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कमजोर पड़ा मानसून जैसलमेर में, अगले चरण की बारिश की उम्मीद तीन दिन बाद

जैसलमेर पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी जिले जैसलमेर में मानसून फिलहाल सुस्त होता नजर आ रहा है। बीते दिनों हुई अच्छी बारिश के बाद अब बादलों ने जिले से दूरी बना ली है। बुधवार को जिले में मौसम पूरी तरह साफ रहा और दोपहर के समय तेज धूप ने गर्मी का असर और अधिक बढ़ा दिया। हालांकि आसमान में छिटपुट हल्के बादलों की मौजूदगी बनी रही, लेकिन वह बारिश लाने में नाकाम रहे। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस, जबकि न्यूनतम तापमान 26.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन के तापमान में मामूली गिरावट देखने को मिली है, लेकिन धूप के तीखे तेवर जारी हैं। मौसम विशेषज्ञों ने अगले तीन दिनों तक जिले में मौसम शुष्क और गर्म रहने की संभावना जताई है। वहीं, जो किसान बारिश का इंतजार करते हुए खरीफ की फसल की बुवाई स्थगित किए बैठे थे। उन्होंने अब खेतों की जुताई कर बोवनी शुरू कर दी है। इस वर्ष अब तक की बारिश ने खेती योग्य भूमि में नमी की पर्याप्त मात्रा बना दी है, जिससे खेतों में बीजों के अंकुरण के लिए अनुकूल स्थिति बनी हुई है। फिर बढ़ेगी बारिश की संभावना, सिस्टम सक्रिय कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. अतुल गालव के अनुसार, वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में एक मानसूनी परिसंचरण तंत्र सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से आगामी दिनों में विशेष रूप से 24 जुलाई के बाद, एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह सिस्टम पूर्वी राजस्थान की ओर बढ़ सकता है और इसके असर से 27 से 30 जुलाई के बीच पुनः बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।डॉ. गालव ने बताया कि मानसून फिलहाल जैसलमेर में कमजोर पड़ गया है, जिस कारण वर्षा की गतिविधियां रुकी हुई हैं। लेकिन बंगाल की खाड़ी से सक्रिय हो रहे सिस्टम के प्रभाव से एक बार फिर जिले में नमी बढ़ेगी और बारिश की वापसी संभव है।

कौन बनेगा अगला उपराष्ट्रपति? थावरचंद गहलोत सहित कई नामों की चर्चा तेज

भोपाल  उपराष्ट्रपति जगदीप धनखंड के इस्तीफे के बाद रेस में कई नाम हैं। सियासी गलियारों में उन नामों को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। इस रेस में मध्य प्रदेश के भी एक दिग्गज नेता का नाम है। वह केंद्र की मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं। चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में उम्मीदवार के नाम जल्द ही आ जाएंगे। अभी एमपी से कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत का नाम भी चल रहा है। पॉलिटिक्ल अनुभवों के साथ-साथ सियासी समीकरण में भी फिट बैठते हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं थावरचंद गहलोत थावरचंद गहलोत एमपी के सीनियर नेता हैं। केंद्र की राजनीति में शुरू से सक्रिय रहे हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं। उन्हें उपराष्ट्रपति पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। उनके राजनीतिक अनुभव और जाति के समीकरण को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इससे उनका नाम इस दौड़ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रतलाम के रहने वाले हैं थावरचंद गहलोत थावरचंद गहलोत का राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के आलोट से शुरू हुआ है। वह राजनीतिक और जातिगत समीकरणों में फिट बैठते हैं। उनके पास राज्यसभा का लंबा अनुभव है। वह राज्यसभा में सदन के नेता भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह मोदी सरकार में दो बार केंद्रीय मंत्री रहे हैं। वह बीजेपी की सबसे बड़ी संसदीय समिति के सदस्य भी रहे हैं। अनुसूचित जनजाति से आते हैं गहलोत 77 साल के गहलोत अनुसूचित जनजाति से आते हैं। इस वजह से जातिगत समीकरणों में भी वह फिट बैठते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी किसी समर्पित कार्यकर्ता को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बना सकती है। थावरचंद गहलोत उनमें से एक हो सकते हैं। 1980 में बने थे पहली बार विधायक थावरचंद गहलोत 1980 में पहली बार मध्य प्रदेश में विधायक बने थे। 1990 में वह एमपी सरकार में राज्यमंत्री बन गए। 1996 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। वहीं 1998 से 2004 तक लगातार लोकसभा सांसद रहे हैं। 2012 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। 2018 में फिर से राज्यसभा गए। 2014 में मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। 2019 में केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ राज्यसभा में वह सदन के नेता भी बने। 2021 में कर्नाटक के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद से पद पर बने हुए हैं। पीएम मोदी के गुड बुक में हैं गहलोत थावरचंद गहलोत को पीएम मोदी का करीबी माना जाता है। उनके पास राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ बीजेपी में भी बड़ी जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव है। वह बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव और उत्तर पूर्व भारत के प्रभारी भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं।हालांकि थावरचंद गहलोत के साथ अन्य भी कई नामों की चर्चा है। मध्य प्रदेश से वह अकेले हैं, जिनके नाम की चर्चा है। हालांकि अंतिम निर्णय बीजेपी और एनडीए गठबंधन को लेना है कि उनका संयुक्त उम्मीदवार कौन होगा।  

अन्नपूर्णा तालाब पर भव्य घाट निर्माण को मंजूरी, छठ पर्व पर दिखेगी खास रौनक

इंदौर इंदौर नगर निगम द्वारा छठ पूजा के लिए विभिन्न स्थानों पर घाट निर्माण की योजना के तहत वर्षों पुराने अन्नपूर्णा तालाब को चुना गया है। निगम यहां सवा करोड़ रुपये की लागत से घाट बनाएगा और तालाब परिसर का संपूर्ण सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रवेश द्वार से लेकर तालाब के चारों ओर सुविधाजनक घाट निर्माण, लाइटिंग और बैठने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे छठ पूजा जैसे प्रमुख पर्व को मनाने में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। कभी बदहाल था अन्नपूर्णा तालाब, अब बनेगा धार्मिक आयोजन का केंद्र एक समय पर अन्नपूर्णा तालाब की हालत बेहद खराब थी। चारों ओर गंदगी, कचरे के ढेर और जलकुंभी से भरे इस तालाब के आसपास लोग आना तक पसंद नहीं करते थे। नगर निगम द्वारा कुछ समय पूर्व इस तालाब की साफ-सफाई करवाई गई और आसपास के क्षेत्र में विकास कार्य कराए गए, जिससे स्थिति में सुधार आया। अब निगम यहां छठ पूजा के मद्देनजर विशेष घाट निर्माण करने जा रहा है। इसके लिए निगम द्वारा टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें घाट निर्माण के साथ-साथ परिसर का समग्र सौंदर्यीकरण भी शामिल है। उत्तर भारतीय समुदाय के लिए विशेष तैयारी, तय होगी समय सीमा छठ पूजा उत्तर भारतीय समुदाय का प्रमुख पर्व है और इंदौर में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए नगर निगम इसे व्यवस्थित ढंग से मनाने के लिए कार्य कर रहा है। अन्नपूर्णा तालाब पर बन रहे इन घाटों की योजना इस तरह से तैयार की जा रही है कि श्रद्धालुओं को जगह, सुविधा और स्वच्छता के स्तर पर कोई परेशानी न हो। निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्यों के लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी ताकि त्यौहार से पहले सभी निर्माण पूर्ण हो जाएं। साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी छठ पूजा के लिए उपयुक्त जमीनों की तलाश की जा रही है, जहां भविष्य में घाट बनाए जा सकें। सुखलिया क्षेत्र की सड़कों पर चलेगा विकास कार्य, बदलेगी ड्रेनेज व्यवस्था नगर निगम द्वारा केवल धार्मिक स्थलों पर ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य इलाकों में भी बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए काम किया जा रहा है। सुखलिया और आसपास की कॉलोनियों जैसे खातीपुरा, पन्नानगर, सूरज नगर में वर्षों पुरानी ड्रेनेज लाइनों के कारण बार-बार चोकिंग की शिकायतें मिल रही थीं। अब इन क्षेत्रों में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से नई और बड़ी ड्रेनेज लाइनें बिछाने का काम शुरू किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। साथ ही पुराने टूटे-फूटे चेंबर भी सुधारे जाएंगे, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी और जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी। 

अन्नपूर्णा तालाब पर भव्य घाट निर्माण को मंजूरी, छठ पर्व पर दिखेगी खास रौनक

इंदौर इंदौर नगर निगम द्वारा छठ पूजा के लिए विभिन्न स्थानों पर घाट निर्माण की योजना के तहत वर्षों पुराने अन्नपूर्णा तालाब को चुना गया है। निगम यहां सवा करोड़ रुपये की लागत से घाट बनाएगा और तालाब परिसर का संपूर्ण सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रवेश द्वार से लेकर तालाब के चारों ओर सुविधाजनक घाट निर्माण, लाइटिंग और बैठने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे छठ पूजा जैसे प्रमुख पर्व को मनाने में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। कभी बदहाल था अन्नपूर्णा तालाब, अब बनेगा धार्मिक आयोजन का केंद्र एक समय पर अन्नपूर्णा तालाब की हालत बेहद खराब थी। चारों ओर गंदगी, कचरे के ढेर और जलकुंभी से भरे इस तालाब के आसपास लोग आना तक पसंद नहीं करते थे। नगर निगम द्वारा कुछ समय पूर्व इस तालाब की साफ-सफाई करवाई गई और आसपास के क्षेत्र में विकास कार्य कराए गए, जिससे स्थिति में सुधार आया। अब निगम यहां छठ पूजा के मद्देनजर विशेष घाट निर्माण करने जा रहा है। इसके लिए निगम द्वारा टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें घाट निर्माण के साथ-साथ परिसर का समग्र सौंदर्यीकरण भी शामिल है। उत्तर भारतीय समुदाय के लिए विशेष तैयारी, तय होगी समय सीमा छठ पूजा उत्तर भारतीय समुदाय का प्रमुख पर्व है और इंदौर में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए नगर निगम इसे व्यवस्थित ढंग से मनाने के लिए कार्य कर रहा है। अन्नपूर्णा तालाब पर बन रहे इन घाटों की योजना इस तरह से तैयार की जा रही है कि श्रद्धालुओं को जगह, सुविधा और स्वच्छता के स्तर पर कोई परेशानी न हो। निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्यों के लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी ताकि त्यौहार से पहले सभी निर्माण पूर्ण हो जाएं। साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी छठ पूजा के लिए उपयुक्त जमीनों की तलाश की जा रही है, जहां भविष्य में घाट बनाए जा सकें। सुखलिया क्षेत्र की सड़कों पर चलेगा विकास कार्य, बदलेगी ड्रेनेज व्यवस्था नगर निगम द्वारा केवल धार्मिक स्थलों पर ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य इलाकों में भी बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए काम किया जा रहा है। सुखलिया और आसपास की कॉलोनियों जैसे खातीपुरा, पन्नानगर, सूरज नगर में वर्षों पुरानी ड्रेनेज लाइनों के कारण बार-बार चोकिंग की शिकायतें मिल रही थीं। अब इन क्षेत्रों में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से नई और बड़ी ड्रेनेज लाइनें बिछाने का काम शुरू किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। साथ ही पुराने टूटे-फूटे चेंबर भी सुधारे जाएंगे, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी और जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी। 

इंतजार खत्म! तय हुई तारीख, किसानों को मिलेगा मुआवजा और शुरू होगा बायपास निर्माण

ग्वालियर  ग्वालियर में वेस्टर्न बायपास के निर्माण की तारीख तय हो गई है। 15 अक्टूबर से बायपास का निर्माण शुरू हो जाएगा। इससे पहले जमीन अधिग्रहण व किसानों मुआवजा वितरण की कार्रवाई पूरी करनी होगी। कलेक्टर रुचिका चौहान ने बायपास की समीक्षा करते हुए सभी कार्य समय सीमा में करने के लिए कहा। कलेक्टर ने दिया आदेश कलेक्टर ने वेस्टर्न बायपास(Western Bypass) निर्माण के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, सभी संबंधित विभागीय अधिकारी समन्वय स्थापित कर निर्माण कार्य के लिए जो भी आवश्यक कार्रवाई है वह समय रहते पूर्ण करें। यातायात की दृष्टि से यह प्रोजेक्ट बहुत की महत्वपूर्ण है। इसके निर्माण के संबंध में जो भी कार्रवाई है उसमें समय-सीमा निर्धारित कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में ये थे मौजूद वन विभाग के माध्यम से भी जो एनओसी या अन्य दस्तावेज जारी किए जाना हैं उनमें भी समय का ध्यान रखकर कार्रवाई की जाए। वेस्टर्न बायपास के निर्माण को लेकर आयोजित बैठक में डीएफओ अंकित पाण्डेय, अपर कलेक्टर कुमार सत्यम, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अशोक चौहान, वेस्टर्न बायपास के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मौजूद थे।

जल क्रांति से सीहोर के खेतों में लौटी जान, हजारों तालाब-डगवेल से बढ़ा जलस्तर

सीहोर  सीहोर जिले में जल संरक्षण को लेकर चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की स्थायी व्यवस्था और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। यह अभियान 30 मार्च से 30 जून 2025 तक चलाया गया था, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी से जल संरक्षण को बढ़ावा देना और किसानों को खेत तालाबों के माध्यम से सिंचाई के स्थायी साधन उपलब्ध कराना था। लक्ष्य के करीब पहुंचा तालाब निर्माण कार्य अभियान के दौरान जिले को 1500 खेत तालाब बनाने का लक्ष्य दिया गया था, जिसके विरुद्ध 1491 तालाबों का निर्माण सफलतापूर्वक कराया गया। इसके साथ ही 3000 डगवेल रिचार्ज का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिनमें से 2519 डगवेलों का रिचार्ज किया गया। खेत तालाबों के निर्माण से किसानों को वर्षा जल संग्रह करने और अपनी फसलों की समय पर सिंचाई करने में मदद मिली है। इससे एक ओर जहां फसल उत्पादन में स्थिरता आई, वहीं सिंचाई की लागत में भी कमी आई।इसके अलावा, तालाब निर्माण और अन्य संबंधित गतिविधियों से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हुए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला। मनरेगा से मिला निर्माण कार्यों को आधार अभियान के दौरान मनरेगा योजना के तहत खेत तालाबों के निर्माण को स्वीकृति दी गई। मनरेगा के संसाधनों का उपयोग कर जल संरक्षण को जमीनी स्तर पर मजबूती दी गई। इससे पानी की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित हुई और जल संकट कम करने में मदद मिली। जिला प्रशासन के अनुसार, इस अभियान के सफल क्रियान्वयन से जल संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। अब प्रयास किया जा रहा है कि जल संरक्षण की इन गतिविधियों को निरंतर जारी रखा जाए, जिससे किसानों को हर फसल सीजन में पर्याप्त जल उपलब्ध हो और क्षेत्र की हरियाली बनी रहे।  

B.Tech या सिर्फ 8वीं पास? दोनों के लिए मौका – 300 से ज्यादा नौकरियां, सैलरी ₹1.77 लाख

भोपाल  मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने कुल 346 पदों पर भर्ती निकाली है। इन पदों में सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, संयंत्र सहायक, कार्यालय सहायक, सुरक्षा गार्ड जैसे कई पद शामिल हैं। योग्य और इच्छुक अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट mppgcl.mp.gov.in पर जाकर 23 जुलाई से 21 अगस्त 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। शैक्षणिक योग्यता पदानुसार इस भर्ती के तहत पदों के अनुसार न्यूनतम योग्यता 8वीं पास से लेकर स्नातक, डिप्लोमा तथा इंजीनियरिंग डिग्री तक निर्धारित की गई है। कुछ पदों के लिए उम्मीदवारों का 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है, जबकि तकनीकी पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में BE/B.Tech की डिग्री मांगी गई है। वहीं कुछ पदों के लिए 3 से 5 वर्षों तक का अनुभव भी अनिवार्य किया गया है। चिकित्सा और कार्यालय संबंधित पदों के लिए योग्यता मेडिकल ऑफिसर के पद हेतु उम्मीदवार के पास MBBS की डिग्री और मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में स्थायी पंजीकरण होना चाहिए। कार्यालय सहायक व अन्य प्रशासनिक पदों के लिए स्नातक डिग्री आवश्यक है। इसके अलावा जूनियर स्टेनोग्राफर के लिए उम्मीदवार को अंग्रेजी या हिंदी में शॉर्टहैंड परीक्षा 80 शब्द प्रति मिनट की गति से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। आयु सीमा  इस भर्ती में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि, मध्य प्रदेश राज्य के आरक्षित वर्गों जैसे कि एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस (नॉन क्रीमी लेयर), पीडब्ल्यूडी एवं महिला उम्मीदवारों को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। आवेदन शुल्क इस भर्ती के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 1200 रुपये का शुल्क देना होगा। वहीं एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस (नॉन क्रीमी लेयर), और पीडब्ल्यूडी श्रेणी के आवेदकों के लिए आवेदन शुल्क 600 रुपये निर्धारित किया गया है। उम्मीदवारों को यह शुल्क ऑनलाइन मोड के माध्यम से जमा करना होगा। चयन प्रक्रिया और वेतनमान उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा (Written Exam), फिजिकल टेस्ट, दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) और मेडिकल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को उनके पद के अनुसार 15,500 रुपये से 1,77,500 रुपये प्रतिमाह तक का वेतनमान प्रदान किया जाएगा। यह वेतनमान पद, योग्यता और अनुभव के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।  

मोहन सरकार की बड़ी पहल: मेधावी छात्रों के लिए निशुल्क कोचिंग से खुलेगा सफलता का द्वार

सुपर 100 योजना  http://www.mpsos.nic.inभोपाल  स्कूल शिक्षा विभाग प्रदेश में प्रतिभाशाली बच्चों को देश के श्रेष्ठ संस्थानों में प्रवेश की कोचिंग के लिये सुपर 100 योजना संचालित कर रहा है। कोचिंग के लिये चयनित बच्चों को विभाग शासकीय सुभाष उच्च.मा.विद्यालय भोपाल और शासकीय मल्हार आश्रम उच्च.मा.विद्यालय इंदौर में निशुल्क कोचिंग के साथ आवासीय सुविधा भी उपलब्ध करा रहा है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश के अनेक बच्चों को देश के चयनित इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ और मैनेजमेंट से जुड़े कॉलेजों में प्रवेश मिला है। स्कूलों में चयन प्रक्रिया सुपर 100 योजना में मेघावी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये नि:शुल्क कोचिंग प्रदान किये जाने की व्यवस्था है। इस योजना में प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों का परीक्षा के माध्यम से चयन किया जाता है। इस वर्ष राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन 26 जुलाई तक दिये जा सकते हैं। परीक्षा की तिथि 3 अगस्त 2025 रविवार को प्रथम पाली में जेईई के लिये और द्वितीय पाली में नीट की परीक्षा होगी। परीक्षा केन्द्र प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय के उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय में बनाये गये हैं। परीक्षा फार्म शुल्क 200 रूपये प्रति छात्र निर्धारित किये गये हैं। पिछले वर्ष इंदौर और भोपाल के सुभाष उच्च.मा.विद्यालय में करीब 300-300 विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग के साथ आवासीय सुविधा दिलाई गई थी। निशुल्क सुविधाएं चयनित बच्चों को निशुल्क छात्रावास सुविधा, आधुनिक प्रयोगशाला, स्मार्ट एवं वर्चुअल क्लासेस और बच्चों को करियर काउंसलिंग की बेहतर व्यवस्था रहती है। सुपर 100 योजना के माध्यम से बच्चों को एम्स, आईआईटी के साथ देशभर के अनेक कॉलेजों में प्रवेश मिला है। लोक शिक्षण संचालनालय ने समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को चयन प्रतियोगी परीक्षा में अधिक से अधिक छात्र शामिल हो सकें, इसके लिये योजना की जानकारी दिये जाने के निर्देश दिये हैं। आवेदन www.mponline.gov.in पर किये जा सकते हैं। परीक्षा का प्रवेश पत्र वेबसाइट www.mpsos.nic.in अथवा मोबाइल एप mpsos से डाउनलोड किये जा सकते हैं। योजना के संबंध में फोन नं-0755-2552106 पर भी संपर्क किया जा सकता है।  

नौकरीपेशा के दिन बहुरेंगे! 8वें वेतन आयोग से ₹51,000 बेसिक सैलरी की उम्मीद

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग का गठन जल्‍द होने जा रहा है. जनवरी 2026 तक इसे लागू करने का प्रस्‍ताव रखा गया है, जिसे लेकर राज्‍य वित्त मंत्री पंकज चौधरी ने जानकारी दी है कि 8th Pay Commission को लेकर राज्‍य सरकारों, वित्त मंत्रालय और संबंधित विभागों से परामर्श की प्रक्रिया चल रही है. जल्‍द ही इसे लागू कर दिया जाएगा.  इस आयोग के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, पेंशन और भत्तों में इजाफा हो जाएगा. कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में जबरदस्‍त उछाल देखने को मिलेगी. साथ ही महंगाई भत्ता और फिटमेंट फैक्‍टर भी बढ़ेगा, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा. आइए समझते हैं, आपकी सैलरी कितनी बढ़ सकती है…  इस फॉर्मूले से बढ़ेगी कर्मचारियों की सैलरी 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी में ठीक वैसे ही इजाफा होगा, जैसे 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के लागू होने पर हुआ था. कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी के लिए एक्रोयड फॉर्मूले का उपयोग किया जाएगा.  क्‍या है ये फॉर्मूला?  डॉ वालेस एक्रोयड ने यह फॉर्मूला पेश किया था, जिसे जीवन के न्‍यूनतम लागत तय करने के लिए डिजाइन किया गया था. इस फॉर्मूले में यह बताया गया था कि एवरेज कर्मचारियों की पोषण संबंधी जरूरतों के आधार पर सैलरी का कैलकुलेशन किया जाना चाहिए. इस फॉर्मूले को बनाते वक्‍त भोजन, कपड़ा और मकान जैसी कर्मचारियों की जरूरतों को ध्‍यान में रखा गया था. 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) ने 1957 में इस फॉर्मूले को अपनाया गया था.  7वें वेतन आयोग पर भी लागू हुआ था ये फॉर्मूला  इस फॉर्मूले का उपयोग करते हुए 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत भी कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा किया गया था. 7वें वेतन आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 7000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये हो गई थी. कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को अपडेट करने के लिए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था. ये फिटमेंट फैक्‍टर एक्रोयड फॉर्मूला से तय किया गया था.  8वें वेतन आयोग के तहत 3 गुना बढ़ जाएगी सैलरी!  अनुमान है कि 8th Pay Commission के लागू होते ही कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल देखने को मिलेगी. बेसिक सैलरी में करीब 3 गुना बढ़ोतरी हो सकती है, जो एक्रोयड फॉर्मूला के तहत संभव होगा. अगर ये फॉर्मूला 8वां वेतन आयोग के तहत भी यूज किया जाता है तो सैलरी और पेंशन का कैलकुलेशन 2.86 फिटमेंट के आधार पर होगा. इसका मतलब है कि न्‍यूनतम बेसिक सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर 51480 रुपये तक हो सकती है. वहीं पेंशन 9000 रुपये से बढ़कर 25740 रुपये हो जाएगी.

स्वास्थ्य सेवाओं में नई उपलब्धि: सीएम डॉ. यादव करेंगे भोपाल में अत्याधुनिक सीटी स्कैन और एमआरआई का लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में अत्याधुनिक सी.टी. स्कैन एवं एम.आर.आई. सेवाओं का करेंगे लोकार्पण भोपाल को मिलेगी नई स्वास्थ्य सुविधा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे आधुनिक सीटी स्कैन व एमआरआई सेवा का शुभारंभ स्वास्थ्य सेवाओं में नई उपलब्धि: सीएम डॉ. यादव करेंगे भोपाल में अत्याधुनिक सीटी स्कैन और एमआरआई का लोकार्पण मशीनें फास्ट स्क्रीनिंग में सक्षम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शोध भी किया जा सकेगा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेशवासियों को आधुनिक, सुलभ और सर्वसमावेशी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। चिकित्सा शिक्षा एवं जनस्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित कर सर्वसुलभ और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में सरकार सतत कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में अत्याधुनिक तकनीकी से युक्त सी.टी. स्कैन मशीन (80 रो डिटेक्टर एक्वारिंग – 128 स्लाइस) तथा एम.आर.आई. मशीन (1.5 टेसला) का 25 जुलाई को लोकार्पण करेंगे। उल्लेखनीय है कि यह सुविधा प्रदेश के समस्त शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में सर्वप्रथम भोपाल में प्रारंभ की गई है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल की गरिमामयी उपस्थिति भी रहेगी। चिकित्सा छात्रों को बेहतर शिक्षा और शोध कार्यों को मिलेगी गति इन आधुनिकतम मशीनों से आयुष्मान भारत योजना एवं अन्य शासकीय योजनाओं के अंतर्गत आने वाले मरीजों को निःशुल्क सी.टी. स्कैन एवं एम.आर.आई. जाँच की सुविधा प्रदान की जाएगी। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी। इन मशीनों की स्थापना से चिकित्सा छात्रों यू.जी., पी.जी. एवं पैरामेडिकल को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलेंगे, साथ ही शोध कार्यों को भी गति मिलेगी। साथ ही, प्रदेश की जनता को उच्च गुणवत्ता की वे जाँच सुविधाएं अब भोपाल में ही मिल सकेंगी। इसके लिए पूर्व में अन्य राज्यों में जाना पड़ता था। मशीनों के संचालन हेतु प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता भी शासन द्वारा सुनिश्चित की गई है। इन मशीनों में हाई-क्वालिटी कार्डियक पैकेजेस शामिल हैं, जिनसे हृदय रोगों की उन्नत और सटीक जाँच संभव है। एम.आर.आई. मशीन में डेडीकेटेड ब्रेस्ट कॉइल्स सहित उच्च गुणवत्ता की सभी आवश्यक कॉइल्स प्रदाय की गई हैं, जिससे स्तन कैंसर की गहन जांच सरलता से की जा सकेगी। सी.टी. स्कैन मशीन वॉल्यूमेट्री, फ्यूजन एवं परफ्यूजन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है, जिससे तीव्र एवं गहन जांच संभव है। ये मशीनें फास्ट स्क्रीनिंग में सक्षम हैं और इन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शोध भी किया जा सकता है।