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CM डॉ. यादव मऊगंज पहुंचे, बहुती जलप्रपात का किया अवलोकन, व्यू प्वाइंट से निहारी दूधिया धाराएं

मऊगंज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मऊगंज जिले के प्रवास पर नई गड़ी जनपद पंचायत के बहुती जल प्रपात का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने वाटरफॉल के नजदीक जाकर व्यू प्वाइंट से जलप्रपात की गिरती हुई दूधिया जल धारा और वहा बनने वाले इंद्रधनुष की आभा को देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहुती जल प्रपात के समीप कार्यक्रम स्थल पर गौपूजन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव से जंगल में विचरण करने वाली गौमाताओं को अपनी एक आवाज में अपने पास बुलाने की कला रखने वाले रकरी गांव के गौसेवक सौखीलाल यादव ने भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आश्रम की दीदीओं द्वारा सम्मान कर उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बहुती में हुआ पारंपरिक स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बहुती पहुंचने पर पारंपरिक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मऊगंज की लोक कला की छात्राओं ने बघेली शैली नृत्य और स्थानीय लोक कलाकारों के दल ने अहिरहाई लोकनृत्य की प्रस्तुति देकर स्वागत किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, पशुपालन डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जिले के प्रभारी मंत्री लखन पटेल, विधायक सर्वगिरीश गौतम, दिव्यराज सिंह और प्रदीप पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, कमिश्नर रीवा बी.एस. जामोद, आई.जी. गौरव राजपूत, कलेक्टर संजय जैन एवं पुलिस अधीक्षक प्रजापति सहित नागरिक मौजूद थे। पर्यटक स्थल के रूप में किया जा रहा है विकसित कलेक्टर मऊगंज संजय जैन ने बताया कि बहुती जल प्रपात को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने एवं जन सुविधाओं के विकास के लिए 10 करोड़ रुपए लागत की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। कलेक्टर ने बातया कि बहुती प्रपात के अप स्ट्रीम में स्टॉप डैम का निर्माण प्रस्तावित है। स्टॉप डैम में जल का संचय होने से वाटर फॉल की जल धारा का बारह माह सदा अविरल प्रवाह बना रहेगा। प्रदेश का सबसे ऊँचा बहुती जल प्रपात बहुती जल प्रपात रीवा से 75 किलोमीटर दूर मऊगंज जिले में स्थित है। यह विन्ध्य क्षेत्र ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। बहुती में सेलर नदी 650 फिट की ऊंचाई से दो धाराओं में विभक्त होकर गिरती है। नीचे सुंदर कुंड और चारों ओर घने वन हैं। बहुती में अनंत जलराशि लंबवत चट्टानों पर गिरती है। जुलाई से सितम्बर माह तक इस प्रपात का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। प्रपात के समीप ही अष्टभुजा देवी का प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है। प्रयागराज और बनारस से सड़क मार्ग से सीधे जुड़ा होने से उत्तरप्रदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ पहुंचते हैं। इसके पास भैंसहाई में प्रागैतिहासिक काल के भित्ति चित्र मिले हैं।  

CM डॉ. यादव बोले- देवतालाब, बनारस और प्रयागराज है धार्मिक आस्था का अनूठा त्रिकोण

देवतालाब, बनारस और प्रयागराज धार्मिक क्षेत्र का अनूठा त्रिकोण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव देवतालाब शिव मंदिर में होगा शिवलोक का निर्माण बहुती जल प्रपात को विकसित करेगा पर्यटन विकास निगम देवतालाब में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का होगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन देवतालाब और नईगढ़ी में बनेंगे नए तहसील भवन हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना से विंध्य के चार जिलों में 1 लाख 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होगी सिंचाई लाड़ली बहनों को दीपावली के बाद से 1500 रुपए प्रतिमाह अंतरित किए जाएंगे मुख्यमंत्री ने देवतालाब में 241 करोड़ 33 लाख रुपए के निर्माण कार्यों का किया शिलान्यास और लोकार्पण मऊगंज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहा है कि शिव मंदिर देवतालाब अदभुत है। यहां पांच तत्वों का आभास होता है। ऐसा अद्भुत मंदिर केवल विश्वकर्मा जी ही बना सकते हैं। देवतालाब, बनारस और प्रयागराज महत्वपूर्ण धार्मिक त्रिकोण हैं। देवतालाब आस्था, इतिहास और आनंद का संगम है। यह श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि है। ऐसी मान्यता है कि देवतालाब के शिव का दर्शन करने पर ही चारधाम की यात्रा का फल मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मऊगंज के देवतालाब स्टेडियम में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 241 करोड़ 33 लाख रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास कर विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये और मऊगंज को विकास की अनेक सौगातें देते हुए घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्यापूजन कर मऊगंज के संयुक्त जिला कार्यालय भवन का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारे गांव स्वावलम्बन की अद्भुत मिसाल हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में स्वदेशी को अपनाते हुए आत्मनिर्भरता और स्वावलम्बन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश एकजुट है। हमारी इस सामर्थ्य के परिणामस्वरूप ही देश की कीर्ति गाथा सम्पूर्ण विश्व में गूंज रही है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का कथन की "21वीं सदी भारत की होगी" साकार हो रहा है। गर्व का विषय है कि स्वामी विवेकानंद अर्थात श्रद्धेय नरेन्द्र नाथ दत्त की भावना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चरितार्थ किया है। देश के गरीब, युवा, अन्नदात और महिलाओं का कल्याण तथा विकास तपोनिष्ट प्रधानमंत्री मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसी माह प्रदेश आगमन के लिए स्वीकृति प्रदान की है। राज्य सरकार ने प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में विकास और जनकल्याण के लिए कभी भी संसाधनों की कमी नहीं होने दी, इसी का परिणाम है कि प्रदेश में चहुंओर विकास का परचम लहरा रहा है। जबकि अन्य दलों की सरकारें विकास के लिए सदैव संसाधनों के अभाव का बहाना बनाती रहीं। विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत है केंद्र बिंदु मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रयागराज और काशी विश्वनाथ के बीच बसा यह स्थान देवताओं की अभिरूचि की अभिव्यक्ति है। उनके स्वयं के लिए भी देवतालाब आगमन सदैव सुखद और भाग्यशाली रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति ने विश्व को मानवता का विचार देते हुए जीवन जीने का सही मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में भी प्रधानमंत्री मोदी की प्रभावशीलता के परिणाम स्वरूप विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत केंद्र बिंदु बना हुआ है। यह हम सबके लिए गर्व-गौरव और स्वाभिमान का विषय है कि अमेरिका हो या दुनिया का कोई भी अन्य बड़ा देश, सभी प्रधानमंत्री मोदी की स्वीकार्यता के लिए उत्सुक हैं। खेत में किसान और सीमा पर जवान का सम्मान हमारी सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेत में किसान और सीमा पर जवान दोनों का सम्मान हमारी सरकार के लिए सर्वोपरि है। किसान सम्मान निधि तथा अन्य प्रोत्साहन गतिविधियों के माध्यम से राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। पर्याप्त सिंचाई और बिजली की उपलब्धता प्रदेश के सभी क्षेत्रों में सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना मंजूर की गई है। जिससे रीवा, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज जिलों की एक लाख 40 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। रीवा के सोलर प्लांट की बिजली से दिल्ली की मेट्रो रेल दौड़ रही है। मऊगंज के घुरेहटा में बाबा रामदेव के पतंजलि संस्थान द्वारा एक हजार करोड़ रुपए की लागत से कृषि पर आधारित उद्योगों का विकास किया जा रहा है। इससे लाखों किसान लाभान्वित होंगे। उज्ज्वला गैस योजना से 64 हजार से अधिक गैस के कनेक्शन दिए गए हैं। मऊगंज में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में 44 हजार गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के आवास मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहनों के खाते में जारी की जा रही राशि दीपावली के बाद से 1500 रुपए प्रतिमाह की जाएगी, जिसे वर्ष 2028 तक प्रतिमाह 3 हजार रुपए किया जायेगा। मऊगंज को दी अनेक सौगातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मऊगंज जिले और देवतालाब विधानसभा क्षेत्र को अनेक सौगातें दीं। मुख्यमंत्री ने देवतालाब शिव मंदिर में शिवलोक के निर्माण और नईगढ़ी एवं देवतालाब में तहसील भवन निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवतालाब के अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया जायेगा। देवतालाब के शासकीय महाविद्यालय में ऑडिटोरियम और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण किया जाएगा। अनुसूचित जाति और जनजाति विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास भवन बनाए जाएंगे। बहुती जल प्रपात को पर्यटन विकास निगम के माध्यम से विकसित किया जायेगा। अष्टभुजी माता मंदिर में सौंदर्यीकरण और जनजाति अंचल में टीपा बदोर से गढ़वा रोड तक 11 किलोमीटर की सड़क बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में बनारस से आये लोक कलाकारों द्वारा दी गई सांगीतिक प्रस्तुति की सराहना की और लोक कलाकारों को 25 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा की। लोक नृत्य प्रस्तुत करने वाले दल के प्रत्येक सदस्य को 5-5 हजार रूपए और स्वागत गीत गाने वाली लोक गायिका राखी द्विवेदी को 50 हजार रूपए देने की घोषणा की। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने 2 साल से कम समय में जो विकास किया है वह ऐतिहासिक है। उन्होंने विकास योजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी। आज मऊगंज को 241 करोड़ रुपए की सौगात मिली है। क्षेत्र में सड़क, नहर और माइक्रो इरिगेशन परियोजना से विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने … Read more

शेयर बाजार में उथल-पुथल? ग्लोबल सेंटीमेंट और महंगाई के आंकड़ों से खुला भविष्य

मुंबई  स्थानीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह ग्लोबल सेंटीमेंट, विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियों और महंगाई के आंकड़ों से तय होगी। एक्सपर्ट्स ने यह राय जताई है। एक एक्सपर्ट्स ने कहा कि मजबूत घरेलू वृहद आर्थिक आंकड़ों और नीतिगत सुधारों के समर्थन से पिछले सप्ताह बेंचमार्क सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। क्या है एक्सपर्ट्स की राय? रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट रिसर्च अजित मिश्रा ने कहा, “इस सप्ताह भी घरेलू और वैश्विक स्तर पर काफी आंकड़े आएंगे। घरेलू मोर्चे पर मुद्रास्फीति का आंकड़ा 12 सितंबर को जारी किया जाएगा।” मिश्रा ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर अमेरिका के महत्वपूर्ण आंकड़ों पर नजर रहेगी। इनमें उपभोक्ता मुद्रास्फीति, बेरोजगारी के दावे और उपभोक्ता धारणा शामिल हैं, जो फेडरल रिजर्व की नीतिगत अपेक्षाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई भी नई सूचना बाजार की धारणा को और मजबूत कर सकती है। पिछले हफ्ते शेयर बाजार में दिखी थी तेजी पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 901.11 अंक या 1.12 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 314.15 अंक या 1.28 प्रतिशत के लाभ में रहा। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के वरिष्ठ तकनीकी एक्सपर्ट प्रवेश गौड़ ने कहा, “आगे की ओर देखते हुए, भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह सतर्क और आशावादी रुख के साथ शुरुआत कर सकता हैं। निवेशक विशेष रूप से उपभोग-आधारित और पूंजीगत व्यय-आधारित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।” इसी महीने होनी है फेड रिजर्व की मीटिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये-डॉलर का रुख भी इस सप्ताह बाजार का रुख तय करेगा। मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के निदेशक पुनीत सिंघानिया ने कहा, ‘‘यह सप्ताह भारतीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती की घोषणा एक संभावित प्रोत्साहन के रूप में काम कर रही है जो बाजार की धारणा को बेहतर बना सकती है और क्षेत्रीय स्तर पर तेजी ला सकती है, जिससे निकट भविष्य में शुल्क की नकारात्मक धारणा का मुकाबला किया जा सकता है।’’ शेयर बाजार के लिए अगला बड़ा घटनाक्रम 16-17 सितंबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शोध प्रमुख-संपदा प्रबंधन सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘‘इस सप्ताह के प्रमुख वृहद आंकड़ों में भारत और अमेरिका की मुद्रास्फीति, ईसीबी (यूरोपीय केंद्रीय बैंक) का ब्याज दर पर निर्णय और जापान की दूसरी तिमाही की जीडीपी आंकड़े शामिल हैं।’’

शेयर बाजार की जोरदार शुरुआत, GST कट और ट्रंप के सुर बदलने से निवेशकों में उत्साह

मुंबई  मोदी सरकार के जीएसटी रेट कट के ऐलान का अभी भी असर शेयर बाजार पर दिख रहा है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाले सेंसेक्स इंडेक्स ने खुलने के साथ ही 200 अंकों की छलांग लगा दी, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी अपने पिछले बंद के मुकाबले तेजी के साथ ग्रीन जोन में ओपन हुआ. शुरुआती कारोबार में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स के साथ ही महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस, बीईएल जैसे बड़े शेयर तेज रफ्तार के साथ भागते हुए नजर आए. जीएसटी कट के असर के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत को लेकर बदले रुख का प्रभाव भी बाजार पर साफ देखने को मिला है.  ग्रीन जोन में खुले दोनों इंडेक्स शेयर बाजार की तेज शुरुआत के बीच सेंसेक्स अपने पिछले बंद 80,710.76 के मुकाबले चढ़कर 80.904.40 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर मिनटों में ही ये 81,000 के लेवल के पार निकल गया. बीएसई इंडेक्स की तरह ही निफ्टी की भी चाल नजर आई और ये एनएसई इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,741 की तुलना में चढ़कर 24,802.60 पर खुलने के बाद 24,831.35 तक उछला.  ये 10 शेयर ओपन होते ही भागे मार्केट में कारोबार शुरू होने के साथ ही जिन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, उनमें टॉप-10 स्टॉक्स की बात करें, तो लार्जकैप में टाटा स्टील शेयर (2.50%), टाटा मोटर्स शेयर (2.35%), महिंद्रा एंड महिंद्रा शेयर (1.95%) और अडानी पोर्ट्स शेयर (1.10%) की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में शामिल फर्स्टक्राई शेयर (3.90%), मान्यवर शेयर (3%), भारतफोर्ज शेयर (2.95%) और ओलेक्ट्रा शेयर (2.90%) की तेजी लेकर ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप कंपनियों में प्राइम फोकस शेयर (10%) और म्यूफिन शेयर (8.10%) चढ़कर कारोबार कर रहा था.  बीते सप्ताह ऐसी थी बाजार की चल  बीता सप्ताह शेयर बाजार के लिए शानदार रहा था. हालांकि दोनों इंडेक्स आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को मामूली घट-बढ़ के साथ बंद हुए थे. सेंसेक्स महज 7.25 अंक गिरकर लेकर 80,710.76 पर, जबकि निफ्टी सिर्फ 6.70 अंक की बढ़त लेकर 24,741 पर क्लोज हुआ था. लेकिन, पूरे सप्ताह की चाल देखें, तो बीएसई का सेंसेक्स 901.11 अंक या 1.12% की बढ़त में रहा, वहीं एनएसई का निफ्टी में 314.15 अंक या 1.28% का उछाल दर्ज किया गया था. बाजार में रौनक के चलते निवेशकों ने भी खूब कमाई की थी.  मिल रहे थे तेजी के संकेत  भारत के लिए सोमवार को पहले से ही विदेशों से पॉजिटव सिग्नल मिल रहे थे. जापान, हांगकांग-साउथ कोरिया समेत ज्यादातर एशियाई बाजार तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. जापान का निक्केई इंडेक्स 700 अंक से ज्यादा चढ़कर 43,700 के लेवल पर कारोबार कर रहा था, तो वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी 35 अंक की बढ़त लेते हुए 25,453.50 के लेवल पर, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी तेजी पकड़े हुए ग्रीन जोन में नजर आ रहा था और ये तेजी के साथ 3,206.34 पर ट्रेड कर रहा था. गिफ्ट निफ्टी भी 70 अंक चढ़कर कारोबार कर रहा था.  जीएसटी के साथ ट्रंप के बदले रुख का असर जीएसटी सुधार को लेकर किए गए मोदी सरकार के ऐलानों का असर पहले से ही शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा था, सरकार ने टैक्स स्लैब की संख्या घटाने के साथ ही कई सामानों पर जीएसटी से राहत दी है. जिसके बाद संबंधित कंपनियों के शेयर रॉकेट बने हुए हैं. वहीं अब भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की सॉफ्ट टोन का इम्पैक्ट भी देखने को मिला है. बता दें कि भारत-यूएस के बीच रूसी तेल खरीद को लेकर बीते कई महीनों से अनबन की खबरों के बाद पिछले शनिवार को अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना भड़काऊ रुख छोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति दोस्ती का कार्ड चला है. वहीं पीएम मोदी ने भी तुरंत पॉजिटिव रिस्पांस देते हुए और भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर विश्वास जताया.

दिवाली पर किसानों की झोली होगी भारी! GST कटौती और PM KISAN 21वीं किस्त की तैयारी

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार ने GST Rate Cut करके किसानों को ही नहीं पूरे देशवासियों को दिवाली का गिफ्ट नवरात्रि में ही दे दिया। 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू होंगी। रोजमर्रा की जरूरतों का लगभग हर सामान सस्ता हो गया। कुछ वस्तुओं पर तो 0 जीएसटी लगेगा। ये गिफ्ट देश के हर वर्ग के लोग किसानों से लेकर मिडिल क्लास तक सभी के लिए हैं। लेकिन किसानों को दिवाली पर मोदी सरकार एक और तोहफा दे सकती है। ये तोहफा PM KISAN YOJANA की 21वीं किस्त का हो सकता है। पीएम किसान योजना केंद्र सरकार की एक योजना है जिसे किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे पहले 2 अगस्त को PM Modi ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 20वीं किस्त जारी की थी। अब किसानों को अगली किस्त का इंतजार है। GST Rate Cut के बाद अब दिवाली पर PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त? कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि किसानों को दिवाली या दिवाली से पहले 21वीं किस्त का तोहफा मिल सकता है। पिछले साल की बात करें तो अक्टूबर 2024 में मोदी सरकार ने 18वीं किस्त जारी की थी। इस बार दिवाली 20 और 21 अक्टूबर को पड़ रही है।  ऐसे में संभावना यही है कि इस बार भी अक्टूबर में मोदी सरकार PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त जारी कर सकती है। हालांकि, अभी सरकार द्वारा आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बैंक खाते में आएंगे 2-2 हजार? अगर दिवाली से पहले किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये आते हैं तो यह डबल धमाके जैसे होगा। क्योंकि सरकार ने पहले ही जीएसटी की दरों में कटौती कर दी है। 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से New GST Rates लागू हो रहे हैं। सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त (21st installment of the PM Kisan Samman Nidhi Yojana) जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। इस योजना के तहत, पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2,000 रुपये की तीन किस्तों में विभाजित होते हैं, सीधे उनके बैंक खातों में।  

कार्लोस अल्कारेज का धमाका, सिनर को हराकर बने यूएस ओपन चैंपियन और दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी

न्यूयॉर्क कार्लोस अल्कारेज ने रविवार को यूएस ओपन फाइनल में जैनिक सिनर को 6-2, 3-6, 6-1, 6-4 से हराकर खिताब अपने नाम किया. यह लगातार तीसरा ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट रहा जिसमें दोनों खिलाड़ी खिताबी मुकाबले में आमने-सामने आए. इस जीत के साथ अल्कारेज ने फ्लशिंग मीडोज पर अपना दूसरा और कुल मिलाकर छठा ग्रैंड स्लैम खिताब जीता. फाइनल मुकाबले में मौजूद रहे ट्रंप फाइनल के दौरान आर्थर ऐश स्टेडियम में स्पॉन्सर के सुइट में मौजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली. कुछ ने उनके लिए तालियां बजाईं तो कुछ ने हूटिंग की. मैच शुरू होने में लगभग आधा घंटा इसलिए भी देरी हुई क्योंकि हजारों दर्शक सुरक्षा जांच की लंबी कतार में फंसे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी के चलते सुरक्षा बेहद कड़ी थी.  बेहद रोमांचक मुकाबला आखिरी बार साल 2000 में बिल क्लिंटन यूएस ओपन में मौजूद रहे थे. बारिश की वजह से बंद छत के नीचे खेला गया फाइनल शुरुआत से ही रोमांचक रहा. कार्लोस अल्कारेज ने मौजूदा चैंपियन सिनर पर शुरुआत से दबाव बनाए रखा. करीब दो महीने पहले विम्बलडन में सिनर से मिली हार का बदला अल्कारेज ने इस बार जीत दर्ज करके चुका लिया. अल्कारेज ने छीनी नंबर-1 की रैंकिंग इस जीत के साथ अल्कारेज और सिनर के बीच आमने-सामने का रिकॉर्ड अब 10-5 हो गया है. ग्रैंड स्लैम खिताबों की गिनती में भी अल्कारेज 6-4 से आगे निकल गए हैं, जबकि यूएस ओपन फाइनल्स में उनका पलड़ा 2-1 हो गया है. इस खिताबी जीत के साथ 22 वर्षीय अल्कारेज ने 24 वर्षीय सिनर से विश्व नंबर-1 की रैंकिंग भी छीन ली. पुरुष टेनिस में कायम दोनों का जलवा फिलहाल पुरुष टेनिस में अल्कारेज और सिनर का दबदबा कायम है. पिछले आठ ग्रैंड स्लैम खिताबों में से सभी इन्हीं दोनों ने जीते हैं. पिछले 13 ग्रैंड स्लैम में से 10 खिताब इनके नाम रहे, जबकि बाकी तीन नोवाक जोकोविच ने जीते. रविवार का फाइनल टेनिस इतिहास में पहला मौका बना, जब एक ही सीजन में लगातार तीन ग्रैंड स्लैम फाइनल्स में वही दो खिलाड़ी आमने-सामने उतरे.

नीतीश राज में उठी नई चुनौती: निर्दलीय उम्मीदवारों की बढ़ती लोकप्रियता

पटना इसे राजनीतिक दलों का बढ़ता प्रभुत्व कहें या लोकतंत्र का बदला चेहरा, बिहार विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की पूछ लगातार घट रही है। वर्ष 2000 में झारखंड बंटवारे के बाद हुए पिछले पांच विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो निर्दलीय उम्मीवारों के सीट जीतने की क्षमता में तेजी से गिरावट हुई है। वोट शेयर भी लगभग आधा हो गया है। फरवरी, 2005 के विधानसभा चुनाव में 17 निर्दलीय विधायक जीते थे, जिसमें चुनाव दर चुनाव कमी आती गई। वर्ष 2020 के पिछले चुनाव में महज एक निर्दलीय प्रत्याशी सुमित कुमार सिंह ही जीत दर्ज कर सके। उन्होंने भी महज 551 मतों से चकाई से निर्दलीय जीत दर्ज की थी। बाद में वह जदयू के पाले में चले गए और वर्तमान में मंत्री भी हैं। इसके पहले वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में चार निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इनमें बोचहां से बेबी कुमारी, कांटी से अशोक कुमार चौधरी, मोकामा से अनंत सिंह और वाल्मीकिनगर से धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह शामिल थे।  वर्ष 2010 में छह विधायक निर्दलीय जीते। इनमें बलरामपुर से दुलाल चंद्र गोस्वामी, डेहरी से ज्योति रश्मि, ढाका से पवन कुमार जायसवाल, लौरिया से विनय बिहारी, ओबरा से सोमप्रकाश सिंह और सिकटा से दिलीप वर्मा शामिल रहे। 2005 में दो विधानसभा चुनाव, जीते 27 निर्दलीय विधायक वर्ष 2005 में छह माह के अंतराल पर दो विधानसभा चुनाव हुए जिनमें कुल 27 निर्दलीय विधायकों ने जीत दर्ज की थी। फरवरी, 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में 17 विधायकों ने निर्दलीय जीत दर्ज की थी। इनमें बछवाड़ा से रामदेव राय, बहादुरगंज से मो तौसिफ आलम, बिस्फी से हरिभूषण ठाकुर, गरखा से रघुनंदन मांझी, गया मुफिस्सल से अवधेश कुमार सिंह, घोसी से जगदीश शर्मा, गोबिंदपुर से कौशल यादव, मधेपुरा से रूप नारायण झा, महिषी से सुरेन्द्र यादव, मढ़ौरा से लालबाबू राय, मशरख से तारकेश्वर सिंह, मटिहानी से नरेन्द्र कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर से विजेन्द्र चौधरी, नवादा से पूर्णिमा यादव, रघुनाथपुर से जगमातो देवी, सिकटी से मुरलीधर मंडल और सोनबरसा से किशोर कुमार निर्दलीय जीते। राष्ट्रपति शासन लगने के कारण जब अक्टूबर, 2005 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए तो दस निर्दलीय विधायक जीतकर सदन पहुंचे। इनमें बाइसी से सैयर रुकनुदीन, बिस्फी से हरिभूषण ठाकुर, डेहरी से प्रदीप कुमार जोशी, गोबिंदपुर से कौशल यादव, मढ़ौरा से लालबाबू राय, मटिहानी से नरेन्द्र कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर से विजेन्द्र चौधरी, नवादा से पूर्णिमा यादव, सोनबरसा से किशोर कुमार और वारसलिगंज से प्रदीप कुमार ने निर्दलीय जीत दर्ज की। जीत के बाद दलों के हो जाते हैं निर्दलीय बिहार के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की अपनी पहचान रही है। उनका अपना गढ़ रहा है। जिसे भेदने में बड़े-बड़े दिग्गज हार गए। डुमरांव से ददन पहलवान, मोकामा से अनंत सिंह, मुजफ्फरपुर से विजेन्द्र चौधरी, बिस्फी से हरिभूषण ठाकुर, सोनबरसा से किशोर कुमार, रूपौली से बीमा भारती समेत ऐसे कई नाम रहे। बाद में इनमें से कई निर्दलीय राजनीतिक दलों में शामिल हो गए और फिर पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने लगे। दरअसल, राजनीतिक दलों को भी ऐसे उम्मीदवारों की तलाश होती है, जिनका अपना वोट बैंक हो। ऐसे में निर्दलीय जीतकर आए उम्मीदवार, उनकी पहली पसंद होते हैं। अमूमन देखा जाता है कि बड़े राजनीतिक दल ऐसे निर्दलीय उम्मीवारों को अगली बार उसी सीट से अपना उम्मीदवार बना लेते हैं। चुनाव दर चुनाव निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या घटने का यह भी एक बड़ा कारण है। कभी मुख्यमंत्री को हराकर निर्दलीय बने थे सीएम बात 1967 के विधानसभा चुनाव की है। तब पटना पश्चिम (वर्तमान बांकीपुर सीट) से चुनाव लड़ रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री केबी सहाय चुनाव को निर्दलीय प्रत्याशी महामाया प्रसाद सिन्हा ने हरा दिया था। इस चुनाव में किसी गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। इसके बाद संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनसंघ, सीपीआइ, जन क्रांति दल और प्रजा सोशलिस्ट जैसी पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई। महामाया प्रसाद जनक्रांति दल में शामिल हो गए और खुद मुख्यमंत्री बने।  

रायपुर : गौ-सेवा से ही मिलती है सच्ची शांति और ऊर्जा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : गौ-सेवा से ही मिलती है सच्ची शांति और ऊर्जा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय ने सीएम हाउस में गौमाता को रोटी और गुड़ खिलाकर प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की रायपुर मुख्यमंत्री साय ने आज चन्द्रग्रहण से पूर्व मुख्यमंत्री निवास में गौमाता को रोटी और गुड़ खिलाया। इस अवसर पर उन्होंने पूरे प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गौ-सेवा करने से उन्हें आत्मिक संतोष और नई ऊर्जा का अनुभव मिलता है।

बच्चों से जवान तक: भारत में ये बीमारियां बना रही 56% मौतों का मुख्य कारण

नई दिल्ली  भारत में दिल की बीमारियां अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। बीते कुछ सालों में 10 साल के बच्चों से लेकर जिम में वर्कआउट करते नौजवानों तक को हार्ट अटैक पड़ते देखा गया है। सोशल मीडिया पर लगभग हर हफ्ते ऐसे दिल दहला देने वाले वीडियो सामने आते हैं, जो इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक 10 साल के बच्चे की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, जिससे पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ गई है। अब एक सरकारी रिपोर्ट ने इस डर को और गहरा कर दिया है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) के अनुसार, देश में होने वाली कुल मौतों में से करीब एक-तिहाई मौतें सिर्फ हार्ट अटैक के कारण हो रही हैं। यानी भारत में हर तीसरी मौत दिल से जुड़ी बीमारी की वजह से हो रही है। कौन सी बीमारियां ले रही हैं सबसे ज्यादा जान? इस रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि भारत में अब संक्रामक रोगों से ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं गैर-संक्रामक रोग (Non-communicable diseases – NCDs)। आंकड़ों के मुताबिक:- दिल की बीमारियां (Heart Attack/Cardiovascular issues): 31% मौतें सांस के संक्रमण (Respiratory Infections): 9.3% कैंसर व ट्यूमर (Tumors): 6.4% पुरानी सांस की बीमारियां (Chronic Respiratory Diseases): 5.7% पाचन संबंधी समस्याएं: 5.3% बुखार और वायरल इंफेक्शन: 4.9% डायबिटीज (Diabetes Mellitus): 3.5% मूत्र और जननांग तंत्र की बीमारियां: 3% कुल मिलाकर, 56.7% मौतें अब नॉन-कम्युनिकेबल डिजीजेज यानी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की वजह से हो रही हैं।   हार्ट अटैक क्यों बन रहा है बड़ा खतरा? एक वक्त था जब हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब यह तेजी से युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है – बदलती जीवनशैली। देर तक बैठकर काम करना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, अनियमित खानपान, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और नींद की अनदेखी जैसी आदतें दिल पर बुरा असर डाल रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कोरोना वैक्सीन को भी हार्ट अटैक से जोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियों ने इसे खारिज किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ा हाथ लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का है, न कि वैक्सीन का। कैंसर भी कम घातक नहीं दिल की बीमारियों के अलावा कैंसर भी भारत में एक प्रमुख जानलेवा बीमारी बनकर उभरा है। National Cancer Registry Programme की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2019 के बीच भारत में कैंसर के 7.08 लाख मामले दर्ज हुए, जिनमें से 2.06 लाख लोगों की जान चली गई। खासकर पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। अब क्या किया जा सकता है? इस alarming स्थिति से निपटने के लिए सिर्फ सरकारी योजनाएं काफी नहीं हैं। हर व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत है: नियमित व्यायाम करें संतुलित और पौष्टिक आहार लें समय पर सोएं और तनाव को कम करें रेगुलर हेल्थ चेकअप कराएं स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी बनाए रखें दिल की सेहत को लेकर जागरूकता और सतर्कता अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुकी है।  

हॉकी एशिया कप 2025: भारत ने जीता खिताब, PM मोदी बोले- गर्व का पल, खिलाड़ियों को मिली लाखों की इनामी राशि

नईदिल्ली  हॉकी एशिया कप 2025 के फाइनल मुकाबलें में भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को करारी शिकस्त दी. बिहार के राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय हॉकी टीम ने साउथ कोरिया को 4-1 के अंतर से पटखनी दी. इस जीत के साथ ही टीम ने अगले साल यानी 2026 में बेल्जियम और नीदरलैंड द्वारा संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाले विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर लिया है. भारत ने चौथी बार हॉकी एशिया कप के खिताब पर अपना कब्जा जमाया है. ये जीत इसलिए भी खास है क्योंकि भारत ने 5 बार की चैम्पियन साउथ कोरिया को शिकस्त दी है. इससे पहले 2017 में मलेशिया को हराकर भारत ने एशिया कप जीता था.  ऐसे रहा दोनों टीमों के बीच मुकाबला इस फाइनल मुकाबले के पहले क्वार्टर के पहले ही मिनट में भारत के सुखजीत सिंह ने गोल दागा. पहला क्वार्टर खत्म होने के बाद भारत 1-0 से आगे रहा. भारत ने दोनों क्वार्टर में 1-1 गोल दागा और 2-0 की बढ़त बना ली. हाफ टाइम तक भारत का स्कोर 2-0 रहा. साउथ कोरिया ने अटैकिंग खेल दिखाया लेकिन वो गोल नहीं कर सके.  तीसरे क्वार्टर के आखिरी मिनट में भारत ने फिर गोल दागा और बढ़त 3-0 की कर ली. चौथे क्वार्टर के 50वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला. रोहिदास ने मौके को भुनाया और गोल दाग दिया. लेकिन इसी क्वार्टर में साउथ कोरिया ने भी एक गोल दागा. लेकिन भारत की बढ़त 4-1 की हो चुकी थी. इसके बाद भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को गोल नहीं दागने दिया और डिफेंसिव अप्रोच अपनाया. आखिरकार भारत ने जीत हासिल कर ली. दोनों टीमों ने ऐसे हासिल किया था फाइनल का टिकट भारतीय हॉकी टीम ने अपने आखिरी सुपर-4 मैच में चीन को 7-0 से हराया और फाइनल में जगह बनाई. लीग में भारत का सफर अजेय रहा था. वहीं दूसरी तरफ कोरिया ने आखिरी सुपर-4 मैच में मलेशिया को 4-3 से हराकर दूसरे स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई थी. ऐसा रहा है एशिया कप में भारत का इतिहास भारत ने अब तक 2003, 2007, 2017 के बाद अब 2025 में चौथी बार एशिया कप का टाइटल अपने नाम किया है. टीम 1982, 1985, 1989, 1994 और 2013 में 5 बार उपविजेता भी रही है.