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कांग्रेस विधायकों का प्रदर्शन: वसुंधरा विधानसभा में वेल में विरोध जारी

जयपुर राजस्थान विधानसभा में सोमवार को प्रश्नकाल के बाद पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी पहुंची। वसुंधरा राजे ने जिस अंदाज में अपनी सियासी सक्रियता बढ़ाई है उसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हैं। राजे दोपहर को शून्य काल के दौरान विधानसभा पहुंची। हालांकि वे सदन के अंदर नहीं गईं लेकिन हां पक्ष में बीजेपी विधायकों से मिलीं। इसके बाद उन्होंने स्पीकर वासुदेव देवनानी से भी मुलाकात की। इसी दौरान राजे ने विधानसभा देखने पहुंचे स्कूल के बच्चों से भी बातचीत की। इधर कांग्रेस विधायकों का विरोध प्रदर्शन सदन के भीतर भी जारी रहा। कांग्रेस विधायकों ने कानून व्यवस्था को लेकर पहले सदन के बाहर नारेबाजी की। इसके बाद सदन में प्रश्नकाल के बाद शून्यकाल शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। चौमू से कांग्रेस विधायक शिखा बराला और नीमकाथाना से सुरेश मोदी ने स्थगन प्रस्ताव पर 2 मिनट बोलते हुए सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर विफल होने के अरोप लगाए। शिखा बराला ने कहा कि अपराधाें के मामले में जयपुर ने देश के दूसरे शहरों को पीछे छोड़ दिया है। यहां महिलाएं सुरक्षित नहीं है। दिन दहाड़े चैन स्नैचिंग हो रही है।  बीजेपी विधायकों ने विरोध किया तो कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। वहीं प्रश्नकाल दौरान खाद संकट और कालाबाजारी के मुद्दे पर भी जोरदार बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पूरक सवाल करते हुए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा से पूछा कि उन्होंने फैक्ट्रियों पर छापे तो मारे, लेकिन कितने मिलावटखोरों को जेल भेजा गया? उन्होंने मुख्यमंत्री की भरतपुर बैठक का हवाला देते हुए पूछा, "सीएम ने बैठक की, लेकिन उसका क्या नतीजा निकला?" इसके जवाब में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि दो कंपनियों के गोदाम, जो टैगिंग से भरे थे, उन्हें सील कर दिया गया है। उन्होंने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा, "हमें विपक्ष का भी साथ चाहिए ताकि कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई हो सके।" मीणा ने बताया कि भरतपुर में भी चूरू की तरह ही खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। "प्रदेश में किसी भी जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है। केवल डीएपी की थोड़ी बहुत कमी है। लेकिन हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आगे किसी भी प्रकार की खाद की कमी ना हो।" उन्होंने कहा कि डीएपी की कमी वैश्विक कारणों, विशेषकर यूक्रेन युद्ध और जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों की वजह से आई है। "यूरिया की प्रदेश में कोई कमी नहीं है, और हम हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करेंगे।"  

कांग्रेस का घेराव और हंगामा, BJP बोली- कांग्रेसियों ने की तोड़फोड़; सर्किट हाउस मामला गरमाया

जगदलपुर बीते शनिवार देर शाम जगदलपुर सर्किट हाउस में हुए बवाल का मामला अब सियासी तूल पकड़ चुका है. वन मंत्री केदार कश्यप पर कर्मचारियों से गाली-गलौज और मारपीट के आरोप लगे थे, जिसके बाद मामला थाने तक पहुंचा. इस घटना के विरोध में आज कांग्रेसियों ने भानपुरी स्थित वन मंत्री केदार कश्यप के निजी कार्यालय का घेराव किया. प्रदर्शन के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी घायल हो गई. वहीं भाजपा ने कांग्रेसियों पर मंत्री कार्यालय में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया है. प्रदेश प्रवक्ता भाजपा अमित चिमनानी ने ट्वीटर पर कांग्रेस का वीडियो पोस्ट कर कहा है कि कांग्रेसियों की करतूत देखें. कार्यालय में पत्थर, महिला पुलिस जवान पर पत्थर, ये एक राजनीतिक दल के लोग हैं या पत्थरबाज? एक बेटी जो अपनी ड्यूटी कर रही थी उसे मारकर कांग्रेसियों ने घायल कर दिया है. दर्द इतना हुआ कि हमारी शेरनी बहन की आंखों में आसू आ गए, इसकी माफी नहीं मिलेगी. बता दें कि वन एवं परिवहन मंत्री भाजपा के वरिष्ठ नेता केदार कश्यप पर सर्किट हाउस के कर्मचारी ने मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है. मामला तब सामने आया, जब मंत्री दौरे से लौटकर सर्किट हाउस पहुंचे और कर्मचारियों पर दरवाजा देर से खोलने को लेकर नाराज हो गए. यह मामला अब सियासी तूल पकड़ लिया है. इस मामले में मंत्री केदार कश्यप ने कहा था कि दौरे से लौटने के बाद उन्होंने सिर्फ कर्मचारियों को डांटा था, मारपीट का आरोप पूरी तरह गलत है. नारेबाजी करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता मंत्री के जगदलपुर स्थित वृंदावन निवास में घुसने की कोशिश भी कर रहे थे, लेकिन बैरिकेडिंग के कारण पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई. कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब मंत्री केदार कश्यप पर कर्मचारियों से बदसलूकी और मारपीट के आरोप लगे हों। उन्होंने याद दिलाया कि पहले कोंडागांव में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं. मौर्य ने कहा कि केदार कश्यप सत्ता के नशे में चूर होकर दो कानून लागू करना चाहते हैं जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है. इसके अलावा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मंत्री ने सर्किट हाउस कर्मचारी और उसकी पत्नी पर दबाव बनाया कि वे केस वापस लें. कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारी की नौकरी पर आंच आती है तो पार्टी उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी. रायपुर में मंत्री बंगले का घेराव करने निकले कांग्रेसियों को पुलिस ने रोका सर्किट हाउस में कर्मचारी से मारपीट मामले में रायपुर में भी मंत्री केदार कश्यप के बंगले का घेराव करने कांग्रेसी कार्यकर्ता निकले थे, जिसे पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया. इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे समेत बड़ी संख्या में कांग्रेसी शामिल थे. पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी है. गरीब, आदिवासी परिवार को प्रताड़ित करने का काम सरकार के मंत्री और उनसे जुड़े लोग कर रहे हैं. भाजपा के मंत्री नेता सत्ता के नशे में चूर हैं. वरिष्ठ मंत्री खाना बनाने वाले को लात घुसे से मार रहे हैं. उसकी सम्मान की न्याय की लड़ाई कांग्रेस पार्टी लड़ रही है. भाजपा ने छत्तीसगढ़ को बनाया अपराध का गढ़ : विकास उपाध्याय विकास उपाध्याय ने कहा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को जानकारी देकर आज मंत्री के बंगले का घेराव करने निकले थे. पुलिस अपराधियों को तो रोक नहीं पाती है, लेकिन हमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बैरिकेड लगाकर रोका गया. उन्होंने कहा, इस प्रदेश को भाजपा ने अपराध का गढ़ बना दिया है. हम आज सड़क की लड़ाई लड़ रहे हैं. पीड़ित की एफआईआर नहीं लिखी जा रही है. भविष्य में उसके साथ कुछ घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी भाजपा और पूरी सरकार की होगी.

प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को किया जाए प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गौ-शालाऔं को स्वावलंबी बनाना जरूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को किया जाए प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़े: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आत्मनिर्भर गौशाला, प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। गौ-शालाएं गोबर, गौमूत्र आदि अपशिष्ट से धन अर्जित कर संपन्न बन सकती हैं। स्वावलंबी गौशालाएं विकसित करने के लिए दुग्ध उत्पादों सहित गौमूत्र-गोबर आदि से निर्मित सामग्री के विक्रय की व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही गौशालाओं में उपलब्ध स्थान का उपयोग सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए भी किया जाए। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में स्थानीय परिवेश के अनुरूप देसी नस्ल के गौपालन को प्रोत्साहित किया जाए। गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़े। प्रदेश में उपलब्ध पशुधन के अनुपात में पशु चिकित्सकों की संख्या कम है। गौवंश के बेहतर प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशु चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी आवश्यक है। इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड की मंत्रालय में सोमवार को हुई बैठक में दिए। पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा अनुसार प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गिर, साहीवाल, मालवी और नागौरी नस्ल के पशुधन को प्रोत्साहित किया जाए। प्रदेश के जनजातीय अंचलों में भी गौपालन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए आवश्यक नवाचार किए जाएं। प्रदेश में पशुपालन-कृषि-उद्यानिकी तथा नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समन्वित रूप से कार्य करने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और दुग्ध उत्पादन की दिशा में भी प्रदेश, देश के शीर्षस्थ राज्यों में शामिल हो सकेगा। बैठक में जानकारी दी गई कि गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा गौशाला समितियों के बैंक खातों में राज्य स्तर से सीधे राशि अंतरित की जा रही है। बोर्ड द्वारा 937 नवीन गौशालाओं की स्थापना उपरांत पंजीयन किया गया है, जिसमें एक लाख 10 हजार गौवंश को आश्रय प्राप्त है। वर्ष 2024-25 में विदिशा, देवास, आगर-मालवा, ग्वालियर, दमोह, सतना तथा रीवा में बायोगैस सह जैविक खाद निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए। नगर निगम ग्वालियर, इंदौर तथा उज्जैन ने वृहद गौशालाओं का संचालन आरंभ किया गया है। भोपाल और जबलपुर में गौशालाओं की स्थापना का कार्य जारी है। बैठक में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति की प्रगति पर भी समीक्षा हुई।  

CM साय बोले: सौर ऊर्जा से उपभोक्ता बन रहे ऊर्जा उत्पादक और दाता

    रायपुर, प्रदेश में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता अब केवल ऊर्जा उत्पादक ही नहीं, बल्कि ऊर्जा दाता भी बन रहे हैं. पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की प्राप्ति के संकल्प को तीव्र गति से पूर्ण करने की ओर अग्रसर है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित सौर ऊर्जा जागरूकता और प्रोत्साहन अभियान को संबोधित करते हुए यह बात कही. मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सौर ऊर्जा के फायदों, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना और इसके अंतर्गत मिलने वाली सब्सिडी के विषय में लोगों को जानकारी देने और जागरूक करने के उद्देश्य से सूर्य रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. साथ ही मुख्यमंत्री ने 618 उपभोक्ताओं के खातों में प्रत्येक को 30 हजार रुपये की दर से कुल 1.85 करोड़ रुपये की राज्यांश सब्सिडी का ऑनलाइन अंतरण किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ता प्रदूषण हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है और छत्तीसगढ़ इस लक्ष्य की प्राप्ति में पूरे समर्पण और क्षमता के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए हॉफ बिजली बिल से आगे बढ़ते हुए मुफ्त बिजली की ओर ले जाने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने इसे हर्ष का विषय बताते हुए कहा कि प्रदेशवासी इस योजना के महत्व को समझते हुए स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. मुख्यमंत्री ने आमजन से आग्रह किया कि वे अपने आसपास के लोगों को भी इस योजना से जोड़ें और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में प्रदेश को अग्रसर बनाने में योगदान दें. मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उपभोक्ताओं को सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं. साथ ही बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से आसान वित्तीय सुविधा भी दी जा रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को पूर्ण रूप से मुफ्त बिजली का लाभ मिलेगा. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत आज लाभार्थियों को लेटर ऑफ अवार्ड प्रदान किए गए हैं. इन योजनाओं से उपभोक्ता स्वयं सौर ऊर्जा का उत्पादन कर बिजली का विक्रय कर रहे हैं और साथ ही सस्ती बिजली का लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने सौभाग्य योजना के माध्यम से हर घर बिजली पहुँचाने का संकल्प लिया था. उस समय देश के 18 हजार गाँव अंधेरे में थे और आज उन सभी गाँवों तक बिजली पहुँच चुकी है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अब देश स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन क्षमता केवल 1,400 मेगावाट थी, जबकि आज प्रदेश 30,000 मेगावाट का उत्पादन कर रहा है और पड़ोसी राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करा रहा है. उन्होंने बताया कि नई उद्योग नीति के अंतर्गत ऊर्जा क्षेत्र में 3.50 लाख करोड़ रुपये के एमओयू संपादित हुए हैं और आने वाले समय में प्रदेश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता और भी बढ़ जाएगी. मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा. उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाएँ और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की प्राप्ति में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएँ. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष राजनांदगांव से आए कक्षा 12वीं के छात्र प्रथम सोनी ने सौर ऊर्जा की विशेषताओं और शासन द्वारा इसे बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर अपने विचार रखे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘इम्पैक्ट ऑफ डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी ऑन ग्रिड स्टेबिलिटी’ और ‘एग्रीवोल्टाइक्स परफार्मर हैण्डबुक’ का भी विमोचन किया. इस अवसर पर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में विशेष भूमिका निभाने वाले उत्कृष्ट वेंडरों को भी सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरंदर मिश्रा, क्रेडा के चेयरमैन भूपेंद्र सवन्नी, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, क्रेडा के सीईओ राजेश राणा, भारतीय सौर ऊर्जा महासंघ के अध्यक्ष सुमन कुमार, तीनों पॉवर कंपनी के प्रबंध निदेशक सहित बड़ी संख्या में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता उपस्थित थे.

सब इंस्पेक्टर भर्ती विवाद: हाईकोर्ट ने रद्दीकरण पर लगाई रोक, अगली सुनवाई डिवीजन बेंच में

जयपुर राजस्थान में बहुप्रतीक्षित सब इंस्पेक्टर भर्ती-2021 की परीक्षा रद्द करने में एक बड़ा मोड़ आ गया है। सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल पीठ द्वारा भर्ती रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब यह मामला जस्टिस एसपी शर्मा की खंडपीठ में सुनवाई के लिए तय किया गया है। अमर सिंह व अन्य चयनित सब इंस्पेक्टरों ने एकल पीठ के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। अपील में कहा गया है कि पेपर लीक का मामला व्यापक स्तर पर नहीं हुआ था, बल्कि यह कुछ व्यक्तियों तक ही सीमित था। आरपीएससी सदस्यों द्वारा लीक पेपर भी केवल उनके बच्चों और रिश्तेदारों तक पहुंचा था। ऐसे में पूरी भर्ती को रद्द करना कानून सम्मत नहीं है। अपीलकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि भर्ती की सभी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उन्हें नियुक्ति दी गई है। इस प्रकार उनके अधिकार सृजित हो चुके हैं और अब उन्हें नियुक्ति से वंचित करना न्यायसंगत नहीं होगा। कई चयनित उम्मीदवारों ने इस भर्ती के लिए अन्य सरकारी नौकरियां छोड़ी थीं। ऐसे में संपूर्ण भर्ती को निरस्त करना उनके साथ गंभीर अन्याय होगा। ट्रेनी एसआई की ओर से वरिष्ठ वकील आरएन माथुर, कमलाकर शर्मा, अलंकृता शर्मा और तनवीर अहमद पैरवी करेंगे। वहीं दूसरी ओर जिन याचिकाकर्ताओं के पक्ष में सिंगल बेंच का फैसला आया था, उन्होंने हाईकोर्ट में कैविएट दायर कर रखी है। उनके वकील हरेन्द्र नील ने कहा कि हम डिवीजन बेंच में भी मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट भी यह स्पष्ट कर चुका है कि यदि सही और गलत में छंटनी संभव न हो, तो भर्ती रद्द करना ही न्यायोचित कदम है। ऐसे में डिवीजन बेंच का फैसला हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करेगा।

सीएम योगी ने लोकभवन में किया नियुक्ति पत्र का वितरण

… तो महाभारत के बहुत रिश्ते बाकी का जीवन जेल में बिताने को मजबूर होंगेः मुख्यमंत्री  प्रदेश में नवचयनित 1112 कनिष्ठ सहायक व 22 एक्सरे टेक्नीशियन को वितरित किया गया नियुक्ति पत्र  सीएम योगी ने लोकभवन में किया नियुक्ति पत्र का वितरण एक परिवार के लोग पैसा लेकर भर्ती करते थे और जनता को लूटते थेः सीएम योगी  सीएम का तंजः उनके कारनामे यूपी को विकास की बुलंदियों को छूने के बजाय गर्त की ओर धकेल रहे थे सीएम ने स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियों को भी गिनाया, बोले-जब व्यक्ति ही स्वस्थ नहीं तो व्यवस्था कैसे स्वस्थ होगी नकारात्मकता फैलाने वालों पर बोले सीएम- वे कहीं की फोटो कहीं लगाकर नकारात्मकता फैलाएंगे और शासन, विभाग व आपकी छवि को खराब करेंगे लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2016  समेत पहले की भर्ती प्रक्रियाओं पर निशाना साधा। कहा कि हमें कई भर्तियों को सीबीआई को देना पड़ा था। एक व्यक्ति आठ-आठ जगह नाम लिखाकर पैसा लिए जा रहा था, जब जांच हुई तब पता चला। यह एक परिवार के वही लोग हैं, जो पैसा लेकर भर्ती करते थे और यूपी की जनता को लूटते थे। अभी भी जांच चल रही है। समय पर जांच हो जाएगी तो महाभारत के बहुत रिश्ते बाकी का जीवन जेल में बिताने को मजबूर होंगे। उनके कारनामे यूपी को विकास की बुलंदियों को छूने की बजाय गर्त की ओर धकेल रहे थे। इन लोगों ने यूपी को बीमारू बना दिया। इससे पहचान का संकट हो गया। नौजवान को नौकरी नहीं, बेटी असुरक्षित, व्यापारी असहाय, किसान आत्महत्या को मजबूर होता था। परंपरागत उद्यम बंदी के कगार पर जा रहे थे। अराजकता का वातावरण था। त्योहारों से पहले दंगे शुरू हो जाते थे, लेकिन 8 वर्ष से हर जनपद, समुदाय और व्यक्ति उत्साह व उमंग के साथ त्योहारों में सहभागी बनता है। आज सामाजिक सौहार्द भी है, जो राष्ट्रीय एकता को संबल देता है। लोगों का उत्साह व उमंग यूपी के विकास का जज्बा लेकर आगे बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका का निर्वहन कर रहा है।  सोमवार को प्रदेश में 1112 कनिष्ठ सहायक व 22 एक्सरे टेक्नीशियन को नियुक्ति पत्र वितरित किया गया। मुख्यमंत्री ने लोकभवन स्थित मुख्य कार्यक्रम में नवचयनितों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया।  स्वस्थ व्यक्ति ही सशक्त समाज और समर्थ राष्ट्र के निर्माण में कर सकता भूमिका का निर्वहन सीएम योगी ने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सकता है। स्वस्थ व्यक्ति ही सशक्त समाज और समर्थ राष्ट्र के निर्माण में भूमिका का निर्वहन कर सकता है। जब व्यक्ति ही स्वस्थ नहीं तो व्यवस्था कैसे स्वस्थ होगी। जब व्यवस्था ही अस्वस्थ हो जाएगी तो उसके सारे पिलर ध्वस्त दिखाई देंगे। 2017 के पहले व्यवस्था में यही घुन लग चुका था, जो उसे खोखला किए जा रहा था, लेकिन पीएम मोदी के विजनरी लीडरशिप में यूपी ने समस्या के समाधान के साथ ही सभी मानकों को प्राप्त किया। उसी का परिणाम है कि पिछले 8 वर्ष में साढ़े 8 लाख युवाओं को अनेक सरकारी सेवा में लेने में हम सफल हुए हैं।  अब समय पर शुरू और संपन्न होती है प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पारदर्शी प्रक्रिया समय पर शुरू और संपन्न होती है। 8 वर्ष में 2. 19 लाख पुलिसकार्मिकों की भर्ती हुई है। हाल में ही 60,244  पुलिस कार्मिकों की भी भर्ती भी हुई। पहली बार जब हमारी सरकार ने पुलिस भर्ती प्रारंभ की थी तो ट्रेनिंग की समस्या खड़ी हुई। भर्ती 50 हजार की निकाली, लेकिन हमारे पास ट्रेनिंग सेंटर नहीं थे। जब रिव्यू किया तो पता चला कि केवल तीन हजार कार्मिकों की ही ट्रेनिंग एक साथ हो सकती है। तब मिलिट्री, पैरा मिलिट्री, अन्य राज्यों के ट्रेनिंग सेटर लेकर किसी प्रकार प्रशिक्षण पूरा कर पाए। इस बार 60,244 पुलिस कर्मियों को यूपी के अंदर ही ट्रेनिंग मिल रही है।  निष्पक्ष चयन प्रक्रिया नए यूपी की तस्वीर को करती है प्रस्तुत सीएम ने कहा कि निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से चयन की प्रक्रिया नए यूपी की तस्वीर को प्रस्तुत करती है। पिछले साढ़े 8 वर्ष में चिकित्सा स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग ने लंबी छलांग लगाने में सफलता प्राप्त की है। हर क्षेत्र में कुछ न कुछ नया परिवर्तन करके दिखाया है। यह परिवर्तन पीएम मोदी के विकसित भारत के संकल्पना को आगे बढ़ाने का क्रम है। 70 वर्ष तक हम लोग केवल 13 लाख करोड़ तक पहुंचे थे, लेकिन इस वित्तीय वर्ष के अंत तक यूपी की अर्थव्यवस्था 35 लाख करोड़ की बनने जा रही है। जो कार्य 70 वर्ष में नहीं हो पाया,  उससे भी ढाई गुना वृद्धि और बेहतर गति आठ-साढ़े वर्ष में दी है। यूपी के नौजवानों को प्रदेश में नौकरी की गारंटी मिली।  सीएम ने चिकित्सा शिक्षा व चिकित्सा स्वास्थ्य की नियुक्तियों को गिनाया  सीएम ने चिकित्सा शिक्षा व चिकित्सा स्वास्थ्य की नियुक्तियों का जिक्र करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की 1354 स्टाफ नर्स, 7182 एएनएम, 1102 विशेषज्ञ चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र दिया गया। चिकित्सा शिक्षा विभाग के 278 एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया संपन्न हुई। यूपी के बड़े-बड़े चिकित्सा संस्थान के लिए 2142 स्टाफ नर्स की भर्ती की गई। यह सभी आज यूपी के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। सीएम ने कहा कि पहले यूपी में 17 मेडिकल कॉलेज थे। 40 मेडिकल कॉलेज बनने में 100 वर्ष से अधिक लगे। पिछले साढ़े 8 वर्ष में सरकारी व निजी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की संख्या 80 से ऊपर पहुंचाने में सफल हुए हैं। एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज यूपी की पहचान बन रही है। आज सिर्फ एडमिशन ही नहीं होते, बल्कि उसमें प्रोफेसर,  क्लर्कियल स्टाफ, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, टेक्नीशियन आदि की भी भर्ती होती है। हर मेडिकल कॉलेज में बड़े पैमाने में भर्ती प्रक्रिया बढ़ाने का कार्य किया गया।  पहले डॉक्टर व दवा नहीं मिलती थी, अब सभी सुविधाएं मिल रहीं  सीएम ने कहा कि पहले हॉस्पिटल बंद मिलता था। डॉक्टर होते थे तो दवा नहीं, दवा है तो डॉक्टर नहीं। दवा और डॉक्टर है तो बिजली नहीं है, लेकिन अब जनपद में लोगों को हर सुविधाएं मिल रही हैं। यूपी मेडिकल कॉरपोरेशन के माध्यम से दवाइयां भी उपलब्ध हो रही हैं तो 5.34 करोड़ से अधिक परिवारों को यूपी में आयुष्मान कार्ड से लाभान्वित किया जा रहा … Read more

एक्वीफर मैपिंग का लक्ष्य गंगा नदी के किनारे जल संचयन के उपायों को बनाना है बेहतर

नमामि गंगे मिशन: प्रयागराज में एक्वीफर मैपिंग प्रबंधन से नदियों को मिलेगा नया जीवन   एक्वीफर मैपिंग का लक्ष्य गंगा नदी के किनारे जल संचयन के उपायों को बनाना है बेहतर परियाेजना में स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीकी का किया जा रहा उपयोग    अध्ययन के माध्यम से लगभग 200 किलोमीटर लंबी, लगभग 4 किलोमीटर चौड़ी तथा 15–25 मीटर गहरी दबी हुई प्राचीन नदी की पहचान की गई लखनऊ/ प्रयागराज  राष्ट्रीय गंगा मिशन (नमामि गंगे) के तहत प्रयागराज में एक्वीफर मैपिंग (Aquifer Management)परियोजना का लक्ष्य गंगा नदी के किनारे जल संचयन के उपायों को बेहतर बनाना और जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक स्थायी प्रणाली विकसित करना है। इस परियोजना में नवाचार और तकनीकी दृष्टिकोण को शामिल किया गया है, जिसमें स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है।  यह प्रणाली न केवल जल आपूर्ति में सुधार करेगी, बल्कि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने में मदद करेगी। इसके अलावा, जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्रीय जल संकट को हल करने के लिए तकनीकी दृष्टिकोणों का कार्यान्वयन किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में पानी की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।     जलमग्न जलाशय प्रबंधन परियोजना से हुई प्राचीन नदी की पहचान  नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र (प्रयागराज से कानपुर के मध्य) में पेलियो-चैनलों पर केंद्रित एक्वीफर मानचित्रण के दौरान एक उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त हुई है। वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के माध्यम से लगभग 200 किलोमीटर लंबी, लगभग 4 किलोमीटर चौड़ी तथा 15–25 मीटर गहरी दबी हुई प्राचीन नदी की पहचान की है। यह उपलब्धि भारत के इतिहास और संस्कृति के अध्ययन में एक नया अध्याय जोड़ती है।इस परियोजना के अंतर्गत उपग्रह चित्रण तकनीक, भू-स्थानिक आंकड़ों तथा नवीनतम वैज्ञानिक उपकरणों का प्रयोग कर प्राचीन नदी मार्गों एवं भूगर्भीय जलाशयों का विस्तृत मानचित्रण किया गया।     भूजल मानचित्रण और स्थायी पुनर्भरण की दिशा में कदम  एक्वीफर अध्ययनों से पता चलता है कि यह प्राचीन नदी लगभग 3,500–4,000 मिलियन क्यूबिक मीटरतक जल भंडारण क्षमता रखती है। 150 से अधिक प्रबंधित एक्वीफर मैपिंग पुनर्भरण (MAR) स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां पुनर्भरण संरचनाएं बनाई जाएंगी ताकि भूजल स्तर बढ़ सके और नदी का आधार प्रवाहस्थायी बना रहे।  पहले चरण में 20–25 प्रबंधित एक्वीफर मैपिंग पुनर्भरण स्थल विकसित किए जाएंगे, जिन पर सीएसआईआर–एनजीआरआई द्वारा वैज्ञानिक निगरानी हेतु स्वचालित जल-स्तर संकेतक स्थापित किए जाएंगे। प्रस्तावित प्रबंधित एक्विफर पुनर्भरण संरचनाओं का आकार 5 मीटर × 5 मीटर × 3 मीटर होगा, जो प्रभावी पुनर्भरण सुनिश्चित करेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश राज्य भूजल एवं सिंचाई विभागके सहयोग से संचालित की जा रही है, जो एक्विफर पुनर्जीवन की दिशा में एक निर्णायक कदम है।     गंगा की अविरल धारा हेतु सतत प्रयास  प्रयागराज में एक्विफर मानचित्रण परियोजना के सफल कार्यान्वयन से भूजल पुनर्भरण में वृद्धि होगी और नदी के प्रवाह में सुधार होगा, जिससे नमामिगंगे मिशनके अविरल गंगा की दृष्टि को बल मिलेगा। नवीनतम तकनीकों का उपयोग अधोसंरचना विकास में किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप नदी प्रवाह और भूजल पुनर्भरण को बढ़ाने के बेहतर उपाय विकसित हुए हैं। भू-जलाशय प्रणालियों के माध्यम से आगामी वर्षों में जल-संकट की समस्या से निपटने के लिए स्थायी और तकनीकी समाधान प्रदान किए जा रहे हैं।     नदी पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्निर्माण और जल संरक्षण में नया मोड़  नमामि गंगे मिशन के तहत चलाए जा रहे शोध और प्रौद्योगिकी आधारित प्रयास नदी पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन प्रयासों के तहत जलमग्न जलाशय प्रबंधन, उन्नत रिमोट सेंसिंग, जीआईएस आधारित डेटाबेस, और इन्फ्रास्ट्रक्चरल समाधान लागू किए जा रहे हैं, जो नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनः स्थापित करने के साथ-साथ जल संरक्षण के लिए स्थायी उपाय सुनिश्चित करेंगे। इन पहलों से न केवल जलवायु परिवर्तन और जल संकट के प्रभावों को कम किया जाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गंगा और अन्य नदियों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।     भविष्य के नदी संरक्षण के लिए मजबूत आधार  नमामि गंगे मिशन के तहत प्रयागराज में एक्वीफर मैपिंग परियोजना जैसे नवाचारी प्रयास न केवल गंगा नदी के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये देशभर में जल संकट से निपटने के लिए भी एक मजबूत दिशा दिखा रहे हैं। अत्याधुनिक तकनीकी उपायों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इन पहलों से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का मुकाबला करना, जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और जल पुनर्भरण के उपायों को लागू करना संभव हो रहा है।

प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सीएम योगी ने दिए आदेश

प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया की होगी सघन जांच प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सीएम योगी ने दिए आदेश  हर मंडल में होगा विशेष जांच टीम का गठन, शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया की गहन जांच करेगी टीम 15 दिन में शासन को भेजनी होगी रिपोर्ट, अनियमितता पर होगी कठोर कार्रवाई शैक्षणिक संस्थानों की जांच की पूरी प्रक्रिया पर मंडलायुक्त रखेंगे प्रत्यक्ष निगरानी  सीएम योगी की अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश, किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं  लखनऊ  उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों की मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया की गहन जांच के आदेश दिए हैं।  हर मंडल में विशेष जांच टीम का होगा गठन मुख्यमंत्री के आदेश के बाद अब प्रत्येक मण्डलायुक्त अपने-अपने मण्डल के तहत आने वाले सभी जनपदों में विशेष जांच टीम गठित करेंगे। इन टीमों में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, एक पुलिस विभाग का अधिकारी और एक शिक्षा विभाग का अधिकारी अनिवार्य रूप से शामिल होगा। यह टीम जमीनी स्तर पर जांच कर संस्थानों की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया की हकीकत सामने लाएगी। शैक्षणिक संस्थाओं के शपथपत्र और मान्यता-पत्र होंगे अनिवार्य जांच के दौरान प्रत्येक शैक्षणिक संस्था से शपथ पत्र लिया जाएगा। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि संस्थान केवल उन्हीं कोर्सों का संचालन कर रहा है, जिन्हें नियामक निकाय, विश्वविद्यालय या बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। इसके साथ ही, संचालित सभी कोर्स की सूची और उनके मान्यता-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र का दाखिला बिना मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में नहीं होना चाहिए। अनियमितता पर होगी कठोर कार्रवाई अगर जांच में किसी संस्थान में अवैध प्रवेश या बिना मान्यता के कोर्स संचालित पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, ऐसे संस्थानों को छात्रों से लिया गया संपूर्ण शुल्क ब्याज सहित वापस करना होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि छात्रों का भविष्य किसी भी हाल में दांव पर नहीं लगाया जाएगा। 15 दिन में शासन को भेजनी होगी रिपोर्ट जांच प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। प्रत्येक जनपद स्तर पर जांच पूरी कर 15 दिनों के भीतर शासन को समेकित रिपोर्ट भेजना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यह कार्यवाही सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। जांच की पूरी प्रक्रिया पर मंडलायुक्त प्रत्यक्ष निगरानी रखेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए राहत सामग्री से भरे ट्रकों को दिखाई हरी झंडी

बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री मानवीय संवेदना की महत्वपूर्ण कड़ी- सीएम योगी – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए राहत सामग्री से भरे ट्रकों को दिखाई हरी झंडी – योगी सरकार ने निभाई मानवीय जिम्मेदारी, उत्तराखंड, हिमाचल और पंजाब को 48 ट्रकों में भेजी राहत सामग्री – सीएम योगी ने हिमाचल और उत्तराखंड राज्य को दी 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि – संकट की घड़ी में उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता तीनों राज्यों के अपने बहन-भाइयों के साथ खड़ी है- सीएम योगी – राहत सामग्री व सहायता राशि लेकर बाढ़ प्रभावित राज्यों में जाएंगे योगी सरकार के मंत्री व विधायक – समय पर किए गए प्रावधानों की वजह से बाढ़ की आपदा से बचा है यूपी- सीएम योगी – बरसात में दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा दे रही सरकार- मुख्यमंत्री  – सीएम योगी ने की जनता से अपील, आपदा के समय सतर्कता और बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है- सीएम योगी सहारनपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सहारनपुर से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बाढ़ प्रभावित नागरिकों के लिए राहत सामग्री से लदे 48 ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सरोवर पोर्टिको, अंबाला रोड पर आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि राहत सामग्री मानवीय संवेदना की महत्वपूर्ण कड़ी है। संकट की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता इन तीनों राज्यों के अपने बहन-भाइयों के साथ खड़ी है। इस दौरान सीएम योगी ने इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को पांच-पांच करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि भी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से राहत सामग्री के रूप में उत्तराखंड, हिमाचल और पंजाब के नागरिकों के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चल रहे 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि विकास के नित नए प्रतिमान स्थापित हो रहे हैं, साथ ही आपदा से निपटने के लिए सरकार के प्रयास अत्यंत प्रभावी साबित हो रहे हैं। एनडीआरएफ, आपदा मित्र और स्थानीय पुलिस जैसी संस्थाएं सक्रिय होकर राहत कार्य में अपनी भूमिका निभाती हैं। सीएम योगी ने कहा कि जब समाज और स्वयंसेवी संगठन पीड़ितों के साथ खड़े हो जाते हैं, तो सरकार के प्रयासों को और मजबूती मिलती है। समय पर किए गए प्रावधानों की वजह से बाढ़ की आपदा से बचा है यूपी- सीएम योगी उत्तर प्रदेश में बाढ़ को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए योगी ने कहा कि इस वर्ष अभी तक राज्य इस आपदा से बचा हुआ है, हालांकि निचले स्तर पर जल-भराव हुआ है। व्यापक पैमाने पर बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए समय पर किए गए प्रावधानों का परिणाम है कि आज हम इस आपदा को नियंत्रण के करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों का जिक्र किया, जहां बाढ़ आई है, जैसे यमुना नदी का क्षेत्र—सहारनपुर, बागपत, गौतम बुद्ध नगर से लेकर प्रयागराज तक, जहां गंगा से मिलती है। साथ ही बिजनौर से बलिया तक गंगा के मुहाने, सरयू, घाघरा, रामगंगा और हिंडन नदी के इलाकों में पुख्ता व्यवस्था की गई है। इन नदियों में अगर जल ओवरफ्लो से जन-धन की हानि हुई, तो सरकार ने तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई है। दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा- मुख्यमंत्री  सीएम योगी ने कहा कि यूपी में बरसात के समय अगर कोई जंगली जानवर, सांप या बिच्छू किसी व्यक्ति को काटता है और दुर्भाग्यपूर्ण मौत होती है, तो पीड़ित परिवार को सरकार चार लाख रुपये का मुआवजा तत्काल उपलब्ध करवाती है। आपदा से अगर किसी गरीब का मकान गिर गया, तो नया आवास बनाने के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है। अगर जमीन और मकान नदी में विलीन हो गया या कटान की चपेट में आ गया, तो परिवार को जमीन का पट्टा और मकान बनाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। जहां गांव जल-प्लावित हुए, वहां सुरक्षित शिविरों में पहुंचाने के साथ ब्रेकफास्ट, दोपहर और शाम का भोजन, बच्चों के लिए दूध और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की गई है। सीएम योगी ने हिमाचल और उत्तराखंड राज्य को दी 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता सीएम योगी ने कहा कि जो सामग्री उत्तर प्रदेश में वितरित की जाती है, उसी को आज इन 48 ट्रकों के माध्यम से उत्तराखंड, हिमाचल और पंजाब के बहनों-भाइयों के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि अगर कहीं आपदा आएगी, उत्तर प्रदेश सहायता के लिए तैयार रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल में बादल फटने और अतिवृष्टि से बड़ी तबाही हुई है, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार और नागरिकों की ओर से पांच करोड़ रुपये की सहायता उत्तराखंड को और पांच करोड़ रुपये हिमाचल सरकार के राहत कोष के लिए उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। योगी सरकार के मंत्री व विधायक लेकर जाएंगे सहायता राशि इस सहायता को पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कुंवर बृजेश सिंह उत्तराखंड जाएंगे, जबकि मंत्री जसवंत सैनी हिमाचल प्रदेश की राहत सामग्री और धनराशि लेकर जाएंगे। पंजाब के लिए सहारनपुर के नगर विधायक राजीव गुम्बर राहत सामग्री लेकर जाएंगे। सीएम ने कहा कि ये प्रतिनिधि वहां जाकर उत्तर प्रदेश वासियों की संवेदना प्रेषित करेंगे और सामग्री सौंपेंगे। जब पूरा देश संकट में एकजुट होता है, तो संकट, संकट नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि  इन सभी के बावजूद, अगर अन्य सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी, तो उत्तर प्रदेश सरकार और 25 करोड़ की जनता हर पीड़ित के साथ खड़ी है और हर प्रकार का सहयोग करने के लिए तत्पर रहेगी। बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है- सीएम योगी सीएम ने जनता से अपील की कि आपदा के समय सतर्कता और सावधानी बरतें। जल ज्यादा आने पर डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए पानी उबालकर पिएं। घर के आसपास पानी एकत्र न होने दें, ताकि डेंगू और मलेरिया के लार्वा न पनपें। साफ-सफाई और छिड़काव का ध्यान रखें। अगर सांप या जहरीला कीड़ा काटे, तो झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर तत्काल डॉक्टर के पास जाएं। … Read more

नवचयनितों ने निष्पक्ष ढंग से मिली नियुक्ति के अनुभव किए साझा

मिशन रोजगार  पहले की सरकारों में नियुक्ति के लिए देनी पड़ती थी रिश्वत, अब ये गुजरे जमाने की बात नवचयनितों ने निष्पक्ष ढंग से मिली नियुक्ति के अनुभव किए साझा   बोले- शुचिता व पारदर्शिता से मिली नौकरी, ईमानदारी से करेंगे जनसेवा  योगी सरकार युवाओं के प्रति है समर्पित, आज का कार्यक्रम इसका प्रत्यक्ष प्रमाण  लखनऊ  योगी सरकार के मिशन रोजगार के तहत उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में चयनित 1,112 कनिष्ठ सहायकों एवं 22 एक्सरे टेक्नीशियन को नियुक्ति पत्र दिया गया। इनमें से कई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन सभागार में नियुक्ति पत्र दिया। नवचयनितों ने एक सुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सीएम योगी के प्रयासों से हम युवाओं को कड़ी मेहनत का फल प्राप्त हुआ है। चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में पारदर्शी एवं निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए उनका आभार जताया। अभ्यर्थियों ने निष्पक्ष व शुचितापूर्ण हुई भर्ती प्रक्रिया का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमें बिना भेदभाव, बिना कोई पैसे दिए और बिना किसी सिफारिश के सिर्फ  योग्यता के आधार पर नौकरी मिल रही है।  योगी सरकार की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शी नीति से युवाओं को मिल रही सरकारी नौकरी  उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में कनिष्ठ सहायक के पद पर नियुक्त हुईं सीतापुर की पंखुड़ी गुप्ता मानती हैं कि ये सरकार की बहुत बड़ी सफलता है। आज युवा कड़ी मेहनत के दम पर पारदर्शी तरीके से चयनित होकर सरकारी नौकरी पा रहे हैं। इस वजह से मुझे भी सरकारी नौकरी मिल पाई है। मैं मुख्यमंत्री जी को दिल से धन्यवाद देती हूं। युवाओं के उज्जवल भविष्य के प्रति संकल्पित हैं मुख्यमंत्री: वैभव  कनिष्ठ सहायक सीतापुर के वैभव मिश्रा ने अपने भाव साझा करते हुए कहा कि सरकार युवाओं के प्रति समर्पित है। आज का कार्यक्रम इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने मुख्यमंत्री से नियुक्ति पत्र मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि योगी सरकार तेज रफ्तार से युवाओं को नियुक्ति दे रही है।  मुख्यमंत्री जी युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के प्रति कृत संकल्पित हैं। रिकॉर्ड युवाओं की निष्पक्ष नियुक्तियां इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।  अब सिर्फ काबिलियत के दम पर मिलती है नियुक्ति  श्रद्धा शुक्ला ने कहा कि पहले की सरकारों में नियुक्ति के लिए रिश्वत देनी पड़ती थी, लेकिन आज नियुक्ति सिर्फ काबिलियत के दम पर मिलती है। सरकारी नौकरी के लिए रिश्वत गुजरे जमाने की बात हो गई। मुख्यमंत्री जी ने पारदर्शी प्रक्रिया से नियुक्ति देकर उत्तम प्रदेश का नया मार्ग बनाया है। इस नौकरी के लिए सिफारिश या एक रुपये रिश्वत भी नहीं देनी पड़ी। इसके लिए मुख्यमंत्री जी का दिल से आभार व्यक्त करती हूं। योगी सरकार नौकरी देने से लेकर सुरक्षा देने में हैं संवेदनशील अयोध्या के आदित्य पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री जी की वजह से हम सभी निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बन पा रहे हैं। सरकार सुरक्षा से लेकर रोजगार देने तक संवेदनशील है। आठ वर्ष में महिलाओं को भी बड़ी तादाद में नियुक्तियां दी गई हैं। सीएम योगी के नेतृत्व में महिलाएं खुद को सुरक्षित और मजबूत महसूस कर रहीं है। योगी जी हमारे लिए नंबर 1 हैं।