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आवासीय स्कूल में सनसनी, 9वीं की छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया

कर्नाटक   कर्नाटक के यादगिर जिले के शाहपुर में एक आवासीय विद्यालय की 9वीं कक्षा की छात्रा के शौचालय में एक शिशु को जन्म देने से हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा कि छात्रा और शिशु, दोनों को शाहपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल दोनों सुरक्षित हैं। स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप वहीं, कर्नाटक बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य शशिधर कोसांबे ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों ने शुरुआत में मामले को दबाने की भरसक कोशिश की थी, लेकिन मामला आयोग की नजर में आ गया, जिसके बाद आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शिकायत दर्ज की और स्कूल का दौरा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। बाल-विवाह का हो सकता है मामला विद्यालय प्रशासन ने लड़की के गर्भवती होने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि संभवत: यह बाल विवाह का मामला हो सकता है। साथ ही विद्यालय प्रशासन ने बताया कि उन्होंने लड़की के माता-पिता को भी इस संबंध में सूचित कर दिया है। विद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप कोसांबे ने इसे विद्यालय प्रशासन की लापरवाही बताया और कहा कि यह न सिर्फ लड़की की निजता का हनन है, बल्कि इससे लड़की का स्वास्थ्य भी गंभीर रुप से प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि आयोग ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक समेत वार्डन, कक्षा के शिक्षक और विद्यालय के नर्स पर कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की है।  

कोटा में बाढ़ का पानी घटा, गांवों में हालात होने लगे सामान्य

कोटा राजस्थान के बूंदी जिले के नैनवां, कापरेन और केशोरायपाटन इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी जैसे-जैसे कम हो रहा है, ग्रामीण जीवन की टूटी हुई कड़ियों को फिर से जोड़कर उसे पटरी पर लाने में जुट गए हैं। वे अपने भीगे हुए घरेलू सामान, गीले कपड़ों और अनाज को सुखा रहे हैं तथा अपने अपने घरों और दुकानों में बाढ़ के कारण जमा गाद को बाहर निकाल रहे हैं। इस क्षेत्र के किसानों को बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है, सोयाबीन, मूंग, उड़द और मक्के की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। नैनवां ब्लॉक में पैबलापुरा बांध के नीचे की ओर स्थित 1,500 से अधिक आबादी वाला डोकुन गांव और पड़ोसी देवरिया गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। शुक्रवार और शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान बांध का पानी उफनकर अचानक घरों और दुकानों में घुस गया था। डोकुन गांव के निवासी रमेश नागर ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से घरों में घुस आया कि लोगों को अपने घरेलू सामान या फसलों को बचाने का भी समय नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उनके घरों में रखे गेहूं, सोयाबीन, चना और मूंग से भरे सैकड़ों बोरे पूरी तरह भीगकर खराब हो गए। इस बीच, प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं पहुंची है। कांग्रेस की बूंदी जिला इकाई के अध्यक्ष और केशोरायपाटन से विधायक सीएल प्रेमी ने मीडिया को बताया, ‘‘बाढ़ के बाद के हालात केशोरायपाटन, कापरेन और नैनवां क्षेत्रों में सबसे खराब हैं। इन इलाकों के गांवों के लगभग हर घर और दुकान को भारी नुकसान हुआ है। संपत्ति और फसलें नष्ट हो गई हैं, अधिकतर कच्चे मकान ढह गए हैं, मवेशी मर गए हैं। राज्य सरकार को शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों तक तुरंत राहत पहुंचानी चाहिए।’’ बूंदी के विधायक हरिमोहन शर्मा ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार ने अब तक बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए कोई मुआवज़ा घोषित नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन और बाढ़ राहत मानदंडों के तहत निर्धारित सहायता राशि अपर्याप्त है और गांवों में हुए नुकसान को देखते हुए ‘‘यह सागर में एक बूंद के समान है और सहायता के नाम पर एक मजाक है’’। इस बीच, केशोरायपाटन के उप-मंडल अधिकारी (एसडीएम) ऋतुराज शर्मा ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य और नुकसान का सर्वेक्षण जारी है। एसडीएम ने कहा, ‘‘हम जल्द ग्राम पंचायतों में शिविर लगाने जा रहे हैं, ताकि मौके पर ही दस्तावेजों और राहत संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।’’ उन्होंने बताया कि लोग राहत शिविरों से अपने अपने घर लौट चुके हैं।  

अक्षय ओबेरॉय ने पूरी की फिल्म सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी की शूटिंग

मुंबई,  बॉलीवुड अभिनेता अक्षय ओबेरॉय ने अपनी आने वाली फिल्म सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी की शूटिंग पूरी कर ली है। शूट खत्म होने की पार्टी से एक दिल छू लेने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें पूरी टीम के बीच की खूबसूरत बॉन्डिंग नज़र आ रही है। वीडियो में अक्षय स्टाइलिश पार्टी लुक में अपने को-स्टार्स जाह्नवी कपूर, वरुण धवन, रोहित सराफ और बाकी टीम को गले लगाते दिख रहे हैं। माहौल हंसी, पॉजिटिव एनर्जी और इमोशनल लेकिन खुशी भरे विदाई पलों से भरा हुआ था, जब सबने मिलकर इस बड़े पड़ाव को सेलिब्रेट किया। अक्षय ओबेरॉय ने कहा, “सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद खास और संतोषजनक अनुभव रहा। वरुण, जाह्नवी और रोहित जैसे टैलेंटेड कलाकारों के साथ स्क्रीन शेयर करना स्पेशल रहा। सेट पर मिला प्यार और ऊर्जा संक्रामक थी, और आखिरी दिन ने हमारी दोस्ती और बॉन्डिंग को और मजबूत कर दिया।” शशांक खेतान के निर्देशन में बनी और धर्मा प्रोडक्शन्स द्वारा निर्मित इस फिल्म में वरुण धवन, जाह्नवी कपूर, अक्षय ओबेरॉय और रोहित सराफ मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे।  

पटना साहिब की जंग: नंद किशोर यादव को BJP ने सौंपी कमान, कांग्रेस ने दिखाया दमखम

पटना सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंंद सिंह जी की जन्मस्थली पटना साहिब की व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी खास पहचान है। यहां मारुफगंज, मंसूरचक, रामबाग, मच्छरहट्टा जैसे मोहल्लों में अनाज-मसाले से लेकर शृंगार व छोटे खिलौनों की थोक मंडी और बड़ी संख्या में कुटीर उद्योग हैं। पहले इसे पटना पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2008 में परिसीमन के बाद यह क्षेत्र पटना साहिब बन गया। कांग्रेस, जनसंघ और समाजवादियों को बारी-बारी से मौका देने वाला यह विधानसभा क्षेत्र पिछले साढ़े तीन दशक से भाजपा का गढ़ है। इस सीट से भाजपा के नंदकिशोर यादव पिछले सात चुनावों से लगातार जीत रहे हैं। वह बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं और इस लिहाज से पटना साहिब महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है। नंद किशोर यादव इस बार चुनाव मैदान में आठवीं बार यहां उतरने वाले हैं। 1957 में अस्तित्व में आए पटना पूर्वी क्षेत्र में 1990 तक नौ विधानसभा चुनावों में सर्वाधिक पांच बार कांग्रेस जीती। भारतीय जनसंघ को दो और जनता पार्टी तथा जनता दल को एक-एक बार सफलता मिली। 1995 में इस सीट पर पहली बार नंदकिशोर यादव जीते। तब से यह भाजपा का गढ़ बना है। इस बार चुनाव में यह सीट इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के खाते में आने के आसार हैं। 90 के दशक के बाद कांग्रेस पहली बार विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर दिख रही है। एक-एक सीट का आकलन हो रहा है। कांग्रेस पटना साहिब में किसे उम्मीदवार बनाती है, यह भी अहम पहलू होगा। उधर, जनसुराज ने भी सक्रियता बढ़ाई है और चुनाव संघर्ष को त्रिकोणीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। नंदकिशोर यादव क्षेत्र से लगाव व विकास कार्यों की बदौलत फिर चुनाव मैदान में उतरने को तैयार हैं। कहते हैं, क्षेत्र का चहुंमुखी विकास मेरा सपना है। उम्मीद है कि जात-पात से ऊपर उठ इस बार भी जनता हमें आशीर्वाद देगी। प्रतिद्वंद्वी दल सामाजिक समीकरण साधने के साथ वे मुद्दे भी उठा रहे हैं, जो विकास से अछूते हैं। 2015 के चुनाव में कांटे की टक्कर नंदकिशोर यादव को क्षेत्र के लोग ‘नंदू भइया’ से भी बुलाते हैं। वह पथ निर्माण, स्वास्थ्य, पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी रहे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा था, जब जदयू, राजद व कांग्रेस का महागठबंधन था। राजद ने उनके शिष्य रहे संतोष मेहता को उतारा और मुकाबला इस कदर कांटे का रहा कि नंदकिशोर यादव के सिर महज 2792 मतों से जीत का सेहरा बंधा। चुनावों में नंद किशोर यादव के सामने प्रतिद्वंद्वी पार्टी और चेहरा बदलता रहा। 1995 में उनके सामने राजद के रामलखन सिंह यादव थे तो 2000 में उनका सामना राजद के ही ज्ञानेन्द्र कुमार ज्ञानू से हुआ। इसी तरह 2005 में हुए दो चुनावों में उनके सामने राजद ने भारती यादव (फरवरी) और अनिल यादव (नवंबर) को उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस ने 2010 के चुनाव में परवेज अहमद को टिकट दिया, जबकि 2015 में राजद ने संतोष मेहता तो 2020 में कांग्रेस ने प्रवीण कुशवाहा को मैदान में उतारा था। नंद किशोर यादव जी बिहार में कई विभागों के मंत्री रहे। अभी विधानसभा के अध्यक्ष हैं। बिहार की राजनीति में जितना बड़ा उनका चेहरा है, उसके मुताबकि पटना साहिब का विकास नहीं हुआ। पटना सिटी के इलाके में आवागमन सुगम नहीं हो सका। कई इलाकों में लोग जलजमाव से त्रस्त हैं। अपराध भी बेलगाम है। -प्रवीण सिंह कुशवाहा, कांग्रेस प्रत्याशी पटना साहिब के विधायक सह बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने कहा कि जातपात से ऊपर उठकर मैं विकास की राजनीति करता हूं। पटना साहिब में सड़कों के निर्माण के लिए 125 करो़ड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गयी है। मंगल तालाब के सौन्दर्यीकरण अगले माह शुरू हो जाएगा। गंगा पाथ के निर्माण से जाम से काफी राहत मिली है। पटना घाट समेत अन्य सड़कों का निर्माण पूरा हो जाने से आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। पांच साल में दिखा यह बदलाव ● जेपी गंगा पथ का दीदारगंज तक विस्तार ● गायघाट से पटना घाट तक लिंक रोड का निर्माण ● गायघाट में आईआईटी की स्थापना ● मंगल तालाब पाटलिपुत्र में इंडोर स्टेडियम का निर्माण ● गुरु गोविंद सिंह अस्पताल को जिला अस्पताल का दर्जा वायदे, जो पूरे नहीं हुए – : ● अशोक राजपथ और उससे सटे इलाकों को जाम से मुक्ति नहीं ● बरसात में जल्ला के कृषि योग्य भूमि को जलजलाव से निजात नहीं ● कुटीर उद्योगों का दायरा बढ़ने की जगह सिमट रहा है ● छोटी पहाड़ी और महादेव स्थान के पास अंडरपास नहीं बना ● अंतरराज्यीय बस स्टैंड बना पर जाम की समस्या का नहीं हुआ निदान कब-कौन जीता 1957 – जेहरा अहमद (कांग्रेस) 1962 – जेहरा अहमद (कांग्रेस) 1967 – रामदेव महतो (भारतीय जनसंघ) 1969 – रामदेव महतो (भारतीय जनसंघ) 1972 – जमील अहमद (कांग्रेस) 1977 – रामदेव महतो (जनता पार्टी) 1980 – शरत कुमार जैन (कांग्रेस) 1985 – शरत कुमार जैन (कांग्रेस) 1990 – महताब लाल (जनता दल) 1995 – नंद किशोर यादव (भाजपा) अबतक  

RCB का अहम फैसला, भगदड़ पीड़ितों को मिलेगा सहारा!

नई दिल्ली  इस साल आईपीएल के इतिहास में पहली बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाने के बाद आरसीबी के जश्न में मची भगदड़ पर फ्रेंचाइजी ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उसने आरसीबी केयर्स नाम की पहल का ऐलान किया है। हालांकि, उसके बारे में अभी डीटेल से नहीं बताया गया है लेकिन जल्द ही डीटेल शेयर करने की बात कही गई है। आईपीएल खिताब जीतने के अगले दिन 4 जून को आरसीबी ने बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में जश्न का कार्यक्रम रखा था। उस दौरान स्टेडियम के गेट के पास भगदड़ मचने से 11 लोगों की मौत हो गई थी और 56 अन्य घायल हो गए थे। भगदड़ के 84 दिन बाद आरसीबी ने उसे लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उसने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट डालते हुए कहा है कि उसकी चुप्पी गैरमौजूदगी नहीं थी। वह दर्द था। इसके साथ ही फ्रेंचाइजी ने 'आरसीबी केयर' पहल का जिक्र किया है। पोस्ट में उसके बारे में तो और ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है लेकिन संकेत मिल रहा है कि हो सकता है कि फ्रेंचाइजी भगदड़ के पीड़ित परिवारों के लिए कुछ राहतभरा कदम उठाए। ये राहत आश्रितों के जीवनयापन, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी उठाने या आर्थिक मदद जैसी पहल के रूप में हो सकती है। लेकिन आरसीबी केयर के तहत ऐसा कुछ किया जाएगा या नहीं, ये फिलहाल स्पष्ट नहीं है। जल्द ही डीटेल देने की बात कही गई है। भगदड़ के बाद से ही आरसीबी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एकदम से चुप्पी थी। 3 महीने तक न तो हादसे को लेकर कुछ लिखा गया और न ही क्रिकेट पर या किसी क्रिकेटर पर या किसी भी तरह का पोस्ट। आरसीबी ने गुरुवार को एक्स पर फैंस को संबोधित नोट पोस्ट किया। उसमें लिखा, 'डियर 12th मैन आर्मी, यह आपको हमारा दिल से लिखा खत है! करीब तीन महीने हो चुके हैं जब हमने यहां पिछली बार पोस्ट किया था। चुप्पी गैरमौजूदगी नहीं थी। यह दर्द था।' नोट में आगे लिखा गया है, 'यह स्पेस कभी ऊर्जा, यादों और मोमेंट्स से भरा हुआ होता था जिसे आप बहुत इंजॉय करते थे…लेकिन 4 जून ने सबकुछ बदल दिया। उस दिन ने हमारे दिलों को तोड़ दिया, और तब से हमारे इस स्पेस पर चुप्पी थी। उस चुप्पी में हम शोक मान रहे थे। सुन रहे थे। सीख रहे थे। और धीरे-धीरे हमने कुछ ऐसा बनाना शुरू किया जो सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं है। कुछ ऐसा है जिसमें हम पूरी तरह यकीन करते हैं। इस तरह आरसीबी केयर्स का जन्म हुआ।' पोस्ट में बताया गया है कि आरसीबी केयर्स अपने फैंस के साथ खड़े होने, उन्हें सम्मान देने और घाव भरने के लिए है। आरसीबी ध्यान रखता है और हम हमेशा ध्यान रखेंगे। जल्द ही विस्तार से जानकारी देंगे।  

NH-107 अपग्रेडेशन को हरी झंडी, 22 करोड़ से काझी पथ होगा और मजबूत

पटना बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरूवार को बताया कि पथ प्रमंडल पूर्णियां अंतर्गत एन.एच.-107 से काझी (कुल लंबाई 6.000 किमी) पथ चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई है। सम्राट चौधरी ने बयान जारी कर बताया कि इस योजना की लागत 22 करोड़ 61 लाख 70 हजार रुपये आएगी। उन्होंने कहा कि पथ निर्माण विभाग से तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद निविदा प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। इसके क्रियान्वयन और खर्च की जिम्मेदारी पथ प्रमंडल पूर्णिया के कार्यपालक अभियंता को दी गई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में डबल इंजन वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार, सड़कों के बुनियादी ढ़ांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। यही वजह है कि बिहार में सड़कों का विशाल नेटवर्क तैयार हुआ है। हाल में ही सरकार ने पूर्णिया जिले के पथ प्रमंडल अंतर्गत एनएच-107 के चेथरीयपीर चौक से चम्पानगर भाया धनहरा, कुम्हारटोला, जंगैली, जगनी तक कुल 7.653 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी और अब इसी कड़ी में 22 करोड़ 61 लाख 70 हजार रुपये की लागत से पूर्णिया में एन.एच.-107 से काझी पथ का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि काझी पथ का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण जहां आवागमन सुगम होगा वहीं रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।  

गवर्नर बनाम राष्ट्रपति: सेना तैनात करने की पावर किसके पास?

नई दिल्ली राज्यपालों और राष्ट्रपति की ओर से किसी विधानसभा से पारित बिल पर लंबे समय तक निर्णय न लेने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में एक आदेश दिया था। बेंच ने विधेयकों पर फैसले के लिए 90 दिन की लिमिट तय कर दी थी, जिस पर राष्ट्रपति ने अदालत में रेफरेंस दाखिल किया है। उन्होंने पूछा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट की ओर से राष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए टाइमलाइन तय की जा सकती है। इसी पर 5 दिन सुनवाई चल चुकी है और आज फिर से दिलचस्प बहस देखने को मिली। केंद्र सरकार के वकील तुषार मेहता ने कहा कि इस तरह यदि बिलों को रोकने की बात अदालत में आई है तो क्या किसी विधेयक को मंजूरी पर भी ऐसा हो सकता है। यही नहीं उन्होंने राज्यपाल और राष्ट्रपति के विवेकाधिकार एवं परिस्थितिजन्य निर्णय लेने की क्षमता पर अदालत में विचार होने पर भी सवाल उठाया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मान लीजिए कि किसी राज्य में कानून व्यवस्था की समस्या हो गई है। स्थानीय पुलिस स्थिति को संभाल नहीं पा रही है। ऐसे में क्या अर्धसैनिक बलों की तैनाती से पहले केंद्र सरकार को अदालत में अर्जी दाखिल करनी चाहिए। मेरा तो जवाब है कि ऐसा नहीं हो सकता। यही नहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आर्टिकल 32 के तहत तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों की ओर से अर्जी दाखिल करने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 32 में मूलभूत अधिकारों की रक्षा की बात कही गई है। एक बार कर्नाटक सरकार ने भी इसके तहत अर्जी डाली थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। बेंच का कहना था कि मूल अधिकारों के रक्षा के नाम पर सरकार अर्जी नहीं डाल सकती। कोई एनजीओ, पीड़ित पक्ष या अन्य उत्पीड़न के शिकार लोग या संस्था ऐसा कर सकते हैं, लेकिन सरकार नहीं। इस दौरान तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने भी दिलचस्प दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल और सरकार एक म्यान में दो तलवार की तरह नहीं रह सकते। दोनों को सहयोगी की भूमिका में ही रहना होगा। राज्यपाल केंद्र सरकार के कर्मचारी नहीं हैं, किसने रखी दलील उन्होंने कहा कि राज्यपाल का काम एक मार्गदर्शक का है। वह टकराव की भूमिका में नहीं आ सकते और ना ही राज्य विधानसभा की ओर से पारित विधेयकों को पलट सकते हैं। यही नहीं उन्हें केंद्र सरकार का प्रतिनिधि बताने पर भी बहस हुई। तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल कोई केंद्र सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। वह एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति हैं। इस पर चीफ जस्टिस गवई ने कहा कि राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के तौर पर वह राज्यों में होते हैं। संविधान के मुताबिक केंद्र सरकार की शक्तियां राष्ट्रपति में समाहित होती हैं। इसलिए ऐसा कहना गलत है कि राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि नहीं हैं।  

गरीब-मजदूरों के मामले में मांगी थी घूस, ESIC मैनेजर रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

सोनीपत हरियाणा में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम भ्रष्टाचार पर लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी के तहत अब रोहतक और सोनीपत एसीबी की संयुक्त टीम ने सोनीपत में तैनात ESIC मैनेजर विनोद को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार 3 माह पहले ही ट्रांसफर होकर सोनीपत पहुंचे मैनेजर विनोद ने गरीब-मजदूरों की मुआवजा राशि निपटाने के बदले शिकायतकर्ता सागर से 16 हजार रुपये की मांग की थी। शुरूआत में आरोपी ने 5 हजार रुपये ले लिए और बाकि राशि बाद में देने का दबाव बनाया। परेशान होकर युवक ने एसीबी से शिकायत की। योजना बनाकर जब शिकायतकर्ता ने 11 हजार रुपये दिए तो एसीबी टीम ने मौके पर छापा मारकर विनोद को गिरफ्तार कर लिया। ACB अधिकारी सचिव कुमार ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और आगे की कार्रवाई कानून के मुताबिक की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि मजदूरों के हक पर डाका डालने वाले भ्रष्ट अधिकारी किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। 

पंजाब BJP कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा के बड़े भाई का निधन

चंडीगढ़  पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा को गहरा सदमा लगा है। अश्वनी शर्मा के बड़े भाई राम प्रसाद शर्मा का निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि राम प्रसाद शर्मा 63 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। पी.जी.आई. में पिछले 15 दिनों से उनका इलाज चल रहा था और पिछले 3 दिनों से वह आई.सी.यू. में भर्ती थे। उनके निधन से अश्वनी शर्मा सहित पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। राम प्रसाद शर्मा का अंतिम संस्कार कल 29 अगस्त  सुबह 11 बजे पठानकोट के सिविल नजदीक श्मशान घाट में किया जाएगा। 

पूर्व CM भूपेंद्र हुड्डा पर अभय चौटाला का निशाना, कहा वोट काटने में सहयोगी

फतेहाबाद  फतेहाबाद की जाट धर्मशाला में बुधवार को इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने 23 सितंबर को होने वाली ताऊ देवीलाल जयंती समारोह को लेकर कार्यकर्ताओं को निमंत्रण दिया। इसके बाद वह मीडिया से भी रूबरू हुए। अभय चौटाला ने भूपेंद्र हुड्डा पर साधा निशाना  अभय सिंह चौटाला ने कहा कि विधानसभा के सत्र में विपक्ष पूरी तरह से नाकाम रहा है और सरकार को घेर नहीं पाया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी के 37 विधायक होते तब हम बताते कि विपक्ष क्या होता है। उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा वोट काटु है और इन्होंने ही बीजेपी की सरकार बनाने में मदद की है। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि मुझे हरवाने में भी बीजेपी और कांग्रेस एक हो गई थी और यह जानती थी कि अगर अभय सिंह चौटाला जीत गया तो वह विधानसभा में किसी को बोलते नहीं देगा। वही आयुष्मान योजना को लेकर रुकी डॉक्टरों की पेमेंट को लेकर भी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि कुछ डॉक्टर आयुष्मान योजना का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो रहे है।