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अर्चना तिवारी की गुमशुदगी रहस्य में नया खुलासा, 13 दिन बाद सुराग हाथ लगा

इंदौर इंदौर से ट्रेन में सवार होकर रक्षा बंधन मनाने कटनी के लिए निकली 29 साल की अर्चना तिवारी का 13 दिनों के बाद भी कुछ पता नहीं चला है। हालांकि, अब पुलिस के हाथ एक सुराग लगा है जिसके बाद अर्चना की मिस्ट्री सुलझने की उम्मीद जागी है। जीआरपी ने ग्वालियर के एक कांस्टेबल राम तोमर को हिरासत में लिया है। पता चला है कि राम तोमर ने ही अर्चना तिवारी के लिए टिकट कराया था। तोमर से पूछताछ करके यह पता लगाया जा रहा है कि उसका अर्चना के साथ क्या संबंध है, उसने क्यों इंदौर से ग्वालियर तक का टिकट कराया था और क्या अर्चना का राज वह जानता है? इससे पहलेअर्चना के परिजनों ने मानव तस्करी की आशंका जताते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग की थी। इंदौर हाई कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस के साथ ही सिविल जज की तैयारी कर रही अर्चना 7 अगस्त को नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से कटनी के लिए निकली थीं। अर्चना की आखिरी लोकेशन भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन पर मिली थी, जिसके बाद उसके परिजनों ने रानी कमलापति जीआरपी थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था। पुलिस रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से लेकर इटारसी और कटनी तक के क्षेत्रों में भी गहनता से जांच कर चुकी है और स्टेशन व आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी खंगाल चुकी है लेकिन अब तक अर्चना का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया कि आस-पास के सभी रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और ट्रैवल एजेंसियों को इसकी सूचना दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच में हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है, चाहे वह दुर्घटना हो, अपहरण या अन्य कोई वजह। लोढ़ा ने बताया कि अर्चना की आखिरी लोकेशन इटारसी रेलवे स्टेशन मिली है और वहीं उसका मोबाइल बंद हुआ है। उन्होंने कहा, "इटारसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में उसे कुछ लोगों ने देखा भी है। उसके बाद वह कहां गई, क्या हुआ… हम पता लगाने में जुटे हुए हैं। हमें उम्मीद है कि हम जल्द पता लगा लेंगे।" पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच के दौरान जहां जरूरत पड़ रही है, वहां संबंधित अन्य एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। इस बीच, अर्चना के परिजनों ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए इसे मानव तस्करी का मामला बताया है और इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। अर्चना के ताऊ बाबू प्रकाश तिवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, 'यह मानव तस्करी का मामला है लेकिन पुलिस इस नजरिए से जांच नहीं कर रही है।' 13 दिन की जांच के बाद पुलिस को सुराग मिला कि अर्चना का टिकट भंवरपुरा थाने में तैनात कांस्टेबल राम तोमर ने कटाया था। उसने इंदौर से ग्वालियर तक के लिए टिकट बुक की थी। दोनों के बीच में क्या रिश्ता है, यह अभी साफ नहीं हुआ है। परिवार के लोगों ने तोमर को पहचानने से इनकार किया है। जीआरपी तोमर से पूछताछ करके पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों के बीच में किस तरह का संबंध है और क्या वह जानता है कि अर्चना कहां है। वहीं सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान तोमर ने कहा है कि उसने टिकट जरूर कराया था लेकिन अर्चना ने किसी और टिकट पर यात्रा की थी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व फोटोग्राफी दिवस की दी शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व फोटोग्राफी दिवस पर सभी फोटोग्राफरों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने मुख्यमंत्री निवास पर प्रेस प्रकोष्ठ से जुड़े फोटोग्राफरों के साथ फोटो खिंचवाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फोटोग्राफी न केवल एक कला है, बल्कि यह जीवन के पलों को कैप्चर करने और उन्हें अमर बनाने का एक सर्व सुलभ साधन भी है। फोटोग्राफर हमारी सांस्कृतिक विविधता, प्रदेश की समृद्ध विरासत और सुंदरता को विश्व के सम्मुख प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम हैं। हमारे फोटोग्राफर साथी अपनी विधा में वैश्विक स्तर पर आ रही अद्यतन तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर अपनी रुचि और व्यवसाय में अग्रसर हों। साथ ही फोटोस के माध्यम से समाज को अविस्मरणीय पलों व भावों को सदा के लिए सहेजने की धरोहर सौंपते रहें। 

38 लाख महिला किसान बदल रहीं बिहार की तस्वीर, खेत से बाजार तक संभाली कमान

अब खेत से बाजार तक महिलाओं का कमाल! सीएम नीतीश ने बदली बिहार की तस्वीर  38 लाख महिला किसान बदल रहीं बिहार की तस्वीर, खेत से बाजार तक संभाली कमान  बिहार की महिलाएं बनीं खेती में ताकत की मिसाल! नीतीश सरकार ने दी आधुनिक तकनीक की उड़ान  अब घर से लेकर खेत तक, महिलाओं के हाथ में कमान! हाथों में ड्रोन और अपने नाम पर कारोबार   61 महिला कंपनियों ने खेती को बनाया व्यापार, किसानों को मिल रहा सही दाम पटना बिहार की मिट्टी अब महिलाओं के हाथों से नई कहानी लिख रही है। कभी अपने घर की चौखट तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज खेत, खलिहान और कारोबार का नेतृत्व संभाल रहीं हैं। इसका श्रेय जाता है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच और उनकी सरकार की उन योजनाओं को, जिन्होंने महिलाओं को खेती-बाड़ी से लेकर कारोबार तक के लिए सशक्त और जिम्‍मेदार बनाया है। 38 लाख महिलाएं बनीं आधुनिक किसान राज्यभर में अब तक 38 लाख से अधिक महिला किसान आधुनिक खेती के तौर-तरीके सीख चुकी हैं। यह बदलाव जीविका योजना और कृषि विभाग की साझेदारी का नतीजा है। अब बिहार के गांव-गांव में खुले 519 कस्टम हायरिंग सेंटर हैं। जहां से महिलाएं ट्रैक्टर, सीड ड्रिल, थ्रेशर और पावर टिलर जैसी मशीनें किराए पर ले रही हैं। इससे न सिर्फ खेती की लागत घटी है, बल्कि मानव श्रम में कमी आई है और उत्पादन भी दोगुने रफ्तार से बढ़ा है। पशुपालन और नीरा उत्पादन में भी महिलाएं आगे खेती ही नहीं, महिलाएं अब बकरी पालन, दुग्ध उत्पादन और छोटे डेयरी कारोबार से भी कमाई कर रही हैं। आज 10 लाख से ज्यादा परिवार इनसे जुड़े हैं। बीते साल महिला स्वयं सहायता समूहों ने 1.9 करोड़ लीटर नीरा का उत्पादन और बिक्री की। इससे न सिर्फ गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई बल्कि महिलाओं के लिए स्थायी आमदनी का नया जरिया भी बना। अररिया में तो सीमांचल बकरी उत्पादक कंपनी के तहत करीब 20 हजार परिवार जुड़ भी चुके हैं। बाजार तक महिलाओं की पकड़ खेती में व्यापारिक सोच लाने के लिए अब 61 किसान उत्पादक कंपनियां (FPCs) पूरी तरह महिलाओं के हाथों में हैं। ये कंपनियां खेत से उपज खरीदती हैं, उसका प्रोसेसिंग और पैकेजिंग करती हैं और फिर बाजार ले जाकर बेचती भी हैं। इसका सीधा फायदा महिला किसानों को मिल रहा है। उनकी मेहनत को सही दाम मिल रहा है और घर में भी सम्‍मान मिल रहा है।  शहद से लेकर ड्रोन तक आज बिहार में कुल 11,855 महिलाएं मधुमक्खी पालन कर रही हैं। इनकी मेहनत ने अब तक 3,550 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया है।  इसके अलावा, सरकार की ‘ड्रोन दीदी योजना’ ने महिलाओं के हाथों में टेक्नोलॉजी थमा दी है। इस योजना में महिलाओं को ड्रोन खरीदने पर 80 फीसद यानी 8 लाख रुपये अनुदान मिल रहा है और बाकी राशि जीविका समूह उपलब्ध करा रहे हैं। आने वाले दो साल में देशभर के 14,500 महिला समूहों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। खेत-खलिहान की नई इबारत जैविक खेती, बीज संरक्षण, सब्जी-फल प्रसंस्करण और कृषि उत्पादों में विविधता, इन सबमें महिलाएं अब बराबर की भागीदार हैं। गांव की चौखट से निकलकर खेतों में ड्रोन उड़ाती महिलाएं इस बदलाव का सबसे बड़ा सबूत हैं। बिहार की बदलती तस्वीर साफ कह रही है।

ग्वालियर के स्कूलों में आधार अपडेशन कैंप, किशोरों का होगा बायोमैट्रिक अपडेट

 ग्वालियर स्कूली बच्चों को पहले से ही बता दें कि आधार अपडेशन के लिये कौन-कौन से दस्तावेजों की जरूरत होगी, जिससे स्कूलों में लगने जा रहे आधार शिविरों में सभी बच्चों के आधार संबंधी काम हो सकें। यह निर्देश कलेक्टर रुचिका चौहान ने आधार शिविरों की तैयारियों की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिस स्कूल में शिविर लगने जा रहा है उस स्कूल सहित अन्य जनप्रतिनिधि स्कूलों में भी शिविर की तिथियों के बारे में जानकारी दी जाए। सोमवार को कलेक्ट्रेट के सभागार में आयोजित हुई बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य शिक्षा केन्द्र की पहल पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के समन्वय से 'विद्यार्थी के लिए आधार, अब विद्यालय के द्वार' अभियान के तहत जिले के सभी विकासखंडों के अंतर्गत कुल 32 स्कूलों में 10–10 दिवसीय आधार शिविर लगने जा रहे हैं। शिविरों की तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं। इन शिविरों में 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के स्कूली बच्चों का अनिवार्य बायोमैट्रिक अपडेट-2 खासतौर पर किया जायेगा। साथ ही आधार पर सुधार संबंधी अन्य कार्य भी कराए जायेंगे। यह पहल मुख्य रूप से बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) पर केंद्रित है। इसमें उनके आधार में उंगलियों के निशान, आईरिस स्कैन और एक तस्वीर अपडेट करना शामिल है। पहला अपडेट तब आवश्यक है जब बच्चा 5 वर्ष का हो जाए। पहला एमबीयू 5 से 7 वर्ष की आयु के बीच पूराहोने पर निःशुल्क रखा गया है। विद्यार्थी के उम्र 7 वर्ष की आयु से अधिक होने के बाद शुल्क लागू होगा। दूसरा एमबीयू तब आवश्यक है जब विद्यार्थी 15 वर्ष का हो जाएगा। तीसरा एमबीयू 15 से 17वर्ष की आयु के बीच पूरा होने पर निःशुल्क है, लेकिन 17 वर्ष की आयु के बाद शुल्क लागू होगा।

अनुकंपा के आधार पर नौकरी: नीतीश कुमार ने 5353 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

पटना  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित 'संवाद' में अनुकंपा के आधार पर माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 4835 विद्यालय लिपिक एवं 518 विद्यालय परिचारी के पदों पर चयनित कुल 5353 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सांकेतिक रूप से मणि कुमारी,अमित गौरव, दिव्या राज, किरण कुमारी गुप्ता एवं तूबा अशरफ को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नवनियुक्त कर्मियों को मेरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं है। मुझे विश्वास है कि सभी नवनियुक्त कर्मी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2006 से शिक्षा विभाग के अन्तर्गत मृत शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर नियोजन ईकाई के माध्यम से शिक्षक के पद पर नियोजन हेतु प्रावधान किया गया। मृत शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के आश्रितों की योग्यता शिक्षक के पद हेतु नहीं रहने के कारण वर्ष 2020 में नियोजन ईकाई के माध्यम से विद्यालय लिपिक एवं विद्यालय परिचारी के नियत वेतन पर अनुकम्पा के आधार पर नियोजन इकाई के माध्यम से वर्ष 2024 तक नियोजन किया गया। वर्तमान में राज्य सरकार ने शिक्षकों की तरह अनुकम्पा पर नियुक्ति हेतु विद्यालय लिपिक एवं विद्यालय परिचारी का पद जो राज्य कर्मी के श्रेणी में आते हैं, नियुक्ति हेतु प्रावधान किया गया है। अनुकम्पा पर नियुक्त होने वाले विद्यालय लिपिक एवं विद्यालय परिचारी का वेतन एवं सेवाशर्त बेहतर हुआ है। आज पूरे राज्य में 4835 विद्यालय लिपिक एवं 518 विद्यालय परिचारी अर्थात् कुल 5353 आश्रितों की नियुक्ति की गई है। पटना जिले में 212 विद्यालय लिपिक एवं 28 विद्यालय परिचारी की नियुक्ति की गई है। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ ने मुख्यमंत्री को पुस्तक भेंटकर स्वागत किया।

कर्मचारियों को मिली राहत, हरियाणा CM सैनी ने किया वेतन से जुड़ा बड़ा ऐलान

चंडीगढ़ जुलाई 2023 में 42 दिन की हड़ताल पर रहे लिपिकों को प्रदेश सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब इस हड़ताल अवधि को उपार्जित अवकाश (लीव आफ दी काइंड ड्यू) माना जाएगा। हड़ताल अवधि का न तो वेतन काटा जाएगा और न ही इस अवधि को सेवा में बाधा (ब्रेक इन सर्विस) माना जाएगा। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का कार्यभार भी है, ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। हड़ताल पर जाने से पूर्व अर्जित अथवा संचित ‘अर्जित अवकाश’ को सर्वप्रथम समायोजित किया जाएगा।इसके पश्चात ‘हाफ पे लीव’ जाएगा। अर्जित अवकाश और ‘हाफ पे लीव’ की कटौती के बाद भी यदि हड़ताल अवधि शेष रहती है तो अग्रिम अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाएगा, जिसे संबंधित लिपिकों के भविष्य में अर्जित होने वाले अवकाश खाते से समायोजित किया जाएगा। क्लर्क एसोसिएशन ने मूल वेतन 35 हजार 400 रुपये करने की मांग को लेकर यह हड़ताल की थी। इसमें 15 हजार से अधिक लिपिक शामिल हुए थे। तब प्रदेश सरकार ने नो वर्क-नो पे का फार्मूला लागू करते हुए हड़ताली कर्मचारियों का वेतन काटने के निर्देश जारी कर दिए थे। मुख्य सचिव द्वारा जारी नए आदेश में कहा गया है कि यह छूट केवल एक बार की विशेष व्यवस्था के तौर दी जा रही है और इसे भविष्य में मिसाल के तौर पर नहीं लिया जाएगा। यह निर्देश केवल कुछ श्रेणियों के कर्मचारियों, खास तौर पर लिपिकों पर लागू होंगे, जिन्होंने उस विशेष हड़ताल में भाग लिया था। यह निर्देश अन्य किसी भी मामले में लागू नहीं होंगे। तदनुसार, विभागों में कार्यरत एसएएस काडर से सत्यापन के उपरांत वेतन जारी किया जा सकता है। इस संबंध में सभी प्रशासकीय सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, एसडीएम और खजाना अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।

सिनेमा और शिक्षा जगत में शोक, प्रोफेसर अच्युत पोतदार का 91 वर्ष में निधन

मुंबई  एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है. मशहूर एक्टर अच्युत पोतदार का 91 साल की उम्र में निधन हो गया है. 18 अगस्त को उन्हें मुंबई, ठाणे के अस्पताल में एडमिट कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. एक्टर उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे. आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.  नहीं रहे अच्युत पोतदार अच्युत पोतदार टेलीविजन और बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर थे. एक्टर के निधन की खबर से उनके चाहने वालों के बीच मातम पसर गया है. पिछले कुछ सालों में उन्होंने हिंदी सिनेमा के अलावा मराठी इंडस्ट्री में भी अपनी पहचान बना ली थी. वो एक मंझे हुए कलाकार थे, जिन्हें अपनी एक्टिंग से लोगों का दिल जीतना बखूबी आता था.  अच्युत पोतदार ने अपने एक्टिंग करियर में लगभग 125 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था. इनमें हिंदी, मराठी और अन्य भाषाओं की फिल्में शामिल हैं. एक्टर को  'अर्ध सत्य', 'तेजाब', 'दिलवाले', 'वास्तव', 'परिणीता', 'दबंग', '3 इडियट्स' और 'लगे रहो मुन्ना भाई' जैसी मूवीज के लिए जाना जाता है.  आमिर खान स्टारर फिल्म '3 इडियट्स' में उन्होंने प्रोफेसर का रोल अदा किया था. फिल्म से उनका डायलॉग 'अरे कहना क्या चाहते हो' काफी फेमस हुआ था. आज भी ज्यादातर लोग उन्हें उनके इसी डायलॉग से जानते हैं. फिल्म में उनका रोल छोटा लेकिन मजेदार था. सेना में भी किया था काम  अच्युत पोतदार ने मध्य प्रदेश में बतौर प्रोफेसर अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना में कैप्टन के रूप में देश की सेवा की. कई सालों तक देश की सेवा करने के बाद वो 1967 में सेना से रिटायर हो गए. उसके बाद उन्होंने लगभग 25 सालों तक इंडियन ऑयल में एग्जीक्यूटिव के रूप में काम किया.  अच्युत पोतदार ने 44 साल की उम्र में उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था. 80 के दशक में वो बड़े पर्दे पर छाए हुए थे. फिल्मों के बाद उन्होंने टीवी की दुनिया में एंट्री ली. टीवी पर उन्होंने 'वागले की दुनिया', 'मिसेज तेंदुलकर', 'माझा होशिल ना' और 'भारत की खोज' जैसे शोज में काम किया. रोल छोटा हो या बड़ा, वो हर किरदार में खुद को ढालना जानते थे.   

हरियाणा: 61 किमी कच्चे रास्ते होंगे पक्के, पंचकूला के ग्रामीणों को मिलेगा सुगम आवागमन

 पंचकूला  हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी ने जिला पंचकूला के पाहड़ी क्षेत्र मोरनी व कालका में लोगों को सुगम आवागमन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए 19 गांवों के लगभग 61 किलोमीटर कच्चे रास्तों को पक्का कर पेवर ब्लॉक की सड़कें बनाने के निर्देश दिए। इन सड़कों की चौड़ाई  12 फुट होगी। CM ने बीते दिन सोमवार को लोक निर्माण विभाग और वन विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने वन विभाग से एनओसी लेकर शीघ्र इन गांवों में सड़कों के निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।    उन्होंने कहा कि मोरनी व कालका के पहाड़ी क्षेत्र के इन गांवों में सड़क बनने से वहां के निवासियों को आवाजाही के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी और इन इलाकों में विकास के नए मार्ग प्रशस्त होगी। यहां रहने वाले निवासियों को कच्ची सड़कों से होने वाली समस्याओं से जल्द निजात मिलेगी।  CM ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश में नई सड़कों के निर्माण और मुरम्मत में गुणवता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुणवता से किसी भी प्रकार का समझौता कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि तय समय सीमा में विकास कार्यों  को पूरा करवाया जाए। यदि कोई कार्य को पूरा करने में देरी करता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिला पंचकूला के थापली बधिशेर से कोटी 1.68 किलोमीटर, पिंजौर मल्लाह से मंगनीवाला 1.20 किलोमीटर और गोबिंदपुर से थाथर 5.35 किलोमीटर सड़क की वन विभाग से एनओसी लेकर इन सड़कों का निर्माण कार्य भी अतिशीघ्र शुरू किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने पानीपत से सफीदों 41 किलोमीटर, सफीदों से जींद 21.65 किलोमीटर और जिला अम्बाला में साहा चौक से पंचकूला-यमुनानगर फोरलेन तक व साहा चौक से कालपी तक तथा टोहाना रतिया सड़क के सुदृढ़ीकरण व चौड़ीकरण करने के कार्य को जल्द शुरू करने के भी निर्देश दिए।   

विपक्ष ने उतारा उम्मीदवार, उपराष्ट्रपति चुनाव में सुदर्शन-राधाकृष्णन आमने-सामने

नई दिल्‍ली उपराष्‍ट्रपति पद के लिए विपक्ष ने अपने उम्‍मीदवार का ऐलान कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी सुदर्शन रेड्डी विपक्ष के उपराष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार होंगे. कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ये जानकारी दी. बी सुदर्शन रेड्डी  भारत के सबसे सम्मानित कानूनविदों में शामिल हैं. वह सुप्रीम कोर्ट के जज भी रहे हैं , इसके अलावा गुवाहाटी और आंध्र उच्च न्यायालय के भी जज रहे हैं.  कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने बताया कि गठबंधन ने सर्वसम्मति से बी सुदर्शन रेड्डी का नाम तय किया है. उनका मुकाबला एनडीए गठबंधन के सीपी राधाकृष्णन से होगा.  बी सुदर्शन रेड्डी आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के प्रताप रेड्डी के अधीन सिविल और संवैधानिक मामलों पर प्रैक्टिस शुरू की थी. 8 अगस्त 1988 को रेड्डी को हाई कोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त किया गया और वह केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील बने. इंडिया गठबंधन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर सुदर्शन रेड्डी के नाम का ऐलान किया. कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि सभी पार्टियों ने सहमति से उनके नाम को फाइनल किया है. टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने बताया कि आम आदमी पार्टी भी सुदर्शन रेड्डी के नाम से सहमत है. डीएमके, टीएमसी… सभी की मांग पूरी हुई विपक्ष का कहना है, "वो (एनडीए) संघ से जुड़े व्यक्ति को लाए हैं, हम सुप्रीम कोर्ट से आए व्यक्ति को सामने ला रहे हैं." यह नाम विपक्ष की तमाम शर्तों पर खरा उतरता है – दक्षिण भारत से उम्मीदवार जिसे डीएमके चाहती थी, और राजनीति से बाहर का चेहरा जिसकी मांग टीएमसी ने उठाई थी. टीएमसी का कहना था कि ऐसे शख्स को उम्मीदवार बनाया जाए जो नॉन-पॉलिटिकल हों. वहीं डीएमके चीफ और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने तमिलनाडु से किसी चेहरे को उम्मीदवार बनाने की मांग की थी. INDIA गठबंधन के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी कौन हैं? बी सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को हुआ था. वे भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके हैं. सुदर्शन रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के अकुला मायलारम गांव में एक कृषि परिवार में हुआ. शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी से 1971 में लॉ पास किया. अपने करियर की शुरुआत रेड्डी ने सिविल और संवैधानिक मामलों की प्रैक्टिस से की और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट के. प्रताप रेड्डी के साथ काम किया. इसके बाद 8 अगस्त 1988 को उन्हें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में गवर्नमेंट प्लीडर नियुक्त किया गया और वे केंद्र सरकार के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसल बने. गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे सुदर्शन रेड्डी 1993 में वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए और उस्मानिया यूनिवर्सिटी के लीगल एडवाइजर भी रहे. न्यायिक करियर में आगे बढ़ते हुए रेड्डी 2 मई 1993 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एडिशनल जज नियुक्त किए गए. इसके बाद 5 दिसंबर 2005 को वे गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. सुदर्शन रेड्डी को 12 जनवरी 2007 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया और वे 8 जुलाई 2011 को रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद मार्च 2013 में उन्होंने गोवा के पहले लोकायुक्त के रूप में कार्यभार संभाला, हालांकि अक्टूबर 2013 में उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफ़ा दे दिया था. जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी का करियर      जस्टिस रेड्डी को 12 जनवरी 2007 को भारत के सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था.      वह 8 जुलाई 2011 को इस पद से सेवानिवृत्त हुए.      बी सुदर्शन रेड्डी को 5 दिसंबर 2005 को गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था.      रेड्डी का जन्म 1946 में भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के तत्कालीन इब्राहिमपटनम तालुका के अकुला मायलाराम गांव में एक कृषक परिवार में हुआ था.     बी सुदर्शन रेड्डी ने हैदराबाद में शिक्षा प्राप्त की और 1971 में उस्मानिया विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की.      बी सुदर्शन रेड्डी ने मार्च 2013 में पहले गोवा लोकायुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया और अक्टूबर 2013 में निजी कारणों से पद से इस्तीफा दे दिया. 8 जुलाई 1946 को जन्‍मे बी सुदर्शन रेड्डी गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके हैं.  सुदर्शन रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के अकुला मायलारम गांव में हुआ. बी सुदर्शन रेड्डी ने शुरुआती पढ़ाई के बाद हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी से 1971 में लॉ में ग्रेजुएशन की थी. 1993 में बी सुदर्शन रेड्डी आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए और उस्मानिया यूनिवर्सिटी के लीगल एडवाइजर भी रहे हैं. बी सुदर्शन रेड्डी को 12 जनवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया था और वे 8 जुलाई 2011 को रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद मार्च 2013 में उन्होंने गोवा के पहले लोकायुक्त के रूप में कार्यभार संभाला. हालांकि अक्टूबर 2013 में उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफ़ा दे दिया था.

ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने को MGNREGA-जीविका दीदी हाट बैठक आयोजित

MGNREGA एवं जीविका दीदी हाट कन्वर्जेन्स विषय पर बैठक आयोजित  ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने को MGNREGA-जीविका दीदी हाट बैठक आयोजित MGNREGA व जीविका दीदी हाट कन्वर्जेन्स पर बैठक, ग्रामीण आजीविका बढ़ाने पर जोर पटना बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में  “MGNREGA एवं जीविका दीदी हाट कन्वर्जेन्स” विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता MGNREGA कमिश्नर सह अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका, आई.ए.एस. श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा ने की। बैठक में INFUSION (Microsave Consulting, ISB) के प्रतिनिधियों, जीविका  तथा MGNREGA विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण, आजीविका संवर्धन एवं पोषण-सुरक्षित बाजार तंत्र के विकास हेतु ‘जीविका दिदी हाट’ मॉडल को बढ़ावा देना था। इसमें यह विचार किया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के अंतर्गत विभिन्न जिलों में निर्मित ग्रामीण हाटों को किस प्रकार ‘जीविका दीदी हाट’ के अनुरूप विकसित किया जा सकता है। साथ ही इन हाटों को SHG (स्वयं सहायता समूह) आधारित महिला उद्यमिता केंद्र के रूप में पुनःस्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका), ग्रामीण विकास विभाग की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाकर उन्हें आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। जीविका के अंतर्गत अब तक लाखों महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है। ये महिलाएं विभिन्न उद्यमों जैसे कि कृषि, पशुपालन, बुनाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, और सेवा क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। ‘जीविका दीदी हाट’ इसी श्रृंखला में एक अभिनव पहल है, जिसमें SHG की महिलाओं द्वारा संचालित ग्रामीण बाजारों को एक मंच प्रदान किया जाता है। इस पहल का उद्देश्य न केवल महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना है, बल्कि ग्रामीण समुदाय को पौष्टिक, सुरक्षित और स्थानीय रूप से उत्पादित खाद्य सामग्री सुलभ कराना भी है। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बैठक के दौरान यह तय किया गया कि राज्य के विभिन्न जिलों में MGNREGA के तहत निर्मित हाट स्थलों की पहचान कर उन्हें आवश्यक ढांचागत सुविधाओं जैसे शेड, जल एवं स्वच्छता व्यवस्था, स्टॉल्स, बैठने की व्यवस्था आदि से सुसज्जित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जीविका की महिलाएं इन हाटों का संचालन करेंगी, जिनके लिए उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण, कौशल विकास, उद्यम प्रबंधन और ब्रांडिंग से संबंधित सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। INFUSION की विशेषज्ञ टीम तकनीकी मार्गदर्शन के रूप में सहयोग करेगी। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि 'दीदी हाट कन्वर्जेन्स’ के तहत न केवल हाटों का स्वरूप बदलेगा बल्कि यह एक सतत जीविकोपार्जन मॉडल के रूप में भी कार्य करेगा। यह पहल महिलाओं को अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही, यह ग्रामीण उपभोक्ताओं को ताजे, जैविक और स्थानीय उत्पाद खरीदने का एक सुरक्षित और सुलभ प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगा। श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा ने कहा कि, “इस पहल के माध्यम से हम दो प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों – MGNREGA और जीविका – के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर रहे हैं। इससे न केवल हाटों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी यह एक मील का पत्थर साबित होगा।” बैठक में संभावित स्थलों की प्राथमिक सूची तैयार करने, पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ जिलों में कार्य आरंभ करने, और एक व्यापक कार्ययोजना निर्माण के लिए एक समन्वय समिति के गठन का निर्णय लिया गया। यह समिति संबंधित विभागों के साथ मिलकर समयबद्ध ढंग से पहल को धरातल पर उतारने के लिए जिम्मेदार होगी। यह पहल ‘सशक्त महिला, समृद्ध गांव’ की भावना को साकार करती है और बिहार को आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर करने के लिए एक सशक्त माध्यम बनेगी। ग्रामीण विकास के इस नवाचार में महिला सहभागिता, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और सामुदायिक स्वामित्व जैसे मूल्यों का समावेश है, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति की दिशा में भी सहायक सिद्ध होंगे।