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जबलपुर-इटारसी तीसरी रेल लाइन का इंतजार बढ़ा, DPR तैयार; सुधरेगी यूपी-दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी

जबलपुर
एक ओर जबलपुर मंडल से जुड़ने वाले रेलखंडों पर मल्टीट्रैकिंग की रफ्तार बढ़ रही है, वहीं मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी के महत्वपूर्ण रेलमार्ग की तीसरी लाइन की योजना अभी अंतिम स्वीकृति का इंतजार कर रही है। इस दोहरी लाइन वाले करीब 519 किमी लंबे रेलखंड पर प्रतिदिन औसतन दो से ज्यादा यात्री और मालगाड़ियों का संचालन होता है।

ट्रेनों की बढ़ती संख्या के मुकाबले ट्रैक क्षमता कम होने से कई बार यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों की समयबद्धता पर पड़ रहा है। ट्रेनों की धीमी चाल और विलंब के कारण यात्रियों को समस्या से जूझना पड़ रहा है।

रेल बोर्ड भेजा गया डीपीआर
पश्चिम मध्य रेल की ओर से मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी रेलखंड की तीसरी लाइन के लिए सर्वे कर डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा चुकी है। डीपीआर परीक्षण के लिए रेल बोर्ड भेजी गई है, लेकिन अंतिम स्वीकृति अभी बाकी है।

इसके चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। यह रेलमार्ग कोलकाता-मुंबई के पुराने और महत्वपूर्ण रेल रूट का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश और बिहार को महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारत से जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। जबलपुर मंडल के इस हिस्से पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी लगातार दबाव रहता है।

अतिरिक्त ट्रैक नहीं होने के कारण एक ट्रेन को आगे बढ़ाने के लिए दूसरी ट्रेन को रोकने की स्थिति कई जगह बनती है।

कनेक्टिंग रूट पर मल्टीट्रैकिंग तेज
मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी से जुड़े रेलखंडों पर मल्टीट्रैकिंग का काम आगे बढ़ चुका है। मानिकपुर-प्रयागराज के बीच उत्तर मध्य रेलवे ने तीसरी लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण पूरा कर निर्माण शुरू कर दिया है। कटनी-बीना रेलखंड पर तीसरी लाइन तैयार हो चुकी है।

चौथी लाइन को मिली स्वीकृति
कटनी-शहडोल-अनूपपुर रेलखंड पर चौथी लाइन को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं इटारसी-भोपाल और इटारसी-नागपुर रेलखंड पर भी चौथी लाइन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में बीच के मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी हिस्से की तीसरी लाइन अभी स्वीकृति के इंतजार में है।

 

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