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स्वास्थ्य की निगरानी हर गांव तक: टीमें करेंगी व्यापक सर्वेक्षण

पंजाब  कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की, जिसमें लोगों को बरसाती पानी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए मज़बूत डाक्टरी सहायता और सक्रिय उपायों पर ज़ोर दिया गया। स्थानीय सर्किट हाउस में ज़िला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री ने विधानसभा हलका जगराओं की विधायक सरवजीत कौर मानूके के साथ वेक्टर-बोर्न बीमारियों के ख़तरों पर चर्चा की। डॉ. बलबीर सिंह ने व्यापक जलभराव और मच्छरों की बढ़ी हुई पैदावार के कारण डेंगू, मलेरिया, बुखार, त्वचा संक्रमण और पेट की बीमारियों के संभावित ख़तरों पर प्रकाश डाला। इन ख़तरों से निपटने के लिए उन्होंने घोषणा की कि पानी घटने पर स्वास्थ्य टीमें पंजाब के हर गांव में घर-घर सर्वेक्षण करेंगी, जिससे आवश्यक स्वास्थ्य उपायों के बारे में जागरूकता पैदा होगी। स्वास्थ्य मंत्री ने नगर निगम और ग्रामीण विकास एवं पंचायती विभाग को संभावित बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग करने के निर्देश भी दिए। कैबिनेट मंत्री ने सामाजिक संगठनों और आई.एम.ए. को बाढ़ प्रभावित परिवारों को स्वेच्छा से गोद लेने और सेवा करने का आह्वान किया, जिसे उन्होंने इस कठिन समय में मानवता की सच्ची सेवा बताया। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पंजाब सरकार के 24 घंटे चल रहे प्रयासों की पुष्टि की और चुनौतियों को दूर करने के लिए सामूहिक कार्रवाई की अपील की। इसके अलावा, उन्होंने पंजाब सरकार के ऐतिहासिक फ़ैसलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें किसानों को फसल नुकसान के लिए 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवज़ा, दरिया किनारे रहने वाले किसानों को बिना परमिट रेत निकालने और बेचने की अनुमति देने वाली नीति और अन्य कल्याणकारी उपाय शामिल हैं। मीटिंग के बाद, डॉ. बलबीर सिंह ने बाढ़ प्रभावित समुदायों में आपातकालीन सेवाओं को मज़बूत करने के लिए एक नई एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाई।

पोलैंड में बढ़ा तनाव: चार एयरपोर्ट बंद, रूसी ड्रोन हमले के बाद F-16 और F-35 की तैनाती

वारसॉ मध्य यूरोपीय देश पोलैंड ने कई रूसी ड्रोन्स को अपने हवाई क्षेत्र में मार गिराने का दावा किया है। इससे पहले बुधवार की अहले सुबह पोलैंड ने NATO देशों के साथ मिलकर अपने F-16 लड़ाकू विमानों को उतार दिया और राजधानी वारसॉ स्थित अपने मुख्य हवाई अड्डे समेत कुल चार एयरपोर्ट्स बंद कर दिए। यूक्रेन के पश्चिम में स्थित इस देश ने यह कदम तब उठाया है, जब रूस से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन की वायु सेना ने पोलैंड को चेतावनी दी थी कि रूसी ड्रोन्स अब यूक्रेन की सीमा पार कर पोलैंड में घुसने जा रही है। इस सूचना पर पोलैंड की वायु सेना ने आननफानन में अपने लड़ाकू विमानों की तैनाती कर दी और कुछ ही देर बाद रूसी ड्रोन मार गिराए। पोलिश वायु सेना ने कहा है कि बार-बार उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया जा रहा था। इसके बाद यह कदम उठाया गया है। इससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। पोलैंड की ऑपरेशनल कमांड ने कहा, "पोलिश और NATO सहयोगियों के लड़ाकू विमान हमारे हवाई क्षेत्र में उड़ान भर रहे हैं, जबकि जमीनी वायु रक्षा और रडार टोही प्रणालियों को उच्चतम स्तर पर तैयार रखा गया है।" CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी वायु सेना ने शुरुआत में कहा था कि रूसी ड्रोन पोलिश क्षेत्र में घुस आए हैं, जिससे ज़मोस्क शहर को खतरा पैदा हो गया है। यूक्रेनी मीडिया ने भी बताया कि एक ड्रोन पश्चिमी पोलिश शहर रेज़्ज़ो की ओर बढ़ रहा है, और कहा कि हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल? इस बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि जो विल्सन ने आरोप लगाया है कि रूस ने पोलैंड पर हमला करने के लिए ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल किया था। विल्सन ने एक्स पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा वाइट हाउस में पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नॉरोकी की मेज़बानी के एक हफ़्ते से भी कम समय बाद रूस ईरानी शाहेद ड्रोन से नाटो सहयोगी पोलैंड पर हमला कर रहा है। यह युद्ध जैसा कृत्य है।” उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से कड़ा जवाब देने का आग्रह करते हुए लिखा, "मैं राष्ट्रपति ट्रंप से आग्रह करता हूँ कि वे रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाएं ताकि युद्ध मशीन बना रूस दिवालिया हो जाए।" विल्सन ने आगे कहा कि मॉस्को अब नाटो के धैर्य की परीक्षा ले रहा है। बेलारूस के साथ लगी सीमा बंद करेगा पोलैंड पिछले साढ़े तीन साल से रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग की वजह से पड़ोसी देश भी परेशान हैं। इसी क्रम में पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अब घोषणा की है कि एक दिन बाद यानी गुरुवार को पोलैंड बेलारूस के साथ लगी पूर्वी सीमा को बंद करने जा रहा है। दरअसल, पोलिश ससरकार बेलारूस में चल रहे रूसी सेना के आक्रामक सैन्य अभ्यास से चिंतित है। द गार्डियन के मुताबिक, पोलिश प्रधानमंत्री ने कहा कि यह रूस और बेलारूस की ओर से बढ़ती उकसावे की कार्रवाई का जवाब है। पोलैंड ने मार गिराए रशियन ड्रोन पोलैंड की सशस्त्र सेनाओं ने तत्काल जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने और NATO सहयोगी देशों के विमान तैनात किए. इसके साथ ही भूमि आधारित वायु रक्षा और राडार प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा गया. देश के ऑपरेशनल कमांड ने घोषणा की – ‘पोलैंड की वायु सीमा में अब हमारे और सहयोगियों के विमान सक्रिय हैं और वायु रक्षा और रडार चौकसी अब हाई अलर्ट पर है.’ इसके साथ ही कुछ प्रमुख हवाई अड्डों को भी अस्थायी रूप से बंद भी कर दिया गया. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक पोलिश आर्मी ने कहा है कि रूसी ड्रोन को मार गिराया गया है. ये पहली बार हुआ है कि नाटो देश किसी रूसी एसेट के साथ सीधे-सीधे उलझा हो. सुरक्षा में तैनात हुए अमेरिकी फाइटर जेट पोलैंड के एयरस्पेस में रशियन ड्रोन के पहुंचने के बाद नाटो देश सतर्क हो गए हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नाटो देश और रूस की ये पहली भिड़ंत हैं, ऐसे में पोलैंड की सुरक्षा के लिए नाटो एयरक्राफ्ट सक्रिय हो चुके हैं. उन्होंने पोलिश एयरस्पेस की सुरक्षा के लिए अमेरिका का एडवांस फाइटर जेट F-35 तैनात कर दिया है. इसी बीच प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने घोषणा की है कि बेलारूस के साथ सभी बॉर्डर क्रॉसिंग बंद की जाएगी, जिसमें रेलमार्ग भी शामिल है. पोलैंड का मानना है कि रूस और बेलारूस की ओर से Zapad‑2025 नाम की बेहद आक्रामक मिलिट्री एक्सरसाइज की वजह से ये हालात पैदा हुए हैं. ऐसे में बॉर्डर क्रॉस करने पर तब तक रोक रहेगी, जब तक खतरा टल नहीं जाता. वहीं पड़ोसी नाटो देशों- लिथुआनिया और लातविया ने भी अपनी सीमाओं की सुरक्षा बढ़ा दी है. पुतिन के इरादे खतरनाक पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरोकी ने भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुकिन के इरादों को भांपकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "हमें व्लादिमीर पुतिन के अच्छे इरादों पर भरोसा नहीं है।" नवरोकी ने आगे कहा, “बेशक, हम दीर्घकालिक शांति, स्थायी शांति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो हमारे क्षेत्रों के लिए जरूरी है, लेकिन हमारा मानना ​​है कि व्लादिमीर पुतिन अन्य देशों पर भी आक्रमण करने के लिए तैयार हैं।” बफर स्टेट के रूप में काम कर रहा पोलैंड बता दें कि पोलैंड में अमेरिका और नाटो देशों के प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठान हैं, जो लंबे समय से रूस और शेष पश्चिमी यूरोप के बीच एक बफर स्टेट के रूप में काम करता रहा है। लेकिन अब यह देश भी रूस से खतरा महसूस कर रहा है। यह खतरा तब पैदा हुआ जब रूस ने रातोंरात यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए। यूक्रेन की वायु सेना ने बताया कि वोलिन और ल्वीव जैसे पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों सहित देश के अधिकांश हिस्से में कई घंटों तक हवाई हमले की चेतावनी जारी रही।

मायका सूना: 32 नदियों का निरीक्षण करने गए मंत्री प्रहलाद पटेल को केवल 7 में पानी मिला

भोपाल  मध्यप्रदेश में 962 छोटी और बड़ी नदियां हैं, जिनका उद्गम स्थल इस प्रदेश में है। इसलिए इसे नदियों का मायका कहा जाता है। लेकिन अब इन नदियों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सरकार भी इस समस्या को लेकर चिंतित है। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल पिछले दो साल से इन नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा कर रहे हैं ताकि इस समस्या का समाधान ढूंढ सकें। प्रहलाद पटेल ने दो बार नर्मदा परिक्रमा की है। साथ ही, उनके पास नर्मदा के संरक्षण का 35 साल का अनुभव है। इस अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने एक किताब लिखी है। इसका नाम है परिक्रमा कृपा सार। इस किताब का विमोचन 14 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत करेंगे। एक महीने में 32 नदियों किया दौरा     इसके बाद यह सवाल किए जाने पर कि पिछले साल उद्गम की यात्रा में कैसा अनुभव रहा? इस पर पटेल ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और मैंने बेतवा के उद्गम से शुरुआत की थी। एक महीने में 32 नदियों के उद्गम पर गए। हमें 7 जगह ही पानी मिला और बाकी जगह सूखा था। यह चिंता का विषय था। फिर 30 जून आ गया। चाहकर भी कुछ कर नहीं पाए। हम सिर्फ इतना निर्णय ही कर पाए कि इस बार पौधरोपण नहीं होगा। मध्य प्रदेश में छोटी-बड़ी 962 नदियों के उद्गम स्थल हैं। इस वजह से प्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है। लेकिन, सरकार नदियों की टूटती सांसों को लेकर चिंतित है। मप्र के पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल नदियों के उद्गम स्थलों की दो सालों से यात्रा कर रहे हैं। नदियों के उद्गम स्थल पर चर्चा  मंत्री प्रहलाद पटेल अब तक 32 नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल 7 नदियों के उद्गम स्थल पर पानी मिला। इससे यह साफ हो गया है कि कई नदियां सूख रही हैं। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार अब नदियों के संरक्षण के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है।   मंत्री पटेल की नदियों के उद्गम स्थलों की यात्रा पर एक नजर     प्रहलाद पटेल ने अब तक 32 नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा किया, जिनमें से केवल 7 स्थानों पर पानी मिला, बाकी जगह सूखा था।     मंत्री पटेल ने बताया कि जब जल गंगा अभियान शुरू हुआ, तब उन्हें राज्य का अनुभव नहीं था, लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें योजना बनाने का जिम्मा सौंपा।     मंत्री पटेल ने पौधारोपण रोकने का फैसला लिया, क्योंकि पौधों के बचाव के लिए जरूरी सुविधाएं जैसे बाड़ और पानी की व्यवस्था नहीं थी।     पटेल ने नर्मदा परिक्रमा के दौरान अपने गुरुदेव से सीखा कि नदी के संगम और उद्गम स्थल पर जीवन की संभावना होती है, और इनका संरक्षण बेहद जरूरी है।     पटेल का मानना है कि बड़ी नदियाँ तभी बच सकेंगी, जब हम छोटी नदियों को बारहमासी बनाए रखेंगे। पटेल ने रखी अपनी बात मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि जब जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू हुआ, तब मैं राज्य में मंत्री बना। मेरा राज्य का अनुभव नहीं था। मैंने मुख्यमंत्री जी से पूछा कि कार्ययोजना क्या होगी? उन्होंने कहा कि आपके विभाग को ही तय करना है। पटेल ने आगे कहा कि इस अभियान का लक्ष्य बहुत सुंदर है। नए स्त्रोत बनाएं और पुराने स्रोतों की क्षमता का वर्धन करें। नए स्रोतों में खेत तालाब और अमृत सरोवर ही बन सकते हैं। तीसरा कोई विकल्प आपके पास है नहीं। पुराने स्रोतों में कुएं, बावड़ी, तालाब और नदियां हैं। इनकी साफ-सफाई पंचायत के आसपास हैं तो ये काम हम कर सकते हैं। ये काम मैं वर्षों से करता आ रहा हूं। मुझे लगा मंत्री होने के नाते मैं क्या करूंगा। तब मुझे लगा कि हमें नदी के उद्गम से यात्रा शुरू करनी चाहिए। मैं नर्मदा का परिक्रमा वासी हूं। मैं जब परिक्रमा में था और जब नदी का संगम होता था तो मेरे गुरुदेव कहते थे कि एक किलोमीटर ऊपर चलो उस नदी को पार करेंगे फिर वापस आओ और फिर नर्मदा जी के किनारे चलेंगे। गुरू आज्ञा थी इसलिए ज्यादा बुद्धि नहीं लगाई। इस दौरान एक जगह सूखा नाला मिला। मैं अंदर घुसने लगा तो मेरे गुरुदेव ने इशारा किया। हम ऊपर की तरफ गए। फिर डेढ़ किलोमीटर वापस नीचे आए। गर्मी बहुत थी। तीन किलोमीटर ज्यादा चले तो मन खराब हुआ। मैने रात में सेवा करते समय गुरु जी से पूछ ही लिया कि जब पानी नहीं था तो इतना परेशान क्यों किया। मैं तो बहुत परेशान था। वो उठकर बैठे और मुझसे कहा: जहां नदी पहाडों या स्त्री पुरुष का संगम हो वहां जीवन की संभावना होती है उसको रौंदने की गलती मत करना। हमें जागने में 30 साल लग गए मंत्री पटेल ने कहा: मेरे गुरु जी ने कहा और जहां नदी का उद्गम होता है वहां सर्वाधिक ऊर्जा होती है। उद्गम किसी मनुष्य ने नहीं बनाया। उद्गम पहले से था उसके किनारे जीवन आया। उद्गम छोटा हो या बड़ा हो। ये बात 1994-95 की थी आज 2025 चल रहा है। हमको भी जगने में 30 साल लग गए। अब बाद में कई बातें ध्यान में आतीं हैं लोग संगम पर स्नान करने जाते हैं। संगम पर साधना करने जाते हैं अपने आश्रम बनाते हैं। लेकिन, क्यों करते हैं कभी इस पर बहस नहीं हुई। तब मुझे लगा कि बड़ी नदियां जैसे नर्मदा को मैने बचपन से देखा है उसका अस्तित्व तब तक है जब तक हम छोटी नदियों को बारहमासी रखेंगे। मंत्री पटेल ने साझा किया अपना अनुभव मंत्री प्रहलाद पटेल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वह नर्मदा नदी परिक्रमा में शामिल थे। जब वह परिक्रमा करते थे और नदी का संगम आता था, तो उनके गुरुदेव उन्हें कहते थे कि एक किलोमीटर ऊपर चलो, उस नदी को पार करो, फिर वापस आओ और नर्मदा जी के किनारे चलो। गुरुदेव की आज्ञा मानकर उन्होंने ज्यादा सोचे बिना यह किया। एक दिन, जब वह एक सूखे नाले के पास पहुंचे, तो वह अंदर जाने लगे, लेकिन उनके गुरुदेव ने उन्हें इशारा किया। फिर वे … Read more

सी.पी. राधाकृष्णन बने भारत के उपराष्ट्रपति, सीएम साय ने दी बधाई

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सी.पी. राधाकृष्णन को भारत का उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक प्रभावशाली नेता और कुशल प्रशासक के रूप में  राधाकृष्णन जी ने समाज की जड़ों से उठकर राष्ट्र के उच्च संवैधानिक पद तक पहुँचने का गौरव अर्जित किया है। उनका यह सफर लोकतांत्रिक मूल्यों की सशक्त मिसाल है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राधाकृष्णन जी का दूरदर्शी नेतृत्व और गहरा प्रशासनिक अनुभव न्याय, समानता और विकास के मूल्यों को नई ऊँचाइयों पर स्थापित करेगा। वंचित और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के उत्थान के प्रति उनकी निष्ठा सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय प्रगति को और सुदृढ़ बनाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह सफलता राधाकृष्णन जी के विश्वास, कड़ी मेहनत और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण का परिणाम है, जो पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से राधाकृष्णन जी को पुनः शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

लात-घूसों से पिटने के बाद गायब हुईं नेपाल की विदेश मंत्री आरजू देउबा, मचा हड़कंप

काठमांडू  नेपाल में अराजकता की स्थिति अब भी जारी है और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसक प्रदर्शनों का दौर थमा नहीं है. सोमवार को पुलिस की झड़प में कम से कम 20 प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद नाराज जेन-जी प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को भारी तोड़-फोड़ की और कई मंत्रियों, नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया. इसी क्रम में प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के काठमांडू में बुदानिलकांठा स्थित घर पर हमला किया. प्रदर्शनकारियों ने घर पर मौजूद देउबा और उनकी पत्नी नेपाल की विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा को बुरी तरह पीटा. सेना के हस्तक्षेप के बाद देउबा की जान तो बच गई लेकिन आरजू का कुछ पता नहीं चल पा रहा है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी आरजू को लात-घूसों से पीटते नजर आ रहे हैं. आरजू हमले में बुरी तरह घायल हुई थीं. उनके पति को तो बचा लिया गया लेकिन उन्हें लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आ पा रही है. फिलहाल यह पता नहीं है कि देश की विदेश मंत्री इस वक्त कहां हैं.  कुछ रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि बुरी तरह पीटने के बाद आरजू को प्रदर्शनकारी अपने साथ ही लेकर चले गए. हालांकि, फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है. पूर्व प्रधानमंत्री को खूब पीटा, चेहरे से बहा खून प्रदर्शनकारियों ने देउबा के आवास में खूब तोड़फोड़ की. फुटेज में दिख रहा है कि देउबा पर हमले के बाद उनके चेहरे से खून बह रहा है. इसके बाद देउबा और आरजू को बचाने के लिए पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे.  फुटेज में देखा जा सकता है कि खून से लथपथ पूर्व प्रधानमंत्री जमीन पर बैठे हैं और सेना के जवान उन्हें घेरे हुए हैं. हालांकि, इस दौरान उनकी पत्नी कहीं नहीं दिख रही हैं. आर्मी के हाथ में नेपाल, पूरे देश में लगा कर्फ्यू नेपाल में आर्मी ने अब कमान संभाल ली है और आंदोलन से निपटने के लिए पूरे नेपाल में कर्फ्यू लगा दिया गया है. कर्फ्यू बुधवार पांच बजे से लेकर गुरुवार सुबह 6 बजे तक रहेगा. सेना ने त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सिंहदरबार जैसे स्थानों पर भी कंट्रोल कर लिया है. नेपाल में जेन-जी का यह आंदोलन 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन के केपी शर्मा ओली सरकार के फैसले से शुरू हु्आ जो कि जल्द ही हिंसक हो गया. इस हिंसा में जान-माल को भारी नुकसान पहुंचा है. भारत स्थिति पर नजर बनाए हुए है और शांति बहाली में मदद कर रहा है.

शिप्रा नदी से मिली आरक्षक आरती की लाश, उज्जैन में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

उज्जैन   मध्य प्रदेश के उज्जैन की शिप्रा नदी में बिना रैलिंग वाले पुल से कार समेत गिरे तीन पुलिसकर्मियों की तलाश में शुरु हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन मंगलवार शाम को आरक्षक आरती पाल का शव बरामद होने के साथ पूरा हो गया। करीब 68 घंटे की जद्दोजहद के बाद आरती का शव नदी के बड़े पुल से 80 मीटर दूरी में स्थित गहरे गड्ढे से बरामद किया गया। वहीं, आज बुधवार को दिवंगत आरक्षक आरती पाल को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। वैसे तो आरती मूल रूप से रतलाम जिले की रहने वाली खीं, लेकिन रेस्क्यू के दौरान उनका पूरा परिवार उज्जैन ही आ गया था। ऐसे में सभी की सहमति से आज बुधवार को उज्जैन चक्र तीर्थ श्मशान घाट पर आरती का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई आरती पाल की अंतिम विदाई के मौके पर एडीजी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, परिवार के लोगों के साथ साथ हजारों की संख्या में उज्जैन वासी शामिल हुए। सभी ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। शिप्रा नदी से निकला कॉन्स्टेबल आरती पाल का शव, परिवार में पसरा मातम उज्जैन की शिप्रा नदी में बिना रैलिंग वाले पुल से कार समेत गिरे तीन पुलिसकर्मियों की तलाश में शुरु हुआ सर्च ऑपरेशन मंगलवार देर शाम तीसरे दिन पूरा हो गया। दरअसल, करीब 68 घंटे की जद्दोजहद के बाद महिला कांस्टेबल आरती पाल का शव नदी के बड़े पुल से 80 मीटर दूरी पर स्थित गहरे गड्ढे से बरामद हुआ है। उज्जैन के उन्हेल थाने में कार्यरत महिला आरक्षक आरती पाल मूल रूप से रतलाम की रहने वाली हैं। उनका शव मिलने की सूचना के बाद से परिवार के बीच कोहराम मच गया। माता-पिता समेत उनके घर के हर सदस्य का रो-रोकर बुरा हाल है। जबकि, हर कोई सदमें में है। शिप्रा नदी में हादसे का शिकार होकर जान गवाने वाली आरती पाल मूल रूप से रतलाम शहर के अरिहंत परिसर की रहती थीं। आरती के पिता अशोक पाल कलेक्टर कार्यालय से सेवानिवृत हुए हैं और माता शीला पाल गृहणी हैं। साल 2013 में पुलिस सेवा में आई आरती के परिवार में उनका एक छोटा भाई लोकेंद्र 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है। बेटी का शव मिलने की खबर मिलते ही उसके बचे होने की नामुमकिन सी उम्मीद बांधे बैठे परिवार में मातम पसर हुआ है। मां का कहना है कि, जबतक बेटी को देख नहीं लेती, यकीन नहीं करूंगी कि अब वो इस दुनिया में नहीं है। बता दें कि, आरती अपने परिवार के प्रति इतनी जिम्मेदार थी कि, माता-पिता की सेवा के चलते अबतक विवाह नहीं किया था। घर की जिम्मेदारियां निभाने अबतक नहीं की शादी आरती के चाचा अजय पाल ने बताया कि, ऐसी जानकारी मिली थी कि, हादसे का शिकार हुआ वाहन आरती ही चला रही थी। आपको बता दें कि, एनडीआरएफ – एसडीआरएफ, पुलिस और उज्जैन-महिदपुर के लोकल रेस्क्यू दलों के कुल 130 जवानों ने 68 घंटे में 40 फीट गहराई तक तलाशने के बाद मंगलवार शाम महिला कांस्टेबल का शव नदी से ढूंढ निकाला है। बताया जा रहा है कि, आरती पाल का शव वाहन के साथ नदी में बड़े पुल से करीब 80 मीटर की दूरी पर स्थित एक गहरे गड्ढे में फंसा मिला है। हादसे से एक दिन पहले बोलकर गई थी 'जल्दी आऊंगी' चाचा के अनुसार, आरती के एक अन्य भाई जितेंद्र पाल का इसी साल 30 जुलाई को बीमारी के कारण निधन हो गया था। सवा माह पूरा होने पर धूप-ध्यान करने आखिरी बार बेटी 4 सितंबर को ही घर आई थी। उस दिन पूरा परिवार एक साथ था। वहीं, 5 सितंबर को जाते समय उसने घर वालों से कहा था, 'इस बार जल्दी आऊंगी'। लेकिन, घर से लौटने के अगले ही दिन इस तरह की दिल दहला देने वाली खबर आई, जिसने परिवार को झकझोर कर रख दिया और अब पता चला है कि, बेटी का शव मिला है। हमें पता नहीं था कि, बेटी इस हाल में जल्दी घर आएगी। ये सिर्फ आरती के माता-पिता नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए गहरी क्षति है। पुलिस महकमें में हड़कंप आपको बता दें कि, 6 सितंबर शनिवार रात को उज्जैन की शिप्रा नदी के पुल से एक वाहन नदी में गिर गया था। प्रत्यक्षदर्शियों की सूचना पर रात डेढ़ बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर वाहन और उसमें सवारों की तलाश की गई पर नदी का बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू रोकना पड़ा। रविवार सुबह 6 बजे दोबारा तलाश दोबारा से शुरु हुई। इसी बीच रेस्क्यू दल समेत पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शिप्रा पुल से करीब 2 किलोमीटर दूर मिली कार से उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव निकला। बाद में मालूम हुआ कि, बीती रात जो वाहन हादसे का शिकार हुआ है, उसमें टीआई के साथ एसआई मदनलाल निनामा और महिला आरक्षक आरती पाल भी मौजूद थीं। 68 घंटे बाद पूरा हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन घटना ने पुलिस महकमें को सन्न कर दिया। टीआई के साथ एसआई और महिला आरक्षक होने की पुष्टि होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार बढ़ाई गई, लेकिन रविवार देर रात तक दोनों लापता पुलिसकर्मियों का कोई सुराग नहीं लगा। सोमवार की सुबह से एक बार फिर एसडीआरएफ ने रेस्क्यू शुरु किया तब जाकर शाम को एसआई मदनलाल का शव भी मिल गया। इसके बाद रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ा और मंगलवार शाम करीब 68 घंटे बाद आरक्षक आरती पाल का शव भी नदी से बरामद कर लिया गया। नदी में कार गिरने का वीडियो हुआ वायरल इधर, सोमवार रात शिप्रा नदी के बड़े पुल से पुलिसकर्मियों की कार गिरने का लाइव वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में कार अन्य वाहनों के साथ जाती दिख रही थी ऐर अचानक ही पुल से नीचे गिर गई। फिलहाल, सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर अब भी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।

36 लोगों को नोटिस, भोपाल के अनंतपुरा कोकता में विभागीय जमीन पर कब्जे की जांच शुरू

भोपाल  भोपाल के अनंतपुरा कोकता में पशुपालन विभाग की जमीन पर कब्जे के मामले में नोटिस जारी किए गए हैं। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा ने 36 लोगों से 10 दिन में जवाब मांगा है। जिसमें कब्जे से जुड़ी पूरी जानकारी शामिल रहेगी।  बता दें, डायमंड सिटी के 20 मकान भी जद में है। इसके अलावा खेती कार्य के लिए कब्जा करने पर 8, कॉलोनी के पहुंच मार्ग के लिए 4 नोटिस दिए हैं। इसके अलावा बीपीएस स्कूल, द ग्रीन स्केप मेंशन शादी हॉल/रिसोर्ट समेत एक हॉस्टल और एक दुकान संचालक को भी नोटिस दिए हैं। पक्ष रख चुके लोग, कहा-कोई लेना नहीं सीमांकन के दौरान निशान और जमीन पर खूटियां लगाई गई थी। इससे स्पष्ट हो गया था कि प्रशासन किन लोगों को नोटिस देगा। इसलिए लोग एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव को अपनी पीड़ा सुना चुके हैं। वहीं, कई लोग पहले से ही अपना पक्ष बता चुके थे। स्कूल के लिए 2400 स्क्वायर फीट जमीन दिसंबर 2021 में सिद्धार्थ सिन्हा ने खरीदी थी। जमीन की जानकारी जुटाई तो यह सही बताई गई थी। इसके बाद एसडीएम ऑफिस से नामांतरण कराया। सभी अनुमति लेने के बाद ही बिल्डिंग बनाई और स्कूल संचालित करना शुरू किया। स्कूल को लेकर भी जिला शिक्षा विभाग से सभी अनुमति और मान्यता प्राप्त की गई। लोगों का भी कहना है कि जमीन खरीदते समय सारे रिकॉर्ड देखें थे। डायवर्जन, रजिस्ट्री, नक्शे, नामांकन कराया। सरकारी तौर पर जब बटांकन कराया तो आरआई-पटवारी आए। उन्होंने ही बताया था कि उनके हिस्से में कहीं कोई सरकारी जमीन नहीं है। सीमांकन में इतना कब्जा मिला था सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार, 4 कॉलोनी के गेट, सड़क और पार्क भी कब्जे में शामिल हैं। वहीं, डायमंड सिटी कॉलोनी में 20 मकान, एक प्राइवेट स्कूल, शादी हॉल/रिसोर्ट, 1 एकड़ जमीन पर खेती, फार्म हाउस और पक्का निर्माण और 130 डेसीमल भूमि पर अवैध तरीके से खेती करना पाया गया। दुकानें, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पेट्रोल पंप नगर निगम के हैं। वहीं, बायपास का 200 फीट हिस्सा भी पशुपालन विभाग की जमीन पर ही निकला था। ऐसे में इन्हें सरकारी प्रक्रिया में कोई राहत मिल सकती है। अब तक यह प्रक्रिया हुई     27 अगस्त को गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार सौरभ वर्मा की मौजूदगी में 11 पटवारी और 3 राजस्व निरीक्षकों ने सीमांकन शुरू किया था।     तीन दिन के भीतर सीमांकन कार्य पूरा हो गया। इसके बाद रिपोर्ट एसडीएम और तहसीलदार को दी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि किस रकबे में किसका और कितना कब्जा है?     इसी बीच 2 सितंबर को डायमंड सिटी समेत आसपास रहने वाले कई लोग एसडीएम ऑफिस पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।     3 सितंबर को यह रिपोर्ट एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा ने कलेक्टर को पेश की।     8-9 सितंबर को चिंह्नित कब्जाधारियों को नोटिस भेजे गए।     नोटिस में 10 दिन की मोहलत दी गई है। इसलिए किया गया था सीमांकन 34 साल बाद पशुपालन विभाग को सीमांकन के पीछे भोपाल के मछली परिवार पर हुई कार्रवाई है। ड्रग्स और रेप केस के मामले में इस परिवार के दो सदस्य जेल में बंद है, जबकि अन्य पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद 30 जुलाई और फिर 21 अगस्त को जिला प्रशासन ने दो बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 बड़े अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए। ये सभी सरकारी जमीन पर बनाए जाना सामने आए। इस जमीन की कीमत सवा सौ करोड़ रुपए आंकी गई। इसी बीच पशुपालन विभाग ने गोविंदपुरा एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा को एक आवेदन दिया, जिसमें कहा गया कि उनकी जमीन पर भी कब्जा हो सकता है। इसलिए सीमांकन किया जाए। प्रशासन ने पड़ताल की तो कब्जे की बात सही निकली। इसके बाद मछली परिवार समेत 20 लोगों को नोटिस दिए गए। इन्हें भी सीमांकन के दौरान मौजूद रहने को कहा गया था। हालांकि, मछली परिवार की तरफ से वकीलों ने अपना पक्ष भी रखा। कहा कि जमीन पर उनका कब्जा नहीं है।

सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ाना चाहते हैं? इन 5 आदतों को तुरंत छोड़ें

हर इंसान में सेल्फ कॉन्फिडेंस का होना जरूरी है। ये एक ऐसी जरूरी चीज है जिसके बल पर वो दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकता है। जिस इंसान में सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी होती है वो ज्यादातर सक्सेज नहीं पाते। अगर आपके अंदर भी सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी रहती है तो जरा इन 5 आदतों पर गौर करें। अगर ये आदते आपकी लाइफ का हिस्सा हैं तो फौरन इन्हें दूर कर दें। तभी आत्मविश्वास बढ़ पाएगा। खुद के बारे में निगेटिव सोचना अगर आप खुद के बारे में हमेशा निगेटिव बातें बोलते और सोचते हैं। खुद की कमियां निकालते हैं तो इससे आपकी सेल्फ एस्टीम प्रभावित होती है। और आपके अंदर का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। आपको खुद पर विश्वास नहीं रहता कि कोई काम आप अकेले कर सकते हैं। इसलिए सेल्फ वैल्यूएशन करने और खुद को क्रिटिसाइज करने के बीच का फर्क समझकर निगेटिव सोचना बंद करें। हमेशा परफेक्ट बनने की चाह किसी भी काम में परफेक्शन अच्छी बात है लेकिन यहीं परफेक्शन की चाह कई बार आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। क्योंकि जरा सी कमी भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और कई बार सेल्फ कॉन्फिडेंस पर निगेटिव असर पड़ता है। दूसरों से तुलना दूसरों से तुलना करना अगर आदत बन जाती है तो खुद में केवल कमियां ही कमियां नजर आती हैं। जिसकी वजह से आत्मविश्वास कमजोर होता है। नए चैलेंज एक्सेप्ट ना करना अगर आप लाइफ में आने वाले नए चैलेंज को एक्सेप्ट नहीं करते हैं तो ये आपकी ग्रोथ को रोक सकती है। क्योंकि मन में बात आती है कि मुझसे ये काम नहीं होगा, जो कि पूरी तरह से कमजोर आत्मविश्वास की निशानी है। खुद को जिम्मेदार ठहराना लाइफ में और अपने आसपास आपसे जुड़े लोगों के जीवन में हो रही किसी भी समस्या के लिए अगर आप खुद को जिम्मेदार ठहराते हैं, तो ये सेल्फ कॉन्फिडेंस को कमजोर बना देती है।  

जासूसी केस में ज्योति मल्होत्रा की 11वीं पेशी, अधूरी चार्जशीट को लेकर वकील तैयार

हिसार  पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोपों में पकड़ी गई ज्योति मल्होत्रा की आज कोर्ट में 11वीं पेशी होगी। ज्योति व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होगी। ज्योति की इससे पहले 3 सितंबर को हिसार कोर्ट ने ज्योति की डिफॉल्ट बेल को खारिज कर दिया था। ज्योति के वकील कुमार मुकेश का कहना था कि 90 दिन का समय पुलिस को चालान पेश करने के लिए मिला था मगर पुलिस पूरी जांच नहीं कर पाई। ज्योति के खिलाफ पुलिस को कुछ नहीं मिला और अधूरी चार्जशीट के आधार पर बेल मिलनी चाहिए मगर कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके अलावा पुलिस ने कोर्ट में 3 एप्लीकेशन लगाई थी। कोर्ट ने 2 एप्लीकेशन को स्वीकार कर लिया था। इसके अनुसार वकील कुमार मुकेश को अधूरी चार्जशीट दी जाएगी और चालान के पार्ट को प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा। हालांकि रूटीन मीडिया ब्रीफिंग पर कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है। ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने बताया कि अदालत के फैसले का सम्मान है, लेकिन मैं इनसे संतुष्ट नहीं हूं। चारों आदेशों की कॉपियां शीघ्र लेकर उनके खिलाफ रिविजन फाइल की जाएगी। ज्योति की पिछली पेशी 2 सितंबर को हुई थी। 25 अगस्त से चार्जशीट को लेकर चल रहा विवाद पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की चार्जशीट को लेकर विवाद चल रहा है। 25 अगस्त को ज्योति को चार्जशीट सौंपने के लिए कोर्ट में पेशी पर लाया गया था। कोर्ट में चार्जशीट सौंपने की प्रक्रिया चल ही रही थी, इस दौरान हिसार पुलिस ने कोर्ट में 3 एप्लिकेशन दी कि ज्योति के वकील कुमार मुकेश को चार्जशीट के कुछ हिस्से न दिए जाएं। पुलिस ने इसके पीछे तर्क दिया है कि वकील को चार्जशीट कॉपी देने से रिपोर्ट सार्वजनिक हो सकती है, जो काफी संवेदनशील है। पुलिस ने कहा कि पंचकूला सीएफएल का डेटा गोपनीय है और देश की सुरक्षा के लिए इसे सार्वजनिक करना ठीक नहीं है। पुलिस ने कहा कि पाक एजेंटों के साथ ज्योति की चैटिंग सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पुलिस ने कहा कि पूरे मामले के मीडिया ब्रीफिंग पर रोक लगाई जाए। वहीं कुमार मुकेश ने कोर्ट में कहा था कि यह एप्लिकेशन अवैध हैं। कुछ प्रावधानों को तरोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। इसका कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद वकील कुमार मुकेश ने अपनी तरफ से डिफॉल्ट बेल की एप्लिकेशन कोर्ट में लगाई थी। पाकिस्तान और चीन की यात्रा से शक के घेरे में आई थी ज्योति ट्रैवल ब्लॉगर ज्योति मल्होत्रा सुरक्षा एजेंसियों की नजर में तब आई जब वह पिछले साल 2024 में 2 महीने के भीतर पाकिस्तान और फिर चीन गई थी। ज्योति मल्होत्रा के यूट्यूब पर अपलोड वीडियो की डेट के अनुसार वह 17 अप्रैल 2024 को पाकिस्तान गई थी। 15 मई तक वह पाकिस्तान में ही रही। इसके बाद भारत लौटी। पाकिस्तान से लौटने के 25 दिन बाद ही 10 जून को वह चीन चली गई। 9 जुलाई तक चीन में रही और फिर वहीं से 10 जुलाई को नेपाल में काठमांडू पहुंच गई। इससे पहले वह करतारपुर कॉरिडोर से पाकिस्तान गई तो वहां पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री और पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ से मिली और उनका इंटरव्यू तक किया। ज्योति को 15 मई को किया था गिरफ्तार बता दें कि हिसार पुलिस ने ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में 15 मई को गिरफ्तार किया था। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 3, 4 और 5 के तहत जासूसी, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने और गोपनीय जानकारी साझा करने जैसे गंभीर आरोप हैं।

जानें घर की सही दिशा, जहां अपराजिता लगाने से बढ़ती है खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र में घर में पेड़-पौधे लगाने के लिए भी कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों का ध्यान रखने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। आज हम आपको अपराजिता के पौधे से संबंधित कुछ वास्तु नियम बताने जा रहे हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में। मिलते हैं ये फायदे घर में अपराजिता का पौधा लगाने से व्यक्ति को धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। साथ ही यह पौधा सकारात्मक ऊर्जा के संचार को भी बढ़ाता है और नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर रखता है। माना जाता है कि घर में अपराजिता का पौधा लगाने से व्यक्ति के करियर में आ रही परेशानियां भी दूर हो सकती हैं। किस दिशा में लगाएं पौधा वास्तु शास्त्र में अपराजिता का पौधा लगाने के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना गया है। क्योंकि वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, यह दिशा देवी-देवताओं की देशा मानी गई है। ऐसे में इस दिशा में पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। साथ ही और नकारात्मकता भी दूर होती है। वहीं वास्तु शास्त्र में अपराजिता लगाने के लिए पूर्व दिशा भी शुभ मानी गई है। इस दिशा से अपराजिता का पौधा लगाने से सुख-शांति और समृद्धि में वृद्धि हो सकती है। रखें इन बातों का ध्यान अपराजिता के पौधे कभी भी पश्चिम या फिर दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ सकता है और आपके जीवन में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं। साथ ही यह भी माना गया है कि आपको शनिवार के दिन अपराजिता का पौधा लगाने से काफी लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही शनि देव की पूजा में अपराजिता का फूल अर्पित करने से शनिदेव की कुदृष्टि आपके ऊपर नहीं पड़ती।