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हमीदिया अस्पताल, स्कूल और कॉलेज के नाम बदलने का प्रस्ताव नगर निगम परिषद से पारित

भोपाल  राजधानी भोपाल में  नगर निगम परिषद की बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें हमीदिया अस्पताल, कॉलेज और स्कूल के नाम बदलने का प्रस्ताव पास हो गया है। वहीं, ओल्ड अशोका गार्डन का नाम 'राम बाग' करने का प्रस्ताव पारित हो गया है हमीदिया अस्पताल का नाम बदलने का प्रस्ताव पास नगर निगम परिषद की बैठक में हमीदिया अस्पताल, कॉलेज और स्कूल के नाम बदलने के नाम बदलने का प्रस्ताव जैसे ही पास हुआ। उसके बाद सदन में पाकिस्तान मुर्दाबाद और हिंदूस्तान जिंदाबाद के नारे लगने लगे। इसी दौरान कांग्रेसी और भाजपाई आमने-सामने आ गए। राम बाग के नाम से जाना जाएगा ओल्ड अशोका गार्डन नगर निगम की बैठक में ओल्ड अशोका गार्डन का नाम बदलकर राम बाग करने का प्रस्ताव पारित हुआ है। वहीं 80 फीट रोड स्थित विवेकानंद चौराहे का नाम विवेकानंद चौक का प्रस्ताव पारित हुआ है। भोपाल के दूसरे नंबर पर आने स्वच्छता मित्रों को मिलेगा सम्मान महापौर मालती राय ने बताया कि भोपाल देश में दूसरे नंबर पर आया है। नगर निगम के द्वारा 8 हजार स्वच्छता मित्रों को भोज और सम्मान किया जाएगा। 1 हजार कर्मचारियों को परमानेंट किया जाएगा। रक्षाबंधन से पहले वेतन दे दिया जाएगा।

स्थायित्व की ओर कदम, नगर निगम के 1000 संविदा कर्मियों को किया जाएगा नियमित

भोपाल  नगर निगम में कार्यरत 1000 कर्मचारियों(Employees) को नियमित किया जाएगा। निगम परिषद की बैठक में ये निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही राजधानी भोपाल के ओल्ड अशोका गार्डन को रामबाग कहने और हमीदिया कॉलेज और अस्पताल का नाम दिवंगत पूर्व विधायक रमेश शर्मा गुट्टू भैया के नाम पर करने का प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। वेटलैंड साइट संरक्षण प्रोजेक्ट के तहत बड़ा तालाब छोटा तालाब में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाने के साथ ही 25 करोड़ की लागत से छह विसर्जन कुंड बनाने का प्रस्ताव भी पारित हुआ। पार्षदों की नाराजगी दूर करने विकास कार्य के प्रस्ताव पर 30 दिन में टेंडर और 60 दिन में वर्क ऑर्डर जारी करने का प्रस्ताव पारित हुआ। इन मुद्दों पर हंगामा बैठक में नगर निगम आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने को लेकर भाजपा पार्षद पप्पू विलास राव धरने पर बैठ गए। नाम परिवर्तन प्रस्ताव पर चर्चा पर भाजपा पार्षद ने नवाब हमीदुल्लाह को गद्दार कहा। इस पर हंगामा हुआ। पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगे। हंगामे पर अध्यक्ष ने कहा कि सत्य को स्वीकारना ही होगा। नाराज कांग्रेस पार्षद इस मुद्दे पर आसंदी का घेराव करने पहुंच गए। बाद में सदन को स्थगित कर दिया गया। ये प्रस्ताव बहुमत से पारित ● महाशिवरात्रि के दिन मांस दुकानें बंद रहेंगी ● ८० फीट रोड चौराहे का नाम विवेकानंद चौक ● हमीदिया अस्पताल-कॉलेज-स्कूल का नाम पूर्व विधायक रमेश शर्मा गुट्टू भैया के नाम पर ● बीयू, नीलबड़, संजीव नगर, मालीखेड़ी, प्रेमपुरा में 25 करोड़ से विसर्जन कुंड ● वार्ड विकास कार्य की फाइल पर दो माह के अंदर टेंडर और वर्कऑर्डर जारी होगा ● शालीमार, मेरीगोल्ड मैरिज गार्डन और 24 दुकानों के निर्माण की जांच होगी ● अवैध पार्किंग स्थलों को दोबारा सर्वे कर चिन्हिंत किया जाएगा ● 8 हजार सफाई कर्मियों को यूनिफार्म, रेनकोट, हेल्थ चेकअप होगा जनता के मुद्दे एजेंडे से गायब शबिस्ता जकी ने कहा कि हमने एजेंडा आने से पहले शहर की सडक़, सीवेज, जल भराव, खराब सड़क जैसी जनता की समस्याओं पर चर्चा का प्रस्ताव दिया था। ये मुद्दे एजेंडे से नदारद हैं। वीआईपी रोड किनारे चौपाटी बनाने का मुद्दा कांग्रेस के पार्षद अजीज उद्दीन ने उठाया। पार्षद अजीजउद्दीन ने अफसरों द्वारा फोन नहीं उठाने पर भी आपत्ति ली। कांग्रेस पार्षद शिरीन ने कहा जन्म-मृत्यु अधिकारी सत्यप्रकाश बड़वैया प्रभारी अधिकारी हैं। उन पर गोविंदपुरा थाने में प्रकरण दर्ज है। योगेंद्र ने पूछा कि क्या एनजीटी की गाइडलाइन के हिसाब से ही कुंड बनाए जा रहे हैं। यति ने कहा सभी अनुमतियां हैं।

मुंबई जाने वाला विमान बीच रास्ते में बिगड़ा, जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग

जयपुर जयपुर से मुंबई जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI 612 को उड़ान भरने के महज 18 मिनट बाद वापस जयपुर एयरपोर्ट पर आपात रूप से लैंड करना पड़ा. यह घटना शुक्रवार को हुई जब फ्लाइट ने दोपहर 1.35 बजे टेकऑफ किया था. फ्लाइटरडार ट्रैकिंग वेबसाइट के अनुसार फ्लाइट को डाइवर्टेड दिखाया गया. फ्लाइट के उड़ान भरने के कुछ मिनटों बाद ही उसमें तकनीकी खराबी का पता चला, जिसके बाद पायलटों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वापसी का फैसला लिया. एअर इंडिया की यह फ्लाइट तकरीबन 18 मिनट हवा में रही और फिर सुरक्षित लैंड कर गई. तकनीकी खराबी के चलते फ्लाइट को उतारा गया हाल के हफ्तों में एअर इंडिया और उसकी सहयोगी एअर इंडिया एक्सप्रेस की कई उड़ानों में तकनीकी गड़बड़ियां सामने आई हैं. इसी बुधवार को दिल्ली एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली मुंबई की एक फ्लाइट ने टेकऑफ से पहले तकनीकी खराबी के चलते उड़ान रद्द कर दी थी. उस फ्लाइट में 160 यात्री सवार थे. इसी दिन एक और फ्लाइट IX 375 जो कि कोझिकोड से दोहा जा रही थी, वह भी तकनीकी खराबी के कारण टेकऑफ के करीब दो घंटे बाद लौट आई. फ्लाइट में 188 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे. 183 फ्लाइटों में तकनीकी गड़बड़ियां दर्ज की गई नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार 21 जुलाई तक देश की 5 प्रमुख एयरलाइंस की 183 फ्लाइटों में तकनीकी गड़बड़ियां दर्ज की गई हैं. इनमें से 85 मामले अकेले एअर इंडिया ग्रुप के हैं. बीते 5 सालों में एअर इंडिया और उसकी सहयोगी ने कुल 541 तकनीकी गड़बड़ियों की जानकारी दी है. 

फराह के कुक का ‘कहो ना प्यार है’ डांस वायरल, अमीषा संग ठुमकों पर फिदा हुए लोग

मुंबई   फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान और उनके कुक दिलीप को कौन नहीं जानता! दोनों ने अपने चैनल पर धमाल मचा रखा है। दोनों को हाल ही में किसी सेलिब्रिटी के घर उनके यूट्यूब कुकिंग चैनल के लिए जाते हुए देखा गया। शुरुआत में उस सेलिब्रिटी की पहचान गुप्त रखी गई थी, लेकिन अब पता चला है कि वह अमीषा पटेल हैं। उनके घर के बाहर, पपाराजी ने दिलीप और अमीषा को साथ मिलकर 'कहो ना… प्यार है' का मशहूर हुक स्टेप करते हुए देखा। फराह खान की मौजूदगी में, दिलीप ने अमीषा पटेल के साथ 'कहो ना… प्यार है' का हुक स्टेप बखूबी किया। दोनों को एक साथ डांस करते देख फराह खान और पपाराजी भी हंसने लगे, खासकर दिलीप को। लोकिन उनकी मासूमियत ने सबका दिल जीत लिया। इंटरनेट पर लोग ये वीडियो देखर खूब मजे ले रहे हैं और दिलीप की किस्मत के बारे में भी बात कर रहे हैं। यहां देखें वीडियो: फराह खान के कुक की चमकी किस्मत फराह खान का अपने कुक दिलीप के साथ रिश्ता रसोई से कहीं आगे तक है। हाल ही में फराह ने खुलासा किया कि वह दिलीप के बच्चों की पढ़ाई करवा रही हैं। उनमें से एक ने अब एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में दाखिला लिया है, जबकि दूसरा बेहतर भविष्य के लिए कुकिंग में डिप्लोमा कर रहा है। शालीन भनोट से मिलने के दौरान बात करते हुए फराह ने कहा, 'क्योंकि अभी हमारा शो चल रहा है, इसके बच्चों को इंग्लिश मीडियम में डाल दिया है। और एक बच्चे को कुकिंग स्कूल से डिप्लोमा कराया है…ताकि घर में ना काम करें, किसी अच्छे रेस्टोरेंट, या बड़े होटल में काम करें।' सोशल मीडिया पर फराह की धूम कोरियोग्राफर गीता कपूर, जो अक्सर अपने करियर में फराह की अहम भूमिका को मानती हैं, उन्होंने बताया कि कैसे फराह ने उनके कुक दिलीप को स्टार बना दिया और वह उनकी बढ़ती प्रसिद्धि से खुश हैं। गीता ने फराह की तारीफ करते हुए उन्हें एक ट्रेंडसेटर बताया, जिन्होंने सोशल मीडिया पर इन दिनों धूम मचा रखी है। गीता कपूर ने भी की तारीफ हिंदी रश को दिए एक इंटरव्यू में, गीता कपूर ने कहा, 'फराह अब सोशल मीडिया के बाजार पर कब्जा करना भी सीख गई हैं। उन्होंने कुकिंग पर एक शो बनाया, दिलीप की लाइफ बन गई है और इन दिनों वह कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। वह कमाल की हैं। उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं है कि दिलीप उनके व्लॉग के जरिए फराह से ज्यादा फेमस हों। उनको लगता है जो आपकी किस्मत का है, वो कोई नहीं छीन सकता। आपको आपका हक जरूर मिलेगा।' चैनल पर क्या करते हैं फराह खान और दिलीप! वीडियो ब्लॉग में फराह खान और दिलीप बॉलीवुड और टेलीविजन हस्तियों के घर खाना बनाने और बातचीत करने जाते हैं और दर्शक उनकी मजेदार बातचीत देखना पसंद करते हैं।

शिक्षक नहीं तो पढ़ाई नहीं: बच्चों ने स्कूल में लगाया ताला, पालकों का साथ

बालोद जिले के कुसुमटोला माध्यमिक स्कूल में शिक्षक की कमी को लेकर बच्चों और पालकों ने मिलकर स्कूल में ताला जड़ दिया। बारिश के बीच बच्चों ने स्कूल के गेट के सामने बैठकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द शिक्षक की नियुक्ति की मांग की। जानकारी के अनुसार, स्कूल में कुल 51 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। पहले यहां तीन शिक्षक पदस्थ थे, लेकिन तीन शिक्षकों में से एक प्रधानपाठक की पदोन्नति हो जाने के बाद अब सिर्फ दो शिक्षक ही कार्यरत हैं। इसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, जिससे नाराज होकर बच्चों और पालकों ने स्कूल का गेट बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के आने का इंतजार करते रहे। प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर पुलिस बल भी मौजूद रहा। वहीं तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे बच्चों और पालकों को समझाने की कोशिश की। हालांकि, बच्चों और पालकों ने स्कूल का गेट तो खोल दिया, लेकिन बच्चे स्कूल के भीतर नहीं गए। स्कूल के अंदर तहसीलदार और शिक्षक मौजूद थे। वहीं बच्चे और उनके अभिभावक बाहर बैठकर लगातार नारेबाजी करते रहे।

बीजेपी कार्यकर्ता की निर्मम हत्या: हमलावरों ने मारीं 8 गोलियां, चेहरा छलनी

अलीगढ़ तालानगरी क्षेत्र के गांव कोंडरा निवासी पेशे से प्रॉपर्टी डीलर तथा भाजपा कार्यकर्ता की गांव 200 मीटर आगे निकलते ही ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। हत्यारे मृतक के खास परिचित थे जिन्होंने हत्या से पूर्व कई मिनट तक बातचीत की थी। परिजन शव को लेकर अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एसएसपी ने घटना स्थल का निरीक्षण कर थाना पुलिस समेत एसओजी की आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं। कोंडरा गांव निवासी 45 वर्षीय सोनू चौधरी पुत्र सरदार सिंह प्रॉपर्टी डीलर का काम करते थे साथ ही भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे। इनके बड़े भाई देवेंद्र चौधरी ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे वह अपनी क्रेटा कार लेकर घर से अकेले निकले थे, गांव से करीब 200 मीटर आगे निकलते ही बाइक सवार दो लोगों ने मृतक सोनू को रोक लिया, एक अंदर जाकर सोनू की बगल वाली सीट पर बैठ गया जबकि दूसरा ड्राइवर साइड में खड़ा रहा। इस दौरान मृतक का पारिवारिक भतीजा सुमित वहां से गुजरा जिसने दोनों को देखा और सामान्य बातचीत समझकर गांव की ओर बढ़ गया। वहीं, कुछ देर बाद ही मौका देखकर बाहर खड़े व्यक्ति ने सोनू को निशाना बनाकर चार गोलियां दाग दी, साथ ही अंदर बैठे हमलावर ने भी करीब 7-9 गोलियां दागी और बाहर निकलकर बाइक लेकर फरार हो गए। इधर, गोलियों की तड़तड़ाहट सुनकर निकटवर्ती लोग घटना स्थल की ओर दौड़े, पहचानकर सोनू के घर सूचना दी। आनन-फानन में परिजन निजी वाहन से मृतक सोनू को लेकर क्वार्सी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने सोनू को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने फील्ड यूनिट की टीम को मौके पर बुला लिया तथा साक्ष्य संकलित कराए। एसएसपी संजीव सुमन भी मौके पर पहुंचे तथा लगभग आधा घंटे तक जानकारी लेने व कार का परीक्षण करने के बाद थाना पुलिस समेत एसओजी की टीम को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।  घटना स्थल पर पुलिस कारवाई के दौरान मृतक के सबसे बड़े भाई देवेंद्र चौधरी मौजूद रहे लेकिन हत्याकांड की वजह को लेकर वह कुछ बता नहीं सके। गांव के सीसीटीवी कैमरे खंगालने में जुटी पुलिस… घटना के बाद मौके पर पहुंचे एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि घटना के बाद गोलियों की आवाज सुनकर जब वह कार की ओर गया तो देखा दो लोग बाइक लेकर गांव की ओर भाग रहे थे। इस जानकारी के आधार पर पुलिस की एक टीम गांव में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगालकर घटना की जांच पड़ताल में जुट गई है। हत्याकांड में किसी खास परिचित का हाथ मान रहा परिवार… जिस तरह से सोनू की हत्या की गई उस परिस्थिति को देखकर परिवारीजन हत्याकांड में किसी खास परिचित की भूमिका मान रहे हैं। गांव से कुछ दूरी पर ही बाइक सवार युवक को मृतक सोनू ने कार में बैठाया, कार को न्यूटल (बिना गियर के) में खड़ा करके गाड़ी और एसी भी चालू रखा, जबकि सोनू काफी तेज तर्रार था। यदि कोई अपरिचित हत्यारा होता तो शायद वह उसे कार में नहीं बैठाता। हालांकि, घटना के पीछे किसी से पुरानी रंजिश को परिवार फिलहाल नहीं मान रहा है। बाकी पुलिस को भी तहरीर का इंतजार है।

PHE भर्ती विवाद: डिप्लोमा बनाम डिग्री की लड़ाई में अब सुप्रीम कोर्ट की एंट्री

रायपुर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में उप अभियंता सिविल, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल के 118 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया “B.Ed बनाम D.Ed” की तरह “डिप्लोमा बनाम डिग्री” विवादों से घिर गई है. लाखों डिप्लोमा धारक युवा अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो न केवल इस भर्ती प्रक्रिया बल्कि भविष्य की सभी तकनीकी भर्तियों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत भी तय करेगा. दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में उप अभियंता सिविल, मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल के 118 पदों हेतु भर्ती प्रक्रिया आरंभ की गई थी. भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से विभागीय आवश्यकता के अनुसार न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता त्रि-वर्षीय डिप्लोमा निर्धारित की गई थी. इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए डिग्री धारकों ने उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका दाखिल की, जिसमें उनके पक्ष में निर्णय आया. इसके पश्चात भर्ती प्रक्रिया पर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है. वहीं दूसरी ओर, डिप्लोमा धारकों का कहना है कि इसरो, डीआरडीओ, व सार्वजनिक उपक्रमों सहित देश की तमाम अग्रणी तकनीकी संस्थाओं में शैक्षणिक अर्हता पद के अनुसार तय की जाती है. अतः पद यदि उप अभियंता (Junior Engineer) है, तो डिप्लोमा ही उपयुक्त योग्यता है. डिप्लोमा अभ्यर्थियों ने इस निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. उनका तर्क है कि 7 नवम्बर 2024 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता”.

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: माता-पिता की देखभाल के लिए मिलेगा एक महीने का अवकाश

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय कर्मी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल सहित किसी भी व्यक्तिगत कारण का हवाला देकर हर साल अन्य पात्र अवकाशों के अलावा 30 दिन की अतिरिक्त छुट्टी ले सकते हैं। ये पात्र अवकाशों के अलावा प्रति वर्ष 30 दिन के अर्जित अवकाश के रूप में होगी। इसके अलावे कर्मचारी 20 दिन का अवकाश आधे वेतन के साथ ले सकते हैं। केंद्रीय कर्मियों को 8 दिन का आकस्मिक अवकाश और 2 दिन का प्रतिबंधित अवकाश लेने की भी छूट है। केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 1972 में अन्य पात्र छुट्टियों के अलावा, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को प्रति वर्ष 30 दिन की अर्जित छुट्टी, 20 दिन की आधे वेतन की छुट्टी, 8 दिन की आकस्मिक छुट्टी और 2 दिन की प्रतिबंधित छुट्टी का प्रावधान है। इसका लाभ वे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल सहित किसी भी व्यक्तिगत कारणों से उठा सकते हैं।

न्यायिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘द्वितीय श्रेणी का व्यवहार न करें जिला जजों से’

जबलपुर  जबलपुर हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश अतुल श्रीधरन व न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल की युगल पीठ ने अपने एक आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हाई कोर्ट और जिला कोर्ट के बीच सामंत और गुलाम जैसे रिश्ते हैं। जिला कोर्ट के जज हाई कोर्ट जजों से मिलते हैं तो उनकी बॉडी लैंग्वेज बिना रीढ़ की हड्डी वाले स्तनधारी के गिड़गिड़ाने जैसी होती है। हाई कोर्ट के जज खुद को सवर्ण और जिला कोर्ट के जजों को शूद्र समझते हैं। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एक फैसले में उच्च न्यायालय और जिला न्यायपालिका के रिश्तों को लेकर तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच का रिश्ता सामंती व्यवस्था जैसा है, जहां उच्च न्यायालय खुद को सवर्ण और जिला न्यायपालिका को शूद्र समझता है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में व्यापमं मामले में आरोपी को जमानत देने के कारण हाई कोर्ट ने संबंधित जज को बर्खास्त कर दिया। हाई कोर्ट के ऐसे कृत्य से जिला न्यायपालिका में संदेश जाता है कि बड़े मामलों में निर्दोष साबित करने, जमानत देने से संबंधित जज के खिलाफ के विपरीत कारवाई हो सकती है। कोर्ट ने गलत तरीके से बर्खास्त किए गए न्यायाधीश को बैकवेजेस के साथ पेंशन का भुगतान करने को कहा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता जज को पांच लाख का मुआवजा प्रदान करने की निर्देश भी दिए। 2016 का है मामला, भोपाल जिला अदालत में पदस्थ थे जगत मोहन चतुर्वेदी 2016 में एससी एसटी एक्ट की विशेष न्यायाधीश के रूप में भोपाल जिला अदालत में पदस्थ रहे जगत मोहन चतुर्वेदी की ओर से यह याचिका दायर की गई थी। उन पर आरोप लगा था कि 2015 में व्यापमं मामले के आरोपी कुछ छात्रों को उन्होंने अग्रिम जमानत दी। जबकि इसी मामले में अन्य आरोपियों की जमानत अर्जी निरस्त कर दी। अलग-अलग तथ्यों के चलते विभिन्न आदेश दिए। इस पर हाई कोर्ट प्रशासन ने उनके विरुद्ध कदाचरण की कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया। हाई कोर्ट की फुल कोर्ट मीटिंग में अनुमोदन किया गया। याचिकाकर्ता की अपील भी निरस्त कर दी गई। यह टिप्पणी जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की बेंच ने दी। बेंच व्यापमं केस से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका भोपाल के पूर्व एससी-एसटी कोर्ट जज जगत मोहन चतुर्वेदी ने लगाई थी। उन्हें एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने के बाद बर्खास्त किया गया था। जिला जज ऐसे मिलते हैं जैसे रीढ़ हीन स्तनधारी कोर्ट ने डबल बेंच ने कहा कि जब जिला कोर्ट के जज हाई कोर्ट के जजों से मिलते हैं तो उनकी शारीरिक भाषा ऐसी होती है जैसे कोई रीढ़विहीन स्तनधारी गिड़गिड़ा रहा हो। रेलवे स्टेशन पर स्वागत करना, जलपान कराना आम बात हो गई है। हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में प्रतिनियुक्त जजों को शायद ही कभी बैठने को कहा जाता है। इस मानसिकता का फैसलों पर भी असर यह रिश्ता सम्मान का नहीं, बल्कि डर और हीनता पर आधारित है। यह मानसिकता इतनी गहरी है कि असर न्यायिक फैसलों में भी दिखता है। कई बार योग्य मामलों में जमानत नहीं दी जाती या सबूतों के अभाव में दोषसिद्धि हो जाती है। सिर्फ इसलिए कि आदेश ‘गलत’ न मान लिया जाए। "डर के साए में न्याय नहीं, सिर्फ दिखावा" राज्य की न्याय प्रणाली की असली तस्वीर जिला कोर्ट की स्वतंत्रता से दिखती है, न कि केवल हाई कोर्ट से। लेकिन जब हाई कोर्ट बार-बार छोटी-छोटी बातों पर सख्त रवैया अपनाता है, तो जिला जज डर जाते हैं। परिवार, नौकरी और प्रतिष्ठा के डर से वे न्याय नहीं कर पाते, बस दिखावा करते हैं। कोर्ट का आदेश- सेवा लाभ बहाल हो.. कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता जज को सिर्फ अलग सोचने और काम करने के कारण दंडित किया गया। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें सेवा समाप्ति की तारीख से सेवानिवृत्ति तक का बकाया वेतन 7% ब्याज सहित दिया जाए। पेंशन और अन्य सेवा लाभ बहाल हों। मानसिक क्षति और सामाजिक अपमान के लिए 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। तर्क दिया गया कि अलग-अलग मामलों के तथ्यों के आधार पर उन्होंने जज की हैसियत से अलग-अलग आदेश दिए थे। …अब यह कहा कोर्ट ने सुनवाई के बाद कोर्ट ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों के बीच निराशाजनक संबंध की आलोचना की। इसे एक सामंत और दास के बीच का रिश्ता बताया। कोर्ट ने कहा कि एक अहंकारी उच्च न्यायालय छोटी-छोटी गलतियों के लिए जिला न्यायपालिका को फटकार लगाने की कोशिश करता है, जिससे जिला न्यायपालिका को दंड के भय में रखा जाता है। पीठ ने कहा कि इससे न्याय व्यवस्था प्रभावित होती है। हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश जब उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का अभिवादन करते हैं, तो उनकी शारीरिक भाषा, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सामने गिड़गिड़ाने जैसी होती है। जिससे जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश अकशेरुकी यानि बिना रीढ़ के स्तनधारियों की प्रजाति बन जाते हैं। जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों द्वारा रेलवे प्लेटफार्म पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनके लिए जलपान की सेवा करने के उदाहरण आम हैं। उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में प्रतिनियुक्ति पर आए जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कभी भी बैठने की पेशकश नहीं करते हैं। जब कभी उन्हें ऐसा मौका मिलता भी है, तो वे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सामने बैठने में हिचकिचाते हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि जाति व्यवस्था की छाया राज्य के न्यायिक ढांचे में स्पष्ट दिखाई देती है, जहां उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सवर्ण हैं और जिला न्यायपालिका के जज शूद्र व दयनीय हैं। इससे जिला न्यायपालिका मानसिक रूप से कमजोर हो जाती है, जो अंतत: उनके न्यायिक कार्यों में परिलक्षित होती है। जहां सबसे योग्य मामलों में भी जमानत नहीं दी जाती, अभियोजन पक्ष को संदेह का लाभ देकर सबूतों के अभाव में दोषसिद्धि दर्ज की जाती है और आरोप ऐसे लगाए जाते हैं, मानो दोषमुक्त करने का अधिकार ही न हो। यह सब उनकी नौकरी बचाने के नाम पर होता है, जिसका खामियाजा इस मामले में याचिकाकर्ता को अलग तरह से सोचने और काम करने के कारण भुगतना पड़ा। हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो चुका है। उसके साथ हुए … Read more

ऊर्जा विभाग की कार्यशैली पर मंथन, सीएम योगी करेंगे बिजली कटौती की समीक्षा

लखनऊ राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग की बैठक बुलाई है। वह अपने आवास पर दोपहर 3:30 बजे ऊर्जा विभाग की समीक्षा करेंगे। बैठक में विभाग के सभी बड़े अधिकारी बुलाए गए हैं। सीएम को बिजली कटौती की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसको लेकर वह समीक्षा करेंगे। बताते चलें कि एक दिन पहले ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का एक वीडियो सामने आया था, इसमें वह बिजली विभाग के अफसरों से नाराज दिख रहे हैं। दरअसल, प्रदेश में बिजली कटौती की समस्या कम होते नहीं दिख रही है।