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जैस्मिन लांबोरिया ने World Boxing Championship में बनाई जगह फाइनल में, हरियाणा का नाम रोशन

भिवानी   लिवरपूल में चल रही वल्र्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत के खिलाडिय़ों का शानदार प्रदर्शन जारी है। विश्व मुक्केबाजी कप अस्ताना की स्वर्ण पदक विजेता जैस्मिन लांबोरिया ने ब्राजील की दो बार की ओलंपियन जुसीलन सेर्कुइरा रोमीयू को मात देकर महिला 57 किलोग्राम भारवर्ग में विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया।  जैस्मिन और रोमीयू का आमना-सामना इससे पहले अस्ताना के फाइनल मुकाबले में हुआ था, जिसमें करीबी जंग के बाद भारतीय मुक्केबाज ने जीत दर्ज की थी। लिवरपूल में जैस्मिन ने तीनों राउंड में दबदबा बनाए रखते हुए 5-0 से मुकाबला जीता और अब वह विश्व चैंपियनशिप पदक से बस एक जीत दूर हैं। वहीं, महिलाओं के 54 किग्रा भार वर्ग में साक्षी का सफर खत्म हो गया, उन्हें तुर्की की हतिसे अकबा के खिलाफ 0-5 से हार झेलनी पड़ी। इसी तरह लिवरपूल में सनमाचा चानू का अभियान भी समाप्त हो गया, जब वह कजाकिस्तान की नताल्या बोगदानोवा से 0-5 से हार गईं। वहीं, अभी सचिन (पुरुष 60 किग्रा) का सामना कजाकिस्तान के बीबार्स झेक्सेन से होगा। सुमित (पुरुष 75 किग्रा) बुल्गारिया के रामी कीवान से भिड़ेंगे। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा का किया भूमि पूजन व शिलान्यास

बस्ती/लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की शिक्षा कैसी होनी चाहिए। आजादी के पांच साल के बाद जब तत्कालीन सरकारें इस दिशा में प्रयास नहीं कर पाईं, तब नाना जी ने गोरखपुर से इस प्रयास को बढ़ाया था। उसके पीछे का ध्येय था कि भारत, भारतीयता, परंपरा,  संस्कृति और मातृभाव से ओतप्रोत ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना आवश्यक है, जो देश को फिर से विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने में योगदान दे सके। इसकी शुरूआत शिक्षा के मंदिरों से ही होती है। शिक्षण संस्थान केवल अक्षर ज्ञान के माध्यम ही नहीं, बल्कि बालक के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं। शिक्षा यदि संस्कार, मूल्यों-आदर्शों, मातृभूमि, महापुरुषों, राष्ट्रीयता के प्रति समर्पण का भाव पैदा नहीं कर पा रही है तो वह कुशिक्षा और भटकाव है। आजादी के तत्काल बाद उसका समाधान सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा का भूमि पूजन, शिलान्यास, पौधरोपण व पुस्तक का विमोचन भी किया। आरएसएस के तत्कालीन प्रचारक नाना जी देशमुख के नेतृत्व में सरस्वती शिशु मंदिर की पहली शाखा गोरखपुर में स्थापित की गई थी। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के मातृभूमि होने का सौभाग्य गोरक्ष प्रांत को प्राप्त है। विद्या भारती के अंतर्गत संचालित हजारों शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्र निर्माण के जिस अभियान के साथ जुड़े हैं, उसकी ताकत देश-दुनिया समझती है। शिशु मंदिर से निकले छात्र समाज का नेतृत्व भी कर रहे और मार्गदर्शन भी सीएम योगी ने कहा कि पाठ्यक्रम सरकार तैयार करती है। सरकार सहयोग करे या न करे। बिना सरकार की सहायता के अपने दम और स्वयंसेवकों के सहयोग से भारतीयता के प्रति अनुराग रखने वाले नागरिकों के माध्यम से सरस्वती शिशु मंदिर ने इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। गोरखपुर के पक्कीबाग में जब पहला सरस्वती शिशु मंदिर स्थापित हुआ तो उस समय मात्र पांच छात्र थे, लेकिन आज शिशु मंदिर के 12 हजार विद्यालय हैं। यह संस्थान बच्चों के अंदर भारत व भारतीयता के प्रति नागरिक के रूप में कर्तव्यों का बोध कराने और सुयोग्य नागरिक बनाने के लिए राष्ट्रीय दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन कर रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर से निकले छात्र समाज को नेतृत्व भी दे रहे और मार्गदर्शन भी कर रहे हैं।   शिक्षा से होती देश के समर्थ, आत्मनिर्भर व शक्तिशाली होने की शुरुआत   सीएम योगी ने कहा कि देश के समर्थ, आत्मनिर्भर व शक्तिशाली होने की शुरुआत शिक्षा से होती है। दुनिया में समृद्धि की चर्चा होती है तो पहला पैरामीटर शिक्षा, फिर स्वास्थ्य, उसके बाद कृषि-जल संसाधन, तब कौशल विकास व रोजगार होता है। फिर पर्यावरण को ध्यान में रखकर विकास की बात होती है। यह पैरामीटर तय करते हैं कि समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। इस मंशा के साथ जब कोई अभियान बढ़ता है तो वह न केवल देशहित, बल्कि मानवता का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आज का कार्यक्रम सुयोग्य नागरिकों को गढ़ने, तलाशने और तराशने का महत्वपूर्ण मंच शुरू करने जा रहा है। इसके माध्यम से भारत के सुयोग्य नागरिक विकसित करने का मंच विकसित हो रहा है। बिना प्लानिंग कार्य करने से चूक जाते हैं सीएम ने कहा कि जब बिना किसी प्लानिंग कार्य करते हैं तो चूक जाते हैं। हर व्यवस्था, प्रबंधन, सरकार, कॉरपोरेट घराना वर्ष भर की योजना बनाता है, फिर लघु, मध्यम व दीर्घ अवधि के कार्यक्रम तय करता है। इसके माध्यम से आगे के लक्ष्यों को प्राप्त करके हम भी सशक्त होंगे और भावी पीढ़ी, संस्थान को भी समर्थ भी बना पाएंगे। सरकार हर साल बजट प्रस्तुत करती है। इसमें विजन होता है कि एक वर्ष, फिर पांच वर्ष, दस वर्ष, 25 वर्ष की योजना क्या होगी। भारत की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष पर पीएम मोदी ने आगामी 25 वर्ष की कार्ययोजना तैयार करने को कहा।  भारत को विकसित बनाने के लिए पंच प्रण को जीवन का हिस्सा बनाने को कहा।   विरासत का करना होगा सम्मान सीएम ने कहा कि विरासत का सम्मान करना होगा। हमारे पूर्वजों (1953 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी) ने संकल्प लिया था कि एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे। कश्मीर में शेष भारत का कानून लागू करने का शंखनाद किया था। उन्हें बलिदान भी देना पड़ा। 1952 में कांग्रेस ने बाबा साहेब के न चाहने के बावजूद जबरन लागू किया, लेकिन पीएम मोदी ने डॉ. मुखर्जी के संकल्प को साकार कर आतंकवाद व भारत विरोधी गतिविधियों-साजिशों को समाप्त करके कश्मीर को भारत के कानून के साथ जोड़ा। 500 वर्ष का इंतजार समाप्त हुआ और अयोध्या में रामललाा के मंदिर का निर्माण हुआ। विपक्षी दल चाहते थे कि यह नहीं होना चाहिए। सीएम ने कहा कि प्रभु श्रीराम आदर्श व भारतीयता के प्रतीक है। जब महर्षि वाल्मिकी ने नारद जी से पूछा कि मुझे कुछ लिखना है, ऐसा कौन सा आदर्श है। तब उन्होंने कहा कि इस धरती पर एक ही चरित्र है, आप श्रीराम पर लिखें। हमें महर्षि वाल्मीकि, प्रभु राम,  श्रीकृष्ण की परंपरा पर गौरव की अनुभूति है। भारत और भारतीयता के लिए जिन महापुरुषों व स्वतंत्र भारत में सीमाओं की रक्षा करते हुए जिन्होंने बलिदान दिया, वे सभी हमारे आदर्श हैं। उनका सम्मान और विरासत का संरक्षण करना हर भारतीय का दायित्व है। विदेशियों ने भारत को लूटकर अर्जित किया, जबकि भारत ने पुरुषार्थ से समृद्धि को बनाया सीएम ने गुलामी के अंशों को सर्वथा समाप्त करने पर भी चर्चा की। बोले कि गुलामी की मानसिकता देश के अंदर छा गई थी। भारतीय को हेय और विदेशी को संपन्न की दृष्टि से देखे जाने लगा। इस दुष्प्रवृत्ति पर 11 वर्ष में आपने रोक लगाते हुए देखा होगा। जो भारतीय है, वह सर्वश्रेष्ठ है और वह ऐसा इसलिए है, क्योंकि जो विदेशियों ने भारत को लूटकर अर्जित किया है, जबकि भारत ने अपने पुरुषार्थ से समृद्धि को बनाया था। 400 वर्ष पहले भारत दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था थी। दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान 25 फीसदी था। जब देश आजाद हुआ तो भारत का योगदान केवल दो फीसदी रह गया। भारत को लूटा गया। भारत और भारतीयता के मन में यह भाव पैदा किया गया कि भारतीयों को आदर्श के रूप में प्रस्तुत करने वालों को लोग हतोत्साहित करते थे। … Read more

सीमा पर अलर्ट: नेपाल में प्रदर्शन, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में एसएसबी ने बढ़ाई निगरानी

पीलीभीत /लखीमपुर खीरी नेपाल में प्रदर्शन के कारण बिगड़े हालात को देखते हुए पीलीभीत और लखीमपुर खीरी जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सीमा पर चौकसी बढ़ाने के साथ ही आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच की जा रही है। पीलीभीत जिले में अफसरों के निर्देश पर माधोटांडा और हजार थाना पुलिस ने एसएसबी के साथ सीमा क्षेत्र में गश्त तेज कर दी है। सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। पुलिस के साथ खुफिया तंत्र भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई हो सके। सीमा पर प्रवेश करने वाले और बाहर जाने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है, साथ ही वाहनों की तलाशी भी ली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है। फिलहाल सीमा क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह तैयार है। गौरीफंटा बॉर्डर पर भी सर्तकता बढ़ी लखीमपुर खीरी के पलियाकला में भारत-नेपाल के गौरीफंटा बॉर्डर पर भी सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। यहां पर पुलिस व एसएसबी के जवान चेकिंग कर रहे हैं। नेपाल के धनगढ़ी शहर में चल रहे प्रदर्शन के बीच मंगलवार को बॉर्डर पर भी काफी चौकसी दिखाई दी। सुरक्षा एजेंसियां दलबल के साथ चेकिंग में लगी रही। नेपाल जाने-आने वाले लोगों की चेकिंग की जा रही है।  

अहर्निश प्रासंगिक हैं युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के विचार

  पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण तृतीया पर बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा लोक कल्याण को समर्पित रहा महंत दिग्विजयनाथ जी का जीवन गोरखपुर, कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने, विरासत पर गौरव की अनुभूति करने और गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने की सनातनी परंपरा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष स्मृतिशेष गुरुजन की स्मृति में अध्यात्म और राष्ट्रीयता के सुर गुंजित होते हैं। अवसर होता है युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का। इस वर्ष ब्रह्मलीन महंतद्वय की स्मृति में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा 4 सितंबर से और समाज व राष्ट्र को प्रभावित करने वाले समसामयिक विषयों पर चिंतन-मंथन के सांगोष्ठिक कार्यक्रम 5 सितंबर से जारी हैं। इस साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत आश्विन कृष्ण तृतीया पर 10 सितंबर (बुधवार) को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि पर तथा आश्विन कृष्ण चतुर्थी पर 11 सितंबर (गुरुवार) को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में किया जाएगा। पुण्य स्मरण का यह कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में होगा जहां देशभर के प्रमुख संतजन उपस्थित रहेंगे। पुण्यतिथि समारोह में बुधवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की स्मृतियों के जीवंत होने के इस अवसर पर यह जानना भी प्रासंगिक है कि उन्हें युगपुरुष क्यों कहा जाता है। भौतिक विद्यमानता न होने के बावजूद जो व्यक्तित्व अपने कार्यों-विचारों से अपने बाद की पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं, सही अर्थों में युगपुरुष होते हैं। कारण, हरेक कालखंड में उनके बताए मार्गों, विचारों और आदर्शों की प्रासंगिकता रहती है। ऐसे ही युगपुरुष हैं ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ। वर्ष 1935 से 1969 तक नाथपंथ के विश्व विख्यात पीठ के कर्ता-धर्ता रहे ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की बुधवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को 56वीं पुण्यतिथि है।  पांच दशक से अधिक समय से उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को श्रद्धा भाव से न केवल नमन-स्मरण किया जाता है बल्कि उनपर अमल करने का संकल्प भी लिया जाता है। महंत जी न केवल गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी रहे बल्कि उनका पूरा जीवन राष्ट्र, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा व समाजसेवा के जरिये लोक कल्याण को समर्पित रहा। तरुणाई से ही वह देश की आजादी की लड़ाई में जोरदार भागीदारी निभाते रहे तो देश के स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक एकता और उत्थान के लिए। इसके लिए शैक्षिक जागरण पर उनका सर्वाधिक जोर रहा। महंत दिग्विजयनाथ का जन्म वर्ष 1894 में वैशाख पूर्णिमा के दिन चित्तौड़, मेवाड़ ठिकाना ककरहवां (राजस्थान) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नान्हू सिंह था। पांच वर्ष की उम्र में 1899 में इनका आगमन गोरखपुर के नाथपीठ में हुआ। अपनी जन्मभूमि मेवाड़ की माटी की तासीर थी कि बचपन से ही उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान से समझौता न करने की प्रवृत्ति कूट कूटकर भरी हुई थी। उनकी शिक्षा गोरखपुर में ही हुई और उन्हें खेलों से भी गहरा लगाव था। 15 अगस्त 1933 को गोरखनाथ मंदिर में उनकी योग दीक्षा हुई और 15 अगस्त 1935 को वह इस पीठ के पीठाधीश्वर बने। वह अपने जीवन के तरुणकाल से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते रहे। देश को स्वतंत्र देखने का उनका जुनून था कि उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में स्कूल छोड़ दिया। उन पर लगातार आरोप लगते थे कि वह क्रांतिकारियों को संरक्षण और सहयोग देते हैं। 1922 के चौरीचौरा के घटनाक्रम में भी उनका नाम आया लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता के सामने ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और उन्हें रिहा कर दिया गया। श्रीराम मंदिर आंदोलन में ब्रह्मलीन महंतश्री की रही महती भूमिका अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण को लेकर हुए आंदोलनों में गोरक्षपीठ की महती भूमिका से सभी वाकिफ हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ इस आंदोलन में नींव के पत्थर हैं। 1934 से 1949 तक उन्होंने लगातार अभियान चलाकर आंदोलन को न केवल नई ऊंचाई दी बल्कि 1949 में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भी रहे। 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति प्रकट होने के नौ दिन पहले महंत दिग्विजय नाथ के नेतृत्व में अखंड रामायण के पाठ का आयोजन शुरू हो गया था। रामलला के प्रकट होने के समय महंत जी स्वयं वहां उपस्थित थे। पांच सौ वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि स्थित मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। प्रभु रामलला के मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन को उनके बाद उनके शिष्य महंत अवेद्यनाथ ने निर्णायक बनाया तो कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी तब आई जब राज्य की सत्ता का नेतृत्व भी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। ऐसे में जब भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर का जिक्र होगा, तो वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ आप ही स्मरित होंगे। पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति के अमर नायक हैं महंत दिग्विजयनाथ महंत दिग्विजयनाथ का नाम पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति लाने वाले नायक के रूप में अमर है। उन्होंने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा की जो ज्योति जलाई, उससे आज पूरा अंचल प्रकाशित हो रहा है। शिक्षा क्रांति के लिए उन्होंने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। एक किराए के मकान में परिषद के अंतर्गत महाराणा प्रताप क्षत्रिय स्कूल शुरू हुआ। 1935 में इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली और 1936 में हाईस्कूल की भी पढाई शुरू हुई। नाम 'महाराणा प्रताप हाई स्कूल' हो गया। इसी बीच महंत दिग्विजयनाथ के प्रयास से गोरखपुर के सिविल लाइंस में पांच एकड भूमि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को प्राप्त हो गयी और महाराणा प्रताप हाईस्कूल का केन्द्र सिविल लाइंस हो गया तथा देश के आजाद होते समय यह विद्यालय महाराणा प्रताप इन्टरमीडिएट कालेज के रुप में प्रतिष्ठित हुआ। 1949-50 में इसी परिसर में महाराणा प्रताप डिग्री कालेज की स्थापना महंतजी की अगुवाई में हुई। शिक्षा को लेकर उनकी सोच दूरदर्शी और निजी हित से परे थी। यही वजह थी कि उन्होंने 1958 में अपनी संस्था महाराणा प्रताप डिग्री कालेज को गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु दान में दिया। बाद में परिषद की तरफ से उनकी स्मृति में दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना … Read more

मोनाली ठाकुर की निजी जिंदगी में उलझन, शादी के 3 साल बाद सामने आया राज और तलाक की चर्चा

मुंबई  ‘सवार लूं’ और ‘मोह मोह के धागे’ जैसे सुपरहिट गानों से खास पहचान बनाने वालीं बॉलीवुड की जानी-मानी प्लेबैक सिंगर मोनाली ठाकुर इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं. उनके और स्विट्जरलैंड के रेस्टोरेंट मालिक माइक रिक्टर के बीच तलाक की अफवाहें जोर पकड़ रही हैं. हालांकि, मोनाली और माइक ने इन अफवाहों पर न तो पुष्टि की है और न ही खंडन, लेकिन मोनाली की हालिया इंस्टाग्राम स्टोरी ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है. मोनाली ठाकुर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर इंस्टाग्राम पर ‘द रीजन’ टाइटल से एक दिल दहला देने वाली स्टोरी शेयर की जो उनके म्यूजिक वीडियो, ‘एक बार फिर’ की एक झलक है. उनकी इस स्टोरी को देखने के बाद फैंस अंदाजा लगा रहे हैं कि कुछ तो गड़बड़ है. इस पोस्ट ने बढ़ाया शक इन विजुअल्स में उन्हें ऐसे डिस्ट्रेसिंग सीन्स में दिखाया गया है जो इमोशनल और फिजिकल शोषण को दर्शाते हैं, जिसमें गला घोंटने के पल भी शामिल हैं. मोनाली ने इस गाने को अपनी अब तक की ‘सबसे निजी’ रचना बताया, हालांकि उन्होंने इसके पीछे की कहानी को अपनी निजी जिंदगी से जोड़ने के बारे में कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया. इस पोस्ट ने फैंस और मीडिया के बीच यह सवाल उठाया कि क्या यह गाना उनकी शादी में चल रही उथल-पुथल को दिखाता है. तलाक की अफवाहों का कारण मोनाली और माइक की शादी में तनाव की खबरें तब शुरू हुईं, जब मोनाली ने अपने पति माइक रिक्टर को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया. रिपोर्ट में एक सूत् के हवाले से बताया गया है , ‘इन सालों में उनके बीच बहुत कुछ बदल गया है. अब कोई उन्हें एक कपल के रूप में बात नहीं करता. लंबी दूरी की शादियां अक्सर ऐसे अंत की ओर बढ़ती हैं.’ सूत्र ने यह भी पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर यह कट-ऑफ दूरियों के संकेत हैं और शायद मोनाली सही समय का इंतजार कर रही हैं ताकि इस मुद्दे पर खुलकर बात कर सकें. इसके अलावा, माइक ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को प्राइवेट कर लिया है, जिसने इन अफवाहों को और बल दिया. मोनाली ने अपनी शादी की तस्वीरें भी अपने प्रोफाइल से हटा दी हैं, जिसे कई लोग उनके रिश्ते में दरार का संकेत मान रहे हैं. मोनाली और माइक की लवस्टोरी, 2017 में गुपचुप शादी मोनाली और माइक रिक्टर ने 2017 में मुंबई में एक निजी समारोह में शादी की थी, जिसे उन्होंने तीन साल तक दुनिया से छिपाकर रखा. 2020 में ईटाइम्स के साथ एक इंटरव्यू में मोनाली ने इस राज से पर्दा उठाया था. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी शादी को सोशल मीडिया पर आधिकारिक नहीं किया था, लेकिन फैंस ने उनकी तस्वीरों में अंगूठी देखकर अनुमान लगा लिया था. मोनाली ने यह भी शेयर किया था कि माइक ने 2016 की क्रिसमस की पूर्व संध्या पर स्विट्जरलैंड में एक रोमांटिक अंदाज में उन्हें 50 गुलाबों के साथ प्रपोज किया था. यह वही जगह थी जहां उनकी मुलाकात पहली बार हुई थी. हालांकि, उनकी शादी का दिन भी ड्रामे से भरा था. मोनाली ने बताया था कि माइक को गलत जानकारी के कारण बिना वीजा के भारत आना पड़ा, जिसके चलते उन्हें देश से बाहर कर दिया गया था. बाद में भारत सरकार और गृह मंत्रालय की मदद से उनकी शादी हो सकी. अफवाह या सच कपल ने साध रखी है चुप्पी मोनाली और माइक ने तलाक की अफवाहों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. फैंस और मीडिया इस इंतजार में हैं कि क्या मोनाली अपनी निजी जिंदगी के बारे में खुलकर बात करेंगी. तब तक, ‘एक बार फिर’ और उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी ने इन अफवाहों को और रहस्यमयी बना दिया है.

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों के आयोजन पर जोर दे रही योगी सरकार

  लखनऊ, योगी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए विभागीय योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। इसके तहत आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा ताकि योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। योगी सरकार ने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे योजनाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सके। योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि योजनाओं की जानकारी को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में फैलाने के लिए मीडिया, सोशल मीडिया, विद्यालयों, पंचायतों, नगरीय निकायों और स्थानीय शिविरों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले मिलेगी छात्रवृत्ति आगामी 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले छात्रवृत्ति वितरित की जाएगी। यह पहली बार होगा जब छात्रवृत्ति का वितरण समय से पूर्व सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। योगी सरकार ने प्रत्येक पात्र लाभार्थी को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों का आयोजन दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार ने रोजगार मेलों के आयोजन पर भी जोर दिया है। ये मेले विभागीय स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, जिससे दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे योजनाओं के प्रचार-प्रसार को और प्रभावी बनाने के लिए रचनात्मक तरीके अपनाएं। सोशल मीडिया के माध्यम से योजनाओं की जानकारी को वायरल करने और स्थानीय स्तर पर शिविरों के आयोजन से जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि योगी सरकार की इस पहल से न केवल दिव्यांगजनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया जाएगा, बल्कि उनकी प्रतिभा और क्षमता को समाज में एक नई पहचान भी मिलेगी। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को दिव्यांग सशक्तीकरण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

पितृपक्ष में पूजा का आसान तरीका: घर बैठे पितरों को दें श्राद्ध

पंचांग के मुताबिक, पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर समाप्त होते हैं. मान्यताओं के अनुसार, 16 दिनों के लिए पितर धरती पर आते हैं और अपने लोगों को आशीर्वाद देकर जाते हैं.  ज्योतिषियों के मुताबिक, पितृ पक्ष में लोग अपने पितरों का पिंडदान या श्राद्ध कर्म करने के लिए कई तीर्थस्थलों जैसे गया, वाराणसी, इलाहाबाद, हरिद्वार आदि जगहों पर जाते हैं जिससे पितरों की आत्मा को शांति प्रदान होती है. लेकिन कई बार तीर्थस्थलों पर जाकर श्राद्ध कर्म करना संभव नहीं हो पाता है, जिसके कारण लोग अपने घरों पर ही ब्राह्मण को बुलाकर श्राद्ध कर्म या पिंडदान की प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं. तो चलिए जानते हैं कि घर पर पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने की पूरी विधि क्या है.  पितृ पक्ष में घर पर श्राद्ध करने की विधि घर पर श्राद्ध करने से लिए सबसे पहले जल्दी उठकर स्नान करें और सफेद रंग के साफ सुथरे वस्त्र पहनें. उसके बाद घर की किसी शांत या खुली जगह पर आसन बिछाएं. फिर, उस पर कपड़ा डालकर अपने पितर की तस्वीर रखें और उनकी तस्वीर के आगे तांबे का लोटा रखें. उस लोटे में जल, काले तिल और कुश डालें. उसके बाद, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हाथ में जल, तिल और कुश लें और पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करें. इसके बाद पितरों को जल अर्पित करते हुए 'ऊं पितृदेवाय नम: मंत्र का जाप करें. याद रखें कि पितरों का तर्पण कुतप वेला यानी दोपहर में ही करें क्योंकि इस वेला में तर्पण का विशेष महत्व होता है. कुतुप वेला दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक होती है.  फिर, पितरों को सात्विक भोजन अर्पित करें जैसे खिचड़ी, खीर, चावल, मूंग आदि और यह सात्विक भोजन केले के पत्ते पर ही रखें. उसके बाद संभव हो तो घर पर बुलाए ब्राह्मण या किसी गरीब को भोजन या दान दें.

दक्षिण मुखी घर वाले जरूर पढ़ें: जानें क्यों कुछ लोगों को होता है नुकसान और क्या हैं आसान उपाय

अक्सर आपने लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि दक्षिण मुखी यानी साउथ डायरेक्शन का घर नहीं लेना चाहिए। ऐसा घर फलता नहीं है। मगर, क्या यह बात पूरी तरह से सही है। क्या दक्षिण मुखी घर किसी को नहीं फलता। यदि आपका घर भी दक्षिण दिशा में बना है, तो क्या उपाय कर सकते हैं। अगर, आपके भी मन में यह सवाल है, तो आज हम आपको इसके फायदों के बारे में बता देते हैं। मगर, इन बातों को मानने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल मजबूत स्थिति में है, उनके लिए दक्षिण मुखी घर ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत हो सकते हैं। ऐसे लोग जमीन-जायदाद के मामले में अच्छी ग्रोथ हासिल करते हैं। इन लोगों के लिए होता है फायदेमंद दक्षिण मुखी घर को इंडस्ट्रियल स्पेस या वर्क प्लेस के रूप में इस्तेमाल किया जाए, तो सफलता और समृद्धि मिल सकती है। जनसंपर्क, मीडिया और फिल्म उद्योग के लिए दक्षिण मुखी मकान अच्छे साबित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को ऐसी दिशा के घर फलते हैं। यदि वास्तु के अनुसार बनाया गया हो, तो दक्षिण मुखी घर के कई फायदे हो सकते हैं। सूर्य की रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह ठीक हो, तो ऐसे घर से कई तरह के फायदे होते हैं। दक्षिण मुखी घर में पूरे दिन पर्याप्त धूप आती है, जिससे घर में ऊर्जा और सकारात्मकता बनी रहती है। दरअसल, सूर्य की ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। दक्षिण मुखी घर में सूर्य की किरणें घर में लंबे समय तक बनी रहती हैं। इससे घर में लगातार सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहता है। क्या उपाय करने चाहिए हालांकि, यदि आपको दक्षिण मुखी घर फल नहीं रहा है, तो उसके वास्तु दोषों को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिह्न बनाने से लाभ होता है। पंचमुखी हनुमानजी की मूर्ति लगाई जा सकती है। गणेश जी की प्रतिमा को ऐसे लगाना चाहिए, जिससे उनकी पीठ न दिखे। मुख्य द्वार पर लाल रंग की डोरमैट रखने से भी लाभ मिलता है।

बड़ा बदलाव: राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम पर काम शुरू, बनी 7 अफसरों की समिति

रायपुर रायपुर में एक नवंबर से लागू होने वाले पुलिस कमिश्नरेट पर काम शुरू हो गया है. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार के निर्देश पर डीजीपी अरुणदेव गौतम ने सीनियर एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में सात आईपीएस अधिकारियों की कमेटी बनाई है, जिसने ड्राफ्ट पर काम प्रारंभ कर दिया है. एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में बनाई गई समिति में पुलिस महानिरीक्षक (नारकोटिक्स) अजय यादव, पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा, पुलिस महानिरीक्षक (अअवि) ध्रुव गुप्ता, उप पुलिस महानिरीक्षक (दूरसंचार) अभिषेक मीणा, उप पुलिस महानिरीक्षक (सीसीटीएनएस) संतोष सिंह और , पुलिस अधीक्षक (विआशा) प्रभात कुमार बतौर सदस्य शामिल किए गए हैं. इसके अतिरिक्त वैधानिक पहलुओं के संबंध में आवश्यकता पड़ने पर लोक अभियोजन संचालनालय में संयुक्त संचालक मुकुला शर्मा को टीम में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. कमेटी इस बात पर मंथन करेगी कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम को छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट 2007 के प्रावधानों के अनुसार बनाया जाए या फिर इसके लिए अलग से एक्ट बनाया जाए. सरकार अगर अलग से एक्ट बनाना चाहेगी तो फिर इसके लिए दो रास्ते हैं. पहला विधानसभा से अधिनियम पारित कराया जाए. या फिर राज्यपाल से अध्यादेश जारी कराना. चूंकि राज्योत्सव के मौके पर रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की शुरुआत होनी है, ऐसे में कई राज्यों के सिस्टम का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में बेस्ट ड्राफ्ट बनाने का प्रयास किया जा रहा है. क्या है पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली? पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम पहले से दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल, इंदौर जैसे बड़े महा नगरों में लागू है. इसमें शहर की कमान किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को दी जाती है, जो आमतौर पर डीजी, एडीजी या आईजी रैंक के हो सकते हैं. कौन-सा अधिकारी बैठेगा, यह राज्य सरकार तय करती है और यह शहर की जनसंख्या व क्राइम रिकॉर्ड पर निर्भर करता है. पुलिस आयुक्त के अधिकार और जिम्मेदारियां कमिश्नर के पास ऐसे कई अधिकार होंगे जो वर्तमान में कलेक्टर या मजिस्ट्रेट के पास होते हैं, जैसे- धारा 144 या कर्फ्यू लगाने का निर्णय धरना-प्रदर्शन की अनुमति देना आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई बड़े सार्वजनिक आयोजनों की अनुमति जिला बदर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का आदेश इससे पुलिस को किसी भी स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की शक्ति मिलेगी और कलेक्टर पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. कलेक्टर के अधिकार हो जाएंगे सीमित कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद कलेक्टर के अधिकार भी सीमित हो जाएंगे. वह सिर्फ रेवेन्यू का काम देखेंगे, जबकि अन्य अनुमति संबंधी कार्य कमिश्नर के हाथों में होंगे. एसपी और आईजी का क्या होगा? कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद जिले में लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी कमिश्नर के हाथों में होगी. यदि सरकार चाहेगी तो, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग से एसपी (रूरल) की नियुक्ति हो सकती है. अगर पूरा जिला कमिश्नरेट के तहत आता है तो एसपी रैंक के अधिकारियों को डीसीपी बनाया जा सकता है. फिलहाल, सीएम विष्णुदेव साय ने केवल इसकी घोषणा की है. अधिकारों का दायरा और तैनाती की प्रक्रिया आने वाले दिनों में तय होगी. रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर कौन होगा, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई है.

प्रधानमंत्री मोदी करेंगे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का उद्घाटन- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जीएसटी सुधार, आम आदमी को सुविधा और समृद्धि देने वाला उपहार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी करेंगे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का उद्घाटन- मुख्यमंत्री डॉ. यादव दशहरे के बाद भोपाल में होगी दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वच्छता ही सेवा की थीम पर मनाया जाएगा सेवा पखवाड़ा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया मंत्रीगण को संबोधित स्वदेशी से समृद्धि के संकल्प के साथ मनेगी दीपावली भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में नये जनरेशन का जीएसटी रिफॉर्म लाकर जो सुधार किया है, वह आम आदमी, किसानों, एमएसएमई, मध्यम वर्ग, महिलाओं और युवाओं के जीवन को स्वावलंबी बनायेगा। यह आम आदमी के जीवन को सुविधा देने वाला उपहार है। अब की बार पूरा देश स्वदेशी से समृद्धि के संकल्प के साथ दीपावली मनाएगा। स्वदेशी से स्वावलंबन के दीप घर-घर जलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक के पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि हम सब को जीएसटी सुधारों की जानकारी जन-जन तक पहुँचानी चाहिए। संचार के सभी माध्यमों से इसका प्रचार-प्रसार किया जाये। स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार की थीम पर होगा कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेशवासियों के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को धार जिले के बदनावर में पीएम मित्र पार्क का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार, स्वदेशी, एक पेड़ मां के नाम, एक बगिया मां के नाम, पीएम-जनमन योजना, धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान और मिशन कर्मयोगी की थीम पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अस्वच्छ क्षेत्रों का चिह्नांकन कर उन्हें स्वच्छ बनाने के लिए होंगी गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा की थीम पर सेवा पखवाड़ा मनाया जाएगा। स्वच्छोत्सव की थीम पर शहरी और ग्रामीण इलाकों में अस्वच्छ क्षेत्रों का चिह्नांकन कर उन्हें स्वच्छ बनाने के लिए गतिविधियां होंगी। पखवाड़े के अंतर्गत सफाई मित्र सुरक्षा शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन गतिविधियों में स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों को भी सहभागी बनाया जाए। मंत्रीगण प्रशासनिक, अधिकारी और राजनीतिक पदाधिकारी का सहयोग लेते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता- सेवा गतिविधियों का अधिक से अधिक विस्तार करें। आगामी वर्षों की कार्य योजना और विजन डॉक्यूमेंट पर होगी चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दशहरे के बाद भोपाल में दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। कॉन्फ्रेंस में कलेक्टर, एसपी, कमिश्नर, आईजी और पुलिस कमिश्नर भाग लेंगे। कॉन्फ्रेंस में आगामी वर्षों की कार्ययोजना और विजन डॉक्यूमेंट पर भी चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को इससे पहले अपने-अपने विभागों की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए।