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मुख्यमंत्री ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में अगले शैक्षणिक सत्र से 200 बच्चों को लाभ दिलाने की महत्वपूर्ण घोषणा

रायपुर : अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए खुला बेहतर शिक्षा का रास्ता – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में अगले शैक्षणिक सत्र से 200 बच्चों को लाभ दिलाने की महत्वपूर्ण घोषणा मुख्यमंत्री साय ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना का किया शुभारंभ, चयनित बच्चों का किया सम्मान रायपुर मुख्यमंत्री ने "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" में अगले शैक्षणिक सत्र से 200 बच्चों को लाभ दिलाने की महत्वपूर्ण घोषणामुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में श्रम विभाग द्वारा श्रमिक बच्चों के लिए संचालित "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" का शुभारंभ किया। उन्होंने चयनित बच्चों का सम्मान करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हुआ है। साय ने घोषणा की कि अगले शैक्षणिक सत्र से इस योजना का लाभ 200 बच्चों को मिलेगा।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक अनेक समाज के हित के लिए कार्य करता है, परंतु अपने परिवार के लिए बहुत कम समय, संसाधन, ऊर्जा और ध्यान दे पाता है। उनके भी सपने होते हैं कि उनके घर के बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर जीवन जिएँ, ताकि भविष्य में मजदूर का बेटा-बेटी केवल मजदूरी न करे, बल्कि समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील और राजनेता बने।इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत श्रमिक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ में "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" प्रारंभ की है। इसके तहत प्रदेश के श्रमिकों के बच्चों को कक्षा छठवीं से बारहवीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त होगी। इनका पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से कार्यक्रम के दौरान निर्माण श्रमिकों एवं उनके बच्चों ने मिलकर योजना का शुभारंभ पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना से अब हम अपने बच्चों के भविष्य को लेकर निश्चिंत हो गए हैं। इस योजना के माध्यम से बच्चों को अच्छी शिक्षा और भविष्य सँवारने का सुनहरा अवसर मिल गया है। हमारे लिए यह एक सपना था, जो अब पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री साय ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए कहा कि निर्माण श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना लागू की गई है। योजना के तहत चालू वर्ष में 100 निर्माण श्रमिकों के बच्चों को 14 निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इन विद्यालयों में सीबीएसई और आईसीएसई पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज श्रम विभाग के सहयोग से श्रमिक परिवारों के 100 बच्चों का दाखिला प्रदेश के 14 निजी आवासीय विद्यालयों में कराया गया है। सरकार की सोच है कि श्रमिक का बच्चा केवल श्रमिक न रहकर अधिकारी बने और देश की सेवा करे। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना भी संचालित की जा रही है, जिसके निश्चित ही दूरगामी परिणाम सामने आएँगे। श्रम मंत्री देवांगन ने आगे कहा कि श्रम विभाग के अंतर्गत तीन मंडल संचालित हैं, जिनमें लगभग 70 से अधिक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा पिछले 20 माह में लगभग 600 करोड़ रुपये का लाभ श्रमिकों को डीबीटी के माध्यम से पहुँचाया गया है। उन्होंने योजना के तहत चयनित बच्चों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी के संकल्पों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सुशासन की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य में लगभग 30 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिक हैं, जिनके बच्चे अच्छे विद्यालयों में नहीं पढ़ पाते थे। उनके लिए "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना से श्रमिकों के बच्चों को बेहतर विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने चयनित बच्चों एवं अभिभावकों को शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर श्रम विभाग के सचिव हिम शिखर गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर संयुक्त सचिव श्रीमती फरिहा आलम, श्रम कल्याण मंडल के सचिव गिरीश रामटेके सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।

तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या दोगुनी, 17 से बढ़कर हुई 35– मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या पिछले तीन वर्षों में दोगुनी हो गई है। वर्ष 2022 में जहां बाघों की संख्या 17 थी, वहीं अप्रैल 2025 के सर्वेक्षण में यह बढ़कर 35 हो गई। यह जानकारी आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सम्पन्न छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव कल्याण बोर्ड की 15वीं बैठक में दी गई।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों का संरक्षण और संवर्धन हमारी प्राथमिकता है। हमारा राज्य वन संपदा और वन्य प्राणियों के मामले में अत्यंत समृद्ध है। इन्हें सुरक्षित और विकसित करने के लिए सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में बाघों की संख्या में तीन वर्षों के भीतर हुई दोगुनी वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बाघों की संख्या 17 से बढ़कर 35 होना इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में संतोषजनक कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि अब हमें अन्य वन्यजीवों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी ठोस प्रयास करने होंगे। छत्तीसगढ़ के कई इलाके ऐसे हैं जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। जशपुर जिले के नीमगांव में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। यहां प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन हेतु आवश्यक कार्य किए जाने की आवश्यकता है। इसी तरह अन्य क्षेत्रों की पहचान कर उनका भी विकास किया जाना चाहिए। इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा बल्कि रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं वनमंत्री केदार कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि राज्य में बाघों की संख्या के साथ-साथ अन्य वन्य प्राणियों के संरक्षण और संवर्धन में भी वृद्धि हुई है तथा उनके रहवासों में सुधार के प्रयास जारी हैं। आगे इसके और बेहतर परिणाम जनता के सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि आज पारित प्रस्ताव जनहित के महत्वपूर्ण कार्य हैं, जो शांति का वातावरण स्थापित करने में सहायक होंगे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि वन्यजीवों एवं जैव विविधता को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। बोर्ड के सदस्य सचिव अरुण कुमार पांडेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) द्वारा विभागीय उपलब्धियों और एजेण्डा पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। सदस्य सचिव ने बताया कि राज्य में सर्वाधिक बाघ अचानकमार टाइगर रिज़र्व में हैं। राज्य वन्यजीव बोर्ड की 14वीं बैठक में पारित निर्णय के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व और गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिज़र्व में मध्यप्रदेश से बाघ एवं बाघिन के ट्रांसलोकेशन की अनुमति मिल चुकी है। शीघ्र ही ट्रांसलोकेशन की कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। उन्होंने बताया कि राजकीय पशु वनभैंसा की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। असम से लाए गए वनभैंसों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इसी प्रकार राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण हेतु भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। “मैना मित्र” नामक समूह का गठन किया गया है, जो मैना के संरक्षण और उनके रहवास की निगरानी करता है। टाइगर रिज़र्व और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अन्य सुविधाएं विस्तारित की जा रही हैं, जिससे समीपवर्ती ग्रामवासियों को रोजगार मिलेगा और वन्यजीव संरक्षण में भी सहयोग प्राप्त होगा। बैठक में वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन हेतु गश्ती मार्ग निर्माण तथा संरक्षित क्षेत्र के युक्तियुक्तकरण के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व, गरियाबंद अंतर्गत धवलपुर से कुकरार तक सड़क निर्माण कार्य; मिशन अमृत योजना के तहत पाइपलाइन विस्तार कार्य; तथा कवर्धा वनमंडल में इंटरनेट सुविधा के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने की अनुमति प्रदान की गई। इससे वन क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों को मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी, शासकीय योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलेगी, ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक विकास में सुधार होगा और क्षेत्रीय अमलों के लिए सूचना संप्रेषण मजबूत होगा। बैठक में राज्य वन्यजीव कल्याण बोर्ड के सदस्यों ने वन्यजीव संरक्षण के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में विधायक धर्मजीत सिंह, विधायक चैतराम अटामी, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, सचिव वन अमरनाथ प्रसाद तथा अन्य माननीय सदस्य और गैर-शासकीय संस्थाओं के प्रख्यात वन्यजीव विशेषज्ञ उपस्थित थे।

इंदिरा एकादशी विशेष: पितृ दोष दूर करने के आसान टिप्स, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद

इंदिरा एकादशी पितृपक्ष में आने वाली विशेष तिथि है, जिसका संबंध पितरों की शांति और मोक्ष से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और नियमपूर्वक पूजा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृदोष से मुक्ति का मार्ग खुलता है. शास्त्रों के अनुसार, जो लोग पितृपक्ष में अपने पितरों को प्रसन्न करने के उपाय करते हैं, उन्हें न केवल पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि उनके जीवन में सुख-समृद्धि और उन्नति भी आती है. आइए जानते हैं इस बार की एकादशी की तिथि और उन उपायों के बारे में जिन्हें करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है. इंदिरा एकादशी 2025 पंचांग के अनुसार, 16 सितंबर को रात 12 बजकर 21 मिनट पर आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी. वहीं, 17 सितंबर को देर रात 11 बजकर 39 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 17 सितंबर को इंदिरा एकादशी मनाई जाएगी. पितृ दोष क्या है? जब किसी व्यक्ति के पूर्वजों (पितरों) की आत्मा को शांति नहीं मिलती, तो उसे पितृ दोष माना जाता है. यह दोष कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि पितरों का विधिपूर्वक श्राद्ध न करना, उनकी मृत्यु के बाद कोई अनुष्ठान अधूरा रह जाना, या उनका असंतोष. पितृ दोष के कारण परिवार में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं, जैसे धन की कमी, विवाह में देरी, संतान संबंधी परेशानियां और लगातार बीमारियां. इंदिरा एकादशी पर पितृ दोष से मुक्ति के लिए क्या करें? अगर आप पितृ दोष से परेशान हैं, तो इंदिरा एकादशी का दिन आपके लिए बहुत शुभ है. इस दिन कुछ विशेष उपाय करके आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं: व्रत और पूजा: इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. भगवान शालिग्राम और भगवान विष्णु की पूजा करें. पूजा में तुलसी दल, फूल, फल और पंचामृत जरूर चढ़ाएं. श्राद्ध और तर्पण: इस दिन पितरों का श्राद्ध करना बहुत ही पुण्यकारी माना जाता है. अगर आप अपने पितरों का श्राद्ध करने में सक्षम हैं, तो किसी योग्य ब्राह्मण से विधिपूर्वक श्राद्ध करवाएं. अगर ऐसा संभव न हो तो तर्पण (जल अर्पित करना) कर सकते हैं. ब्राह्मणों को भोजन कराएं: पितरों की शांति के लिए इस दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना बहुत शुभ होता है. भोजन में खीर और पूड़ी जैसी चीजें शामिल करें. दान-पुण्य: इस दिन अनाज, कपड़े या धन का दान करना भी बहुत लाभकारी होता है. गाय को चारा खिलाना भी पुण्य का काम है. पितृ स्तोत्र का पाठ: अगर आपको पितृ दोष महसूस होता है, तो इंदिरा एकादशी के दिन पितृ स्तोत्र या गरुड़ पुराण का पाठ करना बहुत ही फलदायी होता है. यह पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है. इंदिरा एकादशी का महत्व यह एकादशी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकमात्र एकादशी के रूप में जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. यह भी कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से पितरों को स्वर्गलोक में स्थान प्राप्त होता है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं.

Apple ने बंद किए ये 3 iPhone मॉडल, iPhone 17 के बाद स्टॉक खत्म होने पर नहीं मिलेगा खरीदने का मौका

नई दिल्ली ऐपल ने iPhone 17 सीरीज के चार मॉडल लॉन्च कर दिए हैं। नए फोन के डिजाइन, कलर्स और फीचर्स लोगों को आकर्षक लग रहे हैं। ऐपल स्टोर पर नए लॉन्च हुए मॉडल्स के फीचर्स की जानकारी दे दी गई है। इसी बीच ऐपल ने अपने ऑनलाइन स्टोर से कुछ पुराने मॉडल हटा दिए हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि फोन पूरी तरह से बंद हो गए हैं, बल्कि ऐपल के ये फोन अभी अधिकृत रिटेलर, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बाकी दुकानों पर उपलब्ध हैं। ये तब तक तो मार्केट में रहेंगे, जब तक स्टॉक खत्म नहीं हो जाता। ऐपल ने कौनसे iPhone वेबसाइट से हटाए? ऐपल ने अपनी वेबसाइटी से iPhone के तीन मॉडल हटा दिए हैं। इनमें iPhone 16 Pro, iPhone 16 Pro Max और बेस iPhone 15 शामिल हैं। ये फोन अब ऐपल की आधिकारिक वेबसाइट पर नहीं मिलेंगे, लेकिन आप इन्हें ऐपल के अधिकृत रिटेलर्स, ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट से खरीद सकते हैं। ये तभी तक उपलब्ध रहेंगे, जब तक इनका स्टॉक है। यह ऐपल की स्ट्रैटेजी है कि पुराने मॉडल्स को धीरे-धीरे हटाकर नए मॉडल्स को बढ़ावा दिया जाए।   iPhone 16 Pro और iPhone 16 Pro Max में ऐपल इंटेलिजेंस सपोर्ट था ऐपल ने अपनी वेबसाइट से जो मॉडल्स हटाए हैं, उनमें iPhone 16 Pro और iPhone 16 Pro Max में ऐपल इंटेलिजेंस का सपोर्ट था। यह ऐपल की नई तकनीक है, जो जेनरेटिव मॉडल्स और यूजर के पर्सनल डेटा को मिलाकर स्मार्ट एक्सपीरियंस देती है। यदि अब आप नया iPhone खरीदना चाहते हैं, जिसमें ऐपल इंटेलिजेंस तकनीक हो, तो आपको नए मॉडल्स में से ही कोई एक खरीदना होगा। iPhone 17 Series में नए और पावरफुल प्रोसेसर हैं iPhone 17 सीरीज और iPhone Air में नए और पावरफुल प्रोसेसर हैं। बेस iPhone 17 मॉडल में A19 चिपसेट दिया गया है, जो पिछले A18 चिपसेट के मुकाबले में 20% तेज बताया जा रहा है। iPhone Air और iPhone 17 Pro मॉडल्स में A19 Pro प्रोसेसर है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि यह पिछले मॉडल से 40% अधिक तेज है। iPhone Air की खूब चर्चा, बेहद पतला है ये फोन आईफोन एयर की थिकनेस 5.6mm है, यह सैमसंग एस25 ऐज से भी पतला है, क्योंकि उसकी मोटाई वह फोन 5.8mm है। ऐपल ने इस फोन को लाइटवेट बताया है। इसे बनाने में 5 ग्रेड टाइटेन‍ियम फ्रेम का इस्‍तेमाल हुआ है। यह इतना पतला है, फिर भी इसमें एक्‍शन बटन दिया गया है।

iPhone 17 सीरीज लॉन्च: Pro और Pro Max में 48MP कैमरा, बाकी दमदार फीचर्स भी शामिल

नई दिल्ली मंगलवार को Apple के 'Awe Dropping' इवेंट में नए iPhone 17, iPhone 17 Pro और 17 Pro Max को लॉन्च कर दिया। जैसा कि उम्मीद थी, iPhone 17 Pro मॉडल्स में Apple की A19 Pro चिप दी गई है, जो कि ऐपल का टॉप टियर चिपसेट होगा। iPhone 16 Pro मॉडल्स के अपग्रेड ये नए मॉडल्स कई नए फीचर्स और अपग्रेड के साथ आए हैं। सभी डिवाइस Apple Intelligence के सभी AI फीचर्स को सपोर्ट करेंगे। इस बार लॉन्च हुए सभी मॉडल्स की खास बात है कि इनमें 128GB वाला मॉडल देखने को नहीं मिलेगा। इस इवेंट में लॉन्च हुए हर एक मॉडल की शुरुआत 256GB वाले मॉडल से होगी। iPhone 17 के फीचर और स्पेक्स iPhone 17 एक ड्युअल सिन फोन है जो कि आउट ऑफ द बॉक्स iOS 26 के साथ आएगा। अमेरिका में इसका सिर्फ ई-सिम वाला मॉडल ही मिलेगा जबकि बाकी दुनिया में यह Nano+eSIM के कॉम्बिनेशन के साथ आएगी। इसमें 6.3-इंच का Super Retina XDR OLED डिस्प्ले मिलेगा जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। यह पहली बार है कि ऐपल ने iPhone 17 में 120Hz का रिफ्रेश रेट दिया है। बता दें कि यह एक नया ProMotion पैनल iPhone 16 Pro models से लिया गया है। इस फोन की स्क्रीन 3,000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करेगी।इस बार Apple ने iPhone 17 में Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन दिया है। साथ ही इसमें ऑलवेज ऑन डिस्प्ले का फीचर भी मिलेगा। बता दें कि iPhone 17 में IP68 रेटिंग भी दी गई है।कैमरा की बात करें तो iPhone 17 में ड्युअल रियर कैमरा सिस्टम मिलेगा। इसका मेन कैमरा 48MP का होगा और यही सेंसर 2X टेलिफोटो कैमरा के तौर पर भी काम करेगा। इसके साथ इसमें 48MP का फ्यूजन अल्ट्रा वाइड कैमरा भी मिलेगा। इसकी मदद से यूजर मैक्रो शॉट्स भी क्लिक कर पाएंगे। iPhone 17 के फ्रंट में नया सेंटर स्टेज कैमरा भी दिया गया है। iPhone 17 में A19 चिपसेट दिया गया है। कुल मिलाकर इस फोन की CPU परफॉर्मेंस iPhone 16 से 40% तेज होगी। साथ ही इस बार ऐपल ने फोन्स की स्टोरेज भी बढ़ाई है और अब बेस वेरिएंट 256GB का होगा। यह प्रो मॉडल्स की तरह ऐपल इंटेलिजेंस फीचर को सपोर्ट करेगा। ऐपल के अनुसार iPhone 17 की बैटरी लाइफ iPhone 16 से आठ घंटे ज्यादा होगी। इस बार फोन की चार्जिंग स्पीड भी बढ़ाई गई है। अब यह सिर्फ 20 मिनटों में 50% चार्ज हो जाएगा। iPhone 17 की कीमत iPhone 17 शुरुआती कीमत 799 डॉलर है। यह भारतीय रुपयों में लगभग 70,400 रुपये होता है। इस बार iPhone 17 का बेस वेरिएंट 256GB का होगा। इसके अलावा इसका 512GB वेरिएंट भी खरीदा जा सकेगा। प्री ऑर्डर 12 सितंबर से शुरू होंगे और फोन बिक्री के लिए 19 सितंबर से उपलब्ध होंगे। iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max के स्पेक्स iPhone 17 Pro models इस बार एल्युमिनियम बिल्ड के साथ आए हैं, जिसका मतलब है प्रो मॉडल्स में ऐपल ने टाइटेनियम बॉडी को ड्रॉप कर दिया है। खास बात यह है कि नया iPhone Air टाइटेनियम बॉडी के साथ लॉन्च किया गया है। Apple ने इसमें यूनीबॉजी डिजाइन को अपनाया है जिसके पीछे पिछली बार से अलग और बड़ा कैमरा मॉड्यूल मिलता है। iPhone 17 Pro में पहली बार वेपर चेंबर कूलिंग सिस्टम दिया गया है जो कि हैवी वर्कलोड के दौरान बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए डिजाइन किया गया है। iPhone 17 Pro में 6.3 इंच का Super Retina XDR डिस्प्ले दिया गया है जो ProMotion के साथ 120Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है, जबकि 17 Pro Max में 6.9 इंच का डिस्पले मिलेगा। दोनों में Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन दिया गया है जो कि Apple के अनुसार स्क्रैच से 3 गुना बेहतर सुरक्षा देता है। इसमें पीक ब्राइटनेस 3,000 निट्स की मिलेगी। iPhone 17 Pro मॉडल्स में नई A19 Pro चिपसेट का इस्तेमाल किया गया है। Apple का दावा है कि यह उनकी "most capable" चिप है जो पुराने जेनरेशन से 40% बेहतर परफॉर्मेंस देती है। कैमरा की बात करें तो iPhone 17 Pro मॉडल्स में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा। इसमें 48MP का मेन, 48MP का अल्ट्रावाइड और 48MP का टेलीफोटो लेंस मिलेगा। यह पहली बार है जब iPhone के तीनों बैक कैमरा 48MP के होंगे। फ्रंट में 18MP वाला सेंटर स्टेज कैमरा दिया गया है। यूनिबॉडी डिजाइन की वजह से इसमें बड़ी बैटरी दी गई है। Apple का दावा है कि iPhone 17 Pro Max में अभी तक की सबसे बेहतरीन बैटरी लाइफ देखने को मिलेगी। इतना ही नहीं प्रो मॉडल्स अब ज्यादा पावर वाले चार्जर को भी सपोर्च करेंगे। जो कि इन्हें सिर्फ 20 मिनट में 50% तक चार्ज कर देगा। iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max की कीमत और उपलब्धता iPhone 17 Pro यूएस में 1099 डॉलर की शुरुआती कीमत में खरीदा जा सकेगा। वहीं, iPhone 17 Pro Max की शुरुआती कीमत 1199 डॉलर रखी गई है। इन दोनों का ही शुरुआती वेरिएंट 256GB का होगा। ऐपल ने इनके कॉस्मिक ऑरेंज, डीप ब्लू और सिलवर कलर ऑप्शन उपलब्ध करवाए हैं। प्री ऑर्डर 12 सितंबर से शुरू होंगे और फोन बिक्री के लिए 19 सितंबर से उपलब्ध होंगे।

सीएम योगी का बड़ा कदम: नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर, 4 बॉर्डर जिलों में हाई अलर्ट

लखनऊ  नेपाल में दो दिनों से हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. राजधानी काठमांडू से लेकर छोटे कस्बों तक Gen-Z आंदोलनकारियों का विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है. पथराव, आगजनी से शुरू हुआ ये बवाल अब बढ़ता ही जा रहा है. नेपाल की इस अस्थिरता का असर अब खासकर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों तक भी महसूस किया जाने लगा है. नेपाल सीमा से सटे बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर और महाराजगंज को हाई अलर्ट पर डाल दिया गया है. व्यापार, पढ़ाई और रोजमर्रा की आवाजाही के कारण नेपाल से लगे जिले हमेशा से संवेदनशील रहे हैं. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा को कड़ा कर दिया है योगी सरकार की सख्त तैयारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण को निर्देश दिया कि नेपाल से सटी पूरी सीमा पर 24 घंटे पुलिस अलर्ट पर रहे. आदेश मिलते ही सभी संबंधित जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. गश्त बढ़ा दी गई है, सीमा चौकियों को और मजबूत किया गया है और सुरक्षा एजेंसियों को हर छोटी-बड़ी सूचना पर सतर्क रहने को कहा गया है. बताया जा रहा है कि सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों को विशेष रूप से यह हिदायत दी गई है कि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई करें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने में देरी न हो. इसके लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) को सक्रिय कर दिया गया है. इसके अलावा ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके. नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए मदद का इंतजाम नेपाल में जारी उथल-पुथल की वजह से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक फंस गए हैं. इनमें व्यापारी, छात्र, तीर्थयात्री और पर्यटक शामिल हैं. इनकी सुरक्षा और वापसी के लिए यूपी पुलिस मुख्यालय लखनऊ में एक विशेष नियंत्रण कक्ष (Control Room) बनाया गया है. यह कंट्रोल रूम अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) की देखरेख में काम करेगा और 24×7 सक्रिय रहेगा. हेल्पलाइन नंबर और व्हाट्सएप नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर फंसे नागरिक सीधे संपर्क कर सकते हैं. हेल्पलाइन नंबर जारी हुए: – 0522-2390257 – 0522-2724010 – 9454401674 – WhatsApp नंबर: 9454401674 इन नंबरों पर आने वाली कॉल्स को हैंडल करने के लिए प्रशिक्षित टीम लगाई गई है, जो तुरंत संबंधित विभागों से संपर्क कर मदद पहुंचाएगी. अधिकारियों ने कहा है कि नेपाल में मौजूद भारतीयों को किसी भी हाल में असहाय नहीं छोड़ा जाएगा. सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी नेपाल में हालात बदलते ही अफवाहों का बाजार भी गर्म हो गया है. गलत सूचनाओं से माहौल बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए यूपी पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया इकाई को सख्त निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नेपाल से जुड़ी किसी भी संवेदनशील सूचना या पोस्ट पर लगातार नजर रखी जाए. अगर कोई भ्रामक पोस्ट या अफवाह सामने आती है तो तुरंत कार्रवाई की जाए. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे. नेपाल की स्थिति और बढ़ती चिंता नेपाल में सोमवार तक आंदोलन का चेहरा छात्रों और युवाओं का था, जो सोशल मीडिया बैन का विरोध कर रहे थे. लेकिन मंगलवार को स्थिति ने अचानक करवट बदली. हथियारबंद लोग भीड़ में शामिल हो गए और विरोध हिंसा में बदल गया. इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह टकराव हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की यह अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है, क्योंकि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव अब खुला संघर्ष बन चुका है. ऐसे में भारत के लिए विशेष सतर्कता जरूरी है, क्योंकि दोनों देशों की खुली सीमाएं सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बन सकती हैं. मुख्यमंत्री योगी की सख्त निगरानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ले रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमावर्ती जिलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और कहा गया है कि नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की हर संभव मदद की जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि सीमा पर आवागमन को नियंत्रित किया जाए और जरूरत पड़ने पर अस्थायी तौर पर आवाजाही बंद कर दी जाए. यही कारण है कि कई जगह स्थानीय प्रशासन ने बॉर्डर पर चेकिंग सख्त कर दी है और संदिग्ध लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है. नागरिकों के लिए संदेश पुलिस और प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक हेल्पलाइन या प्रशासनिक चैनल से मिली जानकारी पर भरोसा करें. सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों से कहा गया है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें.

चारपाई पर तीन बेटियों की लाशें, पंखे से लटकी मिली मां… बागपत के एक घर में सनसनी

बागपत उत्तर प्रदेश के बागपत में एक ही घर से चार लाशें उठी तो पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई. सबकी जुबान पर यही सवाल है कि कैसे एक महिला  पति से विवाद में अपनी मासूम बेटियों को मौत के घाट उतार सकती है. फिर खुद भी फांसी के फंदे से झूल गई. आइए जानते हैं पूरी कहानी…  बता दें कि दोघट थाना क्षेत्र के टिकरी गांव में एक मां ने अपनी तीन बेटियों का गला घोंटने के बाद खुद भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मृतक बच्चियों में एक उसकी सौतेली बेटी थी. उसका 12 सितंबर को जन्मदिन था. महिला उसे बुआ के घर से बुलाकर लाई थी. लेकिन जन्मदिन से पहले उसने ऐसा कांड कर दिया जिससे इलाके में हड़कंप मच गया.     मृतकों की पहचान तेज कुमारी उर्फ ​​माया (29) और उसकी बेटियों गुंजन (7), कीतो (2) और मीरा (4 महीने) के रूप में हुई है.गुंजन उसकी सौतेली बेटी थी. दरअसल, तेज कुमारी के पति विकास ने दो शादियां की थीं. पहली पत्नी से तलाक के बाद उसने तेज कुमारी से लव मैरिज की थी. गुंजन पहली पत्नी की बेटी है, जो बुआ के यहां रह रही थी.  घटना के बाद बड़ौत के क्षेत्राधिकारी विजय कुमार ने बताया कि पुलिस को दोघट थाना क्षेत्र के टिकरी गांव में मंगलवार देर शाम इस घटना की सूचना मिली. मौके पर जाकर देखा गया तो वहां चार शव मिले. पूछताछ में पता चला कि महिला ने पहले अपनी तीन बेटियों का गला घोंट दिया और फिर दुपट्टे से पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली.  घटना के समय उसका पति घर के बाहर एक पेड़ के नीचे सो रहा था. बाद में, जब उसने कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश की और उसे बंद पाया, तो उसने पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंचकर पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और तीनों बच्चों के शव चारपाई पर और माया पंखे से लटकी हुई पाई गई. खुद एसपी सूरज कुमार राय ने भी अन्य अधिकारियों के साथ रात में घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने बताया कि दंपति के बीच कथित तौर पर इस बात को लेकर विवाद था कि महिला अपने बेटियों की पढ़ाई के लिए शहर जाना चाहती थी. जबकि, पति राजी नहीं हो रहा था. इसी को लेकर पति-पत्नी में आए दिन झगड़ा होता था. आरोप है कि पति विकास ने पत्नी से बात करना भी बंद कर दिया था. इसी से नाराज होकर तेज कुमारी ने पहले तीनों बच्चियों का गला दबाया और फिर खुद भी मौत को गले लगा लिया. 

पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण तृतीया पर गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा

अहर्निश प्रासंगिक हैं युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के विचार पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण तृतीया पर बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा लोक कल्याण को समर्पित रहा महंत दिग्विजयनाथ जी का जीवन गोरखपुर  कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने, विरासत पर गौरव की अनुभूति करने और गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने की सनातनी परंपरा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष स्मृतिशेष गुरुजन की स्मृति में अध्यात्म और राष्ट्रीयता के सुर गुंजित होते हैं। अवसर होता है युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का। इस वर्ष ब्रह्मलीन महंतद्वय की स्मृति में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा 4 सितंबर से और समाज व राष्ट्र को प्रभावित करने वाले समसामयिक विषयों पर चिंतन-मंथन के सांगोष्ठिक कार्यक्रम 5 सितंबर से जारी हैं। इस साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत आश्विन कृष्ण तृतीया पर 10 सितंबर (बुधवार) को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि पर तथा आश्विन कृष्ण चतुर्थी पर 11 सितंबर (गुरुवार) को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में किया जाएगा। पुण्य स्मरण का यह कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में होगा जहां देशभर के प्रमुख संतजन उपस्थित रहेंगे।  पुण्यतिथि समारोह में बुधवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की स्मृतियों के जीवंत होने के इस अवसर पर यह जानना भी प्रासंगिक है कि उन्हें युगपुरुष क्यों कहा जाता है। भौतिक विद्यमानता न होने के बावजूद जो व्यक्तित्व अपने कार्यों-विचारों से अपने बाद की पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं, सही अर्थों में युगपुरुष होते हैं। कारण, हरेक कालखंड में उनके बताए मार्गों, विचारों और आदर्शों की प्रासंगिकता रहती है। ऐसे ही युगपुरुष हैं ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ। वर्ष 1935 से 1969 तक नाथपंथ के विश्व विख्यात पीठ के कर्ता-धर्ता रहे ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की बुधवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को 56वीं पुण्यतिथि है।  पांच दशक से अधिक समय से उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को श्रद्धा भाव से न केवल नमन-स्मरण किया जाता है बल्कि उनपर अमल करने का संकल्प भी लिया जाता है। महंत जी न केवल गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी रहे बल्कि उनका पूरा जीवन राष्ट्र, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा व समाजसेवा के जरिये लोक कल्याण को समर्पित रहा। तरुणाई से ही वह देश की आजादी की लड़ाई में जोरदार भागीदारी निभाते रहे तो देश के स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक एकता और उत्थान के लिए। इसके लिए शैक्षिक जागरण पर उनका सर्वाधिक जोर रहा। महंत दिग्विजयनाथ का जन्म वर्ष 1894 में वैशाख पूर्णिमा के दिन चित्तौड़, मेवाड़ ठिकाना ककरहवां (राजस्थान) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नान्हू सिंह था। पांच वर्ष की उम्र में 1899 में इनका आगमन गोरखपुर के नाथपीठ में हुआ। अपनी जन्मभूमि मेवाड़ की माटी की तासीर थी कि बचपन से ही उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान से समझौता न करने की प्रवृत्ति कूट कूटकर भरी हुई थी। उनकी शिक्षा गोरखपुर में ही हुई और उन्हें खेलों से भी गहरा लगाव था। 15 अगस्त 1933 को गोरखनाथ मंदिर में उनकी योग दीक्षा हुई और 15 अगस्त 1935 को वह इस पीठ के पीठाधीश्वर बने। वह अपने जीवन के तरुणकाल से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते रहे। देश को स्वतंत्र देखने का उनका जुनून था कि उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में स्कूल छोड़ दिया। उन पर लगातार आरोप लगते थे कि वह क्रांतिकारियों को संरक्षण और सहयोग देते हैं। 1922 के चौरीचौरा के घटनाक्रम में भी उनका नाम आया लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता के सामने ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और उन्हें रिहा कर दिया गया।  श्रीराम मंदिर आंदोलन में ब्रह्मलीन महंतकी रही महती भूमिका अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण को लेकर हुए आंदोलनों में गोरक्षपीठ की महती भूमिका से सभी वाकिफ हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ इस आंदोलन में नींव के पत्थर हैं। 1934 से 1949 तक उन्होंने लगातार अभियान चलाकर आंदोलन को न केवल नई ऊंचाई दी बल्कि 1949 में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भी रहे। 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति प्रकट होने के नौ दिन पहले महंत दिग्विजय नाथ के नेतृत्व में अखंड रामायण के पाठ का आयोजन शुरू हो गया था। रामलला के प्रकट होने के समय महंत जी स्वयं वहां उपस्थित थे। पांच सौ वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि स्थित मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। प्रभु रामलला के मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन को उनके बाद उनके शिष्य महंत अवेद्यनाथ ने निर्णायक बनाया तो कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी तब आई जब राज्य की सत्ता का नेतृत्व भी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। ऐसे में जब भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर का जिक्र होगा, तो वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ आप ही स्मरित होंगे।  पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति के अमर नायक हैं महंत दिग्विजयनाथ महंत दिग्विजयनाथ का नाम पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति लाने वाले नायक के रूप में अमर है। उन्होंने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा की जो ज्योति जलाई, उससे आज पूरा अंचल प्रकाशित हो रहा है। शिक्षा क्रांति के लिए उन्होंने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। एक किराए के मकान में परिषद के अंतर्गत महाराणा प्रताप क्षत्रिय स्कूल शुरू हुआ। 1935 में इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली और 1936 में हाईस्कूल की भी पढाई शुरू हुई। नाम 'महाराणा प्रताप हाई स्कूल' हो गया। इसी बीच महंत दिग्विजयनाथ के प्रयास से गोरखपुर के सिविल लाइंस में पांच एकड भूमि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को प्राप्त हो गयी और महाराणा प्रताप हाईस्कूल का केन्द्र सिविल लाइंस हो गया तथा देश के आजाद होते समय यह विद्यालय महाराणा प्रताप इन्टरमीडिएट कालेज के रुप में प्रतिष्ठित हुआ। 1949-50 में इसी परिसर में महाराणा प्रताप डिग्री कालेज की स्थापना महंतजी की अगुवाई में हुई। शिक्षा को लेकर उनकी सोच दूरदर्शी और निजी हित से परे थी। यही वजह थी कि उन्होंने 1958 में अपनी संस्था महाराणा प्रताप डिग्री कालेज को गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु दान में दिया। बाद में परिषद की तरफ से उनकी … Read more

योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने तैयार की व्यापक रणनीति

दिव्यांगजनों की योजनाओं को लेकर प्रदेश के सभी पात्रों तक पहुंचेगी योगी सरकार   योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने तैयार की व्यापक रणनीति  – सोशल मीडिया से लेकर प्रदेश भर के विद्यालयों, पंचायतों व नगरीय निकायों में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान   दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों के आयोजन पर जोर दे रही योगी सरकार लखनऊ  योगी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए विभागीय योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। इसके तहत आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा ताकि योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। योगी सरकार ने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे योजनाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सके। योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि योजनाओं की जानकारी को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में फैलाने के लिए मीडिया, सोशल मीडिया, विद्यालयों, पंचायतों, नगरीय निकायों और स्थानीय शिविरों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले मिलेगी छात्रवृत्ति  आगामी 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले छात्रवृत्ति वितरित की जाएगी। यह पहली बार होगा जब छात्रवृत्ति का वितरण समय से पूर्व सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। योगी सरकार ने प्रत्येक पात्र लाभार्थी को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है।  दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों का आयोजन दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार ने रोजगार मेलों के आयोजन पर भी जोर दिया है। ये मेले विभागीय स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, जिससे दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे योजनाओं के प्रचार-प्रसार को और प्रभावी बनाने के लिए रचनात्मक तरीके अपनाएं। सोशल मीडिया के माध्यम से योजनाओं की जानकारी को वायरल करने और स्थानीय स्तर पर शिविरों के आयोजन से जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि योगी सरकार की इस पहल से न केवल दिव्यांगजनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया जाएगा, बल्कि उनकी प्रतिभा और क्षमता को समाज में एक नई पहचान भी मिलेगी। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को दिव्यांग सशक्तीकरण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा चेक-बाउंस केस में नहीं हुए हाजिर, कोर्ट ने जारी किया अरेस्ट वारंट

रायसेन  मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे और रायसेन जिले की भोजपुर सीट से बीजेपी एमएलए सुरेंद्र पटवा की मुश्किलें बढ़ गई है। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। यह वारंट इंदौर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने जारी किया है। उन पर चेक बाउंस के कई मामले चल रहे हैं। कोर्ट ने सुरेंद्र पटवा को गिरफ्तार कर 24 सितंबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश सीबीआई और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को भेजा गया है। पटवा के खिलाफ यह वारंट तीसरी बार जारी हुआ है। इससे पहले भी कोर्ट ने 29 अगस्त 2025 को वारंट जारी किया था। इसमें 8 सितंबर को पेश होना था। लेकिन वह नहीं गए। इसके बाद 9 सितंबर को गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इस मामले में दर्ज हुआ मामला दरअसल, यह कार्रवाई चेक बाउंस से जुड़े मामले में की गई है। इस मामले में सुरेंद्र पटवा के अलावा उनकी पत्नी मोनिका पटवा और फर्म 'पटवा इंटरप्राइजेस' के खिलाफ भी केस दर्ज है। पटवा इंटरप्राइजेस ने इंदौर की एक फर्म से 67.5 लाख रुपए का कर्ज लिया था। इस कर्ज के भुगतान के लिए पटवा ने 10-10 लाख रुपए के चेक दिए थे। लेकिन बाद में बाउंस हो गए। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी कोर्ट में पेश नही हुए। 10 दिन के भीतर दूसरा वारंट जारी विधायक सुरेंद्र पटवार के खिलाफ इंदौर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने वारंट जारी किया है. CBI ने सुरेंद्र पटवा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है. बीजेपी विधायक सुरेंद्र पटवा के SBI समेत कई बैंकों में फर्जी खातों की जानकारी मिली थी. पटवा के खिलाफ 10 दिनों के भीतर दूसरी बार वारंट जारी किया गया है. इससे पहले 29 अगस्त को पहला वारंट जारी किया गया था. इसके मुताबिक बीजेपी विधायक पटवा को 8 सितंबर को पेश होना था, लेकिन कोर्ट में पेश नहीं हुए. पेश न होने पर 9 सितंबर 2025 को पटवा के खिलाफ फिर से वारंट जारी किया गया है. पटवा के खिलाफ लगभग 100 के करीब चेक बाउंस के मामले जिला कोर्ट में चल रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट भी लग चुका है झटका पटवा पर कई फर्जी बैंक अकाउंट खोलने का आरोप है. करीब 7 साल पहले कोर्ट ने उनके खिलाफ कुर्की का भी आदेश जारी किया था. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा था. उस समय सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलटते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे. कौन हैं सुरेंद्र पटवा? सुरेंद्र पटवा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे हैं. वे रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं. इसके साथ ही शिवराज सरकार में पर्यटन मंत्री भी रह चुके हैं. उनकी गितनी बीजेपी के दिग्गज नेताओं में की जाती है. सीबीआई और ईओडब्ल्यू को आदेश बार बार आदेश के बाद पेश नहीं होने पर विशेष न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता ने पटवा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने सीबीआई और ईओडब्ल्यू को आदेश दिया है कि वे पटवा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करें। कोर्ट की तरफ जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि आरोपी कोर्ट में 16 सितंबर को उपस्थित नहीं होता है तो बिना जमानत के गिरफ्तार किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। पूर्व सीएम के भतीजे हैं विधायक विधायक पटवा पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे हैं और भोजपुर सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं। वे शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार में पर्यटन और संस्कृति मंत्री भी रह चुके हैं। इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई और ईओडब्ल्यू इस गिरफ्तारी वारंट को कैसे तामील करती है। इस मामले में आगे क्या होता है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।