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चार साल में पड़ोसी देशों में उथल-पुथल, भारत के चार पड़ोसी देशों में हुए तख्तापलट

नई दिल्ली पिछले चार सालों में भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक हलचल ने अस्थिरता की नई परिभाषा गढ़ दी है। पिछले चार सालों में भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक हलचल ने ऐसा तूफान खड़ा किया है कि अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल—सबकी सत्ता हिल गई। काबुल में तालिबान का कब्जा, श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनकारियों का ‘स्विमिंग पूल पार्टी’, और नेपाल में युवा-जनरेशन का जबरदस्त Gen-Z क्रेज—ये सब घटनाएं साबित करती हैं कि सत्ता अब किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं रही।    नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन इतने तेज़ी से फैल गए कि संसद और सुप्रीम कोर्ट तक आंदोलन की लहर पहुंच गई। पांच मंत्रियों के इस्तीफे, विपक्षी सांसदों की सामूहिक बगावत और राष्ट्रपति के घर तक प्रदर्शनकारियों का घेराव—प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा महज एक शुरुआत थी; विरोध की आग अब भी धधक रही है। अफगानिस्तान: तालिबान की वापसी 2021 में अफगानिस्तान का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह उलट-पुलट गया। अमेरिकी मदद से स्थापित अशरफ गनी सरकार धराशायी हो गई और तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया। अगस्त के महीने में शहर में दाखिल होते ही तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर नियंत्रण जमा लिया, जबकि एयरपोर्ट पर भगदड़ में 170 से अधिक लोग मारे गए। भ्रष्टाचार, कमजोर सेना और अमेरिकी सैनिकों की वापसी ने विद्रोह को हवा दी। आज भी तालिबान का शासन कायम है, महिलाओं के अधिकारों पर पाबंदियाँ हैं और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की धमक लगातार बनी हुई है। श्रीलंका: आर्थिक संकट से राजनीति तक अफगानिस्तान के संकट के ठीक एक साल बाद, 2022 में श्रीलंका आर्थिक तूफ़ान की चपेट में आ गया। महंगाई, ईंधन और दवाइयों की किल्लत ने राजधानी कोलंबो की सड़कों को जलते हुए अंगारों में बदल दिया। लाखों लोग प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को रातोंरात देश छोड़ना पड़ा और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा देना पड़ा। विरोध इतना उग्र था कि राष्ट्रपति भवन और संसद तक प्रदर्शनकारियों के कदमों की आवाज गूंज उठी। बांग्लादेश: छात्र आंदोलन और सत्ता परिवर्तन 2024 में बांग्लादेश के छात्र आंदोलनों ने ऐसा तूफ़ान खड़ा कर दिया कि शेख हसीना की सरकार सत्ता की कुर्सी से खिसक गई। भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और आरक्षण नीति के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों ने पूरे देश की राजनीति हिला कर रख दी। हिंसक झड़पों और गोलीबारी में 300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा बैठे। इसके बाद सेना ने अंतरिम सरकार बना दी, लेकिन आम चुनाव अब तक नहीं हो पाए हैं और देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल अब भी गरम है। बांग्लादेश आज भी संघर्ष और आंदोलन की ज्वाला में झुलस रहा है। पाकिस्तान में चार बार तख्तापलट पाकिस्तान में 1947 से ही सेना का हस्तक्षेप सत्ता में रहा है. पाकिस्तान ने एक दो नहीं बल्कि चार बार तख्तापलट का दंश झेला है. पहला तख्तापलट 1953-54 में हुआ. इसके बाद 1958 में सत्ता बदली जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर अली मिर्जा ने पाकिस्तान की संविधान सभा और तत्कालीन फिरोज खान नून की सरकार को बर्खास्त किया था. फिर आया 1977 का दौर. तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे. चुनावों में धांधली के विवाद के बीच सेना प्रमुख जिया उल हक ने तख्तापलट किया. 1999 में फिर वही कहानी दोहराई गई जब सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट कर नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल किया था.  अन्य पड़ोसी देश: पाकिस्तान और मालदीव पाकिस्तान में इमरान खान के हटने के बाद राजनीति का पारा लगातार उँचा है। इमरान समर्थकों की रैलियां, हिंसक झड़पें और देशभर में तनाव ने सरकारी तंत्र को हिला कर रख दिया है। वहीं, बलूचिस्तान में अलगाववादी गुट सत्ता के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। दूसरी तरफ़ मालदीव में नव निर्वाचित राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के ‘भारत विरोधी’ रुख़ और उनकी रूढ़िवादी नीतियों ने द्विपक्षीय संबंधों में खटास पैदा कर दी है। घरेलू स्तर पर भी उनका प्रशासन पिछली सरकार की तुलना में कड़ा और जुझारू नजर आ रहा है।  यहां लगा अमेरिका पर आरोप भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश भी 2024 में इसी तरह की आग में जल उठा था. शेख हसीना की सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और दमन के आरोप थे. जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में 30% कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ. जल्दी ही यह आंदोलन व्यापक हो गया. सड़कों पर उतरे लाखों युवाओं ने शेख हसीना के खिलाफ नारे लगाए और देखते ही देखते बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना घटी. बता दें कि बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना से अमेरिका पर आरोप लगा था. शेख हसीना के बेटे ने तख्तापलट के लिए अमेरिका पर शक जताया था. श्रीलंका की घटना  इसके अलावा साल 2022 में श्रीलंका में भी तख्तापलट की घटन देखी गई. श्रीलंका की अर्थव्यवस्था चरम संकट में थी. ईंधन, दवा, भोजन की भारी किल्लत थी. श्रीलंका ऋणों के बोझ तले दबा था लोगों का मानना था कि राजपक्षे परिवार की भ्रष्ट शासन ने जनता को तंग कर दिया. भारी संख्या में परेशान जनता सड़क पर उतरी. राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और संसद के बाहर डेरा डाला 'गोटा गो गोटा' यानी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे सत्ता छोड़ो के नारे लगे. जुलाई 2022 तक आंदोलन इतना उफान मार गया कि गोटाबाया को देश छोड़कर भागना पड़ा.   अफगानिस्तान भी झेल चुका है तख्तापलट का दंश अफगानिस्तान में भी तख्तापलट की घटना घट चुकी है. अगस्त 2021 में अमेरिका की सेना हटने के बाद अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हो गया. तालिबान ने 2021 में अफगानिस्तान की गनी सरकार का तख्तापलट किया था, जिसके बाद से यहां तालिबानी शासन है.

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का निर्देश: जीएमसी भोपाल का प्लेटिनम जुबिली कार्यक्रम हो गरिमामय

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल देश की गौरवशाली धरोहर है। अब तक हजारों डॉक्टर और विशेषज्ञ तैयार हुए हैं और चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कॉलेज की प्लेटिनम जुबिली एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसका सुव्यवस्थित और गरिमामय आयोजन होना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्थाओं में हर स्तर पर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से मंत्रालय में जीएमसी एल्यूमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधि मंडल ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को प्लेटिनम जुबिली समारोह में आमंत्रित किया और इस अवसर पर आयोजित होने वाले प्रमुख कार्यक्रमों की जानकारी दी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्र संस्थान की परिस्थितियों और जरूरतों से भली-भांति परिचित होते हैं, उनके सुझाव सशक्तिकरण में अत्यंत सहायक होंगे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि एल्यूमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधि को सामान्य सभा की बैठकों में शामिल किया जाए, जिससे उनके अनुभव और सुझावों का लाभ कॉलेज प्रशासन को निरंतर मिलता रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जीएमसी भोपाल की प्लेटिनम जुबिली के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन प्रदेश और देश भर के पूर्व छात्रों को जोड़ने का एक अवसर बनेगा और संस्थान की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। जीएमसी एल्यूमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कॉलेज परिसर में पूर्व छात्रों द्वारा किए जा रहे विकास कार्य और अन्य गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने संस्थान की व्यवस्थाओं के उन्नयन, अधोसंरचना और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी रखे तथा शासन से सहयोग की अपेक्षा की। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, एम.डी. एम.पी. पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड मयंक अग्रवाल सहित जीएमसी एल्यूमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

आंगनबाड़ी सेविकाओं के खाते में आएंगे ₹9000, नीतीश कैबिनेट ने मंजूर किए 25 एजेंडों के फैसले

पटना नीतीश कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को कुल 25 एजेंडों पर मुहर लगी. कैबिनेट की बैठक में बिहार सरकार ने जनकल्याण और विकास को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के मानदेय में वृद्धि, राजस्व कर्मचारियों के अतिरिक्त पदों की स्वीकृति, ग्रामीण पेयजल योजना, जीविका मुख्यालय निर्माण, कन्या विवाह मंडप, सोलर स्ट्रीट लाइट और शवदाहगृह जैसी योजनाएं शामिल हैं. इन फैसलों से बिहार के लाखों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है. बिहार सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी राहत दी है. अब आंगनबाड़ी सेविका को 9,000 रुपये और सहायिका को 4,500 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा. इस बढ़ोतरी के लिए सरकार ने 345 करोड़ 19 लाख रुपये की स्वीकृति दी है. यह कदम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और उनके कार्य को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. राजस्व कर्मचारियों के 3303 अतिरिक्त पद स्वीकृत राजस्व और भूमि सुधार विभाग के तहत क्षेत्रीय कार्यालयों में 3,303 अतिरिक्त राजस्व कर्मचारियों के पदों को मंजूरी दी गई है। यह फैसला भूमि सुधार और प्रशासनिक कार्यों को और प्रभावी बनाने में मदद करेगा। ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के लिए 594 करोड़ रुपये पंचायती राज विभाग के तहत मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के बकाया विपत्रों के भुगतान के लिए 594 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी. जीविका मुख्यालय भवन के लिए 73 करोड़ रुपये पटना में जीविका मुख्यालय भवन के निर्माण के लिए 73 करोड़ 66 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है. यह भवन जीविका परियोजना के संचालन को और सुचारू बनाएगा, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है. कन्या विवाह मंडप योजना के लिए 50 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना के तहत राज्य के सभी 8,053 ग्राम पंचायतों में विवाह मंडप के निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है. यह योजना सामाजिक समारोहों को सुगम बनाने में सहायक होगी. ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के लिए 100 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. इससे ग्रामीण इलाकों में रात के समय सुरक्षा और सुविधा बढ़ेगी. एलपीजी आधारित शवदाहगृह के लिए मंजूरी नगर विकास एवं आवास विभाग ने पटना, गया, छपरा, सहरसा, भागलपुर, और बेगूसराय में एलपीजी गैस आधारित शवदाहगृह की स्थापना और संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को 1 रुपये की टोकन राशि पर 33 वर्षों के लिए एक-एक एकड़ भूमि देने की स्वीकृति दी है. यह पर्यावरण के अनुकूल शवदाह प्रक्रिया को बढ़ावा देगा.

एंड्रायड फोन में कैसे वापस लाए खोया हुआ डेटा

क्यार आपके फोन का डेटा खो गया है, या फिर आपकी कोई जरूरी फाइल फोन से डिलीट हो गई है इसके लिए अपना सर पकड़कर बैठने की बजाए डेटा रिकवरी सॉफ्टवेयर इंस्टॉरल कीजिए जो एंड्रायड फोन में खोई हुई फाइल दोबारा ले आएगा। इसे यूज करना बेहद आसान है। अक्स र धोखे से या फिर किसी टेक्निमकल फॉल्टा की वजह से फोन की फाइलें या तो डिलीट हो जाती हैं या फिर हमें दिखती नहीं हैं। फोन की फाइल को वापस सर्च करने के लिए आपको कई सॉफ्टवेयर मिल जाएंगे जिनमें से कुछ सॉफ्टवेयर आप खरीद सकते हैं तो कुछ फ्री यूज कर सकते हैं। हम यहां फ्री डेटा रिकवरी से फाइल सर्च करने का आसान तरीका बता रहे हैं जिससे आप किसी भी एंड्रायड फोन की फाइल रिकवर कर सकते हैं। सबसे पहले 7डाटारिकवरी डाॅट काॅम में जाकर पीसी या फिर लैपटॉप में फ्री सॉफ्टवेयर डाउनलोड करें। इसके बाद अपने फोन को डेटा केबल की मदद से पीसी से कनेक्टा करिए। पीसी से कनेक्टइ करने के बाद फोन को सॉफ्टवेयर ओपेन करके उसे स्कैमन करिए। स्कै न के टाइम आपके सामने जो भी फोन का डेटा खोया होगा उसका एक प्रिवियू आ जाएगा अब आप जो डेटा रिकवर करना चाहते हैं उसके बॉक्सा के सामने टिक मार्क लगा दें। टिक मार्क लगाने के बाद नीचे दिए गए सेव ऑप्श न पर क्लि क करिए। आपके फोन में वहीं डेटा फिर से आ जाएगा।  

स्वास्थ्य में सुधार: हरियाणा ने एनीमिया के ग्राफ को सुधारा, देश में दूसरी रैंक पर आया

चंडीगढ़  हरियाणा अपनी दशकों पुरानी लोगों में एनीमिया की कमी की समस्या से दूर हो रहा है। राज्य ने साल की पहली तिमाही में इस मामले में सुधार दर्ज किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की नई रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष की पहली तिमाही में हरियाणा एनीमिया उन्मूलन में हुआ खुलासा।  रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा 59 महीने तक की आयु के 77 % बच्चों तथा पांच से नौ वर्ष की आयु के 95% बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में सफल रहा। राज्य ने 'किशोरों' की श्रेणी के 95% व्यक्तियों और 93% लोगों को भी कवर किया है। एनीमिया से निपटने के लिए हरियाणा सरकार की ओर से लाभार्थियों के लिए रोग निरोधी आयरन-फोलिक एसिड (IFA), आयरन से खाद्य पदार्थों का सुदृढ़ीकरण, समुदायों और स्कूलों में एनीमिया की जांच और उपचार; मलेरिया और फ्लोरोसिस जैसे गैर-पोषण संबंधी कारणों का समाधान; और अटल (संपूर्ण एनीमिया सीमा सुनिश्चित करना) अभियान के लागू किया। इसके अलावा अभियान के तहत लाभार्थी ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण के लिए एक आईटी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया गया है। हरियाणा में सबसे अधिक पीड़ित एनीमिया मामलों में देशभर में हरियाणा 11वें और चंडीगढ़ 12वें नंबर पर हैं, जहां 15 से 49 वर्ष की महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। तीन महीने पहले की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में स्थिति चंडीगढ़ से अधिक खराब है, जहां 60.4 फीसद महिलाएं एनीमिया से पीड़ित है। पंजाब में यह दर 58.7 और हिमाचल में यह दर 53.0 फीसद है। वहीं, हरियाणा प्रदेश में एनीमिया से ग्रसित महिलाओं की संख्या पंजाब से 3.2 और हिमाचल से 7.5 प्रतिशत ज्यादा है। क्या बोले अधिकारी… हरियाणा एनएचएम निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया, हम '6x6x6' एप्रोच को लागू करने में सफल रहे, जिससे हमारे प्रदर्शन में सुधार हुआ। हमने छह संस्थागत तंत्रों के माध्यम से छह हस्तक्षेपों के साथ छह आयु समूहों को लक्षित किया। हम समझते हैं कि स्तनपान कराने वाली माताओं को शामिल करना एक चुनौती है जिसका समाधान किया जाना आवश्यक है। हम इस चुनौती से पार पाने और हरियाणा को सौ प्रतिशत एनीमिया मुक्त बनाने की पहल पर काम कर रहे हैं।

लद्दाख में हिमस्खलन की त्रासदी: तीन जवान शहीद, बचाव कार्य जोर-शोर से जारी

सियाचिन लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में एक बड़ा हिमस्खलन आया, जिसमें भारतीय सेना के तीन जवान शहीद हो गए. यह दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है, जहां सैनिक -60 डिग्री की ठंड, तेज हवाओं और बर्फीले खतरों का सामना करते हैं. अभी तक की जानकारी के मुताबिक जवान पेट्रोलिंग कर रहे थे, तभी हिमस्खलन की चपेट में आ गए. सेना की बचाव टीमें तुरंत काम पर लग गई हैं, जो लेह और उधमपुर से मदद ले रही हैं. सियाचिन में हिमस्खलन सर्दियों में आम हैं. 1984 के ऑपरेशन मेघदूत से अब तक 1,000 से ज्यादा सैनिक मौसम की वजह से शहीद हो चुके हैं. अभी और जानकारी का इंतजार है. सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र सियाचिन   सियाचिन ग्लेशियर, जो कराकोरम पर्वत श्रृंखला में 20,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यह खबर दिल दहला देने वाली है, क्योंकि सियाचिन में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं. सियाचिन को दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र कहा जाता है. यहां तापमान -60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. तेज हवाएं, बर्फीले तूफान और हिमस्खलन आम हैं. यह हिमस्खलन उत्तरी ग्लेशियर क्षेत्र में हुआ, जहां ऊंचाई 18,000 से 20,000 फीट है. इस इलाके में सैनिकों को न सिर्फ दुश्मन से, बल्कि प्रकृति की मार से भी लड़ना पड़ता है. 1984 में शुरू हुए ऑपरेशन मेघदूत के बाद से भारत ने सियाचिन पर कब्जा बनाए रखा है, लेकिन मौसम की वजह से 1,000 से ज्यादा जवान शहीद हो चुके हैं. बचाव कार्य और सेना की कोशिशें हिमस्खलन की खबर मिलते ही भारतीय सेना और वायुसेना ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिए. विशेषज्ञ अवलांच रेस्क्यू टीमें (ART) मौके पर पहुंचीं, जो बर्फ में दबे जवानों को निकालने की कोशिश कर रही हैं. ये टीमें लेह और उधमपुर से समन्वय कर रही हैं. सेना के हेलिकॉप्टर, जैसे चीता और Mi-17, घायलों को निकालने और अस्पताल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं. सियाचिन में ऐसी आपात स्थिति के लिए सेना हमेशा तैयार रहती है, लेकिन बर्फ और ठंड की वजह से बचाव कार्य बेहद मुश्किल है. पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए, सेना ने सियाचिन में बुनियादी ढांचा मजबूत किया है. DRDO के ऑल-टेरेन व्हीकल (ATV) ब्रिज, डायनीमा रस्सियां और हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर जैसे चिनूक ने सप्लाई और बचाव को आसान किया है. ISRO के टेलीमेडिसिन नोड्स और HAPO चैंबर्स (हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा) ने चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाई हैं. फिर भी, सियाचिन की कठिन परिस्थितियां हर ऑपरेशन को जोखिम भरा बनाती हैं. सियाचिन: एक रणनीतिक और खतरनाक क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर 76 किलोमीटर लंबा है. कराकोरम रेंज में स्थित है. यह भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र है. 1949 के कराची समझौते में इसकी सीमा साफ नहीं थी, जिसके बाद 1984 में भारत ने ऑपरेशन मेघदूत शुरू कर सियाचिन पर कब्जा किया. यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शक्सगाम घाटी (चीन को पाकिस्तान ने दी) और गिलगित-बाल्टिस्तान (पाकिस्तान के कब्जे में) के बीच एक दीवार की तरह है. अगर भारत सियाचिन छोड़ दे, तो पाकिस्तान और चीन लद्दाख को खतरे में डाल सकते हैं. लेकिन सियाचिन में सैनिकों का सबसे बड़ा दुश्मन मौसम है. 1984 से अब तक 870 से ज्यादा जवान मौसम, हिमस्खलन और अन्य कारणों से शहीद हुए हैं, जबकि युद्ध में कम नुकसान हुआ. 2016 में 10 जवान हिमस्खलन में दब गए थे, जिनमें लांस नायक हनुमंथप्पा कोप्पड़ 6 दिन बाद जिंदा निकाले गए, लेकिन बाद में उनकी मृत्यु हो गई. 2019 में चार जवान और दो पोर्टर एक हिमस्खलन में शहीद हुए थे. ये घटनाएं सियाचिन की खतरनाक सच्चाई को दर्शाती हैं.

टाटा पंच की कीमत में बड़ी कटौती, देश की नंबर-1 SUV अब और भी किफायती

 नई दिल्ली भारत में GST 2.0 लागू होने के बाद से गाड़ियों के दाम लगातार नीचे आ रहे हैं। इसी कड़ी में टाटा मोटर्स (Tata Motors) ने अपनी पॉपुलर माइक्रो-SUV टाटा पंच (Tata Punch) की कीमतें भी घटा दी हैं। अब 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाली नई GST दरों का सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। नई GST दरों के मुताबिक टाटा पंच के लगभग सभी वैरिएंट्स पर 8.5% तक का प्राइस कट देखने को मिल रहा है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। सबसे बड़ा फायदा क्रिएटिव प्लस S Camo (Creative Plus S Camo) पेट्रोल-ऑटोमैटिक वैरिएंट पर मिल रहा है, जिसकी कीमत में लगभग 88,000 तक की कमी आई है। बेस वैरिएंट से लेकर टॉप वैरिएंट तक सभी ग्राहकों को यह लाभ मिलेगा। हालांकि, कटौती की रकम वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी। GST कटौती के बाद टाटा पंच की संभावित कीमतें पुरानी और नई कीमत की तुलना 1.2L पेट्रोल-मैनुअल वैरिएंट मौजूदा कीमत अंतर नई कीमत % में अंतर Pure Rs. 6,19,990 -Rs. 71,190 Rs. 5,48,800 -11.48% Pure (O) Rs. 6,81,990 -Rs. 58,090 Rs. 6,23,900 -8.52% Adventure Rs. 7,16,990 -Rs. 61,090 Rs. 6,55,900 -8.52% Adventure Rhythm Rs. 7,51,990 -Rs. 64,090 Rs. 6,87,900 -8.52% Adventure S Rs. 7,71,990 -Rs. 65,790 Rs. 7,06,200 -8.52% Adventure Plus S Rs. 8,21,990 -Rs. 70,090 Rs. 7,51,900 -8.53% Accomplished Plus Rs. 8,41,990 -Rs. 71,790 Rs. 7,70,200 -8.53% Accomplished Plus Camo Rs. 8,56,990 -Rs. 72,990 Rs. 7,84,000 -8.52% Accomplished Plus S Rs. 8,89,990 -Rs. 75,890 Rs. 8,14,100 -8.53% Accomplished Plus S Camo Rs. 9,06,990 -Rs. 77,290 Rs. 8,29,700 -8.52% Creative Plus Rs. 9,11,990 -Rs. 77,690 Rs. 8,34,300 -8.52% Creative Plus Camo Rs. 9,26,990 -Rs. 78,990 Rs. 8,48,000 -8.52% Creative Plus S Rs. 9,56,990 -Rs. 81,590 Rs. 8,75,400 -8.53% Creative Plus S Camo Rs. 9,71,990 -Rs. 82,790 Rs. 8,89,200 -8.52% Sportz (O) Rs. 8,29,100 -Rs. 70,700 Rs. 7,58,400 -8.53% Asta Rs. 8,62,300 -Rs. 70,600 Rs. 7,91,700 -8.19% 1.2L पेट्रोल-ऑटो (AMT) वैरिएंट मौजूदा कीमत अंतर नई कीमत % में अंतर Adventure Rs. 7,76,990 -Rs. 66,190 Rs. 7,10,800 -8.52% Adventure Rhythm Rs. 8,11,990 -Rs. 69,190 Rs. 7,42,800 -8.52% Adventure S Rs. 8,31,990 -Rs. 70,890 Rs. 7,61,100 -8.52% Adventure Plus S Rs. 8,81,990 -Rs. 75,190 Rs. 8,06,800 -8.53% Accomplished Plus Rs. 9,01,990 -Rs. 76,890 Rs. 8,25,100 -8.52% Accomplished Plus Camo Rs. 9,16,990 -Rs. 78,190 Rs. 8,38,800 -8.53% Accomplished Plus S Rs. 9,49,990 -Rs. 80,990 Rs. 8,69,000 -8.53% Accomplished Plus S Camo Rs. 9,66,990 -Rs. 82,390 Rs. 8,84,600 -8.52% Creative Plus Rs. 9,71,990 -Rs. 82,790 Rs. 8,89,200 -8.52% Creative Plus Camo Rs. 9,86,990 -Rs. 84,090 Rs. 9,02,900 -8.52% Creative Plus S Rs. 10,16,990 -Rs. 86,690 Rs. 9,30,300 -8.52% Creative Plus S Camo Rs. 10,31,990 -Rs. 87,990 Rs. 9,44,000 -8.53% 1.2L CNG-मैनुअल वैरिएंट मौजूदा कीमत अंतर नई कीमत % में अंतर Pure Rs. 7,29,990 -Rs. 62,190 Rs. 6,67,800 -8.52% Adventure Rs. 8,11,990 -Rs. 69,190 Rs. 7,42,800 -8.52% Adventure Rhythm Rs. 8,46,990 -Rs. 72,190 Rs. 7,74,800 -8.52% Adventure S Rs. 8,66,990 -Rs. 73,890 Rs. 7,93,100 -8.52% Adventure Plus S Rs. 9,16,990 -Rs. 78,190 Rs. 8,38,800 -8.53% Accomplished Plus Rs. 9,51,990 -Rs. 81,090 Rs. 8,70,900 -8.52% Accomplished Plus Camo Rs. 9,66,990 -Rs. 82,390 Rs. 8,84,600 -8.52% Accomplished Plus S Rs. 9,99,990 -Rs. 85,190 Rs. 9,14,800 -8.52% Accomplished Plus S Camo Rs. 10,16,990 -Rs. 86,690 Rs. 9,30,300 -8.52% GST 2.0 में सरकार ने छोटी गाड़ियों (1,200cc तक इंजन और 4 मीटर से कम लंबाई) पर टैक्स स्लैब को घटाकर 28% से 18% कर दिया है। यही वजह है कि टाटा पंच जैसी कॉम्पैक्ट और माइक्रो SUVs की कीमतों में यह बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। ग्राहकों के लिए क्या मतलब? अब टाटा पंच (Tata Punch) खरीदना पहले से कहीं ज्यादा किफायती हो गया है। जो लोग फेस्टिव सीजन में नई SUV लेने का सोच रहे थे, उनके लिए यह बेस्ट टाइमिंग है। कंपनी उम्मीद कर रही है कि इन प्राइस कट्स से बुकिंग्स और सेल्स में बड़ा उछाल आएगा। ये दमदार SUV स्टाइलिश डिजाइन के साथ आती है। इसे सेफ्टी में Bharat NCAP से 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग हासिल है। सेफ होने के साथ ही ये एसयूवी CNG और पेट्रोल दोनों ऑप्शन के साथ मौजूद है। इसमें बेहतरीन ग्राउंड क्लियरेंस और सिटी+हाईवे फ्रेंडली परफॉर्मेंस देखने को मिलता है। कुल मिलाकर नई GST दरों के साथ टाटा पंच (Tata Punch) अब और भी वैल्यू फॉर मनी SUV बन चुकी है।

भोपाल में गणेश विसर्जन पर बवाल, प्रतिमाओं पर पथराव… विश्वास सारंग का बड़ा बयान

भोपाल   राजधानी भोपाल में गणपति विसर्जन के दौरान हुए पथराव को लेकर सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कड़ी नाराजगी दिखाई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश शांति का टापू है, हर सनातन त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। लेकिन रंग में भंग मिलाने की कोशिश हुई तो सख्त कार्रवाई करेंगे। मंत्री विश्वार सारंग ने कहा कि ऐसी नजीर पेश करेंगे,अपराधी कोई भी हो, कैसा भी हो बख्शा नहीं जाएगा। आपराधियों के खिलाफ  एफआईआर हुई है। किसी को भी धार्मिक आयोजनों में विघ्न डालने की अनुमति नहीं मिलेगी। ये है पूरा मामला बता दें कि सोमवार को भोपाल के गौतम नगर थाना अंतर्गत आरिफ नगर में गणेश जी की प्रतिमा विसर्जित करने जा रहे थे। इसी दौरान समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने पत्थरबाजी की जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। हिंदू समाज के लोग एकत्रित होकर थाने पहुंचे और जमकर प्रदर्शन किया और चक्काजाम कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 3 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया, जिसके बाद चक्काजाम और प्रदर्शन खत्म हुआ। पुलिस ने चरण सिंह कुशवाहा की शिकायत पर साहिल बच्चा, यामीन और अब्दुल हलीम के खिलाफ मामला दर्ज किया है।  हिंदू उत्सव समिति ने चेतावनी वहीं इस विवाद के बाद हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि क्रिया की प्रतिक्रिया होगी। इसके लिए शासन और प्रशासन जिम्मेदार होगा। उन्होंने आरोप लगाए कि सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई इसलिए ऐसी स्थित पैदा हुई। जिहादियों और विधर्मियों ने पथराव किया, श्री गणेश की कई प्रतिमाएं खंडित की। पूरे प्रदेश में जिहादियों के अराजकता का माहौल है। कई शहरों में घटनाएं सामने आई है। लेकिन हिंदुओं ने कभी मोहर्रम में पथराव नहीं किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में अगर ऐसी घटना होती है तो उसके लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा।

73 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में ईडी के बड़े छापे, दिल्ली और मध्य प्रदेश में कार्रवाई

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 273 करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले से जुड़ी धन शोधन जांच के तहत मंगलवार को दिल्ली और मध्य प्रदेश में छापेमारी की। एरा हाउसिंग एंड डेवलपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (ईएचडीएल) नामक कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ मामले में संघीय जांच एजेंसी के दिल्ली क्षेत्र द्वारा भोपाल स्थित एक परिसर सहित कुल दस परिसरों की जांच की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की जा रही है। ईडी की जांच सीबीआई की ओर से दर्ज की गई एफआईआर से शुरू हुई है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कंपनी और उसके प्रमोटरों/निदेशकों ने भारतीय औद्योगिक वित्त निगम (आईएफसीआई) द्वारा प्रदान किए गए 273 करोड़ रुपये के ऋण को "गबन" कर लिया। ईडी सूत्रों ने आरोप लगाया कि ऋण राशि को ईएचडीएल की कुछ संबंधित संस्थाओं को हस्तांतरित कर दिया गया, जो किसी भी वास्तविक व्यवसाय में संलग्न नहीं थीं।

मात दें पेट के भारीपन को

क्या डिनर में भारी खाना खाए बिना अक्सर आपका पेट असुविधाजनक रूप से भारी लगता है? यहां बताए गए सुझाव आपको राहत दे सकते हैंः क्या आप इस समस्या से परेशान हैं कि आपका पेट आपको हॉट एयर बलून जैसा दिखाता है, तो आप अकेली नहीं हैं। न्यूट्रिशनिस्ट के पास लोगों की जो सबसे आम शिकायतें आती हैं, वो हैं बदहजमी, गैस की तकलीफ, हार्ट बर्न, एसिडिटी और ब्लॉटिंग यानी पेट का भारीपन। हमने एक्सपर्ट्स से बात की और जाना कि क्या हमारी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव इस परेशानी को कम कर सकते हैं। मसलन, शुगर फ्री गम को बार-बार चबाने से बचना। इसलिए अगली बार जब आप अपनी न्यूट्रिशनिस्ट या डॉक्टर के पास जाएं, तो इन छोटे-मोटे सुधारों के साथ पहुंचे लेकिन इससे पहले हम जानते हैं कि हमें पेट का भारीपन क्यों महसूस होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है? सही तरीके से चबाएं पेट के भारीपन का सबसे आम कारण बदहजमी है। एक ऐसी समस्या, जिसकी शुरुआत भोजन को निगलने से होती है। बचपन में हमें कहा जाता है कि हमें अपने भोजन को कम से कम 32 बार चबाना चाहिए। इसका मकसद था कि हमारा भोजन उन रसों के साथ ठीक तरह से मिल जाए, जो हमारी पचान क्रिया में सहायक हैं। लेकिन आजकल हम जल्दबाजी में भोजन को निगलते हैं, बताती हैं न्यूट्रिशनिस्ट निलांजना सिंह। वह कहती हैं, खाते समय बात करते या गम चबाने से हम हवा निगल जाते हैं, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है। धीरे धीरे खाएं और अपने दिमाग को कम से कम 20 मिनट का समय दें यह महसूस करने के लिए कि आपने पर्याप्त भोजन कर लिया है और अब आपको जायकेदार मटन करी के तीसरे चम्मच की जरूरत नहीं है। भूख से ज्यादा न खाएं अगर आप बार-बार खाती हैं, तो एसिड रीफ्लक्स (उतार-चढ़ाव) की संभावनाएं रहती हैं। यह वह स्थिति है, जहां भोजन पेट के एसिड्स और दूसरे पाचन संबंधी रस इसोफैगस यानी भोजन नलिका में बहने लगते हैं। जब एसिड रीफ्लक्स मसल्स, जो भोजन के पेट में प्रवेश करते समय खुलती हैं और फिर एसिड को पीछे की तरफ आने से रोकने के लिए बंद होती हैं, ठीक तरह से काम नहीं करती। अपनी खुराक पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें और प्रति मील केवल एक प्रोटीन खाएं। आयुर्वेद के अनुसार, दो भोजन के बीच कम से कम पांच घंटे का अंतराल होना चाहिए, जिससे शरीर को पाचन के लिए पर्याप्त समय मिल सके। कृत्रिम मिठास को कहें न कृत्रिम मीठे में जो आम सामग्री होती है, वह है सॉर्बिटोल जो बेहद धीमी प्रोसेस से मेटाबलाइज होता है। एक और सामग्री फ्रक्टोज जो नैसर्गिंक शक्कर को पचाना मुश्किल होता है, इसे कम करें। डायट सोडा, कृत्रिम मिठास, एनर्जी बार्स और अन्य सामग्रियां जिनमें सार्बिटॉल शामिल हों, उन्हें छोड़ दें। शक्कर के बजाय चाय में एक चम्मच गुड़ मिलाएं। पैकेट वाले खाने से बचें प्रोसेस्ड फूड्स में जो प्रजर्वेटिव्स, रंग और जो ऐडिटिव्स शामिल होते हैं, वो पाचन में सहायक आंत के अच्छे बैक्टीरिया को ठीक तरह से काम नहीं करने देते। इससे पेट का भारीपन और बदहजमी जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। दरअसल, भोजन में थोड़ा बहुत पोषण होता है, उसे भी ऐडिटिव्स नष्ट कर देते हैं। भोजन को उसके नेचरल रूप में ही खाएं और प्लास्टिक में लिपटे, ललचाने वाले भोजन से ही दूर ही रहें। ढेर सारा पानी पीएं शरीर में पानी का जमाव भी ब्लॉटिंग से संबंधित हो सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से यह समस्या हो सकती है। पानी की कमी महसूस कर शरीर पानी इकट्ठा करने लगता है। पानी के अणु सोडियम के साथ मिल जाते हैं और शरीर के अंदर रह जाते हैं। शरीर में नमी का स्तर बनाए रखें, ताकि आपका शरीर पानी के साथ टॉक्सिंस भी बाहर निकाल सके। गैस को कम करें कोला और अन्य कार्बनेटेड ड्रिंक्स शरीर में गैस भरते हैं। कार्बनेटेड ड्रिंक्स के बजाय ताजा निचोड़े गए फलों के रस, नारियल पानी, छाछ या जलजीरा का एक बड़ा गिलास खाने के साथ पीएं। स्मोकिंग और ड्रिंकिंग पर लगाम अध्ययन बताते हैं कि धूम्रपान करने वाले लोग सांस में ज्यादा हवा खींचते हैं, जो उनके शरीर में गैस इकट्ठा होने की संभावनाओं को बढ़ा देता है। अगर आप स्मोकिंग और ड्रिकिंग पूरी तरह नहीं छोड़ सकते, तो इन पर लगाम कसें। नियमित व्यायाम करें जब आप कब्ज से पीड़ित होते हैं, तो निचली आंत में अपशिष्ट इकट्ठा होने लगता है, जिससे आंत में ज्यादा गैस रिलीज होती है। एक्सर्साइज या किसी भी प्रकार की गतिविधि मांसपेशियों को शिथिल कर समस्या को कम कर सकती है। पानी पीतीं रहें और फाइबर्स का सेवन खूब करें।