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नंगे पैर या जूते पहनकर वॉक करें? जानें सही तरीका और अधिक फायदा

वॉक करना सेहत के लिए सबसे अच्छी और आसान एक्सरसाइज मानी जाती है। इससे पूरे शरीर की एक्सरसाइज होती है, जिससे वजन कम करने, पाचन दुरुस्त रखने, बेहतर हार्ट हेल्थ और मूड अच्छा करने जैसे कई फायदेमिलते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि वॉक करने का सही तरीका क्या है? नंगे पांव चलना या फिर जूते पहनकर वॉक करना , दोनों में से क्या ज्यादा फायदेमंद है। आइए जानें इस बारे में। नंगे पैर चलने के फायदे     चाल में सुधार- जब आप नंगे पैर चलते हैं, तो आपके पैर की मांसपेशियों, टेंडन और लिगामेंट्स को पूरी तरह से काम करने का मौका मिलता है। इससे पैर की नेचुरल आर्च मजबूत होती है और चाल में सुधार होता है। आप जमीन को बेहतर तरीके से महसूस करते हैं और पैर जमीन पर ज्यादा नेचुरल तरीके से पड़ते हैं।     बैलेंस और स्टेबिलिटी में सुधार- नंगे पैर चलने से पैर की उंगलियों को जमीन को पकड़ने का मौका मिलता है, जिससे शरीर का बैलेंस बेहतर होता है। इससे गिरने का खतरा कम हो सकता है।     मूड अच्छा होता है- नंगे पांव हरी घास पर वॉक करने से मूड में सुधार हो सकता है। प्रकृति में टहलने और घास के कॉन्टेक्ट से हमें बेहतर महसूस होता है और मूड में सुधार होता है। नंगे पैर चलने के नुकसान     चोट लगने का खतरा- कांच के टुकड़े, नुकीले पत्थर, कीलें, या गर्म सतहों से पैरों में चोट लग सकती है या इन्फेक्शन हो सकता है।     इन्फेक्शन- सार्वजनिक स्थानों पर नंगे पैर चलने से फंगस, बैक्टीरिया या वायरस के संपर्क में आने का जोखिम रहता है।     पैरों में दर्द- जो लोग हमेशा जूते पहनते आए हैं, वे अगर अचानक ज्यादा देर तक नंगे पैर चलने लगें, तो इससे एड़ी में दर्द या टेंडन में खिंचाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जूते पहनकर चलने के फायदे     सुरक्षा- जूते पैरों को चोट लगने, कटने, छिलने और बाहरी तत्वों से बचाते हैं। यह सुरक्षा कंक्रीट और एस्फाल्ट जैसी सख्त सतहों पर चलते समय खासतौर से जरूरी है।     सपोर्ट और कुशनिंग- अच्छे जूते पैर के आर्च को सपोर्ट देते हैं, झटके कम करते हैं और जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करते हैं। इससे लंबी दूरी तक चलना आरामदायक हो जाता है।     मूवमेंट में स्टेबिलिटी- स्पोर्ट्स एक्टिविटीज जैसे दौड़ना, ट्रेकिंग करना या जिम वर्कआउट करने के लिए डिजाइन किए गए जूते परफॉर्मेंस को बेहतर बनाते हैं और खास मूवमेंट्स में स्टेबिलिटी देते हैं। जूते पहनकर चलने के नुकसान     नेचुरल मूवमेंट में बाधा- ज्यादा कुशनिंग वाले या तंग जूते पैर की नेचुरल स्पीड को सीमित कर सकते हैं, जिससे पैर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।     गलत फिटिंग के नुकसान- ठीक से फिट न आने वाले जूते ब्लिस्टर्स, कॉर्न्स, बुनियन और पोस्चर संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। क्या है ज्यादा फायदेमंद? सुरक्षित माहौल में नंगे पैर चलना जैसे घर के अंदर या घास के मैदान में सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। इसे धीरे-धीरे शुरू करें ताकि पैरों को प्रैक्टिस करने का समय मिले। शहरी इलाकों, सख्त सतहों पर, या एक्सरसाइज के दौरान अच्छी क्वालिटी के और ठीक से फिट होने वाले जूते पहनना एक सुरक्षित विकल्प है।  

रायपुर: स्कूल शिक्षा मंत्री यादव बोले- सरकार की योजनाओं से जुड़ें, भविष्य को बनाएं उज्ज्वल

रायपुर स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी मंत्री गजेन्द्र यादव ने आज रिसाली दशहरा मैदान, भिलाई में छत्तीसगढ़ झेरिया यादव समाज द्वारा आयोजित विशाल अभिनंदन समारोह में शामिल होकर समाज के विकास हेतु कई घोषणाएं कीं। उन्होंने चार सामुदायिक भवनों के निर्माण के लिए प्रत्येक को 20-20 लाख रुपये, कुल 80 लाख रुपये तथा 5 लाख रुपये की स्वेच्छानुदान राशि देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त उन्होंने दुर्ग स्थित पचरीपारा में आयोजित सम्मान समारोह में यादव महिला छात्रावास निर्माण हेतु 30 लाख रुपये देने की घोषणा की। कार्यक्रम में समाजजनों ने पारंपरिक नृत्य-गान के साथ मंत्री यादव का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्हें समाज की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक स्वरूप पारंपरिक वेशभूषा और सजी हुई लाठी भेंट की गई। विभिन्न जिलों से आए यादव समाज के गणमान्य नागरिकों ने उन्हें माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। अपने उद्बोधन में मंत्री यादव ने कहा कि समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी आर्थिक रूप से पिछड़ा है, जिसे मुख्यधारा में लाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर समाज के लोग आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे सरकार की योजनाओं से जुड़ें और अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाकर समाज को नई दिशा प्रदान करें। मंत्री यादव ने इस अवसर पर पाटन सरपंच की मांग पर शासकीय प्राथमिक शाला परेवाडीह के जीर्णाेद्धार की भी घोषणा की, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सकेगा। इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, झेरिया यादव समाज प्रदेश अध्यक्ष जगनीक यादव, प्रदेश संरक्षक जगतराम यादव एवं सुकालु राम यदु, प्रदेश उपाध्यक्ष भगत सिंह यादव, रिसाली पूर्व मंडल अध्यक्ष शैलेन्द्र शेन्डे, प्रदेश सचिव सुंदर लाल यादव सहित समाज के जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। क्रमांक-3737/चन्द्रवंशी

मृत्यु के बाद पहला श्राद्ध कैसे करें? जानें नियम और धार्मिक कारण

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है. पितृपक्ष के दौरान अपने पितरों या पूर्वजों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है. ऐसा करने से पितरों और मृत आत्माएं तृप्त होती है. साल 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है जो 22 सितंबर यानी सर्वपितृ अमावस्या तक चलेंगे. पितृपक्ष के दौरान पितरों का तर्पण, पिंडदान करना शुभ माना जाता है, मान्यता है ऐसा करने से पितृ खुश होते हैं और आशीर्वाद देते हैं. लेकिन श्राद्ध करने के कई नियम हैं जिनका पालन अवश्य करना चाहिए. जानते हैं किसी की मृत्यु के बाद पहला श्राद्ध कब करना चाहिए. क्या हैं श्राद्ध करने के नियम जानें इसका धार्मिक कारण. कई बार लोग सही जानकारी ना होने की वजह से किसी की भी मृत्यु के बाद उनका श्राद्ध कर देते हैं. लेकिन इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए और प्रथम वर्ष श्राद्ध नहीं करना चाहिए. पहले श्राद्ध से जुड़ी जरूरी बातें     पहला श्राद्ध एक वर्ष पूर्ण होने के बाद करना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, मृत्यु के बाद जब मृतक की पहली बरसी आती है, तब पहला श्राद्ध किया जाता है. श्राद्ध कर्म हमेशा तिथि के अनुसार करें. अगर आप तिथि का हिसाब ना लगा सकते हो तो किसी पंडित से तिथि के बारे में जान सकते हैं.     जिनकी मृत्यु किसी भी माह के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया आदि किसी भी तिथि पर अगर हुई है तो उन लोगों का श्राद्ध पितृपक्ष में उसी तिथि पर किया जाता है.     तिथि पर ही श्राद्ध करने का विशेष महत्व होता है. श्राद्ध हमेशा उसी तिथि पर करना चाहिए जिस तिथि पर मृत्यु होती है.     अगर किसी की बरसी पितृ पक्ष में आ जाए तो उस दिन किया गया श्राद्ध और भी अधिक फलदायी माना जाता है. कब करें पहला श्राद्ध ? पितृ की वार्षिक यानी बरसी के बाद श्राद्ध किया जा सकता है. इसलिए कोशिश करें जब तक वार्षिक यानी बरसी ना हो जाए तब तक श्राद्ध ना करें. वार्षिक या बरसी व्यक्ति की मृत्यु के सालभर के अंदर ही होती है. किसी का भी पहला श्राद्ध आत्मा को शांति और संतोष प्रदान करता है. श्राद्ध कर्म करने से पितरों का आशीर्वाद और उनकी कृपा प्राप्त होती है.

सरकारी नौकरी चाहने वालों के लिए प्रेमानंद जी का सफलता मंत्र, जानें 100% सफल होने का तरीका

हमारे देश में सरकारी नौकरी का क्रेज किसी से छिपा नहीं है। हर साल लाखों छात्र अलग-अलग सरकारी नौकरियों का सपना लिए तैयारी शुरू करते हैं। इस रेस में कोई तय समय नहीं होता, कभी कोई सालभर में अपना मुकाम हासिल कर लेता है, तो किसी को कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिलती। जाहिर है लाखों की भीड़ में जब आप उतरते हैं, वो गला काट प्रतिस्पर्धा फेस करते हैं, तो मन में घबराहट भी होती है। और जब कड़ी मेहनत के बाद भी कई सालों तक कोई रिजल्ट नहीं मिलता तो मन निराशा में भी घिर जाता है। प्रेमानंद जी महाराज ने अपने एक सत्संग के दौरान इसी विषय पर विस्तार में बताया है। उनके बताए इस मंत्र को अगर छात्र अपने जीवन में उतार लें, तो जरूर सफलता उनके हाथ लगेगी। और यदि असफल भी हुए तो उसे बेहतर तरीके से डील कर पाने में भी मदद मिलेगी। हमेशा उत्साह के साथ करें तैयारी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि छात्र जीवन में हमेशा उत्साह होना चाहिए। चाहे आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हों या बेसिक पढ़ाई; हमेशा पूरे जोश, लगन और उत्साह के साथ करें। कोई भी काम मिल रहा है तो उसे चुनौती की तरह लें और टालने की बजाए तुरंत करने की आदत डालें। जब आप जरूरी काम को सही समय पर करने की आदत डाल लेंगे तो मानसिक रूप से भी आप स्ट्रेस फ्री ही रहेंगे। हंसते-खेलते जोश के साथ आपकी तैयारी भी बेहतर होगी और परिणाम भी हमेशा अच्छा ही मिलेगा। प्रॉपर प्लानिंग के साथ करें तैयारी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि तैयारी करने से पहले उसकी पूरी योजना बनाना जरूरी है। रोज का काम रोज करने की आदतें डालें और डेली प्लानिंग करें। आज आपको क्या करना है इसकी प्रॉपर प्लानिंग बनाएं। रात में प्लान बनाकर सोएं तो और भी बेहतर होगा। इससे आपको अगले दिन काम करने में आसानी होगी और आप अपने पूरे दिन का अच्छा उपयोग कर पाएंगे। चिंता की बजाय चिंतन करें चिंता करना चिता के समान है। इससे मिलता तो कुछ नहीं उल्टा नुकसान ही होता है। प्रेमानंद जी महाराज भी कहते हैं कि छात्र हो या कोई भी व्यक्ति, चिंता तो बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। चिंता की जगह अगर आप चिंतन करें तो ज्यादा बेहतर होगा। सोचें कि कैसे खुद को बेहतर कर सकते हैं, आगे की योजना बनाएं। अपनी तैयारी ऐसी रखें कि एक महीने बाद परीक्षा है, तो आज भी अगर कोई आपसे सवाल पूछे तो आप बता पाएं। ऐसी तैयारी करने वाले छात्र को जरूर सफलता मिलती है।  

बेहतर नींद के वास्तु टिप्स, अपनाएं और देखें स्वास्थ्य पर असर

कई लोगों को यह समस्या बनी रहती है कि उनकी नींद बार-बार टूटती जिस कारण नींद पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में व्यक्ति को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी घेर लेती हैं। आप इस समस्या के समाधान के लिए कुछ वास्तु टिप्स अपना सकते हैं, जिससे आपको काफी फायदा देखने को मिलेगा। चलिए जानते हैं इस बारे में। क्या होनी चाहिए बेड की दिशा वास्तु शास्त्र में माना गया है कि, अगर आप उत्तर और पश्चिम दिशा में सिर करके सोते हैं, तो इससे रोगों में वृद्धि होती है और व्यक्ति की उम्र घटने लगती है। सोते समय आपका सिर पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। इसलिए आपका बेड भी दक्षिण दिशा में ही होना चाहिए। ध्यान रखें ये बातें रंगों का भी नींद पर काफी असर पड़ता है। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि बेडरूम की दीवारों से लेकर बेडशीट का रंग हल्का ही होना चाहिए। इससे आपको नींद की समस्या में आराम देखने को मिल सकता है। इस बात का भी ध्यान रखें कि सोते समय अपने पैर दरवाजे की तरफ नहीं रखने चाहिए, वरना इससे भी आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। न करें ये गलती सोने से पहले सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे फॉन, लैपटॉप आदि को अपने पास से हटा देना चाहिए और दूर रखकर सोना चाहिए। वास्तु शास्त्र में यह माना गया है कि इलेक्ट्रॉनिक सामान को अपने पास रखकर सोते हैं, तो इससे नींद में तो बाधा उत्पन्न होती ही है, साथ ही सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही आपके बेड के नीचे भी कोई सामान नहीं रखा होना चाहिए। ऐसा करने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है, जिससे बार-बार नींद टूटने की समस्या बनी रहती है। क्या है सोने का सही समय शास्त्रों में इस बात का वर्णन मिलता है कि कभी भी सूर्यास्त के तुरंत बाद और गोधूलि बेला में नहीं सोना चाहिए। सोने के लिए सबसे अच्छा समय रात्रि के पहले प्रहर को माना गया है। वहीं, उठने के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे उत्तम बताया गया है। इसके साथ ही दिन में सोने से भी कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं।  

रायपुर: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ‘नवगुरुकुल’ पहुंचे, छात्राओं को दी आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच की सीख

120 छात्राएँ ले रही हैं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण रायपुर रायगढ़ जिले के मेहनती और वंचित युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित नवगुरुकुल प्रशिक्षण केंद्र का रविवार को वित्त मंत्री ओ.पी. चैधरी ने गढ़उमरिया पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न कोर्स का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही 120 छात्राओं से संवाद किया और अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए उन्हें आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वित्त मंत्री चैधरी ने छात्राओं से बातचीत करते हुए अपने बचपन के संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मात्र 8 वर्ष की उम्र में पिता का साया उठ जाने के बाद उन्होंने सरकारी स्कूल से बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की और कठिन परिस्थितियों के बावजूद धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास से सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि जीवन में कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए। आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि नवगुरुकुल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। वर्तमान में 120 छात्राएँ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, भविष्य में इसे और विस्तारित किया जाएगा। छात्राओं की सफलता इस विस्तार की मजबूत नींव बनेगी। उन्होंने अधिकारियों को प्रशिक्षण में फिटनेस, योग और खेलकूद जैसी गतिविधियाँ शामिल करने का सुझाव दिया, ताकि छात्राओं का शारीरिक और मानसिक विकास समान रूप से हो सके। वित्त मंत्री ने नवगुरुकुल में छात्राओं के लिए उपलब्ध भोजन, आवास, इंटरनेट, बिजली और पाठ्य सामग्री जैसी व्यवस्थाओं का जायजा लिया और कहा कि यदि किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो छात्राएँ बेहिचक बताएं, ताकि समय रहते समाधान किया जा सके। नवगुरुकुल: सशक्तिकरण का नया अवसर वित्त मंत्री ओपी चैधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ में जिला प्रशासन की पहल से संचालित नवगुरुकुल में 120 छात्राओं को निःशुल्क आवासीय दो वर्षीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भोजन और आवास सहित सभी सुविधाएँ निःशुल्क उपलब्ध हैं। नवगुरुकुल एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसका उद्देश्य वंचित युवाओं को गरिमामय करियर दिलाना है। यहाँ छात्राओं को इंजीनियरिंग, प्रोग्रामिंग, डिजिटल मार्केटिंग, बिजनेस आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलते हैं और कई पूर्व छात्राएँ आज 12-18 लाख रुपये वार्षिक तक का वेतन कमा रही हैं। नवगुरुकुल की नेतृत्व टीम में आईआईटी, एनआईटी, सेंट स्टीफेंस कॉलेज और हार्वर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के पूर्व छात्र शामिल हैं। इस संस्थान ने शिक्षा और पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी एकीकृत किया है, ताकि छात्राएँ भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार हो सकें। वर्तमान में देशभर में नवगुरुकुल के 9 परिसरों में 1,100 से अधिक छात्राएँ अध्ययनरत हैं। रायगढ़ में यह केंद्र जिला प्रशासन के सहयोग से केआईटी कॉलेज परिसर में संचालित हो रहा है, जिससे यहाँ की बालिकाएँ आत्मनिर्भरता और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।  

शिप्रा पुल से कार गिरी, टीआई मृत, एसआई और महिला कांस्टेबल की तलाश जारी

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में बड़ा हादसा सामने आया है. यहां शिप्रा नदी के पुल से बीती रात एक कार नीचे जा गिरी. लोगों को पता चला तो सूचना तुरंत पुलिस को दी गई. जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जायजा लिया. रात में रेस्क्यू के दौरान कार के बारे में कुछ भी पता नहीं चल सका. आज सुबह जब दोबारा रेस्क्यू शुरू हुआ तो उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव बरामद किया है. थाना प्रभारी का अंतिम संस्कार हादसे में मृत थाना प्रभारी अशोक शर्मा का रविवार को चक्रतीर्थ घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एडीजी उमेश जोगा, एसपी प्रदीप शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बड़े बेटे दर्श शर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी। जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ, जब थाना प्रभारी अशोक शर्मा दो अन्य पुलिसकर्मियों के साथ उज्जैन से उन्हेल लौट रहे थे. कार नदी में कैसे गिरी, यह अभी साफ नहीं हो पाया है, लेकिन घटना ने पूरे पुलिस महकमे को सदमे में डाल दिया है.  थाना प्रभारी का किया गया अंतिम संस्कार, SI और आरक्षक की खोज के लिए अभियान जारी  शिप्रा नदी में हुए कार हादसे ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। पुलिस विभाग के लिए बेहद ही विचलित करने वाले खबर रही। रविवार को अंधेरा होने के चलते रेस्क्यू बंद कर दिया गया था। आज सुबह से फिर एसआई और आरक्षक को खोजने के लिए अभियान शुरू हुआ। जिसमें NDRF के 30 और होमगार्ड के 20 से अधिक और शिप्रा तैराक दल के करीब 22 लोग जुटेंगे। उज्जैन में शनिवार को शिप्रा नदी में कार गिरने से लापता हुए 3 पुलिसकर्मियों में से 2 की तलाश अब भी जारी है। आज सुबह तक रेस्क्यू टीमें एसआई मदनलाल निमामा और कॉन्स्टेबल आरती पाल का पता नहीं लगा सकी हैं। इससे पहले रविवार सुबह करीब 8 बजे उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव घटना स्थल से 4 किलोमीटर दूर मिला था। इसके बाद रेस्क्यू अभियान तेज किया गया। लेकिन रविवार देर रात तक चली सर्चिंग के बावजूद न तो कार मिल पाई और न ही दोनों पुलिसकर्मियों का कोई सुराग मिला। अंधेरा होने पर रेस्क्यू बंद कर दिया गया था। आज सुबह से फिर से एसआई और आरक्षक की तलाश के लिए अभियान शुरू हुआ है, जिसमें NDRF के 30, होमगार्ड के 20 से अधिक और शिप्रा तैराक दल के करीब 22 सदस्य जुटे हैं। कॉन्स्टेबल आरती चला रही थीं कार एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि उन्हेल थाना इलाके से दो दिन पहले 14 वर्षीय लड़की गुमशुदा हो गई थी। इसी मामले में तीनों पुलिसकर्मी चिंतामन की ओर जा रहे थे। सफेद रंग की कार कॉन्स्टेबल आरती पाल चला रही थीं। यह कार उन्हीं की थी। सर्चिंग बनी बड़ी चुनौती पुलिस अधिकारियों के अनुसार एनडीआरएफ की टीम गोताखोरों के साथ लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। नदी का तेज बहाव और गहराई तलाश में बड़ी बाधा बन रही है। आशंका है कि दोनों पुलिसकर्मी भी नदी में डूब गए हैं। इस घटना के बाद उज्जैन पुलिस समेत पूरे महकमे में शोक की लहर है। अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही घटना के कारणों का पता लगाया जाएगा। सर्चिंग में ड्रोन की मदद शनिवार देर रात कार नदी में गिरने की सूचना मिलने पर महाकाल टीआई गगन बादल और होमगार्ड के जवान मौके पर पहुंचे थे। रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है। सर्चिंग में दो ड्रोन भी लगाए गए हैं। टीआई बादल ने बताया कि शनिवार रात बड़नगर रोड पर शिप्रा नदी पर बने बड़े पुल से कार गिरने की सूचना मिली थी। कार सवार लोग चक्रतीर्थ से कार्तिक मेला मैदान की ओर जा रहे थे, तभी पुल पर रैलिंग नहीं होने के कारण कार सीधे नदी में गिर गई। दरअसल, उन्हेल थाना प्रभारी एक केस की जांच के लिए शनिवार को उज्जैन आए थे. उनके साथ सब-इंस्पेक्टर मदनलाल और महिला कॉन्स्टेबल आरती पाल भी मौजूद थीं. देर शाम तीनों लौट रहे थे कि उनकी कार शिप्रा पुल के पास अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी. घटना के बाद से ही तीनों के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था. मोबाइल फोन भी बंद थे और उनकी आखिरी लोकेशन शिप्रा पुल के आसपास की मिली. इसके बाद रेस्क्यू शुरू हुआ. आज रविवार की सुबह जैसे ही सर्च ऑपरेशन दोबारा शुरू हुआ, एनडीआरएफ और गोताखोरों की टीम मौके पर उतरी तो घंटों की मशक्कत के बाद नदी से कार को बाहर निकाला गया. उसमें से अशोक शर्मा का शव बरामद किया गया है. फिलहाल सब-इंस्पेक्टर मदनलाल और कॉन्स्टेबल आरती पाल के बारे में अभी कुछ पता नहीं चला है, उनकी तलाश की जा रही है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एनडीआरएफ की टीम गोताखोरों के साथ लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है. नदी का तेज बहाव और गहराई तलाश में बड़ी चुनौती बना हुआ है. आशंका जताई जा रही है कि दोनों पुलिसकर्मी भी नदी में डूब गए हैं. इस घटना के बाद उज्जैन पुलिस समेत पूरे महकमे में शोक की लहर है. वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही घटना के कारणों का पता लगाया जाएगा. घटना को लेकर उज्जैन के एसपी ने क्या कहा? एसपी उज्जैन प्रदीप शर्मा ने कहा कि बहुत ही दुखद घटना हुई है. हमारे उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा, उनके साथ निमामा साहब और एक महिला आरक्षक आरती सिंह गए थे. दो दिन पूर्व एक 14 साल की बच्ची मिसिंग हुई थी, उसी की तलाश में रात में ये लोग रवाना हुए थे. इसी दौरान इनकी गाड़ी डिस लेंस होकर बड़े पुल से नीचे गिरी. अभी करीब दो ढाई किलोमीटर आगे अशोक शर्मा का शव भैरवगढ़ पुल के नीचे से बरामद किया है. एनडीआरएफ की टीम लगी है, बाकी दोनों के लिए सर्च जारी है. टीआई 37 साल से सेवा में थे टीआई अशोक शर्मा (58) मूलत: बुलंदशहर, यूपी के निवासी थे। 27 मई 1988 को कांस्टेबल भर्ती हुए और एसआई रहते हुए उन्हेल थाने का प्रभार संभाल रहे थे। परिवार में पत्नी शशि व दो बेटे हैं। एक डॉक्टर है और दूसरा गुड़गांव में … Read more

प्रदेश भर से आये पीड़ितों की समस्याओं से मुखातिब हुए सीएम योगी, निस्तारण के दिए निर्देश

आमजन से व्यवहार ठीक रखें जनसेवक, दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री योगी  प्रदेश भर से आये पीड़ितों की समस्याओं से मुखातिब हुए सीएम योगी,  निस्तारण के दिए निर्देश सहारनपुर से आई महिला ने राशन कार्ड न होने पर राशन डीलर द्वारा अभद्रता की शिकायत की  सीआरपीएफ के जवान की भी सुनीं समस्या, मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन से कहा- शीघ्र निराकरण कराएं जमीन से जुड़े मामले लेकर भी पहुंचे फरियादी मुख्यमंत्री ने गाजीपुर से आये दिव्यांग की सुनी फरियाद, इलेक्ट्रॉनिक वॉकिंग स्टिक भेंट की आर्थिक सहायता का पत्र लेते हुए सीएम ने महिला से कहा-हॉस्पिटल से लेकर एस्टिमेट दें, सरकार सहायता करेगी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 'जनता दर्शन' किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश भर से आये पीड़ितों की शिकायतें सुनीं और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। जनता दर्शन में 50  से अधिक पीड़ित पहुंचे। सहारनपुर से आई महिला ने बताया कि उनके पास राशन कार्ड नहीं है। जब वे राशन लेने गईं तो राशन डीलर अभद्रता करता है। इस पर मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर जनसेवक आमजन से व्यवहार ठीक रखें। किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं होगा।  जमीन के आए मामलों का भी लिया संज्ञान  सोमवार को 'जनता दर्शन' में सर्वाधिक मामले जमीनी विवाद से जुड़े आए। प्रयागराज से आए सीआरपीएफ के जवान ने भी जमीन से जुड़े मामले को लेकर सीएम के समक्ष अपनी बात रखी। इस पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को इस प्रकरण के शीघ्र निस्तारण का निर्देश दिया। शामली से भी एक महिला अपनी शिकायत लेकर आईं, बताया कि उनके पति असम में तैनात हैं। उन्होंने भी बताया कि प्रयागराज में जमीन ली है, लेकिन कब्जा लेने में परेशानी आ रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पत्र लेकर कार्रवाई का निर्देश दिया।  आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर हर पीड़ित के साथ खड़ी है सरकार  'जनता दर्शन' में आईं मंजू देवी त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बताया कि अपोलो में इलाज चल रहा है। इलाज के लिए आर्थिक सहायता दिला दी जाए। इस पर सीएम ने कहा कि सरकार हर जरूरतमंद मरीज को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। आप भी अस्पताल से एस्टिमेट बनवाकर भिजवाएं। आपके इलाज में खर्च की चिंता सरकार करेगी।  गाजीपुर से आए दिव्यांग को सीएम ने दी इलेक्ट्रॉनिक वॉकिंग स्टिक  'जनता दर्शन' में दिव्यांग भी पहुंचे। गाजीपुर से दिव्यांग उधम यादव ने पेंशन बढ़ाने, आयुष्मान कार्ड, हैंडपंप व आवास दिलाने को लेकर सीएम को प्रार्थना पत्र दिया। सीएम ने तत्काल उनकी समस्या के समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अफसरों को निर्देश दिया।  सीएम ने उधम यादव को इलेक्ट्रॉनिक वॉकिंग स्टिक भी प्रदान की।   बच्चों को दी चॉकलेट, पढ़ाई के बारे में पूछा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'जनता दर्शन' में अभिभावकों के साथ आए बच्चों को दुलारा-पुचकारा। नन्हे-मुन्नों के सिर पर हाथ फेर अपनत्व का अहसास कराया। कुछ बच्चों की पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली। सीएम योगी ने चॉकलेट-टॉफी प्रदान किया और पढ़-लिखकर बच्चों को उज्ज्वल भविष्य बनाने का आशीर्वाद दिया।  

रायपुर: महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती राजवाड़े संबलपुर में करमा तिहार उत्सव में हुईं शामिल

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं और जनभावनाओं से जुड़े करमा तिहार पर्व का आयोजन सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत संबलपुर में हर्षाेल्लास और पारंपरिक रंग-रस के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। श्रीमती राजवाड़े ने क्षेत्रवासियों संग करमा पर्व के पारंपरिक गीतों और नृत्यों की छटा का आनंद लिया और ग्रामीणों को करमा तिहार की बधाई दी। उन्होंने कहा कि करमा तिहार भाईचारे, सामूहिकता और श्रम संस्कृति का पर्व है, जो हमारी ग्रामीण परंपराओं और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं, युवाओं और बच्चों को अपने सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान संबलपुर और आसपास के गांवों के कलाकारों द्वारा करमा नृत्य, पारंपरिक गीत और लोककला की प्रस्तुतियां दी गईं, जिनसे वातावरण उल्लास और उत्सव की भावना से सराबोर हो गया। ग्रामीणजनों ने मंत्री श्रीमती राजवाड़े का पारंपरिक स्वागत किया और कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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चंडीगढ़ पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि राज्य में बाढ़ के कारण हाल में बंद किये गए स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय नौ सितंबर से फिर से खुल जाएंगे। मंत्री ने कहा कि यदि कोई स्कूल या कॉलेज बाढ़ से प्रभावित होता है, तो उसे बंद करने का निर्णय संबंधित उपायुक्त द्वारा लिया जाएगा। पंजाब सरकार ने राज्य में दशकों की सबसे भीषण बाढ़ के मद्देनजर हाल में सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को सात सितंबर तक बंद करने का आदेश दिया था। रविवार को ‘एक्स' पर एक पोस्ट में, बैंस ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी, निजी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय फिर से खुलेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘आठ सितंबर को राज्य के सभी सरकारी स्कूल छात्रों के लिए बंद रहेंगे। शिक्षक विद्यालयों में मौजूद रहेंगे और पंचायतों, नगर परिषदों और नगर निगमों के सहयोग से स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा।'' बैंस ने कहा, "शिक्षक स्कूल भवनों का गहन निरीक्षण करेंगे। यदि कोई समस्या पाई जाती है, तो इसकी सूचना तुरंत जिले के उपायुक्त और इंजीनियरिंग विभाग को दी जानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि नौ सितंबर से सभी सरकारी स्कूल सामान्य रूप से फिर से खुलेंगे। बैंस ने कहा कि निजी विद्यालयों के प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि स्कूल भवन और कक्षाएं पूरी तरह सुरक्षित हों। हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद सतलुज, व्यास और रावी नदियों और मौसमी जलधाराओं में उफान के कारण पंजाब के बड़े हिस्से में बाढ़ आ गई है। इसके अलावा, हाल के दिनों में पंजाब में हुई भारी बारिश ने बाढ़ की स्थिति और विकराल कर दी है।