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हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर के परिवार को न्याय, हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को दी मुआवजा देने की हिदायत

गंगटोक सिक्किम उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के आदेश को पलटते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह सड़क दुर्घटना में मारे गए एक श्रमिक के माता-पिता को 21.89 लाख रुपये का मुआवजा अदा करे। न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान ने कहा कि मृतक वाहन का केवल यात्री नहीं था, बल्कि एक कामगार था जो बीमा पॉलिसी के तहत संरक्षित था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी द्वारा कामगार देयता के लिए अतिरिक्त प्रीमियम अदा किया गया था, इसलिए बीमा कवरेज मृतक पर भी लागू होता है। यह अपील मृतक के माता-पिता द्वारा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत दायर की गई थी। उन्होंने एमएसीटी के उस निर्णय को चुनौती दी थी जिसमें मुआवजे का दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि मृतक ने वाहन में केवल लिफ्ट ली थी और वह बीमा पॉलिसी के दायरे में नहीं आता। यह दुर्घटना 20 अप्रैल, 2023 को उस समय हुई जब मृतक रोराथांग से पूर्वी सिक्किम के बेरिंग की ओर जा रहे वाहन में सवार था। उच्च न्यायालय ने पाया कि मृतक को दैनिक वेतन भोगी श्रमिक के रूप में, रेत के पांच बोरों को वाहन से उतारने के लिए नियुक्त किया गया था। वाहन मालिक ने बताया कि मृतक छोटा-मोटा काम करने में मदद करता था और अपने घर की नाली की मरम्मत के लिए रेत उतारने हेतु वाहन में चढ़ा था। न्यायमूर्ति प्रधान ने कहा कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि मृतक एक ‘कामगार’ था। अदालत ने कहा कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत ‘कामगार’ की परिभाषा में सहायक, क्लीनर और वाहन से संबंधित कार्यों में लगे अन्य व्यक्ति भी आते हैं। बीमा कंपनी की इस दलील को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया कि मृतक चालक के गांव का ही निवासी था और वाहन में ‘मुफ्त सवारी’ कर रहा था। बीमा कंपनी ने एक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया था। अदालत ने यह भी कहा कि दुर्घटना वाहन चालक की लापरवाही एवं तेज़ गति के कारण हुई। इससे वाहन मालिक अप्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी ठहराया गया। न्यायमूर्ति प्रधान ने मुआवजे की राशि 21.89 लाख रुपये को ‘उचित मुआवजा’ करार देते हुए कहा कि उस पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।  

नवीन ऊर्जा में नया रिकॉर्ड: भारत की क्षमता 420% बढ़ी, सौर बनी सस्ती विकल्प

नई दिल्ली केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र ने जून 2025 में क्षमता वृद्धि में साल-दर-साल 420% की वृद्धि दर्ज की है, जो पिछले वर्ष के 1.4 गीगावाट से बढ़कर इस वर्ष 7.3 गीगावाट हो गई है. जोशी मंगलवार को मुंबई में IVCA नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन में बोल रहे थे. भारत में सौर ऊर्जा क्षमता में आश्चर्यजनक रूप से 4,000% की वृद्धि हुई है, जो 2025 तक 2.82 गीगावाट से बढ़कर 117 गीगावाट हो जाएगी. इसी अवधि में पवन ऊर्जा क्षमता भी 21 गीगावाट से बढ़कर 51.7 गीगावाट हो गई, जो 140% की वृद्धि को दर्शाता है. हालांकि, सौर ऊर्जा शुल्क में 80% की गिरावट आई है – 2010-11 में 10.95 रुपए /यूनिट से घटकर वर्तमान में 2.15 रुपए /यूनिट हो गई है. परिणामस्वरूप, बैटरी स्टोरेज वाली सौर ऊर्जा भी अब तापीय ऊर्जा से कम खर्चीली है. 2024 में, बिजली क्षेत्र में 83% निवेश नवीकरणीय ऊर्जा की ओर निर्देशित होगा. हम वैश्विक ऊर्जा विकास वित्त के सबसे बड़े प्राप्तकर्ता थे, जिसने एक ही वर्ष में स्वच्छ ऊर्जा के लिए 2.4 बिलियन डॉलर आकर्षित किए.” 2020 से, इस क्षेत्र ने 1.6 लाख करोड़ रुपए से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया है, जिसमें अकेले 2023 में 42,000 करोड़ रुपए शामिल हैं. 2025 की पहली तिमाही में, स्वच्छ ऊर्जा निवेश साल-दर-साल 7.7 गुना बढ़कर 9.8 बिलियन डॉलर हो गया. जोशी ने इस क्षेत्र में और अधिक पूंजी निवेश का आह्वान करते हुए कहा, “जिन निवेशकों ने इस बदलाव का समर्थन किया है, उन्हें पहले ही कई गुना लाभ मिल चुका है. आपको भी ऐसा करना चाहिए.” मंत्री ने अहमदाबाद स्थित भारत के सबसे बड़े अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र का भी हवाला दिया, जो प्रतिदिन 1,000 टन ठोस कचरे को बिजली में परिवर्तित करता है. उन्होंने आगे कहा, “ये इस बात के उदाहरण हैं कि कैसे भारत का ऊर्जा परिवर्तन न केवल टिकाऊ है, बल्कि समावेशी भी है, जिससे शहरों, किसानों और समुदायों को लाभ हो रहा है.”

विश्वास सारंग का वार: दिग्विजय सिंह जानबूझकर कांवड़ यात्रा को बना रहे विवादित

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर कांवड़ यात्रा और नमाज को लेकर जारी की गई तस्वीर पर युवा खेल व कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह की मंशा कांवड़ यात्रा को विवादास्पद बनाने की है। राज्य के मंत्री विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट को लेकर कहा कि ‘मौलाना दिग्विजय सिंह’ केवल सनातन का विरोध करते हैं; ⁠कांवड़ यात्रा जैसे पावन पर्व को भी वह विवादास्पद बनाना चाहते हैं। उनसे इसके अलावा कोई अपेक्षा की ही नहीं जा सकती है। मंत्री सारंग ने पूर्व में दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जाकिर नायक को महिमामंडन करने वाले, आतंकवादियों को संरक्षण करने वाले, सेना के हर ऑपरेशन पर विवाद खड़ा करने वाले, पाकिस्तान परस्ती की बात करने वाले, तुष्टिकरण को आगे बढ़कर राजनीति करने वाले दिग्विजय सिंह से और कुछ अपेक्षा भी नहीं है। दिग्विजय सिंह को मौलाना दिग्विजय कहते हुए सारंग ने कहा कि दिग्विजय सिंह हर समय हिंदू धर्म का, हिंदू धर्मावलंबियों का और हिंदू साधु-संतों के अलावा हिंदू त्योहारों का अपमान करते आए हैं, इसलिए उन्हें मौलाना दिग्विजय सिंह कहा जाता है। भगवा आतंकवाद वाले दिग्विजय सिंह के पुराने बयान का जिक्र करते हुए मंत्री सारंग ने आगे कहा कि ⁠भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों का इजाद करके उन्होंने ही सनातन को इस दुनिया में बदनाम करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि वे दिग्विजय सिंह से कहना चाहते हैं कि हिंदू और सनातन धर्म के किसी भी त्यौहार पर इस तरीके की टिप्पणी होगी, तो वह सहन नहीं की जाएगी। दिग्विजय सिंह को चाहिए कि वे इस पूरे मामले में माफी मांगें। दरअसल, दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की है जिसमें एक तरफ सड़क पर कांवड़ यात्रा है तो दूसरी तरफ सड़क पर नमाज करते लोगों की तस्वीर है, जिसमें लिखा है, एक देश, दो कानून।  

घर में मिली बुजुर्ग दंपति की हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

रायपुर राजधानी रायपुर से सटे अभनपुर थाना क्षेत्र के बिरोदा गांव में सोमवार को एक दिल दहला देने वाली डबल मर्डर की घटना सामने आई है। गांव के एक घर में बुजुर्ग दंपति भूखन ध्रुव (उम्र 62 साल) और उनकी पत्नी रूखमणी ध्रुव (उम्र 60 साल) की लाशें खून से लथपथ हालत में मिलीं। आशंका जताई जा रही है कि दोनों की घर के अंदर गला रेतकर हत्या की गई है। घटना की सूचना फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना की सूचना मिलते ही अभनपुर पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. लाल उमेद सिंह भी अपनी टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मौके पर ACCU टीम, एफएसएल यूनिट, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और डॉग स्क्वॉड को बुलाया गया, जिन्होंने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्रित किए। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हत्या धारदार हथियार से की गई है और यह मामला पूर्व नियोजित हत्या का हो सकता है। पुलिस ने घर को पूरी तरह सील कर दिया है और सभी संभावित पहलुओं से जांच की जा रही है। मर्ग पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर ली गई है, और अभनपुर थाना पुलिस द्वारा आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। समाचार लिखे जाने तक हत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो सका था, न ही किसी आरोपी की पहचान हुई है। हालांकि, पुलिस ने गांव के आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और जल्द ही किसी बड़े खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।

राहत कार्यों में तेजी लाएं: लोकसभा अध्यक्ष ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में किया स्थलीय निरीक्षण

कोटा कोटा दौरे पर आए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को शहर के अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जलभराव, नालों की क्षतिग्रस्त बाउंड्री और वर्षा जनित समस्याओं से जूझ रहे नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। बिरला ने रानपुर बंधा, धर्मपुरा, बड़ा बस्ती, अनंतपुरा, रायपुरा और देवली अरब समेत कई क्षेत्रों का दौरा किया। उनके साथ ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, ओएसडी राजीव दत्ता, जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि जलभराव की समस्या किन कारणों से उत्पन्न हुई, साथ ही नालों की सीमित क्षमता और जल निकासी के अभाव को भी प्रमुख वजह बताया। रानपुर इलाके में हाल ही में एक युवती की जलभराव में डूबने से मौत हो गई थी। बिरला ने इस मामले में कॉलेज और जिला प्रशासन से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नालों की क्षमता बढ़ाई जाए और वैकल्पिक जलनिकासी मार्गों की तलाश की जाए, जिससे हर साल आने वाली समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने सभी प्रभावित क्षेत्रों का जल्द से जल्द सर्वे करने और आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने को कहा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिरला इसके बाद कोटा ग्रामीण के निमोदा हरीजी गांव पहुंचे, जहां हाल ही में नदी में डूबने से कुछ लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मिलकर शोक संवेदना प्रकट की और उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही अधिकारियों को पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। जिन लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं लगा है, उन्हें खोजने के लिए अतिरिक्त रेस्क्यू टीमें लगाने को भी कहा। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन की लापरवाही की शिकायत भी की। ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय रहते रेस्क्यू टीमें पहुंच जातीं, तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। बिरला ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।  

मुख्यमंत्री साय ने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान ने जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व चेतना उत्पन्न की है। विमोचन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत  निहारिका बारीक, आयुक्त मनरेगा और संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना तारण प्रकाश सिन्हा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रियता और जनता की स्वप्रेरित भागीदारी के चलते यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। लोग स्वेच्छा से जल संरक्षण जैसे पुनीत कार्यों से जुड़ रहे हैं, जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पुस्तिका में राज्य की विभिन्न पंचायतों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और नवाचारों को संकलित किया गया है, जो अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के अंतर्गत सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश की 11,000 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर अंकित किया गया है, जिससे लोगों में जल के महत्व को लेकर व्यावहारिक चेतना जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका जल संरक्षण को जन-भागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण रही है, और यह चेतना आने वाले समय में और भी व्यापक स्वरूप लेगी। उल्लेखनीय है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत रैली, दीवार लेखन जैसे माध्यमों से व्यापक स्तर पर जनसामान्य को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक किया गया है। 626 क्लस्टर्स में आयोजित प्रशिक्षणों के माध्यम से 56,000 से अधिक प्रतिभागियों को जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए तैयार किया गया है। अभियान में GIS तकनीक का उपयोग कर जल संरक्षण कार्यों की प्रभावी योजना बनाई जा रही है, जबकि जलदूत ऐप के माध्यम से खुले कुओं का जल स्तर मापा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परकोलेशन टैंक, अर्दन डैम, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज स्ट्रक्चर जैसे संरचनात्मक उपायों के माध्यम से जल पुनर्भरण और संरक्षण के स्थायी प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के यह प्रयास छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करेंगे।

सेपरेट हॉस्टल फॉर फ्रेशर्स: RGPV ने सीनियर्स-जूनियर्स को अलग-अलग आवास में रखा

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) ने वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच रैगिंग और मारपीट की बढ़ती घटनाओं को देखेते हुए इस सत्र से एक नई पहल की है। इस बार कनिष्ठ विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। इसके अलावा इस बार मेरिट के आधार पर नवप्रवेशित विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित किया जाएगा। अब किसी भी छात्र संगठन की सिफारिश पर छात्रावास आवंटित नहीं होंगे। इसके अलावा सख्त नियम भी बनाए गए हैं। विवि प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि छात्र राजनीति, संगठनात्मक दबाव या किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से छात्रावास आवंटन नहीं होगा यह निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुशासित माहौल को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। बता दें, कि प्रदेश में सबसे अधिक आरजीपीवी में रैगिंग और मारपीट की घटनाएं यूजीसी की एंटी रैगिंग कमेटी में दर्ज हुई है। पुराने छात्रावास आवंटन को किया गया निरस्त विश्वविद्यालय ने सभी पुराने छात्रावास आवंटन को पूरी तरह निरस्त कर दिसंबर 2024 की परीक्षा में प्राप्त मेरिट और मध्यप्रदेश शासन की आरक्षण नीति के आधार पर नए सिरे से रूम आवंटन की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें लिए द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के बालक छात्रावास के लिए 690 और कन्या छात्रावास के लिए 510 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थी भी इस नई व्यवस्था समर्थन कर रहे हैं। इस बार विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रावास उन्हीं को मिलेंगे जो वास्तव में अध्ययनरत और पात्र हैं।इसके लिए न केवल आवेदकों की कक्षा व मेरिट आधारित पात्रता तय की जा रही है, बल्कि आवंटन को अस्थायी (प्रोविजनल) रूप में रखा गया है। नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अलग छात्रावास विश्वविद्यालय परिसर में कुल पांच छात्रावासों में लगभग 1460 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था है, जबकि नवप्रवेषित 1200 समेत चार वर्षों के कुल 4500 छात्र-छात्राएं हैं।इस कारण प्रबंधन ने इस बार आवंटन मेरिट के आधार पर करने का निर्णय लिया है। इसमें नवप्रवेशित विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। छात्रों के लिए यह व्यवस्था इसमें लड़कों को चंद्रशेखर आजाद छात्रावास में करीब 270 और भास्कराचार्य में 135 छात्रों को कमरे आवंटित किए गए हैं। वहीं लगभग 450 लड़कियों के लिए रानी अहिल्याबाई छात्रावास आवंटित किया गया है। छात्राओं के लिए लक्ष्मीबाई छात्रावास नर्धारित वहीं द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के 370 छात्रों के लिए एपीजे अब्दुल कलाम छात्रावास और 230 छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास निर्धारित किए गए हैं। इसे लेकर प्रो. एस.एस भदौरिया, संचालक, यूआईटी, आरजीपीवी यह ने बताया कि यह व्यवस्था विवि में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। 1200 आवेदन मिले है, नियमों और मेरिट के आधार पर रूम आवंटित किए जा रहे हैं।

वेस्टइंडीज की शर्मनाक हार के बाद सीडब्ल्यूआई ने बुलाई आपात बैठक, दिग्गजों को किया आमंत्रित

किंग्स्टन (जमैका) ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मिली शर्मनाक हार, खासकर अंतिम टेस्ट में महज 27 रन पर ढेर होने के बाद क्रिकेट वेस्टइंडीज (सीडब्ल्यूआई) ने कड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने अपनी क्रिकेट स्ट्रैटेजी कमेटी की एक आपात बैठक बुलाई है, जिसमें सर क्लाइव लॉयड, सर विवियन रिचर्ड्स और ब्रायन लारा को विशेष आमंत्रण भेजा गया है। सीडब्ल्यूआई अध्यक्ष डॉ. किशोर शालो ने एक बयान में कहा, तुरंत प्रभाव से, मैंने क्रिकेट रणनीति और ऑफिशिएटिंग कमेटी के अध्यक्ष को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल की टेस्ट सीरीज, विशेष रूप से अंतिम मैच की समीक्षा हेतु आपात बैठक बुलाने की सलाह दी है। इस बैठक में पहले से ही शामिल पूर्व दिग्गज जैसे डॉ. शिवनारायण चंद्रपॉल, डॉ. डेसमंड हेन्स और इयान ब्रैडशॉ के साथ अब इन महान बल्लेबाजों की भी राय ली जाएगी। पूर्व स्पिनर दिनानाथ रामनाराइन ने बोर्ड की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर एक तीखा लेख साझा किया है। उन्होंने लिखा, बोर्ड के सदस्य खुद को मनमाफिक वेतन देते हैं, खिलाड़ियों का चयन व्यक्तिगत निष्ठा के आधार पर होता है, और राष्ट्रीय टीम के प्रदर्शन को कोई महत्व नहीं दिया जाता। उन्होंने आगे कहा, जहां प्रशंसक खामोशी के साथ इस खेल से दूर होते जा रहे हैं, वहीं अधिकारी कुर्सियों से चिपके हुए हैं। हार के बाद भी कोई आत्मचिंतन नहीं, कोई जवाबदेही नहीं। रामनाराइन ने यह भी याद दिलाया कि यह वही प्रणाली है जिसकी वजह से वेस्टइंडीज को यूएसए जैसी टीम से 100 रन से हार का सामना करना पड़ा और अब 27 रन पर ऑल आउट होने जैसी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। सीडब्ल्यूआई अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह बैठक केवल प्रतीकात्मक नहीं है, ये वही लोग हैं जिन्होंने हमारे क्रिकेट के स्वर्णिम युग को परिभाषित किया है। उनकी दृष्टि हमारे क्रिकेट के भविष्य को आकार देने में बेहद उपयोगी होगी। हमारा उद्देश्य इस बैठक से ठोस और क्रियान्वयन योग्य सुझाव प्राप्त करना है। हालांकि बैठक कब और कहां होगी, इस पर आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मगर इतना तय है कि वेस्टइंडीज क्रिकेट में यह एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है।  

RCB भगदड़ जांच रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक हो: कर्नाटक हाई कोर्ट का आदेश

बेंगलुरु कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह चार जून को हुई भगदड़ की घटना पर अपनी स्थिति रिपोर्ट सार्वजनिक करें, जिसने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई आईपीएल जीत के जश्न को गहरा धक्का पहुंचाया था। इस त्रासदी में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट से इस रिपोर्ट को गोपनीय रखने का अनुरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने सोमवार, 14 जुलाई को स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की गोपनीयता के लिए कोई कानूनी आधार नहीं है, और ये केवल ‘सरकार की दृष्टि में तथ्यों की प्रस्तुति’ है। कोर्ट ने सरकार को यह रिपोर्ट मामले के अन्य पक्षों – आरसीबी, कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) और डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स, जो फ्रेंचाइजी के इवेंट पार्टनर हैं – को सौंपने का भी निर्देश दिया है। इस बीच फ्रेंचाइजी एक विस्तृत सीआईडी जांच और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) की दो सदस्यीय पीठ की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। यह पीठ सरकारी और सार्वजनिक सेवकों से जुड़े मामलों की जांच करने वाला अर्ध-न्यायिक निकाय है। आरसीबी और डीएनए के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले एक महीने में अपने बयान जमा कराए हैं। फैसले की कोई तय तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। एक जुलाई को सीएटी की दो सदस्यीय पीठ ने एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर जुटी भीड़ को लेकर एक अहम टिप्पणी की। ट्रिब्यूनल ने पाया कि आरसीबी ने तीन से पांच लाख लोगों की भीड़ को स्टेडियम के बाहर आकर्षित किया, जब फ्रेंचाइजी ने अपनी पहली आईपीएल खिताबी जीत के तुरंत बाद, तीन जून को, सोशल मीडिया पर विजय जुलूस की घोषणा की। इस मामले की जांच का काम सीएटी को तब सौंपा गया जब बेंगलुरु (पश्चिम) के पुलिस महानिरीक्षक और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकास कुमार ने एक याचिका दायर की। यह याचिका मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा उन्हें भगदड़ की घटना के बाद पद से हटाए जाने के खिलाफ दाखिल की गई थी। विकास और चार अन्य अधिकारियों को “कर्तव्यों में गंभीर लापरवाही” और “निर्देश न लेने” के आरोप में बर्खास्त किया गया था, जिससे हालात “काबू से बाहर” हो गए थे। ट्रिब्यूनल ने कहा किआरसीबी ने बिना जरूरी अनुमति लिए आईपीएल जीत का जश्न मनाकर ‘अव्यवस्था पैदा की।’ ये टिप्पणियां सीएटी के 29-पन्नों के आदेश का हिस्सा थीं। आरसीबी, के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर निखिल सोसले को पिछले महीने गिरफ्तार कर जमानत पर रिहा किया गया था। उन्होंने मृतकों के परिजनों को मुआवजा बढ़ाने और घायलों की मदद की घोषणा के बाद से अब तक कोई नया बयान जारी नहीं किया है। फ्रेंचाइजी ने ‘आरसीबी केयर्स’ नाम से एक फंड बनाने का वादा किया है, जिससे त्रासदी से प्रभावित सभी परिवारों की मदद की जा सके। 4 जून की घटना के बाद से उनके किसी भी सोशल मीडिया चैनल पर कोई नई अपडेट नहीं आई है।  

विधानसभा के बाहर दिखा विरोध का नया रूप, MVA विधायक बने सुर्खियों का कारण

मुंबई महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ द्वारा कैंटीन कर्मचारी की पिटाई मामले में सियासत अपने चरम पर है। इसका नजरा आज (बुधवार को) उस वक्त देखने को मिला जब विपक्षी दलों के गठबंधन महा विकास आघाडी (MVA) के विधायकों ने अनूठे अंदाज में विरोध-प्रदर्शन किया। दरअसल, महाराष्ट्र विधान भवन के बाहर विपक्षी महा विकास आघाड़ी के विधायकों ने ‘बनियान तौलिया’ प्रदर्शन किया। इस दौरान बनियान और कपड़ों के ऊपर तौलिया पहने विधायकों ने सत्तारूढ़ गठबंधन के "गुंडा राज" के खिलाफ जमकर नारे लगाए। तौलिया लपेटे विधायक जोर-जोर से नारे लगा रहे थे कि राज्य में गुंडा राज चल रहा है। राज्य विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने संवाददाताओं से कहा, "विधायक कैंटीन में गायकवाड़ द्वारा किया गया हमला दर्शाता है कि सरकार भी ऐसे तत्वों का समर्थन कर रही है।" उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ऐसे लोगों को संरक्षण दे रही है। गायकवाड़ को निलंबित करने की मांग कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि यह सभी को बताने और दिखाने की जरूरत है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायक कैसे गुंडों की तरह व्यवहार करते हैं। उन्होंने कहा कि गायकवाड़ का यह कृत्य शर्मनाक है और उन्हें सजा मिलनी चाहिए। NCP (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने बताया कि MVA के विधायकों ने यह विरोध-प्रदर्शन इसलिए किया है ताकि जनता को यह पता चल सके कि सत्ता में बैठे लोग किस प्रकार का व्यवहार आम आदमी से करते हैं। विपक्षी विधायकों ने संजय गायकवाड़ को विधानसभा से निलंबित करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आदित्य ठाकरे ने दिया था चड्डी- बनियान गैंग नाम बता दें कि पिछले हफ्ते विधायक हॉस्टल की कैंटीन में 'बासी' खाना परोसे जाने पर एक कर्मचारी को थप्पड़ और घूंसे मारने का शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ का एक वीडियो सामने आया था। इसके बाद सरकार और विपक्ष दोनों ने उनकी आलोजना की है। वीडियो में गायकवाड़ बनियान पहने और कमर पर तौलिया लपेटे कैंटीन ठेकेदार को थप्पड़ व घूंसे मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। दो दिन पहले ही आदित्य ठाकरे ने शिवसेना विधायकों को चड्डी- बनियान गैंग कहकर बुलाया था, जिस पर नीलेश राणे ने रोष जताया था। एमवीए विधायकों का अनूठा प्रदर्शन आदित्य ठाकरे के बयान का समर्थन और सत्ताधारी गठबंधन के विधायक के करतूत और उसे मिल रहे रथित संरक्षण का विरोध है।