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यात्रियों को मिलेगा जाम से निजात: एबी रोड पर 622 करोड़ से बनेंगे 9 फ्लायओवर

इंदौर  प्राधिकरण द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर कलेक्टर ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा है। इसमें जिलास्तरीय यातायात समिति की रिपोर्ट भी संलग्न की गई है। पत्र में एबी रोड पर 9 फ्लायओवरों के निर्माण को मंजूरी देने का अनुरोध किया गया है। कुल 622 करोड़ रुपए की लागत से इन फ्लायओवरों का निर्माण प्रस्तावित है। नीरंजनपुर से लेकर राजीव गांधी चौराहा तक इनका निर्माण होगा। बीआरटीएस हटाने की कवायद के बीच फ्लायओवर योजना वर्तमान में एबी रोड पर बीआरटीएस को हटाने का कार्य शुरू हो चुका है। निगम ने लगभग ढाई करोड़ रुपए के टेंडर को मंजूरी दी है और ठेकेदार फर्म द्वारा रेलिंग हटाने का कार्य प्रारंभ किया जा सकता है। साथ ही लगभग 13 करोड़ रुपए की राशि डिवाइडर निर्माण के लिए भी स्वीकृत कर दी गई है। ऐसे में फ्लायओवर योजना को लेकर प्राधिकरण का सर्वे और कलेक्टर का पत्र नई दिशा देता है। अधूरे एलिवेटेड कॉरिडोर पर भी सवाल नीरंजनपुर और सत्यसांई चौराहे पर एमपीआरडीसी द्वारा फ्लायओवर निर्माण का कार्य पहले से ही जारी है। वहीं एलआईजी से नवलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर का टेंडर लोक निर्माण विभाग ने कुछ वर्ष पूर्व मंजूर किया था, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस परियोजना से असहमति जताई, जिसके चलते यह अधर में है। हाईकोर्ट के आदेश पर बीआरटीएस को हटाया जा रहा है और अब एबी रोड के प्रमुख चौराहों पर फ्लायओवर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। 622 करोड़ में होगा 9 फ्लायओवरों का निर्माण कलेक्टर ने पहले चरण में एलआईजी चौराहा, शिवाजी वाटिका और गीता भवन चौराहा पर फ्लायओवर बनाने का अनुरोध किया है। इन तीन फ्लायओवरों की अनुमानित लागत 283.56 करोड़ रुपए बताई गई है। इसके अलावा अन्य 11 चौराहों में से पांच फ्लायओवर—जंजीरवाला चौराहा, टॉवर, चाणक्यपुरी, गौपुर और अग्रसेन चौराहा पर निर्माण प्रस्तावित है, जिन पर 380 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस तरह कुल 9 फ्लायओवरों पर 622 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 

यात्रियों की सुरक्षा पर जोर: शताब्दी एक्सप्रेस में लागू हुआ वंदे भारत जैसा डोर सिस्टम

ग्वालियर नई दिल्ली से रानी कमलापति के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस अब हाईटेक हो गई है। इस ट्रेन में मेट्रो, वंदे भारत और तेजस एक्सप्रेस की तर्ज पर अब ऑटोमेटिक डोर लगा दिए गए हैं। इसका ट्रायल भी हो चुका है और अब वंदे भारत की तरह इसके गेट खुलने भी लगे हैं। कोच के दरवाजों पर इंडिकेटर और अलार्म भी लगाए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और आपराधिक घटनाओं को रोकने में यह ऑटोमेटिक डोर कारगर साबित होंगे। शताब्दी के चलने से 10 सेकंड पहले इसके सभी दरवाजे अपने आप बंद होने लगे हैं। इस ट्रेन में अभी हाल ही में इस व्यवस्था को शुरू किया गया है। चेन पुलिंग पर भी नहीं खुलेंगे गेट शताब्दी एक्सप्रेस के डोर लॉकिंग सिस्टम को वंदे भारत एक्सप्रेस की तर्ज पर विकसित किया गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस में अगला स्टेशन आने की सूचना के साथ यह भी बताया जाता है कि दरवाजे किस ओर खुलेंगे। इसी तरह की व्यवस्था शताब्दी एक्सप्रेस में की गई है। कई बार लोग परिजनों के छूट जाने या अन्य किसी कारण से ट्रेन में चेन पुलिंग कर देते थे। अब ऐसा नहीं होगा। अब चेन पुलिंग करने पर भी दरवाजे नहीं खुलेंगे। चोटिल होने से भी बचेंगे अभी तक देखने में आ रहा है कि ट्रेनों के चलते समय प्लेटफॉर्म पर यात्री चढऩे और उतरने के प्रयास में चोटिल हो जाते हैं। कभी- कभी तो यात्रियों की मौत तक हो जाती है, लेकिन अब इस नई व्यवस्था से शताब्दी में इस तरह की घटनाएं नहीं हो सकेंगी। क्योंकि दरवाजे अपने आप ही बंद हो जाएंगे। चोरी, छीना-झपटी की घटनाओं से मिलेगी राहत शताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान यात्रियों को चोरी छीना-झपटी की घटनाओं से भी इस व्यवस्था के शुरू होने से राहत मिल जाएगी। इसके पहले शताब्दी एक्सप्रेस के दरवाजों को मैन्युअल तरीके से बंद किया जाता था। ट्रेन के चलने के दौरान रास्ते में आमतौर पर दोनों तरफ के दरवाजे खुले रहते थे और इसका फायदा शरारती तत्व उठा लेते थे, जिस नई प्रणाली से ट्रेन को लैस किया गया है। वह इसके स्टेशन पहुंचने और चलने के समय ही कार्य करेंगे। शताब्दी एक्सप्रेस में ऑटोमेटिक डोर लगाए गए हैं। यह ट्रेन उत्तर रेलवे मंडल की है। उन्हीं के द्वारा इसे नया रूप दिया है।– शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ उत्तर मध्य रेलवे

क्राइम कंट्रोल का नया तरीका: हरियाणा की जेलों में हाई-टेक सिस्टम से अपराधियों पर नजर

चंडीगढ़  अब अपराधियों की पहचान को और अधिक सटीक व आधुनिक बनाने के लिए हरियाणा की 20 जेलों में मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (एमसीयू) और फिंगर एनरोल्ड डिवाइस (एफईडी) लगाए जाएंगे। इससे अपराधियों की यूनिक पहचान तैयार होगी जिसमें उंगलियों के निशान, चेहरे की विशेषताएं, डीएनए नमूने और रेटिना स्कैन शामिल होंगे।  महानिदेशक कारागार आलोक कुमार राय ने बताया कि अपराधियों के पुराने परंपरागत पहचान के तरीकों से आगे बढ़ते हुए ये तकनीक अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखने, उनकी ट्रैकिंग और गतिविधियों का पता लगाने में मददगार साबित होगी। एमसीयू से जुटाए गए आंकड़े स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) के पास सुरक्षित रहेंगे और इन्हें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ भी साझा किया जाएगा। यह जानकारी 75 साल तक संग्रहित रखी जा सकेगी। आसानी से ट्रैक होंगे अपराधियों के नेटवर्क इन यूनिट्स से मिलने वाले अपराधियों के फिंगर प्रिंट्स और रेटिना स्कैन सीधे नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर प्रिंट्स इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) में अपलोड होंगे। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (नैफिस) में देशभर के अपराधियों, बंदियों और संदिग्धों का डेटा दर्ज होता है, जिससे अपराधियों का नेटवर्क ट्रैक करना और आसान होगा।  पंचकूला सेक्टर-14 स्थित दफ्तर में महानिदेशक कारागार ने कहा कि ये पहल आपराधिक न्याय प्रणाली को और मजबूत करेगी। अपराधियों का विस्तृत यूनिक डेटा उपलब्ध होने से न केवल उनकी पहचान पुख्ता होगी बल्कि लंबे समय तक उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। यह कदम प्रदेश में अपराध पर अंकुश लगाने और कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।  

मुक्ता सिंह का कमाल: चंबल की बेटी ने रचा इतिहास, बनीं सेना में पहली महिला लेफ्टिनेंट

ग्वालियर  चंबल की धरती को वीरों की भूमि कहा जाता है। अब इसी धरती की एक बेटी ने देश का नाम रोशन किया है। ग्वालियर की मुक्ता सिंह भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट बन गई हैं। बिहार के गया स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में आयोजित पासिंग आउट परेड में उन्होंने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक हासिल किया। विशेष बात यह है कि वे ओटीए गया से कांस्य पदक पाने वाली पहली महिला ऑफिसर कैडेट बनी हैं। ग्वालियर की रहने वाली हैं मुक्ता सिंह मुक्ता सिंह मूल रूप से ग्वालियर की रहने वाली हैं, हालांकि उनका जन्म भिंड स्थित ननिहाल में हुआ। उनके पिता राजबीर सिंह भारतीय वायुसेना में अधिकारी रह चुके हैं, जबकि उनकी मां बृजमोहिनी यादव खेल जगत से जुड़ी रहीं। देशभक्ति का जज़्बा परिवार में पहले से ही था, जिसका असर मुक्ता के जीवन पर भी पड़ा। पिता ने बेटी के जन्म के समय ही तय कर लिया था कि वह डिफेंस में जाएगी और नामकरण के समय ही उसका नाम ‘मुक्ता’ रखा गया। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया मुक्ता ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन ग्वालियर से पूरी की और मालनपुर की एक फैक्ट्री में कुछ समय नौकरी भी की। लेकिन बचपन से ही डिफेंस फोर्सेज में जाने का सपना उन्हें प्रेरित करता रहा। फिजिकल ट्रेनिंग के लिए उन्होंने अपने ननिहाल भिंड में मामा राधे गोपाल यादव से तैराकी व अन्य ट्रेनिंग ली। उनके नाना हरबीर सिंह यादव का सपना था कि घर से कोई आर्मी में जाए, जो अब मुक्ता ने पूरा किया। तीसरी बार में मिली सफलता वहीं, मुक्ता सिंह सफर आसान नहीं था। शुरुआती दो प्रयासों में मेरिट में जगह नहीं मिली, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन टेक्निकल महिला-32 कोर्स में ऑल इंडिया-1 रैंक हासिल कर सफलता पाई। शुरुआत में प्रशिक्षण चेन्नई ओटीए में हुआ, बाद में कोर्स बिहार के गया ओटीए में ट्रांसफर कर दिया गया। यहां पर उनकी मेहनत ने उन्हें लीडरशिप के कई मौके दिलाए। अकादमी अंडर ऑफिसर (AUO), जूनियर अंडर ऑफिसर (JUO) और बटालियन अंडर ऑफिसर (BUO) जैसे पदों पर रहते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। तीन बार चोट भी लगी तीन बार चोटों के कारण कोर्स दोबारा शुरू करने के बावजूद उसने हार नहीं मानी। आखिरकार 6 सितंबर को आयोजित पासिंग आउट परेड में अपनी मेहनत और लगन के दम पर तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया। उन्हें 118 इंजीनियर रेजिमेंट में कमीशन मिला है। ग्वालियर और चंबल की यह बेटी आज पूरे देश का गर्व बनी हुई है और जल्द ही अपने गृह नगर ग्वालियर लौटने वाली हैं।

अब विंध्याचल नहीं, ‘विंध्याचल धाम’ रेलवे स्टेशन… योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

लखनऊ  यूपी की योगी सरकार ने विंध्याचल रेलवे स्टेशन के नाम को बदल दिया है। अब ये रेलवे स्टेशन विंध्याचल धाम रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाएगा। सूबे की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने प्रदेश सरकार के अनुरोध पर नाम बदलने को मंजूरी दे दी। प्रमुख सचिव अजय चौहान ने बताया कि डीएम पवन कुमार गंगवार को इस आशय का पत्र भेजा है। विंध्याचल स्टेशन का नाम परिवर्तित कर दिए जाने से विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारियों के साथ ही जिले के अन्य लोगों ने भी प्रदेश सरकार व राज्यपाल के प्रति आभार जताया है। विंध्याचल स्टेशन का नाम बदल कर विंध्यधाम रेलवे स्टेशन किए जाने की लंबे अर्से से विंध्याचल और जिले के लोग कर रहे थे। विधायक रत्नाकर मिश्र ने स्थानीय लोगों की इन मांगों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय निवासियों और जिले के लोगों की इस मांग को गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से बात की। जिसके बाद राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल ने बीते 29 अगस्त को विंध्याचल रेलवे स्टेशन का नाम विंध्यधाम रेलवे स्टेशन करने की अधिसूचना जारी कर दी। प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव अजय चौहान ने सोमवार को इस आशय का पत्र डीएम पवन कुमार गंगवार को भेजा है। साथ ही रेलवे स्टेशन का नाम परिवर्तित किए जाने के संबंध में केंद्र सरकार व रेलवे बोर्ड को भी पत्र भेज दिया गया है। जलालाबाद का नाम बदलकर पशुरामपुरी हुआ इससे पहले योगी सरकार ने शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी कर दिया था। सालों से इस स्थान के बदलने की मांग हो रही थी। जानकारी के मुताबिक भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की जन्म स्थली जलालाबाद है।

मूंग और उड़द की खरीद में बड़ा घोटाला, जबलपुर में 1.75 करोड़ की हेराफेरी उजागर

जबलपुर  उड़द-मूंग उपार्जन कार्य में पौने दो करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा हुआ है। फर्जीवाड़े के आरोप में समिति प्रबंधक और वेयर हाउस संचालक सहित दस व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है। फर्जी किसानों के नाम पर खरीदी दर्शाकर पूरा घालमेल किया गया है। शिकायत पर एफआईआर दर्ज एएसपी ग्रामीण सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि कार्यालय उपसंचालक किसान कल्याण और कृषि विकास के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी ने लिखित शिकायत दी थी। जिसमें बताया गया था कि वे जिले में संचालित समस्त उपार्जन समितियों द्वारा मूंग, उड़द उपार्जन के नोडल अधिकारी के सहायक के रूप में कार्यरत हैं। उपार्जन नीति के परिपालन में कार्यालय कलेक्टर जबलपुर के आदेश द्वारा सेवा सहकारी संस्था 6 बसेड़ी का गोदाम स्त्रीय उपार्जन केन्द्र (5833041) एमएलटी वेयर हाउस मजीठा में स्थापित किया गया था। कम मिले मूंग और उड़द बसेड़ी के गोदाम स्तरीय उपार्जन एमएलटी वेयरहाउस में मूंग 3231 बोरी (1615.5 क्विं.) एवं उड़द 652 बोरी (326 क्विं.) कम पाया गया था। कलेक्टर के निर्देश पर जांच दल गठित किया गया था। जांच में पाया गया कि मूंग एवं उड़द में कुल स्टाक में 2187 क्विंटल की कमी है, जिसका मूल्य 18663188 रुपए है। जांच में कुल 23 किसानों की 1003 क्विंटल खरीदी गयी। मूंग और 5 किसानों की 125.50 क्विंटल खरीदी की उड़द की। ऑनलाइन एंट्री संदिग्ध पाई गई। किसानों के नाम पर फर्जी खरीदी गई भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत जिला जबलपुर द्वारा ग्राम पथरिया के 13 किसानों की सूची प्रदान की गई है, जिनके नाम पर फर्जी खरीदी दर्ज की गई है। उनके नाम पर फर्जी पंजीयन कराकर अन्य किसानों के खसरे जोड़कर कुल 561.50 क्विंटल मूंग की फर्जी तरीके से ऑनलाइन एंट्री की गई है। कम्पयूटर ऑपरेटर ने मिलान नहीं किया ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द उपार्जन नीति 2025-26 अनुसार उपार्जन समिति प्रबंधक कमल सिंह ठाकुर निवासी ग्राम बेलखेड़ी बेलखेड़ा द्वारा प्रतिदिन किसानों से मूंग एवं उड़द का उपार्जन उपरांत स्कंध का सुरक्षित, व्यवस्थित भंडारण नहीं कराया जाना पाया गया। इतना ही नहीं लेखा मिलान न करते हुए कम्पयूटर ऑपरेटर के माध्यम से सीधे ऑनलाइन फीडिंग कराना, निर्धारित समयावधि तक खरीदी न किया जाना भी सामने आया। इसके अलावा आरोपियों ने किसानों को न तो तौल पर्ची जारी की और न ही उपार्जन नीति का पालन किया। किसानों एवं प्रशासन को आर्थिक क्षति पहुंचाते हुए आरोपियों ने अवैध लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से मूंग की 1934 क्विंटल की राशि 16790988/-रुपए एवं उड़द की 253 क्विंटल मात्रा जिसकी राशि 1872200/-रुपए कुल मूंग एवं उड़द में 2187 क्विंटल कुल राशि 18663188/-रुपए की छलपूर्वक कूट रचना करने व कूट रचित दस्तावेजों का प्रयोग अपने स्वंय के लाभ के लिए उक्त पूरा षडयंत्र रचा। इनलोगों पर केस दर्ज शिकायत पर भेड़ाघाट पुलिस ने समिति प्रबंधक कमल सिंह ठाकुर, कम्यूटर ऑपरेटर राजपाल सिंह एवं अतिरिक्त ऑपरेटर दीपेन्द्रे सिंह ठाकुर, प्रभारी शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित शहपुरा शाखा अजय तिवारी, अंकित सिंह उर्फ राजशेखर, शंभु ठाकुर, बिन्दुखराय, सर्वेयर रोहित यादव एवं देवेन्द्र यादव तथा एमएलटी वेयरहाउस मजीठा के संचालक आदेश तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है।  

पुरुषों में प्रजनन समस्या बढ़ी, WHO ने बताया आपकी इन आदतों और गलतियों की वजह

नई दिल्ली परिवार शुरू करने का सपना हर कपल का होता है, लेकिन हर किसी की ये राह आसान नहीं होती. हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और कई मेडिकल स्टडीज ने खुलासा किया है कि दुनियाभर में करीब हर 6 में से 1 पुरुष (1 in 6 men) को बांझपन यानी Infertility की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. यानी, अगर आप सोचते हैं कि प्रेग्नेंसी में दिक्कत सिर्फ महिलाओं से जुड़ी समस्या है, तो यह गलतफहमी है. रिसर्च साफ कहती है कि पुरुष भी उतनी ही बड़ी वजह बनते हैं. रिसर्च क्या कहती है? WHO और कई अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स के अनुसार, infertility सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है. 40से 50 प्रतिशत मामलों में पुरुषों की वजह से गर्भधारण नहीं हो पाता. इसके पीछे कई कारण हैं. लाइफस्टाइल , खानपान की गलतियां, शराब-सिगरेट का सेवन, तनाव और समय पर टेस्टिंग न कराना. पुरुषों में Infertility की बड़ी वजह     धूम्रपान और शराब: ये आदतें स्पर्म की क्वालिटी और संख्या दोनों को कम कर देती हैं.     पोषण की कमी: विटामिन D, जिंक और फॉलिक एसिड की कमी से भी स्पर्म प्रोडक्शन पर असर पड़ता है.     तनाव और नींद की कमी: लगातार स्ट्रेस से हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे fertility घट जाती है.     ओवरवेट या मोटापा: रिसर्च बताती है कि मोटापा टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम कर देता है.     टेस्टिंग से परहेज: कई पुरुष शर्म या झिझक की वजह से टेस्टिंग नहीं कराते, जिससे इलाज देर से शुरू होता है. क्यों जरूरी है फर्टिलिटी टेस्ट? डॉक्टरों के अनुसार, अगर 1 साल तक प्रेग्नेंसी की कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है, तो पुरुष और महिला दोनों को फर्टिलिटी टेस्टिंग ज़रूर करानी चाहिए. इससे जल्दी समस्या पकड़ी जाती है और IVF, IUI जैसी एडवांस तकनीकों के जरिए इलाज की संभावना बढ़ जाती है. सपोर्ट और जागरूकता की जरूरत Infertility से जूझ रहे कपल्स अक्सर खुद को अकेला महसूस करते हैं. ऐसे में परिवार और दोस्तों का सपोर्ट बहुत मायने रखता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि infertility को लेकर जो सामाजिक स्टिग्मा (कलंक) है, उसे तोड़ना बेहद ज़रूरी है. खुलकर बातचीत करने और समय रहते डॉक्टर से सलाह लेने से समस्या का समाधान संभव है. एक्सपर्ट की राय एम्स, नई दिल्ली के एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत सिंह कहते हैं, "आज हर 6 में से एक पुरुष infertility की समस्या से जूझ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह गलत lifestyle है. लेकिन अच्छी बात ये है कि समय पर टेस्टिंग, सही इलाज और स्वस्थ दिनचर्या से ज्यादातर मामलों में इलाज संभव है." पुरुष बांझपन क्या है? बांझपन पुरुष और महिला दोनों को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से, पुरुष बांझपन एक ऐसी स्थिति है जो पुरुषों को प्रभावित करती है। यह उनकी प्रजनन प्रणाली की महिला को गर्भवती करने की क्षमता में बाधा उत्पन्न करता है। यदि कोई पुरुष बांझ हो तो क्या होगा? यदि आप पुरुष बांझपन से पीड़ित हैं, तो इसका मतलब है कि आपने एक वर्ष से अधिक समय तक बार-बार असुरक्षित यौन संबंध बनाए हैं, लेकिन आपकी महिला साथी गर्भवती नहीं हुई है। पुरुष बांझपन कितना आम है? दुनिया भर में 18.6 करोड़ लोग बांझपन से प्रभावित हैं, और लगभग आधे मामलों में इसका कारण पुरुष साथी होता है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे लगभग 10% से 15% पुरुष बांझपन से प्रभावित हैं। क्या गर्भधारण करना आसान है? नहीं, गर्भधारण करना आसान नहीं है। मानव प्रजाति को कम प्रजनन क्षमता वाली प्रजाति माना जाता है। एक उपजाऊ और युवा जोड़े के, हर महीने मुक्त संभोग करने पर, गर्भधारण की संभावना केवल 20-25% होती है। गर्भधारण एक जटिल प्रक्रिया है जो पुरुष और महिला प्रजनन प्रणाली के कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें शामिल हैं:     स्वस्थ पुरुष प्रजनन कोशिकाओं (शुक्राणु) और स्वस्थ महिला प्रजनन कोशिका (अंडाणु) का उत्पादन करना।     अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूब जो शुक्राणु को अंडे तक पहुंचने की अनुमति देती है।     जब शुक्राणु अंडे से मिलते हैं तो उन्हें निषेचित करने की उनकी क्षमता।     निषेचित अंडे (भ्रूण) की गर्भाशय में प्रत्यारोपित करने की क्षमता । गर्भावस्था को पूर्ण अवधि (39 से 40 सप्ताह और छह दिन) तक जारी रखने के लिए, भ्रूण का स्वस्थ होना ज़रूरी है, और भ्रूण के विकास के लिए महिला का हार्मोनल वातावरण पर्याप्त होना चाहिए। अगर इनमें से किसी एक कारक पर भी कोई असर पड़ता है, तो बांझपन हो सकता है। लक्षण और कारण अस्वस्थ शुक्राणु के लक्षण क्या हैं? पुरुष बांझपन का मुख्य लक्षण जैविक संतान पैदा न कर पाना है। लेकिन पुरुष बांझपन कई मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक लक्षणों को भी जन्म दे सकता है, जिनमें शामिल हैं:     अवसाद ।     नुकसान।     दु: ख।     अपर्याप्तता.     असफलता। यदि आप या आपका साथी इनमें से किसी भी भावना का अनुभव करते हैं, तो किसी मनोचिकित्सक या मनोचिकित्सक से बात करना अच्छा विचार है । कभी-कभी, पुरुष बांझपन अंडकोषों में टेस्टोस्टेरोन के कम उत्पादन से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में, थकान, नपुंसकता, अवसाद, वज़न बढ़ना और उदासीनता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर आपको या आपके साथी को ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो पुरुष बांझपन के विशेषज्ञ किसी मूत्र रोग विशेषज्ञ या प्रजनन एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से बात करने से मदद मिल सकती है।  पुरुष बांझपन का क्या कारण है? कई जैविक और पर्यावरणीय कारक पुरुष बांझपन का कारण बन सकते हैं। इनमें शामिल हैं:     शुक्राणु संबंधी समस्याएं, जिनमें विकृत शुक्राणु, कम शुक्राणु संख्या ( ओलिगोस्पर्मिया ) और आपके वीर्य में शुक्राणु की अनुपस्थिति ( एज़ोस्पर्मिया ) शामिल हैं।     आनुवंशिक विकार , जिसमें क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम और मायोटोनिक डिस्ट्रोफी शामिल हैं ।     कुछ चिकित्सीय स्थितियां, जिनमें मधुमेह , कुछ स्वप्रतिरक्षी रोग जो आपके शुक्राणुओं पर हमला करते हैं और सिस्टिक फाइब्रोसिस शामिल हैं ।     संक्रमण, जिसमें एपिडीडिमाइटिस , ऑर्काइटिस और यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) शामिल हैं, जिसमें गोनोरिया या एचआईवी शामिल हैं ।     आपके अंडकोष में सूजी हुई नसें ( वैरिकोसील्स )।     कैंसर उपचार, जिसमें कीमोथेरेपी , विकिरण चिकित्सा … Read more

गुयाना, सोमालिया और अफ्रीका के देशों में बालाघाट चावल का क्रेज, सेहत के लिए भी रामबाण

बालाघाट  वे लोग जो चावल खाने के शौकीन हैं लेकिन बीमारियों की वजह से नहीं खा पाते उनके लिए खास तरह का पारबॉइल्ड चावल बेहद कारगर होता है. खास बात यह है कि मध्य प्रदेश के बालाघाट के किसान इसको अपने खेतों में उगा रहे हैं, जिसकी डिमांड दुनिया भर के कई देशों में हो रही है. आइए जानते हैं इस खास किस्म में चावल की क्या हैं खासियतें- मध्य प्रदेश में धान का कटोरा, विदेशों में चावल की माँग बालाघाट जिसे घाटों वाला जिला भी कहा जाता है यहां पैदा होने वाले चावल की मांग भारत के अलावा विदेशों में भी बढ़ी है. जिले का पारबॉइल्ड चावल अफ्रीकी और खाड़ी देशों में विशेष रूप से पसंद किया जाता है. IR-64 किस्म के धान से बने चावल की गुयाना, सोमालिया, बेनिन, टोगो जैसे अफ्रीकी देशों में काफी डिमांड है. क्या होता है पारबॉइल्ड चावल बालाघाट राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोनू भगत ने बताया "पारबॉइल्ड चावल ऐसे चावल होते हैं जो आंशिक रूप से चावल के भूसे के अंदर ही उबाल दिए जाते हैं. इसके तीन मेन स्टेप्स में इन्हें धोना, स्टीम करना और ड्राई करना शामिल होता है. मोटे पारबॉइल्ड चावल की सबसे ज्यादा डिमांड विदेशों में है जो IR-64 और IR-36 धान से बनता है." मप्र में धान का कटोरा है बालघाट बालाघाट के उपसंचालक कृषि फूल सिंह मालवीय ने बताया "बालाघाट में 2.67 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान का उत्पादन होता है, जिसमें लगभग 82,77,000 क्विंटल धान पैदा होती है. बालाघाट को "प्रदेश का धान का कटोरा" भी कहा जाता है और यहां की अर्थव्यवस्था धान की खेती पर ही निर्भर है. किसानों से यहां की राइस मिल के व्यापारी और मप्र सरकार धान की खरीदी करती है. फिर से मिलों के ज़रिए चावल बनाकर तैयार किया जाता है." मप्र में चिन्नौर धान को मिला है जीआई टैग केंद्र सरकार की "एक जिला, एक उत्पाद" योजना में शामिल होने वाली चिन्नौर धान मध्य प्रदेश से जीआई टैग प्राप्त करने वाली पहली चावल की किस्म है. जीआई टैग से इसका अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रचार हो रहा है. इसे 14 सितंबर 2021 को भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा मान्यता दी गई थी. यह मध्य प्रदेश का पहला चावल है जिसे जीआई टैग मिला और इसने बालाघाट को पहचान दी. 

इंडियन नेवी की ताकत बढ़ी, आंख उठाकर भी नहीं देख पाएंगे चीन-पाकिस्तान के जहाज

नई दिल्ली भारत अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत और आधुनिक बना रहा है. बदलते हालात में समुद्री क्षेत्र की अहमियत और बढ़ गई है, इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना का फोकस अब एक मज़बूत और नेटवर्क्ड ब्लू-वॉटर फोर्स बनाने पर है. लक्ष्य है कि वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना के पास 200 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हों, ताकि समुद्री हितों की रक्षा की जा सके और चीन-पाकिस्तान से पैदा होने वाले किसी भी खतरों का मुकाबला किया जा सके. 55 युद्धपोतों पर चल रहा काम फिलहाल भारतीय शिपयार्ड में 55 बड़े और छोटे युद्धपोतों का निर्माण चल रहा है, जिसकी कुल लागत लगभग 99,500 करोड़ रुपये है. इसके अलावा नौसेना को 74 नए युद्धपोत और जहाज़ के स्वदेशी निर्माण के लिए 2.35 लाख करोड़ रुपये की शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है. इनमें नौ डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां, सात मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट, आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कोरवेट और 12 माइन काउंटरमेज़र पोत शामिल हैं. इसके साथ ही अगली पीढ़ी के चार विध्वंसक पोत और दूसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की योजना भी आगे बढ़ाई जा रही है, जो मौजूदा रूसी मूल के आईएनएस विक्रमादित्य की जगह लेगा. भारत के पास होंगे 230 युद्धपोत टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना अधिकारियों का कहना है कि एक मज़बूत नौसेना रातों-रात नहीं बनाई जा सकती. इसके लिए वर्षों की योजना और निर्माण की आवश्यकता होती है. आज की तारीख में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा भारत ही ऐसा देश है, जो स्वदेशी स्तर पर एयरक्राफ्ट कैरियर और परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां बना और चला सकता है. इस वक्त नौसेना के पास कुल 140 युद्धपोत हैं, जिनमें 17 डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां (ज्यादातर पुरानी) और दो परमाणु-संचालित एसएसबीएन शामिल हैं. इसके अलावा नौसेना के पास 250 से अधिक विमान और हेलिकॉप्टर हैं. पुरानी पनडुब्बियों और युद्धपोतों को चरणबद्ध तरीके से हटाते हुए नौसेना का लक्ष्य अगले दशक में 200 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ 350 नौसैनिक विमान और हेलिकॉप्टरों की क्षमता विकसित करना है. 2037 तक यह संख्या 230 युद्धपोत तक पहुंच सकती है. पाकिस्तानी नौसेना की ताकत बढ़ा रहा चीन इधर, चीन दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बनाकर (370 युद्धपोत और पनडुब्बियां) हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पैठ लगातार बढ़ा रहा है. अफ्रीका के जिबूती, पाकिस्तान के कराची और ग्वादर, और कंबोडिया के रीम जैसे ठिकानों के बाद बीजिंग और भी विदेशी अड्डों की तलाश में है. चीन पाकिस्तान की नौसैनिक ताकत बढ़ाने में भी मदद कर रहा है. पाकिस्तान के पास फिलहाल पांच पुरानी अगोस्ता श्रेणी की पनडुब्बियां हैं, लेकिन अगले साल से उसे आठ नई युआन या हंगोर श्रेणी की डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां मिलने लगेंगी, जिनमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होगी और वे लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकेंगी. इससे पाकिस्तान की समुद्र में लड़ने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी. छह पनडुब्बियों के लिए भी चल रही बात भारत के लिए चिंता की बात यह है कि उसकी पारंपरिक पनडुब्बी क्षमता धीरे-धीरे घट रही है. इस कमी को पूरा करने के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के बीच छह नई डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए 70,000 करोड़ रुपये की बातचीत जारी है. इनमें एआईपी तकनीक और लैंड-अटैक क्रूज़ मिसाइलें होंगी. वहीं, फ्रांसीसी मूल की तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण 32,000 करोड़ रुपये की लागत से करने की योजना फिलहाल अटकी हुई है. मौजूदा समय में भारतीय नौसेना के पास छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के अलावा सात पुरानी रूसी किलो क्लास और चार जर्मन एचडीडब्ल्यू पनडुब्बियां हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नई परियोजनाओं के समय पर पूरे होने और मौजूदा बेड़े के अपग्रेडेशन के बाद भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान की चुनौतियों का मजबूती से मुकाबला कर सकेगा.

बिना टैरिफ के व्यापार, 2025 में भारत का 24 देशों के साथ आर्थिक दांव

नई दिल्‍ली.  अमेरिका की ओर से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने से हुए नुकसान की भरपाई एक झटके में करने की तैयारी है. भारत के हाथ ऐसा दांव लगने वाला है, जिससे टैरिफ से हुए नुकसान की सारी भरपाई हो जाएगी. यह काम पूरा होने पर भारत को 135 अरब डॉलर का व्‍यापार बिना किसी टैक्‍स के करने का मौका मिलेगा. इस पर बातचीत भी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है और माना जा रहा है कि इसी साल करीब 2 दर्जन देशों के साथ बिना टैक्‍स के व्‍यापार का रास्‍ता खुल जाएगा. मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत और यूरोपीय संघ अपने महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द अंतिम रूप देने के लिए अगले एक महीने में दो दौर की महत्वपूर्ण वार्ता करेंगे. इस दौरान उत्पत्ति के नियमों, बाजार पहुंच और वाइन तथा डेयरी उत्पादों पर शुल्क के क्षेत्रों में मतभेदों को दूर करने की कोशिश की जाएगी. इन पर सहमति बनती है तो इसी साल यह डील पूरी होने की संभावना है. दिसंबर हो जाएगी एफटीए डील यूरोपीय आयोग के कृषि आयुक्त क्रिस्टोफ हैनसेन और व्यापार प्रमुख मारोस सेफ्कोविक इस सप्ताह अपने भारतीय वार्ताकारों के साथ बातचीत करने के लिए भारत का दौरा कर रहे हैं. दोनों पक्ष इस साल के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर करना चाहते हैं. यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका वित्तवर्ष 2023-24 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 135 अरब डॉलर था. यह आंकड़ा चीन और अमेरिका से भी ज्‍यादा है. जाहिर है कि एफटीए डील पक्‍की होने पर भारत को इसका बड़ा लाभ मिलेगा. 17 सितंबर को बड़ा दिन व्यापार समझौते के अलावा, भारत और यूरोपीय संघ कई परिवर्तनकारी पहलों को भी आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में हैं, जिनमें एक नया राजनीतिक-रणनीतिक नजरिया और रक्षा संबंधों का विस्तार शामिल हैं. ये कदम बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के मद्देनजर उठाए गए हैं. गौरतलब है कि यूरोपीय संघ 17 सितंबर को भारत के साथ संबंधों के लिए अपने नए रणनीतिक नजरिये को जारी करेगा. नए उपायों को भारत-यूरोपीय संघ वार्षिक शिखर सम्मेलन में जारी करने की उम्मीद है. 27 देशों से एकसाथ बातचीत भारत और ईयू दोनों पक्ष अगले तीन महीनों में कई उच्च-स्तरीय बैठकें और वार्ताएं भी करेंगे, जिनमें यूरोपीय संघ की राजनीतिक और सुरक्षा समिति का भारत दौरा भी शामिल है. इसमें यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के दूत शामिल होंगे. इसका मतलब है कि भारत एकसाथ 27 देशों से एफटीए पर बातचीत करेगा और यह पूरा होता है तो भारत को 27 देशों के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता कराने का अवसर मिलेगा.