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मौसम का कहर: यूपी में तीन दिन तक बरसेंगे बादल, पड़ोसी राज्यों का हाल भी जानें

नई दिल्ली  देशभर में मॉनसून का दूसरा फेज चल रहा है। आने वाले दिनों में मॉनसून की वापसी होने लगेगी, इससे पहले जमकर बारिश हो रही है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम भारत तक भारी बरसात हो रही है। उत्तर प्रदेश में 11-13 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा, उत्तरी गुजरात और उससे सटे दक्षिण पश्चिम राजस्थान पर दबाव की वजह से आठ सितंबर तक राजस्थान और गुजरात में भारी से बहुत भारी बारिश होगी। सात सितंबर को उत्तरी गुजरात और सौराष्ट्र व कच्छ में असाधारण रूप से भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तर पश्चिम भारत के मौसम की बात करें तो सात सितंबर को जम्मू संभाग, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मध्य महाराष्ट्र में हल्की से मध्यम बारिश के साथ, सात, 8 और 13 सितंबर को उत्तराखंड, 12 और 13 सितंबर को उत्तर प्रदेश, 11-13 तारीख के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने वाली है। पूर्वी और मध्य भारत की बात करें तो 7, 8, 10 और 13 सितंबर को ओडिशा में कुछ जगहों पर भारी बारिश, 11-12 सितंबर के दौरान भारी से बहुत भारी बरसात की संभावना है। सात तारीख को पश्चिमी मध्य प्रदेश, 7, 8, 13 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश, 11 और 12 सितंबर को विदर्भ, सात और 10-13 सितंबर के दौरान छत्तीसगढ़, 7-13 सितंबर के दौरान उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, 9-11 सितंबर के दौरान बिहार में अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने वाली है। इसके अलावा, पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो 7, 10, 11 सितंबर को नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, सात और 10 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय में भारी बारिश की संभावना है। 11-13 सितंबर के दौरान असम, मेघालय, अरुााचल प्रदेश, 12, 13 सितंबर को नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।  

अलमारी में जमा पुराने कपड़े ला सकते हैं नकारात्मकता, जानें तुरंत समाधान

आपकी अलमारी में ऐसे कई कपड़े रखें होंगे, जिन्हें आपने महीनों या सालों से नहीं पहना होगा। वहीं, कुछ ऐसे भी कपड़े घर में आपने जमा कर रखें होंगे, जो फटे पुराने होंगे। अगर, ऐसा है तो अनजाने में आप अपने घर में निगेटिविटी को न्योता दे रहे हैं, जो आगे चलकर आपके दुर्भाग्य का कारण बन सकता है। दरअसल, ज्योतिष शास्त्र में पुराने कपड़ों का संबंध शनि और राहु से माना जाता है। जिन घरों में पुराने कपड़े होते हैं, वहां पर शनि और राहु का अशुभ प्रभाव रहता है। पुराने, बिना इस्तेमाल में आने वाले सामान और कबाड़ को भरकर रखने से निगेटिव एनर्जी बनने लगते हैं। ऐसा होने पर आपकी तरक्की और सुख-समृद्धि में बाधा आ सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर पर शुभ और अच्छी चीजों को रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है। इसलिए घर में और अलमारी में उन्हीं कपड़ों को रखें जो पहनने लायक हों और फटे-पुराने नहीं हों। आइए जानते हैं पुराने कपड़ों का क्या करें… वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर पर फटे, पुराने और बेकार कपड़ों को तुरंत ही अलमारी से बाहर निकाल दें। इन कपड़ों की वजह से आपको आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार कभी भी पुराने, बेकार और फटे हुए कपड़ों दान नहीं करने चाहिए। यदि आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति को कुछ दान करना चाहते हैं, तो ऐसे कपड़े दें, जो पहनने लायक हों। यदि आपके पास काले कपड़े हों, तो उन्हें शनिवार के दिन दान करने से शनि दोष कम होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेरंग हो चुके कपड़े पहनने या उन्हें घर में रखे रहने से आपकी जिंदगी भी बेरंगी होने लगती है। इसी तरह दाग-धब्बे लगे कपड़े भी घर में नहीं रखने चाहिए। इसलिए इन कपड़ों को भी फेंक दें।  

1951 मॉडल रोल्स रॉयस कार के विवाद में तलाक, पूर्व प्रधानमंत्री की कार बनी विवाद का कारण

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अलग रह रहे एक दंपती की शादी को खत्म कर दिया है. दंपती के रिश्ते में 1951 मॉडल की रोल्स रॉयस कार को लेकर खटास आ गई थी, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन "महारानी" के लिए मंगवाया था. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को दर्ज किया, जिसके अनुसार पुरुष अपनी पूर्व पत्नी को 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा, जिसके बाद उनके बीच सभी दावों का निपटारा हो जाएगा. पीठ ने 29 अगस्त को कहा, "हम याचिकाकर्ता और प्रतिवादी 1 (पति) के बीच विवाह को भंग करते हैं. अब उनके बीच कोई भी वैवाहिक या अन्य संबंध नहीं रहेगा." समझौते के अनुसार, पति 31 अगस्त तक 1 करोड़ रुपये और शेष 1.25 करोड़ रुपये 30 नवंबर तक चुकाएगा. इस व्यवस्था के तहत, महिला अपने पति द्वारा दिए गए उपहार अपने पास रखेगी और पति उसे और उसके परिवार को मिले सभी उपहार, जैसे सगाई की अंगूठी और अन्य कीमती सामान, एक करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के साथ लौटा देगा. कोर्ट ने दोनों पक्षों को दी चेतावनी दंपती के बीच सभी मामलों को रद्द करते हुए पीठ ने इसे पूर्ण और अंतिम समझौता माना. विवाह खत्म होने के बाद, शीर्ष अदालत ने पक्षों को सोशल मीडिया सहित किसी भी रूप में एक-दूसरे को बदनाम न करने की चेतावनी दी. ग्वालियर में रहने वाली महिला ने दावा किया कि वह बहुत प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है, जिसके पूर्वज छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना में एडमिरल थे और उन्हें कोंकण क्षेत्र का शासक घोषित किया गया था. दूसरी ओर, महिला का पति सैन्य अधिकारियों के परिवार से ताल्लुक रखता है और मध्य प्रदेश में एक शैक्षणिक संस्थान चलाता है. रोल्स रॉयस कार के कारण विवाद इस विवाद का मुख्य कारण 1951 मॉडल की प्राचीन हस्तनिर्मित क्लासिक रोल्स रॉयस कार थी, जो आज तक एक ही मॉडल है और जिसकी वर्तमान कीमत 2.5 करोड़ रुपये से अधिक है. यह कार पंडित नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन महारानी के लिए मंगवाई थी. महिला ने दावा किया कि उसके अलग हुए पति और उसके परिवार ने दहेज के तौर पर रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट की मांग करके उसे लगातार परेशान किया था. हालांकि पति ने इस आरोप से इनकार किया है. महिला ने अपनी याचिका में कहा, "उच्च न्यायालय ने इस बात पर विचार नहीं किया कि प्रतिवादी 1 और 2 (पति और उसके पिता) का शुरू से ही दुर्भावनापूर्ण इरादा था कि वे रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट मांगें. जब प्रतिवादियों की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उन्होंने शादी से इनकार करना शुरू कर दिया और याचिकाकर्ता पर झूठे और तुच्छ आरोप लगाने लगे और उसके चरित्र पर कीचड़ उछालने लगे." उच्च न्यायालय के 5 दिसंबर, 2023 के आदेश की आलोचना करते हुए याचिका में कहा गया, "…यह स्पष्ट है कि प्रतिवादी 1 (पति) और 2 (पति के पिता) ने याचिकाकर्ता (महिला) के पिता की रोल्स रॉयस कार के प्रति अपना आकर्षण दिखाया है और उन्हें उक्त कार उपहार में मिलने की उम्मीद थी और मुंबई में फ्लैट के संबंध में, दहेज की इस मांग को पूरा न करना ही इसका मुख्य कारण था. याचिकाकर्ता को उसके ससुराल नहीं ले जा रहे हैं." मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने महिला द्वारा अपने पति के खिलाफ दहेज और क्रूरता के मामले को खारिज कर दिया था. इसके बाद अलग हुए दंपती का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. दूसरी ओर, पति ने अलग हुई पत्नी, उसके माता-पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ विवाह प्रमाणपत्र तैयार करने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया था. सुप्रीम कोर्ट ने पहले वरिष्ठ अधिवक्ता और केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आर बसंत को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया था.

प्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर पर चोरी का प्रयास, चोरों ने जाली पर किया हाथ साफ

जबलपुर  प्रदेश के सबसे लंबे वीरागंना रानी दुर्गावती फ्लाईओवर को चोर-नशेड़ियों की भी नजर लग गई हैं। नशे के लिए नशेड़ी फ्लाईओवर की सामग्री भी चुराने लगे है। दरअसल फ्लाईओवर पर बरसाती पानी की निकासी के लिए जगह-जगह नालीनुमा चेंबर बनाएं जिसे लोहे की रॉड व जालियां से ढंका गया था। लोक निर्माण विभाग द्वारा इसे मजबूती से नटबोल्ट से टाइट भी किया गया था बावजूद इसके नशेड़ियों ने औजारों का उपयोग कर नट-बोल्ट काट दिया और लोहे की जालियां चुरा ले गए। जिससे फ्लाईओवर पर अब वाहनों के साथ दुर्घटना का अंदेशा बढ़ गया है। क्योंकि रात के अंधेरे में तेज रफ्तार वाहनों का टायर खुले चेंबर में घुस सकता है जिससे किसी बड़े हादसे की संभावना है। ये चेंबर इतने बड़े है कि वाहन का अगला टायर घुसने से वाहन अनियंत्रित होकर पलट भी सकता है। छोड़े सबूत, नशे के इंजेक्शन मिले ये करतूत नशेड़ियों द्वारा की गई है इसके सबूत भी यहां मिले है। चेंबर में नशे के इंजेक्शन इस बात की गवाही दे रहे है कि नशे के लिए नशेड़ियों ने चेंबर की जाली चुराई और बेच दी। ऐसे करीब चार से पांच चेंबर में लोहे की जाली व रॉड काटी गई है। कुछ जगह तो सड़क को भी नुकसान पहुंचाया गया हैं। सीसीटीवी लगाएं जाने चाहिए प्रदेश के सबसे बड़े करीब सात किमी लंबे फ्लाईओवर पर जिस तरह से अनैतिक गतिविधियां बढ़ रही है उससे फ्लाईओवर पर सीसीटीवी लगाने की मांग भी उठने लगी है। ताकि फ्लाईओवर से छेड़छाड़ करने वालों की पहचान हो सके और उन्हें दंडित किया जा सके। वहीं फ्लाईओवर से गुजरने वालों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। मोटरसाइकिल दो युवक कर थे स्टंट, FIR दर्ज दशमेश द्वार-दमोहनाका वीरांगना रानी दुर्गावती फ्लाइओवर पर दो युवक झंडा लेकर स्टंट कर रहे थे। दोनों युवक मोटरसाइकिल पर सवार थे। रील के लिए स्टंट करते हुए वीडियो बना रहे थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जिसमें मोटरसाइकिल पर सवार दोनों युवक हाथ में बड़ा झंडा लेकर लापरवाही पूर्वक वाहन चला रहे है। सफेद रंग के झंडे में उर्दू में कुछ लिखा हुआ है। मदन महल पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को संज्ञान में लिया है। दोनों युवकों पर एफआईआर पंजीबद्ध की है। आरोपितों की तलाश की जा रही है। यह फ्लाइओवर जब से लोकार्पित हुआ है, उस पर स्टंड करने वाले और रील बनाने के लिए लोग लगातार पहुंच रहे है। उनके कृत्य से यातायात बाधित होने के साथ ही राहगीरों के घायल होने की आशंका बन रही है। एक मोटरसाइकिल चला रहा था, दूसरा वीडियो बना रहा था सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक युवक फ्लाइओवर पर तेज गति से मोटरसाइकिल चला रहा है। वाहन चलाते हुए उसने एक बड़ा झंडा थाम रखा है। जिसे वह वाहन चलाने के साथ ही लहरा रहा है। जिसका वीडियो उसका साथी एक दूसरा युवक बना रहा है। उसके इस कृत्य से सड़क पर दुर्घटना और अन्य वाहन सवार के दुर्घटना के शिकार होने का खतरा बना हुआ है। वाहन नंबर के आधार पर तलाश जारी वायरल वीडियो में मोटरसाइकिल का नंबर एमपी 20 एमटी 8574 दिख रहा है। झंडा फहराते हुए वीडियो बनाने वाले दोनों युवक का चेहरा भी नजर आ रहा है। इस वीडियो की जानकारी पुलिस को गुरुवार की रात को लगी। उसके बाद अज्ञात आरोपितों पर मामला दर्ज किया है। मोटरसाइकिल के नंबर के आधार पर आरोपितों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है।

39 दिनों की आस्था: महाकाल के दरबार में सवा करोड़ भक्तों ने नवाया शीश, चढ़े 30 करोड़

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण-भाद्रपद मास में भगवान महाकाल के दर्शन करने आए भक्तों की भेंट से राजाधिराज महाकाल का खजाना एक बार फिर भर गया है। मंदिर समिति को 29 करोड़ 61 लाख रुपये की आय हुई है, जो बीते तीन सालों में (श्रावण-भाद्रपद मास में) सर्वाधिक है। इस साल 39 दिनों चले महापर्व के दौरान भक्तों की संख्या ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है। देश-विदेश से आए सवा करोड़ भक्त मंदिर प्रशासन के अनुसार इस दौरान देश विदेश से आए सवा करोड़ भक्तों ने अवंतिकानाथ को शीश नवाया। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया महाकालेश्वर मंदिर में 11 जुलाई से 18 अगस्त तक श्रावण-भाद्रपद मास का उल्लास छाया रहा। हर दिन आए तीन लाख से ज्यादा भक्त 39 दिनों तक चले इस महा महोत्सव में प्रतिदिन औसतन सवा तीन लाख भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालुओं की यह संख्या वर्ष 2023-24 के मुकाबले 38.9 प्रतिशत अधिक रही। वर्ष 2023 में प्रतिदिन औसतन ढाई लाख दर्शनार्थियों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए थे।   इस बार देखी गई आय में बढ़ोतरी वर्ष 2024 में भक्तों की संख्या कम रही। प्रतिदिन औसतन सवा दो लाख भक्तों ने ही भगवान महाकाल के दर्शन किए थे। दर्शनार्थियों की संख्या के अलावा इस बार शीघ्र दर्शन टिकट, लड्डू प्रसाद की बिक्री, भेंट पेटी में आई दान राशि तथा अन्य स्रोत से हुई आय में भी बीते सालों के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। मंदिर को शीघ्र दर्शन टिकट मद में 10.79 करोड़ रुपये, लड्डू प्रसाद विक्रय से 10.13 करोड़ रुपये की आय हुई। जबकि भेंट पेटियों से 5.23 करोड़ रुपये व दान से 3.26 करोड़ रुपये की आय हुई है।

रूस-फ्रांस में खलबली! तेजस Mark-1A के सामने फीके राफेल और सुखोई

नई दिल्ली तेजस Mark-1A फाइटर जेट की डिलीवरी डेट लगातार टल रही है. एचएएल यानी हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड ने पहले इसे सितंबर में एयरफोर्स को देने की बात कही थी. अब तेजस Mark-1A की दो यूनिट अक्‍टूबर में उपलब्‍ध होगी. इंजन मिलने में देरी की वजह से डिलीवर डेट की डेडलाइन लगातार आगे खिसकती रही है. अब तो डिटेल सामने आया है, उसके अनुसार तेजस Mark-1A फाइटर जेट में ऐसे वेपन इंटीग्रेट किए जा रहे हैं, जिससे दुश्‍मनों का दम फूलना तय है. साथ ही फ्रांस और रूस जैसे फाइटर जेट सप्‍लायर देश भी भौंचक्‍का हो जाएंगे, क्‍योंकि भारत फाइटर जेट बनाने में आत्‍मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. लंबे इंतजार के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की ओर से अगले महीने भारतीय वायुसेना (IAF) को पहले दो इंप्रूव्ड और अपग्रेड तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान सौंपने की उम्मीद है. हालांकि, यह डिलीवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वदेशी सिंगल-इंजन जेट अपने तयशुदा हथियार फायरिंग ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पूरा कर पाता है या नहीं. मॉडर्न वेपन के साथ सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन सूत्रों के मुताबिक, इस महीने के अंत तक तेजस Mark-1A पर अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल, एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल और लेजर-गाइडेड बम की फायरिंग ट्रायल्स निर्धारित हैं. इन ट्रायल्स के जरिए यह भी परखा जाएगा कि इजरायली मूल के एल्टा ELM-2052 रडार और फायर कंट्रोल सिस्टम के साथ हथियारों का इंटीग्रेशन सही ढंग से हुआ है या नहीं. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले ट्रायल में असफलता के बाद तेजस Mark-1A में सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन किए गए हैं. इंजन सप्‍लाई में देरी बनी बड़ी बाधा तेजस Mark-1A परियोजना की धीमी प्रगति की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) की ओर से इंजन की सप्लाई में हुई लगभग दो साल की देरी रही. HAL ने अगस्त 2021 में 99 GE-404 इंजनों की खरीद 5,375 करोड़ रुपये में की थी, लेकिन अब तक सिर्फ दो इंजन ही मिले हैं. कंपनी ने वादा किया है कि अगले साल मार्च तक 10 और इंजन, और उसके बाद हर साल 20 इंजन सप्लाई करेगी. हथियार और रडार इंटीग्रेशन में आई तकनीकी दिक्कतें भी उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं. एयरफोर्स का इंतजार लंबा IAF को अब तक तेजस के शुरुआती वर्जन मार्क-1 के 40 में से 38 विमान ही मिल पाए हैं, जिनका सौदा 2006 और 2010 में कुल 8,802 करोड़ रुपये में हुआ था. वहीं, फरवरी 2021 में किए गए 46,898 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के तहत 83 तेजस मार्क-1ए में से अभी तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं मिला है. इनकी आपूर्ति फरवरी 2024 से फरवरी 2028 के बीच पूरी होनी थी. पिछले महीने प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने तेजस के और 97 विमानों की खरीद 66,500 करोड़ रुपये में मंजूर की, जिससे कुल संख्या और बढ़ जाएगी. एयरफोर्स की चिंता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सार्वजनिक रूप से HAL की देरी पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा था कि IAF की संख्या पहले से ही बेहद कम है और लड़ाकू क्षमता बनाए रखने के लिए हर साल कम से कम 40 नए विमान शामिल करने की जरूरत है. फिलहाल IAF के पास 31 स्क्वॉड्रन हैं, लेकिन 26 सितंबर को सेवा में मौजूद 36 पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों के रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर 29 स्क्वॉड्रन रह जाएगी, जो अब तक का सबसे कम स्तर होगा.

बदल सकता है खेल… इस टीम की कमान संभाल सकते हैं श्रेयस अय्यर

नई दिल्ली श्रेयस अय्यर को इंडिया ए टीम का कप्तान बनाया जा सकता है. दाएं हाथ के बल्लेबाज श्रेयस इस समय दलीप ट्रॉफी में खेल रहे हैं. हालांकि वह सेमीफाइनल मुकाबले की पहली पारी में सस्ते में आउट हो गए. ऑस्ट्रेलिया ए टीम भारत के दौरे पर इस महीने आएगी. भारतीय दौरे पर इंडिया ए और ऑस्ट्रेलिया ए के बीच 2 अनौपचारिक टेस्ट और 3 मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी. इंडिया ए टीम के चयन के लिए जब भारतीय चयनकर्ता बैठेंगे तो उनके सामने श्रेयस अय्यर का नाम सबसे पहले होगा. भारतीय सेलेक्टर्स के सामने सबसे बड़ा सवाल ये होगा कि वो उन्हें किस भूमिका में देखना चाहेंगे. वेबसाइट क्रिकबज के मुताबिक, श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) को ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ बड़ी भूमिका दी जा सकती है. इसमें कप्तानी भी हो सकती है. ऑस्ट्रेलियाई ए टीम अगले सप्ताह भारत के दौरे पर आएगी. दाएं हाथ के बल्लेबाज श्रेयस दलीप ट्रॉफी में वेस्ट जोन की ओर से खेल रहे हैं.सेंट्रल जोन के खिलाफ पहली पारी में वह 25 रन बनाकर आउट हो गए थे. श्रेयस अय्यर के अलावा मौजूदा दलीप ट्रॉफी में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले नितीश रेड्डी, ए ईश्वरन और साई सुदर्शन जैसे कुछ अन्य खिलाड़ियों पर भी चयन के लिए विचार किया जा सकता है. एन जगदीशन, रुतुराज गायकवाड़ और रजत पाटीदार जैसे खिलाड़ी भी चयनकर्ताओं के रडार में हो सकते हैं. इंडिया ए बनाम ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच सीरीज का पहला चार दिवसीय मैच 16 सितंबर से लखनऊ में होगा. दूसरा मैच 23 सितंबर को उसी मैदान पर शुरू होगा. उसके बाद 30 सितंबर से तीन वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी. वनडे के सभी मैच कानपुर में होंगे. पूरी संभावना है कि सेलेक्टर्स 7 सितंबर के बाद इंडिया ए टीम का चयन करेंगे. चयनकर्ता दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल खत्म होने के बाद और 11 सितंबर को होने वाले फाइनल से पहले टीम की घोषणा कर सकते हैं.  श्रेयस का इंडिया ए टीम में चुना जाना तय है.

जल जीवन मिशन: नल से पानी ने ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी आसान बनाई

राजगढ़ जिले के समलाबेह गांव के परिवारों तक पहुँचा शुद्ध पेयजल भोपाल मध्यप्रदेश के दूरस्थ गांवों में नल से जल पहुंचने से जीवन आसान हो गया है। राजगढ़ जिले की ग्राम पंचायत चाँदपुरा का छोटा-सा दूरस्थ गांव समलाबेह इसका आदर्श उदाहरण है। नल से जल की सुविधा मिलने से यह गांव नई पहचान बन गया है। मोहनपुरा ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत यहां की 130 की आबादी और 26 परिवारों तक घर-घर पाइपलाइन से स्वच्छ पेयजल पहुँच रहा है। पानी की कमी से जूझता यह गांव अब सुविधा, स्वास्थ्य और खुशहाली की ओर अग्रसर है। कुछ वर्ष पहले तक इस गांव का जीवन बेहद कठिन था। पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को रोज़ सुबह-शाम कई किलोमीटर दूर कुओं से पानी लाना पड़ता था। बरसात के मौसम में जब गंदा पानी इन स्रोतों में मिल जाता था तो ग्रामीणों को दूषित जल पीना पड़ता था। गर्मियों में गांव में पानी का संकट बढ़ जाता था। सीमित जलस्रोतों पर निर्भरता के कारण आए दिन झगड़े की स्थिति भी बनती थी। इन परिस्थितियों से बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हो रही थी। गांव की बदली तस्वीर समूह नलजल योजना ने इस गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। अब गांव के हर घर में पाइपलाइन से जलापूर्ति हो रही है। 26 घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। महिलाएँ बताती हैं कि पहले उनका आधा दिन पानी ढोने में ही निकल जाता था। अब यही समय परिवार और अन्य कार्यों को दे पा रही हैं। बच्चों को भी पानी लाने के काम से मुक्ति मिली है और उनकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी है। स्वास्थ्य के स्तर पर भी बड़ा बदलाव आया है। पहले बारिश के दिनों में डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियाँ आम थीं। अब ग्रामीण साफ पेयजल का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और इलाज पर होने वाला खर्च भी कम हो गया है। मोहनपुरा समूह जल योजना केवल समलाबेह तक सीमित नहीं है। यह योजना राजगढ़ जिले के कई गांवों को कवर कर रही है, जिनमें हजारों परिवारों तक नल के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुँचाया जा रहा है। योजना का उद्देश्य पूरे क्षेत्र को स्थायी जलस्रोत उपलब्ध कराना है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक जीवन की नींव है। अब पानी के लिए नहीं करना पड़ता है संघर्ष: नौरंग बाई वर्षों तक पानी ढोने को मजबूर रहीं, गांव की 70 वर्षीय नौरंग बाई बताती हैं कि जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष पानी ही रहा। रोज़ाना सिर पर घड़ा रखकर पानी ढोना उनकी दिनचर्या थी। बरसों तक पानी की एक-एक बाल्टी के लिए कतार में खड़े रहना पड़ा। अब घर में नल लगने से यह संघर्ष बीते जमाने की बात हो गयी है। वे कहती हैं कि अब नई पीढ़ी को पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण भी मानते हैं कि नल से जल की व्यवस्था ने उनके जीवन स्तर को ही नहीं, पूरे गांव की सोच और संस्कृति को भी बदल दिया है। अब पानी केवल आवश्यकता नहीं रहा, बल्कि सम्मान, स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक बन गया है। नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. क्रेमर ने भी की सराहना जल जीवन मिशन से ग्रामीण स्वास्थ्य संकेतकों में भी व्यापक सुधार परिलक्षित हो रहा है। स्वच्छ जल की आपूर्ति होने से विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हाल ही में नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी विकास अर्थशास्त्री डॉ. माइकल रॉबर्ट क्रेमर ने राज्य की विकास रणनीतियों पर चर्चा करते हुए मध्यप्रदेश की इस पहल पर प्रसन्नता जाहिर की कि जल जीवन मिशन द्वारा ग्रामीण घरों में जल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने अपने अध्ययन का हवाला देते हुए कहा यदि परिवारों को पीने के लिए सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जाए तो लगभग 20% शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। नवजात शिशु, जल जनित बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं। बच्चों से संबंधित हर चार में से एक मृत्यु सुरक्षित जल उपलब्ध कराकर रोकी जा सकती है। प्रो. क्रेमर ने गत शुक्रवार को भोपाल में मख्य सचिव श्री अनुराग जैन के साथ बैठक कर मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन की उपलब्धियों पर संतोष को सराहा।  

किसानों के लिए बंपर खबर: सितंबर में बोएं ये फसलें, जल्दी तैयार और मुनाफा गारंटीड!

भोपाल  अच्छी फसल के लिहाज से सितम्बर महीना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह महीना ना ही ज्यादा गर्म होता है और ना ही ज्यादा ठंडा। यह मौसम रबी की फसलों के साथ-साथ सब्जी की फसलों के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है और उनका तेजी से विकास होता है। इन सब्जियों में शलगम, बैंगन, गाजर, मूली, चुकंदर, मटर, गोभी, ब्रोकली, पत्ता गोभी, सेम की फली और टमाटर शामिल हैं। अगर आप भी खेती के जरिए अच्छी कमाई के बारे में सोच रहे हैं तो इनमें से किसी भी सब्जी का खेती करके अच्छे पैसे कमा सकते हैं। बड़ी बात यह है कि इनमें से कुछ सब्जियां तो ऐसी हैं, जो दो महीने से भी कम समय में तैयार हो जाती है, जिन्हें बेच कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। एक नजर डालते हैं इन सब्जियों पर।   टमाटर भारत ही नहीं पूरे बल्कि पूरी दुनिया में टमाटर की काफी डिमांड है। टमाटर की खेती के लिए सितंबर महीना उपयुक्त माना जाता है। टमाटर की खेती के लिए काली दोमट मिट्टी, रेतीली दोमट मिट्टी और लाल दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। अगर आप सितंबर में टमाटर की बुआई करते हैं तो इसकी फसल दिसंबर से जनवरी के बीच तैयार हो जाती है। गाजर सर्दी की शुरुआत होते-होते बाजार में गाजर की डिमांड बढ़ जाती है। गाजर की बुवाई अगस्त से लेकर नवंबर तक की जाती है। अच्छी बात यह है कि इसकी फसल दो महीने के अंदर ही तैयार हो जाती है, जिससे आप काफी मुनाफा कमा सकते हो। पूसा रुधिर, पूसा मेघाली और पूसा केसर गाजर की कुछ उन्नत किस्में हैं, जिन्हें आप इस समय बो सकते हैं। ब्रोकली सितंबर में ब्रोकली की खेती करने का सबसे अच्छा समय होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह ठंडे मौसम की फसल है। इस फसल की डिमांड शहरों में दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसकी कीमत 50 से 100 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है। ब्रोकली की फसल के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। बैंगन सितंबर माह की प्रमुख फसलों में एक नाम बैंगन का भी है, जो कम खर्च में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है। बैंगन के लिए अच्छी तरह जुताई की गई, भुरभुरी और जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। यह फसल लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है। 

एम्स भोपाल में नया हृदय सर्जरी केंद्र, मरीजों के लिए तेज और बेहतर इलाज संभव

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के हार्ट पेशेंट का इलाज पहले से आधुनिक और त्वरित होने वाला है। हृदय रोगियों, गर्भ में बच्चों का हृदय दोष और ऑपरेशन के लिए 6 एडवांस मशीनें आने वाली है। करीब 22 करोड़ रुपए की लागत से एम्स में एक नया कार्डियक सेटअप तैयार किया जाएगा। साथ ही हाई-टेक बाइप्लेन कार्डियक कैथलैब लगाई जाएगी। इस व्यवस्था से इलाज के लिए ज्यादा समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का तत्काल इलाज मिल पाएगा। एम्स के उपसंचालक संदेश जैन ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि यह सुविधा कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत प्रारंभ की जाएगी। नवंबर से रोगियों को इस सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है। एम्स में आएगी ये 6 अत्याधुनिक मशीनें बाई प्लेन कार्डियक कैथलैब यह एक नई लैब है जो एक साथ दो अलग-अलग एंगल से एक्सरे वाली इमेज देती है। इस रिपोर्ट को देखकर डॉक्टर हार्ट और धमनियों का दो तरह का दृश्य देख सकता है। बच्चों में जन्मजात हृदय रोग जटिल ब्लॉकेज, वाल्व रिपेयर, ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों के बारे में आसानी से जानकारी लग पाती है। होल्टर मशीन इस मशीन के द्वारा लगातार 24 से 48 घंटे तक हार्टबीट को रिकॉर्ड किया जाता है। इससे हार्ट की धड़कन में अनियमितता जैसी समस्याओं का पता चल जाता है। वर्तमान में इस जांच में मरीजों को दो महीने तक इंतजार करना पड़ता है। आधुनिक ट्रेडमिल एक्सरसाइज मशीन यह मशीन हार्ट और फेफड़ों की क्षमता की जांच करती है। जब किसी रोगी का हार्ट सर्जरी होती है तो उसकी रिकवरी का आकलन किया जाता है। अभी इस जांच के लिए करीब 3 से 4 महीने इंतजार करना पड़ता है। ट्रांस ईसोफेगल इकोकार्डियोग्राफी मशीन इस मशीन के द्वारा हृदय की 2D, 3D और 4D तस्वीर निकाल कर आती हैं। जन्मजात हृदय दोष, हार्ट वाल्व ऑपरेशन के लिए यह बेहद कारगर है। ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी इस तंत्र के द्वारा धमनियों का 3D दृश्य मिलता है। रक्त का प्रवाह को मापा जाता है। दवा देने के दौरान मरीज को इसका असर होगा या नहीं? इस जांच में आसानी होती है। इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड तंत्र इस तंत्र के द्वारा धमनियों के अंदर की बहुत ही हाई डेफिनेशन वाली फोटो मिल जाती है। इससे ब्लॉकेज का सही आकलन किया जा सकता है। इस मशीन के द्वारा डॉक्टर अनुमान लगाते हैं कि क्या स्टंट के द्वारा इलाज संभव है या दवा देने जरूरत है। मरीजों की लंबी कतार आपको बता दें कि वर्तमान में भोपाल एम्स में दो कैथलैब हैं। लेकिन यहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई बार हार्ट अटैक के पेशेंट को तुरंत इलाज नहीं मिल पाता। 22 करोड़ से मिलने वाली 6 मशीन से मरीज का इंतजार खत्म होगा।वर्तमान में एम्स भोपाल में हर दिन करीब 200 से 300 एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर जैसी इलाज होते हैं। मशीनों की कमी के चलते मरीजों को इको और कैथलैब प्रोसीजर के लिए ढाई से तीन माह तक इंतजार करना पड़ता है। नई कैथ लैब और मशीनों के जुड़ने से वेटिंग टाइम लगभग आधा रह जाएगा। इसके साथ ही हमीदिया में भी नई कैथलेब शुरू होने दिल के रोगियों को काफी मदद मिलेगी