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संसदीय समितियों की भूमिका व्यापक, बजट के साथ परिणामों पर भी नजर: ओम बिरला

भुवनेश्वर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राज्य एवम् केंद्र शासित प्रदेशों के विधानमंडलों की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समितियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिरला ने समावेशी विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में संसदीय समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। बिरला ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि संसदीय समितियां न केवल बजट आवंटन की निगरानी करती हैं, बल्कि उनके परिणामों का मूल्यांकन भी करती हैं। बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों में आरक्षण और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन सहित कई ऐतिहासिक निर्णय इन समितियों की सिफारिशों से सामने आए हैं। हालांकि सरकारें इन सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं, ज्‍यादातर सुझावों को आमतौर पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभाओं में समितियों को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वे प्रभावी ढंग से काम कर सकें, सर्वोत्तम प्रथाओं को अपना सकें और नई तकनीकों को एकीकृत कर सकें। इसका उद्देश्य दक्षता बढ़ाना और लोगों के लिए अधिकतम कल्याण सुनिश्चित करना है। बिरला ने समितियों की मुख्य जिम्मेदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका प्राथमिक उद्देश्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक और विधायी अधिकारों की रक्षा करना, उनकी चुनौतियों का समाधान करना और उनका कल्याण है। इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए एक विजन 2025 रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि समितियां नियमित रूप से हितधारकों के साथ बातचीत करती हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामाजिक कल्याण के लिए आवंटित धन का उचित उपयोग हो, क्षेत्रीय दौरे करती हैं। वे मौजूदा योजनाओं में संशोधन का सुझाव भी देती हैं या नई पहल की सिफारिश करती हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से, सरकारों ने इनमें से अधिकांश सिफारिशों को स्वीकार किया है। बिरला ने कहा कि सरकार के अलावा, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग जैसी संस्थाएं भी मुद्दों की निगरानी और इन समुदायों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने विभिन्न संसदीय मुद्दों पर मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि संसदीय समितियों के माध्यम से अच्छे विचारों और प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। समितियों के लिए सभी राजनीतिक दलों से नाम मांगे गए हैं, जिनका गठन जल्द ही किया जाएगा। बिरला ने संसद और राज्य विधानसभाओं में सार्थक और गरिमापूर्ण चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया ताकि जनहित के मुद्दों पर बहस हो सके और समाज के गरीब और हाशिए पर पड़े वर्गों का कल्याण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि देश की जनता भी यही अपेक्षा रखती है। उन्‍हाेंने लोकतंत्र में स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असहमति लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इसे हमेशा गरिमापूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए, चाहे वह नीतियों की आलोचना हो या सरकारी कामकाज की। चर्चाओं और बहसों को और बेहतर बनाने के लिए, 1947 से अब तक की सभी संसदीय बहसों का डिजिटलीकरण और उन्हें मेटाडेटा के साथ 'डिजिटल संसद' प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने सहित कई कदम उठाए गए हैं। सदस्यों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक 'लाइव लाइब्रेरी' भी 24 घंटे उपलब्ध कराई गई है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पटेल ने ग्राम बांक, इंदौर में एम.आर.एफ. प्लांट का निरीक्षण किया

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शनिवार को इंदौर की ग्राम पंचायत बांक में संचालित सामग्री पुनर्चक्रण सुविधा (MRF) प्लांट का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्था ‘सृष्टि वेस्ट मैनेजमेंट’ द्वारा पिछले 2 वर्षों से किए जा रहे सूखा कचरा प्रबंधन कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। संस्था द्वारा प्रतिदिन 3700 घरों, 425 दुकानों, स्कूलों, मैरिज गार्डन और अस्पतालों से लगभग 800 किलोग्राम सूखा कचरा एकत्रित कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाता है। इस नवाचार की सराहना करते हुए श्री पटेल ने कहा कि यह मॉडल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि आत्मनिर्भर ग्राम पंचायत की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि इस पूरी प्रक्रिया पर प्रतिमाह लगभग 2 लाख 80 हजार रूपये का व्यय आता है, जबकि समुचित प्रबंधन के बाद संस्था को 70 हजार रूपये का लाभ भी हो रहा है। श्री पटेल ने इस कार्य को प्रशंसनीय, पर्यावरण हितैषी और सतत विकास की दिशा में प्रेरणादायक पहल बताया। इस अवसर पर सर्वश्री मधु वर्मा, मनोज पटेल, कान्हा पटेल एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

ड्रोन टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने किया शुभारंभ

नोएडा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को नोएडा पहुंचे। दोनों नेताओं ने सेक्टर-81 स्थित राफी मोहिब ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और रक्षा उपकरण एवं इंजन टेस्ट फैसिलिटी का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बढ़ती रक्षा क्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए अत्याधुनिक ड्रोन, एयरक्राफ्ट इंजन और एयरोस्पेस टेस्ट फैसिलिटी देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। भारत 1947 से लगातार चुनौतियों का सामना करता आ रहा है और 'ऑपरेशन सिंदूर' ने युद्ध के नए दौर में देश की सामर्थ्य और शक्ति का प्रदर्शन किया है। आपके पास ताकत है तो दुनिया आपके सामने नतमस्तक होती है। शास्त्र और शस्त्र दोनों का बेहतर समन्वय होगा तो शांति कायम होगी। उन्होंने शेर और बकरी का उदाहरण देते हुए कहा कि शेर सामर्थ्य और राज दोनों का प्रतीक है। सीएम योगी ने महाराणा प्रताप की वीरता का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तर प्रदेश में नौ ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां संचालित हैं। राज्य सरकार ने साढ़े 12 हजार एकड़ भूमि डिफेंस कॉरिडोर के लिए उपलब्ध कराई है, जिसमें आगरा, अलीगढ़, झांसी, चित्रकूट और कानपुर शामिल हैं। साथ ही लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल की यूनिट स्थापित की गई है, जिसने 'ऑपरेशन सिंदूर' में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ की मुस्कुराहट तब और बढ़ेगी जब वहां से ब्रह्मोस मिसाइल दुश्मन पर निशाना साधेगी। उन्होंने नई ड्रोन यूनिट को बधाई देते हुए आश्वस्त किया कि यूपी सरकार देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह यूनिट देश को समर्पित है और डिफेंस सिस्टम में साइंटिफिक रिवॉल्यूशन का प्रतीक है। 2017 में महज 10 लोगों के साथ कंपनी की शुरुआत हुई थी और आज 3,600 से ज्यादा वैज्ञानिक व इंजीनियर यहां काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका या चीन का कोई भी डिफेंस सिस्टम इस कंपनी के बने ड्रोन को डिटेक्ट नहीं कर सकता। इसे देश की सबसे इनोवेटिव एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सिस्टम दुश्मन में दहशत पैदा करने वाला है। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था इतनी खराब थी कि यहां उद्योग लगाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, लेकिन आज योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य निवेशकों की पहली पसंद बन गया है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि ड्रोन अब सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए कहा कि विरोध झेलने के बावजूद भारत ने हमेशा नई राह बनाई है। मात्र 14 महीनों में इस कंपनी और डीआरडीओ के बनाए प्रोडक्ट्स 'ऑपरेशन सिंदूर' में इस्तेमाल हुए। संकल्प, साहस और विज्ञान के मेल से ही यह संभव हो पाया और सेना के जवानों की वीरता का भी जिक्र किया जाना चाहिए।

मोदी शासन की नीतियों से बढ़ी GDP, मंत्रियों ने बताया सुधारों का नतीजा

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्रियों ने शनिवार को वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में जीडीपी की 7.4 प्रतिशत शानदार वृद्धि दर को पीएम नरेंद्र मोदी के सुधार-संचालित शासन का प्रमाण बताया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों के कारण जीडीपी वृद्धि दर लगातार दूसरी तिमाही में उम्मीदों से बेहतर रही और अप्रैल-जून 2025 के लिए यह पांच तिमाहियों के उच्चतम स्तर 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह जनवरी-मार्च 2025 की 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर और 2024-25 की पहली तिमाही की 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर से कहीं अधिक है।" केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत के साथ दूसरे बड़े देशों के वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में रियल जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों का एक इंफोग्राफिक शेयर किया। इस इंफोग्राफिक में दी गई जानकारी के अनुसार, जून तिमाही में चीन ने 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की, उसके बाद इंडोनेशिया ने 5.1 प्रतिशत, अमेरिका ने 2.1 प्रतिशत, जापान और ब्रिटेन ने 1.2-1.2 प्रतिशत और फ्रांस ने 0.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की। इन सबसे अलग भारत ने जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की शानदार जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की। उन्होंने लिखा, "7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि – पीएम नरेंद्र मोदी के सुधार-संचालित शासन का प्रमाण है।" केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लिखा, "निरंतर कम मुद्रास्फीति के कारण, भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि हासिल की। यह पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। साथ ही, पिछली तिमाही की 7.4 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में, वर्तमान विकास दर भारतीय अर्थव्यवस्था के निरंतर बढ़ते रुझान को दर्शाती है।" केंद्रीय मंत्री ने 20वें इंडिया-अफ्रिका बिजनेस कॉन्क्लेव में कहा, "जब हम भारत की विकास गाथा पढ़ते हैं तो पाते हैं कि इस तिमाही आनी अप्रैल से जून तक देश की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही है और हमने सभी क्षेत्रों में प्रगति की है।"

बारिश से बिगड़ा MP का हाल, हाईवे जाम में दो घंटे तक फंसे यात्री

बुरहानपुर बाढ़ ने शनिवार को दूसरी बार इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाइवे दो घंटे से ज्यादा समय तक जाम कर दिया। जिससे हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस जाम में एम्बुलेंस और यात्री बसें भी काफी देर तक फंसी रहीं। बाद में ग्रामीणों ने किसी तरह उन्हें पार कराया। दूसरे वाहन चालकों ने भी जान जोखिम में डाल कर हाइवे पार किया। इससे पहले गुरुवार देर रात भी असीरगढ़ से ढाई किमी दूर धूपगट्टा गांव के पास हाइवे पर पानी भर जाने से रात बारह बजे तक मार्ग अवरुद्ध हुआ था। पानी से हुआ भारी नुकसान निंबोला थाना प्रभारी राहुल कांबले ने हाइवे का निर्माण कर रही कंपनी और एनएचएआई के अधिकारियों को सूचना दी थी। बावजूद इसके निर्माण एजेंसी ने पहाड़ी नाले की जल निकासी का ठोस प्रबंध नहीं किया। जिसके चलते शनिवार दोपहर तीन बजे क्षेत्र में तेज वर्षा होने के बाद फिर न केवल हाईवे जाम हो गया, बल्कि धूपगट्टा गांव में भी पानी घुस गया। जिससे करीब दो दर्जन ग्रामीणों का गृहस्थी का सामान भी खराब हो गया। खेतों में दो से तीन फीट पानी भर जाने के कारण मक्का व अन्य फसलों को भी क्षति हुई है।   पुलिया छोटी करने से उपजी समस्या उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को नईदुनिया टीम ने हाइवे पर बाढ़ का पानी आने का मूल कारण तलाशा था। जिसमें पता चला था कि बरसाती नाले पर नई पुलिया बनाई जा रही है। जिसके लिए निर्माण एजेंसी ने पानी को डायवर्ट करने एक पाइप डालकर अस्थाई पुलिया बनाई है। पहाड़ों से उतरने वाले पानी की मात्रा अधिक होती है। एक पाइप से केवल बीस प्रतिशत पानी ही निकल पा रहा है। जिसके चलते शेष पानी हाईवे और धूपगट्टा गांव में घुस कर तबाही मचा रहा है। अब तक 542 मिमी औसत वर्षा हुई बाढ़ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार अब तक जिले में 542 मिमी औसत वर्षा हुई है। जिले की कुल औसत वर्षा 823 मिमी है। शनिवार सुबह तक बुरहानपुर में पांच मिमी, नेपानगर में 29 मिमी और धूलकोट क्षेत्र में 65 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। जिससे ताप्ती नदी का जल स्तर भी बढ़ गया है। शनिवार दोपहर तीन बजे परसाडोह बांध का एक गेट भी खोला गया है। जिसके कारण ताप्ती नदी का जल स्तर देर रात अथवा कल तक और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।

अस्पताल बनाम इंश्योरेंस कंपनियां: कैशलेस इलाज खतरे में, जिम्मेदारी किसकी?

नई दिल्ली सरकार हेल्थ इंश्योरेंस के दायरे को बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों को इसके प्रीमियम में कटौती से लेकर इंश्योरेंस से जुड़े छोटे-छोटे प्रोडक्ट लाने के लिए कह रही है। दूसरी तरफ मुनाफे को लेकर निजी कंपनियां और निजी अस्पतालों की आपसी लड़ाई में पहले से हेल्थ इंश्योरेस लेने वालों के लिए भी खतरे की घंटी बजने लगी है। अस्पताल उन्हें कभी भी कैशलेस इलाज के लिए मना कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें पहले अपना पैसा लगाकर इलाज कराना होगा और फिर इंश्योरेंस कंपनियां उनके बिल का भुगतान करेंगी। जबकि अधिकतर उपभोक्ता हेल्थ इंश्योरेंस की खरीदारी यह सोचकर करते हैं कि जरूरत पड़ने पर वे अस्पताल में जाकर भर्ती हो जाएंगे और उनके इलाज का खर्चा उनके इंश्योरेंस की सीमा के मुताबिक कंपनी उठाएगी। लोग इत्मीनान से रहते हैं कि उनके खाते में पर्याप्त पैसा नहीं रहने पर भी हेल्थ इंश्योरेंस रहने पर उनका इलाज हो जाएगा। एएचपीआई ने दिया था नोटिस भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) भी कैशलेस (बिना नकदी के) इलाज को बढ़ावा देता है। हाल ही में एसोसिएशन ऑफ हेल्थ प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) ने बजाज एल्यांज और केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की कैशलेस सुविधा को सितंबर से खत्म करने का नोटिस दिया था। अस्पताल कभी भी कैशलेस इलाज के लिए कर सकते हैं मना एएचपीआई निजी अस्पतालों का एसोसिएशन है। हालांकि अब इंश्योरेंस कंपनियों की तरफ से कहा जा रहा है कि एएचपीआई से बातचीत हो गई है और ग्राहकों को सूचीबद्ध या पैनल में शामिल अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रहेगी। लेकिन जानकारों का कहना है कि पिछले 15 दिनों से अस्पताल और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच जो झगड़ा चल रहा था उसे देखते हुए साफ है कि अस्पताल कभी भी कैशलेस इलाज के लिए मना कर सकता है। इंश्योरेंस कंपनियों का क्या कहना है? इंश्योरेंस कंपनियों की तरफ से इस बारे पूछने पर बताया गया कि निजी अस्पताल और उनके बीच कैशलेस इलाज को लेकर समझौता होता है जिसके तहत इलाज से जुड़े रूम किराया से लेकर डॉक्टर की फीस तक की राशि तय होती है। प्राइवेट अस्पतालों ने क्या कहा? निजी अस्पतालों का कहना है कि इलाज से जुड़ी महंगाई सालाना 14 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, लेकिन इंश्योरेंस कंपनियां उस हिसाब से उनकी दरों को नहीं बढ़ा रही है। इसलिए अस्पताल कैशलेस इलाज से इनकार करने के मूड में है। इंश्योरेंस कंपनियों का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम लगातार बढ़ रहा है जिससे उन पर काफी वित्तीय दबाव है। निजी अस्पताल इलाज का खर्च भी बढ़ा-चढ़ा कर पेश करते हैं। हालांकि इस वित्तीय दबाव को कम करने के लिए हर साल हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम 10 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। कौन लेगा जिम्मेदारी? पिछले तीन सालों में हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम में 15-30 प्रतिशत तक का इजाफा देखा गया है। जानकारों का कहना है कि ग्राहकों को हेल्थ इंश्योरेंस बेचने के दौरान उन्हें कंपनी के पैनल में शामिल अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा का आश्वासन दिया जाता है और अचानक वे अस्पताल कैशलेस इलाज से मना कर दे तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इरडा की नजर अस्पताल और इंश्योरेंस कंपनियों की इस लड़ाई पर है और इसका स्थायी हल निकालने का प्रयास किया जा सकता है। जानकार यह भी कह रहे हैं कि अस्पताल और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच कैशलेस इलाज देने का सिर्फ समझौता होता है, कोई कानूनी बंदिश नहीं है। अस्पताल उधार के इलाज को कभी भी बंद कर सकता है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- पर्यटन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती में बड़ी अहम भूमिका निभाता है

म.प्र. की पर्यटन नीति भा रही है निवेशकों को पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने 7 निवेशकों को जारी किये एलओए 60 करोड़ से अधिक का होगा निवेश और रोजगार सृजन अधिकांश निवेशकों ने होटल रिसॉर्ट में दिखाई रूचि 75 करोड़ से अधिक के विरासत कार्यों का हुआ शिलान्यास शिल्पकारों के लिए वेबसाइट और ग्वालियर किले की कार्ययोजना का हुआ विमोचन निवेश के लिए हो रहे सर्वांगीण प्रयासों से अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल : विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रमुख निवेशकों और हितधारकों से किया संवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पर्यटन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती में बड़ी अहम भूमिका निभाता है। पर्यटन से राष्ट्रीय आय तो बढ़ती ही है, साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं। पर्यटन और तीर्थाटन, ये हमारे देश और विशेषकर मध्यप्रदेश की समृद्धि के प्रमुख प्रवेश द्वार हैं। मध्यप्रदेश, देश का दिल है। प्रदेश की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए ही पर्यटन विकास को विशेष महत्व दिया जा रहा है। राज्य सरकार समावेशी प्रयासों के जरिए समाज के सभी वर्गों को जोड़कर पर्यटन क्षेत्र के विस्तार और संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर पर्यटन कॉन्क्लेव में साढ़े तीन हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 6 निवेशकों को लैटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदाय किये गये, इससे 60 करोड़ से अधिक का निवेश और बड़ी संख्या में रोजगार सृजन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्वालियर के राजमाता विजया राजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कान्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें विश्व स्तर पर आकर्षण का केंद्र हैं। इनके संरक्षण और प्रचार-प्रसार से प्रदेश न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर, विकसित और समृद्ध भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में आज राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर ग्वालियर में पहली बार रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव हो रहा है। ग्वालियर देश की राजधानी के करीब का क्षेत्र है। यहां राजा मानसिंह तोमर के काल में बना ऐतिहासिक किला दुनिया में पहचान रखता है। इसकी स्थापत्य कला अद्भुत है। बड़े-बड़े सत्ताधीशों को बुरे समय में इसी किले में बंदी बनाकर रखा गया। इस कठिन दौर में ग्वालियर में एक आध्यात्मिक आत्मा का प्रकटीकरण हुआ। मुरैना के मितावली के चौंसठ योगिनी मंदिर के डिजाइन के आधार पर वर्ष 1912 में दिल्ली में संसद भवन का निर्माण हुआ। यह दुनिया भर में लोकतंत्र का सबसे आकर्षक भवन है। अब नए संसद भवन को विदिशा के मंदिर के डिजाइन पर बनाकर तैयार किया गया है। इसमें बना डोम सांची स्तूप की कॉपी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जो पहली बार चीता देखते हैं, वो आश्चर्यचकित हो जाते हैं। चीता गांवों में घूमते नजर आते हैं। प्रदेश में मनुष्य और वन्य प्राणियों के बीच सह अस्तित्व और साहचर्य भाव नजर आता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर संगीत सम्राट तानसेन और बैजू बावरा की विरासत है। राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय, ग्वालियर के भवन निर्माण के लिए 50 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। जीवाजी विश्वविद्यालय में पीएम उषा योजना के तहत विकास कार्यों के लिए भी बड़ी धनराशि दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा के बाद अब पर्यटन विकास के लिए ग्वालियर अंचल को भी कई सौगातें मिल रही हैं। ग्वालियर के राजा मानसिंह किले में विभिन्न विकास कार्यों के लिए इंडिगो कंपनी द्वारा अपने कॉर्पोरेट सोशल रेस्पांसिबिलिटी फंड (सीएसआर कोष) से 100 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी पूरी दुनिया को देश की विरासतों और पर्यटन केंद्रों के बारे में बता रहे हैं। वे 'मेक इन इंडिया', 'मेड इन इंडिया', 'वोकल फॉर लोकल' और 'स्वदेशी अपनाओ' अभियान के जरिए देश के नागरिकों को स्वदेशी से स्वाबलंवन की ओर प्रवृत्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर की रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में उद्योगपति श्री सचिन गुप्ता ने 1000 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा अन्य निवेशकों एवं उद्योग समूहों की ओर से कुल 3500 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव राज्य सरकार को इस कान्क्लेव के माध्यम से मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि यह कॉन्क्लेव 11 से 13 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली 'मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट' की तैयारियों का हिस्सा है। टूरिज्म सैक्टर के लिए यह महत्वपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि रविवार (31 अगस्त) को मुरैना जिले को अनेक सौगातें मिलेंगी। मुरैना के पीपरसेरा औद्योगिक प्रक्षेत्र में करीब 500 करोड़ रुपए की लागत से हाइड्रोजन कारखाने का शिलान्यास किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में होटल एवं रिसोर्ट के लिए प्राप्त हुए निवेश प्रस्‍ताव कॉन्क्लेव में प्रमुख निवेशकों ने ग्वालियर–चंबल और सागर संभाग में निवेश की इच्छा जताकर पर्यटन के विकास की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। यह ऐतिहासिक पल दोनों संभागों के लिए आर्थिक समृद्धि और रोजगार के नए द्वार खोलेगा। निवेशकों को लैटर ऑफ अलॉटमेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव के दौरान पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 7 भूमियों के लिए 6 निवेशकों को लैटर ऑफ अलॉटमेंट (LOA) प्रदान किए। प्रदेश में इससे सीधे तौर पर 60 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के असंख्य अवसर पैदा होंगे। इन भूमियों पर होटल, रिसॉर्ट और ईको टूरिज्म यूनिट आदि का निर्माण किया जाएगा। श्री अरूण तिवारी को 40 कक्षों के साथ ईको टूरिज्म एक्टिविटी के लिये गांधी सागर मंदसौर और हेमाबर्डी धार में, श्री यश जैन को 20 कक्षों का रिसॉर्ट बनाने रहीपुरा बुराहनपुर में, श्रीमती स्मृति मुकुल थोराट, मेसर्स श्री साईं वेयर हाउस एण्ड एग्रो सर्विस को 20 कक्षों का रिसॉर्ट बनाने बिजाना शाजापुर में, श्री अमित उपाध्याय को 25 कक्षों का होटल/ रिसॉर्ट बनाने के लिये कागपुर विदिशा में, श्री संजय पाव को 22 कक्षों के साथ ईको टूरिज्म एक्टिविटीज के लिये गांधी सागर मंदसौर में और श्री विकास नेमा/प्रवीण … Read more

मेडिकल साइंस का चमत्कार: इंसान के शरीर में लगाया गया सूअर का फेफड़ा, सफल प्रयोग ने खोली नई उम्मीदें

बेजिंग  मेडिकल साइंस ने बड़ी छलांग लगाई है। चीन के वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ब्रेन डेड मरीज के शरीर में जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर का फेफड़ा ट्रांसप्लांट  किया। यह ऐतिहासिक प्रयोग ग्वांगझोउ मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने किया।39 साल के ब्रेन डेड व्यक्ति पर यह ट्रांसप्लांट किया गया। ऑपरेशन के बाद फेफड़ा कुछ समय तक काम करता रहा, लेकिन 24 घंटे के भीतर इसमें नुकसान दिखने लगा। 3वें और 6वें दिन शरीर में एंटीबॉडी बनने लगीं, जिसने फेफड़े को नुकसान पहुंचाया। 9वें दिन  सूअर का फेफड़ा शरीर से हटा दिया गया।   वैज्ञानिकों के अनुसार, फेफड़े का ट्रांसप्लांट हार्ट और किडनी की तुलना में कहीं ज्यादा जटिल है।हर सांस के साथ फेफड़े का सीधा संपर्क बाहरी वातावरण, वायरस, एलर्जन और प्रदूषण से होता है। इसी कारण  इम्यून रिएक्शन और अंग अस्वीकृति (rejection)  का खतरा ज्यादा रहता है।भले ही यह फेफड़ा पूरी तरह सफल न रहा हो, लेकिन यह प्रयोग जेनेटिक साइंस और अंग प्रत्यारोपण की दुनिया में नई राह खोल सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में सूअर जैसे जानवरों से इंसानों के लिए अंग तैयार करना संभव हो सकेगा।

ITR फाइलिंग पर नया अपडेट: ₹3 लाख कमाने वालों के लिए क्या है नियम?

नई दिल्ली  जिन लोगों का आयकर ऑडिट नहीं होता, उनके लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2025 है। अब केवल तीन हफ्ते बचे हैं और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस बारे में SMS रिमाइंडर भेजना शुरू कर दिया है। आयकर विभाग की ओर से भेजे जा रहे SMS में लिखा है- अब तक 3 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं! कृपया 15.09.25 से पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर AY 2025-26 के लिए अपना आईटीआर दाखिल और ई-वेरिफिकेश करें। सालाना सैलरी 3 लाख रुपये हो तब? ऐसे में अब सवाल है कि किसके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी है। क्या उन लोगों के लिए भी रिटर्न फाइल करना जरूरी है जिसकी सालाना सैलरी 3 लाख रुपये तक है? नांगिया एंड कंपनी एलएलपी की कार्यकारी निदेशक संजोली माहेश्वरी ने कहा- वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की आय सीमा टैक्सपेयर की कुल आय और चुने गई टैक्स रिजीम यानी पुरानी या नई टैक्स रिजीम पर आधारित है। ईटी की खबर में संजोली माहेश्वरी ने कहा- यदि टैक्सपेयर की कुल आय मूल छूट सीमा से अधिक है तो टैक्सपेयर को अनिवार्य रूप से आईटीआर दाखिल करना चाहिए। नई टैक्स व्यवस्था के लिए मूल छूट सीमा 3 लाख रुपये और पुरानी टैक्स व्यवस्था के लिए 2.5 लाख रुपये है। किस तरह के होते हैं फॉर्म आईटीआर फॉर्म एक (सहज) और आईटीआर फॉर्म चार (सुगम) सरल फॉर्म हैं जो बड़ी संख्या में छोटे तथा मध्यम करदाताओं की जरूरतों के अनुरूप हैं। सहज को ऐसे व्यक्ति दाखिल कर सकते हैं, जिसकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक हो और जो वेतन, एक मकान की संपत्ति, अन्य स्रोतों (ब्याज) तथा कृषि आय से 5,000 रुपये प्रति वर्ष तक की आय प्राप्त करता हो। सुगम को ऐसे व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) और कंपनियों द्वारा दाखिल किया जा सकता है, जिनकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक हो और व्यवसाय से और कोई पेशेवर आय हो। आईटीआर-2 उन व्यक्तियों और एचयूएफ द्वारा दाखिल किया जाता है जिनकी आय, व्यवसाय या पेशेवर लाभ या प्राप्ति से नहीं होती है।  

रेलवे का बड़ा ऐलान: यात्रियों के लिए बदला लोकल ट्रेनों का टाइमटेबल

मुंबई  गणेशोत्सव को देखते हुए, मुंबई के लाखों लोगों को रेलवे ने बड़ी खुशखबरी दी है। मुंबई मेट्रो के बाद अब मध्य रेलवे ने भी रात में अतिरिक्त लोकल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इस कदम से गणपति विसर्जन के दौरान देर रात तक सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। सेंट्रल लाइन पर चलेंगी ये ट्रेनें मध्य रेलवे 4, 5 और 6 सितंबर की रात को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) और कल्याण-ठाणे के बीच विशेष ट्रेनें चलाएगा। ये ट्रेनें मुख्य मार्ग पर सभी स्टेशनों पर रुकेंगी। CSMT से कल्याण: 6 सितंबर को एक स्पेशल ट्रेन रात 01:40 बजे CSMT से चलेगी और 03:10 बजे कल्याण पहुँचेगी। CSMT से ठाणे: एक अन्य स्पेशल सेवा CSMT से रात 02:30 बजे रवाना होकर 03:30 बजे ठाणे पहुँचेगी। अप मेन लाइन पर: 4, 5 और 6 सितंबर को कल्याण से CSMT के लिए स्पेशल ट्रेनें रात 00:05 बजे से चलेंगी, जो 01:30 बजे CSMT पहुँचेगी। हार्बर लाइन पर भी चलेंगी स्पेशल ट्रेनें गणपति विसर्जन के दिन यानी 6 और 7 सितंबर को हार्बर लाइन पर भी यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। CSMT से पनवेल: 01:30 बजे और 02:45 बजे दो विशेष ट्रेनें CSMT से पनवेल के लिए चलेंगी। पनवेल से CSMT: पनवेल से CSMT के लिए पहली स्पेशल ट्रेन रात 01:00 बजे और दूसरी 01:45 बजे चलेगी।