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16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध, Meta, Snap और TikTok बोले- नकारात्मक असर होगा

सिडनी  ऑस्ट्रेलिया सरकार ने एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लिया है- अब 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. यह नया कानून 10 दिसंबर से लागू होगा, और इसके तहत Meta (Facebook और Instagram), TikTok और Snap जैसी कंपनियों को नाबालिग यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटाना होगा. अगर कोई कंपनी ऐसा करने में असफल रहती है तो उसे 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर (करीब ₹270 करोड़) तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. नए नियमों के तहत क्या करना होगा कंपनियों को ऑस्ट्रेलिया के इस नए कानून के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे उनके प्लेटफॉर्म पर अकाउंट न बना सकें. इसके लिए उन्हें “reasonable steps” यानी तकनीकी और व्यवहारिक उपाय अपनाने होंगे ताकि बच्चों की ऑनलाइन मौजूदगी को रोका जा सके. इस कानून का मकसद बच्चों को हानिकारक कंटेंट, साइबरबुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर से बचाना है. कंपनियां मान गईं, लेकिन बोलीं – यह समाधान नहीं Meta, TikTok और Snap ने कहा कि वे इस कानून का पालन तो करेंगी, लेकिन यह बच्चों की सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका नहीं है. कंपनियों का कहना है कि अगर बच्चों को सोशल मीडिया से पूरी तरह हटा दिया गया, तो वे अनसेफ या अनरेगुलेटेड वेबसाइट्स पर चले जाएंगे, जहां निगरानी और भी मुश्किल है. Snap की ग्लोबल पॉलिसी हेड Jennifer Stout ने कहा- “हम सहमत नहीं हैं, लेकिन कानून का पालन करेंगे.” वहीं TikTok की ऑस्ट्रेलिया की पब्लिक पॉलिसी हेड Ella Woods-Joyce ने कहा कि वे “कंप्लायंस के लिए तैयार हैं.” Meta और TikTok के पास कितने नाबालिग यूजर्स Meta (जो Facebook और Instagram की पेरेंट कंपनी है) ने बताया कि वह लगभग 4.5 लाख नाबालिग यूजर्स से संपर्क करेगी और उन्हें दो विकल्प देगी- या तो वे अपना डेटा डिलीट करें, या फिर उसे तब तक स्टोर रखें जब तक वे 16 साल के नहीं हो जाते. TikTok का कहना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर करीब 2 लाख नाबालिग यूजर्स हैं, जबकि Snap (Snapchat की कंपनी) ने कहा कि उनके पास करीब 4.4 लाख यूजर्स इस उम्र समूह में आते हैं. AI से पकड़े जाएंगे फर्जी उम्र वाले अकाउंट कंपनियां अब AI और एडवांस्ड डिटेक्शन टूल्स का इस्तेमाल करेंगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से अकाउंट्स वयस्क होने का झूठा दावा कर रहे हैं लेकिन असल में बच्चे चला रहे हैं. Snap ने बताया कि वे एक अपील सिस्टम भी तैयार कर रहे हैं, जिसमें अगर किसी यूजर का अकाउंट गलती से फ्लैग हो जाए, तो वह अपनी उम्र साबित कर सके. सरकार का तर्क– बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि यह कानून बच्चों को हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट और साइबरबुलिंग से बचाने के लिए लाया गया है. सरकार का दावा है कि आजकल सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने यह चिंता जताई है कि यह कानून उन बच्चों को अलग-थलग कर सकता है जो बीमारी या आइसोलेशन में हैं और सोशल मीडिया के जरिए ही बाहरी दुनिया से जुड़े रहते हैं. दुनिया देख रही है ऑस्ट्रेलिया का फैसला ऑस्ट्रेलिया का यह कदम अब दुनियाभर के देशों के लिए एक उदाहरण बन सकता है. कई सरकारें पहले से ही बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए नए कानूनों पर काम कर रही हैं. Meta, TikTok और Snap ने कहा कि वे इस कानून का पालन तो करेंगे, लेकिन सरकारों को चाहिए कि वे बच्चों के लिए संतुलित और शिक्षाप्रद डिजिटल माहौल बनाएं- न कि सिर्फ़ बैन लगाएं. 

इंदौर के अंदाज में देपालपुर में बनेगा नया स्वच्छता पार्क, 39 लाख की परियोजना

देपालपुर  देपालपुर को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने एक नई पहल की है। जिस तरह इंदौर के देवगुराड़िया स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड पर उद्यान तैयार किया गया है, उसी तर्ज पर अब देपालपुर के ट्रेंचिंग ग्राउंड पर भी 39 लाख रुपए की लागत से “स्वच्छता पार्क” विकसित किया जाएगा। इस पार्क में एमआरएफ प्लांट, कम्पोस्ट यूनिट, एफएसटीपी प्लांट स्थापित किए जाएंगे और पुराने कचरे का निपटान बायोरेमीडिएशन तकनीक से किया जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्र का सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा ताकि यह क्षेत्र स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बन सके। निरीक्षण में मिली कई खामियां, आयुक्त ने दिए सुधार के निर्देश हाल ही में निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ई-बस से देपालपुर पहुंची और वहां की सफाई व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आयुक्त के साथ अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, कार्यपालन यंत्री अश्विनी जनवदे, मनीष पांडे, सौरभ माहेश्वरी, श्रद्धा तोमर, अंकुश जैन, अमित दुबे और एनजीओ प्रतिनिधि मौजूद रहे। टीम ने पाया कि देपालपुर में 300 से अधिक आवारा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बाजार और घरों से कचरे का सही से पृथक्करण नहीं किया जा रहा है। इस पर आयुक्त यादव ने स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को कचरा सेग्रीगेशन और शुल्क वसूली बढ़ाने की दिशा में जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वॉटर प्लस और थ्री स्टार रेटिंग के साथ सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए जनप्रतिनिधियों का सहयोग जरूरी है। स्वच्छता पार्क का लेआउट हुआ फाइनल, जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य देपालपुर के ट्रेंचिंग ग्राउंड पर बनने वाले स्वच्छता पार्क के लिए लेआउट भी फाइनल कर दिया गया है। आयुक्त ने बताया कि कचरा संग्रहण वाहनों में विभाजन (पार्टिशन) करवाया जाएगा ताकि गीले और सूखे कचरे का अलग-अलग निपटान किया जा सके। जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा और देपालपुर की स्वच्छता व्यवस्था को इंदौर की तरह सुदृढ़ किया जाएगा। इस पहल से न केवल सफाई व्यवस्था में सुधार होगा बल्कि क्षेत्र का पर्यावरण भी बेहतर बनेगा। जनप्रतिनिधियों ने जताया आभार, सीवरेज प्लांट होगा पुनः संचालित देपालपुर के जनप्रतिनिधियों ने इंदौर नगर निगम का धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि इंदौर की तर्ज पर अब देपालपुर को भी नंबर वन बनाने का जो संकल्प लिया गया है, वह सराहनीय कदम है। देपालपुर में कुल 15 वार्ड और चार जोन हैं। निरीक्षण के दौरान सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद मिला, जिसे शीघ्र चालू कराया जाएगा। अगले तीन सप्ताह के भीतर इंदौर निगम की टीम यहां मैदानी कार्य शुरू कर देगी। इसके अलावा स्वच्छता पार्क के विकास के लिए सीएसआर फंड से भी आर्थिक सहयोग लिया जाएगा। टीम ने गलियों में कचरा, जाम नालियां और डस्टबिनों में मिक्स कचरा मिलने पर सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।  

तीन बार फोल्ड होने वाला सैमसंग फोन लॉन्चिंग के लिए तैयार, देखें अनोखी डिजाइन

मुंबई  Samsung के ट्राई फोल्ड फोन का इंतजार सभी को है. कंपनी लंबे समय से अपने फोल्डेबल फोन्स को लॉन्च कर रही है, लेकिन अब बारी ट्राई फोल्ड फोन की है. ब्रांड Samsung Galaxy Z TriFold को अगले साल लॉन्च कर सकता है. लॉन्च से पहले इस फोन की एक झलक सामने आई है.  ये ब्रांड का अब तक का सबसे बड़ा फोन होगा, जो ओपन होने पर किसी टैबलेट की तरह बन जाएगा. वैसे ऐसा ही एक फोन चीनी स्मार्टफोन ब्रांड Huawei लॉन्च कर चुका है. अब सैमसंग भी इस सेगमेंट में एंट्री करते हुए अपना पहला ट्राई फोल्ड फोन लॉन्च कर सकती है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स. एक इवेंट में दिखा फोन  K-Tech शोकेस के दौरान साउथ कोरियन कंपनी ने अपने पहले ट्राई फोल्डिंग फोन की झलक दिखाई है. हालांकि, किसी को भी इस स्मार्टफोन को छूने की इजाजत नहीं दी गई. ये स्मार्टफोन एक ग्लास के केस में पैक्ड था, जिसे सिर्फ देखा जा सकता था. हालांकि, अभी तक कंपनी ने इस संबंध में कोई टीजर वीडियो या फोटो जारी नहीं किया है.  संभवतः ब्रांड सब कुछ रिवील करने में जल्दबाजी नहीं करना चाहता है. कंपनी ने तीन यूनिट्स को शोकेस में दिखाया है, जिसमें एक पूरी तरह से फोल्ड, दूसरा आधा फोल्ड और तीसरी पूरी तरह से खुली हुई है. पूरी तरह से फोल्ड होने के बाद ये Galaxy Z Fold 7 जैसा ही दिखता है.  क्या होंगे फीचर्स? इसमें डुअल हिंज मिलेगा, जिसकी वजह से फोल्ड थोड़ा भारी होगा. अब तक सामने आई डिटेल्स के मुताबिक स्मार्टफोन में 6.49-inch की कवर स्क्रीन मिलेगी. वहीं अनफोल्ड होने पर ये डिवाइस 9.96-inch का हो जाएगा. इसमें Snapdragon 8 Elite मिलेगा, जो गैलेक्सी डिवाइसेस के लिए टेलर्ड होगा.  इसमें NFC का सपोर्ट मिलेगा. फोन वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा. रिपोर्ट्स की मानें, तो सैमसंग सिर्फ 50 हजार यूनिट्स ही तैयार करेगी. संभव है कि पिछले साल कंपनी इस फोन को लॉन्च करेगी. हमें इसके फीचर्स की ज्यादा बेहतर जानकारी आने वाले समय में मिलेगी. उम्मीद है कि कैमरा और बैटरी का जानकारी भी जल्द ही सामने आएगी.

29 अक्टूबर को सरकारी स्कूलों के 6 लाख विद्यार्थियों का क्षमता-आधारित मूल्यांकन

सरकारी स्कूलों के 6 लाख विद्यार्थियों का 29 अक्टूबर को होगा क्षमता-आधारित बेसलाइन आकलन परीक्षण होगा शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार में उपयोगी भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 29 अक्टूबर बुधवार को प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के छह लाख से अधिक विद्यार्थियों का बेसलाइन आकलन (बेंचमार्क परीक्षण) किया जा रहा है। यह आकलन कोई सामान्य परीक्षा नहीं, बल्कि एक क्षमता-आधारित (कॉम्पिटेंसी बेस्ड) मूल्यांकन है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों का रटे हुए तथ्यों के आधार पर नहीं, बल्कि विषयों की मूल अवधारणाओं की समझ और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग करने की क्षमता के आधार पर आकलन करना है। इस पूरी प्रक्रिया को एक तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) द्वारा संपन्न कराया जा रहा है, जिससे मूल्यांकन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सकेगी। इस आकलन के लिए लोक शिक्षण संचालनालय को केन्द्र सरकार की कंपनी 'EdCIL India का सहयोग प्राप्त होगा। इस बेसलाइन आकलन का प्रमुख उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी की वर्तमान शैक्षणिक स्थिति और उनकी सीखने की कमजोरियों या अंतरालों (लर्निंग गैप) का पता लगाना है। इस आकलन से यह जानने का प्रयास होगा कि विद्यार्थी वास्तव में कितना सीख और समझ पाया है। इस आकलन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आकलन के परिणामों के आधार पर विद्यार्थियों को उनकी कमजोरियों को दूर करने के लिए विशेष उपचारात्मक (रेमेडी) शिक्षण सामग्री और सहायता भी प्रदान की जाएगी। इससे शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया में सुधार होगा और हर बच्चे को उसकी जरूरत के अनुसार शैक्षणिक सहायता मिल सकेगी। लोक शिक्षण संचालनालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह आकलन हमारे लिए एक डाटा-आधारित नीति निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि हमारे शिक्षण कार्यक्रमों में कहाँ सुधार की आवश्यकता है ताकि हमारे सभी विद्यार्थी न केवल परीक्षाओं में बल्कि जीवन में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें। यह आकलन ईक्विप-लेप योजना के अंतर्गत किया जा रहा है इससे प्रदेश के शैक्षिक परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है।  

विदेश में काम दिलाने के नाम पर सौदा! 3500 डॉलर में बेचे जा रहे आगरा के युवा

आगरा  उत्तर प्रदेश की ताजनगरी से बड़ा ही अजब-गजब मामला सामने आया है. आगरा की पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. यहां उन्नाव और इंदौर के रहने वाले दो लड़कों को गिरफ्तार किया है. ये लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देते थे. जब युवा उनकी बातों में आ जाते तो उन्हें कंबोडिया और थाईलैंड में 3500 डॉलर के हिसाब से बेच देते थे. इसके बाद दूसरे देशों में बैठे इनके आका खरीदे गए युवाओं को साइबर ठगी की ट्रेनिंग देकर उनको अपने गैंग में शामिल करते थे. एडीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि युवाओं के लापता होने की लगातार जानकारी मिल रही थी. इस पर साइबर क्राइम, साइबर सेल और साइबर इंटेलिजेंस की टीम जांच पड़ताल में जुट गई थी. जांच के दौरान टीम ने उन्नाव के रहने वाले आतिफ खान और इंदौर के रहने वाले अजय कुमार शुक्ला को गिरफ्तार किया. जब इनसे कड़ाई से पूछताछ की तो जो सच पता चला उसे सुनकर पुलिस भी दंग रह गई. इन शातिरों ने पुलिस को बताया कि यह लोग देश के अलग अलग हिस्सों से बेरोजगार युवाओं को खोजते थे. फिर विदेश में नौकरी लगवाने का झांसा देकर उनको कंबोडिया और थाईलैंड में बेच देते थे. इसके बदले में इन शातिरों को प्रति युवा के बदले 3500 डॉलर दिए जाते थे. विदेश में बैठे इनके आका खरीदे गए युवाओं को साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट समेत डिजिटल तरीकों की ट्रेनिंग देते थे. फिर ट्रेनिंग के बाद इन युवाओं को साइबर ठगी के गैंग में शामिल किया जाता था. अभी तक यह शातिर लगभग 50 से ज्यादा युवाओं को कंबोडिया और थाईलैंड में बेच चुके है. अब पुलिस इनके अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है.  

2011 से 2026 तक देश की जनसंख्या में बड़ा बदलाव, छोटे बच्चों का प्रतिशत गिरा

नई दिल्ली देश में जनसांख्यिकी ढांचा में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट सामने आई है। इसके अनुसार, 2011-2026 के बीच देश में बच्चों और किशोरों (0-19 साल) की आबादी में 9 फीसदी का गिरावट आने का अनुमान है। देश में वर्ष 2011 में 0-19 साल की आबादी करीब 41%, थी, जो 2026 में महज 32 फीसदी पर सिमट जाएगी। मंत्रालय की रिपोर्ट भारत में बच्चों की आबादी में यह दावा किया गया है। एक अनुमान के अनुसार, इस आयु वर्ग में करीब 125 करोड़ लोग कम होने का अनुमान है रिपोर्ट में 0-19 साल की आबादी को चार वर्गों में बांटा ने गया है। यदि 2011 की बात करें तो 0-4 साल के औयु वर्ग की आबादी 9.9 फीसदी थी जो 2026 में 7.6 फीसदी रह जाएगी। 5-9 साल आयुवर्ग की आबादी 10.4 से घटकर7.9% रह जाएगी। तीसरे समूह 10-14 आयु वर्ग में आबादी का प्रतिशत 10.6 से घटकर 8.2 रह जाएगी।15-19 साल के आयु वर्ग की आबादी 10.1 से घटकर 8.2 फीसदी रह जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में परिवार नियोजन की सुविधाओं में सुधार होने के कारण पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रजनन दर घट रही है, जिसका असर आबादी के ढांचे पर दिखना शुरू हो गया है। 0-4 साल के आयु वर्ग की आबादी 9.9 फीसदी रही साल की आबादी को चार वर्गों में बांट गया है। यदि 2011 की बात करें तो 0-4 साल के आयु वर्ग की आबादी 9.9 फीसदी थी जो 2026 में 7.6 फीसदी रह जाएगी। 5-9 साल आयु वर्ग की आबादी 10.4 से घटकर 7.9% रह जाएगी। तीसरे समूह 10-14 आयु वर्ग में आबादी का प्रतिशत 10.6 से घटकर 8.2 रह जाएगी। 15-19 साल के आयु वर्ग की आबादी 10.1 से घटकर 8.2 फीसदी रह जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में परिवार नियोजन की सुविधाओं में सुधार होने के कारण पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रजनन दर घट रही है, जिसका असर आबादी के ढांचे पर अब दिखना शुरू हो गया है।

पहली बार मैपकॉस्ट विशेष भूमिका में, ड्रोन-शो होगा अब तक का विशाल विजुअल सेलेब्रेशन

बहुआयामी होगा प्रदेश का 70वां स्थापना दिवस समारोह पहली बार मैपकॉस्ट विशेष भूमिका में, ड्रोन-शो होगा अब तक का विशाल विजुअल सेलेब्रेशन मुख्यमंत्री डॉ. यादव अक्टूबर माह में 4 बार कर चुके हैं समारोह के स्वरूप की समीक्षा भोपाल प्रदेश का 70वां स्थापना दिवस समारोह बहुआयामी होगा। राज्य स्तरीय कार्यक्रम भव्य और दिव्य रूप में मनाया जाएगा। आगामी एक से तीन नवम्बर तक भोपाल स्थित लाल परेड ग्राउंड में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान बहुरंगी शिल्प मेला, सुगम संगीत, नाटक, जनजातीय लोक नृत्य, ड्रोन शो आदि होंगे। समारोह में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकॉस्ट) पहलीबार तकनीकी मार्गदर्शन देकर विशेष भूमिका में सामने आ रहा है। भोपाल के आकाश पर सबसे विशाल विजुअल सेलेब्रेशन पहलीबार दिखाई देगा। मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक विरासत, स्थापत्य कला, पयर्टन महत्व और जनजातीय सभ्यता को इस ड्रोन-शो में देखा जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थापना दिवस समारोह के स्वरूप पर इस माह चार बार बैठकों में समीक्षा की है। गहन मंथन और चिंतन के बाद समारोह को मनोरंजन के साथ सार्थक संदेश देने का आयोजन बनाने के उद्देश्य से रचना की गई है। समारोह की थीम 'उद्योग और रोज़गार वर्ष 2025' के अनुरूप प्रदेश में हुए नवाचारों और विकास के विशेष प्रयासों पर केन्द्रित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर स्थापना दिवस समारोह की गतिविधियों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के हितग्राहियों को भी शामिल किया गया है। जिलों में हो रहे कार्यक्रम भी उद्योग और रोज़गार की थीम के अनुरूप होंगे। प्रमुख उद्योगपतियों और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले व्यक्तियों और समूहों की उपलब्धियों को भी शामिल किया जा रहा है। प्रदेश के सभी अंचलों में समान रूप से गतिविधियां होंगी। जिलों की प्रगति और उपलब्धियों को जिला स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। स्व-सहायता समूह और आईटीआई, पॉलिटेक्निक सहित अन्य संस्थाओं द्वारा युवाओं, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों, कृषक संगठनों द्वारा किसान कल्याण के लिए संचालित गतिविधियों के प्रदर्शन भी समारोह का हिस्सा होंगे। विरासत से विकास प्रदशर्नी स्थापना दिवस पर जननायकों के जीवन और अवदान पर भोपाल और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही 'एक जिला-एक उत्पाद', सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या के सील और सिक्के, मंदिर स्थापत्य तथा भारतीय ऋषि परम्परा पर प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा। इसी क्रम में एक से 3 नवम्बर तक वन मेला, ड्रोन टैक वर्कशॉप और एक्सपो, मध्यप्रदेश की पारंपरिक कला प्रदर्शनी, प्रदेश में विरासत से विकास, प्रदेश की बावड़ियों, भोज और भोपाल आदि विषय पर प्रदर्शनी और देशज व्यंजनों का मेला भी आयोजित किया जाएगा। पार्श्व गायक  जुबिन नौटियाल एक नवम्बर को देंगे प्रस्तुति मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के कार्यक्रम अभ्युदय मध्यप्रदेश के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में एक नवम्बर को भोपाल में प्रसिद्ध पार्श्व गायक  जुबिन नौटियाल प्रस्तुति देंगे। लाल परेड ग्राउंड में होने वाले इस कार्यक्रम में कृष्ण के भक्ति पदों की प्रस्तुति के साथ ही विरासत से विकास की थीम पर ड्रोन-शो होगा। साथ ही आतिशबाजी भी होगी। दो और तीन नवंबर को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महानाट्य-सम्राट विक्रमादित्य की प्रस्तुति होगी। दो एवं तीन नवम्बर को सुगम संगीत की प्रस्तुतियां भी होंगी। औद्योगिक विकास की उपलब्धियां होगी प्रदर्शित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आत्मनिर्भर भारत और आत्म निर्भर मध्यप्रदेश के लिए हुए नवाचारों, विकास के विशेष प्रयासों और जनकल्याणकारी गतिविधियों के प्रस्तुतिकरण के निर्देश दिए हैं। इसके परिपालन में "रोज़गार के मंदिर हैं उद्योग'' थीम पर स्थापना दिवस समारोह में विविधगतिविधियाँ हो रही हैं। कार्यक्रम में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के हितग्राहियों को भी शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा जिलों में प्रमुख उद्योगपतियों और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले व्यक्तियों और समूहों की उपलब्धियों को भी शामिल किया जाएगा। प्रदेश के सभी अंचलों में समान रूप से गतिविधियां होंगी। स्व-सहायता समूह और आईटीआई, पॉलिटेक्निक सहित अन्य संस्थाएँ युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों को प्रदर्शित करेंगी। कृषक संगठन भी किसान कल्याण की गतिविधियों का प्रदर्शन समारोह का हिस्सा बना रहे हैं। कुल मिलाकर इस वर्ष प्रदेश के स्थापना दिवस समारोह को नया स्वरूप प्रदान किया गया है।

नई योजना: मध्यप्रदेश के 5 जिलों को जोड़कर बनेगा मेट्रोपॉलिटन रीजन

भोपाल  मेट्रोपॉलिटन रीजन का खाता 200 करोड़ रुपए से खुलेगा। भोपाल और आसपास के पांच जिलों को मिलाकर प्राधिकरण तय किया जा रहा है। रीजन के तहत करीब 10 हजार करोड़ रुपए के काम प्रस्तावित है। इसमें संबंधित जिलों के मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल क्षेत्रों तक एप्रोच तैयार करने से लेकर पब्लिक यूटिलिटी विकसित करने सहित अन्य काम पूरे किए जाएंगे। गौरतलब है कि भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की प्लानिंग भोपाल विकास योजना से तैयार कराई जा रही है। शासन स्तर से इस पर प्राधिकरण को मार्ग दर्शन दिया जा रहा है। बीएमआर के लिए शासन से नियम सितंबर 2025 तक ही जारी हो गए थे। अब बजट समेत डिटेल प्लान तय किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में काम शुरू हो पाएगा। अभी बीडीए प्लान के लिए एजेंसी तय करने में लगा है। इससे पहले बीएमआर का सेटअप तय होगा। बीएमआर में मौजूदा मास्टर प्लान -बीएमआर के लिए तय नियमों में स्पष्ट किया है कि भोपाल, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सीहोर जिलों के मौजूदा मास्टर प्लान बीएमआर में मर्ज हो जाएंगे। यानी इनके प्रावधानों को ही लागू किया जाएगा। बीएमआर का प्लान बनेगा तो ये रहेंगे। -पांच जिलों को मिलाकर एक महानगर पालिका पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित होगा। यानी पूरी बस सेवाएं एक कंपनी, एक एजेंसी में आ जाएगी। भोपाल की बीसीएलएल जैसी कंपनी इसमें मिला दी जाएगी। -भोपाल नगर निगम, जिला पंचायत समेत संबंधित जिलों के नगरीय निकायों को भी बीएमआर में मिला दिया जाएगा। मौजूदा पार्षदों के बहुमत के आधार पर सदन जैसी कार्रवाई तय होगी। बीएमआर के लिए बजट समेत तमाम बातें तय हो रही है। शासन की एसओपी में ही शुरुआती बजट 200 करोड़ रुपए तय है। स्थापना के लिए इसका उपयोग होगा। तय नियमों के अनुसार प्लान बनवाया जा रहा है। तय समय में ये तैयार होगा। – संजीव सिंह, संभागायुक्त व अध्यक्ष बीडीए

चार्जिंग की चिंता खत्म: इलेक्ट्रिक कार अब चलते-चलते होगी चार्ज

पेरिस कल्पना कीजिए, आपकी इलेक्ट्रिक कार तेज रफ्तार में हाईवे पर दौड़ रही है और बिना रुके उसकी बैटरी अपने आप चार्ज हो रही है. न कोई केबल, न कोई चार्जिंग स्टेशन, न इंतज़ार. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि फ्रांस की धरती पर हकीकत बन चुका है. दुनिया का पहला ऐसा मोटरवे अब फ्रांस में चालू हो गया है, जो चलते हुए वाहनों को वायरलेस तरीके से चार्ज करता है. यह प्रयोग न सिर्फ तकनीकी रूप से क्रांतिकारी है, बल्कि यह भविष्य की सड़कों का खाका भी पेश करता है. जहां सड़कें खुद सोर्स ऑप एनर्जी (ऊर्जा का स्रोत) की तरह काम करेंगी. फ्रांस ने सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है. फ्रांस ने दुनिया का पहला ऐसा मोटरवे शुरू किया है, जिसमें डायनामिक वायरलेस चार्जिंग सिस्टम लगाया गया है. यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों को चलते-चलते चार्ज करने की सुविधा देती है, यानी अब कार या ट्रक को चार्जिंग स्टेशन पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कहां और कैसे शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट पेरिस से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित A10 मोटरवे पर इस अनोखे प्रयोग की शुरुआत हुई है. विंसी ऑटोरूट्स (VINCI Autoroutes) के नेतृत्व में इलेक्ट्रिऑन, विंसी कंस्ट्रक्शन, गुस्टाव आइफ़ेल यूनिवर्सिटी और हचिन्सन जैसी संस्थाओं ने मिलकर “चार्ज ऐज यू ड्राइव” नामक इस प्रोजेक्ट को तैयार किया है. यह पहल अब लैब टेस्टिंग से आगे बढ़कर रियल टाइम ट्रैफिक सिचुएशन तक पहुंच गया है. करीब 1.5 किलोमीटर लंबे इस हाइवे सेक्शन में सड़क के अंदर कॉइल्स (Coils) को एम्बेड किया गया है. इन कॉइल्स से होकर गुजरने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों, जैसे ट्रक, बस, पैसेंजर कार और यूटिलिटी व्हीकल को चलते समय ही बिजली मिलेगी. शुरुआती परीक्षणों में यह तकनीक बेहद सफल साबित हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम ने 300 किलोवॉट से अधिक की पीक पावर और औसतन 200 किलोवॉट की एनर्जी ट्रांसफर की क्षमता दिखाई है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट विंसी ऑटोरूट्स के सीईओ निकोलस नॉटेबेयर के अनुसार, “अगर यह तकनीक फ्रांस के मेन रोड नेटवर्क पर चार्जिंग स्टेशनों के साथ लागू होती है, तो भारी वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन की स्पीड कई गुना बढ़ेगी. इससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी बड़ी कमी आएगी.” Electreon के सीईओ ओरेन एज़र ने इसे “इलेक्ट्रिक रोड टेक्नोलॉजी के इतिहास का निर्णायक मोड़” बताया और कहा कि “दुनिया में अभी कोई भी तकनीक इतनी सस्टेनेबलिटी और पावर के साथ डायनामिक चार्जिंग नहीं दे सकती.” कैसे काम करती है यह तकनीक इस डायनामिक इंडक्शन चार्जिंग में सड़क की सतह के नीचे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कॉइल्स लगाए जाते हैं. जब कोई इलेक्ट्रिक वाहन इन कॉइल्स के ऊपर से गुजरता है, तो मैग्नेटिक फील्ड के माध्यम से बिजली वाहन में लगे रिसीवर तक पहुंचती है. यह एनर्जी या तो सीधे मोटर को चलाती है या फिर बैटरी में स्टोर हो जाती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि वाहन को चार्जिंग के लिए रुकना नहीं पड़ता. वह लगातार चलता रहता है और यात्रा के दौरान ही चार्ज होता जाता है. इससे न केवल वाहनों का डाउनटाइम घटता है, बल्कि छोटी और हल्की बैटरियों का इस्तेमाल भी संभव हो पाता है. ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए इसका मतलब है – ज्यादा लोड कैपेसिटी, कम बैटरी लागत और संसाधनों की बचत. इस सिस्टम में ज्यादा सटीक तकनीकी तालमेल जरूरी है. सड़क के नीचे लगे ट्रांसमिट कॉइल और वाहन में लगे रिसीवर कॉइल के बीच बिजली का आदान-प्रदान रियल टाइम में सेंसर और सॉफ्टवेयर के जरिए कंट्रोल होता है. अन्य देशों में भी प्रयोग फ्रांस का यह प्रयोग दुनिया में पहला है, जो मोटरवे पर लाइव ट्रैफिक में डायनामिक चार्जिंग का परीक्षण कर रहा है. लेकिन अन्य देश भी इस दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं. जर्मनी A6 मोटरवे पर इलेक्ट्रॉन की ही तकनीक से 1 किलोमीटर लंबा ट्रायल शुरू करने जा रहा है. इटली के लोम्बार्डी एरिया में “Arena del Futuro” प्रोजेक्ट ट्रकों और बसों के लिए इसी तरह के चार्जिंग सिस्टम का परीक्षण कर रहा है. स्वीडन, अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और इज़राइल भी अपने-अपने स्तर पर इस तकनीक को परख रहे हैं. ये सभी प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक रोड सिस्टम (ERS) की तकनीकी के स्टैंडर्ड, कॉस्टिंग और व्यवहार्यता तय करने में मदद करेंगे. क्या होंगे फायदे इलेक्ट्रिक रोड सिस्टम का ये प्रोजेक्ट कई मायनों में बेहद ही उपयोगी और लाभदायक साबित होगा, जैसे- इससे छोटी बैटरियों के इस्तेमाल से लिथियम और कोबाल्ट जैसे आयातित खनिजों पर निर्भरता घटेगी. भारी वाहनों को लगातार ऊर्जा मिलती रहेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इलेक्ट्रिफिकेशन की लागत कम होगी. EV के प्रयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने में मदद मिलेगी. आने वाले महीनों में यह पायलट प्रोजेक्ट सड़क की टिकाऊपन, पावर डिलीवरी, रखरखाव और वास्तविक लागत का डाटा एकत्र करेगा. यह 1.5 किलोमीटर का सेगमेंट सिर्फ शुरुआत है. अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो यही तकनीक भविष्य में फ्रांस, यूरोप और संभवतः पूरी दुनिया में हज़ारों किलोमीटर की सड़कों पर लागू हो सकती है. यानी फ्यूचर का रोडमैप तैयार है, जहां सड़कें सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा का स्रोत भी बनेंगी.

भारत की नई उड़ान: देसी सुखोई सुपरजेट एयरलाइन इंडस्ट्री में बढ़ाएगा रफ्तार

नई दिल्ली भारत ने विमानन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए रूस के साथ बड़ी डील की है. सरकारी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने  रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते के तहत HAL भारत में रूसी डिजाइन वाले पैसेंजर जेट ‘सुखोई सुपरजेट 100 (SJ-100)’ का निर्माण करेगी. यह समझौता भारत के लिए दशकों बाद पूरी तरह से नागरिक विमानों के निर्माण में उतरने की दिशा में पहला बड़ा कदम है. यह समझौता मॉस्को में हुआ, जिससे भारत को इस विमान को देश के अंदर ही असेंबल करने का अधिकार मिल गया है. यह कदम भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि यह देश की नागरिक विमान निर्माण क्षमता को दोबारा जिंदा की दिशा में पहला बड़ा प्रयास है. SJ-100 एक ट्विन-इंजन रीजनल जेट है, जो छोटी दूरी की उड़ानों के लिए उपयुक्त है. यह पहले से ही दुनिया की एक दर्जन से अधिक एयरलाइनों में चलाई जा रही है और इसके 200 से अधिक यूनिट बनाए जा चुके हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल बोइंग और एयरबस जैसे अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों के दबदबे वाले बाज़ार में प्रतिस्पर्धा पैदा कर सकती है. इसके अलावा, इस विमान को भारत सरकार की उड़ान (UDAN) योजना के तहत देश के कम जुड़ाव वाले क्षेत्रों को बेहतर हवाई कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए उपयोग किए जाने की संभावना है. यह सौदा भारत की आखिरी बड़ी नागरिक विमान परियोजना, यानी HAL AVRO HS-748 (1961 से 1988 तक निर्मित) की याद भी ताज़ा करता है. तब से अब तक भारत अपने व्यावसायिक बेड़े के लिए विदेशी आयात पर ही निर्भर रहा है. वर्तमान में भारत में संचालित ज्यादातर विमान Boeing 737 और Airbus A320 परिवार के हैं, जो वैश्विक बाजार का लगभग 90% हिस्सा नियंत्रित करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि HAL–UAC साझेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और नए रोजगार पैदा करना है. अनुमान है कि अगले एक दशक में भारत को 200 से अधिक रीजनल जेट विमानों की आवश्यकता होगी.