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विश्व स्तनपान सप्ताह में शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर हुआ मंथन

स्तनपान को प्रोत्साहन स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक निवेश स्तनपान: स्वास्थ्य लाभ के साथ सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण का आधार विश्व स्तनपान सप्ताह में शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर हुआ मंथन भोपाल  स्तनपान में निवेश करना न केवल एक स्वास्थ्य प्राथमिकता है, बल्कि यह एक सामाजिक एवं आर्थिक निवेश भी है, जो दीर्घकालिक रूप से समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। यह एक प्रमाणित तथ्य है कि समुचित स्तनपान से शिशु मृत्यु दर में वांछित कमी लाई जा सकती है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए विश्व स्तनपान सप्ताह पर एनएचएम कार्यालय, भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने की। संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार, संचालक आईईसी डॉ. रचना दुबे, सहित विभिन्न विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे। मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि शासकीय चिकित्सालयों की भांति निजी चिकित्सालयों को भी मातृ-शिशु हितैषी संस्थान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। बैठक में स्तनपान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, इसके विकल्प के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने तथा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, निगरानी तंत्र और सहयोगात्मक नीति-संशोधन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का प्रमुख उद्देश्य इन्फेंट मिल्क सब्सीट्यूट(आईएमएस) अधिनियम के प्रभावी प्रवर्तन एवं नीति निर्माण में सुधार के साथ-साथ शिशु एवं बाल आहार व्यवहारों को प्रोत्साहित करना था। साथ ही शासकीय तंत्र के सहयोग से निजी क्षेत्र को सशक्त बनाते हुए शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया। बैठक में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल से डॉ. मंजूषा गोयल (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग), डॉ. शबाना सुल्तान (विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति रोग) तथा डॉ. शिखा मलिक (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग) उपस्थित रहीं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल से डॉ. ज्योतीनाथ मोदी (प्राध्यापक, स्त्री एवं प्रसूति रोग) ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त, डॉ. पंकज शुक्ला (भारतीय चिकित्सक संघ), डॉ. महेश महेश्वरी (भारतीय शिशु रोग अकादमी के अध्यक्ष), डॉ. श्वेता आनंद (संयुक्त सचिव, शिशु रोग अकादमी), डॉ. आभा जैन (स्त्री रोग विशेषज्ञ महासंघ की अध्यक्ष), डॉ. रणधीर सिंह (मध्यप्रदेश नर्सिंग होम संघ के अध्यक्ष), डॉ. मनीष शर्मा (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल) तथा डॉ. राकेश श्रीवास्तव (सिविल सर्जन, जयप्रकाश चिकित्सालय, भोपाल) भी उपस्थित रहे। यूनिसेफ, मध्यप्रदेश से सुपुष्पा अवस्थी (पोषण विशेषज्ञ), डॉ. प्रशांत कुमार (स्वास्थ्य विशेषज्ञ), सुझिमली बरुआ एवं सुमोनिका मोर्या (सामाजिक व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञ), तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से डॉ. हिमानी यादव (उपसंचालक, शिशु स्वास्थ्य) एवं राज्य स्तरीय सलाहकारों ने भी सहभागिता की।  

राज्यमंत्री पटेल ने मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

भोपाल  लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने आगामी त्यौहारों के मद्देनज़र मिलावटी खाद्य सामग्री की संभावित बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क रहते हुए मिलावटखोरों के विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई करने के लिए कहा है। राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी एवं गणेश चतुर्थी जैसे आगामी त्यौहारों के दौरान दूध, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न होता है। उन्होंने निर्देश दिए कि दूध एवं उससे बने उत्पादों के साथ-साथ फल-सब्जियों में केमिकल व कार्बाइड के उपयोग की भी कड़ी निगरानी की जाए। मिलावटी सामग्री पाए जाने पर तत्काल जब्ती और संबंधित खाद्य कारोबारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। राज्यमंत्री पटेल ने मिलावट के विरुद्ध जन-जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया है, जिससे नागरिक सजग रहें और उन्हें सुरक्षित व शुद्ध खाद्य सामग्री प्राप्त हो सके।  

ऑस्ट्रेलिया जा रहे हैं सभी! प्रधानमंत्री का क्या होगा? सामने आई चौंकाने वाली वजह

पर्थ अभी तक आपने किसी व्यक्ति के दूसरे देश में शिफ्ट होने के बारे में सुना होगा। लेकिन क्या कभी ऐसा सुना है कि पूरा एक देश ही दूसरे देश में शिफ्ट हो गया। ऐसा हो रहा है तुवालू में। तुवालू पैसिफिक ओशियन का एक छोटा सा देश है जो कि आइलैंड पर बसा है। यहां पर समुद्र का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके चलते पूरे देश को ऑस्ट्रेलिया में माइग्रेट किया जा रहा है। पूरी दुनिया में यह अपनी तरफ का पहला मामला है। तुवालू को लेकर बहुत सारी स्टडी हो चुकी हैं। इनमें सामने आया है कि अगले 25 साल में तुवालू पूरी तरह से पानी में डूब सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तुवालू के प्रधानमंत्री नए देश में क्या भूमिका निभाएंगे। इतनी है इस देश की आबादी तुवालू देश कुल मिलाकर नौ समुद्री द्वीपों से मिलकर बना है। इसकी आबादी 11 हजार के करीब है। समुद्र की सतह से अब इसकी ऊंचाई मात्र दो मीटर ही रह गई है। यानी समुद्र का जलस्तर अगर दो मीटर और ऊपर गया तो फिर यह पानी में समाना शुरू हो जाएगा। यहां पर बाढ़ और तूफान का खतरा हमेशा बना रहता है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि तुवालू के नौ में से दो द्वीप करीब-करीब पानी में समा चुके हैं। नासा के मुताबिक पिछले 30 साल में यहां पर समुद्र का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। अगर पानी इसी तरह से बढ़ता रहा तो साल 2050 तक यह द्वीपीय देश पूरी तरह से डूब जाएगा। नागरिकों को मिलेंगे सभी अधिकार साल 2023 में तुवालू और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत हर साल 280 तुवालू नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया में बसने की इजाजत मिली थी। इन नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, घर और नौकरी के सभी अधिकार मिलेंगे। नागरिकों के पहले बैच को 16 से 18 जुलाई के बीच ऑस्ट्रेलिया ले जाया गया। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री पेनी वांग ने कहा कि इन नागरिकों को पूरे सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिलेगा। वहीं, तवालू के प्रधानमंत्री फेलेती तियो ने दुनिया भर से इस मामले पर ध्यान देने की मांग की है।

छुट्टियों की झड़ी! 15 से 18 अगस्त तक स्कूल-कॉलेजों में ताला

उज्जैन अगस्त महीने में लगातार छुट्टियां मिल रही हैं। जिसके चलते आप कहीं परिवार के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मध्यप्रदेश के उज्जैन में ये छुट्टियां और भी खास होने वाली हैं, क्यों कि अगले हफ्ते 15 अगस्त से 18 अगस्त तक लगातार छुट्टियां पड़ रही हैं। चार दिन लगातार मिलेगी छुट्टी इस हफ्ते की बात करें 9 अगस्त को रक्षाबंधन और 10 अगस्त को रविवार है। इसमें दो दिन की लगातार छुट्टी मिल रही है। ऐसे ही अगले हफ्ते 15 को स्वतंत्रता दिवस, 16 को जन्माष्टमी, 17 को रविवार और सोमवार उज्जैन में बाबा महाकाल की राजसी सवारी के चलते उज्जैन तहसील में अवकाश घोषित रहेगा।   बाकी लोगों को मिलेंगी एकसाथ तीन छुट्टी उज्जैन जिले के बाहर के लोगों को एक साथ तीन छुट्टियां मिलेंगी। जिसमें लोग अपने परिवार के साथ तीन दिन का वीकेंड मनाने जा सकते हैं। 

स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी की भीड़ ने बढ़ाई रेलवे की चुनौती, फुल हुईं सभी प्रमुख ट्रेनें

इंदौर अगस्त से त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है। त्योहारी सीजन में ट्रेनों पर दबाव बढ़ गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई तेजस एक्सप्रेस में अब सीटें फुल होना शुरू हो गई हैं। कुछ ट्रेनों में टिकटों की बुकिंग बंद हो गई है। वहीं, बसों के किराए में भी 20 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है। भाई-बहन के त्योहार रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में यात्रियों का एक शहर से दूसरे शहरों, गांवों, कस्बों में आना-जाना होता है। अगस्त में रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त (शनिवार) और 10 अगस्त (रविवार) को आ रहा है। दो दिन की छुट्टी आ रही है। 8 अगस्त की छुट्टी ले ली जाए तो तीन दिन का सप्ताहांत मिल जाएगा। इसी तरह 15 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश एवं 16 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी जैसे बड़े राष्ट्रीय त्योहार आ रहे हैं।   तीन दिन का वीकेंड मिल रहा है 17 अगस्त को रविवार होने से यात्रियों को तीन दिन का सप्ताहांत मिल रहा है। इन त्योहारों का सप्ताह के अंतिम दिनों में आने से ट्रेनों पर दबाव बढ़ गया है। फिर आगामी महीनों में गणेश चतुर्थी, नवदुर्गा, दशहरा एवं दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार आएंगे। पश्चिम रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं विशेष रूप से यात्रा की मांग को ध्यान में रखते हुए मुंबई सेंट्रल और इंदौर स्टेशनों के बीच विशेष किराए पर सुपरफास्ट तेजस स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। यह ट्रेन 23 जुलाई से 29 अगस्त तक चलेगी। त्योहारी सीजन में इस ट्रेन में किराया ज्यादा होने के बाद भी यात्रियों में रुझान बढ़ने लगा है। इसमें थर्ड एसी किराया 1803, सेकंड एसी 2430 और फर्स्ट 3800 रुपए है। बसों के किराए में बढ़ोतरी इंदौर से मुंबई, पुणे, नागपुर सहित अन्य शहरों तक चलने वाली बसों में यात्रियों का आवागमन लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण कई बस संचालकों ने किराए में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। बसों में आमतौर पर 1500 से 2000 रुपए किराया लगता है, जो त्योहारी सीजन में बढ़कर 2500 से 3000 रुपए तक हो गया है।

अमेरिका की आर्थिक पकड़ पर मंडराया खतरा, रूस-चीन-भारत बना सकते हैं नया फाइनेंशियल फ्रंट

नई दिल्‍ली  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप इस समय भारत से अपनी व्‍यक्तिगत खुन्‍नस निकाल रहे हैं. तभी तो उन्‍होंने सारे देशों को छोड़ सिर्फ भारत पर ही 50 फीसदी का टैरिफ ठोक दिया है. ट्रंप के दायरे में भारत ही नहीं, रूस और चीन भी आ गए हैं. इसका मतलब है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति इस समय रूस, भारत और चीन पर एकसाथ हमलावर हो गए हैं. ऐसे में हर आदमी के मन में यही सवाल उठ रहा कि क्‍या ये तीनों देश मिलकर अमेरिका की दादागिरी खत्‍म कर सकते हैं. अमेरिका को सबसे ज्‍यादा लाभ ग्‍लोबल मार्केट में डॉलर में होने वाले ट्रेड से होता है. तो क्‍या, रूस-भारत और चीन मिलकर डॉलर का मुकाबला कर सकते हैं. इस बात का जवाब अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की झुंझलाहट से ही मिल जाता है. आपको याद होगा जब ब्रिक्‍स सम्‍मेलन के दौरान ट्रंप ने डॉलर का विकल्‍प बनाने को लेकर रूस, भारत और चीन को धमकी दी थी. ट्रंप ने कहा था कि अगर ब्रिक्‍स देश मिलकर डॉलर कमजोर करने की साजिश करते हैं तो इन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा दिया जाएगा. फिलहाल भारत ने ऐसी कोई कोशिश नहीं की और उस पर ट्रंप 50 फीसदी का टैरिफ लगा चुके हैं. जाहिर है कि उनके मन में इस बात को लेकर काफी डर है कि अगर तीनों देश साथ आ गए तो डॉलर को नुकसान हो सकता है. कैसे दे सकते हैं डॉलर को टक्‍कर अमेरिकी डॉलर को टक्‍कर देने के लिए भारत ने भले ही अभी तक कोई खास कदम न उठाया हो, लेकिन रूस और चीन लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं. चीन ने अपने ज्‍यादातर साझेदारों से स्‍थानीय मुद्रा युआन में कारोबार बढ़ाना शुरू कर दिया है. रूस ने भी यूक्रेन युद्ध के बाद डॉलर में लेनदेन को काफी हद तक कम किया है और अपनी स्‍थानीय मुद्रा में कारोबार कर रहा है. वैसे तो भारत ने भी ईरान, रूस सहित कुछ देशों के साथ रुपये में लेनदेन किया है, लेकिन अभी तक ग्‍लोबल मार्केट में कोई उल्‍लेखनीय डील स्‍थानीय करेंसी में नहीं हुई. हां, अगर तीनों ही देश मिलकर अपनी-अपनी करेंसी में कारोबार शुरू करते हैं तो डॉलर को कड़ी टक्‍कर दी जा सकती है. क्‍या हो सकती है रणनीति अमेरिका को अपनी बादशाहत कायम रखने और कारोबार बढ़ाने के लिए बड़े बाजार की जरूरत है. यह बात पूरी दुनिया को पता है कि भारत और चीन दो सबसे बड़ी जनसंख्‍या यानी उपभोक्‍ता वाले देश हैं. यही दोनों देश दुनिया की फैक्‍ट्री भी हैं. चीन तो सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है, जबकि भारत दुनिया की दूसरी फैक्‍ट्री बनने की राह पर है. इसका मतलब है कि यह दोनों देश न सिर्फ बड़े उत्‍पादक हैं, बल्कि सबसे बड़े उपभोक्‍ता वाले देश भी हैं. अगर रूस के साथ मिलकर ये तीनों देश अपनी मुद्रा में लेनदेन और कारोबार करते हैं तो निश्चित रूप से डॉलर को बड़ी चुनौती मिल सकती है. तीनों देशों में कितना कारोबार भारत, रूस और चीन का आपस में कुल व्‍यापार भी लगातार बढ़ता जा रहा है. वित्‍तवर्ष 2023-24 में रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय कारोबार 65 अरब डॉलर से ज्‍यादा रहा था, जबकि भारत और चीन का कारोबार 130 अरब डॉलर से अधिक रहा है. इसी तरह, रूस और चीन का कारोबार भी 200 अरब डॉलर से ज्‍यादा ही रहा. इस तरह, अगर तीनों देशों के बीच कुल कारोबार को देखा जाए तो यह करीब 390 अरब डॉलर के आसपास रहा है. इसके 400 अरब डॉलर से भी ज्‍यादा पहुंचने का अनुमान है. भारत-रूस और चीन का कितना ग्‍लोबल कारोबार भारत का कारोबार : पिछले वित्‍तवर्ष 2024-25 में भारत का कुल अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार करीब 1,830 अरब डॉलर (1.83 ट्रिलियन डॉलर के आसपास) रहा है. इसमें प्रोडक्‍ट का कारोबार करीब 1,300 अरब डॉलर और सेवाओं का आयात-निर्यात 500 अरब डालर से ज्‍यादा रहा है. चीन का कुल कारोबार : चीन ने पिछले वित्‍तवर्ष 3.59 ट्रिलियन डॉलर का सामान दुनियाभर में निर्यात किया और 2.56 ट्रिलियन डॉलर का सामान मंगाया. इस तरह, सामान का कुल कारोबार 6.15 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबकि सेवाओं का कारोबार मिला दें तो यह आंकड़ा 7.56 ट्रिलियन डॉलर पहुंच जाता है. रूस का कितना कारोबार : पिछले वित्‍तवर्ष में रूस ने दुनियाभर को 424 अरब डॉलर का सामान बेचा और दुनिया से 304 अरब डॉलर का सामान खरीदा. यानी कुल कारोबार रहा 728 अरब डॉलर का. इसमें सेवाओं का कारोबार जोड़ दिया जाए तो यह 117 अरब डॉलर और बढ़कर करीब 865 अरब डॉलर पहुंच जाएगा. तीनों का कितना कारोबार : इस तरह रूस, चीन और भारत का कुल अंतरराष्‍ट्रीय कारोबार करीब 10 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्‍यादा का रहा है. अमेरिका का कितना ग्‍लोबल कारोबार साल 2024 में अमेरिका का कुल कारोबार करीब 7 ट्रिलियन डॉलर का रहा है. इसमें प्रोडक्‍ट के निर्यात का हिस्‍सा 2 ट्रिलियन डॉलर और आयात का हिस्‍सा 3.37 ट्रिलियन डॉलर रहा. इसका मतलब है माल का कुल कारोबार 5.43 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबक‍ि सर्विस का निर्यात 928 अरब डॉलर और आयात 700 अरब डॉलर रहा. सर्विस का कुल कारोबार 1.63 ट्रिलियन डॉलर रहा है और कुल कारोबार 7 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है. आंकड़ों में कौन आगे अगर तीनों ही देश अकेले-अकेले अमेरिका का मुकाबला करेंगे तो यह मुश्किल होगा, क्‍योंकि उसका कुल कारोबार चीन से भी ज्‍यादा है. लेकिन, अगर चीन-भारत और रूस मिलकर अमेरिका के सामने खड़े होते हैं तो यह आंकड़ा अमेरिका के कुल कारोबार से कहीं ज्‍यादा बैठता है. आंकड़े साफ बताते हैं कि अगर तीनों ही देश मिलकर अमेरिकी डॉलर के सामने खड़े होते हैं तो निश्चित रूप से इसका मुकाबला ग्‍लोबल मार्केट में कर सकते हैं.

अब हर घर में स्मार्ट मीटर: बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा सटीक बिल और रीयल टाइम डेटा

चित्तौड़गढ़ अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एवीएनल) की ओर से चित्तौड़गढ़ जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। वहीं, इसे लेकर आरोप भी लग रहे हैं कि मीटर तेजी से दौड़ेगा। इन सब के बीच निगम ने बड़ा दावा किया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि निगम और उपभोक्ता के लिए स्मार्ट मीटर बहुत उपयोगी है। सोलर एनर्जी का प्रोडक्शन बढ़ रहा है। ऐसे में सोलर एनर्जी और सरकार के जनरेशन प्लांट से बिजली की आपूर्ति को को कम-ज्यादा करना जरूरी है। स्मार्ट मीटर लगाकर बिजली की आपूर्ति एवं खपत को सोलर एनर्जी एवं ग्रिड की आपूर्ति से कम ज्यादा किया जाएगा। ऐसा नहीं करने पर ग्रिड फेल होने का खतरा रहेगा। जानकारी में सामने आया कि एवीएनएल की ओर से जिले में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इसका विरोध भी हुआ है। कांग्रेस के नेताओं का भी विरोध में बयान सामने आया था। वहीं, जिले में वृहद स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य जारी है। इसे लेकर अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड चित्तौड़गढ़ के अधिशासी अभियंता ऋषभ भार्गव ने बताया कि जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू हो गया है। स्मार्ट मीटर लगाना समय की मांग हैं। इससे निगम के साथ उपभोक्ताओं का भी फायदा है। निगम के पास स्टाफ की भी कमी है, जिससे रीडिंग में भी निगम को आसानी रहेगी। उपभोक्ता की गलत बिलिंग की शिकायत का भी निस्तारण होगा। वहीं निगम को आर्थिक फायदा भी होगा। निगम की बिजली को लेकर रियल डेटा की आवश्यकता अधिशासी अभियंता ऋषभ भार्गव ने बताया कि समय के साथ चीजों को बदलना जरूरी है। आने वाले समय में सोलर एनर्जी का प्रोडक्शन बढ़ेगा। इसका प्रोडक्शन कितना हो रहा इसकी जानकारी स्मार्ट मीटर से चलेगी। इसमें प्रोडक्शन बढ़ेगा तो सरकार के जनरेशन प्लांट हैं तो उनकी सप्लाई को कम किया जा सकेगा। ऐसा नहीं करते हैं तो ग्रिड फेल होने का खतरा है और सभी तरफ अंधेरा हो जाएगा। वहीं, स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता को भी रियल डेटा मिलेगा। उपभोक्ता 24 घंटे में बिजली की खपत देख सकता है। इसके लिए मोबाइल में ऐप डाउनलोड होगा। केवल दुष्प्रचार, मीटर एक मेजरमेंट यूनिट अधिशासी अभियंता भार्गव ने बताया कि स्मार्ट मीटर को लेकर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वह केवल दुष्प्रचार है। बिजली मीटर केवल एक मेजरमेंट यूनिट है। कोई सा भी मीटर लगाओ तो वह बिजली खपत की गणना ही करेगा। स्मार्ट मीटर समय की मांग भी है। 27 माह, 3.50 लाख उपभोक्ताओं के लगेंगे मीटर अधिशासी अभियंता ने बताया कि चित्तौड़गढ़ जिले में कृषि उपभोक्ताओं को छोड़ शेष सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर लगेंगे। जिले में 3 लाख 58 हजार उपभोक्ता हैं। जीनस पावर नाम की कंपनी यह कार्य कर रही है। इसमें 27 माह का समय दिया गया है। इसके अलावा 10 साल का रख रखाव भी इसी कंपनी को करना है। 10 में कार्य शुरू, 7 में हो रहा सर्वे अधिशासी अभियंता भार्गव ने बताया कि एवीएनएल के हिसाब से चित्तौड़गढ़ जिला 17 उपखंड में बंटा हुआ है। इसमें से 10 में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू हो गया है तथा 7 में सर्वे किया जा रहा है। जिले में अब तक करीब 5 हजार 500 उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य पूरा हो चुका है। इसमें भी शहर में सबसे अच्छी प्रोग्रेस हैं।

रेलयात्रियों के लिए खुशखबरी: अंतिम समय में टिकट बुकिंग की सुविधा, जानें पूरा प्रोसेस

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने यात्रियों को एक कमाल का तोहफा दिया है। अगर आप वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रा करना चाहते हैं, तो ट्रेन के चलने से 15 मिनट पहले भी आप ऐप से टिकट बुक करा पाएंगे। इस सुविधा से उन लोगों को फायदा होगा जिनका आखिरी समय पर यात्रा करने का प्लान बनता है। यह सुविधा सिर्फ वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए पेश की गई है और फिलहाल इसमें दक्षिण रेलवे जोन की कुछ चुनी हुई ट्रेनों को ही शामिल किया गया है। कुछ समय में इसमें और जोन और ट्रेने जोड़ी जा सकती हैं। ऐप से टिकट बुक कराने के लिए आपको सिंपस से स्टेप्स को फॉलो करना होगा। क्यों पेश की गई सुविधा? भारतीय रेलवे ने इस सुविधा को उन यात्रियों के लिए पेश किया है जिन्हें अचानक यात्रा करने की जरूरत आन पड़ती है। ऐसे यात्रियों के पास भी आरामदायक यात्रा करने का ऑप्शन हो, इसके लिए इस सुविधा को पेश किया गया है। बता दें कि पूरे देश में फिलहाल 144 वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही हैं। यह देश के मुख्य शहरों को तेज रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ती हैं। अभी तक जब ट्रेन अपने शुरुआती स्टेशन से निकल जाती थी, तो बीच के स्टेशनों से चढ़ने वाले यात्री टिकट नहीं ले सकते थे, भले ही सीटें खाली क्यों न हों। इससे न सिर्फ सीटों के खाली रहते यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाती थी, बल्कि रेलवे को भी खाली सीटों का नुकसान झेलना पड़ता था। क्या हुआ बदलाव? अब रेलवे ने इस नियम में बदलाव कर दिया है। बीच के स्टेशनों से चढ़ने वाले यात्री भी ट्रेन के रवाना होने से 15 मिनट पहले तक टिकट बुक कर सकते हैं। यह सुविधा ट्रेन की सीटों के बेहतर इस्तेमाल में भी मदद करेगी और यात्रियों को को भी बेहतर सुविधा मिल सकेगी। इस नई सुविधा का लाभ फिलहाल तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की वंदे भारत ट्रेनों में मिल रहा है। आने वाले समय में उम्मीद है कि इसे देशभर की अन्य वंदे भारत ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा। अब चलिए देर न करके हुए जल्दी से वह तरीका समझ लेते हैं जिससे आप 15 मिनट पहले भी टिकट बुक करवा पाएंगे। इस सुविधा से जुड़े FAQ’S     यह सुविधा फिलहाल सिर्फ साउदर्न रेलवे जोन की 8 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों पर ही उपलब्ध है। आने वाले समय में इसे दूसरे जोन में भी लागू किया जा सकता है।     15 मिनट पहले बुक होने वाली टिकट के दाम उतने ही होंगे, जिनते एक सामान्य टिकट के लगते हैं।     आप अगर चाहें, तो टिकट बुक करवाने के बाद कैंसिल भी कर पाएंगे। हालांकि रिफंड भारतीय रेलवे की रिफंड पॉलिसी के अनुसार मिलेगा।     15 मिनट पहले मिलने वाली टिकट को ऑफलाइन भी लिया जा सकता है।     फिलहाल यह सिर्फ कुछ चुनी हुई वंदे भारत ट्रेनों के लिए उपलब्ध है। बाकी ट्रेनों में इस सुविधा को लाने को लेकर कोई जानकारी नहीं है। 15 मिनट पहले IRCTC ऐप से वंदे भारत की टिकट ऐसे बुक करें?     स्टेप 1: IRCTC वेबसाइट या ऐप खोलें​     स्टेप 2: लॉग इन या नया अकाउंट बनाएं     स्टेप 3: यात्रा की जानकारी भरें और ट्रेन में से वंदे भारत एक्सप्रेस को चुनें     स्टेप 4: सीट की उपलब्धता जांचें     स्टेप 5: क्लास और बोर्डिंग स्टेशन चुनें     स्टेप 6: पेमेंट करें और टिकट पाएं

2027 में आने वाली है तबाही? AI की भविष्यवाणी ने बढ़ाई दहशत, रहस्यमयी शख्स की चेतावनी

नई दिल्ली जहां एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारे कई कामों को आसान बना दिया है वहीं इसके खतरनाक पहलुओं को लेकर बड़ी चेतावनियां भी दी जाने लगी हैं। गूगल के पूर्व एग्जीक्यूटिव मो गावदत ने AI के भविष्य को लेकर एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले 15 साल इंसानियत के लिए नरक जैसे साबित होंगे और इसका बुरा दौर साल 2027 से शुरू होगा। AI खत्म करेगा नौकरियां, बढ़ेगी असमानता मो गावदत ने 'The Diary of a CEO' पॉडकास्ट में कहा कि AI सबसे पहले उन नौकरियों को खत्म करेगा जो पढ़ाई, स्किल और डिग्री पर आधारित हैं (व्हाइट कॉलर जॉब्स)। उन्होंने अपनी खुद की कंपनी का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी AI आधारित कंपनी जो पहले 350 लोगों से चलती थी अब सिर्फ 3 लोगों से चल रही है। उनके अनुसार AI का फायदा सिर्फ अमीर और ताकतवर लोग ही उठा पाएंगे। आम लोगों की नौकरियां छिन जाएंगी जिससे मिडिल क्लास खत्म हो जाएगा और समाज में एक बड़ा विभाजन पैदा होगा। लोग खो देंगे जीवन का उद्देश्य गावदत ने चेतावनी दी कि जब लोगों की नौकरियां जाएंगी तो वे न सिर्फ अपनी आजीविका बल्कि जीवन का उद्देश्य भी खो देंगे। इससे लोगों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ेगा, अकेलापन बढ़ेगा और समाज में तनाव पैदा होगा। उनका कहना है कि अगर आज सरकारें और समाज AI को लेकर ज़रूरी कदम नहीं उठाते हैं तो आने वाले सालों में स्थिति और भी बिगड़ सकती है। हालांकि गावदत ने उम्मीद की किरण भी दिखाई। उन्होंने कहा कि यह बुरा दौर 2040 तक चलेगा उसके बाद AI के ज़रिए एक नया युग शुरू होगा। इस युग में लोग बोरिंग कामों से मुक्त होकर प्यार, सहयोग और रचनात्मकता से भरे जीवन की ओर बढ़ेंगे लेकिन यह तभी मुमकिन होगा जब आज से ही सही कदम उठाए जाएं।

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी: जनरल कोच में भी मिलेगा ताजा खाना, कीमत होगी बेहद कम

रायबरेली रेल यात्रा करने वालों के लिए अच्छी खबर! अब सिर्फ एसी कोच ही नहीं, जनरल कोच के यात्रियों को भी ट्रेन में सफर के दौरान ताजा और पौष्टिक खाना मिलेगा। केवल 80 रुपये खर्च कर आप ट्रेन में ही गर्मागरम शाकाहारी थाली का स्वाद ले सकेंगे। यह सुविधा रायबरेली से शुरू हो रही है और आगे देशभर में लागू की जाएगी। रेलवे यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब जनरल कोच में यात्रा करने वाले यात्री भी ट्रेन में ही पौष्टिक और स्वादिष्ट खाना पा सकेंगे। पहले यह सुविधा सिर्फ एसी कोच तक सीमित थी, लेकिन अब भारतीय रेलवे की सहयोगी संस्था आईआरसीटीसी (IRCTC) और टच स्टोन फाउंडेशन के बीच हुए समझौते के तहत जनरल कोच के यात्रियों को भी यह सेवा दी जा रही है। यह सुविधा सबसे पहले रायबरेली से शुरू की गई है, और जल्द ही इसे अन्य स्टेशनों व ट्रेनों में भी विस्तार दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था में यात्रियों को 80 रुपये में शाकाहारी थाली मिलेगी, जिसमें पूरी न्यूट्रिशन का ध्यान रखा गया है। इस थाली में क्या-क्या मिलेगा? यात्रियों को 2 पराठे या 4 रोटियां (100 ग्राम), 150 ग्राम चावल, 150 ग्राम दाल या सांभर, 100 ग्राम मौसमी सब्जी और 80 ग्राम दही परोसा जाएगा। यह खाना न केवल स्वादिष्ट होगा, बल्कि पूरी तरह से संतुलित और ताजगी से भरपूर भी होगा। रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया है कि खाना पर्यावरण अनुकूल थालियों में परोसा जाए, ताकि प्लास्टिक के उपयोग को कम किया जा सके। यह पहल न केवल खाने की गुणवत्ता को बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन पर मिलने वाले स्टैंडर्ड वेज मील की कीमत 70 रुपये है, लेकिन अगर यात्री ट्रेन में बैठकर खाना मंगवाते हैं, तो उन्हें सिर्फ 80 रुपये खर्च करने होंगे। यह सेवा खासतौर पर जनरल कोच में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए वरदान साबित होगी, जो अब तक स्टेशनों पर उतरकर खाने की तलाश करते थे या फिर सफर में कम गुणवत्ता वाले खाने पर निर्भर रहते थे। अब उन्हें सफर के दौरान ही संतुलित, साफ-सुथरा और गर्म भोजन मिलेगा, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक और सुरक्षित बनेगी।