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शुभमन गिल का खुलासा, उम्मीद नहीं थी किंग चार्ल्स लॉर्ड्स टेस्ट देखेंगे

नई दिल्ली भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि टीम को उम्मीद नहीं थी कि किंग चार्ल्स लॉर्ड्स टेस्ट मैच देखेंगे। भारत की पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने मंगलवार को लंदन स्थित ‘क्लेरेंस हाउस’ में किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात की। इस दौरान किंग चार्ल्स ने जसप्रीत बुमराह, ऋषभ पंत, शुभमन गिल समेत अन्य खिलाड़ियों से बातचीत की। किंग चार्ल्स तृतीय ने अपनी परंपरा निभाते हुए लंदन दौरे पर आई भारतीय क्रिकेट टीम का क्लेरेंस हाउस में स्वागत किया। यह एक दोस्ताना मुलाकात थी। किंग चार्ल्स तृतीय इंग्लैंड दौरे पर राष्ट्रमंडल क्रिकेट टीमों का स्वागत करने की परंपरा रखते हैं। राष्ट्रमंडल प्रमुख के रूप में मेहमानों की मेजबानी कर रहे किंग चार्ल्स ने भारतीय टीम से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने भारत-इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच की झलकियां देखीं। इस मुकाबले में गिल की अगुवाई वाली भारतीय टीम को महज 22 रन से करीबी हार झेलनी पड़ी थी। गिल ने ‘बीसीसीआई’ के ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा, “किंग चार्ल्स बहुत दयालु और उदार हैं। उन्होंने हमसे बहुत अच्छी बातचीत की। उम्मीद नहीं थी कि वह हमारा मैच देखेंगे। किंग चार्ल्स ने बताया कि उन्होंने हमारे मुकाबले के आखिरी सेशन के कुछ अंश देखे। यह एक शानदार अनुभव था। हम इसके लिए बहुत आभारी हैं।” इस दौरान क्लेरेंस हाउस में इंग्लिश अभिनेता और संगीतकार इद्रिस एल्बा ने भी खिलाड़ियों से मुलाकात की। इद्रिस एल्बा सेंट जेम्स पैलेस में आयोजित यूथ ऑपर्च्युनिटीज समिट के लिए लंदन पहुंचे थे। एल्बा ने भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। इस मुलाकात के दौरान बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला और ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराइस्वामी भी मौजूद थे। शुक्ला ने किंग चार्ल्स को अपनी पुस्तक ‘स्कार्स ऑफ 1947’ भेंट की। राजीव शुक्ला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ब्रिटेन के किंग चार्ल्स हम सभी से बहुत ही गर्मजोशी के साथ अपने घर पर मिले। वह खुशमिजाज व्यक्तित्व हैं। मुलाकात से पहले, उन्होंने हम सभी के बारे में काफी जानकारी इकट्ठा की थी।”  

Apple यूज़र्स के लिए खुशखबरी: iPhone और Watch अब करेंगे पहले से कहीं ज़्यादा सिंक और स्मार्ट काम

टेक्नोलॉजी दिनों-दिन आगे बढ़ रही है। आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) काफी चलन में है। ऐसा तय माना जा रहा है कि भविष्य में एआई का खूब इस्तेमाल किया जाएगा। कई कंपनियों ने एआई का इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया है। अभी तक AI का इस्तेमाल बीमारियों का पता लगाने, बीमारियों का इलाज करने या पढ़ाई-लिखाई में मदद करने के लिए किया जाता है। आने वाले वक्‍त में एआई का इस्तेमाल प्रेग्‍नेंसी का पता लगाने के लिए भी किया जाएगा। दुनिया की जानी मानी कंपनी Apple ने ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई है। आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं। iPhone और Apple Watch से पता चलेगी प्रेग्नेंसी ऐपल के प्रोडक्ट्स जैसे iPhone, iPad, Apple Watch आदि को सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स माना जाता है। इनमें कई ऐसे फीचर्स होते हैं जो इन्हें दूसरे डिवाइस से अलग बनाते हैं। एक नई रिसर्च के मुताबिक Apple ने एक कमाल का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल बनाया है जो अब iPhone और Apple Watch से मिली जानकारी (व्यवहारिक डेटा) का इस्तेमाल करके 92% सटीकता के साथ प्रेग्नेंसी का पता लगा सकता है। कैसे काम करती है यह नई टेक्नोलॉजी? इस रिसर्च का नाम "Beyond Sensor Data: Foundation Models of Behavioral Data from Wearables Improve Health Predictions" है। इस रिसर्च में बताया गया है कि यह नया AI मॉडल कुछ खास स्वास्थ्य संकेतों जैसे नींद की गुणवत्ता, दिल की धड़कन में बदलाव (हार्ट रेट वेरिएबिलिटी), चलने-फिरने की आदतें (मोबिलिटी) और अन्य महत्वपूर्ण बातों को पहचान सकता है। यह वियरेबल बिहेवियर मॉडल (WBM) प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को भी ट्रैक कर सकता है। इस नए फाउंडेशन मॉडल को बनाने के लिए 2.5 बिलियन घंटे से भी ज्यादा वियरेबल डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह पिछले मॉडल्स से बेहतर या उनके बराबर काम कर सके। हालां‍क‍ि अभी यह पता नहीं है क‍ि यह टेक्‍नोलॉजी कबतक ड‍िवाइसेज में ले आएगी जाएगी। रिसर्च में क्या-क्या शामिल था? रिसर्चर्स ने 430 प्रेग्नेंट महिलाओं के डेटा का इस्तेमाल करके एक प्रेग्नेंसी डेटासेट बनाया, जिनकी डिलीवरी नॉर्मल या सिजेरियन हुई थी। WBM ने ऐप्पल हेल्थ ऐप, हेल्थकिट और हार्ट रेट सेंसर डेटा (PPG) से जानकारी इकट्ठा की। रिसर्च में बताया गया है कि डेटा से पता चला कि बच्चे के जन्म से पहले के नौ महीने और डिलीवरी के बाद का एक महीना "पॉजिटिव" हफ्ते थे, क्योंकि महिलाएं प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद ठीक होने के दौरान शारीरिक बदलावों से गुजर रही थीं। बाकी समय को "नेगेटिव" हफ्ते के तौर पर चिन्हित किया गया। नतीजों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए रिसर्चर्स ने 24,000 से ज्यादा उन महिलाओं का डेटा भी इकट्ठा किया जिनकी उम्र 50 साल से कम थी और जो प्रेग्नेंट नहीं थीं।  

पहली कक्षा में एडमिशन को लेकर राज्य सरकार और CBSE के दो अलग-अलग नियम का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

 इंदौर  पहली कक्षा में बच्चों के प्रवेश को लेकर राज्य शासन और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दो अलग-अलग नियम अभिभावकों के लिए परेशानी की वजह बन रहे हैं। मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सीबीएसई स्कूल एसोसिएशन की ओर से पैरवी कर रहे अभिभाषक गौरव छाबड़ा ने बताया कि सीबीएसई स्कूलों में प्रवेश की आयु केंद्रीय शिक्षा नीति में निर्धारित की गई है। इसके हिसाब से एक अप्रैल के पहले छह वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों को ही कक्षा एक में प्रवेश दिया जाता है। दूसरी तरफ राज्य सरकार ने मार्च में एक आदेश जारी किया है। इसमें 30 सितंबर तक छह वर्ष की आयु पूरी करने वालों को प्रवेश देने के लिए कहा है। इन दोनों नियमों में करीब छह माह का अंतर आ रहा है। ऐसी स्थिति में अभिभावक असमंजस में हैं। कोई छात्र एक साल पढ़ाई के बाद किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित होता है तो नियमों की वजह से उसे दोबारा कक्षा एक में पढ़ना पड़ेगा। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान दो सरकारों के दो नियमों के कारण आने वाली परेशानी को कोर्ट के समक्ष रखा गया। कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा सचिव, अध्यक्ष सीबीएसई बोर्ड, मप्र शासन, संचालक राज्य शिक्षा केंद्र और इंदौर के जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है।

परम वीर चक्र मेजर सोमनाथ शर्मा एवं कैप्टन विक्रम बत्रा की शौर्य गाथा एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं के सिलेबस में शामिल

भोपाल  एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की अंग्रेजी पुस्तक 'पूरवी' में अब भारत के वीर सपूतों की कहानियां सुनाई जाएंगी। इस पुस्तक में पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा और कारगिल हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा की शौर्य  कहानियां शामिल की गई हैं।  इस पुस्तक के माध्यम से छात्रों को भारत के इतिहास और संस्कृति के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। नए पाठ्यक्रम में शामिल प्रमुख बिंदु: – मेजर सोमनाथ शर्मा: पहले परमवीर चक्र विजेता, जिन्होंने 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अद्वितीय साहस दिखाया। – कैप्टन विक्रम बत्रा: कारगिल युद्ध में परमवीर चक्र विजेता, जिन्होंने अपने अदम्य साहस से दुश्मनों को पराजित किया। – आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा: झारखंड के प्रसिद्ध आदिवासी नेता, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी। – महान गणितज्ञ:     – आर्यभट्ट: प्राचीन भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और खगोलशास्त्री।     – वराहमिहिर: ज्योतिष और गणित के प्रसिद्ध विद्वान।     – भास्कराचार्य: गणितज्ञ और खगोलशास्त्री, जिन्होंने बीजगणित और ज्यामिति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। – देश की पहली महिला भौतिक वैज्ञानिक बिभा चौधरी: भारतीय विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली वैज्ञानिक। – भारतीय साहित्यकार:     – तेनाली राम: विजयनगर साम्राज्य के प्रसिद्ध तेलुगु कवि।     – सरोजनी नायडू: प्रसिद्ध भारतीय अंग्रेजी कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी। इन सभी व्यक्तित्वों की कहानियों और योगदानों को शामिल करके, एनसीईआरटी ने छात्रों को भारत के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति से परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया है।

प्रयागराज-वाराणसी के लिए चेतावनी! IMD का यलो अलर्ट, दिल्ली-मुंबई में पहले से बारिश जारी

नई दिल्ली  हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में बारिश ने खूब तबाही मचाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमाचल में अब तक 55 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है। जान-माल का करोड़ों का नुकसान भी हुआ है। आज कहाँ-कहाँ होगी बारिश? मौसम विभाग (IMD) ने 16 जुलाई के लिए कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। IMD के मुताबिक, आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम? दिल्ली में आज यानी 16 जुलाई को बारिश की संभावना है। राजौरी गार्डन, मुंडाका, कंझावला, बवाना, बुद्ध जयंती पार्क, रोहिणी, पश्चिम विहार और दिल्ली कैंट जैसे इलाकों में बारिश हो सकती है। पिछले कई दिनों से राजधानी में बादल छाए हुए हैं, और 18 तारीख तक ऐसा ही मौसम बना रह सकता है. कहीं-कहीं बादलों की गरज भी सुनाई दे सकती है। उत्तर प्रदेश में बारिश का अपडेट उत्तर प्रदेश में, नोएडा समेत कई इलाकों में पिछले दिनों बारिश हुई थी, और आज भी यह सिलसिला जारी रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फरनगर, किठौर, संभल, गढ़मुक्तेश्वर, सियाना, जहांगीराबाद, बहजोई, नरौरा, प्रयागराज, वाराणसी, सहसवान, अनूपशहर, खतौली, सकौती टांडा, हस्तिनापुर, कासगंज और एटा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा, हरियाणा के असंध, सफीदों, सोनीपत, खरखौदा, कैथल, राजौंद, पानीपत और गोहाना में भी बारिश का अनुमान है। पहाड़ी राज्यों में बारिश और अलर्ट हिमाचल प्रदेश के कई जिलों, जैसे कुल्लू, चंबा, कांगड़ा, मंडी, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन और शिमला में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई है।  

अपनी ही रकम के लिए रिटायर्ड फौजी को देनी पड़ी घूस, पुलिस पर उठे सवाल, SP तक पहुंची शिकायत

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रिटायर्ड फौजी को उनका ही पैसा लौटाने के एवज में 10 हजार रुपया रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। फौजी का कहना है रिश्वत बड़ागांव चौकी प्रभारी एएसआई राजकुमार शर्मा ने मांगी है। एएसआई की इस हरकत का 15 जून को उन्होंने वीडियो भी बनाया है। उसमें एएसआई शर्मा बोलते हुए दिख रहे हैं कि “13 लाख रुपया नहीं देख रहे हो, 10 हजार रुपए की चिंता कर रहे हो”। जिसकी शिकायत पर पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को लेकर कार्रवाई करने की बात कही है। प्लाट धोखाधड़ी से शुरू हुआ था मामला दअरसल, भिंड असहोना निवासी मुन्नालाल जोतिषी ने पुलिस से शिकायत कर बताया कि उन्होंने दो साल पहले पत्नी बैजंती के नाम से बब्लू बुंदेला की पत्नी रागिनी से 25 गुणा 45 वर्ग फीट का प्लॉट 13 लाख 90 हजार रुपये में खरीदा था। इसमें उनके साथ धोखा हो गया। उन्हें जो प्लॉट दिखाया गया, उसकी जगह रेंच वाले प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी गई। इसकी शिकायत उन्होंने 2023 में एसपी दफ्तर में की थी।  ASI ने बिल्डर से चेक लेकर फरियादी को देने का किया वादा फिर पता चला कि रजिस्ट्री भी गड़बड़ है, तो उन्होंने अपने स्तर पर बब्लू बुंदेला पर दबाव बनाया तो उसने एक लाख रुपया तो तत्काल लौटा दिया था। बाकी रकम 12 लाख 50 हजार रुपये का चेक देने का वादा किया। मामले की जांच बड़ागांव चौकी प्रभारी एएसआई राजकुमार शर्मा के पास है। एएसआई शर्मा ने बबलू से उनके नाम का चेक तो ले लिया लेकिन फरियादी को नहीं दिया और उसके बदले 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी।  फोन कर फरियादी से कहा- पैसा दो चेक मिल जाएगा 15 जून को एएसआई राजकुमार शर्मा भिंड मिहोना आए थे। शर्मा ने फोन कर उन्हें बस स्टेंड पर बुलाया था। वहां सीधे कहा था “पैसा दो चेक मिल जाएगा’। मुन्नालाल के मुताबिक उन्होंने एएसआई शर्मा की घूस की डिमांड का वीडियो भी बनाया और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दे दिया। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिटायर्ड फौजी ने एएसआई पर घूस मांगने का आरोप लगाया है। इस मामले की जांच की जा रही हैं वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की मुश्किलें बढ़ीं, आतंकी करार देने की मांग तेज

कनाडा  कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यहां की प्रांतीय सरकार ने इस गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित करने की मांग तेज कर दी है। सरकार का कहना है कि यह गैंग कनाडा में हिंसा, ड्रग तस्करी, जबरन वसूली और टारगेट किलिंग जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल है। अल्बर्टा सरकार ने की सख्त मांग अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ और पब्लिक सेफ्टी एवं इमरजेंसी सर्विस मंत्री माइक एलिस ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से इस गैंग पर कार्रवाई करने की अपील की है। डेनियल स्मिथ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा,'लॉरेंस बिश्नोई गैंग एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क है जो हिंसा, जबरन वसूली, ड्रग तस्करी और टारगेट किलिंग में शामिल है। वे कनाडा में भी यही सब कर रहे हैं।' डेनियल स्मिथ की गैंग को चेतावनी डेनियल स्मिथ ने साफ कहा कि ऐसे गैंग सीमाओं की परवाह नहीं करते और न ही किसी देश का सम्मान करते हैं। अल्बर्टा प्रांत का संदेश साफ है कि यहां ऐसे गैंग का कोई स्वागत नहीं होगा। कनाडा की सुरक्षा को बताया प्राथमिकता डेनियल स्मिथ और माइक एलिस ने प्रधानमंत्री कार्नी से कहा कि अब इस गैंग के खिलाफ सख्त कदम उठाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, 'कनाडा और अल्बर्टा के लोगों की सुरक्षा के लिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। कई देशों में सक्रिय है लॉरेंस गैंग लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नेटवर्क सिर्फ कनाडा ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में फैला हुआ है। यह गैंग पहले भी कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय है।

खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के व्यक्तित्व, करियर और वैश्विक पहचान से जुड़ चुका : CM यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी स्पेन यात्रा के पहले दिन की शुरूआत मैड्रिड स्थित विश्व प्रसिद्ध LaLiga मुख्यालय के भ्रमण से की और वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट कर खेल, युवा सशक्तिकरण और निवेश सहयोग पर केंद्रित संवाद किया। उन्होंने कहा कि LaLiga की खेल विशेषज्ञता और वैश्विक पहुँच का लाभ मध्यप्रदेश के युवाओं तक पहुँचना चाहिए। यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि खेल के क्षेत्र में नवाचार, सामाजिक समावेशन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की दिशा में प्रदेश के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने LaLiga के पदाधिकारी और तकनीकी निदेशकों के समक्ष प्रस्ताव रखा कि मध्यप्रदेश में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर फुटबॉल एक्सीलेंस सेंटर, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन और स्पेनिश कोचिंग आधारित यूथ ट्रेनिंग प्रोग्राम प्रारंभ किए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि LaLiga के साथ यह साझेदारी केवल खेलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह प्रदेश में रोजगार सृजन, सामाजिक भागीदारी, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा दे सकती है। LaLiga मैचों में होगी म.प्र. की ब्राडिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुझाव दिया कि LaLiga मैचों के दौरान डिजिटल और ग्राउंड को-ब्रांडिंग अभियानों के माध्यम से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, वन्यजीव, विरासत स्थलों और पर्यटन अवसरों का स्पेन और यूरोप के व्यापक दर्शकों के बीच प्रभावी प्रचार किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यटन बल्कि स्पोर्ट्स टूरिज्म, फिटनेस, मीडिया ब्रॉडकास्टिंग और स्पोर्ट्स टेक जैसे सेक्टर्स में विदेशी निवेश आकर्षित करने की संभावनाएँ मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की 18 सेक्टर-विशिष्ट औद्योगिक नीतियों और ‘स्टार्ट योर बिजनेस इन 30 डेज़’ जैसी दूरदर्शी पहलों का उल्लेख करते हुए LaLiga के साथ जुड़े वैश्विक निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारियों के लिए एक भरोसेमंद और अनुकूल डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं के कौशल विकास, फुटबॉल अकैडमीज़ के ज़रिये प्रतिभा पहचान, और सामुदायिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में LaLiga की दीर्घकालिक विशेषज्ञता और भारत में उसकी सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश इस सहयोग के माध्यम से खेल को सामाजिक विकास का सशक्त माध्यम बनाएगा। LaLiga और मध्यप्रदेश: भविष्य के साझेदार LaLiga, स्पेन की प्रमुख पेशेवर फुटबॉल लीग, न केवल स्पोर्टिंग उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर युवाओं के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और ब्रांड विस्तार का भी एक प्रभावशाली मंच है। भारत में LaLiga की सक्रियता, विशेषकर LaLiga Football Schools जैसी पहल, यह दर्शाती हैं कि स्पेनिश फुटबॉल का भारतीय युवाओं से गहरा संबंध बन चुका है। अब यह संबंध मध्यप्रदेश जैसे संभावनाशील राज्य के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा, वैश्विक खेल नेटवर्क से जुड़कर प्रदेश में निवेश, युवाओं के कौशल विकास और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल मानी जा रही है। स्पेन के राजनीतिक, कारोबारी और खेल जगत में इस दौरे को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और यह भारत की स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी को भी नई ऊँचाइयाँ देने वाला कदम सिद्ध हो रहा है। फुटबॉल के जरिए भविष्य की नीव और खेलों में अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी का प्रारंभ होगा नया दौर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में ला लीगा मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को लेकर जिस प्रकार से वातावरण बना है, उसने प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचने का अवसर दिया है। खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के व्यक्तित्व, करियर और वैश्विक पहचान से जुड़ चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार और खेल मंत्रालय के सहयोग से मध्यप्रदेश भी हर स्तर पर खेलों के विकास में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि शहडोल के एक छोटे से गाँव में जब प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की "फुटबॉल राजधानी" की उपमा दी, तो वह केवल एक प्रशंसा नहीं थी, बल्कि देश की उस छिपी हुई ताकत को पहचानने का संकेत था, जो ग्रामीण भारत में मौजूद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहडोल से लेकर भोपाल तक, प्रदेश में फुटबॉल सहित सभी खेलों के लिए अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं, प्रशिक्षण और वैश्विक प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्पेन जैसे देशों के अनुभवों से सीखकर, मध्यप्रदेश में भी फुटबॉल को नई दिशा दी जाएगी। प्रतिभाओं को तराशने के लिए तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण केंद्र, और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में सहभागिता की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि स्पेन प्रवास के दौरान औद्योगिक निवेश के कार्यक्रमों के साथ उन्होंने खेल क्षेत्र के लिए भी कई उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश केवल उद्योग, पर्यटन या शिक्षा में ही नहीं, बल्कि खेलों के क्षेत्र में भी अग्रणी बने, यही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय अवसर देने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। फुटबॉल जैसे खेलों के माध्यम से न केवल शरीर, बल्कि भविष्य भी गढ़ा जा सकता है।  

केंद्रीय कैबिनेट की पीएम धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी, हर साल खर्च होंगे 24000 करोड़ रुपये

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने 36 योजनाओं को मिलाकर 24,000 रुपये प्रति वर्ष के परिव्यय वाली प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी। सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह एलान किया है। सरकार ने एनएलसीआईएल को नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के लिए 7,000 करोड़ रुपये की भी मंजूरी दे दी है। इसके अलावे कैबिनेट ने एनटीपीसी को नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपये की मंजूरी देने पर भी अपनी मुहर लगा दी है। क्या है प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना? मंत्रिमंडल ने बुधवार को छह साल की अवधि के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत हर वर्ष 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसमें 100 जिले शामिल होंगे। केंद्रीय बजट में घोषित यह कार्यक्रम 36 मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करेगा और फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने मदद देगा। भंडारण और सिंचाई सुविधाओं में होगा सुधार केंद्रीय मंत्रिमंडल में लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी साझा करते हुए, सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पीएम धन-धान्य कृषि योजना से फसल के बाद भंडारण में वृद्धि होगी, सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा और कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी। इस कार्यक्रम से 1.7 करोड़ किसानों को लाभ मिलने की संभावना है। एनएलसी इंडिया एनआईआरएल में कर सकेगा 7000 करोड़ रुपये का निवेश सरकार ने बुधवार को एनएलसी इंडिया को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई एनआईआरएल में 7,000 करोड़ रुपये निवेश करने की अनुमति दे दी। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की ओर से लिया गया। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) को नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) पर लागू मौजूदा निवेश दिशानिर्देशों से विशेष छूट देने को मंजूरी दे दी है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "इस रणनीतिक निर्णय से एनएलसीआईएल को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनएलसी इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (एनआईआरएल) में 7,000 करोड़ रुपये का निवेश करने में मदद मिलेगी। इसके तहत एनआईआरएल विभिन्न परियोजनाओं में सीधे या संयुक्त उद्यम का गठन कर निवेश कर सकेगी।इसके लिए पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।" शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी पर वापसी से जुड़ा प्रस्ताव भी पारित बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा पर भी एक प्रस्ताव पारित किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह स्पेस की दिशा में हमारी बहुत बड़ी उपलब्धि  है। उन्होंने कहा, "आईएसएस (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की वापसी पर मंत्रिमंडल ने एक बड़ा संकल्प पारित किया है। 15 जुलाई को भारत की अनंत आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अन्तरिक्ष यात्रा से सकुशल धरती पर लौटे हैं। ये समूचे देश के लिए गर्व, गौरव और उल्लास का अवसर है। आज मंत्रिमंडल, देश के साथ मिलकर, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौटने का अभिनंदन करता है। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 18 दिन का ऐतिहासिक मिशन पूरा किया।"  पीएम धन धान्य कृषि योजना, जिसपर सालाना 24000 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार क्या है पीएम धन धान्य कृषि योजना? यह योजना खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए शुरू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य खेती में नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना, किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने की बजाय फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के लिए प्रोत्साहित करना, जलवायु के अनुसार खेती को बढ़ावा देना, गांव स्तर पर भंडारण, सिंचाई और कृषि कर्ज की सुविधाओं को मजबूत बनाना और लागत घटाकर किसान की पैदावार बढ़ाना है जिससे उनकी आय में सुधार हो सके। किन किसानों को मिलेगा लाभ? इस योजना का सबसे ज़्यादा फायदा छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा। इन किसानों की जमीन कम होती है, लेकिन अगर उन्हें सही तकनीक, सिंचाई और भंडारण की सुविधा मिले, तो वे भी ज्यादा उत्पादन कर सकते हैं। इस योजना से करीब 1.7 करोड़ किसानों को सीधे फायदा मिलने की उम्मीद है। 100 ज़िलों को प्राथमिकता सरकार ने देश के 100 ऐसे ज़िलों की पहचान की है, जहां कृषि उत्पादकता कम है, फसल सघनता औसत से नीचे है और किसानों को पर्याप्त ऋण नहीं मिल पाता। इन जिलों में पीएम धन धान्य कृषि योजना को सबसे पहले लागू किया जाएगा। ₹24,000 करोड़ का वार्षिक खर्च सरकार इस योजना पर हर साल ₹24,000 करोड़ खर्च करेगी। यह राशि पहले से चल रही 36 कृषि योजनाओं के समन्वय से खर्च की जाएगी, जिससे न सिर्फ लागत घटेगी बल्कि योजनाओं का असर भी ज़्यादा होगा। कृषि में क्रांति लाने की तैयारी पीएम धन धान्य कृषि योजना से उम्मीद है कि यह देश में कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति लाएगी। टेक्नोलॉजी, विविधीकरण, और स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को लागू कर किसानों की आय को बढ़ाया जाएगा। पीएम धन धान्य कृषि योजना का उद्देश्य: इस योजना का मुख्य उद्देश्य कम फसल उत्पादन वाले क्षेत्रों में कृषि सुधार करना है। सरकार ने उन 100 जिलों को चिन्हित किया है, जहां खेती उन्नत नहीं है और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इस योजना के तहत सरकार किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और उन्नत उपकरण उपलब्ध कराएगी, जिससे किसान अपनी फसल में सुधार कर सकें। इसके साथ ही वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी, ताकि किसान बेहतर उपकरण और नए तरीके अपनाकर अपनी खेती को और अधिक उत्पादक बना सकें। इस योजना का उद्देश्य खेती को आसान और किसानों के लिए लाभकारी बनाना है, जिससे वे अधिक फसल उगा सकें और अपनी आय बढ़ा सकें। इस योजना से कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा, और देश भर के किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा। पीएम धन धान्य कृषि योजना के लिए पात्रता मापदंड: इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो निम्नलिखित पात्रता मापदंडों को पूरा करते हैं:     कम कृषि उत्पादन वाले 100 चयनित जिलों के किसान इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।     छोटे, सीमांत और बड़े पैमाने के किसान सभी पात्र होंगे।     आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।     किसान के पास वैध भूमि स्वामित्व दस्तावेज होना चाहिए।     पारंपरिक या पुरानी खेती के तरीकों का उपयोग करने वाले किसान इस … Read more

ऑपरेशन सिंदूर ने यह दर्शाया है कि स्वदेशी रूप से विकसित UAS और C-UAS हमारी जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण

नई दिल्ली भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि दुनिया में हुईं हाल की लड़ाइयों ने दिखा दिया है कि कैसे ड्रोन जंगों में शक्ति के संतुलन को जबरदस्त तरीके से बदल सकते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि यूएवी और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (सी-यूएएस) में आत्मनिर्भरता भारत के लिए एक "रणनीतिक अनिवार्यता" है.  जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ड्रोन वास्तविकता के प्रमाण हैं और हाल के संघर्षों में उनकी व्यापक उपयोगिता दर्शाती है कि कैसे ड्रोन अपने आकार या कीमत के अनुपात में सामरिक संतुलन को असमान रूप से बदल सकते हैं.  उन्होंने कहा, "असममित ड्रोन युद्ध बड़े प्लेटफार्मों को असुरक्षित बना रहा है और सेनाओं को एयर डॉक्ट्राइन, सी-यूएएस के विकास के वैचारिक पहलुओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर रहा है." दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में जनरल चौहान ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दर्शाया है कि स्वदेशी रूप से विकसित मानवरहित हवाई प्रणालियां (यूएएस) और सी-यूएएस "हमारे इलाकों और हमारी जरूरतों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं." बता दें कि दिल्ली में भारतीय सेना ने थिंक-टैंक सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज के सहयोग से UAV और C-UAS (काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम) पर एक कार्यशाला का आयोजन किया है.  सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि भविष्य की लड़ाइयां आज की जंग को कल के हथियारों से नहीं जा सकता है.  उन्होंने कहा है कि अगर भारत को युद्ध क्षेत्र में बढ़त बनाकर रखनी है, तो हमें ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा. जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि आज का युद्ध ‘कल की तकनीक’ से नहीं लड़ा जा सकता. हमें अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता को स्वदेशी बनाना होगा. जनरल चौहान ने कहा कि अगर भारत को युद्ध क्षेत्र में बढ़त बनाकर रखनी है तो इंडियन आर्मी को ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा. सीडीएस ने कहा कि हमें अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता का स्वदेशीकरण करना होगा.  लोअर एयर स्पेस में लड़ी जा रही हैं लड़ाइयां  अनिल चौहान ने कहा कि हम पहले सोचते थे कि एयर स्पेस एक है, इसे बांटा नहीं जा सकता है. पहले यहां मानव युक्त विमानों का बोलबाला था. लडाइयों में इन्ही का इस्तेमाल होता था. इसके बाद बैलेस्टिक और हाइपर सोनिक मिसाइल आए, इसने अपर स्पेस को खोल दिया. लेकिन अब लोअर एयर स्पेस भी खुल गए हैं. एयर स्पेस की बदलती लड़ाइयों पर उन्होंने कहा कि अपने लोअर एयर स्पेस पर जोर देना होगा. लोअर एयर स्पेस में ट्रैफिक बढ़ती जा रही है. ज्यादातर लड़ाइयां यही लड़ी जा रही हैं. इसलिए समय की जरूरत यह है कि अब लोअर एयर स्पेस में अपनी मारक क्षमता बढ़ाएं. इसके साथ ही दुश्मन को ऐसा करने से रोकने के लिए हमें काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम विकसित करना होगा.  ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र जंगों और ड्रोन्स की बात हो रही थी तो जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने 10 मई को बिना हथियारों वाले ड्रोन और लॉइटर म्यूनिशंस का इस्तेमाल किया. लेकिन "इनमें से कोई भी वास्तव में भारतीय सैन्य या नागरिक बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका." सीडीएस चौहान ने कहा, "इनमें से ज्यादातर को काइनेटिक और नॉन काइनेटिक तरीकों के इस्तेमाल से नष्ट कर दिया गया है. इनमें से कुछ को लगभग इनटैक्ट (साबूत) स्थिति में बरामद किया गया."  उन्होंने कहा कि भविष्य लड़ाइयों में हमें इसी लोअर एयर स्पेस पर फोकस करना होगा. सीडीएस ने जोर देकर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने "हमें दिखाया है कि हमारे इलाके और हमारी जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी रूप से विकसित यूएएस, सी-यूएएस क्यों महत्वपूर्ण हैं" आत्मनिर्भरता के सिद्धांत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि "हम वैसे युद्ध के लिए आयातित तकनीकों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं जो हमारे डिफेंसिव और ऑफेंसिव मिशन के लिए महत्वपूर्ण हैं. युद्ध में ड्रोन के इस्तेमाल पर जनरल चौहान ने कहा कि ड्रोन्स ने जंगों की तस्वीर बदल दी है. मुझे लगता है कि युद्ध में उनका इस्तेमाल बहुत क्रांतिकारी रहा है.  जैसे-जैसे ड्रोन्स की तैनाती बढ़ी इसका दायरा बढ़ा, सेना ने क्रांतिकारी तरीके से इनका इस्तेमाल शुरू कर दिया. इस कार्यशाला के लिए अपने संदेश में सीडीएस ने लिखा, "गैर-संपर्क युद्ध के तेजी से विकसित हो रहे परिदृश्य में, यूएवी एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरे हैं. भारत जैसे राष्ट्र के लिए, यूएवी और सी-यूएएस प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता न केवल एक रणनीतिक अनिवार्यता है, बल्कि यह भारत को अपना भाग्य बनाने, अपने हितों की रक्षा करने और भविष्य के अवसरों का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने के बारे में भी है."