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राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के खिलाफ धोखाधड़ी मामले में लुकआउट नोटिस

मुंबई बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने व्यापारी दीपक कोठारी से लगभग 60 करोड़ रुपये की ठगी की है। इस मामले में अब EOW ने उनकी मूवमेंट पर नज़र रखने के लिए लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है, जिससे दोनों देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।   व्यापारी का आरोप शिकायतकर्ता दीपक कोठारी का कहना है कि उन्होंने 2015 से 2023 के बीच शिल्पा-राज की कंपनी Best Deal TV Pvt. Ltd. में निवेश किया था। यह कंपनी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म चलाती थी। कोठारी ने आरोप लगाया कि कंपनी में निवेश किए गए 60 करोड़ 48 लाख रुपये का इस्तेमाल बिज़नेस के बजाय निजी खर्चों में कर लिया गया। कोठारी के मुताबिक, 2016 में खुद शिल्पा शेट्टी ने पैसों की वापसी की पर्सनल गारंटी भी दी थी, लेकिन बाद में उन्होंने कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया और कंपनी दिवालिया घोषित हो गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उनका पैसा लौटाया गया। पुलिस की जांच EOW ने अब इस मामले में IPC की धारा 403, 406 और 34 के तहत FIR दर्ज की है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि निवेश की रकम का इस्तेमाल किन-किन कामों में हुआ और पैसों का फ्लो कहां गया। पुलिस ने दंपति के ट्रैवल रिकॉर्ड की भी जांच शुरू कर दी है। लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब दोनों बिना अनुमति देश से बाहर यात्रा नहीं कर पाएंगे।

अब सिगरेट, तंबाकू और कोल्ड ड्रिंक पर सिर्फ GST नहीं, अतिरिक्त टैक्स भी लागू होगा!

नई दिल्ली  GST रिफॉर्म के तहत तंबाकू, सिगरेट और कोल्‍ड ड्रिंक्‍स जैसे सिन प्रोडक्‍ट्स पर 40 फीसदी जीएसटी लगाया गया है. लेकिन अब इन उत्‍पादों पर और भी ज्‍यादा टैक्‍स लग सकता है. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है कि सरकार इन चीजों पर टैक्‍स को और भी अधिक बढ़ा सकती है.  सरकार तंबाकू और सिगरेट जैसे हानिकारक वस्‍तुओं पर टैक्‍स के इम्‍पैक्‍ट को वर्तमान स्‍तर पर बनाए रखने के लिए 40% GST के अलावा, सेस भी लगा सकती है. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अध्यक्ष संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि GST के तहत, 40% अधिकतम टैक्‍स लगाया जा सकता है. बाकी टैक्‍स को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने के लिए कोई व्यवस्था करेंगे. हालांकि उन्‍होंने उस व्‍यवस्‍था के बारे में विस्‍तार से जानकारी नहीं दी है. उन्होंने बिजनेस टुडे को दिए एक इंटरव्‍यू में आगे कहा कि अगर विधायी संशोधन या विधेयक की आवश्यकता होगी तो उस पर ध्यान दिया जाएगा. लग्‍जरी कार-बाइक पर एक्‍स्‍ट्रा टैक्‍स नहीं उन्‍होंने यह भी स्‍पष्‍ट किया कि लग्‍जरी कारों, लग्‍जरी बाइक और सुपर लग्‍जरी अन्‍य वस्‍तुओं जैसी वस्‍तुओं एक्‍स्ट्रा टैक्‍स नहीं लगाया जाएगा. उनपर 40 फीसदी का ही टैक्‍स लगेगा.  नए जीएसटी रिफॉर्म के तहत हानिकारक वस्‍तुओं और सुपर लग्‍जरी आइटम्स पर मौजूदा 28% के बजाय 40% टैक्‍स लगेगा. अग्रवाल ने आगे बताया कि हानिकार सबटैक्‍स 28 फीसदी दिसंबर 2025 तक जारी रहने की संभावना है, जबकि पहले यह उम्मीद थी कि यह इस साल 31 अक्टूबर तक यह समाप्त हो जाएगा. 22 सितंबर से लागू करने पर चल रहा काम उन्‍होंने कहा कि CBIC जीएसटी की नई दरों को लागू करने के लिए भी काम कर रहा है, जो 22 सितंबर से लागू होंगी. अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में दो प्रॉसेस चल रही हैं. पहला- हमें आवश्यक नोटिफिकेशन जारी करनी होंगी, और केंद्र के साथ-साथ राज्यों द्वारा भी नोटिफाई किए जाएंगे. हम जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी कर लेंगे. दूसरा- दरों में बदलाव, नया आसान रजिस्‍ट्रेशन प्रॉसेस और रिफंड प्रॉसेस को ध्यान में रखते हुए, हमारी आईटी सिस्‍टम में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं.  उन्होंने आगे कहा कि उद्योग को भी 22 सितंबर से अपने ERP को नई दरों के साथ अपडेट करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनवॉयसिंग सही ढंग से की जा रही है. 

युद्ध में सफलता की कुंजी: CDS अनिल चौहान ने बताया ‘सरप्राइज’ फैक्टर

गोरखपुर ‘भारत के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां’ विषयक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध में सफलता हासिल करने के लिए सरप्राइज एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है। उरी सर्जिकल स्ट्राइक में भारत ने जमीन के रास्ते जाकर आतंकी ठिकानों को बर्बाद किया, बालाकोट में एयर स्ट्राइक का सहारा लिया गया। जबकि पहलगाम हमले के बाद लो एयर स्पेस, ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। भारतीय सेनाओं ने हर बार दुश्मन को सरप्राइज कर अपना टारगेट पूरा किया।   उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भारतीय सेनाएं 365 दिन, 24×7 के फार्मूले पर हमेशा तैयार हैं। आतंकवादी कहीं भी हो, उसे ढूढ़कर मारा जाएगा। सीडीएस जनरल चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक व्यापक और महत्वपूर्ण विषय है। हर वर्ग और व्यक्ति इसे अपने नजरिए से देखता है। किसी देश के राजदूत इसे द्विपक्षीय या बहुपक्षीय दृष्टि से देखतेहैं, तो अर्थशास्त्री इसे आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से। सैनिक का दृष्टिकोण भिन्न होता है। उन्होंने बताया कि आचार्य चाणक्य ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए चार तथ्य बताएहैं:, राष्ट्र के आंतरिक खतरे, बाह्य खतरे, बाहरी सहयोग से आंतरिक खतरे और आंतरिक सहयोग से बाहरी खतरे। सीडीएस ने कहा कि समग्र रूप से राष्ट्र की सुरक्षा के लिए तीन घटक महत्वपूर्ण होते हैं। भूमि की सुरक्षा, विचारधारा की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए इन तीनों की सुरक्षा अनिवार्य है। इस संदर्भ में उन्होंने तीन घेरों सैन्य सुरक्षा, राष्ट्र की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सैन्य तत्परता के लिए रक्षा संसाधनों, अनुसंधान एवं विकास के साथ रणनीतिक संस्कृति अहम होती है। इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी भी जरूरी है। सीडीएस जनरल चौहान ने एक जर्मन विद्वान के उद्धरण के हवाले से कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में युद्ध, राजनीति का ही विस्तार है। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को अल-अलग नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब किसी राष्ट्र की सरकार यह सोचती है कि दूसरे राष्ट्र के खिलाफ बल प्रयोग करने की जरूरत है तो वह सैन्य अफसरों को कार्य करने के लिए निर्देशित करती है। इसमें सैन्य क्षमता पर भरोसा और सैन्य विकल्पों की विविधता महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता की मजबूती इस बात पर भी निर्भर होती है कि किसी राष्ट्र ने शांति काल में रक्षा क्षेत्र में कितना खर्च किया। सीडीएस ने बताया कि भारत की तीनों सेनाओं ने गलवान, बालाकोट में मजबूत सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बालाकोट हमले के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ने अलग-अलग सीख ली। पाकिस्तान ने एयर डिफेंस पर ध्यान दिया तो भारत ने लंबी दूरी तक हमला करने वाले हथियारों पर। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व से सैन्य बलों को दिशा मिलती है। ऑपरेशन सिंदूर में नेतृत्व से क्लियर कट दिशा निर्देश था कि आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाना है, नागरिक ठिकानों को नहीं। दुश्मन के किसी भी उकसावे पर सेना को जवाबी कार्रवाई की खुली छूट दी गई थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद सिर्फ बदला लेना नहीं था, धैर्य का स्तर भी बढ़ाना था। ऑपरेशन सिंदूर ऐसा पहला युद्ध था जिसमें दुश्मन से आमने सामने की लड़ाई काफी कम थी। इसमें न फ्रंट था और न रियर। ऑपरेशन सिंदूर अभी ऑफिशियली टर्मिनेट नहीं किया गया है। सीडीएस ने कहा कि भारत में राष्ट्र की सुरक्षा की पहली चुनौती सीमा विवाद की है। पाकिस्तान और चीन से हुई लड़ाइयां सीमा विवाद का ही परिणाम हैं। पाकिस्तान की तरफ से प्रॉक्सी वार, पड़ोसी देशों में अस्थिरता और युद्ध के बदलते स्वरूप अन्य चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप अब विकेंद्रित होता जा रहा है। भविष्य में नई तकनीकी आधारित, रोबोटिक्स और मानवरहित युद्ध हो सकते हैं। सीडीएस ने कहा कि ‘न्यू नॉर्मल’ नीति ऐसी स्थिति होती है जो संकट खत्म होने के बाद बनती है। जैसे कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम और नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन की अभ्यस्तता। पर, न्यू नॉर्मल में यह स्पष्ट है कि आतंकवाद और बातचीत, व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते। सीडीएस ने अपने संबोधन में पीएम मोदी द्वारा घोषित ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा प्रणाली की चर्चा करते हुए कहा कि इसे 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य है। सुदर्शन चक्र स्वार्ड (तलवार) और शील्ड (ढाल) दोनों का काम करेगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और सशक्त भारत वसुधैव कुटुम्बकम की भूमिका निभाना चाहता है।

बच्चों के स्वास्थ्य मानकों के सुधार में हर घर जल की बड़ी भूमिका : नोबेल विजेता प्रो. क्रेमर

मुख्य सचिव श्री जैन ने विभागीय विकास रणनीतियों को प्रभावी बनाने पर की चर्चा प्रदेश में जल जीवन मिशन की उपलब्धियों पर प्रो. क्रेमर ने जताया संतोष भोपाल मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन एवं नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. माइकल रॉबर्ट क्रेमर ने शुक्रवार को मंत्रालय में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की विकास पहलों को और अधिक प्रभावी बनाने और साक्ष्य-आधारित विकास रणनीतियों पर चर्चा की। बैठक में स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और जल क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से, राज्य की विकास पहलों को और अधिक मज़बूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। प्रो. माइकल क्रेमर अमेरिकी विकास अर्थशास्त्री हैं, जिन्हें वैश्विक गरीबी उन्मूलन के उनके प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए वर्ष 2019 में अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो के साथ संयुक्त रूप से अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। प्रो. क्रेमर ने बताया कि उनके अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि यदि परिवारों को पीने के लिए सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जाए तो लगभग 20% शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। नवजात शिशु, जल जनित बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं और उनके शोध के दौरान किए गए सर्वेक्षण से यह निष्कर्ष निकला है कि बच्चों से संबंधित हर चार में से एक मृत्यु सुरक्षित जल उपलब्ध कराकर रोकी जा सकती है। प्रो. क्रेमर ने बताया कि 'हर घर जल' कार्यक्रम, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य मानकों में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रो. क्रेमर ने नवीन प्रयोगात्मक पद्धतियों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जो शोधकर्ताओं, भारतीय सरकारी संस्थाओं, निजी फर्मों और गैर-लाभकारी संगठनों को एक साथ लाकर लाखों लोगों को लाभ पहुँचाने की क्षमता वाले तौर-तरीकों की पहचान, परीक्षण और परिशोधन प्रदान करती है। प्रो.क्रेमर ने कहा कि विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने से पहले कठोर परीक्षण जरूरी है। प्रो. क्रेमर ने मध्यप्रदेश की इस पहल पर प्रसन्नता जाहिर की कि जल जीवन मिशन द्वारा ग्रामीण घरों में जल उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि जल निर्धारित गुणवत्ता का हो। प्रो. क्रेमर ने अधिकारियों के पेयजल, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन से सम्बंधित विविध प्रश्नों के उत्तर एवं आवश्यक सुझाव भी दिए। एविडेंस एक्शन संस्था के कंट्री डायरेक्टर श्री अंकुर गर्ग ने भारत में 'एविडेंस एक्शन' के किए गए कार्यों का विस्तृत प्रेजेन्टेशन दिया। श्री गर्ग ने बताया कि संस्था, प्रमाणित शोधों को कैसे बड़े पैमाने पर प्रभावी कार्यक्रमों में परिवर्तित करती है। श्री गर्ग ने प्रदेश सरकार को विशेष रूप से स्वास्थ्य और जल संबंधी क्षेत्रों में, संस्था द्वारा दिए जा रहे निरंतर सहयोग की जानकारी भी साझा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्रीमती रश्मि अरुण शमी, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, सचिव कृषि विकास एवं किसान कल्याण श्री निशांत वरवड़े, सचिव महिला एवं बाल विकास सुश्री जी.वी. रश्मि, संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। मुख्य सचिव श्री जैन से डेवलेपमेंट इनोवेशन लैब के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन से शिकागो विश्वविद्यालय के डेवलेपमेंट इनोवेशन लैब और वैश्विक गैर-लाभकारी संस्था एविडेंस एक्शन के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। मुख्य सचिव श्री जैन ने प्रतिनिधिमंडल के साथ समसामयिक विषयों पर सार्थक चर्चा की और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों से अवगत कराया।  

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की खराब सेहत को देखते हुए कैबिनेट बैठक हुई स्थगित

चंडीगढ़  आज शाम होने वाली पंजाब कैबिनेट की बैठक स्थगित कर दी गई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की खराब सेहत को देखते हुए यह बैठक आज नहीं होगी। बैठक की नई तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी। मुख्यमंत्री मान ने पंजाब में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए यह बैठक बुलाई थी, लेकिन अब उनकी सेहत में सुधार होने के कारण यह बैठक आज नहीं होगी। बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान हाल ही में बीमार पड़ गए थे। तेज बुखार होने के कारण सीएम मान अपनी सरकारी रिहायश में हैं। आम आदमी पार्टी सुप्रीमो और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी उनका हालचाल जानने मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। इसके बाद उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से भी मुलाकात की। आपको ये भी बता दें कि इस समय पंजाब के कई इलाके बाढ़ की मार झेल रहे हैं और मुख्यमंत्री मान रोजाना ही बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे थे।   

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- मध्यप्रदेश मातृ-शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में सतत सुधार की राह पर

एमएमआर में 17, यू5 एमआर में 5, आईएमआर और एनएमआर में 2-2 अंकों का सुधार भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग के केन्द्रित एवं समन्वित प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहे हैं। मध्यप्रदेश मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में सही मार्ग पर है। हम स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, मैनपावर की वृद्धि, बेहतर लक्ष्यीकरण, सतत् मॉनिटरिंग और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान के माध्यम से आगामी वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में आने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम-2023 की रिपोर्ट में प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए हैं—मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 159 से घटकर 142, नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 29 से घटकर 27, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 40 से घटकर 37 और 5 वर्ष से कम आयु बाल मृत्यु दर (यू5 एमआर) 49 से घटकर 44 हो गई है। ये आँकड़े सकारात्मक संकेत हैं कि हमारे प्रयास सही दिशा में हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने यह उपलब्धि प्रदेश की स्वास्थ्य टीम की अथक मेहनत का परिणाम है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ, नर्स, डॉक्टर, विशेषज्ञ, प्रशासक और नीति निर्धारक सभी ने मिलकर निरंतर कार्य किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि यह सफलता आगे बढ़ने की प्रेरणा है। सतत प्रयास, वैज्ञानिक योजना और जनभागीदारी के माध्यम से मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 7 अप्रैल 2025 को मातृ शिशु संजीवन मिशन और अनमोल 2.0 पोर्टल का शुभारंभ इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मातृ-शिशु संजीवन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 80 प्रति लाख, नवजात मृत्यु दर को 10 प्रति हजार से कम और शिशु मृत्यु दर को 20 प्रति हजार से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। अनमोल 2.0 और ई-पीएमएसएमए जैसे डिजिटल टूल्स के माध्यम से हाई रिस्क गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और प्रबंधन किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जाँच हर माह की 9 और 25 तारीख को की जा रही है तथा पोषण किट, आयरन सप्लीमेंट और आवश्यक इंजेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चिन्हित अस्पतालों को एफआरयू के रूप में सक्रिय कर एचडीयू/आईसीयू, एसएनसीयू/एनबीएसयू को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। मातृ-शिशु संजीवन मिशन के साथ-साथ सीएचसी और पीएचसी को सुदृढ़ बनाने, टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ सेवाएँ उपलब्ध कराने, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की पहचान और समय पर देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुस्कान और लक्ष्य कार्यक्रमों से गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है तथा ई-रूपी और “यू कोट वी पे” योजनाओं के तहत सोनोग्राफी और एनेस्थीसिया सेवाएँ सुलभ हुई हैं। उन्होंने कहा कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधारों के साथ-साथ किशोर स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में स्वस्थ गर्भधारण सुनिश्चित हो सके। शत-प्रतिशत ट्रैकिंग, मातृ एवं शिशु प्रकरणों की रिपोर्टिंग और समीक्षा, टीबी व सिकल सेल स्क्रीनिंग, कैंसर नियंत्रण, एनसीडी स्क्रीनिंग और एचपीवी टीकाकरण जैसे उपायों से व्यापक स्वास्थ्य सुधार का रोडमैप तैयार किया गया है।  

मुख्यमंत्री साय ने किया बायंग एनीकट कम काजवे का भूमिपूजन, 38 करोड़ की लागत से सिंचाई और आवागमन सुविधा होगी बेहतर

  100 हेक्टेयर क्षेत्र में सोलर संयंत्र और पाइपलाइन के जरिए उपलब्ध होगी सिंचाई सुविधा रायगढ़, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ जिले के ग्राम बायंग (कछार) में 38 करोड़ रुपये की लागत से मांड नदी बायंग एनीकट कम काजवे निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इससे लाभान्वित गांवों में भू-जल संवर्द्धन होगा तथा आवागमन की सुविधा भी बढ़ेगी। एनीकट कम काजवे निर्माण से 100 हेक्टेयर क्षेत्र में सोलर संयंत्र और पाइपलाइन के जरिए सिंचाई सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री साय ने लोकार्पण कार्यक्रम में ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्र में जब भी मैं आता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे अपने ही परिवार के बीच आया हूँ। आप सभी ने 20 वर्षों तक आशीर्वाद देकर मुझे सांसद बनाकर दिल्ली भेजा, अब मुख्यमंत्री के रूप में मैं अपने परिवार से मिलने आप सबके बीच आया हूँ। मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विगत 20 महीनों में ‘मोदी की गारंटी’ के तहत अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। इनमें धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से, 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता, तेंदूपत्ता संग्राहकों को पुनः चरण पादुका वितरण, किसानों को धान बोनस तथा 5 लाख 62 हजार भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद जैसी योजनाएँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने कहा था कि छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आज प्रदेश के युवा देख रहे हैं कि जिन्होंने पीएससी परीक्षा में घोटालेबाजी की, वे जेल के अंदर हैं और कुछ जाने की तैयारी में हैं। श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार में श्रद्धालुओं के लिए रामलला दर्शन योजना और बुजुर्गों के लिए तीर्थ स्थलों की यात्रा की योजना प्रारंभ की गई है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने एनीकट भूमिपूजन के अवसर को बायंग (कछार) गांव के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि हमने जो वादा किया था, उसे पूरा किया। अब गांव-गांव में प्रधानमंत्री आवास बन रहे हैं, महतारी वंदन योजना का पैसा समय पर हर महीने मिल रहा है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन तथा डबल इंजन की सरकार में विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं। वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्र का संसद में पिछले 20 वर्षों से प्रतिनिधित्व करने वाले हमारे मुख्यमंत्री प्रत्येक गांव के लिए परिवार के सदस्य जैसे हैं। रायगढ़ से सांसद रहते हुए शायद ही ऐसा कोई गांव बचा हो जहाँ मुख्यमंत्री श्री साय न गए हों। छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बने मात्र 20 महीने हुए हैं और इस अवधि में अनेक कार्य किए गए हैं। किसानों के एक-एकड़ पर 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी, दो वर्षों का बकाया बोनस, भूमिहीन मजदूरों के खाते में हर साल 10 हजार रुपये की राशि पहुँच रही है। हर गांव में प्रधानमंत्री योजना के अंतर्गत मकान बनाए जा रहे हैं। राजमिस्त्री और सेंट्रिंग प्लेट कम पड़ गए हैं, फिर भी लगातार कार्य हो रहे हैं। केवल कछार गांव में ही 180 से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास की नई गाथा लिख रहा है। हमारी माताएँ-बहनें हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त हो रही हैं। ग्राम पंचायत कछार के किसानों के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। एनीकट बनने से कृषि संबंधी सुविधाएँ बढ़ेंगी। छत्तीसगढ़ की जनता देख रही है कि विष्णुदेव साय के सुशासन में सभी घोषणाएँ पूरी हो रही हैं और ऐसी योजनाएँ चलाई जा रही हैं जिनके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति कर रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविन्द्र गबेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुजाता सुखलाल चौहान, जनपद पंचायत सदस्यगंगाबाई पटेल, ग्राम बायंग के सरपंच गौरीशंकर सिदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

आपदा पीड़ितों के साथ संवेदनशील राष्ट्रपति, लोगों से सहयोग और एकजुटता की अपील

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को मानसून के दौरान देश में हुई प्राकृतिक आपदाओं पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए लोगों से एकजुटता का आह्वान किया। साथ ही इस संकट की घड़ी में राहत बचाव कार्यों में जुटी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की सराहना की।   राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "बादल फटने और बाढ़ जैसी आपदाओं ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, असम सहित देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। इन आपदाओं के कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।" उन्होंने पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। राष्ट्रपति ने लिखा, "इस साल मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं की खबरों ने मुझे बहुत दुखी किया। पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने और मैदानी इलाकों में बाढ़ ने भारी विनाश किया है।" उन्होंने राष्ट्र की ओर से प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता दिखाई और इस संकट की घड़ी में उनके साथ खड़े होने का आश्वासन दिया। उन्होंने लिखा, "राष्ट्र प्रभावित लोगों के दुख में शामिल है और इस संकट की घड़ी में उनके साथ है।" राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्यों में लगे लोगों के समर्पण और जज्बे की भी सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं उन सभी के प्रयासों को सलाम करती हूं जो इस मुश्किल समय में लोगों की मदद के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।" साथ ही उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करने का आह्वान किया। बता दें कि हाल के दिनों में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में बादल फटने की घटनाएं और मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकारें राहत कार्यों में जुटी हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ जैसी टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेश संवर्धन पहल का परिणाम

मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र को मिली मजबूती, आया नया निवेश, बढ़ेगी ऊर्जा सुरक्षा 32,500 करोड़ का निवेश,17 हजार को मिलेगा रोजगार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवेश संवर्धन प्रयासों के फलस्वरुप ऊर्जा क्षेत्र और ज्यादा मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सुरक्षा बढ़ रही है। मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस राज्य के रूप में पहचान बना चुका है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से अब इस क्षेत्र में नया निवेश आ रहा है। टोरेंट पॉवर और अडानी पॉवर जैसी बड़ी कंपनियों ने अब ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रदेश में काम करना शुरू कर दिया है। टोरेंट पॉवर कंपनी 22 हजार करोड़ और अडानी पॉवर कंपनी 10 हजार 500 करोड़ रूपये का निवेश करेगी। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार 17,000 को रोजगार मिलेगा। टोरेंट पॉवर 1600 मेगावॉट थर्मल प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश में 22 हजार करोड़ रूपये का निवेश करेगी। टोरेंट पॉवर लिमिटेड को एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) से 1,600 मेगावॉट के कोयला आधारित बिजली संयंत्र की स्थापना के लिए "लेटर ऑफ अवार्ड (LoA)" दे दिया है। यह अहमदाबाद-स्थित समूह द्वारा बिजली क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। यह परियोजना ग्रीनफील्ड 2×800 मेगावॉट की अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी और इसे डिज़ाइन, निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। टोरेंट इस संयंत्र की पूरी क्षमता MPPMCL को 25 साल की पॉवर परचेज एग्रीमेंट पॉवर परचेस एग्रीमेंट के तहत 5.829 रूपये प्रति यूनिट की दर से आपूर्ति करेगा। यह परियोजना PPA पर हस्ताक्षर होने के 72 महीनों के भीतर चालू होनी है। परियोजना लागत का लगभग 70% ऋण के माध्यम से पूरा किया जाएगा। इस संयंत्र के लिए कोयले का आवंटन MPPMCL द्वारा केंद्र सरकार की SHAKTI नीति के अंतर्गत किया जाएगा। यह परियोजना अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी, जिससे पारंपरिक थर्मल यूनिट्स की तुलना में बेहतर दक्षता और कम उत्सर्जन मिलेगा। टोरेंट पॉवर का यह निवेश केंद्र सरकार के 2032 तक 80 गीगावॉट अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे ग्रिड को स्थिर करने के लिए आवश्यक बेसलोड क्षमता जुड़ेगी। इस परियोजना के निर्माण के दौरान 10 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। अडानी पॉवर मध्यप्रदेश में 800 मेगावॉट का ताप विद्युत संयंत्र 10 हजार 500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित कर मध्यप्रदेश को बिजली आपूर्ति करेगी। इस परियोजना के तहत 800 मेगावॉट की क्षमता वाला एक नया ताप विद्युत संयंत्र स्थापित किया जाएगा। यह संयंत्र अनूपपुर ज़िले में स्थित होगा। संयंत्र को 54 महीनों में चालू किया जाएगा। यह कदम प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगा। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र विकसित करने और उससे बिजली आपूर्ति के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) दे चुकी है। यह संयंत्र डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत स्थापित किया जाएगा। जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, देश की बिजली की मांग, विशेष रूप से बेस लोड पॉवर की मांग, लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा अधोसंरचना में निवेश अत्यंत आवश्यक है, जिससे बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। अनूपपुर संयंत्र विश्वसनीय, सस्ती और प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह न केवल भारत बल्कि मध्यप्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा और राज्य के सतत विकास को गति देगा। इस संयंत्र के लिए कोयले की आपूर्ति भारत सरकार की 'शक्ति योजना' (SHAKTI Policy) के तहत मध्यप्रदेश को आवंटित की गई है। परियोजना निर्माण चरण में 7,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और चालू होने के बाद इसमें लगभग एक हजार स्थायी कर्मचारी कार्यरत होंगे।  

एमपीसीएसटी में एनजीओ के लिए प्रस्ताव लेखन में समस्या कथन की पहचान पर हुई कार्यशाला

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और विज्ञान भारती द्वारा शुक्रवार को एमपीसीएसटी भोपाल के ऑडिटोरियम में एनजीओ के लिए “प्रस्ताव लेखन में समस्या कथन की पहचान” विषय पर एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला 12 से 14 सितंबर, 2025 को ग्वालियर में आयोजित होने वाले “टेक फॉर सेवा” कार्यक्रम के अंतर्गत थी। कार्यशाला एनजीओ के लिए प्रस्ताव लेखन में वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही। एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि प्रस्ताव स्पष्ट, तार्किक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित होना चाहिए। समस्या कथन में उसकी जड़ तक जाना आवश्यक है जिससे निर्धारित उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके। उन्होंने “टेक फॉर सेवा” में अधिक से अधिक एनजीओ से भागीदारी की अपील की, जिससे तकनीक को नया आयाम मिल सके। विज्ञान भारती (मध्य क्षेत्र) के संगठन मंत्री श्री विवस्वान हेबालकर ने कहा कि प्रस्ताव में समस्या को स्पष्ट और सटीक रूप से प्रस्तुत करना जरूरी है। समाज के उत्थान के लिए नवाचारों को अपनाना होगा और “टेक फॉर सेवा” इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एमपीसीएस के कार्यकारी संचालक डॉ. विवेक कटारे ने कहा कि समस्या कथन लिखना एक कला है। इसे जितना स्पष्ट और सटीक लिखा जाएगा, परिणाम उतने ही बेहतर होंगे। कॉपी-पेस्ट से बचकर जमीनी स्तर के कार्यों को आधार बनाना चाहिए। नर्मदा समग्र न्यास के सीईओ श्री कार्तिक सप्रे ने सुझाव दिया कि प्रस्ताव तैयार करते समय गहन शोध और स्पष्ट समस्या कथन जरूरी है। एमपीसीएसटी के प्रिंसिपल साइंटिस्ट श्री विकास शेंडे ने कहा कि प्रभावी समस्या कथन के लिए गहरी समझ और ठोस शोध की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, दस्तावेज़ को व्यवस्थित और सटीक रखने तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित फंडिंग स्कीम्स के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञ डॉ. तृप्ती सिंह ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से समस्या कथन को प्रभावी बनाने के तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, स्किल डेवलपमेंट और जागरूकता से जुड़े 50 से अधिक एनजीओ के प्रतिनिधि और संस्थापक शामिल हुए। उपस्थित लोगों ने "प्रस्ताव लेखन में समस्या कथन की पहचान" और प्रभावी लेखन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। कार्यशाला में एमपीसीएसटी के सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. जी.डी. बैरागी, तकनीकी अधिकारी डॉ. एस.के. गर्ग सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद थे।