samacharsecretary.com

कर्म सिद्धांत का रहस्य: महाभारत की कथा में श्रीकृष्ण ने समझाया जीवन का न्याय

अक्सर हमारे मन में यह सवाल उठता है कि आखिर भगवान दुनिया में न्याय कैसे करते हैं? क्योंकि कई बार बुरा काम करने वाले लोग सुख, धन और सफलता का आनंद लेते नजर आते हैं, जबकि सच्चे-अच्छे इंसान संघर्ष और दुखों से घिरे रहते हैं? क्या ईश्वर वास्तव में पक्षपात करते हैं, या इसके पीछे कोई गहरा नियम छिपा है? हिंदू धर्म और शास्त्रों में कर्म और उसके फल का सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. इसी सत्य को समझाने के लिए महाभारत की एक कथा हमें जीवन के हर कर्म का फल के बारे में बताती है. आइए जानते हैं उस कथा के बारे में.

अर्जुन और श्रीकृष्ण का प्रसंग
महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था. एक दिन अर्जुन और श्रीकृष्ण पैदल कहीं जा रहे थे. तभी अर्जुन की नजर जमीन पर पड़ी एक चींटी पर गई. उस चींटी का आधा शरीर कुचला हुआ था. वह अत्यंत पीड़ा में थी, फिर भी अपने मुंह में एक छोटा सा अनाज का दाना दबाए, अपने कटे हुए शरीर को घसीटते हुए आगे बढ़ रही थी. यह दृश्य देखकर अर्जुन का हृदय द्रवित हो गया. उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा, 'प्रभु, आप तो करुणा के सागर हैं, फिर इस छोटी सी चींटी को इतना भयानक कष्ट क्यों? क्या आपको इस पर दया नहीं आती?'

श्रीकृष्ण मुस्कुराए और बोले, 'हे पार्थ, यह कोई साधारण चींटी नहीं है. अपने पिछले जन्म में यह देवराज इंद्र था- देवताओं का राजा. लेकिन इसने अपने पद का दुरुपयोग किया, ऋषि-मुनियों को कष्ट दिया, प्रजा पर अत्याचार किया और अपने कर्तव्यों को भूलकर भोग-विलास में डूबा रहा. आज जो इसकी अवस्था है, वह उसी कर्म का फल है.'

श्रीकृष्ण आगे बोले, 'ध्यान से समझो- जो लोग दान, धर्म और अच्छे कर्म करते हैं, उनका पुण्य कभी व्यर्थ नहीं जाता है. बस उसके फल के लिए धैर्य रखना पड़ता है. और जो लोग आज धन, पद और प्रतिष्ठा में डूबे हुए हैं, लेकिन दूसरों को सताते हैं, लूटते हैं- वे भी अपने कर्मों के फल से बच नहीं सकते हैं. इस संसार में कोई भी अपने कर्मों के परिणाम से अछूता नहीं है. जब मैं स्वयं भी कर्म के नियम से बंधा हूं, तो फिर तुम और अन्य मनुष्य कैसे इससे बच सकते हैं?'

इसलिए, बिना वजह किसी भी मनुष्य या जीव को पीड़ा देने से पहले दस बार सोचिए. क्योंकि पीड़ित के हृदय से निकली हुई आह कभी व्यर्थ नहीं जाती है. हो सकता है आज आपके पास पद, पैसा और प्रतिष्ठा हो, लेकिन क्या यह सब हमेशा रहेगा?

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here