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मध्यप्रदेश के लाल हरिओम को आखिरी सलाम, हजारों लोगों की मौजूदगी में सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार

राजगढ़   मध्य प्रदेश के जिले का जवान जम्मू कश्मीर में शहीद हो गया। हिमस्खलन की चपेट में आने से उसकी जान चली गई। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने शहीद सैनिक को श्रद्धांजलि दी है। जवान का पार्थिव शरीर भोपाल पहुंच चुका हैं। आज सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। राजगढ़ के ग्राम टूटियाहैड़ी निवासी सिपाही हरिओम नागर सियाचिन में भारत-पाक सीमा पर 13,000 फीट की ऊंचाई पर तैनात थे। ड्यूटी के दौरान 20 जुलाई की सुबह करीब 9 बजे अचानक हुए भूस्खलन में एक विशाल शिला उनके ऊपर गिर गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। भोपाल पहुंचा पार्थिव शरीर जवान हरिओम नागर का पार्थिव शरीर सोमवार शाम लगभग 4 बजे विशेष विमान से भोपाल लाया गया। भोपाल एयरपोर्ट पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने श्रद्धांजलि दी और भारत मां के इस वीर सपूत को नमन किया। मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे सेना के वाहन से बोड़ा नाका पर पार्थिव शरीर लाया गया। इसके बाद 21 किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा शुरू हुई। राष्ट्रभक्ति गीतों के साथ यात्रा चल रहा है। 6 किलोमीटर लंबे काफिले में स्कूली बच्चों समेत हजारों लोग शामिल हैं। 4 हजार से ज्यादा गाड़ियां चल रही हैं, इनमें करीब 3 हजार बाइक और एक हजार चार पहिया वाहन हैं। यात्रा में सांसद रोडमल नागर और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल, नगर परिषद अध्यक्ष विकास करोड़िया सहित प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद हैं। रविवार को ड्यूटी के दौरान एक बड़े पहाड़ के टूटकर गिरने से अग्निवीर हरिओम नागर की मौके पर ही जान चली गई थी। सीएम डॉ मोहन यादव ने सैनिक हरिओम नागर को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा कि मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजन के साथ हैं। मध्यप्रदेश की माटी के वीर सपूत का सर्वोच्च बलिदान मां भारती की सेवा और रक्षा के लिए सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने के लिए भी प्रार्थना की है। आज होगा अंतिम संस्कार आज मंगलवार को पचोर से गाजे बाजे के साथ उनका पार्थिव शरीर टूटियाहेड़ी ले जाया जाएगा। जहां सुबह 11 बजे सैन्य सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। पचोर के महारानीबाग से शव यात्रा शुरू होगी। जो खुजनेर होकर 21 किलोमीटर चलकर टूटियाहेड़ी पहुंचेगी। राज्यमंत्री गौतम टेटवाल अंतिम यात्रा में शामिल होंगे।

बाबा महाकाल की सवारी में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने की सहभागिता

भोपाल श्रावण माह के पावन अवसर पर सोमवार को भोपाल के नरेला विधानसभा अंतर्गत मंशापूर्ण हनुमान मंदिर शंकराचार्य नगर से बाबा महाकाल की सवारी निकाली गई। सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सवारी में सहभागिता कर बाबा महाकाल से सर्वमंगल की कामना की। यह सवारी पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का केंद्र बनी रही। हजारों की संख्या में शिवभक्त इस सवारी में शामिल हुए और हर-हर महादेव के उद्घोष से वातावरण को शिवमय कर दिया। इस दौरान मंत्री सारंग का स्वागत विभिन्न मंचों और स्थानों पर पुष्प वर्षा, माल्यार्पण तथा जयकारों के साथ किया गया। मंत्री सारंग ने कहा कि भगवान महाकाल की कृपा सब पर बनी रहे सबका कल्याण हो, सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हों हम महादेव के श्रीचरणों में प्रार्थना करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रावण माह शिव आराधना का विशेष समय है और इस अवसर पर महाकाल की सवारी का सहभागी बनना सौभाग्य की बात है। मंत्री सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा के शंकराचार्य नगर क्षेत्र से निकली इस सवारी ने जनमानस को भक्ति, एकता और अध्यात्म के सूत्र में पिरो दिया। सवारी में धार्मिक झांकियाँ रहीं आकर्षण का केंद्र सवारी में अनेक सांस्कृतिक व धार्मिक झांकियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। बाल स्वरूप में भगवान शिव की झांकी, माँ काली के दिव्य स्वरूप, ढोल-ताशों की गूंज, पुष्प वर्षा एवं भजन मंडलियों की प्रस्तुति ने सवारी को अद्भुत दिव्यता प्रदान की।  

स्मार्ट मीटरिंग की दिशा में बड़ी उपलब्धि! भोपाल में अब तक 3 लाख से अधिक स्मार्ट मीटरों की सफल स्थापना

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर , मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल सहित कंपनी के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के परिसर में कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर स्थापित कर दिए गए हैं। जिन अधिकारियों के घरों पर स्‍मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उनमें पीडीटीसी के निदेशक श्री अनिल खत्री, महाप्रबंधक प्रशासन एवं पीजीआर श्री संपूर्णानंद शुक्‍ला, उप मुख्‍य महाप्रबंधक सतर्कता श्री आरएनएस ठाकुर, महाप्रबंधक (स्‍मार्ट मीटरिंग सेल) श्री सी.के.पवार, वरिष्‍ठ सुरक्षा अधिकारी श्री राजेश यादव सहित अनेक अधिकारी शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने सभी उपभोक्‍ताओं से आग्रह किया है कि वे स्‍मार्ट मीटर के फायदों को देखते हुए अपने घरों में स्‍मार्ट मीटर जरूर लगवाएं। गौरतलब है कि कंपनी के सभी 16 जिलों में उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। केन्द्र सरकार की रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) योजना के अंतर्गत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का काम त्वरित गति से चल रहा है। अब तक कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में अब तक 03 लाख, 03 हजार 305 स्मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं। सर्वाधिक भोपाल शहर वृत्‍त में 1 लाख 62 हजार 320 स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं। कंपनी ने कहा है कि स्‍मार्ट मीटर लगने से उपभोक्‍ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो रहा है। स्‍मार्ट मीटर लगाने का काम समय सीमा में पूर्ण करने के लिए कंपनी की टीमें लगातार कार्य में जुटी हुई हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्‍मार्ट मीटर के फायदे बताते हुए कहा है कि स्‍मार्ट मीटर से रियल टाइम डेटा प्राप्‍त किया जा सकता है, जिससे उपभोक्‍ताओं को सटीक और समय पर बिलिंग सुनिश्चित की जा रही है। कंपनी ने बताया कि जहां-जहां भी स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं वहां पर बिलिंग तथा रीडिंग निर्धारित समय पर हो रही है, इससे सभी उपभोक्‍ता संतुष्‍ट हैं। दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट नए टैरिफ आर्डर के अनुसार स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को अब खपत के आधार पर दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है। जून माह का बिल जो कि जुलाई माह में जारी हुआ है, उसमें दिन के टैरिफ में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपयोग की गई विद्युत के दौरान बनी यूनिट पर छूट अलग कॉलम में अंकित की गई है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए जिसमें सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और एलटी औद्योगिक उपभोक्‍ताओं के लिए ऑफ पीक/ सौर समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर यह छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड / अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को मिल रही है।  

फिशरीज सेक्टर में क्रांति: हसदेव डुबान में शुरू होगा छत्तीसगढ़ का पहला एक्वा पार्क

उत्पादन प्रोसेसिंग से लेकर एक्वा टूरिजम से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय रायपुर, छत्तीसगढ़ में जल्द ही मछली पालन के क्षेत्र में एक नये युग की शुरूआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से केन्द्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के कोरबा जिले में हसदेव बांगो डुबान जलाशय में पहला एक्वा पार्क स्थापित होने जा रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत केन्द्र सरकार से 37 करोड़ 10 लाख रूपए से अधिक की राशि स्वीकृत हो चुकी हैं। यह एक्वा पार्क एतमा नगर और सतरेंगा क्षेत्र में फैलें सैकड़ों एकड़ डुबान जलाशय में विकसित होगा। इस एक्वा पार्क विकसित हो जाने से राज्य में मछली पालन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन होगा। मछली उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, विक्रय, निर्यात और एक्वा टूरिजम से क्षेत्र के ग्रामीणों की आय बढ़ेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पार्क की स्थापना के लिए राशि स्वीकृत करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित केन्द्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। कोरबा जिले के हसदेव बांगो जलाशय के डुबान क्षेत्र में विकसित होने वाले इस एक्वा पार्क में दो तरह की सुविधाएं होंगी। एतमा नगर में फीड मिल, फिश प्रोेसेसिंग प्लांट, हेचरी और रिसर्कुलेटरी एक्वा कल्चर सिस्टम स्थापित होगा। वहीं सतरेंगा में एक्वा टूरिजम को बढ़ाने के लिए म्यूजियम और अन्य सुविधा विकसित की जाएंगी। एतमा नगर में मछलियों के उत्पादन से लेकर उनकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के साथ-साथ उन्हें विदेशों में एक्सपोर्ट करने तक की सुविधा विकसित होगी। हेचरियों में मछलियों के बीज उत्पादन से लेकर फीड मिल में पूरक पोषक आहार भी यहीं बनेगा। फिश प्रोसेसिंग प्लांट में मछलियों की सफाई, हड्डियां हटाकर फिले बनाना और उसे उच्च स्तरीय गुणवत्ता वाले पैकेजिंग सिस्टम से पैक कर विदेशों में निर्यात करने की पूरी व्यवस्था यहां की जाएगी। एतमा नगर के इस प्रोसेसिंग यूनिट से हटकर सतरेंगा में एक्वा म्यूजियम बनेगा। पहले ही सतरेंगा पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का प्रमुख वाटर बॉडी है। एक्वा म्यूजियम बन जाने से विभिन्न प्रकार की मछलियों को पर्यटकों की जानकारी के लिए यहां रखा जाएगा। इसके साथ ही सतरेंगा में एंगलिंग डेस्क, कैफेटेरिया, फ्लोटिंग हाउस तथा मोटर बोट सहित वाटर स्पोर्ट्स की सविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा। पर्यटन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय ग्रामीणों की आय बढ़ने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। एक्वा पार्क बनने से प्रदेश में मछली व्यवसाय को मिलेगी नई दिशा – मुख्यमंत्री साय इस एक्वा पार्क की स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के मछली पालकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि इस एक्वा पार्क से न केवल मछली पालन की नई उन्नत तकनीकें लोगों तक पहुंचेंगी, बल्कि प्रोसेसिंग-पैकेजिंग यूनिट से छत्तीसगढ़ के मछली व्यवसाय को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की तिलपिया मछली की विदेशों में बहुत मांग है और इस एक्वा पार्क में इस मछली के उत्पादन से छत्तीसगढ़ के मछली पालकों के लिए अब सात समुन्दर पार भी व्यापार के द्वार खुलेंगे। उन्होंने एक्वा पार्क की स्थापना को मछली पालन के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने वाला निर्णय बताया है। अभी लगभग 800 केज में हो रहा मछली उत्पादन, 160 से अधिक मछुआरें उठा रहे लाभ हसदेव बांगो जलाशय के डुबान क्षेत्र में वर्तमान समय में लगभग 800 केज लगे हैं। जहां मछली पालन विभाग के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में लगभग 9  मछुआ समितियों के 160 सदस्य मछली पालन कर रहे हैं। उन्हें पांच-पांच केज आबंटित किए गए हैं। केज कल्चर से इन सदस्यों को औसतन 90 हजार रूपए सालाना शुद्ध आमदनी मिल रही है। मछुआ समिति के सदस्य दीपक राम मांझीवार, अमर सिंह मांझीवार और श्रीमती देवमति उइके ने बताया कि केज कल्चर से उन्हें न केवल रोजगार मिला है, बल्कि मछलियों का उत्पादन बढ़ जाने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। इस क्षेत्र में हर साल लगभग 1600 मेट्रिक टन मछली का उत्पादन हो रहा है। केज कल्चर से मछली पालन में 70 से 80 लोग सीधे तौर पर रोजगार पा रहे हैं, वहीं 20 से 25 पैगारों-चिल्हर विक्रेताओं को बेचने के लिए हर दिन मछली मिल रही हैं। यहां मछली पालन के विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को उन्नत तकनीकों से प्रशिक्षित किया है। हसदेव बांगो डुबान केज कल्चर में मुख्यतः तिलपिया और पंगास मछली का उत्पादन किया जा रहा है। तिलपिया प्रजाति की मछली की अमेरिका में विशेष मांग है और इसका सीमित मात्रा में अभी निर्यात किया जा रहा है। एक्वा पार्क स्थापित कर इस मछली का उत्पादन बढ़ाकर अमेरिका सहित दूसरे यूरोपीय देशों में भी इसका निर्यात बढ़ाने की योजना है। इस मछली का निर्यात बढ़ने से बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर ग्रामीणजन इस व्यवसाय से जुडे़ंगे और उनकी आमदनी बढ़ने से क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी। एतमा नगर के साथ ही सतरेंगा में एक्वा पार्क के विस्तार तथा डिमोस्ट्रेशन यूनिट स्थापित हो जाने से पर्यटन बढ़ेगा। देश-प्रदेश से लोग यहां मनोरंजन के साथ-साथ स्वादिष्ट मछलियों के कई प्रकार के व्यंजनों का भी लुफ्त उठा सकेंगे, इससे भी स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी।  

मुख्यमत्री की मंशानुरुप विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई

पालकी में भगवान चन्द्रमोलेश्वर व मनमहेश हाथी पर विराजित होकर भक्तों का कुशल-क्षेम लेने उज्जैन नगर भ्रमण पर निकले मुख्यमंत्री डॉ. यादव डमरु और झांझ मंजीरे बजाते हुए पूरे सवारी मार्ग पर चले पैदल मुख्यमत्री की मंशानुरुप विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई अलग-अलग स्थानों पर 8 जनजातीय दलों के द्वारा दी गई प्रस्तुति मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भगवान महाकाल की श्रावण माह की दूसरी सवारी में हुए शामिल उज्जैन  श्रावण माह का दूसरा सोमवार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को भगवान महाकाल की श्रावण माह की दूसरी सवारी में शामिल हुए। भगवान महाकालेश्वर पालकी में चन्द्रमोलेश्वर के रूप में तथा हाथी पर मनमहेश के स्वरूप में विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देने और अपनी प्रजा का कुशल-मंगल जानने नगर भ्रमण पर निकले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सवारी निकलने के पूर्व सभा मंडप में पालकी का पूजन-अर्चन किया। सर्वप्रथम भगवान महाकालेश्वर भगवान का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन कर आरती की गई। भगवान श्रीमहाकाल की सवारी धूमधाम से निकाली गई जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर 08 जनजातीय दलों के द्वारा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव संपूर्ण सवारी मार्ग पर बाबा महाकाल की आराधना और भजन-कीर्तन करते हुए नंगे पांव चले। इस दौरान उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालुहेडा, महापौर मुकेश टटवाल, संजय अग्रवाल आदि ने भगवान महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हुए। भगवान महाकालेश्वर की दूसरी सवारी के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव पूरे सवारी मार्ग पर डमरु और झांझ मंजीरे बजाते हुए पैदल चले। स्कूली विदयार्थियों द्वारा घोष वादन किया गया और श्रध्दालुओं के भोले शंभु भोलेनाथ के जयकारों से संपूर्ण उज्जैन नगरी गुंजायमान हुई। एम्बुलेन्स को निकलने के लिए जगह दी सवारी के दौरान रोगी को ले जा रही एम्बुलेन्स को सवारी मार्ग के बीच से निकलने के लिए श्रध्दालुओं द्वारा ढाबा रोड व कमरी मार्ग पर रास्ता प्रदान किया गया। सम्पूर्ण सवारी मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय महाकाल के उद्घोष के साथ पुष्प वर्षा की।   महाकाल के चन्द्रमोलेश्वर स्वरूप को गार्ड ऑफ ऑनर भगवान चन्द्रमोलेश्वर पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। पालकी जैसे ही महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में सवार चन्द्रमोलेश्वर भगवान को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दिया गया। सवारी मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय महाकाल के घोष के साथ अवन्तिका नगरी के राजाधिराज पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमोलेश्वर व हाथी पर आरूढ़ भगवान मनमहेश पर पुष्पवर्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर सवारी में पुलिस बैंड की प्रस्तुति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरुप 350 पुलिस के जवानों द्वारा पुलिस बैंड के माध्यम से नम: शिवाय ॐ नमः शिवाय, हर हर शंभू देवा महादेवा, मेरे घर राम आए है, देवा हो देवा गणपति देवा, ॐ जय शिव ओमकारा ,सत्यम शिवम सुन्दरम आदि शिवभजनों की सु-मधुर धुनों की प्रस्तुतियां दी गई जिस पर श्रद्धालु मंत्र मुग्ध होकर झूमे। बाबा महाकाल की एक झलक के लिए असंख्य श्रद्धालु हुए आतुर भगवान श्रीमहाकाल की सवारी के दौरान पूरी उज्जैन नगरी शिवमय हो गई। महाकालेश्वर भगवान की सवारी में हजारों भक्त झांझ, मंजीरे, डमरू, ढोल आदि वाद्य बजाते हुए महाकाल की आराधना करते हुए पालकी के साथ चल रहे थे। साथ ही उज्जैन के बाहर से आये हुए भक्तगण भी बाबा की एक झलक पाने के लिए उत्सुक थे। महाकालेश्वर भगवान की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट पहुंची। रामघाट पर भगवान चन्द्रमोलेश्वर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा माँ क्षिप्रा के जल से अभिषेक पूजन किया गया। रामघाट के दूसरी तरफ दत्त अखाडा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। साथ ही कलाकार सुलक्ष्मी तलरेजा के द्वारा भगवान शिव पर आधारित भजन प्रस्तुत किए गए। भगवान महाकालेश्वर की पालकी के रामघाट पहुंचने पर शंखनाद और भगवान महाकालेश्वर की आरती की गई। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने यहां भगवान महाकालेश्वर का पूजन अर्चन कर प्रदेश की सुख समृद्धि और विकास की कामना की। पूजन – अर्चन के उपरांत भगवान महाकाल की सवारी रामघाट से रामानुज कोट ,  मोढ की धर्मशाला, कार्तिकचौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। जहाँ परंपरानुसार सिंधिया स्टेट की ओर से गोपाल मंदिर के पुजारी द्वारा पालकी में विराजित चन्द्रमोलेश्वर का पूजन किया गया। सवारी गोपाल मंदिर से पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। जहाँ पुनः आरती उपरांत सवारी का विश्राम हुआ। 8 जनजातीय कलाकारों के दल ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप बाबा महाकालेश्वर की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए 08 जनजातीय कलाकारों के दल ने महाकालेश्वर भगवान की दूसरी सवारी में सहभागिता की। जनजातीय दलों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देकर कला संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी। छवीलदास भावली के नेतृत्व में नासिक महाराष्ट्र के जनजातीय सौगी मुखोटा नृत्य एवं अजय कुमार के नेतृत्व में हरियाणा का लोकनृत्य हरियाणवी घुमर के दल ने महाकालेश्वर मंदिर परिसर व शहनाई द्वार के पास अपने साथियों के साथ प्रस्तुति दी। खेमराज के नेतृत्व में राजस्थान का गैर-घूमरा जनजातीय नृत्य व रवि अहिरवार के नेतृत्व में मध्यप्रदेश छतरपुर के बरेदी लोकनृत्य की कोट मोहल्ला चौराहे पर प्रस्तुति दी गई। अज्जू सिसोदिया के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में झाबुआ का भगोरिया नृत्य एवं बनेसिंह भाई के नेतृत्व में गुजरात जनजातीय राठ नृत्य दल ने रामानुजकोट पर अपनी संस्कृति व कला का प्रदर्शन लोकनृत्य के माध्यम से किया। माँ क्षिप्रा के तट रामघाट पर उडीसा के लोकनृत्य शंख ध्वनि सुनील कुमार साहू के नेतृत्व में व छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य लोकपंथी का दिनेश कुमार जागड़े के नेतृत्व में दलों ने महाकालेश्वर भगवान के सवारी के आगमन पर प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। चलित रथ में लगी एलईडी से श्रद्धालुओं ने किए दर्शन बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन के लिए सवारी के आगे और पीछे एलईडी लगे 2 रथ चले, जिस पर सवारी के लाइव प्रसारण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने सुगमता पूर्वक दर्शन किए। 

डिजिटल सुविधा का नया दौर: बिना एटीएम कार्ड के भी मिलेगा कैश

नई दिल्ली ATM कार्ड नहीं है? खो गया या घर पर छूट गया? अब इससे फर्क नहीं पड़ता. टेक्नोलॉजी ने इस समस्या का हल ढूंढ़ लिया है, Cardless Cash Withdrawal via UPI. आजकल कई बैंक ऐसे ATM मशीनें उपलब्ध करा रहे हैं, जिनसे आप केवल UPI ऐप के माध्यम से कैश निकाल सकते हैं, वो भी बिना कार्ड लगाए. भारत में कुछ चुनिंदा बैंकों ने यह सुविधा शुरू कर दी है और धीरे-धीरे यह पूरे देश में फैल रही है. बिना कार्ड के ATM से पैसे निकालने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया Step 1: ATM पर जाएं: ATM मशीन के पास जाएं और स्क्रीन पर ‘Cardless Cash Withdrawal’ या ‘UPI Cash Withdrawal’ विकल्प चुनें. Step 2: QR कोड स्कैन करें: ATM स्क्रीन पर एक QR कोड दिखाई देगा. अपने स्मार्टफोन में कोई भी UPI ऐप (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm या BHIM) खोलें और QR कोड स्कैन करें. Step 3: राशि दर्ज करें: UPI ऐप में वह राशि दर्ज करें जितना कैश आप निकालना चाहते हैं. Step 4: UPI पिन डालें और कन्फर्म करें: अब अपना UPI पिन डालें और ट्रांज़ैक्शन कन्फर्म करें. Step 5: कैश प्राप्त करें: कन्फर्मेशन के बाद ATM से तुरंत कैश निकल जाएगा, बिना कार्ड लगाए, बिना स्क्रीन को टच किए. किन बातों का रखें ध्यान?     आपके स्मार्टफोन में UPI ऐप इंस्टॉल और सक्रिय होना चाहिए.     आपका बैंक अकाउंट UPI ऐप से लिंक होना अनिवार्य है.     यह सुविधा केवल उन्हीं ATM मशीनों में उपलब्ध है, जिनमें UPI-इनेबल्ड कैश विथड्रॉल सिस्टम लगा है.     हर बैंक की नकद निकासी सीमा अलग-अलग हो सकती है (जैसे ₹5,000 या ₹10,000 प्रति दिन).     नेटवर्क या OTP/पिन में देरी के कारण ट्रांज़ैक्शन असफल हो सकता है — इसलिए इंटरनेट कनेक्शन अच्छा रखें. कौन-कौन से बैंक दे रहे हैं यह सुविधा? भारत के कई प्रमुख बैंक अब UPI आधारित कार्डलेस कैश विथड्रॉल सुविधा प्रदान कर रहे हैं. इनमें शामिल हैं:     HDFC Bank     ICICI Bank     State Bank of India (SBI)     Bank of Baroda     Union Bank of India     Punjab National Bank (PNB) इन बैंकों के चुनिंदा ATM में यह सुविधा उपलब्ध है, और जल्द ही यह पैन-इंडिया स्तर पर लागू होने की उम्मीद है. क्यों बढ़ रही है कार्डलेस ATM की मांग?     सुरक्षा: ATM कार्ड खोने या क्लोनिंग से बचाव.     सहूलियत: केवल मोबाइल और इंटरनेट से ट्रांज़ैक्शन की सुविधा.     फिजिकल टच-फ्री: कोरोना काल के बाद से टचलेस टेक्नोलॉजी की मांग बढ़ी.     डिजिटल इंडिया को बढ़ावा: सरकार और RBI की संयुक्त पहल से डिजिटल ट्रांज़ैक्शन को प्रोत्साहन.  

भारत को बूस्ट: बुमराह खेलेंगे मैनचेस्टर टेस्ट, सिराज ने दी खुशखबरी

मैनचेस्टर भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने इस बात की पुष्टि की है कि जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड के खिलाफ 23 जुलाई से होने वाले चौथे टेस्ट मैच में खेलेंगे। बुमराह का मैनचेस्टर टेस्ट में खेलना चर्चा का विषय रहा है क्योंकि टीम प्रबंधन ने बताया था कि बुमराह इस सीरीज में सिर्फ तीन मैच ही खेलेंगे। बुमराह पहले और तीसरे टेस्ट में उपलब्ध रहे थे, जबकि कार्यभार प्रबंध के चलते दूसरे टेस्ट से उन्हें आराम दिया गया था। बुमराह को खिलाने की पैरवी क्रिकेट प्रशंसक और अनिल कुंबले सहित कुछ पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि बुमराह को मैनचेस्टर टेस्ट में खेलना चाहिए क्योंकि भारत के लिए यह मुकाबला काफी अहम है। भारत पांच मैचों की इस सीरीज में फिलहाल 1-2 से पीछे चल रहा है और उसे सीरीज में बने रहने के लिए चौथा टेस्ट मैच जीतना जरूरी है। ऐसे में बुमराह का इस टेस्ट मैच में खेलना काफी महत्वपूर्ण है। टीम संयोजन पर सिराज ने साधी चुप्पी सिराज ने कहा, 'जितना पता है बुमराह भाई तो खेलेंगे।' मैच के लिए टीम संयोजन के बारे में पूछे जाने पर सिराज ने चुप्पी साधे रखी और कहा कि जो भी लाइनअप चुना जाएगा वह टीम के सर्वोत्तम हित में होगा। उन्होंने कहा, 'मुझे संयोजन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। जो भी चुना जाएगा, वह टीम के लिए सबसे अच्छा होगा।' बुमराह ने अब तक खेले दो मैचों में 12 विकेट लिए हैं, जिसमें दो बार उन्होंने पारी में पांच विकेट भी लिए हैं। भारत के लिए आसान नहीं राह भारतीय टीम अब सीरीज में वापसी के लिए बेताब होगी। भारत के लिए हालांकि, मैनचेस्टर की चुनौती आसान नहीं रहने वाली है। भारत ने अब तक मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में कुल नौ टेस्ट खेले हैं। इसमें से चार टेस्ट इंग्लैंड जीतने में कामयाब रहा है, जबकि पांच टेस्ट ड्रॉ रहे हैं। टीम इंडिया के पास हार और ड्रॉ के इस सिलसिले को तोड़ने का बेहतरीन मौका है और एक जीत सीरीज को दिलचस्प बना देगी।  

अब मोबाइल से घर बैठे बनाएं रेंट एग्रीमेंट और एफिडेविट, एक क्लिक में मिलेगा E-स्टाम्प पेपर

नई दिल्ली डिजिटल इंडिया में कई ऐसे काम अब बेहद आसान हो गए हैं जिनके लिए पहले सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। ऐसे ही कामों में से एक अब एफिडेविट, एग्रीमेंट या सेल्फ डिक्लेरेशन बनवाने के लिए कोर्ट या नोटरी के चक्कर काटने की जरूरत नहीं! यह काम अब आप घर बैठे सिर्फ अपने फोन से कुछ मिनटों में कर सकते हैं और सरकारी मान्यता प्राप्त e-Stamp Paper पा सकते हैं। आसान और डिजिटल प्रोसेस से न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि डॉक्यूमेंट्स भी पूरी तरह वैध और सुरक्षित रहेंगे। चलिए अब देर न करते हुए पूरे प्रोसेस का एक-एक स्टेप समझते हैं। क्या है ई स्टांप पेपर? ई-स्टांप पेपर एक डिजिटल स्टांप पेपर होता है, जो किसी भी कानूनी या वित्तीय डॉक्यूमेंट को वैध बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे सरकार द्वारा अधिकृत वेबसाइट जैसे कि shcilestamp.com से ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ऐसा समझ लें कि यह पारंपरिक स्टांप पेपर का डिजिटल वर्जन है। ई स्टांप पेपर कहां काम आते हैं? ई-स्टांप पेपर का इस्तेमाल एफिडेविट, रेंट एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी, सेल डीड और कोर्ट कचहरी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स जैसे कई कामों में होता है। इससे नकली स्टांप पेपर की समस्या नहीं होती और दस्तावेजों की वैधता कानूनी रूप से सुरक्षित रहती है। ऐसे बनवाएं एग्रीमेंट और एफिडेविट?     इसके लिए सबसे पहले आपको shcilestamp.com या राज्य सरकार की अधिकृत वेबसाइट पर जाना होगा, जो डिजिटल स्टांप पेपर जारी करने की सर्विस देती हैं।     वेबसाइट पर पहुंचने के बाद अपने राज्य को चुनें। ऐसा इसलिए क्योंकि स्टांप ड्यूटी हर राज्य में अलग-अलग होती है। फिर भाषा में हिंदी या अंग्रेजी को चुनें।     अब "e-Stamping Services" या “Generate e-Stamp Certificate” वाले विकल्प पर क्लिक करें, ताकि आप ऑनलाइन स्टांप पेपर के लिए फॉर्म भर सकें।     फॉर्म में इस्तेमाल करने वाले का नाम, पता, डॉक्यूमेंट का प्रकार जैसे कि एफिडेविट या एग्रीमेंट, स्टांप पेपर की वैल्यू, पिन कोड आदि सही-सही भरें।     इसके बाद डॉक्यूमेंट के प्रकार के अनुसार स्टांप पेपर की राशि चुनें, जैसे 10, 50 या 100 रुपये। यह राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि आप किस तरह का डॉक्यूमेंट बनवा रहे हैं।     अब आप नेट बैंकिंग, UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।     पेमेंट पूरी होने के बाद वेबसाइट आपको स्टांप पेपर का PDF देगी जिसे आप तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं या ईमेल पर मंगवा सकते हैं।     अब आप वर्ड या पीडीएफ में अपना एफिडेविट/एग्रीमेंट बनाकर उसे डाउनलोड किए गए स्टांप पेपर पर चिपका सकते हैं या प्रिंट करवाकर साथ जोड़ सकते हैं।     अगर डॉक्यूमेंट को कानूनी तौर पर वैध बनाना जरूरी है, तो उसे किसी अधिकृत नोटरी से हस्ताक्षर और मोहर के साथ प्रमाणित करवाया जा सकता है।     बस अब आपका डॉक्युमेंट तैयार है। आप इसे कोर्ट, बैंक, मकान मालिक या अन्य किसी संस्थान को वैध रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तरह से आप बेहद आसानी से घर बैठे ही एग्रीमेंट्स या एफिडेविट के लिए ई-स्टाम्प पेपर ले सकते हैं। ध्यान रखने वाली बातें ई-स्टांप पेपर या ऑनलाइन एफिडेविट बनवाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले, हमेशा सिर्फ सरकारी या अधिकृत वेबसाइट जैसे shcilestamp.com का ही इस्तेमाल करें। स्टांप पेपर का राज्य चुनते समय उस राज्य की स्टांप ड्यूटी की जानकारी जरूर पढ़ें, क्योंकि हर राज्य के नियम अलग होते हैं। फॉर्म भरते समय नाम, पता, उद्देश्य जैसी सभी जानकारियां बिल्कुल सही भरें। पेमेंट करते समय सुरक्षित गेटवे का ही इस्तेमाल करें। ई-स्टांप पेपर डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रखें। अगर दस्तावेज में नोटरी की जरूरत हो, तो अधिकृत नोटरी से प्रमाणित करवाएं। गलत जानकारी या प्रक्रिया से डॉक्युमेंट अवैध हो सकता है।

जन्मतिथि और बायोमेट्रिक अपडेट की लिमिट तय, UIDAI CEO ने दी जानकारी

नई दिल्ली आधार कार्ड से संबंधित कई बादलाव हो रहे हैं। हाल ही में सरकार ने आधार कार्ड के लिए एक नया ऐप पेश किया है। फिलहाल ऐप का अर्ली एक्सेस आया है, लेकिन इसे फोन में डाउनलोड करके यूज किया जा सकता है। लोग आधार कार्ड में कई बदलाव कराते हैं। नाम से लेकर पता तक, कई बदलाव कराए जा सकते हैं। इतना ही नहीं, आप अपनी जन्म तिथि को भी बदल सकते हैं। हालांकि, अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। बार-बार जन्म तिथि में बदलाव को रोकने के लिए सरकार ने नया नियम लागू किया है। आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था UIDAI अब आधार और नकली UID नंबरों से होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, UIDAI के CEO भुवनेश कुमार ने बताया कि जन्मतिथि और बायोमेट्रिक्स में बार-बार बदलाव को रोका जाएगा। जन्मतिथि में बदलाव के लिए देना होगा यह सर्टिफिकेशट भुवनेश कुमार ने बताया है कि गलत फोटो और बायोमेट्रिक्स के इस्तेमाल को रोकने के लिए UIDIA द्नारा कई उपाय किए जाएंगे। UIDAI अन्य सरकारी डेटाबेस से जानकारी वेरिफाई करेगा। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी नई टेक्नोलॉजी का यूज किया जाएगा। आधार एप्लीकेशन फॉर्म को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया जाएगा। साथ ही, लोगों को ऐसे डॉ्कयूमेंट्स यूज करने होंगे, जो कि राज्यों से ऑनलाइन वेरिफाई हो सकें। आधार की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग गलत तरीके से आधार का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए इसे रोकना जरूरी है। UIDAI अब जन्मतिथि में बदलाव करने पर सख्ती करेगा। अगर किसी को जन्मतिथि बदलनी है, तो उसे पहले ओरिजिनल बर्थ सर्टिफिकेट में जन्मतिथि बदलवानी होगी। UIDAI द्नारा दूसरे बर्थ सर्टिफिकेट को मान्यता नहीं दी जाएगी। लोग ऐसे करते हैं गलत इस्तेमाल UIDAI 35 राज्यों के ओरिजिनल डेटाबेस से सीधा कॉन्टैक्ट कर रहा है। पैन कार्ड, CBSE मार्कशीट और MGNREGA रिकॉर्ड जैसे डॉक्यूमेंट्स को भी इंटीग्रेट किया जा रहा है। कुमार का कहना है कि अगर लोग क्रिकेट टीम में खेलना चाहते हैं, तो वे अपनी उम्र दो साल कम करने की कोशिश करते हैं। अगर वे नौकरी पाना चाहते हैं, तो वे अपनी उम्र दो साल बढ़ाने की कोशिश करते हैं। यह बहुत बड़ा फ्रॉड है। इसका मतलब है कि लोग अलग-अलग फायदे के लिए अपनी उम्र बदलने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आगे बताया है कि लोग कई जन्म प्रमाण पत्रों से ऐसा करने की कोशिश करते हैं। UIDAI अब इस तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहा है। UIDAI यह सुनिश्चित करेगा कि आधार कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के लिए दिए गए डॉक्यूमेंट्स सही हैं या नहीं। इसके लिए UIDAI सीधे सोर्स से डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करेगा। UIDAI सिस्टम को और भी बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। UIDAI ने फिंगरप्रिंट फ्रॉड को रोकने के लिए AI/ML एल्गोरिदम बनाया है। यह एल्गोरिदम यह सुनिश्चित करेगा कि फिंगरप्रिंट असली हैं। आयु की ऐसे होगी जांच इसी तरह, AI बेस्ड सॉफ्टवेयर कैमरों में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सॉफ्टवेयर उम्र की जांच करेगा। बच्चे के आधार के लिए बायोमेट्रिक्स की जरूरत नहीं होती है। AI का इस्तेमाल ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन डेटाबेस में मौजूद फोटो से किसी व्यक्ति की फोटो को मिलाने के लिए भी किया जा रहा है। इससे फ्रॉड को रोका जा सकेगा। UIDAI फिंगरप्रिंट अपडेट करने की संख्या को सीमित करने पर भी विचार कर रहा है। कुमार ने कहा कि बुजुर्ग लोगों के लिए फिंगरप्रिंट अपडेट करना ठीक है, क्योंकि उनकी उंगलियों के निशान बदल सकते हैं। हालांकि, युवाओं के लिए बार-बार फिंगरप्रिंट अपडेट करने का कोई मतलब नहीं है। बार-बार फिंगरप्रिंट भी नहीं करा पाएंगे अपडेट UIDAI फिंगरप्रिंट अपडेट करने की संख्या को सीमित करने पर भी विचार कर रहा है। कुमार ने कहा कि बुजुर्ग लोगों के लिए फिंगरप्रिंट अपडेट करना ठीक है, क्योंकि उनकी उंगलियों के निशान बदल सकते हैं। हालांकि, युवाओं के लिए बार-बार फिंगरप्रिंट अपडेट करने का कोई मतलब नहीं है। UIDAI के इन कदमों से आम लोगों को काफी फायदा होगा। UIDAI ने यह भी कहा है कि वह जल्द ही आधार कार्ड को और भी ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए कुछ और नए कदम उठाएगा।

यूपी स्कूल मर्जर विवाद: एकल पीठ के फैसले को दी चुनौती, आज डबल बेंच में होगी सुनवाई

लखनऊ प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों के विलय मामले में एकल पीठ के फैसले को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दो न्यायाधीशों की खंडपीठ में विशेष अपीलें दाखिल कर चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष आज विशेष अपीलें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। अपीकर्ताओं के अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने बताया कि पहली विशेष अपील 5 बच्चों ने, और दूसरी 17 बच्चों ने अपने अभिभावकों के जरिए दाखिल की है। इनमें स्कूलों के विलय में एकल पीठ द्वारा बीती 7 जुलाई को दिए गए फैसले को रद्द करने का आग्रह किया गया है। इसके बाद मामले में दाखिल एक जनहित याचिका को भी खंडपीठ ने बीती 10 जुलाई को खारिज कर दिया था। एकल पीठ खारिज कर चुकी है याचिका बीती 7 जुलाई को स्कूलों के विलय मामले में राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली थी। एकल पीठ ने प्रथामिक स्कूलों के विलय आदेश को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह फैसला सीतापुर के प्राथमिक व उच्च प्रथामिक स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों समेत एक अन्य याचिका पर दिया था। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बीती 16 जून को जारी उस आदेश को चुनौती  देकर रद्द करने का आग्रह किया गया था, जिसके तहत प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की संख्या के आधार पर उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय करने का प्रावधान किया गया है। याचियों ने इसे मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला कहा था। साथ ही मर्जर से छोटे बच्चों के स्कूल दूर हो जाने की परेशानियों का मुद्दा भी उठाया था। याचियों की ओर से खास तौर पर दलील दी गई थी कि स्कूलों को विलय करने का सरकार का आदेश, 6 से 14 साल के बच्चों के मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करने वाला है। सरकार स्पष्ट कर चुकी है अपना रुख राज्य सरकार की ओर से याचिकाओं के विरोध में प्रमुख दलील दी गई कि विलय की कारवाई, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए बच्चों के हित में की जा रही है। सरकार ने ऐसे 18 प्रथामिक स्कूलों का हवाला दिया था जिनमें एक भी विद्यार्थी नहीं है। कहा कि ऐसे स्कूलों का पास के स्कूलों में विलय करके शिक्षकों और अन्य सुविधाओं का बेहतर उपयोग किया जाएगा। कहा था कि सरकार ने पूरी तरह शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिहाज से ऐसे स्कूलों के विलय का निर्णय लिया है।