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RBI की सख्ती से जन-धन खाताधारकों पर असर: जानिए तीन बड़े फैसलों का सीधा प्रभाव

नई दिल्ली 10 साल पहले जिन जन-धन खातों ने लाखों गरीबों को पहली बार बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा था, अब उन्हीं खातों की दोबारा जांच का वक्त आ गया है. RBI ने बड़ा कदम उठाते हुए बैंकों को निर्देश दिया है कि वे 1 जुलाई से 30 सितंबर तक ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाएं, जहां जन-धन खातों का री-केवाईसी (KYC अपडेट) मुफ्त में किया जाएगा. इस निर्देश के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य हैं पहला, बैंक खातों को धोखाधड़ी से सुरक्षित रखना, और दूसरा, यह सुनिश्चित करना कि 10 साल पहले खुले खाते अब भी वैध जानकारी से जुड़े हुए हैं. जन-धन योजना की शुरुआत 2014 में हुई थी, और कई खातों में उस समय केवल सीमित या बेसिक KYC डॉक्युमेंट्स लिए गए थे. RBI का कहना है कि जिन खातों की KYC वैधता अब समाप्त हो चुकी है, उन्हें री-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा ताकि खाता सक्रिय रह सके. इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद बैंक उपभोक्ताओं को न केवल KYC अपडेट करने का मौका मिलेगा, बल्कि वे नए खाते खोलने, बीमा योजनाओं से जुड़ने और वित्तीय सेवाओं की जानकारी भी मुफ्त में प्राप्त कर सकेंगे. RBI ने मृत खाता धारकों के दावों से जुड़ी प्रक्रिया को भी नया रूप दिया है. अभी तक हर बैंक की अपनी प्रक्रिया थी, जिससे मृतक के परिवार को भारी कागज़ी कार्यवाही और देरी का सामना करना पड़ता था. अब RBI एक समान प्रक्रिया लागू करने जा रहा है, जिसमें सभी बैंकों को एक जैसी गाइडलाइंस, दस्तावेज़ और प्रक्रियाएं अपनानी होंगी. चाहे दावेदार नॉमिनी हो, कानूनी वारिस हो या परिवार का कोई सदस्य, अब दावा करना आसान और तेज़ हो जाएगा. सरकारी बॉन्ड में निवेश अब बिना क्लिक के, खुद-ब-खुद RBI ने रिटेल निवेशकों के लिए एक और बड़ा ऐलान किया है. अब ‘रिटेल डायरेक्ट पोर्टल’ पर एक नया ऑटो-बिडिंग फीचर शुरू किया गया है, जिससे लोग सरकारी बॉन्ड्स (T-बिल्स) में एक बार सेटिंग करके बार-बार निवेश कर सकेंगे. इस सुविधा से निवेशक फ्रेश इन्वेस्टमेंट्स और री-इन्वेस्टमेंट्स के लिए अपनी बोली स्वचालित रूप से सेट कर पाएंगे. इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि निवेश की निरंतरता भी बनी रहेगी — खासकर उन लोगों के लिए जो हर हफ्ते या महीने निवेश करना चाहते हैं. RBI के ये तीन फैसले इस ओर इशारा करते हैं कि भारत की वित्तीय व्यवस्था अब परिपक्वता की दिशा में अग्रसर है. जहां एक ओर ग्रामीण खातों की दोबारा जांच की जाएगी, वहीं दूसरी ओर मृतकों की जमा पूंजी उनके परिवार तक न्यायपूर्वक और पारदर्शिता के साथ पहुंचेगी. और सबसे बड़ी बात, अब आम आदमी भी सरकारी निवेशों में टेक्नोलॉजी की मदद से आसानी से भागीदारी कर सकेगा, वो भी बिना किसी झंझट के.

श्रद्धालुओं को बड़ी राहत! अमृतसर से कटड़ा के बीच चलेगी नई वंदे भारत ट्रेन

उधमपुर देश की सबसे तेज और सुविधाजनक रेल सेवाओं में शुमार वंदे भारत एक्सप्रेस अब एक और नए रूट पर दौड़ने जा रही है। श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा स्टेशन से अमृतसर स्टेशन के बीच नई वंदे भारत ट्रेन 11 अगस्त से नियमित रूप से दौड़ना शुरू होगा। 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तीन वंदेभारत का उद्घाटन विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से करेंगे। इनमें कटड़ा-अमृतसर वंदेभारत, बेंगलुरु–बेलगावी वंदे भारत, अजनी(नागपुर)-पुणे वंदे भारत शामिल हैं। इस दौरान कटड़ा जम्मू और पठानकोट स्टेशन पर भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जानकारी के कटड़ा अमृतसर के बीच शुरू होने वाली वंदे भारत ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलेगी (मंगलवार को छोड़ कर) और इसका प्राइमरी मेंटेनेंस साहिबाबाद में होगा। ट्रेन के उद्घाटन की अधिसूचना रेलवे बोर्ड ने 5 अगस्त 2025 को जारी की है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि उद्घाटन रन एक विशेष सेवा के रूप में होगा, जिसके बाद ट्रेन नियमित संचालन में आ जाएगी।   ट्रेन के नियमित रूप से चलने का समय उद्घाटन रन से अलग है। जानकारी के मुताबिक मुताबिक कटड़ा से अमृतसर के बीच चलने वाली आठ कोच वाली वंदे भारत ट्रेन(02406) को प्रधानमत्री वर्चुअल माध्यम से सुबह 10:50 बजे कटडा स्टेशन से हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे। इसके लिए कटड़ा स्टेशन पर प्रस्तावित मुख्य उद्घाटन समारोह में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह, श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा के विधायक बलदेव सिंह, रियासी के विधायक कुलदीप राज दूबे, एसएसपी जीआरपी संजय कोतवाल और एसएसपी रियासी के शामिल होने की संभावना है। कटड़ा से रवाना होने के बाद ट्रेन दोपहर 12:15 बजे जम्मू तवी स्टेशन पहुंचेगी। जहां पर एक छोटा समारोह आयोजित कर 12:20 बजे इसे आगे रवाना किया जाएगा। जम्मू तवी स्टेशन पर होने वाले कार्यक्रम में जम्मू-पुंछ सांसद जुगल किशोर शर्मा, राज्यसभा सांसद गुलाम अली खटाना, विधायक विक्रम सिंह रंधावा, जम्मू पश्चिम विधायक अरविंद गुप्ता, पूर्वी जम्मू विधायक युद्धवीर सिंह सेठी, एसएसपी जम्मू जोगिंदर सिंह और एसएसपी जीआरपी जम्मू शैलेंद्र सिंह की उपस्थिति प्रस्तावित है। जहां से ट्रेन 13:50 बजे पठानकोट कैंट स्टेशन पहुंचेगी, वहां भी स्वागत समारोह के बाद इसे 13:55 बजे रवाना किया जाएगा। पठानकोट कैंट स्टेशन पर आयोजित स्वागत समारोह में गुरदासपुर के सांसद सुखविंदर सिंह रंधावा, पठानकोट विधायक अश्विनी शर्मा, पठानकोट नगर निगम के मेयर पन्ना लाल भाटिया, पूर्व विधायक दिनेश सिंह बब्बू, भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा, डीसी आदित्य उप्पल और एसएसपी डीएस ढिल्लों के उपस्थित रहने की संभावना है। 11 तारीख से चलने वाली वंदेभारत ट्रेन की दोनों दिशाओं की नियमित समय-सारिणी 26406 (कटड़ा से अमृतसर) स्टेशन आगमन प्रस्थान कटड़ा — 06:40 जम्मू तवी: 08:05 08:07 पठानकोट कैंट: 09:30 09:32 जालंधर सिटी: 11:03 11:05 व्यास: 11:28 11:30 अमृतसर: 12:20 — 26405 (अमृतसर से कटड़ा) स्टेशन आगमन प्रस्थान अमृतसर — 16:25 व्यास: 17:03 17:05 जालंधर सिटी: 17:33 17:35 पठानकोट कैंट: 19:03 19:05 जम्मू तवी: 20:28 20:30 कटड़ा: 22:00 — उधमपुर को स्टॉपेज नहीं मिलने से निराशा कटड़ा से अमृतसर की ओर चलने वाली इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस में उधमपुर जैसे सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्टेशन को स्टापेज नहीं दिया गया है। जिससे उधमपुर के लोगों को इस नई ट्रेन का कोई फायदा नहीं मिलेगा उधमपुर रेलवे स्टेशन सेना की उत्तरी कमान, बीएसएफ, आईटीबीपी, शेर-ए-कश्मीर पुलिस अकादमी जैसे अहम सुरक्षा प्रतिष्ठान के अलावा जम्मू-कश्मीर के प्रवेशद्वार जैसा महत्व रखता है। यहां से बड़ी संख्या में व्यापारी अमृतसर और जालंधर की ओर नियमित यात्रा करते हैं, वहीं विद्यार्थियों और व्यास धाम के श्रद्धालुओं के लिए भी यह रूट बेहद महत्त्वपूर्ण है। रेलवे द्वारा जारी समयसारिणी में अगर उधमपुर को दो से पांच मिनट का स्टॉपेज दिया जाता, तो ट्रेन के कुल सफर में मुश्किल से उतनी ही देरी होती, लेकिन इसके बदले हजारों यात्रियों को सुविधा मिल सकती थी। ऐसे में अब उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में रेलवे मंत्रालय इस चूक को सुधारते हुए उधमपुर स्टेशन को भी इस सेवा से जोड़ेगा।

एम्स भोपाल तक सीमित नहीं रहेगी सुविधा, अब मेडिकल कॉलेजों में भी होंगे ब्रेन-डेड मरीजों से अंगदान

भोपाल  एमपी के सभी ट्रॉमा सेंटर और मेडिकल कॉलेजों में ब्रेन-डेड मरीजों के अंग दान करने की व्यवस्था होगी। साथ ही ब्रेन डेड मरीज के परिवारों से अंगदान की मंजूरी के लिए जरूरी काउंसलिंग के लिए स्थायी काउंसलर की नियुक्ति भी की जाएगी।दरअसल, अंगदान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की गाइडलाइन आई है। प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इनमें से कई का पालन पहले से किया जा रहा है। अब सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। NOTTO से जारी निर्देश में कहा गया कि प्रदेश के सभी ट्रॉमा सेंटर्स में अंग एवं ऊतक प्राप्ति (ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन) की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्हें THOTA अधिनियम के तहत अंग प्राप्ति केंद्र के रूप में पंजीकृत किया जाए। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों में भी चरणबद्ध तरीके से यह सुविधाएं विकसित की जाएं। हर साल 11 सौ ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन, MP की हिस्सेदारी 0.7% भारत में हर साल 11 सौ के करीब ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन होते हैं। जिसमें तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात की हिस्सेदारी 82% से अधिक है। वहीं, मध्यप्रदेश की 0.7 प्रतिशत, राजस्थान की 0.6 प्रतिशत और छत्तीसगढ की 0.3 प्रतिशत हिस्सेदारी रहती है। इसकी दो बड़ी वजह हैं, इनमें पहली सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशनकी व्यवस्था ना होना और दूसरी जागरूकता की कमी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इसको लेकर हाल में सरकार का विजन स्पष्ट किया है। जिसका एक उदाहरण यह कि इस 15 अगस्त को प्रदेश के सभी अंगदाताओं का राजकीय सम्मान किया जाएगा। ऑर्गन वेटिंग लिस्ट में महिलाओं को प्राथमिक्ता नई गाइडलाइन के अनुसार, हर राज्य में अब ऑर्गन वेटिंग लिस्ट में महिलाओं को अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान किया जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी पूर्व दिवंगत दाता के निकट संबंधी को अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो, तो उसे प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, NOTTO ने साफ किया है कि नई गाइडलाइन का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, अंगदान में पारदर्शिता लाना और लैंगिक असमानता को दूर करना है। यही वजह है कि जन-जागरूकता को बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर ब्रांड एम्बेसडर भी नियुक्त किए जाएं। इन गाइडलाइन का प्रदेश में पहले से हो रहा पालन     मृतक दाता के परिवार के सदस्यों को राज्य और जिला स्तर पर सार्वजनिक समारोहों जैसे 15 अगस्त, 26 जनवरी, राज्य स्थापना दिवस आदि पर सम्मानित किया जाना।     आपातकालीन कर्मियों और एम्बुलेंस स्टाफ को सड़क दुर्घटना या स्ट्रोक से पीड़ित संभावित दाताओं की पहचान और अस्पताल के अंग दान समन्वयक को समय पर सूचित करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना। ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन वाला एम्स अकेला सरकारी संस्थान मध्यप्रदेश में फिलहाल ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन की व्यवस्था राजधानी के 3 समेत कुल 6 अस्पतालों में ही मौजूद है। इनमें एम्स भोपाल यह सुविधा वाला अकेला सरकारी अस्पताल है। इसके साथ, भोपाल और इंदौर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह व्यवस्था शुरू करने का काम अब तक कागजों में ही सीमित है। किडनी ट्रांसप्लांट में भोपाल आगे भोपाल के दो प्रमुख सरकारी अस्पताल, एम्स और हमीदिया में किडनी ट्रांसप्लांट रफ्तार पकड़ रहा है। एक तरफ एम्स में 11 किडनी ट्रांसप्लांट हुए, जिसमें से 3 कैडेवरिक ऑर्गन (यानी ब्रेन डेड मरीज से मिली किडनी) ट्रांसप्लांट थे। वहीं, गांधी मेडिकल कॉलेज में 10 किडनी ट्रांसप्लांट हुए और यह सभी लाइव थे। यानी, परिजनों ने अपनों को नया जीवन देने के लिए अपनी किडनी दान की। इसके अलावा, भोपाल का बंसल अस्पताल 400 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। इन दोनों कैटेगरी (सरकारी और निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट) में भोपाल प्रदेश में सबसे आगे हैं। लेकिन, देश में देखें तो टॉप 10 में भी नहीं है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश काफी पीछे मध्य प्रदेश स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO) की कंवीनर डॉ. कविता कुमार ने कहा कि अंगदान के मामले में मध्यप्रदेश अभी शुरुआती दौर में है, जैसे एक छोटा बच्चा चलना सीख रहा हो। इस क्षेत्र में अभी काफी काम बाकी है। सबसे अहम है कि अंगदान पर ज्यादा चर्चा हो और सही जानकारी लोगों तक पहुंचे। जब लोग इसके बारे में बात करेंगे, तो जागरूकता बढ़ेगी। उन्हें इसके फायदे समझ में आएंगे। एक बार जब लोग जान जाएंगे कि अंगदान से कितने लोगों की जान बच सकती है, तब राज्य में अंगदान का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने आगे कहा, सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन शुरू होना जरूरी है। इसके लिए अलग से मैनपावर, पर्याप्त स्पेस और एक बड़े सेटअप की जरूरत होती है। गांधी मेडिकल कॉलेज के पास मैनपावर और जगह तो है, लेकिन ऑर्गन रिट्रीवल के लिए आवश्यक मशीनें और जांच की सुविधा अभी विकसित करनी है। अच्छी बात यह है कि सरकार इस दिशा में काफी सक्रिय है। हमें भरोसा है कि जल्द ही प्रदेश में अंगदान की स्थिति बेहतर होगी और इसका ग्राफ ऊपर जाएगा। आठ अंगों को दान कर सकते हैं लोग     18 या उससे ‎अधिक उम्र के बाद ‎जीवित डोनर या तो‎ एक किडनी या लीवर ‎का केवल एक हिस्सा‎दान कर सकता है।     ‎किसी भी उम्र का ब्रेन‎स्टेम मृत डोनर 8‎ महत्वपूर्ण अंगों को‎ दान कर सकता है। ‎इनमें हार्ट, 2 फेफड़े,‎ लीवर, 2 किडनी,‎ पैंक्रियाज और छोटी‎ आंत, कॉर्निया, हड्डी,‎ त्वचा और हार्ट वाल्व ‎शामिल हैं।‎ लिविंग ऑर्गन डोनेशन     सबसे पहले डोनर के कुछ मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं। यह जानने के लिए व्यक्ति डोनेशन के लिए उपयुक्त है।     इन टेस्ट में सबसे महत्वपूर्ण दो पहलू हैं। डोनर और रिसीवर की कंपैटिबिलिटी और डोनर की मेडिकल कंडीशन यानी उसका शारीरिक रूप से स्वस्थ होना।     सारे टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव होने और डॉक्टर के सर्टिफिकेट के बाद डोनर की बॉडी से डोनेट किया जा रहा हिस्सा सर्जिकली रिमूव किया जाता है और उसे रिसीवर की बॉडी में ट्रांसप्लांट किया जाता है।     डोनर को भी ऑर्गन डोनेशन के बाद कई हफ्तों में मेडिकल सुपरविजन में रखा जाता है। ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन किसी भी कारण से हुई आकस्मिक मृत्यु के बाद … Read more

102 किमी रेलवे लाइन पर ‘कवच’ की तैनाती तय, बिरला नगर से उदीमोड़ के बीच बढ़ेगी सुरक्षा

 ग्वालियर केंद्र सरकार ने उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के 790 किलोमीटर के मार्ग को अत्याधुनिक कवच प्रणाली से लैस करने के लिए 309.26 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसमें जिले के मैनपुरी और उदी मोड़ रेलवे ट्रैक को भी शामिल किया गया है।  बिरला नगर से उदीमोड़ रेलवे स्टेशन तक 102 किमी लंबाई में ट्रेनों की भिड़ंत जैसे हादसे रोकने में कारगर अत्याधुनिक कवच प्रणाली को लागू किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने बिरला नगर-उदीमोड़ सहित कुल 14 रेल खंडों में इस प्रणाली को लागू करने के लिए 309.26 करोड़ रुपये की राशि को स्वीकृति दे दी है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीरो टालरेंस फार सेफ्टी नीति के अंतर्गत लिया गया है और जल्द ही इन मार्गों को कवच तकनीक से लैस करने के लिए काम भी शुरू कर दिया जाएगा। योजना के अंतर्गत प्रयागराज, झांसी और आगरा मंडलों के 14 प्रमुख मार्गों पर कवच प्रणाली को लागू किया जाएगा। रेलवे द्वारा इसे 2025 में ही पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिन मार्गों को योजना में शामिल किया गया है, उनमें प्रयागराज मंडल के शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद खंड तक 103.58 किमी, आगरा मंडल के धौलपुर-सरमथुरा 70 किमी एवं भांडई-उदीमोड़ 113 किमी, झांसी मंडल के ललितपुर-खजुराहो 164 किमी, बिरला नगर-उदीमोड़ 102 किमी, खजुराहो-महोबा 64 किमी, एट-कोंच 13 किमी, अलीगढ़-हरदुआगंज 14 किमी, खुर्जा जंक्शन-खुर्जा सिटी चार किमी, बरहन-एटा 58 किमी, इटावा-मैनपुरी 54 किमी, कानपुर-अनवरगंज खंड 2.42 किमी, मोहारी-टंटपुर 18 किमी, उदीमोड़-इटावा 10 किमी शामिल हैं। क्या है कवच तकनीक यह प्रणाली भारतीय रेलवे की मेड इन इंडिया तकनीक है, जो रेल हादसों को रोकने और मानवीय भूल की संभावनाओं को न्यूनतम करने में बेहद कारगर साबित हो रही है। बिरला नगर-उदीमोड़ खंड को इस अत्याधुनिक कवच तकनीक से लैस करने से ग्वालियर एवं आसपास के यात्रियों को और अधिक सुरक्षित व भरोसेमंद रेल यात्रा का अनुभव मिलेगा। कवच एक आटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो ट्रेनों को टकराने से रोकने के लिए निर्धारित गति बनाए रखने और ड्राइवर को समय पर अलर्ट देने जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। इसकी मदद से न केवल ट्रेनों की स्पीड पर नियंत्रण होगा, बल्कि घने कोहरे या तकनीकी बाधाओं में भी ट्रेनों का संचालन पूरी सुरक्षा के साथ किया जा सकेगा।  

Grok के Spicy Mode से जुड़ा नया खतरा, साइबर अपराधियों की नई चाल

नई दिल्ली Elon Musk की AI कंपनी के एक फीचर के बाद से सोशल मीडिया पर बवाल मचा है. एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि इससे देश में एडल्ट कंटेंट बढ़ेंगे और Sextortion जैसे क्राइम को भी हवा मिलेगी. सिर्फ एक फोटो से xAI का ये फीचर किसी की भी अश्लील फोटो तैयार कर देगा.  Grok AI पर इस फीचर को Spicy Mode नाम दिया है, जिसने आते ही कई लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हैरानी की बात ये है कि ये फीचर एवेलेबल करा दिया गया है और 700 रुपये की मंथली सब्सक्रिप्शन भी है. 700 रुपये में GrokAI का पेड सब्सक्रिप्शन मिलता है. Spicy Mode असल में Grok Imagine फीचर का हिस्सा है और यह एक AI-पावर्ड इमेज और वीडियो जनरेशन टूल है. यह फीचर SuperGrok या X Premium+ सब्सक्रिप्शन के साथ iOS ऐप पर दिया गया है.   Grok के Spicy Mode फीचर को लेकर उठने वाली चिंताएं लाज़मी हैं. असल में इस फीचर की मदद से यूजर्स ना सिर्फ प्रॉम्प्ट देकर एडल्ट कंटेंट बनाने की सुविधा मिलेगी बल्कि किसी पुरानी फोटो या किसी दूसरे शख्स की फोटो का भी गलत इस्तेमाल कर सकेंगे.  Deepfake जैसा खतरनाक Spicy Mode दरअसल, बीते साल Deepfake फोटो और वीडियो की वजह से कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था. यहां तक कि ये मामले सेलिब्रिटी तक पहुंच गए थे, जहां रश्मिका मंदाना का एक फेक वीडियो काफी सुर्खियों में रहा था.  क्या Grok Spicy Mode भारत में उपलब्ध है? हां, भारत में Grok Spicy Mode मौजूद है, लेकिन इसका इस्तेमाल शर्तों के साथ करना होगा. अब अगर कोई शख्स Spicy Mode की मदद से किसी लड़की का फोटो अपलोड करता है और उसको Spicy Mode में कंवर्ट करने को कहता है तो यह पूरी तरह से गैर कानूनी काम है.  प्राइवेसी का उल्लंघन  जानकारी के लिए बता देते हैं कि इस एडल्ट कंटेंट जनरेट करना उस व्यक्ति की प्राइवेसी का उल्लंघन है और गैर कानूनी भी है. विक्टिम चाहे तो फोटो या वीडियो बनाने वाले के खिलाफ पुलिस कंप्लेंट भी दर्ज करा सकते हैं. xAI ने क्लियर कर दिया है कि Spicy Mode का मिसयूज कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है.  xAI की पॉलिसी लेकिन बहुत सीमित  xAI ने Spicy Mode में कुछ मॉडरेशन लगाए हैं, जैसे पब्लिक फिगर्स यानी सेलिब्रिटी आदि का एक्सप्लिसिट कंटेंट जनरेट नहीं होता. हालांकि प्राइवेट इंडिविजुअल्स के फोटो अपलोड किए जा सकते हैं, जिससे इस फीचर के मिसयूज होने का खतरा है. प्राइवेसी को सेफ रखने का क्या है तरीका?  xAI में फेस रिकग्निशन और आईडेंटिटी वेरिफिकेशन टूल्स का यूज किया जा रहा है. इससे पब्लिक फिगर्स की फोटो को एडल्ट कंटेंट में कंवर्ट नहीं कर पाएंगे. यहां यूजर्स चाहें तो कंटेंट की रिपोर्ट भी कर सकते हैं. इसके लिए xAI ने एक टीम तैयार की है, जो इन शिकायतों को सुनेगी और सॉल्व करेगी.  ग्लोबल पॉलिसी होने की वजह से परेशानी  xAI दुनिया के कई देशों में काम करता है और सभी देशों के अपने अलग-अलग नियम और कानून है. ऐसे में xAI के लिए ग्लोबल लेवल पर पॉलिसी लागू करना मुश्किल हो जाता है. हालांकि अगर कोई देश या स्थानीय अथॉरिटी कंप्लेंट करती हैं तो X उस पर एक्शन लेता है. Spicy Mode बड़े खतरे में डाल सकता है भारत में किसी की मर्जी के खिलाफ जाकर उसकी फोटो को एडल्ट तस्वीर में बदलना गैरकानूनी है. भारत में इसके लिए कई नियम-कानून भी हैं. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत धारा 354C और धारा 509 के तहत केस दर्ज किया जा सकता है. साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की धारा 66E, धारा 67, धारा 67A के तहत केस दर्ज कराया जा सकता है. 

भारत आएंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, ट्रंप की चुनौती के बीच बढ़ेगी भारत-रूस की नजदीकी

नई दिल्ली अमेरिका से मची तनातनी के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ रहे हैं. गुरुवार को मॉस्को में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के हवाले से बताया गया कि राष्ट्रपति पुतिन इस साल के अंत में भारत का दौरा करेंगे. रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे की खबर ऐसे वक्त में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद से नाराज होकर भारत पर टैरिफ 50% तक बढ़ा दिया है. रूसी न्यूज एजेंसी इंटरफैक्स (Interfax) ने अजीत डोभाल के हवाले से पहले बताया था कि राष्ट्रपति पुतिन अगस्त के अंत में भारत का दौरा करेंगे. हालांकि, बाद में खबर में संशोधन करते हुए एजेंसी ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन 2025 के अंत में भारत दौरे पर आएंगे. ट्रंप ने भारत पर लगाया है 50% टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर पहले 25% टैरिफ लगाया था. इसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने घोषणा की थी कि रूसी तेल की खरीद के संबंध में भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाई जाएगी. उन्होंने कहा था, 'भारत न केवल रूस से बड़ी मात्रा में तेल की खरीद कर रहा है बल्कि खरीदे गए तेल का एक बड़ा हिस्सा खुले बाजार में बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है. भारत को इस बात की परवाह नहीं है कि यूक्रेन में रूस की वॉर मशीन कितने लोगों को मार रही है. इसे देखते हुए मैं भारत पर टैरिफ बढ़ाने जा रहा हूं.'  ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की जिससे कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है. भारत पर यह 50% टैरिफ ट्रंप का कार्यकारी आदेश जारी होने के 21 दिन बाद से लागू होगा. ट्रंप के 50% टैरिफ पर भारत ने क्या कहा? ट्रंप के अतिरिक्त टैरिफ को भारत के विदेश मंत्रालय ने तर्कहीन बताया है. मंत्रालय ने कहा, 'यह कार्रवाई अनुचित, बेवजह और तर्कहीन है.' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया, 'हाल के दिनों में अमेरिका ने रूस से भारत के तेल आयात को निशाना बनाया है. हम इन मुद्दों पर पहले ही अपना रुख साफ कर चुके हैं जिसमें यह फैक्ट भी शामिल है कि हमारा आयात बाजार के हालातों पर आधारित है. और इसका मकसद भारत की 140 करोड़ आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है.' 

तमोट में विस्तार लेगा औद्योगिक क्षेत्र, निवेश की दिशा में आगे बढ़ेगा प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव औद्योगिक विकास को धरातल पर उतारने के अपने सतत प्रयासों के क्रम में आज रायसेन जिले के तामोट औद्योगिक क्षेत्र में निवेश संवाद, इकाइयों के भूमिपूजन, लोकार्पण और आशय पत्र वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा उद्योगों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता और कार्य संस्कृति का प्रतिबिंब है, जिसमें नीति के साथ क्रियान्वयन को भी बराबरी का महत्व दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तामोट में संचालित सागर मैन्युफैक्चरर प्रा. लि. की इकाई का भ्रमण करेंगे और रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित सामाजिक कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेसर्स आनंद टैक लास्ट प्राइवेट लिमिटेड प्लास्टिक पार्क का भ्रमण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों से संवाद करेंगे और प्रदेश में बन रहे निवेश अनुकूल वातावरण से उन्हें अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक क्षेत्र तामोट में 566 करोड़ रुपए के निवेश एवं 1781 रोजगार देने वाली 14 इकाइयों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण के साथ आशय पत्र वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 416 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक क्षेत्र तामोट में 300 करोड़ निवेश एवं 970 रोजगार देने वाली 6 इकाइयों का भूमिपूजन और 116 करोड़ रुपए से अधिक निवेश एवं 211 रोजगार देने वाली 6 इकाइयों का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्यमियों को भूमि आवंटन से संबंधित आशय-पत्र प्रदान करेंगे और औद्योगिक विकास के प्रति प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं को साझा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह प्रयास निवेशकों को आश्वस्त करने के साथ-साथ युवाओं के लिए नए रोजगार अवसरों का रास्ता भी खोलेगा। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा एमएसएमई प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह प्रदेश की औद्योगिक रणनीति और नीतिगत परिवर्तनों की जानकारी साझा करेंगे। जे.बी.एम, विनप्रो और मंडीदीप औद्योगिक एसोसिएशन जैसे प्रमुख निवेशक समूहों के प्रतिनिधि मध्यप्रदेश में निवेश अनुकूल माहौल और प्रदेश की निवेश फ्रेंडली नीतियों के संबंध में विचार साझा करेंगे। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, भोजपुर विधायक श्री सुरेंद्र पटवा और विधायक श्री नारायण सिंह पंवार भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। 

इंदौर को मिलेगी बड़ी स्वास्थ्य सुविधा, मोहन भागवत करेंगे 96 करोड़ के हॉस्पिटल का उद्घाटन

इंदौर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 10 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व के अगले दिन इंदौर प्रवास पर रहेंगे। वे यहां 96 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कैंसर केयर हॉस्पिटल का उद्घाटन करेंगे। साथ ही शहर में विभिन्न समाजों से जुड़े लोगों के साथ अलग-अलग सत्रों में चर्चा भी करेंगे। यह मोहन भागवत का पिछले सात महीनों में तीसरा इंदौर दौरा होगा। इससे पहले वे 3 जनवरी और 13 जनवरी 2025 को भी इंदौर आ चुके हैं। पूरे दिन रहेंगे इंदौर, समाजजनों से करेंगे संवाद संघ सूत्रों के मुताबिक, डॉ. भागवत इंदौर में दिनभर रहेंगे। वे विजय नगर स्थित एक सभागृह में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम अलग-अलग सत्रों में होगा, हालांकि इसका आधिकारिक शेड्यूल अब तक जारी नहीं किया गया है। डॉ. भागवत का आगमन श्री गुरुजी सेवा न्यास द्वारा निर्मित माधव सृष्टि आरोग्य केंद्र एवं कैंसर केयर सेंटर के उद्घाटन हेतु हो रहा है। यह प्रोजेक्ट दो चरणों में विकसित किया जा रहा है। – पहले चरण में 26 करोड़ की लागत से दो बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और तीन मंजिलें तैयार की गई हैं। – दूसरे चरण में हाईटेक मेडिकल मशीनरी और अन्य फ्लोर का निर्माण किया जाएगा। जनभागीदारी से बन रहा है अत्याधुनिक सेंटर 96 करोड़ के इस कैंसर केयर प्रोजेक्ट का निर्माण जनभागीदारी के माध्यम से किया जा रहा है। इसमें कई कंपनियों ने CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के तहत सहयोग किया है, जबकि अन्य दानदाता भी आगे आए हैं। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत एक रियायती दर वाली ओपीडी से हुई थी, जहां कई वरिष्ठ चिकित्सक नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं। प्रबंधन समिति में मुकेश हजेला अध्यक्ष और दिनेश अग्रवाल उपाध्यक्ष हैं। 2021 में हुई थी OPD की शुरुआत इस कैंसर सेंटर की OPD सेवाएं मार्च 2021 में शुरू हुई थीं। इसका उद्घाटन तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और RSS के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने किया था। 

भोपाल बनेगा देश का टैक सेंटर, सीएम डॉ. यादव ने बताया युवाओं के लिए नया विज़न

भोपाल बन रहा देश का टैक हब, युवाओं के कॅरियर को मिलेगी नई उड़ान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल उभर रहा टेक्नोलॉजी हब के रूप में, युवाओं को मिलेंगे नए अवसर : सीएम डॉ. यादव टैक्नोलॉजी के नए नक्शे पर भोपाल, सीएम बोले– युवाओं का भविष्य होगा उज्जवल भोपाल बनेगा देश का टैक सेंटर, सीएम डॉ. यादव ने बताया युवाओं के लिए नया विज़न भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब नवाचार का केंद्र बनकर भारत के डिजिटल भविष्य को आकार देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यहां ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के अग्रणी केंद्र और उद्योग साझेदारियां आकार ले रही हैं। भोपाल जल्द ही ड्रोन टेक्नोलॉजी का भी हब बनेगा। एनीमेशन ग्राफ़िक्स जैसे नए सेक्टर्स भी प्रदेश के युवाओं के कॅरियर को नई उड़ान देने तैयार हैं। भोपाल में सेमी-कंडक्टर और डाटा-सेंटर जैसे ग्लोबल टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स भी विकसित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विकासमूलक रणनीतिक सोच से भोपाल का हाई-टैक इंडस्ट्रीज के लिए एक मनपसंद गंतव्य के रूप में उभरना कोई संयोग नहीं है, बल्कि, योजनाबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर एवं ईको सिस्टम का विकास और भविष्योन्मुखी नीतियों के निर्माण का परिणाम है। देशी-विदेशी कंपनियां मध्यप्रदेश में उद्यमिता को चुन रही हैं। उन्हें प्रदेश में ईज-ऑफ-डूइंग बिजनेस और नीतिगत प्रक्रिया सहयोग भी मिल रहा है। सेमी-कंडक्टर और ड्रोन जैसे डीप-टैक उपक्रमों से लेकर एवीजीसी और डाटा सेंटर्स तक के लिये मध्यप्रदेश भारत के डिजिटल भविष्य का लॉन्चपैड बनता जा रहा है। एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: ग्लोबल स्किल्स पार्क में नया क्रिएटिव हब ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल में स्थापित हो रहा एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस युवाओं को गेमिंग, एनीमेशन और वीएफएक्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण और स्टार्ट-अप्स के लिए मंच देगा। इसमें एलईडी वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो, एआई लैब्स, मोशन कैप्चर सिस्टम और रेंडर फार्म्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। यह केंद्र देश के मेट्रो शहरों पर निर्भरता को कम करते हुए एक नया डिजिटल वर्कफोर्स तैयार करेगा। आइसर का ड्रोन ट्रेनिंग और शोध केन्द्र बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईसर भोपाल में बन रहा ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एआई-एनेबल्ड ड्रोन निर्माण, स्वदेशी प्रोटोटाइपिंग और एआर/वीआर आधारित प्रशिक्षण के अनूठे मंच के रूप में विकसित हो रहा है। यहां देश की पहली एआई-यूएवी डाटा रिपॉजिटरी भी स्थापित होगी, जो कृषि, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों के लिए नवाचारों को प्रेरित करेगी। सेमीकंडक्टर निर्माण की कायनेस सेमिकॉन की इकाई भोपाल में भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का अहम भागीदार कायनेस सेमिकॉन अब भोपाल के आईटी पार्क में अपनी इकाई स्थापित कर रहा है। इससे चिप डिज़ाइन, असेंबली और अनुसंधान को एक नई दिशा मिलेगी। यह कदम प्रदेश की डीप-टैक नीति को सशक्त करेगा। भोपाल में बनेगा मध्यप्रदेश का पहला निजी ग्रीन डाटा सेंटर एशिया का सबसे बड़ा रेटेड-4 हाइपरस्केल डाटा सेंटर ऑपरेटर, भोपाल के आईटी पार्क में ग्रीन डाटा सेंटर स्थापित कर रहा है। इमर्सिव कूलिंग जैसी तकनीकों से युक्त यह डाटा सेंटर जीरो-एमिशन लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। यह क्लाउड और एआई कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। ईएमसी 2.0: 209 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर भोपाल के बांदाखेड़ी में 209 एकड़ में फैला ईएमसी2.0 क्लस्टर मोबाइल, सेमीकंडक्टर, पीसीबी, एलईडी और ई-मोबिलिटी उद्योगों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें रेडी-बिल्ट फैक्ट्री, टेस्टिंग लैब्स और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। इसमें 1500 करोड़ रूपये का निवेश होगा और इससे 75 हजार रोजगार सृजित होंगे। सिक्योर सर्किट: पीसीबी मैन्युफैक्चरिंग से आत्मनिर्भरता की ओर भोपाल में स्थापित हो रही प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) निर्माण इकाई राज्य के सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करेगी। यह रक्षा, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम होगा। राज्य सरकार उद्योगों को न केवल कम समय में मंजूरी और समाधान उपलब्ध करा रही है,बल्कि निवेशकों में दीर्घकालिक साझेदारी का भरोसा भी जगाने में सफल हो रही है। भोपाल की यह यात्रा केवल तकनीकी विकास की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नई कहानी लिखने का प्रारंभ है। प्रदेश अब नवाचार, ज्ञान और डिजिटल कौशल के केंद्र के रूप में नया उदाहरण बनकर उभर रहा है।

धरती के नीचे दबा है लाखों टन सोना: जबलपुर के सिहोरा में मिला विशाल सोना भंडार

जबलपुर अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा के लिए मशहूर मध्य प्रदेश का जबलपुर काफी सुर्खियों में है। जबलपुर की सिहोरा तहसील के महंगवा केवलारी क्षेत्र में भू-वैज्ञानिकों ने एक विशाल सोने के भंडार की खोज की है। यह खोज भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की टीम द्वारा कई वर्षों की मेहनत और मिट्टी के नमूनों के रासायनिक विश्लेषण के बाद सामने आई है। लगभग 100 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में लाखों टन सोना होने का अनुमान है, जो मध्य भारत की सबसे बड़ी खनिज खोजों में से एक हो सकती है। वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई भू-वैज्ञानिकों की टीम ने महंगवा केवलारी में मिट्टी और चट्टानों के सैंपल की स्टडी की। रासायनिक परीक्षणों में न केवल सोने की मौजूदगी की पुष्टि हुई, बल्कि तांबा और अन्य कीमती धातुओं के अंश भी मिले। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही लौह अयस्क, मैंगनीज, बॉक्साइट और संगमरमर जैसे खनिजों के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन सोने की खोज ने इसकी महत्ता को और बढ़ा दिया है। वैज्ञानिकों के चेहरों पर इस खोज ने नई चमक ला दी है और वे इसे मध्य प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए गेम-चेंजर मान रहे हैं। जबलपुर बना खनिज संपदा का नया केंद्र जबलपुर पहले से ही 42 खदानों के साथ खनन गतिविधियों का केंद्र रहा है, जहां से लौह अयस्क चीन सहित कई देशों में निर्यात किया जाता है। अब सोने के भंडार की खोज ने इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और आकर्षक बना दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह भंडार आर्थिक रूप से व्यवहार्य साबित होता है, तो जल्द ही व्यावसायिक खनन शुरू हो सकता है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं। क्या बदलेगी मध्य प्रदेश की किस्मत? यह खोज न केवल जबलपुर, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक पल हो सकता है। पहले पन्ना की हीरे की खदानों ने मध्य प्रदेश को वैश्विक मानचित्र पर जगह दिलाई थी और अब जबलपुर का सोना इसे और चमका सकता है। हालांकि, अगला कदम इस भंडार की मात्रा और खनन की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन करना होगा। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह खोज मध्य प्रदेश को खनिज संपदा के मामले में देश का एक नया सितारा बना सकती है।