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शाम के इन 5 आसान कामों से बदल जाएगी आपकी पूरी जिंदगी

एक बेहतरीन, खुशहाल और सुकून भरी जिंदगी की चाहत सभी को होती है और इसी चाहत को पूरा करने के लिए हम दिन भर कड़ी मेहनत करते हैं। पर अक्सर शाम का समय टीवी देखने, फोन पर समय बिताने या थक कर कुछ ना करने में ही बेकार चला जाता है। लेकिन अगर आप हर शाम 5 छोटे-छोटे कामों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, तो ये आपकी सोच, स्वास्थ्य और जीवनशैली में मैजिकल बदलाव ला सकती हैं। ये आदतें ना केवल आपको एक अच्छा इंसान बनाएंगी बल्कि आपको जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद भी करेंगी। तो चलिए जानते हैं उन 5 कामों के बारे में जो आपकी शाम को बना सकती है आपकी सफलता की सीढ़ी। आत्ममंथन से करें दिनभर की समीक्षा हर शाम 10-15 मिनट शांत बैठकर यह जरूर सोचें कि आपका दिन कैसा रहा। आपने पूरे दिन क्या अच्छा किया, आपसे कौन सी गलतियां हुईं और उनसे आपको क्या सीख मिली। जब आप शांत मन से बैठकर आत्ममंथन करेंगे, तो इससे आपको अपनी कमियों और खूबियों के बारे में पता चलेगा। इससे आप आत्म-जागरूक बन पाएंगे और अपनी गलतियों को सुधार कर, जीवन में पॉजिटिविटी के साथ आगे बढ़ेंगे। अगली सुबह की करें तैयारी जीवन में आगे बढ़ाने के लिए हर छोटे बड़े काम की बेहतर प्लानिंग करना बहुत जरूरी है। फिर वो चाहे नए दिन की शुरुआत की ही प्लानिंग क्यों ना हो। इसलिए रात में ही अगले दिन की टू-डू लिस्ट बना लें। इससे सुबह आपका समय बर्बाद नहीं होगा और आप साफ लक्ष्य के साथ दिन की शुरुआत कर पाएंगे। यह आदत आपके काम में फोकस और प्रोडक्टिविटी दोनों बढ़ाएगी। शाम को लें डिजिटल डिटॉक्स आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस के ज्यादातर काम लैपटॉप और मोबाइल में ही होते है। काम ना होने पर भी लोग मोबाइल का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इनसे थोड़ी दूरी बनाना जरूरी है। ऐसे में शाम के वक्त आप डिजिटल वर्ल्ड से दूरी बनाकर रखने का प्रयास करें। सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी से दूरी बना लें। इसकी जगह ध्यान करें या परिवार से बात करें। इससे नींद भी अच्छी आएगी और मानसिक शांति भी बढ़ेगी। शरीर के लिए निकालें समय दिन भर के काम के बाद शरीर को भी आराम की जरूरत होती है। ऐसे में शाम के समय थोड़ा वक्त अपने शरीर के लिए निकालें। इस समय आप हल्की स्ट्रेचिंग, योग या वॉक कर सकते हैं। इससे शरीर की थकान दूर होती है और नींद भी अच्छी आती है। और जब नींद अच्छी आती है तो अगला दिन भी ताजगी के साथ शुरू होगा। किताबों को भी दें समय दिमाग को शांत करने के लिए बुक रीडिंग से बढ़िया कोई ऑप्शन नहीं है। इसलिए रोज रात सोने से पहले थोड़ी देर तक अपनी मनपसंद किताब पढ़ें। इससे आपको मानसिक सुकून मिलेगा, जिससे आपका फोकस बढ़ेगा। इसलिए फिक्शन या नॉन फिक्शन जिस भी फील्ड में आपकी रुचि है, सोने से पहले उससे जुड़ी किताबें पढ़ें।  

लखनऊ, कानपुर, आगरा समेत छह जिलों में होगा स्पेशल प्रोजेक्ट, CM के निर्देश जारी

लखनऊ  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के औद्योगिक और अवसंरचनात्मक विकास को लेकर बड़ा निर्देश जारी किया. उन्होंने कहा कि प्रदेश में बन रहे एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़कों का नेटवर्क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक रीढ़ हैं, जो आने वाले वर्षों में उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे. मुख्यमंत्री ने यह बातें उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहीं. बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य दिसंबर तक हर हाल में पूरा कराया जाए. सीएम ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़ेगा और उत्तर प्रदेश के विकास का नया मार्ग बनेगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्य की गति के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी कोई समझौता न हो. हर परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट तैयार की जाए और समय-सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल किया जाए. एक्सप्रेसवे नेटवर्क को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में विकसित किए जा रहे नए एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स पर भी विस्तृत चर्चा की. इनमें मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे, नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे, और विंध्य एक्सप्रेसवे व विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नई परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करते समय भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और हाइवे नेटवर्क को ध्यान में रखा जाए, ताकि दोहराव से बचते हुए एक संतुलित, समन्वित और एकीकृत सड़क तंत्र विकसित किया जा सके. उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश का भविष्य ऐसे ही प्रोजेक्ट्स पर निर्भर है, जो सुविधा, सुरक्षा और निवेश तीनों पहलुओं को साथ लेकर चलें. छह जिलों में विशेष काम, डिफेंस कॉरिडोर पर सीएम का जोर मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े सभी नोड्स लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट में विशेष काम की रूपरेखा तय करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इन छह जिलों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किए जाएं, ताकि स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रक्षा उद्योग से जोड़ा जा सके. इससे न केवल रोजगार सृजन होगा, बल्कि प्रदेश की आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा. सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश के युवा प्रतिभाशाली हैं. अगर उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण मिले, तो वे रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में देश की ताकत बन सकते हैं. हमारे डिफेंस कॉरिडोर का उद्देश्य केवल उद्योग लगाना नहीं, बल्कि युवाओं के हाथों में हुनर देना भी है. बैठक में बताया गया कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए अब तक 30,819 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. कुल 5039 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है, और कई कंपनियों ने अपने प्रोजेक्ट्स पर काम भी शुरू कर दिया है.  भूमि आवंटन पर सख्त निर्देश न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी ने भूमि आवंटन नीति पर भी सख्ती दिखाई. उन्होंने कहा कि अगर किसी निवेशक को भूमि आवंटन के तीन वर्ष के भीतर परियोजना पर काम शुरू नहीं किया गया, तो ऐसा आवंटन स्वतः निरस्त कर दिया जाए. उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि भूमि उपयोग की पारदर्शी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि हर निवेशक अपनी प्रगति की रिपोर्ट समय-समय पर साझा करे. उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेशकों का स्वागत है, लेकिन भूमि उन्हीं को मिलेगी जो प्रदेश के विकास के प्रति गंभीर हैं. जो केवल जमीन लेकर बैठे रहेंगे, उन्हें कोई रियायत नहीं दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निवेशकों को आगे की सुविधाएं और प्रोत्साहन केवल तभी दिए जाएं, जब उनके प्रोजेक्ट्स जमीन पर वास्तविक प्रगति दिखाएं. एक्सप्रेसवे के किनारे बनेगा औद्योगिक तंत्र बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं. यूपीडा ने इन क्षेत्रों में बिजली, जलापूर्ति, ट्रक टर्मिनल, हेल्थ-इमरजेंसी और अन्य आधारभूत सुविधाओं के लिए समयबद्ध योजना तैयार की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे केवल यात्रा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये भविष्य में उद्योग, व्यापार और रोजगार के मुख्य केंद्र बनने जा रहे हैं. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाले क्लस्टरों में एमएसएमई और स्थानीय उद्यमियों को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि छोटे उद्योगों को भी बड़ी परियोजनाओं से लाभ मिल सके. निवेश के लिए आकर्षक माहौल बनाने पर फोकस बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए कई नीतियों को और सरल और पारदर्शी बनाया गया है. यूपीडा ने हाल ही में भूमि आवंटन, पंजीकरण और परियोजना अनुमोदन की प्रक्रिया को ऑनलाइन और सिंगल विंडो सिस्टम के तहत लागू किया है. सीएम योगी ने कहा कि निवेशकों को भरोसा और सुविधा दोनों मिले, यही हमारी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश देश का सबसे सुरक्षित और स्थिर निवेश केंद्र बन चुका है. एक्सप्रेसवे, औद्योगिक पार्क और डिफेंस कॉरिडोर इस परिवर्तन के सशक्त प्रतीक हैं.  नई परियोजनाओं पर आगे बढ़ेगा यूपी बैठक में यह भी तय हुआ कि आने वाले समय में प्रदेश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में नए लिंक एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. विंध्य और पूर्वांचल क्षेत्रों को जोड़ने वाला विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे विकास के नए द्वार खोलेगा. इसके अलावा, चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे मध्य भारत के औद्योगिक गलियारों से उत्तर प्रदेश की सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक परियोजना केवल सड़क निर्माण का काम नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग और सामाजिक विकास का माध्यम है.  

इनसाइड स्टोरी: सुखोई विमान तैनात एयरबेस अचानक क्यों हुआ बंद, और किसने रची योजना?

नई दिल्ली भारत ने ताजिकिस्तान में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आयनी एयरबेस से अपनी सैन्य मौजूदगी पूरी तरह समाप्त कर ली है। यह कदम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते की समाप्ति के बाद उठाया गया है। मामले से वाकिफ लोगों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह वही एयरबेस है जहां भारत ने लगभग दो दशक पहले, अफगानिस्तान में तालिबान विरोधी नॉर्दर्न अलायंस का समर्थन करते हुए पहली बार अपने सैनिक और वायुसेना कर्मियों को तैनात किया था। सूत्रों के अनुसार, भारत और ताजिकिस्तान के बीच इस एयरबेस के विकास और संयुक्त संचालन के लिए किया गया द्विपक्षीय समझौता लगभग चार साल पहले समाप्त हो गया था, और इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। इसी के बाद से धीरे-धीरे भारतीय कर्मियों की वापसी शुरू हुई, जो 2022 तक ही पूरी हो गई थी। यह एयरबेस राजधानी दुशांबे से लगभग 10 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। 100 मिलियन डॉलर खर्च कर किया था एयरबेस का विकास पूर्व सोवियत काल में बने इस एयरबेस को भारत ने 2000 के दशक में विकसित और आधुनिक बनाया था। सूत्रों के अनुसार, भारत ने इस पर करीब 100 मिलियन डॉलर (लगभग 830 करोड़ रुपये) खर्च किए थे। इन सुधारों में रनवे को मजबूत और लंबा करना शामिल था ताकि कॉम्बैट जेट्स और भारी परिवहन विमानों की लैंडिंग हो सके। इसके अलावा, फ्यूल डिपो, हैंगर, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर और हार्डनड शेल्टर जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई थीं। तैनात थे भारतीय वायुसेना और थलसेना के कर्मी 2014 के बाद कुछ समय के लिए भारत ने अपने Su-30MKI लड़ाकू विमानों को भी आयनी एयरबेस पर तैनात किया था। उस समय करीब 200 तक भारतीय सैन्य कर्मी यहां तैनात रहते थे जिनमें वायुसेना और थलसेना दोनों के अधिकारी शामिल थे। नॉर्दर्न अलायंस को मिली थी मदद भारत की इस मौजूदगी का मूल उद्देश्य था तालिबान विरोधी नॉर्दर्न अलायंस को रसद और उपकरणों की आपूर्ति में तेजी लाना, साथ ही हवाई समर्थन और निगरानी मिशन चलाना। इसके साथ ही, भारत ने ताजिकिस्तान के फरखोर में एक सैन्य अस्पताल भी स्थापित किया था, जहां घायल नॉर्दर्न अलायंस के लड़ाकों का इलाज किया जाता था। इसी अस्पताल में 9/11 हमलों से दो दिन पहले नॉर्दर्न अलायंस के प्रमुख नेता अहमद शाह मसूद को घातक हमले में घायल होने के बाद लाया गया था, जहां उनका निधन हो गया था। रणनीतिक दृष्टि से अहम थी यह मौजूदगी 2001 में तालिबान शासन के पतन और काबुल में नई सरकार बनने के बाद भी भारत ने आयनी एयरबेस पर अपनी मौजूदगी बनाए रखी। यह कदम मध्य एशिया में भारत के प्रभाव को बढ़ाने और पाकिस्तान पर सामरिक दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा था, क्योंकि यह एयरबेस अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह वही संकीर्ण पट्टी है जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से सटी हुई है। अफगानिस्तान से नागरिकों की निकासी में हुई थी मदद 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल कर लिया था, तब भारत ने आयनी एयरबेस का उपयोग अपने नागरिकों और राजनयिकों को सुरक्षित निकालने के लिए किया था। उस दौरान भारतीय सेना और वायुसेना के साथ-साथ नागरिक विमानों का भी इस्तेमाल किया गया था। अब पूरी तरह समाप्त हुई भारतीय उपस्थिति सूत्रों ने बताया कि भारत की सारी सैन्य और तकनीकी संपत्तियां, साथ ही वहां तैनात कर्मी, 2022 तक वापस बुला लिए गए थे। समझौता समाप्त होने के बाद आयनी एयरबेस का संचालन अब पूरी तरह ताजिकिस्तान सरकार के अधीन है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की मध्य एशिया नीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहां नई परिस्थितियों के तहत भारत को कूटनीतिक और आर्थिक माध्यमों से अपनी मौजूदगी मजबूत करनी होगी। भारत का पहला विदेशी एयरबेस: एक रणनीतिक सपना साल 2002। अफगानिस्तान में तालिबान का साया मंडरा रहा था। भारत ने ताजिकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाया। आयनी एयरबेस राजधानी दुशांबे से महज 10 किलोमीटर दूर है। यह सोवियत युग का एक पुराना हवाई अड्डा था। भारत ने इसे नया जीवन दिया। लगभग 70-80 मिलियन डॉलर (करीब 500 करोड़ रुपये) खर्च करके रनवे को 3,200 मीटर लंबा बनाया, हैंगर बनवाए, ईंधन डिपो स्थापित किए। माना जाता है कि यह भारत का पहला विदेशी एयरबेस था- कोई स्थायी फाइटर स्क्वाड्रन नहीं, लेकिन दो-तीन Mi-17 हेलीकॉप्टर ताजिकिस्तान को गिफ्ट में दिए गए थे, जिन्हें भारतीय वायुसेना (IAF) के पायलट उड़ा रहे थे। रणनीतिक महत्व? आयनी अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर से सटा है, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से महज 20 किलोमीटर दूर है। यानी अगर पीओके पर पाक का कब्जा नहीं होता तो ताजिकिस्तान हमारा पड़ोसी देश होता। आयनी एयरबेस से भारतीय Su-30 MKI जैसे फाइटर जेट्स पेशावर या इस्लामाबाद तक को निशाना बना सकते थे। चीन के शिनजियांग प्रांत से भी सटी सीमा इसे दुश्मनों के लिए दोहरी चुनौती बनाती। 2001 में तालिबान के अफगानिस्तान कब्जे के दौरान भारत ने इसी बेस से अपने नागरिकों को निकाला था। यह न सिर्फ ह्यूमैनिटेरियन मिशनों के लिए था, बल्कि पाकिस्तान-चीन गठजोड़ को नजरअंदाज करने का तरीका। लेकिन शुरुआत से ही इस पर रूस की छाया थी। ताजिकिस्तान रूस-नीत कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (CSTO) का सदस्य है। मानाजाता है कि भारत ने रूस की मंजूरी से ही यहां कदम रखा। 2011 में ताजिकिस्तान ने रूस को ही बेस सौंपने की बात कही। फिर भी, भारत ने 2021 तक लीज बढ़ाने की कोशिश की- यहां तक कि सुखोई (Su-30) जेट्स भी तैनात किए थे। ताजिकिस्तान की रणनीतिक स्थिति ताजिकिस्तान कभी सोवियत संघ का हिस्सा था। वह अफगानिस्तान, चीन, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान की सीमाओं से जुड़ा है। यह क्षेत्र रूस, चीन और भारत जैसे तीनों परमाणु शक्तियों के लिए प्रभाव क्षेत्र का केंद्र बना हुआ है। भारत की वापसी यह संकेत देती है कि मध्य एशिया धीरे-धीरे रूस और चीन के प्रभाव क्षेत्र में और गहराई से समाहित हो रहा है। बता दें कि रूस-नेतृत्व वाले CSTO में रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, आर्मेनिया और बेलारूस जैसे देश भी शामिल हैं। इसके अलावा, ताजिकिस्तान को चीन, यूरोपीय संघ, भारत, ईरान और अमेरिका से भी सीमा सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहायता मिलती है। ताजिकिस्तान में रूस का सबसे बड़ा विदेशी सैन्य ठिकाना भी … Read more

स्ट्रॉन्ग मौसम प्रणाली का प्रभाव: 24 घंटे में MP के पूर्वी जिलों में 4.5 इंच तक बारिश का खतरा

भोपाल   अरब सागर में बने डिप्रेशन (अवदाब) और बंगाल की खाड़ी में सक्रिय डीप डिप्रेशन (गहरा अवदाब) के साथ देश के उत्तरी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) प्रभावी है। इन तीनों मौसमी प्रणालियों का संयुक्त असर अब मध्य प्रदेश में भी दिखाई दे रहा है। बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में बारिश हुई, जबकि भोपाल, इंदौर और उज्जैन में तेज हवाओं के चलते दिन का तापमान सामान्य से नीचे चला गया। उज्जैन में दिन का अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अरब सागर में उठे 'मोंथा' चक्रवात का प्रभाव भी प्रदेश के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है। हवा की रफ्तार बढ़ने से ठंडक में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गुरुवार को भी सिस्टम का असर रहेगा। खासकर पूर्वी और दक्षिणी हिस्से में सिस्टम स्ट्रॉन्ग होगा। 12 जिले- सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में अगले 24 घंटे में ढाई से साढ़े 4 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, जबलपुर, कटनी और पन्ना में हल्की बारिश, गरज-चमक और आंधी का असर बना रहेगा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी हवा की रफ्तार आम दिनों की तुलना में अधिक रहेगी। पूर्वी और दक्षिणी जिलों में अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को भी सिस्टम का असर जारी रहेगा। खासकर पूर्वी और दक्षिणी मध्य प्रदेश में यह सिस्टम और अधिक सक्रिय रहेगा। अगले 24 घंटे में इन 12 जिलों-सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में 2.5 से 4.5 इंच तक बारिश की संभावना है। वहीं, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, जबलपुर, कटनी और पन्ना जिलों में हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और आंधी का असर बना रहेगा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी हवाएं आम दिनों की तुलना में तेज गति से चलने की संभावना है। 2 नवंबर तक बना रहेगा बारिश का दौर हालांकि मध्य प्रदेश से मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि बारिश का सिलसिला अभी थमा नहीं है। 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक प्रदेश में बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी। 30 अक्टूबर को सबसे अधिक वर्षा गतिविधि रहने की उम्मीद है। इस बार कड़ाके की सर्दी के आसार मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, नवंबर से सर्दी का दौर शुरू होकर जनवरी के अंत तक चरम पर रहेगा। इस बार फरवरी तक ठंडक बनी रहने की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि यह सर्दी 2010 के बाद की सबसे तीव्र ठंड साबित हो सकती है। सर्दियों के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा भी देखने को मिल सकती है। 'मोंथा' तूफान का भी असर, हवा की रफ्तार बढ़ी, पारा लुढ़का इधर, तूफान 'मोंथा' का असर भी प्रदेश में देखने को मिल रहा है। कई शहरों में हवा की रफ्तार बढ़ गई है। इस वजह से ठंड का असर भी बढ़ा है। बुधवार को दिन के तापमान की बात करें तो 20 शहर ऐसे रहे, जहां पारा 26 डिग्री से नीचे रहा। भोपाल में 25.2 डिग्री, इंदौर में 25.1 डिग्री, उज्जैन में 23 डिग्री, जबलपुर में 28.8 और ग्वालियर में पारा 24.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, बैतूल में 26.5 डिग्री, दतिया-गुना में 25.6 डिग्री, धार में 24.9 डिग्री, पचमढ़ी में 24 डिग्री, रायसेन में 27.4 डिग्री, रतलाम में 24.6 डिग्री, श्योपुर में 24.4 डिग्री, शिवपुरी में 24 डिग्री रहा। पूर्वी हिस्से के छिंदवाड़ा, दमोह, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, नौगांव, रीवा, सागर, सतना, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया और बालाघाट में पारा 28 डिग्री से कम दर्ज किया गया। इधर, रात के तापमान में भी गिरावट देखने को मिली है। आगे यह अलर्ट…2 नवंबर तक बारिश का दौर बता दें कि मध्य प्रदेश से मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है, लेकिन बारिश का दौर जारी है। 31 अक्टूबर, 1-2 नवंबर को भी प्रदेश में बारिश का दौर बना रहेगा। 30 अक्टूबर को बारिश की ज्यादा एक्टिविटी रहेगी। नवंबर-जनवरी में पड़ेगी कड़ाके की सर्दी मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में नवंबर से कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो जाता है, जो जनवरी तक रहता है। लेकिन इस बार फरवरी तक ठंड का असर रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले सर्दियों के मौसम में 2010 के बाद सबसे भीषण ठंड का एहसास हो सकता है। सर्दियों के दौरान इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश भी देखने को मिल सकती है। पूरे एमपी से विदा हो चुका मानसून मौसम विभाग के अनुसार, पूरे प्रदेश से मानसून विदा हो गया है। इस साल मानसून 3 महीने 28 दिन एक्टिव रहा। 16 जून को प्रदेश में मानसून की एंट्री हुई थी और 13 अक्टूबर को वापसी हुई। इस बार प्रदेश में मानसून की 'हैप्पी एंडिंग' रही। भोपाल, ग्वालियर समेत 30 जिलों में 'बहुत ज्यादा' बारिश दर्ज की गई। ओवरऑल सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला गुना है। जहां पूरे सीजन में 65.7 इंच पानी गिर गया, जबकि श्योपुर में 216.3% बारिश हुई। शाजापुर ऐसा जिला है, जहां सबसे कम 28.9 इंच (81.1%) ही बारिश हुई है। मानसूनी सीजन में मौसम विभाग ने प्रदेश में 106 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया था, लेकिन 15 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर गया। इंदौर, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर संभाग के 50 जिलों में बारिश का कोटा फुल रहा। वहीं, भोपाल, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के 4 जिले- उज्जैन, शाजापुर, बैतूल और सीहोर में 81.1 से 98.6 प्रतिशत बारिश हुई। इन जिलों में कोटा पूरा नहीं हो पाया। इनमें से 3 जिले उज्जैन, सीहोर और बैतूल में आंकड़ा 94% से ज्यादा ही है। इस वजह से ये सामान्य बारिश के आसपास है, लेकिन शाजापुर 'बारिश की भारी कमी' की कैटेगरी में है। यहां कोटे का 81 प्रतिशत पानी ही गिरा।  

सोने के आभूषणों पर पाबंदी: उत्तराखंड पंचायत ने शादी समारोह के लिए जारी किया नया फरमान

देहरादून  सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं. सोने पर महंगाई की मार के बीच उत्तराखंड की एक पंचायत ने इसे लेकर नया फरमान जारी किया है. अनुसूचित जनजाति क्षेत्र जौनसार इलाके की एक पंचायत की ओर से जारी किया गया यह फरमान महिलाओं के आभूषण पहनने को लेकर है. इस पंचायत ने शादी और अन्य समारोह में महिलाओं के तीन से अधिक आभूषण पहनने पर रोक लगा दी है. महिलाओं के आभूषण पहनने से संबंधित यह नियम कंदाड़ और इद्रोली गांव में लागू भी हो गया है. महिलाओं को जो तीन आभूषण पहनने की छूट दी गई है, उनमें झुमके, नाक की नथ और मंगलसूत्र शामिल हैं. दो गांवों की संयुक्त पंचायत ने इस नियम की अवहेलना करने पर संबंधित व्यक्ति से 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूलने का भी प्रावधान किया है. इस नए सामाजिक नियम को लेकर कंदाड़ के निवासी अर्जुन सिंह ने सोने की बढ़ती कीमतों को आधार बताया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अर्जुन सिंह का कहना है कि कई महिलाएं सोने के आभूषण खरीदने का दबाव बनाती हैं. सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, इस वजह से परिवार में झगड़े की स्थिति बन जा रही है. इसे देखते हुए ही यह कदम उठाया गया है. उन्होंने महिलाओं की शराब और फिजूलखर्ची पर रोक की डिमांड पर कहा कि इस पर भी विचार किया जाएगा और चरणबद्ध तरीके से रोक लगाई जाएगी. महिलाओं ने भी पंचायत के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन कुछ असहमतियां भी जताई हैं. जौनसार निवासी अमला चौहान ने कहा कि समानता लाना ही अगर इसका उद्देश्य है, तो केवल महिलाओं के आभूषण पहनने पर ही क्यों. उन्होंने पुरुषों के ब्रांडेड शराब पीने पर भी रोक लगाने की वकालत की. अमला ने कहा कि सोना एक निवेश है, जो मुश्किल समय में काम आता है. शराब और अन्य फिजूलखर्ची का क्या? एक अन्य महिला निशा रावत ने शादियों में महंगे उपहार के ट्रेंड पर भी चिंता जताई और कहा कि ब्रांडेड शराब, चिकन… ये सब दिखावे की चीजें हैं. उन्होंने कहा कि शादियों में पहले घर की बनी शराब परोसी जाती थी, लेकिन ब्रांडेड शराब और महंगे उपहार का चलन बढ़ गया है. खर्च कम करने की ही बात है, तो शराब और मांस पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए. इन सबको लेकर एक स्थानीय भीम सिंह ने कहा कि आभूषण को लेकर नियम का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन शराब और फिजूलखर्ची को लेकर महिलाओं की मांग भी जायज है. पंचायत को इस पर भी विचार करना चाहिए. गौरतलब है कि जौनसार का इलाका अनुसूचित जनजाति की बहुलता वाला क्षेत्र है. इस इलाके में सामाजिक स्तर पर पंचायत का बहुत महत्व है. रहन-सहन से लेकर सामाजिक मसलों तक, इलाके के लोग पंचायत के निर्णय को पूरी गंभीरता से लेते हैं और मानते हैं.

140 साल पुराने रणजीत हनुमान मंदिर में अन्नकूट का आयोजन, पूड़ी-भजियों से सजी प्रसादी

इंदौर  इंदौर के करीब 140 साल पुराने रणजीत हनुमान मंदिर में शुक्रवार को चलित अन्नकूट है। यहां 50 हजार भक्तों के लिए प्रसादी में पूड़ी, राम भाजी, नुक्ती, भजिए बनाए जा रहे हैं। अन्नकूट महोत्सव चलित स्वरूप में होगा यानी भक्त लाइन से आकर पैकेट में पूड़ी, सब्जी, नुक्ती बाँटी जयेगी।  चलित अन्नकूट महोत्सव का यह दूसरा साल है। दो साल पहले तक मंदिर के ही ग्राउंड में भक्तों को सुव्यवस्थित रूप से बैठाकर भोजन कराया जाता था।इसमें काफी समय लगता था और भक्तों को काफी इंतजार करना पड़ता था। इसे देखते हुए व्यवस्था में बदलाव किया गया।मंदिर के ग्राउंड में तैयार हो रही प्रसादी मंदिर परिसर में बने ग्राउंड में 4 से ज्यादा अस्थायी भट्टियां बनाई हैं। बुधवार को भट्टी पूजन करने के साथ ही नुक्ती बनाने का काम शुरू हो गया। गुरुवार रात 12 बजे तक ये भट्टियां चलती रहेगी। 8 क्विंटल बेसन से नुक्ती बनाई जा रही है। अलग-अलग भट्टियों पर तेल में बेसन से नुक्ती बनाई जा रही थी, जिसके बाद नुक्ती को चाशनी में डाला जा रहा था।बाद में इन नुक्ती को एक बड़े थाल में निकालकर मंदिर के अन्न क्षेत्र में रखा गया। इसके अलावा 8 क्विंटल बेसन से भजिए बनेंगे।गुरुवार को राम भाजी और पूड़ियां तलने का काम किया जाएगा। राम भाजी बनाने के लिए भक्त मंडल की महिला सदस्य भी इसमें अपनी भागीदारी देंगी। वे गुरुवार सुबह 9 बजे से ही मंदिर परिसर में सब्जी को धोने और काटने का काम करेगी। इसके लिए मंदिर के वॉट्सऐप ग्रुप पर भी मैसेज भेजा गया है।जिसमें लिखा है कि भोग में बनने वाली राम भाजी की सब्जी सुधारने में जो सेवा देना चाहते है वे सुबह 9 बजे मंदिर परिसर में आमंत्रित है। इसमें बड़ी संख्या में महिला सदस्य शामिल होंगी। मंदिर स्थापना से ही होता आया है अन्नकूट महोत्सव मंदिर के मुख्य पुजारी पं.दीपेश व्यास ने बताया कि मंदिर को करीब 140 साल हो चुके हैं। मंदिर की स्थापना के साथ ही अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाता आ रहा है और हनुमान जयंती के बाद आने वाले मंगलवार को इसमें भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर की परंपरानुसार बाबा की आरती होने के बाद शहर के 101 मंदिरों में यहां से प्रसाद भी भेजा जाएगा। 200 से 250 लोगों की टीम तैयार कर रही प्रसादी मंदिर में पिछले 12 सालों से प्रसादी तैयार करने वाले महेश गर्ग ने बताया कि मंदिर में काम करने के लिए 200 से 250 लोगों की टीम लगती है। बुधवार सुबह 8 बजे भट्टी पूजन हुआ जो गुरुवार रात 12 बजे तक जारी रहेगा। 50 हजार लोगों के लिए प्रसादी तैयार की जा रही है। भोजन प्रसादी तैयार करने में 100 से 150 लोग लगातार लगे रहते है। महोत्सव शुरू होने के बाद परोसगारी करने के लिए 100 लोगों की टीम बढ़ जाती है। इस प्रकार 200 से 250 लोगों की टीम इसमें लगती है जो भोजन तैयार करने से लेकर परोसगारी करने में लगती है। 600 से 700 भक्त मंडल के सदस्य संभालेंगे व्यवस्था पं.दीपेश व्यास ने बताया कि गुरुवार को अन्नकूट महोत्सव के लिए भक्त मंडल के 600 से 700 सदस्य अपनी सेवा देंगे। वे अलग-अलग व्यवस्थाओं को संभालेंगे। इसमें भक्तों की एंट्री से लेकर उनके बाहर निकलने तक पैकेट देने से लेकर प्रसादी परोसने तक की व्यवस्था भक्त मंडल के सदस्य संभालेंगे। इसके अलावा पुलिस प्रशासन की व्यवस्था भी यहां रहेगी। 100 से ज्यादा पुलिस बल भी यहां तैनात रहेगा जो व्यवस्थाओं को संभालेगा। इसके अलावा पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहेंगे। ग्राउंड में बैठते थे भक्त, व्यवस्था में किया बदलाव पं.व्यास ने बताया कि मंदिर परिसर के ग्राउंड में 1700 से 1800 भक्त एक बार प्रसादी ग्रहण करने के लिए बैठते थे, इसके चलते ग्राउंड के बाहर भक्तों की भारी भीड़ जमा हो जाती थी और कई घंटे उन्हें इंतजार करना पड़ता था। कई बार धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन जाती थी। जिससे भक्तों का काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसे देखते हुए पिछले साल ही व्यवस्था में बदलाव किया गया और चलित अन्नकूट की शुरुआत की गई। चलित अन्नकूट से भक्तों को प्रसादी के लिए ज्यादा समय नहीं लगेगा। 15 से 20 मिनट के अंदर ही भक्तों को प्रसादी आसानी से मिल सकेगी। अलग-अलग काउंटर पर भक्तों को पैकेट, पूड़ी-सब्जी, नुक्ती-भजिए की प्रसादी मिल जाएगी और वे प्रसादी लेकर ग्राउंड के बाहर जा सकेंगे।

भयंकर कार्रवाई: ब्राजील में नशे के खिलाफ ऑपरेशन, 119 से अधिक मृतक और जनता का गुस्सा

रियो डी जनेरियो साउथ अमेरिका के देश ब्राजील में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह पर छापेमारी हुई है। इसमें 119 लोगों की मौत हो गई है। बुधवार को इन मौतों के बाद ब्राजील में काफी प्रदर्शन हुए। इसके अलावा गवर्नर से भी इस्तीफे की मांग की गई है। पुलिस की छापेमार कार्रवाई में रियो डि जनेरियो में ये मौतें हुई हैं। पुलिस की इस कार्रवाई को शहर के इतिहास की सबसे घातक कार्रवाई माना जा रहा है। लोगों ने सड़क पर शव रख कर प्रदर्शन किए और पुलिस पर एक खास वर्ग के लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। इन लोगों ने कहा कि पुलिस पर सख्त ऐक्शन होना चाहिए। बड़ी संख्या में लोग सरकारी मुख्यालय के सामने एकत्र हुए। उन्होंने नारे लगाए और लाल रंग से रंगे ब्राजीलियाई झंडे लहराए। मृतकों की संख्या और शवों की अवस्था (विकृति और चाकू के घाव आदि) को लेकर तत्काल सवाल उठने लगे। ब्राजील के उच्चतम न्यायालय, अभियोजकों और सांसदों ने गवर्नर कास्त्रो से अभियान की विस्तृत जानकारी प्रदान करने को कहा। कई नेताओं ने हैरानी जताई कि आखिर पुलिस के ऐक्शन में इतने लोगों की मौत कैसे हो सकती है। मृतकों की कुल संख्या अधिकारियों द्वारा पूर्व में बताई गई संख्या से कहीं अधिक है। अधिकारियों ने पहले कहा था कि 60 लोग मारे गए हैं। छापे की कार्रवाई लगभग 2,500 पुलिसकर्मियों और सैनिकों ने पेन्हा और कॉम्प्लेक्सो डी अलेमाओ में की थी। स्थानीय निवासी एलिसांगेला सिल्वा सैंटोस (50) ने पेन्हा में कहा, 'वे उन्हें जेल ले जा सकते थे, उन्हें इस तरह क्यों मार रहे हैं? उनमें से बहुत से जिंदा थे और मदद के लिए पुकार रहे थे। हां, वे तस्कर हैं, लेकिन वे इंसान हैं।' पुलिस और सैनिकों ने हेलीकॉप्टरों, बख्तरबंद वाहनों और पैदल ही अभियान शुरू किया, जिसका लक्ष्य ‘रेड कमांड’ गिरोह था। फिलहाल ब्राजील में इस घटनाक्रम के चलते तनाव की स्थिति है और बड़ी संख्या में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल को तैनात किया गया है।

क्रिस इवांस बने पापा! कैप्टन अमेरिका और एल्बा बैप्टिस्टा ने स्वागत किया नन्हे मेहमान का

मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स के 'कैप्टन अमेरिका' उर्फ हॉलीवुड एक्टर क्रिस इवांस पापा बन गए हैं। उनके घर में बेबी गर्ल की किलकारियां गूंजी है। वाइफ एल्बा बैप्टिस्टा शादी के दो साल बाद मां बनी हैं। लेकिन किसी को भी उनकी प्रेग्नेंसी की कानोंकान खबर तक नहीं मिली। हॉलीवुड स्टार क्रिस इवांस और पुर्तगाली एक्ट्रेस एल्बा बैप्टिस्टा एक बच्ची के माता-पिता बन गए हैं। 'टीएमजेड' के अनुसार, इस कपल ने 24 अक्टूबर 2025 को मैसाचुसेट्स में अपनी बेटी अल्मा ग्रेस बैप्टिस्टा इवांस का स्वागत किया। दोनों ने साल 2023 में शादी की थी। प्रेग्नेंसी का नहीं किया था ऐलान क्रिस और एल्बा दोनों ही अपनी पर्सनल लाइफ को लाइमलाइट से दूर रखते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी का भी ऐलान नहीं किया था। हालांकि, महीनों से इसको लेकर अटकलें लग रही थीं। एल्बा के पिता ने दिया था हिंट हालांकि, इस साल जून में एल्बा के पिता लुईज बैप्टिस्टा ने एक पोस्ट में जरूर इसका हिंट दिया था। उ्होंने फादर्स डे पर लिखा था, 'बहुत बहुत धन्यवाद प्यारे क्रिस। तुम्हारी बारी आ रही है।' 'वाइफ, बच्चे और परिवार… यही तो चाहिए' क्रिस लंबे समय से परिवार शुरू करने की इच्छा जता रहे हैं। साल 2022 में 'पीपल पत्रिका' को दिए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था, 'यही तो मैं चाहता हूं, वाइफ, बच्चे और परिवार बसाना।' फिर साल 2024 में भी उन्होंने यही बात दोहराई थी। क्रिस और एल्बा की उम्र में फासला बता दें कि क्रिस 43 साल के हैं तो एल्बा सिर्फ 28 साल की हैं। दोनों की उम्र में 15 साल का फासला है।

सिद्धू बोले ऋषभ पंत के बारे में: असंभव को संभव बनाने वाले हैं फीनिक्स जैसे

 नई दिल्ली पूर्व क्रिकेटर और मशहूर कॉमेंटेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने ऋषभ पंत की जमकर तारीफ की है। स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज पंत अभी दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ बेंगलुरु में चल रहे अनऑफिशियल टेस्ट में भारत ए की अगुआई कर रहे हैं। सिद्धू कहा कि किसी ने सोचा तक नहीं था कि भीषण कार हादसे के बाद ऋषभ पंत दोबारा कभी अपने पैरों पर खड़ा हो पाएगा। उन्होंने स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज की तुलना पौराणिक पक्षी फीनिक्स से की है जो अपने ही राख से फिर जिंदा हो जाती है। ऋषभ पंत फिलहाल फुट इंजरी से उबरकर इंडिया ए की अगुआई कर रहे हैं। इसी साल इंग्लैंड दौरे पर मैनचेस्टर टेस्ट के दौरान तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स की एक यॉर्कर पर रिवर्स स्वीप खेलने के दौरान उनके पैर की उंगली में फ्रैक्चर हो गया था। इस वजह से वह एशिया कप, वेस्टइंडीज के खिलाफ होम सीरीज और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी नहीं जा पाए थे. नवजोत सिंह सिद्धू ने स्टार स्पोर्ट्स पर कहा, 'ऋषभ पंत फीनिक्स हैं जो राख से उठ खड़ी होती है। किसी ने कल्पना तक नहीं की होगी कि वह फिर से कभी (कार हादसे के बाद) चल पाएंगे। उनकी निडरता को देखिए, उनकी असाधारण उपलब्धियों को देखिए जिसे उन्होंने हासिल किया है। जिस तरह से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में बल्लेबाजी की थी, जिस तरह उन्होंने इंग्लैंड में हमें मैच जितवाए, वो शानदार है। मैं अब तक जितने भी क्रिकेटर देखें हैं उनमें से वह सबसे अच्छे में एक है। जब मैं उन्हें देखता हूं तो आनंद आता है। ऋषभ पंत ने सभी को सिखाया है कि जिंदगी में मुश्किलों से कैसे पार पाते हैं।' भारत ए बनाम दक्षिण अफ्रीका ए के बीच अनऑफिशियल टेस्ट की बात करें तो गुरुवार को कप्तान ऋषभ पंत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है। भारत ए की प्लेइंग इलेवन की बात करें तो कप्तान ऋषभ पंत के अलावा साई सुदर्शन, आयुष म्हात्रे, देवदत्त पड्डीकल, रजत पाटीदार, आयुष बडोनी, तनुष कोटियन, अंशुल कंबोज, मानव सुधार, गुरनूर बरार और खलील अहमद शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ा संतुलन: चीन-अमेरिका सौदे से टैरिफ घटा, सोयाबीन और रेयर अर्थ मेटल का आदान-प्रदान तय

बीजिंग /वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की साउथ कोरिया में हुई बैठक में बड़े फैसले लिए गए हैं. इसमें टैरिफ के मुद्दे पर बात बनी, तो वहीं ट्रंप के लिए सिरदर्द बनी सोयाबीन की खरीद भी फिर से शुरू होने पर सहमति बनी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसके बारे में बताते हुए कहा कि China Tariff को 10 फीसदी कम करते हुए 57% से 47% किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति के साथ बैठक शानदार रही है और इसमें कई बड़े फैसले लिए गए हैं. Soyabean पर भी इस दौरान चर्चा हुई और ट्रंप के मुताबिक चीन द्वारा सोयाबीन की खरीद तुरंत शुरू की जाएगी.  US-China संबंधों की नई शुरुआत Donald Trump ने गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ आर्थिक और व्यापारिक समझौतों को लेकर बड़ा ऐलान किया. इसमें उन्होंने चीन पर लागू टैरिफ में 10% की कटौती करते हुए इसे 57% से 47% किए जाने की जानकारी दी. तो वहीं दूसरी ओर कई अन्य विवादित मुद्दों पर चीन के साथ सहमति की बात कहते हुए इस बैठक अद्भुत करार दिया. उन्होंने कहा कि ये अमेरिका-चीन संबंधों में एक शानदार नई शुरुआत है.  साउथ कोरिया के बुसान शहर में Donald Trump-Xi Jinping के बीच करीब दो घंटे से अधिक समय तक बंद कमरे बातचीत हुई. इसके बाद ट्रंप ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि बैठक में बहुत सारे निर्णय लिए गए और बहुत सी महत्वपूर्ण चीजों पर निष्कर्ष जल्द ही जारी किए जाएंगे. 'US में चीनी निर्यात में कोई बाधा नहीं…' रेयर अर्थ मिनरल्स, चिप समेत अन्य ऐसे मुद्दे, जो बीते कुछ समय से अमेरिका और चीन के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह बने थे, उन्हें भी सुलझाने का दावा ट्रंप की ओर से किया गया है.चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक में बनी सहमतियों के बारे में बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि अब कोई भी रुकावट अमेरिका में चीनी निर्यात के प्रवाह में नहीं आएगी.  चिप से रेयर अर्थ मिनरल्स तक बनी बात डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस बात पर सहमति बनी है कि चीन फेंटेनाइल को रोकने के लिए कड़ी मेहनत करेगा. उन्होंने कहा कि कई मुद्दों पर चर्चा हुई, चिप्स के मुद्दे पर जिनपिंग NVIDIA और अन्य कंपनियों से चर्चा करेंगे. इसके अलावा ट्रंप के साथ मौजूद अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर मुद्दा तय हो गया है और चीन दुर्लभ खनिजों के निर्यात को जारी रखेगा. US-China Deal को लेकर आए इस अपडेट के बाद सप्लाई चेन से संबंधित चिंताएं कम हो सकती हैं. 'सोयाबीन खरीदारी हमारे किसानों की जीत' डोनाल्ड ट्रंप ने चीन द्वारा अमेरिकी सोयाबीन की खरीद को तुरंत फिर से शुरू करने को लेकर कहा कि, 'यह हमारे किसानों के लिए एक बहुत बड़ी जीत है. अब अमेरिका औऱ चीन के व्यापारिक संबंध बहुत अलग नजर आने वाले हैं.' बता दें कि US Soyabean के लिए चीन सबसे बड़ा खरीदार रहा है. बीते साल अमेरिका ने करीब 24.5 अरब डॉलर मूल्य का सोयाबीन निर्यात किया था और इसमें से 12.5 अरब डॉलर मूल्य की सोयाबीन को अकेले चीन ने ही खरीदा था. हालांकि, टैरिफ टेंशन के चलते ड्रैगन ने इसकी खरीद रोककर अमेरिका को तगड़ा झटका दिया था.  दूसरी ओर चीन द्वारा रेयर अर्थ मिनरल्स पर प्रतिबंध बढ़ाने के बाद दोनों देशों के बीच तनातनी और भी बढ़ गई थी. China के इस कदम पर पलटवार करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान तक कर दिया था. हालांकि, अब दोनों के बीच इस तमाम मुद्दों को लेकर सहमति बन गई है.