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CM डॉ. यादव का बड़ा बयान- स्वच्छता व पर्यावरण में मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य

स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने फिर रचा इतिहास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव CM डॉ. यादव का बड़ा बयान- स्वच्छता व पर्यावरण में मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में इंदौर प्रथम, जबलपुर द्वितीय और श्रेणी-3 में देवास प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी प्रदेशवासियों को बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में इंदौर, जबलपुर और देवास को 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण- 2025" सम्मान प्राप्त होने पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने फिर इतिहास रचा है। संपूर्ण भारत के लिए यह सफलता अत्यंत प्रेरणादायी है। मध्यप्रदेश के इन शहरों के नागरिकों की स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता, अटूट संकल्प और अद्वितीय जनभागीदारी सराहनीय है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में "स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025" के पुरस्कार समारोह में श्रेणी-1 के अंतर्गत इंदौर को प्रथम पुरस्कार (पुरस्कार राशि 1.5 करोड़ रुपए), जबलपुर को द्वितीय पुरस्कार (पुरस्कार राशि एक करोड़) और श्रेणी -3 के अंतर्गत देवास को प्रथम पुरस्कार (पुरस्कार राशि 37.50 लाख रुपए) देकर सम्मानित किया। राष्ट्रीय स्तर के इस सर्वेक्षण में इंदौर ने 200 में से 200 अंक, जबलपुर ने 199 अंक और देवास ने 193 अंक प्राप्त किए हैं।  

प्रधानमंत्री मोदी गरीबों का दुख और उनकी जरूरतें समझते हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

संबल योजना सच्चे अर्थों में श्रमिक भाई-बहनों का सहारा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी गरीबों का दुख और उनकी जरूरतें समझते हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने 7,953 हितग्राहियों के खातों में 175 करोड़ की राशि सिंगल क्लिक से की अंतरित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी संस्कृति में मान्यता है कि 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई' यानी दूसरों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और संबल योजना दूसरों की सेवा करने की इसी भावना को चरितार्थ करने का मार्ग है। राज्य सरकार की इस पहल का ही परिणाम है कि संबल योजना सच्चे अर्थों में श्रमिक भाई-बहनों का सहारा बनी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय से संबल योजना के 7 हजार 953 हितग्राहियों के खातों में 175 करोड़ रुपये अंतरित कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि यह राशि श्रमिक भाई-बहनों के लिए बड़ी मदद साबित होगी। प्रदेश में 1 करोड़ 77 लाख से अधिक श्रमिक इस योजना में पंजीकृत हैं। पंजीयन की प्रक्रिया लगातार जारी है। इस अवसर पर पंचायत और ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल उपस्थित थे। कार्यक्रम से सभी जिले वर्चुअली रूप से जुड़े। श्रमिकों के कल्याण के लिए "श्रीपहल" को मंजूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संबल योजना की शुरूआत वर्ष 2018 में हुई थी, तब से अब तक कुल 7 लाख 60 हजार 886 प्रकरणों में 7 हजार करोड़ रूपए से अधिक की राशि हितग्राहियों को वितरित की जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीबी देखी है, इसलिए वे गरीबों का दुख और उनकी जरूरतें समझते हैं। संबल योजना उसी मुश्किल वक्त के साथी का नाम है। इसी क्रम में श्रमिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में मदद के लिए को "श्रीपहल" को मंजूरी प्रदान की गई है। इसका एक और उद्देश्य श्रमिकों के जीवन स्तर को उन्नत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। गिग एवं प्लेटफार्म श्रमिकों की नई श्रेणी बनाकर संबल योजना में किया शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार सबका साथ और सबका विकास की राह पर अग्रसर है। मार्च 2024 से घर-घर जाकर सामान और सेवायें देने वाले गिग एवं प्लेटफार्म श्रमिकों की नई श्रेणी बनाकर संबल योजना में शामिल किया गया है। अब ये श्रमिक भाई-बहन अधिकाधिक संख्या में संबल योजना में रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं और सभी आर्थिक हितलाभ ले रहे हैं। इसी क्रम में पत्थर तोड़ने वाले, ईंट बनाने वाले, पापड़-अचार बनाने वाले, खाना बनाने वाले, घरों में काम करने वाले मजदूर या तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले सभी श्रमिक और उनके परिवार इस योजना से जुड़कर आर्थिक मदद पा रहे हैं। संबल योजना के जरिए श्रमिक भाई-बहनों और उनके परिवार के जीवन को आसान और बेहतर बनाने तथा उनका बेहतर भविष्य गढ़ने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संबल योजना में रजिस्टर्ड श्रमिकों के आंशिक स्थाई रूप से अपंग होने पर 01 लाख रुपये और स्थाई रूप से अपंग होने पर 02 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। दुर्घटना में संबल हितग्राही भाई-बहन की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 4 लाख रुपये और सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये अनुग्रह सहायता दिये जाने का प्रावधान है। संबल हितग्राही के परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए 5 हजार रुपये की अंत्येष्टि सहायता राशि देने का भी प्रावधान है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना का लाभ भी दिया जा रहा है। इसमें पांच लाख रुपये तक निःशुल्क इलाज की सुविधा का प्रावधान किया गया है। कम से कम समय में प्रभावितों को उपलब्ध कराया जाएगा हितलाभ : मंत्री पटेल पंचायत और ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 5वीं बार श्रमिकों के खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे राशि अंतरित की जा रही है। आज अंतरित हुई राशि में 28 दिसम्बर 2024 तक के सभी प्रकरणों का निराकरण हो गया है। दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में कम से कम समय में संबंधित श्रमिक या उनके परिजन को हितलाभ अंतरित कराने की दिशा में विभाग निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर सचिव रघुराज राजेन्द्रन सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। 

सेमीकंडक्टर में भारत की बड़ी छलांग! नीति आयोग का गजब का फॉर्मूला आया सामने

नई दिल्ली भारत सेमीकंडक्टर की दुनिया में अपने आप को स्थापित करने के लिए दिन-रात एक कर रहा है। इस साल के आखिर में भारत के पास पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप भी होने वाली है। इसी बीच नीति आयोग ने कहा है कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। इसके लिए 2D मटेरियल्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इनके इस्तेमाल से ना सिर्फ ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि कंप्यूटिंग की स्पीड में भी सुधार हो सकता है। यही कारण है कि नीति आयोग का मानना है कि भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर को लीड करने की क्षमता रखता है। चलिए, समझते हैं कि 2D मटेरियल्स क्या हैं और सेमीकंडक्टर निर्माण में इनका क्या महत्व है?  2D मटेरियल्स ऐसी सब्सटेंस है, जो बहुत ही पतली होती है। इसकी मोटाई एक या कुछ एटम जितनी ही होती है। यह एक या कुछ एटम की मोटाई वाली। ये मटेरियल्स इतनी पतली होती है कि इन्हें देखना भी मुश्किल है। कल्पना करें कि आपका स्मार्टफोन कागज की तरह मोड़ा जा सकता है, लेकिन वह टूटता नहीं या फिर ऐसी स्क्रीन जो इतनी पतली हो कि नजर ही ना आए। ये 2D मटेरियल्स बिजली, प्रकाश और ताकत के मामले में आम 3D मटेरियल्स से बहुत अलग होती हैं। इनका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, मेमोरी चिप्स, क्वांटम डिवाइस और फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स में हो सकता है। 2D मटेरियल्स के क्या फायदे? नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 2D मटेरियल्स से बने ट्रांजिस्टर बहुत कम बिजली खर्च करते हैं। ये नॉर्मल ट्रांजिस्टर के मुकाबले पांच से दस गुना कम ऊर्जा लेते हैं। इससे स्मार्टफोन की बैटरी कई दिनों तक चल सकती है। इसके अलावा, ये मटेरियल्स तेज और ठंडे रहने वाले प्रोसेसर यानी सीपीयू और जीपीयू बनाने में मदद कर सकती है। इससे प्रोसेसर गर्म नहीं होंगे और ज्यादा तेजी से काम करेंगे। यह तकनीक AI और बाकी छोटे-छोटे गैजेट्स के लिए बहुत काम की हो सकती है। रिसर्च शुरुआती दौर में है 2D मटेरियल्स में भारत की संभावनाएं कम मानी जाती हैं, लेकिन रिसर्च शुरुआती दौर में है। भारत में वैज्ञानिक अभी इन 2D मटेरियल्स को बनाने और उनके बुनियादी चीजों को समझने पर काम कर रहे हैं। लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन, करने की दिशा में अभी बहुत काम बाकी है। नीति आयोग का मानना है कि अगर भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़े, तो यह तकनीक दुनिया के सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत का परचम फहरा देगी। बिजली की खपत कम होगी 2D मटेरियल्स का इस्तेमाल सिर्फ तकनीक को ही बेहतर बनाएगा, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद होंगी। इनसे बिजली की खपत कम होगी, जिससे ऊर्जा की बचत होगी।नई तरह की कंप्यूटिंग डिवाइस बनाने में मदद मिलेगी, जैसे- छोटे और हल्के AI डिवाइस, पहनने वाले गैजेट्स और क्वांटम प्रोसेसर। यदि भारत इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो वह दुनिया में तकनीकी दौड़ में सबसे आगे हो सकता है।

रांची में जाम से मिलेगी राहत, जल्द तैयार होंगे 3 फ्लाईओवर – जानें कब होगा उद्घाटन

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सोमवार कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित रांची शहर के तीन महत्वपूर्ण फ्लाईओवर के कार्य योजना एवं इसके डिजाइन से संबंधित प्रेजेंटेशन पर पथ निर्माण विभाग के वरीय अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया।         हरमू फ्लाईओवर को रातू रोड फ्लाईओवर से जोड़ने के निर्देश मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित हरमू (सहजानंद चौक) से एसीबी कार्यालय तक बनने वाले फ्लाईओवर परियोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन देखा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि हरमू फ्लाईओवर का निर्माण ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हरमू बाईपास रोड पर अक्सर लगने वाले जाम से लोगों को काफी परेशानी होती है। इस फ्लाईओवर के निर्माण से लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी और उनका समय भी बचेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस फ्लाईओवर को रातू रोड फ्लाईओवर से जोड़ें ताकि आमजनमानस को आवागमन में सुविधा हो सके। मुख्यमंत्री के समक्ष पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से यह जानकारी दी कि प्रस्तावित हरमू (सहजानंद चौक) से एसीबी कार्यालय तक बनने वाले फ्लाईओवर परियोजना का टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर लिया गया है। CM हेमंत ने फ्लाईओवर परियोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन देखा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अरगोड़ा चौक से कटहल मोड़ एवं करम टोली चौक से साइंस सिटी तक बनने वाले फ्लाईओवर निर्माण परियोजना से संबंधित प्रेजेंटेशन की विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की एवं इन फ्लाईओवर की महत्ता को देखते हुए कई आवश्यक दिशा-निर्देश भी अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जल्द उक्त फ्लाईओवर निर्माण के लिए एक बेहतर कार्य योजना बनाते हुए डीपीआर तैयार की जाए तथा इस परियोजना को मूर्त रूप देने की दिशा में अग्रतर कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री ने अरगोड़ा चौक के ऊपर गोल चक्कर बनाने का दिया निर्देश मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित फ्लाईओवर अरगोड़ा चौक के ऊपर गोलचक्कर (रोटरी) बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अरगोड़ा चौक में गोलचक्कर निर्माण से कई महत्वपूर्ण सड़कें आपस में कनेक्ट हो जाएगी जिससे लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने करम टोली चौक से साइंस सिटी तक एलिवेटेड फ्लाईओवर (4 लेन) परियोजना का प्रेजेंटेशन देखा।इस फ्लाईओवर निर्माण तथा प्रस्तावित डॉक्टर्स कॉलोनी से हिल व्यू बरियातू रोड तक सड़क निर्माण योजना पर भी अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया।         मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित उक्त सभी फ्लाईओवर निर्माण कार्य परियोजना एवं इससे जुड़ी डिजाइन में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इन परियोजनाओं को मूर्त रूप देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है, अतएव सभी कार्य पूरी तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ किए जाएं। इस अवसर पर पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, अभियंता प्रमुख, पथ निर्माण विभाग प्रवीण भेंगरा, मुख्य अभियंता विजय रंजन एवं कंसल्टेंट कंपनी स्पर्श इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड के सुधीर कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

क्रॉस वोटिंग से अवैध वोटों तक… उपराष्ट्रपति चुनाव में कैसे रची BJP ने नई कहानी

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत हासिल की है। उन्हें प्रथम वरीयता के 452 वोट प्राप्त हुए, जिसके साथ वे भारत के उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। वहीं, विपक्ष के उम्मीदवार जस्टिस बी सुधर्शन रेड्डी को प्रथम वरीयता के 300 वोट मिले। सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना अप्रत्याशित नहीं था, क्योंकि उनके पक्ष में पहले से ही पर्याप्त संख्याबल मौजूद था। हालांकि, उनकी इस जीत ने बीजेपी की राजनीतिक रणनीति को नया आयाम दे दिया है। संभव है कि आने वाले समय में भारत की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिले। आजीवन रहे आरएसएस के समर्पित कार्यकर्ता सीपी राधाकृष्णन की जीत इस बात का संकेत देती है कि बीजेपी ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु के एक प्रभावशाली नेता को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनकर दक्षिण भारत में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। साथ ही, पार्टी ने आरएसएस के वरिष्ठ और समर्पित कार्यकर्ता राधाकृष्णन को इस भूमिका के लिए चुना है। सीपी राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुप्पुर में हुआ था और उन्होंने व्यवसाय प्रशासन में स्नातक की डिग्री हासिल की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से की थी। बाद में वे सक्रिय राजनीति में आए और अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान 1998 और 1999 में कोयंबटूर से दो बार लोकसभा सांसद चुने गए। उस समय तमिलनाडु का राजनीतिक माहौल हिंदुत्व-केंद्रित बीजेपी के लिए अनुकूल नहीं था, क्योंकि इसे द्रविड़ विचारधारा के विपरीत माना जाता था। एनडीए के सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले हैं, जबकि 'इंडिया' ब्लॉक के सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले हैं. संसद की मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एनडीए के 427 और 'इंडिया' ब्लॉक के 315 वोट थे. इसके बाद सुदर्शन रेड्डी को कम वोट मिलने से साफ है कि सत्ता पक्ष विपक्ष में सेंधमारी करने में सफल रहा. राधाकृष्णन को एनडीए के 427 वोटों की तुलना में 25 वोट ज़्यादा यानी 452 मिले हैं. वहीं, सुदर्शन रेड्डी को 'इंडिया' ब्लॉक के कुल 315 की तुलना में 15 वोट कम यानी 300 वोट मिले हैं. इससे साफ है कि विपक्ष के 15 सांसदों ने एनडीए के पक्ष में वोट डाले हैं. क्रॉस वोटिंग से लेकर सांसदों के निरस्त वोटों के पीछे क्या कहानी है? समझें, चुनाव में कैसे हुआ सियासी गेम उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद वोट करते हैं, जिनकी संख्या 788 है. इनमें से वर्तमान में 7 सीटें रिक्त हैं, यानी 781 सांसदों को वोट करना था, जिसमें मंगलवार को 767 सांसदों ने वोट डाला और 14 सांसदों ने वोट नहीं डाला. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए पड़े कुल 767 वोटों में से 752 वोट वैध तो 15 वोट निरस्त पाए गए. वैध पाए गए 752 वोटों में से एनडीए के सीपी राधाकृष्णन को 452 और 'इंडिया' ब्लॉक के बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले. एनडीए के सांसदों की संख्या 427 थी और विपक्षी सांसदों की संख्या 354 थी. विपक्षी सांसदों में 'इंडिया' ब्लॉक में शामिल पार्टियों के 315 और 39 ऐसे दलों के सांसद थे जो एनडीए और 'इंडिया' ब्लॉक किसी का हिस्सा नहीं थे. विपक्ष के 14 सांसदों ने हिस्सा नहीं लिया वाईएसआर कांग्रेस के 11 सांसदों ने एनडीए के राधाकृष्णन के पक्ष में वोट दिया. इस तरह राधाकृष्णन की संख्या बढ़कर 438 हो गई और न्यूट्रल की संख्या घटकर 28 रह गई. इन 28 सांसदों में से बीजेडी के सात, बीआरएस के चार, अकाली दल के एक और दो निर्दलीय सरबजीत सिंह खालसा और अमृतपाल ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया यानी 14 वोट अनुपस्थित रहे. इस तरह न्यूट्रल की संख्या घटकर 14 रह गई, जिनमें से कुछ वोटरों ने एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया होगा. क्रॉस वोटिंग और सांसदों के निरस्त वोट वाईएसआर कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद एनडीए के राधाकृष्णन के 438 वोट हो गए थे, जबकि उन्हें 452 वोट मिले हैं. इस तरह से उन्हें 14 अतिरिक्त वोट मिले हैं, जिसमें माना जा रहा है कि कुछ न्यूट्रल वोट भी हैं. इसकी बड़ी वजह यह है कि जो 15 वोट निरस्त हुए हैं, उनमें 10 एनडीए के थे और 5 वोट 'इंडिया' ब्लॉक के थे. इस तरह क्रॉस वोटिंग के कारण ही एनडीए के पक्ष में उसकी संख्या 452 तक पहुँच सकी. 'इंडिया' ब्लॉक के किन सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, जिस तरह से एनडीए के 10 सांसदों के वोट निरस्त हुए हैं, उससे साफ है कि विपक्ष के 10 सांसदों ने एनडीए के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की है. 'इंडिया' ब्लॉक को 15 वोटों का नुकसान हुआ है. इनमें पाँच निरस्त वोट और दस क्रॉस वोटिंग को मिला दें तो यह हिसाब पूरा हो जाता है. 2004 में बने तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष 2004 में सीपी राधाकृष्णन को तमिलनाडु बीजेपी की राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2023 तक बीजेपी तमिलनाडु में नया नेतृत्व स्थापित करने की कोशिश में थी, जिसके तहत राधाकृष्णन को पहले झारखंड और बाद में महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। वे सभी राजनीतिक दलों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी इस सौम्य और समावेशी राजनीति के कारण उन्हें 'कोयंबटूर का वाजपेयी' कहा जाता है। झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार के साथ उनकी कुछ असहमतियां जरूर रहीं, लेकिन उनका कार्यकाल गैर-बीजेपी राज्यों में अन्य बीजेपी राज्यपालों की तरह विवादों से भरा नहीं था। तमिलनाडु चुनाव पर बीजेपी की पैनी नजर बीजेपी कई वर्षों से तमिलनाडु में अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। राज्य में पार्टी का बढ़ता वोट शेयर इस बात का प्रमाण है, लेकिन यह वोट शेयर अभी तक सीटों में तब्दील नहीं हो सका है। यही कारण है कि तमिलनाडु बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अब सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति बनाकर बीजेपी ने तमिलनाडु की पश्चिमी बेल्ट पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर मात्र 2.6% था, जबकि 2016 में यह 2.9% था। ऐसे में पार्टी अब दोहरे अंकों में वोट … Read more

युवा बनेंगे प्रोफेशनल: छत्तीसगढ़ में मुफ्त होटल मैनेजमेंट कोर्स की सुविधा

रायपुर युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू करने जा रही है है. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने युवाओं को होटल मैनेजमेंट का निःशुल्क प्रशिक्षण देने की घोषणा की है. ये कोर्स छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के युवाओं के लिए होगा और कोर्स का खर्च बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरण वहन करेगा. मंत्री ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं. विभागीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने छत्तीसगढ़ रजत जयंती समारोह की तैयारियों का जायजा लिया और इसे भव्य बनाने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए. इसके साथ ही उन्होंने श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना की प्रगति की जानकारी ली. आगामी चक्रधर समारोह, बस्तर पंडुम, और रामगढ़ महोत्सव को और बेहतर ढंग से आयोजित करने पर भी चर्चा हुई. मंत्री ने स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने और उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए मंच प्रदान करने के निर्देश दिए. बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, संचालक संस्कृति विवेक आचार्य सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. यह पहल न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और पर्यटन क्षमता को भी बढ़ावा देगी.

महमंत्री पद की होड़: भाजपा नगर कार्यकारिणी में 15 दिग्गजों की चुनौती, किसका होगा दबदबा?

भोपाल   भाजपा की नगर कार्यकारिणी के महत्वपूर्ण पदों पर प्रदेश संगठन ही फैसला करेगा। महामंत्री के 3 पदों के लिए करीब 15 नेता कतार में हैं, समर्थकों के लिए बड़े नेता जोर आजमाइश कर रहे हैं। पदों पर नियुक्ति इस सप्ताह संभव है। अंतिम दौर की जोर आजमाइश चल रही है। पदों के लिए बड़े नेताओं से समर्थकों के नाम बंद लिफाफे में लिए गए थे। पिछले महीने अध्यक्ष को भोपालबुलाकर लिफाफे खोले गए। शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को कार्यकारिणी को अंतिम रूप देकर लिस्ट भेजने के लिए कहा था। सबका जोर महामंत्री पद को लेकर नगर कार्यकारिणी में सबका जोर महामंत्री पद को लेकर है। 3 महामंत्री बनाए जाना हैं, जो अलग-अलग वर्ग के होंगे। सुमित मिश्रा भी रजामंदी से नियुक्ति के प्रयास में हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई है। विधायक महेंद्र हार्डिया समर्थक को यह पद जा सकता है। विधानसभा 2 से सुधीर कोल्हे का नाम है। चार नंबर से विधायक मालिनी गौड़ ने वीरेंद्र शेंडगे का नाम दिया है। महापौर ने भरत पारिख का नाम बढ़ाया तो सांसद ने विशाल का। राऊ से निलेश चौधरी का नाम भी है। अन्य नामों में हरप्रीत बख्शी, देवेश जाजोरिया, भूपेंद्र केसरी, माधुरी जायसवाल हैं। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मनाने की तैयारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस से लेकर गांधी जयंती तक प्रदेशभाजपा ‘सेवा पखवाड़ा’ मनाएगी। भाजपा कार्यालय पर आयोजनों को लेकर बैठक की गई। इसमें संभाग सहप्रभारी तेजबहादुर सिंह, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, प्रताप करोसिया, सुदर्शन गुप्ता, प्रदेश प्रवक्ता आलोक दुबे, प्रदेश मीडिया सहप्रभारी दीपक जैन आदि शामिल हुए। अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा, सेवा पखवाड़े के अंतर्गत पीएम मोदी के कार्यों को सेवा के माध्यम से जनता तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा।

लिटरेचर का त्योहार लौट रहा जयपुर: 15 जनवरी से शुरू होगा फेस्टिवल, नए आयोजनों के साथ

जयपुर जयपुर। दुनिया का सबसे बड़ा साहित्यिक उत्सव, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF), 15 से 19 जनवरी 2026 तक राजधानी जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित होगा। यह फेस्टिवल अपने 19वें संस्करण में प्रवेश कर रहा है और इस दौरान साहित्य, राजनीति, विज्ञान, कला और विचार जगत के दिग्गज एक मंच पर जुटेंगे। वैश्विक मुद्दों पर सार्थक विमर्श और संवाद की यह परंपरा हर वर्ष की तरह इस बार भी नए दृष्टिकोण और कहानियों को सामने लाएगी। दुनिया का सबसे बड़ा साहित्यिक उत्सव, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 15 से 19 जनवरी 2026 तक राजधानी जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित होगा। यह फेस्टिवल अपने 19वें संस्करण में प्रवेश कर रहा है और इस दौरान साहित्य, राजनीति, विज्ञान, कला और विचार जगत के दिग्गज एक मंच पर जुटेंगे। वैश्विक मुद्दों पर सार्थक विमर्श और संवाद की यह परंपरा हर वर्ष की तरह इस बार भी नए दृष्टिकोण और कहानियों को सामने लाएगी। खास बात यह है कि इस बार फेस्टिवल जनवरी के मध्य में आयोजित हो रहा है, जबकि पिछले दो वर्षों से यह फरवरी के शुरुआती हफ्तों में समाप्त होता था। वर्ष 2025 में यह 30 जनवरी से 3 फरवरी तक और 2024 में 1 से 5 फरवरी तक आयोजित हुआ था। आयोजकों ने बताया कि फेस्टिवल को लेकर फ्रेंड्स ऑफ फेस्टिवल (एफओएफ) पैकेज की शुरुआत की गई है। इन पैकेजों की शुरुआती कीमत 14,000 रुपए रखी गई है। पैकेज धारकों को जेएलएफ म्यूजिक स्टेज, गाला डिनर और प्रतिष्ठित राइटर्स बॉल जैसे विशेष आयोजनों में शामिल होने का अवसर मिलेगा। हालांकि इसमें होटल स्टे शामिल नहीं है और सभी कार्यक्रमों में सीटें पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर ही मिलेंगी। पैकेज को और आकर्षक बनाने के लिए डिस्काउंट ऑफर भी रखे गए हैं। पांच दिन बुकिंग कराने पर 20% छूट, चार दिन पर 15% और 2–3 दिन पर 10% की छूट दी जाएगी। साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक कैंसलेशन करने पर 75% तक रिफंड मिल सकेगा। फेस्टिवल के दौरान भारत और विदेश के नामी लेखक, कलाकार और वक्ताओं से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। 15 से 17 जनवरी को जेएलएफ म्यूजिक स्टेज पर विश्वभर के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। 18 जनवरी को गाला डिनर के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी, जबकि 19 जनवरी को प्रतिष्ठित राइटर्स बॉल का आयोजन होगा। इसमें साहित्य, विचार, संगीत और संवाद के साथ सितारों भरी शाम का अविस्मरणीय अनुभव मिलेगा। आयोजकों के अनुसार जेएलएफ केवल साहित्य का उत्सव नहीं है, बल्कि विचारों और संस्कृतियों का वैश्विक संगम है, जो नई सोच और दृष्टिकोणों को जन्म देता है।

अब Google AI Mode आपकी भाषा में करेगा जवाब, हिंदी समेत कई भाषाओं का समर्थन

  नई दिल्ली AI का बढ़ता चलन देखते हुए गूगल ने अपने AI Mode को अपग्रेड कर दिया है। गूगल सर्च को और भी बेहतर बनाने के लिए एआई मोड लाया गया था। अब यह मोड 5 नई भाषाओं में उपलब्ध है। खास बात यह है कि हिंदी बोलने वालों के लिए गूगल सर्च के इस फीचर को यूज करना और भी आसान और उपयोगी हो गया है। अब आप हिंदी में भी सवाल पूछ सकते हैं और उनके जवाब पा सकते हैं। अब गूगल एआई मोड को इन पांच भाषाओं का मिला सपोर्ट लगभग छह महीने पहले Google ने AI Mode को केवल इंग्लिश भाषा में लॉन्च किया गया था। हालांकि, अब यह हिंदी समेत पांच और भाषाओं इंडोनेशियाई, जापानी, कोरियाई और ब्राजीलियाई पुर्तगाली को सपोर्ट कर रहा है। गूगल के ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, इस विस्तार के साथ अब ज्यादा लोग AI मोड का इस्तेमाल करके अपनी पसंदीदा भाषा में जटिल सवाल पूछ सकेंगे। साथ ही, वेब को और गहराई से एक्सप्लोर कर पाएंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले महीने इसे 180 से ज्यादा देशों में लाया गया था। गूगल ने Gemini 2.5 AI मॉडल का इस्तेमाल करके इसे बनाया है। गूगल का यह फीचर उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जो नई चीजें जानना चाहते हैं या कोई काम करना चाहते हैं, जैसे कि यात्रा की योजना बनाना या स्थानीय जगहों के बारे में जानना। कैसे काम करता है एआई मोड? AI मोड में आप टेक्स्ट, आवाज या फोटो का इस्तेमाल करके सवाल पूछ सकते हैं। गूगल का AI आपकी बात को समझ सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आप रात में खिलने वाले फूलों के बारे में जानना चाहते हैं तो AI आपको सही जानकारी देगा। आप उससे और भी सवाल पूछ सकते हैं। गूगल ने बताया कि यह सिर्फ अनुवाद नहीं है। AI को स्थानीय जानकारी को भी समझना होता है। गूगल का मकसद है कि AI सर्च दुनिया भर के लोगों के लिए उपयोगी हो। समय के साथ और होगा बेहतर गूगल का कहना है कि AI मोड अभी भी विकास के अधीन है। इसका मतलब है कि यह समय के साथ और भी बेहतर होता जाएगा। गूगल का AI मोड एक पावरफुल फीचर है, जो लोगों को जानकारी खोजने और नए चीजें सीखने में मदद कर सकता है। अब हिंदी सपोर्ट मिलने के बाद भारतीयों के लिए यह और भी उपयोगी हो गया है। वे अपनी भाषा में इससे सवाल करके आंसर मांग सकते हैं।

दो तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन! पितृ पक्ष में पिंडदान करने का सही तरीका

साल 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है. हर साल पितृ पक्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से शुरू होते हैं और आश्विन माह की अमावस्या तिथि पर समाप्त होते हैं. साल 2025 में पितृ पक्ष की अंतिम श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन 21 सितंबर के दिन किया जाएगा. साल 2025 में श्राद्ध की दो तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं. पंचांग के अनुसार इस वर्ष तृतीया और चतुर्थी तिथि का श्राद्ध एक ही तिथि पर पड़ रहा है. इन दोनों की तिथि के श्राद्ध 10 सितंबर 2025 के दिन किए जाएंगे. इन दो तिथि का श्राद्ध होगा एक साथ तृतीया श्राद्ध 10 सितंबर, 2025 बुधवार तृतीया श्राद्ध 10 सितंबर, 2025, बुधवार आश्विन, कृष्ण तृतीया तिथि के दिन है. इस दिन इन लोगों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता जिनकी मृत्यु तृतीया तिथि पर हुई हो. इस दिन शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की तृतीया तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है.तृतीया श्राद्ध को तीज श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है. तृतीया श्राद्ध करने का समय-     कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.     रौहिण मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से 01 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.     अपराह्न काल – दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 02 मिनट तक रहेगा. चतुर्थी श्राद्ध 10 सितंबर, 2025, बुधवार आश्विन, कृष्ण चतुर्थी तिथि के दिन है. चतुर्थी श्राद्ध परिवार के उन मृत सदस्यों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु चतुर्थी तिथि पर हुई हो. इस दिन शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है. चतुर्थी श्राद्ध करने का समय-     कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से लेकर 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.     रौहिण मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.     अपराह्न काल – दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 02 मिनट तक रहेगा. दो तिथियों के श्राद्ध और पिंडदान की विधि     इस दिन सुबह स्नान आदि करके साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें.     घर के पूजा स्थल को गंगाजल स्वच्छ करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें.     दो तिथियों के लिए अलग-अलग संकल्प करें.     संकल्प में दोनों तिथियों के पितरों का नाम, गोत्र, और मृत्यु तिथि शामिल करें.     तांबे के लोटे में गंगाजल, काले तिल, जौ, और दूध मिलाकर तर्पण करें.     प्रत्येक तिथि के लिए तीन बार जल अर्पित करें.     चावल, जौ, काले तिल, और घी को मिलाकर पिंड बनाएं. प्रत्येक तिथि के पितरों के लिए अलग-अलग पिंड तैयार करें.     दो तिथियों पर दोनों तिथियों के पितरों के लिए अलग-अलग पिंड बनाएं.     पिंडों को कुश के आसन पर रखें और गंगाजल, दूध, और तिल से अभिषेक करें.     पिंडों को दक्षिण दिशा की ओर अर्पित करें और पितरों से आशीर्वाद मांगे.     पिंडदान के बाद पिंडों को पवित्र नदी में विसर्जित करें या पीपल के पेड़ के नीचे रख दें.     भोजन को केले के पत्ते या पत्तल पर परोसें और पितरों को अर्पित करें.     ब्राह्मणों को भोजन कराएं. दोनों तिथियों के पितरों के लिए अलग-अलग ब्राह्मणों को आमंत्रित करें.     ब्राह्मण को दक्षिणा, वस्त्र, और फल दान करें.