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पुलिस अधिकारी के साथ बड़ा फ्रॉड! सबूत पेश, फिर भी कार्रवाई गायब

पंचकूला हरियाणा पुलिस के डीएसपी सुरेंद्र सिंह यादव के साथ 47 लाख रुपए की ठगी हुई थी। डीएसपी ने इस मामले की शिकायत 2024-25 के दौरान हरियाणा डीजीपी, पंचकूला डीसीपी और पंचकूला सेक्टर-14 थाना के एसएचओ को दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।   10 अक्तूबर को पंचकूला सेक्टर-1 पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित ग्रिवेंसेज कमेटी की मीटिंग में डीएसपी हरियाणा सरकार के मंत्री विपुल गोयल के समक्ष पेश हुए। मंत्री ने तुरंत मामला दर्ज करने का आदेश दिया। मंत्री के आदेश के 24 दिन बाद पंचकूला पुलिस ने 4 नवंबर को सेक्टर-14 पुलिस थाने में भरतपाल, आरती देवी, नायब सिंह, राजकुमार भाटिया, सुखविंदर कौर और कुलविंदर सिंह पुवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी, 406 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया है। 2022-23 में डीएसपी सुरेंद्र सिंह यादव पंचकूला जोन 2 के डीएसपी थे। आरोपियों ने उन्हें सेक्टर 26 में 14 मरले का प्लॉट दिखाया और 2.35 करोड़ में डील तय हुई। डीएसपी ने आरोपियों के बैंक खाता में 53 लाख रुपए ट्रांसफर किए लेकिन आरोपियों ने प्लॉट का सौदा किसी और से कर लिया। पीड़ित हरियाणा पुलिस के डीएसपी ने कहा कि पंचकूला पुलिस ने कमजोर धारा के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने धारा 467, 468 और 471 धारा को उसमें नहीं जोड़ा है। वह पंचकूला पुलिस की कार्रवाई से नाखुश हैं और डीजीपी को शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं। 

WiFi राउटर पर एल्युमिनियम फॉयल लगाने का ट्रिक — काम करता है या सिर्फ़ मिथ है?

नई दिल्ली घर में वाई-फाई की स्पीड कम होना आम समस्या है। कभी फिल्म देखते समय बफरिंग होती है, तो कभी मीटिंग में सिग्नल कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में लोग कभी राउटर की पोजीशन बदलते हैं तो कभी राउटर ही चेंज कर देते हैं। हालांकि, आपने कभी न कभी तो सुना ही होगया कि एल्युमिनियम फॉयल वाई -फाई राउटर का सिग्नल बढ़ा देती है। ये सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन यह थ्योरी खूब फ्लोट होती है। लेकिन क्या सचमुच एक एल्युमिनियम फॉयल वाई-फाई का सिग्नल बढ़ा सकती है? चलिए, जान लेते हैं कि इस बारे में रिसर्च और एक्सपर्ट क्या कहते हैं। वैज्ञानिकों ने क्या बताया? रीडर्स डाइजेस्ट की एक रिपोर्ट बताती है कि डार्टमाउथ कॉलेज के वैज्ञानिकों ने टेस्ट किया। उन्होंने फॉयल से कवर किया आकार बनाया। कुछ जगहों पर सिग्नल 55% तक बढ़ गया। जहां जरूरत नहीं, वहां 63% तक कम हो गया। इससे पूरा कवरेज बेहतर हुआ। रिसर्च में साबित हुआ कि एल्युमिनियम फॉयल का सही से इस्तेमाल किया जाए तो वाई-फाई सिग्नल बढ़ सकता है। डार्टमाउथ यूनिवर्सिटी की कंप्यूटर साइंस टीचर और इस रिसर्च की मुख्य वैज्ञानिक जिया झोउ कहती हैं कि एल्युमिनियम फॉयल वाई-फाई सिग्नल को उछालती है। कैसे काम करती है एल्युमिनियम फॉयल? राउटर में एंटीना होता है जो सिग्नल भेजता है। ये सिग्नल रेडियो Waves की तरह हर तरफ फैलते हैं। जैसे पानी की स्प्रिंकलर चारों ओर छिड़काव करती है। इससे सिग्नल कमजोर हो जाता है। दीवारें, फर्श और खिड़कियां इसे रोकती हैं। कुछ जगहों पर सिग्नल पहुंचता ही नहीं। ऐसे में एल्युमिनियम फॉयल को घुमाकर राउटर के पीछे लगाएं। चमकदार साइड अंदर की ओर रखें। यह सिग्नल को रिफ्लेक्ट करता है। सिग्नल एक दिशा में जाता है जहां जरूरत है। जैसे लिविंग रूम या बेडरूम। खिड़की की तरफ जाने वाला सिग्नल रुक जाता है। इससे स्पीड बढ़ती है। हैकर्स का खतरा भी कम होता है एल्युमिनियम फॉयल सिग्नल को घर के अंदर रखती है, बाहर नहीं जाने देती। इससे हैकर्स का खतरा कम होता है। वे सिग्नल पकड़कर डेटा नहीं चुरा सकते। यह पासवर्ड के साथ एक्स्ट्रा सुरक्षा देता है। घर की प्राइवेसी बनी रहती है। हालांकि बताया दें कि यह हैक सभी के लिए परफेक्ट नहीं। लेकिन सस्ता और आसान तरीका है। वाई-फाई एक्सटेंडर खरीदने से पहले आप इसे भी आजमा सकते हैं।

शांति भरा जीवन चाहिए तो इन 5 लोगों से रहें सावधान

हर कोई चाहता है कि उनकी लाइफ शांति और सुकून से भरी रहे। जीवन में खूब तरक्की करना भी सभी चाहते हैं। कुल मिलाकर किसी के लाइफ गोल पूछें तो मोटा-मोटा यही तीन-चार चीजें निकल कर आती हैं। अब सवाल है कि खुद के लिए ऐसी लाइफ कैसे बनाई जाए। मेहनत और किस्मत, तो दो जरूरी फैक्टर्स हैं ही लेकिन आपके इर्द गिर्द कैसे लोग हैं, ये भी बहुत मायने रखता है। आपने बड़े-बुजुर्गों से भी सुना होगा कि आपकी संगति ही आपके जीवन की दिशा और दशा तय करती है। कई बार हमारे सर्कल में ऐसे लोग मौजूद होते हैं, जो आसपास एक नेगेटिविटी का जैसे घेरा सा बना देते हैं। इनके आसपास रहकर शांति, सुकून और सफलता की तलाश करना, लगभग नमकुकिन होता है। अगर आप भी जीवन में पॉजिटिव बदलाव चाहते हैं, तो इन खास किस्म के लोगों से दूर रहें। 'अरे तुम्हारी दोस्त तुमसे ज्यादा सुंदर है ', 'देखो उन्होंने तो ये कर लिया लेकिन तुम अभी तक नहीं कर पाए'। ऐसा कितनी बार कुछ लोग मजे-मजे में बोल जाते हैं, जो कहीं ना कहीं आपके मन में बैठ जाता है। ये उस किस्म के लोग होते हैं, जिन्हें खूब मजा आता है आपकी दूसरों से तुलना करने में। इनका मकसद ही होता है कि कैसे आपको छोटा दिखाया जाए, ताकि आप भी अपनी नजरों में खुद को ले कर ऐसा ही सोचें। अगर आसपास भी आपको ऐसे लोग दिखते हैं, तो इन्हें अवॉइड करने की कोशिश करें। कभी अवॉइड ना कर पाएं तो खुद के लिए जरूर स्टैंड लें। जो दूसरों की चुगली में हों एक्सपर्ट इस खास किस्म के लोग हमारे आसपास अक्सर मिल जाते हैं। इन्हें दूसरों की बुराई करने, किसी को छोटा दिखाने में खूब मजा आता है। लेकिन एक बात याद रखिएगा जितनी शिद्दत से ये दूसरों की चुगली आपके साथ करते हैं, उतने ही मजे से आपकी चुगलियां भी दूसरों के आगे उड़ेलते नजर आएंगे। वैसे भी किसी की बुराई कर के खुशी कभी मिलने से तो रही। इसलिए आसपास शांति और सुकून चाहिए जो ऐसे लोगों को अपनी लाइफ से कट कर दें। जो आपके सपनों का उड़ाते हों मजाक कुछ लोग होते हैं जो आपके सपनों का मजाक उड़ाते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपने कहा कि आपको फ्यूचर में एक बड़ा घर या गाड़ी लेनी है। तो इनका सबसे पहला रिएक्शन यही होगा 'रहने दो आपसे हो गया', 'अरे अपनी औकात में रहकर सपने देखो'। इस तरह के टॉक्सिक लोग कभी आपको कुछ ऊंचा सोचने ही नहीं देंगे। आप कुछ अच्छा भी कर लें तो उसमें कमियां निकाल देंगे कि ये तो हर कोई कर लेता है। ऐसे लोगों से अगर समय रहते ना बचे, तो ये आपको नेगेटिविटी, डर, इनसिक्योरिटी जैसी नेगेटिव चीजें दिए बिना नहीं छोड़ने वाले। सिर्फ अपना मतलब निकालने वाले कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो आपके आसपास सिर्फ तभी दिखाई पड़ते हैं, जब इन्हें आपसे कुछ चाहिए होता है। सिर्फ अपने मतलब के लिए ये आपसे अपने रिश्ते ठीक रखते हैं। वहीं जैसे ही आपको इनकी कभी जरूरत पड़ जाए, ये फोन उठाना तक बंद कर देते हैं। ऐसे मतलबी लोगों को पहचानना सीखें और जितना हो सके इनसे दूर रहें। इन्हें आपके इमोशन, आपके स्ट्रगल किसी की कोई परवाह नहीं होती। ऐसे टॉक्सिक लोगों सिर्फ आपकी एनर्जी, टाइम और पैसा जाया करते हैं; बिना किसी वैल्यू एडिशन के। हमेशा नेगेटिव रहने वाले वाले लोग कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके साथ थोड़ी देर बैठ जाने से ही सबकुछ बड़ा नेगेटिव सा लगने लगता है। ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने सारी एनर्जी सोख ली हो। ये होते हैं नेगेटिव किस्म के लोग, जो हर चीज में नेगेटिविटी ढूंढ लेते हैं। ये हमेशा सिर्फ दुखड़ा रोते हैं, हर चीज की शिकायत करते रहते हैं लेकिन उसे बदलने के लिए करना कुछ भी नहीं चाहते। ऐसे लोगों के साथ रहने से ना सिर्फ आपकी मेंटल पीस खराब होती है, बल्कि जिंदगी को देखने का आपस रवैया की नेगेटिव होने लगता है।  

‘ताई-भाई’ का दौर खत्म? मालवा में नई पीढ़ी की एंट्री और 2028 के लिए बिछ रही नई बिसात

इंदौर   मध्य प्रदेश में बीजेपी की नई कार्यकारिणी की घोषणा ने राजनीति में हलचल मचा दी है. पहले प्रदेश स्तर की टीम बनी, फिर इंदौर शहर की कार्यकारिणी घोषित हुई. इन दोनों में कई नए चेहरे शामिल किए गए हैं. इससे सवाल उठ रहा है कि क्या इंदौर और मालवा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे पुराने गुटों का दौर अब खत्म होने की ओर है? इंदौर की राजनीति में दशकों से दो बड़े नाम हावी रहे हैं – पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, जिन्हें प्यार से ‘ताई’ कहा जाता है, और कैलाश विजयवर्गीय, जो ‘भाई’ के नाम से मशहूर हैं. दोनों के अपने-अपने समर्थक हैं और कई बार इनके बीच खींचतान भी सामने आई है. लेकिन नई सूची में इन दोनों गुटों के पुराने चेहरों को जगह नहीं मिली. इसके बजाय युवा और नए नेताओं को मौका दिया गया है. सबसे चर्चित नाम है गौरव रणदिवे का. उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है. गौरव विजयवर्गीय के करीबी माने जाते हैं. उनकी नियुक्ति के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने एक बयान दिया – “मैं जो पौधा लगाता हूं, उसे कभी नहीं काटता.” यह बात सुनने में साधारण लगती है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे गहरा संदेश माना जा रहा है. मतलब साफ है कि विजयवर्गीय अपने चुने हुए लोगों को आगे बढ़ाना चाहते हैं और उन्हें मजबूत करना उनका पुराना तरीका है. इंदौर नगर कार्यकारिणी में भी यही पैटर्न दिखा. ताई और भाई के पुराने साथियों को बाहर रखा गया. उनकी जगह नए कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं को शामिल किया गया. कुछ पुराने नेता इससे नाराज भी हैं. पार्टी के अंदर खुसुर-फुसुर की खबरें आ रही हैं, लेकिन बीजेपी हाईकमान ने फिलहाल स्थिति को संभाल लिया है. असंतोष को दबाने की कोशिश की जा रही है. दरअसल, जब प्रदेश कार्यकारिणी में गौरव रणदिवे को जगह मिली तो कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान सुर्खियों में रहा। उन्होंने कहा- मैं जो पौधा लगाता हूं, उसे काटता नहीं हूं। जानकारों के मुताबिक, प्रदेश कार्यकारिणी में गौरव रणदिवे को शामिल करना इंदौर से एक नए पावर सेंटर की शुरुआत माना जा रहा है। इसके बाद जब इंदौर नगर कार्यकारिणी का ऐलान हुआ तो उसमें भी ताई और भाई गुट के चेहरे लगभग गायब थे। इस कार्यकारिणी में नए चेहरों को आगे बढ़ाया गया है। इस बदलाव के बाद असंतोष के सुर भी सुनाई दिए हैं, मगर बीजेपी ने जैसे-तैसे डैमेज कंट्रोल किया है। ताई और भाई के गुट को तवज्जो न देकर नए गुटों के नेताओं को आगे बढ़ाकर पार्टी क्या मैसेज देना चाहती है? क्या 2028 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से नई लीडरशिप तैयार हो रही है? भास्कर ने इसे लेकर एक्सपर्ट्स से बात की। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बदलाव 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है. बीजेपी नहीं चाहती कि पुरानी गुटबाजी पार्टी को नुकसान पहुंचाए. इसलिए नई पीढ़ी को तैयार करने का प्लान है. इंदौर बीजेपी का गढ़ रहा है. यहां से आठ विधानसभा सीटें हैं और सभी पर पार्टी का कब्जा है. लेकिन लंबे समय तक एक ही चेहरों पर निर्भर रहने से कार्यकर्ताओं में थकान आ सकती है. नई लीडरशिप से जोश भरने की कोशिश है. कुल मिलाकर, यह बदलाव संगठन को मजबूत करने और भविष्य की तैयारी का हिस्सा लगता है. पुरानी गुटबाजी को कम करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है. अब देखना यह है कि नए चेहरे कितना असर दिखा पाते हैं और क्या वाकई इंदौर की राजनीति में नया दौर शुरू हो रहा है. पार्टी के भीतर एकता बनी रहेगी या फिर नई खींचतान शुरू होगी – यह आने वाला वक्त बताएगा. लेकिन फिलहाल बीजेपी ने साफ संदेश दे दिया है कि अब समय नई पीढ़ी का है. ताई-भाई के युग से हटकर युवाओं की नई खेमेबंदी इंदौर की बीजेपी में दशकों तक सत्ता के दो ही केंद्र माने जाते रहे- 'भाई' यानी कैलाश विजयवर्गीय और 'ताई' यानी सुमित्रा महाजन। संगठन से लेकर टिकट वितरण तक, हर फैसला इन्हीं दो ध्रुवों के इर्द-गिर्द घूमता था। लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। एक नया युवा नेतृत्व आकार ले रहा है, जो इन दोनों के साये से बाहर अपनी पहचान बना रहा है। शहर की राजनीति में अब दो नए शक्ति केंद्र उभरते दिख रहे हैं। 1. नया युवा गुट: इस गुट का नेतृत्व गौरव रणदिवे, विधायक मनोज पटेल, एकलव्य गौड़ और सावन सोनकर कर रहे हैं। ये चारों नेता अक्सर एक साथ पोस्टरों और कार्यक्रमों में नजर आते हैं। यह गुट सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय है और राजनीति के नए तौर-तरीकों पर जोर देता है। 2. पुराना संरचनात्मक गुट: इस गुट का नेतृत्व विधायक रमेश मेंदोला, विधायक गोलू शुक्ला और नवनियुक्त नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के हाथ में माना जा रहा है। नगर टीम में इनके समर्थकों को ज्यादा पद मिले हैं, जिससे संगठन के भीतर इनका प्रभाव स्पष्ट दिखता है। पुराने गुटों को नई कार्यकारिणी में ज्यादा तवज्जो नहीं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) के समर्थकों को इस कार्यकारिणी में कोई स्थान नहीं मिला है। पूर्व पार्षद सुधीर देड़गे और उनके दो अन्य समर्थकों के नामों पर चर्चा थी, लेकिन उन्हें भी शामिल नहीं किया गया। सांसद शंकर लालवानी खेमे से कंचन गिदवानी को मंत्री बनाया गया है, जबकि महापौर के करीबी भरत पारख को उपाध्यक्ष पद मिला है। सूत्रों के अनुसार, सांसद शंकर लालवानी ने नगर टीम के लिए चार नाम सुझाए थे, जिनमें से केवल एक नाम (कंचन गिदवानी) को जगह मिली। इसमें भी वरिष्ठता का ध्यान नहीं रखा गया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के गुट के नेताओं को भी कार्यकारिणी में अपेक्षित स्थान नहीं मिला। विजयवर्गीय समर्थक भूपेंद्र केसरी को महामंत्री पद की चर्चा के बाद उपाध्यक्ष पद से ही संतोष करना पड़ा। वहीं, गोविंद पंवार को सह कार्यालय मंत्री बनाया गया है।

शादी का नया ट्रेंड: बारात और शराब के बिना, सिर्फ सादगी और संस्कार के साथ विवाह

भोपाल  शादी-ब्याह में दिखावे, फिजूलखर्ची और शोर-शराबे से परेशान समाज को एक नया विकल्प मिल गया है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गायत्री शक्तिपीठ ने सादगी और संस्कार का संदेश देने के लिए संस्कारित विवाह अभियान शुरू किया है. इसमें न डीजे होगा, न बैंड-बाजा, न भव्य सजावट होगी. विवाह सिर्फ मंत्रोच्चार, अग्नि और सात फेरों यानी पूरी तरह वैदिक रीति से सम्पन्न होगा.  भोपाल के महाराणा प्रताप नगर (MP नगर) स्थित शक्तिपीठ के एक पैम्फलेट यानी पत्रक में विवाह को एक पवित्र संस्कार बताते हुए खर्चीली रीतियों और सामाजिक बुराइयों को सख्ती से वर्जित किया गया है. पैम्फलेट में साफ लिखा है, ''दहेज लेना व देना एक सामाजिक अपराध है.'' साथ ही मांस-मदिरा के सेवन को इस पवित्र संस्कार को अपवित्र न बनाने की अपील की गई है. कैसा होगा यह संस्कारित विवाह:-      विवाह पूरी तरह वैदिक विधि से संपन्न होगा      अधिकतम 15 से 20 मेहमानों की इजाजत होगी      प्रतीक स्वरूप 2 वरमाला और एक डिब्बा मिठाई का आदान-प्रदान किया जाएगा      डीजे, बैंड-बाजा या किसी भी तरह की भव्य सजावट की अनुमति नहीं होगी      बारात और भोजन की व्यवस्था यहां इजाजत नहीं है.  संस्कारों पर जोर और फिजूलखर्ची का विरोध गायत्री परिवार के प्रांतीय शक्तिपीठ समन्वयक राकेश कुमार गुप्ता ने बताया, ''यह पहल गायत्री परिवार की सात क्रांतियों (साधना, स्वास्थ्य, शिक्षा, नारी जागरण, नशा निवारण आदि) का हिस्सा है.'' गुप्ता ने बताया कि गायत्री परिवार हमेशा फिजूलखर्ची को कम करने के लिए लोगों को प्रेरित करता रहता है. इसमें मृत्युभोज का हम लोग विरोध करते हैं, शादी में दान दहेज का विरोध करते हैं और खर्चीली शादियों को कम करने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं.  उन्होंने तर्क दिया कि विकृतियों और वृद्धाश्रमों के बढ़ने के पीछे मुख्य कारण संस्कारों की कमी है, जिसे इस वैदिक विधि से दूर किया जा रहा है. गृहस्थ जीवन एक तपोवन शक्तिपीठ ने अपने पैम्फलेट में गृहस्थ जीवन को एक आध्यात्मिक साधना के रूप में परिभाषित किया है: "गृहस्थ एक तपोवन है, इसमें संयम, सेवा और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है." राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि वे शादी का वास्तविक संदर्भ समझाते हैं कि आगे परिवार कैसे चलेगा और वैदिक विधि से विवाह का बंधन कैसा होना चाहिए.  गायत्री परिवार के प्रांतीय शक्तिपीठ समन्वयक राकेश कुमार गुप्ता. देवउठनी एकादशी पर गायत्री मंदिर से विवाह करने वाले दंपति वैभव वर्मा और प्रिया शर्मा ने बताया, ''हमने 18 मेहमानों के सामने शादी की. मंदिर की रसीद कटवाने के बाद कुल खर्च करीब 1000 रुपए ही आया. न दहेज, न दिखावा. अब पैसों से बची रकम हम अपने गृहस्थी में लगाएंगे.  इसके अलावा, एक अन्य नवविवाहित जोड़े जय अरोड़ा और मधु पांडेय ने कहा,  हम दोनों एक साथ आईटी कंपनी में काम करते हैं. लंबे समय से एक दूसरे से प्रेम करते हैं.हमें अपने आर्थिक हालात देखे और मेट्रो सिटी में आगे के भविष्य को देखते हुए कम खर्च में विवाह बंधन में बंधने का फैसला लिया.   रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया गायत्री शक्तिपीठ में विवाह संस्कार कराने की प्रक्रिया भी सरल और पारदर्शी रखी गई है.  – विवाह के लिए आवश्यक सामग्री (जैसे अग्निकुंड, पंचमेवा, हल्दी, नारियल, पुष्पादि आदि) परिवारों को खुद लानी होगी. – कम से कम 15 दिन या एक महीने पहले रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है. – सबसे अहम शर्त यह है कि वर और वधू दोनों के माता-पिता की लिखित सहमति जरूरी है.  – गायत्री परिवार में सभी संस्कार निशुल्क कराए जाते हैं. विवाह कराने का यहां कोई शुल्क या फीस नहीं है. – सिर्फ पूजा के लिए उपयोग होने वाले सामान की व्यवस्था के लिए 2 हजार या 4 हजार रुपए का एक नॉमिनल अमाउंट लिया जाता है. – विवाह के लिए यह राशि 7000 हजार रुपए तय की गई है.  दीवारों से लेकर पोस्टरों पर संदेश ही संदेश  शक्तिपीठ के परिसर में दीवारों से लेकर बैनर पोस्टरों में समाज को सही दिशा देने वाले संदेश ही संदेश लिखे गए हैं. संदेश में समाज से खर्चीली शादियों को बंद कर सादगी भरी रीतियों को अपनाने का आह्वान किया है. मसलन,  'हम बदलेंगे, युग बदलेगा.' अमर रीतियों से बंधो, बंद करो खर्चीली शादी. सादगी भरी शादियां हमें सद्भाव और वैदिकता बताती हैं.' इसके साथ ही मोटे अक्षरों में समाज को कचोट देने वाला लिखा है- 'खर्चीली शादियां हमें दरिद्र और बेईमान बनाती हैं.' 

गहलोत ने हरमाड़ा हादसे के पीड़ितों का हाल जाना, बोले—सरकार कर रही है उपेक्षा

जयपुर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के हरमाड़ा हादसे में घायल लोगों से एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। गहलोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार हादसों के बाद तब ही हरकत में आती है, जब लोग धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होते हैं। उन्होंने कहा कि हरमाड़ा में डंपर की टक्कर से 13 लोगों की मौत हो गई, लेकिन अब तक सरकार की ओर से किसी प्रकार का मुआवजा घोषित नहीं किया गया है, जो बेहद संवेदनहीनता है। गहलोत ने कहा कि चाहे जोधपुर का हादसा हो या जैसलमेर में बस में आग लगने की घटना, सरकार तब ही राहत देती है जब लोग मॉर्च्यूरी के बाहर विरोध दर्ज कराते हैं। उन्होंने मांग की कि हरमाड़ा हादसे के सभी पीड़ितों और मृतकों के परिवारों को तत्काल राहत राशि दी जाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना में गुजरात और बिहार के लोग भी घायल हुए हैं, इसलिए सरकार को बिना भेदभाव सहायता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान और जोधपुर हाईकोर्ट ने सड़क हादसों पर संज्ञान लिया है, जो खुद सरकार की विफलता को दर्शाता है। गहलोत ने सुझाव दिया कि सरकार को एक विशेष समिति गठित कर विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, ताकि सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लग सके। उन्होंने कहा कि कई जगह सड़कों पर स्पीड ब्रेकर नहीं हैं और कई स्थानों पर गलत तरीके से बने हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। आज आरटीओ के पास गाड़ियों की गति मापने की मशीनें मौजूद हैं, फिर भी सड़क सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। लगातार हो रही मौतें सरकार की नाकामी को दर्शाती हैं। अस्पताल में गहलोत ने घायल गुजरात निवासी मनोज गोविंद व्यास से मुलाकात कर हालचाल जाना। मनोज ने बताया कि वे छह दोस्तों के साथ खाटूश्यामजी दर्शन के लिए आए थे। हादसे में उनके दो दोस्तों की मौत हो गई और चार घायल हैं। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद लूटपाट की भी घटना हुई, जिसमें उनका मोबाइल और पर्स चोरी हो गया। नीमकाथाना निवासी देशराज ने बताया कि हादसे में उनका ई-रिक्शा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घायल होने के बावजूद उन्होंने अन्य लोगों की मदद की। वहीं गोविंदपुरा कालवाड़ निवासी ज्ञानरंजन ने बताया कि उनके पिता अजय को गंभीर चोटें आई हैं और वे आईसीयू में भर्ती हैं। गहलोत ने कहा कि सरकार को ऐसे हादसों से सबक लेना चाहिए और पीड़ितों को जल्द से जल्द सहायता पहुंचानी चाहिए ताकि परिवारों को राहत मिल सके।

गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 520 लीटर ताड़ी के साथ दो गिरफ्तार, FSL जांच जारी

गरियाबंद जिले में देवभोग पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 520 लीटर अवैध ताड़ी के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी शिवा कुम्भम (25 वर्ष) और उसके पिता यादईया कुम्भम (50 वर्ष) को आबकारी अधिनियम के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी मात्रा में कथित छिंद रस, जिसे ताड़ी कहा जाता है जब्त किया गया है। थाना प्रभारी फैजुल हुदा शाह ने बताया कि तेलंगाना के नालगुंडा जिले के निवासी पिता-पुत्र इस क्षेत्र में लगातार ठिकाना बदलकर अवैध ताड़ी का कारोबार कर रहे थे। शिवा कुम्भम पहले भी 25 लीटर ताड़ी के साथ पकड़ा जा चुका है। जमानत मिलने के बाद वह कालाहांडी सीमा के खुटगांव के गौठान के पास अवैध बिक्री में जुटा हुआ था। पुलिस ने आरोपी से कुल 27,400 रुपये मूल्य का ताड़ी और नगद जब्त किया। जाँच के लिए एफएसएल भेजी जाएगी जब्त ताड़ी देवभोग क्षेत्र में ताड़ी का रहस्य वर्षों से चर्चा का विषय रहा है। पिछले कई सालों से इस क्षेत्र में सक्रिय ताड़ी कारोबारी रोजाना डेढ़ से 2 हजार लीटर ताड़ी की खपत कराते थे। अब पुलिस ने उच्च अधिकारियों की अनुमति लेकर जब्त ताड़ी का एफएसएल (Forensic Science Laboratory) परीक्षण कराने की तैयारी शुरू कर दी है। फर्जी ताड़ी के सेवन से हो रही मौतें ! पूर्व कारोबारी सूत्रों के अनुसार, आंध्र और तेलंगाना में तैयार मीठी पावडर को बसों के माध्यम से देवभोग लाया जाता है। 1 किलो पावडर से लगभग 170 लीटर नकली ताड़ी तैयार होती है, जिसे 50 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जाता है। इसमें नींद लाने वाली दवाओं (बेंजोडाइजिपम ग्रुप) का इस्तेमाल किया जाता है। औसतन 2,500 रुपये की लागत में 10,000 रुपये का ताड़ी उत्पाद तैयार होता है। सूत्रों ने बताया कि गांव में प्रभावशाली लोगों और आबकारी अधिकारियों को भी कमाई का 30 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था। पिछले एक साल में देवभोग क्षेत्र में ताड़ी के सेवन से 10 से अधिक लोगों की मौत हुई है। मृतक फैटी लिवर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। बीएमओ प्रकाश साहू ने बताया कि मीठी पावडर में सेकरीन और कैल्शियम की अधिकता वाले तत्व पाए जाते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर अरविंद तिवारी ने चेताया कि नियमित सेवन से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और फैटी लिवर और नेफ्रो जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कैसा बनाया जाता है असली छिंद रस ? जानकार बताते हैं कि असली छिंद रस छिंद और ताड़ पेड़ के तने को छेदकर प्राप्त किया जाता है। एक बड़े पेड़ से दिनभर में केवल 3 से 5 लीटर रस ही एकत्रित होता है। ताजा रस स्वास्थ्यवर्धक होता है और 3-5 घंटे के भीतर उसमें खमीर विकसित होकर प्राकृतिक मादकता लाता है। जबकि नकली ताड़ी में रासायनिक पावडर और दवाओं का प्रयोग तुरंत मादक बनाने के लिए किया जाता है। पिछले डेढ़ साल में की गई 16 बड़ी कार्रवाई पिछले डेढ़ साल में देवभोग थाना क्षेत्र में आबकारी विभाग और पुलिस ने मिलकर 16 बड़ी कार्रवाई की है। हालांकि पहले एफएसएल जांच कराने की प्रक्रिया जटिल होने के कारण लंबित रही, लेकिन अब पुलिस ने जप्त रस का परीक्षण कराने की पहल शुरू कर दी है। थाना प्रभारी फैजुल शाह ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अवैध पेय पदार्थ की बिक्री पर रोक और सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। थाना प्रभारी फैजुल शाह ने कहा कि जो लोग सीमा-वर्ती इलाकों का फायदा उठाकर अवैध बिक्री में शामिल होने की कोशिश करेंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर आगे जप्त पेय पदार्थ की जांच और संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना में नवाचार की बौछार, 55 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने अपलोड किए आइडिया

इंस्पायर अवार्ड मानक योजना में 55 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने आइडिया अपलोड किये योजना के माध्यम से विद्यार्थियों में विज्ञान के अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहन भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों ने इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के अंतर्गत इस वर्ष शिक्षण सत्र 2025-26 में 55 हजार 247 विद्यार्थियों ने विज्ञान अनुसंधान एवं अध्ययन से जुड़े आइडिया केन्द्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड कराये हैं। केन्द्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्पायर अवार्ड मानक योजना कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों में विज्ञान के अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिये योजना शुरू की है। पिछले वर्ष 2672 विद्यार्थियों का अवार्ड के लिये चयन किया गया था। चयनित विद्यार्थियों के विचार को प्रोटोटाइप तैयार करने के लिये 10-10 हजार रूपये की राशि विद्यार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित की गई थी। पिछले 3 वर्षों से राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश प्रथम केन्द्र सरकार की इंस्पायर अवार्ड मानक योजना में मध्यप्रदेश शैक्षणिक सत्र 2019-20 से 2022-23 पिछले 3 वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर आ रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की इस योजना में वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन नई दिल्ली में किया जाना प्रस्तावित है। योजना में सत्र 2022-23 में विदिशा जिले के गंजबासोदा की छात्रा कुमारी रूपाली लोधी ने श्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। उनके इस प्रदर्शन के कारण अंतर्राष्ट्रीय सकूरा एक्सचेंज प्रोग्राम में उन्होंने जापान में सहभागिता की थी। स्कूलों की भागीदारी इंस्पायर अवार्ड मानक योजना प्रदेश के विद्यार्थियों में किया गया एक एैसा निवेश है, जो विज्ञान के अध्ययन एवं अनुसंधान को विकसित करता है। योजना का उद्देश्य बच्चों में विज्ञान का बीज बोना, उसका पोषण करना, उन्हें प्रोत्साहित करना, रूचि बढ़ाना तथा वैज्ञानित दृष्टिकोण उत्पन्न करना है। इस योजना में प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय माध्यमिक हाई स्कूल, अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय (सेंट्रल स्कूल), नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल एवं केन्द्र सरकार के अन्य सीबीएसई विद्यालयों में कक्षा 6 से कक्षा 10 तक के नियमित विद्यार्थी पुरस्कार के लिये पात्र होते हैं। कार्यक्रम में देशभर के 5 लाख विद्यालयों के बच्चों प्रत्येक विद्यालय से कम से कम 2 सर्वश्रेष्ठ विचार के मान से लगभग 10 लाख नवाचारों को प्राप्त करने का कार्यक्रम रखा जाता है।  

पूर्वी रीजनल नक्सल मोर्चे का पत्र आया सामने, ब्यूरो के तेवर फिर तीखे

जगदलपुर लगातार नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के दौर के बीच, अब नक्सल संगठन के पूर्वी रीजनल ब्यूरो का नया बयान सामने आया है. यह ब्यूरो झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय बताया जाता है. ब्यूरो की ओर से जारी बयान में लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया गया है. बताया जा रहा है कि इस बयान के पीछे नक्सल नेता मिशिर बेसरा का नाम प्रमुखता से सामने आया है, जिसे इस रीजन का सबसे बड़ा नक्सली माना जाता है. बेसरा और उसके संगठन ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में लगातार हो रहे नक्सल आत्मसमर्पण की निंदा की है. बयान में कहा गया है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी “संगठन के गद्दार” हैं और राज्य सरकार की नीति में फंस गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह बयान नक्सलियों की घटती ताकत और संगठनात्मक हताशा का संकेत है. बस्तर से लेकर सीमाई राज्यों तक नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बढ़त ने अब संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर कर दी है.

उदयपुर में परिचालक भर्ती परीक्षा शांतिपूर्ण सम्पन्न, आधे से कम परीक्षार्थी पहुंचे केंद्रों पर

उदयपुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) द्वारा शनिवार को परिचालक (कंडक्टर) भर्ती परीक्षा का आयोजन प्रदेशभर में किया गया। कुल 500 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में 1 लाख 12 हजार से अधिक अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। इसके लिए राज्य के 14 जिलों में 370 परीक्षा केंद्र बनाए गए। उदयपुर जिले में परीक्षा एक ही पारी में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित हुई, जिले में कुल 15 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां 5064 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 49.59 फीसदी उम्मीदवार ही परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की आवाजाही शुरू हो गई थी। प्रवेश सुबह 9 बजे से दिया गया और 10 बजे गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। एग्जाम सेंटरों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई थी। पुलिसकर्मियों ने प्रवेश से पहले उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड और पहचान पत्र की जांच की। कई केंद्रों पर परीक्षार्थियों के हाथों में बंधे धागे काट दिए गए, ताकि किसी तरह की नकल या तकनीकी मदद न ली जा सके। सभी अभ्यर्थियों की मेटल डिटेक्टर से स्कैनिंग की गई। मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, इयरफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र के बाहर ही जमा करवाए गए। परीक्षा हॉल में सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। बोर्ड ने इस बार अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए एडमिट कार्ड के साथ एक विशेष लिंक भी जारी किया है। इस लिंक को स्कैन कर उम्मीदवार आसानी से अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकते हैं। यह सुविधा पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पांच बड़े जिलों में शुरू की गई है। फिलहाल इसमें गूगल लोकेशन या मुख्य प्रवेश द्वार की फोटो उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसमें बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की दिशा सहित अन्य उपयोगी जानकारी दी गई है। कुल मिलाकर, सख्त सुरक्षा और तकनीकी सुविधा के बीच यह परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। अब अभ्यर्थियों को रिजल्ट और कट-ऑफ का इंतजार है, जो चयन बोर्ड द्वारा बाद में जारी किया जाएगा।