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सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा– हमेशा हिंदू विरोधी रवैया अपनाती है

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आदिवासियों से जुड़े एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इससे भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस पर हमला बोलने का एक बार फिर मौका मिल गया है। दरअसल अमंग सिंघार ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था आदिवासी हिंदू नहीं हैं। उन्होंने गुरुवार को आदिवासीबहुल जिले छिंदवाड़ा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं। मैं इस बात को हमेशा कहता हूं। वो शबरी थीं, जिन्होंने राम को बेर खिलाए थे, वो भी आदिवासी थीं। जो आदिकाल से वास कर रहे हैं, वो आदिवासी हैं। उनके इस बयान पर मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत कई नेताओं ने कांग्रेस को निशाने पर लिया है। सीएम मोहन यादव ने कहा, दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस हमेशा हिंदू और हिंदुत्व के विरोध में काम करती है। राहुल गांधी ने हिंदू के बारे में जो बात कही, वह अत्यंत बचकानापन था। अब कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कह रहे हैं कि आदिवासियों में हिंदुत्व नहीं है। उन्हें शर्म आनी चाहिए। हिंदुत्व पर प्रश्न उठाएंगे तो जनता माफ नहीं करेगी। कांग्रेस के नेताओं को माफी मांगनी चाहिए। वहीं केंद्रीय मंत्री डीडी उइके ने सिंघार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने जनजातीय समुदाय को अपमानित किया है। जनजातीय समुदाय मूलत: महादेव के वंशज हैं। लगभग सभी ज्योतिर्लिंग भी जनजातीय क्षेत्र में ही हैं। सभी गोंड राजाओं के किलों में भी महादेव विराजमान हैं। आदिवासी राजा महादेव के उपासक थे। भारतीय जनता पार्टी के सांसद गजेंद्र पटेल ने कहा कि वे श्री सिंघार की इस बात को खारिज करते हैं। भारत के संविधान में आदिवासी समाज को हिंदू समाज का अभिन्न अंग माना गया है। 1951 की जनगणना में इसी परिधि में आदिवासी समुदाय को गिना गया है।

बाढ़ प्रभावित बच्चों के लिए आर्थिक मदद: तुरंत आवेदन करें और पाएं छात्रवृत्ति

पंजाब पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण हज़ारों परिवार विस्थापित हो गए हैं और अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन आपदाग्रस्त क्षेत्रों में छात्रों और अभिभावकों की भारी मुश्किलों को समझते हुए, देश भगत यूनिवर्सिटी ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के उन छात्रों के लिए ट्यूशन फीस में 50% छात्रवृत्ति की घोषणा की है।   है कि प्रतिकूल समय में भी शिक्षा जारी रहनी चाहिए। इस मौके पर प्रभावित लोगों के प्रति अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए देश भगत यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. ज़ोरा सिंह ने कहा कि हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन ने अनगिनत परिवारों के जीवन को प्रभावित किया है, जिससे न केवल घरों और आजीविका को नुकसान पहुंचा है, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए अनिश्चितता भी पैदा हुई है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा आशा की नींव है और भविष्य के पुनर्निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है।

मकान ढहने से भिवानी में तीन मासूमों की जान गई, प्रशासन ने दिए मुआवज़े के 12 लाख

भिवानी भिवानी के गांव कलिंगा में 2 सितंबर की रात को मकान की छत ढहने से तीन नाबालिग बहनों की मौत के मामले में प्रशासन ने पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान की है। शुक्रवार को डीसी साहिल गुप्ता के निर्देश पर एसडीएम महेश कुमार मृतकों के परिजनों के घर पहुंचे। इस दौरान बवानीखेड़ा के विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि के प्रतिनिधि के रूप में उनके भाई राजेश कुमार भी मौजूद रहे। एसडीएम ने परिवार को हरियाणा सरकार की ओर से 12 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा। हादसे में परिवार के मुखिया ओमपाल, उनकी पत्नी अनिता और पांच साल के बेटे ध्रुव गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि उनकी तीन बेटियों की मौके पर ही मौत हो गई थी। ओमपाल ने चार साल पहले अपने जर्जर मकान को छोड़कर परिवार की सुरक्षा के लिए किराए का मकान लिया था, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन भी किया था। हालांकि, बारिश के कारण किराए के मकान की छत भी ढह गई, जिससे परिवार पर भारी विपत्ति आ पड़ी। प्रशासन ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

तेजस्वी यादव बोले– बिहार बंद के दौरान भाजपा नेताओं ने करवाई हिंसा, भीड़ को बुलाया गया

  पटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मां की गाली देने के विरोध में एनडीए के बिहार बंद को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने विफल बताया। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने बिहार बंद के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपाई पंचायत छोड़ एक वार्ड तक बंद नहीं करा पाए। भाजपा पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, पीएम मोदी की रैली तरह बिहार बंद में भी भाड़े के लोग बुला लेने चाहिए थे। पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने कल बिहार में दुनिया भर की गुंडागर्दी की। भाजपाई गुंडों ने सरेआम महिलाओं को पीटा, शिक्षिकाओं को पीटा, गर्भवती महिलाओं को रोका, बुजुर्गों को धक्का दिया, छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार किया, बच्चों को स्कूल जाने से रोका, एम्बुलेंस को रोका, शहीद के परिजनों को पीटा लेकिन फिर भी ये लोग एक वार्ड तक बंद नहीं करा पाए।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि जैसे उनकी रैली में पुलिस और प्रशासन पर दबाव दिया जाता है, उसी तरह बिहार बंद के लिए भी पुलिस को बोल देना चाहिए था। वे ही ट्रैफिक रुकवा देते। तेजस्वी ने कहा, "गुजरात के रहने वाले मोदी ने वोट की खेती के लिए बिहार बंद में आम बिहारियों को परेशान करने का मस्ती भरा निर्णय ले लिया।"  

कमल तोड़ने गए उप रजिस्ट्रार दलदल में फंसे, CSVTU अधिकारी की मौत से शोक की लहर, अंतिम संस्कार आज

दुर्ग भिलाई स्थित स्वामी विवेकानन्द तकनीकी विश्विद्यालय के उप-कुलसचिव की तालाब में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब उप रजिस्ट्रार भास्कर चन्द्राकर तालाब में कमल का फूल तोड़ने उतरे थे। यह घटना ग्राम पतोरा की है। प्रोफेसर चंद्राकर के पार्थिव शरीर को दुर्ग से पीएम के बाद उनके निवास पचपेड़ी नाका नवजीवन कॉलोनी रायपुर ले जाया जाएगा। उनका अंतिम संस्कार आज ही दोपहर 2 बजे किया जाएगा। दरअसल 4 सितंबर को शाम 5 बजे कार्यालयीन समय के बाद प्रोफेसर भास्कर चंद्राकर मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) के साथ अपने उतई स्थित प्लाट देखकर वापस रायपुर जा रहे थे। तभी ग्राम पतोरा (उतई) से गुजरते समय कमल फूल तोड़ने के लिए वहां के तालाब में उतरे थे, लेकिन कमल के जड़ो और दलदल की वजह से वे बाहर नहीं आ सके, फिर सहकर्मी ने गांव वालों की सहायता से उन्हें तुरंत तालाब से निकालकर सीपीआर दिया और उन्हें तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया। उन्हें बीएसपी के सेक्टर 9 होस्पिटल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जगदलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में थी मूल पदस्थापना सीएसवीटीयू के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उप रजिस्ट्रार चंद्राकर का असमय जाना तकनीकी शिक्षा जगत के साथ हम सभी लिए व्यक्तिगत अपूरणीय क्षति है। सरल, सहज व विनम्र स्वभाव के साथ प्रो. चंद्राकर अकादमिक व प्रशासनिक क्षमता के दक्ष व्यक्तित्व थे। मूल रूप से रायपुर निवासी डॉ. चंद्राकर ने शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय जगदलपुर से लेकर सीएसवीटीयू भिलाई सहित अन्य संस्थाओं में 15 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। वे 4 साल से सीएसवीटीयू में प्रतिनियुक्ति पर थे। मूल पदस्थापना जगदलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में थी।

कंतारा: चैप्टर 1 में ऋषभ शेट्टी ने बिना बॉडी डबल के किये खतरनाक स्टंट

मुंबई,  दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार ऋषभ शेट्टी ने कंतारा: चैप्टर 1 में बिना बॉडी डबल के खतरनाक स्टंट किया है। होम्बले फिल्म्स की कंतारा: चैप्टर 1 सबसे ज्यादा इंतेज़ार की जाने वाली फिल्मों में से एक है। वर्ष 2022 में रिलीज फिल्म कंतारा की जबरदस्त सफलता के बाद, इसे बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त परफॉर्मेंस के कारण सबसे बड़ी स्लीपर हिट का दर्जा दिया गया। ऐसे ने अब इसका प्रीक्वल उस लेगेसी को आगे ले जाने का वादा करता है, जिससे दर्शकों का उत्साह और भी ज्यादा बढ़ गया है। साल की सबसे बड़ी फिल्म होने के नाते, ऋषभ शेट्टी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं और उन्होंने अपने सभी स्टंट खुद बिना किसी बॉडी डबल के किए हैं। कंतारा: चैप्टर 1 के एक्शन-स्टंट कोरियोग्राफर अर्जुन राज ने बताया कि, “हमने ऋषभ के लिए बॉडी डबल का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने बिना किसी मदद, खुद अपने स्टंट किए हैं। उनका बॉडी लैंग्वेज इतना अलग है कि कोई डुप्लीकेट कॉपी नहीं कर सकता। उन्होंने कलारिपयट्टू, तलवारबाज़ी और घुड़सवारी की ट्रेनिंग ली है। इसके बावजूद जो रिस्क उन्होंने उठाए, वो सिर्फ उनकी हिम्मत और जज़्बे से संभव हुआ है। मैंने कई एक्टर्स के साथ काम किया है, लेकिन ऋषभ सिर्फ इतना नहीं कहते कि ‘मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा’, बल्कि वो कहते हैं ‘मैं जब तक जिंदा हूं, मैं करूंगा।’ यही स्पिरिट सबकुछ बदल देती है।” होम्बले फिल्म्स की कंतारा: चैप्टर 1 सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी फिल्मों में से एक है। इसकी क्रिएटिव टीम की बात करें तो इसमें म्यूजिक डायरेक्टर बी. अजनीश लोकनाथ, सिनेमैटोग्राफर अरविंद कश्यप और प्रोडक्शन डिज़ाइनर विनेश बंगालन शामिल हैं, जिन्होंने मिलकर इस फिल्म के विजुअल से लेकर इमोशनल नैरेटिव को खूबसूरती से आकर दिया है। इसके अलावा, होम्बले फिल्म्स 2022 की इस ब्लॉकबस्टर फिल्म की विरासत को आगे ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मेकर्स ने 'कंतारा: चैप्टर 1' के लिए नेशनल और इंटरनेशनल स्पेशलिस्ट के साथ एक बड़ा वॉर सीक्वेंस तैयार किया है, जिसमें 500 से ज़्यादा कुशल फाइटर्स और 3,000 लोग शामिल हैं। यह सीक्वेंस 25 एकड़ में फैले एक पूरे शहर में, ऊबड़-खाबड़ इलाके में 45-50 दिनों के दौरान फिल्माया गया था, जो इसे भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे बड़े सीक्वेंसेज में से एक बनाता है।यह फिल्म 02 अक्टूबर को दुनिया भर में कन्नड़, हिंदी, तेलुगु, मलयालम, तमिल, बंगाली और अंग्रेजी भाषाओं में रिलीज होगी।  

मध्यप्रदेश में मॉनसून की मार, मौसम विभाग ने आज के लिए दिया अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश के कई जिलों में आज भी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक और बारिश होने की संभावना जताई है। भोपाल जिले में अब तक 38 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो इस सीजन के कोटे से केवल 2 इंच कम है। बड़ा तालाब छलकने की कगार पर पहुंच गया है। ऐसे में भदभदा डैम के गेट किसी भी समय खोले जा सकते हैं। बात दें कि मौसम विभाग के अनुसार, इस बार मध्य प्रदेश में इस मॉनसूनी सीजन में औसत से अधिक करीब 40 इंच बारिश हो चुकी है, जो कोटे का 108 प्रतिशत है। हालांकि अब तक 32.1 इंच बारिश होनी थी, प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। पिछले मॉनसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी। यह लगातार दूसरे साल प्रदेश में सामान्य से ज्यादा है। फिलहाल मॉनसून के 25 दिन ओर बाकी हैं, ऐसे में यह आंकड़ा और भी बढ़ने के संभावना जताई जा रही है। उज्जैन इंदौर रतलाम में हालात बिगड़े लगातार हो रही बारिश से इंदौर, उज्जैन और रतलाम जिले के हालात बिगड़ रहे हैं, मौसम विभाग ने अगले 2 दिन तक प्रदेश में तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। अगले 24 घंटे में रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। यहां साढ़े 8 इंच तक पानी गिर सकता है। उज्जैन संभाग के नीमच, मंदसौर, देवास और आसपास के जिले इंदौर, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, गुना, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 24 घंटे में यहां ढाई से साढ़े 4 इंच तक बारिश हो सकती है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश में गुरुवार को चार सिस्टम एक्टिव रहे। इनमें एक मॉनसून समेत दो टर्फ, एक लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम शामिल हैं। शुक्रवार को भी सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिल सकती है, इसलिए कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। एमपी में जब से मॉनसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल में भी मॉनसून जमकर बरसा है। प्रदेश के 20 जिलों में बारिश का कोटा फुल हो गया है। उज्जैन घाट पर बने मंदिरों में पानी भरा बुधवार ओर गुरुवार उज्जैन और आसपास के जिले देवास ओर इंदौर में रुक-रुक कर तेज बारिश होती रही। बुधवार देर रात और गुरुवार रुक-रुक कर हुई बारिश से शहर के कई निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति बन गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिप्रा नदी उफान पर आ गई है। नदी के बढ़ते जलस्तर से रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर पानी आने से मंदिर डूब गए। वहीं अंगारेश्वर महादेव मंदिर में क्षिप्रा का जल घुस गया। घाट पर स्थित सभी मंदिर जलमग्न हो गए हैं। साथ ही चिंतामण जवासिया, खरेट सहित गांव के घरों तक पानी पहुंचा। दाउदखेड़ी में बन रही कॉलोनियों के चलते गांव के रास्ते पानी में डूब गए। नालों के ऊपर हो रहे निर्माण से पानी निकल नहीं पा रहा। यहां से आरटीओ जाने वाला रास्ता पानी भरने के चलते तालाब जितना भरा मिला, जहां एक बस भी काफी समय तक फंसी रही। इस दौरान शहर में हुई बारिश के कारण बहादुरगंज, एटलस चौराहा, केडी गेट, नीलगंगा, इंदौर गेट, दशहरा मैदान सहित कई क्षेत्रों में जलभराव हो गया है। इन क्षेत्रों के रहवासी जलभराव के कारण खासे परेशान नजर आ रहे हैं। उज्जैन जिले में प्रशासन ने लोगों से नदियों-घाटों के पास नहीं जाने की अपील की है, क्षिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण उज्जैन बड़नगर मार्ग स्थित छोटा ब्रिज पूरी तरह से डूब गया है। उज्जैन कलेक्टर ने पुलिस बल के साथ एसडीई आरएफ टीम को मौके पर तैनात किया है। क्षिप्रा किनारे रामघाट पर नगर निगम, होमगार्ड और एसडीईआरएफ की टीमें तैनात हैं। घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं को दूर रखा जा रहा है बात दे कि उज्जैन में क्षिप्रा नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि घाट किनारे स्थित मंदिर गुंबद तक जलमग्न हो गए है। ग्रामीण क्षेत्र के चिंतामन थाना के दाउद खेडी गांव में एक स्कूल बस और सरकारी स्कूल में कुछ छात्र और टीचर जलभराव के दौरान फंस गए। आसपास इतना पानी भर गया कि मोटर बोट से टीचर्स को रेस्क्यू करना पड़ा। 7 सदस्यीय एसडीईआरएफ टीम ने सभी टीचर्स को निकालकर सकुशल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। गुना में सबसे ज्यादा, 5 जिलों में कम एमपी के गुना जिले में अब तक सबसे ज्यादा बारिश हुई है तो वहीं उज्जैन संभाग सहित एमपी के 5 जिलों में बारिश फिलहाल औसत से कम है, यह जिले इंदौर और उज्जैन संभाग के हैं। इसमें खरगोन में सबसे कम 24.7 इंच, खंडवा में 24.9 इंच, बड़वानी में 25.2 इंच, बुरहानपुर में 25.5 इंच और शाजापुर में 25.6 इंच बारिश हुई है। इस मामले में गुना सबसे बेहतर है। यहां 62.9 इंच बारिश हो चुकी है। गुना में 30.5 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मंडला में 55.5 इंच बारिश हो चुकी है। शिवपुरी में 52.9 इंच, अशोकनगर में 52.6 इंच और श्योपुर में 55.3 इंच पानी गिर चुका है। ब्लॉक की वजह से ट्रेनें निरस्‍त रतलाम नागदा खंड में ब्‍लॉक के कारण कुछ ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के रतलाम-नागदा खंड में ऑटोमेटिक ब्‍लॉक सिगनलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए शीघ्रता से काम जारी है। रतलाम-नागदा खंड में ऑटोमेटिक ब्‍लॉक सिगनलिंग सिस्‍टम को कार्यान्वित करने के लिए 6 सितंबर को प्रस्‍तावित ब्‍लॉक के कारण मंडल की कुछ ट्रेनें प्रभावित होगी। 6 सितंबर 25 को निम्‍न ट्रेनें निरस्‍त रहेंगी : 59318 उज्‍जैन – नागदा पैसेंजर 59346 नागदा-उज्‍जैन पैसेंजर,59345 रतलाम-नागदा पैसेंजर 6 सितम्‍बर, 25 को नागदा से चलने वाली गाड़ी संख्‍या 19341 नागदा बीना एक्‍सप्रेस, उज्‍जैन से चलेगी तथा नागदा से उज्‍जैन के मध्‍य निरस्‍त रहेगी। ट्रेनों की आगमन/प्रस्‍थान समय सहित अन्‍य अद्यतन जानकारियों के लिए यात्री कृपया www.enquiry. indianrail.gov.in पर जाकर अवलोकन कर सकते हैं।

जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

गोरखपुर  गोरखपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरे दिन गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन कर लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। शुक्रवार सुबह जनता दर्शन में उन्होंने समस्या लेकर आए लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए कहा, ‘घबराइए मत, आपकी समस्या का प्रभावी समाधान सुनिश्चित कराएंगे। सरकार सबकी समस्या दूर करने को संकल्पित है।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं। शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। जनता दर्शन में महिलाओं की संख्या अधिक रही। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। एक-एक कर और इत्मीनान से सबकी समस्याएं सुनीं। उन्हें आश्वस्त किया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अफसरों को यह निर्देश भी दिए कि यदि किसी प्रकरण में पीड़ित को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ा है तो इसकी भी जांच कर जवाबदेही तय की जाए।  जनता दर्शन में हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। इस दौरान उन्होंने अफसरों से कहा कि हर पात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवाया जाए जिससे उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।

शिवराज चौहान बोले: कमजोर तटबंध और अवैध खनन ने बनाई प्रलय जैसी स्थिति

पंजाब  पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार राज्य को मौजूदा संकट से बाहर निकालने के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करेगी। पंजाब की स्थिति को "प्रलय" बताते हुए चौहान ने कहा कि वह किसानों, पशुधन और कृषि भूमि को हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपेंगे और केंद्र सरकार एक व्यापक राहत और पुनर्वास पैकेज लेकर आएगी। शिवराज चौहान ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी पंजाब की स्थिति को लेकर गहरी चिंता में हैं। उनके ही निर्देश पर मैंने कल पंजाब का दौरा किया। यहां प्रलय जैसी स्थिति है। फसलें नष्ट हो गई हैं। इस कठिन समय में केंद्र सरकार पंजाब की जनता और किसानों के साथ खड़ी है।” उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुनियोजित पुनर्विकास की जरूरत है। मंत्री ने कहा “पंजाब को मौजूदा संकट से बाहर निकालने के लिए हमें अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक योजना की जरूरत है।” चौहान ने चेतावनी दी कि पानी उतरने के बाद संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। उन्होंने कहा, “मरे हुए जानवरों का सही ढंग से निपटान करना होगा ताकि महामारी न फैले। खेतों में सिल्ट जमा हो गई है। अगली फसल बचाने के लिए हमें एक डी-सिल्टिंग योजना बनानी होगी।” उन्होंने याद दिलाया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे, तब केंद्र ने सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर नदियों के किनारे तटबंध बनाए थे, ताकि संकट के समय फसलों और कृषि भूमि को बचाया जा सके। चौहान ने अमृतसर, पठानकोट और गुरदासपुर बेल्ट का दौरा करने के बाद कहा “अवैध खनन के कारण ये तटबंध कमजोर हो गए हैं और पानी गांवों में घुस आया है। भविष्य में संकट रोकने के लिए हमें इन तटबंधों को पुनः मजबूत करना होगा।” उन्होंने इस आपदा के समय पंजाब की सेवा भावना की सराहना भी की। चौहाने कहा, “मैंने पंजाब की सेवा भावना देखी। सामाजिक कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर राहत, भोजन, कपड़े और दवाइयां बांट रहे हैं। मैं पंजाब की सेवा भावना को सलाम करता हूं। जरूरतमंद की सेवा ईश्वर की पूजा के समान है। पड़ोसी राज्य भी मदद के लिए आगे आए हैं। संकट के समय एकता की यह भावना ही हमें सभी मुश्किलों से उबरने की ताकत देती है।”

मॉनसून की मार: मुख्यमंत्री भजनलाल ने अधिकारियों को मैदान में भेजकर दिया सतर्क रहने का आदेश

जयपुर राजस्थान में इस बार मॉनसून की बारिश बहुत ज्यादा हुई है। अब तक सामान्य से 62 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है और बारिश का दौर लगातार जारी है। आज शुक्रवार 5 सितंबर को भी प्रदेश के 25 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। गुरुवार रात को ही अजमेर के बोराज तालाब की पाल टूटने से शहर में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। भारी बारिश के चलते प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ के हालात बन गए हैं। जनजीवन प्रभावित होने पर विपक्ष ने सरकार पर तत्काल राहत नहीं देने का आरोप लगाते हुए सदन में मुद्दा उठाया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बाढ़ ने सभी विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अपने क्षेत्र में जाकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लें और रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजें। प्रभारी मंत्रियों को भी क्षेत्र में दौरा करने के निर्देश दिए हैं। तीन दिन फील्ड में रहेंगे विधायक और मंत्री इन दिनों विधानसभा का सत्र चल रहा है। इस दरमियान शुक्रवार 5 सितंबर से लेकर रविवार 7 सितंबर तक विधानसभा में अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि अवकाश के दिनों में तीन दिन तक सभी प्रभारी मंत्री और विधायक अपने अपने क्षेत्र का दौरा करें। अतिवृष्टि से हुए नुकसान की रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशीलता और तत्परता के साथ आमजन की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलभराव से उत्पन्न विषम परिस्थितियों के समाधान के लिए राज्य सरकार दीर्घकालिक योजना बनाकर काम करेगी ताकि स्थायी समाधान मिल सके। प्रभावी सचिवों को भी दो दिन तक क्षेत्र का दौरा कर आमजन की समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।   विधानसभा में विधायकों से मिले सीएम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति पर विधानसभा में विधायकों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 1 जून से 1 सितम्बर तक औसत बारिश से 62 प्रतिशत से अधिक बारिश हुई है। ऐसे में सभी विधायक अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में जाएं तथा जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर राहत-बचाव कार्यों को और अधिक गति प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तात्कालिक राहत के साथ-साथ बारिश और बाढ़ से प्रतिवर्ष होने वाली समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार दीर्घकालिक योजनाएं बना रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आमजन की परेशानियों को प्रभावी रूप से दूर कर रही है। अधिकारियों से नियमित फीडबैक लेने के निर्देश मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभारी मंत्री और सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्र में अधिकारियों और प्रशासन से नियमित रूप से फीडबैक लें। जिला कलेक्टर और उच्च अधिकारियों के साथ नियमित बैठक करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने विधायकों को प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों का मनोबल बढ़ाने, निचले इलाकों से लोगों को समय पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, भोजन पैकेट, पीने का पानी, दवाइयों और कपड़ों के वितरण की सतत निगरानी के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्र में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए सुरक्षित अस्थायी आश्रय की व्यवस्था करवाएं। साथ ही कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन पर नजर रखें। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्वयंसेवकों की पर्याप्त तैनाती भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।