेश मॉडल योगी सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचे, कुशल मानव संसाधन और तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को ताइवानी कंपनियों के सामने प्रमुख ताकत के रूप में रखा गया। राज्य ने चिप निर्माण, सेंसर, डाटा सेंटर और सप्लाई चेन के स्थानीयकरण आदि क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी और निवेश के अवसरों पर जोर दिया। प्रमुख ताइवानी कंपनियों से हुई चर्चा प्रमुख सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी आलोक कुमार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया-ताइवान सेमीकंडक्टर फोरम में भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा शर्मा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनीष मीना शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने क्रिएटिव सेंसर्स इंक के चेयरमैन यूजीन हुआंग और कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बैठक कर भारत में कंपनी के विस्तार की योजनाओं पर चर्चा की। इसके अलावा मीडियाटेक, एडीएटीए टेक्नोलॉजी और टीआईबीए बिजनेस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ भी निवेश, संयुक्त उपक्रम और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई। सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में कदम आलोक कुमार ने उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए राज्य के औद्योगिक बुनियादी ढांचे, प्रगतिशील प्रोत्साहन नीतियों, कुशल कार्यबल और मजबूत टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने की योजनाओं की जानकारी दी। ताइवानी कंपनियों को सेंसर मॉड्यूल, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एप्लीकेशन इंजीनियरिंग, परीक्षण और सप्लाई चेन के व्यापक स्थानीयकरण में निवेश के अवसरों से अवगत कराया गया। राष्ट्रीय योजनाओं के साथ कदमताल योगी सरकार राज्य की रणनीति को आईएसएम 2.0, ईसीएमएस और एमपीएमएस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 और उत्तर प्रदेश एफडीआई नीति-2023 के अनुरूप आगे बढ़ा रही है। इन्वेस्ट यूपी, यीडा तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग निवेशकों को औद्योगिक बुनियादी ढांचे, नीतिगत प्रोत्साहनों और सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। एनसीआर की निकटता और मजबूत सप्लायर नेटवर्क बना आकर्षण निवेशकों के सामने उत्तर प्रदेश के बड़े लैंड बैंक, एनसीआर से निकटता, कुशल कार्यबल, मजबूत आपूर्तिकर्ता आधार और तेजी से विस्तार कर रहे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को प्रमुख निवेश लाभ के रूप में प्रस्तुत किया गया। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में स्थापित करना है।

यूपी में बाढ़ के बीच योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थान पहुंचाया

बाढ़ के बीच योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया 4.02 लाख लंच पैकेट और 79 हजार से अधिक बाढ़ राहत किट प्रभावितों को वितरित की गईं 1072 मेडिकल टीमें रख रहीं स्वास्थ्य का ध्यान, 24 जिलों में राहत-बचाव अभियान जारी   बाढ़ संकट में सरकार की तत्परता बनी सुरक्षा कवच, अब तक नहीं होने दी कोई जनहानि अयोध्या में जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया से सूचना मिलते ही परिवार को पहुंचाई मदद रायबरेली में उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने प्रभावित परिवारों को वितरित की राहत सामग्री लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार का राहत और बचाव अभियान लगातार तेज गति से जारी है। सरकार की सक्रियता और प्रशासन की तत्परता से बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि शुक्रवार को ही 4,799 लोगों का रेस्क्यू किया गया। राहत अभियान के तहत अब तक 4.02 लाख से अधिक लंच पैकेट और 79,666 बाढ़ राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। 1,821 नाव एवं मोटरबोट रेस्क्यू कार्य में लगाई गई हैं। बाढ़ से अब तक कोई जनहानि की सूचना नहीं है। 6 हजार से ज्यादा लोग शरणालय में रह रहे वर्तमान में 24 जिलों में बाढ़ का असर है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी और राहत कार्य किया जा रहा है। अब तक 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके साथ ही 1,313 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें 6 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं। 4 लाख से ज्यादा लंच पैकेट किए वितरित बाढ़ के बीच प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चल रहा है। बाढ़ की शुरूआत से अब तक 4.02 लाख से अधिक लंच पैकेट और 79 हजार से अधिक बाढ़ राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। शुक्रवार को भी 38 हजार से ज्यादा लंच पैकेट और 6 हजार से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटी गईं। इससे प्रभावित लोगों को संकट की स्थिति में तत्काल भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी सरकार का विशेष फोकस बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी सक्रिय रखा गया है। प्रदेश में अब तक 1,072 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5.75 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 2 लाख से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। 1,821 नाव-मोटरबोट से लगातार रेस्क्यू जलभराव और बाढ़ के कारण जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां नाव और मोटरबोट के जरिए राहत एवं बचाव दल पहुंच रहे हैं। अब तक 1,821 नाव एवं मोटरबोट का प्रयोग किया जा चुका है। इससे प्रभावित गांवों में फंसे लोगों को निकालने और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है। अब तक बाढ़ से कोई व्यक्ति या पशुहानि दर्ज नहीं हुई है, जो रेस्क्यू ऑपरेशंस और निगरानी व्यवस्था की अहम उपलब्धि है। बाढ़ से मकान क्षतिग्रस्त होने के 485 मामलों में प्रभावित परिवारों को सहायता वितरित की जा चुकी है। प्रभावित 24 जिले अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी। सोशल मीडिया से सूचना पर पहुंची मदद, आवास का दिया भरोसा अयोध्या में सोशल मीडिया के माध्यम से परिवार की परेशानी की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। बीकापुर के खजुराहट गांव के बरगदीया मजरे में प्रभावित अर्पिता पाण्डेय के परिवार को खाद्य सामग्री, सब्जियां, तिरपाल, बर्तन, गैस सिलेंडर सहित जरूरी गृह उपयोगी सामान उपलब्ध कराया गया। विधायक डॉ. अमित चौहान भी राहत सामग्री लेकर पहुंचे। प्रशासन ने परिवार को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्राथमिकता से शुरू कर दी है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे राज्यमंत्री रायबरेली में उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रदेश सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी तरह की शिथिलता न बरतने और प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक समयबद्ध तरीके से राहत व सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।

UP में 81 शिक्षकों का सम्मान, बेसिक के 61 और माध्यमिक शिक्षा के 20 शिक्षक हुए पुरस्कृत

सभी 81 शिक्षकों को सीएम योगी ने अपने हाथों से दिया पुरस्कार शिक्षक दिवस पर बेसिक शिक्षा के 61 और माध्यमिक शिक्षा के 20 शिक्षक हुए पुरस्कृत 10 शिक्षकों को ही सीएम के हाथों मिलना था पुरस्कार, मुख्यमंत्री ने पहले से तय कार्यक्रम को बदलकर सभी को किया सम्मानित गोरखपुर,  शिक्षा व्यवस्था के उत्थान और शिक्षकों के सम्मान के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कितने संवेदनशील हैं, इसकी बानगी शनिवार को शिक्षक दिवस पर योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित सम्मान समारोह में देखने को मिली। राज्य अध्यापक पुरस्कार और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित सभी 81 शिक्षकों को सीएम ने अपने हाथों पुरस्कार दिया, जबकि तय कार्यक्रम के अनुसार उन्हें सिर्फ 10 शिक्षकों को ही सम्मानित करना था। मुख्यमंत्री की इस पहल से प्रदेश भर से आए शिक्षक मुदित हो गए। सीएम योगी को मंच पर राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित बेसिक शिक्षा विभाग के 5 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 5 यानी कुल 10 शिक्षकों को ही अपने हाथ से पुरस्कृत करना था। पर, जब शिक्षकों को पुरस्कृत करने की बारी आई तो मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी चयनित 81 शिक्षकों की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा और वह सभी को खुद पुरस्कृत करेंगे। इसके बाद पहले से तय 10 शिक्षकों के बाद सीएम योगी ने अन्य सभी 71 शिक्षकों को भी मंच पर बुलवाकर खुद पुरस्कृत किया।  मुख्यमंत्री ने पुरस्कृत हुए शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि के रूप में 25 हजार रुपये का प्रतीकात्मक चेक सौंपा। महिला शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने और पुरुष शिक्षकों को बेसिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने अंगवस्त्र पहनाया। बाद में सभी पुरस्कृत शिक्षकों को मां सरस्वती की प्रतिमा भी भेंट की गई। उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त इन शिक्षकों को आजीवन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में प्रतिवर्ष 4000 किलोमीटर की निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। साथ ही इनकी सेवानिवृत्ति की सीमा भी दो वर्ष बढ़ जाएगी।  बेसिक शिक्षा के इन शिक्षकों को सीएम योगी ने दिया राज्य अध्यापक पुरस्कार 1. संगीता शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय धनौली, अकोला, आगरा) 2. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौबारा, गजरौला, अमरोहा) 3. प्रीति मिश्रा (सहायक अध्यापक, पीएम श्री उच्च विद्यालय बेलवा, पयागपुर, बहराइच) 4. सलमा खान (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय आदर्श, नगर क्षेत्र, बलरामपुर) 5. उर्मिला देवी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय खेमईपुर, भदोही) 6. रचना कपूर (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नंगली छोइया, हल्दौर, बिजनौर) 7. किरन देवी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अंबियापुर, बदायूं) 8. जूही मलिक (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय स्याना, बुलंदशहर) 9. उषा सिंह (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय सैदपुर, शहबादगंज, चंदौली) 10. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अमानाबाद, फर्रुखाबाद) 11. अर्चना पांडेय (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट स्कूल पर्थला खंजरपुर, गौतमबुद्धनगर) 12. ज्योत्स्ना गोस्वामी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय ननकागढ़ी, राजापुर, गाजियाबाद) 13. शुचि त्यागी (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पिपलैडा, दहौलाना, हापुड़) 14. विजया अवस्थी (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय मंसूरनगर, पिहानी, हरदोई) 15. पल्लवी चतुर्वेदी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सासनी, हाथरस) 16. प्रीति श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पठाकरका, बंगरा, झांसी) 17. डॉ. सुमनलता यादव (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कुंवरपुर बनवारी, छिबरामऊ, कन्नौज) 18. डॉ. कामायनी शर्मा (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय औरोताहरपुर, ककवन, कानपुर नगर) 19. सुमन कुशवाहा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर, नेवादा, कौशाम्बी) 20. प्रीति गुप्ता (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौकी बस स्टैंड, बिरधा, ललितपुर) 21. विनीता (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू, गोसाईगंज, लखनऊ) 22. सीमा कुमारी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय महटौली, घिरोर, मैनपुरी) 23. प्रतिभा रानी भारती (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, हर्रा, सरूरपुर, मेरठ) 24. सुनीता रानी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां, भगतपुर, मुरादाबाद) 25. आरती शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रुस्तमगढ़, मुज्जफरनगर) 26. वैलेंटिना विक्टर (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अहमदनगर, नगर क्षेत्र, रामपुर) 27. अमिता टंडन (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय राजपुर रानी, श्रावस्ती) 28. मीरा सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह, चोपन, सोनभद्र) 29. प्रीति भारती (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवलगंज, हसनगंज, उन्नाव) 30. नीलम राय (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह, वाराणसी) 31. सय्यदा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु, मरौरी, पीलीभीत) 32. सुनीत मित्र पांडेय (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गोकुला, नवाबगंज, गोंडा) 33. अमर सिंह (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय बहरावद, अतरौली, अलीगढ़) 34. राम मिलन गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च विद्यालय, नसीरपुर छितौना, जहांगीरगंज, अम्बेडकरनगर) 35. पंकज कुमार द्विवेदी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, ठेउंगा, सोहावल, अयोध्या) 36. प्रदीप कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरवपुर, कोयलसा, आजमगढ़) 37. अजीत कुमार श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, इब्राहिमाबाद, मुरली छपरा, बलिया) 38. राहुल कुमार शुक्ल (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बहुता, त्रिवेदीगंज, बाराबंकी) 39. हरिशंकर त्रिपाठी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा, मानिकपुर, चित्रकूट) 40. ओमवीर सिंह (प्रधानाध्यापक, पीएम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय पिदौरा, मरेहरा, एटा) 41. वीरेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय ताखा, इटावा) 42. आनंद कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर, ऐरायां, फतेहपुर) 43. संतोष कुशवाहा (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय मनिहारी, गाजीपुर) 44. नीतिराज सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, चुनकी का डेरा, सुमेरपुर, हमीरपुर) 45. राजेश कुमार उपाध्याय (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बारीगांव, घुघली, महराजगंज) 46. संजय कुमार मिश्र (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय गरियांव, मुंगरा बादशाहपुर, जौनपुर) 47. विनीत कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अन्ता, रसूलाबाद, कानपुर देहात) 48. धनंजय प्रताप सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला, कासगंज) 49. प्रमोद कुमार (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रतासिया, बेहजम, लखीमपुर खीरी) 50. नवीन कुमार त्रिपाठी (सहायक अध्यापक, पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालय उनवल प्रथम, बांसगांव, गोरखपुर) 51. ओमप्रकाश तिवारी (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय बिलखी, कबरई, महोबा) 52. अनिल कुमार मौर्य (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय दौलसेपुर, रानीपुर, मऊ) 53. दयानंद मिश्रा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सिद्धि, पहारी, मिर्जापुर) 54. डॉ. देवेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय बरना, प्रतापगढ़) 55. रामलखन मौर्या (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिरसा, प्रतापपुर, प्रयागराज) 56. बृजकिशोर (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय रसूलपुर, गुन्नौर, सम्भल) 57. अरुण कुमार गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय धनौरा, ददरौल, शाहजहांपुर) 58. दिनकर चौहान (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गंगेरू प्रथम, कांधला, शामली) 59. महेश कुमार (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बूड़ा, बर्डपुर, सिद्धार्थनगर) 60. अतुल शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अडावेनिया ग्रांट, एलिया, सीतापुर) 61. सत्येंद्र कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय साढापुर, प्रतापपुर कमैचा, सुल्तानपुर) सीएम के हाथों माध्यमिक विद्यालयों के इन शिक्षकों को मिला राज्य अध्यापक पुरस्कार 1. रेनू तोमर (प्रधानाचार्य, जवाहर … Read more

CM योगी ने शिक्षकों को दी बधाई, कहा- आधुनिक शिक्षा और नवाचार से नई पीढ़ी को दे रहे नई दिशा

आधुनिक शिक्षा और नवाचार से नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ रहे शिक्षक : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   शिक्षक दिवस पर सीएम योगी का प्रदेश के शिक्षकों के नाम खास संदेश मुख्यमंत्री ने सेल्फी वीडियो साझा कर शिक्षकों को दी शुभकामनाएं   काशी, सारनाथ और नैमिषारण्य तक यूपी की प्राचीन ज्ञान परंपरा का किया उल्लेख लखनऊ,   शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने शनिवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सेल्फी वीडियो साझा करते हुए उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा को याद किया और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की विशिष्ट ज्ञान परंपरा को आधुनिक स्वरूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले सभी गुरुजनों और शिक्षकों को वह शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई देते हैं। उत्तर प्रदेश प्राचीन काल से ज्ञान, साधना और संस्कारों की पावन भूमि रहा है। काशी ने विश्व को ज्ञान का प्रकाश दिया, जबकि सारनाथ में भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश दिया था। अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज भी सनातन ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र रहे हैं। मुख्यमंत्री ने शुकतीर्थ और नैमिषारण्य की ज्ञान परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब पांच हजार वर्ष पूर्व शुकतीर्थ में महर्षि शुकदेव जी ने श्रीमद्भागवत का प्रथम वाचन किया था। वहीं नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों की साधना ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। इसी भूमि से आयुर्वेद, अध्यात्म, दर्शन और भारतीय ज्ञान-विज्ञान की महान परंपराएं विकसित हुईं। सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश के शिक्षक इसी गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, तकनीक और नवाचार से जोड़कर नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति मंगलमय शुभकामनाएं व्यक्त कीं।