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तकनीकी साझेदारी की पहल: मुख्यमंत्री यादव का सबमर कंपनी में दौरा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बार्सिलोना में सबमर कंपनी का किया दौरा मध्यप्रदेश को एआई-रेडी, ग्रीन और सस्टेनेबल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में अहम पहल तकनीकी साझेदारी की पहल: मुख्यमंत्री यादव का सबमर कंपनी में दौरा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने और वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को स्पेन के बार्सिलोना में स्थित इमर्शन कूलिंग टेक्नोलॉजी में अग्रणी कंपनी सबमर के मुख्यालय का दौरा किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबमर की अत्याधुनिक तकनीकों, कार्यप्रणाली और ग्रीन एनर्जी समाधानों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्हें स्मार्ट पोड और माइक्रो पोड जैसी उन्नत तकनीकों के साथ ही कंपनी की डिजाइन एंड बिल्ड क्षमताओं तथा इनोवेशन लैब्स की जानकारी दी गई। सबमर ने बताया कि वह अब तक 400 मेगावॉट से अधिक इमर्शन कूलिंग समाधान विश्वभर में तैनात कर चुकी है और OCP-रेडी ग्रीन कूलिंग सॉल्यूशन प्रदान करने वाली दुनिया की पहली कंपनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंपनी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश डेटा सेंटर और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में वैश्विक निवेश के लिए एक नई ऊर्जा और अवसर का केंद्र बन रहा है। सबमर जैसी अग्रणी तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी से राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।" दौरे के दौरान सबमर और मध्यप्रदेश सरकार के बीच संभावित रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई। कंपनी सबमर को मध्यप्रदेश में तकनीकी सलाहकार और सर्टिफायर के रूप में शामिल कर, नए डेटा सेंटर परियोजनाओं की डिजाइन, सस्टेनेबिलिटी और एआई-रेडिनेस के मानकों को परिभाषित करने में भागीदार बनाया जाएगा। सबमर ने यह भी अवगत कराया कि वह भारत में अपनी कमर्शियल, आरएंडडी और प्रोडक्शन इकाइयों की स्थापना की योजना बना रही है। इसके लिए मध्यप्रदेश को प्राथमिकता देते हुए कंपनी के इंडिया हेड देव त्यागी जुलाई के अंत में मध्यप्रदेश का दौरा करेंगे, जिससे संभावित साझेदारियों को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा न केवल तकनीकी नवाचारों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का माध्यम बनी, बल्कि यह प्रदेश को ग्रीन और AI-रेडी डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी सिद्ध होगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्यप्रदेश में विभिन्न सेक्टर्स में निवेश के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रॉयल पैलेस ऑफ मैड्रिड महल न केवल यूरोप के सबसे विशाल और भव्य शाही महलों में से एक है, बल्कि भारत और स्पेन के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंधों का भी सशक्त प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि यह महल केवल स्थापत्य सौंदर्य का नमूना नहीं, बल्कि भारत और स्पेन के बीच परस्पर सम्मान, संवाद और सहयोग की जीवंत मिसाल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रॉयल पैलेस ऑफ मैड्रिड के भ्रमण के बाद यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रॉयल पैलेस के भ्रमण के दौरान उसके ऐतिहासिक महत्व, स्थापत्य कला और संरक्षित यूरोप की दुर्लभ कलाकृतियों, शस्त्रों और राजसी वस्तुओं का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि रॉयल पैलेस जैसी धरोहरें हमें न केवल अतीत की गौरवशाली झलक दिखाती हैं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की गरिमा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अहमियत भी सिखाती हैं। उल्लेखनीय है कि इसी रॉयल पैलेस में वर्ष 2006 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का राजकीय सम्मान के साथ स्वागत हुआ था।इन ऐतिहासिक अवसरों की स्मृतियों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थल भारत और स्पेन के मधुर संबंधों की नींव का जीवंत साक्षी है। निवेश के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा स्पेन दौरा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में विभिन्न सेक्टर्स में निवेश के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्रम में स्पेन का दौरा निवेश के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेन के दौरे के दूसरे दिन और दो देशों की यात्रा के पांचवें दिन मीडिया को जारी संदेश में कहा कि स्पेन के साथ भारत विशेष रूप से मध्यप्रदेश के व्यापारिक तथा औद्योगिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की पहल हुई है। खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल आदि क्षेत्रों में स्पेन के उद्यमी मध्यप्रदेश में निवेश करें, इन संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। विभिन्न इकाईयों का अवलोकन भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि निश्चित ही इसके सुखद परिणाम आएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 18 औद्योगिक नीतियों की जानकारी निवेशकों को दी जा रही है। युवाओं को कार्य का अवसर मिले और राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर हो। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुसार विकसित भारत के लिए मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक निवेश और रोजगार के प्रयास किये जा रहे हैं।  

टूटी सड़क की शिकायत का मिलेगा फौरन हल, सरकार ने लॉन्च किया खास ऐप

नई दिल्ली ऐसा कितनी बार होता है कि हमें टूटी सड़क या खुला गड्ढा दिख जाता है लेकिन हम लोग चाह कर भी उसके लिए कुछ नहीं कर पाते। अक्सर इस तरह के मामलों की शिकायत करने का प्रोसेस इतना मश्क्कत भरा होता है कि कोई भी उसमें अपना समय खराब नहीं करना चाहता। हालांकि अब ऐसा और नहीं होगा। अब अगर आपको भी कहीं कोई टूटी सड़क या गड्ढा दिख जाए, तो आप अपने फोन से भी उसकी शिकायत संबंधित विभाग को कर पाएंगे। इसके लिए आपके फोन में सिर्फ एक सरकारी ऐप होनी चाहिए। चलिए डिटेल में इसके बारे में डिटेल में जानते हैं कि आखिर इस ऐप का इस्तेमाल करना कैसे है? इंस्टॉल कर लें समीर ऐप टूटी हुई सड़क या गड्ढों की रिपोर्ट करने के लिए आपको अपने फोन में भारत सरकार के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा बनाई गई Sameer ऐप को इंस्टॉल करना होगा। यह ऐप मुख्य रूप से नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी कि AQI की हर घंटे की रिपोर्ट देने के लिए बनाई गई थी। इस ऐप में इसमें एयर पॉल्यूशन समेत टूटी हुई सड़क या गड्ढे की शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी है। इसमें यूजर अपनी समस्या फोटो के साथ CPCB को सीधे भेज सकता है। बता दे कि यह ऐप Android और iOS दोनों प्लेटफार्म पर मौजूद है और यह इस ऐप की मदद से लोगों को स्वच्छ हवा के प्रति जागरूक किया जाता है। ऐसे कर पाएंगे शिकायत अगर आप भी अपने एरिया की टूटी सड़क या गड्ढे की शिकायत करना चाहते हैं, तो आप समीर ऐप पर नीचे बताए स्टेप्स को फॉलो करके आसानी से शिकायत कर सकते हैं। बता दें कि टूटी हुई सड़के और खुले गड्ढे भी प्रदूषण की मुख्य वजहों में से एक हैं, इस वजह समीर ऐप पर आपको इनकी शिकायत करने का ऑप्शन मिल जाता है। इसके लिए आप:     प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से Sameer ऐप को डाउनलोड कर लें।     इस ऐप में शिकायत दर्ज करने के लिए या शिकायत को ट्रैक करने के लिए पहले लॉग इन करना होगा।     अगर आपका इस ऐप पर अकाउंट नहीं है, तब भी आप Log in पर क्लिक करके अपना नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करके ऐप पर खुद को रजिस्टर कर पाएंगे।     इसके बाद आपको ऐप में नीचे दूसरे नंबर पर Complaint का ऑप्शन मिल जाएगा।     इसके बाद आपको Add New Complaint पर टैप करना होगा और जरूरी डिटेल्स को भरना होगा।     बता दें कि Add New Complaint पर टैप करने पर आपसे फोन का कैमरा इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जा सकती है। उसे Allow जरूर कर दें।     इसके बाद टूटी सड़का या गड्डों के लिए Unpaved Road/Pit को शिकायत की कैटेगरी में चुनना होगा। इसके बाद आपको सड़क या गड्ढे की फोटो को अटैच करना होगा और लोकेशन, राज्य, शहर, इलाके का पता और पिनकोड जैसी जानकारी भरनी होगी।     इसके बाद आप अपनी शिकायत दर्ज कर पाएंगे और शिकायत करने पर मिलने वाले नंबर के जरिए उसे ट्रैक भी कर पाएंगे।

TECNO ने दिखाया फ्यूचर फोन: ट्रिपल फोल्ड टेक्नोलॉजी और लगभग 10 इंच की डिस्प्ले

   नई दिल्ली आजकल तीन बार फोल्ड होने वाले स्मार्टफोन्स यानी ट्रिपल फोल्ड स्मार्टफोन्स की खूब चर्चा हो रही है। इसी कड़ी में TECNO ने अपना नया ट्रिपल-फोल्ड कॉन्सेप्ट फोन TECNO PHANTOM Ultimate G Fold Concept पेश किया है। यह एक अनोखा डिवाइस है जिसमें दो स्क्रीन हैं और यह अंदर की तरफ तीन बार फोल्ड हो सकता है। इसमें एक बड़ी 9.94 इंच की डिस्प्ले मिलती है, जो पहले से ज्यादा टिकाऊ भी है। जब यह फोन फोल्ड होता है, तो इसकी मोटाई सिर्फ 11.49mm होती है और जब इसे पूरी तरह से खोला जाता है, तो यह सिर्फ 3.49mm पतला हो जाता है, जो इसे अब तक का सबसे पतला ट्रिपल-फोल्ड डिवाइस बनाता है। इनोवेटिव G-स्टाइल ट्रिपल-फोल्ड डिजाइन PHANTOM Ultimate G Fold Concept में एक इनोवेटिव G-स्टाइल डिजाइन है। इसकी बड़ी इंटरनल डिस्प्ले दो बार अंदर की तरफ मुड़ती है, जिससे इस्तेमाल न होने पर मेन स्क्रीन खरोंच और टूट-फूट से पूरी तरह सुरक्षित रहती है। रोजमर्रा के कामों के लिए इसमें एक सुविधाजनक दूसरी कवर डिस्प्ले भी है जो एक सामान्य स्मार्टफोन जैसा एक्सपीरियंस देती है। इस नई तकनीक का मुख्य आधार एक खास डिजाइन वाला डुअल-हिंज सिस्टम है, जिसमें एक छोटा वॉटरड्रॉप हिंज और एक बड़ा प्राइमरी हिंज शामिल है। जब फोन फोल्ड होता है, तो छोटा हिंज डिस्प्ले के दाहिने हिस्से को बिना गैप के अंदर की तरफ मुड़ने देता है। फिर बड़ा हिंज बचे हुए हिस्से को उसके ऊपर मोड़ता है। एक सेल्फ-लॉकिंग मैकेनिज्म यह सुनिश्चित करता है कि बंद होने पर डिवाइस पूरी तरह से गैप-फ्री और सुरक्षित रहे। यह एंडवांस्ड इंजीनियरिंग नए इस्तेमाल के तरीकों को भी संभव बनाती है। बड़े हिंज में एक कस्टम-डिजाइन वाला डुअल-कैम डिजाइन मल्टी-एंगल होवरिंग को सपोर्ट करता है, जिससे डिवाइस को आंशिक रूप से फोल्ड करके इस्तेमाल किया जा सकता है। मिलती है बड़ी डिस्प्ले जब फोन पूरी तरह से खोला जाता है, तो डुअल-हिंज सिस्टम एक शानदार 9.94 इंच की डिस्प्ले दिखाता है जिसमें बहुत कम क्रीज (मुड़ने का निशान) होता है। यह बिना किसी रुकावट के मिलने वाली बड़ी स्क्रीन फोन को पॉकेट में रखने वाले स्मार्टफोन से एक टैबलेट में बदल देती है, जिससे मल्टीटास्किंग और वीडियो देखने के लिए एक बड़ी जगह मिलती है। फ्लैगशिप फीचर्स TECNO PHANTOM Ultimate G Fold Concept की मोटाई फोल्ड होने पर सिर्फ 11.49mm है, जो आज के कई डुअल-फोल्ड स्मार्टफोन के बराबर है। पूरी तरह से खोले जाने पर यह डिवाइस 3.49mm की अल्ट्रा-स्लिम प्रोफाइल हासिल करता है, जो इसे अब तक का दुनिया का सबसे पतला ट्रिपल-फोल्ड स्मार्टफोन बनाता है। इसमें एक हाई-परफॉरमेंस चिपसेट, ट्रिपल-कैमरा सिस्टम और 5000mAh से ज्यादा की बड़ी बैटरी शामिल है। 2024 में टेक्नो ने अपना अल्ट्रा-थिन ट्रिपल-फोल्ड कॉन्सेप्ट फोन PHANTOM ULTIMATE 2 पेश किया था, जिसे MWC 2025 में दिखाया गया था और इसने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरी थीं।

मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला: एक परीक्षा, कई सरकारी नौकरियों का रास्ता खुलेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश शासन के विभिन्न विभागों में होने वाली कर्मचारियों की नियुक्ति का पैटर्न बदलने जा रहा है. अब सरकारी विभागों में होने वाली नियुक्तियां यूपीएससी की तर्ज पर की जाएंगी. यानि कि विभिन्न सरकारी विभागों के लिए अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा देने की जरुरत नहीं होगी, बल्कि इस परीक्षा के माध्यम से सभी विभागों के विभिन्न रिक्त पदों के लिए एक ही मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी. सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एक वर्ष में एक ही भर्ती परीक्षा कराए जाने के संबंध में प्रारंभिक दौर की चर्चा कर चुके हैं. इस संबंध अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है. उम्मीदवारों को केवल एक बार देनी होगी फीस एकल भर्ती परीक्षा से अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा की झंझट से मुक्ति तो मिलेगी ही, साथ ही अलग-अलग विभागों की परीक्षा के लिए बार-बार आवेदन करने और फीस भरने की जरूरत नहीं रहेगी. उम्मीदवारों को परीक्षा की तैयारी करने और स्लॉट चुनने में दिक्कत नहीं होगी. इससे सरकार को बार-बार परीक्षा आयोजित कराने के लिए समय और पैसा बर्बाद नहीं करना पड़ेगा. यदि कोई उम्मीदवार चयनित पद नहीं लेता है, तो वेटिंग लिस्ट के कारण अगला उम्मीदवार तुरंत नियुक्त हो सकेगा. इससे रिक्तियों को बिल्कुल भी नहीं छोड़ना पड़ेगा. मुख्यमंत्री ने बार-बार परीक्षा पर जताई चिंता मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के डायरेक्टर साकेत मालवीय ने बताया कि "विभिन्न सरकारी विभागों के लिए बार-बार परीक्षाएं आयोजित करने से सबसे अधिक परेशानी अभ्यर्थियों को होती थी. ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे. मालवीय ने बताया कि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के लिए एसएससी और यूपीएससी की परीक्षाओं का पैटर्न आदर्श है. जिससे यूपीएससी की तरह मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में भी एकल परीक्षा का आयोजन किया जा सके. जिस तरह संघ लोक सेवा आयोग एक परीक्षा कराता है और विभिन्न श्रेणी के उपलब्ध पदों के लिए मेरिट के हिसाब से चयन होता है. अब यही प्रक्रिया मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में नियुक्ति के लिए अपनाई जाएगी. सभी विभागों में एक जैसे होंगे भर्ती नियम अधिकारियों ने बताया कि एकल परीक्षा प्रणाली में सभी सरकारी विभागों के भर्ती नियम भी अब एक जैसे होंगे. सामान्य प्रशासन विभाग ही इन्हें बनाकर अधिसूचित करने के लिए देगा. यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है, ताकि प्रदेश के सभी सरकारी विभागों की नियुक्तियों में एकरूपता रहे. इसमें समान प्रकृति के पदों के लिए एक जैसे नियम हो जाएंगे. साथ ही यह लाभ भी होगा कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को विज्ञापन निकालते समय विभागीय भर्ती नियम के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और समय पर विज्ञापन जारी हो जाएंगे. कोर्ट जाने के लिए बाध्य नहीं होंगे अभ्यर्थी अभी मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में नकल और अनियमितताओं की घटनाएं सामने आती रहती है. लेकिन नई व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए नियम से लेकर परीक्षा का पूरा ब्योरा ऑनलाइन रहेगा. अभी राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली परीक्षा में कई चीज सार्वजनिक नहीं की जाती हैं, जिससे अभ्यर्थी कोर्ट चले जाते हैं. परीक्षा परिणाम या चयन सूची पर रोक लगा जाती है. इससे पूरी प्रक्रिया रुक जाती है. आगे ऐसा न हो, इसके लिए सभी जानकारियां ऑनलाइन की जाएंगी, ताकि किसी को सूचना के अभाव में कोई भ्रम या संदेह ना रहे और अभ्यर्थी कोर्ट जाने के लिए बाध्य न हो. नए पैटर्न में इस प्रकार होंगी परीक्षाएं     मध्य प्रदेश शासन के सभी विभागों के लिए साल में एक बार एकल परीक्षा का आयोजन किया जाएगा.     इसमें सभी श्रेणी के पदों के लिए मेरिट के हिसाब से सूची बन जाएगी, लेकिन वेटिंग लिस्ट एक रहेगी.     एकल परीक्षा के लिए सभी विभागों से रिक्त पदों की संख्या साल में एक बार पूछी जाएगी.     सभी विभागों से मिले प्रस्तावों के आधार पर सितंबर महीने में परीक्षा का कैलेंडर तैयार किया जाएगा.     सामान्य प्रशासन विभाग जनवरी 2026 से कर्मचारियों के चयन की यह प्रक्रिया लागू करने की तैयारी में है. इन विभागों में बड़ी संख्या में होगी भर्ती बता दें कि मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने साल 2024 के जून महीने में आयोजित कैबिनेट बैठक स्वास्थ्य विभाग के 46,491 नए पदों का भर्ती करने का निर्णय लिया था. इसी प्रकार 22 अक्टूबर, 2024 को हुई कैबिनेट की बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग में सहायिका के 12,670 पद और सुपरवाइजर के 467 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई थी. वहीं बीते 9 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में तीनों विद्युत वितरण कंपनियों के लिए 49 हजार 263 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है. इन पदों पर भर्ती आने वाले वर्षों में की जाएगी. बता दें कि वर्तमान में मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में 1 लाख 40 हजार पद खाली हैं. सरकार एक साल में इनमें से 27 हजार रिक्त पदों को भरने जा रही है.

एक दशक पहले भारत ने कह दिया था क‍ि M1 Abrams टैंक किसी काम का नहीं, अब US नेवी भी बोली

नईदिल्ली  एक दशक पहले भारत ने साफ कह दिया था क‍ि M1 Abrams टैंक हमारे किसी काम का नहीं है. वजह भी बहुत सीधी थी. इस टैंक का भारी-भरकम होना. रखरखाव में झंझट, ईंधन की ज्‍यादा खपत, और भारत के पहाड़ी इलाके में ऑपरेशन के लिहाज से बिल्कुल भी फिट नहीं. भारत ने तब T-90 टैंक और स्वदेशी अर्जुन टैंक को ज्यादा बेहतर विकल्प माना था. अब वही बात अमेरिका की मरीन कॉर्प्स ने भी मान ली है. साफ कह द‍िया क‍ि M1 Abrams टैंक क‍िसी काम के नहीं हैं. नेशनल इंट्रेस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स ने बड़ा ऐलान किया क‍ि अब वे M1 Abrams टैंक नहीं चलाएंगे. इस बदलाव के पीछे था उनका 10 साल का ट्रांसफॉर्मेशन प्लान. मरीन कॉर्प्स ने तय किया कि उन्हें फिर से समुद्री युद्ध की ओर लौटना है, ना कि दूसरी थल सेना बनना है. और इसके लिए सबसे पहले उन्होंने अपने 1300 टैंक हटा दिए. भारत ने पहले ही क्यों मना किया था? M1 Abrams बहुत भारी था, जो कि भारत के पहाड़ी और रेतीले इलाकों में चलाना मुश्किल था. इसका मेंटेनेंस भी बहुत महंगा और जटिल था, खासतौर पर जब भारत जैसे देश में लॉजिस्टिक्स की चुनौती बड़ी हो. तेल बहुत पीता था, जिससे लंबी दूरी तक ऑपरेशन करना भारी पड़ता. इसके मुकाबले T-90 हल्का, तेज और सस्ता था, और भारतीय सेना की ज़रूरतों के ज्यादा करीब था. साथ ही भारत ने अपने अर्जुन टैंक को विकसित करना भी जारी रखा, जो अब काफी हद तक उन्नत हो चुका है. अब अमेरिका क्या सोच रहा है? अब जब M1 Abrams टैंक हट चुके हैं, तो अमेरिका के कुछ अफसर M10 Booker टैंक को अपनाने की बात कर रहे हैं. यह टैंक हल्का है और मौजूदा जरूरतों के मुताबिक ज्यादा फुर्तीला भी.

डाक व्यवस्था में बड़ा बदलाव: IT 2.0 से होंगी सेवाएं हाईटेक और कुशल

श्योपुर  डाकघर अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और डिजिटल होंगे। डाक विभाग ने आईटी 2.0 एप्लिकेशन के रोलआउट की घोषणा की है, जो डाक सेवाओं को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। यह नया एप्लिकेशन 22 जुलाई 2025 से श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों के सभी डाकघरों में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर, तेज और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करना है। डाक विभाग ने बताया कि IT 2.0 एप्लिकेशन की मदद से डाकघरों की कार्यप्रणाली पूरी तरह से डिजिटल हो जाएगी, जिससे लेनदेन की गति और सटीकता में इज़ाफा होगा। यह नया सिस्टम एक यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस के साथ आएगा, जिससे हर उम्र के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकेंगे। डाउनटाइम की जानकारी इस बदलाव को सही तरीके से लागू करने के लिए 21 जुलाई 2025 को एक दिन का सिस्टम डाउनटाइम निर्धारित किया गया है। इस दिन किसी भी प्रकार का सार्वजनिक लेनदेन नहीं होगा, क्योंकि उस दौरान डेटा माइग्रेशन, सिस्टम चेकिंग और तकनीकी कॉन्फिगरेशन किया जाएगा। डाक विभाग ने ग्राहकों से अपील की है कि वे 21 जुलाई से पहले अपने जरूरी डाक-संबंधी कार्य पूरे कर लें ताकि उन्हें किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। विभाग ने इस अस्थायी असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया है कि इस परिवर्तन के बाद डाक सेवाएं पहले से कहीं अधिक डिजिटल, तेज और विश्वसनीय होंगी। तकनीकी रूप से सशक्त डाक सेवाएं आईटी 2.0 एप्लिकेशन न केवल डाक विभाग की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाएगा, बल्कि यह ग्राहक अनुभव को भी पूरी तरह बदल देगा। डिजिटल लेनदेन, ट्रैकिंग सिस्टम, रियल टाइम अपडेट और पेपरलेस वर्कफ्लो जैसी सुविधाएं अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के डाकघरों में उपलब्ध होंगी।

गोल्ड की चमक हुई फीकी, बिक्री में 60% की गिरावट – जानिए इसके पीछे की वजहें

नई दिल्ली जून में सोने की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 60% गिरकर सिर्फ 35 टन रह गई। कोविड के बाद वॉल्यूम में वे सबसे बड़ी गिरावट है। इसकी वजह यह है कि ऊंची और उतार-चढ़ाव वाली कीमतों की वजह से ग्राहक सोने से दूर रहे। इंडिया बुलियन एंड जूलर्स असोसिएशन (IBJA) ने ये जानकारी दी है। जुलाई में भी सोने के दाम में उतार-चढ़ाव दिख रहा है। अभी कीमतों में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है।  IBJA के नैशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता बताया कि हमें डिमांड में तुरंत कोई रिकवरी नहीं दिख रही है। देश भर में सोने के गहने बनाने वाली कई यूनिट्स ने अपना प्रोडक्शन लगभग आधा कर दिया है। उन्होंने कहा कि छोटे प्लेयर्स पर इसका असर पड़ रहा है। सोने के कारोबार के लिए ये काफी मुश्किल वक्त है। डिस्काउंट देने के बावजूद वॉल्यूम डिमांड बढ़ नहीं रही है। क्यों बढ़ रही है सोने की कीमत सोने के ट्रेड एनालिस्ट्स का कहना है कि कि इंटरनैशनल लेवल पर सोने के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की यूरोपियन यूनियन और मेक्सिको पर और टैरिफ लगाने की धमकी है इससे ट्रेड टेंशन फिर से बढ़ गई है। हालांकि, ट्रंप ने 1 अगस्त तक बातचीत का वक्त दिया है, लेकिन हालात के तेजी से बिगड़ने की आशंका ने रिस्क असेट्स को दबाव में रखा है। इससे निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेश की तरफ रुख कर रहे हैं। IBJA के सुरेंद्र मेहता का कहना है कि उनकी असोसिएशन ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) से कई दौर की बातचीत की है, ताकि 9- कैरेट सोने के लिए भी हॉलमार्किंग की सुविधा शुरू की जा सके। उन्होंने कहा कि हमें BIS ने बताया है कि उन्होंने 9 कैरेट जूलरी के लिए हॉलमार्किंग का मॉडल तैयार कर लिया है। हमें उम्मीद है कि सरकार से हॉलमार्किंग के लिए जल्द ही हरी झंडी मिल जाएगी। सोने की गिरती कीमतों पर क्या बोले एक्सपर्ट्स केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक, सोने के दाम में आई आज की गिरावट की पांच वजहे हैं। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध विराम की घोषणा, अमेरिका ने ईरान पर सैंक्शन में ढील देने के संकेत दिए, रेट कट को लेकर फेडरल रिजर्व का डोविश रुख, घरेलू बाजार में रुपए में आई उछाल और सोने में मुनाफावसूली प्रमुख हैं। LKP सिक्योरिटी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने सोने की दामों में आई गिरावट के बारे में कारण बताते हुए कहा कि ईरान और इजरायल के बीच हुए युद्धविराम का असर गोल्ड मार्केट पर पड़ा है। सोने में उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है। MCX पर इसकी तत्काल सीमा ₹96,000 और ₹98,000 के बीच देखी जा रही है। ₹96,000 से नीचे की निरंतर चाल आगे की गिरावट का संकेत दे सकती है, जबकि ₹98,000 से ऊपर की रिकवरी तेजी भी देखी जा रही है। जतिन त्रिवेदी ने बताया कि Comex गोल्ड में $25 की गिरावट और रुपये में 0.75% की मजबूती के दोहरे दबाव के कारण भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई। घरेलू सोना लगभग ₹2,000 गिरकर ₹97,350 के करीब कारोबार कर रहा है। ईरान और इजरायल के बीच संभावित युद्धविराम की खबरों के साथ-साथ अमेरिका की आधिकारिक घोषणाओं से भी गिरावट आई। भू-राजनीतिक तनाव कम होने के साथ ही सोने की सुरक्षित मांग कमजोर पड़ गई है। बिक्री बढ़ाने को 14 कैरेट का सहारा दामों में भारी उछाल के बीच अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए जूलर्स अब 14 कैरेट सोने के गहनों को खूब बढ़ावा दे रहे हैं। दरअसल, जूलरी बनाने में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के मुकाबले 14 कैरेट के गहने सस्ते पड़ते हैं। इसकी वजह से ये जूलरी खरीदने वालों के लिए एक ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन बन गया है। ऑल इंडिया जेन एंड जूलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े का कहना है कि भारत में 14 कैरेट सोने की डिमांड बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये ट्रेड आगे भी बढ़ेगा, क्योंकि हल्के वजन वाले गहनों की मांग बढ़ रही है। ये खूबसूरती तो देते हैं, लेकिन आपकी जेब पर भारी नहीं पड़ते।  

IIT इंदौर का इनोवेशन: बिना सीमेंट का सुपरकंक्रीट, मजबूती में सब पर भारी

इंदौर  इमारतें अब सीमेंट के बिना भी बनेंगी, वो भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर ने एक ऐसा अनोखा कंक्रीट विकसित किया है जो पूरी तरह से सीमेंट मुक्त है, लेकिन ताकत और स्थायित्व में पारंपरिक कंक्रीट को पीछे छोड़ देता है। IIT इंदौर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. अभिषेक राजपूत और उनकी टीम ने इस नई तकनीक को विकसित किया है। इसे जियोपॉलिमर हाई-स्ट्रेंथ कंक्रीट (Geo-Polymer High Strength Concrete – GHSC) नाम दिया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह औद्योगिक अपशिष्ट जैसे फ्लाई ऐश और GGBS (ग्राउंड ग्रेन्युलेटेड ब्लास्ट फर्नेस स्लैग) से तैयार किया गया है। ये ऐसे पदार्थ हैं जो फैक्ट्रियों से निकलकर प्रदूषण फैलाते हैं, लेकिन अब निर्माण कार्य में इनका उपयोग होगा। सीमेंट उद्योग दुनिया में सबसे ज्यादाकार्बन डाइऑक्साइड छोड़ने वालों में से एक है। हर साल लगभग 2.5 अरब टन CO₂ सीमेंट निर्माण से निकलता है। GHSC इस उत्सर्जन को 80% तक घटा सकता है, जिससे यह नेट जीरो कार्बन लक्ष्य की ओर एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पारंपरिक कंक्रीट को ठोस बनाने के लिए पानी से "क्योर" करना पड़ता है। लेकिन इस नई तकनीक में पानी की जरूरत नहीं होती, जिससे निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में पानी की बचत होती है। यह कंक्रीट केवल 3 दिनों में ही 80 MPa से ज्यादा ताकत हासिल कर लेता है। जबकि सामान्य कंक्रीट को इतनी मजबूती पाने में कई हफ्ते लगते हैं। कम खर्च में ज्यादा फायदा GHSC को स्थानीय अपशिष्ट सामग्री से बनाया जा सकता है, जिससे लागत में 20% तक की कटौती होती है। यानी यह न सिर्फ सस्ता है, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी है। किन निर्माणों में आएगा काम?     सेना के बंकर व आपातकालीन शेल्टर     ब्रिज और रेलवे स्लीपर     हाईवे की मरम्मत     आपदा राहत के प्रीफैब्रिकेटेड ढांचे IIT इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास जोशी के अनुसार, यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे विज्ञान और तकनीक से हरित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। प्रोजेक्ट प्रमुख डॉ. अभिषेक राजपूत ने कहा कि यह तकनीक न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि निर्माण जगत के लिए भी भविष्य का समाधान है।

आईसीटी और सांदीपनि स्कूलों में पहुंची स्किल डिवेलपमेंट गाइड, छात्रों को मिलेगा लाभ

सांदीपनि और आईसीटी लैब वाले विद्यालयों को मिली कौशल विकास पुस्तिका कौशल शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम, विशेष पुस्तिका पहुंची सांदीपनि और आईसीटी स्कूलों तक आईसीटी और सांदीपनि स्कूलों में पहुंची स्किल डिवेलपमेंट गाइड, छात्रों को मिलेगा लाभ भोपाल प्रदेश में संचालित सांदीपनि और आईसीटी लैब विद्यालयों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को कम्प्यूटर कौशल से जुड़ी जानकारी पर आधारित पुस्तिका स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है। यह पुस्तिका कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिये उपयोगी है। इन पुस्तकों का प्रकाशन पाठ्यपुस्तक निगम से कराया गया है। आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय ने विद्यार्थियों के बीच पुस्तिका के वितरण के संबंध में समस्त जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी किये है। अतिथि शिक्षकों को ई-अटेंडेन्स के बाद ही मिलेगा मानदेय लोक शिक्षण संचालनालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में अतिथि शिक्षकों को शत प्रतिशत ई-अटेंडेन्स हमारे शिक्षक एप के माध्यम से दर्ज करने के निर्देश जारी किये है। निर्देश में कहा गया है कि यह व्यवस्था 18 जुलाई से प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू होगी। जिन अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति हमारे शिक्षक एप के माध्यम से दर्ज नहीं होगी उनका मानदेय का भुगतान नहीं किया जा सकेगा। इस व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किये जाने के लिये जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये है। विद्यालय में रिक्त पदों के विरूद्ध आवेदकों की री-ज्वॉइनिंग शासकीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पूर्व से कार्यरत अतिथि शिक्षक आवेदकों की रिक्त पद होने पर री-ज्वॉइनिंग के संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने समय सारणी जारी की है। समय सारणी के अनुसार आवेदकों को अंतिम अवसर देते हुए आज दिनांक 17 जुलाई गुरूवार तक री-ज्यॉइनिंग करने के निर्देश जारी किये गये है। नियत तिथि के बाद 18 जुलाई 2025 को रिक्त पदों की पुन: समीक्षा की जायेगी। प्रदेश में करीब 60 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक शिक्षण कार्य से जुड़े हुए है।