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उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गांव पहुँचकर प्रदान किया प्रमाण पत्र

रायपुर : ग्राम जिंदा को मिला छत्तीसगढ़ का पहला टीबी मुक्त गांव होने का गौरव ग्राम जिंदा को मिला छत्तीसगढ़ का पहला टीबी मुक्त गांव बना जिंदा, स्वास्थ्य मिशन में बड़ी उपलब्धि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गांव पहुँचकर प्रदान किया प्रमाण पत्र रायपुर टीबी मुक्त भारत अभियान को सशक्त आधार देते हुए कबीरधाम जिले ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिले की ग्राम पंचायत जिंदा को प्रदेश का पहला टीबी मुक्त ग्राम घोषित किया गया है। इस उपलब्धि को मान्यता प्रदान करते हुए आज प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ग्राम जिंदा पहुँचकर ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर आयोजित गरिमामयी कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए टीबी मुक्त भारत अभियान को छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में गंभीरता से लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि टीबी जिसे पहले एक गंभीर बीमारी माना जाता था, अब आधुनिक चिकित्सा, टीकों, दवाइयों और जनसहभागिता के चलते नियंत्रण और समाप्ति की दिशा में है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य अभियान की सफलता केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं होती, बल्कि उसमें समाज की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कबीरधाम जिले में 84 ग्राम पंचायतों का टीबी मुक्त घोषित होना इसी सामाजिक सहभागिता और प्रशासनिक सक्रियता का प्रमाण है। जायसवाल ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की भूमिका की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी सतत निगरानी, सजगता और नेतृत्व में जिले को यह उपलब्धि प्राप्त हुई है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्राम जिंदा को इस उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह गांव प्रदेश के लिए एक प्रेरणा बन गया है। उन्होंने कहा कि ग्राम जिंदा की सक्रियता, सजगता और सामूहिक प्रयासों के चलते यह संभव हो सका है। उन्होंने जानकारी दी कि कबीरधाम जिले की कुल 84 ग्राम पंचायतें अब तक टीबी मुक्त हो चुकी हैं, जो कि प्रदेश ही नहीं, देश के लिए भी अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़, विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में नए हितग्रहियों को आयुष्मान कार्ड प्रदान किया गया। कार्यक्रम में सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, कलेक्टर गोपाल वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सीईओ अजय त्रिपाठी, सहित कई जनप्रतिनिधिगण और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि जिले में निक्षय मित्र योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, जिसमें जनभागीदारी को केंद्र में रखते हुए टीबी मरीजों को नियमित दवा और पोषण सहायता उपलब्ध कराई गई। इसी मॉडल को आधार बनाकर टीबी की रोकथाम और मरीजों के जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित किया गया।

पीजी छात्रा केस में झटका: डॉ. आशीष सिन्हा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने FIR को माना उचित

बिलासपुर मेडिकल की छात्रा को शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करने के आरोपी डॉक्टर आशीष सिन्हा को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. हाइकोर्ट ने आदेश में कहा कि आरोपी ऐसे अपराधों से संबंधित हैं, जो गंभीर और संवेदनशील हैं, जिनमें कार्यस्थल पर एक महिला की गरिमा और शारीरिक अखंडता शामिल है. एफआईआर किसी भी तरह से प्रेरित या विलंबित नहीं लगती है. मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा की एकलपीठ में हुई. जिसमें याचिकाकर्ता डॉक्टर आशीष सिन्हा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी. आरोपी डॉक्टर ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर में लगे आरोप को खारिज करते हुए सरकारी कर्मचारी होने और गिरफ्तार किए जाने पर करियर बर्बाद होने की दुहाई दी थी. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने मामले में दोनों पक्षों को गंभीरता से सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया. आरोपी डॉक्टर के अधिवक्ता ने दलील दी कि जब विशाखा समिति की रिपोर्ट निदेशक, चिकित्सा शिक्षा को भेजी गई और आवेदक के खिलाफ कुछ भी नहीं पाया गया, तो शिकायतकर्ता ने आवेदक को किसी भी तरह से फंसाने के लिए एफआईआर दर्ज कराई. आवेदक की अनधिकृत अनुपस्थिति के कारण उनके प्रति रंजिश भी थी, इसलिए उनका वजीफा रोक दिया गया था. वह एक सरकारी कर्मचारी हैं, और यदि उन्हें गिरफ्तार किया जाता है तो उनका करियर बर्बाद हो जाएगा, उन्हें अग्रिम जमानत दी जा सकती है. दूसरी ओर सरकारी वकील अमित वर्मा ने आवेदक के वकील द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्क का विरोध करते हुए कहा कि चूँकि शिकायतकर्ता, जो एक महिला डॉक्टर और पीजी छात्रा भी है, के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न से संबंधित है और प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि आवेदक ने ऊपर बताए गए अपराध किए हैं, आवेदक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और मामला जाँच के अधीन है, इसलिए आवेदक अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है. आपत्तिकर्ता/शिकायतकर्ता की ओर से उपस्थित वकील मधुनिशा सिंह ने अग्रिम जमानत आवेदन का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि शिकायतकर्ता एक होनहार छात्रा है, और रूस के एक मेडिकल कॉलेज से मेडिसिन की डिग्री में स्वर्ण पदक विजेता छात्रा है. आवेदक ने शुरू से ही शिकायतकर्ता पर बुरी नजर रखी और गंदी और घटिया टिप्पणियाँ कीं. उसे परीक्षा में फेल करने और उसका करियर बर्बाद करने की धमकी दी गई. शिकायतकर्ता ने अपने ही विभाग के अधिकारियों के समक्ष शिकायत करने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उसे मजबूरन एफआईआर दर्ज करानी पड़ी. विशाखा समिति ने भी पाया है कि आवेदक अपने ऊपर लगे आरोपों में दोषी है. इससे पहले सिकल सेल संस्थान, छत्तीसगढ़ के अधिकारियों और महिला कर्मचारियों ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ महिलाओं को परेशान करने, गाली देने और अभद्र व्यवहार करने की शिकायत दर्ज कराई थी. इसके अलावा वित्तीय अनियमितताएं करने का भी आरोप है. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुना और केस डायरी का अवलोकन किया और आदेश में कहा आवेदक के विरुद्ध लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं. केस डायरी के साथ संलग्न दस्तावेजों से पता चलता है कि शिकायतकर्ता द्वारा आवेदक के विरुद्ध कई शिकायतें की गई थीं, और विभाग की विशाखा समिति ने भी एक जाँच की है. रिपोर्ट में यद्यपि इस आशय का कोई प्रत्यक्ष निष्कर्ष नहीं है कि आवेदक अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों का दोषी है, तथापि, व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट से ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदक ने शिकायतकर्ता पर टिप्पणी करने का प्रयास किया है, जो एक चिकित्सक जैसे महान पेशे के लिए, और वह भी विभागाध्यक्ष होने के नाते, अनुचित था. कोर्ट ने आदेश में कहा कि आवेदक द्वारा गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या निष्पक्ष जाँच में बाधा डालने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. प्राथमिकी किसी भी तरह से प्रेरित नहीं लगती है, और उसमें घटनाओं का वर्णन प्रथम दृष्टया मामला दर्शाता है. आदेश में जाँच के प्रारंभिक चरण में है, और इस स्तर पर केस डायरी में उपलब्ध सामग्री के आधार पर अग्रिम जमानत खारिज की जाती है.

सीएम डॉ. यादव ने कहा – कारगिल विजय दिवस हर भारतीय के लिए गर्व का पर्व

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कारगिल विजय दिवस की बधाई देते हुए कहा है कि भारतीय सैनिकों ने पराक्रम की पराकाष्ठा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पाकिस्तान को पराजित किया था। साठ दिन तक चलने वाले युद्ध की छवियां आज भी देशवासियों के मन मस्तिष्क पर बनी हुई है। भारतीय सैनिकों ने दुर्गम पहाड़ी परिस्थितियों में एक-एक चोटी को फतह कर अपने शौर्य का परचम फहराया, देश को गौरवान्वित किया और हमारा मनोबल बढ़ाया। हमें विश्वास है कि भारतीय सेना सभी चुनौतियों का सामना करने मैं सदैव समर्थ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शौर्य और बलिदान की अमर गाथा, कारगिल विजय दिवस हम सभी के लिए गौरव का उत्सव है। मां भारती के वीर सपूतों ने सर्वस्व न्यौछावर कर कारगिल में शत्रु का संहार कर विजय प्राप्त की। यह अवसर राष्ट्र के प्रति समर्पण के प्रण का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया के माध्यम से जारी अपने संदेश में, प्रदेशवासियों से मां भारती की सेवा में सर्वस्व समर्पित करने का संकल्प लेने का आहवान किया है।  

पूर्व सीएम के बेटे से मिलकर बोले पायलट- चाहे कुछ भी हो, कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी

रायपुर कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट आज छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं. राजधानी पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के साथ सेंट्रल जेल में बंद पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात की. मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि चैतन्य ने मजबूती से लड़ाई लड़ने की बात कही है. इसके साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कंद्रीय जांच एजेंसियों का उपयोग विपक्ष को दबाने के लिए कर रही है. लेकिन वे भाजपा चाहे जो कर लें, हमारा कांग्रेस परिवार एक कदम पीछे नहीं हटेगा. बता दें, छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा की गिरफ्तारी के बाद ईडी ने 18 जुलाई को पूर्व सीएम भूपेश बघेल के घर पर छापेमार कार्रवाई करते हुए शराब घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में उनके बेटे चैतन्य को भी गिरफ्तार किया है. ईडी की इस कार्रवाई के बाद से छत्तीसगढ़ में राजनीति गरमाई हुई है. सचिन पायलट ने कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों को दबाने का प्रायस कर रही है. भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विरोधी दलों के लिए कर रही है. 10 साल में किसी भाजपा नेता के विरुद्ध कोई जांच सेंट्रल एजेंसी ने नहीं की है. विधायक पुरंदर मिश्रा के बयान का पलटवार विधायक पुरंदर मिश्रा के बयान पर भी उन्होंने पलटवार किया है. रायपुर विधायक मिश्रा ने कहा था कि सचिन पायलट को परिवार की चिंता है, कांग्रेस की नहीं. इसपर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता के लिए खड़ी है, परिवार के एक-एक सदस्य के लिए कांग्रेस पार्टी लड़ाई लड़ेगी. जो भी कर ले, लेकिन हम और हमारी पार्टी एक कदम भी पीछे नहीं हटेगी. इस दौरान उन्होंने जेल में बंद पूर्व मंत्री कवासी लखमा के स्वास्थ खराब होने की भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा का स्वास्थ्य खराब है. अधिकारियों से कहा है कि उनका ध्यान रखें. कवासी लखमा के हौसले बुलंद है. विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश वहीं केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर सचिन पायलट ने कहा कि एजेंसियां कांग्रेस के नेताओं को संदेश दे रही हैं कि आप आवाज बुलंद करेंगे तो आपका भी यही हाल होगा. केंद्र और प्रदेश की एजेंसियों का उपयोग विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए किया जा रहा है. छवि धूमिल करने ये कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में ये साबित हो चुका है कि मुद्दों से भटकाने के लिए विपक्ष के नेताओं को टारगेट कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी कोशिश कर रही है कि कोई उनके खिलाफ आवाज न उठाए. उन्हें दबाने के लिए ये सब किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता के लिए खड़ी है. परिवार के एक-एक सदस्य के लिए कांग्रेस पार्टी लड़ाई लड़ेगी. छत्तीसगढ़ से उपराष्ट्रपति बनाने PCC चीफ की PM को चिट्ठी वहीं दीपक बैज की ओर से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ भाजपा के नेताओं में से किसी एक को उप राष्ट्रपति बनाने के सुझाव और क्या कांग्रेस दीपक बैज के सुझाव के साथ है के सवाल पर सचिन पायलट गोलमोल जवाब देते नजर आए. पायलट ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष को जो कहना था वो कह चुके हैं, मुझे इसपर कुछ नहीं कहना है. उन्होंने क्लिरिफिकेशन दिया कि किस सोच के साथ उन्होंने कहा अपनी चिट्ठी के बारे में उनके वीडियो में देख लीजिए. कांग्रेस की बैठक में नेताप्रतिपक्ष महंत नहीं रहे मौजूद सेंट्रल जेल के बाद सचिन पायलट राजीव भवन पहुंचे. वहां उन्होंने पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर कई विषयों पर चर्चा की. इस दौरान सह- प्रभारी विजय जांगिड, जरीता लैतफलांग, ताम्रध्वज साहू, शिव डहरिया मौजूद रहे. हालांकि इस मुलाकात और चर्चा में नेताप्रतिपक्ष चरण दास महंत मौजूद नहीं रहे. पीसीसी चीफ बैज की अनुपस्थिती बनी चर्चा का विषय छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी के इस दौरे में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी. बीते कुछ दिनों से बैज बस्तर दौरे पर है. जानकारी के मुताबिक पायलट के दौरे की सूचना बैज को काफ़ी देर से मिली जिसके चलते वो नहीं पहुंच सके.

सैनिक अब जानेंगे इस्लाम और अरबी, इजरायल का नया कदम चर्चा में

तेल अवीव इजरायल डिफेंस फोर्स (IMF) ने खुफिया विभाग के सैनिकों और अधिकारियों के लिए अरबी भाषा व इस्लामी स्टडी की ट्रेनिंग जरूरी कर दी है। रिपोर्ट में बताया गया कि 7 अक्टूबर, 2023 को हुई खुफिया विफलता को देखते हुए यह फैसला लिया गया। माना जा रहा है कि इस पहल से खुफिया अफसरों की जांच का दायरा और बढ़ेगा। अगले साल के अंत तक AMAN (इजरायल के सैन्य खुफिया निदेशालय का हिब्रू में नाम) के सभी कर्मियों से इस्लामी अध्ययन कराया जाएगा। साथ ही, 50 प्रतिशत कर्मियों को अरबी भाषा सिखाई जाएगी। यह आदेश अमन के प्रमुख मेजर जनरल श्लोमी बाइंडर ने जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आईडीएफ के इस कार्यक्रम में हूती और इराकी बोलियों पर भी ध्यान दिया जाएगा। खुफिया कर्मियों को फिलहाल हूती में बातों को समझने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट में बताया गया कि यमन और अन्य अरब क्षेत्रों के ज्यादातर लोगों को कात (हल्का नशीला पौधा) चबाने की आदत है। इससे साफ बोलने में दिक्कत आने लगती है। सीनियर अधिकारी ने आर्मी रेडियो को बताया, 'अब तक हम संस्कृति, भाषा और इस्लाम के क्षेत्रों में सक्षम नहीं रहे हैं। हमें इनमें सुधार करने की जरूरत है। हम अपने खुफिया अधिकारियों और सैनिकों को अरब गांवों में पले-बढ़े बच्चों जैसा तो नहीं बना सकते, लेकिन भाषा और सांस्कृतिक अध्ययन से उनकी समझ को बढ़ाया जा सकता है।' स्कूल में अरबी को बढ़ावा आर्मी रेडियो के सैन्य संवाददाता डोरोन कादोश ने बताया कि अरबी और इस्लामी शिक्षा के लिए एक नया विभाग स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, आईडीएफ ने मिडिल और हाई स्कूलों में अरबी को बढ़ावा देने के लिए टेलेम विभाग को फिर से खोलने की योजना बनाई है। पहले यह विभाग बजट की कमी के कारण बंद कर दिया गया था। इसके चलते अरबी पढ़ने वाले कर्मियों की संख्या में भारी कमी आई है। अब जरूरत महसूस होने पर इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी है।

धर्मांतरण केस में कार्रवाई तेज: जेल में बंद सबरोज का घर धराशायी, बुलडोजर एक्शन जारी

बलरामपुर  उत्तर प्रदेश में आजकल धर्मांतरण के मामले लागातार सामने आ रहे हैं. यह मुद्दा गरमाता जा रहा है. छांगुर बाबा सिंडिकेट का भांडा फूटने के बाद आगरा, अलीगढ़ समेत अब सुल्तानपुर में धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया. प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार सख्ती से कार्रवाई कर रहा है. अब बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण के मास्टरमाइंड जमालुद्दीन उर्फ छांगुर के भतीजे पर बुलडोजर एक्शन का कहर बरपा है. जेल में बंद सबरोज का घर आज बुलडोजर से ढहा दिया गया. बताया जा रहा है कि गांव की जमीन पर अवैध कब्जा कर घर बनाया गया था. इसलिए ये कार्रवाई हुई है. इससे पहले छांगुर की आलीशान कोठी पर बुलडोजर चल चुका है. सबरोज का मकान छांगुर की कोठी से 1 किमी दूर रेहरा माफी गांव में ही बना हुआ था. सबरोज एटीएस की गिरफ्त में हैं. छांगुर के बाद एटीएस ने 19 जुलाई को उसे गिरफ्तार किया था. सबसे पहले सबरोज के घर उतरौला कोतवाली की फोर्स यानी 30 पुलिसकर्मी, सीओ राघवेंद्र सिंह और एएसपी विशाल पांडेय पहुंचे. वहां सुरक्षा व्यवस्था देखी. इसके बाद एसडीएम सत्यपाल प्रजापति पहुंचे. फिर सुबह 11 बजे टीम उतरौला तहसील की टीम दो बुलडोजर लेकर पहुंची. दो बुलडोजर ने 7 मिनट में छत ढहाई और 10 मिनट में दीवारें गिरा दी. इसके बाद पिलर खोद दिए. कुल 20-25 मिनट में पूरे घर को जमींदोज कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान कुछ लोग मौजूद थे. मगर, जैसे ही कार्रवाई पूरी तो सब गायब हो गए. वहीं, प्रशासन ने कहा कि सबरोज को 3 बार नोटिस दिया जा चुका था. आखिरी नोटिस 18 जुलाई को दिया गया था. सबरोज का यह घर गौडास बुजुर्ग क्षेत्र के ग्राम रेहरा माफी में बना हुआ है. प्रशासन का कहना है कि यह आवास अवैध कब्जा करके बनाया गया था. लगभग 300 स्क्वायर फीट में बना हुआ था. इसमें एक किचन, एक कमरा और एक बरामदा बना हुआ था. बता दें, सबरोज की पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं. बड़ा बेटा 10 साल और छोटा 6 साल का है. आसपास के लोगों ने बताया कि ​सबरोज की पत्नी बच्चों को लेकर मायके चली गई है.

सनसनी: सागर जिले में एक ही परिवार के चार सदस्य मृत मिले, जांच में जुटी पुलिस

सागर मध्य प्रदेश के सागर जिले के खुरई क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां टीहर गांव में खेत में बने एक मकान में रह रहे परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। प्रारंभिक जांच में मामला सामूहिक आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि मौत की असल वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। घटना शुक्रवार देर रात की बताई जा रही है। मृतकों की पहचान मनोहर सिंह लोधी, उनकी मां फूलरानी लोधी (70), बेटी शिवानी (18) और बेटा अनिकेत (16) के रूप में हुई है। फूलरानी और अनिकेत की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि शिवानी ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। मनोहर सिंह को गंभीर हालत में सागर रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, मनोहर सिंह अपनी मां और दो बच्चों के साथ गांव से दूर खेत में बने मकान में रहते थे। उनकी पत्नी कुछ दिन पहले अपने मायके गई हुई थी। घटना के समय घर में केवल चारों ही मौजूद थे। बड़े भाई को मिली घटना की जानकारी घटना की जानकारी सबसे पहले मनोहर के बड़े भाई को मिली, जिन्होंने बताया कि मकान के ऊपर रहने वाले एक भाई को नीचे से उल्टी करने की आवाजें सुनाई दीं। जब उसने जाकर देखा, तो हालत गंभीर लगी और तुरंत आसपास के लोगों को जानकारी दी गई। खुरई सिविल अस्पताल की ड्यूटी डॉक्टर वर्षा केशरवानी ने बताया कि बीती रात चार लोगों को अस्पताल लाया गया था। इनमें से दो पहले से मृत थे, जबकि एक युवती और उसके पिता की हालत नाजुक थी। शिवानी की अस्पताल में ही मौत हो गई, और मनोहर सिंह ने सागर ले जाते समय एम्बुलेंस में दम तोड़ दिया। पुलिस की जांच जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भिजवाया गया। खुरई शहरी थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि घटना किस वजह से हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं है। सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। फिलहाल यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है और हर कोई जानना चाहता है कि एक ही परिवार के चार लोगों की जान आखिर कैसे चली गई। पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले से पर्दा उठ सकेगा। मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक ही परिवार के चार लोगों ने की आत्महत्या, दादी, पिता और दो बच्चों की मौत, मां मायके गई थी. सागर  में शुक्रवार देर रात एक ही परिवार के चार लोगों ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। पिता, बेटा-बेटी और दादी की मौत हो गई। पुलिस आत्महत्या के कारण जानने का प्रयास कर रही है।  एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के सागर जिले के टीहर गांव में एक ही परिवार के चार सदस्यों ने सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली। यह दर्दनाक घटना शुक्रवार रात को घटी, घर की ऊपरी मंजिल पर रहने वाले भाई को उल्टियां करने की आवाज आई तो वह नीचे आए, इस दौरान उन्हें इसकी जानकारी मिली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। परिवार ने ऐसा क्यों किया, अब तक इस बारे में जानकारी सामने नहीं आ पाई है. जानकारी के अनुसार, टीहर गांव के पास खेत में बने एक मकान में मनोहर लोधी (45), उनकी मां फूलरानी (70), बेटा अनिकेत और बेटी शिवानी (18) रह रहे थे। मनोहर की पत्नी कुछ दिनों पहले अपने मायके गई थीं। घर में मनोहर के अलावा दो बच्चे और दादी थीं। शुक्रवार रात को सभी को उल्टियां होने लगीं। उल्टियों की आवाज सुनकर घर की ऊपरी मंजिल में रह रहा मनोहर का भाई चीजे आया। उसने सभी को गंभीर हालत में देखा तो सबसे पहले परिजनों और ग्रामीणों को जानकारी दी। इसके पुलिस और एंबुलेंस को कॉल कर सूचना दी गई।     सभी को गंभीर हालत में खुरई अस्पताल पहुंचाया गया, इस दौरान डॉक्टरों ने फूलरानी और अनिकेत की मृत घोषित कर दिया। वहीं, कुछ देर के इलाज के बाद शिवानी ने दम तोड़ दिया। गंभीर हालत में जिला अस्पताल ले जाते समय मनोहर की भी मौत हो गई। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर ह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परिवार ने यह कदम क्यों उठाया?  पुलिस मनोहर के छोटे भाई समेत ग्रामीणों से जानकारी जुटा रही है.

75% समर्थन के साथ PM मोदी ने फिर से मारी बाज़ी—ट्रंप अब पायदान 8 पर

नई दिल्ली अमेरिका की बिजनेस इंटेलिजेंस कंपनी मॉर्निंग कंसल्ट के एक सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के नेताओं में 75% अप्रूवल रेटिंग के साथ सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता हैं। यह डेटा 4 से 10 जुलाई 2025 के बीच सर्वे करके इकट्ठा किया गया। साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग 59% के साथ दूसरे स्थान पर हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 45% से कम अप्रूवल के साथ आठवें स्थान पर हैं। पीएम मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 4,078 दिन पूरे कर लिए हैं। वह जवाहरलाल नेहरू के बाद सबसे लंबे समय तक बने रहने वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं। मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे का डेटा क्या कहता है? इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे में भाग लेने वाले 75% लोगों ने PM मोदी को एक लोकतांत्रिक विश्व नेता के रूप में पसंद किया। 7% लोग कोई राय नहीं बना पाए, जबकि 18% लोगों ने उन्हें नापसंद किया। इस लिस्ट में दूसरे सबसे लोकप्रिय नेता साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग हैं। उन्हें 59% लोगों ने पसंद किया। 13% लोगों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जबकि 29% लोगों ने उन्हें नापसंद किया। म्युंग के लिए दूसरा स्थान हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अभी एक महीना पहले ही साउथ कोरिया के राष्ट्रपति का पद संभाला है। रेटिंग 4-10 जुलाई तक इकट्ठा किए गए डेटा पर आधारित मॉर्निंग कंसल्ट ने कहा, लेटेस्ट अप्रूवल रेटिंग 4-10 जुलाई, 2025 तक इकट्ठा किए गए डेटा पर आधारित हैं। रेटिंग हर देश में वयस्कों के विचारों का सात दिन का सिंपल मूविंग एवरेज दिखाती हैं। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई तीसरे स्थान पर हैं। उन्हें 57% वोट मिले। 6% लोगों ने कोई राय नहीं दी और 37% लोगों ने उन्हें नापसंद किया।कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी चौथे स्थान पर हैं। उन्हें 56% वोट मिले। 31% लोगों ने उनके खिलाफ वोट किया, जबकि 13% लोगों ने कोई राय नहीं दी। ऑस्ट्रेलिया के एंथोनी अल्बानीस पांचवें स्थान पर हैं। उन्हें 54% वोट मिले। 35% वोटर उनसे सहमत नहीं थे, जबकि 11% लोगों ने कोई राय नहीं दी। डोनाल्ड ट्रंप आठवें स्थान पर हैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आठवें स्थान पर हैं। उन्हें केवल 44% वोट मिले। हैरानी की बात यह है कि ट्रंप ने पिछले नवंबर में अमेरिका का चुनाव भारी बहुमत से जीता था। लेकिन, उनके व्यापार शुल्क और कुछ अंदरूनी फैसलों से उनकी लोकप्रियता कम हुई है। पोलैंड के डोनाल्ड टस्क नौवें स्थान पर हैं। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी दसवें स्थान पर हैं। इस लिस्ट में पीएम मोदी के बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग 59% अप्रूवल रेटिंग के साथ दूसरे स्थान पर रहे। यह ली जे म्युंग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि दक्षिण कोरिया में सर्वोच्च पद पर आसीन हुए उन्हें अभी सिर्फ एक ही महीना हुआ है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 45% से भी कम अप्रूवल रेटिंग के साथ 8वें स्थान पर खिसक गए हैं। दुनिया में PM मोदी का बढ़ा कद: एक लोकतांत्रिक वैश्विक नेता मॉर्निंग कंसल्ट सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी का कद देश के अंदर और बाहर दोनों जगह और बढ़ गया है। सर्वे में शामिल 75% लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को एक लोकतांत्रिक वैश्विक नेता के रूप में स्वीकार किया है। इस पर 7% लोग कोई निर्णय नहीं ले पाए जबकि 18% लोगों की राय इससे अलग थी। अन्य प्रमुख नेता: माइली तीसरे, मैक्रों सबसे कम लोकप्रिय     तीसरा स्थान: दक्षिणपंथी माने जाने वाले अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर रहे उनके पक्ष में 57% वोट पड़े। 6% लोगों ने कोई राय नहीं दी और 37% प्रतिभागियों ने उन्हें अस्वीकार कर दिया।     सबसे कम लोकप्रिय: सबसे कम लोकप्रिय नेताओं में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और चेक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री पेट्र फिआला शामिल हैं जिन्हें केवल 18% लोगों का समर्थन मिला है जबकि 74% लोग उनसे असंतुष्ट हैं।     इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी 10वें स्थान पर हैं। यह सर्वे रिपोर्ट एक बार फिर दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

एयरपोर्ट सुरक्षा में हाई अलर्ट, बम की धमकी को लेकर तीन बार कंट्रोल रूम में कॉल

 मुंबई मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम को एक के बाद एक तीन अलग-अलग नंबरों से आए धमकी भरे कॉल ने शुक्रवार को हड़कंप मचा दिया. कॉलर ने दावा किया कि मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बम रखा है और कुछ ही देर में जोरदार धमाका होने वाला है.  इस कॉल के बाद मुंबई पुलिस तुरंत अलर्ट हो गई और एयरपोर्ट पर पुलिस अधिकारियों के साथ बम स्क्वॉड की टीम भी पहुंच गई. घंटों तक चले सघन तलाशी अभियान के बाद भी कुछ भी संदिग्ध बरामद नहीं हुआ. पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, अज्ञात कॉलर ने मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 पर बम विस्फोट होने की धमकी दी थी. सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस के आला अधिकारी और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंच गए. एयरपोर्ट के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गई, लेकिन पुलिस को कोई भी ऐसी चीज नहीं मिली जिससे बम होने की पुष्टि हो सके. असम-बंगाल सीमा से जुड़े धमकी भरे कॉल के तार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये धमकी भरे कॉल असम और पश्चिम बंगाल सीमा के पास सक्रिय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके किए गए थे. मुंबई की आज़ाद मैदान पुलिस ने अज्ञात कॉलर के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है ताकि धमकी देने वाले शख्स तक पहुंचा जा सके और उसके इरादों का पता लगाया जा सके.

अनिल अंबानी के ऑफिसों पर लगातार छापेमारी, ED की कार्रवाई तीसरे दिन भी जारी

मुंबई रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़े दिल्ली और मुंबई स्थित परिसरों पर पिछले 48 घंटों से ईडी की छापेमारी जारी है. प्रवर्तन निदेशालय ने 3,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल अंबानी के रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों और अधिकारियों से जुड़े 35 से ज्यादा जगहों परिसरों में तलाशी अभियान शुरू किया है. गुरुवार सुबह 7 बजे से ईडी के अधिकारी अनिल अंबानी के कई ठिकानों पर छापेमारी कर रहे थे. आज भी अनिल अंबानी के ऑफिस रिलायंस में छापेमारी जारी है. रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने एक बयान जारी कर कहा है कि ईडी की छापेमारी समूह की अन्य कंपनियों से जुड़े पुराने मामलों से संबंधित है. उन कंपनियों या जांच के दायरे में आने वाले मामलों से कोई संबंध नहीं है. ये शिकायतें RAAGA कंपनियों द्वारा सार्वजनिक संस्थानों के साथ लोन हेराफेरी, रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों से संबंधित हैं. RAAGA कंपनियां रिलायंस अनिल अंबानी समूह की संस्थाओं का संदर्भ देती हैं. सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय आवास बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कई एजेंसियों ने जांच में योगदान देने वाली जानकारी साझा की है. अधिकारियों का कहना है कि लोन वितरण से ठीक पहले, यस बैंक के प्रवर्तकों से जुड़ी संस्थाओं को पैसा रिसीव हुआ था. इससे बैंक अधिकारियों और उधार लेने वाली फर्मों के बीच संभावित रिश्वतखोरी और लेन-देन की व्यवस्था के सवाल उठे हैं. ईडी अब यस बैंक के प्रवर्तकों और अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों के बीच कथित सांठगांठ की जांच कर रहा है.