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स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ बढ़ाने के आसान टिप्स

मॉडर्न स्मार्टफोन यूजर्स के सामने अभी सबसे बड़ा इश्यू है-बैटरी लाइफ। वे दिन गए जब आप बिना चार्जिंग के कुछ दिन तक फोन को साथ रख सकते थे। इन दिनों विशेष तौर पर जब बाजार में मॉडर्न एंड्रायड स्मार्टफोंस उमड़ रहे हंा तो आपको चार्जर या माइक्रोयूएसबी केबल के आस-पास ही रहना होता होगा। यदि नहीं तो आपको बैटरी पैक या बैटरी केस को अपने साथ रखना होता होगा। वास्तव में आप ऐसा चाहते नहीं होंगे पर मजबूरी है फोन को बार-बार चार्ज करना। पर आपको इस चार्जर वाले झंझट से छुटकारा दिलाने को पेश हैं कुछ टिप्स जो आपके स्मार्टफोन को कम से कम एक दिन बिना चार्ज के रख सकती है। -अपना लोकेशन सेटिंग्स ऑफ करें। आपके फोन का जीपीएस हमेशा आपके पोजिशन पर लॉक-इन की कोशिश करेगा और इसमें काफी पावर खर्च होता है। कभी-कभी लोकेशन शेयरिंग ऑटोमैटिक ही ऑन होता है, इसलिए एंड्रायड फोन पर आपको सेटिंग मेन्यू में जाकर इसे ऑफ कर देना चाहिए। -अपने फोन के ब्राइटनेस लेवल को कम रखें। स्क्रीन जितना अधिक ब्राइट होगा, उतना ही अधिक बैटरी खर्च होगा। ब्राइट स्क्रीन अच्छा दिख सकता है लेकिन यह ज्यादा पावर खर्च करता है। आपको ऑटोमैटिक ब्राइटनेस लेवल कुछ इस तरह कनफिगर करना चाहिए जिससे कंटेंट स्पष्ट रूप से दिख पाएं, लेकिन यह ज्यादा ब्राइट न हो। -उपयोग में नहीं आने वाले एप्स को स्विच ऑफ रखें। एंड्रायड फोन पर यदि आप मल्टीपल एप्स पर स्विच कर रहे हैं जैसे कैमरा तो बैकग्राउंड में अन्य एप्स ऑन रहते हैं। ये सभी एप्स अधिक पावर कंज्यूम करते हैं और इसलिए आपके फोन की बैटरी लाइफ कम हो जाती है। -सेटिंग्स मेन्यू में आपको हमेशा एप्स या प्रोसेस पर हमेशा टैब रखना चाहिए, जो ढेर सारा बैटरी तो लेता ही है साथ में डाटा भी। यहां तक कि यदि कोई एप ज्यादा बैटरी नहीं ले रहा तो यह पूरी तरह से 3जी नेटवर्क का उपयोग कर रहा होगा, जो अंततः बैटरी की खपत तेजी से करेगा। फेसबुक एप व गूगल नाउ अच्छे उदाहरण हैं इसलिए अपनी बैटरी बचाने के लिए इन्हें ऑफ कर दें। -जब भी संभव हो वाई-फाई का उपयोग करें। ढेर सारे फोंस पर यह ऑटोमैटिक ही शुरू होता है लेकिन यदि ऐसा न हो तो आपको वाई-फाई नेटवर्क पर स्विच करना चाहिए, इससे बैटरी की खपत कम होती है। -मोबाइल नेटवर्क सेटिंग्स में जाकर 2जी पर स्विच करें। यदि आप डाटा का उपयोग नहीं करते हैं और कॉल व मैसेज के लिए फोन का उपयोग करते हैं तो 2 जी नेटवर्क आपके लिए बेहतर है। -यदि आप क्वालकॉम प्रोसेसर वाला फोन उपयोग करते हैं तो आप एंड्रायड के लिए क्वालकॉम बैटरी गुरु एप डाउनलोड कर सकते हैं। यह एप आपके उपयोग का विश्लेषण करेगी और फोन के सेटिंग को आप्टिमाइज करेगी। -आप अपने डिस्प्ले को हमेशा 15 सेकेंड के बाद स्लिप की सेटिंग पर रखें। कभी यदि आप फोन का उपयोग नहीं कर रहे तो इसका लाइट अप होना भी बैटरी की खपत करता है। -यदि आप सोनी एक्सपीरिया जेड 3, एचटीसी वन एम8 या सैमसंग गैलेक्सी नोट 4 जैसे हाई-एंड फोन का उपयोग करते हैं तो इनबिल्ट सॉफ्टवेयर पर आधारित बैटरी एंहांसमेंट मोड का उपयोग करें।  

रूस ने यूक्रेन ड्रोन हमलों का किया सामना, अब मोबाइल ऐप्स ऑफलाइन भी करेंगे काम

मास्को रूस और यूक्रेन को जंग में उलझे कई साल हो गए हैं। तमाम कोशिशाें के बावजूद शांत‍ि नहीं हो पाई है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमला करते रहते हैं। यूक्रेन के ड्रोन हमलों के दौरान रूस को उसके तमाम इलाकों में ब्लैकआउट करना पड़ता है, जिसकी वजह से इंटरनेट कनेक्ट‍िविटी प्रभावित होती है और लोग सोशल मीडिया समेत तमाम जरूरी ऐप्स को एक्सेस नहीं कर पाते। इसका तोड़ अब रूस की तरफ से न‍िकाला गया है। उसने ऐसा डिजिटल तरीका तैयार क‍िया है, जिससे लोकल ऐप्स बिना इंटरनेट भी काम करते हैं। रूस की तरफ से इन ऐप्स की लिस्ट जारी करके लोगों को अवेयर क‍िया गया है। जरूरी सेवाओं से जुड़े हैं ऐप रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हाल में रूसी सरकार ने ऐसे ऐप्स की लिस्ट जारी की है जो बिना इंटरनेट काम करेंगे। ये ऐप्स सोशल मीडिया से संबंधित है। ओला-उबर जैसी सेवाओं से जुड़े हैं। इसके अलावा सरकारी सेवाओं से जुड़े ऐप्स, पेमेंट ऐप्स भी लिस्ट में हैं, जो बिना इंटरनेट काम करेंगे। खास बात है कि रूसी लिस्ट में अमेरिकी ऐप्स जैसे- वॉट्सऐप आदि को जगह नहीं दी गई है। टेलिग्राम भी लिस्ट में शामिल नहीं है। इंटरनेट बंद होने पर नहीं होगी परेशानी रिपोर्ट के अनुसार, रूस की डिजिटल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री ने कहा है कि उसके पास एक ऐसा डिजिटल तरीका (special technical solution) है, जिससे लोकल ऐप बिना इंटरनेट के भी काम करेंगे। मिनिस्ट्री के अनुसार, इंटरनेट बंद रहने के दौरान लोगों को परेशानी होती है, उसे कम करने के लिए यह उपाय क‍िया गया है। हालांकि रूस की तरफ से इस मामलों को यूक्रेन के ड्रोन हमलों से नहीं जोड़ा गया है। हालांकि रिपोर्ट में रूस के बॉर्डर एरिया वाले कुछ गवर्नरों के हवाले से बताया गया है कि यूक्रेनी हमलों के दौरान ही ज्यादातर बार इंटरनेट बंद क‍िया जा रहा है। लोकल ऐप्स को बढ़ावा देना चाहता है रूस रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस अपने देश में ऐसे ऐप्स को बढ़ावा देने में जुटा है जो स्थानीय स्तर पर डेवलप क‍िए गए हैं। उसने कई बाहरी ऐप्स पर बंद‍िशें भी लगाई हैं। खास बात यह है कि रूस में वॉट्सऐप और टेलिग्राम पॉपुलर ऐप्स में शामिल हैं। दोनों ऐप्स को 18 करोड़ से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं। लेकिन रूस ने दोनों ऐप्स की बजाए वीके मैसेंजर और मैक्स मैसेंजर जैसे ऐप्स को प्राथमिकता दी है। 1 सितंबर से रूस में बिकने वाले सभी स्मार्टफोन्स में मैक्स मैसेंजर का पहले से इंस्टॉल होना जरूरी है। इसके यूजर्स भी तेजी से बढ़ रहे हैं।  

सड़क निर्माण से बदलेगा बिहार का चेहरा: आठ जिलों में 675 करोड़ की परियोजनाओं को मिली मंजूरी

पटना राज्य के आठ जिलों की दस सड़कों को केंद्रीय सड़क और बुनियादी ढांचा कोष (सीआरआईएफ) को नया स्वरूप दिया जाएगा। इन परियोजनाओं पर 675 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने शनिवार को इस आशय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन सड़क परियोजनाओं के लिए सीआरआईएफ से मंजूरी मिली है। उनकी अनुशंसा राज्य सरकार ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को की थी। पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि बिहार की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने को ले केंद्र एवं राज्य सरकार संयुक्त रूप से काम कर रही है। इसी क्रम में आठ जिले क्रमश: बक्सर, सारण, नवादा, मधुबनी, भागलपुर, अररिया, पूर्णिया एवं पूर्वी चंपारण की दस परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी है। इनमें पथों के मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण तथा एक पुल निर्माण की योजना शामिल है। इन परियोजनाओं को मिली मंजूरी 1. 135 करोड़ की लागत से अररिया जिले के जयनगर (भरगामा प्रखंड) से घुरना (नरपतगंज प्रखंड) भारत-नेपाल सीमा तक 30 किलोमीटर सड़क का निर्माण 2. 117.49 करोड़ की लागत से बक्सर जिले में एसएच-17 का चौसा-गोला-कोचस पथांश (बसाही पुल तक) का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण एवं एक एच.एल. पुल का निर्माण 3. 48.68 करोड़ की लागत से सारण जिले के तरैया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत राज्य राजमार्ग संख्या 104 के 12 किमी पथ का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य 4. 45 करोड़ की लागत से नवादा स्टेशन रोड से गोसाईबिगहा, जहाना, लाखमोहना, सुपौल तक की 11.6 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य 5. 72 करोड़ की लागत से मधुबनी जिले के रामनगर-मोतीपुर खैरा सड़क का 12.5 किलोमीटर तक चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य को शामिल किया गया है। 6. 80 करोड़ की लागत से भागलपुर से गोराडीह होते हुए कोतवाली तक 17.14 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य। 7. 56.70 करोड़ की लागत से 4.5 किलोमीटर तक भागलपुर-हंसडीहा मुख्य मार्ग (एसएच-19) को एनएच-80 से जोड़ने का कार्य। 8. 42.50 करोड़ की लागत से मोतिहारी के ढाका-लौखान सड़क का 11 किलोमीटर तक चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य 9. 47.42 करोड़ की लागत से मोतिहारी के ही नारीगिर-चंपापुर-आदापुर सड़क का 15.55 किलोमीटर चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य 10. 29.48 करोड़ की लागत से पूर्णिया जिले के घमदाहा से कुआरी सड़क 11.2 किलोमीटर का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य को भी शामिल किया गया है।

ऐसी सड़कें जो खुद बताएंगी खराब होने से पहले, भारत में आने वाली है नई AI तकनीक

नई दिल्ली भारत में बरसात के मौसम में सड़कों में गड्ढे होने या इनके टूटने की खबरें आती हैं। लेकिन क्या हो अगर सड़कों के टूटने या इनमें गड्ढे होने से पहले ही अलर्ट मिल जाए। इससे ना सिर्फ लोग दूसरा रूट ले सकते हैं, बल्कि लोगों की लाइफ पर भी रिस्क नहीं होगा। सुनने में भले ये नामुमकिन-सा लगे, लेकिन ऐसी तकनीक पर तेजी से काम चल रहा है, जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI भारत की 63 लाख किलोमीटर लंबी सड़कों को बनाने, देखभाल करने और इनको मैनेज करने के काम को पूरी तरह से बदल देगी। चलिए, जान लेते हैं कि यह AI तकनीक कैसे काम करेगी और आमजन को इससे क्या फायदा होगा? वर्चुअल मॉडल में पता लग जाएगी कमजोरी ईटी इंफ्रा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल ट्विन्स नाम की एक तकनीक है जिससे इंजीनियर पूरी सड़क का वर्चुअल मॉडल बना सकते हैं। यह मॉडल ट्रैफिक और सड़क की कमजोरी का पहले से एनालिसिस कर लेता है।सॉफ्टवेयर सड़क की खराबी को पहले ही पकड़ लेंगे। इतना ही नहीं, बल्कि उसे ठीक करने के तरीके भी सुझाएंगे। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अपने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम में पहले ही AI का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जिससे सड़क निर्माण की क्वालिटी की जांच होती है। तकनीक का इस्तेमाल यहां हो रहा है भारत के शहरी क्षेत्र में AI पहले से ही काम पर लगा हुआ है। पुणे में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और बेंगलुरु का ऐडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम इसका उदाहरण हैं। ये सिस्टम ट्रैफिक को समझकर सिग्नल को अपने आप कंट्रोल करते हैं, जिससे जाम की समस्या से मुक्ति मिल सकती है। यही नहीं, रोड प्रोजेक्ट्स में ड्रोन और GPS का इस्तेमाल भी हो रहा है। सड़क मंत्रालय ने AI-MC नाम का एक सिस्टम शुरू किया है, जो ड्रोन और सेंसर की मदद से सड़क निर्माण को बेहतर बनाता है। बिहार में AI का इस्तेमाल कर 12000 से ज्यादा पुलों और 743 ब्रिजों की जांच की गई है। यह तकनीक खराब ढांचे को ढूंढकर उसकी मरम्मत का सुझाव देती है। ग्रामीण इलाकों में AI आया तो सुधर जाएंगी सड़कें केपीएमजी की एक रिपोर्ट बताती है कि AI से सड़कों की देखभाल करने से खर्च 30% तक कम हो सकता है और सड़कों की लाइफ भी बढ़ सकती है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में अभी भी 70% सड़कों की जांच पुराने तरीकों से होती है, जैसे कि कागजी रिकॉर्ड और Manual Inspection से। यदि ग्रामीण इलाकों में भी AI का इस्तेमाल बढ़े, तो सड़कों की हालत पहले के मुकाबले काफी सुधर सकती है। AI से सड़क हादसों की संख्या घट सकती है रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में हर साल सड़क हादसों में 1.5 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवाते हैं। AI इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। इंटेलिजेंट सिस्टम से इमरजेंसी रिस्पांस टाइम 60% तक कम हो सकता है और Traffic Efficiency 30% तक बढ़ सकती है। AI कार्बन उत्सर्जन को मापने, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कॉरिडोर बनाने और टिकाऊ डिजाइन में भी मदद करता है।  

शिक्षा विभाग की नई योजना: हरियाणा में 2026 से बदल जाएगा स्कूल सिस्टम

हरियाणा हरियाणा की एजूकेशन में शिक्षा विभाग बड़ा बदलाव करने जा रहा है। दरअसल, नए शिक्षण सत्र (2026) में विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिलेबस शुरू करने की तैयारी कर रहा है। विभाग इसे 4 फेज में लागू करेगा। पहले फेज में, एआई सिलेबस क्लास 9 के स्टूडेंट के लिए होगी पढ़ाई।  टीचर, क्लास और टीचिंग में एआई एक्यूपमेंट को भी शामिल किया जाएगा, ताकि लेसन को अधिक आकर्षक और व्यावहारिक बनाया जा सके। इस मुहिम को सफल करने के लिए शिक्षा विभाग करीब एक लाख टीचरों को चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग भी देगा।हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी अपने स्तर पर इस मुहिम को मॉनिटर कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि जल्द से जल्द इस पर बचा हुआ काम पूरा कर लिया जाए। 25 से 29 सितंबर तक जिला स्तरीय ट्रेनिंग होगी डाइट डिंग द्वारा 25 से 29 सितंबर तक एक जिला स्तरीय ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया जाएगा, जहां सिरसा जिले के 50 शिक्षकों को एआई की बुनियादी बातों, परियोजना-आधारित शिक्षा, प्रश्नपत्र डिजाइन और मूल्यांकन तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिक्षा विभाग अधिकारियों ने बताया कि 5 विषयों में 40-45 मिनट की अवधि में पढ़ाए जाने वाले इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में रचनात्मकता, समस्या-समाधान कौशल और डिजिटल उपकरणों के उपयोग को बढ़ाना है, जिससे उच्च शिक्षा और नौकरियों के लिए उनकी संभावनाएं मजबूत होंगी। पहले चरण में पाठ्यक्रम सिर्फ 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए शुरू होगा। इसके बाद हर साल एक-एक करके 10वीं, 11वीं फिर 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए एआई पाठ्यक्रम लागू हो जाएगा। एआई के एक पाठ्यक्रम में पांच पार्ट होंगे, जिनमें अलग-अलग तरह के कौशल (स्किल्स) वाले कोर्स बच्चों को पढ़ाए जाएंगे।पाठ्यक्रम की शुरुआत की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। वहीं शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। 6वीं से 8वीं के लिए 40 मिनट का चलेगा पीरियड सरकारी स्कूलों में 6वीं, 7वीं और 8वीं कक्षा में एआई पाठ्यक्रम अभी शामिल नहीं होगा। इन तीनों कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए 40 मिनट का एआई पीरियड अनिवार्य होगा। इस दौरान प्रशिक्षित शिक्षक इन तीनों कक्षा के विद्यार्थियों को एआई पाठ्यक्रम संबंधित जानकारी देंगे। पाठ्यक्रम के 100 अंक होंगे 9वीं कक्षा के एआई पाठ्यक्रम में मशीन लर्निंग, न्यूरल नेटवर्क और एआई एप्लीकेशन जैसी मूलभूत श्रेणियां शामिल हैं। इसके जरिए विद्यार्थी एआई से दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाले पहलू, उसमें सुधार के प्रारंभिक तरीके और परिणाम को समझेंगे। इसमें 50 अंकों की व्यावहारिक मूल्यांकन और 50 अंकों की सैद्धांतिक परीक्षाएं शामिल हैं, जो कुल 100 अंकों की होंगी। मॉडल स्कूल और पीएमश्री स्कूलों में चल रहा पाठ्यक्रम प्रदेश के सभी मॉडल स्कूल और पीएमश्री स्कूलों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से पाठ्यक्रम चलते हैं। इसी कारण इन स्कूलों में पहले से एआई पाठ्यक्रम चल रहे हैं। कुल 468 सरकारी मॉडल संस्कृति (जीएमएस) और पीएमश्री माध्यमिक उच्च विद्यालय और 1420 सरकारी मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल हैं।  

उम्र 40 के बाद प्रेग्नेंसी: जानें स्वास्थ्य और तैयारी से जुड़ी अहम बातें

एक अध्यकयन से पता चला है कि 95 फीसदी महिलाएं करियर और परिवार के बीच में परिवार को ही चुनती हैं। करियर के पीक की तरफ बढने के दौरान, महिलाओं पर मां बनने का भी दबाव होता है क्योंकि इसमें देरी करने पर उम्र बढ़ने से मां बनने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से वे अपने करियर में सहयोगियों से बेहतर होते हुए भी पिछड़ती जाती हैं।   लेकिन कुछ महिलाएं अपना करियर बीच मे नहीं छोड़तीं और 40 पार कर जाने के बाद भी मां बनने के सपने को साकार करना चाहती हैं। लेकिन महिलाओं की प्रजनन क्षमता 35 की उम्र आते-आते कम होनी शुरू हो जाती है। ऐसा नहीं है कि वे इस उम्र के बाद प्रेगनेंट नहीं हो सकतीं। आप अगर 40 पार भी मां बनने की इच्छा रखती हैं, तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपकी प्रजनन क्षमता बरकरार रहे…   -उम्र बढने के साथ एग की क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों कम होती जाती है। 25 से 30 वर्ष की उम्र में अपना एग फ्रीज कराकर अपने मां बनने के सपने को 40 साल की उम्र में भी पूरा कर सकती हैं।   -सही प्रकार के प्रोटीन प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैंय टोफू, चिकन, अंडे, और कुछ सी-फूड्स में उच्च स्तर पर ओमेगा-3 फैटी एसिड, लोह-तत्व, सेलेनियम इत्यादि पाए जाते हैं।   -आपके विटामिन में फोलिक एसिड, कैल्शियम और लोह-तत्व मौजूद हों। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालें खाएं।   -किसी भी तरह के यौन रोग न हों, इसके लिए सेफ सेक्स पर गौर करें।   -वजन कम करें। अध्ययन बताते हैं की मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को गर्भधारण करने में ज्यादा कठिनाई आती है और उन्हें गर्भावस्था के दौरान अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि आपका बॉडी मास इंडेक्स (बी.एम.आई.) थोड़ा अधिक है, तो डाइट ठीक करें और साथ ही एक्सरसाइज भी करें या फिर योगाभ्यास शुरू करें।   -धूम्रपान त्यागें। यह न सिर्फ गर्भावस्था के लिए हानिकारक है अपितु यह गर्भ धारण करने में भी बाधा पैदा कर सकता है।   -एक कहावत है कि हंसी सबसे अच्छी दवा है। अधिकांश डॉंक्टर भी मानते हैं कि यह 100 प्रतिशत सही है। तो फिर दिल से क्यों न हंसा जाए। अगर आप जोर से हंसती हैं या मुस्कराती भी हैं तो आपके शरीर में फील गुड हारमोन्स का स्रव होता है, जो तनाव पैदा करने वाले कोर्टीसोल नामक हार्मोन को नष्ट करता है। इससे आप ज्यादा सेहतमंद रह पाएंगी। हंसने से चेहरे की माशपेशियों का भी व्यायाम हो जाता है।   -35 की उम्र के बाद समय-समय पर रैगुलर टैस्ट्स के अलावा फर्टिलिटी जांच करवाती रहें। गोनोरिया और कैलामाइडिया नामक यौन संचारित रोग हो तो जल्दी ट्रीटमेंट करवाना जरूरी है। वरना पेडू में सूजन की बीमारी हो सकती है जिससे फैलोपियन ट्यूब में घाव हो जाता है, जिससे बांझपन की संभावना बढ़ती है।  

सच्ची घटना पर आधारित भूतिया फिल्म, डिटेक्टिव भी रह गए दंग—गुत्थी अब तक अनसुलझी

लॉस एंजिल्स कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स: फिल्में अक्सर खुद को 'सच्ची कहानी पर आधारित' बताकर अपना प्रमोशन करती हैं। यह एक ऐसी तरकीब है जो खासकर हॉरर फिल्मों में काम आती है। भले ही आपको यकीन न हो कि कहानी असली है, लेकिन यह सोचना कि यह असली हो सकती है, उसे और भी डरावना बना देता है। यह फॉर्मूला दशकों से चला आ रहा है। इस फ्रैंचाइजी की छवि फैक्ट्स को तोड़-मरोड़कर पेश करने और सच्चाई से खिलवाड़ करने की रही है, लेकिन फैंस आज भी इन्हें पसंद करते हैं क्योंकि ये एड और लोरेन वॉरेन के जांच किए गए असली मामलों पर आधारित हैं। हाल ही में रिलीज हुई 'द कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स' इस फ्रैंचाइजी के पहले युग को खत्म करती है। इस बार, एड और लोरेन वॉरेन के सबसे परेशान करने वाले मामलों में से एक पर ध्यान दिया गया है। यह यकीनन अब तक का सबसे ज्यादा गूगल किया गया अलौकिक मामला है, न सिर्फ इसकी गंभीरता और चौंकाने वाले दावों के लिए, बल्कि इसलिए भी कि संशयवादी अभी भी इस बात पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं कि क्या यह सच था। 'द कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स' की कहानी कहानी 1973 में शुरू होती है। जैक और जेनेट स्मरल, अपनी बेटियों और जैक के माता-पिता के साथ, तूफान एग्नेस की बाढ़ में अपना घर खोने के बाद, पेंसिल्वेनिया के वेस्ट पिट्सटन में एक डुप्लेक्स में रहने चले गए। नौसेना के एक पूर्व सैनिक और न्यूरोसाइकियाट्रिक टेक्निशियन जैक ने अपनी सारी जमा-पूंजी इस नए घर में लगा दी। बाद में, इस कपल ने वहां जुड़वा बच्चों का स्वागत किया। घर में घट रही थीं अजीब घटनाएं पांच साल तक जिंदगी शांत रही, 1985 में अजीबोगरीब घटनाएं घटने लगीं। शुरुआत औजारों के गायब होने, बिजली जाने, घर में गंध फैलने जैसी घटनाओं से हुई। लेकिन जल्द ही यह हिंसक हो गई। एक लटकी हुई लाइट एक बच्ची पर गिर गई, जिससे उसके सिर में चोट लग गई। अगले डेढ़ साल में, परिवार ने दावा किया कि यह गतिविधि और भी ज्यादा गंभीर होती गई, उनके जर्मन शेफर्ड को दीवार से टकराया गया, उनकी बेटियों को सीढ़ियों से नीचे धकेला गया और जैक ने तो यहां तक आरोप लगाया कि एक शैतानी साये ने उसका यौन उत्पीड़न किया। जेनेट ने तो यह भी कहा कि उस पर एक सक्यूबस ने हमला किया था। घर में सबने सबकुछ किया स्मर्ल्स ने कैथोलिक चर्च की मदद ली। कई पादरियों ने घर में अपनी पावर इस्तेमाल की, लेकिन कोई बदलाव नहीं आया। इस बीच, पड़ोसी नाराज हो गए, परिवार पर ध्यान देने के लिए यह सब झूठ बोलने का आरोप लगाया और कुछ ने तो उनके घर पर पत्थर भी फेंके। बाहर उपहास और अंदर दहशत के बीच फंसे स्मर्ल्स हताश हो गए। तभी एड और लोरेन वॉरेन आगे आए और उन्होंने कसम खाई कि यह उनका आखिरी मामला होगा। तब तक वॉरेन परिवार की साख बन चुकी थी और स्थानीय लोगों ने परिवार से उन्हें बुलाने को कहा।   वॉरेन कपल नहीं सुलझा पाए गुत्थी वॉरेन कपल का मानना था कि स्मर्ल्स बुराई को घर में बुलाने के लिए जिम्मेदार नहीं थे। एड ने दावा किया कि आत्माओं ने उन्हें मानव नियंत्रण से परे कारणों से निशाना बनाया था। उनकी जांच से पता चला कि घर में चार भूत-प्रेत रहते थे, जिनमें एक बूढ़ी औरत की आत्मा, एक हिंसक औरत, एक मृत आदमी के साथ एक राक्षस शामिल था जो स्मर्ल्स परिवार को चोट पहुंचाने के लिए तीन को कंट्रोल कर रहा था। वॉरेन कपल ने दावा किया कि उन्होंने ऑडियो टेप इकट्ठा किए थे और बताया था कि कैसे तापमान अचानक गिर गया, कुछ परछाइयां दिखाई दीं और यहां तक कि शीशों पर धमकी भरे मैसेजेस भी लिखे मिले। प्रार्थनाओं और मंत्रोच्चार के बावजूद, बुराई चुपचाप नहीं गई। एड ने बाद में कहा कि यह उन कुछ मामलों में से एक था जिसे वे कभी पूरी तरह से सुलझा नहीं पाए। मामला आखिर कैसे निपटा? मामला आखिरकार निपट गया। पास के एक पल्ली के रेवरेंड जोसेफ एडोनिजियो ने खूब पूजा-प्रार्थना की जिससे कथित तौर पर बुराई दूर हो गई। 1987 तक, स्मर्ल्स ने घर बेच दिया और आगे बढ़ गए। बाद में वहां के लोगों ने दावा किया कि उसके बाद उन्होंने कभी कुछ असामान्य नहीं देखा या सुना।

महिला सुरक्षा संकट: राजस्थान में आधे साल में 2966 दुष्कर्म मामले दर्ज

जयपुर राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध  के आंकड़ें चिंता बढ़ाने वाले हैं। प्रदेश में साल 2025 में महिलाओं के साथ दुष्कर्म के 2966 मामले थानों में दर्ज हुए हैं। इनमें 12 प्रकरणों में दुष्कर्म के बाद हत्या किया जाना भी शामिल है। विधानसभा में पूछे गए गए सवाल के जवाब में सरकार की ओर से यह आंकड़े पेश किए गए हैं। कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने विधानसभा में सरकार से सवाल पूछा है कि प्रदेश में 1 जनवरी, 2025 से 30 जून, 2025 तक महिलाओं के साथ बलात्कार, बलात्कार के बाद हत्या, दहेज हत्या, आत्महत्या का दुष्प्रेरणा एवं महिला उत्पीड़न (दहेज) के कितने प्रकरण दर्ज हुए हैं? इनमें से कितने प्रकरणों में चालान पेश कर दिया गया है एवं कितने प्रकरणों में अब तक अनुसंधान लम्बित हैं? इसके जवाब में गृह विभाग की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में एक जनवरी से 30 जून तक दुष्कर्म के कुल 2966 प्रकरण दर्ज हुए। वहीं 12 प्रकरणों में दुष्कर्म के बाद पीड़िताओं की हत्या भी कर दी गई। पुलिस की तरफ से इनमें 1387 प्रकरणों में चालान पेश कर दिए गए हैं जबकि 1187 में एफआर लगा दी गई। इनके अलावा 392 प्रकरण अभी लंबित बताए गए हैं। इसी अवधि में दहेज हत्या के 187 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 92 में चालान पेश किए गए जबकि 31 में एफआर लगा दी गई, तथा 64 प्रकरणों में अभी जांच चल रही है। महिला उत्पीड़न के कुल 6192 प्रकरण सामने आए जिनमें 3004 में चालान पेश किए गए तथा 1863 में एफआर लगा दी गई। जयपुर- अलवर में दुष्कर्म के मामले सबसे ज्यादा दुष्कर्म के मामलों में राजधानी जयपुर के हालात सबसे ज्यादा खबरा है। यहां कुल 293 दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें से 128 मामलों में कोर्ट में चालान पेश हुए हैं। इनमें 2 मामले दुष्कर्म के साथ हत्या के भी हैं। जयपुर के बाद दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले अलवर जिले में रिपोर्ट हुए हैं। यहां दुष्कर्म की 143 एफआआईआर दर्ज हुई है। इनमें से 50 में चालान पेश किए गए हैं तथा 74 में एफआर लगा दी गई। गंगानगर में कुल 128 मामले दर्ज हुए हैं जिनमें से  45 मामलों में चालान पेश किए गए। 187 महिलाओं की दहेज हत्या दहेज के मालले भी चौंकाने वाले हैं। प्रदेश में दहेज के मामलों में 187 महिलाओं की हत्या हुई है। इनमें से 92 मामलों में कोर्ट में चालान पेश किए गए हैं। इनके अलावा महिला उत्पीड़न के 6 हजार से ज्यादा प्रकरण थानों में दर्ज हुए हैं। घरेलू हिंसा के मामलों में भावनात्मक और मानसिक प्रताड़ना, मारपीट, घर से बाहर निकालने की धमकी जैसी शिकायतें शामिल हैं। पिछले पांच साल में जयपुर जिले में 18 हजार से अधिक महिलाएं मदद मांगने आईं।  

नमक वाला पानी पीने के 6 चौंकाने वाले फायदे, जानें कैसे बदल सकता है सेहत

सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है क्योंकि जान है तो जहान है। अगर आपने स्वस्थ जिंदगी जीनी है तो रोज सुबह काला नमक और पानी मिलाकर पीना शुरू कर दें। इसे सोल वॉटर कहते हैं, जिससे आपकी ब्लड शुगर, ब्लाड प्रेशर, ऊर्जा में सुधार, मोटापा और अन्य  तरह की बीमारियां झट से ठीक हो जाएंगी। लेकिन ध्यान रहे कि सादे नमक का प्रयोग नहीं करना है। यह लाभ नहीं करेगा। काले नमक में 80 खनिज और जीवन के लिए वे सभी आवश्यक प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो जरूरी हैं। नमक वाला पानी बनाने की विधि-हलके गरम पानी में एक तिहाई छोटा चम्मीच काला नमक मिलाइए। इस गिलास को प्लानस्ट्कि के ढक्कयन से ढंक दीजिए। फिर गिलास को हिलाते हुए नमक मिलाइए और 24 घंटे के लिए छोड़ दीजिए। जब आपको लगे कि पानी में नमक अब नहीं घुल रहा है तो, समझिए कि आपका घोल पीने के लिए तैयार हो गया है। पाचन दुरुस्तव करें: नमक वाला पानी मुंह में लार वाली ग्रंथी को सक्रिए करने में मदद करता है। अच्छें पाचन के लिए यह पहला कदम बहुत जरूरी है। पेट के अंदर प्राकृतिक नमक, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीन को पचाने वाले इंजाइम को उत्तेेजित करने में मदद करता है। इससे खाया गया भोजन टूट कर आराम से पच जाता है। नींद: नमक, कोर्टिसोल और एड्रनलाईन, जैसे दो खतरनाक सट्रेस हार्मोन को कम करता है इसलिए इससे रात को अच्छीम नींद लाने में मदद मिलती है। शरीर करे डिटॉक्स:  नमक में काफी खनिज होने की वजह से यह एंटीबैक्टींरियल का काम भी करता है। इसकी वजह से शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीयरिया का नाश होता है। हड्डी की मजबूती: कई लोगों को नहीं पता कि हमारा शरीर हमारी हड्डियों से कैल्शिलयम और अन्यभ खनिज खींचता है। इससे हमारी हड्डियों में कमजोरी आ जाती है, इसलिए नमक वाला पानी उस मिनरल लॉस की पूर्ती करता है और हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। त्वचा की समस्या: नमक में मौजूद क्रोमियम और सल्फनर त्वडचा को साफ और कोमल बनती है। इसके अलावा नमक वाला पानी पीने से एक्जिममा और रैश की समस्या् दूर होती है। मोटापा: यह पाचन को दुरुस्तद कर के शरीर की कोशिकाओं तक पोषण पहुंचाता है, जिससे मोटापा कम करने में मदद मिलती है।  

हाईस्पीड इंटरनेट में बड़ा कदम: भारत ने 6G पर शुरू की तैयारी

नई दिल्ली 5G के बाद अब भारत 6G के लिए तैयार है। पिछले काफी समय से देश में 6G टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है। अब इसे बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम लिया गया है। बता दें कि हाल ही में Telecommunications Standards Development Society, India ( TSDSI ) और भारत 6G एलायंस ने 6G कनेक्टिविटी के डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया है। दोनों संगठन के बीच समझौता हुआ है। 6G विजन को कामयाब बनाने के लक्ष्य से यह पार्टनरशिप की गई है। ये दोनों मिलकर अब 6G के लिए स्टैंडर्ड डेवलप करेंगी। ये संगठन ग्लोबल लेवल पर जानकारियों का आदान-प्रदान करेंगे। यह पार्टरनशिप भारत को 2030 तक 6G टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लेवल पर टॉप पर पहुंचाने में अहम रोल मिभाएगी। आइये, डिटेल में जानते हैं। दोनों संगठन मिलकर करेंगे ये काम भारत में 6G को सपने को साकार बनाने के लिए अब TSDSI और भारत 6G एलायंस मिलकर काम करेंगे। इससे 6G टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट में तेजी आएगी। दोनों संगठन मिलकर एक दूसरे का हाथ बताएंगे। इससे देश की प्राथमिकताएं 6G और भविष्य की टेक्नोलॉजी के क्षेत्र की तरफ जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि TSDSI के डायरेक्टर-जनरल, ए.के. मित्तल का कहना है कि TSDSI को B6GA के साथ साझेदारी करके खुशी हो रही है। TSDSI और B6GA की एक्टिविटीज में आपसी तालमेल और सामंजस्य स्थापित करने के लिए उत्सुक है। इससे रिसर्च और डेवलपमेंट के परिणामों पर कई गुना प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, ग्लोबल स्टैंडर्ड के डेवलपमेंट में भी योगदान मिलेगा। इसका मतलब है कि TSDSI और B6GA मिलकर काम करके 6G तकनीक को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। भारत 6G एलायंस के डायरेक्टर-जनरल, राजेश कुमार पाठक का कहना है कि यह साझेदारी ग्लोबल स्टैंडर्ड के डेवलपमेंट की प्रोसेस में भारत की भागीदारी को मजबूत करेगी। इसका मतलब है कि इस साझेदारी से 6G विजन को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। 2023 में देखा गया था 6G विजन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च, 2023 में भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट जारी किया था। इसका उद्देश्य 6G नेटवर्क को डिजाइन, विकसित और तैनात करना है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 6G तकनीक में ग्लोबल लेवल पर उभरकर आना है। इसमें देश का साथ देने के लिए भारत 6G एलायंस आगे आ गया है। यह घरेलू उद्योग, शिक्षा, राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और मानक संगठनों का एक गठबंधन है। यह भारत 6G विजन को ध्यान में रखते हुए एक योजना बनाएगा। इस समझौता से भारत को 6G तकनीक के क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी बनने में काफी मदद मिलेगी। इससे 6G के डेवलपमेंट में भी तेजी आएगी। साथ ही, लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।