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रेलवे ब्रिज कंस्ट्रक्शन के दौरान बड़ा हादसा, धार जिले में क्रेन पलटने से दो मजदूरों की मौत

पीथमपुर धार में औद्योगिक क्षेत्र पिथमपुर के सागौर में रेलवे ब्रिज निर्माण के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. दरअसल, यहां रेलवे ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है. इसी दौरान ब्रिज निर्माण में लगी क्रेन पलटी खा गई और एक पिकअप वाहन पर जा गिरी. जिससे पिकअप में सवार दो लोगों की मौके पर मौत हो गई. पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने बताया कि जानकारी के अनुसार रेलवे निर्माण में लगी क्रेन अचानक पलटी खा गई और क्रेन रास्ते से गुजर रही पिकअप वाहन पर जा गिरी. इसमें दबकर दो लोगों की मौत हो गई.साथ ही क्रेन के नीचे अन्य लोगों के भी दबे होने की आशंका जताई जा रही है. घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन व बडी संख्या में पुलिस बल मौके पहुंची है और पिकअप में फंसे दोनों शवों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे है. बता दें कि कंस्ट्रक्शन साइट्स पर अक्सर मशीनों के चलते ऐसे बड़े हादसे हो जाते हैं. भारी भरकम मशीनों की जरा सी गलत हैंडलिंग का नतीजा हो जाता है कोई बड़ा हादसा जिसमें जनहानि भी हो जाती है.

गाड़ी पार्किंग की समस्या से छुटकारा: भोपाल में 18 माह में तैयार होगी नई हाइड्रोलिक पार्किंग

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में पहली हाइड्रोलिक पार्किंग बनने जा रही है। शहर के सबसे व्यस्त बाजारों में से एक बिट्टन मार्केट में अब पार्किंग की समस्या से जल्द ही निजात मिलने वाली है। नगर निगम यहां पीपीपी मॉडल पर एक अत्याधुनिक हाइड्रोलिक पार्किंग बनाने की तैयारी में है, जिसका अनुमानित प्रोजेक्ट मूल्य 15-20 करोड़ तक होगा। 15 हजार वर्ग मीटर में बनने वाली यह पार्किंग करीब रोज पहुंचने वाले 1.5 लाख ग्राहकों को परेशानियों से मुक्त करने का काम करेगी। यह पार्किंग सब्जी हाट क्षेत्र में विकसित की जाएगी। अभी है पार्किंग की समस्या बिट्टन मार्केट में सब्जी हाट, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी के लिए भी शहरभर से लोग आते हैं। सामान्य दिनों में भी यह क्षेत्र वाहनों की पार्किंग से अटा रहता है, जिससे यहां अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। यहां सप्ताह में तीन दिन सब्जी हाट लगता है, जिसमें भारी भीड़ होती है। लोगों को अक्सर अपने वाहन सड़क किनारे या दूर-दराज की कॉलोनियों में खड़े करने पड़ते हैं, जिससे चोरी और यातायात बाधित होने का खतरा बना रहता है। प्रोजेक्ट की समय-सीमा और तैयारी -ईओआई (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) जारी: अगले 15 दिन के भीतर। प्रारंभिक तौर पर दो कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है। -फाइनल प्रोपोजल: ईओआइ के बाद 50 दिन के भीतर तय होने की संभावना। -डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट): 100 दिन के अंदर बनकर तैयार होगा। -अनुमति के लिए मंत्रालय को रिपोर्ट: अगले 4 माह में भेजी जाएगी। -पार्किंग निर्माण: अधिकारियों का अनुमान है कि 18 माह में नई हाइड्रोलिक पार्किंग बनकर तैयार हो जाएगी। क्या होती है हाइड्रोलिक पार्किंग हाइड्रोलिक पार्किंग एक आधुनिक तकनीक है, जिसे मल्टी-लेवल कार पार्किंग सिस्टम भी कहा जाता है। इस तकनीक में हाइड्रोलिक लिफ्टों का इस्तेमाल करके वाहनों को एक के ऊपर एक या कम जगह में अधिक ऊंचाई पर पार्क किया जाता है। पारंपरिक पार्किंग की तुलना में कई गुना ज्यादा वाहन खड़ा करने की क्षमता रखती है। यह परियोजना न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। सकती है। संस्कृति जैन, आयुक्त, निगम

परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई: छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से बच्ची की मौत की आशंका

छिंदवाड़ा  छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप का संकट गहराता जा रहा है। बिछुआ में कफ सिरप के सेवन के बाद एक 5 महीने की बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने बच्ची को सिरप पिलाने के बाद उसकी जान जाने का आरोप लगाते हुए बिछुआ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। आयुर्वेदिक सिरप पर संदेह बच्ची का नाम रुही मिनोटे (पिता संदीप मिनोटे, निवासी बिछुआ वार्ड नंबर 12) बताया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के किसी निजी मेडिकल स्टोर से कफ सिरप खरीदकर बच्ची को पिलाया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस कफ सिरप पर संदेह है, वह आयुर्वेदिक है। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और संदेह के घेरे में आए सिरप का पंचनामा बनाने की कार्रवाई कर रही है। परिजन इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए बिछुआ थाने पहुंचे हैं। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।  

भारतीय नौसेना की अदम्य वीरता और सामुद्रिक क्षमता का जीवंत प्रतीक होगी यह परियोजना: मुख्यमंत्री

लखनऊ में शीघ्र तैयार होगा ‘नौसेना शौर्य संग्रहालय’ भारतीय नौसेना की अदम्य वीरता और सामुद्रिक क्षमता का जीवंत प्रतीक होगी यह परियोजना: मुख्यमंत्री भारत की समुद्री आत्मा और सभ्यता की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुँचाएगा यह संग्रहालय: मुख्यमंत्री जहाज के अमूर्त रूप में होगा संग्रहालय का स्वरूप, नौसैनिक वास्तुकला, समुद्री प्रतीकों और हरित निर्माण तकनीक से बनेगी विशिष्ट पहचान मुख्यमंत्री का निर्देश, संग्रहालय केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि ‘अनुभव का केंद्र’ बने, डिजिटल, इंटरएक्टिव और इमर्सिव तकनीकों से हो प्रस्तुति आईएनएस गोमती और ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ होंगे खास, फ्रिगेट, टीयू-142 विमान और सी किंग हेलीकॉप्टर होंगे मुख्य आकर्षण संग्रहालय परिसर में 7D थिएटर, एयरक्राफ्ट कैरियर लैंडिंग सिम्युलेटर, डिजिटल वाटर स्क्रीन शो और ‘ड्रेस लाइक योर हीरोज’ जैसी सहभागितापरक गतिविधियाँ होंगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित ‘नौसेना शौर्य संग्रहालय’ की प्रस्तुति का अवलोकन करते हुए इसके शीघ्र निर्माण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय भारतीय नौसेना की अदम्य शौर्यगाथाओं और हिन्द महासागर क्षेत्र में भारत की सामुद्रिक क्षमता का जीवंत प्रतीक बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समुद्र भारत की सभ्यता का मंथन स्थल रहा है, और भारतीय नौसेना उस गौरवशाली परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति है। लखनऊ का यह संग्रहालय उसी परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा। बैठक में बताया गया कि संग्रहालय का स्वरूप एक जहाज के अमूर्त रूप में होगा। जहाज की रेलिंग, पोर्थोल जैसी खिड़कियाँ, नौसैनिक वास्तुकला और समुद्री प्रतीकों के साथ इसे विशिष्ट पहचान दी जाने की योजना है। परिसर में इंटरप्रिटेशन सेंटर, सेंट्रल डेक, ओपन एयर मेमोरियल, थीमैटिक वॉकवे, प्रदर्शनी गैलरी, फाउंटेन और लाइट-एंड-साउंड एरिना शामिल होंगे। डिज़ाइन को ऊर्जा-संवेदनशील रखा गया है, जिसमें प्राकृतिक रोशनी, वेंटिलेशन और हरित निर्माण तकनीक का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय को केवल देखने योग्य नहीं बल्कि 'अनुभव का केंद्र' बनाया जाए, जहाँ दर्शक इतिहास को महसूस कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि डिस्प्ले में डिजिटल, इंटरएक्टिव और इमर्सिव तकनीकों का प्रयोग हो, ताकि लोग नौसेना के अभियान, युद्ध और तकनीकी प्रगति को प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि नौसेना संग्रहालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में आवश्यक जानाकरी उपलब्ध कराई जाए। प्रस्तुति में बताया गया कि परियोजना दो प्रमुख हिस्सों में विकसित हो रही है। पहली-‘आईएनएस गोमती शौर्य स्मारक’ और दूसरी-‘नौसेना शौर्य वाटिका’। बताया गया कि ‘आईएनएस गोमती (F-21)’ गोदावरी श्रेणी का स्वदेशी मिसाइल फ्रिगेट है जिसने 34 वर्षों तक भारतीय नौसेना में सेवा दी और ‘ऑपरेशन कैक्टस’, ‘ऑपरेशन पराक्रम’ जैसे अभियानों में भाग लिया। इसे संरक्षित कर संग्रहालय परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा ताकि नागरिक और युवा उसकी बहादुरी की कहानी को प्रत्यक्ष देख सकें। मुख्यमंत्री ने ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ को परियोजना का विशेष आकर्षण बताते हुए इसके शीघ्र पूर्ण होने के निर्देश दिए। इस वाटिका में टीयू-142 विमान, जो 29 वर्षों तक नौसेना की समुद्री निगरानी और आपदा राहत अभियानों में सक्रिय रहा, स्थापित किया जा रहा है। साथ ही सी किंग एसके-42बी हेलीकॉप्टर की प्रदर्शनी भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वाटिका युवाओं को आधुनिक नौसैनिक अभियानों और प्रौद्योगिकी से जोड़ने वाला सजीव अनुभव स्थल बनेगी। बैठक में बताया गया कि संग्रहालय परिसर में 7D थिएटर, एयरक्राफ्ट कैरियर लैंडिंग सिम्युलेटर, वॉरशिप सिम्युलेटर, सबमर्ज्ड द्वारका मॉडल, डिजिटल वाटर स्क्रीन शो, मरीन लाइफ एक्वेरियम तथा ‘ड्रेस लाइक योर हीरोज़' जैसी सहभागितापरक गतिविधियाँ होंगी। इसके अतिरिक्त नौसेना के वीरता पुरस्कारों, ऐतिहासिक अभियानों और स्वदेशी रक्षा नवाचारों से जुड़ी इंटरएक्टिव गैलरियाँ भी विकसित की जाएंगी। परियोजना की निगरानी हेतु महानिदेशक पर्यटन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जिसमें मेरिटाइम हेरिटेज सोसाइटी, यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन और नौसेना विशेषज्ञ सम्मिलित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में समुद्री गौरव की वह चेतना पुनः जागृत होगी जो कभी भारत के तटीय व्यापार और हिंद महासागर की सांस्कृतिक कड़ी रही है। उन्होंने कहा, लखनऊ का यह संग्रहालय भारतीय नौसेना की वीरता का ही नहीं, बल्कि भारत की समुद्री आत्मा का भी प्रतीक बनेगा। यह उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई, गौरवपूर्ण पहचान देगा।

कृषि संकट: MP में बेमौसम बारिश से धान, सरसों, मटर और तिल की फसल प्रभावित

भोपाल  वर्तमान समय प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि अपना कहर बरपा रही है। प्रदेश  में कहीं भारी बारिश तो कहीं ओलावृष्टि हो रही है, इसके चलते किसान अपनी फसलों को लेकर बहुत चिंतित है। तेज हवा, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की लाखों रूपये की फसल बर्बाद हो गयी है। वर्तमान समय में रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा है। किसानों के सामने इस समय बहुत बड़ा संकट यह है  बेमौसम बारिश ने राज्य के कई क्षेत्रों में किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। आगर मालवा, ग्वालियर-चंबल व विंध्य महाकोशल से फसलों के नुकसान की खबरें हैं। खेत खलिहानों में रखी कटी फसल और खेतों में खड़ी फसल को खासा नुकसान पहुंचा है। खंडवा में इस बार मौसम (MP Rains) ने पहले सोयाबीन की फसल को प्रभावित किया और अब फसल भीगने से मक्का में अंकुरण शुरू हो गया है। सूखने के लिए रखी उपज भीगने से काली भी पड़ रही है। 50 से 60 प्रतिशत नुकसान हुआ है। चक्रवात (Cyclone Montha) की वजह से रतलाम जिले में पांचवें दिन बुधवार को भी मावठे का असर बना रहा। इससे मटर की फसल खराब हो रही है, वहीं ज्यादातर किसान खेतों में जलजमाव, अत्यधिक नमी के चलते रबी की तैयारी व बोवनी नहीं कर पा रहे हैं। बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के 20 से ज्यादा गांवों में मक्का, सोयाबीन, कपास फसल भीगी है। किसानों को फसल सुखाने का मौका नहीं मिल रहा है। आलीराजपुर में मक्का, सोयाबीन और उड़द की फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। उज्जैन के नागदा, बड़नगर और खाचरौद में खेतों में पानी भर गया है। गेहूं और मटर की फसल प्रभावित हुई है। धार के बदनावर क्षेत्र में चार घंटे में 76 मिमी बारिश हुई है। इससे खेतों में जलभराव की स्थिति बनी। खुले में पड़ी सोयाबीन और मक्का की फसल भीग गई। तेज हवा से पपीता के पौधे टूटकर गिर गए। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मटर के फूल और फलियों दोनों के लिए हानिकारक है। गुणवत्ता और उपज दोनों पर असर पड़ेगा। महाकोशल-विंध्य में भी नुकसान महाकोशल-विंध्य के जिलों में भी फसलों को असमय बारिश से नुकसान पहुंचा है। डिंडौरी जिले में बारिश होने से सोयाबीन की फसल अधिक प्रभावित हुई है। दाने काले पड़ गए हैं। पककर तैयार धान की फसल भी प्रभावित हो रही है। बारिश से सोयाबीन,उड़द की फसल पहले ही खराब हो चुकी है। खेत में कटकर रखी धान की फसल भीग गई है, जिसमें अंकुरण होने का अंदेशा बना हुआ है। अभी बारिश के आसार बने हुए हैं, जिससे धान सहित अन्य फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान हो सकता है। अनूपपुर में खेतों में पानी भरने से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि कृषि विभाग के अनुसार 15 प्रतिशत से कम क्षति हुई है, जिसे नुकसान के दायरे में नहीं माना जाएगा। जल्द ही सर्वे शुरू होगा। ग्वालियर चंबल अंचल में बारिश ने रबी फसलों पर बरसाया कहर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खरीफ के समय बारिश से फसल बर्बादी की बाद अब रबी के मौसम में तीन दिन की बारिश ने खेतों में खड़ी धान, बाजरा, मटर, तिल, ज्वार आदि की फसलों में करीब 50 से 60 प्रतिशत नुकसान कर दिया है। सरसों की बुवाई हो चुकी है, खेतों में पानी भरने से फसल खराब हो गई है। ग्वालियर, दतिया, श्योपुर आदि जिलों में धान की फसल को अधिक नुकसान पहुंचा है। ग्वालियर जिले में ही एक लाख 10 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। अभी तक 15 प्रतिशत फसल ही कट सकी है। ऐसे में बारिश से धान की खड़ी फसल जमीन पर गिरने इसे सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। खेतों में पानी भरने से धान की बालियां काली पड़ने और अंकुरण का खतरा बढ़ गया है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड में बाजरा भी खेतों में पका हुआ खड़ा है। बारिश से बाली के दाने काले पड़ने की आशंका है। कई आलू व मटर जैसी फसलों के पौधे सड़ गए हैं। इन फसलों में 60 से 70 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका जताई गई है। मुरैना में बाजरे की जो फसल में 50 प्रतिशत से अधिक के नुकसान की आशंका जताई गई है। दतिया में करीब पांच सौ से अधिक गांवों में धान की फसल खेतों में बिछ गई है। श्योपुर में धान की फसल में 30 से 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। सरसों पूरी तरह नष्ट हो गई     यदि बारिश के साथ-साथ हवा भी चलेगी तो यह नुकसान अधिक होगा। आलू, सरसों, मटर एवं चना तथा मसूर में भी नुकसान है। सरसों की जो 10 दिन के अंदर बोई गई थी वह पूरी तरह नष्ट हो गई है। बारिश से धान की चमक कम होगी और गिरने की वजह से उत्पादन कम हो जाएगा। – डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह, वरिष्ठ विज्ञानी कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालियर।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की देव दीपावली तैयारियों की समीक्षा

काशी की सनातन परंपरा, गंगा आराधना और लोकआस्था का अद्वितीय संगम है देव दीपावली: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की देव दीपावली तैयारियों की समीक्षा 01 से 04 नवंबर तक आयोजित होगा गंगा महोत्सव, 05 नवंबर को गंगा तट पर भव्य देव दीपावली घाटों पर प्रकाश, सजावट, दीपदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी उच्च गुणवत्ता व समयबद्धता से पूरी करने के निर्देश गंगा तट पर दीपदान का दृश्य श्रद्धा और अनुशासन की मिसाल बने, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर रहे: मुख्यमंत्री चेत सिंह घाट पर 25 मिनट की प्रोजेक्शन सहित प्रतिदिन 03 बार लेज़र शो होगा देव दीपावली में स्मार्ट लाइटिंग, थीम आधारित इंस्टालेशन, ड्रोन और सीसीटीवी मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु शौचालय, पेयजल, चिकित्सा, कंट्रोल रूम और सफाई कर्मियों की तैनाती 24×7 सक्रिय रखने का निर्देश नाविक समुदाय को देव दीपावली की गरिमा का हिस्सा बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, उन्हें सुरक्षा उपकरण, लाइफ जैकेट और पूर्ण सहयोग दिया जाए क्लीन काशी, ग्रीन काशी, डिवाइन काशी’ के दर्शन से अभिभूत होंगे श्रद्धालु: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में 05 नवम्बर को वाराणसी में आयोजित होने वाली देव दीपावली 2025 की तैयारियों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की। उन्होंने कहा कि देव दीपावली काशी की सनातन परंपरा, गंगा आराधना और लोकआस्था का अद्वितीय संगम है। यह पर्व भारत की उस अनादि परंपरा का सजीव प्रतीक है, जहाँ दीप केवल ज्योति नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और राष्ट्रभाव का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी की देव दीपावली का आयोजन इस प्रकार किया जाए कि यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा और आध्यात्मिक चेतना का विश्व संदेश बने। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि देव दीपावली से पूर्व आयोजित गंगा महोत्सव (01 से 04 नवम्बर) और मुख्य आयोजन देव दीपावली (05 नवम्बर) की सभी तैयारियाँ समयबद्ध, व्यवस्थित और उच्च गुणवत्ता की हों। घाटों की प्रकाश सज्जा, दीपदान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनसहभागिता की तैयारियाँ इस प्रकार हों कि श्रद्धा, अनुशासन और सौंदर्य का संतुलन प्रदर्शित हो। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर दीपदान का दृश्य श्रद्धा और अनुशासन की मिसाल बने। इसके लिए घाटों पर भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या अवरोध न हो। मुख्यमंत्री ने पर्यटन, नगर निगम, पुलिस, जल पुलिस, संस्कृति, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, विद्युत व स्वास्थ्य विभागों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे अपनी जिम्मेदारी के अनुरूप आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि देव दीपावली के अवसर पर घाटों पर स्मार्ट लाइटिंग, आकर्षक फ्लोरल डेकोरेशन, थीम-आधारित इंस्टालेशन तथा ड्रोन और सीसीटीवी मॉनिटरिंग की समुचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि घाटों, गलियों और प्रमुख मार्गों की सफाई और सजावट पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा प्रत्येक घाट पर पर्याप्त सफाई कर्मी तैनात रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय रहे और कमांड सेंटर से सीसीटीवी फीड की निगरानी निरंतर की जाए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त शौचालय, पेयजल व्यवस्था, चिकित्सीय सहायता और प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किए जाएँ। घाटों के समीप आपातकालीन नौका एवं एम्बुलेंस सेवाएँ उपलब्ध रहें। नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें लाइफ जैकेट, पंजीकरण टैग और निर्धारित रूट की जानकारी दी जाए। मुख्यमंत्री ने नमो घाट, राजघाट, राजेन्द्र प्रसाद घटा, दशाश्वमेध घाट सहित सभी प्रमुख घाटों पर आयोजित होने वाले दीपोत्सव की तैयारियों की भी समीक्षा की और कहा कि वहाँ दीप सज्जा, पर्यटक सुविधाएँ और सुरक्षा उपाय उच्च स्तर पर किए जाएँ। उन्होंने कहा कि नाविक समुदाय काशी की परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, उनका उत्साह और योगदान देव दीपावली की गरिमा को और बढ़ाता है। प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि उन्हें पर्याप्त सहयोग मिले और श्रद्धालुओं को सुरक्षित नौका सेवाएँ प्राप्त हों। बैठक में बताया गया कि चेत सिंह घाट पर 25 मिनट की प्रोजेक्शन सहित प्रतिदिन 03 बार लेज़र शो का आयोजन करने की योजना है। इसी तरह, काशी विश्वनाथ घाट और चेत सिंह घाट के बीच रेत की सैंड आर्ट इंस्टॉलेशन लगाई जाएगी। ग्रीन आतिशबाजी, लेज़र शो और संगीत कार्यक्रम के साथ काशी विश्वनाथ धाम घाट के सामने 10 मिनट का ग्रीन फायरक्रैकर शो आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देव दीपावली का आयोजन ‘क्लीन काशी, ग्रीन काशी, डिवाइन काशी’ के भाव को साकार करने वाला हो। घाटों से लेकर गलियों तक स्वच्छता, सुगमता और प्रकाश व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने यातायात प्रबंधन, पार्किंग, बैरिकेडिंग, शटल सेवाओं, विद्युत आपूर्ति और चिकित्सा सेवाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए ताकि किसी भी क्षेत्र में जाम या अव्यवस्था न हो। उन्होंने कहा कि गंगा तटों पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों, विद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला समूहों और धर्माचार्यों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। यह आयोजन जनसहयोग, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी का यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और आत्मबल का उत्सव है। काशी आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ की पावनता, व्यवस्था और अनुशासन देखकर ‘अतिथि देवो भवः’ की भारतीय परंपरा को अनुभव करें।

कांग्रेस ने कसा शिकंजा: पार्टी में ‘अनुशासन अभियान’ 2 नवंबर से

चंडीगढ़ हरियाणा कांग्रेस में अब ‘अनुशासन की घंटी’ बज चुकी है। पार्टी अब ‘मनमानी की राजनीति’ नहीं, बल्कि ‘मर्यादा की राजनीति’ की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। चरखी दादरी में मनीषा सांगवान के समर्थकों द्वारा प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की मौजूदगी में किए गए हंगामे और नारेबाजी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को झकझोर कर रख दिया। यह घटना सिर्फ एक संगठनात्मक असहमति नहीं, बल्कि कांग्रेस की अनुशासन परंपरा पर सीधा सवाल थी और इसी ने पार्टी हाईकमान को ‘एक्शन मोड’ में ला दिया। तीन दिन पहले ही कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने हरियाणा के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति का गठन किया है। अब 2 नवंबर को चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में इस समिति की पहली अहम बैठक होने जा रही है। बैठक में तय होगा कि हरियाणा कांग्रेस में अब आगे अनुशासन तोड़ने वालों का क्या अंजाम होगा। यह बैठक केवल औपचारिक नहीं, बल्कि संगठन के भीतर ‘संविधान से ऊपर कोई नहीं’ का संदेश देने वाली सख्त शुरुआत मानी जा रही है। इस समिति की कमान पूर्व सांसद और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धर्मपाल सिंह मलिक को सौंपी गई है। उन्हें पार्टी में संयम और सख्ती दोनों के प्रतीक के तौर पर देखा जा सकता है। उनके नेतृत्व में 2 अक्तूबर को होने वाली बैठक में समिति की कार्यप्रणाली तय की जाएगी। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में बैठकों की तैयारी जोरों पर है और समिति के सभी सदस्यों को औपचारिक सूचना भेज दी गई है। समिति की घोषणा के बाद ही अब इसकी पहली रणनीतिक बैठक को लेकर संगठन के भीतर हलचल तेज है। बैठक में नहीं होंगे हुड्डा और राव यह बैठक केवल समिति सदस्यों की होगी, जिसमें प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा शामिल नहीं होंगे। राव नरेंद्र सिंह ने खुद निर्देश दिया है कि समिति पूरी तरह स्वायत्त होकर अपने फैसले और प्रक्रिया तय करे। सूत्रों का कहना है कि राव पिछले कुछ हफ्तों से अनुशासन और जवाबदेही को लेकर बेहद गंभीर हैं। चरखी दादरी की घटना के बाद उन्होंने साफ कहा था – ‘पार्टी की गरिमा सर्वोपरि है। कांग्रेस में कोई भी नेता या कार्यकर्ता संगठन से बड़ा नहीं हो सकता। अगर हम खुद पर नियंत्रण नहीं रखेंगे, तो जनता पर भरोसा कैसे कायम करेंगे।’ राव का यह बयान हरियाणा कांग्रेस में एक ‘नई कार्यशैली’ की नींव माना जा रहा है, जिसमें संगठन पहले, व्यक्ति बाद में होगा। समिति यानी अनुभव और कानून की जोड़ी समिति का गठन बेहद सोच-समझकर किया गया है। इसमें राजनीतिक अनुभव और कानूनी दृष्टि का संतुलित मेल दिखता है। चेयरमैन धर्मपाल सिंह मलिक के साथ जगाधरी विधायक अकरम खान, पूर्व सांसद कैलाशो सैनी और पूर्व विधायक अनिल धन्तौड़ी शामिल हैं। वहीं अंबाला सिटी के वरिष्ठ अधिवक्ता रोहित जैन को सदस्य सचिव बनाया गया है ताकि अनुशासनात्मक मामलों में कानूनी स्पष्टता और प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके। मनीषा सांगवान विवाद ने खींची लकीर चरखी दादरी की घटना ने पार्टी में गहरी प्रतिक्रिया पैदा की थी। जब मनीषा सांगवान के समर्थकों ने सार्वजनिक मंच पर प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र की मौजूदगी में नारेबाजी की, तो कांग्रेस नेतृत्व ने इसे सीधा अनुशासन भंग माना। प्रदेश प्रभारी और केंद्रीय नेताओं ने इसे ‘संगठनात्मक मर्यादा के उल्लंघन’ के तौर पर देखा और तुरंत सख्ती के निर्देश दिए। इसी घटना के बाद यह समिति बनी ताकि आगे से किसी भी स्तर पर ‘भीड़ की राजनीति’ या ‘गुटों का दबाव’ पार्टी अनुशासन से ऊपर न जा सके। ‘डिसिप्लिन कोड’ का खाका होगा तैयार होगा बैठक में समिति ‘डिसिप्लिन कोड’ तैयार कर सकती है, जिसमें पहली गलती पर चेतावनी। दोहराने पर निलंबन और और बार-बार उल्लंघन करने पर निष्कासन जैसी तीन स्तरीय दंड प्रक्रिया प्रस्तावित की जा सकती है। साथ ही, समिति यह भी तय करेगी कि सोशल मीडिया पर अनुशासनहीन बयानबाजी, कार्यक्रमों में विरोध प्रदर्शन या वरिष्ठ नेताओं के प्रति असम्मानजनक व्यवहार को किस श्रेणी में रखा जाएगा। कमेटी की भी अपनी सीमाएं कांग्रेस संविधान के अनुसार, राज्य अनुशासन समिति विधायकों, पूर्व विधायकों, प्रदेश, जिला और ब्लॉक पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। लेकिन एआईसीसी सदस्यों, सांसदों और राष्ट्रीय पदाधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का अधिकार नहीं है। ऐसे मामलों में समिति सिफारिशें तैयार कर पार्टी हाईकमान को भेजेगी। इससे यह स्पष्ट है कि समिति का मकसद ‘संगठन में डर नहीं, व्यवस्था पैदा करना’ है ताकि हर स्तर पर अनुशासन एक समान मानदंड से लागू हो। अनुशासन ही कांग्रेस की आत्मा है : धर्मपाल मलिक समिति चेयरमैन धर्मपाल सिंह मलिक ने कहा कि यह बैठक केवल दंडात्मक नहीं होगी, बल्कि संगठनात्मक मर्यादा को पुनर्स्थापित करने का संकल्प होगी। कांग्रेस में अनुशासन ही असली पहचान है, और जो इसे बनाए रखेगा वही संगठन का सच्चा सिपाही कहलाएगा। उन्होंने कहा कि कमेटी किसी गुट या व्यक्ति को निशाना नहीं बनाएगी, बल्कि यह सुनिश्चित करेगी कि हर कार्यकर्ता पार्टी के संविधान के दायरे में काम करे।

मुख्यमंत्री ने की निर्माण कार्य की समीक्षा, जनवरी तक भवन निर्माण हर हाल में पूरा करने के निर्देश

भारत के शौर्य, स्वाभिमान और सांस्कृतिक वैभव का प्रेरणास्थल होगा छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने की निर्माण कार्य की समीक्षा, जनवरी तक भवन निर्माण हर हाल में पूरा करने के निर्देश संग्रहालय में केवल इतिहास का स्थिर प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की गौरवगाथा का जीवंत अनुभव हो: मुख्यमंत्री ‘शिवाजी एवं द ग्रेट एस्केप गैलरी’ में 7D तकनीक से आगरा किले से शिवाजी महाराज की ऐतिहासिक मुक्ति का सजीव चित्रण होगा ‘अग्रदूतों की गैलरी’ में 1857 के अमर सेनानियों की गाथा आधुनिक तकनीक से प्रदर्शित होगी, लक्ष्मीबाई, नाना साहेब, तात्या टोपे जैसी विभूतियों को मिलेगा स्थान ‘त्योहारों’ और ‘नदियों’ की गैलरियों में उत्तर प्रदेश की आस्था, लोकजीवन और उत्सव परंपराओं का इंटरएक्टिव चित्रण होगा मुख्यमंत्री का निर्देश, हर गैलरी और स्थापत्य तत्व उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतिनिधित्व करे लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में आगरा में बन रहे छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय के निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय भारत के स्वाभिमान, सांस्कृतिक वैभव और वीरता का प्रेरणास्थल बनेगा। मुख्यमंत्री ने अब तक की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए और कहा कि भवन का निर्माण कार्य जनवरी तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए, ताकि संग्रहालय का स्वरूप देने का काम तय समय पर पूरा हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संग्रहालय केवल इतिहास का स्थिर प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव होना चाहिए, जहाँ आगंतुक भारत की गौरवगाथा को महसूस कर सकें। उन्होंने निर्देश दिया कि संग्रहालय की प्रत्येक गैलरी को ऐसी थीमैटिक और इंटरएक्टिव प्रस्तुति दी जाए, जिससे आगंतुक केवल दर्शक न रहकर सहभागी बनें। मुख्यमंत्री ने ‘शिवाजी एवं द ग्रेट एस्केप गैलरी’ के संबंध में निर्देश दिए कि इसमें आगरा किले से छत्रपति शिवाजी महाराज की ऐतिहासिक मुक्ति की घटना को 7D तकनीक, डिजिटल साउंड, लाइट और विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए ताकि आगंतुक उस क्षण की वीरता और रणनीति को सजीव रूप में अनुभव कर सकें। उन्होंने कहा कि यह अनुभाग शिवाजी महाराज के स्वराज्य संकल्प का प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने ‘अग्रदूतों की गैलरी’ में प्रथम स्वाधीनता संग्राम 1857 के अमर सेनानियों से जुड़ी वस्तुओं, स्मृतियों और दस्तावेजों को सुरक्षित प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह गैलरी उन अग्रदूतों की गाथा कहे जिन्होंने स्वतंत्रता की नींव रखी। यहाँ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहेब, तात्या टोपे और अनेक वीरों की स्मृतियाँ आधुनिक तकनीक के साथ प्रदर्शित हों। मुख्यमंत्री ने ‘त्योहारों की गैलरी’ के संबंध में कहा कि इसमें काशी की महाशिवरात्रि और देव दीपावली, ब्रज का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और रंगोत्सव, तथा प्रयागराज का महाकुंभ जैसे उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्वों का जीवंत चित्रण हो। उन्होंने निर्देश दिया कि यहाँ केवल तस्वीरें न लगाई जाएं, बल्कि प्रत्येक पर्व को इंटरएक्टिव अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाए, जहाँ प्रकाश, ध्वनि, संगीत और रंगों के माध्यम से आगंतुक उत्सव का अनुभव कर सकें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ‘नदियों की गैलरी’ में गंगा, यमुना, सरयू और घाघरा जैसी नदियों से जुड़ी आस्था, संस्कृति और लोकजीवन का सजीव चित्रण हो। साथ ही ‘देवासुर संग्राम’ जैसे अनुभाग के माध्यम से सृष्टि, धर्म और मानव मूल्यों की भारतीय व्याख्या को भी दर्शाया जाए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय परिसर में स्थापित सभी कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ और स्थापत्य तत्व उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतिनिधित्व करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय की प्रत्येक दीवार, आंगन और कलाकृति बोलती हुई कहानी बने, जिसमें लोककला, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक कला का समन्वय झलके। मुख्यमंत्री ने ‘आगरा गैलरी’ में शहर की स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए ताकि आगंतुकों को मुगलकालीन स्थापत्य, ब्रज संस्कृति और आधुनिक आगरा का समग्र परिदृश्य एक साथ देखने को मिले। उन्होंने ‘ओरिएंटेशन गैलरी’ को संग्रहालय की प्रस्तावना के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए, जहाँ आगंतुकों को संग्रहालय के उद्देश्य, छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उस कालखंड के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश का परिचय मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय का उद्देश्य केवल अतीत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा केंद्र बनना है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी गैलरियों और अनुभव क्षेत्रों में इंटरएक्टिव तकनीक, वर्चुअल रियलिटी, साउंड-लाइट शो और डिजिटल आर्काइव्स का प्रयोग किया जाए। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग और निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए कि परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता और समयसीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय आगरा की पहचान को नई ऊँचाई देगा और उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक गौरव का जीवंत प्रतीक बनेगा।

अकाली-भाजपा गठबंधन पर बोले कैप्टन अमरिंदर सिंह- ऐसा फैसला पंजाब की राजनीति बदल देगा

मोगा 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अकाली दल और भाजपा के बीच संभावित गठबंधन को लेकर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का अहम बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि समझौते तो होते हैं, लेकिन ऐसे फैसले राष्ट्रीय इकाई (नेशनल बॉडी) लेती है। गठबंधन पर अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान ही करता है। उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह का माहौल इस समय बन रहा है और बड़ी संख्या में लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं, हो सकता है कि हमें किसी गठबंधन की ज़रूरत ही न पड़े। पंजाब सरकार की “नशे के खिलाफ युद्ध” मुहिम पर बोलते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि नशे को खत्म करने के लिए राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर सभी को एकजुट होकर लड़ना होगा। उन्होंने कहा कि जितनी तरक्की भाजपा के शासनकाल में हुई है, उतनी किसी अन्य सरकार के समय नहीं हुई। देश की प्रगति के लिए भाजपा की सरकार ज़रूरी है। कैप्टन ने कहा, “मोदी का हर तरफ डंका बज रहा है। भारत की जीडीपी चीन से आगे निकल चुकी है। देश की तरक्की के लिए जरूरी है कि भाजपा की सरकार बनी रहे।” तरनतारन उपचुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें कोई जानकारी नहीं है क्योंकि वे वहां नहीं गए हैं। मजीठिया मामले पर क्या कहा बिक्रम मजीठिया से जुड़े मामले पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि इस मामले की जांच हरप्रीत सिंह सिद्धू ने की थी, जिसकी बंद रिपोर्ट माननीय हाईकोर्ट में जमा कराई जा चुकी थी। ऐसे में दोबारा जांच करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, “बिक्रम मेरा कोई रिश्तेदार नहीं है कि मैं उसका पक्ष लूं, लेकिन हमारे देश में हर काम कानून के दायरे में रहकर होना चाहिए। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जिस तरह मजीठिया मामले में दोबारा जांच के आदेश दिए हैं, वह पूरी तरह गलत है।” 

कैलाश कुमार तिवारी की किस्मत चमकी: कृष्णा कल्याणपुर पट्टी से दो हीरे बरामद

पन्ना  पन्ना टाइगर रिजर्व के एक गाइड कैलाश कुमार तिवारी की कहानी इन दिनों सुर्खियों में है. मॉनसून के दौरान जंगल के गेट बंद हुए, तो कैलाश ने खाली समय में अपनी किस्मत आजमाई और पन्ना के हीरा खनन क्षेत्र कृष्णा कल्याणपुर पटी में खदान लगा दी. नतीजा हैरान करने वाला रहा. उन्हें अपनी पहली ही कोशिश में दो चमचमाते हुए हीरे मिले. कैलाश तिवारी ने दोनों हीरे पन्ना के हीरा कार्यालय में जमा करा दिए हैं. हीरा अधिकारी रवि पटेल ने हीरों की क्वालिटी की पुष्टि की है. इनमें पहला हीरा 1.56 कैरेट और जेम्स क्वालिटी (Gems Quality) का है. यह सबसे महंगा और डिमांड वाला होता है. जबकि दूसरा हीरा 1.35 कैरेट का है. यह मेले किस्म (Melee Quality) का कम चमक वाला, लेकिन मूल्यवान होता है.  हीरा अधिकारी रवि पटेल ने बताया, "इन दोनों हीरों को आगामी नीलामी में इन्हें रखा जाएगा. जेम्स क्वालिटी के हीरे की हीरा बाजार में अच्छी डिमांड होती है." कैलाश तिवारी पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को जंगल सफारी कराते हैं. उन्होंने बताया कि हर साल 30 जून से मॉनसून के चलते पार्क बंद हो जाता है. खाली समय का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने हीरा कार्यालय से बकायदा पट्टा लिया और किस्मत आजमाई. कड़ी मेहनत के बाद उन्हें मंगलवार, 28 अक्टूबर को ये बेशकीमती रत्न मिले.  कैलाश ने कहा कि वह बहुत खुश हैं कि उन्हें पहली ही बार में हीरे मिल गए. नीलामी से मिलने वाले पैसों से वह अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई-लिखाई कराएंगे.