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दूल्हा-दुल्हन को मिले गिफ्ट्स पर लगेगा टैक्स! कितना और कब देना होगा?

नई दिल्ली भारत में शादी-ब्याह और त्योहारों के मौके पर लाखों रुपये के तोहफे और उपहार आम बात है. लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि किसी को शादी में 20 लाख रुपये कैश मिले तो क्या उस पर टैक्स देना होगा. आइए विस्तार से समझते हैं. शादी के तोहफे पर टैक्स: क्या कहता है कानून आयकर अधिनियम 1961 की धारा 56 के अनुसार:     दूल्हा और दुल्हन को शादी के मौके पर रिश्तेदारों और मित्रों से जो भी तोहफा मिलता है, वह टैक्स फ्री होता है.     चाहे वह कैश हो या कोई वस्तु, उस पर टैक्स नहीं लगेगा.     निष्कर्ष: यदि आपको शादी में 20 लाख रुपये कैश मिले हैं, तो इसे आयकर योग्य नहीं माना जाएगा. ध्यान देने योग्य बातें     छूट केवल दूल्हा और दुल्हन के लिए: अगर उनके परिवार को तोहफा मिलता है और उसकी वैल्यू ₹50,000 से ज्यादा है, तो उस पर टैक्स लगेगा.     रिश्तेदारों से उपहार: रिश्तेदारों से मिले तोहफे पर टैक्स नहीं लगता.     गैर-रिश्तेदारों से: 1 साल में ₹50,000 तक का तोहफा भी टैक्स फ्री है.     वसीयत या उत्तराधिकार: इनसे प्राप्त संपत्ति पर भी तुरंत टैक्स नहीं लगता. केवल संपत्ति बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा. ITR में कैसे दिखाएं शादी के उपहार     बड़े तोहफे या कैश लेनदेन को Income from Other Sources में दिखाना चाहिए.     भले ही टैक्स नहीं देना पड़े, लेकिन डिक्लेरेशन देना आवश्यक है.     इससे आयकर विभाग की कार्रवाई से बचा जा सकता है. कैश ट्रांजैक्शन पर विशेष नियम     कैश लेनदेन की सीमा: ₹2,00,000 तक.     ₹2,00,000 से ऊपर कैश ट्रांजैक्शन पर जुर्माना या पेनल्टी लग सकती है.     बेहतर है कि लाखों रुपये का तोहफा बैंक ट्रांसफर या ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त या भेजा जाए. सलाह और टिप्स     शादी में मिले सभी बड़े उपहार बैंक अकाउंट में जमा करें.     कैश लेनदेन का रिकॉर्ड रखें.     ITR फाइल करते समय इसे डिक्लेयर करें, भले ही टैक्स फ्री हो.     यह कदम आपको कानूनी सुरक्षा और भविष्य में विवाद से बचाव प्रदान करेगा.  

28 अगस्त से बदल जाएगा वॉट्सऐप: बिना डाटा-पैक भी कर पाएंगे वीडियो कॉल

नई दिल्ली आज के समय में लोगों के लिए तब सबसे बड़ी मुश्किल हो जाती है, जब उनके फोन में नेटवर्क नहीं आता है और वे जरूरत पड़ने पर भी किसी को कॉल या मैसेज नहीं कर सकते हैं। हालांकि, अब काफी हद तक लोगों की यह परेशानी दूर हो जाएगी, क्योंकि वे बिना इंटरनेट के लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप के लिए वायस और वीडियो कॉल कर पाएंगे। जी हां, अगर आपको लग रहा है कि यह कैसे हो सकता है तो बता दें कि हाल ही में लॉन्च हुई Google Pixel 10 Series सीरीज के स्मार्टफोन्स में सैटेलाइट कॉल्स फीचर मिल रहा है। इसकी मदद से व्हाट्सऐप ऐप के जरिए बिना नेटवर्क के भी कॉल की जा सकती है। आइये, पूरी डिटेल जानते हैं। Google Pixel 10 से बिना नेटवर्क भी कर पाएंगे व्हाट्सऐप कॉल Google ने हाल ही में हुए इवेंट में Google Pixel 10, Pixel 10 Pro, Pixel 10 Pro XL और Pixel 10 Pro Fold स्मार्टफोन लॉन्च किए हैं। इन फोन्स को कई दमदार फीचर्स के साथ लाया गया है। अगर खासियत की बात करें तो व्हाट्सऐप के जरिए सैटेलाइट कॉल की सुविधा वाले ये पहले स्मार्टफोन्स हैं। इन सभी हैंडसेट्स में Bluetooth 6 दिया गया है। गूगल लोगों को अब इन डिवाइसेस के जरिए सर्कुलर नेटवर्क से काफी दूर होने पर भी व्हाट्सऐप कॉल करने की सुविधा दे रहे हैं। यह सुविधा देने वाली गूगल पहली कंपनी है। अभी तक ऐपल या फिर किसी अन्य कंपनी के स्मार्टफोन्स में यह फीचर नहीं मिलता है। अब तक स्मार्टफोन पर सैटेलाइट कनेक्टिविटी ज्यादातर इमरजेंसी टेक्स्ट मैसेज तक ही सीमित थी। वहीं, Pixel 10 के साथ Google इस टेक्नोलॉजी को व्हाट्सऐप में लेकर आया है। इसका मतलब है कि अब गूगल पिक्सल 10 सीरीज के फोन के साथ आप यात्रा के दौरान, पहाड़ों पर गांव में हर जगह व्हाट्सऐप कॉल कर सकते हैं, जहां नेटवर्क नहीं आ रहे हों। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह स्नैपड्रैगन सैटेलाइट प्लेटफॉर्म का यूज करते हुए गूगल और क्वालकॉम के बीच पार्टनरशिप के जरिए मुमकिम हुआ है। कब से मिलेगी यह सुविधा? गूगल ने एक्स पर एक ट्वीट करके इस फीचर की जानकारी दी है। यह सुविधा 28 अगस्त, 2025 से शुरू हो जाएगी। ट्वीट में एक वीडियो दिया गया है, जिसमें साफ-साफ दिख रहा है कि फोन में नेटवर्क नहीं हैं, लेकिन व्हाट्सऐप कॉल की जा सकती है। हालांकि, गूगल ने साफ कर दिया है कि यह पार्टनर कैरियर्स के जरिए उपलब्ध होगा। इस कारण अभी फीचर चुनिंदा लोगों के लिए ही आएगा। बता दें कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन को फिलहाल मंजूरी नहीं मिली है, इस कारण भारत में अभी इस सुविधा की उपलब्धता के बारे में कुछ कह पाना मुश्किल है। हो सकता है आगे आने वाले समय में भारत में भी इस फीचर का यूज किया जा सके।

मध्यप्रदेश में ताप्ती रिजर्व: वन्यजीव संरक्षण को मिली नई पहचान, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

भोपाल  मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व 'ताप्ती' को सरकार ने हरी झंडी दे दी है. यह कंजर्वेशन रिजर्व 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल होगा. यह कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीव कॉरिडोर का हिस्सा है. राज्य सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और इसकी सीमाएं भी घोषित कर दी हैं. इसी के साथ एक बार फिर मध्य प्रदेश के वन्य जीवों का घर लगातार बड़ा हो रहा है. यह होगी कंजर्वेशन रिजर्व की सीमाएं मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व ताप्ती की सीमाएं भी निर्धारित कर दी गई हैं. यह कंजर्वेशन रिजर्व दक्षिण और पश्चिम वन मंडल बैतूल की 3 तहसील बैतूल, भीमपुर और भैंसदेही में बना है. इसमें ताप्ती, चिचोली और तावड़ी वन क्षेत्र को शामिल किया गया है. इस रिजर्व क्षेत्र में टाइगर, तेंदुआ, जंगली कुत्ते, बायसन जैसे कई वन्य जीव मौजूद हैं. जानें नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में अंतर      ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 250 वर्ग किलोमीटर होगा.     इसमें 224.844 वर्ग किलोमीटर रिजर्व फॉरेस्ट और 25.156 वर्ग किलोमीटर संरक्षित वन क्षेत्र शामिल है.     यह पहला कंजर्वेशन रिजर्व बन गया है, जो दो टाइगर रिजर्व सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व को जोड़ता है.     रिजर्व में टाइगर, लैपर्ड जैसे वन्य जीवों के अलावा ब्लैक बक, चीतल और जंगली उल्लू भी देखे जा सकते हैं. यह होगा रिजर्व से फायदा एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ए. कृष्णामूर्ति कहते हैं, '' कंजर्वेशन रिजर्व टाइगर रिजर्व और सेंक्चुरी की तरह एक संरक्षित वन क्षेत्र है. इससे बाघ सहित दूसरे वन्य प्राणियों को संरक्षण मिलेगा. यह रिजर्व दो टाइगर रिजर्व के बीच कॉरिडोर का काम करेगा. इससे स्थानीय लोगों को नुकसान के स्थान पर फायदा होगा. इस रिजर्व के बनने से इस क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय लोगों के वनोपज संग्रह के अधिकार खत्म नहीं होंगे. वहीं, आदिवासी पहले के तरह तेंदुपत्ता, चिरौंजी, सूखी लकड़ी, गोंद आदि एकट्ठा कर सकेंगे.'' क्या होता है अलग-अलग रिजर्व में अंतर? आमतौर पर सवाल उठता है कि आखिर नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में क्या अंतर होता है? तो बता दें नेशनल पार्क में मानवीय गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध होता है. इस क्षेत्र में लकड़ी काटने, वनोपज इकट्ठा करने जैसी कोई भी गतिविधि नहीं की जा सकती. जबकि वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में कुछ सीमित मानवीय गतिविधियां जैसे जानवरों को चराने या स्थानीय उपयोग नियंत्रित तरीके से किए जा सकते हैं. जबकि कंजर्वेशन रिजर्व का क्षेत्र बफर जोन जैसा होता हैं. यहां स्थानीय समुदाय की सहभागिता की मदद से वन्य जीवों ओर वन्य क्षेत्र का संरक्षण किया जाता है. इस क्षेत्र में रहने वालों की आजीविका को भी महत्व दिया जाता है. 

सावधान! पीरियड्स डिले करने की दवा बन सकती है जानलेवा, डॉक्टर ने बताई सच्चाई

नई दिल्ली हमारे आसपास ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो किसी कारण से कभी-कभी पीरियड्स रोकने वाली दवाओं का सेवन करती हैं ताकि किसी खास दिन या मौके पर उन्हें पीरियड्स ना हों. कई बार इन दवाओं का सेवन महिलाएं डॉक्टर से पूछे बिना ही कर लेती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीरियड्स रोकने वाली गोलियों का सेवन करना खतरनाक साबित भी हो सकता है. एक पॉडकास्ट में वैस्कुलर सर्जन डॉ. विवेकानंद ने अपने एक केस के बारे में बताते हुए कहा, 'कुछ समय पहले मेरे हॉस्पिटल में एक 18 साल की इंजीनियरिंग की छात्रा आई थी. उसे पैर और जांघ में काफी ज्यादा दर्द हो रहा था. रूटीन चेकअप के दौरान लड़की ने बताया कि वह 3 दिनों से पीरियड्स रोकने वाली दवा का सेवन कर रही थी क्योंकि उसके घर में पूजा थी.' 'चेकअप के दौरान उसके घरवालों को बुलाया और उन्हें बताया कि लड़की को डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या है और उसे अस्पताल में एडमिट करना होगा. लड़की के पेरेंट्स ने उसे एडमिट करने के लिए मना कर दिया और देर रात डॉक्टर के पास अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड से फोन आया कि उस लड़की को अस्पताल में लाया गया है और उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है. लेकिन कुछ मिनटों के बाद ही उसकी मौत हो गई.' ये उनके लिए काफी मुश्किल मामला था. अब ऐसे में हर लड़की या महिला को बिना प्रिस्काइब के पीरियड्स रोकने वाली गोलियां नहीं खानी चाहिए. आज हम आपको बता रहे हैं कि पीरियड्स की दवाओं का सेवन महिलाओं को क्यों नहीं करना चाहिए, डीप वेन थ्रोम्बोसिस क्या है और इसके कारण और लक्षण क्या हैं? पीरियड्स रोकने वाली दवा से किन महिलाओं को खतरा? इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम सूरी का कहना है कि आजकल कई महिलाएं हार्मोनल पिल्स का इस्तेमाल पीरियड देरी करने या मासिक धर्म से जुड़ी अन्य समस्याओं के लिए करती हैं. ये पिल्स शरीर में हार्मोन्स का स्तर बदलकर काम करती हैं, जिससे पीरियड में बदलाव आता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हार्मोनल पिल्स लेने से खून गाढ़ा हो सकता है, जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है. खून का गाढ़ा होना यानी ब्लड थिकनेस बढ़ जाना, खासकर उन लोगों में जो पहले से ही ब्लड क्लॉटिंग (थ्रोम्बोसिस) की समस्या से ग्रस्त होते हैं, खतरनाक साबित हो सकता है. जब खून गाढ़ा होता है तो ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) में थ्रोम्बस बन सकते हैं. ये थ्रोम्बस ब्लड के सामान्य प्रवाह को रोक देते हैं, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है. यदि ये थ्रोम्बस टूटकर कहीं और चले जाएं, तो वे फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में अटक सकते हैं. इसे पल्मनरी एम्बोलिज्म कहते हैं, जो अचानक दिल की धड़कन रुकने (सडन कार्डियक अरेस्ट) या मृत्यु का कारण बन सकता है. इसलिए हार्मोनल पिल्स कभी भी खुद से या बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए. डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, रिस्क फैक्टर्स और आपकी सेहत का पूरा मूल्यांकन करके ही सही दवा और मात्रा तय करते हैं. सही दवा और सही डोज़ ही आपकी सेहत के लिए सेफ होती है. जो लोग सीधे केमिस्ट से पिल्स ले लेते हैं या बिना डॉक्टर से पूछे कोई भी मेडिकेशन शुरू कर देते हैं, उनमें ऐसे खतरनाक कॉम्प्लिकेशंस होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहें, और हार्मोनल पिल्स जैसी दवाइयों का इस्तेमाल हमेशा डॉक्टरी सलाह के बाद करें. क्या होता है डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT)? डीप वेन थ्रोम्बोसिस का सामना तब करना पड़ता है जब हमारे  शरीर के अंदर मौजूद नसों में ब्लड क्लॉटिंग या खून के थक्के बनने लगते हैं. ऐसा तब होता है जब या तो आपको चोट लगी हो या आपकी नसों में बहने वाला खून काफी ज्यादा गाढ़ा हो. ये खून के थक्के खून के प्रवाह को रोक सकते हैं. आमतौर पर, डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या का सामना पैर के निचले हिस्से, जांघ या पेल्विस में करना पड़ता है, लेकिन ये समस्या शरीर के बाकी अंगों में भी हो सकती है. इसमें हाथ, ब्रेन, आंतें, किडनी और लिवर भी शामिल हैं. डीप वेन थ्रोम्बोसिस के लक्षण और कारण क्या हैं? यह समस्या आमतौर पर आपके पैरों या हाथों की नसों में होता है. DVT एक गंभीर स्थिति है, जिसके कारण खून का थक्का नस को बंद कर सकता है, जिससे खून का फ्लो रुक जाता है. कभी-कभी इस बीमारी के लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि अन्य बार ये लक्षण अचानक और ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं. आइए जानते हैं डीप वेन थ्रोम्बोसिस केलक्षण क्या होते हैं- सबसे आम लक्षण पैरों या हाथों की सूजन है, जो कभी-कभी अचानक शुरू हो सकती है. इस सूजन वाले हिस्से में दर्द या टेंडरनेस भी महसूस हो सकती है, खासकर जब आप खड़े होते हैं या चल रहे होते हैं. सूजन वाली जगह का रंग लाल या भूरा हो सकता है, और वहां की स्किन नार्मल से गर्म लग सकती है. दबी हुई नसें भी थोड़ी सूजी हुई  दिख सकती हैं. कुछ मामलों में, जब क्लॉटिंग पेट की गहराई में मौजूद नसों पर असर डालती है, तो पेट या कमर में दर्द हो सकता है. अगर खून का थक्का दिमाग की नसों में बनता है, तो अचानक तेज सिरदर्द, दौरे या झटके जैसे लक्षण हो सकते हैं. कई लोगों को इसके लक्षण नहीं भी दिख सकते. पर कभी-कभी थक्का पैर या हाथ से निकलकर फेफड़ों में चला जाता है, जिससे फेफड़ों में ब्लॉकेज हो सकती है. इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) कहा जाता है. PE के लक्षणों में छाती में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ, खून के साथ खांसी, चक्कर आना या बेहोशी शामिल हैं. डीप वेन थ्रोम्बोसिस का क्या कारण है? ये स्थितियां डीप वेन थ्रोम्बोसिस के खतरे को बढ़ा सकती हैं:     वंशानुगत (आनुवांशिक) स्थिति होने से खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है.     कैंसर और कीमोथेरेपी होना.     अगर आपको या आपके परिवार में डीप वेन थ्रोम्बोसिस की हिस्ट्री रही हो.     चोट, सर्जरी  के कारण नसों में ब्लड का फ्लो सीमित होना.   … Read more

त्योहारों की भीड़: 3 दिन में ट्रेनें फुल, रेलवे का बड़ा ऐलान,12 हजार स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी में

चंडीगढ़  चंडीगढ़ से त्योहारों पर घर जाने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन टिकटों की भारी मारामारी शुरू हो गई है। 21 अगस्त को जब 20 अक्टूबर (दीपावली) की बुकिंग खुली, तो सिर्फ तीन दिनों में ही उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली लगभग सभी ट्रेनें फुल हो गईं। हालात ये हैं कि कई ट्रेनों में अब वेटिंग टिकट भी नहीं मिल रही। ऐसे में यात्रियों के पास अब केवल तत्काल टिकट या फिर रेलवे की ओर से चलाई जाने वाली स्पेशल ट्रेनें ही विकल्प बची हैं।रेलवे का कहना है कि दीपावली (20 अक्टूबर) और छठ पूजा (26 अक्टूबर) के मौके पर पूरे देश में 12 हजार से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी।उम्मीद है कि चंडीगढ़ से भी 2-3 स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए मिलेंगी। हालांकि, अंबाला मंडल की तरफ से अभी तक इसका आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। तत्काल टिकट ही आखिरी सहारा त्योहार सीजन में यात्रियों को तत्काल टिकट पाने के लिए सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। अक्सर लोगों को रिजर्वेशन सेंटर पर पूरी रात कतारों में गुजारनी पड़ती है, इसके बावजूद टिकट हाथ नहीं लगती। कई बार लोग तत्काल टिकट पाने के लिए दो-तीन दिन तक रेलवे स्टेशन पर डेरा डालते हैं।अभी हालात यह हैं कि सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों में सीटें मिलना लगभग नामुमकिन है और यात्री केवल तत्काल या फिर स्पेशल ट्रेनों का ही इंतजार कर रहे हैं। नई ट्रेनों और परियोजनाओं की भी घोषणा की गई इसके तहत यात्री यदि 13 से 26 अक्टूबर के बीच आगे की यात्रा करेंगे और 17 नवंबर से एक दिसंबर के बीच वापसी करेंगे तो रिटर्न टिकट पर 20 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। त्योहारों के दौरान बिहार लौटने वाले प्रवासी यात्रियों के लिए यह योजना काफी उपयोगी होगी। बिहार को ध्यान में रखते हुए कई नई ट्रेनों और परियोजनाओं की भी घोषणा की गई। गयाजी से दिल्ली, सहरसा से अमृतसर, छपरा से दिल्ली और मुजफ्फरपुर से हैदराबाद के बीच चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई जाएंगी। धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए बुद्ध सर्किट ट्रेन शुरू होगी इसके अलावा, भगवान बुद्ध से जुड़े धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए बुद्ध सर्किट ट्रेन शुरू होगी, जो वैशाली, हाजीपुर, सोनपुर, पटना, राजगीर, नालंदा, गया और कोडरमा तक जाएगी।सीमांचल क्षेत्र को राजधानी से जोड़ने के लिए पूर्णिया से पटना के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत होगी। साथ ही बक्सर-लखीसराय रेलखंड पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी ताकि ट्रेनों का संचालन सुगम हो। पटना के चारों ओर रिंग रेलवे बनाया जाएगा, जबकि सुल्तानगंज को देवघर से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन का निर्माण होगा। लौकहा में नया वॉशिंग पिट बनेगा और बिहार में कई नए रोड ओवरब्रिज और अंडरपास तैयार किए जाएंगे।रेल मंत्री ने यह भी बताया कि पटना से अयोध्या के लिए भी नई ट्रेन शुरू की जाएगी, जिससे धार्मिक यात्रियों को सुविधा मिलेगी। रेल मंत्री के साथ मौजूद बिहार के सभी नेताओं ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री के प्रति आभार जताया। उनका कहना था कि इन परियोजनाओं से न केवल बिहारवासियों की यात्रा आसान होगी बल्कि व्यापार, पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। रेलवे का दावा है कि इस बार त्योहारों के मौसम में यात्रियों को बिना भीड़ और परेशानी के सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा का अनुभव होगा।  

MP में विधायकों की तनख्वाह बढ़ सकती है 45% तक, विधानसभा में गूंजा प्रस्ताव

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर विधायकों की सैलरी बढ़ने के मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर मध्य प्रदेश में विधायकों की सैलरी 45 फीसदी बढ़ती है तो उन्हें मिलने वाली सैलरी 1 लाख से ज्यादा हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो राजस्थान से ज्यादा मध्य प्रदेश के विधायकों की सैलरी हो जाएगी. जानकारी के मुताबिक सैलरी बढ़ाने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को भेजा गया है. इतना ही नहीं पूर्व विधायकों के पेंशन में भी इजाफा करने की मांग की गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से भी यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार को भेजा गया है. अब 3 सदस्यीय समिति इस मुद्दे पर फैसला करेगी. इस समिति के अध्यक्ष एमपी के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा हैं. इस समिति में बीजेपी और कांग्रेस के एक-एक सीनियर विधायक भी शामिल होंगे. माना जा रहा है कि उनका चयन जल्द ही सरकार की तरफ से किया जाएगा. लंबे समय से चल रही मांग काफी लंबे वक्त से मध्य प्रदेश के विधायकों की तरफ से वेतन, भत्ते और विधायक निधि में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी. इसके लिए एक समिति भी बनी हुई है. इसकी अध्यक्षता रीवा की गुढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक नागेंद्र सिंह कर रहे हैं. समिति ने सभी पक्षों पर चर्चा कर वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी थी.  

एमपी में वंदे भारत एक्सप्रेस की बढ़ती लोकप्रियता, भोपाल रेल मंडल ने लिया अहम निर्णय

भोपाल एमपी में चल रहीं वंदेभारत एक्सप्रेस में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश की पहली वंदेभारत भोपाल निजामुद्दीन और बाद में चलनेवाली इंदौर नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस तथा रानी कमलापति रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की ऑक्यूपेंसी बेहतर होती जा रही है। रेलवे बोर्ड द्वारा वंदे भारत के संबंध में जोन और मंडलों से बुलाई गई रिपोर्ट के अनुसार भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में तो सीटों की जबर्दस्त कमी पड़ रही है। इसकी ऑक्यूपेंसी और पैसेंजर डिमांड को देखते हुए भोपाल रेल मंडल ने बड़ा फैसला लिया है। मंडल ने भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए अब रेलवे बोर्ड की मंजूरी मांगी गई है। एमपी की राजधानी भोपाल को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़नेवाली रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। ट्रेन नंबर 20171 रानी कमलापति-निजामुद्दीन की ऑक्यूपेंसी जहां 94 प्रतिशत है वहीं ट्रेन नंबर 20172 निजामुद्दीन-रानी कमलापति वंदेभारत 112 प्रतिशत की ऑक्यूपेंसी से चल रही है। ट्रेन में तेजी से बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाए जा रहे हैं। इससे रेल यात्रियों को खासी राहत मिल सकेगी। भोपाल रेल मंडल ने रेलवे बोर्ड को वंदे भारत ट्रेन में 4 कोच बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। मंडल अधिकारियों के अनुसार बोर्ड से इसकी जल्द मंजूरी मिल सकती है। रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस अभी 16 कोच की ट्रेन है। इसमें 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच और 14 एसी चेयर कार कोच हैं। इस प्रकार कुल 1128 सीटें हैं। 4 कोच बढ़ाने पर रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत में 432 सीटें बढ़ जाएंगी। 20 कोच से रोज 1560 यात्री कर सकेंगे सफर भोपाल रेल मंडल के अधिकारी बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने से इसमें रोज 1560 यात्री सफर कर सकेंगे। नया प्रस्ताव मंजूर होने पर ट्रेन में 2 एसी चेयर कार और 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच बढ़ जाएंगे। इस प्रकार रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 4 एग्जीक्यूटिव क्लास और 16 चेयर कार कोच हो जाएंगे। भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने का फैसला लिया गया है। रेलवे बोर्ड से जल्द ही इसकी मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव विद्युत कंपनियों के 1060 कर्मचारियों को देंगे नियुक्ति-पत्र मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर विद्युत कंपनियों में नई नियुक्तियाँ: सीएम डॉ. यादव बांटेंगे 1060 नियुक्ति-पत्र ऊर्जा मंत्री ने 26 अगस्त के नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 26 अगस्त को दोपहर 12 बजे रवीन्द्र भवन भोपाल में विद्युत कंपनियों के नवनियुक्त 1060 कार्मिकों को नियुक्त-पत्र वितरित करेंगे। कार्यक्रम में बिजली कंपनियों के लिए नवीन संगठनात्मक संरचना के तहत 51 हजार 711 नये स्थाई पदों की स्वीकृति के लिये मुख्यमंत्री का अभिनंदन भी किया जायेगा। ऊर्जा विभाग की विभिन्न बिजली कंपनियों में रिक्त पदों की परीक्षा के बाद कर्मचारियों का चयन किया गया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सोमवार को मंत्रालय में 26 अगस्त के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने अधिकारियों को सभी तैयारियां समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिये। उन्होंने कार्यक्रम स्थल का भी निरीक्षण किया। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई ने कार्यक्रम आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि संकल्प-पत्र के आधार पर विभिन्न पदों पर एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भर्ती की गई है। चयनित पदों में बिजली इंजीनिय़र, सिविल इंजीनियर, लेखाधिकारी, सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधक, सहायक विधि अधिकारी, लाइन अटैंड़ेंट, सिक्य़ोरिटी ऑफिसर, पॉवर प्लांट  फार्मासिस्ट, केमिस्ट, एएनएम, ट्रेसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्निशियन, रेडियोग्राफर, ईसीजी टैक्निशियन, पब्लिसिटी ऑफिसर, मेडिकल ऑफिसर आदि पद शामिल हैं। भोपाल में होने वाले इस राज्य स्तरीय समारोह में नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं के परिजनों को भी आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों की उपलब्धियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। साथ ही विद्युत कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी कर्मचारी हितों और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर चर्चा भी की जाएगी। बैठक में एम.डी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी अविनाश लवानिया और एम.डी. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

2005-06 के बाद फिर कहर! WHO ने चेताया, दुनियाभर में फैल रहा चिकनगुनिया

भोपाल   करीब 20 साल बाद एक बार फिर चिकनगुनिया का खतरा बढ़ता दिख रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर अलर्ट जारी किया है. चिकनगुनिया एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन यह अब तक 119 देशों में पाई जा चुकी है, जिससे करीब 5.6 अरब लोग जोखिम में हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि 20 साल पहले वाले वायरस में जो म्यूटेशन देखे गए थे, वही फिर से सामने आए हैं. भारत जैसे देशों में, जहां मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां पहले से मौजूद हैं, वहां इसका खतरा और बढ़ जाता है. राजधानी की बात करें तो बीते साल अगस्त के अंत तक चिकनगुनिया के 40 मरीज मिले थे। इस साल अब तक 58 मरीजों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। खास बात यह है कि चिकनगुनिया जैसे लक्षण वाले मामले भी तेजी से बढ़े हैं। सभी को बुखार, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में अकड़न जैसी शिकायत है, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आती। हमीदिया, जेपी और एम्स में एक अगस्त से अब तक 7 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे हैं। इसमें से 700 से ज्यादा मरीजों की जांच भी हो चुकी है। डॉक्टर बताते हैं कि इस बार मरीजों की सबसे बड़ी शिकायत जोड़ों में दर्द की है। मरीज बताते हैं कि लगता है जैसे हड्डियां आपस में टकरा रही हों। टेस्ट रिपोर्ट 10 दिन तक पॉजिटिव नहीं आ रही, जिससे पहचान में देरी हो रही है। मरीजों के लिए यह सिर्फ बुखार नहीं, बल्कि हफ्तों तक चलने वाला जोड़ों का कहर है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों के लिए यह और खतरनाक है। चिकनगुनिया के लक्षण जीएमसी के एमडी मेडिसिन डॉ. अनिल शेजवार बताते हैं कि इस बीमारी का वायरस शरीर में आने के 4 से 7 दिनों में लक्षण दिखने लगते हैं। तेज बुखार, जोड़ों में तीव्र दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और नसों में खिंचाव, सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी, पूरे शरीर पर लाल चकत्ते, आंखों में सूजन और दर्द, डेंगू जैसे लक्षण होने की वजह से कई बार मरीज सही समय पर पहचान नहीं कर पाते। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन गंभीर मरीजों (अस्पताल में भर्ती) के लिए: आईवी हाइड्रेशन (ड्रिप) का प्रयोग करें। कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और इम्युनोग्लोबिन थेरेपी से बचें। प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन सिर्फ तब करें जब ब्लीडिंग हो। येलो फीवर से लिवर फेलियर होने पर आईवी एन-एसिटाइलसिस्टीन का उपयोग। मोनोक्लोनल इम्युनोग्लोबिन और सोफोसबुविर जैसी दवाएं सिर्फ रिसर्च में। सामान्य या हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए: डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ओआरएस और तरल पदार्थ दें। दर्द और बुखार के लिए केवल पैरासिटामोल का इस्तेमाल। स्टेरॉइड से बचें। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज जेपी अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट, कॉइल और स्प्रे का उपयोग करें। दरवाजों-खिड़कियों पर नेट लगाएं। भारत में कितना खतरा? पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ समीर भाटी बताते हैं कि भारत में मॉनसून के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियां आम हैं और यही चिकनगुनिया के फैलने की सबसे बड़ी वजह बनती है. हालांकि यहां चिकनगुनिया का ज्यादा रिस्क नहीं होता है, लेकिन इस बात सतर्क रहने की जरूरत है. डॉ भाटी कहते हैं कि चिकनगुनिया कीबीमारी एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलती है, जो दिन में ज्यादा एक्टिव रहते हैं. जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उसके खून में एंटर कर जाता है और शरीर में तेजी से फैलता है. इसका असर शरीर की जोड़ों, मांसपेशियों और नसों पर सबसे ज्यादा पड़ता है, जिससे मरीज को तेज दर्द और कमजोरी का सामना करना पड़ता है. चिकनगुनिया के लक्षण क्या हैं? चिकनगुनिया के लक्षण अचानक और तेजी से सामने आते हैं. इसका इनक्यूबेशन पीरियड 2 से 7 दिन होता है यानी वायरस के संक्रमण के कुछ दिनों बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सबसे विशेष लक्षणों में तेज बुखार, तीव्र जोड़ दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं. यह जोड़ दर्द कई बार इतना गंभीर होता है कि मरीज को हिलने-डुलने में कठिनाई होती है और यह हफ्तों से लेकर महीनों तक रह सकता है. इसके अलावा मरीज को सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी और पूरे शरीर पर लाल चकत्ते हो सकते हैं. आंखों में दर्द और सूजन भी सामान्य लक्षण हैं. कई मामलों में लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे मरीज को सही पहचान करने में देर हो सकती है. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य पर असर डालता है. डेंगू, चिकनगुनिया और जीका ऐसी ही तीन खतरनाक बीमारियां हैं जिनका अभी तक कोई स्थायी इलाज या वैक्सीन नहीं है।  यही वजह है कि डॉक्टर सभी लोगों को बचाव के उपायों का पालन करते रहने की सलाह देते रहते हैं। इन बीमारियों की सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि शुरुआती लक्षण साधारण बुखार जैसे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये जानलेवा रूप ले सकते हैं। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मच्छरों से होने वाली तमाम बीमारियां हर साल लोगों के परेशान करती हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से घटने लगता है जो गंभीर स्थितियों में जानलेवा भी हो सकता है। चिकनगुनिया महीनों तक जोड़ों में दर्द देता रहता है वहीं जीका वायरस गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए आजीवन खतरा बन सकता है। यानी ये सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि गंभीर चिंता का कारण भी हैं। डेंगू का खतरा डेंगू एक वायरल बीमारी है जो एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से फैलती है। दुनियाभर में हर साल लगभग 40 करोड़ लोग डेंगू का शिकार होते हैं। भारत में मानसून के दिनों में और बरसात के बाद यह सबसे ज्यादा फैलता है। डेंगू के कारण रोगियों को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे और मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द के साथ त्वचा पर लाल चकत्ते हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह हेमरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम का भी कारण बन सकता है। इसमें प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटने लगती है जो शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव का कारण बन सकती है।  डेंगू का कोई विशेष इलाज मौजूद नहीं है। इसके उपचार में केवल … Read more

महू में होगा रण संवाद 2025, सेनाओं में नवाचार और रणनीति पर चर्चा

महू  ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार देश की तीनों सेनाओं द्वारा युद्ध पद्धति में नवाचार और रणनीतिक विमर्श को लेकर राष्ट्रीय स्तर का रण संवाद 2025 आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन 26 और 27 अगस्त को महू के सैन्य संस्थान में होगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister in MP) 27 की शाम कोमध्यप्रदेश में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके साथ सीडीएस जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नेवी चीफ एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह भी उपस्थित रहेंगे। वहीं देशभर के अन्य सैन्य अधिकारी भी शामिल होंगे। इसको लेकर महू शहर के आर्मी क्षेत्र की मुख्य माल रोड को भी बंद किया गया है। कार्यक्रम के तहत 25 से 27 अगस्त तक यह मार्ग पूर्णत: बंद रहेगा। वहीं ड्रीमलैंड से डीएसओएमआई चौराहा होते हुए चाकू चौराहे से मंडलेश्वर की ओर जाने वाला मार्ग खुला रहेगा। यह है कार्यक्रम देशभर में पहली बार ट्राय-सर्विस सेमिनार रणसंवाद का आयोजन किया जाएगा। जिसकी शुरुआत महू से हो रही है। इसमें विशेष रूप से थल सेना, जल सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। इसमें युद्ध, युद्धनीति और युद्ध-लड़ाई पर तकनीक का प्रभाव विषय पर बातचीत होगी। जिसमें प्रतिष्ठित कमांडर, रक्षा उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि विचार साझा करेंगे। इसमें युद्ध पद्धति में नवाचार व नई तकनीकों पर विचार विमर्श होगा। विचार विमर्श भविष्य के लिए सशस्त्र बल तैयार करने, युद्ध के अभ्यासियों के लिए अद्वितीय मंच उपलब्ध कराने, शिक्षा जगत और रक्षा उद्योग की सक्रिय भागीदारी और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने को ध्यान में रखकर किया जाएगा। महू के यह मार्ग होंगे बंद आयोजन के तहत महू सेना द्वारा महू में तैयारियां की जा रही है। इसको लेकर महू यातायात पुलिस ने ट्रफिक प्लान भी बनाया है। ट्रैफिक सूबेदार विनोद यादव ने बताया कि 25, 26 और 27 को माल रोड को पूरी तरह बंद किया जाएगा। इसमें आंबेडकर जन्मभूमि स्मारक के पास राम मंदिर होते हुए डीएसओएमआई तक जा रहे माल रोड पर जाना पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। वहीं महू शहर के किशनगंज आरओबी से होते हुए ड्रीमलैंड तक जाने वाले भायाजी मार्ग से माल रोड पर जुड़ने वाले मार्ग भी बंद रहेंगे। इसमें गर्ल्स स्कूल चौपाटी से माल रोड जाने वाला मार्ग, भायाजी मार्ग से गेटवेल अस्पताल होते हुए माल रोड, मदर मेरी स्कूल से, भायाजी मार्ग से बत्तीवाला चौराहा मार्ग और गैरिसन ग्राउंड से माल रोड जुड़ने वाले मार्ग पर आवाजाही बंद रहेगी। इसके पूर्व 23 और 24 को सांकेतिक रूप से बंद किया है ताकि सभी को पता चल सके। यह होगा वैकल्पिक मार्ग इंदौर की ओर से किशनगंज आरओबी से आने वाले मार्ग गर्ल्स स्कूल चौपाटी से भायाजी मार्ग से होते हुए ड्रीमलैंड चौराहे पर जाएंगे। ड्रीमलैंड से डीएसओएमआई होते हुए चाकूल चौराहे की ओर जाने वाला मार्ग खुला रहेगा। इससे महू से मंडलेश्वर व मानपुर की ओर जाने मार्ग पर जा सकेंगे। इसके लिए भायाजी मार्ग पर खड़े वाहनों को हटवाया जाएगा। ताकि यातायात सुगम रहे। 26-28 अगस्त तक महू नो फ्लाईंग जोन आयोजन के दौरान 26 से 28 अगस्त तक महू को नो-फ्लाई जोन घोषित किया है। महू और आसपास के इलाके में कोई ड्रोन भी नहीं उड़ा सकेंगे। पहली बार तीनों सेनाओं का साझा मंच देश में पहली बार तीनों सेनाओं का संयुक्त सेमिनार (Three Armies of India Joint Seminar) हो रहा है। इसमें थल सेना, जल सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस संवाद में युद्ध, युद्धनीति और युद्ध पर आधुनिक तकनीक के प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसमें सेनाओं के अफसर बल्कि रक्षा उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी विचार साझा करेंगे।