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हरियाणा का यह जिला मनाएगा धूमधाम से दशहरा, देखें 70 फीट रावण और विशाल मूंछें

सिरसा  इस बार सिरसा में दशहरे का पर्व कुछ खास और अनोखा होने जा रहा है। यहां एक बेहद आकर्षक और अलग तरह का रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत हैं उसकी जलेबी जैसी लंबी, घुमावदार मूंछें। करीब 40 फीट लंबी इन मूंछों के साथ 70 फीट ऊंचा यह रावण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस अनोखे पुतले के पीछे हैं दिल्ली के मशहूर कारीगर बाबा भगत, जो पिछले 40 वर्षों से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले बनाने की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। चार दशकों से रामायण की कहानी को जीवित रख रहे हैं बाबा भगत बाबा भगत का कहना है कि वे अब तक दिल्ली और सिरसा में मिलाकर हजारों पुतले बना चुके हैं। सिर्फ सिरसा में ही पिछले 20 वर्षों में उन्होंने लगभग 4000 छोटे रावण के पुतले तैयार किए हैं, जिन्हें बच्चे खास पसंद करते हैं। बच्चे इन पुतलों को मोहल्लों और गलियों में जलाकर अपने तरीके से दशहरा मनाते हैं। वहीं, बड़े पुतलों की बात करें तो बाबा भगत अब तक 500 से अधिक विशालकाय रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले बना चुके हैं। हर साल वे करीब 100 छोटे रावण के पुतले तैयार करते हैं, जिनकी मांग पूरे साल बनी रहती है—केवल दशहरे के लिए नहीं, बल्कि सजावट और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए भी। इस बार 70 फीट का भव्य रावण, होगी 40 फीट की जलेबी मूंछ  इस बार सिरसा में जो रावण का पुतला तैयार हो रहा है, वह करीब 70 फीट ऊंचा होगा और इसकी सबसे अनोखी बात होगी इसकी 40 फीट लंबी जलेबी जैसी मूंछें, जो इसे बाकी रावणों से बिल्कुल अलग और खास बना रही हैं। इसके अलावा, कुंभकर्ण और मेघनाथ के भी विशाल पुतले तैयार किए जा रहे हैं, जो इस आयोजन को और भी भव्य बना देंगे। कला नहीं, एक संस्कार है यह काम – बाबा भगत बाबा भगत का कहना है कि वे इस कला को केवल रोजगार या पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक सेवा के रूप में करते हैं। उनका उद्देश्य है कि नई पीढ़ी रामायण और रावण की कहानी से जुड़े, केवल पुतले जलाकर उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे अर्थ और संस्कृति को भी समझे। हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि मौजूदा समय में महंगाई ने इस परंपरा को बनाए रखना कठिन बना दिया है। कागज, बांस, रंग और अन्य सामग्री की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका और उनके परिवार का जुनून कम नहीं हुआ। परिवार ही टीम है – मिलकर बनाते हैं इतिहास बाबा भगत के परिवार के करीब 20 सदस्य इस परंपरा में उनके साथ काम कर रहे हैं। कोई ढांचा तैयार करता है, कोई कागज चिपकाता है, तो कोई रंग भरने का काम करता है। महीनों की मेहनत के बाद ये भव्य पुतले आकार लेते हैं। इस बार सिरसा का दशहरा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक दृश्यात्मक अनुभव होगा। जलेबी मूंछों वाला 70 फीट ऊंचा रावण, उसके साथ विराट कुंभकर्ण और मेघनाथ, दर्शकों को अद्भुत दृश्य और जीवन भर की यादें देंगे। रावण बुरा था या नहीं, बहस का विषय हो सकता है… बाबा भगत का मानना है कि “रावण बुरा था या नहीं, यह बहस का विषय हो सकता है, लेकिन उसकी कहानी अच्छाई और बुराई के बीच फर्क करना सिखाती है। यही संदेश हम अपने पुतलों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं।  

मुख्यमंत्री यादव का संदेश: नवरात्रि से बढ़ाएं सामाजिक समरसता

नवरात्रि पर्व मिलकर आराधना करने और सद्भाव बढ़ाने का माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री भोपाल के भेल क्षेत्र में भोजपाल गरबा महोत्सव में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नवरात्रि पर्व हमें एक साथ मिलकर आराधना करने, मेलजोल और सद्भाव बढ़ाने का माध्यम बनता है। यह पावन पर्व शक्ति-आराधना का पर्व है। यह अवसर इतिहास के गौरवशाली अध्याय का स्मरण करवाता है। नवरात्रि पर्व में मां जगदम्बा, भगवान कृष्ण के स्वरूप और देवी-देवताओं के रूप में हमारे कलाकार उत्साह और श्रद्धा का परिचय देते हैं। ऐसी अनुभूति होती है कि माँ भवानी साक्षात हमारे बीच आ गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि दशहरा पर्व भगवान राम की असुरों पर विजय के साथ माँ जगदम्बा द्वारा महिषासुर का वध करने के उल्लास का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की रात्रि भोपाल के भेल क्षेत्र में भोजपाल गरबा महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। वर्ष 2014 के बाद बदल गया है भारत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व में अलग पहचान बनाई है। जहां तक शौर्य की बात है अब कोई भी शत्रु भारत में आतंकवादी गतिविधि घटित करने की हिम्मत नहीं कर सकता। भारत, शत्रु को पाताल तक जाकर भी तलाश कर सकता है और शत्रु के घर में घुसकर उसे सबक सिखाने की क्षमता रखता है। ऑपरेशन सिंदूर इस बात का उदाहरण है कि भारत दुश्मन के किसी मंसूबे को सफल नहीं होने देगा। वर्ष 2014 के पहले का भारत बदल चुका है, अब कोई शत्रु भारत से बच नहीं सकता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में भारत के समस्त देव स्थानों पर आनंद की वर्षा हो रही है। भारत में शौर्य प्रदर्शन और विकास के साथ कई क्षेत्रों में अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। खेल क्षेत्र में की बात करें तो गत रविवार को हुए 20-20 एशिया कप मैच में भारत की विजय सभी भारतीयों का गर्व बढ़ाने का कारण बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोजपाल गरबा महोत्सव का यह दूसरा वर्ष है। यहां नागरिकों और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पदाधिकारी और गरबा महोत्सव के संयोजक  सुनील यादव के साथ अन्य पदाधिकारियों को गरबा महोत्सव को अभिनव स्वरूप देने की बधाई दी और सराहना की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निर्वहन के लिए अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में संयोजक  सुनील यादव,  रविंद्र यति,  विकास विरानी,  अमन यादव और अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। गरबा महोत्सव के आखिरी दिन विशाल जनसमूह और कलाकार दल ने गरबा की आकर्षक प्रस्तुति दी।  

ई-व्हीकल यूज़र्स के लिए खुशखबरी! सरकार लगाएगी 72 हजार चार्जिंग स्टेशन, PM E-Drive को मिला बूस्ट

नई दिल्ली इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले हर किसी के जेहन सबसे बड़ा सवाल चार्जिंग इंफ्रा को लेकर ही उठता है. ड्राइविंग रेंज की चिंता को तो कार कंपनियों ने काफी हद तक बड़े बैटरी पैक से दूर करने की कोशिश की है. लेकिन अब भी लोग ये सोचते हैं कि, “इलेक्ट्रिक कार ले तो लें… लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का क्या?”. इलेक्ट्रिक कारों की कीमत के बाद दूसरी सबसे बड़ी टेंशन यही है, जिसने भारत में EV क्रांति की रफ्तार धीमी कर दी है. अब सरकार इस सबसे बड़े रोड़े को हटाने की तैयारी में है.  भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (PM E-Drive) योजना के तहत पब्लिक ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी की है. यह गाइडलाइंस न सिर्फ उद्योग जगत बल्कि आम उपभोक्ता के लिए भी अहम साबित होंगी, क्योंकि अब भारत में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या और पहुंच दोनों में बड़ा विस्तार देखने को मिलेगा. इसमें साफ कहा गया है कि पब्लिक चार्जिंग स्टेशन बनाने वालों को तगड़ी सब्सिडी मिलेगी. कहीं 70%, कहीं 80%, और सरकारी इमारतों में लगे फ्री चार्जर पर तो पूरी 100% सब्सिडी दी जाएगी. सरकार की 10,000 करोड़ रुपये की PM E-Drive योजना में से 2,000 करोड़ रुपये चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे. इसका लक्ष्य है 72,300 नए पब्लिक चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और बैटरी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना. योजना का जोर खासतौर पर मेट्रो शहरों, स्मार्ट सिटीज़, राज्य की राजधानियों और नेशनल व स्टेट हाईवे जैसे हाई-डेन्सिटी इलाकों पर होगा. गाइडलाइंस के मुताबिक-      सरकारी इमारतों (जैसे दफ्तर, अस्पताल, स्कूल, रेज़िडेंशियल कॉम्प्लेक्स) में यदि पब्लिक के लिए मुफ्त चार्जिंग की सुविधा दी जाएगी, तो 100% सब्सिडी मिलेगी.     PSU आउटलेट्स, एयरपोर्ट, मेट्रो/बस स्टेशन, बंदरगाह और NHAI टोल प्लाज़ा पर बने चार्जिंग स्टेशनों को 80% तक इंफ्रास्ट्रक्चर और 70% तक EVSE सब्सिडी दी जाएगी.     मॉल, मार्केट और सड़कों पर बने स्टेशन को 80% सब्सिडी सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिलेगी।     बैटरी स्वैपिंग और बैटरी चार्जिंग स्टेशन भी 80% सब्सिडी के दायरे में आएंगे. सब्सिडी की गणना ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा तय बेंचमार्क कॉस्ट या वास्तविक लागत (जो भी कम हो) के आधार पर होगी. उदाहरण के लिए, 50 kW तक के चार्जर पर 6.04 लाख रुपये और 150 kW से अधिक पर 24 लाख रुपये की लागत तय है. वहीं, एक 50 kW CCS-II चार्जर की बेंचमार्क कॉस्ट 7.25 लाख रुपये और 100 kW CCS-II चार्जर की 11.68 लाख रुपये तय की गई है. योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि चार्जिंग स्टेशनों को नेशनल यूनिफाइड EV चार्जिंग हब से जोड़ा जाएगा. इससे यूज़र्स को रियल-टाइम में चार्जिंग स्टेशन की लोकेशन, उपलब्धता और पेमेंट ऑप्शन मिलेंगे. भारत में फिलहाल करीब 30,000 पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन हैं, जो मौजूदा ईवी डिमांड की तुलना में बेहद कम माने जाते हैं. यही वजह है कि सरकार ने इस योजना में चार्जिंग नेटवर्क को प्राथमिकता दी है. योजना का लक्ष्य है 22,100 फास्ट चार्जर (कारों के लिए), 1,800 (बसों के लिए) और 48,400 चार्जर (टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए) पब्लिक चार्जर इंस्टॉल करना है. इस पूरी परियोजना की इंप्लीमेंटिंग एजेंसी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) होगी. सब्सिडी दो चरणों में जारी की जाएगी, जिसमें परफॉर्मेंस और कम्प्लायंस मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा. चार्जिंग स्टैंडर्ड्स भी तय कर दिए गए हैं-      टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर: लाइट EV DC (IS-17017-2-6) और लाइट EV AC/DC कॉम्बो (IS-17017-2-7) – 12 kW तक.     कार और बसें: CCS-II (IS-17017-2-3) – 50 kW से 250 kW तक.     हेवी ड्यूटी ई-बसेस और ई-ट्रक: CCS-II (250–500 kW), हर गन से कम से कम 120 kW आउटपुट. इस नई गाइडलाइन से यह साफ हो रहा है कि, भारत सरकार अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की दिशा में आक्रामक रणनीति अपना रही है. जानकारों का भी मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क का रणनीतिक विस्तार ही वह निर्णायक कदम होगा, जिससे देश में EV अपनाने की गति दोगुनी हो सकती है. क्या है PM E-Drive स्कीम? पीएम ई-ड्राइव (PM E-Drive) यानी प्राइम मिनिस्टर इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट, भारत सरकार की नई योजना है, जिसे 1 अक्टूबर 2024 से लागू किया गया है और यह मार्च 2026 तक चलेगी. इसका मकसद देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को बढ़ावा देना और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना है. करीब 10,900 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना के तहत ई-टू व्हीलर, ई-थ्री व्हीलर, ई-बस और ई-ट्रक जैसे वाहनों पर सब्सिडी मिलेगी. साथ ही, सरकार 72,000 से ज़्यादा चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स लगाने की तैयारी में है.  इस योजना की खासियत यह है कि सब्सिडी सीधे ग्राहक तक e-voucher सिस्टम से पहुँचेगी और चार्जिंग स्टेशनों को नेशनल यूनिफाइड EV चार्जिंग हब से जोड़ा जाएगा. ताकि लोकेशन और पेमेंट की सुविधा आसान हो. सरकार चाहती है कि पेट्रोल-डीज़ल पर निर्भरता कम हो, प्रदूषण कम हो और आम लोगों को EV अपनाने में “रेंज एंग्ज़ाइटी” यानी चार्जिंग की चिंता न रहे.

इतिहास रच गया Maruti, फोर्ड और फॉक्सवैगन को पछाड़कर पहुंचा टॉप-10 ऑटो कंपनियों की लिस्ट में

नईदिल्ली  भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी ने ग्लोबल ऑटोमोबाइल मार्केट में एक नई पहचान बना ली है. कंपनी अब दुनिया की टॉप 10 सबसे मूल्यवान कार कंपनियों की सूची में शामिल हो गई है. ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मारुति सुज़ुकी 8वें स्थान पर पहुंच गई है और सबसे तगड़े मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ फोर्ड, जनरल मोटर्स और फॉक्सवैगन जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है. वही मारुति जिसे आपने गली-मोहल्ले में खड़े अल्टो, वैगनआर और स्विफ्ट के रूप में देखा है, वही मारुति अब फोर्ड, जनरल मोटर्स और यहां तक कि फॉक्सवैगन जैसे बिग शॉट्स को पीछे छोड़ चुकी है. ताजा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब 57.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो चुका है. यह उपलब्धि भारत की ऑटो इंडस्ट्री के लिए किसी मील के पत्थर से कम नहीं है. अब सवाल उठता है कि मारुति की यह छलांग संभव कैसे हुई? इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है हाल ही में लागू हुई संशोधित जीएसटी स्ट्रक्चर. छोटे और बजट-फ्रेंडली कारों, जैसे अल्टो, एस-प्रेसो और वैगनआर पर टैक्स में राहत मिलने से ये कारें और सस्ती हुईं हैं. इसका असर सीधे बुकिंग पर पड़ा और ग्राहकों की कतारें लंबी हो गईं. विदेशी निवेशकों की नज़र भी एक बार फिर भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट पर गई, जहां मारुति का ब्रांड भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है. अगर ग्लोबल लेवल की तस्वीर देखें तो टेस्ला अभी भी बादशाह है. जिसका मार्केट कैप 1.4 ट्रिलियन डॉलर है. इसके बाद टोयोटा (314 बिलियन डॉलर) और चीन की BYD (133 बिलियन डॉलर) का नंबर आता है. फेरारी (92.7 बिलियन डॉलर), बीएमडब्ल्यू (61.3 बिलियन डॉलर) और मर्सिडीज़-बेंज (59.8 बिलियन डॉलर) भी टॉप लिस्ट में शामिल हैं. लेकिन मारुति सुज़ुकी ने अपने 57.6 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन के दम पर जनरल मोटर्स (57.1 बिलियन डॉलर), वोक्सवैगन (55.7 बिलियन डॉलर) और फोर्ड (46.3 बिलियन डॉलर) जैसे बड़े नामों को पीछे छोड़ दिया है. दुनिया की टॉप 10 ऑटोमोबाइल कंपनियां   रैंक  कंपनी मार्केट कैप (अमेरिकी डॉलर में) 1  टेस्ला 1.4 ट्रिलियन 2 टोयोटा  314 बिलियन 3  बीवाईडी  133 बिलियन 4   फेरारी 92.7 बिलियन 5  बीएमडब्ल्यू   61.3 बिलियन 6 मर्सिडीज़-बेंज  59.8 बिलियन 7 होंडा मोटर  59  बिलियन  8  मारुति सुज़ुकी   57.6 बिलियन 9  जनरल मोटर्स 57.1 बिलियन 10   फॉक्सवैगन   55.7 बिलियन 11 फोर्ड   46.3 बिलियन पैरेंट कंपनी Suzuki भी हुई मारुति के पीछे देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी ने अपने ही पैरेंट ब्रांड सुज़ुकी मोटर कॉरपोरेशन, जापान को भी पीछे छोड़ दिया है. जिसका वर्तमान मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 29 बिलियन डॉलर है. ग्लोबल रैंकिंग में अब मारुति, होंडा मोटर (59 बिलियन डॉलर) से ठीक नीचे स्थित है. यानी जल्द ही मारुति सुजुकी होंडा को भी पीछे छोड़ सकती है.  

असुरक्षा और भय के जीवन से मिली मुक्ति प्रधानमंत्री आवास योजना से

रायपुर कभी नक्सल गतिविधियों से जुड़े रहे ग्राम पंचायत एलमागुंडा निवासी श्री सोड़ी हुंगा का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना आखिरकार पूरा हो गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में गृह विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’’ (विशेष परियोजना नियद नेल्लानार योजना) के अंतर्गत उनका नाम चयनित किया गया। कलेक्टर बीजापुर के मार्गदर्शन में आवास प्लस ऐप सर्वे और प्राथमिकता क्रम मं  लक्ष्य आवंटन के बाद उनका आवास स्वीकृत हुआ।            पूर्व में नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे श्री हुंगा ने लगातार असुरक्षा और भय से जीवन व्यतीत किया। शासन-प्रशासन पर विश्वास जताते हुए उन्होंने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उन्हें प्रोत्साहन राशि और अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 1 लाख 20 हजार रुपए की सहायता से पक्का मकान मिला। एलमागुंडा ग्राम पंचायत दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। सीमित परिवहन सुविधाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्री हुंगा ने परिवार के सहयोग से अपने घर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया।          प्रधानमंत्री आवास योजना की प्राप्ति से श्री सोड़ी हुंगा ने भावुक होकर कहा कि पहले नक्सल गतिविधियों में जीवन हमेशा खतरे में रहता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री आवास योजना की बदौलत उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।          प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और नियद नेल्ला नार योजना न केवल आवासीय सुविधा उपलब्ध करा रही है, बल्कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उनका पुनर्वास भी सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि श्री सोड़ी हुंगा जैसे हितग्राहियों की सफलता की कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि योजनाएँ सही दिशा में प्रभावी ढंग से कार्य कर रही हैं।

जंबो तबादला की तैयारी में मध्यप्रदेश सरकार, 12 कलेक्टरों पर गाज गिरने का खतरा

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने बीती शनिवार की देर रात 18 आइएएस और एसएएस के 8 अफसरों समेत 24 अधिकारियों के तबादले किए। एक जंबो सूची और आनी है। इसमें कई आइएएस अफसरों के नाम होंगे। चर्चा के अनुसार 12 से 15 कलेक्टरों पर गाज गिर सकती है। ये वे कलेक्टर होंगे, जिन्हें जिलों की कमान मिलने को दो से ढाई साल का आदर्श समय हो चुका है। बाकी ऐसे होंगे, जो पर्याप्त समय मिलने के बाद भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। हटाया जाना तय जिन कलेक्टरों की वजह से बार-बार विवाद की स्थिति बन चुकी है, उन कलेक्टरों को हटाया जाना तय बताया जा रहा है। इनमें भिंड जैसे जिलों के कलेक्टर दायरे में आ सकते हैं। हालांकि प्रशासन के ज्यादातर अधिकारी मानते हैं कि कलेक्टरों को कई बार घेरने के प्रयास भी होते है। कानूनी जवाब देने पर विवाद की स्थिति पैदा की जाती है। नहीं दिए बेहतर परिणाम लगभग यही बात मध्यप्रदेश आइएएस एसोसिएशन के पदाधिकारी पूर्व में मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव से मिलकर कह चुके हैं। उक्त सूची में मुख्यमंत्री कार्यालय के उन अधिकारियों के नाम भी होने की संभावना है, जिन्हें मौके देने के बावजूद बेहतर परिणाम नहीं दे पा रहे। इनमें दो आइएएस और इतने ही राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का नाम होना बताया जा रहा है। इनकी जगह नए अफसरों को मौके दिए जा सकते हैं।

पृथ्वी की चाल में बदलाव! नासा ने बताया—चीन की मेगा डैम परियोजना से खिसकी धरती की धुरी, सिकुड़ा समय

बीजिंग  चीन के थ्री गॉर्जेस डैम (Three Gorges Dam) को दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोपावर परियोजना माना जाता है. अब नासा ने इस बांध को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. वैज्ञानिकों ने बताया कि इस डैम में संचित पानी की अपार मात्रा ने पृथ्वी की धुरी को करीब 2 सेंटीमीटर तक खिसका दिया है. इतना ही नहीं, पृथ्वी के घूमने की गति में भी मामूली बदलाव दर्ज किया गया है. नासा के मुताबिक थ्री गॉर्जेस डैम में अरबों टन पानी संग्रहीत है. जब यह पानी पृथ्वी की सतह पर फैलने के बजाय एक जगह पर इकट्ठा हो गया, तो मास डिस्ट्रीब्यूशन यानि द्रव्यमान का वितरण बदल गया. अब इसका असर पृथ्वी के घूमने की गति पर पड़ा. नासा ने कहा कि पृथ्वी की घूर्णन गति में बदलाव की वजह से ही दिन लगभग 0.06 माइक्रोसेकंड छोटा हो गया है. आखिर कैसे बदली पृथ्वी की चाल? थ्री गॉर्जेस डैम चीन का एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जो यांग्त्जी नदी पर स्थित है. यह दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक डैम है, जो ऊर्जा उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और नेविगेशन सुधार के लिए बनाया गया. डैम का निर्माण 1994 में शुरू हुआ और 2012 में पूर्ण रूप से चालू हो गया. यह सैंडौपिंग, यिचांग शहर के पास हूबेई प्रांत में मौजूद हैं. इसकी इंजीनियरिंग को समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक उदाहरण दिया है- जैसे कोई फिगर स्केटर अपने हाथ फैलाकर धीमे घूमता है और हाथ समेटकर तेजी से. बिल्कुल उसी तरह जब द्रव्यमान खिसकता है तो पृथ्वी की घूर्णन गति भी प्रभावित होती है. यही वजह है कि दिन छोटे हो रहे हैं. चीन की खतरनाक इंजीनियरिंग चीन के थ्री गॉर्जेस डैम में इतना पानी आ सकता है कि यह अकेले ही 22,500 मेगावॉट से अधिक बिजली पैदा कर सकता है. यह न केवल चीन की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करता है बल्कि बाढ़ नियंत्रण और नेविगेशन को भी बेहतर बनाता है. हालांकि अब यह सामने आया है कि इसकी शक्ति पृथ्वी जैसे ग्रह की भौतिक संरचना पर भी प्रभाव डालने में सक्षम है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस नहीं किया जा सकता, लेकिन यह दिखाता है कि बड़े पैमाने पर इंसानी परियोजनाएं ग्रह की प्राकृतिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं. नासा ने इसे एक अहम उदाहरण बताया है कि कैसे इंसान की बनाई हुई संरचनाएं भी पृथ्वी की गतिशीलता पर असर डाल सकती हैं.

सुप्रीम कोर्ट नाराज़! फ्रॉड केस में बेल देने पर दो जजों को भेजा ट्रेनिंग पर, निचली अदालतों को चेतावनी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में दी गई जमानत को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने मजिस्ट्रेट और सेशन जज के जमानत देने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं. दोनों न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली न्यायिक अकादमी में सात दिन की स्पेशल ट्रेनिंग का निर्देश दिया गया है. अदालत ने कहा कि चार्जशीट सामग्री की जांच किए बिना जमानत आदेश पारित किए गए थे.  कोर्ट ने पाया कि गंभीर तथ्यात्मक मैट्रिक्स के बावजूद जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी. अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को मामले में जांच अधिकारियों की भूमिका की जांच करने का भी निर्देश दिया है.  जमानत के सिद्धांतों को तथ्यों से जोड़ा जाना चाहिए, उन्हें शून्यता में लागू नहीं किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने जाहिर की नाराजगी कोर्ट ने साफ कहा कि अगर वह एसीएमएम (ACMM) द्वारा आरोपी को जमानत दिए जाने और सेशन जज द्वारा इस पर हस्तक्षेप करने से इनकार करने के तरीके को नजरअंदाज करता है, तो यह अपनी ड्यूटी में फेल होगा. कोर्ट ने जमानत दिए जाने के आदेशों को रद्द करते हुए, दोनों न्यायिक अधिकारियों को करीब सात दिनों के विशेष न्यायिक प्रशिक्षण से गुजरने का निर्देश दिया.  कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से गुजारिश किया है कि दिल्ली न्यायिक अकादमी में ट्रेनिंग की उचित व्यवस्था की जाए, जिसमें उच्च न्यायालयों के फैसलों के महत्व पर न्यायिक अधिकारियों को संवेदनशील बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत आदेश चार्जशीट सामग्री की जांच किए बिना ही पारित कर दिए गए थे. कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि एसीएमएम (ACMM) का आदेश चार्जशीट में उपलब्ध सामग्री की जांच किए बिना कैसे पारित कर दिया गया. कोर्ट ने खुद नोट किया था कि 'धोखाधड़ी की कथित घटना में दोनों आरोपियों की भूमिका को चार्जशीट में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है.' कोर्ट ने कहा कि जमानत के मामले मुख्य रूप से कानून के किसी भी सिद्धांत को लागू करने से पहले तथ्यों और परिस्थितियों पर तय किए जाने चाहिए. प्रक्रियागत खामियां और जांच अधिकारियों की भूमिका… कोर्ट ने जमानत देने के तरीके में हुई कुछ प्रक्रियागत अनियमितताओं को भी उजागर किया, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि आरोपी तकनीकी रूप से कोर्ट की कस्टडी में थे, फिर भी उन्हें औपचारिक रिहाई आदेश के बिना ही कोर्ट से जाने दिया गया था. अदालत ने यह भी कहा कि जांच अधिकारियों (IOs) की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इसके चलते, दिल्ली पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से आईओज (IOs) के आचरण की जांच करने और प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. क्या है मामला? यह मामला आरोपी पति और उसकी सह-आरोपी पत्नी से संबंधित था, जिन पर एक करोड़ नब्बे लाख रुपये लेने और जमीन हस्तांतरित करने का वादा करने का आरोप था. बाद में पता चला कि वह जमीन पहले ही गिरवी रख दी गई थी और किसी तीसरे पक्ष को बेची जा चुकी थी. अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपी आदतन अपराधी हैं और उनके खिलाफ इसी तरह के छह मामले लंबित हैं. कोर्ट ने जमानत रद्द करने का एक प्रमुख कारण आरोपियों का आचरण बताया. 2019 में हाई कोर्ट ने मध्यस्थता की ख्वाहिश जताने पर उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी थी, लेकिन करीब चार साल बीत जाने के बाद भी मध्यस्थता प्रक्रिया से कोई नतीजा नहीं निकला. कोर्ट ने कहा कि गंभीर तथ्यात्मक मैट्रिक्स के रोशनी में जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी. कोर्ट ने दोहराया कि जमानत के सिद्धांत हमेशा विशिष्ट मामलों के तथ्यों के साथ जुड़े होने चाहिए.  

UIDAI ने बदले आधार से जुड़े नियम, जरूरी अपडेट नहीं किया तो आधार हो सकता है निष्क्रिय

भोपाल    आधार कार्ड को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। जिन लोगों के आधार कार्ड बने हुए 10 या इससे ज्यादा साल हो चुके हैं उनका आधार कार्ड रद्द हो सकता है। आधार कार्ड एक नागरिक के जीवन में अहम दस्तवेज है जो किसी भी काम काज के लिए सबसे पहले मांगा जाता है फिर चाहे वह सरकार की तरफ से दिया जाने वाला कोई लाभ हो या फिर हमारे मोबाइल से लेकर कोई काम, ऐसे में अगर किसी का आधार कार्ड रद्द हो जाए तो कितना मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।  लेकिन इन सभी सेवाओं का फायदा तभी मिल पाता है, जब आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर एक्टिव और सही हो। इसको लेकर एक नई अपडेट जारी कि गई है। जितने भी आधार कार्ड धारक हैं, सभी को यह जानना जरूरी है कि क्या-क्या अपडेट आप सभी को करना होगा। हाल ही में एक नई सूचना आई है कि अगर आप अपने आधार कार्ड को 10 साल से अपडेट नहीं कर रहे हैं, तो आपका आधार कार्ड बंद (डीएक्टिवेट) हो सकता है। इससे आपको कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। पहले मोबाइल नंबर ऑनलाइन अपडेट किया जा सकता था, लेकिन अब UIDAI ने यह सुविधा बंद कर दी है। अब अगर आपको अपने आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर को बदलना है तो आपको नजदीकी आधार सेवा केंद्र जाकर ही यह काम करना होगा। तो इसलिए अब जल्दी अपने नजदीकी आधार केंद्र में जाएं और अपना मोबाइल नंबर अपडेट करवाएं।   आधार अपडेट के नए शुल्क और अनिवार्य नियम 1 अक्टूबर 2025 से आधार कार्ड में सामान्य सुधार (जैसे नाम या पता) के लिए 75 रुपये का शुल्क लगेगा. वहीं, अगर आप बायोमेट्रिक जानकारी, जैसे फिंगरप्रिंट, आइरिस या फोटो बदलना चाहते हैं, तो इसके लिए 125 रुपये देने होंगे. बच्चों (7 से 17 साल) के बायोमेट्रिक अपडेट के लिए भी अब 125 रुपये का शुल्क देना होगा. हालांकि, नया आधार कार्ड बनवाने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, ये पहले की तरह मुफ्त ही रहेगा. UIDAI के सीईओ, भुवनेश्वर कुमार के मुताबिक 1 अक्टूबर 2025 से 10 साल पुराने आधार कार्ड को अपडेट कराना अनिवार्य होगा. ये उन लोगों के लिए एक अतिरिक्त खर्च हो सकता है जो ग्रामीण और छोटे शहरों में रहते हैं. अगर आपने पिछले दस सालों में अपना आधार अपडेट नहीं कराया है, तो अब आपको अपने दस्तावेज जमा करके ये नया शुल्क देना होगा. बच्चों और किशोरों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट एक अच्छी खबर ये है कि 5 से 7 साल के बच्चों और 15 से 17 साल के किशोरों को अब बायोमेट्रिक अपडेट के लिए कोई फीस नहीं देनी होगी. पहले ये 50 रुपये थी, जिसे अब माफ कर दिया गया है. हालांकि, इन आयु वर्गों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट कराना अनिवार्य है. अगर इसे समय पर नहीं कराया गया, तो उनका आधार कार्ड अवैध हो सकता है. आधार कार्ड पर अब नहीं दिखेगा पति या पिता का नाम 15 अगस्त 2025 से, नए आधार कार्ड पर 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए पिता या पति का नाम नहीं दिखेगा. ये जानकारी सिर्फ UIDAI के रिकॉर्ड में रहेगी. इस बदलाव से बार-बार नाम बदलने की जरूरत नहीं होगी और लोगों की प्राइवेसी भी सुरक्षित रहेगी, खासकर महिलाओं के लिए ये एक बड़ा कदम है. जन्मदिन और ‘केयर ऑफ’ कॉलम में बदलाव अब आपके आधार कार्ड पर जन्मतिथि सिर्फ साल (जैसे 1990) के रूप में दिखेगी, जबकि पूरी जन्मतिथि (जैसे 01/01/1990) UIDAI के रिकॉर्ड में ही रहेगी. इसके अलावा, कार्ड से 'केयर ऑफ' (C/o) कॉलम हटा दिया गया है. अब आपके आधार कार्ड पर सिर्फ आपका नाम, उम्र और पता ही दिखाई देगा. एड्रेस अपडेट के लिए नए दस्तावेज और डिजिटल प्रक्रिया जनवरी 2025 से पता बदलने के लिए सिर्फ बैंक स्टेटमेंट या यूटिलिटी बिल (बिजली, पानी, गैस का बिल) ही स्वीकार होंगे. अन्य सुधारों जैसे नाम या जन्मतिथि के लिए पैन कार्ड, वोटर आईडी या बर्थ सर्टिफिकेट ही मान्य होंगे. 1 अक्टूबर 2025 से अपडेट की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल हो जाएगी. इसका मतलब है कि आप UIDAI की वेबसाइट (uidai.gov.in) या mAadhaar ऐप पर रिक्वेस्ट सबमिट करके नजदीकी आधार केंद्र पर अपने डॉक्यूमेंट्स वेरिफाई करा सकते हैं. इसके बाद अपडेट ऑनलाइन ही हो जाएगा. ये सभी बदलाव लोगों को आधार अपडेट कराने में सहूलियत देने और कार्ड की जानकारी को और सुरक्षित बनाने के लिए किए जा रहे हैं.

ऑटो सेक्टर में मंदी के बीच पाकिस्तान ने खोला सेकेंड हैंड गाड़ियों का रास्ता, कई कंपनियां कर रहीं पलायन

नई दिल्ली पाकिस्तान की माली हालत खराब है. विदेशी कर्ज़ का बोझ बढ़ा हुआ है, डॉलर की तंगी है और दूसरी तरफ़ IMF की शर्तें सामने रखी हुई हैं. ऐसे में पाकिस्तान की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री भी इस समय गंभीर संकट से जूझ रही है. देश की माली स्थिति, IMF का दबाव और इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने एक ऐसा फ़ैसला लिया है, जिसने पाक ऑटो इंडस्ट्री को चुनौतीपूर्ण स्थिति में ला दिया है.  हाल ही में हुए इकोनॉमिक कोऑर्डिनेशन कमेटी (ECC) ने पुरानी यानी सेकेंड हैंड (Used Cars) गाड़ियों के आयात को मंजूरी दे दी है. सरकार इसे सुधार और आज़ादी की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन कार मैन्युफैक्चरर्स और ऑटो पार्ट्स मेकर्स कह रहे हैं कि यह फ़ैसला उनकी जड़ों को खोद देगा. वहीं, पाकिस्तान ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (PAMA) ने चेतावनी दी है कि देश की पिछड़ी और शोषणकारी नीतियों के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है और कुछ अन्य दिग्गज कंपनियाँ बाज़ार छोड़ सकती हैं. पाकिस्तान सरकार का फैसला वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब की अध्यक्षता में ने न्यूयॉर्क से होने वाली वर्चुअली ECC की बैठक में तय हुआ कि, पहले चरण में सिर्फ़ 5 साल तक की पुरानी गाड़ियाँ आगामी 30 जून 2026 तक आयात की जा सकेंगी. इस पर 40 फ़ीसदी रेगुलेटरी ड्यूटी भी लगेगी, जो हर साल 10-10 प्वाइंट घटती जाएगी और 2029-30 तक ख़त्म हो जाएगी. बाद में पुरानी गाड़ियों पर उम्र की कोई पाबंदी नहीं रहेगी. ऑटो इंडस्ट्री की चिंता अरब न्यूज में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, टोयोटा, होंडा, सुज़ुकी, हुंडई और किआ जैसे बड़े ब्रांड्स का कहना है कि ये फ़ैसला उनकी मैन्युफैक्चरिंग को चौपट कर देगा. पाकिस्तान ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (PAMA) के डायरेक्टर जनरल अब्दुल वहीद खान ने साफ कहा “40 फ़ीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाकर भी मार्केट पुरानी यानी यूज्ड कारों से भर जाएगा और लोकल मैन्युफैक्चरिंग तबाह हो जाएगी.” इसी तरह पाकिस्तान ऑटोमोबाइल पार्ट्स एंड एक्सेसरीज़ मैन्युफैक्चरर्स (PAAPAM) ने भी चिंता जताई है. संगठन के वाइस चेयरमैन शेहरयार क़ादिर ने मीडिया से कहा कि, इससे 1,200 लोकल कंपनियाँ बंद होने के कगार पर पहुँच जाएँगी, जो स्टील, प्लास्टिक, रबर, कॉपर और एल्युमिनियम जैसी पार्ट्स सप्लाई करती हैं. उनके मुताबिक़ 18 लाख से ज़्यादा लोगों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा. IMF का दबाव और डॉलर की तंगी यह फ़ैसला IMF मिशन के पाकिस्तान पहुँचने से ठीक पहले लिया गया है. IMF ने अपने 7 अरब डॉलर के लोन प्रोग्राम के तहत पाकिस्तान से व्यापार को खोलने और यूज्ड गाड़ियों पर रोक हटाने की शर्त रखी थी. विश्लेषकों का मानना है कि सेकेंड हैंड गाड़ियों का आयात पाकिस्तान के पहले से ही कमज़ोर विदेशी मुद्रा भंडार (जो अभी महज़ 14 अरब डॉलर है) पर और बोझ डालेगा. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टॉपलाइन सिक्योरिटीज़ के विश्लेषक शंकर तलरेजा के अनुसार, पहले छोटे हैचबैक मॉडल्स की आयात ही ज़्यादा होती थी, लेकिन अब रेगुलेटरी ड्यूटी में साल-दर-साल कमी के साथ मिड-एंड कार्स का आयात भी बढ़ सकता है. लोकल इंडस्ट्री के लिए चुनौती कार निर्माताओं का कहना है कि यह क़दम उनके लिए सीधे घाटे का सौदा है. जैसा कि PAMA के वहीद खान ने कहा “एक गाड़ी का आयात मतलब प्रोडक्शन लाइन पर एक गाड़ी का नुकसान. आयातित गाड़ियाँ और लोकल गाड़ियाँ, दोनों एक-दूसरे की सीधी प्रतिद्वंद्वी हैं.” निचोड़ यह है कि पाकिस्तान की सरकार IMF की शर्तें पूरी करने के लिए लोकल इंडस्ट्री को बलि का बकरा बना रही है. लेकिन सवाल यही है कि इससे पाकिस्तानी कार इंडस्ट्री बचेगी कैसे, और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का क्या होगा? पाकिस्तान छोड़ भाग रही हैं कंपनियां: PAMA की चेतावनी हाल ही में जापानी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी यामाहा ने पाकिस्तान में अपने ऑपरेशन बंद करने का ऐलान किया था. अब पाकिस्तान ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि देश में “पिछड़े और शोषणकारी” नीतियों के चलते कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ पाकिस्तान छोड़ सकती हैं.  पाकिस्तान टुड में छपी एक रिपोर्ट में एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अब्दुल वहीद खान के हवाले से कहा गया है कि, पाकिस्तान में ऑटो सेक्टर में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) बेहद कम रहा है, और शेल, उबर, केरीम, माइक्रोसॉफ्ट और टेलिनोर जैसी बड़ी कंपनियाँ पहले ही पाकिस्तान का बाज़ार छोड़ चुकी हैं. यामाहा की हाल ही में पाकिस्तान से निकासी पर चर्चा करते हुए खान ने स्थानीय मीडिया को दिए अपने बयान में बताया कि, कंपनी का यह निर्णय उस नीति के कारण हुआ, जिसमें ऑटो निर्माताओं को कच्चे माल और कंपोनेंट के आयात के लिए अनिवार्य इंपोर्ट टार्गेट पूरे करने होते थे. खान ने इस नीति की आलोचना करते हुए कहा कि यह देश की वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों से पूरी तरह कट चुकी है और संघर्ष कर रहे ऑटो सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है. यामाहा ने 2015 में पाकिस्तान में 100 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ वापसी की थी. कंपनी ने तकरीबन एक दशक पर पाकिस्तान में अपने वाहनों की असेंबलिंग और बिक्री की और तमाम रोजगार पैदा किए. लेकिन अब यामाहा ने बाजार छोड़ दिया है. बता दें कि, यामाहा दूसरी जापानी कंपनी होंडा के अलावा, पाकिस्तान में इंजन उत्पादन का लोकलाइजेशन करने वाली एकमात्र कंपनी थी.