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MP में प्रशासनिक फेरबदल की गूंज, दो IAS अफसरों को पद से हटाया गया – जानिए वजह

भोपाल  मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव विदेश दौरे से लौट आए हैं। उनकी अनुपस्थिति में सिया चेयरमैन और दो आईएएस अधिकारियों का विवाद तूल पकड़ा था। कथित तौर पर एक आईएएस अफसर नवनीत मोहन कोठारी ने एमपी एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन का ऑफिस लॉक करवा दिया था। बाद में मामला ऊपर तक पहुंचा तो कुछ घंटे बाद ऑफिस को खुलवाया गया। बुधवार को आईएएस नवनीत मोहन कोठारी को पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटा दिया गया है। सिया चेयरमैन का आरोप था कि गलत तरीके से प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। साथ ही आईएएस आर उमा महेश्वरी को भी एप्को के कार्यकारी निदेशक पद से हटाया गया है। कहा जा रहा है कि सिया चेयरमैन की शिकायत के बाद यह कार्रवाई हुई है। गलत तरीके से प्रोजेक्ट को मंजूरी देने का आरोप वहीं, सिया चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान ने दोनों अधिकारियों पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाया था। साथ ही कहा था कि दोनों ने गलत तरीके से 237 प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी एमपी सरकार से जवाब मांगा है। विवाद के बाद सरकार ने उठाया है बड़ा कदम दरअसल, सिया में लंबे समय से घमासान चल रहा था। आए दिन विवाद की खबरें आते रहती थीं। सरकार ने करीब दो महीने बाद बड़ा कदम उठाया है। अब आईएएस नवनीत मोहन कोठारी राज्यपाल के प्रमुख सचिव होंगे। इसके साथ ही आर उमा महेश्वरी को भी एप्को के कार्यकारी निदेशक और सिया की मेंबर सेक्रेटरी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अशोक वर्णवाल बने पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव वहीं, नवनीत मोहन कोठारी की जगह अब अशोक वर्णवाल पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव होंगे। उन्हें एप्को के महानिदेशक पद की भी अतिरिक्त जिम्मेवारी सौंपी गई है। दीपक आर्य को एप्को का कार्यकारी निदेशक बनाया गया है। सिया के मेंबर सेक्रेटरी का अतिरिक्त प्रभार मिला है। खनन माफिया से है मिलीभगत इसके साथ ही सिया चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान ने दोनों अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि इनकी मिली भगत खनन माफियाओं से है। यह भी कहा था कि इन लोगों ने सिया की बैठकें नहीं होने दी। 237 प्रोजेक्ट्स की मंजूरी गलत तरीके से दी है। यहां से विवाद पकड़ा तूल गौरतलब है कि कोठारी और महेश्वरी के खिलाफ केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय में भी शिकायत की गई थी। मंत्रालय ने 27 जून को इस मामले पर ध्यान दिया। डीओपीटी की विजलेंस शाखा को जांच सौंपी गई। इस शिकायत के बाद कोठारी के निर्देश पर सिया चेयरमैन के ऑफिस में ताला लगा दिया गया था। जब मुख्यमंत्री मोहन यादव स्पेन दौरे पर थे, तब यह मामला उन तक पहुंचा। इसके बाद सीएम कार्यालय के एसीएस नीरज मंडलोई के कहने पर सिया चेयरमैन का ऑफिस खोला गया।

सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम

हरेली की सुग्घर परंपरा के रंग में रंगा मुख्यमंत्री निवास सरगुजिहा कला पर केंद्रित सजावट में बस्तर और मैदानी छत्तीसगढ़ की भी सुंदर झलक सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम रंग-बिरंगी छोटी गेड़ियों, नीम और आम पत्तियों की झालर से आकर्षक बना कार्यक्रम मंडप  रायपुर  छत्तीसगढ़ की परंपरा में “हरेली” मानव और प्रकृति के जुड़ाव को नमन करने का उत्सव है। हरेली आती है तो छत्तीसगढ़ के खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हल और बैल, बच्चे-युवा-महिलाएँ सभी इस पर्व के हर्षोल्लास से भर जाते हैं। जिस हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत होती है, उसके स्वागत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी सज गए हैं। पूरा मुख्यमंत्री निवास श्रावण अमावस्या को मनाये जाने वाले हरेली पर्व की सुग्घर परंपरा के रंग में रंग गया है।  हरेली पर मुख्यमंत्री निवास की सजावट के तीन प्रमुख हिस्से हैं। प्रवेश द्वार, मध्य तोरण द्वार और मुख्य मंडप। प्रवेश द्वार में बस्तर के मेटल आर्ट की झलक है। इस द्वार पर लोगों के स्वागत में छत्तीसगढ़ का पारम्परिक वाद्य तुरही के मध्य में भगवान गणेश की प्रतिकृति है और मेटल आर्ट का घोड़ा भी उकेरा गया है।  प्रवेश द्वार के बाद मध्य में तोरण द्वार है जिसे पारम्परिक टोकनी से सजाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगी छोटी झंडियाँ तोरण के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं। इस हिस्से में नीम और आम पत्तों की झालर को हरेली की परम्परा के प्रतीक के रूप में लगाया गया है। पूरी सजावट का मुख्य आकर्षण वे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी गेड़ियां हैं, जिनका सुंदर स्वरूप यहां से मुख्य मंडप तक हर जगह दिखता है।  मुख्य मंडप द्वार को सरगुजा की कला के रंगों से आकर्षक बनाया गया है। इस द्वार की छत को पैरा से छाया गया है और सरगुजिहा भित्ति कला का के मनमोहक चित्र बनाये गए हैं। कई रंगों से सजा बैलगाड़ी का चक्का भी इस द्वार की रौनक बढ़ा रहा है।  मुख्य कार्यक्रम मंडप के बाएँ हिस्से में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश का पारम्परिक घर बना है। इस घर के आहते को मैदानी छत्तीसगढ़ की चित्रकला से सजाया गया है। घर के आँगन में तुलसी चौरा और गौशाला है, जहाँ हल, कुदाल, रापा, गैती, टंगिया, सब्बल जैसे पारम्परिक कृषि यंत्र के साथ ही गोबर के उपले रखे हैं। इस ग्रामीण घर की दीवारों को सरगुजा की रजवार पेंटिंग के सुंदर चित्रों से सजाया गया है।  कार्यक्रम मंडप में कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण है। खास बात यह है कि इस प्रदर्शनी में पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। पैडी सीडर, जुड़ा, बियासी हल, तेंदुआ हल और ट्रैक्टर जैसे यंत्र प्रदर्शित हैं।  मंडप में एक ओर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के जलपान का हिस्सा है तो वहीं सावन का झूला भी सावन के फुहारों भरे मौसम के आंनद को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ का पारम्परिक रहचुली झूला भी आकर्षण का केंद्र है। संस्कृति की छटा बिखेरते पारम्परिक नृत्य :  हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी  नृत्य और राउत नाचा जैसे पारम्परिक लोक नृत्य की छटा भी मनमोहक धुनों के साथ बिखर रही है। गेड़ी नृत्य के लिए बिलासपुर से दल आमंत्रित किया गया है। गेड़ी नृत्य के दल ने वेशभूषा में परसन वस्त्र के साथ सिर पर सीकबंद मयूर पंख का मुकुट, कौड़ी व चिनीमिट्टी से बनी माला और कौड़ी जड़ित जैकेट पहन रखा है। यह दल माँदर, झाँझ, झुमका, खँजरी, हारमोनियम और बाँसुरी की मधुर धुन में अपनी प्रस्तुति दे रही है। ग़ौरतलब है कि गेड़ी नृत्य की शुरुआत हरेली के दिन से होती है।  हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में गड़बेड़ा (पिथौरा) से राउत नाचा के लिए 50 लोगों का दल पहुँचा है। इस दल में पुरुषों ने जहाँ धोती-कुर्ता के साथ सिर पर कलगी लगी पगड़ी, कौड़ी जड़ित बाजूबंद और पेटी के साथ पैरों में घुँघरू पहना है तो महिलाएँ भी पारम्परिक श्रृंगारी करके पहुँची हैं। इन दोनों ही दलों के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस मौक़े पर मुख्यमंत्री निवास पहुँचने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।

BCCI का बड़ा फैसला: पंत खेलेंगे बतौर बल्लेबाज़, कीपिंग करेगा ये खिलाड़ी

मैनचेस्टर पैर में लगी चोट के बावजूद ऋषभ पंत मैनचेस्टर टेस्ट मैच में बैटिंग के लिए उपलब्ध होंगे. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने इसे लेकर अपडेट दिया है. बीसीसीआई ने कहा कि ऋषभ पंत टीम के साथ दूसरे दिन के खेल के लिए जुड़ चुके हैं और जरूरत पड़ने पर बैटिंग करेंगे. हालांकि बीसीसीआई ने ये स्पष्ट किया कि ऋषभ अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ध्रुव जुरेल के कंधों पर होगी. बीसीसीआई की ओर से कहा गया, 'ऋषभ पंत को मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लगी थी. इसी कारण अब वह इस टेस्ट मैच में आगे विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. उनकी जगह ध्रुव जुरेल को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि, चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ मौजूद और जरूरत पड़ने पर वह बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे.' विकेटकीपिंग नहीं करेंगे पंत ऐसे में बीसीसीआई ने पहले दिन मैच के बाद पंत की चोट पर अपडेट जारी करते हुए कहा था कि उन्हे स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया गया है। मेडिकल टीम उनकी निगरानी कर रही है। गुरुवार को बीसीसीआई ने एक बार फिर अपडेट जारी किया और बताया, मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन चोटिल होने वाले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे। उनकी जगह अब ध्रुव जुरेल विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभाएंगे। बल्लेबाजी के लिए हैं उपलब्ध अपनी चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ जुड़ गए हैं और जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे। टीम की आवश्यकता अनुसार, वे बैटिंग कर सकते हैं। यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम मैनेजमेंट की सलाह के बाद लिया गया है, ताकि ऋषभ पंत की चोट और टीम बैलेंस दोनों का ध्यान रखा जा सके।

BCCI का बड़ा फैसला: पंत खेलेंगे बतौर बल्लेबाज़, कीपिंग करेगा ये खिलाड़ी

मैनचेस्टर पैर में लगी चोट के बावजूद ऋषभ पंत मैनचेस्टर टेस्ट मैच में बैटिंग के लिए उपलब्ध होंगे. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने इसे लेकर अपडेट दिया है. बीसीसीआई ने कहा कि ऋषभ पंत टीम के साथ दूसरे दिन के खेल के लिए जुड़ चुके हैं और जरूरत पड़ने पर बैटिंग करेंगे. हालांकि बीसीसीआई ने ये स्पष्ट किया कि ऋषभ अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ध्रुव जुरेल के कंधों पर होगी. बीसीसीआई की ओर से कहा गया, 'ऋषभ पंत को मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लगी थी. इसी कारण अब वह इस टेस्ट मैच में आगे विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. उनकी जगह ध्रुव जुरेल को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि, चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ मौजूद और जरूरत पड़ने पर वह बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे.' विकेटकीपिंग नहीं करेंगे पंत ऐसे में बीसीसीआई ने पहले दिन मैच के बाद पंत की चोट पर अपडेट जारी करते हुए कहा था कि उन्हे स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया गया है। मेडिकल टीम उनकी निगरानी कर रही है। गुरुवार को बीसीसीआई ने एक बार फिर अपडेट जारी किया और बताया, मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन चोटिल होने वाले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे। उनकी जगह अब ध्रुव जुरेल विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभाएंगे। बल्लेबाजी के लिए हैं उपलब्ध अपनी चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ जुड़ गए हैं और जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे। टीम की आवश्यकता अनुसार, वे बैटिंग कर सकते हैं। यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम मैनेजमेंट की सलाह के बाद लिया गया है, ताकि ऋषभ पंत की चोट और टीम बैलेंस दोनों का ध्यान रखा जा सके।

सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है। इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।

सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है। इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।

हाथियों के साथ फोटो लेना पड़ा भारी, 39 वर्षीय CEO की ट्रैजिक डेथ

नई दिल्ली  दक्षिण अफ्रीका के एक गेम रिजर्व में बड़ा हादसा हुआ है।  गेम रिजर्व के मालिक और करोड़पति सीईओ की ही हाथी ने कुचलकर हत्या कर दी। यह घटना सुबह 8 बजे गोंडवाना प्राइवेट गेम रिजर्व में हुई।  हाथी ने सीईओ पर दातों से किया हमला डेली मेल के अनुसार, हाथियों के एक झुंड को पर्यटक आवासों से दूर ले जाने का प्रयास कर किया जा रहा था। तभी, हाथियों का भगाने का काम गड़बड़ा गया और एक बड़ा वजनी हाथी ने करोड़पति सीईओ पर हमला कर दिया। कथित तौर पर हाथी ने फ्रेंकोइस क्रिश्चियन कॉनराडी को अपने दांतों से मारा और उन्हें कई बार कुचला, जिससे आस-पास के रेंजर अपनी पूरी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाने में असमर्थ रहे। हाथियों से था गहरा लगाव कॉनराडी एक केलिक्स ग्रुप स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी के भी मालिक थे। उनके बारे में कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें हाथियों और नेचर से गहरा लगाव था और वे अक्सर उनकी तस्वीरें लेने के लिए जंगलों और रिजर्व में जाते थे। उनके पास जूलॉजी, पशु अध्ययन, कॉमर्स एंड मार्केटिंग की डिग्री थी। गोंडवाना के एक अधिकारी ने कहा कि कॉनराडी के हादसे के बारे में उनकी कंपनी के कर्मचारियों को कुछ न कहने की चेतावनी दी गई है कि वे कुछ भी न कहें, वरना उन्हें उसी दिन नौकरी से निकाल दिया जाएगा।  

बब्बर खालसा आतंकी की इंदौर में गिरफ्तारी, रॉकेट लॉन्चर अटैक का था मास्टरमाइंड

इंदौर दिल्ली पुलिस ने इंदौर से खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य को पकड़ा है। उस पर पंजाब के एक थाने पर रॉकेट लॉन्चर से हमला करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, पंजाब से भागकर वह पहले गुजरात पहुंचा। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी अमित कौशिक ने बताया- आतंकवादी का नाम आकाशदीप सिंह उर्फ बाज है। वह अमृतसर में चनाचेन का रहने वाला है। उसने अप्रैल 2025 में पंजाब के गुरदासपुर के बटाला में किला लाल सिंह थाने पर रॉकेट लॉन्चर से हमला किया था। हमले की जिम्मेदारी बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े हैप्पी पासिया, मनू आगवन और गोपी नवांशहरिया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ली थी। पुलिस ने दावा किया था कि ये हमला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और पंजाब में ग्रेनेड हमलों के आरोपी को मारने का बदला लेने के लिए किया गया था। आकाश सिंह इंदौर के हीरानगर थाना इलाके की निर्माणाधीन बिल्डिंग में क्रेन ऑपरेटर का काम कर रहा था। बुधवार को दिल्ली पुलिस यहां पहुंची और उसे गिरफ्तार कर साथ ले गई। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एक अन्य मामला भी दिल्ली में ही दर्ज है। विदेश में बैठे आतंकी हैंडलर से संपर्क में था दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आकाशदीप बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में था। जो उसे सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए निर्देश दे रहा था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को आकाशदीप के गुजरात में होने का सुराग मिला था। वहां पतासाजी करने पर उसके इंदौर में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद इंस्पेक्टर अशोक कुमार भड़ाना के नेतृत्व में एक टीम इंदौर पहुंची थी। आकाशदीप से पूछताछ में आतंकी नेटवर्क, उनके विदेशी संपर्क और फंडिंग के खुलासे की उम्मीद है। डीसीपी कौशिक ने कहा- यह गिरफ्तारी बब्बर खालसा के भारत में फैले नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता है। हम आरोपी से पूछताछ कर अन्य लिंक और मॉड्यूल की जांच कर रहे हैं।

कुशीनगर एक्सप्रेस में बड़ा हादसा टला, धुएं के कारण रेलवे ट्रैक पर रुकीं कई गाड़ियां

बुरहानपुर बुरहानपुर रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब प्लेटफार्म के नजदीक कुशीनगर एक्सप्रेस पहुंची। बताया जा रहा है कि, मुंबई से गोरखपुर जा रही कुशीनगर एक्सप्रेस के बी-3 कोच के चक्कों से धुआं निकलता दिखाई दिया था, जिसके चलते ट्रेन के साथ साथ प्लेटफार्म पर हड़कंप मच गया। बताया ये भी जा रहा है कि, रेलवे के एक कर्मचारी की तत्परता के चलते आज कुशीनगर एक्सप्रेस हादसे का शिकार होने से बची है। फिलहाल, तीन घंटे डिले होने के बाद एक्सप्रेस ट्रेन को उसके गनतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि, ट्रेन के कोच में लगे चक्के से सबसे पहले धुआं उठता स्टेशन पर तैनात रेलवे कर्मी (अपॉइंटमेंट) सीताराम पटेल ने देखा। उन्होंने न सिर्फ डिब्बे में सवार यात्रियों को सावधानी पूर्वक रिस्क में आने वाले हिस्से से दूर किया। साथ ही तत्काल प्रभाव से रेलवे प्रबंधन को सूचित किया। आनन-फानन में मौके पर पहुंचे रेलवे के सुरक्षा प्रबंधन के अधिकारियों ने आग बुझाने के प्रबंध शुरु किये। इसके बाद काफी देर आग बुझाने का प्रयास किया गया। आग बुझने के बाद पहले उससे हुई क्षति में सुधार करने का प्रयास किया, लेकिन करीब 3 घंटे बाद कोच को ही ट्रेन से अलग कर रवाना उसके गनतव्य क लिए रवाना किया गया। कर्मचारी की तत्पता से टला बड़ा हादसा रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार, कोच के हॉट एक्सल में स्पार्किंग होने से धुआं निकलने लगा था। रेलवे स्टेशन पर ही समय रहते उसे देखकर मामला ठीक कर लिया गया, वरना कोई हादसा हो सकता था। घटना के बाद मौके पर भुसावल से सीएनडब्लू की टीम समेत अन्य अफसरों का दल भी जांच के लिए बुरहानपुर पहुंच गया था। पीछे से आ रही कई गाड़ियां 3 घंटे रोकी गईं वहीं, सबसे पहले प्लेटफार्म प्रबंधन के कर्मचरियों ने अग्निशमन यंत्र से चक्के से निकल रहे धुएं को काबू किया। ट्रेन को यार्ड में खड़ा करवाया, जहां उसका ठीक से परीक्षण किया गया। जांच के बाद ट्रेन को खंडवा के लिए रवाना कर दिया गया है। बता दें कि, हादसे के चलते पीछे से आ रही गाड़ियों को भी भुसावल समेत अन्य स्टेशनों पर रोका गया था।

राजस्थान का लक्ष्य दूध उत्पादन में शीर्ष पर पहुंचना, यूपी को पीछे छोड़ने की तैयारी

जयपुर  देश में दुग्ध उत्पादन के मामले में राजस्थान सिरमौर बनने में एक कदम पीछे हैं। वर्तमान में पहले नम्बर पर उत्तरप्रदेश है। मध्यप्रदेश व गुजरात तीसरे व चौथे नम्बर पर है। उत्पादन की दौड़ में शीर्ष पर पहुंचने के लिए राजस्थान में ग्राम स्तर पर प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2022-23 में राजस्थान बना था सिरमौर राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फैडरेशन के अनुसार देश में दूध उत्पादन में राजस्थान वर्ष 2022-23 में पहले स्थान पर आ गया था। तब राज्य ने 900 लाख लीटर उत्पादन में ही उत्तरप्रदेश को पीछे छोड़ दिया। उसके बाद उत्तरप्रदेश में दूध का उत्पादन बढ़ गया। वर्तमान में राजस्थान में दूध का प्रतिदिन औसत उत्पादन उत्तरप्रदेश से 151 लाख लीटर कम है। राजस्थान में दूध उत्पादन व कारोबार राज्य में कुल उत्पादन- 912 लाख लीटर पशुपालकों के घरों में खपत (दूध-दही, छाछ-घी)- 500 लाख लीटर दूध बिक्री का कुल बाजार- 412 लाख लीटर दूध की खुले में बिक्री (हलवाई इत्यादि)- 312 लाख लीटर डेयरियों में बिक्री के लिए जा रहा- 100 लाख लीटर सरस डेयरी का दूध संकलन- 35 लाख लीटर अन्य डेयरियां खरीद रही दूध (अमूल, मदर, कोटा फ्रेश, पतजंलि इत्यादि)- 65 लाख लीटर। (प्रतिदिन औसत लाख लीटर) राज्य में 55 प्रतिशत घरों में हो रही खपत राज्य में कुल उत्पादन 912 लाख लीटर है, उसका 55 प्रतिशत यानी 500 लाख लीटर दूध पशुपालकों के घरों में ही खप रहा है। घरों में दूध पीने के अलावा दही, छाछ व घी बनाकर भी खपत हो रही है।