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यूपी में डेयरी क्षेत्र में साहीवाल गाय की भूमिका और योगी सरकार की योजनाओं में योगदान

लखनऊ  साहीवाल गाय (Sahiwal Cow) भारत की सबसे उन्नत देसी दुधारू नस्ल है, जो पंजाब के साहीवाल जिले (अब पाकिस्तान में) से उत्पन्न हुई। योगी सरकार की मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना और नंद बाबा दुग्ध मिशन में साहीवाल को प्राथमिक नस्ल के रूप में चुना गया है। 2025 तक 11,000+ साहीवाल गायें UP के किसानों को ₹80,000 अनुदान (2 गायों पर) से वितरित की गईं, जिससे दूध उत्पादन 10-15 लीटर/दिन और आय ₹50,000+ मासिक तक पहुंची। साहीवाल का दूध A2 प्रोटीन युक्त, FAT 4.5-5.5%, SNF 9%+ और स्वास्थ्यवर्धक है, जो बच्चों की वृद्धि, इम्यूनिटी में लाभकारी है। यह नस्ल गर्मी सहनशील, रोग प्रतिरोधक और कम चारा वाली है, जो UP Dairy Policy 2022 के तहत आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन रही है। साहीवाल गाय की प्रमुख विशेषताएं: वैज्ञानिक और व्यावहारिक विश्लेषण विशेषता    विवरण    लाभ (UP संदर्भ में) 1. शारीरिक संरचना    – रंग: गहरा लाल-भूरा (महोगनी रेड)। – सींग: छोटे, मध्यम मुड़े हुए। – कान: मध्यम, लटकते हुए। – कूबड़: बड़ा, मांसल। – वजन: वयस्क गाय 400-500 किग्रा, बैल 600-700 किग्रा।    – मजबूत शरीर: UP के ग्रामीण फार्म में आसान रखरखाव। – आकर्षण: बाजार में उच्च मूल्य। 2. दूध उत्पादन क्षमता    – प्रतिदिन: 10-15 लीटर (औसत), अधिकतम 25+ लीटर। – लैक्टेशन पीरियड: 300-320 दिन। – वार्षिक: 3,000-4,000 लीटर। – FAT: 4.5-5.5%, SNF 9-9.5%।    – उच्च आय: ₹50/लीटर पर ₹5,000-7,500 मासिक (2 गायें)। – A2 दूध: प्रीमियम ₹80-120/लीटर। 3. दूध की गुणवत्ता    – A2 बीटा-कैसिन: पाचन में आसान, एलर्जी-मुक्त। – उच्च प्रोटीन, कैल्शियम: हड्डी/दांत मजबूत। – प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट: कैंसर/हृदय रोग में लाभ।    – स्वास्थ्य बाजार: UP Mart, Amul, Parag पर डिमांड। – निर्यात: G20 गिफ्टिंग में चयन। 4. पर्यावरण अनुकूलता    – गर्मी सहनशील: 48°C तक। – कम चारा: 30-35 किग्रा हरा/6-8 किग्रा सूखा चारा। – रोग प्रतिरोधक: FMD, ब्रूसेलोसिस, मास्टाइटिस।    – UP जलवायु: गर्मी/सूखे में जीवित। – कम लागत: ₹1,800 मासिक रखरखाव। 5. प्रजनन और दीर्घायु    – पहला ब्यांत: 34-38 माह। – ब्यांत अंतराल: 12-13 माह। – उम्र: 16-20 वर्ष (12+ लैक्टेशन)।    – दीर्घकालिक लाभ: 1 गाय से 12+ बछड़े। – बछड़ा मूल्य: ₹40,000-60,000। 6. आर्थिक लाभ    – गोबर: 18-22 किग्रा/दिन (खाद/गैस/पेंट)। – गौमूत्र: 6-8 लीटर/दिन (दवा/कीटनाशक)।    – अतिरिक्त आय: ₹12,000+ मासिक (गोबर पेंट)। उत्तर प्रदेश में साहीवाल गाय का योगदान: योगी सरकार की योजनाओं से •    स्वदेशी गौ संवर्धन योजना: 2 साहीवाल गायें + ₹80,000 अनुदान → 60 लीटर दूध/दिन। •    नंदिनी कृषक समृद्धि योजना: 10 साहीवाल गायें + ₹11.80 लाख → 150 लीटर/दिन। •    NDDB-PCDF MoU: पंजाब/हरियाणा से उच्च गुणवत्ता साहीवाल आयात, कानपुर/गोरखपुर प्लांट में प्रोसेसिंग। •    परिणाम: 38.78 मिलियन टन दूध में 12%+ साहीवाल योगदान। 41,000+ SHG महिलाएं लाभान्वित। प्रेरक उदाहरण: UP में साहीवाल से समृद्धि 1.    आजमगढ़ के रामू यादव (SC किसान):  o    2024: 2 साहीवाल गायें + ₹80,000। o    2025: 70 लीटर दूध/दिन, ₹50,000 मासिक। A2 दूध से प्रीमियम बिक्री। 2.    झांसी SHG (सुमित्रा देवी):  o    10 साहीवाल गायें नंदिनी से। o    अब: ₹1.2 लाख मासिक, गोबर पेंट निर्यात। योगी आदित्यनाथ का उद्धरण •    लॉन्च 2023:  "साहीवाल गाय दूध की रानी है। ₹80,000 अनुदान से किसान आत्मनिर्भर, A2 दूध से स्वास्थ्य क्रांति!" निष्कर्ष: साहीवाल – UP का दुग्ध स्वर्ण साहीवाल गाय उच्च दूध, A2 गुणवत्ता और कम रखरखाव से योगी सरकार की डेयरी क्रांति का प्रतीक है। आवेदन करें, साहीवाल अपनाएं! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश

विशेष आर्टिकल- मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना: देसी गाय पालन से किसानों की आय दोगुनी, 80 हजार तक अनुदान

लखनऊ  मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 6 जून 2023 को लॉन्च की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू यह योजना स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों (साहीवाल, गिर, थार पारकर, हरियाणा) के संवर्धन को बढ़ावा देती है, ताकि दूध उत्पादन बढ़े, ग्रामीण रोजगार सृजित हो और देसी नस्लें संरक्षित रहें। योजना के तहत दो गायों की यूनिट स्थापित करने पर 40% अनुदान (अधिकतम ₹80,000) मिलता है, जो कुल लागत (लगभग ₹2 लाख) का बड़ा हिस्सा कवर करता है। 2025 तक 2,100+ इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं, जिससे दूध उत्पादन 38.78 मिलियन टन (देश का 16%) पहुंचा। यह योजना UP Dairy Policy 2022 के साथ एकीकृत है, जो महिला SHG, SC/ST/OBC को प्राथमिकता देती है। आवेदन पोर्टल: nandbabadugdhmission.up.gov.in। योजना का उद्देश्य: देसी गौ-पालन से आत्मनिर्भरता •    दूध उत्पादन वृद्धि: प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता बढ़ाना। •    नस्ल संरक्षण: स्वदेशी गायों (हरियाणा, पंजाब, गुजरात से खरीद) को प्रोत्साहन। •    आय वृद्धि: किसानों की मासिक आय ₹5,000 से ₹50,000+ तक। •    रोजगार सृजन: ग्रामीण क्षेत्रों में 1 लाख+ परिवार लाभान्वित। •    महिला सशक्तिकरण: SHG के माध्यम 40% कोटा। योजना के प्रमुख लाभ: विस्तृत संरचना योजना दो गायों की इकाई पर फोकस करती है, जिसमें ट्रांसपोर्टेशन, इंश्योरेंस और अन्य खर्च शामिल हैं: लाभ की श्रेणी    विवरण    प्रभाव (2025 तक) वित्तीय अनुदान    – 40% सब्सिडी: कुल ₹2 लाख पर ₹80,000 (प्रति गाय ₹40,000)। – बैंक लोन: शेष पर 5% ब्याज सब्सिडी (5 वर्ष)। – SC/ST/OBC: 35% अतिरिक्त।    – आय: 50-60 लीटर दूध/दिन से ₹20,000+ मासिक। – NPA: 2.5% से कम। गाय खरीद और परिवहन    – नस्लें: साहीवाल (हरियाणा/पंजाब), गिर (गुजरात), थार पारकर (राजस्थान)। – ट्रांसपोर्ट: 40% अनुदान (अधिकतम ₹40,000/गाय)।    – उन्नत नस्ल: 8-12 लीटर दूध/गाय/दिन। – संरक्षण: 11,000+ देसी गायें। इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता    – शेड/फीड: ₹50,000 तक सब्सिडी। – पशु बीमा: ₹10 लाख कवरेज (मुफ्त प्रथम वर्ष)। – चारा: 50% सब्सिडी (1 वर्ष)।    – स्वास्थ्य: रोगमुक्त पशुधन। – बाजार: PCDF/Amul लिंकेज। प्रशिक्षण और मार्केटिंग    – 15-दिवसीय कोर्स: RSETI/CFC में मुफ्त। – डिजिटल भुगतान: तत्काल ट्रांसफर। – UP Mart: ऑनलाइन बिक्री।    – गुणवत्ता: FAT/SNF सुधार। – अतिरिक्त आय: गोबर पेंट से ₹10,000+। विशेष प्राथमिकता    – महिलाएं/SHG: 40% कोटा। – ग्रामीण फोकस: 18 जिलों (झांसी, गाजीपुर, देवरिया आदि) में प्राथमिकता।    – 41,000+ महिलाएं जुड़ीं। – पलायन रोक: गांव में स्थिरता। आवेदन प्रक्रिया: •    पात्रता: UP निवासी, 18+ आयु, 2+ गायें न हों, शेड उपलब्ध। •    दस्तावेज: आधार, बैंक पासबुक, भूमि प्रमाण-पत्र। •    चरण: ऑनलाइन आवेदन → ई-लॉटरी → सत्यापन → अनुदान वितरण। •    अंतिम तिथि: 23 अगस्त 2025 (द्वितीय चरण)। हेल्पलाइन: 1800-XXX-XXXX। प्रेरक उदाहरण: योजना से जीवन परिवर्तन 1.    झांसी के शाश्वत सिंह (दो गायों की यूनिट):  o    2024: ₹80,000 अनुदान से साहीवाल गायें खरीदीं। o    2025: ₹25,000 मासिक आय, परिवार सशक्त। "योजना ने पलायन रोका।" 2.    गाजीपुर के अमितेश सिंह:  o    अनुदान: गिर नस्ल पर ₹80,000। o    अब: 50 लीटर दूध/दिन, ₹40,000 मासिक। SC लाभार्थी के रूप में अतिरिक्त 35%। 3.    देवरिया के पशुपालक:  o    40% अनुदान: थार पारकर गायें। o    प्रभाव: आय दोगुनी, SHG में महिला भागीदारी। योगी आदित्यनाथ के उद्धरण: योजना पर दृष्टि •    लॉन्च (6 जून 2023):  *"स्वदेशी गौ संवर्धन से देसी नस्लें संरक्षित होंगी। ₹80,000 अनुदान से किसान आत्मनिर्भर, दूध क्रांति आएगी।" •    बजट समीक्षा 2025:  *"योजना से दूध उत्पादन बढ़ेगा, ग्रामीण UP मजबूत। स्वदेशी गौ-पालन हमारी सांस्कृतिक धरोहर।" निष्कर्ष: स्वदेशी गौ संवर्धन – UP का दुग्ध भविष्य मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना ₹80,000 अनुदान से दो गायें, एक परिवार की समृद्धि का मंत्र दे रही है। योगी सरकार का प्रयास विकसित भारत-2047 को मजबूत करेगा। आवेदन करें, लाभ लें! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश!

योगी सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर हो रहे अग्रसर

मुख्यमंत्री योगी के सख्त निर्देशों का असर, उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में आई उल्लेखनीय कमी योगी सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर हो रहे अग्रसर 20 प्रमुख जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों और सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राज्य सरकार के सक्रिय प्रयासों से अब किसान फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। कम हुई पराली जलाने की घटनाएं मथुरा, पीलीभीत, सहारनपुर, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, कौशांबी, एटा, हरदोई, जालौन, फतेहपुर, महराजगंज, कानपुर देहात, झांसी, मैनपुरी, बहराइच, इटावा, गोरखपुर, अलीगढ़, उन्नाव और सीतापुर जैसे कुल 20 जनपदों में पराली जलाने की घटनाओं में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है। इसमें भी एटा, कौशांबी, सीतापुर और उन्नाव जैसे जनपदों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। यह स्थिति बताती है कि मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों का जमीनी असर दिखाई देने लगा है। सेटेलाइट से की जा रही निगरानी सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया था कि पराली जलाने की घटनाओं की सेटेलाइट से निगरानी की जाए। साथ ही किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जाए। प्रशासन द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों, कंपोस्टिंग तकनीक और बायो-डीकंपोजर के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जुर्माने और जिम्मेदारी की सख्त व्यवस्था राज्य सरकार ने पराली जलाने वालों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क तय किया है। इसके अनुसार, दो एकड़ से कम क्षेत्र पर ₹2,500, दो से पांच एकड़ तक ₹5,000, पांच एकड़ से अधिक पर ₹15,000 क्षतिपूर्ति शुल्क लगेगा। साथ ही प्रत्येक 50 से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है, जो अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करेंगे।

517 जनजातीय बहुल गांवों में सैचुरेशन आधारित विकास, धरती आबा अभियान बना बदलाव की धुरी

जनजातीय गौरव को नई पहचान, योगी सरकार ने बदली वंचित समाज की तस्वीर 517 जनजातीय बहुल गांवों में सैचुरेशन आधारित विकास, धरती आबा अभियान बना बदलाव की धुरी थारू, बुक्सा और अन्य जनजातियों के लिए योगी सरकार का सुरक्षा कवच, आवास से आजीविका तक बड़ा विस्तार थारू हस्तशिल्प कंपनी ने खोले राष्ट्रीय बाजार के दरवाजे, 371 समूहों को मिला आर्थिक संबल एकलव्य मॉडल स्कूलों और सर्वोदय छात्रावासों से जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा बनी नई ताकत पीएम जनमन से वन क्षेत्रों में बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल की सीधी पहुंच, बुक्सा जनजाति के 815 परिवार हुए संतृप्त परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना से युवाओं को बड़ा लाभ, सैकड़ों की प्रशासनिक सेवाओं में एंट्री विमुक्त और घुमंतू समुदायों के लिए योगी सरकार का बड़ा हस्तक्षेप, शिक्षा और निवास योजनाओं से जीवन में आया स्थायित्व लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जनजातीय समाज के जीवन में जो बदलाव आया है, वह सिर्फ योजनाओं का विस्तार नहीं बल्कि सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना की एक बड़ी कहानी है। लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन समुदायों को योगी सरकार ने न केवल मुख्य धारा में जगह दिलाई बल्कि उनकी परंपराओं, जरूरतों और सपनों को शासन की प्राथमिकता बनाया। मुख्यमंत्री की सोच हमेशा यही रही है कि विकास तभी सार्थक है जब वंचितों को वरीयता मिले और अंत्योदय से सर्वोदय का रास्ता खुले। प्रदेश में थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी, राजी, गोंड, बैगा, सहरिया, मुसहर और चेरो जैसी जनजातियों के 11 लाख से अधिक लोगों के जीवन को बदलने के लिए सरकार ने योजनाएं जमीन पर उतारीं। वनाधिकार अधिनियम के तहत आवासीय अधिकार दिए गए, मुख्यमंत्री आवास योजना से वनवासियों को पक्के घर मिले और पीएम जनमन योजना के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाओं को सीधे उनके द्वार तक पहुंचाया गया। खास तौर पर बुक्सा जनजाति के 815 परिवारों को हर सुविधा से संतृप्त कर एक नई मिसाल पेश की गई। 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' और 'धरती आबा जनभागीदारी अभियान' ने जनजातीय इलाकों में विकास की असली तस्वीर बदली। 26 जिलों के 517 गांवों तक पहुंचकर सरकार ने कनेक्टिविटी से लेकर आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला, जनधन, किसान सम्मान निधि और विश्वकर्मा जैसी योजनाओं का सैचुरेशन कराया। सोनभद्र, ललितपुर, कुशीनगर, बलरामपुर से लेकर बिजनौर तक इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर लगातार बढ़े हैं। जनजातीय संस्कृति को संजोने पर भी भरपूर जोर दिया गया। बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू संग्रहालय स्थापित हुआ और मिर्जापुर, सोनभद्र, महराजगंज में नए संग्रहालयों पर तेजी से काम चल रहा है। थारू समुदाय की कला और कौशल को राष्ट्रीय बाजार दिलाने के लिए लखीमपुर खीरी में थारू हस्तशिल्प कंपनी बनाई गई। इसमें जुड़े 371 समूहों को रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड देकर आत्मनिर्भरता की राह दिखाई गई। शिक्षा को जनजातीय उन्नति का आधार बनाते हुए एकलव्य मॉडल स्कूल, सर्वोदय छात्रावास और आश्रम पद्धति विद्यालयों में बच्चों को पूरी सुविधा मिल रही है। लखीमपुर खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर के एकलव्य विद्यालयों ने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को नई दिशा दी है। ये पहलें साफ बताती हैं कि योगी सरकार जनजातीय बच्चों की शिक्षा को भविष्य निर्माण का सबसे मजबूत आधार मानती है। मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि विकास की असली कसौटी भागीदारी है। पुलिस भर्ती में आरक्षित सभी सीटें पूरी तरह भरना इसी परिवर्तन का संकेत है। परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना से 700 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन, साढ़े 06 हजार युवाओं को प्रशिक्षण और आठ उच्चस्तरीय केंद्रों की स्थापना ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोली हैं। विमुक्त और घुमंतू समुदायों को भी सरकार ने बराबर महत्व दिया। नट, बंजारा, सांसी, कंजर, कालबेलिया जैसे समुदायों के लिए 101 आश्रम पद्धति विद्यालय, 9 सर्वोदय विद्यालय और अनेक छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। इन समुदायों को सामाजिक सुरक्षा, आवास और आजीविका से जोड़कर सरकार ने उन्हें सम्मानजनक जीवन की राह दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया

भारत की स्वाधीनता के पक्षधर थे भगवान बिरसा मुंडाः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया भगवान बिरसा मुंडा ने दिया नारा, देश हमारा है तो राज भी हमारा ही होना चाहिए, विदेशी हुकूमत भारत में राज न करेः मुख्यमंत्री उत्सव में उत्तर प्रदेश आकर 22 राज्यों के कलाकार बन रहे सहभागी बोले सीएम- जनजातियों को दिया जा रहा विकास की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने विकास कार्यों को भी गिनाया लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा भारत की स्वाधीनता के पक्षधर थे। इसके लिए उन्होंने अभियान चलाया, जिस पर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया। मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्होंने रांची की जेल में अंतिम सांस ली। उन्होंने जनजाति समुदाय को नारा दिया कि अपना देश-अपना राज। देश हमारा है तो राज भी हमारा ही होना चाहिए, विदेशी हुकूमत भारत में राज न करे। धरती आबा को श्रद्धांजलि देते हुए पीएम मोदी ने 15 नवंबर को जनजाति दिवस के रूप में आयोजित करने की प्रेरणा दी। सीएम योगी ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गुरुवार को ढोल-नगाड़ों की थाप से जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ किया। सीएम ने यहां लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सीएम ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मेजबान उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के जनजाति कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति भी दी। सीएम योगी ने इस वर्ष की विशेषता बताते हुए इसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पहली से 15 नवंबर तक देश में जनजाति गौरव पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। सरकार द्वारा जनजाति समुदाय को समाज व राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने व सम्मान के साथ आगे बढ़ने के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जा रहा है। 22 राज्यों के कलाकार उत्तर प्रदेश आकर बन रहे सहभागी सीएम योगी ने कहा कि सांस्कृतिक समागम में 22 राज्यों के कलाकारों को जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। कलाकार सहभागिता की दृष्टि से अरुणाचल प्रदेश पार्टनर स्टेट है। गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, सिक्किम, उड़ीसा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मिजोरम, गोवा, केरल, पश्चिम बंगाल, असम, हिमाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, झारखंड व पंजाब के कलाकार उत्तर प्रदेश में आकर जनजाति भागीदारी उत्सव में सहभागी बन रहे हैं। यहां हस्तशिल्प व कला प्रदर्शनी, व्यंजन मेला और जनजाति साहित्य को समर्पित साहित्यिक व विकास मंच भी है। जनजाति समुदाय की शिक्षा का बढ़ा स्तर, मिल रहा शासन की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने कहा कि जनजातीय समुदाय की आबादी यूपी में कम है। पहले सरकारी नौकरी के विज्ञापन निकालते थे तो अनुसूचित जाति की पूरी सीटें नहीं भरी पाती थीं। अभी हाल में 60,244 पुलिस की भर्ती की गई तो इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें उसी समाज के युवाओं से भरी गईं। यह चीजें दिखाती हैं कि उनके शिक्षा का स्तर, भागीदारी बढ़ी है। शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। जनजातियों को दिया जा रहा विकास की योजनाओं का लाभ सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने तय किया कि उत्तर प्रदेश में जितनी भी जनजातियां हैं, उन्हें अधिकार प्राप्त हो और उन्हें सेचुरेशन के लक्ष्य तक पहुंचाने की दिशा में कार्य हो। थारू, मुसहर, चेरो, बुक्सा, सहरिया, कोल, गौड़ आदि जनजातियों को शासन की सभी योजनाओं से आच्छादित करने के लिए सरकार ने मिशन मोड पर अभियान चलाया। परिणामस्वरूप ज्यादातर जनजातियों को विकास की योजनाओं (कनेक्टिविटी, पेयजल, बिजली, पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत) का लाभ दिया जा रहा है। सीएम ने की प्रधानमंत्री आदिवासी न्याय महाभियान की चर्चा सीएम ने कहाकि जनजाति समुदाय के लिए पीएम जनमन योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान के माध्यम से अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। बिजनौर में बुक्सा जनजाति को सूची में श्रेणीबद्ध किया गया है। इसके तहत 815 परिवारों को, इसमें बुक्सा जनजाति के 145 पीएम आवास व समस्त घरों के विद्युतीकरण, पेयजल, मोबाइल मेडिकल यूनिट, आंगनबाड़ी सेंटर, पांच बसावटों में मोबाइल टावर, पांच मल्टीपर्पज सेंटर व पांच वनधन केंद्र स्वीकृत किए जा चुके हैं। जनजातीय बाहुल्य 517 गांवों को सभी योजनाओं से जोड़ने का किया गया कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जितनी भी अनुसूचित जनजाति की बस्तियां हैं, धरतीआबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत उन्हें सभी सुविधाओं से आच्छादित किया जा रहा है। इसके लिए 26 जनपदों के 47 ब्लॉक व 517 ग्रामों को चिह्नित किया है। इनमें सोनभद्र में सर्वाधिक 176 गांव, बलिया के 61, ललितपुर के 36, देवरिया, लखीमपुर खीरी व कुशीनगर के 34-34, गाजीपुर के 26, मीरजापुर के 20, गोरखपुर के 18, चंदौली के 17, बलरामपुर के 16, पीलीभीत, प्रयागराज व सिद्धार्थनगर के 7-7, बिजनौर के 5, बहराइच व बस्ती के तीन-तीन, बाराबंकी, भदोही, महराजगंज, श्रावस्ती के दो-दो, अंबडेकरनगर, महोबा, संतकबीरनगर, जौनपुर, सीतापुर के एक-एक गांव को आच्छादित करने का कार्य किया गया है। जनजातीय बाहुल्य 517 गांवों की कनेक्टिविटी से लेकर सभी योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया गया है। इनका आधार, आयुष्मान कार्ड, पीएम उज्ज्वला योजना, जाति-निवास प्रमाण पत्र, मुद्रा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम जनधन योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम विश्वकर्मा योजना, राशन कार्ड आदि की व्यवस्था के साथ ही यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को डबल इंजन सरकार ने आच्छादित करने की स्वीकृति दी। जनजाति गौरव की पुनर्स्थापना के साथ ही समाज को बढ़ा रही डबल इंजन सरकार सीएम योगी ने अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति का जिक्र किया। कहा कि हम लोगों ने अब तक 1.50 लाख छात्रों को इन योजनाओं से लाभान्वित किया है। 9 आश्रम पद्धति विद्यालय लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, बहराइच, महराजगंज, श्रावस्ती, बिजनौर में संचालित हैं। इनके माध्यम से 2026 जनजाति छात्र-छात्राओं को शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। जनजाति छात्रों के लिए दो निःशुल्क छात्रावास का संचालन किया जा रहा है। 8 छात्रावास (लखीमपुर खीरी, चंदौली में दो-दो, बलिया, गोरखपुर, मीरजापुर, सोनभद्र में एक-एक) निर्माणाधीन हैं। जनजाति छात्रों के लिए लखीमपुर खीरी, बहराइच व सोनभद्र में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित है और ललितपुर में निर्माणाधीन है। कक्षा छह, 9 व 11 की वे छात्राएं, जो आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत नहीं हैं, उन्हें यूनिफॉर्म, साइकिल योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। सीएम ने वनाधिकार अधिनियम की … Read more

स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ साथ प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 जनपदों का पर्यवेक्षण भी करेंगे संयुक्त निदेशक

आपदा से सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठा रही योगी सरकार संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र (वाराणसी जोन) की होगी नियुक्ति स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ साथ प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 जनपदों का पर्यवेक्षण भी करेंगे संयुक्त निदेशक  आपात स्थिति को तुरंत काबू करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित रेस्क्यू ग्रुप तैयार किया जाएगा, फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर करेगा रेस्क्यू कार्य  ग्रुप के जरिए दैवीय आपदाओं, अग्निकांड, रासायनिक, जैविक, आपात स्थितियों और अन्य खतरों से निपटने के लिए मिलेगी फौरी मदद  सरकार ने यूपी अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली 2024 के तहत इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति दे दी है  योगी सरकार के निर्णय से वाराणसी जोन के 10 जनपदों की सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम  अभी तक वाराणसी में चीफ फायर ऑफिसर की देखरेख में चल रही व्यवस्था  वाराणसी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी काशी को विकास का मॉडल बनाने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार आपदाओं से जनमानस को सुरक्षित रखने के लिए और बड़ा कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अग्निशमन विभाग को आधुनिक रूप देने के निर्देश दिए थे। दैवीय आपदाओं, अग्निकांड, रासायनिक, जैविक व ऊंची इमारतों की आपात स्थितियों और अन्य खतरों से निपटने के लिए विशेष इकाइयों का गठन होगा। इसके साथ ही संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र (वाराणसी जोन) की नियुक्ति होगी।  संयुक्त निदेशक स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ साथ प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 जनपदों का पर्यवेक्षण भी करेंगे। वाराणसी जोन में किसी भी आपात स्थिति को तुरंत काबू करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित रेस्क्यू ग्रुप तैयार किया जाएगा, जो फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर रेस्क्यू कार्य करेगा। सरकार ने यूपी अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली 2024 के तहत इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति दे दी है, जिससे वाराणसी जोन की सुरक्षा में नया आयाम जुड़ेगा। विशेष रेस्क्यू ग्रुप: फर्स्ट रिस्पांडर की मजबूत टीम प्रदेश में विकास केवल अवसंरचना तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के आधुनिक दृष्टिकोण से भी जुड़ा हुआ है। काशी जैसी प्राचीन नगर में,  जहाँ धार्मिक आयोजन और पर्यटक गतिविधियाँ पूरे वर्ष चलती हैं, ऐसे में यह रेस्क्यू ग्रुप शहर को आपात स्थितियों में अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्य अग्निशमन  अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि वाराणसी में आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए संयुक्त निदेशक के नियंत्रण में विशेष रेस्क्यू ग्रुप गठित किया जाएगा। रेस्क्यू ग्रुप के सभी सदस्यों को आधुनिक उपकरणों और नवीन तकनीकों के साथ प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे वाराणसी सहित पूर्वांचल में किसी भी संकट का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। यह ग्रुप फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर रेस्क्यू कार्य संभालेगा।  संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र- वाराणसी, दस जनपदों की करेंगे निगरानी  संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र- वाराणसी, दस जनपदों की निगरानी करेंगे। वे वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, आजमगढ़, मऊ, बलिया, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र का प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण भी करेंगे। आपदा या आकस्मिक स्थितियों में रेस्क्यू दल तुरंत मौके पर पहुँच कर राहत, बचाव और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।  संयुक्त निदेशक के अधीन होगा संचालन अग्निशमन प्रक्षेत्र (वाराणसी जोन) के प्रभारी अधिकारी के रूप में संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी कार्य करेंगे, जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समकक्ष पद पर होंगे। उनके अधीन यह स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप कार्य करेगा। अभी तक यहां मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) के नेतृत्व में कार्य हो रहा है।  स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के सदस्य का पदनाम और संख्या  अग्निशमन द्वितीय अधिकारी- 01 लीडिंग फायरमैन- 02  फायर सर्विस चालक- 02 फायरमैन- 16  कुक-01

अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की अवधि 5 साल करने पर उद्यमियों को मिली बड़ी राहत

योगी सरकार का ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में बड़ा फैसला गैर-आवासीय भवनों की अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र (NOC) की वैधता को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष किया गया अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की अवधि 5 साल करने पर उद्यमियों को मिली बड़ी राहत  संवेदनशील हॉस्पिटल एवं हाई हैजार्ड इण्डस्ट्रियल भवनों पर पहले वाले नियम लागू उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली को बनाया गया आसान नए प्रारूप में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन और प्रारूप को किया गया छोटा अधिक तेजी और आसानी से ऑनलाइन आवेदन एवं फायर एन०ओ०सी० प्राप्त होगी निवेश को बढ़ावा मिलेगा,  रोजगार सृजन तथा नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा  लखनऊ योगी सरकार ने उद्यमियों को राहत देने के लिए उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली, 2024 को पहले से ज्यादा सरल बना दिया है। वर्तमान समय में अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र (NOC) विभिन्न प्रकार के भवनों के उपयोग के वर्गीकरण के आधार पर दिया जाता है। नेशनल बिल्डिंग कोड (एन०बी०सी०) के अनुसार भवनों को निम्न प्रकार में वर्गीकृत किया गया है- यह हैं रेजिडेंशियल टाइप ऑक्यूपेन्सी, एजुकेशनल टाइप ऑक्यूपेन्सी, इन्स्टीट्यूशनल टाइप ऑक्यूपेन्सी, असेम्बली टाइप ऑक्यूपेन्सी, बिजनेस टाइप ऑक्यूपेन्सी, मर्केन्टाइल टाइप ऑक्यूपेन्सी, इंस्ट्रियल टाइप ऑक्यूपेन्सी, स्टोरेज टाइप ऑक्यूपेन्सी और हैजार्डस टाइप ऑक्यूपेन्सी।  मौजूदा नियमों के अनुसार उपरोक्त भवनों के लिए वर्तमान समय में अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की अवधि आवासीय भवनों (होटल से भिन्न) के लिये 5 वर्ष और गैर-आवासीय भवनों के लिये के लिये 3 वर्ष  है। वहीं होटलों, अस्पतालों और अत्यधिक संकट वाले औद्योगिक भवनों के लिये 1 वर्ष निर्धारित है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली, 2024 के प्रावधानों में बदलाव किया है। अत्यधिक संवेदनशील हॉस्पिटल (इन्स्टीट्यूशनल ऑक्यूपेन्सी) एवं हाई हैजार्ड इण्डस्ट्रियल भवनों को छोड़कर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए शेष समस्त भवनों भवनों/ऑक्यूपेंसी के अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्रों की वैधता 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष करने का फैसला किया गया है।  योगी सरकार के इन सुधारों से निवेशकों, उद्यमियों एवं आम नागरिकों को काफी लाभ मिलेगा। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस " की नीति के तहत किया गया है। इससे उत्तर प्रदेश में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा । नए फैसले से रोजगार सृजन तथा नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा।  इसी प्रकार बिजनेस को सुविधाजनक बनाने के लिए अग्निशमन तथा आपात सेवा विभाग की एन०ओ०सी० निर्गमन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। पहले ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदकों से अपेक्षित सूचनाओं प्राप्त करने के संबंध में प्रारूप में अपूर्णता थी। क्वालीफाइड एजेंसी, फायर लिफ्ट सुरक्षा प्रमाण पत्र, विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र, अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र आदि पूर्व में सम्मलित नहीं थे। नए प्रारूप में आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन एवं फायर एन०ओ०सी० प्राप्त करने में सुगमता, सरलता पारदर्शिता और समयबद्धता रहेगी।  योगी सरकार के नए फैसले से औद्योगिक विकास, नगरीकरण, आपदाओं तथा सम्भावित अग्नि दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी । इसके साथ ही अग्नि सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ करने और ईज आफ डूइंग बिजनेस के उद्देश्यों की पूर्ति आसान हो जाएगी। इन सुधारों से आम नागरिकों को त्वरित सेवा प्राप्त होगी तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।

68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी के लिए मिला नामांकन

साउंड्स ऑफ कुंभ’ के माध्यम से  वैश्विक मंच पर प्रयागराज की दमदार दस्तक 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी के लिए मिला नामांकन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ न केवल एक आध्यात्मिक महोत्सव के रूप में प्रतिष्ठित हुआ, बल्कि यह एक वैश्विक सांस्कृतिक मील का पत्थर भी बन गया। इसी असाधारण आयोजन को समर्पित एल्बम “साउंड्स ऑफ कुंभ” को अब 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी के लिए नामांकित किया गया है। गायक-संगीतकार सिद्धांत भाटिया की परिकल्पना पर आधारित है एल्बम गायक-संगीतकार सिद्धांत भाटिया की परिकल्पना पर आधारित इस एल्बम में 12 ट्रैक सम्मिलित हैं, जिन्हें भारत और विदेशों के लगभग 50 कलाकारों ने मिलकर साकार किया है। यह एल्बम जनवरी–फरवरी में आयोजित 45 दिवसीय महाकुंभ के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भाव को संजोता है, जिसमें विश्व के कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु आस्था के इस अद्वितीय संगम का हिस्सा बने। प्राचीन मंत्रोच्चारण और बाइनॉरल बीट्स का है समायोजन प्रयागराज के घाटों पर किए गए लाइव रिकॉर्डिंग्स को प्राचीन मंत्रोच्चारण और बाइनॉरल बीट्स के साथ संयोजित करते हुए, “साउंड्स ऑफ कुंभ” महाकुंभ के दृश्यों और ध्वनियों को एक अनूठे श्रवण अनुभव में परिवर्तित करता है। यह एल्बम भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है। ऐसे में, यह सम्मान न केवल महाकुंभ की भव्यता और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक है, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में की गई सुसंगठित योजना, कुशल प्रबंधन और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयासों का भी प्रमाण है। ‘साउंड्स ऑफ कुंभ’ के माध्यम से प्रयागराज आज श्रद्धा, संस्कृति और नवाचार का वैश्विक प्रतीक बनकर उभरा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गुजरात के एकता नगर में भारत पर्व समारोह को किया संबोधित

हमेशा से देश को राह दिखाने वाला राज्य रहा है गुजरातः योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गुजरात के एकता नगर में भारत पर्व समारोह को किया संबोधित सीएम योगी, अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल समेत अतिथियों ने विभिन्न राज्यो की संस्कृतियों को भी देखा भारत की एकता की प्रतिमूर्ति है स्टैच्यू ऑफ यूनिटीः सीएम योगी पीएम मोदी ने विरासत, विकास व गरीब कल्याण की परंपरा को बढ़ाकर वर्तमान पीढ़ी को दी नई प्रेरणाः सीएम योगी नया भारत सुरक्षा, संप्रभुता व अखंडता से समझौता नहीं करताः मुख्यमंत्री सीएम योगी ने विभिन्न पवेलियन व स्टॉल का किया अवलोकन सरदार पटेल ने भारत को एक भारत रखा तो पीएम मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष में देश बन रहा श्रेष्ठ भारतः सीएम योगी एकता नगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुजरात सदैव से देश को राह दिखाने वाला राज्य रहा है। भगवान श्रीकृष्ण उप्र से इस धरा पर आए और द्वारिकाधीश बनकर धर्म की स्थापना के कार्य को आगे बढ़ाया। स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी धरा से आर्यसमाज के बड़े आंदोलन को बढ़ाने का कार्य प्रारंभ किया था। इस धरा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को स्वाधीनता के अगुआ के रूप में देकर आजादी का मार्ग प्रशस्त किया था। यह भारत की अखंडता के शिल्पी लौहपुरुष सरदार पटेल की भी पावन धरा है। गुजरात भगवान सोमनाथ, नागेश्वर नाथ की पावन धरा है। यह भारत की आध्यात्मिक और विरासत की भूमि है। स्वाधीनता आंदोलन को स्वदेशी से स्वावलंबन की ओर अग्रसर करने वाली धरा है। इस पावन धरा को हर भारतीय नमन करता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतिनिधिमंडल के साथ बुधवार को गुजरात के एकता नगर के दौरे पर रहे। वे यहाँ भारत रत्न, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘भारत पर्व-2025’ में भी सम्मिलित हुए। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी देखा। सीएम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी पहुंचे और लौहपुरुष को नमन किया। भारत की एकता की प्रतिमूर्ति है स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सीएम योगी ने कहा कि 2018 में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के दर्शन का अवसर मिला था। उस समय कुछ दिन पूर्व ही प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था। पिछले सात वर्ष में यहां परिवर्तन हुआ है। विरान जगह को विश्व पर्यटन के व्यस्त डेस्टिनेशन के रूप में कैसे स्थापित किया जा सकता है, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और सरदार सरोवर के तट पर हुआ विकास का यह कार्य दिखाता है। आज दूसरी बार इसके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत की एकता की प्रतिमूर्ति है। यह पीएम मोदी के विजन का परिणाम है। उनकी विजनरी लीडरशिप में भारत विरासत को सम्मान दे रहा है और विराट व्यक्तित्व के अनुरूप महापुरुषों के गौरवशाली कार्यों को भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्रबिंदु बना रहा है। पीएम मोदी ने देश को विकसित भारत के रूप में स्थापित करने का विजन दिया सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी ने देश में विरासत, विकास व गरीब कल्याण की परंपरा को बढ़ाकर वर्तमान पीढ़ी को न केवल नई प्रेरणा दी, बल्कि देश को विकसित भारत के रूप में स्थापित करने का विजन भी दिया है। पीएम मोदी काशी से संसद में प्रतिनिधित्व करते हैं। काशी में काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद वहां प्रतिवर्ष 11 से 12 करोड़ श्रद्धालु आ रहे हैं। अयोध्या में कई पीढ़ियां राम मंदिर बनने की आस लेकर चली गईं, लेकिन उसे मोदी जी ने संभव करके दिखाया और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया। आज अयोध्या सुंदरतम नगरियों में से एक हो गई। वहां प्रतिवर्ष छह से 8 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटक आकर दर्शन कर रहे हैं। मथुरा-वृंदावन हो या उत्तराखंड में केदारनाथ पुरी व बद्रीनाथ का पुनरोद्धार, मध्य प्रदेश में महालोक हो या देश के अंदर अलग-अलग स्थानों पर भारत की विरासत को सम्मान, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्य भी तेजी से हो रहे हैं। किसानों, युवाओं, श्रमिकों, आधी आबादी की आकांक्षाओं के अनुरूप भारत का समग्र विकास हो रहा है। भारत आज तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी आस्था के साथ विरासत के सम्मान का महत्वपूर्ण उदाहरण है। हर भारतवासी इसके लिए पीएम मोदी का आभार प्रकट करता है। भारत की अखंडता के शिल्पी थे सरदार वल्लभ भाई पटेल सीएम योगी ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत की अखंडता के शिल्पी थे। ब्रिटिशर नहीं चाहते थे कि भारत एक रहे। उन्होंने शरारतपूर्ण तरीके से केवल भारत और पाकिस्तान के नाम पर ही देश का विभाजन ही नहीं किया था, बल्कि उनकी शरारत थी कि देश को इतने टुकड़ों में बांट डालो कि भारत एक न रह सके, लेकिन लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जहां अपनी दूरदर्शिता के कारण 563 देसी रियासतों को भी भारत गणराज्य का हिस्सा बनाकर वर्तमान भारत को एक भारत के रूप में रखा, वहीं पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्ष से भारत को श्रेष्ठ भारत बनाने के कार्य हो रहे हैं। नया भारत सुरक्षा, संप्रभुता व अखंडता से समझौता नहीं करता सीएम योगी ने कहा कि जूनागढ़ का नवाब और हैदराबाद का निजाम भारत गणराज्य में आने में आनाकानी कर रहा था, लेकिन सरदार पटेल ने कहा कि प्यार से मानोगे तो ठीक, वरना और भी तरीके हैं। अंततः उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा। नया भारत देश की सुरक्षा, संप्रभुता व अखंडता से कोई समझौता नहीं करता है। भारत और उसके नागरिकों की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस करने वाले को कीमत चुकानी ही पड़ेगी। 11 वर्ष में सभी ने देखा कि नया भारत समय आने पर जवाब देता है। सीएम योगी ने गुजरात सरकार व आयोजन से जुड़े लोगों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल कैवल्य त्रिविक्रम परनायक, उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, जयवीर सिंह, गुजरात के मंत्री व पोरबंदर विधायक अर्जुन मोधवाडिया आदि मौजूद रहे। गुजरात में उतरा उत्तर प्रदेश, अतिथियों ने देखी सांस्कृतिक प्रस्तुति गुजरात में बुधवार को उत्तर प्रदेश उमड़ पड़ा। यहां के कलाकारों ने भारत पर्व में अपनी अद्भुत प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। उत्तर प्रदेश के साथ ही गुजरात का गरबा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि राज्यों के कलाकारों के लोकनृत्य समेत अनेक सांस्कृतिक … Read more

एआई बना कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्यम, छोटे किसानों की उन्नति को दे रहा गति

सीएम योगी की दूरदर्शिता व एआई की तकनीक से बदल रही यूपी के किसानों की तकदीर एआई बना कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्यम, छोटे किसानों की उन्नति को दे रहा गति -स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में आईसीसीसी और एआई बने नगरीय प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण  -भविष्य-उन्मुख शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में उन्नत तकनीक रख रहा सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला महाकुंभ 2025 में एआई ने साबित की उपयोगिता, सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ ही दक्षता व सांस्कृतिक संरक्षण का भी बना माध्यम  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भविष्य आधारित तकनीक को आत्मसात कर एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। यूपी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से शासन तंत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जा रही है। प्रदेश के छोटे किसानों के उन्नति का भी एआई के माध्यम से नया अध्याय लिखा जा रहा है। यह उपलब्धि योगी सरकार की उस दूरदर्शी नीति का परिणाम है जिसके अंतर्गत परंपरागत क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक को एकीकृत कर ग्रामीण समाज को सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।         नवाचार और सहयोग की भावना को प्रोत्साहन देते हुए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर प्रदेश भारत के पहले एआई आधारित शासन प्रणाली को आत्मसात करने का केंद्र बन रहा है, जिसे विश्व बैंक–गूगल साझेदारी के अंतर्गत आरंभ किया गया। इस ऐतिहासिक पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि कैसे एआई अभूतपूर्व स्तर पर सार्वजनिक सेवा प्रदायगी में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। उत्तर प्रदेश बना डिजिटल परिवर्तन का जीवंत उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी दूरदर्शी नीतियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन व समावेशी विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को परिलक्षित करती हैं। इन प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को एक जीवंत उदाहरण बना दिया है। दृष्टि और नवाचार के सम्मिलन से शासन की परिभाषा कैसे वैश्विक स्तर पर पुनःनिर्धारित की जा सकती है इसका भी यह अनुपम उदाहरण है। एआई आज उत्तर प्रदेश में शासन और सेवा प्रदायगी के प्रत्येक क्षेत्र को नया स्वरूप प्रदान कर रहा है। चाहें वह नगरीय प्रबंधन हो, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि या सांस्कृतिक आयोजन, प्रदेश के प्रमुख नगरों में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्मार्ट गवर्नेंस की रीढ़ बन चुके हैं। ये केंद्र एआई-संचालित विश्लेषण के माध्यम से यातायात प्रबंधन, सुरक्षा निगरानी और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर रहे हैं। इस तकनीकी एकीकरण से नगरीय जीवन अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और नागरिक-अनुकूल बन गया है। उन्नाव बनेगा अत्याधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण का केन्द्र उत्तर प्रदेश ही वह राज्य है जहाँ भारत का पहला एआई-अग्मेंटेड बहुविषयक विश्वविद्यालय उन्नाव में स्थापित किया जा रहा है। यह संस्थान विद्यार्थियों को एआई, रोबोटिक्स, डेटा साइंस तथा साइबर सुरक्षा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देगा। साथ ही, यह प्रदेश में चिकित्सा, कृषि और प्रबंधन जैसे विविध विषयों से भी जोड़कर एक भविष्य-उन्मुख कार्यबल तैयार करने का माध्यम बनेगा। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एआई ने उपचार की दिशा ही बदल दी है। राज्य के प्रमुख अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से शल्य-चिकित्सा अब अधिक सटीक और सुरक्षित हो गई है। एआई-आधारित डायग्नोस्टिक उपकरणों से रोगों की प्रारंभिक पहचान संभव हो रही है, जिससे प्रदेश के शहरी व ग्रामीण अंचल में नागरिकों को समय पर और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हो रही हैं। महाकुम्भ 2025 में एआई बना करोड़ों श्रद्धालुओं के कुशल प्रबंधन का माध्यम महाकुंभ 2025 में प्रयागराज ने दुनिया के समक्ष एआई के वास्तविक अनुप्रयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इस ऐतिहासिक आयोजन में एआई-सक्षम रीयल-टाइम निगरानी, फेशियल रिकग्नीशन और पूर्वानुमान विश्लेषण का उपयोग कर करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सहज बनाया गया। एआई-संचालित खोया-पाया केंद्र ने मात्र कुछ मिनटों में लापता बच्चों और वृद्धजनों को उनके परिजनों से मिलाया। साथ ही, स्मार्ट लाइटिंग, डिजिटल समन्वय और डेटा-संचालित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को आध्यात्मिक और तकनीकी दोनों दृष्टियों से अद्वितीय बना दिया। इस प्रकार, महाकुंभ 2025 ने यह सिद्ध किया कि परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम विश्व-स्तर पर भारत की नई पहचान बन सकता है। एआई साबित हो रहा किसानों का सच्चा सहायक  कृषि क्षेत्र में एआई आज किसानों का सच्चा सहायक सिद्ध हो रहा है। एआई-संचालित ड्रोन फसलों के स्वास्थ्य की निगरानी करते हैं, सिंचाई की आवश्यकता का आकलन करते हैं और कीटनाशकों के उपयोग को न्यूनतम रखते हैं। इन स्मार्ट कृषि तकनीकों से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि कृषि को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप भी प्राप्त हुआ है। इससे छोटे किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने का नया आत्मविश्वास मिला है। नगरों से लेकर ग्रामों तक, कक्षाओं से लेकर अस्पतालों तक, उत्तर प्रदेश एआई-आधारित शासन की एक नई परिभाषा रच रहा है। शासन के प्रत्येक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समाहित कर राज्य न केवल भविष्य का स्वागत कर रहा है, बल्कि नवाचार, दक्षता और नागरिक-केंद्रित शासन के वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।