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इंदौर :DAVV बनाएगा छात्र जानकारी का ऑनलाइन डेटाबेस, 1990–2020 तक की मार्कशीट तुरंत डाउनलोड करें

 इंदौर  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) अब अपने 50 साल पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने जा रहा है। यह कदम विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। इस परियोजना के पहले चरण में वर्ष 1970 से लेकर 2020 तक के विद्यार्थियों की अंकसूचियों (Mark Sheets), डिग्रियों और टेबुलेशन चार्ट्स (Tabulation Charts) को डिजिटलाइज किया जाएगा। रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के बाहर नहीं भेजे जाएंगे विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी गोपनीय दस्तावेज को विश्वविद्यालय परिसर से बाहर नहीं भेजा जाएगा। इसके लिए आरएनटी मार्ग स्थित नालंदा परिसर में ही संबंधित आईटी कंपनी का कार्यालय स्थापित किया जा रहा है। यह कंपनी डिजिटलीकरण का सारा कार्य विश्वविद्यालय परिसर में ही करेगी। पुराने दस्तावेजों की हालत खराब डीएवीवी की स्थापना 1964 में हुई थी और वर्षों से जमा रिकॉर्ड अब जर्जर होने लगा है। कई दस्तावेजों में दीमक लग चुकी है, टेबुलेशन चार्ट्स क्षतिग्रस्त हो गए हैं और जगह की भी कमी हो रही है। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने डिजिटल संरक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया है। 50 सालों में लाखों छात्रों का रिकॉर्ड 1970 से 2020 तक विश्वविद्यालय से लाखों छात्रों ने स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। बीए, बीकॉम, बीएससी, एमए, एमकॉम, एमएससी, बीबीए आदि पाठ्यक्रमों के छात्रों का पूरा डेटा अब डिजी-लॉकर (DigiLocker) में संरक्षित किया जाएगा। साल 2018 से चल रही थी तैयारी वर्ष 2018 में ही विश्वविद्यालय ने इस दिशा में पहल की थी। राजभवन द्वारा एक समिति बनाई गई थी जिसमें कई विश्वविद्यालयों के अधिकारी शामिल थे। कई सॉफ्टवेयर कंपनियों ने अपनी प्रस्तुतियां दी थीं, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते प्रक्रिया धीमी हो गई। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत उच्च शिक्षा विभाग ने डेटा डिजिटलीकरण को अनिवार्य किया है। 80 हजार छात्रों का डेटा पहले से ऑनलाइन वर्तमान में DAVV ने सत्र 2023-24 में स्नातक अंतिम वर्ष के 80 हजार छात्रों का डेटा पहले ही ऑनलाइन कर दिया है। अब यह काम पुराने रिकार्ड्स तक भी विस्तार पा रहा है। 10 महीनों में पूरा होगा कार्य आईटी कंपनी को रिकॉर्ड डिजिटलीकरण के लिए 10 महीनों की डेडलाइन दी गई है। कार्य पूरा होने के बाद डेटा विशेष सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा, जिसे कभी भी कर्मचारी या संबंधित विभाग देख सकेंगे। इससे न केवल प्रशासन को सुविधा होगी, बल्कि छात्रों को भी भविष्य में दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ने पर तुरंत लाभ मिलेगा। डॉ. राकेश सिंघई, कुलगुरु, डीएवीवी ने बताया कि विश्वविद्यालय पूरी पारदर्शिता और गोपनीयता के साथ इस कार्य को शीघ्र पूरा करेगा।

सिंहस्थ‑2028 से पहले उज्जैन में बनेगा रेलवे स्टेशन से महाकाल तक 1.76 किमी रोपवे, 55 गोन्डोला के साथ

उज्जैन  सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में तैयारियां तेज हो गई हैं। रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक रोपवे चलाए जाएंगे। इसके लिए के लिए काम शुरु हो गया। रोपवे का ठेका डोप्पेलमेयर को दिया गया है। जो कि अपनी टेक्नोलॉजी के जरिए डिजाइन तैयार कर रही है। 1.7 किलोमीटर लंबा रोपवे होगा तैयार उज्जैन रेलवे स्टेशन से लेकर महाकाल मंदिर तक 1.7 किलोमीटर लंबा रोपवे तैयार किया जा रहा है। इसके रूट पर तीन स्टेशन बनाए जा रहे हैं। यहां पर यात्री रोपवे के जरिए आना-जाना कर सकेंगे। जिसमें यात्री सीधा मंदिर में ही उतरेंगे। 1.7 किलोमीटर के रूट में 55 केबिन चलाए जाएंगे। जो कि दिन में 16 घंटे चलेंगे। इस दूरी को तय करने में सिर्फ 5-7 मिनट का समय लगेगा। रोपवे के लिए तीन स्टेशन बनेंगे महाकाल लोक की पार्किंग पर उतरकर नंदी द्वारा से सीधा महाकाल लोक में प्रवेश होगा। गणेश कॉलोनी में उतरने के बाद भक्त रूद्र सागर पर बने नए ब्रिज से सीधे महाकाल मंदिर के पास स्थित मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर पहुंचेंगे। रोपवे हरिफाटक ब्रिज के ऊपर से गुजरेगा। एक घंटे में 2 हजार कर सकेंगे दर्शन रोपवे प्रोजेक्ट को पूरा होने में 2026 तक का समय लगेगा। रोपवे में 3 स्टेशन, 13 टावर और 55 केबिन होंगे। रोपवे की क्षमता प्रति घंटे 2 हजार यात्री होगी। यह पूरे दिन में 16 घंटे तक चलेगा। पब्लिक सेफ्टी रहेगी प्राथमिकता उज्जैन में लगाया जा रहा रोपवे यूरोपीय मानकों पर आधारित है। सरकार के द्वारा पहले प्राथमिकता नागरिकों सुरक्षा रखी गई है। कंपनी की ओर से गारंटी दी जाती है कि किसी प्रकार की समस्या आने पर यह केबिन अपने आप ही स्टेशन पर पहुंच जाएगा।   

भारत 2050 तक बन जाएगा दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम जनसंख्या वाला देश? रिपोर्ट में हुआ खुलासा

नई दिल्ली साल 2010 से 2020 के बीच मुस्लिम समुदाय दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला धार्मिक समूह बनकर उभरा है, जबकि ईसाई धर्म की वैश्विक जनसंख्या में हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि गिरावट के बावजूद ईसाई धर्म अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समूह हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की एक ताजा रिपोर्ट '2010 से 2020 तक वैश्विक धार्मिक परिदृश्य कैसे बदला' में ये आंकड़े सामने आए हैं। इसमें ये भी कहा गया है कि अगले 25 सालों में भारत ऐसा देशा होगा जहां दुनिया के सबसे ज्यादा मुसलमान होंगे। मुस्लिम आबादी में रिकॉर्ड वृद्धि रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम आबादी में 34.7 करोड़ की वृद्धि हुई, जो अन्य सभी धर्मों की संयुक्त वृद्धि से अधिक है। वैश्विक स्तर पर मुस्लिमों की हिस्सेदारी 2010 में 23.9% से बढ़कर 2020 में 25.6% हो गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से जनसांख्यिकीय कारकों जैसे उच्च जन्म दर और युवा आबादी के कारण हुई। प्यू के वरिष्ठ जनसांख्यिकी विशेषज्ञ कॉनराड हैकेट ने बताया, "मुस्लिमों में बच्चों का जन्म मृत्यु दर से अधिक है, और उनकी औसत आयु (24 वर्ष) गैर-मुस्लिमों (33 वर्ष) की तुलना में कम है।" इसके अलावा, धर्म परिवर्तन का इस वृद्धि में बहुत कम योगदान है। मुस्लिम आबादी का सबसे अधिक विकास एशिया-प्रशांत क्षेत्र में देखा गया, जहां विश्व की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी निवास करती है। इस क्षेत्र में 2010 से 2020 के बीच मुस्लिम आबादी में 16.2% की वृद्धि हुई। मध्य पूर्व-उत्तर अफ्रीका क्षेत्र में मुस्लिम 94.2% आबादी का हिस्सा हैं, जबकि उप-सहारा अफ्रीका में यह 33% है। हिंदुओं की क्या है स्थित? रिपोर्ट में बताया गया कि हिंदू आबादी 2010 से 2020 के बीच 12% बढ़ी, जो वैश्विक जनसंख्या वृद्धि के लगभग बराबर है। 2020 में हिंदुओं की संख्या 1.2 अरब थी, जो वैश्विक आबादी का 14.9% है। भारत में हिंदू आबादी 2010 में 80% से थोड़ा घटकर 2020 में 79% रह गई, जबकि मुस्लिम आबादी 14.3% से बढ़कर 15.2% हो गई। भारत में मुस्लिम आबादी में 3.56 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि हिंदू धर्म में धर्म-परिवर्तन की दर अत्यंत कम है, और इनका प्रजनन दर वैश्विक औसत के बराबर है- इसी कारण इनकी हिस्सेदारी स्थिर बनी हुई है। प्यू की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू और यहूदी आबादी ने वैश्विक जनसंख्या वृद्धि के साथ तालमेल बनाए रखा। भारत, नेपाल और मॉरीशस में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक समूह हैं। हालांकि, भारत में हिंदुओं की हिस्सेदारी में मामूली कमी आई है, लेकिन यह अभी भी देश की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा है। तेजी से बढ़ रही है जनसंख्या  भारत में मुसलमानों की जनसंख्या हिंदुओं की तुलना में तेजी से बढ़ने की संभावना है, जिसका मुख्य कारण उनकी कम औसत आयु और उच्च प्रजनन दर है. 2010 में, भारतीय मुसलमानों की औसत आयु 22 वर्ष थी, जबकि हिंदुओं की 26 वर्ष और ईसाइयों की 28 वर्ष थी. इसी तरह प्रति मुस्लिम महिला औसतन 3.2 बच्चे होते हैं, जबकि हिंदू महिलाओं में यह आंकड़ा 2.5 और ईसाई महिलाओं में 2.3 है. इन्हीं कारकों के कारण भारत में मुस्लिम आबादी 2010 में 14.4% से बढ़कर 2050 तक 18.4% तक पहुंचने का अनुमान है. हालांकि, 2050 तक हिंदुओं की संख्या भारतीय जनसंख्या का तीन-चौथाई (76.7%) से अधिक बनी रहेगी. दिलचस्प बात यह है कि 2050 में भारत में हिंदुओं की संख्या दुनिया के पांच सबसे बड़े मुस्लिम देशों (भारत, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और बांग्लादेश) की कुल मुस्लिम आबादी से भी अधिक होगी. जानें कितनी होगी ईसाइयों की संख्या भारत में कई छोटे धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय भी हैं. 2010 में, देश की कुल जनसंख्या का लगभग 2.5% ईसाई थे. 2050 तक भारत में ईसाइयों की जनसंख्या घटकर 2.2% रहने की संभावना है. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में धार्मिक विविधता बनी रहेगी, और सभी समुदायों की उपस्थिति देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए रखेगी. ईसाई धर्म में कमी, 'नास्तिक' बढ़े विश्व में ईसाइयों की संख्या 2.18 अरब से बढ़कर 2.3 अरब हो गई, लेकिन उनकी वैश्विक हिस्सेदारी 30.6% से घटकर 28.8% रह गई। यह कमी मुख्य रूप से धार्मिक परित्याग के कारण हुई, खासकर यूरोप, उत्तरी अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में। हैकेट के अनुसार, "प्रत्येक व्यक्ति जो वयस्क होने पर ईसाई बनता है, उसके मुकाबले तीन लोग, जो ईसाई धर्म में पले-बढ़े, इसे छोड़ देते हैं।" इसके विपरीत, धार्मिक रूप से असंबद्ध या 'नास्तिक' लोगों की संख्या 27 करोड़ बढ़कर 1.9 अरब हो गई, जो वैश्विक आबादी का 24.2% है। यह समूह मुस्लिमों के बाद दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला समूह है। विशेष रूप से, एशिया-प्रशांत क्षेत्र, खासकर चीन, में 78.3% 'नास्तिक' आबादी रहती है। बौद्ध धर्म की गिरावट रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्रमुख धार्मिक समूहों में बौद्धों की संख्या ही ऐसी थी जिसमें गिरावट दर्ज की गई। इसका कारण चीन में जनसंख्या की वृद्धावस्था और जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट को माना गया है, जहां बौद्धों की संख्या सर्वाधिक है। ईसाई क्यों हुए कम? ईसाइयों की वैश्विक जनसंख्या हिस्सेदारी में गिरावट का मुख्य कारण "धर्म-परित्याग" बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में ईसाई धर्म को छोड़ रहे हैं, खासकर यूरोप और अमेरिका जैसे क्षेत्रों में। यह गिरावट इतनी व्यापक है कि यह ईसाइयों की उच्च प्रजनन दर के लाभ को भी पछाड़ देती है। धर्म-परिवर्तन के मामले में हिंदू और मुस्लिम सबसे स्थिर Pew की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि धर्म-परिवर्तन की दृष्टि से हिंदू और मुस्लिम समुदाय सबसे स्थिर हैं। औसतन 100 में से केवल एक वयस्क ही ऐसा होता है जो मुस्लिम या हिंदू धर्म छोड़ता है या इनमें शामिल होता है। भविष्य की संभावनाएं प्यू रिसर्च के अनुसार, यदि वर्तमान जनसांख्यिकीय रुझान जारी रहे, तो 2050 तक मुस्लिम आबादी (2.8 अरब) और ईसाई आबादी (2.9 अरब) लगभग बराबर हो सकती है। भारत 2050 तक विश्व की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश बन सकता है, जो इंडोनेशिया को पीछे छोड़ देगा। हिंदू आबादी के 1.4 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 14.9% होगा। क्यों बढ़ रही है मुस्लिम आबादी? मुस्लिम समुदाय में तेजी से जनसंख्या वृद्धि का कारण उनकी औसतन युवा आबादी और उच्च प्रजनन दर है। 2010 में … Read more

तिरुपति में 1000 गैर-हिंदू कर्मचारी कार्यरत, उठी तुरंत हटाने की मांग

तिरुपति केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में गैर-हिंदू कर्मचारियों की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि करीब 1,000 गैर-हिंदू भगवान वेंकटेश्वर में आस्था रखे बिना या सनातन धर्म का पालन किए बिना टीटीडी में काम कर रहे हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने सवाल किया, 'अगर गैर-हिंदू कर्मचारियों की भर्ती पहले हुई थी, तो अब तक इसमें बदलाव क्यों नहीं किया गया?' भाजपा नेता ने आग्रह किया कि इसमें कई छिपी हुई गड़बड़ियां हो सकती हैं। इसकी गहन जांच होनी चाहिए।  'टीटीडी को तुष्टिकरण की राजनीति का मंच नहीं बनना चाहिए' अपने जन्मदिन के मौके पर तिरुमला मंदिर में पूजा करने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'टीटीडी में 1000 से अधिक गैर-हिंदू कर्मचारी क्यों हैं? क्या कभी मस्जिदों या चर्चों में हिंदुओं को नौकरी मिलती है? यह नफरत की बात नहीं है, यह धर्म की बात है। टीटीडी को तुष्टिकरण की राजनीति का मंच नहीं बनना चाहिए।' केंद्रीय मंत्री ने कहा- टीटीडी का स्पष्ट हो मिशन उन्होंने कहा कि टीटीडी का मिशन स्पष्ट होना चाहिए- मंदिरों का विकास करना, परंपराओं की रक्षा करना और मंदिरों से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां केवल हिंदुओं को ही सौंपनी चाहिए। बंदी संजय कुमार ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान  सवाल उठाया, 'जो गैर-हिंदू भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में आते हैं, उन्हें यह बताना होता है कि वे भगवान में आस्था रखते हैं। फिर ऐसे में यह कैसे हो रहा है कि करीब 1,000 गैर-हिंदू कर्मचारी, जो भगवान में विश्वास नहीं रखते, टीटीडी में नौकरी कर रहे हैं?' उन्होंने हाल ही में हुए एक मामले का जिक्र किया जिसमें एक व्यक्ति को निलंबित कर दिया गया था, क्योंकि यह पाया गया कि वह टीटीडी का कर्मचारी होने के बावजूद नियमित रूप से चर्च जा रहा था। 'टीटीडी किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है' केंद्रीय मंत्री बी. संजय ने कहा कि टीटीडी किसी व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, यह केवल हिंदुओं की धार्मिक संस्था है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह भी कहा कि सभी को 'सनातन धर्म' की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने टीटीडी अध्यक्ष से यह भी आग्रह किया कि वह तेलंगाना के कोण्डागट्टू, करीमनगर, वेमुलावाड़ा और इल्लंताकुंटा के मंदिरों के विकास पर ध्यान दें। चर्च में प्रार्थना करने वाले कर्मचारी पर कार्रवाई गौरतलब है कि टीटीडी ने 3 जुलाई को अपने सहायक कार्यकारी अधिकारी ए. राजशेखर बाबू को निलंबित कर दिया, क्योंकि वे तिरुपति जिले के पुत्तूर में हर रविवार चर्च की प्रार्थना में भाग ले रहे थे। टीटीडी के अनुसार, 'एक हिंदू धार्मिक संस्था के कर्मचारी के रूप में उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन किया है और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया है।' पहले भी 18 कर्मचारियों पर हुई थी कार्रवाई इससे पहले फरवरी 2025 में टीटीडी ने कुल 18 कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी, जो गैर-हिंदू धार्मिक परंपराओं में भाग ले रहे थे। यह कार्रवाई टीटीडी के नए अध्यक्ष बी. आर. नायडू के उस एलान के बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि टीटीडी और इससे जुड़े संस्थानों में केवल हिंदू ही कार्य कर सकते हैं।  जांच की कर रहे मांग राज्य मंत्री ने इस बात की जांच की मांग की कि बोर्ड में कितने गैर-हिंदू कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू श्रद्धालुओं में गंभीर चिंता के बावजूद अभी तक कोई जांच क्यों नहीं शुरू की गई है। अपने जन्मदिन के अवसर पर बंदी संजय कुमार ने परिवार के सदस्यों के साथ भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए। शांति, समृद्धि और सनातन धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने प्रार्थना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घायु होने की कामना भी की। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने कुमार को जन्मदिन की बधाई दी। शाह ने भी व्यक्तिगत रूप से फ़ोन करके उन्हें शुभकामनाएं दीं। कुमार ने सभी भक्तों और नागरिकों से सनातन धर्म की रक्षा और टीटीडी जैसी पवित्र संस्थाओं की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।

वैश्विक निवेश को साधने निकले सीएम मोहन यादव, 19 जुलाई तक विदेश में रहेंगे सक्रिय

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 जुलाई से 19 जुलाई तक दुबई और स्पेन के दौरे पर रहेंगे हुए रवाना । यह यात्रा मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने और विदेशी कंपनियों को प्रदेश में उद्योग, टेक्सटाइल, पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी के लिए आमंत्रित करने के उद्देश्य से की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 से 19 जुलाई को दुबई और स्पेन की यात्रा पर है । यह दौरा मध्यप्रदेश की वैश्विक निवेश रणनीति में महत्वपूर्ण कदम होगा। दुबई में मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेश को लेकर इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल काउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ प्रमुख बैठक प्रस्तावित है, जहां मध्य प्रदेश की औद्योगिक तैयारियों और निवेश नीति को लेकर प्रस्तुतियां दी जाएंगी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई में कार्यरत लुलु इंटरनेशनल ग्रुप, लैंडमार्क ग्रुप और नखील ग्रुप जैसे अंतर्राष्ट्रीय रिटेल और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे, जिनमें प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, रिटेल चेन और निवेश संबंधी अन्य सहयोग पर विचार किया जाएगा।  16 से 19 जुलाई तक स्पेन दौरे पर  मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई के बाद 16 से 19 जुलाई तक स्पेन के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव बार्सिलोना में स्पेन की अग्रणी ऑटोमोबाइल कंपनियों और ग्रीन मोबिलिटी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे निवेशकों के साथ महत्वपूर्ण संवाद करेंगे। बार्सिलोना में होने वाली बैठकों में टेक्सटाइल, गारमेंट और डिजाइन सेक्टर की अग्रणी कंपनियों से भी चर्चा की जाएगी, जिससे मध्य प्रदेश में पीएम मित्र पार्क, टेक्सटाइल ओडीओपी और वर्धमान सहित टेक्सटाइल क्लस्टर को और गति दी जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पेन यात्रा का एक बड़ा फोकस पर्यटन और हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी रहेगा। निवेश पर रणनीतिक संवाद होगा  इन निवेश यात्राओं की खास बात है कि निवेश पर रणनीतिक संवादों की प्रमुखता रहेगी। मुख्यमंत्री का उद्देश्य निवेश के जरिए न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है, बल्कि युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ना भी है। बता दें इससे पहले सीएम यूके से लेकर जापान गए थे। मुख्यमंत्री ने कहना है कि इन यात्राओं के जरिए सामने आ रहे निवेश प्रस्ताव, संवाद और उद्योग समूहों का उत्साह इस बात का संकेत है कि मध्य प्रदेश अब उस मोड़ पर खड़ा है जहां अवसर केवल दस्तक नहीं दे रहे है, बल्कि आगे बढ़कर साझेदारी कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 जुलाई को भोपाल से दुबई के लिए रवाना हुए जहां वे 15 जुलाई तक रहेंगे। इसके बाद 16 से 19 जुलाई तक वे स्पेन की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान उनकी दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों, व्यापार संगठनों और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें होंगी। उन्होंने कहा कि ये यात्रा मध्यप्रदेश को औद्योगिक विकास और वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्य प्रदेश में उद्योग और रोजगार बढ़ाने के साथ निवेशकों को आमंत्रित करने के प्रयास लगातार जारी है, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इसे खुद लीड कर रहे हैं, वे अलग अलग शहरों में जाकर मध्य प्रदेश की विशेषताएं, यहाँ उपलब्ध संसाधनों की जानकारी देकर निवेशकों को आमंत्रित कर रहे हैं साथ ही विदेशी निवेशकों को भी आमंत्रित कर रहे हैं जिसके सार्थक परिणाम भी सामने आ रहे हैं, मुख्यमंत्री डॉ यादव एक बार फिर निवेशकों को मध्य प्रदेश में आमंत्रित करने के लिए विदेश यात्रा पर जाने वाले हैं। राज्य शासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 13 से 19 जुलाई को दुबई और स्पेन की यात्रा पर रवाना । यह दौरा मध्य प्रदेश की वैश्विक निवेश रणनीति में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दुबई में मुख्यमंत्री निवेश को लेकर इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल कॉउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ प्रमुख बैठक प्रस्तावित है, जहां मध्य प्रदेश की औद्योगिक तैयारियों और निवेश नीति को लेकर प्रस्तुतियां दी जाएंगी। दुबई प्रवास पर इन बड़े ग्रुपों से करेंगे चर्चा  निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई में कार्यरत लुलु इंटरनेशनल ग्रुप, लैंडमार्क ग्रुप और नखील ग्रुप जैसे अंतर्राष्ट्रीय रिटेल और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे, जिनमें प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, रिटेल चेन और निवेश संबंधी अन्य सहयोग पर विचार किया जाएगा। 16 से 19 जुलाई तक स्पेन के प्रवास पर, बार्सिलोना में करेंगे संवाद  दुबई के बाद सीएम डॉ मोहन यादव 16 से 19 जुलाई तक स्पेन के प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे बार्सिलोना में स्पेन की अग्रणी ऑटोमोबाइल कंपनियों और ग्रीन मोबिलिटी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे निवेशकों के साथ महत्वपूर्ण संवाद करेंगे। बार्सिलोना में होने वाली बैठकों में टेक्सटाइल, गारमेंट और डिजाइन सेक्टर की अग्रणी कंपनियों से भी चर्चा की जाएगी, जिससे मध्य प्रदेश में पीएम मित्र पार्क, टेक्सटाइल ओडीओपी और वर्धमान सहित टेक्सटाइल क्लस्टर को और गति दी जा सके। MP की औद्योगिक और आर्थिक आत्मनिर्भरता का रोडमैप बनेगी यात्रा  सरकार के अनुसार इन निवेश यात्राओं की खास बात है कि निवेश पर रणनीतिक संवादों की प्रमुखता रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्देश्य निवेश के ज़रिए न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है, बल्कि युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ना भी है। यह निवेश यात्राएं मध्य प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक आत्मनिर्भरता का रोडमैप बनती जा रही हैं। पिछले वर्ष की थी यूके, जर्मनी, जापान की यात्रा  उल्लेखनीय है कि यूके, जर्मनी , जापान और अब दुबई से लेकर स्पेन तक मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह सतत प्रयास मध्य प्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी संकल्प का प्रमाण है। इन यात्राओं के ज़रिए सामने आ रहे निवेश प्रस्ताव, संवाद और उद्योग समूहों का उत्साह इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश अब उस मोड़ पर खड़ा है जहां अवसर केवल दस्तक नहीं दे रहे है, बल्कि आगे बढ़कर साझेदारी कर रहे हैं। निवेश और रोजगार पर रहेगा जोर मुख्यमंत्री दुबई में इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल काउंसिल के लोगों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे मध्यप्रदेश की उद्योग नीति और निवेश के मौके पर जानकारी देंगे। दुबई मिडिल ईस्ट का बड़ा व्यापारिक शहर है और वहां से प्रदेश में रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और टूरिज़्म जैसे क्षेत्रों में निवेश लाने की कोशिश होगी। वहीं स्पेन में मुख्यमंत्री ऑटोमोबाइल, शिप मेकिंग और फैशन इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर चर्चा करेंगे। स्पेन की डिजाइन, मशीनरी और … Read more